Tuesday, March 10, 2026
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आखिर कैसे बढ़ जाता है चुनावों में मत परसेंटेज?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर चुनावों में मत परसेंटेज कैसे बढ़ जाता है! एक एनजीओ ने वोटिंग के बाद मत प्रतिशत बढ़ने पर सवाल उठाया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत आवेदन भी किया है। कोर्ट ने इस गैर सरकारी संगठन की याचिका को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा। मत प्रतिशत में वृद्धि का हवाला देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को बदलने की आशंका है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को 24 मई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। एडीआर ने चुनाव आयोग को मतदान समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर मतदान के आंकड़े प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पूछा कि वेबसाइट पर मतदान के आंकड़े डालने में क्या कठिनाई है? चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि इसमें समय लगता है क्योंकि हमें बहुत सारा डेटा एकत्र करना होता है। 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की मतपत्रों पर वापसी की याचिका और ईवीएम पर संदेह को खारिज कर दिया था। चुनाव आयोग के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण द्वारा व्यक्त किए गए प्रत्येक संदेह का उत्तर दे दिया है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत करने के बाद 26 अप्रैल को ‘बैक टू बैलेट’ याचिका को खारिज कर दिया था। ईवीएम के खिलाफ संदेह को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे विश्वसनीय हैं। सिंह ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि भूषण को आवेदन के माध्यम से कुछ भी लाने का मन है, वह भी 2019 से लंबित याचिका में, अदालत को इस पर विचार नहीं करना चाहिए। ये चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास है, जिसके चार चरण सुचारू रूप से संपन्न हो चुके हैं।

सीजेआई की अगुआई वाली बेंच ने भूषण को दिए जा रहे तरजीही व्यवहार के आरोप पर आपत्ति जताई और कहा, ‘यह गलत आरोप है। अगर हमें लगता है कि किसी मुद्दे पर कोर्ट के ध्यान और हस्तक्षेप की जरूरत है, तो हम ऐसा करेंगे, भले ही इसे कोर्ट के सामने कोई भी लाए। अगर जरूरत पड़ी तो हम मामले की सुनवाई के लिए पूरी रात बैठेंगे।’ दरअसल, बेंच ने निर्धारित समय से कुछ घंटे बाद शाम 6.10 बजे याचिका पर सुनवाई की थी। 26 अप्रैल को जस्टिस खन्ना और दत्ता ने कहा था कि हमारे विचार से ईवीएम सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता के अनुकूल हैं। मतदाता, उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि तथा चुनाव आयोग के अधिकारी ईवीएम प्रणाली की बारीकियों से अवगत हैं। वीवीपीएटी प्रणाली को शामिल करने से वोट सत्यापन के सिद्धांत को मजबूती मिलती है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की समग्र जवाबदेही बढ़ जाती है।

न्यायमूर्ति खन्ना और न्यायमूर्ति दत्ता ने फॉर्म 17सी के तहत मतदान प्रतिशत की गणना और प्रकाशन की प्रक्रिया का भी विस्तृत विवरण दिया था – जो डाले गए मतों की संख्या का पता लगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीठ ने कहा कि मतदान प्रतिशत प्रत्येक मतदान एजेंट को प्रदान किया गया था। कांग्रेस, टीएमसी और सीपीएम द्वारा चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र के तुरंत बाद एडीआर ने अदालत में एक आवेदन दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चल रहे चुनावों के पहले और दूसरे चरण के लिए अंतिम मतदान के आंकड़े जारी करने में असामान्य देरी हुई है। एडीआर ने आरोप लगाया कि 19 अप्रैल के लिए मतदाता मतदान के आंकड़े 30 अप्रैल को प्रकाशित किए गए और 26 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए क्रमशः 11 और चार दिनों की देरी के बाद 30 अप्रैल को प्रकाशित किए गए।

एडीआर ने कहा, ‘चुनाव आयोग के 30 अप्रैल को जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित आंकड़ों में मतदान के दिन शाम 7 बजे तक घोषित प्रारंभिक प्रतिशत की तुलना में तीव्र वृद्धि (लगभग 5-6%) दिखाई देती है। अंतिम मतदाता मतदान डेटा जारी करने में अत्यधिक देरी, साथ ही 30 अप्रैल के चुनाव आयोग के प्रेस नोट में असामान्य रूप से उच्च संशोधन (5% से अधिक), और पूर्ण संख्या में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र के आंकड़ों की अनुपस्थिति ने उक्त डेटा की सत्यता के बारे में चिंता और सार्वजनिक संदेह पैदा किया है। एनजीओ ने आगे कहा कि इन आशंकाओं का समाधान किया जाना चाहिए और इन्हें दूर किया जाना चाहिए। मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए, यह आवश्यक है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी वेबसाइट पर सभी मतदान केंद्रों के फॉर्म 17सी भाग-I (रिकॉर्ड किए गए मतों का लेखा-जोखा) की स्कैन की गई सुपाठ्य प्रतियां प्रदर्शित करे, जिसमें मतदान समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर डाले गए मतों के प्रमाणित आंकड़े हों।

वोटिंग परसेंटेज विवाद को लेकर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वोटिंग परसेंटेज विवाद को लेकर एक बयान दे दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की अर्जी पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। इस अर्जी में मतदान के कुछ दिनों बाद फाइनल वोटिंग पर्सेंट में हुई बढ़ोतरी का हवाला देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के संभावित रिप्लेसमेंट की आशंका जताई गई है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने चुनाव आयोग को 24 मई तक एडीआर की अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस याचिका पर सोमवार से शुरू हो रहे कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वैकेशन बेंच सुनवाई करेगी। हालांकि, एडीआर की याचिका पर चुनाव आयोग के वकील ने सवाल उठाए थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम मामले की सुनवाई के लिए पूरी रात बैठेंगे। एडीआर ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को मतदान खत्म होने के 48 घंटे में वोटिंग के आंकड़े प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की है। जब पीठ ने पूछा कि ‘वेबसाइट पर मतदान के आंकड़े डालने में क्या कठिनाई है’, तो चुनाव आयोग के वकील ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ‘इसमें समय लगता है क्योंकि हमें बहुत सारा डेटा एकत्र करना होता है।’ चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव आयोग को याचिका पर जवाब देने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए। बेंच ने इसे चुनाव के छठे चरण से एक दिन पहले 24 मई को वेकेशन बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया। इससे पहले 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की बैलेट पेपर पर वापसी और ईवीएम पर संदेह जताए जाने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी।

एडीआर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर चुनाव आयोग के वकील ने सवाल खड़े किए। इलेक्शन कमीशन के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग के सीनियर अधिकारियों ने पिछली बार दाखिल याचिका पर एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण की ओर से व्यक्त किए गए हर संदेह का जवाब दिया था। उस याचिका में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया गया था और बैलेट पेपर से वोटिंग की अपील की गई थी। निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने याचिका में बिल्कुल गलत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा, जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ के हालिया फैसले में उन मुद्दों से निपटाया गया है, जो वर्तमान मामले का भी हिस्सा हैं।

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत के बाद 26 अप्रैल को बैलेट पेपर को फिर से अपनाने और वीवीपैट के साथ ईवीएम से हुई वोटिंग के 100 फीसदी मिलान की याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा था कि ईवीएम भरोसेमंद हैं। अब एडीआर की नई याचिका पर चुनाव आयोग के वकील मनिंदर सिंह ने कहा, ‘सिर्फ इसलिए कि प्रशांत भूषण को आवेदन के जरिए कोर्ट में कुछ भी लाने का मन है, वह भी 2019 से लंबित याचिका में, अदालत को इस पर विचार नहीं करना चाहिए। ये चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास हैं, जिसके चार फेज सुचारू रूप से पूरे हो चुके हैं। प्रशांत भूषण ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि मतदाता वोटिंग डेटा से संबंधित मुद्दा पिछली याचिका का हिस्सा नहीं था।

कांग्रेस, टीएमसी और सीपीएम की ओर से चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र के तुरंत बाद एडीआर ने एक आवेदन के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।बेंच ने इसे चुनाव के छठे चरण से एक दिन पहले 24 मई को वेकेशन बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया। इससे पहले 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की बैलेट पेपर पर वापसी और ईवीएम पर संदेह जताए जाने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका में चल रहे चुनावों के पहले और दूसरे चरण के लिए फाइनल वोट काउंटिंग के आंकड़ों को जारी करने में असामान्य रूप से देरी का आरोप लगाया गया था। एडीआर ने आरोप लगाया कि 19 अप्रैल को हुई वोटिंग के फाइनल आंकड़े 30 अप्रैल को प्रकाशित किए गए। 26 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान हुई तो उसके फाइनल आंकड़े 30 अप्रैल को प्रकाशित किए गए। इस तरह से पहले फेज की वोटिंग का फाइनल डेटा 11 दिन बाद और दूसरे चरण की वोटिंग के अंतिम आंकड़े 4 दिन बाद जारी किए गए।

क्या कांग्रेस पार्टी बन चुकी है मुसलमान की हमदर्द?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस पार्टी मुसलमान की हमदर्द बन चुकी है या नहीं! लोकसभा चुनाव, 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा गूंज रहा है। कोई मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कर रहा है तो कोई उन्हें घुसपैठिया तक बता रहा है। भाजपा जहां मुस्लिमों से दूरी बरतती नजर आती है, वहीं कांग्रेस और सपा खुद को मुस्लिमों की रहनुमा बताने में पीछे नहीं रहती हैं। मगर, हकीकत इन सबसे कोसों दूर हैं। मुस्लिमों को लेकर कोई भी पार्टी बहुत फिक्रमंद नहीं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संसद से लेकर विधानसभाओं तक करीब 20 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। भले ही मुस्लिमों की आबादी बढ़ी हो, मगर उनका संसद और विधायिकाओं में प्रतिनिधित्व घटा है। आइए-समझते हैं कि राजनीतिक पार्टियां क्यों मुस्लिमों से दूरी बरतती हैं और मुस्लिमों को किस पार्टी ने कितने टिकट दिए। कांग्रेस ने इस बार बस 16 मुस्लिम कैंडिडेट ही चुनाव में उतारे हैं। वहीं, सपा ने बस 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा है। इंडिया गठबंधन ने कुल 34 मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा है। वहीं, राजद ने बस 2 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में कांग्रेस ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। जबकि इसके पहले के चुनावों में वो कम से कम 1-2 सीटों पर प्रत्याशी उतारती रही है।

भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 13 मुस्लिमों को ही लोकसभा का टिकट दिया था। इनमें से एक को भी जीत हासिल नहीं हुई। 2024 के चुनाव में भाजपा की ओर से केरल की मलप्पुरम सीट से एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी अब्दुल सलाम हैं। अगर, उन्हें जीत मिलती है तो वह 2014 के बाद से भाजपा के पहले मुस्लिम प्रत्याशी होंगे, जो लोकसभा पहुंचेंगे।1980 के दशक में मुस्लिमों की कुल आबादी 11 फीसदी हुआ करती थी। उस वक्त संसद में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व 9 फीसदी था। आज मुस्लिमों की आबादी 14 फीसदी हो चुकी है, मगर संसद में उनका प्रतिनिधित्व 5 फीसदी से भी कम है। इनमें से बस 1 सांसद ही भाजपा का था। वहीं, 2019 के चुनाव में 543 सदस्यीय संसद में 27 मुस्लिम सांसद बनकर पहुंचे थे। इनमें एक भी सांसद भाजपा से नहीं था।2019 में मुस्लिमों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व 4.97 फीसदी था। इससे पहले 22014 में यह आंकड़ा 4.23 फीसदी था। भाजपा ने इस बार 430 प्रत्याशी खड़े किए हैं। एनडीए गठबंधन ने कुल 4 मुस्लिम प्रत्याशियों को इस बार चुनावी अखाड़े में भेजा है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि बताते हैं कि कोई भी चुनाव हो, उसमें मुस्लिम प्रत्याशी कम उतारे जाने की वजह है, पार्टियों की तुष्टिकरण की नीति। भाजपा भले ही मुस्लिमों से दूरी बरतती हो, मगर कांग्रेस-सपा जैसी पार्टियां भी मुस्लिमों से लगाव का बस ढोंग करती ही नजर आती हैं। दरअसल, कोई भी पार्टी उसी को टिकट देती हैं, जिसके जीत की संभावना ज्यादा हो। इसमें जातिगत समीकरण, धार्मिक समीकरण, आबादी, लोकप्रियता और दूसरों के मुकाबले काम का प्रदर्शन जैसे फैक्टर्स का ध्यान रखा जाता है। 1980 के दशक में मुस्लिमों की कुल आबादी 11 फीसदी हुआ करती थी। उस वक्त संसद में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व 9 फीसदी था। आज मुस्लिमों की आबादी 14 फीसदी हो चुकी है, मगर संसद में उनका प्रतिनिधित्व 5 फीसदी से भी कम है। 2019 में मुस्लिमों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व 4.97 फीसदी था। इससे पहले 22014 में यह आंकड़ा 4.23 फीसदी था।

देश के 28 राज्यों की विधायिकाओं में 4,000 से ज्यादा विधानसभा सदस्य चुनकर आते हैं। मगर, यहां भी मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नाममात्र का ही है। मौजूदा वक्त में इन विधायिकाओं में महज 6 फीसदी ही मुसलमान हैं। यहां तक कि देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य यूपी में करीब 16 फीसदी मुसलमान हैं, मगर वहां भी विधायिका में बस 7 फीसदी ही मुस्लिम हैं। 2014 में मोदी सरकार पहली बार सत्ता में आई थी। बता दें कि कांग्रेस ने इस बार बस 16 मुस्लिम कैंडिडेट ही चुनाव में उतारे हैं। वहीं, सपा ने बस 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा है। इंडिया गठबंधन ने कुल 34 मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा है। वहीं, राजद ने बस 2 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में कांग्रेस ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। जबकि इसके पहले के चुनावों में वो कम से कम 1-2 सीटों पर प्रत्याशी उतारती रही है। उस वक्त देश की संसद में 30 मुसलमान चुनाव जीतकर पहुंचे थे। इनमें से बस 1 सांसद ही भाजपा का था। वहीं, 2019 के चुनाव में 543 सदस्यीय संसद में 27 मुस्लिम सांसद बनकर पहुंचे थे। इनमें एक भी सांसद भाजपा से नहीं था।

स्वाति मालीवाल विवाद पर क्या बोले प्रमोद कृष्णम?

हाल ही में प्रमोद कृष्णम ने स्वाति मालीवाल विवाद पर एक बयान दिया है! दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार द्वारा मारपीट और बदसलूकी मामले में पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। यह एक गंभीर और संवेदनशील विषय है। मुझे लगता है कि जांच सही दिशा में हो रही है। जांच के बाद कुछ तथ्य सामने आएंगे तो फिर कुछ कहा जा सकता है। मैं दिल्ली पुलिस से अनुरोध करूंगा कि इस मामले की निष्पक्ष से जांच करें। राज्यसभा सांसद मालीवाल से सीएम केजरीवाल के घर में हुई मारपीट मामले में शनिवार को दिल्ली पुलिस ने बिभव कुमार को गिरफ्तार किया। इसके बाद बिभव ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा कि सोनिया गांधी ने अमेठी की जनता से भी यही कहा था कि अपने बेटे (राहुल गांधी) को तुम्हें सौंप रही हूं।

उन्होंने दावा किया राहुल गांधी जिस तरह अमेठी छोड़कर वायनाड चले गए, उसी तरह एक दिन रायबरेली भी छोड़ देंगे। दरअसल, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने रायबरेली में चुनावी रैली में भावुक अपील करते हुए कहा कि मैं आपको अपना बेटा सौंप रही हूं। जैसे आपने मुझे अपना माना, वैसे ही राहुल गांधी को अपना मानकर रखना। वह आपको निराश नहीं करेंगे।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव के अमरोहा और रायबरेली में चुनाव प्रचार करने पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि उन्हें अपनी-अपनी सीट और जान बचानी है। इंडिया गठबंधन का कोई भी नेता एक-दूसरे के साथ नहीं है। यह दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा करने के लिए देश की जनता को धोखा दे रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी को हटाना चाहते हैं क्योंकि वह भ्रष्टाचार उजागर कर रहे हैं। सारे लोग हजारों-करोड़ों की लूट में लिप्त हैं, इसलिए इनकी दुश्मनी पीएम मोदी से है।उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्ण बहुमत से नरेंद्र मोदी की सरकार बन रही है।

पीएम मोदी के खिलाफ सभी दल इकट्ठा हो गए हैं। पीएम मोदी अकेले अर्जुन की तरह इस महाभारत को जीतकर जैसे हस्तिनापुर का सिंहासन युधिष्ठिर को सौंप दिया था, उसी तरह नरेंद्र मोदी तीसरी बार खुद विजेता बनकर निकलेंगे। सभी दल अपने-अपने स्वार्थों के लिए एक-दूसरे का साथ दे रहे हैं। जबकि, सच बात है कि यह सभी एक-दूसरे के खिलाफ हैं। छात्र जीवन से ही कांग्रेस का दामन आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पकड़ लिया था। 1993 में संभल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी किया था लेकिन किसी कारण नामांकन वापस लेना पड़ा था।आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रियंका गांधी के करीबियों में शामिल आचार्य प्रमोद कृष्णम का कांग्रेस से साथ छूट गया। कई महीने से कांग्रेस छोड़ने की अटकलों पर भी शनिवार को विराम लग गया है। उनकी अब भाजपा के साथ राजनीतिक पारी की नई शुरूआत हो सकती है। हालांकि अभी तक भाजपा में जाने की बात पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्पष्ट नहीं किया है लेकिन अब उम्मीद है कि वह खुलकर सामने आ सकते हैं। छात्र जीवन से ही कांग्रेस का दामन आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पकड़ लिया था। 1993 में संभल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी किया था लेकिन किसी कारण नामांकन वापस लेना पड़ा था।

वर्षों से ऐंचोड़ा कंबोह में श्री कल्कि धाम का महोत्सव आयोजित होता है। कांग्रेस पार्टी के कई मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेताओं का सभी महोत्सव में आना-जाना रहा है। लेकिन शिलान्यास कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र इन नेताओं को दिया गया या नहीं इस पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने खुलकर बात नहीं की। ऐसी भी कोई जानकारी सामने नहीं आई जिससे यह जानकारी मिल पाती कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण पत्र दिया गया है या नहीं।आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के नेताओं पर लगातार निशाना साध रहे थे। वह उनके बयानों से खफा थे और इसलिए ही उन्होंने कांग्रेस के कई नेताओं को हिंदू विरोधी भी बताया था। अयोध्या में श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण पत्र ठुकराने वाले नेताओं पर भी भड़के थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बाद भी अपनी ही पार्टी का खुलकर विरोध शुरू किया तो कयास लगाए जाने लगे थे कि अब वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

क्या वर्तमान में मजबूर हो चुके हैं भारतीय नाविक?

वर्तमान में भारतीय नाविक मजबूर हो चुके हैं! पिछले दो सालों की तरह भारतीय नाविकों पर छोड़े जाने की तलवार लटकी हुई है। दरअसल अभी आधा साल भी नहीं बीता है और 411 भारतीय नाविकों को जहाजों पर छोड़ दिया गया है। अभी तक इस साल कुल 116 जहाजों को छोड़ा गया है और 1672 नाविक फंसे हुए हैं। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय परिवहन श्रमिक संघ को उम्मीद है कि पिछले साल 2023 के मुकाबले इस साल जहाज छोड़ने के मामले और भी ज्यादा होंगे। 2023 में रिकॉर्ड 129 जहाज छोड़े गए थे जिन पर 1983 नाविक सवार थे, जिनमें 401 भारतीय शामिल थे। ITF ने संयुक्त अरब अमीरात में एक ही कंपनी द्वारा संचालित दो जहाजों पर फंसे 16 भारतीय नाविकों की जानकारी दी है। ये जहाज यूएई की कंपनी AIM ग्लोबल शिपिंग एंड फ्यूल सप्लाई द्वारा संचालित हैं। इन नाविकों को महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जहाजों पर वातानुकूलन की सुविधा नहीं है और खाने की भी कमी है। छह नाविक सीशाइन 7 जहाज पर हैं, जो शारजाह में लंगर डाले हुए है। उन्हें 40,000 डॉलर से अधिक का बकाया वेतन दिया जाना बाकी है।

दस भारतीय संशाइन 7 नाम के जहाज पर हैं, जिनका उन्हें 35,000 डॉलर बकाया है। इस जहाज पर तंजानिया का झंडा है और इसे सितंबर 2022 में रद्द कर दिया गया था। इस जहाज पर न तो वातानुकूलन है और न ही रेफ्रिजरेशन की सुविधा है, और जनरेटर केवल एक घंटे के लिए चलता है। केबिनों में बहुत गर्मी होने के कारण चालक दल को डेक पर सोना पड़ता है। ITF फिलहाल जहाजों के मालिक के साथ बातचीत कर रही है।

इस साल अब तक छोड़े गए 116 जहाजों में से 75% तथाकथित सुविधा ध्वज के अंतर्गत चल रहे हैं। सीशाइन 7 जहाज को पलाउ के झंडे के साथ FOC के रूप में पंजीकृत किया गया था, वहीं तंजानिया को भी ITF ने FOC घोषित किया है। इस जहाज पर तंजानिया का झंडा है और इसे सितंबर 2022 में रद्द कर दिया गया था। इस जहाज पर न तो वातानुकूलन है और न ही रेफ्रिजरेशन की सुविधा है, और जनरेटर केवल एक घंटे के लिए चलता है। केबिनों में बहुत गर्मी होने के कारण चालक दल को डेक पर सोना पड़ता है। ITF फिलहाल जहाजों के मालिक के साथ बातचीत कर रही है। सुविधा ध्वज का मतलब है कि जहाज किसी ऐसे देश के झंडे का इस्तेमाल करता है, जो जहाज के मालिक देश से अलग होता है। ऐसा श्रम और कर नियमों से बचने के लिए किया जाता है। ITF की FOC सूची में शामिल होने वाले नवीनतम देश गैबॉन और एस्वातिनी पूर्व स्वाजीलैंड हैं। बता दें कि यूएई की कंपनी AIM ग्लोबल शिपिंग एंड फ्यूल सप्लाई द्वारा संचालित हैं।

इन नाविकों को महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जहाजों पर वातानुकूलन की सुविधा नहीं है और खाने की भी कमी है। छह नाविक सीशाइन 7 जहाज पर हैं, जो शारजाह में लंगर डाले हुए है। बता दें कि 401 भारतीय शामिल थे। ITF ने संयुक्त अरब अमीरात में एक ही कंपनी द्वारा संचालित दो जहाजों पर फंसे 16 भारतीय नाविकों की जानकारी दी है। ये जहाज यूएई की कंपनी AIM ग्लोबल शिपिंग एंड फ्यूल सप्लाई द्वारा संचालित हैं। इन नाविकों को महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जहाजों पर वातानुकूलन की सुविधा नहीं है और खाने की भी कमी है। यही नहीं जनरेटर केवल एक घंटे के लिए चलता है। केबिनों में बहुत गर्मी होने के कारण चालक दल को डेक पर सोना पड़ता है। ITF फिलहाल जहाजों के मालिक के साथ बातचीत कर रही है। सुविधा ध्वज का मतलब है कि जहाज किसी ऐसे देश के झंडे का इस्तेमाल करता है, जो जहाज के मालिक देश से अलग होता है। बता दें कि इसे सितंबर 2022 में रद्द कर दिया गया था। इस जहाज पर न तो वातानुकूलन है और न ही रेफ्रिजरेशन की सुविधा है, और जनरेटर केवल एक घंटे के लिए चलता है। केबिनों में बहुत गर्मी होने के कारण चालक दल को डेक पर सोना पड़ता है। ITF फिलहाल जहाजों के मालिक के साथ बातचीत कर रही है। ऐसा श्रम और कर नियमों से बचने के लिए किया जाता है। छह नाविक सीशाइन 7 जहाज पर हैं, जो शारजाह में लंगर डाले हुए है। उन्हें 40,000 डॉलर से अधिक का बकाया वेतन दिया जाना बाकी है। एस्वातिनी एक ऐसा देश है जो समुद्र से घिरा नहीं है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का सदस्य नहीं है। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद के दो सालों में गैबॉन ने अपनी रजिस्ट्री में 675% की वृद्धि देखी गई।

आखिर क्या है लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में अहम?

आज हम आपको बताएंगे कि लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में क्या अहम है! लोकसभा चुनाव के 5वें चरण का चुनाव प्रचार शनिवार शाम को थम गया है। इस चरण में 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 49 सीटों के लिए 20 मई को वोटिंग होनी है। इस चरण में 695 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। पांचवें चरण में मोदी सरकार के पांच मंत्रियों को अपनी साख बचानी होगी। इनके भाग्य का फैसला 20 मई को जनता करेगी। इस चरण में मोदी सरकार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, कौशल किशोर, साध्वी निरंजन ज्योति, भानु प्रताप वर्मा और योगी सरकार के मंत्री दिनेश सिंह रायबरेली से कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। पांचवे चरण में यूपी में 14 सीटों पर चुनाव होगा। 2019 के चुनाव में सिर्फ रायबरेली को छोड़कर सभी सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। रायबरेली से सोनिया गांधी ने जीत दर्ज की थी। राजनाथ सिंह लखनऊ से तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं। उनके खिलाफ सपा-कांग्रेस गठबंधन से रविदास मेहरोत्रा और बसपा के सरवर अली चुनावी मैदान में हैं। अमेठी लोकसभा से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एक बार फिर से चुनाव लड़ रही हैं। 2019 में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को हराया था। उनके खिलाफ गांधी परिवार के खास किशोरीलाल शर्मा ताल ठोक रहे हैं। शर्मा का दावा है कि 40 सालों से वो अमेठी की जनता से जुड़े हैं। उन्होंने राजीव गांधी के साथ भी रैलियों में भाग लिया था। इस सीट पर कांग्रेस के बड़े नेताओं का पूरा फोकस है। उत्तर प्रदेश में आम चुनाव के पांचवें चरण की 14 सीट और विधानसभा उपचुनाव की एक सीट के लिए चुनाव प्रचार शनिवार शाम 6 बजे समाप्त हो गया । इन सीटों पर 20 मई को मतदान होगा। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पांचवें चरण के 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों तथा लखनऊ पूर्व विधानसभा उप निर्वाचन के लिए 20 मई, सोमवार को मतदान होना है। इस चरण की 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मोहनलालगंज (आरक्षित), लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, जालौन (आरक्षित), झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी (आरक्षित), बाराबंकी (आरक्षित), फैजाबाद, कैसरगंज, गोंडा लोकसभा सीटें आती हैं। इसमें से 10 सीटें सामान्य श्रेणी की हैं और चार सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इन सभी सीटों के लिए शनिवार शाम छह बजे चुनाव प्रचार थम गया।

पांचवें चरण में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ-लखनऊ, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी-रायबरेली, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी-अमेठी, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर-मोहनलालगंज, केंद्रीय मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा-जालौन, केंद्रीय मंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति और सांसद लल्लू सिंह-फैजाबाद लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबले में हैं। पांचवें चरण में चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उप्र के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ समेत सत्‍ता पक्ष के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने जहां विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला।

वहीं, विपक्षी दलों के समूह इंडिया गठबंधन के प्रमुख नेताओं कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेताओं ने भाजपा पर जमकर प्रहार किए। वहीं इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में साझा सभाएं की। अकेले चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहीं बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ही सपा और कांग्रेस की भी जमकर आलोचना की।

बिहार में लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में पांच संसदीय क्षेत्र में होने वाले मतदान को लेकर शनिवार की शाम चुनाव प्रचार थम गया। इस चरण में सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण तथा हाजीपुर लोकसभा क्षेत्रों में सोमवार को मतदान होगा। कुल 95.11 लाख मतदाता 80 प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। इस चरण में सबसे अधिक 26 प्रत्याशी मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में हैं, जबकि सबसे कम मधुबनी संसदीय क्षेत्र में 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। सीतामढ़ी, सारण और हाजीपुर से 14-14 प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। मतदाताओं के मताधिकार का उपयोग करने के लिए 9436 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस चरण में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय दलों से 15 प्रत्याशी हैं, जबकि 35 निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इस चरण में एनडीए की ओर से भाजपा के तीन, लोजपा के एक तथा जदयू के एक प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद के चार, कांग्रेस के एक प्रत्याशी हैं। बसपा इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन सभी सीटों पर मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन उम्मीदवारों के बीच माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों के लिए पांचवें चरण में 13 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके लिए चुनाव प्रचार शाम पांच बजे खत्म हो गया। महाराष्ट्र में पांचवें और अंतिम चरण मुंबई मेट्रोपॉलिटिन रीजन की 10 सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे। महाराष्ट्र की इन 13 सीटें में सात सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी हैं, जबकि छह सीटों पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना की प्रतिष्ठा दांव हैं। इसी प्रकार महाविकास आघाड़ी में तीन सीटों पर कांग्रेस और दो सीटों पर एनसीसी शरदचंद्र पवार और बाकी नौ सीटों पर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के कैंडिडेट मैदान में है। मोटे तौर पर यह महाराष्ट्र की इन 13 सीटों में शिवसेना के दोनों खेमों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

2047 ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पूरा करने में सफल होने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी!

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नरेंद्र मोदी ने भी यही कहा कि भगवान ने उन्हें 2047 में ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पूरा करने के लिए भेजा है. जब तक वह लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता, भगवान उसे वापस नहीं लेंगे।
नरेंद्र मोदी ने कहा, उन्हें यकीन है कि उनका जन्म जैविक तौर पर नहीं हुआ है. भगवान ने उसे भेजा. उन्हें कुछ खास काम करने के लिए भेजा गया है. आज फिर नरेंद्र मोदी ने वही शब्द दोहराते हुए कहा कि भगवान ने उन्हें 2047 में ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पूरा करने के लिए भेजा है. जब तक वह लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता, भगवान उसे वापस नहीं लेंगे।

आज राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर मोदी को भगवान ने भेजा है तो जब कोविड के दौरान गंगा में लाशें तैर रही थीं, अस्पताल के सामने लाशों के ढेर लग रहे थे तो वह बर्तन बजाने को क्यों कह रहे थे! उसने परमात्मा के भेजे हुए से कहा, मोबाइल फोन की लाइट जलाओ। जिसे भगवान ने भेजा है, वह सिर्फ अडानी, अंबानी जैसे देश के 22 करोड़पतियों के लिए ही काम क्यों करता है? कांग्रेस नेताओं ने कटाक्ष किया, मोदी इतने दिनों तक खुद को भगवान का दूत बताते रहे. अब वह यह भी दावा कर रहा है कि उसके पास इच्छा-मृत्यु की शक्ति है।

हाल ही में वाराणसी में एक इंटरव्यू के दौरान नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि उन्हें इतनी ऊर्जा कहां से मिलती है? नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, ”जब तक मेरी मां जीवित थीं, मुझे लगता था कि मेरा जन्म जैविक प्रक्रिया के तहत हुआ है. लेकिन मेरी मां के जाने के बाद मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि भगवान ने मुझे भेजा है. इसीलिए इतनी अधिक कार्य-शक्ति है। मुझे एक काम करना है. इसीलिए मुझे भेजा गया है।”

आज एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 73 वर्षीय नरेंद्र मोदी ने कहा, ”भगवान ने मुझे 2047 में विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए भेजा है। मुझे पूरा विश्वास है, जब तक वह लक्ष्य पूरा नहीं होगा, भगवान मुझे वापस नहीं लेंगे।” संयोग से नरेंद्र मोदी 2047 में 96 साल के हो जाएंगे.

राहुल गांधी ने गुरुवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में चुनाव प्रचार किया. दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर शनिवार को वोटिंग हो रही है. आज प्रचार का आखिरी दिन था. राहुल ने भीड़ से पूछा, क्या उन्होंने मोदी का इंटरव्यू देखा है या नहीं? पूर्वोत्तर दिल्ली की लोकसभा सीट से उम्मीदवार कन्हैया कुमार भी वहां मौजूद थे. राहुल ने कहा, ‘अगर कन्हैया आकर मेरी बात पर विश्वास करता है और कहता है कि वह जैविक रूप से पैदा नहीं हुआ है, उसे भगवान ने भेजा है, तो मैं हाथ जोड़कर कन्हैया से कहूंगा, गलती हो भी जाए तो ऐसी बातें मत कहना. लेकिन देश के प्रधानमंत्री खुलेआम कहते हैं कि उनका जन्म जैविक तौर पर नहीं हुआ है. भगवान ने उसे भेजा. उनके चमचे वाह-वाह कर रहे हैं. जिसे परमात्मा ने भेजा है, वह कोविड के दौरान कहता है, थाली बजाओ। जब गंगा में लाशें तैर रही होती हैं, लोग अस्पताल के सामने मर रहे होते हैं, तब प्रधानमंत्री आते हैं और कहते हैं, “प्रधानमंत्री नहीं, भगवान दूत हैं,” वे कहते हैं, “भाइयों और बहनों, मोबाइल फोन की लाइट जलाओ ।”

राहुल ने कहा, ”जिसे भगवान भेज रहे हैं, जब युवा उनसे आमदनी पूछते हैं तो वो कहते हैं कि नाली में गैस है. अगर आप उस नाली में पाइप डालेंगे तो गैस निकलेगी. – आग जलाकर पकौड़े बनाएं. जिसे भगवान ने भेजा है, वह केवल 22 करोड़पतियों के लिए काम करता है। वह केवल अडानी और अंबानी के लिए काम करने में व्यस्त हैं। इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं? गरीब और गरीब क्यों होते जा रहे हैं? मोदी जी ने 30 सेकंड सोचा और जवाब दिया, तो क्या मैं सबको गरीब बना दूंगा?’ राहुल ने मजाक में कहा, “हे परमात्माजी, आपने कैसा आदमी भेजा?”

दिलशाद गार्डन अभियान के बाद, राहुल ने उत्तर पश्चिमी दिल्ली के मंगलपुरी में महिला सम्मेलन के लिए मेट्रो रेल पकड़ी। बाद में उन्होंने ट्वीट किया कि दिल्ली मेट्रो रेल कांग्रेस काल में शुरू हुई थी। प्रचार के दौरान आंध्र भवन रेस्टोरेंट में जाकर दोपहर का खाना खाया. महिला सम्मेलन में राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है. राहुल ने कांग्रेस को सत्ता में आने पर गरीब महिलाओं को प्रति वर्ष 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने के वादे की याद दिलाई। महंगाई पर बात करते-करते एक महिला रो पड़ीं. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत कम कर दी गई है. वोट के बाद सिलेंडर के दाम बढ़े तो परिवार कैसे चलेगा? राहुल ने उसके आँसू पोंछे और उसे सांत्वना देते हुए कहा, “मैं तुम्हारे परिवार की देखभाल कर रहा हूँ।” राहुल ने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से महिला की समस्या पर गौर करने को कहा। दिल्ली चुनाव के लिए आज प्रचार के आखिरी दिन सात सीटों पर कांग्रेस-आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “यह चुनाव बेरोजगारी, महंगाई, संवैधानिक संस्था पर हमले के मुद्दों पर लड़ा जा रहा है।” दिल्ली में।

आज नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान की ताकत को परखने के लिए उन्होंने खुद पाकिस्तान का दौरा किया था. एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, ”मैं बिना किसी सुरक्षा जांच के लाहौर में उतरा. उनके एक पत्रकार ने टीवी पर कहा, “हे भगवान, मोदी बिना वीज़ा के पाकिस्तान में प्रवेश कर गए हैं।” यह बताते हुए कि पाकिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा था, मोदी ने कहा, “मैं क्यों नहीं जा सकता?” ”यह कभी मेरा देश था।”

पीएम मोदी की जीत के बारे में क्या बोले राहुल गांधी?

हाल ही में राहुल गांधी ने पीएम मोदी की जीत के बारे में एक बयान दे दिया है! कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि प्रधानमंत्री को यह पता चल गया है कि लोकसभा चुनाव में उनका ‘बाय-बाय’ होने जा रहा है। उन्होंने यहां एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी को सीधी बहस की चुनौती दी और यह भी कहा कि मोदी उनके साथ कभी बहस नहीं कर सकेंगे क्योंकि उनसे अडाणी के रिश्ते, ‘अग्निपथ’ योजना, चीन के अतिक्रमण, कोरोना संकट के बारे में सवाल किए जाएंगे।राहुल गांधी ने उम्मीद जताई कि दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीट पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तीन सीट पर अपनी पार्टी को वोट देना है और चार सीट पर आम आदमी पार्टी का समर्थन करना है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को तीन सीट पर कांग्रेस का (चुनाव चिह्न वाला) बटन दबाना है और चार पर अपनी पार्टी का बटन दबाना है।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इस चुनाव में एक साथ आए हैं क्योंकि हमारा लक्ष्य संविधान को बचाने का है।राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा के कई नेताओं ने खुलकर कहा है कि उन्हें मौका मिलेगा तो संविधान को फाड़ कर फेंक देंगे। उन्होंने कहा कि पहला काम इस संविधान की रक्षा करना है क्योंकि यही आपका भविष्य और यही आपका सपना है, आपके दिल की आवाज है।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ 22-25 उद्योगपतियों के लिए काम किया है।

राहुल गांधी ने कहा कि मैं छोटे व्यापारियों से पूछना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी ने 10 साल में आपके लिए क्या किया है? चांदनी चौक दिल्ली के व्यापारियों के लिए क्या काम किया है?उन्होंने कहा कि नोटबंदी से छोटे व्यापारियों का नुकसान हुआ, हजारों कारोबार बंद हो गए तथा गलत ढंग से जीएसटी लागू गई जिसके कारण भी बहुत बड़ा नुकसान हुआ।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने छोटे व्यापारियों का एक रुपया माफ नहीं किया, लेकिन अंबानी, अडाणी और कई उद्योगपतियों के 16 लाख करोड रुपये माफ कर दिए।उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे और सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने दावा किया की देशभक्ति के प्रतीक लाल किले का भी ठेका किसी को दे दिया गया। उन्होंने कहा कि दो-तीन बुद्धिजीवी और पत्रकारों ने मुझे चिट्ठी लिखी और मोदी जी को चिट्ठी लिखी। उन्होंने कहा कि मोदी जी, लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए, आपको राहुल गांधी के साथ बहस करनी चाहिए। उनका कहना था कि मैं बहस के लिए तैयार हूं, नरेन्द्र मोदी कहीं भी, किसी भी समय बहस कर सकते हैं। नरेन्द्र मोदी जी मेरे साथ बहस नहीं करेंगे क्योंकि उससे पहले सवाल यही होगा कि अडाणी जी के साथ आपका क्या रिश्ता है?राहुल गांधी ने कहा कि जब चुनावी बॉन्ड के बारे में नरेन्द्र मोदी से सवाल किया जाएगा तो वह फंस जाएंगे, तीन काले कानून के बारे में भी सवाल किए जाएंगे।

राहुल गांधी ने कहा कि बहस में मोदी से यह सवाल भी किया जाएगा कि जब कोरोना में लोगों की मौत हो रही थी तो आपने ताली-थाली बजाने के लिए क्यों कहा?उनके मुताबिक, बहस में प्रधानमंत्री मोदी से चीन के अतिक्रमण और सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ’ योजना के बारे में भी सवाल किए जाएंगे।राहुल गांधी ने दावा किया इन सब सवालों के चलते नरेन्द्र मोदी के उनके साथ बहस नहीं कर पाएंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि कि प्रधानमंत्री पहले नफरत फैलाते थे, लेकिन पिछले दिनों एक पत्रकार ने उनका इंटरव्यू किया तो उन्होंने कहा कि ईद के दिन मुसलमान भाई उनके घर खाना भेजते थे।उन्हें कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी, आप तो कहते थे कि आप शाकाहारी हैं।उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी को पता चल गया है कि उनका ‘बाय-बाय’ होने जा रहा है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को टैम्पो से पैसे मिल रहे हैं तो फिर इस मामले की जांच कराई जाए।उन्होंने कहा कि एक साथ खड़े होकर ‘मेड इन चाइना’ का मुकाबला करना है और ‘मेड इन इंडिया’, ‘ मेड इन चांदनी चौक ‘ और ‘मेड इन न्यू डेल्ही’ बनाना है।राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करती है।उन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग डरपोक हैं, वह चले जाए तो बेहतर है क्योंकि कांग्रेस को बब्बर शेर लोगों की जरूरत है।

क्रिकेटरों, चयनकर्ताओं से असहमति! टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने से 10 दिन पहले,

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दोनों क्रिकेटरों को वर्ल्ड कप टीम में नहीं रखने को लेकर कोच की चयनकर्ताओं से गहरी असहमति थी. टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी कोच के खिलाफ शिकायत की. उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.
टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने से 10 दिन पहले राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच को बर्खास्त कर दिया गया. ऐसा ही एक हैरान करने वाला फैसला क्रिकेट कनाडा (देश की क्रिकेट संस्था) ने लिया। वे राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच पुबुदु दश्नायक पर भरोसा नहीं कर सके।

टी20 वर्ल्ड कप 2 जून से शुरू होगा. और गुरुवार को राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच डैशनाइके को कनाडाई क्रिकेट एसोसिएशन ने बर्खास्त कर दिया। यह पहली बार है जब उत्तरी अमेरिकी देश ने टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है। इससे पहले, पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर कनाडाई राष्ट्रीय टीम के कोच थे। हालाँकि, कनाडाई क्रिकेट अधिकारी उन पर भरोसा नहीं कर सके। कनाडा के क्रिकेट अधिकारी दासनाइक के कुछ हालिया कार्यों से नाखुश थे। वे टीम की तैयारी के चरण से खुश नहीं थे। लेकिन उनकी कोचिंग में ही कनाडा ने पहली बार टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया. 2023 एक दिवसीय विश्व कप के लिए क्वालीफाइंग में कनाडा के अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें 50 ओवर के क्रिकेट के लिए फिर से मान्यता दिला दी। डैशनाइक ने पिछले दो वर्षों में कनाडा को ऐसी कई सफलताएँ दिलाई हैं।

दशनायके ने निखिल दत्त और जेरेमी गोर्न को विश्व कप टीम से बाहर कर दिया। उनसे असहमति के कारण कोच उन्हें टीम में नहीं रखना चाहते थे. कुछ दिन पहले कनाडा की तीन सदस्यीय चयन समिति के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई थी. इसके अलावा कुछ दिनों तक तैयारी शिविर में डैशनाइके की अन्य क्रिकेटरों से नहीं बन पाई. उनके खिलाफ कई शिकायतें कनाडाई क्रिकेट एसोसिएशन को सौंपी गई थीं। इसके तुरंत बाद, क्रिकेट कनाडा के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष गुरदीप क्लेयर ने डैशनाइके को कोच पद से बर्खास्त कर दिया। डैशनाइक को हटाने के फैसले की घोषणा क्रिकेट कनाडा ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को लिखे एक पत्र में की। नये कोच के रूप में किसी की घोषणा नहीं की गयी है. क्रिकेट कनाडा ने आश्वासन दिया कि टी20 विश्व कप शुरू होने से पहले एक उपयुक्त व्यक्ति को राष्ट्रीय टीम के लिए कोच नियुक्त किया जाएगा।

इंग्लैंड ने पिछली बार टी20 वर्ल्ड कप जीता था. वे इस बार भी ट्रॉफी बरकरार रखने के लिए बेताब हैं. उस उद्देश्य के लिए, वे मैनचेस्टर सिटी से एक ‘विशेष’ व्यक्ति को शिविर में लाए, जिसने इंग्लिश प्रीमियर लीग जीता था। वह अल्पावधि में जोस बटलर की टीम से जुड़ रहे हैं.

वह व्यक्ति डेविड यंग है। पेशे से मनोवैज्ञानिक. पेप गार्डियोला की टीम पिछले कुछ वर्षों से मैन सिटी के साथ जुड़ी हुई है। लेकिन पहले उन्होंने 2016 से 2020 तक इंग्लैंड क्रिकेट टीम के साथ काम किया था. यंग के पास खिलाड़ियों को वापस लाने और उन्हें उत्साहित करने का कौशल नहीं है। उन्हें इंग्लैंड टीम में विशेषज्ञ के तौर पर चुना गया है. शहर से अनुमति ले ली गई है।

इस फैसले के पीछे सफेद गेंद टीम के कप्तान बटलर हैं. 2019 विश्व कप फाइनल में यंग ने बटलर की काफी मदद की थी. मालूम हो कि यंग पाकिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मैच से पहले लीड्स में इंग्लैंड टीम से जुड़े थे. इससे पहले, उन्होंने मैन सिटी को प्रेरित किया। सिटी अगले शनिवार को एफए कप फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ खेलेगी। इंग्लैंड के व्हाइट बॉल कोच मैथ्यू मॉट ने कहा, ”यंग पहले भी हमारी टीम में काम कर चुके हैं। मैंने उनसे टीम में वह जुनून, वह सहजता वापस लाने के लिए कहा।”

देश के लिए खेलने के लिए उन्हें आईपीएल के बीच में ही टीम छोड़नी पड़ी. देश दौरे पर गए जोस बटलर ने एक टिप्पणी कर विवाद पर विराम लगा दिया. उन्होंने कहा, आईपीएल के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं होना चाहिए. उन्होंने अपने ही देश का विरोध किया.

पहला टी20 बारिश के कारण धुल जाने के बाद बटलर ने एक टीवी चैनल से कहा, ”एक नई प्रतियोगिता खेलने जा रहा हूं.” सारी टीम का वहां होना अच्छा है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मेरी राय है कि आईपीएल के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं होना चाहिए. यह बात मैंने अपने मन से कही है. ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कोई जरूरत नहीं है जब आईपीएल इससे टकरा रहा हो.”

यह महसूस करते हुए कि उनके शब्द विवादास्पद हो सकते हैं, बटलर ने कहा, “इंग्लैंड के कप्तान के रूप में मैं पहली बार देश के लिए खेल रहा हूं। हम विश्व कप के लिए यथासंभव अच्छी तैयारी करना चाहते हैं।”

हालाँकि, इंग्लैंड के बोर्ड के प्रमुख रॉब ने कुछ दिन पहले इसके विपरीत कहा था। उन्होंने इंग्लैंड के कप्तान से हुई बातचीत का जिक्र किया. बटलर से कहा, “सुनो, तुम इंग्लैंड के कप्तान हो। तो आपको पाकिस्तान के खिलाफ इस सीरीज में जरूर खेलना चाहिए. आप क्या सोचते हैं?”

गरीबी कम करने का जादू आप भी अपनाये ये तरीका!

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यह देखने के लिए कि गरीबी कितनी कम हुई है, केवल निचले 20% परिवारों के प्रति व्यक्ति खर्च को देखने की जरूरत है। एनएसएसओ परिवारों के मासिक प्रति व्यक्ति व्यय को दो तरीकों से मापता है।
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा 2022-23 में भारतीय परिवारों के मासिक प्रति व्यक्ति व्यय पर जारी रिपोर्ट में निस्संदेह राजनीतिक मकसद है। इससे पहले 2017-18 में भी इसी तरह की रिपोर्ट तैयार की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे जारी नहीं होने दिया था, क्योंकि रिपोर्ट के लीक हुए हिस्से के मुताबिक पता चला था कि 2017-18 में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च पिछले साल की तुलना में कम हो गया है. 2011-12. गरीबी बढ़ी है. इस बार वह डरने वाले नहीं हैं. पूर्ण डेटा युक्त रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बजाय सर्वेक्षण के अंतिम निष्कर्षों का सारांश देने वाली एक फैक्ट शीट जारी की गई है, जिसमें 2011-12 की तुलना में 2022-23 में भारतीय परिवारों के प्रति व्यक्ति मासिक व्यय में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। वहीं गरीबी दर 22.9% से घटकर करीब 5% पर आ गई है. दूसरे शब्दों में कहें तो एनएसएसओ की रिपोर्ट लोकसभा चुनाव से पहले यह संदेश दे रही है कि मोदी-काल में न केवल उन लोगों की स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि सुधार का लाभ समाज के सबसे निचले तबके तक भी पहुंचा है।

यह देखने के लिए कि गरीबी कितनी कम हुई है, केवल निचले 20% परिवारों के प्रति व्यक्ति खर्च को देखने की जरूरत है। एनएसएसओ परिवारों के मासिक प्रति व्यक्ति व्यय को दो तरीकों से मापता है। सबसे पहले, विभिन्न सरकारी योजनाओं से परिवारों को मिलने वाली उपभोग वस्तुओं – राशन चावल और गेहूं से लेकर साइकिल, लैपटॉप, स्कूल बैग, नोटबुक तक – की गणना केवल घरेलू आय से की जाती थी। दूसरा, प्रति व्यक्ति व्यय के आंकड़े की गणना सरकारी योजनाओं से मुफ्त उपभोक्ता वस्तुओं के बाजार मूल्य को घरेलू व्यय में जोड़कर की जाती है। परिवारों को उनके प्रति व्यक्ति मासिक व्यय के आधार पर कई स्तरों में विभाजित किया गया है।

जिस परिवार की दैनिक प्रति व्यक्ति आय $2.15 या उससे कम है, उसे विश्व बैंक द्वारा गरीब कहा जाता है। यदि आप पैसे के संदर्भ में इस डॉलर के मूल्य की गणना करना चाहते हैं, तो आपको क्रय शक्ति समानता, यानी क्रय शक्ति-आधारित मनी-डॉलर विनिमय दर को देखना होगा। 2022 में यह विनिमय दर 22.88 रुपये प्रति डॉलर थी. तदनुसार, यदि किसी परिवार की मासिक प्रति व्यक्ति खपत 1476 टका या उससे कम है, तो उसे विश्व बैंक के मानदंडों के अनुसार गरीब कहा जा सकता है। सरकारी आंकड़ों से निकलने वाले मासिक उपभोग व्यय के अनुमान से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सबसे गरीब पांच प्रतिशत परिवारों का प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय कम है – मुफ्त उपभोग्य सामग्रियों को छोड़कर, प्रति माह 1,373 रुपये और मुफ्त वस्तुओं सहित 1,441 रुपये। यानी एनएसएसओ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गरीबी दर घटकर 5 फीसदी पर आ गई है.

अगर सच है तो यह बहुत अच्छी खबर है. लेकिन, यह बात सच है या नहीं, इस पर गहरा संदेह है। जैसा कि हम जानते हैं, लगातार नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन ने देश के असंगठित क्षेत्र और उस पर निर्भर गरीब लोगों को तबाह कर दिया। उपरोक्त चोटों से जूझने के बाद देश की गरीब जनता ने अपना मासिक खर्च रातों-रात कैसे बढ़ा लिया? हालाँकि, लॉकडाउन के दौरान या उससे पहले, केंद्र और राज्य सरकारों ने गरीबों के लिए योजनाओं की संख्या और आवंटन में वृद्धि की। मुफ़्त राशन जैसी कुछ योजनाएँ अभी भी चल रही हैं। लेकिन, यह कहना मुश्किल है कि इन कल्याणकारी योजनाओं के कारण गरीबी दर में कमी आई है। क्योंकि, सरकारी खातों से पता चलता है कि मुफ्त उपभोक्ता वस्तुओं को छोड़कर भी, ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे गरीब पांच प्रतिशत परिवारों को छोड़कर, सभी घरों का मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय 1,476 टका से अधिक है। माना कि खर्च किया गया कुछ पैसा सरकारी नकद हस्तांतरण योजनाओं जैसे विधवा लाभ या किसान लाभ से आता है। लेकिन पूरे देश के सन्दर्भ में इसकी मात्रा इतनी नहीं है कि गरीबी घटकर पाँच प्रतिशत रह जाये।

संशय के और भी कारण हैं. विश्व बैंक ने दो साल 2019-21 के दौरान भारत में एक अध्ययन किया। उस सर्वेक्षण के आधार पर, विश्व बैंक का अनुमान है कि 2021 में, $2.15 बेंचमार्क के आधार पर 18.2 करोड़ या 12.92% भारतीय गरीबी रेखा से नीचे रहते थे। अगर हम इस गणना को पूरी तरह से निराधार मानकर खारिज न करें तो सवाल उठेगा- किस जादू से महज एक साल में गरीबी का अनुपात इतना कम हो गया?

यह रहस्य एनएसएसओ की नई सर्वेक्षण पद्धति में छिपा हो सकता है। नमूना लेने से पहले, परिवारों को उनकी वित्तीय स्थिति के अनुसार स्तरीकृत करना महत्वपूर्ण है। अगला कदम प्रत्येक स्ट्रैटम का अलग-अलग नमूना लेना है, ताकि कोई भी स्ट्रैटम परिवार नमूने से छूट न जाए। इस प्रक्रिया को स्तरीकृत नमूनाकरण कहा जाता है। स्तरीकरण का कार्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस पर निर्भर करता है कि समाज के प्रत्येक स्तर के परिवारों को नमूने में जगह मिलेगी या नहीं। 2011-12 के सर्वेक्षण की तरह 2022-23 के सर्वेक्षण में स्तरीकरण नहीं किया गया। हमारे अनुमान में, स्तरीकरण में परिवर्तन के परिणामस्वरूप गरीबी दर इतनी कम प्रतीत होती है। पहला, शहरी परिवार। 2011-12 के सर्वेक्षण में, शहर में परिवारों को उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था – शीर्ष 10%, मध्य 60% और निचला 30% – मध्य स्तर से आधे और शेष दो स्तरों से छह। परिणामस्वरूप, अमीर और गरीब दोनों को उनके महत्व के अनुसार नमूने में शामिल किया गया। 2022-23 का सर्वेक्षण शहर के परिवारों को तीन श्रेणियों में विभाजित करता है – जिनके पास 10 लाख रुपये या उससे अधिक के चार पहिया वाहन हैं; जिनके पास दस लाख रुपये से कम कीमत का चार पहिया वाहन है; और जिनके पास चार पहिया वाहन नहीं है. चूंकि हमारे देश में अधिकांश घरों के पास चार पहिया वाहन नहीं हैं, इसलिए अधिकांश नमूना तीसरे खंड से आता है।