Friday, March 13, 2026
Home Blog Page 609

आखिर कहां से मिलती है धर्म की व्याख्या?

आज हम आपको बताएंगे कि धर्म की व्याख्या कहां से मिलती है! सबसे पुरानी सभ्यताओं में एक सिंधु घाटी की सभ्यता यानी हड़प्पा सभ्यता में आज भी दुनिया के कई देशों में लोगों की काफी दिलचस्पी है। यह सभ्यता कई कारणों से सिर्फ पुरात्तत्वविदों के लिए ही नहीं पूरी दुनिया के लिए भी हैरत का विषय है। सौ साल पहले 20 सितंबर, 1924 को दुनिया को पहली बार सिंधु (हड़प्पा) सभ्यता के बारे में पता चला था। ब्रिटिश राज द्वारा स्थापित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तत्कालीन महानिदेशक जॉन मार्शल ने इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज में यह बात कही थी। बता दें कि पाकिस्तान में कुछ लोगों को लगता है कि यह नामकरण थोड़ा पक्षपाती है क्योंकि हड़प्पा पंजाब में है, सिंध में नहीं। लेकिन असल में हड़प्पा ही वह जगह थी जहां सबसे पहले खुदाई हुई थी। कुछ हिंदू मानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता को सरस्वती सभ्यता कहा जाना चाहिए। कुछ लोग इसे सरस्वती सभ्यता के रूप में संदर्भित करते हैं, यह मानते हुए कि यह घग्गर-हकरा नदी के किनारे स्थित थी, जिसे वे पौराणिक सरस्वती नदी मानते हैं। इस सभ्यता की व्याख्या को लेकर भारत और पाकिस्तान, दो देशों में अलग-अलग नजरिए हैं। जॉन मार्शल ने इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज में एक रोमांचक घोषणा की। उन्होंने कहा था कि पुरातत्वविदों को बहुत कम ही ऐसा अवसर मिलता है, जैसा उन्हें सिंधु के मैदानों में खुदाई करने को मिला। उन्होंने कहा कि अब तक भारत के इतिहास के बारे में हमारी जानकारी ईसा से 300 साल पहले तक ही थी। लेकिन सिंधु घाटी में दो चौंकाने वाली जगहों – पंजाब के हड़प्पा और सिंध के मोहनजोदड़ो में मिले अवशेष बताते हैं कि वहां कभी समृद्ध शहर हुआ करते थे। ये शहर शायद सैकड़ों साल पुराने हैं। दिलचस्प बात ये है कि असल में इन खंडहरों की सही उम्र का पता एक पत्र के जरिए चला। 27 सितंबर 1924 को प्रोफेसर एएच सायसे ने अखबार के संपादक को लिखे पत्र में बताया कि वहां मिली मुहरें सुमेर में पाई गई मुहरों से मिलती-जुलती हैं, जो 2300 ईसा पूर्व की हैं।

19वीं सदी में अंग्रेजों को तो ये भी नहीं पता था कि ये खंडहर किसी बड़े सभ्यता के हैं। अंग्रेज वहां से ईंटें निकाल कर मुल्तान-लाहौर रेलवे लाइन बनाने में इस्तेमाल कर रहे थे। असल में सबसे पहली हड़प्पा की मुहर 1853 में ही अलेक्जेंडर कनिंघम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संस्थापक को वहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने इसे 1875 में जाकर दिखाया। पहले इस सभ्यता को सिंधु-सुमेरियन कहा जाता था लेकिन बाद में पता चला कि ये अपनी ही अलग सभ्यता थी। इसे बाद में सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाने लगा। लेकिन अब और भी जगहों पर इस सभ्यता के निशान मिले है जैसे कि सूख चुके घग्गर-हकरा नदी के किनारे और गुजरात के तट पर। इसलिए अब इस सभ्यता को सबसे पहले खोजे गए शहर के नाम पर – हड़प्पा के नाम से जाना जाता है।

1947 में भारत के विभाजन के समय इस सभ्यता के दो प्रमुख स्थल – हड़प्पा और मोहनजोदड़ो ,पाकिस्तान में चले गए। दोनों देशों ने इन जगहों से मिली चीजों को आपस में बांट लिया। 1970 के दशक तक, भारत के पास सिर्फ 10% ही हड़प्पा की मुहरें और चीजें थीं। लेकिन 2020 तक सरकार के प्रयासों से पूरे भारत में 1400 से ज्यादा हड़प्पा जैसी जगहें खोजी जा चुकी हैं। ये जगहें गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मिली हैं।

हड़प्पा सभ्यता का पुराना नाम सिंधु घाटी सभ्यता अब उतना सटीक नहीं रहा। चूंकि अब भारत में इस सभ्यता के और भी कई स्थल खोजे जा चुके हैं, इसलिए सिर्फ सिंधु शब्द ठीक नहीं बैठता। पाकिस्तान में कुछ लोगों को लगता है कि यह नामकरण थोड़ा पक्षपाती है क्योंकि हड़प्पा पंजाब में है, सिंध में नहीं। लेकिन असल में हड़प्पा ही वह जगह थी जहां सबसे पहले खुदाई हुई थी। अपनी ही अलग सभ्यता थी। इसे बाद में सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाने लगा। लेकिन अब और भी जगहों पर इस सभ्यता के निशान मिले है जैसे कि सूख चुके घग्गर-हकरा नदी के किनारे और गुजरात के तट पर। इसलिए अब इस सभ्यता को सबसे पहले खोजे गए शहर के नाम पर – हड़प्पा के नाम से जाना जाता है।कुछ हिंदू मानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता को सरस्वती सभ्यता कहा जाना चाहिए। कुछ लोग इसे सरस्वती सभ्यता के रूप में संदर्भित करते हैं, यह मानते हुए कि यह घग्गर-हकरा नदी के किनारे स्थित थी, जिसे वे पौराणिक सरस्वती नदी मानते हैं। वे हड़प्पा संस्कृति को वेदों और महाभारत में वर्णित सरस्वती नदी से जोड़ते हैं।

जानिए कब शुरू होगी देश में बारिश ?

आज हम आपको बताएंगे कि देश में बारिश कब शुरू होगी! दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देशभर के कई राज्यों में इन दिनों भीषण गर्मी से बुरा हाल है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक हीट वेव चल रही है। मौसम विभाग लगातार लू का अलर्ट जारी कर रहा है। अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टर लोगों को घर से कम से कम निकलने की सलाह दे रहे हैं। वहीं मॉनसून के आने में भी वक्त है। मौसम विभाग ने जून में कम बारिश का अनुमान जताया है। दिल्ली में बुधवार को 12 साल बाद सबसे गर्म रात रही और न्यूनतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से आठ डिग्री अधिक है। मौसम विभाग ने यह जानकारी दी। दिल्ली में इससे पहले जून 2012 में सबसे गर्म रात दर्ज की गई थी और उस दौरान न्यूनतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात यहां इस मौसम की सबसे गर्म रात रही और 33.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। भीषण गर्मी से राहत न मिलने के कारण दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और थकावट की शिकायत लाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सकों ने बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

राजधानी दिल्ली में पिछले 72 घंटों में तेज गर्मी की वजह से 5 लोगों की मौत हो गई है। ये मौतें हीटस्ट्रोक से हुई हैं और इन मौतों की जानकारी तीनों अलग-अलग अस्पतालों से मिली है। वहीं नोएडा के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हीटस्ट्रोक की वजह से संदेहजनक रूप से 14 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में हीटस्ट्रोक से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गर्मी से प्रभावित करीब 36 लोग भर्ती हैं।

मौसम विभाग ने दिल्ली समेत कई जगहों पर ली का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार, पश्चिमी और पूर्वी यूपी में 19 और 20 जून को हीटेवव का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और बिहार में लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में, हरियाणा, चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब के कई हिस्सों में, दक्षिण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में, बिहार के कुछ इलाकों में, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और जम्मू संभाग में लू से लेकर गंभीर लू का प्रकोप रहा। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 44-46°C के बीच रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून मुंबई पहुंचने के बाद थोड़ा रुक गया था, लेकिन अब रफ्तार पकड़ रहा है और 21-22 जून तक और आगे बढ़ने की उम्मीद है। मॉनसून आगे बढ़ने से उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। मुंबई मौसम विभाग के प्रमुख सुनील कांबले ने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद मॉनसून थोड़ा कमजोर पड़ गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। 21-22 जून तक यह और मजबूत हो जाएगा और महाराष्ट्र के समुद्र के किनारे वाले इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। उसी समय, मध्य महाराष्ट्र में, जिसमें मराठवाड़ा भी शामिल है, हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मुंबई के कुछ इलाकों में बुधवार सुबह हल्की बारिश हुई, लेकिन गर्मी इतनी तेज है कि इससे खास राहत नहीं मिली। मॉनसून समय से पहले 9 जून को मुंबई पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसकी गति धीमी हो गई है। अभी तक उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ के कुछ इलाकों में बारिश नहीं हुई है। 1 जून से शुरू हुए मॉनसून सीजन में अब तक भारत में सामान्य से 20% कम बारिश हुई है, क्योंकि 12 से 18 जून के बीच बारिश वाली हवाओं ने ज्यादा गति नहीं पकड़ी।

मौसम विभाग ने मंगलवार को बताया कि जून में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। जून और जुलाई कृषि के लिए मॉनसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान खरीफ की फसलों की बुवाई ज्यादातर हो जाती है। कम बारिश का मतलब है कि इस साल फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

मौसम विभाग ने बुधवार को अपने पूर्वानुमान में बताया कि जून में पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, क्योंकि मॉनसून की प्रगति धीमी हो गई है। जून में दक्षिणी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जबकि गर्मी की लहर से जूझ रहे उत्तरी और मध्य राज्यों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। आईएमडी के एक बयान के अनुसार, ‘दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक मासिक वर्षा होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम और उससे सटे मध्य भारत के कई क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।’ इस महीने के दौरान 11 उप-मंडलों में सामान्य से अधिक तथा 25 में सामान्य से बहुत कम वर्षा हुई।

भीषण गर्मी के बारे में क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा?

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भीषण गर्मी के बारे में एक बयान दे दिया है! राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार को लू की स्थिति और केंद्र सरकार के अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की। नड्डा ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को बेहतर देखभाल प्रदान करने के लिए सभी अस्पताल तैयार रहें। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि भीषण गर्मी के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में विशेष इकाइयां शुरू की जाएं। दिन के सबसे गर्म समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच में बाहरी कार्यक्रमों की योजना बनाने से बचें। अगर कोई कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं, तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था और बैठने के लिए ठंडी जगह सुनिश्चित करें।केंद्र ने इस महीने की शुरुआत में, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया था कि वे सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में आग और विद्युत सुरक्षा उपायों को लागू करें तथा भीषण गर्मी से बीमार लोगों के लिए विशेष कक्ष आदि स्थापित करें।स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि हर जिले अधिकारी हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करें। हर शहर और इलाके के हीट इंडेक्स के मुताबिक ही वहां का एक्शन प्लान तैयार करें। इसके साथ ही राज्यों को जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राज्य और जिला टास्क फोर्स के साथ बैठक करने का भी निर्देश दिया गया है।मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में हीटस्ट्रोक से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गर्मी से प्रभावित करीब 36 लोग भर्ती हैं। 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सभी राज्य लू से संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों का डेटा भी रिपोर्ट करें। 1 मार्च 2024 से हीटस्ट्रोक से मौतों का डेटा IHIP पोर्टल पर जमा किया जाए। वहीं अडवाइजरी में कहा गया है कि मौसम विभाग द्वारा रोजाना शाम 4 बजे के बाद जारी पूर्वानुमान की जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। समय-समय पर लोगों को लू से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक करने के लिए हेल्थ अडवाइजरी जारी करें।

अडवाइजरी में कहा गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लू से बचने के उपाय और जागरुकता के बारे में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि इनके माध्यम से आम लोगों लू को लेकर जागरुक हो सकें। इससे बचने के लिए प्राथमिक उपचार वगैरह की बेसिक जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। लू से बचने के लिए ओआरएस पैकेट, जरूरी दवाएं, IV फ्लुइड्स, आइस पैक और अन्य उपकरणों की पर्याप्त मात्रा की खरीद और आपूर्ति हो। लू से संबंधित रोगियों के इलाज के लिए अस्पतालों में इमरजेंसी सुविधा हो और एसी एंबुलेंसों की व्यवस्था या खरीद भी हो।

गर्मी के मौसम में सामूहिक सभा या खेल आयोजन करते समय, स्वास्थ्य विभागों और स्थानीय प्रशासन से बातचीत करके लू से बचने के लिए सभी जरूरी तैयारियों को पूरा किया जाना चाहिए। बता दें कि राजधानी दिल्ली में पिछले 72 घंटों में तेज गर्मी की वजह से 5 लोगों की मौत हो गई है। ये मौतें हीटस्ट्रोक से हुई हैं और इन मौतों की जानकारी तीनों अलग-अलग अस्पतालों से मिली है। वहीं नोएडा के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हीटस्ट्रोक की वजह से संदेहजनक रूप से 14 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में हीटस्ट्रोक से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गर्मी से प्रभावित करीब 36 लोग भर्ती हैं। 

किसी भी सामूहिक कार्यक्रम करने से पहले हीट वेव का पूर्वानुमान देख लें। ऐसे दिनों से बचें जिनमें हीटवेव का अलर्ट हो।वहीं अडवाइजरी में कहा गया है कि मौसम विभाग द्वारा रोजाना शाम 4 बजे के बाद जारी पूर्वानुमान की जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। समय-समय पर लोगों को लू से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक करने के लिए हेल्थ अडवाइजरी जारी करें। दिन के सबसे गर्म समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच में बाहरी कार्यक्रमों की योजना बनाने से बचें। अगर कोई कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं, तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था और बैठने के लिए ठंडी जगह सुनिश्चित करें।

मोदी के इटली जाने से क्यों खफा है विपक्ष ?

वर्तमान में विपक्ष मोदी के इटली जाने से खफा नजर आ रहा है! G-7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इटली यात्रा तीसरे कार्यकाल में उनकी पहली विदेश यात्रा और सात देशों के समूह के बैठक (जी-7) में जाने का उनका पांचवां कार्यक्रम था। हालांकि इटली में उनके गर्मजोशी से हुए स्वागत ने कई लोगों, विशेष रूप से इसने कांग्रेस पार्टी को परेशान कर दिया। क्योंकि कांग्रेस पीएम मोदी की इटली यात्रा के पीछे के उद्देश्य पर सवाल उठाती रही। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की नाराजगी का कारण अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला (वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला) का ‘डर’ हो सकता है, जो उसे परेशान कर रहा है। खासकर ऐसे समय में जब वह लोकसभा चुनाव में पार्टी की सफलता का जश्न मना रही है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी सवाल किया, ‘जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की इटली यात्रा के बारे में कांग्रेस लगातार क्यों शिकायत कर रही थी’ और उन्होंने यह भी विवरण साझा किया कि सबसे पुरानी पार्टी को क्या परेशान कर रहा है। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय दैनिक ने सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि इटली ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले पर अपनी अदालत के 225 पृष्ठों के विस्तृत फैसले और रिश्वत घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेजों को भारत के साथ साझा किया है। इससे साफ है कि ये दस्तावेज पूरे खेल को पलट सकते हैं और भारत में उच्च प्रोफाइल वाले राजनेताओं और बिचौलियों को उनके इस अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है।

इसमें यह भी दावा किया गया कि पीएम मोदी की हाल की इटली यात्रा से लौटने के बाद इस वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले में जांच और अभियोजन गति पकड़ सकता है। इस मामले में भारत में इसको लेकर रिश्वत प्राप्त करने वालों के नाम इतालवी अदालत के दस्तावेजों में सील कर दिए गए। हेलिकॉप्टर घोटाला भले ही भारत में अंजाम तक नहीं पहुंचा हो, लेकिन इतालवी अदालत ने भारतीय समकक्षों को रिश्वत देने वालों को इस मामले में दोषी ठहराया है।बता दें कि 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी जब पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने, उसके लगभग 8 महीने पहले, इटली की एक अदालत ने भारत से जुड़े सबसे बड़े रिश्वत घोटालों में एक हाई प्रोफाइल कंपनी के सीईओ, एक इतालवी रक्षा कंपनी के अध्यक्ष और दो बिचौलियों सहित चार लोगों को दोषी ठहराते हुए एक फैसला सुनाया था। इस मामले में वहां की अदालत में दर्ज अभियुक्तों के पूरे बयान, अपीलों का पूरा लेखा-जोखा और अदालत के अंतिम फैसले को 2013 में भारत के दबाव में तत्कालीन इतालवी सरकार द्वारा कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया था, क्योंकि इससे भारत के राजनीतिक और नौकरशाही प्रतिष्ठानों में भूचाल आ सकता था।

इन दस्तावेजों के जरिए जो खुलासा होता उससे भारत के प्रमुख राजनीतिक परिवार और बिचौलियों के पूरे नामों का खुलासा हो जाता, जिन्हें अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में 600 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत मिली थी। इस मामले में भारत में इसको लेकर रिश्वत प्राप्त करने वालों के नाम इतालवी अदालत के दस्तावेजों में सील कर दिए गए। हेलिकॉप्टर घोटाला भले ही भारत में अंजाम तक नहीं पहुंचा हो, लेकिन इतालवी अदालत ने भारतीय समकक्षों को रिश्वत देने वालों को इस मामले में दोषी ठहराया है। बता दें कि खासकर ऐसे समय में जब वह लोकसभा चुनाव में पार्टी की सफलता का जश्न मना रही है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी सवाल किया, ‘जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की इटली यात्रा के बारे में कांग्रेस लगातार क्यों शिकायत कर रही थी’ और उन्होंने यह भी विवरण साझा किया कि सबसे पुरानी पार्टी को क्या परेशान कर रहा है। अब बताया जा रहा है कि इटली के द्वारा भारत को सौंपे गए सीलबंद इतालवी दस्तावेजों में रक्षा घोटाले में रिश्वत पाने वालों के नाम भी हैं। इटली ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले पर अपनी अदालत के 225 पृष्ठों के विस्तृत फैसले और रिश्वत घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेजों को भारत के साथ साझा किया है। इससे साफ है कि ये दस्तावेज पूरे खेल को पलट सकते हैं और भारत में उच्च प्रोफाइल वाले राजनेताओं और बिचौलियों को उनके इस अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है।इससे यूपीए-2 के दौरान सत्ता में बैठे लोगों के लिए खतरे की घंटी बजना तय है और सबसे बड़े रक्षा घोटालों में से एक, जो एक दशक तक दबा रहा, वह अब बाहर आने के लिए तैयार नजर आ रहा है।

आखिर कैसा है C-130J हरक्यूलस विमान?

आज हम आपको C-130J हरक्यूलस विमान की विशेषताएं बताने जा रहे हैं! कुवैत में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले 45 भारतीयों का शव स्वदेश आ चुका है। भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलस विमान से इन शवों को कोच्चि लाया गया। ये पहली बार नहीं है जब एयरलिफ्ट मिशन में C-130J को उतारा गया। पहले भी कई सर्च, रेस्क्यू समेत दुनियाभर में सामरिक एयरलिफ्ट मिशन में इनका इस्तेमाल होता रहा है। पिछले साल उत्तरकाशी में जब सुरंग हादसा हुआ था, जिसमें कई मजदूर फंस गए थे। उस समय भी भारतीय वायुसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन में इसका इस्तेमाल किया था। इस तरह के अहम मिशन में C-130J सुपर हरक्यूलस को उतारा जाना इसकी खास खूबियों के चलते है। जानिए क्यों भारतीय वायुसेना स्पेशल ऑपरेशन में इसके उतारने से पीछे नहीं हटती। 34 टन से भी ज्यादा वजन वाला C-130J सुपर हरक्यूलस विमान छोटे और रफ एयरस्ट्रिप पर भी उतर सकता है। भारतीय वायुसेना ने 2007 में इनका ऑर्डर दिया था। धीरे-धीरे इसे अपग्रेड किया गया। इन्‍हें एक्‍सप्रेसवे पर भी लैंड कराया जा चुका है। इन विमान की ऊंचाई करीब 15 मीटर और लंबाई 30 मीटर है। ये एक बार में करीब 19 टन वजन उठा सकता है। यह चार इंजन वाला टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान है। अमेर‍िकी वायुसेना इसे सैन‍िकों को ले जाने के ल‍िए इस्‍तेमाल करती है।

इस विमान को अमेरिकी सुरक्षा और एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है। C-130J सुपर हरक्यूलस, 643 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। ये एक बार में 68 हजार किलोमीटर तक जा सकता है। कुवैत से भारत की दूरी करीब 5100 क‍िलोमीटर है। इसी के चलते इंडियन एयरफोर्स ने कुवैत से भारतीयों के शवों को वापस लाने में इस विमान का इस्तेमाल किया। C-130J सुपर हरक्यूलस की लैंडिंग में समस्या नहीं होती। ये छोटे रनवे, ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी लैंड करने में सक्षम है। खराब मौसम का भी इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। सर्च और रेस्क्यू के काम में भी इसकी मदद ली जाती है। इस विमान से बड़ी संख्या में सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है। इस विमान से टैंक भी भेजे जा सकते हैं। बीते साल जब उत्तरकाशी हादसा हुआ था तो कई मजदूर इसमें फंस गए थे। उन्हें निकालने के लिए चल रहे रेस्क्यू में भी C-130J का इस्तेमाल हुआ था। इसी के जरिए ड्रिल मशीनें रेस्क्यू वाली जगह पहुंचाई गई थी। ये विमान 90 लोगों को लेकर उड़ान भर सकता है। सैनिकों को भेजने में ये अहम रोल निभा सकता है।

भारत के अलावा अमेरिकी वायु सेना, यूएस मरीन कॉर्प्स, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इटली और ब्रिटेन की सेना भी इसका इस्‍तेमाल करती है। ये दुनिया का सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे स्पेशल ऑपरेशन में उतारा जाता है। सी-130जे पहले से ज्यादा तेज है। बता दें कि अमेरिकी रक्षा विभाग की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को मजबूती प्रदान करने तथा एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा को दुरुस्त करने में मदद करके अमेरिका की विदेश नीति एवं राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन करेगी। डीएससीए ने अमेरिकी कांग्रेस को एक प्रमुख बिक्री अधिसूचना जारी कर कहा कि हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं आर्थिक प्रगति के लिए भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति बना हुआ है। ये ज्यादा दूरी तक जाता है और पुराने प्लेटफॉर्म की तुलना में ज्यादा वजन ले जाने में सक्षम है।

भारत ने जो अनुरोध किये हैं, उनमें विमानों में खप सकने वाले कलपुर्जे और मरम्मत तथा वापसी वाले पुर्जे, कारट्रिज एक्चुएटिड उपकरण या प्रोपेलेंट एक्चुऐटिड उपकरण (सीएडी या पीएडी), अग्निशमन कारट्रिज, आधुनिक रडार चेतावनी रिसीवर शिपसेट और जीपीएस आदि शामिल हैं। इनकी कुल कीमत नौ करोड़ डॉलर है। पेंटागन ने कहा कि प्रस्तावित बिक्री सुनिश्चित करेगी कि पहले खरीदे जा चुके विमान भारतीय वायु सेना, सेना और नौसेना की परिवहन जरूरतों, स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता तथा क्षेत्रीय आपदा राहत के लिए प्रभावी तरीके से काम कर सकें। उसने कहा कि उपकरणों और सेवाओं की यह बिक्री वायु सेना को सी-130जे परिवहन विमानों के संदर्भ में मिशन के लिहाज से तैयार रहने की स्थिति में रखेगी। भारत को इस अतिरिक्त सहायता को प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं आएगी। पेंटागन के अनुसार इन उपकरणों की प्रस्तवित बिक्री क्षेत्र में मूलभूत सैन्य संतुलन को नहीं बदलेगी। प्रमुख अनुबंधकर्ता लॉकहीड-मार्टिन कंपनी (जॉर्जिया) होगी। अमेरिका ने 2016 में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार घोषित किया था। इसके तहत अमेरिका अपने कई आधुनिक हथियारों को बिना यूएस कांग्रेस की मंजूरी के सीधे भारत को बेंच सकता है।

क्या पन्नू की बात पर आमने-सामने होंगे अमेरिका और भारत?

आने वाले समय में अमेरिका और भारत पन्नू की बात पर आमने-सामने हो सकते हैं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने अभी इटली गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी वहीं हैं। दक्षिणी इटली के पुगलिया में सम्मेलन का आयोजन किया गया है। माना जा रहा है कि मोदी और बाइडेन की अकेले में मुलाकात भी हो सकती है। तो क्या बाइडेन अपने देश में ‘खालिस्तानी आतंकी’ गुरपतवंत पन्नू की हत्या की साजिश रचे जाने का मामला मोदी के सामने उठाएंगे? बाइडेन के इटली जाने के साथ ही व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच ‘मुलाकात’ की संभावना है।अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलिवन ने भी कहा कि अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ हत्या की नाकाम साजिश ‘अमेरिका और भारत के बीच बातचीत का एक निरंतर विषय होगा, जिसमें बहुत वरिष्ठ स्तर पर भी बातचीत शामिल है।’ राजनयिक सूत्रों ने मोदी-बाइडेन बैठक में इस मुद्दे के उठने की संभावना से इनकार नहीं किया। सितंबर में मोदी के साथ अपनी बैठक के दौरान बाइडेन ने इस मुद्दे को उठाया था। सुलिवन खुद अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। तब वो अमेरिका के आरोपों पर भारत की जांच में प्रगति या उसकी कमी पर चर्चा कर सकते हैं। चेक अदालत ने फैसला सुनाया कि गुप्ता को उनके विरुद्ध आरोपों का सामना करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है।हालांकि इस यात्रा की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुलिवन 18 जून को यहां आने वाले हैं।

 दरअसल, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका की नागरिकता ले रखी है और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहता है। जब पन्नू को मारे जाने की साजिश रचने की बात सामने आई तो अमेरिका आग बबूला हो गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस बात पर रोष जताया कि एक भारतीय अधिकारी ने पन्नू की हत्या के लिए सुपारी किलर की तलाश में एक भारतीय नागरिक से संपर्क किया। दावा है कि इस साजिश का पता अमेरिकी खुफिया विभाग को था, इसलिए पन्नू की जान बच गई। अमेरिका के आरोप पर भारत ने घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।  अमेरिकी न्याय विभाग ने मैनहट्टन की एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि भारत सरकार के एक कर्मचारी ने एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या को एक हत्यारे की तलाश करने का काम सौंपा। कथित तौर पर अमेरिकी अधिकारियों ने इस साजिश को नाकाम कर दिया था।

चेकोस्लोवाकिया सरकार के अधिकारियों ने 30 जून, 2023 को अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। गुप्ता पर सुपारी किलिंग का आरोप है। इसके लिए अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मामले के बारे में कुछ खास प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। उसने कहा कि जांच की उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जब तक अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक वह कुछ नहीं कहेगा। भारत ने आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें ‘अनुचित और निराधार’ बताया। भारत सरकार ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है। कथित साजिश ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। रूस ने अमेरिका की तरफ से उपलब्ध कराए गए साक्ष्य पर सवाल उठाया। उसने कहा कि पन्नू ही हत्या की साजिश में भारतीय नागरिकों को शामिल होने का कोई पुष्ट सबूत नहीं है। चेक अदालत ने फैसला सुनाया कि गुप्ता को उनके विरुद्ध आरोपों का सामना करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

यह मामला अभी भी कानूनी रूप से उलझा हुआ है। अमेरिका ने कानूनी-कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए निखिल गुप्ता के खिलाफ जांच जारी रखी है। भारत सरकार कथित साजिश में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करती रही है और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस मामले में घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। उधर, आतंकी पन्नू वक्त-वक्त पर वीडियो जारी कर भारत को खुलेआम धमकियां देता है, लेकिन उसकी हरकतों से अमेरिका के कानों पर जूं नहीं रेंगती है। इस बीच नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में अजित डोभाल का ही कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सवाल है कि क्या अमेरिका को इस बात से भी खुन्नस खा सकता है। दरअसल, पन्नू हत्या की कथित साजिश के पीछे वह डोभाल का ही हाथ मानता है।

क्या मोदी सरकार कतर सरकार से ला पाएगी निखिल ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मोदी सरकार कतर सरकार से निखिल ला पाएगी या नहीं! अमेरिका में सिख अलगाववादी की हत्या कराने की साजिश करने के आरोपी निखिल गुप्ता पर अमेरिका की अदालत में केस चलेगा। 53 वर्षीय गुप्ता को न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में अमेरिका सरकार के अनुरोध पर 30 जून, 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था। गुप्ता को 14 जून को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल मेरिक गार्लैंड के अनुसार गुप्ता पर सुपारी देकर हत्या कराने और साजिश रचने के आरोप हैं। आरोपों की जांच के लिए भारत पहले ही एक जांच समिति गठित कर चुका है। अमेरिकी जांचकर्ताओं का दावा है कि गुप्ता को एक भारतीय सरकारी एजेंट की तरफ से काम पर रखा गया था। अगर गुप्ता को दोषी करार दिया जाता है तो उसे प्रत्येक आरोप के लिए अधिकतम 10 साल कैद की सजा सुनाई जा सकती है। वहीं, गुप्ता इस मामले में खुद को बेगुनाह बता रहे हैं। अब सवाल है कि क्या मोदी सरकार निखिल गुप्ता को अमेरिका से उसी तरह छुड़ा पाएगी जिस तरह उसने कतर में फांसी की सजा पाए 8 पूर्व नौसैनिकों को भारत लाने में कामयाब रही थी। हालांकि, कतर की शासन प्रणाली और अमेरिका की शासन प्रणाली में अंतर हैं। कतर में अमीर का शासन चलता है। इसके उलट अमेरिका में लोकतांत्रिक प्रणाली है।

निखिल गुप्ता, जिन्हें ‘निक’ के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय नागरिक हैं। सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोपी गुप्ता को फिलहाल ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार निखिल गुप्ता बिजनेस और टूरिज्म के लिए चेक गणराज्य गए थे। दूसरी तरफ, चेक गणराज्य के अधिकारियों को बताया गया था कि वो एक ड्रग बिजनेसमैन हैं। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर नशीली दवाओं की स्मगलिंग का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद चेक रिपब्लिक की अदालत ने सुनवाई के बाद निखिल गुप्ता के प्रत्यर्पण की मंजूरी दी थी।

भारतीय नौसेना के 8 पूर्व कर्मी कतर में दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टिंग सर्विसेज में काम करते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों इजरायल के लिए कथित रूप से जासूसी करने के आरोप में अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों पर कतर की अदालत में केस चला। गिरफ्तारी के करीब 14 महीने बाद अक्टूबर 2023 में इन लोगों को फांसी की सजा दी गई। फांसी की सजा के बाद नौसैनिकों के परिजनों ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। विदेश मंत्री ने पूर्व नौसैनिकों के परिजनों को मदद का भरोसा दिया था। इसके बाद भारत ने कतर को मनाने के लिए तुर्किए की मदद लेने की कोशिश की थी। माना जाता है कि कतर और तुर्किए के बीच संबंध काफी बेहतर हैं। भारत सरकार की तरफ से पूर्व नौसैनिकों पर लगे आरोपों पर कुछ भी नहीं कहा गया है। हालांकि, भारत ने अपने नागरिकों के साथ सही व्यवहार पर जोर दिया। 28 दिसंबर 2023 को नौसैनिकों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।

इस साल फरवरी में कतर ने भारत के सभी आठों पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया। इस रिहाई को मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता बताया गया। नौसैनिकों की रिहाई से पहले पीएम मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी से मुलाकात की थी। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार नौसैनिकों की रिहाई ऐसे समय हुई थी जब भारत ने कतर से 78 अरब डॉलर की एलएनजी डील की। नौसैनिकों की रिहाई के पीछे इस डील को भी मुख्य कारण माना गया। मोदी सरकार निखिल गुप्ता को अमेरिका से उसी तरह छुड़ा पाएगी जिस तरह उसने कतर में फांसी की सजा पाए 8 पूर्व नौसैनिकों को भारत लाने में कामयाब रही थी। हालांकि, कतर की शासन प्रणाली और अमेरिका की शासन प्रणाली में अंतर हैं। कतर में अमीर का शासन चलता है। इसके उलट अमेरिका में लोकतांत्रिक प्रणाली है।भारत और कतर के बीच यह सौदा 20 साल के लिए हुआ। कतर कुछ समय पहले तक एलएनजी लिक्विफाइड नेचुरल गैस का सबसे बड़ा निर्यातक था। हालांकि, बाद में अमेरिका ने उसे पीछे छोड़ दिया था। कतर वैश्विक बाजार में दोबारा अपने दबदबे के लिए बेचैन था। कतर इसके लिए एशिया में नए बाजार की तलाश में था। भारत के साथ हुए इस सौदे ने उसे बड़ा मौका दिया।

क्या लोकसभा स्पीकर ही बीजेपी की है आखिरी उम्मीद?

वर्तमान में लोकसभा स्पीकर ही बीजेपी की आखिरी उम्मीद है! बीते दो बार के मुकाबले इस बार भाजपा अकेले बहुमत के 272 के आंकड़े से काफी दूर है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जहां 240 सीटें जीती थीं। वह बहुमत के आंकड़े से वह 32 अंक दूर रह गई थी। नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार टीडीपी और जदयू के सहयोग से सरकार बनाई है। भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की लोकसभा चुनाव में जीतीं 16 सीटों और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू की 12 सीटों के दम पर सरकार बनाई है। बहुमत के आंकड़ों से दूर भाजपा के लिए इसीलिए स्पीकर का पद काफी मायने रखता है। यह पद कितना मायने रखता है, इसे समझते हैं। बीते दो लोकसभा में भाजपा की सुमित्रा महाजन और ओम बिरला ही स्पीकर थे। लोकसभा का प्रमुख और पीठासीन अधिकारी स्पीकर ही होता है। लोकसभा कैसे चलेगी, इसकी पूरी जिम्मेदारी स्पीकर की होती है। संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत स्पीकर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है। स्पीकर ही संसदीय बैठकों का एजेंडा तय करता है। वही स्थगन प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव जैसे प्रस्तावों को अनुमति प्रदान करता है। सदन के किसी नियम पर अगर कोई विवाद होता है तो वह इस संबंध में उस नियम की व्याख्या करता है और उस नियम को सदन में लागू कराता है, जिसे किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है। स्पीकर का पद पक्षपात रहित होना चाहिए। मर्यादा का उल्लंघन करने वाले सांसदों को भी स्पीकर निलंबित कर सकते हैं। स्पीकर का मुख्य काम सरकार के हितों की रक्षा करना है। अगर वह सरकार से असहमत हो जाए तो समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

संसद में किसी बिल या अहम मुद्दों पर कौन सदस्य वोट कर सकता है कौन नहीं। सदन कब चलेगा और कब स्थगित करना है। कानूनी रूप से ये सभी फैसला लोकसभा स्पीकर ही तय करते हैं। किसी सांसद को एक दल से दूसरे दल में जाने से रोकने के लिए राजीव गांधी सरकार 1985 में दल-बदल कानून लेकर आई। पाला बदलने वाले सदस्यों की अयोग्यता पर भी स्पीकर दल-बदल कानून के तहत फैसला करते हैं। हालांकि, 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में साफ कर दिया था कि स्पीकर के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

लोकसभा स्पीकर के लिए टीडीपी नेताओं का कहना है कि स्पीकर के प्रत्याशी के लिए चुनाव एनडीए के सहयोगी दलों की सहमति से ही किया जाएगा। वहीं, जदयू नेता केसी त्यागी ने संकेत दिया है कि भाजपा जो भी प्रत्याशी चुनेगी, जदयू उसका हर हाल में समर्थन करेगी। संविधान के अनुच्छेद 93 में कहा गया है कि सदन जितनी जल्दी हो सके अपने दो सदस्यों को स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के रूप में चुनेंगे।

दरअसल, आजाद भारत में अभी तक लोकसभा स्पीकर हमेशा सर्वसम्मति से चुना जाता रहा है। माना जा रहा है कि इस बार इंडिया ब्लॉक भी स्पीकर का चुनाव भी लड़ सकता है। कहा जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन डिप्टी स्पीकर का पद मांग रहा है। ऐसे में अगर उसे डिप्टी स्पीकर का पद नहीं मिलता है, तो फिर वो स्पीकर का चुनाव भी लड़ सकता है। सरकार विपक्षी दलों से स्पीकर के चुनाव के मामले में सहयोग जुटाने की कोशिश कर रही है। आमतौर पर स्पीकर का पद सत्ताधारी और डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष के पास जाता है, लेकिन पिछली लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली था।

संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव का प्रावधान किया गया है। 24 जून से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है। दो दिन नए सांसदों को शपथ दिलवाई जाएगी। ऐसे में लोकसभा स्पीकर का चुनाव 26 जून को होगा, जबकि डिप्टी स्पीकर के चुनाव की तारीख स्पीकर तय करेंगे। 27 जून को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। स्पीकर के चुनाव की तारीख राष्ट्रपति तय करते हैं, जबकि डिप्टी स्पीकर के चुनाव की तारीख स्पीकर की ओर से तय की जाती है। डिप्टी स्पीकर का चुनाव भी वैसे ही होता है, जैसे स्पीकर का चुनाव होता है। अगर एक ही उम्मीदवार है तो सदन में उसका प्रस्ताव रखा जाता है और पास किया जाता है। एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर वोटिंग कराई जाती है। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर वही बन सकता है जो लोकसभा का सदस्य हो। दोनों का ही कार्यकाल पांच साल का होता है।

13 मार्च 1998 में अटल बिहारी वायपेयी की अगुवाई वालह एनडीए की सरकार बनी थी। उस वक्त भी टीडीपी ने भाजपा सरकार को समर्थन दिया था। उस वक्त भी टीडीपी ने अपने नेता जीएमसी बालयोगी को स्पीकर बनवा लिया था। 13 महीने तक सरकार चलने के बाद एनडीए की एक और सहयोगी डीएमके ने अचानक अटल सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी अहम हो गई।

स्पीकर बालयोगी ने लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल एस गोपालन की ओर एक पर्ची बढ़ाई। उस पर्ची में बालयोगी ने कांग्रेस सांसद गिरधर गोमांग को अपने विवेक के आधार पर वोट देने की अनुमति दी थी। दरअसल, गोमांग फरवरी में ही ओडिशा के मुख्यमंत्री बन गए थे, लेकिन उन्होंने तब तक अपनी लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया था। सदन के सदस्य होने के नाते उन्हें वोट देने का अधिकार हासिल था। गोमांग ने अपना वोट अटल सरकार के खिलाफ दे दिया था। अटल सरकार के पक्ष में 269 और विपक्ष में 270 मत पड़े थे।

क्या पीएम मोदी को लेने होंगे कई बड़े फैसले?

आने वाले समय में पीएम मोदी को कई बड़े फैसले लेने होंगे !एक लंबे और कठिन चुनाव अभियान के बाद इटली में G-7 के दिग्गजों के साथ मोदी की मुलाकात सिर्फ मोदी 3.0 के लिए नहीं थी। यह वैश्विक संघर्षों पर चर्चा करने का भी अवसर था जो विश्व व्यवस्था को बदल रहे हैं। मोदी ने यहां तो नेताओं से मुलाकात की लेकिन बड़ी समझदारी से स्विस-यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन को छोड़ दिया जो इसके तुरंत बाद हुआ। हालांकि भारत ने शिखर सम्मेलन में सचिव स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा था। यूक्रेन में शांति को लेकर आयोजित किए गए स्विट्जरलैंड शिखर सम्मेलन के लिए जारी साझा बयान से भारत ने खुद को अलग रखा। भारत ने साझा बयान पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। रूस के टेबल पर न होने के कारण शिखर सम्मेलन के प्रयास बहुत आगे नहीं बढ़ पाए। लेकिन भारत के लिए इन शांति प्रयासों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना अच्छा होगा। भारत ने 21वीं सदी की दुनिया में बेहतर तरीके से काम किया है। वो भी तब जब कभी एक, कभी दो तो कभी अलग- अलग पावर सेंटर दिखाई दिए। वर्तमान में एक तरह से अलग-अलग पावर सेंटर दिखाई दे रहे हैं। इनमें भारत भी एक पावर सेंटर बनने की आकांक्षा रखता है। हालांकि एक वैश्विक महामारी, एक आर्थिक मंदी, यूक्रेन और गाजा में युद्ध और ताइवान के आसपास एक और संघर्ष का खतरा। 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था के अपने सपने को साकार करने के लिए भारत को न केवल इन चुनौतियों के अनुकूल ढलना होगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इन चुनौतियों से उत्पन्न होने वाले बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना होगा। भारत की मजबूत विकास दर – 2023-24 में 8% से अधिक और 2024-25 में अपेक्षित 7% युद्ध के विस्फोटों से पटरी से उतर सकती है। इसलिए भारत को वैश्विक संघर्षों के प्रभावों को कम करने में सक्षम विदेश नीति की आवश्यकता होगी और बाहरी झटकों से निपटने के लिए एक सक्रिय रणनीति बनानी होगी।

दो प्रमुख शक्तियां चीन और रूस और एक शक्ति ईरान, अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ये राजनीतिक संघर्ष भारत की तरक्की के लिए भी जोखिम पैदा करते हैं। चीन एशिया और उसके बाहर अमेरिका के खिलाफ खुद को मजबूत कर रहा है, जबकि रूस नाटो के विस्तार के खिलाफ दबाव बना रहा है। ईरान सीधे और प्रॉक्सी के माध्यम से अमेरिका को चुनौती दे रहा है, क्योंकि वह इजरायल का सामना कर रहा है। ये कम्पटीशन विभिन्न तरीकों से प्रकट होती हैं। यूरोप में जहां रूस और यूक्रेन लड़ाई को बढ़ाते हैं, लेकिन अपनी-अपनी शर्तों पर शांति की मांग करते हैं। पश्चिम एशिया में जहां नागरिकों की जान जाने के कारण सभी पक्ष इजरायल और हमास को बातचीत की मेज पर लाने के लिए दबाव डाल रहे हैं, लेकिन इसका भी कोई हल नजर नहीं आता।

भारत के लिए सबसे तात्कालिक चिंता उसके दरवाजे पर रणनीतिक चुनौती है। हमारे सैनिक चीनी सैनिकों के साथ आंख से आंख मिलाकर खड़े हैं। चीन की आक्रामक रणनीति भारत के सामने चुनौती पेश कर रही है। इसका मुकाबला करने के लिए, भारत को अपने पूरे कूटनीतिक अस्त्रों का उपयोग करना चाहिए। साझेदारी बनानी चाहिए और चीनी मुखरता को रोकने के लिए क्वाड जैसे संगठन का लाभ उठाना चाहिए। चीनी व्यवहार भारत को बीजिंग के मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी अमेरिका और उसके सबसे बड़े सहयोगी रूस के साथ बातचीत करने का अतिरिक्त कारण देता है। भारत संघर्ष के अन्य क्षेत्रों से कुछ हद तक दूर है फिर भी भारत को सजग रहने की जरूरत है।

आज मोदी के अलावा बहुत कम वैश्विक राजनेता इतने प्रभावशाली और विश्वसनीय हैं कि वे एक ही सुबह इजरायल और फिलिस्तीन, यूक्रेन और रूस, अमेरिका और फ्रांस के प्रमुखों के साथ बात कर सकें। लेकिन देश के पास शांति बहाली में सीमित अनुभव और क्षमता है। विदेश मंत्रालय और थिंक टैंक को राजनयिकों, एक्सपर्ट और संघर्ष का अध्ययन करने के लिए समर्पित लोगों को शामिल करते हुए शांति बहाली टीमों के साथ क्षमता और अधिक बढ़ाने की जरूरत है। जो वैश्विक शांति निर्माण के अनुभवों से सीख सकते हैं और संघर्ष समाधान रणनीतियों को तैयार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, नॉर्वे में लगभग एक दर्जन लोगों की एक छोटी लेकिन प्रभावी शांति इकाई है, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड ओस्लो को शांति का पर्याय बनाता है। भारत समान विचारधारा वाली शक्तियों (जैसे दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, इंडोनेशिया) और पारंपरिक पश्चिमी शांति निर्माताओं (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, अमेरिका) के साथ सहयोग कर सकता है। भारत के लिए शांति कूटनीति को आगे बढ़ाने और वैश्विक शांति के लिए कैलकुलेटिव रिस्क उठाने का समय आ गया है।

क्या इस बार और भी तेज हो सकती है बारिश ?

इस बार बारिश और भी तेज हो सकती है! भीषण गर्मी के बीच लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर इससे राहत कब मिलेगी। देश के अधिकांश राज्य इस वक्त भीषण गर्मी की चपेट में हैं। कई राज्यों में पारा 45 के पार बना हुआ है। मॉनसून की एंट्री देश में हो चुकी है लेकिन इसने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ी है। लोग जल्द बारिश के लिए पूजा-पाठ कर रहे हैं। इस भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग की ओर से मंगलवार कहा गया कि अगले 24 घंटों तक उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी की स्थिति बनी रहेगी लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे इसमें कमी आ सकती है। मॉनसून को लेकर आईएमडी ने अगले दो दिनों के दौरान पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में भारी बारिश का अनुमान लगाया है। मौसम विभाग ने 19 जून से दिल्ली में भी भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने का अनुमान जताया है। यूपी के प्रयागराज में सोमवार को 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो 17 जून को देश में सबसे अधिक था। आईएमडी ने पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार में 18-19 जून को और उत्तर प्रदेश में 18 से 20 जून तक भीषण गर्मी के बीच रेड अलर्ट जारी किया है। मध्य प्रदेश में 18 और 19 जून, उत्तर प्रदेश में 21 और 22 जून और झारखंड में 18 जून को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और मंगलवार को भी अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि मौसम विभाग ने 19 जून से भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने का अनुमान जताया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जितनी तेज गर्मी पड़ेगी। मॉनसून उतना ही अच्छा होने की उम्मीद होती है, क्योंकि हवाएं जब गर्म होकर ऊपर उठती हैं तो उस खाली जगह को भरने के लिए मॉनसूनी हवाएं तेजी के साथ आती हैं। फिर वह झमाझम बारिश करती हैं। अभी 21 जून तक दिन में हीट वेव और गर्म रातें रहेंगी।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार तक के लिए ‘रेड’ अलर्ट जारी किया गया था।

मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए 19 और 20 जून को येलो अलर्ट जारी किया है। आसार है कि अगले दो दिनों में कुछ जगहों पर धूलभरी आंधी चले और कहीं-कहीं बौछारें पड़ें। मगर, इससे भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। अब तो दिल्ली वालों को मॉनसून का इंतजार है। हाल फिलहाल में बड़ी राहत मिलने के आसार नहीं हैं और दिल्ली वालों को 10 दिनों तक प्रचंड गर्मी सहनी होगी। 27 जून के करीब दिल्ली में प्री मॉनसून की बारिश हो सकती है। जून के आखिर या जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून दिल्ली पहुंच सकता है।

मौसम विभाग की मानें तो गाजियाबाद और नोएडा 26 जून के आसपास मॉनसून की बारिश शुरू हो जाएगी, लेकिन उससे पहले प्री मॉनसून की बारिश से भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। प्री मॉनसून की बारिश की संभावना 22 जून के आसपास बन रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जितनी तेज गर्मी पड़ेगी। मॉनसून उतना ही अच्छा होने की उम्मीद होती है, क्योंकि हवाएं जब गर्म होकर ऊपर उठती हैं तो उस खाली जगह को भरने के लिए मॉनसूनी हवाएं तेजी के साथ आती हैं। फिर वह झमाझम बारिश करती हैं। अभी 21 जून तक दिन में हीट वेव और गर्म रातें रहेंगी।

आईएमडी ने कहा है कि अगले तीन से चार दिनों के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा,बंगाल, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। यही नहीं लू का असर पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल और उत्तराखंड में भी देखने को मिल रहा है। यहां 22 जून तक येलो और ऑरेंज अलर्ट दोनों है। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां 22 जून तक राहत नहीं है। आज यहां हीटवेव का येलो अलर्ट है जो 22 जून तक रहेगा। उत्तराखंड में भी कमोबेश यही स्थिति है। इस दौरान जरूर 40-5- किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।पंजाब और हरियाणा में भी लू और भीषण गर्मी का अटैक है। दोनों प्रदेशों में 22 जून तक राहत के कोई आसार नहीं हैं। यहां हीटवेव का अलर्ट 22 जून तक है जिसमें कहीं कहीं इसका येलो तो कहीं कहीं ऑरेंज अलर्ट भी है। मध्य प्रदेश के लिए सोमवार और मंगलवार का दिन काफी राहत भरा रहा।

पश्चिम बंगाल और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। आईएमडी ने अगले पांच दिनों के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में आंधी, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की से तेज बारिश की बात कही है। अगले पांच दिनों के दौरान गुजरात, कोंकण और गोवा में हल्की बारिश की संभावना है।