Monday, March 9, 2026
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आखिर क्या है राजस्थान के उदयपुर में हुआ पूजा हत्याकांड?

आज हम आपको राजस्थान के उदयपुर में हुआ पूजा हत्याकांड के बारे में जानकारी देने वाले हैं! राजस्थान में उदयपुर जिले के मावली थाना क्षेत्र में एक साल पहले हुआ पूजा भील हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर पूजा भील को न्याय दिलाने के लिए एक मुहिम चल रही है। इस मुहिम में हजारों लोग मांग कर रहे हैं कि पूजा भील के हत्यारों को फांसी दी जाए। सोशल मीडिया के ट्विटर पर ‘हैशटैग पूजा के हत्यारों को फांसी दो’ तेजी से ट्रेंड हो रहा है। साथ में एक साल पहले प्रकाशित खबरों को भी वायरल किया जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के राज में उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। महज 8 साल की मासूम बालिका की निर्मम हत्या करके उसके शव के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे। इन टुकड़ों को बोरे में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया गया था। हत्याकांड के 5 दिन बाद पुलिस ने एक बोरे में से शव बरामद किया था। पोस्टमार्टम से हैरान जनक खुलासा हुआ। पता चला कि मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया था। हैवानियत इतनी कि हत्या के बाद शव के साथ भी दुष्कर्म किया गया था। पुलिस ने इस मामले में दुष्कर्म और हत्या के आरोपी कमलेश उर्फ करण सिंह को गिरफ्तार किया था। साथ ही उसके माता-पिता को भी गिरफ्तार किया गया था।

मासूम बालिका की हत्या के बाद जब आरोपी की गिरफ्तारी हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पूछताछ के दौरान पुलिस ने बताया कि आरोपी कमलेश ने पड़ोस में रहने वाली 8 साल की मासूम को घर बुलाया। फिर उसे बंधक बनाकर जबरन दुष्कर्म किया। वारदात को छिपाने के लिए आरोप कमलेश ने गला घोंटकर बच्ची की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके 10 टुकड़े कर दिए और बोरे में भरकर लकड़ी के बक्से में छिपा दिया। उधर परिजनों ने बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज कराई तो कमलेश भी पुलिस के साथ बच्चों की तलाश करने के लिए घूमता रहा। चार दिन तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।

कमलेश के घर में लकड़ी के बक्से में पड़े शव से जब बदबू आने लगी तो उसे लगा कि अब मामले का खुलासा होने वाला है। ऐसे में उसने अपने माता पिता को घटना की जानकारी दी। आरोपी के माता-पिता ने भी वारदात को छिपाने का प्रयास किया और बोरे में बंद शव को लकड़ी के बक्से से बाहर निकाल कर घर के पास ही एक खंडहर में बोरा फेंक दिया। शव ढूंढते हुए घूम रहे लोगों को जब बदबू आई तो खंडहर में पड़े बोरे के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने जांच की तो बोरे में मासूम लड़की के शव के टुकड़े टुकड़े मिले थे। हत्यारे का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की टीमें बुलाई गई। डॉग घटनास्थल से सीधा कमलेश के मकान की ओर भागा और भौंकने लगा। बाद में पुलिस ने कमलेश से पूछताछ की तो वारदात का खुलासा हो गया जिसके बाद कमलेश और उसके माता पिता को गिरफ्तार कर लिया गया।

वारदात का खुलासा होने पर पुलिस ने बड़ी गंभीरता से मामले की जांच की। एसपी विकास कुमार के निर्देशन में जांच हुई और 10 दिन के भीतर पूरा अनुसंधान करके चालान पेश किया गया। बता दें कि साथ में एक साल पहले प्रकाशित खबरों को भी वायरल किया जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के राज में उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। महज 8 साल की मासूम बालिका की निर्मम हत्या करके उसके शव के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे। शव ढूंढते हुए घूम रहे लोगों को जब बदबू आई तो खंडहर में पड़े बोरे के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने जांच की तो बोरे में मासूम लड़की के शव के टुकड़े टुकड़े मिले थे। हत्यारे का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की टीमें बुलाई गई।इन टुकड़ों को बोरे में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया गया था। हत्याकांड के 5 दिन बाद पुलिस ने एक बोरे में से शव बरामद किया था। पोस्टमार्टम से हैरान जनक खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की कोशिश की लेकिन पूरा एक साल गुजरने के बाद भी आरोपी को सजा नहीं सुनाई जा सकी। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने की मांग के साथ यह मामला एक बार फिर ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

क्या जाट आरक्षण से सीएम भजनलाल के राज्य में आ सकता है सियासी फ़ेर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जाट आरक्षण से सीएम भजनलाल के राज्य में सियासी फ़ेर सकता है या नहीं! राजस्थान में लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही समीकरणों की जोड़, गुणा, भाग की गणित लगाने में जुटी हुई है। इस बीच राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर करौली लोकसभा सीट काफी सुर्खियों में है। दोनों ही सीटें जाट बाहुल्य हैं लेकिन इस बार जाट आरक्षण आंदोलन की आग ने दोनों सीटों की समीकरणों को प्रभावित किया है। इसमें अब मुख्यमंत्री भजनलाल के गृह जिले भरतपुर के चुनाव परिणाम को लेकर सियासत की नजरें बेसब्री से रुक गई हैं। इस चुनाव में जाट समाज ने आरक्षण की मांग नहीं मानने पर बीजेपी को हराने का अभियान चलाया। ऐसी स्थिति में राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर की समीकरणों को जाट समाज ने नहीं बिगाड़ दिया हो, इसको लेकर बीजेपी की चिंता बढ़ी हुई है। राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर लोकसभा सीट जाट समाज के बाहुल्य क्षेत्र की हैं। ऐसे में सियासी चर्चा है कि जाट आरक्षण के आंदोलन को देखते हुए दोनों लोकसभा सीटों पर चुनाव परिणाम प्रभावित होने के आसार हैं। जाट आरक्षण समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि भजनलाल सरकार ने समाज के साथ वादा खिलाफी की है। इसके कारण समाज ने गांव-गांव घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प लिया। इस दौरान समाज ने धौलपुर और भरतपुर में कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन भी दिया है। ऐसे में चर्चा है कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को जाट आरक्षण के आंदोलन का फायदा मिल सकता है। इस स्थिति में सियासत में धौलपुर और भरतपुर की सीट पर कांग्रेस को काफी मजबूत माना जा रहा है। इधर, फौजदार का दावा है कि दोनों सीटों पर कांग्रेस इस बार जीत हासिल करेगी।

भरतपुर लोक सभा क्षेत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है। ऐसे में भरतपुर लोकसभा सीट को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल की भी प्रतिष्ठा दाव पर है। हालांकि, भरतपुर लोकसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां से बीजेपी की तरफ से रामस्वरूप कोली और कांग्रेस की संजना जाटव के बीच जोर आजमाइश हुई। इधर, जाट बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण भरतपुर सीट पर जाट आरक्षण का प्रभाव देखने को मिल सकता है। जाट समाज ने आरक्षण को लेकर यहां गांवों में घूम-घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प दिलाया है। ऐसे में 4 जून को आने वाले चुनाव परिणाम में जाट समाज की भूमिका के कारण बीजेपी के लिए मुसीबत बढ़ सकती है।

जाट आरक्षण समिति के आंदोलन पर संयोजक नेम सिंह फौजदार की अगवाई में भजनलाल सरकार के साथ कमेटी की जयपुर और दिल्ली में वार्ता हुई। इस दौरान समाज को आरक्षण दिए जाने का आश्वासन दिया, लेकिन जाट समाज लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मांगे मानने के लिए अड़ा हुआ था। जब समाज की मांग पूरी नहीं हुई, तो जाट समाज की ओर से ऑपरेशन गंगाजल अभियान चलाया गया। जिसके तहत समाज ने धौलपुर, भरतपुर, करौली समेत क्षेत्रों में गांव-गांव घूम कर लोगों को हथेली पर गंगाजल लेकर बीजेपी को वोट नहीं देने की सौगंध दिलाई। इस दौरान जाट समाज ने कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में जाट समाज को प्रेरित भी किया।

जाट आरक्षण का मुद्दा इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को काफी प्रभावित कर सकता हैं। इस दौरान राजस्थान में धौलपुर और भरतपुर के अलावा भी यह मुद्दा राजस्थान से सटी हुई हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 10 लोकसभा सीटों पर अपना असर दिखा सकता हैं, क्योंकि भरतपुर धौलपुर जाट समाज की रिश्तेदारी इन क्षेत्रों में भी हैं। इसको लेकर आरक्षण समिति के संयोजक नेमसिंह फौजदार ने बताया कि उन्होंने आरक्षण के मुद्दों को लेकर मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सिकरी और हरियाणा की 10 सीटों पर लोगों से संपर्क किया। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई है कि इन सीटों पर बीजेपी को जाट समाज का विरोध झेलना पड़ेगा। समाज ने गांव-गांव घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प लिया। इस दौरान समाज ने धौलपुर और भरतपुर में कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन भी दिया है। ऐसे में चर्चा है कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को जाट आरक्षण के आंदोलन का फायदा मिल सकता है। इस स्थिति में सियासत में धौलपुर और भरतपुर की सीट पर कांग्रेस को काफी मजबूत माना जा रहा है।उनका अनुमान हैं कि बीजेपी को इन सीटों से हार का सामना करना पड़ सकता हैं। उन्होंने दावा किया है कि भरतपुर, धौलपुर के अलावा देश के आठ राज्यों में भी जाट समाज के आरक्षण का मुद्दा व्यापक असर दिख रहा हैं।

राजनीतिक पार्टियों को क्या बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद?

हाल ही में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनीतिक पार्टियों को एक सलाह दे दी है! जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वर्तमान परिपेक्ष में धर्म के नाम पर राजनीतिक पार्टियों के चुनाव लड़ने का घोर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि धर्म राजनीति का विषय नहीं है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को जयपुर प्रवास के दौरान पहुंचे। यहां मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों पर जमकर कटाक्ष किया, उन्होंने गौ हत्या को लेकर भी इसका अंदरूनी तौर पर सपोर्ट करने वाली राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार करने का आव्हान जनता से किया। उन्होंने गौ माता की राष्ट्रीय माता भी घोषित करने की मांग उठाई हैं। जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सोमवार को जयपुर ‘गौहत्या रोकने के लिए आयोजित संकल्प यात्रा’ में हिस्सा लेने आए। इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने राजनीतिक दलों को धर्मशास्त्र का पाठ पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने नाना पटोले के बयान ‘कांग्रेस की सरकार आई, तो फिर से राम मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा’ पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले तो यह बताइए, उस मंदिर में क्या कमी है? जब आपको मंदिर, मस्जिद और धर्म शास्त्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो फिर इस तरह की बयानबाजी क्यों देते हैं? यह धार्मिक लोगों के जिम्मे का कार्य है और उन्हीं का रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी धार्मिक मामले में दखलअंदाज करने के लिए हकदार नही हैं।

जगतगुरु शंकराचार्य ने आगे कहा कि गौ हत्या को रोकने के लिए हमारा ही नहीं, हर सनातनी का दृढ़ संकल्प होना चाहिए। इसके लिए अब हमने कमर कस ली है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर, बिना किसी का नाम लिए ‘कसाई पार्टी’ कहकर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि कसाई पार्टी वह है, जो चुनाव जीतने के बाद गौ हत्या करने वालों को प्रोत्साहन देती है, वह गौ हत्यारों से चंदा लेती है। गौ हत्या करने वाले कत्ल खानों को लाइसेंस देती है, जो कत्लखानों की मशीनों पर सब्सिडी देती हैं।

इस दौरान शंकराचार्य लोकसभा चुनाव में राम मंदिर और धर्म के नाम पर वोट मांगने पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव जीतने के लिए धर्म के नाम पर लोगों से वोट मांगने का कोई अधिकार नहीं है। राजनीति में धर्म का प्रयोग करना अक्षम्य में अपराध है। उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक पार्टियों को पहले धर्मशास्त्र की शिक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए राजनीतिक पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि इन्होंने चुनाव आयोग में अपनी धर्मनिरपेक्ष होने का शपथ पत्र दिया है, लेकिन यह सभी इसका उल्लंघन कर रहे हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से पूछा गया कि पीएम मोदी अपने चुनाव भाषण में जय श्री राम और गौ माता की जय के नारे लगाते हुए भाषण देते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी हो, उसे चुनाव जीतने के लिए धर्म का सहारा नहीं लेना चाहिए, यह गलत है। उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए कहा कि उनको अपने प्रबंधन, कानून व्यवस्था… कैसे लोगों में जागरूकता पैदा की.. कैसे उन्होंने शिक्षा का प्रसार किया, इस बात पर वोट मांगने चाहिए।

शंकराचार्य ने गौ हत्या को रोकने के लिए अब आमजन को आंदोलन नहीं करना की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन करने से कोई सुनवाई नहीं होती हैं। बड़े-बड़े आंदोलनकर्ता आए, लेकिन फेल होकर चले गए। आपने देखा कि खिलाड़ी बैठे थे, उन्हें पुलिस ने घसीट -घसीट के बर्बाद कर दिया। किसानों का भी क्या हाल हुआ आप जानते हैं। आंदोलन में भगदड़ मचती है, पुलिस गोलियां चलाती है, धाराएं लगाकर मुकदमा दर्ज किया जाता हैं।इसके लिए अब हमने कमर कस ली है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर, बिना किसी का नाम लिए ‘कसाई पार्टी’ कहकर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि कसाई पार्टी वह है, जो चुनाव जीतने के बाद गौ हत्या करने वालों को प्रोत्साहन देती है, वह गौ हत्यारों से चंदा लेती है। पूरी जिंदगी आप मुकदमा ही लड़ते रह जाते हैं तो आंदोलन से कोई सुनवाई नहीं होगी। हमें गौ हत्या को प्रोत्साहन देने वाली राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार करना चाहिए। हमें मन में संकल्प कर घर के बाहर बोर्ड लगा देना चाहिए कि ‘यह सच्चे सनातन धर्म और गौ भक्त का घर है। कृपया गौ हत्या समर्थक पार्टी हमसे संपर्क नहीं करें। ऐसा संकल्प लेकर राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

आखिर कौन बनेगा राजस्थान का नया कांग्रेस अध्यक्ष?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर राजस्थान का नया कांग्रेस अध्यक्ष कौन बनेगा! राजस्थान में लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई। इस बीच कांग्रेस में 4 जून को चुनाव परिणाम नाम आने के बाद बड़े बदलाव होने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि चुनाव परिणाम के बाद राजस्थान कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर हाईकमान बड़ा फैसला ले सकता है। इसको लेकर कांग्रेस में पीसीसी चीफ को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई हैं। कांग्रेस की सियासत में चर्चा शुरू हो गई है कि अब अगला पीसीसी चीफ कौन होगा? क्या वर्तमान अध्यक्ष एक्सटेंशन मिलेगा? या किसी नए चेहरे को पीसीसी चीफ बनाया जाएगा। हाल ही में लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके, लेकिन अब नवंबर दिसंबर में राजस्थान के पंचायत राज के चुनाव होने हैं। इस बीच कांग्रेस की सियासत में फिर से चर्चा उठ रही है कि यदि कांग्रेस को इस चुनाव में बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस के कमान देनी होगी! हाल ही में राजस्थान में लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ। अब 4 जून परिणाम का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब कांग्रेस की अगली नजर राजस्थान के पंचायत राज चुनाव पर हैं। इधर, कांग्रेस में पीसीसी चीफ को लेकर फिर से सीयासी चर्चा शुरू हो गई हैं। कयास है कि 4 जून के परिणाम के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कोई फैसला हो सकता है। इसको लेकर कांग्रेस के नेताओं के नाम को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई हैं। वहीं चर्चा यह भी है कि कांग्रेस वर्तमान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जारी रख सकती हैं। इस बीच मांग उठने लगी हैं कि यदि पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस को बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से पायलट को कमान सौंपनी होगी। इसको लेकर सियासत में पायलट समर्थक नेता उनके कार्यकाल के पंचायत राज चुनाव और 2018 के आंकड़े देकर तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं कि उस समय कैसे कांग्रेस में चुनाव में बढ़त हासिल की।

राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश का अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच यह भी माना जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को कांग्रेस फिर से एक्सटेंशन दे सकती है। 2022 में गहलोत और सचिन पायलट के बीच चले सियासी संकट के दौरान डोटासरा को शिक्षा मंत्री के पद से हटाकर पीसीसी चीफ बनाया गया, तब से डोटासरा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनके नेतृत्व में राजस्थान में विधानसभा चुनाव लड़ा गया और अब लोकसभा चुनाव का परिणाम आना बाकी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फिलहाल डोटासरा का कार्यकाल कम अवधि का रहा है। ऐसे में कांग्रेस हाई कमान उनके कार्यकाल को एक्सटेंशन दे सकती है।

राजस्थान में नवंबर दिसंबर में पंचायत राज के चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस का अगला मिशन पंचायती राज चुनाव है। ऐसे में सियासत में फिर से चर्चाएं तेज हो गई है कि यदि कांग्रेस को पंचायत राज चुनाव में बढ़त हासिल करनी है, तो एक बार फिर सचिन पायलट को पीसीसी चीफ की कमान सौंपनी होगी। इसके पीछे उनके समर्थक नेता इस बात का तर्क दे रहे हैं कि 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने केवल 21 सीटें जीत पाई थी, लेकिन जब पायलट प्रदेश अध्यक्ष बने, तो राजस्थान में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी। ऐसे में पायलट समर्थक नेताओं का दावा है कि पंचायत राज चुनाव जीतना है, तो फिर से पायलट को लाना होगा।

पीसीसी चीफ के लिए कांग्रेस में जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत का नाम भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया हैं। गहलोत तीन बार के प्रदेश अध्यक्ष, तीन बार के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं। ऐसे में पीसीसी के पद के लिए उनका नाम भी मजबूत है। इस दौड़ में उन्हें भी माना जा रहा है।बता दें कि इस बीच मांग उठने लगी हैं कि यदि पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस को बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से पायलट को कमान सौंपनी होगी। इसको लेकर सियासत में पायलट समर्थक नेता उनके कार्यकाल के पंचायत राज चुनाव और 2018 के आंकड़े देकर तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं कि उस समय कैसे कांग्रेस में चुनाव में बढ़त हासिल की। हालांकि यह अलग बात अलग है कि हाई कमान गहलोत के नाम पर राजी होता है या नहीं। इसके अलावा भी राजस्थान के कई कांग्रेसी नेता रघु शर्मा, हरीश चौधरी, मुरारी लाल मीणा, प्रताप सिंह खाचरियावास समेत नेता के नाम भी चर्चा में चल रहें हैं।

आखिर भारत से क्यों तिलमिलाया अमेरिका?

हाल ही में अमेरिका भारत से तिलमिला उठा है! भारत के ईरानी बंदरगाह चाबहार को संचालित करने के लिए 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से अमेरिका तिलमिला गया है। अनुबंध के कुछ घंटे बाद ही अमेरिका ने भारत को ईरान के साथ डील के लिए प्रतिबंध की धमकी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि ईरान के साथ डील करने वाले को प्रतिबंध से सावधान रहना चाहिए। सोमवार को भारत और ईरान ने रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद 10 साल के लिए इस बंदरगाह के संचालन का अधिकार मिल गया है। 10 साल बाद ये अनुबंध स्वतः आगे बढ़ जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने भारत-ईरान डील को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कोई भी जो ईरान के साथ साथ व्यापार सौदों को अंजाम दे रहा है, उन्हें उन संभावित प्रतिबंधों के खतरों के बारे में पता होना चाहिए, जिसके वे करीब जा रहे हैं।’ सोमवार को भारत के शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और उनके ईरानी समकक्ष की मौजूदगी में इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईजीपीएल) और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

ओमान की खाड़ी के पास ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह को भारत विकसित कर रहा है। भारत क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए चाबहार बंदरगाह पर जोर दे रहा है। रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है।यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण व्यापार धमनी के रूप में कार्य करता है।’ सोनोवाल ने कहा, ‘इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने से चाबहार बंदरगाह की व्यवहार्यता और दृश्यता पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा।’इसके रास्ते भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच हासिल होगी और पाकिस्तान को बायपास करने में सक्षम होगा। इसके पहले भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की जरूरत पड़ती थी। इसके साथ ही इस रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है। इसे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ने की योजना है। 7200 किलोमीटर लंबा ये गलियारा भारत को ईरान, अजरबैजान के रास्ते होते हुए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ेगा।

इस पोर्ट का महत्व भारत के लिए इससे भी समझा जा सकता है कि चुनाव के व्यस्त समय के बीच मोदी सरकार ने अपने मंत्री को इस डील के लिए ईरान भेजा था। समझौते पर हस्ताक्षर के साथ दोनों देशों ने चाबहार में दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखी है। समझौते के तहत, चाबहार बंदरगाह पर सरकारी स्वामित्व वाली आईपीजीएल लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी, जबकि अतिरिक्त 250 मिलियन डॉलर वित्तपोषण में दिए जाएंगे, जिससे अनुबंध का मूल्य 370 मिलियन डॉलर हो जाएगा। सोनोवाल ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा, ‘चाबहार बंदरगाह का महत्व भारत और ईरान के बीच एक मात्र माध्यम के रूप में इसकी भूमिका से कहीं अधिक है।

भारत और ईरान ने रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद 10 साल के लिए इस बंदरगाह के संचालन का अधिकार मिल गया है। 10 साल बाद ये अनुबंध स्वतः आगे बढ़ जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने भारत-ईरान डील को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कोई भी जो ईरान के साथ साथ व्यापार सौदों को अंजाम दे रहा है, उन्हें उन संभावित प्रतिबंधों के खतरों के बारे में पता होना चाहिए, जिसके वे करीब जा रहे हैं।’इसके पहले भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की जरूरत पड़ती थी। इसके साथ ही इस रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है।यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण व्यापार धमनी के रूप में कार्य करता है।’ सोनोवाल ने कहा, ‘इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने से चाबहार बंदरगाह की व्यवहार्यता और दृश्यता पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा।’ उन्होंने कहा, ‘चाबहार न केवल भारत का निकटतम ईरानी बंदरगाह है, बल्कि यह समुद्री दृष्टिकोण से भी एक उत्कृष्ट बंदरगाह है।’

रणबीर कपूर और आलिया भट्ट पहले डेस्टिनेशन वेडिंग चाहते थे?

विदेश जाकर शादी करने का था रणबीर-आलिया का प्लान! उसके बाद शादी घर पर क्यों बैठ गई? हाल ही में एक्ट्रेस नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, ”डेस्टिनेशन वेडिंग” रणबीर-आलिया का प्लान था। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी परिवार और दोस्तों के साथ हुई। 14 अप्रैल, 2022 को उनका विवाह समारोह कपूरबाड़ी में आयोजित किया गया था। लेकिन योजना यह थी कि शादी समारोह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया जाएगा। हाल ही में रणबीर की मां और एक्ट्रेस नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, ”डेस्टिनेशन वेडिंग” रणबीर-आलिया का प्लान था। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया।

रणवीर-आलिया ने करीब दो साल तक शादी की प्लानिंग की थी। नीतू ने कहा, ”वे दक्षिण अफ्रीका गए थे. वह यह देखने आया था कि कहां शादी करनी है और उसने तस्वीरें दिखायीं।” लेकिन नीतू कहती हैं, ”यह सबसे अच्छा है। आलिया बेहद खूबसूरत लग रही थीं।” इससे पहले आलिया ने खुद कहा था कि उनका डेस्टिनेशन वेडिंग प्लान है। लेकिन आडम्बर के दबाव से बचने के लिए उन्होंने वह योजना त्याग दी। आलिया कॉस्मेटिक फेज खत्म करने के बाद घर से बाहर निकलकर शादी करना चाहती थीं। और इसलिए उनके घर में ही बारात बैठी है. शादी में 40 मेहमान शामिल हुए. सभी आलिया-रणवीर के करीबी रिश्तेदार और दोस्त थे। भीड़ कम होने के कारण यह जोड़ा मेहमानों से करीब से बात कर सका।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी के बाद बॉलीवुड में डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन बढ़ गया है. उस स्थान पर आलिया और रणवीर की शादी काफी असाधारण है। नवंबर 2022 में आलिया-रणबीर ने बेटी राहा का स्वागत किया। हाल ही में मेटा गाला में आलिया भट्ट के आउटफिट ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने पिछले साल हॉलीवुड फिल्म से भी डेब्यू किया था. आलिया को अपने करियर में एक के बाद एक सफलता मिलती जा रही है। इन सबके बावजूद एक्ट्रेस की डेढ़ साल की बेटी के इर्द-गिर्द ही उनकी जिंदगी घूमती है।

अप्रैल 2022 में शादी के बंधन में बंधने के बाद, आलिया और रणबीर कपूर नवंबर में एक बच्ची के माता-पिता बने। फ़िलहाल, राहाई दो सितारों की आंखों के आभूषण की तरह है। रणवीर-आलिया ने अपनी बेटी राहा को खो दिया। वे उसे एक पल के लिए भी छोड़ना नहीं चाहते. चाहे उनकी अपनी फिल्म की शूटिंग हो या विदेश यात्राएं या अंबानी की पार्टियां, वे हमेशा राहा को अपने साथ ले जाते हैं। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया।

आलिया छोटी राहा को आश्वासन और सुरक्षा से घिरे घेरे में बड़ा करना चाहती है। एक्ट्रेस के पिता महेश भट्ट ने ऐसा होने से रोका. आपने अपनी बेटी को उसकी पोती राहा की भावी जिंदगी के बारे में क्या सलाह दी? रणवीर और आलिया स्वाभाविक रूप से अपनी बेटी के प्रति कुछ अधिक जागरूक हैं। लड़की चले तो भी दर्द होता है! हाल ही में एक इंटरव्यू में आलिया ने कहा कि दोनों पति-पत्नी अपनी बेटी को चलने नहीं देते थे. कहीं गिर कर चोट लग जाये, यही डर. यहां अभिनेत्री के पिता की सलाह है कि राहा को अकेला छोड़ दिया जाए। तभी वह उठना सीखेगा!

अपने पिता की बात मानते हुए आलिया ने कहा, ”मैंने खुद छोटी उम्र में घर छोड़ दिया था. मैं तब 23 साल का था. उन्होंने घर पर कभी नहीं पूछा कि मैं कहां शूटिंग कर रहा हूं, कहां जा रहा हूं।’ कितने दिन बीत गए, जब घर पर लोगों को पता नहीं था कि मैं कहां शूटिंग कर रही हूं. उसकी वजह से, मैं आज ‘आदमी’ बन सका! ऐसा लगता है, मैं बहुत कम उम्र में घर से दूर चला गया था। हम अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे. ऐसे कई मामले हैं जहां अज्ञात नंबरों से कॉल करके बैंक खातों से पैसे उड़ा लिए जाते हैं। इस बार उस धोखाधड़ी का निशाना सोनी थी. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में सोनी लिखती हैं, ”हमारे आसपास एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। एक शख्स ने मुझे फोन किया और कहा कि वह दिल्ली पुलिस से बोल रहा है. उन्होंने कहा, मैंने अवैध ड्रग्स का ऑर्डर दिया था. उसने मेरा आधार कार्ड नंबर पूछा. मेरे जानने वाले कुछ लोगों को इसी तरह के फोन कॉल आए हैं।

सुनील गावस्कर का कहना है कि एमएस धोनी की वजह से विराट कोहली में सुधार हुआ.

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धोनी की वजह से कोहली में इतना सुधार हुआ है, प्रशंसित माही से लेकर कोर्निश गाओस्कर तक विराट कोहली के लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें बाकियों से अलग खड़ा कर दिया है। प्रत्येक प्रतिभा का कोई न कोई व्यक्ति होता है जो उसे पोषित करता है। सुनील गावस्कर का दावा है कि महेंद्र सिंह धोनी ने कोहली के लिए ऐसा ही किया है। क्रिकेट के सभी प्रारूपों में विराट कोहली के लगातार प्रदर्शन ने उन्हें बाकियों से अलग खड़ा कर दिया है। अलग-अलग परिस्थितियों में रन बनाने की उनकी भूख भी दूसरों से अलग है. लेकिन हर प्रतिभा में कोई न कोई होता है जो उसे निखारता है। सुनील गावस्कर का दावा है कि महेंद्र सिंह धोनी ने कोहली के साथ यही किया था।

गौस्कर ने आईपीएल ब्रॉडकास्टर से कहा, “विराट कोहली ने जब अपना करियर शुरू किया था तब उन्हें काफी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा था।” लेकिन धोनी आए और उनमें एक अलग लय पैदा की. इसीलिए हम उस कोहली को देखते हैं जिसे हम आज देखते हैं।”

आईपीएल में धोनी-कोहली की भिड़ंत से पहले गॉस्कर ने विराट की तारीफ की थी, लेकिन कुछ दिनों से उन्होंने उनके स्ट्राइक रेट पर तंज कसा था. कोहली के आईपीएल में 53वें अर्धशतक को देखने के बाद गॉस्कर ने कहा, ”ऐसा नहीं लग रहा कि कोहली फॉर्म में हैं. मुझे ठीक से याद नहीं है, लेकिन 31-32 का स्कोर बनाने के बाद मैंने एक भी चौका नहीं देखा। ओपनिंग करने उतरे और 15वें ओवर में आउट हो गए. लेकिन कोहली का स्ट्राइक रेट 118 जैसा है! टीम को उनसे ऐसी पारी की उम्मीद नहीं है.” कोहली ने किया पलटवार. गुजरात मैच जीतने के बाद कोहली ने कहा, ”बहुत से लोग मेरे बारे में बहुत कुछ कहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि मैं तेज़ नहीं दौड़ सकता। कोई नहीं कहता कि आप स्पिन के खिलाफ नहीं खेल सकते। मैं 15 साल से क्रिकेट खेल रहा हूं. मैं अब ये सब बातें नहीं सुनता. अपना काम खुद करो. उनका अपना सम्मान है. मैं इसे रखना और खेलना चाहता हूं.’ मैं प्रशंसकों के लिए खेलना चाहता हूं।” आलोचकों से बात करते समय विराट को बॉक्स की ओर इशारा करते हुए भी देखा गया।

विराट कोहली ने आलोचकों को आड़े हाथों लिया. इससे पहले आईपीएल की ऑरेंज कैप के मालिक ने मैदान पर खड़े होकर बॉक्स की तरफ इशारा करके आलोचकों पर तंज कसा था. इस बार उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने मैच जीतना कैसे सीखा.

आलोचक बार-बार विराट के स्ट्राइक रेट को लेकर बात कर रहे हैं. उस सूची में सुनील गौस्कर जैसे पूर्व क्रिकेटर भी शामिल हैं। विराट ने कहा, ”मुझे यह सुनने की जरूरत नहीं है कि कोई बाहर से क्या कह रहा है। मैं जानता हूं कि मैं मैदान पर क्या कर सकता हूं।’ मुझे किसी को यह बताने की जरूरत नहीं है कि मैं किस तरह का क्रिकेटर हूं।’ मैंने कभी किसी से नहीं पूछा कि मैच कैसे जीता जाए? मैंने हार से सीखते हुए मैदान पर खड़े रहकर मैच जीतना सीखा।’ ऐसा नहीं है कि टीमें बार-बार जीतती हैं।”

इसके बाद विराट ने कहा, ”कोई खेल देख रहा है और विश्लेषण कर रहा है और दूसरा मैदान पर खड़ा होकर खेल रहा है, दोनों बिल्कुल अलग हैं। मैंने कभी किसी को मेरा नाम न बोलने के लिए नहीं कहा। मैं जानता हूं कि मैं क्या कर सकता हूं.” गॉस्कर का नाम न लेते हुए विराट ने कहा, ”मैं अच्छा खेल रहा हूं या नहीं, मुझे किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं है. मुझे ये सब नहीं चाहिए. यह मैंने बचपन में अपने पिता से सीखा था। राज्य के लिए खेलने का अवसर मुझे अपने करियर की शुरुआत में ही मिल गया था। लेकिन पिता ने कहा, जिस दिन तुम खेलोगे, जिस दिन तुम योग्य हो जाओगे। मेरा प्रदर्शन ही मेरे मानक तय करेगा।”

एक और मैच, जिसके बाद कभी साथ खेलते नजर नहीं आएंगे विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी! आईपीएल में शनिवार को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और चेन्नई सुपर किंग्स आमने-सामने हैं. इस आईपीएल में दोनों टीमों का लीग चरण का यह आखिरी मैच है. शनिवार को एक टीम बाहर हो जाएगी, दूसरी प्लेऑफ़ में पहुंच जाएगी। लेकिन अगर धोनी इस आईपीएल के बाद संन्यास लेते हैं तो धोनी और विराट फिर कभी मैदान पर एक साथ खेलते नजर नहीं आएंगे.

विराट और धोनी आखिरी बार भारत के लिए 2019 वनडे विश्व कप में एक साथ खेले थे। तब से धोनी सिर्फ आईपीएल में ही खेले हैं. नतीजा ये हुआ कि चेन्नई बनाम बेंगलुरु मैच के अलावा धोनी और विराट कभी भी एक साथ नजर नहीं आए. वह भी शायद इस साल के बाद देखने को न मिले. विराट के एक शब्द में ऐसी संभावना नजर आई है. उन्होंने कहा, ”धोनी का भारत के किसी भी मैदान में खेलने आना फैन्स के लिए बड़ी घटना है. धोनी और मैं शायद आखिरी बार एक साथ मैदान पर उतरेंगे.’ कोई नहीं जानता कि क्या होगा. यह एक बहुत ही अनोखी घटना है. हमने भारत के लिए एक साथ कई मैच खेले हैं।’ हमारे पास कई जोड़े हैं. प्रशंसकों के लिए हम दोनों को एक साथ देखना दिलचस्प है।” विराट के शब्दों के मुताबिक कई लोगों को लगता है कि धोनी इस आईपीएल के बाद संन्यास ले लेंगे.

विराट अब अंत तक क्रीज पर टिके रहने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. मैच को अंत तक ले जाना. इसकी आलोचना भी की जाती है. विराट ने कहा, ”माही भाई की भी आलोचना की गई. सवाल उठता है कि खेल को आख़िरी ओवर तक क्यों ले जाया जा रहा है. लेकिन भारत ने कितने मैच जीते? मुझे लगता है कि धोनी एकमात्र व्यक्ति हैं जो जानते हैं कि वह क्या कर रहे हैं।’ आदत है। धोनी जानते हैं कि अगर वह अंत तक जाएंगे तो मैच जीत लेंगे।”

कोविशील्ड वैक्सीन के बाद कोवैक्सिन से जुड़े सवाल उठने लगे हैं.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शोधकर्ताओं की एक टीम भारत बायोटेक निर्मित कोविड वैक्सीन कोवैक्सिन के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का अध्ययन कर रही थी। हाल ही में एक रिसर्च रिपोर्ट में सनसनीखेज जानकारी सामने आई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोवैक्सिन के महत्वपूर्ण हानिकारक दुष्प्रभाव भी हैं।

हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश-स्वीडिश दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन AZD1222 (भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है) पर इस वैक्सीन से कई लोगों को नुकसान पहुंचाने और यहां तक ​​कि उनकी जान लेने का आरोप लगा है। कई मामले हैं. बाद में एस्ट्राजेनेका द्वारा दवा को बाजार से वापस ले लिया गया। इस बार कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स पर भी सवाल उठाए गए.

बीएचयू के शोधकर्ताओं द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 926 ऐसे लोगों पर एक साल तक नजर रखी गई, जिन्होंने कोवैक्सिन ली थी। वैज्ञानिकों का दावा है कि इनमें से 30 प्रतिशत में सांस लेने में समस्या, त्वचा रोग, स्ट्रोक, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम और रक्त के थक्के जैसे दुष्प्रभाव होते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘एडवर्स इवेंट ऑफ स्पेशल इंटरेस्ट’ या ‘एएसआई’ कहा जाता है। इसके अलावा महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी कई तरह की जटिलताएं देखी गई हैं।

हाल ही में एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन के घातक साइड इफेक्ट को लेकर देश में हंगामा मचा हुआ था. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका के साथ संयुक्त रूप से कोविशील्ड वैक्सीन विकसित की है। कंपनी द्वारा ब्रिटिश अदालत में दुष्परिणामों को स्वीकार किया गया। एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट को बताया कि कोवीशील्ड से लोगों को खून का थक्का जमने या कम प्लेटलेट काउंट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

भारत में केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 से लड़ने के लिए दो कोवैक्सीन भारत के नागरिकों को लगाई गईं। बीएचयू के शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन में 635 नाबालिगों और 291 वयस्कों ने भाग लिया। सर्वेक्षण 2022 से अगस्त 2023 तक आयोजित किया गया था। अध्ययन के अनुसार, 304 किशोर (47.9 प्रतिशत) और 124 वयस्क (42.6 प्रतिशत) श्वसन समस्याओं से पीड़ित थे।

अध्ययन में शामिल 635 किशोरों में से 4.7 प्रतिशत को तंत्रिका संबंधी विकार, 10.5 प्रतिशत को त्वचा रोग और 10.2 प्रतिशत को विभिन्न शारीरिक समस्याएं थीं। इसके अलावा, 291 वयस्कों में से 8.9 प्रतिशत सामान्य बीमारियों से पीड़ित थे। 5.8 प्रतिशत में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं और 5.5 प्रतिशत में तंत्रिका संबंधी विकार देखे गए।

महिलाओं में इसके गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए हैं। अध्ययन में भाग लेने वाली 4.6 प्रतिशत महिलाओं को टीके के कारण मासिक धर्म संबंधी समस्याएं हुईं। इसके अलावा, 2.7 प्रतिशत महिलाओं को आंखों की समस्या थी और 0.6 प्रतिशत को हाइपोथायरायडिज्म था। स्ट्रोक 0.3 प्रतिशत और गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) 0.1 प्रतिशत में होता है। कोवैक्सिन की निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने कहा कि यह एक ऐसी दुर्लभ बीमारी है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे शरीर पर लकवाग्रस्त हो जाता है। दो से 18 साल के बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का प्रायोगिक प्रयोग समाप्त हो गया है। हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता ने कहा कि सारी जानकारी अगले सप्ताह के भीतर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को सौंप दी जाएगी।

भारत बायोटेक के प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने आज कहा कि बच्चों और किशोरों (2-18 वर्ष) में वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण पूरा हो चुका है। सभी डेटा का विश्लेषण चल रहा है. इसे अगले सप्ताह के भीतर नियामक संस्था को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रायोगिक अनुप्रयोग में एक हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया.

कोवैक्सिन के उत्पादन को लेकर एला ने कहा कि उनकी कंपनी की वैक्सीन अक्टूबर में 55 लाख के आंकड़े तक पहुंच जाएगी. इसके अलावा, उन्होंने कहा, उनके संगठन के इंट्रानैसल वैक्सीन के प्रायोगिक अनुप्रयोग का दूसरा चरण सितंबर तक पूरा हो जाएगा। यह प्रयोग 650 स्वयंसेवकों पर किया गया। इन्हें तीन समूहों में बांटकर परीक्षण कराया गया। पहले समूह को कोवैक्सिन की पहली खुराक और इंट्रानैसल वैक्सीन की दूसरी खुराक मिली। दूसरे समूह को इंट्रानैसल वैक्सीन की दो खुराकें दी गईं। तीसरे समूह को पहले इंट्रानैसल वैक्सीन दी गई और उसके बाद कोवैक्सिन की दूसरी खुराक दी गई। प्रत्येक मामले में पहली खुराक के 28 दिन बाद दूसरी खुराक दी गई।

इस संबंध में एक अध्ययन से पता चला है कि अगस्त के अंत में देश में आर वैल्यू 1.17 थी, लेकिन सितंबर के मध्य में यह घटकर 0.92 हो गई है। और प्रजनन मूल्य उन लोगों की संख्या है जिन्हें एक व्यक्ति संक्रमित कर सकता है।

अनुसंधान दल का नेतृत्व चेन्नई में गणितीय विज्ञान संस्थान के सीतावरा सिन्हा ने किया था। उन्होंने कहा कि देश में आर वैल्यू एक से नीचे चले जाने से चिंता कम हो गई है। हालाँकि, मुंबई (1.09), कोलकाता (1.04), चेन्नई (1.11), बैंगलोर (1.06) जैसे बड़े शहरों में R मान एक से ऊपर है। लेकिन दिल्ली और पुणे एक से भी कम हैं।

बिभव कुमार को राहत नहीं, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका.

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‘स्वाति ने रची साजिश’, कोर्ट में लगाई अग्रिम जमानत की गुहार लेकिन नहीं मिली राहत केजरी के सचिव वैभव के वकील एन हरिहरन ने शनिवार को वैभव की अग्रिम जमानत की पैरवी करते हुए कई दलीलें पेश कीं। अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव वैभव कुमार को कोर्ट में नहीं मिली राहत, हरिहरन का दावा, ‘पूरी घटना मनगढ़ंत थी’ आप सांसद स्वाति मालीवाल के ‘निग्रहकांड’ मामले में वैभव को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था. वैभव की अग्रिम जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल की गई थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया.

शनिवार को वैभव की अग्रिम जमानत पर बहस करते हुए उनके वकील एन हरिहरन ने कई दलीलें दीं. हरिहरन ने दावा किया कि पूरी घटना सुनियोजित थी. उनके मुवक्किल को हिरासत में लेने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया. वहीं, स्वाति की शिकायत को लेकर उन्होंने दलील दी कि स्वाति का ऑफिस आकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहना- पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. स्वाति के पास मुख्यमंत्री से मिलने के लिए जरूरी अपॉइंटमेंट नहीं था. उन्होंने सुरक्षा का उल्लंघन किया. सुरक्षा गार्डों ने उस संबंध में एक रिपोर्ट भी बनाई।

वैभव के वकील ने कोर्ट से कहा, ”स्वाति को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया. फिलहाल वह आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं. मुझे नहीं पता कि वह वैभव का विरोध क्यों कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि कोई और मकसद था. उन्हें बिना सूचना दिए थाने बुलाया गया। यह नहीं किया जा सकता. इस मामले में अंतरिम सुरक्षा दी जा सकती है.” वकील हरिहरन ने कोर्ट से सवाल करते हुए आगे कहा, ”13 मई को स्वाति SHO के पास गई थी. लेकिन उस दिन वह बिना किसी शिकायत के चला गया. इसके बाद उन्होंने 16 मई को शिकायत की. यानी उसने मेरे मुवक्किल के खिलाफ साजिश रची है.” लेकिन कोर्ट ने वैभव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

स्वाति मालीवाल विवाद में सहयोगी वैभव कुमार की गिरफ्तारी पर अरविंद केजरीवाल पहली बार बोले. हालांकि, पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति ने आम आदमी पार्टी (यूपी) प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री का नाम नहीं लिया। वहीं, पूरे विवाद के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एक-एक कर सभी आप सदस्यों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है.

केजरीवाल ने केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ हमले तेज करने के लिए रविवार को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के सामने ‘जेल भरो’ कार्यक्रम का आह्वान किया है। आप प्रमुख ने कहा कि पार्टी के सभी नेता दोपहर 12 बजे बीजेपी मुख्यालय के सामने अपनी गिरफ्तारी की मांग करेंगे. केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि नेताओं को गिरफ्तार करके आप को दबाया नहीं जा सकता. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर मोदी से कहा, ”प्रधानमंत्री जी, ये जेल-जेल का खेल बंद करें. कल दोपहर 12 बजे हम बीजेपी मुख्यालय जा रहे हैं. हमारी पार्टी के सांसद, विधायक हमारे साथ रहेंगे. जिसे चाहो गिरफ्तार कर लो. हम सबको जेल में डाल दो. क्या आपको लगता है कि आप इसे ख़त्म कर सकते हैं? ऊपर एक विचार है. जितनी अधिक गिरफ्तारियां होंगी, यह विचार उतना ही अधिक फैलेगा।” शनिवार को एक वीडियो संदेश में भाजपा पर निशाना साधते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, ”वे हमारे नेताओं को जेल में डाल रहे हैं। संजय सिंह को जेल हुई. मेरे सहायक को आज गिरफ्तार कर लिया गया।” साथ ही केजरी ने कहा, ”राघव चड्ढा लंदन से लौट आए हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वे राघव को भी गिरफ्तार कर लेंगे। उसके बाद वे आतिशी (मार्लेना) और सौरव भारद्वाज को गिरफ्तार करेंगे।

केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें दिल्ली में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में सुधार और निर्बाध बिजली सेवा प्रदान करने के “अपराध” के लिए दंडित किया जा रहा है। संयोगवश, आप की राज्यसभा सांसद स्वाति ने दावा किया कि वह 13 मई को केजरीवाल से उनके आवास पर मिलने गयी थीं। उस वक्त केजरी के सहयोगी वैभव ने उनके साथ मारपीट की थी. गालों पर थप्पड़ और पेट पर लातें। स्वाति ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। उस रात दिल्ली के एमसी में स्वाति की मेडिकल जांच भी की गई. स्वाति ने शुक्रवार को एक मजिस्ट्रेट के सामने भारतीय दंड संहिता की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया। वैभव को ‘निग्रह कांड’ में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था.

AAP सांसद स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के घर पर सीसीटीवी से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.

‘केजरी के घर की सीसीटीवी फुटेज को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया’, आप सांसद स्वाति के खिलाफ शिकायत एमएस स्वाति की मेडिकल रिपोर्ट भी दिल्ली पुलिस के हाथ आ गई है। आप सांसद के दाहिने गाल और बाएं पैर पर चोट के निशान हैं. आंखों के नीचे भी चोट लगी है. आम आदमी पार्टी (यूपी) प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है, पार्टी सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए एक्स हैंडल पोस्ट पर लिखा, ”मुझे जानकारी है कि वो लोग अब घर के सीसीटीवी से छेड़छाड़ कर रहे हैं.”

शुक्रवार को दिल्ली पुलिस और फॉरेंसिक टीम स्वाति हत्याकांड के सबूत जुटाने के लिए केजरी के आवास पर गई थी. इसके तुरंत बाद, यूपी नेता और दिल्ली की मंत्री आतिशी ने एक वीडियो फुटेज प्रकाशित किया (जिसे आनंदबाजार ऑनलाइन ने सत्यापित नहीं किया है) और स्वाति पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। केजरी के आवास के फुटेज में स्वाति को सोफे पर बैठे हुए और सुरक्षा गार्डों के साथ जोर-जोर से बातें करते हुए सुना जा सकता है। इसके बाद इस पोस्ट में स्वाति ने ‘सीसीटीवी फ्रॉड’ के आरोप लगाए। आप की राज्यसभा सांसद स्वाति ने दावा किया कि वह 13 मई को केजरीवाल से मिलने उनके आवास पर गयी थीं. उस वक्त केजरी के निजी सचिव वैभव कुमार ने उनके साथ मारपीट की थी. गालों पर थप्पड़ और पेट पर लातें। स्वाति ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। उस रात दिल्ली के एमसी में स्वाति की मेडिकल जांच भी की गई. स्वाति ने शुक्रवार को एक मजिस्ट्रेट के सामने भारतीय दंड संहिता की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया।

उसके बाद स्वाति ‘निग्रह कांड’ ने व्यावहारिक रूप से एक नया मोड़ ले लिया। इस घटना पर पार्टी के पुराने रुख से हटते हुए दिल्ली यूपी की मंत्री आतिशी ने दावा किया कि स्वाति दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को बीजेपी का एजेंट बताकर फंसाने गई थीं. आतिशी ने दावा किया कि चूंकि केजरी उस दिन आवास पर नहीं थे, इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री के करीबी वैभव को फंसाने की कोशिश की। हालांकि, 14 मई को आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्वीकार किया कि वैभव ने स्वाति के साथ छेड़छाड़ की थी।

स्वाति की बात सुनने के बाद ही संजय ने कहा. वैभव के खिलाफ गुरुवार को एफआईआर दर्ज की गई। वैभव ने शुक्रवार को दिल्ली के सिविल लाइंस थाने में स्वाति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बीजेपी से नजदीकी के आरोपों का जिक्र करते हुए स्वाति ने कहा, ‘दो दिन पहले पार्टी मेरे साथ खड़ी थी. दरअसल वैभव ने पार्टी पर राज किया था, अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वह पार्टी की सारी गुप्त सूचनाएं लीक कर देंगे. ”

स्वाति की ओर से पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि जब वह लिविंग रूम में इंतजार कर रही थीं तो उन्हें बताया गया कि केजरीवाल उनसे मिलने आ रहे हैं. लेकिन केजरी के निजी सचिव वैभव ने घर में घुसकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया। जब उसने विरोध किया तो वैभव ने उसे सात-आठ थप्पड़ मार दिये। सीने, पेट और कमर पर भी लात मारी। स्वाति ने कल पुलिस को यह भी बताया कि धक्का लगने से उसकी शर्ट का बटन टूट गया था. इसके बाद उसने मजिस्ट्रेट को बयान दिया. दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक टीमों ने शुक्रवार को केजरी के आवास पर जाकर नमूने एकत्र किए और कर्मचारियों से पूछताछ की।

वहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतिशी ने दावा किया, ”स्वाति को शतरंज के मोहरे की तरह केजरीवाल को फंसाने के लिए भेजा गया था.” आतिशी ने दावा किया कि स्वाति सोमवार को बिना अपॉइंटमेंट के मुख्यमंत्री आवास परिसर में घुस गईं. सुरक्षा गार्डों ने स्वाति को बताया कि मुख्यमंत्री घर पर नहीं हैं. फिर भी स्वाति मुख्यमंत्री के मुख्य आवास के बैठक कक्ष में चली गईं। आप ने आरोप लगाया कि गार्डों ने उन्हें रोकने की कोशिश करने पर उनकी नौकरी छीन लेने की धमकी दी।

आप नेतृत्व ने मांग की कि स्वाति मुख्य आवास के लिविंग रूम में प्रवेश करें और मांग की कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति दी जाए। गार्ड वैभव को बुलाते हैं। आतिश का दावा है, ”वैभव ने स्वाति से कहा कि केजरीवाल से मिलना संभव नहीं है.” लेकिन स्वाति अंदर जाने की कोशिश करती है। इसके बाद वैभव ने गार्डों को स्वाति को हटाने का आदेश दिया।” वैभव को राष्ट्रीय महिला आयोग ने शुक्रवार को तलब किया था। वैभव के नहीं आने पर उसे शनिवार तक का समय दिया गया। अगर वह शनिवार को भी नहीं आए तो आयोग की टीम वैभव के घर जाएगी।