Friday, March 13, 2026
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पेयजल समस्या पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पेयजल समस्या पर अपना बयान दे दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने पानी की बर्बादी और टैंकर माफिया पर नकेल नहीं कसे जाने को लेकर बुधवार को दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि अगर दिल्ली सरकार टैंकर माफिया पर नकेल नहीं कस पाती है तो हम दिल्ली पुलिस को लगाएंगे। शीर्ष अदालत ने पूछा कि हिमाचल से पानी आ रहा है तो ये दिल्ली में कहां जा रहा है। हिमाचल प्रदेश से दिल्ली के लिए अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के मुद्दे पर साफ-साफ जानकारी नहीं दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘तैयार रहिए, हम आपके अफसर को सीधे जेल भेजेंगे।’ कोर्ट ने संबंधित अफसर को गुरुवार को कोर्ट में पेश होने कहा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार से गुरुवार तक हलफनामा देकर बताने को कहा है कि उसने पानी की बर्बादी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की वकेशन बेंच ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि उसने पानी की बर्बादी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। बेंच ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर भी नाराजगी जताई, जिसने एक पत्र में कहा था कि राज्य सरकार दिल्ली को जो 132 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ना चाहती थी, वह ‘पहले से ही निर्बाध रूप से बह रहा है।’अदालत ने आश्चर्य जताया कि फिर राज्यों द्वारा पहले यह दावा करने का क्या मतलब था कि बैराजों पर अतिरिक्त पानी को मापा जा सकता है, ताकि पता चल सके कि कितना अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है।

जस्टिस मिश्रा ने पूछा, ‘हिमाचल ने इस कोर्ट के सामने पेश किया कि हमारे पास अतिरिक्त पानी है। और अब पत्र में कहा गया है कि हमारे पास जो पानी है, वह पहले ही छोड़ा जा चुका है, इसका मतलब है कि उनके पास कोई अतिरिक्त पानी नहीं है। आपकी (दिल्ली सरकार) याचिका का पूरा आधार यह है कि हिमाचल के पास अतिरिक्त पानी है, 137 क्यूसेक। फिर यदि आप इसे पहले ही छोड़ रहे हैं, तो हमारे आदेश के अनुसार 5 जून को ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (UYRB) की बैठक में इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? बोर्ड को इसकी जानकारी कभी नहीं दी गई… इसके उलट, दूसरे दिन जब दस्तावेज़ पेश किया गया, तो आपके अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि यह दस्तावेज भी बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है… न्यायालय में झूठे बयान क्यों दिए जा रहे हैं?’ उन्होंने कहा, ‘मुझे अच्छी तरह याद है कि उस दिन (पिछली सुनवाई) मेरे मन में कुछ संदेह था और मैंने संबंधित अधिकारी का नाम दर्ज किया, जिसने अतिरिक्त महाधिवक्ता (हिमाचल के लिए) को सूचना (अतिरिक्त पानी की उपलब्धता पर) सौंपी थी।’ जस्टिस मिश्रा ने अधिकारी को गुरुवार को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश देते हुए कहा, ‘तैयार रहो। हम आपके अधिकारी को सीधे जेल भेज देंगे।’ उन्होंने दिल्ली सरकार से पूछा, ‘पानी हिमाचल से आ रहा है…यह दिल्ली में कहां जा रहा है?’

बेंच ने कहा कि अगर उसी पानी को टैंकर के जरिए पहुंचाया जा सकता है तो उसे पाइपलाइन के जरिए क्यों नहीं मुहैया कराया जा सकता है। अगर बिजली चोरी रोकने के लिए कड़े कानून हो सकते हैं तो पानी की बर्बादी रोकने के लिए कानून क्यों नहीं हो सकते। बेंच ने कहा, ‘यदि हिमाचल प्रदेश से पानी आ रहा है तो दिल्ली में कहां जा रहा है? यहां इतनी चोरी हो रही है, टैंकर माफिया काम कर रहे हैं। क्या आपने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई की है? यदि आप कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं तो हम इस मामले को दिल्ली पुलिस को सौंप देंगे। लोग परेशान हैं। टैंकर से वही पानी आ रहा है लेकिन पाइपलाइन में पानी नहीं है।’कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, ‘हर चैनल पर तस्वीरें देख रहे हैं कि दिल्ली में टैंकर माफिया काम कर रहा है। आपने इस संबंध में क्या उपाय किए हैं? हलफनामे से पता चलता है कि ये मामले 2018, 2019 और 2021 में भी सामने आए हैं। हर बार यह अदालत कहती है कि हम ऐसा नहीं कर सकते, यह काम यमुना जल बोर्ड (ऊपरी यमुना नदी बोर्ड-यूवाईआरबी) द्वारा किया जाना चाहिए।’

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील शादान फरासत ने अदालत की चिंता को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए कार्रवाई की गई है, जिसमें उन स्थानों पर आपूर्ति बंद करना भी शामिल है जहां इसकी तत्काल जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जहां तक पुलिस का सवाल है, हमें खुशी होगी कि पुलिस इस मामले (जल माफिया पर लगाम लगाने के लिए) में कार्रवाई करे।’ फरासत ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) भी ‘टैंकरों का उपयोग कर रहा है’ और ‘जो दृश्य आ रहे हैं, उनमें से अधिकांश डीजेबी के टैंकरों के हैं, जो लोगों को आपूर्ति कर रहे हैं और निम्न आर्थिक परिवारों के विभिन्न स्थानों पर आपूर्ति कर रहे हैं।’

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है जिसमें पानी की बर्बादी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें हरियाणा को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह हिमाचल प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय राजधानी को दिए गए अतिरिक्त पानी को छोड़ दे, ताकि जल संकट को दूर किया जा सके।

कुवैत में लगी आग के लिए क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी ?

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में लगी आग के लिए एक बयान दिया है! कुवैत शहर में एक इमारत में आग लगने से दर्जनों लोगों की मौत हो गई है, जिनमें कई भारतीय मजदूर हैं। इस दुखद घटना पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को गहरा दुख व्यक्त किया। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘कुवैत शहर में आग लगने की घटना की खबर से गहरा सदमा लगा है। कथित तौर पर 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 50 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। हमारे राजदूत घटनास्थल पर गए हैं। हम आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं। हमारा दूतावास इस संबंध में सभी लोगों को पूरी सहायता प्रदान करेगा।” कुवैत आग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा,’कुवैत शहर में आग लगने की घटना दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। अधिकारियों ने बताया कि आग बुधवार तड़के कुवैत के दक्षिणी अहमदी गवर्नरेट के मंगाफ क्षेत्र में स्थित छह मंजिला इमारत के रसोईघर में लगी। बताया जा रहा है कि इमारत में करीब 160 लोग रहते थे, जो एक ही कंपनी के कर्मचारी हैं। बताया जा रहा है कि वहां रहने वाले कई कर्मचारी भारतीय थे।कुवैत में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और प्रभावितों की सहायता के लिए वहां के अधिकारियों के साथ काम कर रहा है।

कुवैत में भारतीय दूतावास ने भी इस त्रासदी के संबंध में एक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। दूतावास ने एक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किया है: +965 65505246। दूतावास ने पुष्टि की गई है कि मरने वालों में भारतीय मजदूर भी शामिल थे। इसने कहा, ‘सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे अपडेट के लिए हेल्पलाइन से जुड़ें। दूतावास हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ इस बीच, कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बुधवार दोपहर एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया है, ‘स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगाफ में एक इमारत में आग लगने की घटना में 43 लोगों को अस्पताल पहुंचाया है, जिनमें से 4 मृत पाए गए।’

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह आग त्रासदी में घायल हुए लोगों की सहायता की निगरानी करने तथा इस घटना में मारे गए लोगों के पार्थिव शरीरों को शीघ्र वापस लाने के लिए स्थानीय प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए तत्काल कुवैत जा रहे हैं। बता दें कि कुवैत में श्रमिकों के आवास वाली एक इमारत में बुधवार को लगी भीषण आग में 41 लोगों के मारे जाने की आशंका है। खाड़ी देश से मिल रही खबरों के अनुसार, मरने वालों में कुछ भारतीय भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि आग बुधवार तड़के कुवैत के दक्षिणी अहमदी गवर्नरेट के मंगाफ क्षेत्र में स्थित छह मंजिला इमारत के रसोईघर में लगी। बताया जा रहा है कि इमारत में करीब 160 लोग रहते थे, जो एक ही कंपनी के कर्मचारी हैं। बताया जा रहा है कि वहां रहने वाले कई कर्मचारी भारतीय थे।

कुवैत की कुल जनसंख्या में भारतीय 21 प्रतिशत 10 लाख तथा कार्यबल में 30 प्रतिशत लगभग 9 लाख हैं। ‘कुवैत टाइम्स’ की खबर के अनुसार, कुवैत के गृह मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ अल-सबाह ने पुलिस को मंगाफ इमारत के मालिक, इमारत के चौकीदार और श्रमिकों के लिए जिम्मेदार कंपनी के मालिक को घटनास्थल पर आपराधिक साक्ष्य कर्मियों की जांच पूरी होने तक गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।बता दें कि जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं। हमारा दूतावास इस संबंध में सभी लोगों को पूरी सहायता प्रदान करेगा।” कुवैत आग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया। सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे अपडेट के लिए हेल्पलाइन से जुड़ें। दूतावास हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ इस बीच, कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बुधवार दोपहर एक बयान जारी किया।उन्होंने कहा,’कुवैत शहर में आग लगने की घटना दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। घटनास्थल का दौरा करने के बाद मंत्री ने एक बयान में कहा, ‘आज जो कुछ हुआ वह कंपनी और भवन मालिकों के लालच का परिणाम है।’

क्या अब हजारों फीट की ऊंचाई से चीन पर नजर रखेगा भारत ?

भारत अब हजारों फीट की ऊंचाई से चीन पर नजर रखने वाला है! भारतीय सेना चालबाज चीन को हर मोर्चे पर मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर रही है। लद्दाख में स्थित लेह एयर बेस पर एक नया रनवे बनाया जा रहा है। ये वही हवाई क्षेत्र है जहां पिछले कुथ सालों में भारत और चीन की सेना के बीच कई टकराव हुए हैं। यहां अब दूसरा रनवे बनाया जा रहा है। यह हवाई क्षेत्र भारत और चीन के बॉर्डर यानी एलएसी और सियाचिन पर सैन्य गतिविधियों को जारी रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह एयर बेस रात के वक्त भी लड़ाकू विमानों और सामान ले जाने वाले एयरफोर्स के जहाजों के लिए उड़ान भरने के लिए उपयुक्त है। चीन के साथ संबंध खराब होने के बाद से राफेल, मिग-29, सुखोई-30 और अपाचे जैसे विमान इसी एयरबेस से नियमित रूप से उड़ान भर रहे हैं। जब कड़ाके की ठंड में इलाके के सभी सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं, तब यही एयर बेस सैनिकों और जरूरी सामान को लाने-जाने का इकलौता जरिया बचता है। 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लेह देश का पहला ऐसा ऊंचाई वाला एयर बेस होगा जहां दो रनवे होंगे। साल 2020 में पूर्वी क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए इस एयर बेस से 68 हजार सैनिकों और टैंकों को हवाई जहाजों द्वारा पहुंचाया गया था, जो इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। एक अखबार ने एक अधिकारी का हवाला देते हुए लिखा कि पिछले कुछ सालों में लेह एयर बेस पर सैन्य और नागरिक उड़ानों की संख्या काफी बढ़ गई है, लेकिन यहां के मौसम और वातावरण की वजह से उड़ान भरने का समय सुबह के कुछ घंटो तक ही सीमित रहता है।

अप्रैल 2024 में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि चीन से लगने वाली सीमा के पास पूर्वी कमान के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण चाबुआ एयर बेस पर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। इन तस्वीरों में एयर बेस पर हो रहे बड़े स्तर के डेवलेपमेंट और निर्माण कार्यों को देखा जा सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक्स्ट्रा टैक्सीवे (विमानों के आने-जाने के रास्ते), लड़ाकू विमानों के लिए मजबूत शरणस्थल और भूमिगत हथियारों के भंडार बनाने का काम देखा गया। अतिरिक्त रनवे और टैक्सीवे चीन के साथ गतिरोध के युद्ध में बदल जाने की स्थिति में हवाई अभियानों को सुचारू रूप से चलाने में मदद कर सकते हैं। तस्वीरों में एक बेहतरीन टैक्सीवे को भी दिखाया गया है जिसका इस्तेमाल ड्रोन के लिए किया जा सकता है।

एयर बेस के बुनियादी ढांचे के डेवलेपमेंट का कांट्रेक्ट 2020 में ही दे दिया गया था, लेकिन चीन के साथ बढ़े तनाव के कारण इसे तेजी से पूरा करने वाले प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया। टाटा पावर एसईडी (टीपीएसईडी) के साथ 1200 करोड़ रुपये की लागत वाली आधुनिकीकरण हवाई क्षेत्र बुनियादी ढांचा (MAFI) प्रोजेक्ट के तहत वायुसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के 37 हवाई क्षेत्रों को डेवलेप किया जाएगा। लद्दाख में स्थित न्योमा एयर बेस पर चीन की सीमा से सिर्फ 23 किलोमीटर की दूरी पर 2.7 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण अक्टूबर 2024 में पूरा हो जाएगा। यह नया 13,700 फीट लंबा रनवे उस क्षेत्र में वायुसेना के अभियानों को और मजबूत बनाएगा। न्योमा एयर बेस पर बनाए जा रहे बुनियादी ढांचे में विमानों को खड़ा करने के लिए शेड (हैंगर), एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पक्के रास्ते (जहां वाहन और विमान खड़े हो सकें) शामिल हैं, ये सब 2025 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

यह न्योमा हवाई पट्टी 1962 में भी चालू थी, उसी साल भारत और चीन के बीच एक छोटा खूनी संघर्ष हुआ था। युद्ध के बाद जल्द ही इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल बंद हो गया, लेकिन 2009 में एक एएन-32 विमान के यहां उतरने के बाद इसे फिर से चालू कर दिया गया। तब से सी-130जे सुपर हरक्युलेस विमान इस हवाई पट्टी से उड़ान भरते रहे हैं। चीन के साथ 2020 में गतिरोध के चरम पर, वायुसेना ने अपने मध्यम क्षमता वाले Mi-17 हेलीकॉप्टर, भारी क्षमता वाले CH-47F चिनूक हेलीकॉप्टर और आक्रमण करने वाले AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों को सैनिकों की तैनाती में मदद करने और निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए न्योमा भेज दिया था।

शिगात्से शांति हवाई अड्डे पर J-20 विमानों की तैनाती महत्वपूर्ण है। यह हवाई अड्डा पश्चिम बंगाल में हाशिमारा वायुसेना स्टेशन से 300 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है, जहां भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान तैनात हैं। सेना से जुड़े जानकारों ने सीमा के पास इतने लड़ाकू विमानों की तैनाती पर चिंता जताई है। चीन के विपरीत, भारत के पास अभी तक पांचवीं पीढ़ी का कोई लड़ाकू विमान नहीं है। शिगात्से हवाई क्षेत्र चीन-भारत सीमा के मध्य भाग में स्थित है और 2017 के डोकलाम गतिरोध वाले विवादित क्षेत्र के सबसे नजदीक हवाई अड्डा है। 2017 में, चीन ने वहां पहले से मौजूद रनवे के साथ ही एक नया 3,000 मीटर लंबा सहायक रनवे बनाया था, जिसमें सात हेलीपैड भी शामिल हैं। गौर करने वाली बात ये है कि नया रनवे पुराने रनवे के समानांतर नहीं बल्कि अलग एंगल पर बनाया गया है। इससे दुश्मन ताकतों के लिए एक ही हमले में दोनों रनवे को निष्क्रिय करना मुश्किल हो जाता है।

अमेरिका के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की चाइना पावर प्रोजेक्ट के अनुसार, चीन अपने पश्चिमी क्षेत्रों तिब्बत और शिनजियांग में दर्जनों हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों को डेवलेप कर रहा है। चाइना पावर ने तिब्बत और शिनजियांग के भीतर 37 हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों की पहचान की है, जिनका 2017 से जब चीन और भारत के बीच डोकलाम पठार पर 73 दिनों का गतिरोध हुआ था या तो निर्माण किया गया है या डेवलेप किया गया है। ये नए हवाई क्षेत्र भारतीय सीमा के साथ उन बड़े क्षेत्रों को भी भर देते हैं, जहां पहले कोई हवाई अड्डा नहीं था। इससे पीएलए वायुसेना को भारत के खिलाफ हवाई शक्ति प्रदर्शित करने के लिए नए ठिकाने मिल जाएंगे।

आखिर कैसे और क्यों हो रहे हैं देश में आतंकी हमले?

हाल ही में देश में लगातार तीन आतंकी हमले हो चुके हैं! पीएम मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं। पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण के दिन से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। बीते 72 घंटों में आतंकवादी 3 आतंकी हमलों को अंजाम दे चुके हैं। क्या जम्मू-कश्मीर में कोई नया लोकल नेटवर्क ऐक्टिव हो गया है, जो पाकिस्तान समर्थित दहशतगर्दों को सपोर्ट कर रहा है। दरअसल यह बात सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों को टेंशन दे रही है। केंद्रीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर (J&K) में पिछले 72 घंटों में हुए तीन हमलों में शामिल विदेशी आतंकवादियों की मदद करने वाला एक नया आतंकी नेटवर्क पकड़े जाने का शक है। इस नेटवर्क में स्थानीय लोग और स्थानीय आतंकी शामिल बताए जा रहे हैं। इन हमलों में 11 लोग मारे गए और करीब 50 लोग घायल हुए। हर एक हमले में विदेशी आतंकवादियों को सुरक्षाबलों के बचने के रास्तों, ठिकानों और उनके शिविरों के बारे में सटीक जानकारी मिली, जिसने चिंता बढ़ा दी है। एजेंसियों को शक है कि कोई नया या पुराना स्थानीय समर्थन का नेटवर्क है जो मदद कर रहा है, जिसमें खाने के सामान की सहायता भी शामिल है। जम्मू और कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारियों का कहना है कि ये हमले आतंकी गुटों की नाकामी को दिखाते हैं, खासकर भारत की ओर से जम्मू और कश्मीर में लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक कराने के बाद।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले ये सूचना मिली थी कि लगभग 70-80 विदेशी आतंकी घुसपैठ कर चुके हैं। इन्होंने हथियार हासिल किए, आसानी से पनाह और खाना पाया, सुरक्षाबलों के शिविरों के बारे में जानकारी हासिल की, खास ठिकानों तक पहुंचने का तरीका सीखा और हमलों के बाद भागने में आसानी के लिए सुनसान इलाकों की जानकारी जुटाई। जैसे ही सूचना मिली एक सब-डिवीजनल पुलिस अफसर और एक थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गांव पहुंची।सूत्रों का कहना है कि इन विदेशी आतंकवादियों का स्थानीय लोगों से संपर्क होने का शक है, जो शायद उन्हें हमले वाली जगहों तक ले जाने में भी मदद कर सकते हैं। सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों को शक है कि जम्मू में अभी और भी आतंकी हो सकते हैं। यह भी आशंका है कि ये आतंकी संगठन मिलकर हमले कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी चिंता ये है कि आतंकी कैसे हमले की जगह से भागने में कामयाब हुए। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों की निगरानी करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज चैनल, न्यूज 18 को बताया, ‘जिस तरह से वे सभी रास्ते जाने बिना हमले की जगह से निकल पाए, उससे लगता है कि कोई स्थानीय व्यक्ति उनके साथ गया होगा और उन्हें रास्ता दिखाया होगा। साथ ही हमला करने के बाद स्थानीय मदद से उन्हें पनाह मिली होगी और खुले माध्यमों से सुरक्षाबलों की गतिविधियों के बारे में जानकारी भी मिली होगी।’ एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन आतंकवादियों ने स्थानीय नेटवर्क को फिर से मजबूत कर लिया है, जिसमें जमीनी मददगार, स्थानीय आतंकी और शायद कुछ आम लोग भी शामिल हैं।

जम्मू जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद जैन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग रात 8 बजे सीमा पार से घुसे दो संदिग्ध आतंकी सांझा सुखाल गांव में दिखाई दिए और एक घर से पानी मांगा। ग्रामीण डर गए। जैसे ही सूचना मिली एक सब-डिवीजनल पुलिस अफसर और एक थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गांव पहुंची।।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुए बड़े हमलों में से एक, रविवार को रियासी जिले में शिवखोड़ी मंदिर से कटरा जा रहे श्रद्धालुओं की बस पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था। बता दें कि एक हमले में विदेशी आतंकवादियों को सुरक्षाबलों के बचने के रास्तों, ठिकानों और उनके शिविरों के बारे में सटीक जानकारी मिली, जिसने चिंता बढ़ा दी है। एजेंसियों को शक है कि कोई नया या पुराना स्थानीय समर्थन का नेटवर्क है जो मदद कर रहा है, जिसमें खाने के सामान की सहायता भी शामिल है। जम्मू और कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारियों का कहना है कि ये हमले आतंकी गुटों की नाकामी को दिखाते हैं, खासकर भारत की ओर से जम्मू और कश्मीर में लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक कराने के बाद। चारों तरफ से फायरिंग के कारण बस गहरी खाई में गिर गई, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी और 41 अन्य घायल हो गए थे।

क्या G7 के लिए इटली जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी?

आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 के लिए इटली जाएंगे! प्रधानमंत्री गुरुवार को जी – 7 समिट में हिस्सा लेने के लिए इटली रवाना होंगे। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि पीएम मोदी इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के बुलावे पर जी 7 समिट में शिरकत करने के लिए इटली के अपुलिया जा रहे हैं, जहां 14 जून को दुनिया की 7 विकसित अर्थव्यवस्थाएं अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए साथ बैठेंगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान 14 जून को प्रधानमंत्री आउटरीच सेशन में हिस्सा लेने के बुलाए गए दूसरे देशों के साथ आउटरीच सेशन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान इस सेशन में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, एनर्जी और अफ्रीका जैसे मुद्दे फोकस में रहेंगे। क्वात्रा ने कहा कि इटली ने इस बार अल्जीरिया, ब्राजील, अर्जेंटीना, इजिप्ट, केन्या,मॉरीटेनिया,सऊदी अरब,दक्षिण अफ्रीका, ट्यूनीशिया, टर्की, यूएई के अलावा यूएन जैसे कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को भी बुलाया गया है। ऐसे में जी 7 में भारत की रेगुलर भागीदारी से ग्लोबल चुनौतियों को लेकर उसकी प्रतिबद्धता जाहिर करता रहा है। भारत हमेशा से ही शांति, विकास और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर अपनी कोशिशों को दिशा देता रहा है। क्वात्रा ने बताया कि कहा कि समिट में हिस्सा लेने से भारत को जी अपनी अध्यक्षता में हुई 20 सम्मेलन के परिणामों की समीक्षा करने का एक मौका मिलेगा। भारत ने हमेशा ही जी 7 के मंचों पर ग्लोबल साउथ के मुद्दों को सामने उठाया है ।इटली यूरोपीय यूनियन के देशों में चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है। दोनों प्रधानमंत्री अपने रिश्तों के सभी आयामों की समीक्षा करेंगे। क्वात्रा ने कहा इटली कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ भागीदार है, दोनों देशों के बीच इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंडो पैसिफिक ग्लोबल इनीशिएटिव, बायो फ्यूल अलायंस और इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की साझी कड़ियां हैं। इस साल समिट में रूस-यूक्रेन संघर्ष और मिडिल ईस्ट में शांति समिट के अजेंडे के बड़े मुद्दे रहेंगे। इसके साथ ही विकासशील देशों और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंध भी अहम अजेंडा है, जिसमें फोकस अफ्रीका और इंडो पैसिफिक क्षेत्र पर रहेगा। इसके अलावा माइग्रेशन, AI और फूड सिक्योरिटी भी सम्मेलन के अहम अजेंडे होंगे, हालांकि इन मुद्दों पर जी 7 देश खुद ही चर्चा करेंगे।

रूस और यूक्रेन को लेकर एक सवाल के जवाब में क्वात्रा ने कहा कि भारत हमेशा से ही मानता रहा है कि इस संघर्ष के समाधान को डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। पीएम पहले ही कह चुके हैं कि ये युद्ध का दौर नहीं है। इटली में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की एक घटना के बारे में उन्होंने कहा कि इटली की सरकार के सामने ये मुद्दा उठाया गया है, और इस पर इटली की सरकार ने कार्रवाई भी की है।

समिट से इतर इटली और भारत के पीएम की द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। हालांकि दूसरे देशों के नेताओं के साथ भी ऐसी बातचीत होने की संभावना है लेकि- पीएम की दूसरी द्विपक्षीय बातचीत को लेकर अभी शेड्यूल तय नहीं हुआ है। बता दें कि पीएम मोदी और मेलोनी की पिछली मुलाकात दिसंबर 2023 में कॉप समिट के लिए आबू धाबी में हुई थी। दोनों देशों के रिश्ते पिछले एक साल में और गहरे हुए हैं, मेलोनी रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने के साथ ही जी 20 समिट में हिस्सा लेने दिल्ली भी आई थी,इसके साथ ही वो पिछले साल मार्च में अपने आधिकारिक दौरे पर भारत भी आई थी। क्वात्रा ने कहा उनके भारत दौरे के वक्त ही दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक आयाम दिया गया था, इस पार्टनरशिप में डिफेंस, इंडो पैसिफिक और एनर्जी को फोकस बनाया गया था। । इटली यूरोपीय यूनियन के देशों में चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है। दोनों प्रधानमंत्री अपने रिश्तों के सभी आयामों की समीक्षा करेंगे। क्वात्रा ने कहा इटली कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ भागीदार है, दोनों देशों के बीच इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंडो पैसिफिक ग्लोबल इनीशिएटिव, बायो फ्यूल अलायंस और इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की साझी कड़ियां हैं।

इटली के अपुलिया में हो रही जी 7 समिट में राष्ट्राध्यक्षों के भविष्य में पद पर कायम रहने को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को नवंबर में चुनाव का सामना करना है। वहीं ऋषि सुनक के ब्रिटेन में 4 जुलाई को भी वोटिंग है, ऐसा माना जा रहा है कि उनकी पार्टी सत्ता गंवा सकती है, हालांकि वो प्रचार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पार्टी को जीत मिलेगी।ऐसे में जब कुछ अंतर्राष्ट्रीय नेताओं के लिए ये आखिरी मीटिंग हो सकती है, ऐसे में पीएम और इन नेताओं की द्विपक्षीय बैठक पर भारत की नज़रें बनी रहेंगी।

आखिर कब तक आएगा देश में मानसून?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर देश में मानसून कब तक आएगा! राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी का दौर जारी है। दिल्ली में तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है, वहीं यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में भी पारा लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अभी कुछ दिनों तक हीट वेव चलने की संभावना जताई है। उत्तर भारत में जहां गर्मी से बुरा हाल है, तो वहीं दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। बुधवार को मॉनसून ने महाराष्ट्र के बड़े हिस्से को अपने दायरे में ले लिया है, वहीं अब भीषण गर्मी से जूझ रहे मध्य और उत्तर भारत को अब भी मानसून के पहुंचने का इंतजार है। बुधवार को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड के अधिकांश भागों, उत्तरी राजस्थान के कई भागों, हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों, दक्षिणी बिहार, उत्तरी ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में भीषण गर्मी का प्रकोप रहा।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में भी भीषण गर्मी की स्थिति देखी गई। पश्चिमी झारखंड, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब, उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान 45-47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। उत्तर प्रदेश के कानपुर में सबसे अधिक 47.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

दिल्ली में बुधवार को अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने जून के अंत तक राजधानी में मॉनसून के आगमन का अनुमान जताया है। दिल्ली में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। पिछले 15 दिन से अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। आईएमडी ने कहा कि इस महीने के अंत तक 27 जून के आसपास शहर में मानसून आने की उम्मीद है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को अधिकांश स्थानों पर तेज हवाएं चलने और आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 45 और 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।एक अधिकारी ने कहा, ‘बंगाल की खाड़ी में मॉनसून कमजोर है और इसके वहां से आगे बढ़ने का इंतजार है।’ मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम से आने वाली गर्म हवाएं बंगाल की खाड़ी के ऊपर कमजोर मॉनसून पर हावी हो रही हैं और मध्य और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में गर्म मौसम की स्थिति को बढ़ा रही हैं।मौसम विभाग ने बताया कि मॉनसून अगले तीन से चार दिनों के दौरान ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है।

पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव माधवन राजीवन ने कहा कि सामान्य प्रगति के बाद मॉनसून का क्रम भंग हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘अगले 8-10 दिनों में बहुत ज्यादा प्रगति की उम्मीद नहीं है, इसलिए उत्तर भारत में इसकी शुरुआत में देरी हो सकती है। इससे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत में अत्यधिक तापमान और लू चलने की संभावना है।’बता दे कि बुधवार को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड के अधिकांश भागों, उत्तरी राजस्थान के कई भागों, हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों, दक्षिणी बिहार, उत्तरी ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में भीषण गर्मी का प्रकोप रहा।मौसम विभाग ने जून के अंत तक राजधानी में मॉनसून के आगमन का अनुमान जताया है।

दिल्ली में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। पिछले 15 दिन से अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। आबादी के मामले में सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी भयंकर गर्मी से अछूता नहीं है। गोरखपुर से लखनऊ और नोएडा, गाजियाबाद वाले अब जल्द बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। मौसम विभाग की मानें को बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। आईएमडी ने यूपी में मॉनसून पहुंचने की तारीख 20 से 25 जून के बीच की बताई है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आने वाले समय में मौसम शुष्क रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बूंदा-बादी हो सकती है।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में भी भीषण गर्मी की स्थिति देखी गई। उत्तराखंड में भी गर्मी का कहर है। अधिकतम तापमान 41 डिग्री तक जा रहा है। तपिश कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। मौसम विभाग ने जो अनुमान व्यक्त किया है, उसके हिसाब से अगले 2-3 दिन तापमान में वृद्धि की आशंका है।मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के बिहार और झारखंड में 16-18 जून तक, उत्तर प्रदेश में 20-30 जून तक और दिल्ली में 27 जून के आसपास पहुंचने की उम्मीद है, जो राष्ट्रीय राजधानी के लिए सामान्य शुरुआत की तारीख है।

आखिर कौन से शहर झेल रहे हैं मौसम की मार ?

आज हम आपको बताएंगे कि कौन से शहर मौसम की मार झेल रहे हैं! दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में गर्मी के तेवर के आगे सब नतमस्तक हैं, फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर। मॉनसून वाली बारिश की बाट जोह रहे लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। अल सुबह जहां ठंडी हवाएं सुकून देती थीं, लेकिन अब सुबह से ही 40 डिग्री वाला फील आता है जो दोपहर होते तक हालत पस्त कर रहा है। इस गर्मी के आगे कूलर ऐसी सब फेल हैं। देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां अभी अधिकतान तापमान 45 डिग्री तक जाएगा। बाकी जगहों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित कई राज्यों में अभी मॉनसून से पहले जल्द राहत मिलने की संभवना नहीं है। दिल्ली में लू का प्रकोप एक बार फिर बढ़ रहा है। पश्चिमी राजस्थान और पूर्वी राजस्थान में भी अगले तीन दिन तक प्रचंड गर्मी देखने को मिलेगी। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी अभी राहत की उम्मीद नहीं है। मॉनसून की देरी और बढ़ती तपिश ने इन राज्यों को भी बेहाल कर दिया है।बुधवार को अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस रहा। यह सामान्य से पांच डिग्री अधिक था। आने वाले दिनों में दिल्ली और तपेगी। 18 जून से पहले लू से राहत के आसार नहीं हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री रहा। यह सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 28.5 डिग्री रहा। यह सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को आंशिक तौर पर बादल छाएंगे। कई जगहों पर लू का प्रकोप रहेगा। जमीनी सतह पर तेज गर्म और शुष्क हवाएं चलेंगी। इनकी स्पीड 25 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे रहेगी। अधिकतम तापमान 45 और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री तक रह सकता है। इसके बाद 14 और 15 जून को अधिकतम तापमान 44 डिग्री और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री तक रह सकता है। आंशिक तौर पर बादल छाएंगे। कुछ जगहों पर लू का प्रकोप रह सकता है। तेज हवाएं चलेंगी। इनकी गति 25 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। इसके बाद 16 से 18 जून के बीच अधिकतम तापमान 45 और न्यूनतम तापमान 30 से 31 डिग्री तक रह सकता है। आंशिक तौर पर बादल छाए रहेंगे। तेज हवाएं चलेंगी। इनकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है।

आबादी के मामले में सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी भयंकर गर्मी से अछूता नहीं है। गोरखपुर से लखनऊ और नोएडा, गाजियाबाद वाले अब जल्द बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। मौसम विभाग की मानें को बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। आईएमडी ने यूपी में मॉनसून पहुंचने की तारीख 20 से 25 जून के बीच की बताई है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आने वाले समय में मौसम शुष्क रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बूंदा-बादी हो सकती है।

उत्तराखंड में भी गर्मी का कहर है। अधिकतम तापमान 41 डिग्री तक जा रहा है। तपिश कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। मौसम विभाग ने जो अनुमान व्यक्त किया है, उसके हिसाब से अगले 2-3 दिन तापमान में वृद्धि की आशंका है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी। मौसम विभाग ने 16 जून तक हीटवेव चलने की भविष्यवाणी की है। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां भी हालत ठीक नहीं हैं। गर्मी का पारा यहां भी बढ़ा हुआ है। कई जगहों पर हीटवेव की स्थिति है और अभी यहां भी राहत की उम्मीद नहीं है। पश्चिमी राजस्थान और पूर्वी राजस्थान में भी अगले तीन दिन तक प्रचंड गर्मी देखने को मिलेगी। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी अभी राहत की उम्मीद नहीं है। मॉनसून की देरी और बढ़ती तपिश ने इन राज्यों को भी बेहाल कर दिया है।

बिहार में मॉननसून कब आएगा इसकी घोषणा हो गई है। अब ज्यादा दिनों तक गर्मी नहीं झुलसाएगी। बता दें कि बुधवार को अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस रहा। यह सामान्य से पांच डिग्री अधिक था। आने वाले दिनों में दिल्ली और तपेगी। 18 जून से पहले लू से राहत के आसार नहीं हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री रहा। यह सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 28.5 डिग्री रहा। यह सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 15-16 जून को उत्तर बिहार के जिलों के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा हो सकती है। इस दौरान दिन का तापमान 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इससे पहले बिहार में अगले दो-तीन दिनों तक हीट वेव की स्थिति बनी रहेगी।

क्या राजधानी दिल्ली में दूर हो पाएगी पानी की दिक्कत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राजधानी दिल्ली में पानी की दिक्कत दूर हो पाएगी या नहीं !राजधानी दिल्ली इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है। दिल्ली के कई इलाकों में पीने की पानी की भारी किल्लत है। सरकार इलाकों में पानी के टैंकर भेज कर आपूर्ति करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। दिल्ली सरकार इस मुद्दे को लेकर हरियाणा सरकार पर आरोप लगा रही है। जल संकट पर जमकर राजनीति हो रही है, लेकिन इसका खामियाजा केवल दिल्ली की जनता भुगत रही है। इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के सक्सेना की भी इस मामले में एंट्री हो चुकी है। उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज से राज निवास में मुलाकात की और जल संकट के हालातों की समीक्षा की। एलजी ने दिल्ली के मंत्रियों को आश्वासन दिया कि वह जल आपूर्ति के मुद्दे को हरियाणा सरकार के सामने उठाएंगे। लेकिन उन्होंने दोनों मंत्रियों को ‘आरोप-प्रत्यारोप’ में शामिल न होने और मुद्दों का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान करने की सलाह दी। गौरतलब है कि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार ने बीजेपी शासित हरियाणा पर पिछले कई दिनों से दिल्ली के हिस्से का पानी रोकने का आरोप लगाया है क्योंकि वह भीषण गर्मी के बीच गंभीर जल संकट से गुजर रही है। बैठक के बाद दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने कहा कि उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार से बात करने का आश्वासन दिया है कि राजधानी के हिस्से का 1,050 क्यूसेक पानी मुनक नहर में छोड़ा जाए।

उपराज्यपाल कार्यालय के एक बयान में कहा गया कि सक्सेना ने मंत्रियों को आश्वासन दिया कि वह जल आपूर्ति का मामला हरियाणा सरकार के साथ उठाएंगे और उनसे मानवीय आधार पर अतिरिक्त पानी छोड़ने का अनुरोध करेंगे। इसमें कहा गया है कि सक्सेना ने मंत्रियों को ‘आरोप-प्रत्यारोप’ से बचने और पानी की बर्बादी रोकने की भी सलाह दी। बयान में कहा गया है, ‘उपराज्यपाल ने मंत्रियों को सलाह दी कि वे व्यर्थ के आरोप-प्रत्यारोप में न पड़ें और पड़ोसी राज्यों के साथ इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करें। उन्होंने इस ओर भी इंगित किया कि यदि हरियाणा अपने आवंटित हिस्से से अधिक अतिरिक्त पानी छोड़ता है, तो जल शोधित करने और इसकी राजधानी वासियों तक आपूर्ति करने के लिहाज से दिल्ली के पास पर्याप्त जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) और क्षमता नहीं है।’

जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक 1 एमजीडी की कमी से शहर में लगभग 21,500 लोग प्रभावित होते हैं। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में या तो पानी की सप्लाई हो ही नहीं रही अगर हो भी रही है, तो जरूरत से काफी कम। इसमें मुनिरका, वसंत कुंज, मीठापुर, किराड़ी, संगम विहार, छतरपुर और बलजीत नगर के कुछ इलाके शामिल हैं। वहीं रोहिणी, बेगमपुर, वसंत कुंज, इंद्र एन्क्लेव, रोहिणी, सराय रोहिल्ला, मानकपुरा, डोलीवालान, प्रभात रोड, रैगरपुरा, बीडनपुरा, देव नगर, बापा नगर, नाइवालान, बलजीत नगर और ईस्ट पटेल नगर में पानी की किल्लत जारी है।

दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने कहा है कि दिल्ली को जितना पानी मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल रहा है। हरियाणा की तरफ से छोड़ा जा रहा पानी न जाने कहां गायब हो जा रहा है, जो दिल्ली तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, तब से वजीराबाद बैराज का पानी लगातार नीचे गिर रहा है। जितना पानी हरियाणा सरकार को मुनक कैनाल और वजीराबाद बैराज के लिए छोड़ना चाहिए, वह नहीं छोड़ रही है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि दिल्ली के जितने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं, वह अपनी कैपेसिटी के हिसाब से काम नहीं कर पा रहे हैं और पूरी दिल्ली में जल संकट बना हुआ है।

आतिशी ने आरोप लगाया कि जब हम हरियाणा सरकार से बात करते हैं तो वह कह रहे हैं कि हम तो पानी छोड़ रहे हैं, लेकिन यह पानी रास्ते में कहां गायब हो जाता है। हरियाणा सरकार के झूठ का खुलासा उन्हीं के सुप्रीम कोर्ट में दायर एफिडेविट से हुआ है। हरियाणा सरकार ने हिमाचल प्रदेश से भेजे जा रहे पानी को रास्ता नहीं दिया और हरियाणा सरकार की साजिश यही नहीं रुकी। जो मुनक कैनाल में पानी आता है, अपर यमुना रिवर बोर्ड के फैसले के बाद भी लगातार हरियाणा कम पानी छोड़ रहा है। दिल्ली में चुनाव से पहले चार दिनों तक हरियाणा ने कम पानी छोड़ा है।

आतिशी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो एफिडेविट हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है, उसमें साफतौर पर दिख रहा है कि बीते 7, 8, 9 और 10 जून को जो 710 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता, उसकी जगह 657 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और दूसरे सेंटर पर जो 330 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता, वह 310 क्यूसेक छोड़ा गया है। हरियाणा के दिए गए एफिडेविट से ही साफ हो गया है कि वह पूरी तरीके से मुनक कैनाल पर ही कम पानी छोड़ रहा है। जिसकी वजह से दिल्ली में जल संकट बरकरार है।

आखिर कैसा होने वाला है देश के मौसम का मिजाज?

अब देश के मौसम का मिजाज आने वाले समय में बदलने वाला है! दिल्ली-एनसीआर समेत देश भर के ज्यादातर राज्यों में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पारा 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया। दिल्ली के नरेला और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अधिकतम तापमान 47.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर हीट वेव का असर देखने को मिलने वाला है। आईएमडी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 12 जून से लेकर 17 जून के बीच हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है और पारा 45 डिग्री के पार पहुंच जाएगा। डॉक्टरों की सलाह है कि हीट वेव के दौरान घरों से बिल्कुल ना निकलें और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन का शिकार ना हो पाएं। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में 12 जून को आसमान में बादल छाए रहने की उम्मीद है और पारा 44 डिग्री के पार पहुंच सकता है। वहीं 13, 14, 15, 16 और 17 जून तक पारे के 45 डिग्री से ज्यादा पहुंचने की संभावना जताई गई है। साथ ही साथ किसी भी तरीके के कोई भी बादल छाने या बारिश या तेज तूफान के असर को भी मौसम विभाग ने नहीं दिखाया है। इससे साफ तौर पर जाहिर है कि एनसीआर वालों को एक बार फिर भीषण और तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है और हीट वेव के चलने के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ेगा।

देशभर में गर्मी ने सितम ढा रखा है। मानसून के आने से पहले लोगों के लिए इस चुभती गर्मी ने जीना मुश्किल कर दिया है। तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। गर्मी इतनी ज्यादा है कि अस्पतालों में हीटवेव की वजह से बीमार मरीजों की संख्या में खास तेजी देखी जा रही है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पानी की मारा-मारी भी शुरू हो गई है। एनसीआर के क्षेत्र में तो स्थिति और भी भयावह है। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में गर्मी से लोगों का हाल बुरा है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि प्रशासन को एडवाइजरी जारी करनी पड़ रही है। नोएडा में पारा 46 डिग्री को पार कर गया है। नोएडा जिला अस्पताल की सीएमएस रेनू अग्रवाल ने लोगों से अपील की कि पहले तो आप अपने घर से तब तक बाहर ना जाएं, जब तक कोई काम ना हो। फिर भी किसी तरह की परेशानी इस तपती गर्मी की वजह से किसी को हो रही है तो वह जिला अस्पताल में पहुंचें, यहां उनको पूरा इलाज मिलेगा।

वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राज्य में सबसे अधिक 47.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वाराणसी में अधिकतम तापमान 45.3 डिग्री, बागपत और फुरसतगंज में 45.2 डिग्री सेल्सियस, फतेहपुर में 45 डिग्री और राज्य की राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बीच, आगरा में हल्की बारिश हुई। बिहार में भीषण गर्मी के बीच राज्य शिक्षा विभाग ने सोमवार को सभी सरकारी स्कूलों को 15 जून तक बंद रखने का आदेश दिया है। शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है, “राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी और आईएमडी द्वारा जारी की गई चेतावनी के मद्देनजर विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को 11 से 15 जून तक बंद रखने का आदेश दिया है। चूंकि स्कूल बंद रहेंगे, इसलिए शिक्षकों के लिए भी 15 जून तक छुट्टियां घोषित की जाएंगी।” मौसम विभाग ने कहा कि राज्य में अगले तीन से चार दिन तक “भीषण गर्मी” रहेगी और 14 जून तक उत्तरी व दक्षिणी क्षेत्रों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है।

राजस्थान के कई स्थानों पर अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ गर्मी का प्रकोप जारी रहा। मंगलवार को चुरू 45.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा। जयपुर मौसम केन्द्र के एक अधिकारी ने बताया कि चूरू में मंगलवार को अधिकतम तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस, श्रीगंगानगर में 45.1 डिग्री, फतेहपुर और बीकानेर में 44.8 डिग्री, पिलानी में 44.7 डिग्री, संगरिया में 44.3 डिग्री, बाड़मेर में 44 डिग्री, जयपुर, अलवर एवं जैसलमेर में 43.5 डिग्री तापमान तथ जोधपुर और जालौर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि राज्य के अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान 25 डिग्री से 32 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। उनके अनुसार मंगलवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई।

हरियाणा के नूंह में अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस और हिसार में अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बीच, पंजाब के अंबाला में अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस और करनाल में 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोनों राज्यों की साझा राजधानी चंडीगढ़ में भी भीषण गर्मी रही और यहां अधिकतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

आखिर कौन से व्यक्ति किसी भी देश में बिना पासपोर्ट के जा सकते हैं?

आज हम आपको बताएंगे कि कौन से व्यक्ति किसी भी देश में बिना पासपोर्ट किया जा सकते हैं! जानकारी के लिए बता दे कि आपने कभी ना कभी तो विदेश यात्रा जरूर की होगी या किसी को करते हुए जरूर देखा होगा! हर किसी के हाथ में अपना पासपोर्ट और वीजा होता है! लेकिन आज हम आपको तीन ऐसे व्यक्ति बताने वाले हैं जो दुनिया में किसी भी देश में चले जाए उन्हें कभी भी पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं पड़ती! इस बारे में आपको पूरी जानकारी देंगे!

आपको बता दे कि जब वे विदेश यात्रा करते हैं तो कोई उनसे उनके पासपोर्ट के बारे में नहीं पूछता. बावजूद इसके उन्हें पूरा आदर सम्मान दिया जाता है. पहले के समय में दुनिया के देशों के बीच इस बात पर सहमति नहीं थी कि दूसरे देशों की यात्रा के वक्त दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही हर देश पासपोर्ट के महत्व को समझने लगा. वर्ष 1920 में अचानक सब कुछ बदल गया. संयुक्त राज्य अमेरिका ने अवैध अप्रवासियों को अपने देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए दुनिया भर में पासपोर्ट जैसी प्रणाली बनाने की पहल की. राष्ट्र संघ में भी इस पर बात हुई और 1924 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी नई पासपोर्ट प्रणाली जारी की. अब पासपोर्ट किसी दूसरे देश की यात्रा करने वाले व्यक्ति के लिए आधिकारिक पहचान पत्र बन गया है। इसमें उनका नाम, पता, उम्र, फोटो, नागरिकता और हस्ताक्षर शामिल हैं. यह उस व्यक्ति की पहचान का पता लगाने का एक सरल तरीका बन गया, जिस देश में वह जा रहा था. अब सभी देश ई-पासपोर्ट जारी करते हैं.

हालांकि अब भी 3 खास लोग हैं, जिन्हें दुनिया में कहीं भी यात्रा करने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं है. ये तीन विशेष लोग हैं -ब्रिटेन के राजा, जापान के राजा और रानी. चार्ल्स के ब्रिटेन का राजा बनने से पहले यह विशेषाधिकार दिवंगत महारानी एलिजाबेथ के पास था! जब एलिजाबेथ महारानी थीं तो उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त था, लेकिन उनके पति प्रिंस फिलिप के पास राजनयिक पासपोर्ट होना ज़रूरी था. ब्रिटेन में सबसे पहले सम्मान राज सिंहासन पर बैठे व्यक्ति को दिया जाता है, वहीं रानी के पति को हमेशा राजकुमार कहा जाता है.

जैसे ही चार्ल्स ब्रिटेन के राजा बने, उनके सचिव ने अपने देश के विदेश कार्यालय के माध्यम से सभी देशों को एक दस्तावेज़ संदेश भेजा. किंग चार्ल्स अब ब्रिटिश शाही परिवार के मुखिया हैं, इसलिए उन्हें पूरे सम्मान के साथ कहीं भी जाने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस दौरान कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. ब्रिटिश सम्राट को यह अधिकार है, लेकिन उनकी पत्नी को नहीं. जब वे किसी दूसरे देश की यात्रा करें तो उन्हें अपना कांसुलर पासपोर्ट अपने साथ रखना होता है. इसी तरह, शाही परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य भी राजनयिक पासपोर्ट रखने के हकदार हैं. इस प्रकार के पासपोर्ट रखने से उन्हें विशेष सम्मान दिया जाता है.

आइए अब जानते हैं कि जापान के सम्राट और महारानी को यह विशेषाधिकार क्यों और कैसे मिला. जापान के वर्तमान सम्राट नारुहितो हैं. उनकी पत्नी मसाको ओवाटा जापान की महारानी थीं और उन्होंने अपने पिता अकिहितो के सम्राट पद छोड़ने के बाद यह पद संभाला था. जब तक उनके पिता जापान के सम्राट थे, उन्हें और उनकी पत्नी को पासपोर्ट रखने की आवश्यकता नहीं थी. 88 वर्षीय अकिहितो 2019 तक जापान के सम्राट थे, जिसके बाद उन्होंने सेवानिवृत्त होने का फैसला किया. ऐसे में अब उन्हें विदेश यात्रा के दौरान कॉन्सुलर पासपोर्ट साथ रखना होगा.

जापान के सरकारी दस्तावेज़ बताते हैं कि विदेश मंत्रालय ने अपने सम्राट और साम्राज्ञी के लिए यह विशेष व्यवस्था 1971 में शुरू की थी. जापान का विदेश मंत्रालय और ब्रिटेन में राजा का सचिवालय तीनों के विदेश जाने की स्थिति में संबंधित देश को पहले ही जानकारी भेज देते हैं बता दे कि पहले के समय में दुनिया के देशों के बीच इस बात पर सहमति नहीं थी कि दूसरे देशों की यात्रा के वक्त दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही हर देश पासपोर्ट के महत्व को समझने लगा. वर्ष 1920 में अचानक सब कुछ बदल गया. संयुक्त राज्य अमेरिका ने अवैध अप्रवासियों को अपने देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए दुनिया भर में पासपोर्ट जैसी प्रणाली बनाने की पहल की . दुनिया के सभी प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों को एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते समय पासपोर्ट रखना अनिवार्य होता है. उनके पासपोर्ट काउंसलर पासपोर्ट होते हैं. इन नेताओं को सुरक्षा जांच और अन्य प्रक्रियाओं से भी छूट दी गई है. भारत में यह दर्जा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को प्राप्त होता है!