Sunday, March 15, 2026
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क्या देश में बढ़ रही है उमस? क्या कर सकते हैं इलाज?

वर्तमान में देश में उमस बढ़ती ही जा रही है! दिल्ली-एनसीआर के लोग एक बार फिर गर्मी से बेहाल हैं। इस बार उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान करके रख दिया है। हालांकि मौसम विभाग ने आज दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश का अनुमान जताया है। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है। वहीं इस पूरे सप्ताह दिल्ली का अधिकतम 33-35 के बीच रहने का अनुमान है। उधर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में आज भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं यूपी, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के बाद मौसम सुहाना हुआ है। कुछ जगहों पर बाढ़ जैसे हालात हैं। हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह के लिए ‘येलो अलर्ट’ पहले ही जारी कर दिया था। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है।मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर एवं बीकानेर संभाग के कुछ भागों में आगामी दिनों में बारिश होने का अनुमान है और 17 जुलाई को जोधपुर संभाग और 18 जुलाई को शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। बीते दो दिनों से राज्य के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिसमें सबसे अधिक 36.8 मिलीमीटर बारिश सुंदरनगर में दर्ज की गई। इसके बाद मंडी में 16.6 मिमी, पंडोह में 12 मिमी, पांवटा साहिब में 8.2 मिमी, करसोग में 8.1 मिमी, गोहर में 7 मिमी, बग्गी में 5.7 मिमी, सोलन में 4.4 मिमी और कुफरी में 4 मिमी बारिश दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश के हरदोई सहित अन्य जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं। इस बीच, हरदोई के डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पूरी स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए। बाढ़ की वजह से 83 स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं कार्य में तेजी लाने के लिए एसडीआरएफ, पीएसी व राजस्व की टीमें तैनात की गईं हैं।

बाढ़ ने किसानों की फसलों को भी बर्बाद करके रख दिया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के संपर्क मार्ग कट गए हैं। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को राहत-सामग्री पहुंचाने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में बीते दिनों डीएम की अगुवाई में बैठक भी हुई। इसमें राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के मकसद से पूरी रूपरेखा तैयार की गई, जिसे आगामी दिनों में जमीन पर उतारा जाएगा।

मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान में अगले चार-पांच दिन मानसून के सक्रिय रहने और कोटा एवं उदयपुर संभाग में विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान लगाया है। मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ व आसपास के क्षेत्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और बंगाल की खाड़ी में 18 जुलाई के आसपास एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। उसने अपने पूर्वानुमान में कहा कि पूर्वी राजस्थान में विभिन्न स्थानों पर अगले चार-पांच दिन मानसून सक्रिय रहेगा तथा कोटा एवं उदयपुर संभाग में भारी बारिश हो सकती है।

उसने कहा कि कोटा, उदयपुर, अजमेर संभाग में कहीं-कहीं अति भारी बारिश होने का अनुमान है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह के लिए ‘येलो अलर्ट’ पहले ही जारी कर दिया था। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बीते दो दिनों से राज्य के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिसमें सबसे अधिक 36.8 मिलीमीटर बारिश सुंदरनगर में दर्ज की गई। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं। इस बीच, हरदोई के डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पूरी स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए। बाढ़ की वजह से 83 स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिए गए हैं।उत्तर प्रदेश के हरदोई सहित अन्य जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं।मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर एवं बीकानेर संभाग के कुछ भागों में आगामी दिनों में बारिश होने का अनुमान है और 17 जुलाई को जोधपुर संभाग और 18 जुलाई को शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।

केदारनाथ में गौरीकुंड के पास हादसा, बारिश के कारण भूस्खलन से तीन तीर्थयात्रियों की मौत, कई घायल

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स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ तीर्थयात्री ट्रैकिंग के लिए केदारनाथ जा रहे थे। रविवार सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. परिणाम स्वरूप पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर टूटकर उनके ऊपर गिरे।
उत्तराखंड के केदारनाथ में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में तीन लोगों की मौत हो गई. कई लोग घायल हो गये. घटना रविवार सुबह गौरीकुंडा के पास हुई. सूचना मिलने के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा.

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ तीर्थयात्री ट्रैकिंग के लिए केदारनाथ जा रहे थे। रविवार सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. परिणाम स्वरूप पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर टूटकर उनके ऊपर गिरे। तीन लोगों की कुचलकर मौत हो गई। कई लोग घायल हो गये. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल भेजा गया. राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स-हैंडल पर हुई घटना पर अफसोस जताया. उन्होंने कहा, ”बचाव कार्य जारी है. स्थिति पर नजर रखी जा रही है।” उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है। बारिश के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन हो रहा है.

मौसम विभाग ने कहा कि रविवार को चंपावत, नैनीताल, उधमसिंह नगर में भारी से बहुत भारी बारिश होगी. उन इलाकों में अंतिम चेतावनी भी जारी कर दी गई है. इसके अलावा पौडी, पिथौरागढ, बागेश्वर, अल्मोडा के कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. पतन की भी आशंका है. टोंकपुर चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग शनिवार को भूस्खलन के कारण बंद कर दिया गया है। बदरीनाथ हाईवे पर कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित है।

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद इस बार उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने जानकारी दी है कि रविवार को चारधाम यात्रा बंद रहेगी. तीर्थयात्रियों को जहां हैं वहीं खड़े रहने के लिए कहा गया है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है.

चारधाम यात्रा 10 मई से शुरू हो गई है. नवंबर तक जारी रहेगा. मौसम भवन के पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 और 8 जुलाई को उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. कुमाऊं,पौड़ी,चमोली,रुद्रप्रयाग में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार, टिहरी जैसे जिले ऑरेंज अलर्ट पर हैं। ऐसे में पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन की आशंका अधिक है. नदियों में भी पानी बढ़ने लगा है. कई नदियाँ पहले से ही खतरे के स्तर तक पहुँच रही हैं। नतीजतन, उत्तराखंड प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।

गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडे ने शनिवार रात मौसम का पूर्वानुमान देखकर एडवाइजरी जारी की। मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को बताया गया है कि वे रविवार को पूरे दिन आगे नहीं बढ़ सकते। जो जहां है, जहां तक ​​चला गया है, वहीं खड़ा रहना चाहिए। अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ तो प्रशासन आगे नहीं बढ़ने देगा. तीर्थयात्रियों को हृषिकेश के बाद आगे न बढ़ने के लिए कहा गया है।

मौसम की वजह से शनिवार को अमरनाथ यात्रा भी रद्द कर दी गई. भारी बारिश के कारण सड़क पर कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है. इसके बाद तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यात्रा को अस्थायी तौर पर रोकने का फैसला किया. प्रशासन सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को जम्मू से 5600 तीर्थयात्री बालटाल और पहलगांव बेसकैंप के लिए रवाना हुए। लेकिन शुक्रवार से भारी बारिश शुरू हो गयी. कुछ जगहों पर सड़क टूट गयी. परिणामस्वरूप, तीर्थयात्रियों को उन दो आधार शिविरों से आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। खबर है कि बुधवार को 30,000 तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ गुफा के दर्शन किये. अमरनाथ और लास्टनाग में तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। रात में तापमान 5 डिग्री तक गिर सकता है। प्रशासन ने उस पहलू पर भी विचार किया है. मौसम में सुधार होने तक अमरनाथ यात्रा की इजाजत नहीं दी जाएगी. 52 दिनों की यह यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी. यह यात्रा 19 अगस्त को समाप्त होगी.

क्या अमेरिका भारत पर बना पाया दबाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अमेरिका भारत पर दबाव बना पाया है या नहीं! हाल ही में पीएम मोदी के रूस दौरे की काफी चर्चा हुई। भारत से कहीं अधिक चर्चा अमेरिका और दूसरे देशों में हुई। पीएम मोदी की इस यात्रा पर सबसे अधिक पैनी नजर अमेरिका की थी। कहा जा रहा था कि मोदी के वहां जाने से भारत के साथ रिश्तों पर इसका असर पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली रूस यात्रा थी। इसलिए भी इस दौरे पर अधिक नजर थी। भारत और रूस के बीच गहराते रिश्तों से अमेरिका और यूरोपीय देश एक अलग तरह की बेचैनी महसूस कर रहे थे। मोदी के दौरे के बाद जिस तरीके से अमेरिका की ओर से बयान सामने आए उससे एक बात और अधिक क्लियर हो गई कि भारत का स्टैंड बदला नहीं है। इसी का नतीजा है कि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने कहा है कि रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर चिंताओं के बावजूद भारत वाशिंगटन का रणनीतिक साझेदार बना रहेगा। पेंटागन के प्रेस सचिव ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच काफी लंबे समय से रिश्ते हैं। अमेरिका के नजरिये से भारत एक रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ हम रूस से उसके रिश्तों सहित पूर्ण और स्पष्ट बातचीत करना जारी रख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका, रूस से भारत के रिश्तों को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में बिल्कुल स्पष्ट रहा है। हमने अपनी चिंताओं को निजी तौर पर सीधे भारत सरकार के समक्ष जाहिर किया है और हम ऐसा करना जारी रख रहे हैं। इसमें बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल है कि क्या ऐसे बयान पहले संभव थे।

भारत और रूस के बीच गहरी दोस्ती जगजाहिर है लेकिन एक सवाल यह कि क्या अमेरिका की ओर से कुछ साल पहले इसी तरह की प्रतिक्रिया सामने आती। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने आर्थिक क्षति पहुंचाने के लिए रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इनमें अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली ‘स्विफ्ट’ से रूस को बाहर करना शामिल था। इससे रूस पर विदेशी भुगतान प्राप्त करने की समस्या खड़ी हो गई। इतना ही नहीं रूस से व्यापार करने वाले देशों के लिए भी इसमें एक छिपी चेतावनी थी। इस फैसले के बीच भारत एक अलग ही राह पर चल पड़ा और उसने रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल खरीदने का फैसला हुआ। यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक आर्थिक स्थितियों में बदलाव और इस दिशा में भारत के प्रयासों के कारण, दिल्ली ने अब 20 से अधिक देशों के साथ रुपये में लेनदेन शुरू कर दिया है। इन सभी बदलावों की बदौलत अमेरिका और उसके डॉलर का दबदबा कम होने लगा है। इन सभी परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में भारत और रूस के बीच घनिष्ठ संबंधों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत पर पश्चिमी देशों की करीबी नजर थी। पुतिन से बातचीत में मोदी ने उनसे कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान पर संभव नहीं है और शांति के प्रयास बम और बंदूकों के बीच सफल नहीं होते हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई जिसमें रूस से यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता तुरंत रोकने की अपील की गई है। भारत इस वोटिंग से दूर रहा। 193 सदस्यों वाली महासभा में 99 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। बेलारूस, क्यूबा, उत्तर कोरिया, रूस और सीरिया सहित 9 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया। भारत, बांग्लादेश, भूटान, चीन, मिस्र, नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका सहित 60 देश मतदान से दूर रहे। पेंटागन के प्रेस सचिव ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच काफी लंबे समय से रिश्ते हैं। अमेरिका के नजरिये से भारत एक रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ हम रूस से उसके रिश्तों सहित पूर्ण और स्पष्ट बातचीत करना जारी रख रहे हैं।अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की एक टिप्पणी हाल ही में सामने आई जिसमें उन्होंने कहा कि हम सिर्फ अपना भविष्य भारत में नहीं देखते और भारत केवल अपना भविष्य अमेरिका में नहीं देखता, बल्कि दुनिया हमारे संबंधों में बड़ी चीजें देख सकती है। इस बयान के भी अलग-अलग मायने मतलब निकाले जा सकते हैं लेकिन भारत की ओर से जो बात बार-बार कही जा रही है कि देश का हित पहले अब भी वह उस पर कायम है। बिना इसकी परवाह किए कि कौन नाराज होगा।

जानिए कहानी इच्छाधारी बाबा भीमानंद की!

आज हम आपको इच्छाधारी बाबा भीमानंद की कहानी सुनाने जा रहे हैं! भजन गाने वाला शख्स है इच्छाधारी स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूटवाले। उनके खुले बाल गेंदे की पंखुड़ियों से सजे हुए हैं, जबकि बाबा के हाई प्रोफाइल भक्त उनके समर्थन में झांझ बजा रहे हैं। यूपी के हाथरस में भगदड़ में 121 लोगों की मौत के बाद सूरजपाल उर्फ नारायण हरि सरकार ‘भोले बाबा’ का नाम आने के साथ ही देश में विवादित बाबाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विवादित बाबाओं में एक नाम चित्रकूट के रहने वाले इच्छाधारी बाबा के नाम से मशहूर भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी का भी है। दिल्ली में फाइव स्टार होटल में कभी सिक्योरिटी गार्ड रहे शख्स ने करोड़पति बनने तक का सफर तय किया। द्विवेदी के बाबा बनने से लेकर फिर जेल जाने की कहानी दिल्ली और एनसीआर पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। भीमानंद की एक बेटी है जिसने महाराष्ट्र से पढ़ाई की है। उसकी पत्नी मुन्नी देवी चित्रकूट में ही रहती थी। 1988 में दिल्ली आकर उसने होटल पार्क रॉयल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली। जल्द ही वह आगरा के एक फाइव स्टार होटल में रहने लगा। लेकिन वह एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। वह दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक मसाज पार्लर में मैनेजर की नौकरी शुरू की। यहां उसकी मुलाकात एक द्विवेदी उपनाम वाले व्यक्ति से हुई। यह दोस्त, जो शिरडी के साईं बाबा का भक्त था। उसने, भीमानंद को अन्य स्वामियों और संतों के संपर्क में ला दिया। इसके बाद भीमानंद अलग-अलग जगहों पर जाकर सत्संग करने लगा। वो लोगों की समस्याओं को सुलझाने से लेकर शादी कराने और नौकरी दिलाने की आड़ में पैसे बनाना शुरू कर दिया। बाद में आगे चलकर वह पूरी तरह से सेक्स रैकेट का बड़ा सरगना बन गया।

प्राचीन काल के देवताओं की तरह, उनकी उपस्थिति भी जरूरत और परिस्थिति के हिसाब से अलग-अलग रूपों में प्रकट होती थी। अपने साथी साईं भक्तों के लिए, वे स्वामी भीमानंद था। संदेह से परे एक पवित्र व्यक्ति। अपनी गर्लफ्रेंड के लिए, वे बस शिव मूरत द्विवेदी था। अपने पीड़ितों और ग्राहकों के लिए, वे शिव मूर्ति थे, एक ऐसा व्यक्ति जो वेश्यावृत्ति, डकैती, हत्या के प्रयासों में लिप्त था और दलाल होने के आरोप में जेलों में आता-जाता रहा। यह सब साईं बाबा के नाम पर किया गया था। पुलिस के अनुसार, वह अपने सभी फ़ोन कॉल्स का जवाब हमेशा की तरह ‘हेलो’ के बजाय ‘ओम श्री साईं’ कहकर देता था। वह कॉल करने वाले की आवाज सुनता और फिर तय करता कि किसे ढूंढा जा रहा है- दलाल शिव मूर्ति या साईं भक्त स्वामी भीमानंद को।

द्विवेदी को पहली बार 1997 में गिरफ्तार किया गया था। इसके तुरंत बाद अगली गिरफ्तारी हुई। उसे 1998 में बदरपुर में चोरी का माल प्राप्त करने और डकैती के आरोप में गिरफ्तार किया गया। दिल्ली में पुलिस की निगाह में आने के बाद उसने अपना काम नोएडा में शुरू कर दिया। तब तक, उसने खानपुर में एक मंदिर बना लिया था। वह शिव मूरत द्विवेदी को इच्छाधारी स्वामी भीमानंद बना लिया था। 2003 में, नोएडा पुलिस ने द्विवेदी के साथ सौदा करने के लिए दो नकली ग्राहकों को भेजकर एक जाल (25 फरवरी को दिल्ली पुलिस द्वारा बिछाए गए जाल के समान) बिछाया। उन्होंने फर्जी बाबा, उसके दलाल और छह सेक्स वर्करों को गिरफ्तार किया। यह रैकेट दक्षिण दिल्ली में दो सरकारी फ्लैटों से चलाया जा रहा था- एक आरके पुरम में और दूसरा मोहम्मदपुर में लोक निर्माण के माली राम नारायण का। भीमानंद ने उस फ्लैट को किराए पर दे रखा था। यह सब तब हो रहा था, जब एक लाख से अधिक भोले-भाले अनुयायियों को उसके पवित्र वेश के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

पुलिस का कहना है कि शिव मूर्ति अपने काम को एक बिजनेस की तरह चलाता था। वह लॉजिस्टिक के लिए एक या दो लोगों के अलावा किसी और पर भरोसा नहीं करता था। वह अक्सर अपने सेक्स वर्कर को पिक-अप पॉइंट पर खुद ही ले जाता था। वह सभी बुकिंग भी खुद ही लेता था। वह, अपनी छुट्टियों का एक डायरी रखता था। इसके साथ ही अपने अकाउंट में सावधानी बरतता था। उसके पास 50 से अधिक लड़कियां थीं जो सीधे उसके लिए काम करती थीं। उसके उसके पास 500 से अधिक लड़कियों के नंबर थे। जाहिर है, पैसा अच्छा था।

इच्छाधारी बाबा की कुल संपत्ति लगभग 60 करोड़ रुपये आंकी गई है। अपनी पारिवारिक संपत्ति को छोड़कर, उसके पास खानपुर में एक मंदिर और आश्रम और दिल्ली में तीन अन्य संपत्तियां हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में भी संपत्ति है। वहां वह 200 बिस्तरों वाला अस्पताल बनवा रहा था।

क्या विकलांगता प्रमाण पत्र भी हासिल करना चाहती थी IAS पूजा खेड़कर?

IAS पूजा खेड़कर विकलांगता प्रमाण पत्र भी हासिल करना चाहती थी! ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर इस वक्त सुर्खियों में हैं। सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने का इन पर आरोप है। पूजा हाल ही में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने पुणे में अपनी तैनाती के दौरान कथित तौर पर अलग ‘केबिन’ और ‘स्टाफ’ की मांग की थी और उसके बाद उनका ट्रांसफर वाशिम जिले में कर दिया गया। अब इस मामले में एक और जानकारी सामने आई है। अगस्त 2022 में, पूजा खेडकर ने पुणे से विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए अप्लाई किया था। लेकिन डॉक्टरों ने उनकी जांच के बाद सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार कर दिया था। रिपोर्ट में इस लेटर को दिखाया गया है। जो लेटर खारिज करते हुए भेजा गया उसमें लिखा गया है कि आपके मेडिकल कंडीशन की जांच की गई, मेडिकल बोर्ड की ओर से पूरे मामले को देखा गया लेकिन विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं है। यह दूसरी बार था जब खेडकर ने इस तरह का मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करने का प्रयास किया था। रिपोर्टों के अनुसार इससे पहले अहमदनगर से एक प्रमाण पत्र हासिल करने का प्रयास किया था। महाराष्ट्र काडर की 2022 बैच की ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर की नियुक्ति सवालों के घेरे में आ गई है। 821वीं रैंक हासिल करने वाली अधिकारी पर आरोप लगे हैं कि सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सर्टिफिकेट जमा किए। ट्रेनी IAS अधिकारी ने ओबीसी और दृष्टिबाधित श्रेणियों के तहत सिविल सेवा परीक्षा दी थी।

इस कैटेगरी में अप्लाई करने की वजह से पूजा को एम्स में मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया। आईएएस पद के लिए चयन प्रक्रिया के दौरान पूजा ने छह बार अनिवार्य मेडिकल परीक्षण कराने से मना किया था। अप्रैल 2022 में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में पहला टेस्ट निर्धारित किया गया था, जिसे उन्होंने कोविड-19 पॉजिटिव होने का दावा करते हुए छोड़ दिया। इसके बाद मई, जुलाई और अगस्त में भी उन्होंने परीक्षण टाल दिया। सितंबर में, उन्होंने एक एमआरआई टेस्ट नहीं करवाया जो उनकी दोनों आंखों में विजन लॉस के आकलन करने के लिए जरूरी था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूजा ने एक प्राइवेट मेडिकट सेंटर से एमआरआई रिपोर्ट जमा करा दी थी।

ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर पर आरोप हैं कि सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए उन्होंने फर्जी दिव्यांगता और ओबीसी सर्टिफिकेट दिए। ट्रेनिंग के दौरान अपने लिए अलग केबिन और स्टाफ की मांग की, जो प्रोबेशनरी ट्रेनी को नहीं दिए जाते। पुणे कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार पूजा ने 3 जून को ट्रेनी के तौर पर जॉइन करने से पहले ऐसी मांगे की थीं, लेकिन उन्हें ये सुविधाएं नहीं दी गईं। पद के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद में आने के बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। आरोप यह भी है कि वह निजी ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करती थीं। खेडकर की अब एक सदस्यीय पैनल द्वारा जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।

ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के पिता ने बेटी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। महाराष्ट्र सरकार के पूर्व कर्मचारी और पूजा के पिता दिलीप खेडकर ने एक मराठी समाचार चैनल से कहा कि वह वास्तव में गैर समृद्ध वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) से संबंध रखते हैं। दिलीप खेडकर ने लोकसभा चुनाव लड़ा था और उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 40 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उन्होंने कहा कि यदि सीमित साधनों वाला कोई व्यक्ति चार से पांच एकड़ जमीन का मालिक है, तो मूल्यांकन से पता चल सकता है कि उसकी संपत्ति कई करोड़ रुपये है। दिलीप ने कहा क्रीमी लेयर के रूप में वर्गीकरण (संपत्ति) मूल्यांकन के बजाय आय पर निर्भर करता है। वहीं पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर से भूमि विवाद को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले में अभी तक संपर्क नहीं कर पाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। भूमि विवाद को लेकर मनोरमा द्वारा कुछ लोगों को पिस्तौल दिखाकर कथित तौर पर धमकाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मनोरमा और उनके पति दिलीप खेडकर के अलावा पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

जब जम्मू के कठुआ में आतंकियों के पास मिली अमेरिकी राइफल!

हाल ही में जम्मू के कठुआ में आतंकियों के पास से अमेरिकी राइफल मिली है! हाल ही में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकी हमले में अमेरिकी राइफलों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी अमेरिका निर्मित एम-4 कार्बाइन असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल करते पाए गए हैं। वहीं, कठुआ सहित हाल के हमलों के दौरान इस राइफल के और अधिक इस्तेमाल के बाद यह चिंता जताई जा रही है कि अगर ऐसे हालात बने रहे तो आतंकियों से पार पाना बेहद मुश्किल होगा। खास बात यह है कि अमेरिका में बनीं इन घातक राइफलों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जा रहा है। वहीं, कई आतंकी हमलों में चीन में बनी बुलेट्स का भी इस्तेमाल हो रहा है। एक्सपर्ट से समझते हैं कि आखिर कश्मीर में आतंकवाद से पार पाने में इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है। हाल ही में कठुआ में आतंकियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों पर हमला किया था, जिसमें 5 जवान शहीद हो गए, जबकि 5 जवान घायल हुए हैं। पिछले 1 महीने में यह जम्मू संभाग में हुआ छठवां बड़ा हमला है। वहीं, कठुआ जिले में एक महीने में ये दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। यहां सुरक्षाबलों के 10 जवान सेना के वाहन से बदनोता गांव के पास माचेडी-किंडली-मल्हार मार्ग पर नियमित गश्त पर जा रहे थे। आतंकियों ने मल्हार सड़क से सटी एक पहाड़ी पर पोजीशन ले रखी थी। जैसे ही सैन्य वाहन गुजरा आतंकियों ने घात लगाकर पहले ग्रेनेड फेंका और उसके बाद आधुनिक हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी।

डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के सोपोर, बारामुला और पट्टन तीन ऐसी जगहें हैं, जहां सबसे ज्यादा आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि कठुआ हमले में करीब 3 आतंकी शामिल थे। हमले के दौरान आतंकियों के साथ स्थानीय गाइड के भी साथ होने की आशंका जताई जा रही है। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कश्मीर टाइगर्स ने ली है। आतंकी संगठन ने इस हमले में एम-4 असॉल्ट राइफल, स्नाइपर, ग्रेनेड और दूसरे हथियारों का इस्तेमाल किया है। इससे पहले इस संगठन ने जम्मू क्षेत्र में कठुआ,रियासी और डोडा में भी हमले को अंजाम दिया था।

अमेरिकी सेनाओं के 2021 में अफगानिस्तान से जाने के बाद उनके हथियार पाकिस्तानी आतंकियों तक पहुंच गए। इनमें एम-4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल और कंधे पर रखकर दागे जाने वाले हथियार भी शामिल हैं। एम-4 कार्बाइन राइफलों को 1980 के दशक में बनाया गया था। इससे करीब 60 सेकेंड में 700 से 900 राउंड फायर किया जा सकता है। यह करीब आधे किलोमीटर तक मार कर सकती है। इनका नाटो सेनाओं ने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इन राइफलों से स्टील की घातक गोलियां ताबड़तोड़ निकलती हैं। डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी कहते हैं कि इन राइफलों का इस्तेमाल सीरियाई गृहयुद्ध, इराकी गृहयुद्ध, यमनी गृहयुद्ध, कोलंबियाई संघर्ष, कोसोवो युद्ध, 9/11 के बाद इराक और अफगानिस्तान युद्ध सहित कई युद्धों में किया गया है। पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई ने जम्मू-कश्मीर में एम-4 कार्बाइन राइफलें देकर आतंकियों की मदद कर रही है।

एक्सपर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में एम-4 कार्बाइन राइफल की बरामदगी पहली बार तब हुई, जब 7 नवंबर 2017 को जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भतीजे तल्हा रशीद मसूद को सेना ने पुलवामा जिले में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था। उसके पास से ये राइफलें मिली थीं। 2018 में पुलवामा में सुरक्षा बलों ने दूसरी बार हथियार बरामद किया था, जब अजहर का एक और भतीजा उस्मान इब्राहिम मारा गया था। 11 जुलाई, 2022 को जम्मू-अवंतीपोरा इलाके में एम-4 कार्बाइन राइफल बरामद की गई। पुंछ में आतंकियों ने हमले के लिए जिस गोली का इस्तेमाल किया था वो स्टील की थीं। आमतौर पर गोलियां पीतल की होती है, लेकिन अब आतंकी हमलों के लिए स्टील की गोलियां इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस तरह की गोलिया चीन बनाता है। स्टील की ये गोलियां चीन के जरिए पाकिस्तान पहुंचती हैं और फिर वहां से पाकिस्तानी फौज के जरिए आतंकियों को इसकी सप्लाई की जाती है। पीतल की गोली की तुलना में स्टील की गोलियां सस्ती भी होती हैं और घातक भी।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकियोंवादियों के साथ मुठभेड़ों में ज्यादा एडवांस चीनी टेलीकम्यूनिकेशन इक्विपमेंट ‘अल्ट्रा सेट’ जब्त किया गया है। दरअसल, पाकिस्तानी सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण आतंकवादी समूहों के हाथों में पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इससे नियंत्रण रेखा के पार से होने वाली घुसपैठ और शहरों तथा गांवों के बाहरी इलाकों में आतंकवादियों के संभावित रूप से रहने की चिंता भी पैदा हो गई है। इन संदेशों को हैंडसेट से पाकिस्तान स्थित मास्टर सर्वर तक पहुंचाने के लिए चीनी सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है, संदेशों को बाइट्स में छोटा करके भेजा जाता है।

डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को स्थानीय समर्थन ज्यादा मिल रहा है। हालांकि, ये समस्या भी हल हो सकती है। अगर राजनीतिक बातचीत शुरू हो तो इस समस्या से भी पार पाया जा सकता है। इसमें सभी राजनीतिक दलों को इस मसले को हल करना होगा। अमेरिका के एक थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन की 30 जून, 2008 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य कार्रवाई से महज 7 फीसदी ही आतंकवाद का खात्मा किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर सभी राजनीतिक दल मिल बैठकर रेगुलर बातचीत करें तो इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी बताते हैं कि पाकिस्तान ने पंजाब में आतंकवाद का समर्थन किया था। जम्मू-कश्मीर में पिछले 35 साल से वह आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। बीते 5 साल में एक बार ही यानी 24 जून, 2021 को सभी राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लेकर व्यापक चर्चा की थी। वहीं, सीमा विवाद को लेकर चीन के साथ इसी दौरान 21 बार बातचीत हुई। ऐसे में कश्मीर में आतंकवाद से निपटने का सबसे बड़ा मूल मंत्र है भारत की सभी राजनीतिक पार्टियों को साथ में बैठकर इस पर बातचीत करना।

आखिर बीजेपी क्या कर रही है चूक जानिए?

आज हम आपको बताएंगे कि बीजेपी आखिर क्या और कहां चूक कर रही है! लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भारत की राजनीति करवट लेने लगी है। एनडीए के 293 सांसदों के साथ तीसरी बार सरकार बनाने के बाद भी बीजेपी कॉन्फिडेंट नजर नहीं आ रही है, जबकि 234 सीटें जीतने वाले विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने भी बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। 13 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी को सिर्फ दो सीटें मिलीं। कहीं न कहीं देश में माहौल मनमोहन सिंह के यूपीए-2 जैसा होने लगा है। नीट एग्जाम (NEET) और यूजीसी जैसे एग्जाम में धांधली के आरोप इसकी शुरुआत हो चुकी है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कराए गए काम में नुस्ख निकाले जा रहे हैं और यह लोगों को पसंद भी आ रहा है। 10 साल सत्ता में रहने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की छवि करप्शन के मामले बेदाग रही। अब पेपर लीक, ढहते पुल, दरकती सड़कें और बारिश में टपकते एयरपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार और पार्टी की ओर से किए जा रहे दावों को पब्लिक दरकिनार कर रही है। अगर बीजेपी छवि बदलने में सफल नहीं हुई तो इसका परिणाम बीजेपी को राज्यों के चुनावों में भुगतना पड़ेगा। अब बीजेपी को बूस्टर डोज तभी मिलेगा, जब वह नवंबर में होने वाले चुनाव में झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में बड़ी जीत हासिल करे। फ्लैश बैक में जाकर 2014 के दौर को याद कीजिए। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने थे, तब देश की जनता करप्शन और घोटालों की खबरों से परेशान थी। मनमोहन सिंह ऐसे प्रधानमंत्री के तौर प्रचारित हुए, जो कांग्रेस अध्यक्ष के मातहत के तौर पर काम करते हैं। विपक्ष ने बड़े घोटालों पर उनकी चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस भी आरोपों का सटीक जवाब देने में सक्षम नहीं दिख रही थी। गुजरात में ब्रांड बन चुके नरेंद्र मोदी ने इस माहौल को भुनाया। बदलाव की इंतजार कर रही जनता ने समर्थन दिया और बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। फिर 10 साल तक राष्ट्रवाद की बयार बही और नरेंद्र मोदी इसके सबसे बड़े आइकॉन के तौर पर उभरे। बीजेपी हिंदी पट्टी में पंचायत से संसद तक काबिज होती गई। नगर निगम में मिलने वाली जीत का सेहरा भी पीएम मोदी के सिर मढ़ा गया। झारखंड, बिहार, कर्नाटक में हार का ठीकरा स्थानीय नेताओं ने ले लिया। 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक ने पीएम मोदी की साख बढ़ाई। जनता ने उन्हें दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया। मोदी 2.0 में धारा-370 हटाने और सीएए लागू करने जैसे बुलंद फैसले भी लिए। कोरोना के दौर में भी जनता नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी रही। उन्होंने जैसा कहा, लोगों ने वैसा ही किया। यह उनकी लोकप्रियता का चरम था, जिसे देखकर विपक्ष समेत पूरी दुनिया दंग रह गई। किसान आंदोलन और कोरोना से हुई मौतों के बाद भी यूपी में बीजेपी की वापसी हुई। पिछले साल राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भारतीय जनता पार्टी की बनी, तो नरेंद्र मोदी को अजेय मान लिया गया।

2024 के लोकसभा चुनाव में हालात बदल गए। बेहतर चुनाव प्रबंधन और अग्रेसिव कैंपेन के बाद भी बीजेपी पूर्ण बहुमत के 273 के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। राष्ट्रवाद, मुफ्त राशन और मोदी मैजिक के सहारे चुनाव में उतरी बीजेपी के 240 पर अटकने से विपक्ष का मनोबल बढ़ा। बीजेपी के नेताओं का कहना है कि वह आरक्षण खत्म करने, 10 किलो मुफ्त राशन और खटाखट 8500 रुपये देने को लेकर फैलाए गए विपक्ष के भ्रम का काट नहीं ढूंढ सके। एक्सपर्ट मानते हैं कि नरेंद्र मोदी खुद अपनी ही स्कीम की जाल में फंस गए। बीजेपी ने राम मंदिर, पांच किलो मुफ्त राशन और कैश डिलिवरी सिस्टम को जीत का रामबाण मान लिया। कोरोना के बाद वोटरों का एक ऐसा वर्ग तैयार कर दिया, जो मुफ्त की स्कीमों पर बंपर वोट करती है। लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने मुफ्त वाली स्कीम और कैश की रकम बढ़ा दी। संगठन के स्तर पर मोदी-शाह की जोड़ी ने करीब उम्र और परफॉर्मेंस के नाम पर 100 सांसदों के टिकट काटे और दूसरे दलों के आए चेहरों को टिकट दिया। मगर इस स्क्रीनिंग में बीजेपी से बड़ी चूक हुई। वह ऐसे सांसदों को टिकट दिया, जो क्षेत्र में नजर नहीं आए। उन नेताओं को भी मैदान में उतारा, जिन्हें जनता पहचानती भी नहीं थी। बीजेपी के अधिकतर उम्मीदवार पीएम नरेंद्र मोदी को चेहरे पर जीतने को लेकर आश्वस्त रहे और नतीजा अब सामने है।

केंद्र सरकार के बेहतर काम का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी के सिर गया। राज्यों में हो रहे डेवलेपमेंट के लिए क्रेडिट पीएम मोदी के खाते में जाता रहा। मोदी-शाह के युग में बीजेपी एक ऐसा चेहरा नहीं पेश नहीं कर सकी, जो पीएम नरेंद्र मोदी का विकल्प बन सके। कुछ ऐसा ही हाल 2004 में था, जब अटल बिहारी वाजपेयी की छवि के सामने बड़े नेताओं का कद छोटा पड़ने लगा। लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एक चुनाव हारने के बाद दूसरा नेता बनाने में संगठन को 10 साल लग गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट के साथ अधिकतर लोग मान चुके हैं 2024 पीएम नरेंद्र मोदी का आखिरी चुनाव है, क्योंकि वह 2029 में 78 साल के हो जाएंगे। यह नैरेटिव बड़े ही तेज गति से जनमानस के बीच अपनी जगह बना रहा है। अगले दो साल में इसका असर भी नजर आने लगेगा। बीजेपी इसे विपक्ष की चाल कह सकती है, मगर अभी तक पार्टी की ओर से इस नैरेटिव के खिलाफ कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। पार्टी न ही किसी नेता को विकल्प के तौर पेश कर रही है और न ही इसका खंडन कर रही है।

शहरी मध्यम वर्ग बीजेपी का कोर वोटर रहा है, मगर पिछले 10 साल में राष्ट्रवाद की घुट्टी के अलावा मिडिल क्लास के हाथ कुछ नहीं लगा। हर खरीदारी पर टैक्स भरने वालों को इनकम टैक्स में छूट नहीं मिली। सरकारी नौकरियों में कमी की गई। ऐसा ही हाल अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में था, जब एनडीए सरकार ने सरकार के आकार छोटा किया और सरकार के खजाने को भर दिया। 2004 में सेंसेक्स उफान मार रहा था और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 100 बिलियन डॉलर के पार गया था। जब सरकार बदली तो कांग्रेस ने इस खजाने से नौकरियां बांटी। आज सरकार के स्तर पर बीजेपी इसी गलती को रिपीट कर रही है। विपक्ष के हाथ बेरोजगारी और महंगाई का बड़ा मुद्दा लग चुका है। अब यह मुद्दा आम लोगों को रास भी आ रहा है।

कांग्रेस और दूसरे दलों से आयातित नेताओं को पार्टी, सरकार और संगठन में जगह दी गई, जबकि संगठन के लिए वर्षों तक मेहनत करते वाले कार्यकर्ता ही बने रहे। दूसरी पार्टियों से आने वाले अधिकतर ऐसे नेता हैं, जिन्हें बीजेपी के नेताओं ने चुनाव में पटखनी दी थी और वह अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे थे। इन नेताओं को केंद्र और राज्यों में मंत्री पद भी नवाजा गया। पार्टी का यह रुख सीनियर कार्यकर्ताओं के मनोबल तोड़ने के लिए काफी था। अब दबी जुबान में नेता बीजेपी के कांग्रेसीकरण की बात कर रहे हैं।

बीजेपी के कोर समर्थक पार्टी विद डिफरेंस वाले टैगलाइन को आदर्श मानते रहे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार को दूसरी और तीसरी इसलिए मौका मिला कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा बीजेपी के कोर मुद्दों पर लीक से हटकर फैसले लिए। पिछले एक साल से पार्टी शौचालय, मुफ्त राशन, पांचवें नंबर की आर्थिक शक्ति जैसे चंद मुद्दों को अलाप रही है, जिसे नरेंद्र मोदी लालकिला, संसद, चुनाव प्रचार अभियान और विदेशों में भी कई दफा दोहरा चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता भी टीवी डिबेट में उन्हीं मुद्दों को बार-बार दोहराते हैं। इनमें में अधिकतर मुद्दे आर्थिक और मुफ्त वाले मुद्दे हैं, जो निम्न और मिडिल क्लास के पल्ले नहीं पड़ते हैं। यह सर्वविदित है कि सरकार चाहे किसी की भी हो, आर्थिक उदारीकरण का दौर जारी रहेगा। इस सरकार को नए तेवर के साथ कलेवर भी बदलना होगा।

आखिर क्या है जीरो एरर एग्जाम का पैटर्न?

आज हम आपको जीरो एरर एग्जाम का पैटर्न बताने जा रहे हैं! जीरो एरर परीक्षा का रोडमैप तैयार कर रही केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की कमिटी तीन स्तर की रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें पहली बार इंटरनैशनल लेवल पर बेस्ट प्रैक्टिस की स्टडी के साथ भारतीय छात्रों और पैरंट्स के हर एक सुझाव को महत्व दिया जाना शामिल है। सूत्रों का कहना है कि कमिटी नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के सभी एग्जाम सेंटरों की मैपिंग और परीक्षा के विभिन्न तरीकों (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट, पेन एंड पेपर, हाईब्रिड मोड) के हर स्टेप को जांच रही है। सात सदस्यीय कमिटी ने डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स की भी मदद ली है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि एग्जामिशन प्रोसेस को 100 पर्सेंट पारदर्शी, टेंपर फ्री और Zero-error परीक्षा बनाना केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता है। बता दें कि एग्जाम के हर पैटर्न को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी ताकि एग्जाम किसी भी मोड में हो, उस एग्जाम की सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च रहे। इसी मकसद को पूरा करने के लिए यह कमिटी बनाई गई है। शिक्षा मंत्री भी लगातार छात्रों से मिल रहे हैं और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जा रहा है। नीट परीक्षार्थी भी शिक्षा मंत्री से मिल रहे हैं। वहीं कमिटी को 37 हजार में से 30 हजार सुझाव छात्रों के मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कमिटी परीक्षा सिस्टम में पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास के लिए 360 डिग्री तक की ओवरऑल संभावनाओं को तलाश रही है। हाई लेवल कमिटी ने तीन स्तर की रणनीति अपनाई है।यूजीसी, नैशनल मेडिकल कमिशन , नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंसेस की राय भी ली गई है। इसके अलावा एग्जाम कंडक्ट करवाने वाली मल्टीपल एजेंसी TCS, ION, NSEIT के साथ मीटिंग में समझा कि उनकी प्रैक्टिस क्या हैं, उनका बेस्ट प्रैक्टिस क्या है, क्या सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स होते हैं, क्या कमियां, है, उसको कैसे दूर करें? अल्पकालिक उपायों में आने वाले दिनों में होने वाले एग्जाम सिस्टम में सुधार और पारदर्शिता को लेकर उपाय सुझाए गए हैं। मध्यम अवधि के उपायों में यह तय किया गया है कि इन परीक्षा सुधारों को बड़े स्तर पर कैसे लागू किया जाएगा और दीर्घकालिक चुनौतियों में एनटीए में ऑपरेशनल रिफॉर्म (परिचालन सुधार) लागू करने हैं।

मल्टीपल चेक एंड बैलेंस और डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स को लागू करने के लिए आईआईटी कानपुर के सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग एक्सपर्ट प्रफेसर अमेय करकरे और हाई सिक्योरिटी और अप्लाईड क्रिप्टोग्राफी एक्सपर्ट प्रो. देबप्रिय रॉय की मदद भी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कमिटी पेपर सेटिंग, क्वेश्चन पेपर को एग्जाम सेंटर तक ट्रांसफर करने समेत हर स्टेप को बारीकी से देख रही है। एग्जाम सेंटर में पेपर देने का प्रोसेस क्या होता है, मौजूदा एग्जाम में कहां पर समस्या हुई है, लीकेज की समस्या को जड़ से कैसे खत्म किया जा सकता है?

सूत्रों का कहना है कि बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं में इंटरनैशनल लेवल पर बेस्ट प्रैक्टिस की स्टडी की गई है। यूजीसी, नैशनल मेडिकल कमिशन , नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंसेस की राय भी ली गई है। इसके अलावा एग्जाम कंडक्ट करवाने वाली मल्टीपल एजेंसी TCS, ION, NSEIT के साथ मीटिंग में समझा कि उनकी प्रैक्टिस क्या हैं, उनका बेस्ट प्रैक्टिस क्या है, क्या सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स होते हैं, क्या कमियां, है, उसको कैसे दूर करें?

NTA के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली में बदलाव का खाका तैयार किए जाने की प्रक्रिया बहुत तेजी से चल रही है। सूत्र बताते हैं कि डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स अब पूरी तरह से बदल जाएंगे। एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली में भी बड़े बदलाव होंगे। एनटीए द्वारा कंडक्ट करवाए जाने वाले सभी एग्जाम का मैक्रो और माइक्रो लेवल पर विश्लेषण किया जा रहा है। बता दें कि शिक्षा मंत्री भी लगातार छात्रों से मिल रहे हैं और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जा रहा है। नीट परीक्षार्थी भी शिक्षा मंत्री से मिल रहे हैं। वहीं कमिटी को 37 हजार में से 30 हजार सुझाव छात्रों के मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कमिटी परीक्षा सिस्टम में पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास के लिए 360 डिग्री तक की ओवरऑल संभावनाओं को तलाश रही है। एनटीए को विश्वस्तरीय एग्जाम एजेंसी बनाने के ब्लूप्रिंट पर काफी चीजें स्पष्ट हो गई हैं और डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स सबसे अहम कड़ी साबित होगा। कमिटी एग्जाम के हर पैटर्न को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी ताकि एग्जाम किसी भी मोड में हो, उस एग्जाम की सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च रहे।

क्या वर्तमान में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हार मान ली है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वर्तमान में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हार मान ली है या नहीं! क्या बीजेपी के पतन के दिन आ गए हैं? इसका कोई ठोस जवाब नहीं हो सकता, लेकिन परिस्थितियों, शीर्ष नेताओं के मिजाज, काम-काज के तौर-तरीके, चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण से फिलहाल तो संकेत पतन के ही दिख रहे हैं। जो बीजेपी फटाफट निर्णय लेने के लिए जानी जाती है, उसे क्या हो गया! 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए, लेकिन क्या बीजेपी ने उम्मीद से कमतर प्रदर्शन पर कोई बड़ा फैसला लिया? यहां तक कि जगत प्रकाश नड्डा का कार्यकाल 30 जून को ही खत्म हो गया, लेकिन 15 दिन बाद भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन तो दूर, चर्चा तक नहीं हो रही है! बीजेपी पार्टी विद डिफरेंस कहलाती थी, उस बीजेपी में वो सब देखने को मिल रहा है जिसके लिए कांग्रेस बदनाम हुआ करती थी- प्रदर्शन पर चाटुकारिता को तवज्जो। शीर्ष नेताओं की तरफ से पार्टी की हैंडलिंग में इस तरह की मनमर्जी हो रही है कि निराशा का भाव दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। लोकसभा से लेकर उप-चुनावों तक में तमाम नकारात्मक संकेतों के बावजूद दूसरी पार्टियों से नेताओं के बुलाकर अपने वर्षों के कार्यकर्ताओं, नेताओं को ठगा महसूस करवाने का चलन बदस्तूर जारी है। तो पार्टी अब अपने ही नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों की तरफ से भेजे जा रहे अलर्ट मेसेज को भी अनसुना कर रही है? लगता तो ऐसा ही है।

नरेंद्र मोदी को 2014 में देश ने प्रधानमंत्री के रूप में इसीलिए चुना था क्योंकि मनमोहन सिंह की छवि फैसले नहीं ले पाने वाले पीएम की हो गई थी। यह मतदाताओं को पसंद नहीं आया। मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने के लिए धड़ाधड़ फैसले लिए- नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक। फिर मोदी ने पार्टी के उम्रदराज नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया, भ्रष्टाचार के आरोपी विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। ये सभी नरेंद्र मोदी के एक मजबूत पीएम होने की छवि मजबूत करने में मददगार साबित हुए। नतीजा हुआ कि जनता ने दूसरी बार 2019 में ज्यादा सीटें देकर सत्ता में वापसी करवा दी। लेकिन अब पार्टी को मतदाता ही नहीं, अपने कार्यकर्ता और नेता भी खुलकर कह रहे हैं- जाग जाओ, वरना देर हो जाएगी।

अभी हुए विभिन्न राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणामों की व्याख्या ही कर लें। सात राज्यों की इन कुल 13 में से बीजेपी सिर्फ दो सीटें जीत पाई है। मतलब साफ है कि पार्टी कैडर और वोटरों में मायूसी का माहौल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। ऐसा लगता है कि दूसरी पार्टियों से नेताओं को लाकर अपने ही कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने में बीजेपी रिकॉर्ड बनाना चाहती है। अब दिखने लगा है कि दशकों से पार्टी के लिए समर्पित नेताओं, कार्यकर्ताओं पर बाहरी नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने से बीजेपी बहुत तेजी से गर्त में जा सकती है। लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक यही संकेत मिला। अब जब उप-चुनाव हुए तो बीजेपी कैडर और इसके समर्थकों ने साफ बता दिया कि पैराशूट कैंडिडेट्स किसी को रास नहीं आ रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़ने वाले छह में से चार कैंडिडेट हार गए। यह पिछले महीने हुआ था। ताजा चुनाव में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने बीजेपी के टिकट पर उम्मीदवारी हासिल की थी। उनमें दो बुरी तरह हारे और एक किसी तरह जीत सका। 2024 के लोकसभा चुनावों की ही बात करें तो दूसरी पार्टियों से आए उन 26 कैंडिडेट्स में 21 हार गए जिन्हें बीजेपी ने टिकट दिए थे। इन 26 ने 2024 में ही बीजेपी जॉइन की थी। वैसे 2014 से दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आए कुल 110 नेताओं को इस बार पार्टी ने टिकट दिया था। इनमें 69 कैंडिडेट हार गए। साफ है कि मोदी को जिताने के लिए जनता आंखें मूंद लेने को अब तैयार नहीं है।

ऐसा नहीं है कि पार्टी नेता ये समझ नहीं रहे हैं। समझ रहे हैं और शीर्ष नेतृत्व को समझाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गोवा बीजेपी की कार्यसमिति की बैठक में साफ कहा कि हम पार्टी विद डिफरेंस हैं। हम भी अगर कांग्रेस की गलतियां करेंगे तो फिर उसे सत्ता से बाहर करके अपनी सरकार बनाने का क्या फायदा? हिमचाल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार खुद-ब-खुद गिरने वाली थी, लेकिन हमारी पार्टी बीजेपी ने हड़बड़ी कर दी और सब चौपट हो गया।

राजस्थान के मंत्री किरोड़ लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को कई पत्र लिखकर भ्रष्टाचार और सरकार के कामों में हीलाहवाली के प्रति सचेत किया। उचित सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प. बंगाल के बीजेपी चीफ दिलीप घोष ने इस बात पर नाराजगी जताई कि शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं को आसान जीत वाली सीटों से हटाकर चुनौतीपूर्ण सीटों से टिकट दिए। नतीजा यह हुआ कि पहले से खराब रिजल्ट आए। उत्तर प्रदेश के बदलापुर विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने कहा है कि प्रदेश में बीजेपी की हालत काफी गंभीर है और 2027 के विधानसभा चुनावों में जीत की कोई आस नहीं दिख रही है।

सवाल है कि क्या बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व अपने ही नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों, मतदाताओं के लगातार भेजे जा रहे संदेशों को अब सुनेगा? संभव है कि नहीं सुने। ऐसा इसलिए क्योंकि वह वोट प्रतिशत के चश्मे से चुनावी नतीजों का विश्लेषण करना ठीक समझ रही है। उसे लगता है कि मतदाता अब भी पार्टी के साथ है, वरना वोट प्रतिशत में भारी गिरावट आती। क्या यह सच है? हां, हो सकता है। मतदाता आज भी बीजेपी से दूर नहीं गया हो, लेकिन उसकी मायूसी कब विरोध में बदल जाए, यह समझना बहुत कठिन नहीं है।

आखिर कैसा है दिल्ली से बिहार तक का मौसम?

आज हम आपको बताएंगे कि दिल्ली से बिहार तक का मौसम आखिर कैसा है! दिल्ली-NCR समेत देशभर में मॉनसून सक्रिय हो गया है। कुछ राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है तो कुछ इलाकों में रुक- रुक कर बारिश हो रही है। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली-NCR में इन दिनों गर्मी और उमस से जीना मुहाल कर दिया है। एक तरफ दिल्ली के लोग उमस से परेशान हो गए हैं तो वही दूसरी और यूपी-बिहार के कई इलाकों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। दिल्ली में मॉनसून के आने के बाद भी उमस और गर्मी दिल्लीवासियों का पीछा छोड़ ही नहीं रही है। सोमवार को भी दिल्ली के कुछ इलाकों में बारिश हुई लेकिन उमस का प्रकोप फिर भी जारी रहा। आज के मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली के कई इलाकों में रिमझिम बारिश हो सकती है।चार-पांच दिनों में उत्तराखंड के मौसम का मिजाज बदलने वाला है, इसके मद्देनजर प्रदेश भर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि जान–माल का नुकसान न हो। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली का अधिकतम तापमान एक डिग्री बढ़ने की उम्मीद है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है।

यूपी-बिहार में झमाझम बारिश पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज भी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश और कुछ जगहों पर रिमझिम बारिश पड़ सकती है। मौसम विभाग ने आज उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बता दें कि मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है।इसके साथ ही सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर, बरेली और आसपास के इलाकों में बारिश के साथ वज्रपात की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग ने पूरे उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक आज प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने कहा कि 16 जुलाई को उत्तराखंड में अनेक जगहों पर हल्की-मध्यम बारिश की संभावना है। इसके साथ ही पर्वतीय जिलों नैना, चंपारण, पिथौरागढ़ और देहरादून में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, 17 और 18 जुलाई को प्रदेश में कई जगहों पर हल्की वर्षा होने की उम्मीद है। इस दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि चार-पांच दिनों में उत्तराखंड के मौसम का मिजाज बदलने वाला है, इसके मद्देनजर प्रदेश भर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि जान–माल का नुकसान न हो।

हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहने के बीच यहां के मौसम कार्यालय ने सोमवार को ‘येलो अलर्ट’ जारी करने के साथ सप्ताह के अंत में राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बता दें कि मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली के कई इलाकों में रिमझिम बारिश हो सकती है। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली का अधिकतम तापमान एक डिग्री बढ़ने की उम्मीद है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है। यूपी-बिहार में झमाझम बारिश पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज भी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश और कुछ जगहों पर रिमझिम बारिश पड़ सकती है। मौसम विभाग ने आज उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।इसके साथ ही मौसम विभाग ने महाराष्ट्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है।IMD ने मंगलवार यानी आज रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट और मुंबई, ठाणे, पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सतार और कोल्हापुर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।