Saturday, March 7, 2026
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आखिर कब तक चलता रहेगा यातायात नियमों का उल्लंघन ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यातायात नियमों का उल्लंघन कब तक चलता रहेगा! शॉर्टकट हमेशा खतरनाक होता है। खास तौर पर अगर आप गाड़ी चला रहे हैं तो ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। सरकार हो या प्रशासन या फिर घर के बड़े-बुजुर्ग, सभी ये समझाते हैं कि सड़क पर यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। इसके बावजूद भी अकसर लोग थोड़ा सा समय बचाने के लिए रॉन्ग साइड ड्राइविंग से परहेज नहीं करते। वो भी ये जानते ही हुए ये कितना खतनाक हो सकता है। ऐसा ही भीषण हादसा द्वारका एक्सप्रेसवे फ्लाईओवर के नीचे देखने को मिला, जब सवारियों को बिठाने के बाद ई-रिक्शा ड्राइवर समय बचाने के लिए रॉन्ग साइड जाने लगा। तभी अचानक एक एसयूवी से ई-रिक्शे की सीधी टक्कर हो गई। हादसा कितना भयानक था ये इसी से समझा जा सकता है कि टक्कर के बाद ई-रिक्शा ड्राइवर और इसमें सवार यात्री हवा में उछल गए। दिल दहला देने वाले इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और 6 लोग घायल हैं। इस एक्सीडेंट में एसयूवी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं थ्री-व्हीलर के मानो परखच्चे ही उड़ गए। इस हादसे के बारे में जिसने भी सुना वो सन्न रह गया। सवाल यही कि आखिर कब तक चुप रहकर जान देते रहेंगे। पूरा मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम के धनवापुर चौक का है। जानकारी के मुताबिक, द्वारका एक्सप्रेसवे फ्लाईओवर के नीचे सड़क पर ई-रिक्शे की एक एसयूवी से जोरदार टक्कर हुई। पुलिस ने बताया कि सोमवार को ई-रिक्शा ड्राइवर समय बचाने के लिए सड़क के गलत साइड से आ रहा था, तभी शाम करीब 6 बजे किआ सेल्टोस से उसकी सीधी टक्कर हो गई। एसयूवी से टकराने के बाद थ्रीव्हीलर दो बार पलट गया। भीषण हादसे ई-रिक्शा ड्राइवर और सात यात्री हवा में उछल गए और फिर सड़क पर गिरकर बुरी तरह से घायल हो गए। राहगीरों ने तुरंत ही घायल यात्रियों को सेक्टर 10 के सिविल अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने राजस्थान के जोधपुर से आए 22 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर रवि कुमार को मृत घोषित कर दिया गया। ई-रिक्शा चला रहे पंकज कुमार ने भी मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया। घायल हुए छह अन्य यात्रियों का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। राजेंद्र पार्क थाने के हेड कांस्टेबल विनोद ने बताया कि हादसे में घायल सभी लोग दिहाड़ी मजदूर हैं। वो धनवापुर के आसपास अलग-अलग प्रोजेक्ट साइट्स पर काम करते हैं। शाम करीब 5.45 बजे वे राजिंदर पार्क जाने के लिए ई-रिक्शा में बैठे थे। वे दिनभर काम करने के बाद घर जा रहे थे। समय बचाने के लिए ई-रिक्शान ड्राइवर पवन ने रॉन्ग साइड ही जाने का फैसला किया, इसी वजह से ये हादसा हुआ।

बताया जा रहा कि मानेसर जा रही जिस एसयूवी से एक्सीडेंट हुआ उसमें पांच लोग सवार थे। पुलिसकर्मी ने बताया कि ई-रिक्शा से टकराने के बाद कार के एयरबैग खुल गए। एसयूवी में सवार किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई। शुरुआती जांच में पता चला है कि कार की रफ्तार भी तेज नहीं थी। घायल मजदूरों में से एक राम कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले में आईपीसी की धारा 304ए (तेज गति से या लापरवाही से किसी की मौत), 337 (तेज गति से या लापरवाही से किसी को घायल करना) और 279 सार्वजनिक मार्ग पर तेज गति से वाहन चलाना के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

राजेंद्र पार्क थाने के इंस्पेक्टर यशवीर सिंह ने कहा कि हालांकि एसयूवी ड्राइवर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन उन्हें यह पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने की जरूरत है कि गलती किसकी थी। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए। इस दुर्घटना ने एक बार फिर नए खुले एक्सप्रेसवे के आसपास यातायात नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस ने जोर देकर कहा कि वे एक्सप्रेसवे और इसकी सर्विस रोड पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम लगाने के लिए प्रयास तेज कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन भले ही कह रहा हो कि एक्सप्रेस-वे से जुड़ने वाले रास्तों पर वो नजर रखते हैं। यातायात नियमों का पालन भी कराया जाता है। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं सवाल खड़े करती हैं। आखिर ई-रिक्शे में बैठे उन मजदूरों की क्या गलती है। वो बेचारे तो दिनभर काम करने के बाद अपने घर के लिए निकले थे। चाहे गलती रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने वाले उस ई-रिक्शा ड्राइवर की हो या फिर एसयूवी चलाने वाले शख्स की, लेकिन सबसे ज्यादा कीमत तो उस 22 वर्षीय मजदूर ने चुकाई, जिसकी जान चली गई। महज 22 साल की उम्र में वो अपने परिवार से दूर हो गया। रॉन्ग साइड ड्राइविंग में उस ई-रिक्शा ड्राइवर की भी जान चली गई। जैसा कि पुलिस बता रही कि वक्त बचाने के लिए ई-रिक्शा ड्राइवर ने रॉन्ग साइड लिया तो क्या वो ये नहीं सोच सकता था कि उसके रिक्शे में और भी लोग हैं। अब उनमें से एक की मौत हो गई। छह मजदूर अभी भी अस्पताल में हैं। ऐसे में सवाल यही आखिर हम लोग जागरुक कब होंगे। क्या वो मजदूर जो रिक्शे में थे वो उस ड्राइवर को नहीं रोक सकते थे कि रॉन्ग साइड ड्राइविंग नहीं करो। ई-रिक्शा ड्राइवर खुद तो गया ही एक युवक के और मौत की वजह बना।

इस घटना ने फिर लोगों को अलर्ट किया कि ट्रैफिक नियमों का पालन करना कितना जरूरी होता है। ये कोई अकेला मामला नहीं है, रॉन्ग साइड के कारण हर साल हजारों लोगों की जिंदगियां काल के गाल में समा जाती हैं। ट्रांसप्रोर्ट मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में नेशनल हाईवे पर 7332 लोगों की मौत हुई थी। 44 फीसदी मौत रॉन्ग साइड ड्राइविंग के चलते हुई थी। ऐसे हादसे नहीं हो इसके लिए जरूरी है कि सड़क पर ड्राइव कर रहे लोग थोड़ा अलर्ट रहें। वो जरा सा समय बचाने के लिए रॉन्ग साइड ड्राइविंग से परहेज करें तो खुद के साथ कई जिंदगियां बच सकती हैं। गलत दिशा में गाड़ी चलाने के घातक परिणाम हो सकते हैं, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला। यह दुखद घटना राजमार्गों पर सावधानी से गाड़ी चलाने और चौकस रहने के महत्व को रेखांकित करती है।

क्या बिना फेरों के वैद्य नहीं है हिंदू विवाह ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हिंदू विवाह बिना फेरों के वैद्य है या नहीं! हिंदू विवाह एक ‘संस्कार’ है। इसे हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत तब तक मान्यता नहीं दी जा सकती जब तक कि इसे उचित रीति रिवाज और समारोहों के साथ नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध शादी के लिए मैरिज सर्टिफिकेट ही पर्याप्त नहीं है। ये एक संस्कार है जिसे भारतीय समाज में प्रमुख रूप से दर्जा दिया गया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 19 अप्रैल को इस संबंध में अहम आदेश सुनाया। पीठ ने युवा पुरुष और महिलाओं से आग्रह किया कि वे शादी से पहले ही इस विवाह संस्कार के बारे में गहराई से सोचें और यह भी कि भारतीय समाज में ये संस्कार कितने पवित्र हैं। शीर्ष अदालत ने याद दिलाया कि हिंदू विवाह ‘नाच-गाने’ और ‘खाने-पीने’ या दहेज और गिफ्ट मांगने जैसे अनुचित दबाव डालने का मौका नहीं होता है। ऐसी किसी भी शिकायत के बाद आपराधिक कार्यवाही शुरू होने की संभावना है। पीठ ने आगे कहा कि विवाह का मतलब कोई व्यावसायिक लेन-देन नहीं है। यह एक पवित्र समारोह है, जिसे एक पुरुष और एक महिला के बीच संबंध स्थापित करने के लिए आयोजित किया जाता है। इसमें युवक-युवती भविष्य में एक परिवार के लिए पति और पत्नी का दर्जा प्राप्त करते हैं, जो भारतीय समाज की एक बेसिक यूनिट हैं।

पीठ ने आगे कहा कि हिंदू विवाह संतानोत्पत्ति को सुगम बनाता है, परिवार की यूनिट को मजबूत करता है। ये विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। ये विवाह पवित्र है क्योंकि यह दो व्यक्तियों के बीच आजीवन, गरिमापूर्ण, समान, सहमतिपूर्ण और स्वस्थ मिलन प्रदान करता है। इसे एक ऐसी घटना माना जाता है जो व्यक्ति को मोक्ष प्रदान करती है, खासकर जब संस्कार और समारोह आयोजित किए जाते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करते हुए, पीठ ने कहा कि जब तक शादी उचित समारोहों और रीति-रिवाज में नहीं किया जाता, तब तक इसे एक्ट की धारा 7(1) के अनुसार ‘संस्कारित’ नहीं कहा जा सकता है।

कोर्ट ने आगे कहा कि धारा 7 की उपधारा (2) में कहा गया है ऐसे संस्कारों और समारोहों में सप्तपदी शामिल है। यानी, पवित्र अग्नि के समक्ष वर और वधू के संयुक्त रूप से सात फेरे लेना जरूरी होता है। इस दौरान सातवां कदम उठाए जाने के बाद विवाह पूर्ण हो जाता है। ऐसे में हिंदू विवाह के अनुष्ठान में अपेक्षित समारोह लागू रीति-रिवाजों के अनुसार होने चाहिए, जिसमें शादी कर रहे युवा जोड़े सप्तपदी को अपनाएं। वो सात फेरे लें। सुप्रीम कोर्ट एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। ये तलाक की याचिका है, जिसे बिहार के मुजफ्फरपुर की एक अदालत से झारखंड के रांची की एक अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान, महिला ने और उनके पूर्व साथी ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एक संयुक्त आवेदन दायर करके इस विवाद को सुलझाने का फैसला किया। दोनों ही ट्रेंड कमर्शियल पायलट हैं। इस जोड़े की सगाई 7 मार्च, 2021 को होने वाली थी, और उन्होंने दावा किया कि 7 जुलाई, 2021 को उनकी शादी ‘संपन्न’ हो गई। उन्होंने वैदिक जनकल्याण समिति से एक ‘मैरिज सर्टिफिकेट’ भी प्राप्त किया। इस प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 के तहत मैरिज सर्टिफिकेट हासिल किया। उनके परिवारों ने हिंदू संस्कार और रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह समारोह की तारीख 25 अक्टूबर, 2022 तय की। इस बीच, वे अलग-अलग रहते थे लेकिन उनके बीच मतभेद पैदा हो गए और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

पीठ ने कहा कि हिंदू विवाह रीति रिवाजों, संस्कारों और सात फेरे जैसे तय नियमों के अनुसार नहीं किया जाता है, उसे हिंदू मैरिज नहीं माना जाएगा। दूसरे शब्दों में, अधिनियम के तहत एक वैध विवाह के लिए, अपेक्षित समारोहों का आयोजन किया जाना जरूरी है। कोई मुद्दा/विवाद उत्पन्न होने पर उस समारोह के प्रदर्शन का सर्टिफिकेट होना चाहिए। जब तक दोनों पक्षों ने इस तरह का समारोह नहीं किया है, तब तक अधिनियम की धारा 7 के अनुसार कोई हिंदू विवाह नहीं माना जाएगा। तय रीति रिवाज और समारोहों के अभाव में किसी संस्था की ओर से सर्टिफिकेट जारी करना वैवाहिक स्थिति की पुष्टि नहीं करेगा। अदालत ने वैदिक जनकल्याण समिति की ओर से जारी सर्टिफिकेट और उत्तर प्रदेश पंजीकरण नियम, 2017 के तहत जारी ‘विवाह प्रमाण पत्र’ को ‘हिंदू विवाह’ के प्रमाण के तौर अमान्य घोषित कर दिया। पीठ ने कहा कि अगर धारा 7 के अनुसार कोई विवाह नहीं हुआ है तो रजिस्टर्ड मैरिज को भी मान्यता नहीं मिलेगी।

ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ क्या बोले कांग्रेस के नेता अधीर रंजन?

हाल ही में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन ने ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ एक बयान दिया है! पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और बहरामपुर लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी पर निशाना साधा है। दरअसल, अधीर रंजन चौधरी का एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें कथित तौर पर वो कहते नजर आ रहे कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बजाय बीजेपी को वोट देना बेहतर है। टीएमसी ने आधिकारिक एक्स हैंडल से कांग्रेस नेता का वीडियो शेयर करते हुए अधीर रंजन को बीजेपी की बी-टीम का सदस्य करार दिया। उन्होंने कहा कि बहरामपुर के लोग इस विश्वासघात का मुंहतोड़ जवाब देंगे। हालांकि, इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सीट कम करना है और टीएमसी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है। बताया जा रहा अधीर रंजन चौधरी का कथित वीडियो एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान का है। इसमें वो कहते दिख रहे कि टीएमसी को वोट देने से अच्छा है कि बीजेपी को वोट दे दो। टीएमसी पहले से ही कांग्रेस नेता चौधरी से खफा है। अब पार्टी ने उनके नए वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें कांग्रेस के साथ सीट बंटवारा न होने के लिए जिम्मेदार ठहराया। यही नहीं उन्हें ‘बंगाल विरोधी’ भी करार दिया। टीएमसी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर कहा कि बंगाल में ‘बीजेपी की आंख और कान’ के रूप में काम करने के बाद, चौधरी अब बंगाल में बीजेपी का प्रचार भी कर रहे हैं।

टीएमसी ने कहा कि अधीर रंजन का वीडियो शेयर करते हुए कहा कि सुनें कैसे बीजेपी की ‘बी-टीम’ का सदस्य खुलेआम लोगों से भारतीय जनता पार्टी को वोट देने के लिए कह रहा है। बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जिसने बंगाल का वाजिब हक देने से इनकार कर दिया और हमारे लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया। एक बंगाल-विरोधी ही उस बीजेपी के लिए प्रचार कर सकता है, जिसने बार-बार बंगाल के प्रतीकों का अपमान किया है। ममता की पार्टी ने आगे कहा कि 13 मई को बहरामपुर की जनता इस धोखे का करारा जवाब देगी।

टीएमसी के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने भी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बंगाल इकाई प्रमुख चौधरी ने अपनी रैली में सार्वजनिक तौर पर लोगों से टीएमसी के बजाय भाजपा को वोट देने के लिए कहा। जहां एक ओर ममता बनर्जी पीएम मोदी और केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ रही हैं, वहीं बंगाल कांग्रेस खुलेआम बीजेपी के लिए वोट मांग रही है। गोखले ने कहा कि बंगाल में टीएमसी ‘INDI’ गठबंधन की तरफ से बीजेपी से मुकाबला कर रही है। इस बीच, कांग्रेस और सीपीएम ने पीएम मोदी का वफादार सिपाही बनना पसंद किया है। यह घृणित है और बेशर्मी से परे है।

इस सियासी घमासान के बीच जयराम रमेश ने रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एकमात्र लक्ष्य पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सीटों की संख्या कम करना है। मुझे नहीं पता कि अधीर रंजन ने क्या कहा, लेकिन हमारा उद्देश्य पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सीटों को काफी कम करना है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 18 सीटें जीतीं, बता दे कि कांग्रेस नेता का वीडियो शेयर करते हुए अधीर रंजन को बीजेपी की बी-टीम का सदस्य करार दिया। उन्होंने कहा कि बहरामपुर के लोग इस विश्वासघात का मुंहतोड़ जवाब देंगे। हालांकि, इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सीट कम करना है और टीएमसी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है। बताया जा रहा अधीर रंजन चौधरी का कथित वीडियो एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान का है। इसमें वो कहते दिख रहे कि टीएमसी को वोट देने से अच्छा है कि बीजेपी को वोट दे दो। हमें उनकी सीट की संख्या कम करनी है और यही एकमात्र लक्ष्य है। ये विधानसभा चुनाव नहीं, ये लोकसभा चुनाव है। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस, वाम दलों के साथ, ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है, टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने भी कहा है कि वे ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं। हालांकि हमारा सीट बंटवारा नहीं हो सका। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीट हैं।

क्या कांग्रेस बना रही है पीएम मोदी को हराने की रणनीति ?

वर्तमान में कांग्रेस पीएम मोदी को हराने की रणनीति बना रही है! लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में यौन उत्पीड़न केस ने हलचल मचा दी है। जेडीएस से जुड़ा होने के बावजूद इस मामले की आंच बीजेपी तक सीधे पहुंच रही है। कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर से गठबंधन होने की वजह से कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ ही सीधे-सीधे पीएम पर हमला शुरू कर दिया है। कर्नाटक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने महिला सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी पर सीधा सवाल उठा दिया। इसके साथ ही कैसरगंज से कर्नाटक, उन्नाव से उत्तराखंड को लेकर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का मामला उठाया। कांग्रेस ने सीधे तौर पर महिला सुरक्षा को लेकर बीजेपी को घेरने की रणनीति बना ली है। राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक में महिलाओं के साथ हुए वीभत्स अपराध पर भी नरेंद्र मोदी ने हमेशा की तरह शर्मनाक चुप्पी साध ली है। प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा: मणिपुर में, एक जवान की पत्नी को निर्वस्त्र कर घुमाया गया। वीडियो सभी ने देखा। प्रियंका ने सवाल उठाया कि मोदी जी, अमित शाह ने भी देखा होगा. तो वे चुप क्यों थे? अपने संबोधन के दौरान, वह महिला मतदाताओं तक भी पहुंचीं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने ‘महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया है।सब कुछ जान कर भी सिर्फ वोटों के लिए उन्होंने सैकड़ों बेटियों का शोषण करने वाले हैवान का प्रचार क्यों किया? आखिर इतना बड़ा अपराधी बड़ी सहूलियत के साथ देश से फरार कैसे हो गया? राहुल गांधी ने लिखा कि कैसरगंज से कर्नाटक और उन्नाव से उत्तराखंड तक, बेटियों के गुनहगारों को प्रधानमंत्री का मूक समर्थन देश भर में अपराधियों के हौसले बुलंद कर रहा है। क्या मोदी के ‘राजनीतिक परिवार’ का हिस्सा होना अपराधियों के लिए ‘सुरक्षा की गारंटी’ है?

असम में बोलते हुए, प्रियंका ने कहा कि ये लोग (बीजेपी नेता) महिला सुरक्षा की बात करते हैं। आपने देखा होगा कि कर्नाटक में क्या हो रहा है। उनकी पार्टी से जुड़े लोगों ने ऐसे अपराध किए हैं (भाजपा और जद(एस) कर्नाटक में लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन में हैं)। हजारों वीडियो सामने आ चुके हैं हम क्या पाते हैं? प्रियंका गांधी ने कहा कि मोदीजी ने उन अपराधों को अंजाम देने वाले व्यक्ति के लिए प्रचार किया था। अपराधी देश छोड़कर भाग गया और किसी ने उसे नहीं रोका। न तो मोदी जी ने और न ही अमित शाह ने उन्हें रोका. उन्होंने उसे भागने दिया। जहां भी महिलाओं के खिलाफ अपराध हुए, चाहे वह यूपी का हाथरस हो या उन्नाव, मोदीजी चुप थे। इसके बजाय उन्होंने अपराधियों को बचाने की कोशिश की… मणिपुर में, एक जवान की पत्नी को निर्वस्त्र कर घुमाया गया। वीडियो सभी ने देखा। प्रियंका ने सवाल उठाया कि मोदी जी, अमित शाह ने भी देखा होगा. तो वे चुप क्यों थे? अपने संबोधन के दौरान, वह महिला मतदाताओं तक भी पहुंचीं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने ‘महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया है।

प्रियंका ने कहा कि जो सबसे अधिक बोझ उठाती हैं वे महिलाएं हैं। वे काम पर जाती हैं, वे खेतों में जाती हैं और वे नौकरियों पर जाती हैं। फिर वे घर आती हैं और बच्चों की देखभाल करते हैं, खाना बनाती हैं, सबकी देखभाल करती हैं… उनके लिए, बीजेपी सरकार कुछ भी नहीं दे रही है। बता दें कि राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक में महिलाओं के साथ हुए वीभत्स अपराध पर भी नरेंद्र मोदी ने हमेशा की तरह शर्मनाक चुप्पी साध ली है। प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा: सब कुछ जान कर भी सिर्फ वोटों के लिए उन्होंने सैकड़ों बेटियों का शोषण करने वाले हैवान का प्रचार क्यों किया? आखिर इतना बड़ा अपराधी बड़ी सहूलियत के साथ देश से फरार कैसे हो गया? राहुल गांधी ने लिखा कि कैसरगंज से कर्नाटक और उन्नाव से उत्तराखंड तक, बेटियों के गुनहगारों को प्रधानमंत्री का मूक समर्थन देश भर में अपराधियों के हौसले बुलंद कर रहा है। उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि आपको 5 किलो राशन मिलता है और इसके साथ 1,200 रुपये (असम सरकार की महिलाओं के लिए ओरुनोडोई वित्तीय सहायता योजना के तहत)। वह (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) आपसे कहते हैं ‘बस चुप रहो’ (अब चुप रहो)। उन्होंने आगे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पूर्व कांग्रेस नेता के खिलाफ बड़े आरोप थे और जब वह भाजपा में शामिल हो गए, वे आरोप गायब हो गए। बीजेपी वाशिंग मशीन को धन्यवाद।

जब एक पिता ने किया कोविशील्ड पर मुकदमा!

हाल ही में एक पिता ने कोविशील्ड पर मुकदमा कर दिया है! ब्रिटिश वैक्सीन निर्माता एस्ट्राजेनेका ने यूके की हाई कोर्ट में माना कि उसकी कोविड वैक्सीन से खून जमने का खतरा हो सकता है। एस्ट्राजेनेका की इस स्वीकारोक्ति का साइड इफेक्ट भारत में उसकी सहयोगी कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) को झेलना पड़ सकता है। अदार पूनावाला की कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ने एस्ट्राजेनेका की मदद से भारत में कोविशिल्ड वैक्सीन का उत्पादन किया था। कथित तौर पर वही कोविशील्ड लगाने से दो लड़कियों की मौत हो गई थी। अब उनके पिता का कहना है कि चूंकि एस्ट्राजेनेका ने मान लिया है कि उसकी वैक्सीन जानलेवा हो सकती है, इसलिए इसका उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट के खिलाफ मुकदमा करेंगे। बता दें कि इसका पर्यूप्त सबूत नहीं है।हालांकि, दवा कंपनी के खिलाफ मुकदमों पर मुकदमें हो रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि उसके कोविड-19 टीके के कारण मौतें और गंभीर नुकसान हुआ है। टीटीएस थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) एक गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया है जिसके कारण खून का थक्का बनता है और ब्लड प्लेटलेट का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्राजेनेका ने कानूनी दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि उसके कोविड-19 टीके में टीटीएस को प्रेरित करने की क्षमता है। ऋतिका श्री ऑम्ट्री और करुण्या नाम की लड़कियों की कोविड महामारी के दौरान मौत हो गई। दोनों ने कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई थी। 18 साल की ऋतिका ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2021 में कोविड महामारी के समय आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रही थीं। मई में उन्हें कोविशील्ड की पहली खुराक दी गई थी। लड़कियों की मौत हो गई थी। अब उनके पिता का कहना है कि चूंकि एस्ट्राजेनेका ने मान लिया है कि उसकी वैक्सीन जानलेवा हो सकती है, इसलिए इसका उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट के खिलाफ मुकदमा करेंगे। ऋतिका श्री ऑम्ट्री और करुण्या नाम की लड़कियों की कोविड महामारी के दौरान मौत हो गई।हालांकि, एक हफ्ते बाद ही ऋतिका को तेज बुखार आया, उल्टी होने लगी। हालत इतनी खराब हो गई कि वो चल-फिर भी नहीं पाती थी। एमआरआई स्कैन से पता चला कि उसके मस्तिष्क में रक्त के कई थक्के जमे थे और खून का रिसाव हो रहा था। दो हफ्तों के भीतर ऋतिका की दुखद मौत हो गई।

ऋतिका के माता-पिता उसकी मौत के सही कारण से अनजान थे। दिसंबर 2021 में एक आरटीआई के माध्यम से उसके परिवार को पता चला कि रितिका को टीटीटी (थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) हुआ था और ‘वैक्सीन रिएक्शन’ के कारण उसकी मृत्यु हुई थी। इसी तरह, वेणुगोपाल गोविंदन की बेटी करुण्या की भी जुलाई 2021 में कोविड टीका लगवाने के एक महीने बाद मृत्यु हो गई। तब वैक्सीन पर राष्ट्रीय समिति ने यह कहते हुए वैक्सीन से मौत की आशंका को खारिज कर दिया था कि इसका पर्यूप्त सबूत नहीं है।हालांकि, दवा कंपनी के खिलाफ मुकदमों पर मुकदमें हो रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि उसके कोविड-19 टीके के कारण मौतें और गंभीर नुकसान हुआ है। टीटीएस थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) एक गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया है जिसके कारण खून का थक्का बनता है और ब्लड प्लेटलेट का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्राजेनेका ने कानूनी दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि उसके कोविड-19 टीके में टीटीएस को प्रेरित करने की क्षमता है।

सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन अब यूके में नहीं दी जा रही है। हालांकि स्वतंत्र अध्ययनों ने महामारी से लड़ने में इसकी प्रभावशीलता को साबित कर दिया है, पूनावाला की कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ने एस्ट्राजेनेका की मदद से भारत में कोविशिल्ड वैक्सीन का उत्पादन किया था। कथित तौर पर वही कोविशील्ड लगाने से दो लड़कियों की मौत हो गई थी। अब उनके पिता का कहना है कि चूंकि एस्ट्राजेनेका ने मान लिया है कि उसकी वैक्सीन जानलेवा हो सकती है, इसलिए इसका उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट के खिलाफ मुकदमा करेंगे। ऋतिका श्री ऑम्ट्री और करुण्या नाम की लड़कियों की कोविड महामारी के दौरान मौत हो गई। दोनों ने कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई थी।टीटीएस थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) एक गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया है जिसके कारण खून का थक्का बनता है और ब्लड प्लेटलेट का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्राजेनेका ने कानूनी दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि उसके कोविड-19 टीके में टीटीएस को प्रेरित करने की क्षमता है।लेकिन असामान्य दुष्प्रभावों के सामने आने के कारण नियामक जांच और कानूनी उपाय किए गए हैं। कानूनी कार्यवाही जारी है क्योंकि वैक्सीन से प्रभावित व्यक्ति और उनके परिवार उचित मुआवजा और वैक्सीन से होने वाली समस्याओं को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।

आखिर इस्लाम धर्म को क्यों छोड़ रहे हैं लोग?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि लोग वर्तमान में इस्लाम धर्म को क्यों छोड़ रहे हैं! जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसका शरीर एक धर्म के साथ पैदा होता है। बच्चे को ये धर्म के नाम का ठप्पा अपना माता पिता से मिलता है। ऐसे में ये कह सकते हैं कि धर्म या मजहब को हम नहीं चुनते हैं वो जन्म के बाद ही हमारे साथ परछाई की तरह साथ रहता है। हालांकि जब बच्चा बड़ा होता है तो उसे पता चलता है कि उसके अलावा और भी धर्म हैं और वो उनके रीति रिवाज कानूनों को देखता है। ऐसे में कई बार लोगों को अपने धर्म से ज्यादा दूसरों का धर्म पसंद आता है और वो अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाने की सोचते हैं लेकिन अपनी धार्मिक पहचान छोड़ना इतना भी आसान नहीं है। हालांकि दुनियाभर इस वक्त इस्लाम को मानने वाले लोग ऐसा कर गुजर रहे हैं। दरअसल इन दिनों भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के अलावा कई मुस्लिम बहुल देशों में भी एक आंदोलन जोर पकड़ रहा है जिसमें वहां के मुस्किम लोग अपना धर्म छोड़ रहे हैं। भारत हो या अन्य देशों में इस वक्त एक मुहिम चल रही है। जिसे एक्स मुस्लिम मूवमेंट का नाम दिया गया है। इस मूवमेंट में मुस्लिम लोग इस्लाम धर्म छोड़ रहे हैं। उन लोगों का कहना है कि इस्लाम में कुछ चीजें ठीक नहीं हैं ऐसे में हम उस मजहब का पालन नहीं कर सकते हैं। हाल ही में केरल की एक महिला सफिया पीएम ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका डाली है। जिसमें उन्होंने कहा कि वो अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी शरिया कानून से नहीं बल्कि भारतीय उत्तराधिकारी कानून के तहत चाहती हैं। सफिया एक्स मुस्लिम ऑफ केरल संगठन की जनरल सेक्रेटरी हैं सफिया ने कहा कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस्लाम तो नहीं छोड़ा है लेकिन वो इस्लाम को नहीं मानती हैं।

बता दें कि केरल की सफिया पीएम ही नहीं कई अन्य लोग भी हैं जिनका इस्लाम से मोहभंग हो गया है। इस्लाम धर्म को छोड़ने वाली केरल की नूरजहां ने टाइम्स ऑफ इंडिया से इस मामले में बात करते हुए बताया कि उन्होंने इस्लाम क्यों छोड़ा? नूरजहां ने कहा कि उनके इस्लाम छोड़ने की एक नहीं कई वजहें हैं जैसे हिजाब पहनने की मजबूरी, महिलाओं से भेदभाव और मजहब के नाम पर कट्टरता। इन सभी चीजों ने उनके अंदर से इस्लाम को खत्म कर दिया जिसके बाद वो नास्तिकता की तरफ बढ़ गईं। नूरजहां का कहना है कि इस्लाम धर्म में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। उन्हें दोयम दर्जे का माना जाता है।

2018 में प्रकाशित प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में रहने वाले 23 प्रतिशत वयस्क जो मुस्लिम परिवार में बड़े हुए, अब अपनी पहचान मुसलमान के रूप में नहीं बताते हैं। इस्लाम छोड़ने वालों में 7 फीसदी लोगों ने बताया कि वे इसकी शिक्षाओं से सहमत नहीं थे। एंग्लिकन इंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 55 प्रतिशत पूर्व-मुसलमान नास्तिक बन जाते हैं, लगभग 25 प्रतिशत ईसाई बन जाते हैं जबकि अन्य 10 प्रतिशत के बारे में पता नहीं चलता है।बीबीसी ने 2015 में अपनी पड़ताल में पाया था कि ब्रिटेन में इस्लाम छोड़ने वालों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।बता दें कि कई बार लोगों को अपने धर्म से ज्यादा दूसरों का धर्म पसंद आता है और वो अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाने की सोचते हैं लेकिन अपनी धार्मिक पहचान छोड़ना इतना भी आसान नहीं है। हालांकि दुनियाभर इस वक्त इस्लाम को मानने वाले लोग ऐसा कर गुजर रहे हैं। दरअसल इन दिनों भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के अलावा कई मुस्लिम बहुल देशों में भी एक आंदोलन जोर पकड़ रहा है जिसमें वहां के मुस्किम लोग अपना धर्म छोड़ रहे हैं। भारत हो या अन्य देशों में इस वक्त एक मुहिम चल रही है। जिसे एक्स मुस्लिम मूवमेंट का नाम दिया गया है। इस मूवमेंट में मुस्लिम लोग इस्लाम धर्म छोड़ रहे हैं। इसमें सिर्फ समाज ही नहीं बल्कि अपने ही परिवार के लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे में इन पूर्व मुस्लिमों का खुलकर सामने आना ऐसे लोगों को हिम्मत देता है। यूरोप के सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश फ्रांस में 15000, जबकि अमेरिका में एक लाख मुसलमान हर साल धर्म छोड़ देते हैं।

आखिर कैसे भाव रखता है पीएम मोदी और शरद पवार के बीच का रिश्ता?

आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी और शरद पवार के बीच का रिश्ता आखिर कैसा भाव रखता है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी नेता शरद पवार दोनों ही एक दूसरे पर कभी भी तीखे वार करने से पीछे नहीं हटते हैं। हाल ही में एक रैली को संबोधित करते हुए बिना नाम लिए पीएम मोदी ने शरद पवार पर निशाना साधा। उन्होंने शरद पवार को भटकती आत्मा कहा। पीएम मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र ने लंबे समय तक अस्थिरता का दौर देखा है। आज मैं कुछ बोलने जा रहा हूं, लेकिन कोई अपने सिर पर टोपी ना ले लेना। हमारे यहां कहते हैं कि कुछ भटकती आत्माएं होती हैं, जिनकी इच्छाएं पूरी नहीं होती हैं और जिनके सपने पूरे नहीं होते हैं, वो आत्माएं भटकती रहती हैं। ऐसी आत्मा को खुद का काम नहीं हुआ तो दूसरों का काम बिगाड़ने में मजा आता है। हमारा महाराष्ट्र भी ऐसी भटकती आत्माओं का शिकार हो चुका है। आज से 45 साल पहले यहां के एक बड़े नेता ने अपनी महत्वाकांक्षा के लिए खेल की शुरुआत की थी, तब से महाराष्ट्र एक अस्थिरता के दौर में चला गया और कई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। पीएम मोदी ने बिना नाम लिए शरद पवार को बहुत दूर की बातें कह गए। जिसपर शरद पवार ने पलटवार करते हुए कहा कि मोदी पहले कहा करते थे कि वह हमारी उंगली पकड़कर राजनीति में आए हैं लेकिन आजकल वह मझे भटकती आत्मा कह रहे हैं। वह मुझ पर काफी गुस्सा है। ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी और शरद पवार शुरू से ही एक दूसरे पर तंज कसते आ रहे हैं।एक वक्त ऐसा था कि पीएम मोदी शरद पवार को अपना गुरु कहा थे लेकिन अब दोनों के रिश्ते काफी बदल गए हैं।लेकिन उसके बाद जब साल 2019 लोकसभा चुनाव पास आए तो फिर ये मिठास कड़वाहट में बदलती चल गई। पहले दोनों का रिश्ता काफी अच्छा था एक वक्त ऐसा था कि पीएम मोदी शरद पवार को अपना गुरु कहा थे लेकिन अब दोनों के रिश्ते काफी बदल गए हैं।

कई दशकों से एक दूसरे को जानने वाले ये दोनों नेता पहले एक दूसरे काफी करीब थे। कई बार एक दूसरे की तारीफ भी करते देखे गए थे। पीएम मोदी ने साल 2015 में पुणे जिले के बारामती में कृषि विज्ञान केंद्र का उद्घाटन करने के बाद शरद पवार के घर पहुंच गए थे। वहां पर उन्होंने उनके परिवार के साथ खाना भी खाय था। इतना ही नहीं नोटबंदी के बाद पीएम मोदी एक कार्यक्रम में शरद पवार को अपना राजनीतिक गुरु भी कह दिया था। पीएम मोदी ने पुणे में हुए एक सम्मेलन में कहा था कि शरद पवार के प्रति मेरे मन में व्यक्तिगत सम्मान है। उन्होंने मेरी उंगली पकड़ कर मुझे राजनीति में चलने में मदद की। मुझे सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा करते हुए बहुत ही गर्व हो रहा है।

शरद पवार को राजनीतिक गुरु मानने के दो साल बाद ही भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने शरद पवार को पद्म विभूषण से सम्मानित किया। यहां तक तो दोनों के रिश्ते में शब्दों की मिठास बराबर आ रही थी लेकिन आजकल वह मझे भटकती आत्मा कह रहे हैं। वह मुझ पर काफी गुस्सा है। ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी और शरद पवार शुरू से ही एक दूसरे पर तंज कसते आ रहे हैं। पहले दोनों का रिश्ता काफी अच्छा था एक वक्त ऐसा था कि पीएम मोदी शरद पवार को अपना गुरु कहा थे लेकिन अब दोनों के रिश्ते काफी बदल गए हैं।लेकिन उसके बाद जब साल 2019 लोकसभा चुनाव पास आए तो फिर ये मिठास कड़वाहट में बदलती चल गई।

पद्म विभूषण से सम्मानित होने के के एक साल बाद ही शरद पवार के तेवर बदल गए और उन्होंने आम चुनाव पास आते ही पीएम मोदी पर तंज कसना शुरू कर दिया। साल 2018 में पुणे में एनसीपी के अधिवेशन में नरेंद्र मोदी को बातूनी पीएम कहते हुए देश में दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं की बदतर स्थिति पर चुप्पी तोड़ने को कहा। शरद पवार के इन तीखे हमलों के बाद पीएम मोदी ने एनसीपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा चुनाव 2019 प्रचार के दौरान उन्होंने बारामती में लोगों से बंधनों को तोड़ने के लिए कहा और शरद पवार के शासन को खत्म करने का आह्वान किया। उसके बाद पीएम मोदी ने एनसीपी को राष्ट्रवादी नहीं ‘भष्ट्रवादी’ पार्टी करार दिया। उसके बाद से आए पवार हो या पीएम मोदी दोनों ही नेता कई बार एक दूसरे पर निशाना साधते हुए तंज कस चुके हैं।

प्रज्वल रेवन्ना की सेक्स स्कैंडल के बारे में क्या बोले कुमारस्वामी?

हाल ही में प्रज्वल रेवन्ना के सेक्स स्कैंडल के बारे में कुमारस्वामी ने एक बयान दिया है! कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट से एनडीए उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना के अश्लील वीडियो मामले में राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इसी बीच प्रज्वल रेवन्ना के विदेश भाग जाने की जानकारी मिली है। इन सभी घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि जिन्होंने गलत किया है उन्हें सजा मिलनी चाहिए। कुमारस्वामी ने कहा कि वह कथित सेक्स स्कैंडल में अपने भतीजे और हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना की संलिप्तता के बारे में जांच में तथ्य सामने आने का इंतजार करेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि जिसने भी अपराध किया है, उसे माफ करने का सवाल ही नहीं उठता। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रज्वल रेवन्ना के कथित तौर पर देश छोड़ने से उनका कोई लेना-देना नहीं है और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लाना विशेष जांच दल (एसआईटी) की जिम्मेदारी है। प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री और जद (एस) के संरक्षक एचडी देवेगौड़ा के बड़े बेटे एचडी रेवन्ना की संतान हैं। एचडी रेवन्ना भी विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं। प्रज्वल रेवन्ना की संलिप्तता वाले कुछ कथित वीडियो हाल के दिनों में हासन जिले में वायरल हो रहे हैं। प्रज्वल हासन से बीजेपी-जद(एस) गठबंधन के उम्मीदवार हैं। इस सीट पर मतदान 26 अप्रैल को संपन्न हो चुका है। कुमारस्वामी ने कहा कि मुझे पता चला है कि मुख्यमंत्री ने एसआईटी जांच का आदेश दिया है। चाहे मैं हों या देवेगौड़ा (उनके पिता), हमने हमेशा महिलाओं के प्रति सम्मानपूर्वक व्यवहार किया है और जब भी कोई अपनी पीड़ा लेकर आया तो हमने समस्या को हल करने का प्रयास किया है।

बेंगलुरु में संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि हासन मुद्दे में जांच के बाद तथ्य सामने आने दीजिए। चाहे कोई भी हो, जिसने भी कानून की नजर में गलत किया है, उसे माफ करने का कोई सवाल ही नहीं है। इसलिए जांच से तथ्य सामने आने दीजिए, उसके बाद मैं प्रतिक्रिया दूंगा। प्रज्वल रेवन्ना के विदेश जाने के सवाल पर कुमारस्वामी ने कहा कि इसका मेरे से संबंध नहीं है। एसआईटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों को काम पर लगा दिया गया है। अगर वह विदेश चले गये हैं तो उन्हें वापस लाना एसआईटी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कथित सेक्स स्कैंडल में सांसद की संलिप्तता की जांच को लेकर एसआईटी गठित करने की घोषणा की है।उन्होंने कहा कि जिसने भी अपराध किया है, उसे माफ करने का सवाल ही नहीं उठता। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रज्वल रेवन्ना के कथित तौर पर देश छोड़ने से उनका कोई लेना-देना नहीं है और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लाना विशेष जांच दल (एसआईटी) की जिम्मेदारी है। प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री और जद (एस) के संरक्षक एचडी देवेगौड़ा के बड़े बेटे एचडी रेवन्ना की संतान हैं। एचडी रेवन्ना भी विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं। इस बीच मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक पुलिस इस बात से अवगत है कि प्रज्वल देश छोड़ चुके हैं। बयान में कहा गया है कि प्रज्वल रेवन्ना के वीडियो हासन में वायरल किए जा रहे हैं। और प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया गया।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की तीन सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) बिजय कुमार सिंह करेंगे। अन्य दो सदस्य, सहायक पुलिस महानिरीक्षक सुमन डी. पेनेकर और मैसुरु की पुलिस अधीक्षक सीमा लाटकर हैं। एसआईटी को शीघ्र अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

बयान में कहा गया कि सरकार ने कर्नाटक राज्य महिला आयोग की प्रमुख के अनुरोध पर एक एसआईटी गठित करने का फैसला किया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने गुरुवार को सिद्धरमैया और राज्य पुलिस प्रमुख आलोक मोहन को पत्र लिखकर हासन में वायरल हो रहे वीडियो की जांच की मांग की। इसलिए जांच से तथ्य सामने आने दीजिए, उसके बाद मैं प्रतिक्रिया दूंगा। प्रज्वल रेवन्ना के विदेश जाने के सवाल पर कुमारस्वामी ने कहा कि इसका मेरे से संबंध नहीं है। एसआईटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों को काम पर लगा दिया गया है। अगर वह विदेश चले गये हैं तो उन्हें वापस लाना एसआईटी की जिम्मेदारी है।प्रज्वल ने अपने चुनाव एजेंट के माध्यम से अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई है कि वीडियो से फर्जी है और चुनाव से पहले उनकी छवि खराब करने के लिए इसे प्रसारित किया जा रहा है।

क्या अब बीजेपी पर भारी पड़ेगा प्रज्वल रेवन्ना का सेक्स स्कैंडल?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रज्वल रेवन्ना का सेक्स स्कैंडल बीजेपी पर भारी पड़ेगा या नहीं! देश में इस बार सात चरणों में लोकसभा चुनाव पूरे होने हैं। जिसमें से दो चरणों के लिए वोटिंग हो गई है। इसी बीच कर्नाटक में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जनता दल एस के एक उम्मीदवार और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना कथित सेक्स स्कैंडल की वजह से विवादों में आ गए हैं। प्रज्वल रेवन्ना इस लोकसभा चुनाव में जिस हासन सीट से खड़े हुए हैं उस पर दूसरे चरण में वोटिंग हो गई है लेकिन सेक्स स्कैंडल में नाम सामने आने के बाद से ही जनता दल एस पार्टी पर सवाल उठने लगे हैं। जिसका नुकसान जनता दल (सेक्युलर) को तीसरे चरण में भुगतना पड़ सकता है। कर्नाटक में दो चरणों में लोकसभा चुनाव होने हैं। कर्नाटक की 14 लोकसभा सीटों पर 26 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। जबकि बची हुई सीटों पर 7 मई को वोटिंग होगी। लोकसभा हसन सीट से सांसद प्रज्वल रेवन्ना का नाम सामने आने के बाद से पार्टी पर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। विपक्षी नेता भी लगातार पार्टी और केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इस सेक्स स्कैंडल विवादपर बढ़ते हंगामे को देखते हुए जेडीएस ने आनन- फानन में कोर कमिटी की बैठक की और प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया।

प्रज्वल रेवन्ना को लोकसभा सीट में टिकट देना अब बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीएस के लिए सिरदर्द बन गया है। जब से प्रज्वल रेवन्ना का सेक्स स्कैंडल सामने आया है। विपक्ष जेडीएस के साथ ही बीजेपी को भी निशाने पर ले रहा है। जिसके बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में बीजेपी के रुख को एकदम साफ कर दिया है। अमित शाह ने आज कहा कि बीजेपी का रुख स्पष्ट है कि हम देश की ‘मातृ शक्ति’ के साथ खड़े हैं, देश की नारी शक्ति के साथ हैं। नरेंद्र मोदी जी का देश को एक कमिटमेंट है कि कहीं भी मातृ शक्ति के अपमान को सहन नहीं किया जा सकता।

अमित शाह ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी हम पर आरोप लगाना चाहती है, मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि वहां किसकी सरकार है? सरकार कांग्रेस पार्टी की है। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? हमें इस पर कार्रवाई नहीं करनी है क्योंकि यह राज्य की कानून व्यवस्था का मामला है, राज्य सरकार को इस पर कार्रवाई करनी है। प्रियंका गांधी हमसे सवाल पूछ रही हैं, नरेंद्र मोदी या मुझसे सवाल करने की जगह अपने मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री से सवाल करिए।

देवराज गौड़ा ने जद (एस) पर आरोप लगाया कि उन्हें प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल की खुफिया रिपोर्ट पहले से ही थी उसके बावजूद प्रज्वल रेवन्ना के लोकसभा में उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मैंने वीडियो के बारे में हमारे अध्यक्ष को एक पत्र लिखा और कार्यालय को दिया, लेकिन जैसा कि उन्होंने कहा, पत्र उन तक भी नहीं पहुंचा था। मैंने पत्र में लिखा था कि जद (एस) के साथ गठबंधन करने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन उन पर (प्रज्वल रेवन्ना) यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं। उन्होंने आगे बताया कि प्रज्वल रेवन्ना का ड्राइवर कार्तिक मेरे पास आया और कहा कि उसे परेशान किया जा रहा है। उसने (कार्तिक ने) कहा कि उसके (प्रज्वल रेवन्ना) पास कई अश्लील वीडियो हैं। मैंने ड्राइवर से पूछा कि क्या उसने यह वीडियो किसी को दिया है। कार्तिक ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को अश्लील वीडियो दिए थे।लयह सोचकर कि यह पेन ड्राइव समस्या पैदा करेगी, मैंने पार्टी को पत्र लिखा -यह संवादहीनता है और उन्हें टिकट मिल गया। इसके साथ ही, यह भाजपा की गलती नहीं थी क्योंकि खुफिया रिपोर्ट होने के बावजूद जद (एस) ने उन्हें टिकट दिया।

जेडीएस ने पार्टी की छवि धूमिल होता देखकर प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निलंबित कर दिया है। ऐसे में अगर प्रज्वल रेवन्ना लोकसभा चुनाव जीत गए तो पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद भी वो लोकसभा सदस्य बने रहेंगे। अगर वो चुनाव हार जाते हैं तो उनका राजनीतिक करियर पर काफी असर पड़ेगा। बता दें कि सेक्स स्कैंडल मामले में पुलिस ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अगर पीड़ित महिला रेप की शिकायत करती है तो प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। बता दें कि अभी जर्मनी भाग गए हैं।

क्या अब भीषण गर्मी के बीच राहत देगी बरसात?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब भीषण गर्मी के बीच बरसात राहत देगी या नहीं! आज से मई की शुरुआत है और देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दिल्ली एनसीआर में सूरज की पहली किरण के साथ जो गर्मी पड़नी शुरू होती है दोपहर तक धरती तपने लग जाती है। हाल ऐसा है कि अगर कुछ देर के लिए बाहर किसी काम से बाहर निकले तो वापस आते- आते शर्ट पसीने से भीग जाती है लेकिन इस चिलचिलाती गर्मी के बीच मौसम विभाग गुड न्यूज लेकर आ गया है। दरअसल मौसम विभाग की मानें तो मई का पहला सप्ताह दिल्ली एनसीआर के लोगों के लिए राहतभरा रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में आज से तीन मई तक अधिकतम तापमान 38 डिग्री के आसपास रहेगा। आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। इसके साथ तेज हवा भी चलने का अनुमान है। डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इसके साथ ही लोगों को बाहर कम निकलने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने ठाणे, मुंबई और रायगढ़ में कुछ जगहों पर आने वाले कुछ दिनों में लू चलने की संभावना जताई है।जिसके कारण मई का पहला सप्ताह दिल्ली के लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत तो देकर ही जाएगा।

दिल्लीवासियों की तरह मई का पहला सप्ताह भी कूल- कूल गुजरने वाला है। IMD के अनुसार एक से तीन मई तक आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे। वहीं चार मई को ये बादल काले और घने हो जाएंगे और रात होते- होते बारिश में बदल जाएंगे। वहीं 5 और 6 मई को भी दिल्ली का मौसम हल्का ठंडा बना रहेगा। न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

भीषण गर्मी से तप रहे उत्तर प्रदेश के लोगों पर भी आने वाले दिनों में इंद्रदेव थोड़े मेहरबान होते दिख रहे हैं। हालांकि अभी पूरा यूपी भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। सूर्यदेव के तेवर के आगे तो दिन में लोग घरों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मंगलवार को कुशीनगर, गाजीपुर और वाराणसी में दिन का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया किया। हालांकि लू की मार झेल रहे यूपी वालों के लिए भी IMD ने राहत भरी भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग के अनुसार मई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। पांच और छह मई को राज्य के कुछ जिलों में गरज और चमक के साथ बारिश पड़ने की संभावना है। बारिश होने के कारण उत्तर प्रदेश के लोगों को भी लू से राहत मिलेगी।

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में दिन के साथ ही रात में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। आलम ये है कि 24 घंटे पंखा चलाना पड़ रहा है लेकिन उससे भी गर्मी से कुछ खास राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र को अभी लू से कोई राहत नहीं मिलने वाली है। IMD ने मराठवाड़ा, मुंबई , रायगढ़, ठाणे और कोंकण गोवा के लिए हीटवेव का अलर्ट जारी कर दिया है।वहीं चार मई को ये बादल काले और घने हो जाएंगे और रात होते- होते बारिश में बदल जाएंगे। वहीं 5 और 6 मई को भी दिल्ली का मौसम हल्का ठंडा बना रहेगा। न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इसके साथ ही लोगों को बाहर कम निकलने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने ठाणे, मुंबई और रायगढ़ में कुछ जगहों पर आने वाले कुछ दिनों में लू चलने की संभावना जताई है।

बता दे कि दो दिन की भीषण गर्मी के बाद बुधवार को मुंबई में हल्के बादल छाए रहे। नतीजतन मुंबई का अधिकतम तापमान सांताक्रूज़ में 34.7 डिग्री और कोलाबा में 34 डिग्री दर्ज किया गया। सांताक्रूज में 24 घंटे में अधिकतम तापमान पांच डिग्री तक गिर गया। कोलाबा में भी अधिकतम तापमान 1.2 डिग्री तक गिर गया। हालांकि बादल छाए रहने और नमी बढ़ने के कारण न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है। बुधवार को सांताक्रूज़ का न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस और कोलाबा का 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सांताक्रूज़ में न्यूनतम तापमान औसत से 3.8 डिग्री अधिक था। मुंबईकरों को बुधवार को उमस के कारण पसीने से भी परेशानी हुई, लेकिन गर्म मौसम की तुलना में यह सहनीय था। कई मुंबईकरों ने बुधवार को बताया। इससे पहले 2019 में सांताक्रूज में न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसलिए, बुधवार का तापमान भी पिछले 10 सालों में अप्रैल में सबसे अधिक न्यूनतम तापमान के रूप में दर्ज किया गया।