Sunday, March 8, 2026
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आखिर क्यों हुआ कश्मीर में आतंकी हमला?

हाल ही में कश्मीर में एक और आतंकी हमला हुआ है! लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व के जश्न में देश डूबा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। इस बीच तीसरे चरण के मतदान से पहले जम्मू-कश्मीर से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां पुंछ जिले में बीती शनिवार शाम को आतंकियों ने पुलवामा स्टाइल में वायुसेना के काफिले पर बड़ा आतंकी हमला कर दिया। इस आंतकी हमले में एक जवान शहीद हो गया और 4 जवान घायल। उधर लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच इस आतंकी हमले की टाइमिंग से देश का सियासी पारा हाई है। दरअसल पीएम मोदी और बीजेपी के दिग्गज नेता अपनी अधिकांश चुनावी रैलियों में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद बहाल हुई शांति का जिक्र कर लोगों की वाहवाही बटोर रहे हैं, लेकिन इस बीच पुंछ में हुए आतंकी हमले से विपक्षी दलों को बैठे-बैठे बीजेपी को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है। हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी राजौरी-पुंछ सेक्टर में हो रही आतंकी हत्याओं और हमलों को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने सेना के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष अपनी चिंता भी व्यक्त की है। लेकिन विपक्षी दल इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए हैं। यह मुद्दा पीएम मोदी और बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं के लिए भारी चुनौती बन सकता है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस हमले को ‘पॉलिटिकल स्टंट’ करार देते हुए कहा कि जब भी चुनाव आते हैं तो ऐसे स्टंट खेले जाते है और भाजपा को चुनाव में जिताने का रास्ता तैयार किया जाता है। लोगों को मरवाने और उनकी लाशों पर खेलना भाजपा का काम है। चन्नी के उठाए सवाल का केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने जवाब दिया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि इससे घटिया मानसिकता कांग्रेस की और क्या होगी, जिन्होंने अपने ही जवानों को सशक्त करने की बजाय, हथियार देने की बजाय, बुलेट प्रूफ जैकेट देने की बजाय ये लोग 10 साल दलाली ही खाते रहे। दूसरी ओर, मोदी सरकार है जिसने हमेशा ही दुश्मनों को जवाब दिया। पुलवामा के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकवादी हमले को सुरक्षा विफलता के रूप में नहीं देखते हैं, क्योंकि उस क्षेत्र में आतंकवाद अब भी जीवित है। पुंछ, अनंतनाग-राजौरी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जहां 25 मई को छठे चरण में मतदान होना है। अब्दुल्ला ने, ‘मैं इसे सुरक्षा विफलता नहीं कहूंगा। यह इस जगह की वास्तविकता है। भाजपा ने उग्रवाद की कमर तोड़ने का दावा किया, लेकिन हमने बार-बार कहा है कि वे सच्चाई स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और सच्चाई यह है कि दुर्भाग्य से, जो क्षेत्र आतंकवाद से मुक्त हो गये थे, वहां हम फिर से आंतकवाद देख रहे हैं।’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम इस कायरतापूर्ण आतंकी हमले की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं और आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्र के साथ एकजुट होकर खड़े हैं।’ रमेश ने दावा किया कि 2007 और 2014 के बीच इस क्षेत्र में आतंकवाद की कोई बड़ी घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सुरनकोट आतंकवादी हमला, नियंत्रण रेखा के पास स्थित पहाड़ी राजौरी-पुंछ क्षेत्रों में विशेष रूप से सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ आतंकवादी हमलों की चिंताजनक प्रवृत्ति का हिस्सा है। कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि एक जनवरी 2023 से अब तक राजौरी-पुंछ क्षेत्र में हमारे 25 बहादुर सुरक्षाकर्मी और आठ निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके विपरीत, 2007 से 2014 के बीच इस क्षेत्र में आतंकवाद की कोई बड़ी घटना नहीं हुई थी।’ रमेश ने कहा कि चार जून के बाद, कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के उसके सहयोगी दल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी ग्रिड को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा सरकार के उस दावे की पोल खुल चुकी है कि अनुच्छेद 370 आतंकवाद के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने अपना रुख दोहराया कि केवल भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत ही क्षेत्र में आतंकवाद के खतरे को समाप्त कर सकती है। शनिवार शाम पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके में हुए हमले में वायुसेना के पांच कर्मी घायल हो गए और उनमें से एक ने बाद में एक सैन्य अस्पताल में दम तोड़ दिया। अब्दुल्ला ने दावा किया, ‘यह क्षेत्र कई महीनों से अशांत है। राजौरी, सुरनकोट और अन्य निकटवर्ती इलाकों में घटनाएं हुई हैं।’

उन्होंने कहा कि जहां तक आतंकवाद का सवाल है, भाजपा सरकार दावा करती है कि इसके लिए अनुच्छेद 370 जिम्मेदार था, लेकिन पांच अगस्त, 2019 को इसके निरस्त होने के बाद भी आतंकवाद अभी भी बरकरार है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शीत युद्ध इसके लिये जिम्मेदार है। जब तक दोनों देश बातचीत की प्रक्रिया शुरू नहीं करेंगे और इस मुद्दे का समाधान नहीं ढूंढेंगे, तब तक यह नहीं रुकेगा।’

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में वायुसेना की गाड़ी पर हुए हमले को लेकर शहजाद पूनावाला ने इंडिया गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘अब तो यह स्पष्ट हो चुका है कि पूरे इंडिया अलायंस का हाथ पाकिस्तान के साथ है। अब ये लोग मोदी विरोध में उतरते हुए पाकिस्तान को क्लीन चिट देने का काम करने लगे हैं। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि हेमंत करकरे को अजमल कसाब ने नहीं मारा, बल्कि उन्हें हिंदुओं ने मारा है और उज्जवल निक्कम उसे बचा रहे थे और अब पुंछ हमला, जिस पर पूरा देश गमगीन है, देश शोक मना रहा है, उस पर भी ये लोग ओछी राजनीति कर रहे हैं। चन्नी जी कहते हैं, स्टंटबाजी है ये। तेजप्रताप यादव कहते हैं कि ये शहीद किसने करवाए? अब ये लोग वोट की खातिर पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कांग्रेस के लोग कुछ वोटों की खातिर देश की सेना का मनोबल तोड़ रहे हैं। कांग्रेस कई आतंकवादी संगठनों के बचाव में उतरी है।

हाल ही में मुस्लिम समाज के बच्चों के लिए क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने हाल ही में मुस्लिम समाज के बच्चों के लिए एक बड़ा बयान दे दिया है! पीएम मोदी मुस्लिम समाज के लोगों से खास अपील भी की। उन्होंने कहा कि आप लोग आत्ममंथन कीजिए कि आखिर सरकार की योजनाओं का लाभ कांग्रेस के जमाने में आप लोगों को क्यों नहीं मिला? गुजरात में 10 साल में से 7 साल दंगे हुए थे लेकिन 2002 के बाद गुजरात में एक भी दंगा नहीं हुआ है। उसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि मैं कभी पहले भी इन विषयों पर नहीं आया। मैं मुस्लिम समाज को कह रहा हूं। उनके पढ़े-लिखे लोगों को कहता हूं कि आत्ममंथन करिए। सोचिए देश इतना आगे बढ़ रहा है अगर कमी आपके समाज में महसूस होती है तो क्या कारण हैं। सरकार की व्यवस्थाओं का फायदा कांग्रेस के जमाने में आपको क्यों नहीं मिला? क्या कांग्रेस के कालखंड में आप इस दुर्दशा के शिकार हुए हो क्या? आत्ममंथन कीजिए और एक बार तय कीजिए। ये आपके मन में जो है कि सत्ता पर हम बिठाएंगे, हम उतारेंगे, उसमें आप अपने बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हो।

मुसलमान समाज दुनिया में बदल रहा है, आज मैं गल्फ के देशों में जाता हूं, इतना सम्मान व्यक्तिगत रूप से मुझे मिलता है और भारत को भी मिलता है। उन सबको लगता है हमारे यहां विरोध हो रहा है, सऊदी अरबिया में योग ऑफिशियल सिलेबस का विषय है। यहां मैं योग की बात करूं तो आप चला देंगे एंटी मुस्लिम है। मैं गल्फ के देशों में जाता हूं सारे अमीर लोग जो हैं मेरे साथ बैठते होंगे, लंच या डिनर में जरूर मुझे योग के विषय में पूछते हैं कि मोदी जी का स्पेशल ऑफिशल ट्रेनिंग लेना है तो क्या करना, कैसे करना।पीएम मोदी ने एंटी मुस्लिम होने के आरोपों पर कहा कि हम न इस्लाम के विरोधी हैं, न हम मुसलमान के विरोधी हैं, हमारा यह काम ही नहीं है। मुसलमान समाज समझदार है, जब में तीन तलाक का कानून खत्म करता हूं, परम्परा खत्म करता हूं, तो मुस्लिम बहनों को लगता है, ये तो सही आदमी है। मैं जब आयुष्मान कार्ड देता हूं तो उसको लगता है यार ये तो जेनुइन व्यक्ति है। मैं कोविड का वैक्सीन देता हूं, तो उसको लगता ये तो जेनुइन आदमी है। हमारे साथ तो कोई भेद नहीं कर रहा है। इनकी परेशानी यह है कि उनका झूठ अब पकड़ा जाने लगा है। इसलिए उनको ज्यादा भ्रम फैलाने के लिए बिना सिर पैर के झूठ बोलने पड़ रही है।कोई कहता है- मेरी पत्नी इंडिया जाती है योग सीखने। महीनों तो वहीं रहती है, अमीर की पत्नी कहती हैं, उनके परिवार जन आते हैं।

अब यहां उसको हिंदू-मुसलमान बना दिया योग को भी, अब ये जो कर रहे हैं मैं मुसलमान समाज से आग्रह पूर्वक कहता हूं, देश इतना आगे बढ़ रहा है अगर कमी आपके समाज में महसूस होती है तो क्या कारण हैं। सरकार की व्यवस्थाओं का फायदा कांग्रेस के जमाने में आपको क्यों नहीं मिला? क्या कांग्रेस के कालखंड में आप इस दुर्दशा के शिकार हुए हो क्या? आत्ममंथन कीजिए और एक बार तय कीजिए। ये आपके मन में जो है कि सत्ता पर हम बिठाएंगे, हम उतारेंगे, उसमें आप अपने बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हो।कम से कम अपने बच्चों की जिंदगी का तो सोचो, अपना भविष्य तो सोचो। मैं नहीं चाहता हूं कोई समाज बंधुआ मजदूर की तरह जिंदगी जिये। क्योंकि कोई डरा रहा है, दूसरा अगर आप बैठना-उठना शुरू करोगे, भाजपा वाले आपको डर वाले लगते हैं, अरे जाओ ना 50 लोग बैठकर भाजपा कार्यालय में एक दिन बैठे रहो निकाल देंगे क्या आपको, अब देखिये क्या चल रहा है, कौन निकाल देगा आपको, कब्जा करो न जाकर बीजेपी कार्यालय में आपको कौन रोकता है।

पीएम मोदी ने एंटी मुस्लिम होने के आरोपों पर कहा कि हम न इस्लाम के विरोधी हैं, न हम मुसलमान के विरोधी हैं, हमारा यह काम ही नहीं है। मुसलमान समाज समझदार है, जब में तीन तलाक का कानून खत्म करता हूं, परम्परा खत्म करता हूं, तो मुस्लिम बहनों को लगता है, ये तो सही आदमी है। मैं जब आयुष्मान कार्ड देता हूं तो उसको लगता है यार ये तो जेनुइन व्यक्ति है। मैं कोविड का वैक्सीन देता हूं, तो उसको लगता ये तो जेनुइन आदमी है। हमारे साथ तो कोई भेद नहीं कर रहा है। इनकी परेशानी यह है कि उनका झूठ अब पकड़ा जाने लगा है। इसलिए उनको ज्यादा भ्रम फैलाने के लिए बिना सिर पैर के झूठ बोलने पड़ रही है।

क्या चीन भारत के विरुद्ध बना रहा है एयरक्रॉफ्ट कैरियर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चीन भारत के विरुद्ध एयरक्रॉफ्ट कैरियर बना रहा है या नहीं! जमीन और हवा के बाद दुनिया के शक्तिशाली देशों ने अब पानी पर अपनी बादशाहत और बढ़ाने का मन बना लिया है। भारत भी लगातार अपनी समुद्री ताकत बढ़ा रहा है। लेकिन भारत को अपने पड़ोसी देश चीन की समुद्री ताकत को लेकर अब पहले से ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत हैं। दरअसल चीन ने अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान पिछले हफ्ते परीक्षण के लिए समुद्र में उतारा है। अमेरिका की बढ़ती सैन्य शक्ति के बीच चीन भी अपनी नौसेना का विस्तार कर रहा है। साथ ही चीन अपने पड़ोसी देश भारत को भी अपनी समुद्री ताकत का अहसास कराने की कोशिश कर रहा है। यह नया एयरक्राफ्ट कैरियर फ़ुजियान प्रांत के नाम पर रखा गया है और यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर है। सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, फ़ुजियान कैरियर शंघाई के जियांगनान शिपयार्ड से रवाना हुआ और परीक्षण मुख्य रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर के प्रणोदन और विद्युत प्रणालियों की विश्वसनीयता और स्थिरता का परीक्षण करेंगे। यह परीक्षण लगभग दो साल तक चलेगा, उसके बाद पांच साल में इस कैरियर को आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) दुनिया की ‘सबसे बड़ी नौसेना’ है, जो 370 से अधिक युद्धपोतों के साथ अमेरिका को पीछे छोड़ देती है। फुजियान कैरियर का वजन लगभग 79,000 टन होने की उम्मीद है, जो इसे अब तक का सबसे भारी चीनी विमान वाहक बनाता है। साथ ही, यह सबसे शक्तिशाली लड़ाकू जेट लॉन्च सिस्टम – इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) से लैस है। वर्तमान में, दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक, यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड, EMALS लॉन्च सिस्टम का उपयोग करता है। चीन के अन्य विमान वाहक, लियाओनिंग और शेडोंग, पुराने स्की-जंप सिस्टम का उपयोग करते हैं। विमानवाहक पोत दो तरह के होते हैं – कैटोबार और स्टोबार। स्टोबार (शॉर्ट टेक-ऑफ, बैरियर-असिस्टेड रिकवरी) में एक ऊंचा स्की-रैंप होता है जो लड़ाकू जेट को उड़ान भरने में मदद करता है। लेकिन, यह स्की-रैंप विमान के उड़ान भरने के वजन को सीमित कर देता है, जिससे उसका हथियार और ईंधन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है। 

दूसरी तरफ, कैटोबार प्रणाली में विमानों को उड़ाने के लिए कैटापल्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है। कैटोबार-आधारित विमान वाहकों में भाप से चलने वाले कैटापल्ट सिस्टम होते हैं, जिन्हें अधिक रखरखाव की आवश्यकता होती है, वे भारी होते हैं और अन्य विकल्पों की तुलना में ज्यादा जगह लेते है। EMALS कैटापल्ट विमान वाहक से विमान को अधिक सहज और सटीक तरीके से लॉन्च करने की सुविधा देता है, जिससे भारी लड़ाकू जेट भी उड़ान भर सकते हैं।

1990 के दशक से चीन में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां पीएलए के बजाय नौसेना के विस्तार पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव 90 के दशक और 2000 के दशक के शुरुआत में हुए आर्थिक विकास से प्रेरित था, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की उपस्थिति को बढ़ाया और इसे दुनिया का विनिर्माण केंद्र बना दिया। पीएलए नेवी धीरे-धीरे एक रक्षात्मक-आक्रामक सेना से बदलकर ऐसी शक्ति बन गई जो क्षेत्र से बाहर अभियान चलाने में सक्षम है और इसे ‘ब्लू वाटर नेवी’ का दर्जा प्राप्त हुआ। तीन दशक पहले शुरू हुआ आधुनिकीकरण जहाजों, हवाई हथियारों, लड़ाकू विमानों, सिद्धांतों के निर्माण, प्रशिक्षण, बहुपक्षीय अभ्यास आदि पर केंद्रित था। 2015 के चीनी रक्षा श्वेत पत्र में समुद्री संचार लिंक (एसएलओसी) को राष्ट्रीय हितों के हिस्से के रूप में सुरक्षित रखने का आह्वान किया गया और कहा गया कि ये समुद्री लिंक चीन के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हिंद महासागर, जो भारत का समुद्री पिछवाड़ा है, वैश्विक पूर्व-पश्चिम व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है और चीन अपने समुद्री सिल्क रोड (एमएसआर) की सुरक्षा के लिए भारत के दक्षिण में समुद्री ठिकाने स्थापित कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) लगभग 2.5 बिलियन लोगों का घर है, जिसमें भारत जैसी कुछ वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं हैं, जो क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में मौजूद हैं। हॉर्मुज का जलडमरूमध्य, बाब-एल-मंडेब, मलक्का जलडमरूमध्य और मोजाम्बिक चैनल इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण मार्ग हैं और चीन के वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन चाहता है कि उसकी नौसेना ‘ताइवान या किसी अन्य मुद्दे पर चीन के निकट-समुद्री क्षेत्र में संघर्ष में अमेरिकी हस्तक्षेप को रोके, या उसमें विफल होने पर, हस्तक्षेप करने वाले अमेरिकी बलों के आगमन में देरी करे या उनकी प्रभावशीलता को कम करे।

भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने पिछले साल कहा था कि स्वदेशी विमानवाहक पोत-2 (आईएसी-2) आईएनएस विक्रांत का एक दोहराया संस्करण होगा। उन्होंने कहा, ‘हम अभी भी इस बात पर काम कर रहे हैं कि आईएसी-2 का आकार कैसा होना चाहिए और उसमें क्या क्षमताएं होनी चाहिए। लेकिन, अभी के लिए, हमने इसे रोक दिया है क्योंकि हमने अभी हाल ही में आईएनएस विक्रांत को शामिल किया है और हम परीक्षणों में जहाज के प्रदर्शन से काफी खुश हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आईएसी-1 के निर्माण में काफी विशेषज्ञता हासिल की गई है। हम आईएसी-2 बनाने के बजाय आईएसी-1 के लिए दोहराए गए ऑर्डर को गंभीरता से देख रहे हैं। इससे देश में उपलब्ध विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सकेगा और हम अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकेंगे।’ आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य STOBAR प्लेटफॉर्म पर बने हैं और उनमें मिग-29के लड़ाकू विमान तैनात हैं। जल्द ही राफेल और तेजस के नौसेना संस्करण मिग की जगह लेंगे। आईएनएस विशाल का उत्पादन जल्द ही शुरू हो जाएगा, लेकिन नए विमानवाहक पोत को चालू होने में अभी कई साल लगेंगे। चीन के बड़े आकार के अर्थव्यवस्था और भारत से तीन गुना अधिक रक्षा बजट को भी ध्यान में रखना चाहिए। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच क्वाड गठबंधन और भारतीय नौसेना के क्षेत्र में नियमित बहुपक्षीय अभ्यास क्षेत्रीय उपस्थिति और वर्चस्व सुनिश्चित करते हैं।

प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल के बारे में क्या बोले पीएम मोदी?

हाल ही में पीएम मोदी ने प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल के बारे में एक बयान दे दिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जोर देकर कहा कि प्रज्वल रेवन्ना जैसे व्यक्ति के लिए कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए। उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने जद (एस) सांसद को देश से बाहर जाने दिया और वोक्कालिगा बहुल क्षेत्र में चुनाव संपन्न होने के बाद आपत्तिजनक सेक्स वीडियो जारी किए। मोदी ने समाचार चैनल को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही। चैनल की ओर से जारी इस साक्षात्कार के विवरण के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है क्योंकि यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा था। उन्होंने कहा कि हजारों वीडियो की मौजूदगी से लगता है कि यह उस समय का है जब जनता दल (सेक्यूलर) का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। उन्होंने कहा कि ये वीडियो तब एकत्र किए गए थे जब वे सत्ता में थे और वोक्कालिगा समुदाय द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद चुनाव के दौरान उन्होंने इसे जारी किया गया। प्रधानमंत्री ने इस घटनाक्रम को बेहद संदिग्ध बताते हुए कहा कि उन्हें (रेवन्ना) देश से बाहर भेजे जाने के बाद वीडियो जारी किए गए। मोदी ने कहा कि अगर राज्य सरकार के पास सूचना थी तो उसे हवाई अड्डे पर नजर रखनी चाहिए थी और सतर्कता बरतनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘आपने कुछ नहीं किया। भारत सरकार को सूचित नहीं किया गया। इसका मतलब है कि यह एक राजनीतिक खेल था और वे जानते हैं कि ये वीडियो उस समय से थे जब वे गठबंधन में थे और उन्होंने इन वीडियो को एकत्र किया था। हालांकि, यह मेरा मुद्दा नहीं है, मेरा मुद्दा यह है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारे देश में इस प्रकार के खेल बंद होने चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘जहां तक मोदी की बात है, जहां तक भाजपा की बात है, जहां तक हमारे संविधान की बात है, मेरा स्पष्ट विचार है कि ऐसे लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (कतई बर्दाश्त नहीं करने) की नीति होनी चाहिए। उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करके कड़ी सजा दी जानी चाहिए।’

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘हमें उन्हें वापस लाना चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कोई अगर-मगर नहीं होना चाहिए।’ कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) ने 2018 के चुनावों के बाद कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाई थी और 2019 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ने के बाद दोनों अलग हो गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा नीत पार्टी ने पिछले साल सितंबर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन किया था और दोनों दल मौजूदा लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने रेवन्ना के कथित यौन उत्पीड़न के मुद्दे का इस्तेमाल भाजपा पर निशाना साधने के लिए किया है। गौड़ा के पोते रेवन्ना हासन से फिर चुनाव लड़ रहे हैं, जहां 26 अप्रैल को मतदान हुआ था। इस क्षेत्रीय पार्टी का दक्षिण कर्नाटक में प्रभाव है, खासकर वोक्कालिगा समुदाय के बीच, जिससे गौड़ा ताल्लुक रखते हैं। विरासत कर और संपत्ति के पुनर्वितरण जैसे मुद्दों पर कांग्रेस के खिलाफ अपने आरोपों के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी बात रखने के लिए विपक्षी पार्टी और उसके नेताओं की भाषा, शब्दों और लिखित आश्वासन का हवाला दिया है।

उन्होंने कहा, ‘इस बार मैंने पूरी तरह से उनकी पोल खोल दी है। यही कारण है कि वे परेशान हैं। जब वे एक समुदाय से वोट मांगने जाते हैं, तो वे अलग तरह से बोलते हैं और जब वे दूसरे समुदाय से संपर्क करते हैं, तो वे तटस्थ रुख अपनाते हैं। यह उनका दोहरा चरित्र है।’ उन्होंने कहा कि यह भाजपा के विपरीत है जो हमेशा राम मंदिर बनाने, अनुच्छेद 370 हटाने और समान नागरिक संहिता की बात करती है। उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार झूठ बोल रही है और भाजपा पर यह आरोप लगा रही है कि उसकी मंशा संविधान को बदलने की है। उन्होंने कहा, ‘वे हमारी बात को सुनने से इनकार कर रहे हैं। अब कांग्रेस पूछती है कि उसके घोषणापत्र में संपत्ति वितरण और विरासत कर का उल्लेख कहां है। कांग्रेस को दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए। कांग्रेस को जवाब देना होगा।’ धर्म आधारित आरक्षण के खिलाफ अपने तर्कों पर उन्होंने कहा कि इस तरह का विचार संविधान के खिलाफ है। अपनी सरकार के कल्याणकारी कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते।

आखिर नीट पेपर लीक के बारे में क्या बोला NTA?

हाल ही में NTA के द्वारा नीट पेपर लीक के बारे में एक बयान दिया गया है! नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने साफ तौर पर कहा कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का पेपर लीक होने का दावा करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद है। एनटीए ने बाकायदा इस बारे में बयान जारी कर कहा है कि हर क्वेश्चन पेपर का हिसाब रखा गया है। पेपर लीक होने की खबरें पूरी तरह से गलत हैं। हर एग्जाम सेंटर सीसीटीवी के दायरे में होता है और देश-विदेश के 4750 सेंटरों पर सफलतापूर्वक मेडिकल एग्जाम करवाया गया है। इसके साथ ही एनटीए एग्जाम के बाद डेटा का विश्लेषण कर रहा है। नकल के मामले, दूसरे के बदले परीक्षा देने के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कैंडिडेट का एग्जाम तो कैंसल होगा ही, भविष्य में भी उसके एग्जाम देने पर रोक लगाई जाएगी। एनटीए ने हर क्वेश्चन पेपर का हिसाब रखे जाने का दावा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल पेपर की कथित तस्वीरों का असली पेपर से कोई संबंध नहीं है। एनटीए के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर से यह पता चला है कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पेपर लीक के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। एनटीए का कहना है कि एग्जाम शुरू होने के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति या एजेंसी केंद्रों तक नहीं पहुंच सकती। एग्जामिनेशन हॉल में सीसीटीवी से निगरानी रखी जाती है।

मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट NEET-UG में इस बार रजिस्ट्रेशन का नया रेकॉर्ड बना। 24 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए और हाजिरी में भी नया रेकॉर्ड बना।10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये के जुर्माने के प्रावधान वाले ‘लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी है। पेपर लीक करने वालों पर शिकंजा कसने का वादा अब हर पार्टी कर रही है। यह मुद्दा चुनावों में भी उठाया जा रहा है। 97 पर्सेंट से ज्यादा हाजिरी रही है और 23.30 लाख से ज्यादा छात्रों ने यह एग्जाम दिया है। यह एंट्रेंस टेस्ट विदेश के 14 शहरों सहित 571 शहरों के 4750 केंद्रों पर आयोजित किया गया था।

राजस्थान के एक परीक्षा केंद्र पर गलत पेपर बांटे जाने के बाद कुछ कैंडिडेट्स परीक्षा केंद्र से बाहर चले गए थे। सवाई माधोपुर में एक स्कूल में हो रही परीक्षा में सेंटर सुपरिटेंडेंट की ओर से कुछ छात्रों को गलत पेपर दे दिया गया। हिंदी मीडिया के छात्रों को इंग्लिश मीडिया का पेपर दिया गया। एनटीए अधिकारियों का कहना है कि पर्यवेक्षकों द्वारा रोकने के बावजूद कुछ छात्र करीब सवा चार बजे परीक्षा केंद्र से पेपर लेकर बाहर चले गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एनटीए का पेपर लीक होने का दावा किया। हालांकि, एनटीए ने पब्लिक नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया कि पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाई माधोपुर के इस सेंटर पर कुछ छात्रों को गलत पेपर दे दिया गया, जिससे यह समस्या हुई। बाद में सभी 120 छात्रों की परीक्षा आयोजित की गई और उन सभी छात्रों को पेपर देने का मौका मिला।

बिहार में रविवार को नीट की परीक्षा के दौरान परीक्षा का पेपर लिखते कुछ मुन्ना भाई पकड़े गए थे। ये डमी कैंडिडेट दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे थे।हर एग्जाम सेंटर सीसीटीवी के दायरे में होता है और देश-विदेश के 4750 सेंटरों पर सफलतापूर्वक मेडिकल एग्जाम करवाया गया है। इसके साथ ही एनटीए एग्जाम के बाद डेटा का विश्लेषण कर रहा है। नकल के मामले, दूसरे के बदले परीक्षा देने के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कैंडिडेट का एग्जाम तो कैंसल होगा ही, भविष्य में भी उसके एग्जाम देने पर रोक लगाई जाएगी। पकड़े गए डमी कैंडिडेट राजस्थान के जालौर, भोजपुर, बेगूसराय और सीतामढ़ी के हैं। ये सभी मेडिकल स्टूडेंट्स बताए जा रहे हैं। पेपर लीक अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी है। संसद ने सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, फर्जी वेबसाइट जैसी अनियमितताओं के खिलाफ तीन साल से लेकर 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये के जुर्माने के प्रावधान वाले ‘लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी है। पेपर लीक करने वालों पर शिकंजा कसने का वादा अब हर पार्टी कर रही है। यह मुद्दा चुनावों में भी उठाया जा रहा है। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी अपने न्याय पत्र में वादा किया है कि पेपर लीक बंद होगा। मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट को देखें तो यह परीक्षा करवाने वाली एजेंसी एनटीए ने आम नागरिकों को आश्वस्त किया है कि यह पेपर लीक नहीं हुआ है और अभी जो भी सवाल सामने आ रहे हैं, उनके जवाब भी जल्द मिलेंगे।

आखिर क्या है हेमंत करकरे की मौत का विवाद?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर हेमंत करकरे की मौत का विवाद क्या है! लोकसभा चुनाव में तीसरे फेज की वोटिंग से पहले महाराष्ट्र कांग्रेस के एक नेता ने 26/11 हमले को लेकर ऐसा दावा किया, जिस पर सियासी पारा चढ़ने लगा है। बीजेपी ने कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने कहा कि 26/11 हमले में अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी हेमंत करकरे की मौत ‘अजमल कसाब जैसे आतंकी की गोली से नहीं हुई, बल्कि संघ के करीबी एक पुलिसकर्मी की गोली से हुई’ थी। उज्जवल निकम ने अदालत में इसे लेकर तथ्य छिपाए थे। बता दें कि कांग्रेस नेता का बयान सांप्रदायिक कार्ड खेलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करता है। बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा कि उनका बयान न केवल न्यायपालिका की ओर से स्थापित तथ्यों का खंडन करता है, बल्कि इसे सांप्रदायिक मुद्दों के साथ जोड़कर राष्ट्रीय सुरक्षा को भी कमजोर करता है। इसका स्पष्ट उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव भड़काना है।

कांग्रेस नेता के इसी कमेंट पर बीजेपी ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पूरा मामला तब सामने आया जब विजय वडेट्टीवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे की हत्या जिस गोली से हुई थी, वह कसाब या आतंकियों की बंदूक से नहीं चलाई गई थी। यह बात एसएम मुश्रीफ की किताब में लिखी गई है। बता दें कि कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान को लेकर बीजेपी अब चुनाव आयोग पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता का बयान सांप्रदायिक कार्ड खेलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करता है।कोर्ट से जमानत दिलाने वाला कोई भी सामान्य वकील यह काम कर सकता था।पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने अब तक इस कमेंट से खुद को अलग नहीं किया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि उज्जवल निकम ने कोर्ट के सामने यह बात क्यों नहीं रखी। कांग्रेस नेता ने उज्जवल निकम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो बीजेपी के लिए काम करते आ रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अजमल कसाब को फांसी दिलाना कोई बड़ी बात नहीं है। कोर्ट से जमानत दिलाने वाला कोई भी सामान्य वकील यह काम कर सकता था।

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान को लेकर बीजेपी अब चुनाव आयोग पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता का बयान सांप्रदायिक कार्ड खेलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करता है। बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा कि उनका बयान न केवल न्यायपालिका की ओर से स्थापित तथ्यों का खंडन करता है, बल्कि इसे सांप्रदायिक मुद्दों के साथ जोड़कर राष्ट्रीय सुरक्षा को भी कमजोर करता है। इसका स्पष्ट उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव भड़काना है।

बीजेपी ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं की संवेदनशीलता और वडेट्टीवार के पद को देखते हुए झूठी कहानियां फैलाने का यह कदम बेहद गंभीर है। पार्टी ने ये भी जोड़ा कि जब विजय वडेट्टीवार राज्य में मंत्री थे तो उस दौरान उन्होंने कभी इस तरह के दावे नहीं किए। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने कहा कि 26/11 हमले में अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी हेमंत करकरे की मौत ‘अजमल कसाब जैसे आतंकी की गोली से नहीं हुई, बल्कि संघ के करीबी एक पुलिसकर्मी की गोली से हुई’ थी। उज्जवल निकम ने अदालत में इसे लेकर तथ्य छिपाए थे। कांग्रेस नेता के इसी कमेंट पर बीजेपी ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उज्जवल निकम ने कोर्ट के सामने यह बात क्यों नहीं रखी। कांग्रेस नेता ने उज्जवल निकम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो बीजेपी के लिए काम करते आ रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अजमल कसाब को फांसी दिलाना कोई बड़ी बात नहीं है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान को लेकर बीजेपी अब चुनाव आयोग पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता का बयान सांप्रदायिक कार्ड खेलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करता है।कोर्ट से जमानत दिलाने वाला कोई भी सामान्य वकील यह काम कर सकता था।पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने अब तक इस कमेंट से खुद को अलग नहीं किया है। इससे ऐसा लगता है कि वह ऐसे बयान का मौन समर्थन कर रही है। आयोग को इस तरह के विवादित कमेंट का समर्थन करने और इसका प्रचार करने के लिए कांग्रेस और उसके नेता दोनों पर एक्शन लेना चाहिए।

इस बार के तीसरे फेस में कौन-कौन थे मुख्य चेहरे?

आज हम आपको बताएंगे कि इस बार के तीसरे फेस में कौन-कौन से मुख्य चेहरे थे! लोकसभा चुनाव 2024 के तीसरे चरण के तहत 12 राज्यों की 94 सीट के लिए चुनाव प्रचार रविवार शाम छह बजे थम गया। इन सीट पर सात मई यानी मंगलवार को मतदान होगा। इस फेज में जिन सीटों पर चुनाव होगा उनमें गुजरात की 25, कर्नाटक की 14, महाराष्ट्र की 11, उत्तर प्रदेश की 10 सीटें शामिल हैं। इनके अलावा मध्य प्रदेश की नौ, छत्तीसगढ़ की सात, बिहार की पांच, असम की चार और गोवा की दो सीट पर भी 7 मई को वोटिंग होगी। उत्तर प्रदेश की संभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला और बरेली संसदीय सीट पर मतदान होगा। यूपी में इस चरण के दौरान 100 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि 1.88 करोड़ मतदाता मतदान कर सकेंगे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिये प्रयास कर रही हैं। इस सीट पर उन्होंने अपने ससुर और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। सपा के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद सीट से फिर चुनाव मैदान में हैं। आदित्य यादव सपा का गढ़ मानी जाने बदायूं लोकसभा सीट से अपने चुनावी करियर की शुरुआत कर रहे हैं। तीसरे चरण के चुनाव में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह एटा से ‘हैट्रिक’ बनाने की उम्मीद कर रहे हैं। बरेली में मुख्य मुकाबला बीजेपी के छत्रपाल सिंह गंगवार और सपा के प्रवीण सिंह ऐरन के बीच है। कांग्रेस ने फतेहपुर सीकरी से रामनाथ सिंह सिकरवार को मैदान में उतारा है, जबकि उसके सहयोगी दल समाजवादी पार्टी ने बाकी नौ संसदीय क्षेत्रों से अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

मध्यप्रदेश की नौ सीट के लिए चुनाव के दौरान तीन बड़े दिग्गजों शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह का राजनीतिक भविष्य तय होगा। इस दौरान 1.77 करोड़ से अधिक मतदाता नौ सीट के लिए मैदान में उतरे 127 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीट शामिल हैं। मध्य प्रदेश की इन नौ सीट में मुरैना, भिंड (एससी), ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़ और बैतूल (एसटी) निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगभग 17 वर्षों के बाद विदिशा सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वो पहले भी कई बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। शिवराज का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार प्रताप भानु शर्मा से है। राजगढ़ सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री 77-वर्षीय दिग्विजय सिंह का मुकाबला दो बार के बीजेपी सांसद रोडमल नागर से है। बीजेपी को मध्य प्रदेश की सभी 29 सीट पर अपनी जीत की उम्मीद है। गुना सीट पर यादव समुदाय के वोट चुनावी पलड़ा झुका सकते हैं और यहां सिंधिया का मुकाबला कांग्रेस के यादवेंद्र सिंह यादव से है। वर्ष 2019 में सिंधिया कांग्रेस के उम्मीदवार थे, लेकिन बीजेपी के केपी यादव से सिंधिया परिवार के इस गढ़ में हार गए थे। ग्वालियर के पूर्व शाही परिवार के वंशज सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए थे। विदिशा में शिवराज सिंह चौहान सहज दिख रहे हैं, लेकिन राजगढ़ में मुकाबला करीबी हो सकता है। दिग्विजय सिंह 1984 और 1991 में राजगढ़ सीट से जीते थे, लेकिन 1989 में हार गए, वह 1993 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

गुजरात की 26 लोकसभा सीट में से 25 लोकसभा सीट और पांच विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी प्रचार थम गया है। कांग्रेस के नीलेश कुंभाणी का नामांकन खारिज होने और अन्य उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी के मुकेश दलाल सूरत से पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं। गुजरात के प्रमुख उम्मीदवारों में गांधीनगर सीट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पोरबंदर सीट से मनसुख मांडविया और राजकोट सीट से परषोत्तम रूपाला शामिल हैं। गुजरात में कांग्रेस ने चार मौजूदा और आठ पूर्व विधायकों को मैदान में उतारा है और वह आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। समझौते के तहत कांग्रेस को 24 सीट (सूरत सहित) मिलीं, जबकि आप को भावनगर और भरूच दी गई हैं। आप ने मौजूदा विधायक चैतर वसावा को भरूच सीट से और उमेश मकवाना को भावनगर सीट से मैदान में उतारा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, गुजरात में कुल 4.97 करोड़ वोटर हैं, जिनमें 2.56 करोड़ पुरुष, 2.41 करोड़ महिलाएं हैं। ये 50,788 मतदान केंद्रों पर वोटिंग कर सकेंगे।

भारत चीन सीमा विवाद पर क्या बोले विदेश मंत्री?

हाल ही में विदेश मंत्री ने भारत चीन सीमा विवाद पर एक बयान दिया है! विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने ईस्टर्न लद्दाख में चीन के साथ चल रहे गतिरोध को लेकर कहा कि चीन के साथ भारत की जो बातचीत चल रही है वह पेट्रोलिंग को लेकर है। उन्होंने कहा कि आजकल जो बातचीत चल रही है, वह डिसइंगेजमेंट की बातचीत नहीं है, वह पेट्रोलिंग को लेकर बात है। कुछ ऐसी जगह हैं जहां वे हमें पेट्रोलिंग (गश्ती) से रोकते हैं तो हम भी उन्हें पेट्रोलिंग से रोकते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि अभी जो पेट्रोलिंग की बात हो रही है, ऐसी जगह पर हो रही है जहां हमने एक दूसरे को ब्लॉक किया हुआ है। विदेश मंत्री ने कहा कि पेट्रोलिंग का एक पैटर्न होता है। हर फौज देखती है कि दूसरा क्या कर रहा है। अगर वह पेट्रोलिंग पैटर्न के हिसाब से कर रहा है तो ठीक है लेकिन कोई पैटर्न से निकल जाता है तो थोड़ी टेंशन होती है। ये पूछने पर कि जब सरकार कहती है कि हमारी एक इंच जमीन नहीं गई है और कोई आगे नहीं आया है, हमारी जमीन पर नहीं आया तो ईस्टर्न लद्दाख में कई पॉइंट्स पर जो डिसइंगेजमेंट हुआ, वह किसलिए? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि जब आप कहते हैं कि वो भी आगे आए, तो हम भी आगे आए। उन्होंने कहा कि 2020 से पहले दोनों फौज अपने बेस या अपने कैंप से ऑपरेट करते थे। 2020 में चीन की ओर से वे अपने बेस से बाहर तो आए लेकिन काफी बड़ी संख्या में आए और कई तरह के हथियार भी उनके पास ज्यादा थे। इसके जवाब में सरकार ने भी हमारी फोर्स बढ़ाई।

विदेश मंत्री ने कहा कि मई-जून 2020 में हम दोनों (भारत- चीन सेना) की बहुत क्लोजअप डिप्लॉयमेंट थी क्योंकि हम दोनों अपनी पोजिशन से आगे थे। ये नहीं था कि आमने सामने थे, क्रिस-क्रॉस थे। कोई आगे थे, कोई ऊपर था, कोई नीचे था, कोई साइड में था, बहुत नजदीक में थे। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए था कि हमें फिजिकल कॉन्टेक्ट में आना ही नहीं चाहिए था, हम तय प्रक्रिया के हिसाब से दूरी रखते, पर उसका उल्लंघन हुआ। हम बहुत क्लोज आ चुके थे इसलिए डिसइंगेजमेंट की बात हुई, हम भी अपने बेस पर वापस जाएं, वो भी अपने बेस पर वापस जाएं। ताकि आगे से कोई हिंसक घटना ना हो। इसके लिए दोनों के बीच समझौता हुआ। एस.जयशंकर ने कहा कि जिस तरह समझौता हुआ वह कोई नई बात नहीं थी। भारत- चीन बॉर्डर में देखें तो हमारा सबसे पहले जो विवाद था वह 1958 में उत्तराखंड के बाराहोती में था। उस वक्त बाराहोती में समझौता हुआ कि वे भी अपने बेस मे चलें जाएं और हम भी अपने बेस में चले जाएं और वहां पेट्रोलिंग रोका जाए। उसके बाद कुछ न कुछ होता रहा। राजीव गांधी के समय में सुमदोरॉग चू में भी यही हुआ कि वे आगे आए, हम भी आगे गए। फिर समाधान यह निकला कि वह भी अपने बेस में जाएं हम भी जाएं। जहां तनाव के चांस ज्यादा थे वहां कहा कि पेट्रोलिंग नहीं करेंगे।

ईस्टर्न लद्दाख में जब तनाव शुरू हुआ तो चीनी सैनिक चार जगहों पर आगे आ गए थे जिसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी तैनाती बढ़ाई और बातचीत के बाद पैंगोंग एरिया यानी फिंगर एरिया और गलवान में पीपी- 14, गोगरा में पीपी-17 और हॉट स्प्रिंग एरिया में डिसइंगेजमेंट हुआ। जिन जगहों पर डिसइंगेजमेंट हुआ वहां नो-पेट्रोलिंग जोन बने हैं। यानी जब तक दोनों देश मिलकर कोई हल नहीं निकालते तब तक कोई वहां पेट्रोलिंग नहीं करेगा। गतिरोध खत्म करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई दौर की कोर कमांडर स्तर की मीटिंग हो चुकी है और बातचीत आगे भी जारी रखने के लिए दोनों देश राजी हैं।

देपासांग प्लेन्स में चीन ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग ब्लॉक की हुई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पहले वाई-जंक्शन जिसे बॉटल नेक एरिया कहते हैं उससे आगे तक भारतीय सैनिक पेट्रोलिंग के लिए जाते थे। देपसांग प्लेन्स सामरिक तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि यह भारत के डीबीओ एयरस्ट्रिप के पास है और यहां से काराकोरम दर्रा भी करीब 30 किलोमीटर दूर है। देपसांग पर खतरे का मतबल दरबुक-श्योक-दौलतबेग ओल्डी DS-DBO रोड पर खतरा है। यह रोड लेह को काराकोरम पास से जोड़ती है। डेमचॉक में भी चारदिंग ला एरिया में अलग अलग दावे हैं, चीन ने चारदिंग नाले के इस तरह अपने टेंट बनाए हैं।

क्या चीन और ईरान में भी हो रही है दोस्ती ?

वर्तमान में चीन और ईरान में भी दोस्ती होती जा रही है! ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी हाल ही में पाकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे को सहयोग का भरोसा दिलाया। रईसी की ये यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच कुछ समय पहले तनाव देखने को मिला था। दूसरी ओर अमेरिका ने भी इस पर पाकिस्तान से नाखुशी जाहिर की। रईसी की यात्रा खत्म हो गई है लेकिन इसके नतीजे अभी भी साफ नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि यह पूरी तरह से संभव है कि चीन की ओर से पाकिस्तान और ईरान पर निकटता के लिए दबाव डाला जा रहा है। वह दोनों देशों को बाहर से एक तरह का भरोसा दे रहा है क्योंकि दोनों ही उसके लिए जरूरी हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या ईरान, पाकिस्तान और चीन की तिकड़ी भारत के लिए कोई मुश्किल खड़ी कर सकती है। फर्स्टपोस्ट की एक्सपर्ट के हवाले से की गई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान के बीच गैस पाइपलाइन का प्रश्न राईसी की यात्रा में आया। दोनों देशों के संयुक्त बयान में भी इसका जिक्र किया गया। पाकिस्तान पर अमेरिका इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से हटने का दवाब बना रहा है लेकिन वह इससे पीछे भी नहीं जा सकता है। पाकिस्तान 18 अरब डॉलर का भारी जुर्माना चुकाने की असहज स्थिति में है और उसको गैस की भी सख्त जरूरत है। संयुक्त बयान में इस मुद्दे पर कहा गया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र के लोगों की इच्छा और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से कश्मीर के मुद्दे को हल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का कोई संदर्भ नहीं है। ऐसा लगता है कि ईरान को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है।पाकिस्तान का कहना है कि उसने अमेरिका से छूट का अनुरोध किया है लेकिन ऐसा होने की संभावना नहीं है। ईरान पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हैं। पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसे मदद करेगा लेकिन हालिया समय में जिस तरह से चीनी नागरिकों पर पाक में हमले हुए हैं, उससे चीजें मुश्किल हुई हैं।

ईरानी राष्ट्रपति की यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान का दूसरा फोकस आतंकवाद पर है। ये एक ऐसा विषय है, जिस पर दोनों देश एक-दूसरे पर भी आरोप लगाते रहे हैं। एक-दूसरे की जमीन पर आतंकियों को निशाना बनाने के लिए हमलों के बाद ईरान-पाकिस्तान के रिश्तें हाल ही में काफी खराब हो गए थे। इससे आगे निकलते हुए दोनों पक्ष बाजारों और व्यापारिक क्षेत्रों को विकसित करने की कोशिश भी कर रहे हैं। हालांकि इस पर भी सीमा पर मौजूद कई संगठन मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। ईरान की पाक यात्रा के दौरान कश्मीर का भी मामला आया। प्रेस इवेंट में पाक पीएम शरीफ ने इसे उठाया लेकिन ईरानी राष्ट्रपति राईसी ने इसे टाल दिया। संयुक्त बयान में इस मुद्दे पर कहा गया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र के लोगों की इच्छा और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से कश्मीर के मुद्दे को हल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का कोई संदर्भ नहीं है। ऐसा लगता है कि ईरान को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है।

ईरान ने भले ही कश्मीर पर पाकिस्तान की जुबान नहीं बोली लेकिन भारत के लिए आगे मुसीबत हो सकती है। ईरान, रूस, चीन, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक तरह का गुट उभरने लगा है। तुर्की का हमेशा पश्चिम के साथ मतभेद में रहा है और बाकी देश प्रतिबंधों से बुरी तरह आहत हुए हैं। सभी देश रूस को सैन्य उपकरणों के आपूर्तिकर्ता कर रहे हैं और ज्यादातर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से भी जुड़े हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या ईरान, पाकिस्तान और चीन की तिकड़ी भारत के लिए कोई मुश्किल खड़ी कर सकती है। फर्स्टपोस्ट की एक्सपर्ट के हवाले से की गई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान के बीच गैस पाइपलाइन का प्रश्न राईसी की यात्रा में आया। दोनों देशों के संयुक्त बयान में भी इसका जिक्र किया गया। पाकिस्तान पर अमेरिका इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से हटने का दवाब बना रहा है लेकिन वह इससे पीछे भी नहीं जा सकता है।यह पूरी तरह से संभव है कि चीन ही पाकिस्तान और ईरान को इस गुट में धकेल रहा है। चीन को ईरान से सस्ता तेल मिलता है। पाकिस्तान भी चीन के लिए भौगोलिक स्थिति के कारण उपयोगी है। इस गुट में कोई भी करीबी भारत के लिए चिंता की बात होगी।

आखिर क्या है जापानी सेना की 731 यूनिट की क्रूरता की कहानी?

आज हम आपको जापानी सेना की 731 यूनिट की क्रूरता की कहानी सुनाने जा रहे हैं! दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कई अमानवीय घटनाओं की बात सामने आई थी लेकिन जापान की ‘यूनिट 731’ने इस दौरान दुनिया में अब तक देखे गए सबसे कुख्यात युद्ध अपराधों को अंजाम दिया था। जापानी सेना की एस यूनिट ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दो लाख से ज्यादा लोगों को मार डाला था। इस यूनिट ने चीनी, कोरियाई, रूसी और अमेरिकी बंदियों पर अमानवीय परीक्षण और प्रयोग करते हुए ना सिर्फ पुरुषों बल्कि महिलाएं और बच्चों को भी क्रूर यातना देकर मार डाला था। इस यूनिट ने लोगों को सिर्फ सीधे गोली ही नहीं मारी। इंजेक्शन लगाकर तड़पाते हुए लोगों को मारा तो हथियार परीक्षण के नाम पर लोगों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। महिलाओं के साथ बलात्कार कर उनको मार डाला गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिट 731 के भयानक कामों में से एक शीतदंश परीक्षण था, इसमें बंदियों के अंगों को बर्फ से भरे टब में डुबोया जाता था। बंदी के हाथ-पैरों तब तक बर्फ में पकड़े रखा जाता था, जब तक कि वे ठोस रूप से जम न जाएं और त्वचा पर बर्फ की परत ना बन जाए। यूनिट 731 बंदियों के शरीर को बर्फ में जमाने तक ही नहीं रुकती थी। बर्फ से जमे बंदियों के शरीर को फिर से गर्म करने के लिए भी किए अमानवीय प्रयोग किए गए। बर्फ से जमे शरीर के अंग को गर्म पानी में डुबोया या खुली आग के पास रखा जाता था। कई बार रात भर ऐसे ही बाहर छोड़ दिया जाता था, ताकि यह देखा जा सके कि उनके जमे खून को पिघलने में कितना समय लगा। शीतदंश परीक्षण जापान की यूनिट 731 द्वारा उपयोग की जाने वाली कई भयानक यातना तकनीकों में से एक थी।

इस यूनिट ने चीनी आबादी को खत्म करने के लिए घातक कीटाणुओं का इस्तेमाल किया। ये एक तरह से जर्म्स का मानव शरीर पर प्रयोग था। डॉक्टरों ने कीटाणुओं को शरीर में प्रवेश कराने के बाद लक्षणों की निगरानी की।बंधे हुए लोगों पर चाकुओं और संगीनों से भी वार क्या जाता था। माना जाता है कि यूनिट 731 ने दो से तीन लाख के बीच लोगों को मारा था।रूसी और अमेरिकी बंदियों पर अमानवीय परीक्षण और प्रयोग करते हुए ना सिर्फ पुरुषों बल्कि महिलाएं और बच्चों को भी क्रूर यातना देकर मार डाला था।बर्फ से जमे बंदियों के शरीर को फिर से गर्म करने के लिए भी किए अमानवीय प्रयोग किए गए। इससे जब लोग सबसे तेजी से बीमार पड़ते थे तो उन्हें मुर्दाघर की मेज पर लहूलुहान करके मार दिया जाता था। बीमार व्यक्ति जब मरने की हालत में आ जाता था तो चमड़े के जूते पहने एक अधिकारी मेज पर चढ़ जाता था और पीड़ित की छाती पर इतनी ताकत से कूदता था कि उसकी पसली कुचल जाती थी। उनके खून से दूसरे बंदियों को संक्रमित किया जाता था।

रोंगटे खड़े कर देने वाले प्रयोगों में लोगों को घूमने वाले सेंट्रीफ्यूज के अंदर मारना, उन्हें रोगग्रस्त जानवरों के खून के साथ इंजेक्ट करना शामिल था। यूनिट 731 लोगों पर हथियारों का परीक्षण भी करते थे। लोगों को बांधकर बंदूकों से निशाना लगाया जाता था। बंधे हुए लोगों पर चाकुओं और संगीनों से भी वार क्या जाता था। माना जाता है कि यूनिट 731 ने दो से तीन लाख के बीच लोगों को मारा था।रूसी और अमेरिकी बंदियों पर अमानवीय परीक्षण और प्रयोग करते हुए ना सिर्फ पुरुषों बल्कि महिलाएं और बच्चों को भी क्रूर यातना देकर मार डाला था। इस यूनिट ने लोगों को सिर्फ सीधे गोली ही नहीं मारी। इंजेक्शन लगाकर तड़पाते हुए लोगों को मारा तो हथियार परीक्षण के नाम पर लोगों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। यूनिट 731 बंदियों के शरीर को बर्फ में जमाने तक ही नहीं रुकती थी। बर्फ से जमे बंदियों के शरीर को फिर से गर्म करने के लिए भी किए अमानवीय प्रयोग किए गए।

बर्फ से जमे शरीर के अंग को गर्म पानी में डुबोया या खुली आग के पास रखा जाता था। कई बार रात भर ऐसे ही बाहर छोड़ दिया जाता था, ताकि यह देखा जा सके कि उनके जमे खून को पिघलने में कितना समय लगा।द्वितीय विश्व युद्ध का ‘डरावना बंकर’ पूर्वोत्तर चीन के अंडा शहर के पास खोजा गया था। इसे यूनिट 731 का सबसे बड़ा ‘परीक्षण स्थल’ माना जाता है। पुरातत्वविदों को हेइलोंगजियांग प्रांत में बहुत से कंकाल खोजे थे, जो यूनिट 731 की क्रूरता की गवाही देते हैं।