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ओइक्यश्री में “हैंड-ऑन” चोरी, लक्ष्मी भंडार में विफलता से “सीख” के साथ टैब पर सफल पबजी खिलाड़ी

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टैब मामले में पुलिस ने राज्य भर से 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. हालांकि, शुक्रवार रात तक नादिया और मुर्शिदाबाद से किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। इस्लामपुर और फरक्का में पांच प्राथमिकी दर्ज की गयी है. टैब घोटाले के पीछे ‘युवा साइबर विशेषज्ञों’ का एक समूह है! इनकी करतूत PUBG जैसे ऑनलाइन गेम में है. हाथ धोने के बाद ये वही हैं जो राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के पैसों के लिए ऑनलाइन ठगी करना चाहते हैं. बहुत कम सफलता मिली है. इस बार “साइबर विशेषज्ञ” टैब कांड “खलनायक”! जांच और कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद कुछ जांचकर्ताओं का शुरुआती विचार यही है.

नेट की दुनिया का सफर पबजी गेम से शुरू हुआ। कभी पिता से उधार लिए पैसों से तो कभी स्कूल से मिली स्कॉलरशिप के पैसों से खरीदे गए पहले ‘टचस्क्रीन मोबाइल’ से खेल शुरू हुआ। इसके बाद स्कूल पास कर कॉलेज पहुंचे कुछ युवा पैसों की लत के चलते कभी ऑनलाइन जुआ तो कभी मोबाइल गेम खेलते थे। कदम दर कदम वे साइबर अपराध की दुनिया में शामिल होते जा रहे हैं. दरअसल, ‘यूथ ड्रीम’ योजना का पैसा हड़पने के आरोपियों में ज्यादातर युवक और युवतियां हैं। उनमें से कुछ ने अपने घरों में ही एक छोटे से ‘डेस्कटॉप’ से ‘ऑनलाइन सर्विस सेंटर’ बना लिया। काम में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन पत्र भरना, कुछ पोर्टल पर आवेदन पत्र जमा करना, ट्रेन और फ्लाइट टिकट बुक करना और सस्ते मोबाइल सिम कार्ड बेचना शामिल है। ये सब करते हुए उनके हाथ कई लोगों की निजी जानकारी लग गई. इसके बाद उस ‘ऑनलाइन सर्विस सेंटर’ के मालिकों ने बैंक अकाउंट और आधार कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल कर साइबर क्राइम की दुनिया में कदम रखा. जांचकर्ताओं का एक समूह करीब दो हजार छात्रों के टैब मनी की चोरी के पीछे इन ‘युवा साइबर विशेषज्ञों’ का हाथ देख रहा है. इतना ही नहीं, जांच से पता चला कि आरोपी छात्रों के टैब मनी ट्रांसफर करने से पहले राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं से पैसे का गबन करने में भी शामिल थे।

टैब मामले में पुलिस ने अब तक राज्य भर से 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि शुक्रवार रात तक नादिया और मुर्शिदाबाद से किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं थी, इस्लामपुर और फरक्का में कुल पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। आरोपियों के तौर पर 17 लोगों के नाम हैं. पुलिस के मुताबिक ये सभी फरार हैं. वे टैब घोटाले में कैसे शामिल हुए? मालूम हो कि कुछ ‘पबजी गेमर्स’ ने 25 से 30 हजार में आईडी बेचीं और ग्रामीण इलाकों में ‘साइबर कैफे’ या ‘ऑनलाइन सर्विस सेंटर’ खोले। चूंकि संबंधित क्षेत्रों में बहुत से लोग विभिन्न कार्य ऑनलाइन करते हैं, इसलिए उनका आधार और बैंक विवरण उनकी पहुंच में आ जाते हैं। उन कैफे मालिकों ने जालसाज़ों को सभी निजी दस्तावेज़ उपलब्ध कराकर मोटी कमाई की। इस तरह वे विदेशी जालसाजों के संपर्क में हैं. बैंक खाते से पैसे निकालने आने वाले ग्राहकों के बायोमेट्रिक्स की क्लोनिंग कर पैसे निकालने में लग जाते हैं. यहीं से इन ‘साइबर एक्सपर्ट्स’ ने ‘बड़ा ऑपरेशन’ शुरू किया. कृष्णानगर पुलिस जिले के साइबर पुलिस स्टेशन के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, 2023 में नादिया के दो कॉलेजों पर ‘ऐक्याश्री’ परियोजना से कई लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया गया था। जांच से पता चला कि मास्टरमाइंड कॉलेज के आसपास खुले कई साइबर कैफे के मालिकों से जुड़े हुए हैं। आरोपियों की उम्र 20 से 24 साल के बीच है. कुछ लोगों से पूछताछ के बाद उस मामले में मुर्शिदाबाद से तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया. बाद में उन्हें जमानत भी मिल गयी. ओइक्याश्री कांड में राजस्थान गैंग का कनेक्शन सामने आया था. यह ज्ञात है कि “सफल हैकर्स” की पहचान “इक्याश्री” धन धारकों द्वारा की गई थी। उन्हें ‘संभावनाएं’ देखने और प्रमुख साइबर धोखाधड़ी के लिए तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। लेकिन वो प्रशिक्षित हैकर्स पहले ऑपरेशन में असफल हो गए. इसके बाद आरोपी ने महिलाओं के प्रोजेक्ट ‘लक्ष्मी भंडार’ के पैसे चुराने की योजना बनाई. लेकिन ‘साइबर सिक्योरिटी’ को तोड़ने में नाकाम रहे. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बाद ‘तरुणेर सपना’ प्रोजेक्ट में उन हैकर्स को ‘बड़ा असाइनमेंट’ टैब मनी था।

पुलिस के एक अन्य सूत्र के मुताबिक, वे साइबर अपराधी राज्य सरकार से बड़ी रकम चुराने की योजना बना रहे थे. उत्तरी दिनाजपुर से मुर्शिदाबाद के साथ-साथ ताब-कांडे तक विदेशी लिंक पाए गए हैं। पुलिस ने शुक्रवार रात तक राज्य भर में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. मालूम हो कि आरोपी कंप्यूटर को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के लिए पैसे चुराने की फिराक में थे. अपराधियों की नजर में सिर्फ ‘युवा का सपना’ ही नहीं, बल्कि ‘कन्याश्री’ भी थी. हालांकि, प्रोजेक्ट के सरकारी पोर्टल पर जानकारी बदलने के दौरान साइबर हैकर्स को दिक्कत का सामना करना पड़ा. हालाँकि, असफल होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी। वे ‘युवाओं के सपने’ को लक्ष्य बनाते हैं। इस मामले में बिहार का पूर्णिया या झारखंड का जामताड़ा जोड़ा जाता है. पड़ोस के कुछ साइबर कैफे मालिकों से विभिन्न स्कूलों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्राप्त करके साइबर धोखाधड़ी का काम आसान कर दिया गया था। कुछ कैफे मालिकों को हथकड़ी पहनाई गई है। कुछ मामलों में उनके साथ कई स्कूलों के कंप्यूटर शिक्षक भी थे। बड़ी संख्या में सिम कार्ड, फर्जी बैंक खाता नंबर, विभिन्न राज्यों के सरकारी बैंकों के खाता नंबर, विदेशी आईपी पते आदि इकट्ठा करके ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता है। कुछ मामलों में खाता संख्या को समान रखते हुए आईएफएससी कोड बदल दिया जाता है। इस तरह साइबर बदमाशों ने राज्य भर में करीब ढाई करोड़ रुपये

राजस्थान थप्पड़कांड- महिलाएं बोलीं, पुलिस ने हमें लाठियों से पीटा:एसडीएम को थप्पड़ मारने वाले नरेश जिस घर में घुसे, वहां सबसे ज्यादा तोड़फोड़

पुलिस ने महिलाओं को पीटा। छोटी-छोटी बच्चियों को भी नहीं बख्शा। गेट बंद किया तो तोड़ दिया। ये निशान देखिए, पुलिस ने बेरहमी से मुझपर डंडे बरसाए। हमारा क्या कसूर था कि इतनी बुरी तरह पीटा। पुलिस पर ये आरोप लगाए हैं समरावता गांव की महिलाओं ने। थप्पड़कांड की आग में राजस्थान के देवली-उनियारा (टोंक) का समरावता गांव झुलस गया है। लपटें भले ही बुझ गईं, लेकिन कालिख लगभग हर घर पर है। सबसे बुरी हालत में है कई कच्चे-पक्के घरों के बीच बना एक तीन मंजिला मकान। गेट से लेकर पार्किंग में खड़ी कार और चौक, बरामदे किचन और कमरे, हर तरफ तोड़फोड़ के निशान। फर्श से लेकर दीवारों तक जगह-जगह खून के निशान। पुलिस से बचने के लिए घर में घुसे थे भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि नरेश मीणा और उनके कई समर्थक पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए भीड़ के बीच में से बचते-बचाते इसी घर में घुसे थे। उनका पीछा कर रही पुलिस का यहीं पर उनके समर्थकों से आमना-सामना हुआ था। हालांकि नरेश मीणा पुलिस के ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर पहुंचने से पहले ही छत से पास के ही कच्चे मकान के चद्दरों पर कूदकर पीछे के गेट से निकलकर खेतों में भाग गए थे। पड़ताल में सामने आया है कि देर रात समर्थकों के पथराव के दौरान नरेश मीणा पुलिस हिरासत से छूट गए थे। छूटने के बाद नरेश मीणा वापस समर्थकों के बीच पहुंच गए और पुलिस को ललकार रहे थे। इसी दौरान भारी तादाद में मौजूद पुलिस फोर्स ने दोनों साइड से घेर कर वहां लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद पुलिस व नरेश मीणा समर्थक आमने-सामने हो गए। इसी दौरान नरेश मीणा को कुछ समर्थक गिरफ्तारी और पुलिस लाठीचार्ज से बचाने के लिए थोड़ी दूर आगे मौजूद एक पक्के घर में ऊपर की तरफ ले गए। इस घर के बाहर मीणा समर्थकों की भारी भीड़ भी जमा हो गई थी। भीड़ मीणा को कवर दे रही थी।पुलिस फोर्स उग्र प्रदर्शनकारियों को काबू करने और मीणा को गिरफ्तार करने के लिए बल प्रयोग करते हुए इसी घर में घुस गई। यहां भी नरेश मीणा के समर्थकों और पुलिस में जमकर संघर्ष हुआ। पुलिस नरेश मीणा को पकड़ पाती उससे पहले ही वो पास वाले मकान की तरफ कूदकर पीछे के गेट से खेतों की तरफ भाग गए। मां-बेटी बोलीं- बच्चियों पर भी लाठियां बरसाईं भास्कर रिपोर्टर ने उस घर में रहने वाली मां-बेटी से बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेरहमी से पीटा। छोटी-छोटी बच्चियों और बच्चों पर भी लाठी बरसाई। गेट बंद किया तो तोड़ दिया। गांव के कई लोगों को पुलिस उठा ले गई। इस बवाल में कई लोग चोटिल और घायल हुए हैं। जिनका अभी तक कोई अता-पता नहीं है। इसी घर में मौजूद दूसरी बेटी रूमाली से भी भास्कर ने बात की। उसने बताया कि पुलिस ने उसे भी बेरहमी से पीटा। पास में ही बैठी उसकी मां बोली- हमारा क्या कसूर था ? हमने तो दिन भर पुलिसवालों की सेवा की थी। नरेश की भी गलती नहीं थी। वो तो ये सब हमारे लिए ही तो कर रहा था। मां-बेटी ने बताया- उस दिन सब कुछ सही से चल रहा था। पूरे गांव ने अपनी मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएम ने एक महिला सहित 3 लोगों पर प्रेशर बना वोट डलवा दिए थे। इसी के चलते नरेश मीणा ने गांव के समर्थन में उस एसडीएम के थप्पड़ जड़ दिया था। पुलिस पर लगाए कई आरोप दोपहर बाद सब ने अपने वोट भी डाल दिए थे। शाम में धरना चल रहा था और नरेश मीणा वहां लोगों के साथ बैठ कर खाना खाने की तैयारी में थे। तभी किसी ने उन्हें बताया कि पुलिस ने खाने के पैकेट लेकर आ रही गाड़ी को रोक लिया है। इस पर नरेश धरने में से अकेले ही पैदल वहां पुलिस से बात करने के लिए चले गए थे। तभी वहां पर पुलिस वालों ने नरेश का हाथ पकड़कर उन्हें जीप में बैठा लिया। इस बात का पता धरने में मौजूद भीड़ उग्र हो गई। लोगों ने पुलिस जीप को घेर लिया। भीड़ का गुस्सा देख पुलिस भी पीछे हट गई। मीणा पुलिस जीप से बाहर आ गए और सीधे धरने में पहुंच गए थे। इसके थोड़ी देर बाद ही बड़ी तादाद में आई पुलिस ने धरने को दोनों साइड के रास्तों से घेर लिया। नरेश मीणा कुछ बोल रहे थे कि तभी पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। यहां अफरा-तफरी मच गई थी। हर कोई इधर-उधर भाग रहा था। कुछ लोग नरेश को बचाने के लिए पड़ोस वाले घर में लेकर पहुंचे और यहां अंदर से गेट बंद कर लिए। इधर इसके बाद उग्र हुई भीड़ ने कई पुलिस वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी स्टार्ट कर दी। धीरे-धीरे यहां गांव में भारी पुलिस फोर्स पहुंच गई थी। पुलिस एक-एक घर में घुसकर लोगों को पकड़ रही थी और पीट रही थी। घरों में पड़े मवेशियों के चारे में आग लगा दी। धरने में आए हुए लोगों के निजी वाहनों और बाइकों में तोड़फोड़ कर उन्हें भी आग के हवाले कर दिया। अचानक हमारे पड़ोस में बने इस दो मंजिला मकान में चीख-पुकार मच गई थी। अब इस घर में कोई भी नहीं है, सभी को पुलिस पकड़कर ले गई है। एसपी बोले- पुलिस पर लगाए आरोप बेबुनियाद एसपी ने बताया- ग्रामीणों और महिलाओं के साथ मारपीट और जबरदस्ती के कोई फैक्ट नहीं है। हमने ही तो वहां लाइट्स लगवाई हैं। ये सब तो ग्रामीणों के ही कंट्रोल में था। गेट तोड़कर घर में घुसने वाली बात सही नहीं है। पुलिस वहां लोगों को मारने या गाड़ियां जलाने नहीं गई थी। हमारी गाड़ियां जलाई गई हैं और पत्थरबाजी भी हम पर हुई है। हमारी गाड़ियों में पथराव हुआ था। सबसे आगे एडीएम साहब की गाड़ी चल रही थी। सबसे पहले उसी में आग लगाई गई थी। इसी समय नरेश हमारी हिरासत से भाग गया था। वहां बाहरी लोग जमा थे। बाहरी लोगों की ही गाड़ियां जली हुई हैं। जो गिरफ्तार हुए वो भी 80 से 90 प्रतिशत लोग बाहर के हैं। ये वहां क्या कर रहे थे? -विकास सांगवान, एसपी, टोंक ….. SDM थप्पड़कांड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए…. 1. बुजुर्ग के वोट डालने के बाद भड़के लोग:देवली-उनियारा के समरावता गांव में SDM थप्पड़ कांड के बाद आगजनी-पथराव की पूरी कहानी देवली-उनियारा में 13 नवंबर को एसडीएम थप्पड़ कांड और फिर देर रात हुई आगजनी-पथराव के बाद समरावता गांव खाली हो गया है। गांव के लोग पुलिस से बचने के लिए खेतों और ढाणियों में छुपे हैं। भास्कर टीम हालात जानने के लिए मौके पर पहुंची तो लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। पूरी खबर पढ़िए… 2. राजस्थान थप्पड़कांड; नरेश मीणा टोंक जेल में शिफ्ट:किरोड़ी ने कहा- टारगेटेड था मामला; वकील बोले- SDM ने थाने में निर्दलीय प्रत्याशी को पीटा राजस्थान के देवली-उनियारा (टोंक) में एसडीएम के थप्पड़कांड विवाद के बाद समरावता गांव में तीसरे दिन शुक्रवार को भी तनाव रहा। घटना के बाद जिला कलेक्टर डॉ सौम्या झा का पहला बयान सामने आया। इधर, नरेश मीणा को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया। पूरी खबर पढ़िए….

देश में सड़क हादसों में रोज 26 बच्चे मर रहे:इनमें से 7 की जान ड्राइविंग करते गई; 2023 में हेलमेट न पहनने से 54,568 मौतें हुईं

बिना लाइसेंस 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को वाहन चलाने के लिए थमाने वाले माता-पिता के लिए यह महज खबर नहीं, बल्कि एक अलर्ट है। 2023 के दौरान हुए सड़क हादसों में 18 वर्ष से कम आयु के 9,489 बच्चों की मौत हुई यानी देश ने हर दिन 26 बच्चों को खो दिया। ये साल भर के हादसों में जान गंवाने वाले कुल लोगों का 5.49% है। दुखद पहलू यह है कि इनमें से 2,537 बच्चों की मौत ड्राइविंग (बिना लाइसेंस) करते हुए हुई यानी हर दिन करीब 7 ‘नाबालिग चालकों’ ने जान गंवाई। हादसों में 4,242 बच्चों की मौत बतौर सवारी हुई, जबकि 2,232 बच्चों को पैदल चलते हुए सड़कों पर रौंद दिया गया। सड़क परिवहन मंत्रालय की रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2023 रिपोर्ट के लिए जुटाए गए आंकड़ों में यह तस्वीर सामने आई। रिपोर्ट जल्द ही जारी होने वाली है। भास्कर ने अलग-अलग राज्यों से ये आंकड़े संकलित किए। इन आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में हेलमेट न पहनने के कारण 54,568 मौतें हुईं 2023 में बच्चों की मौतों की संख्या 2022 से कम सड़क हादसों में बच्चों की मौतों की संख्या 2022 की तुलना में 39 कम है। 2022 के दौरान सड़क हादसों में 9,528 बच्चों की जान चली गई थी। देश में अब भी हर घंटे औसतन 55 सड़क हादसे हो रहे हैं। इनमें 20 लोगों की जान जा रही है। 2022 की तुलना में 2023 में सड़क हादसे 4.2% और मौतें 2.6% बढ़ी हैं। देश में सबसे अधिक 13.7% मौतें यूपी में हुईं और लगातार छठे वर्ष सड़क हादसों की संख्या में तमिलनाडु नंबर-1 रहा। वर्ष 2023 के दौरान सड़क हादसों में उम्र के हिसाब से देखें तो सबसे अधिक 66.4% मौतें 18-45 के आयु वर्ग में हुईं। कुल मौतों में 35 वर्ष से कम आयु वाले लोग 50.5% थे। सड़क हादसों में मारे गए लोगों में 31.5% शहरी और 68.5% ग्रामीण थे। 85.8% पुरुष और 14.2% महिलाएं थीं। सड़क के गड्‌ढों से होने वाली मौतें सालभर में 16% तक बढ़ीं ———————- सड़क हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बिजनौर में दूल्हा-दुल्हन समेत 7 की मौत, कार ने टेंपो को टक्कर मारी, खाई में जा गिरा उत्तर प्रदेश के बिजनौर में बेकाबू कार ने टेंपो में टक्कर मार दी। टेंपो सड़क किनारे खाई में जा गिरा। हादसे में दूल्हा-दुल्हन समेत 7 लोगों की मौत हो गई। 2 घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूल्हा-दूल्हन और परिजन झारखंड से ट्रेन से 1:30 रात मुरादाबाद स्टेशन पर उतरे ,वहां से टेंपो में सवार होकर धामपुर आ रहे थे। पूरी खबर पढ़ें…

बिजनौर में सड़क हादसे में दूल्हा-दूल्हन समेत 7 की मौत:झारखंड से शादी करके घर लौट रहा था परिवार, कार ने ऑटो को मारी टक्कर

यूपी के बिजनौर में बेकाबू कार ने टेंपो में टक्कर मार दी। टेंपो सड़क किनारे खाई में जा गिरा। हादसे में दूल्हा-दुल्हन समेत 7 लोगों की मौत हो गई। 2 घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूल्हा-दूल्हन और परिजन झारखंड से ट्रेन से रात 1:30 बजे मुरादाबाद स्टेशन पर उतरे ,वहां से टेंपो में सवार होकर धामपुर आ रहे थे। हादसा शनिवार रात 2 बजे थाना धामपुर के नेशनल हाईवे-74 के फायर स्टेशन के पास हुआ। मरने वालों में दूल्हा-दुल्हन, दूल्हे की मौसी, मौसा और मौसेरी बहन समेत 7 लोग शामिल हैं। घर पहुंचने से पहले आ गई मौत जानकारी के अनुसार बिजनौर जिले के तिबड़ी गांव निवासी खुर्शीद अपने बेटे विशाल की करने झारखंड गए थे। शादी करके परिवार के साथ गांव लौट रहे थे। उनके साथ विशाल,उसकी पत्नी खुशी, मौसी रूबी, मौसा मुमताज, मौसेरी बहन बुशरा के अलावा परिवार के दो लोग थे। ट्रेन से मुरादाबाद स्टेशन पर आए। वहां से घर आने के लिए ऑटो बुक किया था। धामपुर के नगीना मार्ग स्थित फायर स्टेशन के पास क्रेटा कार ने उनके ऑटो को टक्कर मार दी। हादसे में हादसे में में खुर्शीद (65), विशाल (25), खुशी (22), मुमताज़ (45), रूबी (42), बुशरा (10) और ऑटो चालक अजब की मौत हो गई। दो लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी को रामपुर सीएचसी पहुंचाया। 7 शवों को पोस्टमॉर्टम मे लिए भेज दिया गया। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी बोले-कोहरे के कारण हुआ हादसा
एसपी अभिषेक ने बताया- बिजनौर में कार और ऑटो की टक्कर में दूल्हा-दूल्हन समेत 7 लोगों की मौत हो गई। परिवार झारखंड में शादी करके बिजनौर लौट रहा था। दो लोग घायल हुए हैं, जिन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया है। घने कोहरे के कारण हादसा हुआ है। घायल बोले तेज रफ्तार ने ऑटो को मारी टक्कर
घायल युवक ने बताया- भाई की शादी करके हम झारखंड से लौट रहे थे। ट्रेन से मुरादाबाद पहुंचे। मुरादाबाद से ऑटो से रात में घर जा रहे थे। तेज रफ्तार क्रेटा कार ने ऑटो को टक्कर मार दी। परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। सीएम ने जताया शोक
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में सड़क हादसे में हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएम ने संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। ————————– ये भी पढ़ें… मैडम ब्यूटी पार्लर के उद्धघाटन में व्यस्त:व्यापारियों का दर्द- क्या चाय-समोसे भी हमें ही मंगाने पड़ेंगे, लखनऊ में तैनाती को बेताब अफसर एक मैडम महिलाओं की समस्या से ज्यादा ध्यान सौंदर्य पर दे रही हैं। इसे लेकर भगवा दल के नेताओं में चिंता है। उधर, राजधानी के व्यापारी नेता गुस्से में हैं। वजह है मैडम का तवज्जो न देना। मैडम ने उन्हें चाय-पानी नहीं पूछा, और तो और अपने चैम्बर से उठकर जाने लगीं। सरकार की किरकिरी कराने वाले कुछ अफसरों के सिर पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। राजधानी में चर्चा है कि जिले के कप्तान और जोन के सुपर कप्तान दोनों की कुर्सी खतरे में है। इस शनिवार सुनी-सुनाई में पढ़िए ब्यूरोक्रेसी और राजनीति में चल रही चर्चाएं… पढ़ें पूरी खबर…

परवीन बाबी से रिश्ता टूटने पर बोले कबीर बेदी:बताया परवीन के साथ रिश्ता खत्म होने का सच,

परवीन बॉबी से रिश्ता टूटने की बात को लेकर कबीर बेदी ने बातचीत की। उन्होंने कहा कि दरअसल, मैंने नहीं बल्कि परवीन ने मुझसे रिश्ता तोड़ा था। इस दौरान कबीर ने परवीन की तारीफ की और कहा कि परवीन की गलती नहीं थी उसने मुझे इसलिए छोड़ा क्योंकि उसकी मेंटल हेल्थ ठीक नहीं थी।
कबीर बेदी और परवीन बाबी का रिश्ता काफी कम समय तक चला था। कबीर बेदी ने बताया कि ये रिश्ता उस समय शुरू हुआ, जब परवीन अपनी मेंटल हेल्थ से जूझ रही थीं। हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर ने परवीन के साथ अपने रिश्ते को खत्म करने के बारे में भी बात की। हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर ने परवीन के साथ अपने रिश्ते के खत्म होने के बारे में बात की। अपने रिश्ते की सच्चाई भी बताई है।

आखिर 11 अक्टूबर की रात को दिल्ली में क्या हुआ था?

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आज हम आपको बताएंगे कि 11 अक्टूबर की रात को दिल्ली में आखिर क्या हुआ था! देश की राजधानी दिल्ली का भीड़भाड़ वाला इलाका- सराय काले खां। तारीख 11 अक्टूबर 2024 और आधी रात के लगभग 3 बजे का वक्त। दिल्ली पुलिस के पास एक कॉल आती है। फोन करने वाला शख्स बताता है कि इलाके में एक महिला बेसुध और बुरी हालत में पड़ी है। दिल्ली पुलिस की गाड़ी तुरंत मौके पर पहुंचती है। महिला के शरीर से खून बह रहा था और उसकी हालत काफी नाजुक थी। महिला को फौरन एम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया जाता है, जहां जांच के बाद डॉक्टर बताते हैं कि उसके साथ गैंगरेप हुआ है। जांच में ये भी पता चलता है कि पीड़िता ओडिशा की रहने वाली है और मानसिक तौर पर विक्षिप्त है। मौके पर पुलिस के आला अफसर भी पहुंचते हैं और केस की तफ्तीश के लिए तेज-तर्रार अफसरों की 10 टीमें गठित कर दी जाती हैं। पीड़िता इस हालत में नहीं थी कि उसके साथ दरिंदगी करने वालों का हुलिया या कोई सुराग बता सके। ऐसे में पुलिस के लिए पूरी तरह से ये एक ब्लाइंड केस था।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता से उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की थी, जिन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके लिए पुलिस एक प्लान बनाती है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्सटेबल को सामाजिक कार्यकर्ता बनाकर पीड़िता के पास भेजा जाता है। साथ ही एम्स मैनेजमेंट से बातचीत के बाद एक महिला ओडिया ट्रांसलेटर भी नर्स के कपड़ों में उसके पास भेज दी जाती है।

धीरे-धीरे पीड़िता का भरोसा इन दोनों महिलाओं पर बन जाता है। जब उससे घटना के बारे में पूछा जाता है, तो वो उंगली के इशारे से बताती है कि उसके साथ हैवानियत करने वाले तीन लोग थे। पीड़िता बहुत ज्यादा जानकारी तो नहीं दे पाती, लेकिन इतना जरूर बताती है कि इन तीनों में से एक विकलांग था और दूसरा ऑटो ड्राइवर। इसके साथ ही वो रेलवे स्टेशन का भी जिक्र करती है। अब इस मासूम के साथ दरिंदगी करने वालों को पकड़ने के लिए पुलिस के पास मजबूत ना सही, लेकिन कुछ सुराग जरूर थे। पहला- आदमी तीन थे। दूसरा- एक ऑटो ड्राइवर था, जबकि एक विकलांग, तीसरे के बारे में कुछ नहीं पता। और तीसरा सुराग- वारदात रेलवे स्टेशन के आसपास हुई थी। पुलिस को एहसास हो गया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए उन्हें काफी लंबी जद्दोजहद करनी होगी।

सबसे पहले एक साइट प्लान तैयार किया जाता है, जिसके तहत उस इलाके से लेकर आसपास की सभी सड़कों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाते हैं, जहां पीड़िता बेसुध हालत में मिली थी। सरकारी और प्राइवेट मिलाकर पुलिस 700 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करती है। आखिरकार एक कैमरे में पीड़िता 10 अक्टूबर की सुबह तकरीबन 10 बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते हुए दिख जाती है। शुरुआती तीनों सुरागों के बाद पुलिस के लिए ये एक बड़ा सुराग था। अब यहां से पुलिस पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और सराय काले खां के बीच में पड़ने सभी रूट्स के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करती है। पुरानी दिल्ली स्टेशन से निकलकर पीड़िता कहां-कहां जा सकती है, सारे रूट का डिजिटल मैप तैयार किया जाता है।

इसके साथ ही इस डिजिटल मैप के जरिए, सुबह 10 बजे से लेकर पीड़िता के मिलने के बीच के समय में, रूट पर दिखे लगभग 150 ऑटो रिक्शा वालों की नंबर प्लेट की लिस्ट तैयार होती है। इनमें कुछ नंबर पूरे नजरआए थे, जबकि कुछ अधूरे। काम बेहद मुश्किल था, लेकिन पुलिस की ये टीम किसी भी कीमत पर उन तीनों अपराधियों तक पहुंचना चाहती थी। और आखिरकार, पुलिस की मेहनत रंग लाती है। एक सीसीटीवी फुटेज में एक ऑटो रिक्शा उस जगह पर खड़ा दिखाई देता है, जहां महिला मिली थी। आगे की तफ्तीश होती है, तो कुछ और कैमरों में यही ऑटो रिक्शा दूसरी जगह जाते हुए और एक जगह पर रुकते हुए नजर आता है। ड्राइवर यहां अपने ऑटो से उतरता है और सड़क पार कर दूसरी तरफ जाता है। पुलिस ने अपने डिजिटल मैप के जरिए जिन 150 ऑटो रिक्शा की लिस्ट बनाई थी, उनमें ये ऑटो रिक्शा भी था!

थोड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को इस ऑटो रिक्शा और उसके ड्राइवर की पूरी डिटेल मिल जाती है। ड्राइवर का नाम था प्रभु महतो। घटना वाली रात उसके मोबाइल की लोकेशन भी उसी इलाके में एक्टिव मिलती है। 30 अक्टूबर को पुलिस प्रभु महतो को गिरफ्तार कर लेती है। पूछताछ में महतो अपना जुर्म कबूलते हुए दूसरे साथी प्रमोद उर्फ बाबू का नाम बताता है और उसे भी 2 नवंबर को पकड़ लिया जाता है। इसके बाद वहां शमशुल पहुंचा। उसने भी शराब पी रखी थी और प्रमोद के बाद शमशुल ने महिला के साथ हैवानियत की। इन दोनों को दुष्कर्म करते हुए प्रभु महतो ने देख लिया और उसने भी महिला के साथ अपने ऑटो में दरिंदगी की। इसके बाद महतो पीड़िता को सराय काले खां इलाके में फेंककर फरार हो गया। इस केस को सुलझाने में 24 दिनों का वक्त लगा और पुलिस का कहना है कि वो आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाएगी।

 

क्या लॉरेंस बिश्नोई के चक्कर में टूट चुकी है पप्पू यादव की हिम्मत?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पप्पू यादव की हिम्मत लॉरेंस बिश्नोई की वजह से टूट चुकी है या नहीं! बिहार के ‘कथित’ बाहुबली और पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जिंदगी में जब तक गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की एंट्री नहीं थी, तब तक मजे में ‘रॉबिन हुड’ स्टाइल में वक्त गुजर रहा था। मगर, जैसे ही लॉरेंस आया, पप्पू यादव का सुख-चैन छिन गया। अब तो ‘घर’ भी टूट चुका है। कांग्रेस की सांसद पत्नी रंजीत रंजन ने घर की बात पब्लिक कर दीं। वरना, किसी को क्या पता था कि पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन अलग-अलग रह रहे हैं। दोनों का पॉलिटिकल करियर सेट है, फिर भी घर का ‘क्लेश’ सार्वजनिक हो गया। ये सबकुछ सिर्फ और सिर्फ लॉरेंस बिश्नोई की वजह से हुआ। अब तो दूसरे जगह से भी पप्पू यादव को नसीहतें मिल रही है। बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की वजह से सुख-चैन छिन गया है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि लॉरेंस चाहे सलमान खान को मारे या किसी और को, उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। वे (लॉरेंस) जब आना चाहें, आ जाएं और उन्हें मार कर चले जाए। वो डरने वालों में से नहीं है। पप्पू यादव ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई, आपको जिसे मारना है, मारिए। मुझे कोई मतलब नहीं है। मेरा कोई लेना-देना नहीं है। सलमान को या फिर किसी और को मारिए, हमें क्या लेना-देना है। सलमान को बचाना है या नहीं ये सरकार का दायित्व है। हमारी हिफाजत की चिंता आप लोग मत करिए।

इससे पहले पप्पू यादव को सोशल मीडिया और फोन के जरिए जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। पप्पू यादव के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई के आदमियों ने उन्हें ये धमकी दी थी। ये सबकुछ इसलिए हुआ क्यों कि मुंबई में बाबा सिद्दीकी हत्या के बाद पप्पू यादव ने लॉरेंस बिश्नोई को ‘दो टके’ का क्रिमिनल बताया था। साथ ही 24 घंटे में उसके गैंग की सफाया करने की चुनौती दी थी। मुंबई जाकर बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी से मातमपुर्सी भी की थी। जिसके बाद लॉरेंस के गुर्गे का ‘कॉल’ पप्पू यादव के पास आ गया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय से पप्पू यादव ने खुद के जान का खतरा बताते हुए ‘जेड’ कैटेगरी की सिक्योरिटी की मांग रख दी।

यहां तक तो सबकुछ गैंगस्टर बनाम बाहुबली की फाइट लग रही थी। मगर, मामला तब और संगीन हो गया, जब उनकी सांसद पत्नी ने सांसद पप्पू यादव से किनारा कर लिया। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मसला है। इसका उनके या उनके बच्चों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये मामला सरकार की जिम्मेदारी है। पप्पू यादव के इस बयान से उनका कोई संबंध नहीं है। हम पति-पत्नी डेढ़-दो साल से अलग-अलग रह रहे हैं। उनसे मेरा विचार नहीं मिलता है।

वैसे, ये बात उन दिनों की है जब रंजीत रंजन की तस्वीर देख पप्पू यादव को प्यार हुआ था। ये पहली नजर का इश्क था। राजनीति में आने से पहले रंजीत रंजन टेनिस प्लेयर थीं। रंजीत का फोटो देखकर पप्पू यादव अपना दिल हार बैठे थे। खास बात यह है कि टेनिस खेलते हुए रंजीत रंजन की ये तस्वीर खुद पप्पू यादव के दोस्त और रंजीत के भाई ने उन्हें दिखाई थी। फोटो को देखते ही पप्पू यादव ने मन ही मन फैसला कर लिया कि वो रंजीत से शादी करेंगे। तब तक पप्पू यादव की पहचान एक बाहुबली सांसद के तौर पर हो चुकी थी।

शुरू में पप्पू यादव ने रंजीत को शादी के लिए प्रपोज किया, तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया। फिर भी, पप्पू यादव ने हार नहीं मानी। करीब तीन महीने तक लगातार प्रयास करते रहे। आखिरकार, उनकी इश्क वाली मेहनत रंग लाई और रंजीत ने शादी के लिए हां कर दी। अब दोनों के दो बच्चे भी हैं। मगर, अब ये सांसद जोड़ा अलग रह रहा है। हालांकि, पत्नी रंजीत रंजन के बयान पर पप्पू यादव ने अब तक कुछ नहीं कहा है।

लॉरेंस और पप्पू के मामले में अब नया ट्विस्ट आ गया है। उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व बीजेपी सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने पप्पू यादव का नाम लिए बगैर कहा कि एक कोई बिहार के अंदर बाहुबली हैं, जो हर विषय पर बोलते हैं। उन्होंने पहले बोला और अब सिक्योरिटी मांग रहे हैं। तीन-चार क्विंटल वजन है उनका। क्यों बयान दिया? बिना बयान दिए आपका काम नहीं चलता है। अगर आपने बयान दिया है तो झेलो। जो किसी समाज के खिलाफ, किसी जाति के खिलाफ अपने देश के खिलाफ जो टिप्पणी करता है। उसके लिए सीधा कानून होना चाहिए कि उनको जीवन में कभी भी सरकारी सुरक्षा ना मिले।

हालांकि, पप्पू यादव ने ब्रजभूषण शरण सिंह को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब करणी सेना के अध्यक्ष की हत्या की गई थी, तब उनकी बोलती बंद क्यों हो गई थी? जो लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मैं डर गया हूं, तो वे मुझे मरवा दें, कोई दिक्कत नहीं है। हम चाहते हैं कि जल्दी मर जाएं। आपको भी मारने की जल्दबाजी है, तो जल्दी खत्म कर दो। हिंदुस्तान से एक शख्स गायब हो जाएगा। जब आना है आ जाओ, मार के चले जाओ।

 

कैदी और जमानत के बारे में क्या बोले पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया?

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हाल ही में पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया ने कैदी और जमानत के बारे में एक बड़ा बयान दे दिया है! भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ कुछ दिनों बाद रिटायर होने वाले हैं। रिटायर होने से पहले उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संवाद बहुत जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जजों पर ‘भरोसा’ रखें। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सच तो यह है कि जैसा कि मैंने कहा कि इस तरह की बातचीत में कभी कोई ‘डील’ नहीं होती। इसलिए, कृपया हम पर भरोसा रखें, हम कोई ‘डील’ करने के लिए वहां नहीं हैं। जब भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रार्थना करते हुए उनकी तस्वीरों के राजनीतिक संदर्भ में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मेरे घर एक निजी कार्यक्रम के लिए आए थे, यह कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं था। मुझे लगता है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था क्योंकि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सामाजिक स्तर पर भी निरंतर बैठकें होती रहती हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या पीछे मुड़कर देखें तो क्या वह तस्वीर में कुछ बदलाव करना चाहेंगे, जैसे कि अन्य जजों या विपक्ष के नेता को भी शामिल करना? इस पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ऐसा करने पर वह एक चयन समिति बन जाती। उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष के नेता को इसलिए शामिल नहीं करूंगा क्योंकि यह केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए कोई चयन समिति नहीं है।

अदालतों द्वारा कई मामलों में जमानत न दिए जाने के मुद्दे पर, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि सीजेआई के रूप में यह उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है कि यह संदेश निचली अदालतों तक नहीं पहुंच पाया है कि जमानत एक नियम है, अपवाद नहीं, और ये अदालतें जमानत देने से हिचकिचाती हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी बात है, मैंने हमेशा कहा है कि मैंने A से Z तक , अर्नब से लेकर जुबैर तक सभी को जमानत दी है। यही मेरा सिद्धांत है। CJI ने यह भी बताया कि उनके दो साल के कार्यकाल में, शीर्ष अदालत में जमानत के 21,000 मामले दायर किए गए थे, जबकि 21,358 जमानत मामलों का डिस्पोजल किया गया।

इसके बाद न्यायिक नियुक्तियों पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि कॉलेजियम ने अपना काम पूरा कर लिया है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार लंबित सिफारिशों को मंजूरी दे देगी। उन्होंने कहा कि उनमें से कुछ नाम अभी भी सरकार के पास लंबित हैं और आपने उनमें से कुछ का उल्लेख किया है। मुझे उम्मीद है कि सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दे दी जाएगी। हमने सर्वोच्च न्यायालय के रूप में अपनी शक्ति के भीतर वह सब कुछ किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम संविधान की प्रक्रिया में अपना हिस्सा निभाएं। नामों का मूल्यांकन करें, नामों पर चर्चा करें, और हम नाम सरकार को भेजते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी करके सरकार प्रभावी रूप से वीटो पावर का इस्तेमाल करती है, CJI ने कहा कि कॉलेजियम भी वीटो का इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि मुझे आपको बताना होगा कि यह वीटो सिर्फ सरकार द्वारा ही नहीं लगाया जाता है। कॉलेजियम द्वारा भी वीटो का इस्तेमाल किया जाता है। जब तक हम नियुक्ति को मंजूरी नहीं देते, तब तक कोई भी नियुक्ति नहीं हो सकती।

यह बताते हुए कि राज्य सरकारें न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम को भेजे जाने वाले नामों में किस तरह भूमिका निभाती हैं, उन्होंने कहा कि जहां हमें लगता है कि कोई विशेष उम्मीदवार नियुक्ति के योग्य नहीं है और हम उसे वीटो करते हैं, तो भारत सरकार उस उम्मीदवार को नियुक्त नहीं कर सकती। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि जिन्हें हम नियुक्ति के योग्य नहीं मानते हैं, उन्हें न्यायाधीश के रूप में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। अपने नेतृत्व वाले कॉलेजियम के ट्रैक रिकॉर्ड पर, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 18 न्यायाधीशों की सिफारिश की गई थी, जिन्हें नियुक्त कर दिया गया था।शीर्ष अदालत में जमानत के 21,000 मामले दायर किए गए थे, जबकि 21,358 जमानत मामलों का डिस्पोजल किया गया। सिफारिश किए गए 42 मुख्य न्यायाधीशों में से 40 को नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 164 सिफारिशों में से 137 को मंजूरी दे दी गई, जबकि 27 सरकार के पास लंबित हैं।

 

रिटायरमेंट के बाद आखिर क्या है पूर्व जस्टिस का प्लान?

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आज हम आपको बताएंगे कि रिटायरमेंट के बाद पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया का प्लान क्या है! भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हो गए हैं। अपने वर्किंग डे के आखिरी दिन उन्होंने ‘बुलडोजर न्याय’ पर फैसला सुनाया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर, 2022 को सीजेआई का पद संभाला था। उनकी जगह अब संजीव खन्ना भारत के अगले चीफ जस्टिस होंगे। 11 नवंबर यानी सोमवार को जस्टिस खन्ना ये जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ अपने सख्त फैसलों और टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद लोग यह सोच रहे हैं कि आगे उनका प्लान क्या है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने अपनी आगे की योजना के संबंध में खुद सबको जानकारी दी। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उनका मानना है एक बार कोई व्यक्ति CJI या जज के पद से रिटायर हो जाता है, तो भी लोग उसे जज या CJI ही मानते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद भी उनके काम ऐसे होने चाहिए जो उनकी जिम्मेदारी को दर्शाते हों। उन्होंने कहा कि अगर मैं कोई पद संभालता हूं, तो मेरा मानना है कि CJI या जज के पद से रिटायर होने के बाद भी लोग आपको जज या CJI ही मानते हैं। समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने अबतक संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए।

CJI चंद्रचूड़ ने बताया कि रिटायर हुए जज संसदीय कानूनों के तहत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन और टेलीकॉम डिस्प्यूट्स ट्रिब्यूनल जैसे कई ट्रिब्यूनल में काम कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज या CJI के लिए संभावित भूमिकाओं की ओर इशारा करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इन ट्रिब्यूनल के सामने आने वाले मामलों की प्रकृति ऐसी होती है कि उनका बहुत महत्व होता है। इन मामलों की सुनवाई के लिए अत्यधिक ईमानदारी और विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि पूर्व जजों, खासकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को इन पदों पर नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऐसे मामलों में कुछ कमियों का भी जिक्र किया जिसके चलते रिटायर हुए जज ट्रिब्यूनल या शिकायत निवारण में भूमिका निभाने से हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी पद पर जुड़ने को लेकर उनके कार्यों, उनके कार्यकाल के दौरान सुनाए गए फैसलों से जोड़कर देखा जा सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इस तरह की चर्चा ही कई जजों को रिटायरमेंट के बाद की भूमिकाओं को स्वीकार करने से रोकती है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर इन भूमिकाओं में सबसे ईमानदार और विशेषज्ञ जज नहीं होंगे, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था के विकास और बदलाव पर पड़ेगा। इसे एक गंभीर चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इन ट्रिब्यूनल का कामकाज उन विवादों को निपटाने के लिए जरूरी है जो लगातार जटिल होते जा रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि मीडिया को इस बात पर पुनर्विचार करना चाहिए कि वह रिटायर हुए जजों द्वारा इन भूमिकाओं को स्वीकार करने को कैसे दिखाता है। हमें इन पदों पर पूर्व जजों की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद हो।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि संसद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के रिटायर हुए जजों के लिए ऐसी भूमिकाएं बनाने के फैसले के अधिकार के कारण उस जज पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए जो यह भूमिका निभा रहा है। हमेशा एक CJI या जज के रूप में देखे जाने पर विश्वास व्यक्त करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए। समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने अबतक संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए।जस्टिस चंद्रचूड़ के जवाब से यह स्पष्ट है कि अगर वह रिटायरमेंट के बाद ऐसी कोई भूमिका निभाते हैं, तो उस पद पर उनके कार्य उनकी CJI के रूप में की गयी सेवा को दर्शाएंगे।

 

‘गदर 2 हिट कराने के लिए हमने टिकट नहीं खरीदे’:डायरेक्टर अनिल शर्मा बोले- गदर-3 जल्द आएगी, अभी टाइम ‘वनवास’ का है

गदर-2 फिल्म के डायरेक्टर अनिल शर्मा शुक्रवार को जयपुर में थे। उन्होंने कहा कि गदर-2 एक ऑरिजनल हिट थी। इसे आम दर्शकों ने हिट करवाया था। न ही बल्क में टिकट खरीदे गए और न ही कॉरपोरेट बुकिंग हुई। सनी देओल बहुत कुछ डिजर्व करते हैं। गदर-2 के बाद उन्हें वह मिल भी रहा है। इसको लेकर मैं बहुत खुश हूं। उन्होंने अपने बेटे उत्कर्ष के लिए कहा- वह एक प्रोफेशनल एक्टर हैं। उसने लॉकडाउन में मुझे सत्यजीत रे का सिनेमा दिखाया। वह बहुत हार्ड वर्किंग एक्टर है। दैनिक भास्कर से अनिल शर्मा की खास बातचीत… सवाल: वनवास फिल्म के बारे में बताएं किस तरह की फिल्म है और किस तरह का एक्सपीरियंस देने वाली है? अनिल शर्मा: वनवास एक पारिवारिक फिल्म है। गदर-2 के बाद मुझे सभी ने कहा कि आपको एक बड़ी एक्शन फिल्म बननी चाहिए, वनवास क्यों बना रहे हैं? यहां तक की नाना पाटेकर साहब ने भी यही कहा था। तब मैंने कहा था कि आज परिवार बहुत न्यूक्लियर हो गए हैं। हर बुजुर्ग व्यक्ति अपने घर में वनवासी है। वह अकेला बैठा रहता है। आप भी घर में जब एंट्री लेते हैं तो बाबूजी से हाल-चाल पूछ कर दो ही मिनट में बाहर चले जाते हैं। इसलिए यह एहसास करना की परिवार हमारी जिंदगी का एक अंग है। सवाल: रामजी का वनवास तो 14 साल का था, यह वनवास कितने समय का और क्या खास इसमें नजर आएगा? अनिल शर्मा: देखिए वह त्रेता युग का वनवास था। उसमें पुत्र अपने पिता की वचन के लिए वनवास चला जाता है। आजकल तो पुत्र पिता को वनवास दे रहे हैं। यह कलयुग है, इसमें युगों का फर्क है। परिवार नहीं तो कुछ भी नहीं है। इसलिए मैंने यह पारिवारिक फिल्म बनाई। जब फिल्म खत्म होगी तो आप सीट पर बैठे रह जाएंगे।जब बाहर निकलेंगे तो सबसे पहले अपने पिता को फोन करेंगे। सवाल: इस फिल्म में लीड आपके बेटे उत्कर्ष शर्मा हैं, एक बाप-बेटे की जोड़ी जो सेट पर आकर एक्टर-डायरेक्टर की जोड़ी में बदल जाती है, उसे कैसे देखते हैं? अनिल शर्मा: एक्टर के तौर पर उत्कर्ष सामने होता है तो हम बतौर डायरेक्टर काम करते हैं। ऐसे में जो डायरेक्टर एक्टर का रिश्ता होता है। वह बहुत प्रोफेशनल होता है। उत्कर्ष एक प्रोफेशनल एक्टर है। जो अमेरिका से पढ़कर और ट्रेनिंग लेकर आए हैं। मैं भी एक हाइली प्रोफेशनल डायरेक्टर हूं। घर पर तो जैसे पिता-पुत्र में प्यार का रिश्ता होता है वैसे ही हमारा रिश्ता है। लॉकडाउन उसने मुझे सत्यजित रे का सिनेमा दिखाया। जब मैं करियर के शुरुआती दिन में था, तब मैंने यह सिनेमा देखा था। उस समय बंगाली तो आती नहीं थी। उसने मुझे अब सारा सिनेमा दिखाया। सवाल: आपने नाना पाटेकर को किस तरह मनाया, वह अब बॉलीवुड से थोड़ी दूर रहते हैं? अनिल शर्मा: नाना सर थोड़े से वनवासी टाइप व्यक्ति हैं। जब तक उनको स्क्रिप्ट सही नहीं मिलती। वह काम नहीं करते हैं। जब मैं नाना सर के पास यह सब्जेक्ट लेकर गया तो उन्होंने कुछ देर में हां कर दिया था।। उन्होंने बहुत मेहनत की। नाना सर का इस फिल्म में अपने किरदार को लेकर बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है। लोगों ने नाना पाटेकर को मीम्स में ज्यादा देखा है। थोड़े बहुत उनके डायलॉग में देखा है। नाना पाटेकर की परफॉर्मेंस का लेवल लोगों ने आज तक देखा नहीं देखा है। आज की ऑडियंस देखेगी कि नाना पाटेकर इतने बड़े एक्टर क्यो है? सवाल: गदर 2 की रिलीज के बाद कहा जा रहा था कि अनिल शर्मा, सन्नी देओल की आंखों में भी आंसू थे। उसके बारे में आप बताएं ? अनिल शर्मा: हां यह सही है। जब एग्जाम में ईश्वर आपको टॉप कर देता है तो आपकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह खुशी के आंसू होते हैं। यह बिल्कुल सही बात है कि रिलीज वाले 11 अगस्त के दिन जब पहली बार सुबह 7:30 वह रिव्यू देख रहे थे तो सनी सर को मैंने कॉल किया। मेरे साथ मेरी वाइफ भी थी। उस कॉल के दौरान हमारे तीनों के आंखों में आंसू थे। सनी सर ने मुझे कहा- यह कमाल हो गया है। सवाल: आपने गदर की सक्सेस के बाद कहा सन्नी से कहा था- कि आप एक फिल्म के 50 करोड़ रुपए लेने वाले एक्टर हैं, आज वह सिद्ध भी किया है? अनिल शर्मा: सनी सर बहुत डिजर्व करते हैं। बिजनेस कम्युनिटी है, कुछ स्टूडियो देखते हैं कि आपकी पिछली फिल्मों ने कितना बिजनेस किया। उस हिसाब से आपको पेमेंट मिलता है। स्टूडियो भी अपनी जगह राइट है। अगर आप 2 रुपए ही कमा रहे हैं। आपको उतना ही मिलेगा और आप 100 रुपए कमा रहे हैं तो आपको इतना मिलेगा। यह सही है कि गदर 2 के बाद सनी सर जो डिजर्व करते हैं, वह उनको हासिल हुआ है। मैं उनको लेकर बहुत खुश हूं। सवाल: गदर और गदर-2 फिल्मों के अनुभव कैसे रहे? अनिल शर्मा: दोनों फिल्मों का एक जैसा माहौल मैने देखा है। गदर 2 एक ओरिजिनल हिट रही है। इसे हिट करवाने के लिए न ही हमने बल्क में टिकट खरीदी, न कॉर्पोरेट बुकिंग हुई। आम दर्शक फिल्म को देखने पहुंचे थे। हमारी टिकट रेट भी 200 से 250 रुपए रखी गई थी। अगर हमने 500 से 600 रुपए टिकट किया होता। हमारी फिल्म 700 करोड़ नहीं कमाती। हमारी फिल्म हजार करोड़ से ऊपर कमाती। सवाल: हर कोई अब गदर 3 की बात कर रहा है, तो कहां से शुरुआत होने वाली है और कब यह दर्शकों के बीच आएगी? अनिल शर्मा: अभी तो हम वनवास फिल्म की बात कर रहे हैं। इसके बाद हम गदर 3 की तैयारी में जुड़ जाएंगे। उसकी कहानी पर काम चल रहा है। तारा और जीते की कहानी को हम आगे जरूर बढ़ाएंगे। बॉलीवुड से जुडृी ये खबर भी पढ़िए… एक्टर विक्रांत मैसी बोले- मुझे धमकियां मिल रहीं:फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ करने पर पत्नी ने कहा था तुम पागल हो, परिवार-दोस्त बोले गालियां पड़ेंगी ​​​​​​​एक्टर विक्रांत मैसी अपनी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ के प्रमोशन के लिए जयपुर आए। इस दौरान उन्होंने फिल्म से जुड़े अनुभवों से लेकर अपने फिल्मी करियर पर बात की। उन्होंने कहा- जब यह फिल्म उन्हें ऑफर हुई थी, घरवालों और दोस्तों ने इसे करने से मना कर दिया था।​​​​​​​ पूरी खबर पढृिए…