Saturday, March 14, 2026
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संसद में हिंदू और आरएसएस पर क्या बोले राहुल गांधी?

हाल ही में राहुल गांधी ने संसद में आरएसएस और हिंदू पर एक बयान दिया है! राहुल गांधी ने सोमवार लोकसभा में कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने कई ऐसी बातें कहीं जिस पर सदन के भीतर जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी का सदन के भीतर अंदाज बतौर नेता प्रतिपक्ष बदला हुआ भी दिखाई दिया। शायद दस वर्षों में ऐसा पहली बार होगा जब राहुल गांधी के बयान पर प्रधानमंत्री मोदी ने हस्तक्षेप किया हो। राहुल गांधी के बयान पर कई और दूसरे मंत्रियों ने भी उन्हें टोका। बतौर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अग्निवीर, नीट और किसानों के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा। लेकिन सबसे अधिक हंगामा राहुल गांधी के हिंदू वाले बयान पर देखने को मिला। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में एक दिन कहा कि हिंदुस्तान ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। भारत अहिंसा का देश है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने कहा कि डरो मत, डराओ मत। शिवजी कहते हैं डरो मत-डराओ नहीं और त्रिशूल को जमीन में गाड़ देते हैं। दूसरी ओर जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं वो 24 घंटे हिंसा, हिंसा, नफरत,नफरत… आप हिंदू हो ही नहीं। राहुल गांधी के इतना कहते ही सत्ता पक्ष की ओर से हंगामा शुरू हो गया। इस बीच पीएम मोदी ने हंगामे के बीच खड़े होकर कहा कि पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना गंभीर बात है।राहुल गांधी ने भाषण के अंत में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की कई बातें तथ्यात्मक और सत्य नहीं है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इन बातों का सत्यापन किया जाए। बिरला ने कहा कि सत्यापन किया जाएगा। हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी और बीजेपी पूरा हिंदू समाज नहीं।

हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी पूरा हिंदू समाज नहीं हैं। बीजेपी पूरा हिंदू समाज नहीं है। आरएसएस पूरा हिंदू समाज नहीं है। ये ठेका बीजेपी का नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में भगवान शिव की तस्वीर दिखाई और कहा कि शंकर भगवान से सच, साहस और अहिंसा की प्रेरणा मिलती है। राहुल गांधी ने अयोध्या में बीजेपी की हार का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने भाजपा को एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा मुझ पर हमला किया गया। सरकार प्रधानमंत्री के आदेश पर मेरे खिलाफ 20 से अधिक मामले दर्ज किए गए, दो साल की सजा दी गई… मुझसे 55 घंटे तक पूछताछ की गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं भाजपा और आरएसएस को बताना चाहता हूं कि हमने किन विचारों का उपयोग भारत की अवधारणा की रक्षा करने के लिए किया है। राहुल गांधी ने भाषण के अंत में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की कई बातें तथ्यात्मक और सत्य नहीं है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इन बातों का सत्यापन किया जाए। बिरला ने कहा कि सत्यापन किया जाएगा।

राहुल गांधी ने अग्निपथ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सैनिकों में भेद पैदा कर दिया गया और अग्निवीरों की मृत्यु पर उन्हें शहीद का दर्जा और एक आम सैनिक की तरह उनके परिवारों को पेंशन और सहायता राशि नहीं मिलती। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि नेता विपक्ष सदन में गलतबयानी कर रहे हैं, जबकि सच यह है कि जान गंवाने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है। राहुल गांधी ने कहा कि सेना और अग्निवीरों को सब पता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निपथ योजना सेना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिमाग की उपज है।राहुल गांधी के इतना कहते ही सत्ता पक्ष की ओर से हंगामा शुरू हो गया। इस बीच पीएम मोदी ने हंगामे के बीच खड़े होकर कहा कि पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना गंभीर बात है। हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी और बीजेपी पूरा हिंदू समाज नहीं। हमारी सरकार आएगी तो इसे समाप्त कर देंगे। राहुल गांधी की ओर से किसानों की बात उठाई गई उनकी ओर से एमएसपी का जिक्र किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि किसानों को एमएसपी नहीं दिया जा रहा। जिस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने खड़े होकर राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।

हिंदुओं पर बयान देना क्या राहुल गांधी पर भारी पड़ेगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हिंदुओं पर बयान देना राहुल गांधी पर भारी पड़ेगा या नहीं! लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को बीजेपी पर देश में हिंसा, नफरत तथा डर फैलाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ‘ये लोग हिंदू नहीं हैं क्योंकि 24 घंटे की हिंसा की बात करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए यह बातें कहीं। राहुल के इस बयान पर अब बीजेपी आक्रामक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल ने इस मुद्दे पर सेल्फ गोल बीजेपी को बड़ा मौका दे दिया है। सदन में राहुल गांधी ने कहा कि हिंदू कभी हिंसा नहीं कर सकता, कभी नफरत और डर नहीं फैला सकता। सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक के बीच राहुल गांधी ने कहा कि जो अपने आप को हिंदू कहते हैं कि वो 24 घंटे हिंसा की बात करते हैं। आप (भाजपा) हिंदू नहीं हैं। राहुल गांधी ने जब भाजपा पर यह आरोप लगाया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताते हुए यह कहा कि कांग्रेस नेता ने पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहा है।

इस पर प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना ठीक नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता विपक्ष ने कहा है कि जो अपने आपको हिंदू कहते हैं वो हिंसा करते हैं। इनको मालूम नहीं है कि करोड़ों लोग अपने आप को गर्व से हिंदू को कहते हैं, क्या वो सभी लोग हिंसा करते हैं। उन्हें (राहुल) माफी मांगनी चाहिए।नेता प्रतिपक्ष ने सदन में भगवान शिव की तस्वीर दिखाई। राहुल ने कहा कि शंकर भगवान से सच, साहस और अहिंसा की प्रेरणा मिलती है। उनका कहना था, भगवान शिव कहते हैं कि डरो मत, डराओ मत। उन्होंने भगवान शिव की ‘अभय मुद्रा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्रा का उल्लेख इस्लाम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन, सभी धर्मों में हैं।

संसद में राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर अपनी बात रखी। नड्डा ने ट्वीट में लिखा पहला दिन, सबसे खराब प्रदर्शन! झूठ + हिंदू घृणा = संसद में राहुल गांधी जी। नड्डा ने आगे लिखा कि तीसरी बार असफल हुए नेता प्रतिपक्ष को उत्तेजित, दोषपूर्ण तर्क करने की आदत है। नड्डा का कहना था कि उनके आज के भाषण से पता चला है कि न तो उन्होंने 2024 के जनादेश को समझा है (उनकी लगातार तीसरी हार) और न ही उनमें कोई विनम्रता है। इसी बीच चिराग पासवान के दिवंगत पिता और रामविलास पासवान ने 10 दिसंबर 1998 को लोकसभा में एक बयान दिया था। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि किसी भी धर्म को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने हिंदू धर्म को लेकर यह भी कहा था कि वेदों में कहीं भी ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं मिलता। संसद में राम विलास पासवान ने कहा था कि वे लगातार ‘हिंदू धर्म-हिंदू धर्म’ सुन रहे हैं, लेकिन वे इस बहस में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि सदन में बहुत से पढ़े-लिखे लोग हैं, खासकर संस्कृत और वेदों के जानकार। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई वेदों, गीता या महाभारत में ‘हिंदू’ शब्द दिखा दे तो वे सजा भुगतने को तैयार हैं।अपने भाषण के दौरान उन्होंने वाल्मीकि और तुलसीदास द्वारा रचित रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों ही ग्रंथों में ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं है। उनका कहना था कि यह तो जीने का एक तरीका है, एक दूसरे के साथ कैसे रहना है। सहनशीलता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हर चीज में हिंदू, हिंदुत्व जोड़ा जा रहा है, जबकि हिंदू है ही नहीं तो हिंदुत्व कहां से आया? उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि ‘हिंदू’ शब्द विदेशियों द्वारा दिया गया नाम है, जो सिंधु को हिंदू बोलते थे।

नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी जी को सभी हिंदुओं को हिंसक कहने के लिए तुरंत उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। यह वही व्यक्ति है जो विदेशी राजनयिकों से कह रहा था कि हिंदू आतंकवादी हैं। हिंदुओं के प्रति यह अंतर्निहित नफरत बंद होनी चाहिए। विपक्ष के नेता ने हमारे मेहनती किसानों और बहादुर सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों सहित कई मामलों में झूठ बोला है।

हिंदू वाले विवाद पर राहुल गांधी से क्या बोले चिराग पासवान?

हाल ही में चिराग पासवान ने हिंदू वाले मुद्दे पर राहुल गांधी को खरी खोटी सुना दी है! केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास ) प्रमुख चिराग पासवान ने लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर सवाल उठाए है। सोमवार को राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। चिराग पासवान ने कहा कि राहुल गांधी के कुछ बातें तथ्य पर आधारित नहीं थे। चिराग पासवान ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। राहुल गांधी ने भगवान महादेव की तस्वीर को कागजों के नीचे रख दिया। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। चिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस की यही सोच है। डीएमके ‘सनातन’ को बीमारी मानती है। कांग्रेस भी इसी सोच से प्रभावित है।दरअसल, राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण के बाद सियासी हंगामा मच गया था। उनके भाषण के कुछ हिस्सों को संसद के रिकॉर्ड से हटा दिया गया। इन हिस्सों में हिंदुओं और पीएम नरेंद्र मोदी-बीजेपी-आरएसएस पर की गई टिप्पणी शामिल है। चिराग पासवान ने कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने भगवान शिव की तस्वीर लहराई और उसे कागजों के नीचे मेज पर रखा, वह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जिस गठबंधन का वे नेतृत्व कर रहे हैं, उसमें ऐसी सोच है। डीएमके ‘सनातन’ को बीमारी कहती है और कांग्रेस उसी सोच से प्रभावित है। चिराग के इस बयान के बीच उनके पिता राम विलास पासवान का 25 साल पुराना भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है।

चिराग पासवान के दिवंगत पिता और रामविलास पासवान ने 10 दिसंबर 1998 को लोकसभा में एक बयान दिया था। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि किसी भी धर्म को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने हिंदू धर्म को लेकर यह भी कहा था कि वेदों में कहीं भी ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं मिलता। संसद में राम विलास पासवान ने कहा था कि वे लगातार ‘हिंदू धर्म-हिंदू धर्म’ सुन रहे हैं, लेकिन वे इस बहस में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि सदन में बहुत से पढ़े-लिखे लोग हैं, खासकर संस्कृत और वेदों के जानकार। बता दें कि हिंदुत्व सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विश्वास और नजरिये का जटिल मेल है। यह भारतीय उप महाद्वीप में विकसित हुआ। मानवता पर विश्वास करता है। यह एक विचार है जो हर प्रकार के विश्वासों पर विश्वास करता है और धर्म, कर्म, अहिंसा, संस्कार व मोक्ष को मानता है और उनका पालन करता है । यह ज्ञान का रास्ता है, प्रेम का रास्ता है, जो पुनर्जन्म पर विश्वास करता है। यह एक जीवन पद्धति है। अंग्रेजी लेखिका केरीब्राउन ने अपनी चर्चित किताब ‘द इसेन्शियल टीचिंग्स ऑफ हिंदुइज्म’ में कहा है कि आज हम जिस संस्कृति को हिंदू संस्कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय सनातन धर्म या शाश्वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्त है जिस मजहब को पश्चिम के लोग समझते हैं।  उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई वेदों, गीता या महाभारत में ‘हिंदू’ शब्द दिखा दे तो वे सजा भुगतने को तैयार हैं।

अपने भाषण के दौरान उन्होंने वाल्मीकि और तुलसीदास द्वारा रचित रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों ही ग्रंथों में ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं है। उनका कहना था कि यह तो जीने का एक तरीका है, एक दूसरे के साथ कैसे रहना है। सहनशीलता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हर चीज में हिंदू, हिंदुत्व जोड़ा जा रहा है, जबकि हिंदू है ही नहीं तो हिंदुत्व कहां से आया? उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि ‘हिंदू’ शब्द विदेशियों द्वारा दिया गया नाम है, जो सिंधु को हिंदू बोलते थे। यही नहीं धार्मिक दिखावे पर कई लोगों के साथ उनके संघर्ष से पता चलता है कि वे किसी भी तरह के कर्मकांड, धार्मिक अंधविश्वास और जीवन के प्रति अवैज्ञानिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण के बिल्कुल खिलाफ थे। उनकी धर्मनिरपेक्ष साख जीवन के प्रति उनके तर्कसंगत मानवतावादी दृष्टिकोण पर आधारित थी और यह जीवन मृत्यु के बाद के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण था। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ये झगड़ा किसके लिए हो रहा है? डीएमके ‘सनातन’ को बीमारी कहती है और कांग्रेस उसी सोच से प्रभावित है। चिराग के इस बयान के बीच उनके पिता राम विलास पासवान का 25 साल पुराना भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है।मान लीजिए आज हिन्दू राष्ट्र की घोषणा हो जाए, उसके लिए क्या पद रहेगा?

आखिर क्या है हिंदू और हिंदुत्व की कहानी ?

आज हम आपको राजनीतिक रूप से हिंदू और हिंदुत्व की कहानी सुनाने जा रहे हैं! लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में भगवान शंकर की तस्वीर दिखाते हुए कहा था कि मोदीजी ने अपने भाषण में एक दिन कहा कि हिंदुस्तान ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। इसका कारण यह है कि हिंदुस्तान अहिंसा का देश है। यह डरता नहीं है। उन्होंने कहा, हमारे महापुरुषों ने यह संदेश दिया- डरो मत, डराओ मत। शिवजी कहते हैं- डरो मत, डराओ मत और त्रिशूल को जमीन में गाड़ देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं वो 24 घंटे हिंसा-हिंसा-हिंसा..नफरत-नफरत-नफरत… आप हिंदू हो ही नहीं। हिंदू धर्म में साफ लिखा है सच का साथ देना चाहिए। राहुल के इस बयान पर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आइए- जानते हैं कि हिंदू और हिंदुत्व का क्या मतलब है और बड़े-बड़े महापुरुषों ने इस बारे में क्या कहा है। यह शब्द कहां से चलन में आया, यह कहानी भी जानते हैं। राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उठे और कहा कि ये विषय बहुत गंभीर है। पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना ये गंभीर विषय है। इस मामले पर सियासत गरमा गई है।इतिहासकार डॉ. दानपाल सिंह बताते हैं कि हिंदुत्व शब्द कब चलन में आया, यह ठीक-ठीक तो नहीं पता, मगर इतिहासिक साक्ष्यों में इसका वजूद 5000 साल पहले से है। आज पूरी दुनिया में हिंदुत्व है, इसमें से करीब 90 फीसदी हिंदू आबादी भारत में रहती है। ईसाई और इस्लाम के बाद हिंदू धर्म दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। यह माना जाता है कि इंडो आर्यन और इंडो यूरोपियन भाषाएं संस्कृत से ही विकसित हुई हैं। सिंधु घाटी सभ्यता यानी हड़प्पा सभ्यता में हिंदुत्व के साक्ष्य मिट्टी की शिव की मूर्तियों में भी देखने को मिलती है। बाद में वैदिक ग्रंथों में भी हिंदू और हिंदुत्व के मौजूद होने के साक्ष्य मिलते हैं।

हिंदू शब्द उत्तर भारत में बहने वाली नदी के नाम पर पड़ा। यह नदी थी सिंधु नदी। हिंदू शब्द या हिंदुत्व भारतीय शब्द नहीं है। जब भारत में फारसी यानी ईरानी आए तो चूंकि उनकी भाषा में स शब्द नहीं है तो वो सिंधु नदी को हिंदू कहने लगे और भारत को हिंदुओं का देश बताने लगे। जब यह शब्द ईजाद हुआ, तब भारत करीब 3000 साल पहले के दौर से गुजर रहा था। britannica.com के अनुसार, हिंदू शब्द यूनानियों और फारसियों की देन है। बाद में 16वीं सदी में मुगलों और तुर्कों से खुद को अलग दिखाने के लिए भारतीयों ने खुद को हिंदू कहना शुरू किया। अंग्रेजी राज में औपनिवेशिक गुलामी से मुक्ति के लिए यह शब्द भारतीयों की पहचान बन गया।चीन की एक किताब है- रिकॉर्ड ऑफ द वेस्टर्न रीजंस। इसे चीन में दातांग शीयूजी या डा तांग शीयूजी कहा जाता है। दरअसल, यह किताब सातवीं सदी में सम्राट हर्षवर्धन के राज में आए चीनी यात्री और बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग की है, जो भारत में 19 साल तक रहे। उन्होंने हिंदुत्व को भारतीयों की धार्मिक आस्था के रूप में बताया है।

भारत में सती प्रथा को खत्म कराने वाले युगांतकारी नायक राजा राम मोहन राय ने हिंदुत्व शब्द की शुरुआत की। यह माना जाता है कि उन्होंने पहली बार हिंदुत्व को लेकर 1816-17 में लिखा। 1830 में ब्रिटिश उपनिवेश और अंग्रेजों के खिलाफ हिंदुत्व का इस्तेमाल किया गया। तभी से सनातन हिंदुत्व और खुद को हिंदू बताने का चलन तेजी से शुरू हुआ। महात्मा गांधी ने भी हिंदू धर्म क्या है, इस बारे में बताया है। उन्होंने कहा था- अगर मुझसे हिंदू धर्म की व्याख्या करने के लिए कहा जाए तो मैं इतना ही कहूंगा-अहिंसात्मक साधनों द्वारा सत्य की खोज। कोई मनुष्य ईश्वर में विश्वास नहीं करते हुए भी अपने आपको हिंदू कह सकता है। सत्य की अथक खोज का ही दूसरा नाम हिंदू धर्म है। 20 अक्टूबर 1927 में ‘यंग इंडिया’ में महात्मा गांधी ने “मैं हिंदू क्यों हूं” नाम से एक लेख लिखा। उसमें उन्होंने बताया कि मेरा जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ, इसलिए मैं हिंदू हूं। अगर मुझे ये अपने नैतिक बोध या आध्यात्मिक विकास के खिलाफ लगेगा तो मैं इसे छोड़ दूंगा।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी किताब इंडियन स्ट्रगल में लिखा है- भारत का इतिहास दशकों या सदियों में नहीं, बल्कि हजारों वर्षों में गिना जाना चाहिए। भौगोलिक, जातीय और ऐतिहासिक रूप से भारत किसी भी पर्यवेक्षक के लिए एक अंतहीन विविधता का प्रतिनिधित्व करता है। इस विविधता के पीछे एक मौलिक एकता है। सबसे महत्वपूर्ण मजबूत करने वाला कारक हिंदू धर्म रहा है। जवाहरलाल नेहरू ने 1929 में लाहौर कांग्रेस में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा था कि मैं जन्म से हिंदू हूं, मगर मुझे यह नहीं पता कि खुद को हिंदू कहना या हिंदुओं की ओर से बोलना कितना उचित है। नेहरू एक तर्कवादी थे जो अच्छी तरह जानते थे कि मानवीय मूल्य धार्मिक रूढ़िवादिता से श्रेष्ठ हैं।

धार्मिक दिखावे पर कई लोगों के साथ उनके संघर्ष से पता चलता है कि वे किसी भी तरह के कर्मकांड, धार्मिक अंधविश्वास और जीवन के प्रति अवैज्ञानिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण के बिल्कुल खिलाफ थे। उनकी धर्मनिरपेक्ष साख जीवन के प्रति उनके तर्कसंगत मानवतावादी दृष्टिकोण पर आधारित थी और यह जीवन मृत्यु के बाद के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण था।

अंतरराष्ट्रीय शब्दकोष वेबस्टर के अनुसार, हिंदुत्व सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विश्वास और नजरिये का जटिल मेल है। यह भारतीय उप महाद्वीप में विकसित हुआ। मानवता पर विश्वास करता है। यह एक विचार है जो हर प्रकार के विश्वासों पर विश्वास करता है और धर्म, कर्म, अहिंसा, संस्कार व मोक्ष को मानता है और उनका पालन करता है । यह ज्ञान का रास्ता है, प्रेम का रास्ता है, जो पुनर्जन्म पर विश्वास करता है। यह एक जीवन पद्धति है। अंग्रेजी लेखिका केरीब्राउन ने अपनी चर्चित किताब ‘द इसेन्शियल टीचिंग्स ऑफ हिंदुइज्म’ में कहा है कि आज हम जिस संस्कृति को हिंदू संस्कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय सनातन धर्म या शाश्वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्त है जिस मजहब को पश्चिम के लोग समझते हैं। कोई किसी भगवान में विश्वास करे या किसी ईश्वर में विश्वास नहीं करे फिर भी वह हिंदू है। यह एक जीवन पद्धति और मन की एक दशा है।

चुनाव प्रचार ख़त्म, छह राज्यों की नौ विधानसभा सीटों पर पश्चिम बंगाल की चार सीटों के साथ होगा मतदान।

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चुनाव प्रचार ख़त्म हो गया है, छह राज्यों की नौ विधानसभा सीटों पर बुधवार को पश्चिम बंगाल की चार सीटों के साथ मतदान होगा। पश्चिम बंगाल के राणाघाट दक्षिण, बागदा, मानिकतला, रायगंज समेत 13 विधानसभा क्षेत्रों में अगले बुधवार (10 जुलाई) को उपचुनाव होंगे। वोटों की गिनती 13 जुलाई को होगी.
लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद दोबारा वोट करें. देश के सात राज्यों के कुल 13 विधानसभा क्षेत्रों में बुधवार को उपचुनाव होंगे, जिनमें पश्चिम बंगाल के चार विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं। अभियान सोमवार शाम 6 बजे समाप्त होगा। इन 13 केंद्रों पर अगले बुधवार (10 जुलाई) को उपचुनाव होंगे. वोटों की गिनती 13 जुलाई (शनिवार) को होगी.

बंगाल के चार केंद्रों- नादिया के राणाघाट दक्षिण, उत्तर 24 परगना के बागदा, कोलकाता के मानिकतला और उत्तरी दिनाजपुर के रायगंज में उपचुनाव होंगे। इनमें मानिकतला में विधायक साधन पांडे के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है. चुनाव फिर से अपरिहार्य हो गए हैं क्योंकि तीन भाजपा विधायक कृष्णा कल्याणी, मुकुटमणि अधिकारी और बिस्वजीत दास, जिन्होंने रायगंज, राणाघाट दक्षिण और बगदा में 2021 की नीलबारी लड़ाई जीती थी, ने इस्तीफा दे दिया है और लोकसभा के लिए दौड़ने के लिए तृणमूल में शामिल हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश के देहरा, हमीरपुर और नालागढ़ के तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा में शामिल होने से पहले जन प्रतिनिधित्व संशोधन अधिनियम के बाद इस्तीफा दे दिया। तो वोटिंग है. देहरा में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश को मैदान में उतारा है. बिहार के रूपौली से जदयू विधायक बीमा देवी राजद में शामिल हो गईं और मध्य प्रदेश के अमरवाड़ा से कांग्रेस विधायक कमलेश प्रताप शाह भाजपा में शामिल हो गए।

उत्तराखंड के बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी ने इस्तीफा दे दिया और उस सीट पर उपचुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार बन गए। उस राज्य के मैंगलोर में विधायक की मृत्यु के कारण उपचुनाव हो रहा है। तमिलनाडु के विक्राबंदी में डीएमके विधायक की मौत और पंजाब के जालंधर पश्चिम में आप विधायक शीतल अंगुराल रिंकू के बीजेपी में शामिल होने के बाद बुधवार को उपचुनाव हो रहे हैं. इस बार रिंकू बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

राणाघाट में प्रचार करने पहुंचे बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उपचुनाव के दिन दोपहर 2 बजे के बाद तृणमूल के लोग चप्पा-चप्पा मार देंगे. तृणमूल नेतृत्व का दावा है कि कोई भी ऐसी बातें तब तक नहीं कह सकता जब तक वह ‘बीमार’ न हो.

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राणाघाट दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोजकुमार विश्वास के समर्थन में नोकारी और माजेरग्राम में मार्च और बैठक की। उन्होंने नारायण साहा मोर से पैदल चलने के बाद एक सड़क सभा में कहा, “मुकुटमणि ने सांसद बनने के लिए भाजपा छोड़ दी और तृणमूल में शामिल हो गए। उनके मकड़ी के जाले और तौलिए दोनों चले जाएंगे। पूर्व विधायक द्वारा लिखे गए पैड को मुद्रित किया जाना चाहिए।” दोपहर में राणाघाट रथतला गेट के पास नोकरी फूलबाजार तक। मुकुटमणि ने प्रतिवाद किया, “शुभेंदुबाबू पहले अपनी पार्टी संभालें। वे उपचुनाव से डरे हुए हैं।”

बीजेपी प्रत्याशी कृष्णानगर के रहने वाले हैं. अगर वे जीत गए तो आम जनता को संशय है कि वे क्षेत्र में मिलेंगे या नहीं. उस दिन शुभेंदु ने कहा, “आपने मनोज विश्वास को जीत लिया। मैं गारंटी देता हूं, वह आपके लिए यहां रहेंगे। वह आपके लिए काम करेंगे।” उन्होंने मतुआ प्रधान इस केंद्र में हरिचंद और गुरु चंद टैगोर का नाम लेकर मतुआ भावनाओं को भड़काने की भी कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि मतुआ वोट पहले भी उनके साथ था और इस बार भी उनके साथ रहेगा.

नोकरी में बैठक के अंत में शुवेंदु ने महेरग्राम पंचायत क्षेत्र में एक रोड-शो भी किया। शाम करीब साढ़े छह बजे के बाद उन्होंने गौरीशैल जीएएफ प्राइमरी स्कूल के सामने से रोड-शो शुरू किया. सड़क यात्रा के अंत में महेरग्राम बाजार में एक सड़क सभा का आयोजन किया गया। वहां बोलते हुए, शुवेंदु ने दावा किया, “शंकर सिंह, महुआ मैत्रेय ने मतदान के दिन दोपहर 2 बजे के बाद अनुपस्थित मतदाताओं के वोटों को दबाने की योजना बनाई है। आपको इसे रोकना होगा। आपको शंख बजाकर, हॉर्न बजाकर इसे रोकना होगा।”

यह सुनकर राणाघाट सांगठनिक जिला तृणमूल अध्यक्ष शंकर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, ”शुभेंदु अधिकारी को मस्तिष्क की समस्या है. शर्म आती है। बीजेपी जितना उनकी बात सुनेगी, पार्टी का उतना ही पतन होगा।”

घर में घुसते ही हो जाएंगे खुश, 3 तरह से बदलें इंटीरियर डेकोरेशन l

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अपने घर को इस तरह व्यवस्थित करना चाहिए कि निराशा के बादल पल भर में दूर हो जाएं। कैसे सजाएं इंटीरियर, उदासी होगी दूर? पूरे दिन के काम के अंत में शरीर ही नहीं बल्कि दिमाग भी थक जाता है। थके मन को शांत करने के लिए घर की सजावट में बदलाव करना जरूरी है। अपने घर को इस तरह व्यवस्थित करना चाहिए कि निराशा के बादल पल भर में दूर हो जाएं। कैसे सजाएं इंटीरियर, उदासी होगी दूर?

1) घर के चारों ओर रंगों का स्पर्श होना चाहिए. रंग मन का ख्याल रखते हैं. आप दीवार पर रंग-बिरंगे चित्र, रंग-बिरंगे पोस्टर, कैनवस टांग सकते हैं। मेज पर रखे फूलदान में कई रंग-बिरंगे फूल हैं। आप सोफे पर रंग-बिरंगे कुशन लगा सकते हैं। अगर घर बैठे रंग गोरा हो जाए तो परेशान होने का कोई मौका नहीं है।

2) बिस्तर के बगल में एक मेज, पढ़ने की मेज पर एक लैंप, लिविंग रूम में एक सोफा – कमरे को सजाने के लिए कुछ न कुछ रखना चाहिए। हालाँकि, ‘डोपामाइन सजावट’ का मतलब इस नियम को बाध्य करना नहीं है। आपको घर को अपनी इच्छानुसार सजाना है। भले ही उसे वहां नहीं रखा गया हो जहां उसे रखना चाहिए. टेबल तोड़ने का एक अलग ही मजा है. एक और एहसास है.

3) घर को सजाने का सारा खर्च अपने पास रखें। अलग से खरीदने की जरूरत नहीं. बच्चों के चित्र, बचपन की तस्वीरें, मोज़े, रंगीन पेंसिलें कई लोग संभालकर रखते हैं। लेकिन उन्हें बक्से में बंद करके रखने की बजाय अपने सामने रखें। आप अपने कमरे को उन चीज़ों से सजा सकते हैं जो बचपन की यादें ताज़ा कर दें। यह अच्छा होगा यदि आप बड़े होने पर भी अपने बचपन में वापस जा सकें।

कभी बारिश हो रही है तो कभी बादल छा रहे हैं. मानसून के दौरान आसमान का चेहरा हमेशा भारी रहता है। इस मौसम में कपड़े धोना एक बड़ा काम है! मानसून में कपड़े बालकनी में नहीं बल्कि पूरे घर में सुखाने पड़ते हैं। घर में गीले कपड़े लटकाने से कमरा दुर्गंध से भर जाता है। इस समय मानसून शुरू होने के कारण खिड़कियाँ बंद रखी जाती हैं। रात में फिर से मच्छर हो जाते हैं, इसलिए खिड़की खोलने का कोई रास्ता नहीं होता, इसलिए बाहर की रोशनी और हवा अंदर नहीं आ पाती। दिन के अंत में ऑफिस का काम खत्म करके घर में प्रवेश करने पर नाक में सीलन भरी गंध आती है। यहां तक ​​कि अगर आप बहुत सारे ‘रूम फ्रेशनर’ का उपयोग करते हैं, तो भी गंध बहुत लंबे समय तक नहीं रहती है। जानिए, कुछ घरेलू टोटके, जिन्हें अपनाने से मानसून में घर महकेगा, वातस्फीति से मिलेगा छुटकारा।

1) वापसा की गंध को दूर करने के लिए घर के किसी ऊंचे स्थान पर एक कटोरी में बेकिंग सोडा को थोड़े से सिरके के साथ मिलाएं। सिरका कमरे की गंध को सोख लेगा।

2) सुगंधित मोमबत्तियाँ बाजार में खरीदने के लिए उपलब्ध हैं। आप शाम को उन सभी मोमबत्तियों को जला सकते हैं। घर की खूबसूरती बढ़ेगी और बदबू भी दूर हो जाएगी।

3) पसंदीदा खुशबू वाले रूम फ्रेशनर का उपयोग करना उपयोगी नहीं है? पानी के एक बड़े कटोरे में अपने पसंदीदा आवश्यक तेल की कुछ बूँदें डालें। आप ऊपर कुछ गुलाब की पंखुड़ियाँ भी फैला सकते हैं। घर में दुर्गंध से छुटकारा पाने के लिए यह ट्रिक काम आ सकती है।

4) कपूर का प्रयोग किया जा सकता है. इस मौसम में घर पर कपूर खरीदें। घर में वासा की गंध आने पर कपूर जला दें। घर खुशबू से भर जाएगा, वह खुशबू लंबे समय तक रहेगी। अगर आपके पास कपूर नहीं है तो आप घर में भी इसका धुआं कर सकते हैं।

5) घर ही नहीं, इस मौसम में अलमारी खोलने से भी नाक में सीलन की बदबू आती है। इस समस्या को खत्म करने के लिए आप कपूर का एक टुकड़ा और दस काली मिर्च को एक कागज में लपेट लें। साथ ही नीम की कुछ पत्तियां बिखेरने से भी समस्या दूर हो जाएगी।

वह अभी-अभी ऑफिस से लौटा और सोफे पर झुक गया और अपनी आँखें बंद कर लीं। अचानक एक दोस्त का फ़ोन आया. वे झुंड में आ रहे हैं. दोस्तों के आने की बात सुनकर दिल भले ही खुशी से नाच रहा हो, लेकिन घर का हाल रोने जैसा है। पूरे हफ्ते की भागदौड़ और व्यस्तता में घर बदलता है, छुट्टियों के दौरान वॉल्यूम बदलने का दौर चलता है। लेकिन जब अचानक मेहमानों के आने की खबर आती है तो पढ़ना मुश्किल होता है. जल्दी में गड़बड़ हो जाती है. यदि आप अपना समय लें और कुछ चीज़ों पर नज़र डालें, तो आप अपने मेहमानों के सामने असहज महसूस नहीं करेंगे।

घर खुशबू से भर जाए

घर की स्थिति चाहे कैसी भी हो, अगर घर में प्रवेश करते ही मेहमान की नाक में खुशबू आ जाए तो मेहमान का आधा दिल वहीं जीता जा सकता है। इसलिए कमरे की सफाई शुरू करने से पहले रूम फ्रेशनर फैला लें। अथवा यदि सुगंधित धूपबत्ती हो तो भी आप उसे जला सकते हैं।

रोशनी से सजाएं
बिखरे हुए कपड़ों को व्यवस्थित करने से पहले कमरे में लैंपशेड जला लें। कमरा दीपक की धीमी रोशनी से भर जाएगा। बेहतर होगा कि आप कमरे की बड़ी लाइट बंद कर दें। हल्के-अंधेरे वातावरण में दोस्तों के साथ घूमना बुरा नहीं होगा।

रसोई में देखो

मेहमानों के आने पर ताक-झाँक न करें। हालाँकि, अगर कोई बहुत करीब है तो आप किचन में भी जा सकते हैं। ऐसे में एक बार किचन की सफाई करना जरूरी है। मसाले की फलियाँ व्यवस्थित रखें। कूड़ेदान को भी खाली करें।

मानसिक बीमारी पर काबू पाने के साथ आयोजित हुआ महोत्सव l

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‘प्रत्याय’ दूसरे वर्ष में प्रवेश, मानसिक बीमारी पर काबू पाने और मुख्यधारा में वापस लाने के वादे के साथ आयोजित हुआ महोत्सव यह यात्रा कुछ साल पहले शुरू हुई थी। सोमवार को उस ‘प्रत्यय’ की दूसरी वर्षगांठ थी। घर पर जन्मदिन मनाया गया.

वह अपने परिवार की छत्रछाया में रहते थे। लेकिन मानसिक बीमारी ने कई चीजें बदल दी हैं। जीवन का काफी समय लुंबिनी पार्क या पावलोव अस्पताल में बिताया। उचित इलाज से मानसिक बीमारी की जंजीरें टूट जाती हैं। लेकिन ठीक होने के बाद भी वह विभिन्न कारणों से घर नहीं लौटे. प्रत्यय उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश में लगे हुए हैं. मनोरोग रोगियों को ठीक करने के लिए यह घर दो वर्षों से समाज और मानसिक अस्पतालों के बीच एक सेतु के रूप में काम कर रहा है। यह उत्सव उस ‘सत्यापन’ की दो साल की सालगिरह के अवसर पर आयोजित किया गया था। सोमवार को घर पर जन्मदिन मनाया गया।

राज्य की महिला संरक्षण एवं बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह इसी घर में रहते थे। लेकिन अब वह अपने घर लौट आये हैं. कार्यक्रम की शुरुआत ऐसे ही एक पूर्व निवासी के गीत से हुई. घर में रहने वाली महिलाओं ने नाच-गाकर जश्न मनाया। इसके अलावा घर के निवासियों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प की प्रदर्शनी भी लगाई गई। बिस्तर की चादरों से हाथ से बना साबुन – ‘प्रत्या’ के करीबी लोगों, रिश्तेदारों ने प्रदर्शनी का दौरा किया। यह जश्न बुधवार तक जारी रहेगा.

जन्मदिन मनाने की अधिकांश जिम्मेदारी निवासियों के हाथ में थी। उनका उत्साह देखते ही बनता है. ‘अंजलि’ की निर्देशक और मनोसामाजिक कार्यकर्ता रत्नावली रॉय उस उत्साह और पहल को बहुत सकारात्मक रूप से देखती हैं। वह विभिन्न गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। कठपुतली बनाने की कार्यशालाओं से लेकर फिल्म समारोहों तक – प्रत्यय के निवासियों के साथ पूरे वर्ष विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ होती रहती हैं।
‘अंजलि’, ‘प्रत्या’ के बगल में है। ठीक हो रहे मनोरोगी सामान्य जीवन में लौटने का प्रयास करें। रत्नावली ने कहा कि कोलकाता लाइफ सपोर्ट सेंटर का कार्यभार संभालने के बाद अंजलि का मुख्य काम लुम्बिनी पार्क और पावलोव हॉस्पिटल में इलाज से ठीक हुए मनोरोग रोगियों के सामाजिक पुनर्वास की व्यवस्था करना था। प्रत्या से अब तक कुल छत्तीस निवासियों का सामाजिक पुनर्वास संभव हो सका है। उनमें से आठ कमा रहे हैं और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। शेष अट्ठाईस अपने परिवारों में लौट आए। लेकिन उनमें से कई अब न केवल परिवार से या परिवार से दूर अपने लिए कमा रहे हैं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं। कुल मिलाकर दो साल में छत्तीस लोगों की संख्या कोई बहुत छोटी नहीं है.

रत्नावली ने कहा, ”यह संख्या बढ़ सकती थी. वे स्थितियाँ जो यदि पूरी होतीं तो इसे संभव बनातीं, वे हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। अधिकांश नीति के बारे में हैं। उदाहरण के लिए, वे निवासी जिनके पास पहचान का कोई प्रमाण नहीं है, हो सकता है कि उनके पास पहले था, लेकिन अब नहीं है, या ऐसे निवासी के सभी दस्तावेज़ जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं, अपने परिवार के साथ रहे हैं, या कभी नहीं रहे हैं, उनके नागरिकता की पहचान सवालों के घेरे में है. जैसे-जैसे देश के कानून निगरानी बढ़ाते हैं, इन गैर-दस्तावेज लोगों का जीवन तेजी से बाधित होता जा रहा है। समाधान हमारे हाथ में नहीं है, दो साल तक अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने के बाद भी हम समझ नहीं पाए कि समाधान किसके पास है। यह हमारे लिए बहुत स्पष्ट नहीं है कि अगर पहचान पत्र के बिना उस व्यक्ति के लिए कमाई का कोई अवसर नहीं है तो उसे जेल क्यों भेजा जा रहा है।”

प्रयास के बावजूद कुछ दिक्कतें आ रही हैं। जैसा कि हर जगह होता है. यहां भी हैं। जो महिलाएं दृढ़ विश्वास के साथ आईं उनमें से अधिकांश को अस्पताल से पहले के जीवन में कमाई का कोई अनुभव नहीं था। उदयास ने कड़ी मेहनत की, लेकिन यह मुख्य रूप से परिवार का समर्थन करने के लिए थी। अब इस मध्य आयु में उन्हें पेशेवर जीवन में ढलने में समय लग रहा है। रत्नावली ने बात स्पष्ट की। उन्होंने आगे कहा, “ऐसे समय में जब उन्हें आत्मनिर्भर जीवन में पुनर्वासित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, एक पारंपरिक उपदेशक उच्च-स्तरीय पेशेवरों के एक सम्मेलन में आता है और महिलाओं को अपनी दृष्टि से दूर बैठने के लिए कहता है।” और ये दावा किसी को भी अस्वाभाविक नहीं लगता. उनका अनुरोध पूरा होने के बाद भी सम्मेलन जारी रहा। आप समझते हैं कि सामान्यता की अवधारणा सापेक्ष है। इस बार समस्या यह है कि, सत्ता संरचना में थोड़ा ऊपर होने के कारण, समाज निवासी महिलाओं की पेशेवर अनुभवहीनता को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं होगा। लेकिन इसके अभाव में उनका काम निपटाने में समय लग रहा है.”

रात में बिना मोबाइल इस्तेमाल किए त्वचा की देखभाल को दें 15 मिनट, जानें स्टेप बाई स्टेप देखभाल कैसे करें l

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व्यस्त दिन में त्वचा की देखभाल के लिए समय नहीं मिल पाता है। रात में भी मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। मेकअप के लिए 15 मिनट देने की बजाय त्वचा चमक उठेगी। चरण दर चरण विधि जानें.
पूरे दिन की व्यस्तता में खाने-पीने का भी समय नहीं मिलता। त्वचा की देखभाल नहीं हो पाती. जागकर, दिन का युद्ध आरम्भ हुआ, रात्रि को विश्राम करो। रोजमर्रा की इस भागदौड़ में त्वचा और बाल सबसे ज्यादा उपेक्षित होते हैं। दिनभर की थकान का असर आंखों और चेहरे पर साफ दिखने लगता है। बाहर की धूल, प्रदूषण से बाल रूखे, बेजान हो रहे हैं। आईने के सामने खड़े होकर आप हर दिन चौंक सकते हैं। त्वचा और बालों की स्थिति क्या है? दिन व्यस्त नहीं था, लेकिन रात में? सोने से पहले मोबाइल, टैब पर नजरें गड़ाने की बजाय त्वचा की देखभाल पर ध्यान दें। अगर आप इसे हर दिन पंद्रह मिनट भी दे सकें तो त्वचा ताज़ा और कोमल हो जाएगी।

जानें कि रात में अपनी त्वचा की देखभाल कैसे करें, चरण दर चरण।

साफ़ त्वचा

त्वचा की सफाई से शुरुआत करें। सबसे पहले अपने चेहरे को पानी से अच्छी तरह धो लें। अगर आप बाहर जाते हैं, भले ही आप पूरे दिन घर पर रहते हैं, तब भी त्वचा पर तेल, पसीना आदि जमा हो जाता है। और अगर आप मेकअप करती हैं तो उसे हटाना भी जरूरी है। सबसे पहले कॉटन पैड और मेकअप रिमूवर से मेकअप को अच्छी तरह हटा लें। नाक के दोनों तरफ, आंखों के नीचे अच्छे से पोंछ लें। इसके बाद अपने चेहरे पर थोड़े से जैतून के तेल से मसाज करें। अतिरिक्त तेल को टिश्यू पेपर से पोंछ लें और चेहरे को फेसवॉश से धो लें। जो लोग रोजाना बाहर जाते हैं, उनके लिए दिन में कम से कम दो बार फेस वॉश का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसके बाद आप स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं।

फेस पैक

अगर आपके पास समय है तो आप सोने से पहले फेस पैक लगा सकते हैं। चूंकि त्वचा को रात भर आराम मिलता है इसलिए फेस पैक लगाने से भी अच्छे परिणाम मिलते हैं। चाहे आपकी त्वचा तैलीय हो या शुष्क, उसी के अनुसार फेस पैक चुनें। अगर नहीं तो इसे घर पर ही बनाएं. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी (सामान्य और तैलीय त्वचा के लिए) या खट्टा दही, शहद और पका हुआ केला (शुष्क त्वचा के लिए) एक साथ मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं। इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें और धो लें। इस पैक को आप हफ्ते में दो बार लगा सकते हैं।

टोनर

अगर आप नियमित रूप से त्वचा पर टोनर का इस्तेमाल करेंगे तो आप देखेंगे कि मुंहासे, दाने, दाने की समस्या दूर हो जाएगी। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार टोनर चुनें। नीम, तुलसी, टी-ट्री ऑयल, ग्रीन टी से भरपूर टोनर तैलीय त्वचा पर बहुत अच्छा काम करते हैं। वहीं अगर त्वचा रूखी है तो गुलाब जल, शहद आदि से बना टोनर अच्छा काम करेगा। सुनिश्चित करें कि टोनर अल्कोहल-आधारित न हो। इससे त्वचा को नुकसान पहुंचेगा.

मॉइस्चराइज़र

शरीर कितना भी थका हुआ क्यों न हो, रात को सोने से पहले मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। यदि त्वचा अत्यधिक तैलीय है, तो चेहरा गीला होने पर थोड़ी मात्रा में मॉइस्चराइजर लगाएं। 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें और कॉटन पैड से धीरे से पोंछ लें। चेहरे के साथ-साथ गर्दन और गर्दन पर भी मॉइस्चराइजर लगाएं। हाथों, पैरों, घुटनों, कोहनियों पर मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। तैलीय त्वचा के लिए आप घर पर भी मॉइस्चराइजर तैयार कर सकते हैं। प्राकृतिक मॉइस्चराइजर बनाने के लिए थोड़ा सा दूध, नींबू का रस, दो बड़े चम्मच जैतून का तेल मिलाएं। इस मॉइस्चराइजर में मौजूद दूध त्वचा को मुलायम बनाएगा और जैतून का तेल त्वचा के पीएच स्तर को नियंत्रित करेगा।

पैरों की त्वचा की देखभाल

एक बार चेहरे की रूपरेखा तैयार हो जाने के बाद, पैरों पर ध्यान दें। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप, धूल-मिट्टी के कारण पैरों पर काले धब्बे बहुत जल्दी पड़ जाते हैं। जो लोग बंद पैर के जूते नहीं पहनते, उनका रंग जल्दी काला हो जाता है। जब तक आप अपने चेहरे पर फेस पैक या मॉइस्चराइजर लगाते हैं, तब तक अपने पैरों पर भी पैक लगाकर रखें। पपीते के कुछ टुकड़े लें और पेस्ट बना लें। इस बार इसमें शहद मिलाकर स्क्रब बना लें। इस मिश्रण को पैरों पर अच्छी तरह मलें। या फिर आप पके केले को शहद के साथ मिलाकर स्क्रब बना सकते हैं। इसे पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें और गुनगुने पानी से धो लें। सारे दोष दूर हो जायेंगे.

ऋषि फिलहाल विपक्षी बेंच पर बैठेंगे l

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फिलहाल सनॉक कुछ दिनों के लिए अपने घर यॉर्कशायर जा रहे हैं। 17 जुलाई को संसद का सत्र शुरू होने पर वह दोबारा लंदन लौटेंगे। नया नेता चुने जाने तक वह पार्टी का नेता बना रहता है। कल हार स्वीकार करने के कुछ ही मिनटों के भीतर, यह देखा गया कि एक्स हैंडल पर ऋषि सुनक का प्रोफ़ाइल विवरण बदल गया था। वहां पूर्व प्रधानमंत्री लिखा हुआ है. स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठता है कि अब पूर्व क्या करेगा? हालाँकि, सुनक खुद कई साक्षात्कारों में कह चुके हैं कि वह विपक्षी बेंच पर बैठेंगे। लेकिन यह पूरे कार्यकाल के लिए है या नहीं, इस पर कई लोग संशय में हैं।

फिलहाल सनॉक कुछ दिनों के लिए अपने घर यॉर्कशायर जा रहे हैं। 17 जुलाई को संसद का सत्र शुरू होने पर वह दोबारा लंदन लौटेंगे। नया नेता चुने जाने तक वह पार्टी का नेता बना रहता है। परिणामस्वरूप, वह कीयर स्टुरमर पर सवाल उठाने के लिए भी जिम्मेदार हैं। सुनक कुछ दिन पहले स्टार्मर की ही भूमिका में नजर आएंगे।

सुनक की दीर्घकालिक योजनाओं को लेकर भी काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि सुनक ने कैलिफोर्निया में अपने पुराने दोस्तों और सहकर्मियों के साथ संपर्क बनाए रखा है। वे वहां एक हेज फंड फर्म खोल सकते हैं। ब्रिटेन लौटने से पहले उन्होंने अमेरिका में ऐसी एक कंपनी चलाई। सुनक्स का कैलिफोर्निया में भी एक घर है। इसलिए उनके लिए वहां लौटना मुश्किल नहीं है.

एक और अटकल यह है कि अगर वह अमेरिका लौटते भी हैं तो यह तत्काल नहीं होगा। फिलहाल सुनक ब्रिटिश सांसद बने रहेंगे, शायद कुछ चैरिटी खोलने के बारे में सोचें। क्योंकि उनकी बेटियां अभी स्कूल में हैं. अगर वे स्कूल खत्म करने के बाद किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी में जाना चाहते हैं तो शायद ऋषि भी अमेरिका लौट आएंगे। ऋषि और उनकी पत्नी अक्षता की मुलाकात अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई थी।

सुनकों के पास धन की कमी नहीं होती। संपत्ति की सूची में ये शाही परिवार से ऊपर हैं। लेकिन अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों के पास अधिक विविध आय स्रोत हैं। उदाहरण के लिए, बोरिस जॉनसन एक भाषण देने के लिए लाखों पाउंड खर्च करते हैं। इस मामले में सुनक की बाजार कीमत इतनी अच्छी नहीं हो सकती है। न ही यह संभावना है कि प्रकाशक कोई संस्मरण लिखने के लिए अग्रिम मानदेय के रूप में बड़ी रकम लेकर उनके दरवाजे पर आएंगे। आख़िरकार, ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधान मंत्री के रूप में, सुनक के पास बताने के लिए कई कहानियाँ हो सकती हैं। लेकिन सुनक बहुत व्यंग्यात्मक या व्यंगात्मक नहीं माने जाते। परिणामस्वरूप, यदि वह एक सफल संस्मरण लिखना चाहता है, तो उसे एक पुस्तक लेखक को नियुक्त करना होगा।

एक विजयी लेबर पार्टी के सामने चुनौतियों की कोई कमी नहीं होती। अर्थव्यवस्था को बदलने, स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने, राजनेताओं में लोगों का भरोसा बहाल करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। साथ ही उन्हें फिलिस्तीन नीति के बारे में भी सोचना होगा. एक बिंदु पर, स्टुरमर ने कहा, इज़राइल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है। ब्रिटिश मुस्लिम समुदाय ने इसे बहुत अच्छी तरह से नहीं लिया। कम से कम चार सीटों पर लेबर उम्मीदवार केवल गाजा पर अपनी स्थिति के कारण निर्दलीय उम्मीदवारों से हार गए। दक्षिण लीसेस्टर में लेबर उम्मीदवार को हराने के बाद शौकत एडम ने कहा, ‘यह गाजा के लिए है’!
वयोवृद्ध नेता जेरेमी कॉर्बिन को ‘यहूदी विरोध’ के कारण लेबर पार्टी से बाहर निकाल दिया गया। वह निर्दलीय खड़े हुए और सात हजार वोटों से जीते। गाजा समर्थक रुख के कारण लेबर से निष्कासित नेता फैजा शाहीन के भारी मतदान के बाद टोरीज़ ने सरे में एक सीट जीती। Dewsbury और Batley सीटें भी निर्दलीय इकबाल मोहम्मद ने लेबर को हराकर जीतीं। निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू फेनस्टीन, जिन्होंने लेबर की गर्भपात नीति का मुखर विरोध किया है, भी स्टार्मर की सीट पर दूसरे स्थान पर रहे। इतना ही नहीं, बल्कि मुस्लिम क्षेत्रों में लेबर ने जो सीटें जीती हैं, वहां गाजा को लेकर जनता के असंतोष ने उन्हें अभियान में परेशान कर दिया है। ब्रैडफोर्ड वेस्ट में नाज़ शाह या बर्मिंघम यार्डली में जेस फिलिप्स का अनुभव अच्छा नहीं है। लेबर के मुस्लिम नेताओं द्वारा कई स्थानीय पार्षद पदों से इस्तीफा दे दिया गया है।

हालाँकि, अब लेबर पार्टी गाजा में युद्धविराम की वकालत कर रही है। लेकिन प्रधानमंत्री स्टार्मर और विदेश सचिव डेविड लैमी को गाजा के बारे में और अधिक सोचने की जरूरत है। हमें कश्मीर के बारे में भी सोचना होगा.

जब देशभर में लागू हुआ स्वदेशी कानून!

हाल ही में देश भर में स्वदेशी कानून लागू हो गया है! 30 जून खत्म होते ही देशभर में 1 जुलाई 2024 से तीनों नए कानून लागू हो गए। इसके तहत देश में पहली एफआईआर ग्वालियर में दर्ज की गई। जहां 1.80 लाख रुपये की कीमत की बाइक चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। अब से जो भी अपराध होगा। वह नए कानून के तहत ही दर्ज किया जाएगा। जबकि 1 जुलाई से पहले हुआ क्राइम पुराने कानून के हिसाब से ही दर्ज किया जाएगा। भले ही उस मामले में एफआईआर 1 जुलाई को या इसके बाद दर्ज की जाए। नए क्रिमिनल सिस्टम के तहत 15 अगस्त तक तमाम केंद्र शासित प्रदेशों में काम होने लगेगा। अन्य राज्यों में भी तकनीकी स्तर पर कार्य तेजी से हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नए कानूनों के तहत देश में पहली एफआईआर दिल्ली में नहीं बल्कि ग्वालियर में बाइक चोरी की दर्ज की गई है। दिल्ली में वेंडर के खिलाफ जो मामला दर्ज हुआ था। वह पुराने प्रावधान के तहत हुआ था। जिसे पुलिस ने रिव्यू के प्रावधान का उपयोग कर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के आजाद होने के 77 साल बाद आज भारत की न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी हो गई है। इसके बड़े फायदे होंगे। अंग्रेजों ने जो कानून बनाए थे।

उन्होंने 1 जुलाई से लागू हुए तीनों नए कानूनों को दंड की जगह न्याय देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि कानून बनाने से पहले इसके हर पहलू पर चार सालों तक विस्तार से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा की गई। आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा पहले कभी नहीं हुई। नए कानूनों में पहली प्राथमिकता महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को दी गई है। इसमें एक नया अध्याय जोड़कर इसे और अधिक संवेदनशील बनाया गया है। यह तीनों नए कानून सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली का सृजन करेंगे। इन कानूनों में आधुनिक से आधुनिक तकनीक को ना केवल अपनाया गया है। बल्कि ऐसा प्रावधान किया गया है कि अगले 50 सालों में भी आने वाली तकनीक भी इसमें समाहित हो सकें।

गृह मंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं को देखते हुए तीनों कानून देश की 8वीं अनुसूची की सभी भाषाओं में उपलब्ध होंगे और केस भी उन्हीं भाषाओं में चलेंगे। इसमें केवल हिंदी या इंग्लिश भाषा नहीं रखी गई है। नए कानूनों में आज के समय के हिसाब से धाराएं जोड़ी गई हैं। जिनसे लोगों को परेशानी थी। उन धाराओं को हटा दिया गया है। नए कानूनों में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता मिलेगी। देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और जस्टिस मिलेगा। नए कानूनों में सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने की टाइम लिमिट भी तय की गई है। इसके पूरी तरह लागू होने के बाद तारीख-पे-तारीख से निजात मिलेगी। किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज होने से सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में न्याय मिल सकेगा। नए कानूनों में अंग्रेजों के राजद्रोह कानून को जड़ से समाप्त कर दिया गया है। कुछ लोग ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि नए कानूनों में रिमांड का समय बढ़ा दिया गया है। यह सच नहीं है। नए कानूनों के तहत भी रिमांड का समय पहले की तरह ही 15 दिन का है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों में 60 दिनों के अंदर कुल 15 दिनों की रिमांड का प्रावधान किया गया है। 15 दिन की रिमांड की लिमिट को नहीं बढ़ाया गया है। इस बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है।

नए कानूनों में सात साल या इससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है। इससे न्याय जल्दी मिलेगा और सजा मिलने की दर को भी 90 फीसदी तक ले जाने में मदद मिलेगी। नए कानूनों पर करीब 22.5 लाख पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए 12 हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं। कई इंस्टीट्यूशंस को इसके लिए अधिकृत किया गया है और 23 हजार से अधिक मास्टर ट्रेनर्स को भी ट्रेंड किया जा चुका है। पहले कानूनों में केवल पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी लेकिन नए कानूनों में अब पीड़ितों और शिकायतकर्ता के अधिकारों की भी रखा करने का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए पहले के कानून में कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन इन कानूनों में पहली बार मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया। उन्होंने कहा कि देशभर के 99.9 फीसदी पुलिस थाने कंप्यूटराइज हो चुके हैं। ई-रिकॉर्ड जनरेट करने की प्रक्रिया भी 2019 से शुरू कर दी गई थी। जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट सभी डिजिटल होंगे।

उन्होंने बताया कि 2020 में सभी सांसदों, मुख्यमंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को पत्र लिखकर उनसे सुझाव मांगे गए।गृह सचिव ने देश के सभी आईपीएस और जिला अधिकारियों से इस संबंध में सुझाव मांगे। शाह ने बताया कि उन्होंने स्वयं 158 बार इन कानूनों की समीक्षा बैठक की। इसके बाद गृह मंत्रालय की समिति के पास इन्हें भेजा गया। जहां ढाई से तीन महीने तक इन पर गहन चर्चा के बाद कुछ राजनीतिक सुझावों को छोड़ते हुए 93 बदलावों के साथ इन बिलों को फिर से कैबिनेट ने पारित किया।