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स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल की सफल टेस्टिंग:1500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज, आवाज से 5 गुना तेज रफ्तार; इसे रोक पाना असंभव

डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने शनिवार रात लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल की सफल टेस्टिंग की। इसका वीडियो शेयर करते हुए DRDO ने बताया कि ओडिशा के तट के पास एपीजे अब्दुल कलाम आजाद द्वीप से मिसाइल को ग्लाइडेड व्हीकल से लॉन्च किया गया। मिसाइल की फ्लाइट ट्रेजेक्टरी की ट्रैकिंग के बाद टेस्टिंग सफल मानी गई है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार सुबह X पर पोस्ट करते हुए कहा- इस मिसाइल की सफल टेस्टिंग से भारत उन चुनिंदा देशों के ग्रुप में शामिल हो गया, जिसके पास ऐसी सैन्य तकनीक है। यह एक बड़ी उपलब्धि है और यह देश के लिए एक ऐतिहासिक पल है। लंबी दूरी की इस हाइपरसोनिक मिसाइल की रेंज 1500 किलोमीटर से ज्यादा है। इस मिसाइल से हवा, पानी और जमीन तीनों जगहों से दुश्मन पर हमला किया जा सकता है। लॉन्च के बाद इसकी रफ्तार 6200 किलोमीटर प्रतिघंटे तक पहुंच सकती है, जो साउंड की स्पीड से 5 गुना ज्यादा है। हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत हाइपरसोनिक मिसाइलों पर DRDO लंबे समय से काम कर रहा है भारत भी कई वर्षों से हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटा है। DRDO ने 2020 में एक हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटेड व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत HSTDV का इस्तेमाल करके अपनी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की ओर बढ़ रहा है। साथ ही भारत रूस के सहयोग से ब्रह्मोस-II मिसाइल के विकास में जुटा है, जोकि एक हाइपरसोनिक मिसाइल है। ब्रह्मोस-II की रेंज 1500 किमी तक होगी और स्पीड साउंड से 7-8 गुना ज्यादा (करीब 9000 किमी/घंटे) होगी। इसकी टेस्टिंग 2024 तक होने की उम्मीद है। इनके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देश हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटे हैं। वहीं नॉर्थ कोरिया भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने का दावा कर चुका है। —————————————- डिफेंस टेक्नॉलोजी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें … भारत ने शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम तैयार किया: कहीं से भी लॉन्च हो सकेगा, लाना-ले जाना बेहद आसान; पोखरण में सफल परीक्षण राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में बेहद कम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के तीन सफल परीक्षण किए। यह चौथी पीढ़ी का डिफेंस सिस्टम है। इसे बेहद कम दूरी पर कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए बनाया गया है। पूरी खबर पढ़ें …

‘मास्टर शेफ इंडिया’ के फॉर्मेट में बदलाव:’लाफ्टर शेफ’ की तरह सेलिब्रिटी की एंट्री; अगले साल दोनों शो में हो सकती है टक्कर

कुकिंग-बेस्ड रियलिटी शो ‘मास्टर शेफ इंडिया’ के मेकर्स ने इस बार शो का फॉर्मेट बदलने का फैसला लिया है। अब तक के सभी सीजन में सिर्फ सेलिब्रिटी शेफ और होम कुक्स को ही शामिल किया गया था। लेकिन इस बार सीजन 9 में पहली बार सेलिब्रिटी को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। ‘लाफ्टर शेफ’ की पॉपुलैरिटी का असर सूत्रों के मुताबिक, ‘लाफ्टर शेफ – अनलिमिटेड एंटरटेनमेंट’ की पॉपुलैरिटी ने ‘मास्टर शेफ इंडिया’ के मेकर्स को अपने फॉर्मेट में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया है। मेकर्स को उम्मीद है कि सेलिब्रिटी की एंट्री से शो में और ज्यादा एंटरटेनमेंट का तड़का लगेगा। इससे नई ऑडियंस भी जुड़ने की उम्मीद है। यह बदलाव शो को और भी मजेदार और इंटरएक्टिव बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। शूटिंग में देरी, शो जनवरी 2025 में ऑन-एयर हो सकता है बता दें, ‘मास्टर शेफ इंडिया’ की शूटिंग इसी महीने शुरू होने वाली थी। लेकिन अब इसे दिसंबर तक टाल दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, फॉर्मेट में हो रहे बदलावों के कारण यह फैसला लिया गया है। अब शो जनवरी 2025 में ऑन-एयर हो सकता है। मेकर्स चाहते हैं कि बदलाव पूरी तरह से सही तरीके से किए जाएं ताकि शो में कोई कमी न रहे। ‘लाफ्टर शेफ’ और ‘मास्टर शेफ’ में हो सकती है TRP की टक्कर दिलचस्प बात यह है कि ‘लाफ्टर शेफ’ का दूसरा सीजन भी जनवरी में लॉन्च हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो दोनों शो के बीच कड़ी टीआरपी टक्कर हो सकती है। दोनों शो कुकिंग और एंटरटेनमेंट का मिक्स हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ऑडियंस के बीच दोनों में से कौन सा शो ज्यादा पॉपुलर होगा। ‘मास्टर शेफ इंडिया’ के पुराने सीजन अब तक ‘मास्टर शेफ इंडिया’ में कुकिंग टैलेंट और होम कुक्स की कहानियों पर फोकस किया गया है। शो के जज के तौर पर रणवीर बरार, विकास खन्ना और गरिमा अरोड़ा जैसे शेफ जुड़े रहे हैं। हर सीजन का उद्देश्य दर्शकों को कुकिंग के प्रति मोटिवेट करना और नई रेसिपीज पेश करना रहा है। ‘लाफ्टर शेफ’ की खासियत ‘लाफ्टर शेफ’ इस साल करीब 4 महीने तक चला एक कुकिंग बेस्ड शो हैं। शो के पहले सीजन ने ऑडियंस में अपनी अलग पहचान बनाई। इसका कॉन्सेप्ट कुकिंग और कॉमेडी का मिक्स था। अंकिता लोखंडे, विक्की जैन, अर्जुन बिजलानी, निया शर्मा, भारती सिंह और कृष्णा अभिषेक जैसे पॉपुलर सेलेब्स ने अपनी कुकिंग स्किल्स और एंटरटेनमेंट से ऑडियंस को इम्प्रेस किया।

दारू नहीं…कॉन्सर्ट में घुला कोका कोला का रंग:लाइव शो में दिलजीत दोसांझ ने बदले सॉन्ग के बोल; तेलंगाना सरकार के आगे झुके पंजाबी सिंगर

पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने 15 नवंबर को हैदराबाद में एक कॉन्सर्ट के दौरान अपने फेमस गानों में कुछ बदलाव किए। इस लाइव परफॉर्मेंस में उन्होंने शराब के नाम की जगह कोका कोला का नाम डाला। यह कदम तेलंगाना के अधिकारियों द्वारा नोटिस भेजे जाने के बाद उठाया गया। नोटिस में गानों के लिरिक्स में शराब, ड्रग्स और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था। जानें पूरा मामला
दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ‘दिल-लुमिनाती’ टूर को लेकर चर्चा में हैं। इस टूर के दौरान, तेलंगाना सरकार ने उन्हें और उनकी टीम को नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही हैदराबाद के होटल नोवोटेल को भी नोटिस भेजा गया। इस नोटिस के मुताबिक, दिलजीत को अपने लाइव शो के दौरान पटियाला पग और पंज तारा जैसे गाने नहीं गाने थे। यह कदम ‘वेलफेयर ऑफ वूमेन एंड चाइल्ड’ और ‘डिसएबल एंड सीनियर सिटीजन’ डिपार्टमेंट द्वारा उठाया गया था। ये डिपार्टमेंट गानों में शराब, हिंसा और नशे से जुड़े कंटेंट के खिलाफ थे। दिल्ली की लॉ स्टूडेंट ने भेजा था नोटिस
बता दें, दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट 26 अक्टूबर को दिल्ली में था। शो की टिकट कीमतों में धोखाधड़ी और टिकट नहीं खरीद पाने के कारण एक महिला फैन ने सिंगर को लीगल नोटिस भेजा था। दिलजीत की फैन रिद्धिमा कपूर ने यह नोटिस भेजा था। नोटिस में कपूर ने कहा था कि टूर से पहले टिकट की कीमतों में हेराफेरी की गई है, जो एक अनुचित व्यापार व्यवहार है। बता दें कि नोटिस भेजने वाली लड़की दिल्ली की लॉ स्टूडेंट है। 10 शहरों में बड़े कॉन्सर्ट
पंजाबी इंडस्ट्री के सबसे बड़े गायक और बॉलीवुड अभिनेता दिलजीत दोसांझ अपने इंडिया टूर पर हैं। दिलजीत दोसांझ एक के बाद एक इंडिया में 10 जगह पर बड़े कॉन्सर्ट करने वाले हैं। इस टूर को दिल-लूमिनाटी नाम दिया गया है। इससे पहले 26 अक्टूबर को दिल्ली में दिलजीत ने अपने टूर की शुरुआत की थी। दूसरा कॉन्सर्ट हैदराबाद में किया और अब अगला शो 17 नवंबर को अहमदाबाद में होने वाला है। ————————————
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1. कोल्डप्ले कॉन्सर्ट-भास्कर ने 3,500 का टिकट 70,000 में खरीदा:साइट पर नहीं मिल रहा, बाहर खुलेआम बिक्री; जालसाज ने कहा- बोलो कितने चाहिए ब्रिटिश म्यूजिकल बैंड कोल्ड प्ले का इंडिया कॉन्सर्ट जनवरी 2025 में होने वाला है। दो दिन पहले इसकी ऑनलाइन टिकट विंडो खोली गई। चंद मिनट में सारे टिकट बिक गए। टिकट बेचने वाली साइट बुक माई शो क्रैश हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

कबीर बेदी ने बताई परवीन से ब्रेकअप की असली वजह:बोले मानसिक बीमारियों से जूझ रही थीं एक्ट्रेस, इसलिए मुझे छोड़ दिया

परवीन बाबी अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहती थीं। उनका नाम इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों डैनी डेन्जोंगपा, कबीर बेदी और फिल्ममेकर महेश भट्ट के साथ जोड़ा गया था। एक्ट्रेस का कबीर बेदी के साथ रिश्ता काफी कम समय तक चला था। हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर बेदी ने परवीन बाबी के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि मैंने नहीं बल्कि परवीन ने मुझसे रिश्ता तोड़ा था। उसने मुझे इसलिए छोड़ा, क्योंकि उसकी मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं थी। परवीन ने किया था रिश्ता खत्म – कबीर बेदी
कबीर बेदी ने एक डिजिटल कमेंट्री में बातचीत करते हुए कहा कि परवीन को डर था कि अगर वो मेडिकल ट्रीटमेंट करवाएंगी तो उनकी इस हालत के बारे में इंडस्ट्री में सबको पता चल जाएगा, जिससे उनका करियर भी खत्म हो जाएगा। कबीर ने कहा कि मुझे पता था कि अगर वो अपना इलाज नहीं करवाएंगी तो उनकी हालत और बिगड़ जाएगी। कबीर ने अपने और परवीन के रिश्ते का सच बताते हुए कहा कि मैंने नहीं, उसने मुझे छोड़ा था। लेकिन लोगों ने मुझे दोषी ठहराया। मुझ पर आरोप लगाए गए कि परवीन मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही थीं, इसलिए मैंने उन्हें छोड़ दिया। महेश भट्ट के साथ लिव-इन में थी परवीन बाबी
खबरों की मानें तो डैनी और कबीर बेदी के साथ रिश्ता खत्म होने के बाद परवीन बाबी फिल्ममेकर महेश भट्ट के साथ रिलेशनशिप में थीं। महेश भट्ट और परवीन बाबी लिव-इन में रहते थे। इनका रिश्ता भी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया था। 1980 में महेश और परवीन अलग हो गए थे। परवीन के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले ही महेश लोरेन ब्राइट से पहली शादी कर चुके थे। और एक बच्चे के पिता भी थे। घर में मिली थी परवीन बाबी की लाश
परवीन बाबी पैरानॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर से जूझ रही थीं। परवीन की मौत साल 2005 में हो गई थी। उनकी लाश को 3 दिन बाद उनके घर से बरामद किया गया था।

काजोल-कृति की फिल्म का विवाद पहुंचा थाने:हुड्‌डा खाप ने फिल्म 2 पत्ती को लेकर की मानहानि की शिकायत, 10 नवंबर को हुई थी पंचायत

बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल और कृति सेनन की 25 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म दो पत्ती का विवाद अब थाने पहुंच गया है। सर्व हुड्‌डा खाप की तरफ से गुरुग्राम के राजेंद्र पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दी गई है। जिसमें दो पत्ती फिल्म के निर्माताओं, निर्देशक, अभिनेता और ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज करने की मांग की। इससे पहले सर्व हुड्‌डा खाप के प्रतिनिधियों ने CM नायब सैनी से उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर मुलाकात कर फिल्म पर कार्रवाई करने की मांग की थी। खाप का कहना है कि 25 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म दो पत्ती में हुड्डा गोत्र पर टिप्पणी की गई है। इस टिप्पणी को फिल्म से हटवाया जाए और फिल्म निर्माता, निदेशक, अभिनेता और प्रसारित करने वाले OTT प्लेटफॉर्म के कर्ताधर्ता सार्वजनिक माफी मांगें। हुड्‌डा खाप का कहना है कि ‘दो पत्ती’ फिल्म में एक सीन है, जिसमें एक कलाकार कोर्ट में आरोपी बना है, जो कह रहा है, ‘हत्या यह नहीं होती। हत्या तो वह थी जो हमारे पड़ोस में हुड्‌डाज रहते हैं, जिन्होंने सरेआम अपनी बहू को जिंदा जला दिया था।’ खाप को इसी टिप्पणी पर आपत्ति है। 10 नवंबर को हुई थी पंचायत 25 अक्टूबर को फिल्म दो पत्ती के OTT प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद रोहतक के गांव बसंतपुर स्थित सर्व हुड्डा खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर 10 नवंबर को पंचायत हुई। इसमें खाप के 45 गांव के प्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया। सुरेंद्र हुड्डा की अगुआई में समिति सदस्यों ने CM सैनी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने बताया कि फिल्म दो पत्ती के एक संवाद से जाट समाज के हुड्डा गोत्र को बदनाम किया जा रहा है। इस विवादित मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात की गई है। फिल्म में जिस प्रकार से हुड्डा गोत्र को बदनाम करने का षड्यंत्र हुआ है, यह एक आपराधिक मामला है। खाप ने भेजा नोटिस, मेकर्स जवाब दे चुके सुरेंद्र हुड्डा ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के अगले ही दिन इसके निर्माता, निदेशक, अभिनेता और नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी कर दिया था। इसके जवाब में नेटफ्लिक्स और फिल्म निर्माताओं ने कहा है कि जो आरोप नोटिस में लगाए गए हैं, वह घटना फिल्म में हुई है। लेकिन, यह फिल्म निर्माता और अभिनेता की बोलने की आजादी के तहत है, और हुड्डा शब्द का प्रयोग केवल एक संयोग है। सुरेंद्र ने कहा कि देश का कानून किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने और मान-सम्मान की हानि करने का अधिकार नहीं देता है। फिल्म में प्रसारित विवादास्पद संवाद से समस्त हुड्डा खाप की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। एक षड्यंत्र के तहत ही जाट समाज के हुड्डा गोत्र की मानहानि हुई है।

गोविंदा के सीने में उठा दर्द, अस्पताल में भर्ती:चुनाव प्रचार के लिए रैली का हिस्सा बने थे, तबीयत बिगड़ने पर रोड शो अधूरा छोड़ा

बीते कुछ दिनों से अचानक पैर में गोली लगने से सुर्खियों में बने हुए गोविंदा की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। हाल ही में गोविंदा शिवसेना शिंदे गुट के उम्मीदवारों का प्रचार करने एक रोड शो का हिस्सा बने थे, हालांकि इसी दौरान उनके सीने में दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हाल ही में आई टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गोविंदा शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता माहयुति के उम्मीदवारों के सपोर्ट में पचोरा में रोड शो का हिस्सा बने थे। रैली जलगांव पहुंची ही थी कि इसी दौरान उनके सीने में तेज दर्द उठा था। तबीयत बिगड़ने पर गोविंदा ने रैली बीच में ही छोड़ दी और अस्पताल पहुंचे। फिलहाल उनकी हेल्थ से जुड़ी कोई अपडेट सामने नहीं आ सकी है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि देर रात गोविंदा घर पहुंच चुके हैं। बताते चलें कि गोविंदा खुद भी कांग्रेस के पूर्व लोकसभा सांसद रह चुके हैं। कुछ दिनों पहले ही लगी थी पैर में गोली 1 अक्टूबर की सुबह गोविंदा को पैर में गोली लगी थी। गोविंदा घर में अकेले थे और उन्हें एक प्रोग्राम के लिए कोलकाता रवाना होना था। इसी दौरान घर में रखी रिवॉल्वर साफ करते हुए हादसा हो गया था। गोविंदा ने गन साफ कर अलमारी में रखी, तभी गन गिर गई और मिसफायरिंग से गोली उनके पैर में लगी। उन्हें मुंबई के क्रिटी केयर अस्पताल में एडमिट किया गया था। 3 दिनों बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था। डिस्चार्ज होने के बाद गोविंदा ने मीडिया से बातचीत में कहा, मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये क्या हो गया। मैं एक शो के लिए कोलकाता निकल रहा था। सुबह 5 बजे का टाइम था। मैं रिवॉल्वर साफ करने लगा। गलती से ट्रिगर चल गया। मैं ऐसी अवस्था में था कि गोली सीधे मेरे पैर पर जा लगी। पैर से खून का फव्वारा बहने लगा। मैंने खुद से ही वीडियो रिकॉर्ड करके अपने डॉक्टर को भेज दिया। अब यही कहूंगा कि ऐसे मामले में सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसा किसी के साथ न हो, यही मनाऊंगा। ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- मुंबई पुलिस ने गोविंदा से अस्पताल में पूछताछ की:एक्टर ने दोहराई मिसफायर की बात, अपने आप गोली चलने की बात से संतुष्ट नहीं पुलिस जुहू पुलिस ने जब उनसे सवाल किए तो गोविंदा ने गोली के मिसफायर होने की बात दोहराई। एक्टर ने पुलिस को बताया कि रिवॉल्वर 20 साल पुरानी है। घटना मंगलवार सुबह करीब 4.45 बजे की है। पुलिस गोविंदा के बयान से संतुष्ट नहीं है। पूरी खबर पढ़िए…

फर्जी होता है कपिल शर्मा का कॉमेडी शो!:​​​​​​​ब्रह्मास्त्र एक्टर हुए आहत, कहा- रणबीर के साथ की फोटो में नकली कमेंट पढ़े गए, मुझे अच्छा नहीं लगा

कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स के खिलाफ हाल ही में शिकायत दर्ज हुई है। शो पर रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान करने के आरोप लगे हैं। इसी बीच अब ब्रह्मास्त्र एक्टर सौरव गुर्जर ने शो को फर्जी बताया है। कुछ समय पहले शो में सौरव गुर्जर से जुड़े कुछ कमेंट पढ़े गए थे, जिससे उन्हें ठेस पहुंची थी। उन्होंने कहा है कि शो में पढ़े जाने वाले सभी कमेंट फर्जी होते हैं, जो लोगों को हंसाने के लिए खुद टीम करती है। रणबीर कपूर कुछ महीनों पहले फिल्म तू झूठी मैं मक्कार का प्रमोशन करने कपिल शर्मा के शो में पहुंचे थे। शो के एक सेगमेंट में सेलेब्स की सोशल मीडिया पोस्ट के फनी कमेंट पढ़े जाते हैं। इस सेगमेंट के लिए कपिल ने रणबीर की एक फोटो के कमेंट पढ़े थे, जिसमें एक्टर सौरव गुर्जर ने उन्हें उठा रखा था। कपिल ने उस पोस्ट का एक कमेंट पढ़ा, जिसमें लिखा था, लगता है रणबीर ने नई गाड़ी ली है बी.एम.बब्लू। ये सुनकर उस समय तो सब हंस पड़े, लेकिन इस कमेंट से सौरव गुर्जर आहत हो गए। हाल ही में द रश के पॉडकास्ट में सौरव गुर्जर ने कहा है, मुझे लगता था कि शो में जो फोटोज और कमेंट दिखाए जाते हैं वो रियल होते हैं। एक फोटो थी मेरी और रणबीर की फोटो दिखाई गई थी। कुछ कमेंट ऐसे थे, जो मुझे अच्छे नहीं लगे। मेरी पर्सनालिटी को लेकर कमेंट किए गए। मुझे जब इस बारे में पता चला तो मैंने फोटो के कमेंट देखे। कहीं से कहीं तक वो कमेंट नहीं थे। टीम से की शिकायत, तो खुद कमेंट करने लगी टीम- सौरव सौरव ने आगे बताया है, जब मैंने उनकी टीम को ये बताया तो उनकी टीम ने खुद कमेंट करने शुरू कर दिए। आप पहले जाकर तो कमेंट कर नहीं सकते। जो भी कमेंट करोगे, वो बाद में ही आएंगे। मुझे ऐसा अच्छा नहीं लगा कि मेरे लिए ऐसे कमेंट किए गए। वो भी फेक। ………………………………….. इस खबर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस:विवादों के बीच सलमान खान की टीम ने दी सफाई, कहा- हमारा शो से कोई लेना-देना नहीं नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रहे कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस मिला है। आरोप हैं कि शो के एक सेगमेंट में नोबेल पुरुस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया गया है। खबरें ये भी हैं कि सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी लीगल नोटिस मिला है, जो पहले शो के प्रोडक्शन का हिस्सा थी। पूरी खबर पढ़िए… कपिल शर्मा का शो एक बार फिर विवादों में:रवीन्द्रनाथ टैगोर के गीत पर कमेंट करके फंसे कृष्णा अभिषेक, बंगाली कवि ने माफी की मांग की द ग्रेट इंडियन कपिल शो के एक एपिसोड में रवींद्रनाथ टैगोर पर अपने कमेंट को लेकर कृष्णा अभिषेक विवादों में आ गए हैं। बंगाली लेखक सृजातो बंद्योपाध्याय ने कृष्णा पर टैगोर का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखते हुए कृष्णा से माफी मांगने की मांग की है। पूरी खबर पढ़िए…

विंडीज का घर में सबसे बड़ा रन चेज:चौथे टी-20 में इंग्लैंड को 5 विकेट से हराया, लुईस और होप ने अर्धशतक जमाए

वेस्टइंडीज ने अपने घरेलू मैदान पर टी-20 इंटरनेशनल का सबसे बड़ा स्कोर चेज किया है। टीम ने इंग्लैंड को चौथे टी-20 मुकाबले में 5 विकेट से हराया। हालांकि, मेजबान टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-3 से पीछे चल रही है। आखिरी मुकाबला रविवार रात को खेला जाएगा। सेंट लूसिया के ग्रोस आइलेट में शनिवार रात विंडीज के कप्तान शाई होप ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बैटिंग करने उतरी इंग्लिश टीम ने फिल सॉल्ट (55 रन) और जैकब बिथेल (62 रन) की फिफ्टी के सहारे 218 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज के बैटर्स ने 219 रन का टारगेट 19 ओवर में 5 विकेट पर चेज कर दिया। शाई होप प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। उन्होंने 54 रन की अर्धशतकीय पारी खेली। साथ ही इवेन लुईस के साथ 55 गेंद पर 136 रनों की ओपनिंग साझेदारी की। अहम फैक्ट वेस्टइंडीज की वापसी, सीरीज गंवा चुकी है
इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने 5 मैचों की टी-20 सीरीज में वापसी की है। हालांकि, टीम अब भी 1-3 से पिछड़ रही है। इससे पहले इंग्लैंड ने शुरुआती 3 मुकाबले जीतते हुए सीरीज में अजेय बढ़त बना ली है। आखिरी मुकाबले में भी विंडीज हार का अंतर कम कर सकेगी। विंडीज ने पहली बार घर में 200+ का टारगेट चेज किया
वेस्टइंडीज की टीम ने अपने घरेलू मैदान पर पहली बार 200 रन से ज्यादा का टारगेट चेज किया है। इससे पहले 194 रन टीम का बेस्ट रन चेज था, जो विंडीज की टीम ने इंडिया के खिलाफ किंग्स्टन में 2017 में किया था। यहां से मैच रिपोर्ट… ओपनर्स की फिफ्टी पार्टनरशिप, करेन बिथेल ने 200 पार पहुंचाया
टॉस हारकर बैटिंग कर रही इंग्लैंड के ओपनर फिल सॉल्ट ने विल जैक्स के साथ शानदार शुरुआत की। उन्होंने 35 बॉल पर 54 रन बनाए और जैक्स के साथ 54 रन की ओपनिंग साझेदारी की। इस साझेदारी को अल्जारी जोसेफ ने ब्रेक किया। उन्होंने विल जैक्स को विकेटकीपर पूरन के हाथों कैच कराया। कप्तान जोस बटलर ने 38 रन का योगदान दिया। फिर जैकब बिथेल ने 32 बॉल पर 62 रन बनाए। उन्होंने सैम करन (24 रन) के साथ 30 बॉल पर 63 रन की पार्टनरशिप की। इस साझेदारी के दम पर टीम 218 रन का स्कोर बनाने में कामयाब रही। लुईस-होप की सेंचुरी पार्टनरशिप, टीम ने 136 के स्कोर पर 3 विकेट गंवाए
219 रन का टारगेट चेज करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने मजबूत शुरुआत की। इवेन लुइस और शाई होप ने 136 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप करके टीम को तेज शुरुआत की। लेकिन, 10वां ओवर लेकर आए रेयान अहमद ने पहली बॉल पर लुईस को मुसली के हाथों कैच कराया। अगली ही बॉल पर शाई होप रन आउट हो गए। फिर ओवर की तीसरी बॉल पर रेयान अहमद ने निकोलस पूरन को बोल्ड कर दिया। अब दोनों ओपनर्स पवेलियन लौट चुके थे। ऐसे में कप्तान रोवमन पॉवेल ने शिमोरन हेटमायर (7 रन) और शेरफेन रदरफोर्ड के साथ अहम साझेदारियां की। फिर रदरफोर्ड और रोस्टन चेज ने 15 बॉल पर 25 रन जोड़कर टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। पॉवेल ने 23 बॉल में 38 रन बनाए, जबकि रदरफोर्ट ने 17 बॉल पर 29 रन की पारी खेली। इन दोनों से पहले लुईस ने 31 बॉल पर 68 और शाई होप ने 24 बॉल पर 54 रन बनाए। इंग्लैंड की ओर से रेयान अहमद ने 3 विकेट झटके। ————————————– टी-20 क्रिकेट की यह खबर भी पढ़िए… दूसरे टी-20 में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को हराया ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को दूसरे टी-20 में 13 रन से हरा दिया। इसी के साथ टीम ने 3 मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त ले ली। सीरीज का आखिरी मुकाबला 18 नवंबर को हॉबर्ट में खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

आखिर क्या है मलयालम सिनेमा में खास बात?

आज हम आपको बताएंगे कि मलयालम सिनेमा में आखिर खास बात क्या है! हाल के सालों में तेलुगू, तमिल और कन्नड़ फिल्मों का उत्तर भारत में एक अलग, उत्सवपरक स्वागत हमने देखा है। इस सिलसिले में मलयालम ने अलग ही तेवर, मिजाज़ और स्वाद के साथ खुद को दाखिल किया है। यह दखल बड़ा मानीखेज है। दूसरे शब्दों में कहें तो, पोस्ट कोविड एक भ्रम यह भी फैला कि हिंदी के समक्ष दक्षिण की चुनौती है। दरअसल यह एक तथ्यहीन सरलीकरण था, क्योंकि दक्षिण का सिनेमा 4 भाषाओं का सिनेमा है, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ के बाद, जिसका चौथा रंग अब खिलने लगा है, यह है मलयालम का सिनेमा। यूं कुल मिलाकर बुनियादी बात हो सकती है कि सुदूर दक्षिण की कहानियां धुर उत्तर तक असर कर रही हैं, अपनी बहुआयामी अलग खुशबू से हम सबको महका रही हैं। यह मुझे ऐतिहासिक भारतीयता की अंतर्निहित गर्भनाल संबद्धता का भी पुनर्जागरण लगता है। उत्तर भारतीय दर्शक पहले दक्षिण की डब फिल्में देखते थे, या कभी-कभार रीमेक। अब ओटीटी पर सबटाइटल्स के साथ ओरिजिनल मलयालम देखने की प्रवृत्ति हिंदी पट्टी में बढ़ी है। यह खास प्रवृत्ति है जिसे रेखांकित करने की जरूरत है। इससे भारतीय भाषाओं के सिनेमा और पैन इंडियन सिनेमा के आने वाले सालों में और बदलने की आहट महसूस की जा सकती है।

हालिया मलयालम सिनेमा अपने अलग से, अछूते विषयों के कारण तुरंत दर्शक को मोहता है। छोटे-छोटे विषय जिनको सामान्यतः सिनेमा का मुख्य विषय नहीं बनाया जाता, उनको उठाकर कहानी बुनी जा रही है, जैसे बाढ़ पर, गांव के छोटे-छोटे मसलों पर कहानियां बन रही हैं। शहरी जीवन पर कम मलयालम सिनेमा दिखता है। हिंदी सिनेमा का शहरीकरण तो कई दशकों में हुआ ही है, अब तो महानगरीकरण की तरफ बढ़ चुका है। इसके बरक्स मलयालम सिनेमा अपने जमीनी दर्शकों के लिए फिल्में बना रहा है।

यह बड़ा अंतर है, इसे एक दार्शनिक, दूरदर्शी और जड़ों पर केंद्रित होने की दृष्टि को चुनने की तरह देखना चाहिए। कमाल यह है कि इसका अच्छा नतीजा बॉक्स ऑफिस पर भी दिख रहा है। उन कहानियों की खूबी यह भी है कि वे कहानियों से पैदा हुई कहानियां नहीं हैं, यानी उनके रेफरेंस साहित्य या सिनेमा से नहीं उठाए गए हैं। वे कहानियां सीधे जीवन या ज़मीन से उठाई गई हैं। हिंदी सिनेमा के दर्शक के रसास्वादन का स्टीरियो टाइप टूटने की तरह भी इसे देखना चाहिए। एक दूसरा स्टीरियो टाइप और भी टूटता दिख रहा है कि पिछले कुछ सालों में जो दक्षिण के अतिनाटकीय सिनेमा ने उत्तर के दर्शकों को मोहित किया, वह रसास्वादन भी शायद कमज़ोर पड़ने लगा है। ऐसे में मलयालम का सिनेमा उनकी थाली में नई डिश की तरह आया है। क्या पता हिंदी दर्शक के चटोरेपन के ये ट्रेंड्स स्थायी न बन पाएं और वे हिंदी सिनेमा की पुरानी दाल रोटी पर लौट आएं कि वही स्थायी भाव है। इसका ठीक ठीक जवाब अभी किसी के पास नहीं होगा।

कमोबेश हाल का सारा मलयालम सिनेमा कहानी केंद्रित सिनेमा है। इस साल आई चर्चित मलयालम फिल्मों में ‘गोट लाइफ’ नाम की एक बड़ी सुंदर फ़िल्म है। बड़ी मुश्किलों से बनी है, दुबई में रिलीज पर प्रतिबंध भी लगे हैं। अरब जाने वाले प्रवासियों की कहानी है, जो सत्य घटनाओं पर आधारित है। उनके संघर्ष और सर्वाइवल की कहानी है। ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ को ही याद कीजिए, कैसे हमारे जेंडर स्टीरियो टाइप को झकझोरती हुई फिल्म थी।

अन्वेशिपिन कंडेथुम’ के बिना तो इस साल के मलयालम सिनेमा की बात ही नहीं पूरी हो सकती। इसने भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया, 8 करोड़ में बनी फिल्म 40 करोड़ कमा गई। कई स्तरों की कहानी, उपकथाओं में अलग जादू है और क्लाइमेक्स और कथार्सिस के तो क्या ही कहने! बस ये समझिए कि यह फिल्म गूंगे का गुड़ है। ऐसी ही फिल्म है ‘आवेशम’। फहाद फासिल की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मलयालम सिनेमा के तो रेकॉर्ड तोड़े ही, इस साल भारत की सभी भाषाओं की सबसे कमाऊ फिल्मों मे अपना नाम दर्ज किया। फिल्म के गीतकार विनायक शशिकुमार को याद न करना तो गुनाह ही होगा।

एक और पहलू है जो मलयालम फिल्मों को हिंदी दर्शकों के मन के करीब लाता है, वह है संगीत। सुशिन श्याम, सूरज एस कुरूप, शान रहमान और जस्टिन वर्गीस जैसे संगीतकारों ने मलयालम फिल्मों के संगीत की धारा ही बदल दी है। इतना ही नहीं, वहां पर अनु एलिजाबेथ ऐसी गीतकार हैं जिन्होंने मलयालम फिल्मी गीतों को मेल गेज से बाहर लाने का काम किया है, लगभग वही काम हिंदी सिनेमा में कौसर मुनीर कर रही हैं। इन गीतकारों- संगीतकारों के संगीतमय कांधों पर टिकी ये फिल्में या तो न्यूनतम संगीत वाली गीत रहित फिल्में हैं या लोक के जादू से सजी, परंपरागत भारतीय गीत परंपरा के गीतों वाली फिल्में।

हिंदी में वह जगह इंडी म्यूजिक या आजाद संगीत भर रहा है। और हिंदी इंडी म्यूजिक देखते ही देखते हिंदी फिल्मी गीतों से बड़ा हो गया है, अपने प्रभाव में भी, अपने बाजारी आकार में भी। मलयालम सहित हिंदी से इतर भारतीय भाषाओं में से किसी भी भाषा के सिनेमा का बड़ा होना कुल मिलाकर सच्चे अर्थों में भारतीय सिनेमा का बड़ा होना है, उस गुलदस्ते में नए फूल का खिलकर महकना है।

 

आखिर किन मुद्दों के लिए याद आएंगे पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़?

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आज हम आपको बताएंगे कि पूर्व CJI चंद्रचूड़ आखिर किन मुद्दों के लिए याद आएंगे! इसके बाद भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल दो साल से ज्यादा का रहा। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए, कुछ में उन्हें सराहना मिली तो कुछ में आलोचना भी झेलनी पड़ी। उनके कार्यकाल की शुरुआत में दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग उनके कट्टर आलोचक थे। हालांकि, अब कार्यकाल के अंत तक हालात बदल गए हैं। अब तक जो लोग उनकी आलोचना कर रहे थे वही उनके बचाव में खड़े नजर आ रहे। एक नजर सीजेआई चंद्रचूड़ के कार्यकाल, उनके महत्वपूर्ण फैसलों पर। जस्टिस चंद्रचूड़ भारत के उन 14 मुख्य न्यायाधीशों में से एक हैं जिनका कार्यकाल दो साल या उससे अधिक समय का रहा है। क्या यह उनके लिए एक खोया हुआ मौका था? या फिर उनसे बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाई जा रही थीं, यह देखते हुए कि वह एक ऐसी न्यायिक प्रणाली का हिस्सा हैं जो अक्षम है, अधिकांश मामलों में पुरानी है, और जिसकी विश्वसनीयता बेहद कम है?

मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने जो फैसले सुनाए थे, उनसे उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं। लेकिन सीजेआई के रूप में उनसे कई लोग निराश हुए, कुछ ऐसे मामले थे जिन्हें उन्होंने अनदेखा कर दिया, और अदालत के बाहर उनका आचरण और बयान भी इसमें अहम हैं। सबसे पहले, आइए उन फैसलों पर नजर डालते हैं, जिन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ को उदारवादियों का पसंदीदा बना दिया! जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 1976 में उनके पिता वाईवी चंद्रचूड़ वाली पीठ की ओर से सुनाए गए एक फैसले को पलट दिया था। 1976 का फैसला, जो ADM जबलपुर मामले के नाम से मशहूर है। इसमें आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायिक मदद लेने से रोक दिया था। अगस्त 2017 में, नौ जजों की एक पीठ ने 1976 के फैसले को ‘गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण’ बताते हुए पलट दिया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने लिखा, ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता मानव अस्तित्व के लिए अपरिहार्य हैं। वे प्राकृतिक कानून के तहत अधिकार बनाते हैं।’

जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने एडल्ट्री पर भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि एक महिला को उसके पति की ‘संपत्ति’ नहीं माना जा सकता है। धारा 497 में व्यभिचार को ‘किसी व्यक्ति की पत्नी के साथ उसकी सहमति या जानकारी के बिना यौन संबंध बनाना’ के रूप में परिभाषित किया गया है। हालांकि, महिलाओं को इस धारा के तहत मुकदमा चलाने से छूट दी गई थी। दो वयस्कों के बीच समलैंगिक गतिविधि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के अपने फैसले में, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह प्रावधान एक ‘ पुराना और औपनिवेशिक कानून’ था जो लोगों के जीवन और निजता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ‘लव जिहाद’ मामले में हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया था। हाईकोर्ट ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी। उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला अपना जीवन कैसे जीना चाहती है यह पूरी तरह से उसके अपने फैसले की बात है। आधार अधिनियम मामले में उनके एकमात्र असहमतिपूर्ण फैसले ने इस एक्ट को पूरी तरह से यह कहते हुए रद्द कर दिया कि 2009 से आधार कार्यक्रम संवैधानिक खामियों और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से ग्रस्त है। भीमा-कोरेगांव मामले में अपने एकमात्र असहमतिपूर्ण फैसले में, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था, ‘न्यायिक घोषणाओं में बुलंद आदेशों का नागरिक के लिए कोई अर्थ नहीं हो सकता है जब तक कि मानव स्वतंत्रता की संवैधानिक तलाश उन व्यक्तियों के लिए न्याय हासिल करने में तब्दील न हो जाए जिनकी स्वतंत्रता खतरे में है।’

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ‘रोस्टर के मास्टर’ भी होते हैं, इसका मतलब है कि वह अन्य जजों को मामले सौंपते हैं। पिछले साल दिसंबर में, तत्कालीन दूसरे मोस्ट सीनियर जज संजय किशन कौल ने पाया कि उनके केसों की लिस्ट से कुछ मामले हटा दिए गए हैं। उनसे छीने गए मामलों में से एक केस केंद्र सरकार की ओर से कॉलेजियम द्वारा रिकमेंड जजों की नियुक्तियों, पदोन्नति और ट्रांसफर पर कार्रवाई न करने के बारे में था। जस्टिस कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ कुछ महीनों से मामले की सुनवाई कर रही थी और लगभग हर सुनवाई में सरकार को फटकार लगा रही थी। दरअसल, कॉलेजियम के प्रस्तावों को मंजूरी देने वाली कई सरकारी अधिसूचनाएं इन सुनवाइयों में चेतावनी दिए जाने के बाद ही जारी की गई थीं। 5 दिसंबर, 2023 को, जब मामले की फिर से सुनवाई होनी थी, तो वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और जस्टिस कौल ने आश्चर्य व्यक्त किया कि केस को बाद वाले की मामलों की सूची से हटा दिया गया था। कथित तौर पर अदालत कक्ष में इस तरह की बातचीत हुई: जस्टिस कौल: ‘मैं बस एक बात कहूंगा। मैंने मामले को नहीं हटाया है।’ प्रशांत भूषण: ‘महोदय आपको रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।’ जस्टिस कौल: ‘मुझे यकीन है कि प्रधान न्यायाधीश इससे अवगत हैं।’ प्रशांत भूषण: ‘बहुत अजीब। इसे आज सूचीबद्ध करने का न्यायिक आदेश है।’ जस्टिस कौल: ‘कल मैंने पाया कि इसे हटा दिया गया था। मैंने जांच की।’ प्रशांत भूषण: ‘बहुत ही असामान्य है।’ जस्टिस कौल: ‘कुछ बातें अनकही ही बेहतर होती हैं। मैं स्पष्ट करता हूं कि ऐसा नहीं है कि मैंने मामले को हटा दिया है या मैं मामले को लेने को तैयार नहीं हूं।’

एक मुख्य न्यायाधीश के पास अपनी पसंद के पूजा स्थलों पर जाने का पूरा अधिकार है, यहां तक कि हाई ज्यूडिशियल अधिकारियों के लिए आचार संहिता में भी ऐसा कोई उल्लेख नहीं है जो उन्हें ऐसा करने से रोकता हो। लेकिन ये दौरे निजी प्रकृति के होने चाहिए या प्रचार के साथ, यह तय करना हर जज के विवेक पर निर्भर करता है। जस्टिस चंद्रचूड़ के मंदिर दौरे चर्चा का विषय बने रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात), राम मंदिर (अयोध्या), जगन्नाथ पुरी मंदिर (ओडिशा), पशुपतिनाथ मंदिर (नेपाल), और तिरुपति मंदिर (आंध्र प्रदेश) जैसे प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन किए। इन यात्राओं को लेकर काफी प्रचार भी हुआ।

पिछले साल मई में जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों वाली पीठ ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उठाए गए हर कदम को उस समय तक अवैध करार दिया, जब तक तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा नहीं दे दिया। हालांकि, पीठ ने उद्धव ठाकरे के पक्ष द्वारा उनकी सरकार के खिलाफ बगावत करने वालों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। कुल मिलाकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल उतार-चढ़ाव भरा रहा। एक ओर उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले दिए, वहीं दूसरी ओर कुछ विवादों में भी रहे। उनके उत्तराधिकारी को न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करने और देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।