Home Blog Page 578

क्या समुद्र में बढ़ने वाली है भारत की ताकत?

0

आने वाले समय में समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने वाली है! समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने जा रही है। भारतीय नौसेना को जल्द ही आईएनएस तुशील के रूप में अपना नया साथी मिलने जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लंबी देरी के बाद भारत को इस महीने के अंत तक रूस में निर्मित दो गाइडेड मिसाइल युद्धपोतों में से पहला प्राप्त होने वाला है। इन दो गाइडेड मिसाइल के मिलने से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी। इससे निश्चित रूप से चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ जाएगी। लगभग 4,000 टन वजनी वाला मल्टी रोल वाला फ्रिगेट पिछले कुछ महीनों से कलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में तैनात 200 से अधिक अधिकारियों और नाविकों के भारतीय दल को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद युद्धपोत को आईएनएस तुशील के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से नेवी में कमीशन किया जाएगा। राजनाथ सिंह भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग सैन्य-तकनीकी सहयोग (आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी) की बैठक के लिए दिसंबर की शुरुआत में रूस का दौरा करने वाले हैं। हालांकि, एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के 2 शेष स्क्वाड्रनों की डिलीवरी 2026 तक देरी होने की संभावना है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी का पट्टा 2028 तक मिलने की संभावना है।

एक सूत्र ने बताया कि दूसरा फ्रिगेट, आईएनएस तमल को अगले साल की शुरुआत में सौंप दिया जाएगा। दोनों स्टील्थ फ्रिगेट में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों सहित हथियार और विभिन्न मिशनों को अंजाम देने के लिए सेंसर लगे होंगे। इसकी लंबाई 124.8 मीटर है। आईएनएस तुषिल की टॉप स्पीड 30 समुद्री मील है। इनकी अधिकतम स्पीड 59 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। यह जंगी जहाज इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है। साथ ही इसकी क्रूजिंग रेंज 4850 मील है। भारत ने अक्टूबर 2018 में चार ग्रिगोरोविच श्रेणी के फ्रिगेट की खरीद के लिए एक अम्ब्रेला समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें से पहले दो को रूस से लगभग 8,000 करोड़ रुपये में आयात किया जाना था।

अन्य दो का निर्माण गोवा शिपयार्ड (जीएसएल) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ लगभग 13,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से किया जा रहा है। इसमें से पहला इस साल जुलाई में त्रिपुत के रूप में ‘लॉन्च’ किया गया है। ये चार युद्धपोत छह ऐसे रूसी फ्रिगेट में शामिल हो जाएंगे, जिनमें तीन तलवार श्रेणी के और तीन टेग श्रेणी के युद्धपोत हैं, जो 2003-04 से नौसेना में पहले से ही शामिल हैं।

पानी के अंदर की बात करें तो भारत ने पहले रूस से लीज पर लेकर दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियों INS चक्र-1 और INS चक्र-2 (जिन्हें SSN कहा जाता है) का संचालन किया है। इनमें पारंपरिक हथियार (जिन्हें SSN कहा जाता है) शामिल हैं। मार्च 2019 में, भारत ने रूस के साथ 10 साल के लिए एक अधिक एडवांस SSN को लीज पर लेने के लिए 3 अरब डॉलर (21,000 करोड़ रुपये) से ज़्यादा का सौदा किया था। हालांकि, इसकी डिलीवरी भी 2027 से आगे टल गई है। सूत्र ने कहा कि रूस से SSN को पहले डिलीवर करने के लिए कहा गया है, लेकिन 2028 से पहले इसकी डिलीवरी संभव नहीं है।

एक अन्य सूत्र ने कहा कि रूस के साथ किए गए 5.43 बिलियन डॉलर (40,000 करोड़ रुपये) के कॉन्ट्रैक्ट के तहत, एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के चौथे और पांचवें स्क्वाड्रन की डिलीवरी 2026 तक ही होगी। एक अन्य सूत्र ने कहा कि भारत ने रूस से जल्द डिलीवरी के लिए कहा है लेकिन यह मुश्किल लग रहा है। इसकी वजह है कि रूस का पूरा डिफेंस टेक्नोलॉजी प्रोडक्श यूक्रेन युद्ध में जुटा हुआ है। भारतीय वायुसेना ने पहले तीन एस-400 स्क्वाड्रनों को तैनात किया है, जो 380 किलोमीटर की दूरी पर शत्रुतापूर्ण रणनीतिक बमवर्षकों, जेट विमानों, जासूसी विमानों, मिसाइलों और ड्रोनों का पता लगा सकते हैं। साथ ही उन्हें नष्ट कर सकते हैं। ये स्क्वाड्रन चीन और पाकिस्तान दोनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में तैनात किए गए हैं।

संयोगवश, प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 9 अक्टूबर को 40,000 करोड़ रुपये की लागत से दो एसएसएन बनाने की स्वदेशी परियोजना को मंजूरी दे दी। हालांकि, इन्हें चालू होने में कम से कम एक दशक लगेगा। भारत ने परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइलों (जिन्हें एसएसबीएन कहा जाता है) के साथ अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी को अगस्त में आईएनएस अरिघात के रूप में नौसेना में शामिल किया था। अगले साल की शुरुआत में आईएनएस अरिधमन के रूप में तीसरी पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने की योजना है, जो सामरिक प्रतिरोध के लिए एक बड़ा बढ़ावा होगा।

 

भूषण कुमार ने किया बड़ा खुलासा:अजय देवगन और रोहित शेट्टी पर लगाया गंभीर आरोप, बोले- ‘भुल भूलैया-3 के साथ नाइंसाफी हुई’

कार्तिक आर्यन की भूल भुलैया 3 का क्लेश अजय देवगन की सिंघम अगेन से हुआ था। यह फिल्म दिवाली के मौके पर 1 नवंबर को रिलीज हुई थी। अब हाल ही में टी-सीरीज़ के मालिक भूषण कुमार ने एक इंटरव्यू में अजय देवगन और रोहित शेट्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सिंघम अगेन की टीम को अनफेयर बताया। कनेक्ट सिने के साथ हाल ही में बातचीत में भूषण कुमार ने खुलासा करते हुए बताया, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘सिंघम अगेन’ की रिलीज से पहले स्क्रीन बराबर बांटने को लेकर मेरी सिंघम अगेन की टीम से बहस हुई थी। मेरा मानना था कि ये दोनों ही फिल्में बड़ी हैं, इसलिए दोनों को बराबर स्क्रीन मिलनी चाहिए। मैं इस मामले में निष्पक्षता चाहता था, लेकिन कुछ पर्सनल इंटरेस्ट्स के चलते ऐसा नहीं हो पाया। इसे लेकर सिंघम अगेन की टीम ने अनफेयर किया। हालांकि, मैं थिएटर चेन को दोष नहीं देना चाहता, क्योंकि वे दूसरी फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर थे और उनके कुछ मुद्दे थे। इसके बाद भी उन्होंने हमें सपोर्ट किया। भूषण कुमार ने कहा, ‘मैंने एडवांस बुकिंग शुरू करने का सुझाव दिया था, ताकि फिल्म का रिस्पॉन्स देखा जा सके। भूल भुलैया 3 ने बड़ी फिल्म के बावजूद 36 करोड़ रुपये से ज्यादा की ओपनिंग की। वैसे तो दोनों ही फिल्मों ने अच्छी कमाई की।’ फिल्मों के क्लेश को लेकर भूषण कुमार ने कहा कि दोनों ही टीमें क्लैश को टालने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन किसी भी फिल्म के लिए अपनी रिलीज डेट बदलना संभव नहीं था। उन्होंने अजय देवगन और रोहित शेट्टी को बताया कि उन्होंने भूल भुलैया 3 पहले अनाउंस की थी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के साथ उनकी कुछ डील्स थीं, इसलिए वह फिल्म को आगे नहीं कर सकते थे। सिंघम अगेन की टीम ने यह समझा, लेकिन उनकी भी अपनी वजह थी क्योंकि उनकी फिल्म का थीम रामायण से जुड़ा हुआ था, और वे दीवाली पर रिलीज करना मिस नहीं कर सकते थे। सिंघम अगेन के टाइटल ट्रैक पर टी-सीरीज ने लगाया था स्ट्राइक
जब यूट्यूब पर सिंघम अगेन का टाइटल ट्रैक रिलीज किया गया था, तो कुछ ही देर बाद टी-सीरीज ने उस वीडियो पर कॉपीराइट स्ट्राइक जारी कर दी थी। टी-सीरीज का दावा था कि टाइटल ट्रैक में 2011 की मूल सिंघम फिल्म की थीम के कुछ तत्व शामिल हैं, जिनके राइट्स उनके पास हैं। इसके बाद डायरेक्टर रोहित शेट्टी को सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से टाइटल ट्रैक को हटाना पड़ा था। गाने की फिर से एडिटिंग करनी पड़ी और इसे फिर से दोबारा यूट्यूब पर अपलोड करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिंघम अगेन के टाइटल ट्रैक में सिंघम फिल्म की थीम के 10 सेकंड से ज्यादा तत्व शामिल थे, जबकि कॉपीराइट पॉलिसी के अनुसार किसी भी गाने में तीन सेकंड से ज्यादा का तत्व शामिल करने के बाद उस पर कॉपीराइट का दावा किया जा सकता है।

दिल्ली में हवा बेहद जहरीली, सरकारी ऑफिस की टाइमिंग बदली:106 ज्यादा बसें चलेंगी, मेट्रो के 60 और फेरे बढ़ेंगे; स्कूलों में मास्क अनिवार्य

दिल्ली में शुक्रवार को भी प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। हालांकि, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से नीचे आ गया है। शुकवार की शाम 7 बजे AQI घटकर 386 हो गया, जो शाम 4 बजे 396 पर था। प्रदूषण को देखते हुए मुख्यमंत्री आतिशी ने सरकारी दफ्तरों के लिए नए समय की घोषणा की। केंद्र सरकार के दफ्तर सुबह 9 से शाम 5:30, दिल्ली सरकार के दफ्तर 10 से शाम 6:30 और MCD के दफ्तर 8:30 से शाम 5 बजे तक चलेंगे। दिल्ली की सभी प्राइमरी (5वीं क्लास तक) स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। बच्चे ऑनलाइन क्लास में पढ़ेंगे। इसके अलावा सभी कक्षाओं के बच्चों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने लोगों से निजी वाहन न चलाने की अपील की है। साथ ही 106 अतिरिक्त क्लस्टर बसें चलाने का फैसला किया है। मेट्रो के भी 60 और फेरे बढ़ा दिए गए हैं। सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-III) के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि प्रदूषण को रोका जा सके। इसका पालन न करने पर 20,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। एयर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने NCR यानी हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आने वाली बसों के दिल्ली आने रोक लगा दी है। दिल्ली में प्रदूषण और धुंध की 6 तस्वीरें इस बीच, अमेरिकी साइंटिस्ट हीरेन जेठवा ने 14 नवंबर को दिल्ली की सैटेलाइट इमेज शेयर की हैं। इसमें दिल्ली में घना स्मॉग दिखाई दे रहा है। हीरेन अमेरिका की मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी में एरोसोल रिमोट सेंसिंग साइंटिस्ट हैं। हीरेन की फोटोज NASA ने भी शेयर की हैं। दिल्ली-NCR में तोड़फोड़ पर रोक, डीजल गाड़ियों पर पाबंदी आगे क्या: UP, पंजाब, हिमाचल में रहेगा बहुत घना कोहरा
पंजाब-चंडीगढ़ में धुंध का अलर्ट जारी किया है। राजस्थान में दो दिन घने कोहरे का अलर्ट है। UP और पंजाब में 15 नवंबर तक, हिमाचल में 18 नवंबर तक रात और सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाएगा। हरियाणा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड में 16 नवंबर तक धुंध छाने का अनुमान है। दिल्ली में प्रदूषण से निपटने ग्रेडेड एक्शन प्लान लागू
राजधानी में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए प्रदूषण के स्तर को 4 कैटेगरी में बांटकर देखा गया है। हर स्तर के लिए लिए पैमाने और उपाय तय हैं। इसे ग्रेडेड एक्शन प्लान यानी GRAP कहते हैं। इसकी 4 कैटेगरी के तहत सरकार पाबंदियां लगाती है और प्रदूषण कम करने के उपाय जारी करती है। दिल्ली सरकार ने कहा था- प्रतिबंध नहीं लगाएंगे
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने गुरुवार सुबह ही कहा था, ‘GRAP-3 के प्रतिबंध लागू नहीं किए जाएंगे।’ इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आतिशी सरकार की निष्क्रियता के कारण प्रदूषण की स्थिति दिल्ली के आसपास के इलाकों से भी बदतर हो गई है। राजपथ जैसे इलाकों में भी AQI 450 से ज्यादा है। उन्होंने कहा- दिल्ली के लोग चाहते हैं कि गोपाल राय अपना पद छोड़ दें। इस पर गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली की खराब एयर क्वालिटी में 35% योगदान भाजपा शासित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के NCR में आने वाले जिलों का है। दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था
दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (BS -III पेट्रोल और BS-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेन्टेनेन्स एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रिपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है। ​​​​​​AQI क्या है और इसका हाई लेवल खतरा क्यों
AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) , PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है। हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है। क्या होता है PM, कैसे नापा जाता है
PM का अर्थ होता है पर्टिकुलेट मैटर। हवा में जो बेहद छोटे कण यानी पर्टिकुलेट मैटर की पहचान उनके आकार से होती है। 2.5 उसी पर्टिकुलेट मैटर का साइज है, जिसे माइक्रोन में मापा जाता है। इसका मुख्य कारण धुआं है, जहां भी कुछ जलाया जा रहा है तो समझ लीजिए कि वहां से PM2.5 का प्रोडक्शन हो रहा है। इंसान के सिर के बाल की अगले सिरे की साइज 50 से 60 माइक्रोन के बीच होता है। ये उससे भी छोटे 2.5 के होते हैं। मतलब साफ है कि इन्हें खुली आंखों से भी नहीं देखा जा सकता। एयर क्वालिटी अच्छी है या नहीं, ये मापने के लिए PM2.5 और PM10 का लेवल देखा जाता है। हवा में PM2.5 की संख्या 60 और PM10 की संख्या 100 से कम है, मतलब एयर क्वालिटी ठीक है। गैसोलीन, ऑयल, डीजल और लकड़ी जलाने से सबसे ज्यादा PM2.5 पैदा होते हैं। मौसम से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… दावा- दिल्ली में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित NDTV के मुताबिक, प्राइवेट एजेंसी लोकल सर्कल के सर्वे में दावा किया गया कि दिल्ली-NCR में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित हैं। 1 नवंबर को जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली-NCR में 62% परिवारों में से कम से कम 1 सदस्य की आंखों में जलन है। 46% फैमिली में किसी न किसी मेंबर को जुकाम या सांस लेने में तकलीफ (नेजल कंजेशन) और 31% परिवार में एक सदस्य अस्थमा की परेशानी है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब-चंडीगढ़ में धुंध का अलर्ट, बारिश की संभावना:तापमान में गिरावट जारी; चंडीगढ़ में 400 पहुंचा AQI पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद से ही चंडीगढ़ और पंजाब के तापमान में बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकतम के साथ-साथ दिन के न्यूनतम तापमान में भी अब गिरावट देखने को मिल रही है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर पैदा हुए साइक्लोन का असर पंजाब पर भी पड़ रहा है। पूरा पंजाब व चंडीगढ़ धुंध की चपेट में है। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान में दो दिन घने कोहरे का अलर्ट:17 नवंबर से सर्दी तेज होने के आसार; माउंट आबू में पारा 10 डिग्री से नीचे उत्तर भारत में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण राजस्थान में सर्दी बढ़ गई है। श्रीगंगानगर में लगातार दूसरे दिन शुक्रवार सुबह घना कोहरा रहा। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और चूरू में दो दिन घने कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, 17 नवंबर के बाद से राजस्थान में सर्दी तेज होने की संभावना जताई है। पूरी खबर पढ़ें… हवाओं के रुख से बढ़ी एमपी में सर्दी:पचमढ़ी में टेम्प्रेचर 8.8° पहुंचा; भोपाल, इंदौर-जबलपुर में भी पारा लुढ़का हवाओं के रुख ने मध्यप्रदेश में सर्दी बढ़ा दी है। पचमढ़ी में रात का टेम्प्रेचर 8.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर-उज्जैन समेत प्रदेश के कई शहरों में पारा लुढ़क गया है। अमरकंटक, मंडला और शहडोल में भी तापमान 11 डिग्री के आसपास आ गया है। पूरी खबर पढ़ें… छत्तीसगढ़ में अगले चार दिन मौसम ड्राई:सरगुजा संभाग में गिरने लगा तापमान, 12 डिग्री के साथ अंबिकापुर सबसे ठंडा छत्तीसगढ़ में अगले तीन से चार दिन मौसम ड्राई रहेगा। कल से रात के तापमान में हल्की गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। गुरुवार को सबसे ठंडा अंबिकापुर रहा, यहां न्यूनतम तापमान 12.4 डिग्री रहा। सुकमा सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। पूरी खबर पढ़ें…

अनबन की खबरों के बीच अल्लू अर्जुन का वीडियो वायरल:चाचा पवन कल्याण की तारीफ करते नजर आए; आंध्र प्रदेश चुनाव के दौरान थीं मनमुटाव की खबरें

पिछले कुछ समय से साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और उनके चाचा पवन कल्याण के बीच मनमुटाव की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच एक्टर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने चाचा पवन कल्याण की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, अनस्टॉपेबल विद एनबीके सीजन 4 के एक एपिसोड में अल्लू अर्जुन पहुंचे थे। इस दौरान अल्लू अर्जुन को स्क्रीन पर उनके चाचा पवन कल्याण की तस्वीर दिखाई गई। इसपर अल्लू अर्जुन ने कहा, ‘रेस्पेक्ट कल्याण गौड़ा। मुझे उनकी हिम्मत पसंद है। जब मैं उन्हें लाइव देखता हूं, तो मुझे उनकी बहादुरी बहुत पसंद आती है। वे सबसे साहसी व्यक्ति हैं।’ जानें पूरा मामला?
2024 के आंध्र प्रदेश चुनाव के बाद से अल्लू अर्जुन और उनके चाचा पवन कल्याण के बीच रिश्तों में तनाव की अफवाहें हैं। पवन कल्याण, जो इस समय आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम हैं, ने विधानसभा चुनाव में सिल्पा रवि चंद्र किशोर रेड्डी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वहीं, चुनाव से पहले अल्लू अर्जुन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विधायक सिल्पा रवि चंद्र किशोर रेड्डी के समर्थन में नंद्याल गए थे। इसके बाद से ही खबरें थीं कि पवन कल्याण और अल्लू अर्जुन के बीच पारिवारिक रिश्ते ठीक नहीं हैं। पुष्पा-2 के मेकर्स बोले- दोनों के परिवार में सब ठीक है
हाल ही में हैदराबाद में एक प्रेस मीट में फिल्म पुष्पा 2 के प्रोड्यूसर नवीन यरनेनी और यालमंचीली रविशंकर शामिल हुए थे। इसी दौरान दोनों से पूछा गया कि जब परिवार के फैंस आपस में बंट गए हैं तो क्या फिल्म अच्छी कमाई कर पाएगी? इस पर प्रोड्यूसर्स ने कहा, ‘चुनाव के दौरान छोटी-मोटी घटनाएं हुई होंगी। लेकिन राजनीति के अलावा मुझे यकीन है कि उन सभी के फैंस फिल्म देखना चाहेंगे। अर्जुन और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच कोई दरार नहीं है। अल्लू किसी पार्टी का सपोर्ट नहीं करते हैं।’ 5 दिसंबर को रिलीज होगी पुष्पा-2
पटना के गांधी मैदान में 17 नवंबर को फिल्म ‘पुष्पा-2’ का ट्रेलर लॉन्च किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भव्य तैयारी की गई है। साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन खुद फिल्म का ट्रेलर लॉन्च करेंगे। उनके साथ फिल्म की हीरोइन रश्मिका मंदाना भी बिहार आएंगी। ‘पुष्पा: द राइज’ ने बिहार में अच्छी कमाई की थी। श्रीवल्ली गाने ने काफी सुर्खियां बटोरी थी। जिसके बाद निर्माताओं ने ‘पुष्पा 2’ के ट्रेलर को बिहार में लॉन्च करने का निर्णय लिया है।

एक्टर ठाकुर अनूप सिंह बने ‘छत्रपति संभाजी महाराज’:बोले- इस किरदार को निभाना सपने जैसा, अब विक्की कौशल के वर्जन को लेकर उत्साहित हूं

एक्टर ठाकुर अनूप सिंह ने मराठी-हिंदी फिल्म ‘धर्मरक्षक महावीर छत्रपति संभाजी महाराज’ में छत्रपति संभाजी महाराज का किरदार निभाया है। उनके लिए यह फिल्म सिर्फ एक रोल नहीं, बल्कि एक सपने जैसा है। अनूप ने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में इस किरदार और उससे जुड़ी चुनौतियों पर बात की। इसके साथ ही, विक्की कौशल भी जल्द ही बड़े परदे पर छत्रपति संभाजी महाराज का किरदार निभाते नजर आएंगे। उनकी फिल्म ‘छावा’ अगले साल रिलीज होगी। विक्की के संभाजी महाराज के वर्जन को देखने के लिए एक्साइटेड हूं अनूप कहते हैं, ‘मैंने विक्की का काम देखा है। ‘उरी’ और ‘सैम बहादुर’ में उनका काम बहुत अच्छा था। मैं उन्हें बेहतरीन एक्टर मानता हूं। छत्रपति संभाजी महाराज जैसा किरदार किसी एक्टर को जीवन में एक बार ही मिलता है। विक्की भी भाग्यशाली हैं और मैं भी खुद को भाग्यशाली मानता हूं। इस पर और फिल्में बननी चाहिए, ताकि इस किरदार को और पहचाना जा सके।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह जरूरी है कि इसे शिक्षा के मकसद से इस्तेमाल किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी इतिहास जान सके। अफसोस है कि मेरे बचपन में इतिहास की किताबों में छत्रपति संभाजी महाराज का कोई चैप्टर नहीं था। इस फिल्म की शूटिंग करते वक्त मुझे एहसास हुआ कि इस किरदार के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया। ऐसे किरदारों पर और फिल्में बननी चाहिए, और मैं विक्की के संभाजी महाराज के वर्जन को देखने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं।’ किरदार को निभाने का मौका मिलना था सौभाग्य अनूप बताते हैं कि जब यह फिल्म उनके पास आई, तो उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। छत्रपति शिवाजी और संभाजी महाराज मेरे आदर्श रहे हैं। उनका साहस और संघर्ष हमेशा मुझे प्रेरित करता रहा है। जब मुझे यह किरदार निभाने का मौका मिला, तो यह सिर्फ एक रोल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी थी। यह रोल उनके आदर्शों को समझकर लोगों तक पहुंचाने के लिए था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे किरदार बहुत कम मिलते हैं। जब ऐसा मौका मिले, तो उसे पूरी मेहनत और दिल से निभाना चाहिए। इस किरदार ने मुझे एक्टिंग ही नहीं, बल्कि जिंदगी के कई पहलुओं में भी सिखाया है। मैंने इसे पूरी तरह से समझने की कोशिश की।’ मराठी भाषा और इतिहास को समझने में मिली कठिनाई इस किरदार को निभाने के लिए अनूप को मराठी भाषा और उस समय के इतिहास को समझने में काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कहा, ‘फिल्म में उस वक्त की मराठी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जो आजकल से बहुत अलग थी। उसे सही से बोलना और समझना चैलेंजिंग था। मैंने पहले ‘महाभारत’ जैसे प्रोजेक्ट्स किए थे, लेकिन इस किरदार के लिए मुझे और भी मेहनत करनी पड़ी। कई बार रात को डायरेक्टर से सवाल पूछता था कि महाराज ने यह बात क्यों कही और उसका सही मतलब क्या था?’ शारीरिक तैयारी और शूटिंग की चुनौतियां इस ऐतिहासिक किरदार को निभाने के लिए सिर्फ डायलॉग ही नहीं, बल्कि फिजिकल तरीके से भी तैयार होना जरूरी था। उन्होंने कहा, ‘मैं पहले से फिट था, लेकिन इस फिल्म ने मेरी शारीरिक सहनशक्ति को एक नई चुनौती दी। हमें भारी आर्मर पहनकर धूप में 8-10 घंटे तक शूटिंग करनी पड़ती थी। कई बार तो मुझे याद नहीं रहता था कि मैंने खाना खाया है या नहीं। शूटिंग खत्म होने के बाद, शरीर कांपने लगता था। ऐसे में गर्म पानी और नमक का सहारा लेना पड़ता था। यह एक्सपीरियंस काफी थका देने वाला था। लेकिन इसने मुझे अपने किरदार के और करीब ला दिया।’ इतिहास से जुड़ने का अनुभव फिल्म की शूटिंग महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों, जैसे सातारा और विजयदुर्ग में की गई। अनूप ने कहा, ‘इन जगहों पर काम करना बहुत खास था। यहां की हवा, मिट्टी और माहौल ने हमें इतिहास को महसूस करने का मौका दिया। जब आप उस जगह पर शूट करते हैं, जो आपके किरदार की कहानी का हिस्सा रही हो, तो आपका एक्टिंग खुद-ब-खुद बेहतर हो जाता है। यह एक्सपीरियंस जिंदगी भर याद रहेगा।’ यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि … अनूप को उम्मीद है कि फिल्म ऑडियंस को जरूर पसंद आएगी। ‘यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक एक्सपीरियंस है, जिसे ऑडियंस हर फ्रेम में महसूस करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि यह फिल्म हर पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक साबित होगी।’

भास्कर अपडेट्स:रिपोर्ट में दावा- 2022 में दुनिया में सबसे ज्यादा डायबिटीज के मरीज भारत में थे

एनसीडी रिस्क फैक्टर कॉलैबरेशन और डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में दुनियाभर के डायबिटीज के 82.8 करोड़ मरीजों में एक चौथाई से ज्यादा मरीज भारत में थे। द लैंसेट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में भारत में करीब 21.2 करोड़ लोगों को डायबिटीज था। इनमें से करीब 13.3 करोड़ मरीज कोई इलाज नहीं ले रहे थे। आज की अन्य बड़ी खबरें… राजस्थान और गुजरात में भूकंप के झटके, 4.2 की रही तीव्रता गुजरात और राजस्थान में शुक्रवार रात करीब 10.15 मिनट पर भूकंप के झटके लगे। गुजरात के मेहसाना में इसकी तीव्रता 4.2 रही। भूकंप जमीन के 10 किमी अंदर आया। इसका असर राजस्थान तक रहा। जोधपुर में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए।

शीला भट्ट का कॉलम:महाराष्ट्र में ऐसे कोई मुद्दे नहीं हैं, जो सभी वोटरों को खींच सकें

महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए चुनाव प्रचार आक्रामक लेकिन भ्रमित करने वाला रहा है। ऐसा कोई भावनात्मक मुद्दा नहीं है, जिस पर लोग वोट दें या जिसका विरोध जताएं। चुनावों में हमेशा ही ऐसा कोई मुद्दा बनाना मुश्किल रहता है, जिसकी गूंज पूरे राज्य में समान रूप से सुनाई दे। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में तो ऐसा और मुश्किल है, क्योंकि पश्चिम में मुम्बई और पूर्व में गोंदिया के बीच की दूरी लगभग 1000 किमी है। इसीलिए विदर्भ के भूमि से घिरे क्षेत्र में सोयाबीन और कपास की कीमतें किसानों के लिए गम्भीर मुद्दे हैं, कोंकण के समुद्र तटवर्ती क्षेत्र में युवाओं में बेरोजगारी की उच्च दर और उत्तर भारतीय श्रमिकों की आमद अहम मुद्दे हैं। मराठवाड़ा में मराठों के लिए आरक्षण का संवेदनशील मुद्दा हावी है। मुम्बई में स्थानीय मराठी मतदाताओं को लगता है कि महाराष्ट्र की अनदेखी करके गुजरात को आकर्षक परियोजनाएं दी जा रही हैं। हालांकि विकास से जुड़ा यह मुद्दा तेजी से नहीं उठ रहा है, क्योंकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना जैसी क्षेत्रीय पार्टियां मुम्बई में गुजराती वोटों का बड़ा हिस्सा खोना नहीं चाहती हैं। कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना के तीन गुट और एनसीपी के दो गुट करीब 9.4 करोड़ मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ जाति आधारित दलों के अलावा प्रकाश आम्बेडकर और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टियां भी मैदान में हैं। कई मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। विश्लेषकों का मानना ​​है कि चुनाव में वोटिंग प्रतिशत अगर कम हुआ तो उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन ज्यादा नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में शरद पवार के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) ने 30 सीटें जीती थीं और भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को मात्र 17 सीटें मिली थीं। 48 सीटों में से कांग्रेस को 13 और भाजपा को मात्र 9 सीटें मिली थीं। लेकिन मतदान-प्रतिशत कुछ और ही कहानी बयां करता है। एमवीए और महायुति गठबंधन को मिले वोटों के बीच का अंतर मात्र दो लाख के आसपास था। अगर लोकसभा के नतीजों पर गौर करें तो एमवीए को स्पष्ट बढ़त हासिल है। लेकिन भाजपा का तर्क है कि विधानसभा चुनाव में मतदाता अलग तरीके से मतदान करते हैं, खासकर महाराष्ट्र में जहां 1990 के दशक से ही बुद्धिमान मतदाता गठबंधन सरकार को वोट देते आए हैं। भाजपा के जोरदार चुनाव-प्रचार से पता चलता है कि लोकसभा में हार का सामना करने के बाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। लाड़की बहन योजना- जिसके तहत राज्य में अब तक करीब 2 करोड़ महिलाओं में से प्रत्येक को 7500 रुपए दिए जा चुके हैं- ने सत्तारूढ़ महायुति के लिए ‘फीलगुड फैक्टर’ पैदा किया है। मराठा-मुस्लिम-दलित मतदाताओं की शक्तिशाली धुरी ने लोकसभा में शानदार प्रदर्शन करने में एमवीए की मदद की थी, इसकी तोड़ निकालने के लिए भाजपा ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा दिया है। जाति जनगणना के लिए राहुल गांधी की अपील का मुकाबला करने के लिए भाजपा ‘एक हैं तो सेफ हैं’ का नारा बुलंद कर रही है। हरियाणा में भाजपा ने गैर-जाट जातियों के बीच चुपचाप काम करके जाट-विरोधी वोट हासिल किए थे। महाराष्ट्र में वह चतुराईपूर्वक ओबीसी वोटों के लिए काम कर रही है, जिनकी सामाजिक-हैसियत परम्परागत रूप से मराठा जाति से दूर रही है। यहां ओबीसी की 330 से अधिक और दलितों की 55 से अधिक उपजातियां हैं। भाजपा उन्हें एकजुट करने की कोशिश कर रही है। महाराष्ट्र का यह विधानसभा चुनाव स्थानीय भावनाओं, मुद्दों और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों की ताकत के आधार पर लड़ा जा रहा है। ज्यादातर जगहों पर किसी पार्टी के बजाय उम्मीदवार महत्वपूर्ण हैं। करीब 70 सीटों पर कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से है। भाजपा की परीक्षा विदर्भ क्षेत्र में है। शरद पवार की परीक्षा मराठवाड़ा क्षेत्र में है। जबकि उद्धव ठाकरे मुम्बई और ठाणे में अपने पूर्व नायब एकनाथ शिंदे से मुकाबला करेंगे। अगर भाजपा महाराष्ट्र में सरकार बनाने में विफल रहती है तो इससे संसद के अंदर और बाहर राहुल गांधी का हौसला बढ़ेगा। कांग्रेस को 102 में से 70 से अधिक सीटें मिलने से राहुल मजबूत होंगे, क्योंकि वैसी स्थिति में ज्यादातर सीटें भाजपा उम्मीदवारों को हराकर आएंगी। लेकिन महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार विपक्ष की राजनीति को कड़ी चोट पहुंचाएगी। वहीं अगर भाजपा हारती है तो पार्टी और सरकार दोनों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इससे उनके सहयोगियों और आलोचकों की बार्गेनिंग पॉवर भी बढ़ेगी। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)

प्रताप भानु मेहता का कॉलम:ट्रम्प को अमेरिकी मतदाताओं ने और मजबूत बना दिया है

अमेरिका के मतदाताओं ने डोनाल्ड ट्रम्प को निर्णायक जनादेश दिया है। आप कह सकते हैं कि ट्रम्प अब न केवल रिपब्लिकन पार्टी, बल्कि अमेरिका के भी कर्ता-धर्ता बन गए हैं। उन्होंने दोनों सदन जीते। रिपब्लिकंस के लिए सबसे व्यापक नस्ली-सामाजिक गठबंधन को अपने पक्ष में किया। उनके साथ एलोन मस्क जैसे प्रमुख व्यवसायी थे। अलबत्ता पैसा खर्च करने के मामले में डेमोक्रेट्स ने उन्हें पीछे छोड़ दिया था। इसलिए यह ऐसी जीत नहीं है, जिसके लिए अमीरों और रसूखदारों के दोहन को जिम्मेदार ठहराया जा सके। तीन ऐसे नैरेटिव थे, जिन्होंने डेमोक्रेट्स को चोट पहुंचाई। बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति विफल होती दिखी थी। दुनिया के सामने आज दो वैश्विक रूप से परस्पर जुड़े युद्ध मुंह बाए खड़े हैं। मध्य-पूर्व में युद्ध तो डेमोक्रेट्स के लिए दोहरा झटका था। गाजा में नरसंहार का समर्थन करने के लिए उनकी मलामत की गई, जिसने उनसे नैतिक रूप से ऊंचे होने का दावा छीन लिया। ट्रम्प ने प्रवासियों के व्यापक डिपोर्टेशन का जो खतरनाक वादा किया था, वह उस भयावह युद्ध को बढ़ावा देने की तुलना में क्या था, जिसमें 40 हजार लोग मारे गए हों? इस युद्ध ने घरेलू स्तर पर भी असंतोष की भावना पैदा की। यह डेमोक्रेट्स की विश्वसनीयता की कमी का संकेत बना। ट्रम्प भले ही लोकतंत्र के लिए खतरा बताए जाते हों, लेकिन यह तर्क चुनावी तौर पर कारगर नहीं हुआ। पहला यह कि इसे सिर्फ यथास्थिति के बचाव के लिए एक बहाने की तरह देखा जाता है, जो कि पुराने कुलीनों का पक्ष लेता हो। दूसरे, इस जोखिम को समकालीन दुनिया में हिटलर नहीं, ओर्बन (हंगरी के प्रधानमंत्री) जैसे लोगों से ज्यादा मापा जाता है। या अगर कोई ऐतिहासिक समानताओं की तलाश कर रहा हो तो बिस्मार्क और नेपोलियन जैसों से, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत शक्ति को मजदूर वर्ग के लोकलुभावन आधार के साथ जोड़ा। लोग यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ट्रम्प का सत्ता में आना ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात लिबरल संस्थानों की विश्वसनीयता है। ट्रम्प झूठे हो सकते हैं, लेकिन मीडिया, शिक्षाविदों, वैज्ञानिक समुदायों जैसी संस्थाएं भी आज दागदार हैं, वे अब सत्य की सेवा नहीं कर रही हैं- यह भावना अब व्यापक हो गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बचाव में भी लिबरल्स कमजोर पड़े हैं। जब ​​युद्ध, कोविड और इतिहास के बारे में बड़े झूठ बोले जा रहे हों तो ट्रम्प के निजी झूठ क्या हैं? यह दुनिया के लोकतंत्रों के लिए एक ऐसा साल रहा है, जिसमें पोलैंड से लेकर यूके और भारत तक की मौजूदा सरकारों ने पहले की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। सरकारें अपने मतदाताओं को यह समझाने के लिए संघर्ष कर रही हैं कि उनके पास ऐसा आर्थिक ढांचा है, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। कागज पर तो मौजूदा डेमोक्रेटिक सरकार को चुनाव में बहुत बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए था, क्योंकि अमेरिका में आज बेरोजगारी और मुद्रास्फीति दोनों ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर हैं। लेकिन मतदाता आर्थिक खुशहाली को कैसे समझते हैं, यह आंकड़ों से नहीं पता चलता। महंगाई की एक छोटी-सी अवधि ने ही अच्छी अर्थव्यवस्था की यादों को धूमिल कर दिया और भविष्य की चिंताओं ने वर्तमान सम्भावनाओं को पीछे छोड़ दिया। अमेरिका एक ऐसे सामाजिक अनुबंध के लिए लामबंद होने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, जो कॉलेज के स्नातकों के साथ ही श्रमिक वर्ग के हितों का भी ख्याल रख सकता हो। ट्रम्प की छठी इंद्री उन्हें बता रही थी कि इस चुनाव में इमिग्रेशन का मुद्दा बहुत बड़ा है और वे सही साबित हुए। उनके इस प्रचार ने जोर पकड़ा कि डेमोक्रेट्स की इमिग्रेशन नीति की कीमत कामकाजी वर्ग के नागरिकों को उठानी पड़ रही थी। उदारवाद के दो गढ़- सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क- लिबरल-कुशासन के पोस्टर बॉय बन गए। मतदान में लैंगिक-अंतर भी दिखा। कमला हैरिस की हार के पीछे अमेरिकी समाज में निहित स्त्री-द्वेष के संकेतों को भी नकारा नहीं जा सकता। गर्भपात उतना महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं निकला, जितनी कि डेमोक्रेट्स को उम्मीद थी। ट्रांसजेंडरों के मुद्दों पर लोग जेंडर और आत्म-निर्णय के नए रूपों को बर्दाश्त करने के लिए तैयार तो दिखते हैं, लेकिन उन्हें एक ऐसी विचारधारा में बदलने की सम्भावना से पीछे हट जाते हैं, जो आम तौर पर समाज के मानदंडों को मौलिक रूप से बदल देती हो। नस्ल और जातीयता भी परिपाटी पर काम नहीं करती हैं। ट्रम्प पहले से मजबूत होकर आए हैं। उनके पास बड़ा जनादेश है। इस बार उनकी तैयारी भी बेहतर हैं। लेकिन उनके राज में सामाजिक ध्रुवीकरण का गहराना जारी रहेगा। दुनिया के और शांतिपूर्ण व स्थिर होने के भी आसार नहीं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

एन. रघुरामन का कॉलम:मानव संसाधन में निवेश का मुकाबला आलीशान इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं कर सकता

शुक्रवार रात 00.01 बजे मैं अपने एक सहकर्मी के साथ 22222 राजधानी ट्रेन में सवार होने के लिए भोपाल स्टेशन पहुंचा। आगे की यात्रा में छह घंटे लगना थे। इस ट्रेन को चुनने का कारण यह था कि हमारे पास कुछ भारी सामान था। चूंकि हम सही जगह पर खड़े थे, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक साइन बोर्ड की सहायता से हम आसानी से उस प्रतिष्ठित ट्रेन के सबसे अपर क्लास के एच1 डिब्बे में चढ़ गए। हमने पहले अन्य यात्रियों को चढ़ने दिया। बाद में मेरे सहकर्मी ने सामान चढ़ाया और मैंने उन्हें अंदर खींच लिया। जैसे ही ट्रेन चली, हम सामान को धीरे-धीरे अंदर ले गए। हम सतर्क थे कि हमारी वजह से किसी भी यात्री को परेशानी न हो, लेकिन एक क्यूबिकल में यात्रा कर रहे कुत्ते को बाहरी व्यक्ति की गंध आ गई और उसने तुरंत जोरदार तरीके से भौंकना शुरू कर दिया। उसके मालिकों ने उसे चुप रहने के लिए कहा होगा और कुत्ता उसके बाद चुप ही रहा। कुछ अन्य यात्रियों के लिए बर्थ के आवंटन को लेकर एक छोटी-सी समस्या थी, लेकिन उनकी मदद के लिए कोई टीसी या कोच-अटेंडेंट नहीं था। यात्रियों ने खुद ही यह मामला सुलझा लिया। हालांकि हमने अपना सामान खुद ही व्यवस्थित किया था और चुपचाप सोने की कोशिश की थी, लेकिन कोच-अटेंडेंट किसी न किसी बहाने से हमारे क्यूबिकल के दरवाजे खटखटाता रहा। उसने हमारे हाथ में पानी की बॉटल देखी तो रेलवे द्वारा बोगी में सभी यात्रियों को दी जाने वाली यह बॉटल भी हमें नहीं दी। कई मायनों में उसने अपनी सेवा से यात्रियों को प्रभावित नहीं किया। उतरते समय भी उसने बर्थ से सामान को गेट तक ले जाने में हमारी मदद नहीं की। लेकिन जब ट्रेन रुकी, तो वह जल्दी से सामान उतारने में हमारी मदद करने आया और इंतजार करने लगा। उसके हाव-भाव से लग रहा था कि वह हमसे “बख्शीश’ मांग रहा था और मैंने पैसे दिए, इसलिए नहीं कि उसने हमारे लिए कुछ किया, बल्कि इसलिए कि मुझे उसके लिए बुरा लगा, उसे गर्व के साथ “बख्शीश’ कमाने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया था। मुझे उस युवा, गोरे-चिट्टे लड़के के लिए वाकई बुरा लगा, क्योंकि वह किसी भी यात्री को केवल एक बड़ी मुस्कान, स्वागतपूर्ण रवैए या उन्हें सुखद यात्रा की शुभकामनाएं देकर या “अगर आपको कुछ चाहिए तो कृपया मुझे फोन करें’ कहकर ही प्रभावित नहीं कर सकता था। दरअसल उस तड़के कोई भी यात्री उसे फोन नहीं करने वाला था। वे अपनी खोई हुई नींद पूरी करना चाहते थे। उसे नहीं पता था कि “मैं हमेशा आपकी मदद के लिए उपलब्ध हूं’ का उचित रवैया उसे हर यात्री से स्वेच्छा से टिप दिलाता। मुझे जर्मनी के कोलोन से फ्रांस के पेरिस तक की अपनी ऐसी ही एक यात्रा याद आ गई, जो मध्यरात्रि 1 बजे शुरू हुई थी और पेरिस में सुबह 5 बजे पूरी हुई थी। ऐसी यात्राओं में कोच कंडक्टर (सीसी) हमारा पासपोर्ट ले लेता है क्योंकि हम कुछ यूरोपीय देशों से गुजरते हैं और हम यूरोपीय नागरिक नहीं हैं। मुझे ठीक से नींद नहीं आई क्योंकि मैंने अपना पासपोर्ट एक अज्ञात व्यक्ति को सौंप दिया था। लेकिन उस सीसी को इस बात की चिंता थी कि मैं ठीक से सो नहीं रहा हूं। उसने मुझे कम से कम दस बार आश्वासन दिया कि मेरे पासपोर्ट को कुछ नहीं होगा और यह एक प्रोटोकॉल है क्योंकि हम दूसरे देशों की सीमाओं को पार कर रहे हैं। उसने मुझे गर्म दूध और कुछ खाने को दिया और मुझे सहज महसूस कराने की कोशिश की। वह ट्रेन भी हमारी राजधानी एक्सप्रेस से कहीं बेहतर थी, हालांकि उसके सीसी का व्यवहार मेरी यादों से कभी नहीं गया। हमारे कुछ बड़े विश्वविद्यालयों, अनब्रांडेड रिजॉर्ट्स का उदाहरण लें। वे भी हमारी राजधानी ट्रेन जैसे ही हैं, जो दिखने में तो शानदार हैं, लेकिन वहां कामकाज सम्भाल रहे लोग, स्टूडेंट्स या गेस्ट्स को एक “वॉव’ वाला अनुभव देने के ​लिए ठीक से प्रशिक्षि​त नहीं होते। यही कारण है कि उन्हें अपना ब्रांड बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। फंडा यह है कि ग्राहकों को यादगार अनुभव प्रदान करने के लिए लोगों के प्रशिक्षण में निवेश करें, बनिस्बत इसके कि उन भवनों में पैसा लगाया जाए, जो समय के सा​थ जर्जर हो जाएंगे।

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:आप खुशी के कई रूप जीवन में उतार सकते हैं

यह कहावत अब पुरानी हो गई है कि दौलत से खुशी नहीं खरीदी जा सकती। लेकिन खुशी को खरीदने की जरूरत क्या है। खुशी को कमाइए। खरीदने और कमाने में फर्क है। अगर आपने दौलत कमाई है, तो आपके पास बहुत सारे विकल्प हैं। अगर आपने खुशी कमाई है, तो फिर आप उसके कई रूप जीवन में उतार सकते हैं। लक्ष्मी जी, सरस्वती जी और दुर्गा जी तीनों बहनें हैं। जो लोग कुछ कमाने निकले हैं, वो इन तीनों माताओं को ठीक से समझ लें। सरस्वती जी, यानी शिक्षा होना ही चाहिए। अब पढ़ने-लिखने का युग है। दुर्गा जी पुरुषार्थ हैं, लक्ष्मी जी संपन्नता हैं। इन तीनों का तालमेल बैठाना पढ़ेगा। और जब आप तीनों के तालमेल से समर्थ हो जाएं, तो फिर आप खुशी कमा सकते हैं और उसका उपयोग कर सकते हैं। खुशी को कमाने का एक आसान तरीका है कि आपके पास जो दौलत है, आप उसको खर्च कैसे करते हैं, इस पर नजर रखना। पैसा कमाने में तनाव आ सकता है, पर अच्छे काम पर खर्च करने पर खुशी मिलेगी।