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पीएम मोदी ने हिंदू समाज को क्या सीख दी?

हाल ही में पीएम मोदी ने हिंदू समाज को एक सीख दे दी है! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार लोकसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने उनकी सरकार की भारत सर्वप्रथम और तुष्टीकरण नहीं, संतुष्टीकरण की नीति को अपना समर्थन दिया और लगातार झूठ फैलाने के बावजूद विपक्ष की घोर पराजय हुई। उन्होंने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि उनकी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि देश निराशा से बाहर निकला। इस दौरान पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये कहा गया कि हिंदू हिंसक होते हैं। उन्होंने कहा कि आज हिंदुओं पर झूठा आरोप लगाने की साजिश हो रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से सोमवार दिए गए भाषण की आलोचना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये वो लोग हैं जिन्होंने हिंदू आतंकवाद का शब्द गढ़ने की कोशिश की थी। इनके साथी ने हिंदू धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया जैसे शब्दों से की। ये देश कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि एक सोची-समझी साजिश के तहत इनके और इनके पूरे इकोसिस्टम ने हिंदू परंपरा को नीचा दिखाने और मजाक उड़ाने को फैशन बना दिया है।

पीएम मोदी ने कहा कि निजी राजनीतिक स्वार्थ के लिए ईश्वर के रूपों का इस तरह से खेल, ये देश कैसे माफ कर सकता है। सदन में कल का दृश्य देखकर अब हिंदू समाज को सोचना पड़ेगा कि क्या ये अपमानजनक बयान कोई संयोग है या बड़े प्रयोग की तैयारी है। मोदी ने कहा कि ये कहा गया कि हिंदू हिंसक होते हैं। ये आपके संस्कार, ये है आपका चरित्र, ये है आपकी सोच, ये है आपकी नफरत। इस देश के हिंदुओं के साथ ये कारनामे। ये देश शताब्दियों तक इसे भूलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे देवी-देवताओं का अपमान 140 करोड़ देशवासियों के हृदय को गहरी चोट पहुंचा रहा है।

मोदी ने कहा कि 2014 से पहले आतंकवादी जहां चाहे आकर हमला करते थे और निर्दोष लोग मारे जाते थे और सरकारें चुप बैठी रहती थीं। उन्होंने कहा,लेकिन 2014 के बाद का हिंदुस्तान घर में घुसकर मारता है। सजिर्कल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक करता है और आतंकवाद के आकाओं को सबक सिखाने का सामर्थ्य हमने दिखा दिया। बता दें कि कांग्रेस के लोग कभी भी भारतीय सेनाओं को ताकतवर होते नहीं देख सकते। उन्होंने यह भी कहा कौन नहीं जानता कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय देश की सेना कितनी कमजोर होती थी। हमारी सेनाओं में कांग्रेस ने लाखों करोड़ों रुपये के घोटाले किए, जिसने देश की सेना को कमजोर किया। जब से देश आजाद हुआ तब से कांग्रेस ने जल, थल और वायु में भ्रष्टाचार की परम्परा बनाई। जीप घोटाले से लेकर पनडुब्बी और बोफोर्स घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि इन घोटालों ने देश की ताकत बढ़ने से रोकी।यही नहीं प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाया। पीएम मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने झूठ की राजनीति को अपना हथियार बना लिया। इन लोगों ने माताओं और बहनों से झूठ बोला। इतना ही नहीं इन्होंने 1 जुलाई को भी सदन में अग्निवीर योजना से लेकर एमएसपी पर झूठे दावे किए। जिसे पूरे देश ने कल प्रत्यक्ष रूप में देखा है।

उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि वोट बैंक को राजनीति का हथियार बनाने वालों ने जम्मू कश्मीर के लोगों के अधिकार छीन लिए थे इसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस पर एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ने विकसित देश बनने के सपने को चुन लिया है। ऐसे समय ये देश का दुर्भाग्य है कि 6-6 दशक तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी अराजकता फैलाने में जुटी है। ये दक्षिण में जाकर उत्तर के लोगों के खिलाफ बोलते हैं। उत्तर में जाकर पश्चिम के लोगों को खिलाफ जहर उगलते हैं।उसी तरह कांग्रेस के मुंह पर भी झूठ का खून लग गया गया है। कांग्रेस ने देशवासियों को गुमराह किया है इन लोगों ने माताओं-बहनों को हर महीने 8,500 रुपये देने का झूठ बोला। जिसकी वजह से माताओं-बहनों के दिल को जो चोट लगी है, वह कांग्रेस को तबाह करने वाली है। महापुरुषों के खिलाफ बोलते हैं।और वहां की सीमा के अंदर संविधान नहीं पहुंचने दिया था।

क्या कांग्रेस पार्टी को नहीं मिल रही है नई ऊर्जा?

वर्तमान में कांग्रेस पार्टी को नई ऊर्जा नहीं मिल पा रही है! किसी भी राजनीतिक दल के उत्तरोत्तर विकास के लिए जरूरी है कि उसमें नई ऊर्जा समय-समय पर आती रहे। युवा और छात्र इकाइयों को राजनीतिक दलों की नर्सरी कहा जाता है। लेकिन देखें तो बीते डेढ़ दशक में कांग्रेस की यह नर्सरी बंजर सी हो गई है। जानकारों की मानें तो दोनों संगठनों के ढांचे में जबसे बदलाव हुए हैं तब से इन दोनों संगठनों से निकलने वाली पौध बेअसर हो गई है। न तो संगठन में अगली पीढ़ी के नेता आ रहे हैं, न ही कांग्रेस के आंदोलनों में वह धार बची है, जिसके लिए युवा जोश की जरूरत होती है। इस लोकसभा चुनाव में यूपी में छह सीटें जीतने के बाद कांग्रेस 2027 के विधान सभा चुनावों को लेकर योजना तैयार कर रही है। हालांकि आंदोलन की राह पकड़कर वह जिस तरह से अपने लिए राजनीतिक जमीन बनाना चाहती है, उसमें सबसे बड़ी कमी युवा जोश की है।अब इस कमिटी में जीते और हारे दोनों प्रतिनिधि होते हैं, लिहाजा चुनाव बाद भी एक भीतरी प्रतिस्पर्धा बनी रहती है, जो कि संगठन के विस्तार में काफी अड़चन पैदा करती है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में बीते काफी समय से चुनाव की प्रक्रिया से कमिटी में पदाधिकारी निर्वाचित होते हैं। मनोनयन की कोई व्यवस्था नहीं है। कांग्रेस के नेता इस मसले पर काफी चिंतित भी दिखते हैं और वे मानते हैं कि यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को दोबारा खड़ा करना बेहद जरूरी है। साथ ही वे मौजूदा सिस्टम और तौर तरीके में कुछ कमियां भी देखते हैं, जिसे बदलने की वकालत करते हैं।

यूथ कांग्रेस का संगठन दो जोनों में जबकि एनएसयूआई का संगठन तीन जोनों में बंटा हुआ है। ऐसे में हर जोन के मसले अलग हैं और उनका एक्सपोजर भी। अब मान लीजिए कि लखनऊ में किसी भी मसले पर विरोध प्रदर्शन किया जाना है तो उसमें मध्य जोन की हिस्सेदारी होगी जबकि बाकी के जोन के लोग उतनी निष्पक्षता से इसमें नहीं जुटते हैं। कांग्रेस का लंबे समय से सत्ता से दूर रहना और छात्र राजनीति को कुंद किया जाना भी एनएसयूआई को विस्तारित करने में बड़ी अड़चन है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, लिहाजा वहां संगठन ज्यादा बेहतर है। वो कहते हैं कि बदलाव होने हैं। सभी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस की मजबूती की तरफ काम कर रहे हैं।ऐसे में संगठन की ताकत जमीन पर कम दिखती है। इसके अलावा किसी भी एक अध्यक्ष के पास इतनी ताकत नहीं होती है कि वह अपना प्रभाव जमीन पर दिखा सके। जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी की प्रभारी बनाई गई थीं तब उनके समय में एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस ने जोनल सिस्टम समाप्त किए जाने की मांग की थी। उस समय बदलाव का आश्वासन तो दिया गया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।

यूथ और एनएसयूआई में चुनाव के मार्फत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होता है। चुनाव में जो जीता वह तो अध्यक्ष बना, लेकिन हारने वाला व्यक्ति उपाध्यक्ष बना रहता है। अब इस कमिटी में जीते और हारे दोनों प्रतिनिधि होते हैं, लिहाजा चुनाव बाद भी एक भीतरी प्रतिस्पर्धा बनी रहती है, जो कि संगठन के विस्तार में काफी अड़चन पैदा करती है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में बीते काफी समय से चुनाव की प्रक्रिया से कमिटी में पदाधिकारी निर्वाचित होते हैं। मनोनयन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर किसी दूसरे दल की छात्र इकाई या यूथ विंग से अच्छे लोगों को लाना बेहद मुश्किल है क्योंकि उन्हें पदाधिकारी नहीं बनाया जा सकता है। इस तरह से छात्र इकाई और यूथ विंग के विस्तार की संभावनाएं भी काफी कम हैं।

यूपी में एनएसयूआई से लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व इनचार्ज रहे प्रणव पांडेय फिलहाल नैशनल सेक्रेटरी हैं और महाराष्ट्र के प्रभारी के तौर पर काम देख रहे हैं। प्रणव कहते हैं कि संगठन में काफी कुछ बदलाव अपेक्षित हैं। यूपी में भी अगले दो-तीन महीने में कुछ बदलाव होंगे। वो कहते हैं कि यूपी में कांग्रेस का लंबे समय से सत्ता से दूर रहना और छात्र राजनीति को कुंद किया जाना भी एनएसयूआई को विस्तारित करने में बड़ी अड़चन है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, लिहाजा वहां संगठन ज्यादा बेहतर है। वो कहते हैं कि बदलाव होने हैं। सभी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस की मजबूती की तरफ काम कर रहे हैं। दो से तीन महीने में काफी बदलाव दिखाई देंगे।

राहुल गांधी द्वारा दिए गए भाषण के बारे में क्या बोले पीएम मोदी?

हाल ही में पीएम मोदी ने राहुल गांधी द्वारा दिए गए भाषण पर अपना तंज कसा है! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर सेना में भर्ती को लेकर सरासर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को सवाल किया कि आखिर किसके फायदे के लिए सेना के बारे में इतना झूठ फैलाया जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि सेना में भर्ती को लेकर कांग्रेस की ओर से सरासर झूठ फैलाया जा रहा है ताकि नौजवान सेना में न जाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को सेना में जाने से रोकने के लिए झूठ फैलाया जा रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि आखिर किसके लिए कांग्रेस हमारी सेनाओं को कमजोर करना चाहती है। किसके फायदे के लिए (कांग्रेस) सेना के बारे में इतना झूठ फैला रही है। पीएम मोदी ने कहा कि उनके कार्यकाल में सेना में व्यापक सुधार किया गया है और सेना का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को युवाओं पर भरोसा होना चाहिए और काल, परिस्थितियों और समय के हिसाब से सरकार लगातार सैन्य बलों में सुधार कर रही है। उन्होंने अग्निपथ योजना के बारे में परोक्ष रूप से कहा हम युद्ध योग्य सेना बना रहे हैं। आज युद्ध की परिस्थितियां, तकनीक और तौर-तरीके बदल रहे हैं, इसलिए हम अपने अनुसार रक्षा सुधार का प्रयास कर रहे है। गालियां खाकर भी हम मुंह पर ताला लगाकर रक्षा क्षेत्र में सुधार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग कभी भी भारतीय सेनाओं को ताकतवर होते नहीं देख सकते। उन्होंने यह भी कहा कौन नहीं जानता कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय देश की सेना कितनी कमजोर होती थी। हमारी सेनाओं में कांग्रेस ने लाखों करोड़ों रुपये के घोटाले किए, जिसने देश की सेना को कमजोर किया। जब से देश आजाद हुआ तब से कांग्रेस ने जल, थल और वायु (सेनाओं) में भ्रष्टाचार की परम्परा बनाई। जीप घोटाले से लेकर पनडुब्बी और बोफोर्स घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि इन घोटालों ने देश की ताकत बढ़ने से रोकी।

प्रधानमंत्री ने एक रैंक, एक पेंशन (ओआरओपी) के मामले में कांग्रेस पर पूर्व सैनिकों की आंख में धूल झोंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ओआरओपी को खत्म किया और दशकों तक कांग्रेस ने इसे लागू नहीं होने दिया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने संसाधन सीमित होने के बावजूद ओआरओपी लागू किया। यही नहीं प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाया। पीएम मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने झूठ की राजनीति को अपना हथियार बना लिया। इन लोगों ने माताओं और बहनों से झूठ बोला। इतना ही नहीं इन्होंने 1 जुलाई को भी सदन में अग्निवीर योजना से लेकर एमएसपी पर झूठे दावे किए। जिसे पूरे देश ने कल प्रत्यक्ष रूप में देखा है।पीएम मोदी ने आज लोकसभा में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जैसे आदमखोर जानवर के मुंह पर खून लग जाता है। उसी तरह कांग्रेस के मुंह पर भी झूठ का खून लग गया गया है। कांग्रेस ने देशवासियों को गुमराह किया है इन लोगों ने माताओं-बहनों को हर महीने 8,500 रुपये देने का झूठ बोला। जिसकी वजह से माताओं-बहनों के दिल को जो चोट लगी है, वह कांग्रेस को तबाह करने वाली है।

इसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस पर एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ने विकसित देश बनने के सपने को चुन लिया है। ऐसे समय ये देश का दुर्भाग्य है कि 6-6 दशक तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी अराजकता फैलाने में जुटी है। ये दक्षिण में जाकर उत्तर के लोगों के खिलाफ बोलते हैं। उत्तर में जाकर पश्चिम के लोगों को खिलाफ जहर उगलते हैं। महापुरुषों के खिलाफ बोलते हैं। इन्होंने भाषा के आधार पर बांटने की हर कोशिश की है।

जिन नेताओं ने देश के हिस्से को भारत से अलग करने की वकालत की थी उनको संसद का टिकट देने का दुर्भाग्य हमें देखना पड़ा जो कांग्रेस पार्टी ने पाप किया है। कांग्रेस पार्टी खुलेआम एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ नैरेटिव गढ़ रही है। देश के एक हिस्से के लोगों को हीन बताने की प्रवृत्ति को कांग्रेस के लोग बढ़ावा दे रहे हैं। कांग्रेस देश में आर्थिक अराजकता फैलाने की दिशा में भी सोची समझी चाल चल रही है।

क्या दिल्ली में कमजोर पड़ चुका है मानसून?

वर्तमान में दिल्ली में मानसून कमजोर पड़ चुका है !मॉनसून तेजी दिखाते हुए तय समय से 6 दिन पहले ही पूरे देश पर छा चुका है। आमतौर पर यह 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर करता है। मंगलवार को राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के बचे हिस्सों को भी इसने भिगो दिया। दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में मंगलवार शाम हुई बारिश ने उमस से लोगों को राहत दी। आज भी बारिश का अलर्ट है। सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश में भी कई जिलों में अच्छी बारिश ने उमस से राहत दी। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश तो अच्छी हो रही है, लेकिन कहीं कहीं यह आफत बनकर भी आई है।  दिल्ली में 2 और 2 जुलाई को अच्छी बारिश का अनुमान लगाया गया था, लेकिन कुछेक जगहों में हल्की बारिश ही हुई। बढ़ी उमस की वजह से राजधानी का वेट बल्ब टेंपरेचर बढ़कर 29 डिग्री पर पहुंच गया है। वेट बल्ब टेंपरेचर नमी के स्तर के साथ शरीर का कंफर्ट लेवल बताता है। 32 डिग्री या इससे अधिक के ऊपर वेट बल्ब टेंपरेचर होने से स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार महसूस करने लगता है। पूर्वानुमान के अनुसार, बुधवार को बादल छाए रहेंगे। मध्यम दर्जे की बारिश होगी। तेज हवाएं चल सकती हैं। इनकी गति 25 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम 28 डिग्री रह सकता है। इसके बाद 4 से 8 जुलाई तक कोई अलर्ट नहीं है। दिल्ली में बदलते मौसम का असर पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में भी पड़ा है। पंजाब और हरियाणा में 6 जुलाई तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। इस बीच कहीं-कहीं बारिश का ऑरेंज अलर्ट भी घोषित है। चंडीगढ़ का भी कमोबेश यही हाल है।राजस्थान में यह सिलसिला 6 जुलाई तक रहेगा। मौसम विभाग ने इस दौरान येलो अलर्ट घोषित कर रखा है।इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री तक रह सकता है।

उत्तर प्रदेश में कुछेक जिलों में बारिश के चलते लोगों को बड़ी राहत मिली है। आज भी पश्चिमी और पूर्वी यूपी में अधिकांश जगहों पर बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने इसके अलावा कहीं कहीं भारी बारिश की भी संभावना जताई है। मंगलवार को उरई में सबसे ज्यादा 37.4℃, झांसी में 35.6℃, आगरा ताज में 34.4℃, कानपुर में 34.7℃ और लखनऊ में 32.3℃ तापमान नोट किय गया।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश राहत और आफत दोनों लेकर आई है। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां आज से लेकर 6 जुलाई तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने हिमाचल में 6 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में भी आज गरज चमक के साथ भारी बरसात की भविष्यवाणी है। आईएमडी ने उत्तराखंड में 6 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। दिल्ली में बदलते मौसम का असर पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में भी पड़ा है। पंजाब और हरियाणा में 6 जुलाई तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। इस बीच कहीं-कहीं बारिश का ऑरेंज अलर्ट भी घोषित है। चंडीगढ़ का भी कमोबेश यही हाल है।

मध्य प्रदेश में तो मॉनसून मेहरबान है। प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी है। भोपाल में भी रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में सिवनी, बालघाट, इंदौर, मऊगंज, सीधी, पांढुर्ना, खंडवा, बैतूल, नर्मदापुरम, सिंगरौली में गरज—चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया है। आज एमपी में छतरपुर, पन्ना, उमरिया, आगर-मालवा, सागर, दमोह, हरदा, देवास, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, जबलपुर के भेड़ाघाट, मंडला, डिंडोरी, बड़वानी, धार, खरगोन, अलीराजपुर, सतना, मैहर, उज्जैन, रतलाम, शहडोल, रीवा और अनूपपुर में बारिश की संभावना है।

राजस्थान की बात करें तो यहां भी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने मुख्यत: पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बता दें कि आने वाले समय में मध्यम दर्जे की बारिश होगी। तेज हवाएं चल सकती हैं। इनकी गति 25 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम 28 डिग्री रह सकता है। इसके बाद 4 से 8 जुलाई तक कोई अलर्ट नहीं है।भारी बारिश की भी संभावना जताई है। मंगलवार को उरई में सबसे ज्यादा 37.4℃, झांसी में 35.6℃, आगरा ताज में 34.4℃, कानपुर में 34.7℃ और लखनऊ में 32.3℃ तापमान नोट किय गया। अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री तक रह सकता है। राजस्थान में यह सिलसिला 6 जुलाई तक रहेगा। मौसम विभाग ने इस दौरान येलो अलर्ट घोषित कर रखा है।

सरसों-वापा अक्सर होता है! स्वाद बदलो और बंगाल के दूसरी तरफ का दूध-हिल्सा पकाओ

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तली हुई हिल्सा मछली से लेकर झोल, झाल, वापा, पतुरी तक यह खाने में अच्छी लगती है. लेकिन नीरस पोस्ट छोड़ें और दूध और हिल्सा ट्राई करें।

मानसून का मतलब है हिल्सा. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बंगाली-घाटी हिल्सा-झींगा को लेकर कैसे लड़ते हैं, खाने के शौकीन बंगाली दोनों खाते हैं। हाल ही में, भले ही मानसून आ गया हो, लेकिन हिल्सा की वृद्धि उतनी अच्छी नहीं है। फिर भी एक बार बाजार में देखने के बाद खरीदने की इच्छा खत्म हो जाती है। झाल, झोल, अंबल बस इस मछली को खाओ। वापा से सरसे तक हिल्सा एक लोकप्रिय शब्द है। लेकिन आप स्वाद बदलने के लिए मिल्क-हिल्सा को पका सकते हैं.

बांग्लादेश की पद्मा नदी में अच्छी हिल्सा मिलती है. हालाँकि यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि दूध हिल्सा की पाक कला कहाँ से और कैसे आई, यह ओपर बंगाल का एक पुराना और लोकप्रिय व्यंजन है।

सामग्री

हिलसा के 4 टुकड़े

1 उबला हुआ प्याज

बैटर

1 कप दूध

50 ग्राम कच्चा दूध
नमक स्वाद अनुसार

आवश्यकतानुसार सरसों का तेल

4-5 हरी मिर्च

1 चम्मच घी

1 चम्मच गरम मसाला पाउडर

3-4 इलायची

दालचीनी का एक टुकड़ा

प्रक्रिया

– हिल्सा मछली, नमक और हल्दी मिलाकर बारी-बारी से भून लें. लेकिन यह डीप फ्राई नहीं होगा. तली हुई मछली निकालें और हिल्सा तेल में इलायची और दालचीनी डालें। – फिर इसमें उबले हुए प्याज का बैटर डालें. अच्छी तरह निचोड़ने के बाद पिसी हुई खोआ की खीर दें. -प्याज और दूध मिक्स हो जाने पर स्वादानुसार नमक डालें. एक कप उबला हुआ दूध दें. पूरे मिश्रण को अच्छे से मिला लीजिये. – जब दूध उबल जाए तो उसे भूनी हुई हिल्सा के साथ उबलने दें. – जब शोरबा गाढ़ा हो जाए तो इसे गरम मसाला पाउडर और घी से ढककर 2 मिनट के लिए रख दीजिए. यह सफेद दिखना चाहिए.

रेन हिल्सा से बदलें स्वाद, ये है रेसिपी कई घरों में हिल्सा चढ़ाने का रिवाज है. हिल्सा सूप या हिल्सा नहीं, बारिशाली इस बार खाने के लिए हिल्सा बना सकती हैं.

दुर्गा पूजा के बाद बंगाली घरों में लक्ष्मी पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. टैगोर अन्ना: भले ही पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन कई लोग सोच रहे हैं कि टैगोर के लिए क्या बनाया जाए। लक्ष्मी पूजा में कई घरों में हिल्सा चढ़ाने का रिवाज है. हिल्सा सूप या हिल्सा नहीं, बारिशाली इस बार खाने के लिए हिल्सा बना सकती हैं.

सामग्री:

हिल्सा मछली: 6

काली सरसों: 1 चम्मच

पीली सरसों: 2 बड़े चम्मच

नारियल बैटर: 4 बड़े चम्मच

दही: आधा कप

नारियल का दूध: आधा कप

काला जीरा: आधा चम्मच

हरी मिर्च: 5

नमकीन

हल्दी पाउडर: 1 चम्मच

लाल मिर्च पाउडर: आधा चम्मच

सरसों का तेल: 3 बड़े चम्मच

प्रक्रिया:

हिल्सा मछली को हल्दी पाउडर और नमक के साथ रगड़ें। सरसों के दानों को 15 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर रखना चाहिए. फिर इसमें थोड़ा सा नमक मिला लें. – फिर एक बाउल में सरसों का घोल, नारियल का घोल और दही को अच्छी तरह मिला लें. नमक, लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिला दीजिये. – एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें काला जीरा डालें. कटी हुई हरी मिर्च और बैटर मसाला डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। खूब पानी से धोएं. जब मिश्रण उबलने लगे तो इसमें नमक और हल्दी पेस्ट के साथ मछली डालें। ढककर मध्यम आंच पर लगभग 10 मिनट तक पकाएं। बीच में एक बार मछली को पलट दें. – फिर जब दही-सरसों का मिश्रण गाढ़ा हो जाए तो इसमें नारियल का दूध डालें और बर्तन को फिर से ढक दें. कुछ मिनट तक पकाएं. गैस की आंच बंद कर दीजिये. रेन हिल्सा को एक प्लेट में परोसें।

बंगाली भोजन प्रेमियों का एक वर्ग ‘चांदी के दाने’ के इंतजार में पूरा साल गुजार देता है। हिलसा झाल, वापा हिलसा, हिलसा पतुरी, सरशे हिलसा – नाम सुनते ही बंगाली की जीभ में पानी आ जाता है। लंबे इंतजार के बाद हाल ही में डायमंड हार्बर में सीजन की पहली हिल्सा देखी गई। दक्षिण बंगाल में मानसून शुरू होने से पहले डायमंड हार्बर के नागेंद्रबाजार में 3000 किलोग्राम हिल्सा प्रवेश कर चुकी है. जो 1400 टका प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. परिणामस्वरूप, यह माना जा सकता है कि इस मौसम की पहली हिल्सा मछली, चावल और बंगाली पत्तियों पर पड़ने वाली है।

गौरतलब है कि दो महीने तक मछली पकड़ने के बाद डायमंड हार्बर के मछुआरे 15 जून से दोबारा मछली पकड़ने के लिए समुद्र में जा रहे हैं. हिल्सा नेट में बढ़ रही है. वह हिल्सा इस बार नागेंद्रबाजार में आई। डायमंड हार्बर के नागेंद्रबाजार मत्स्य कलाकार समिति की ओर से शुक्रवार को नागेंद्रबाजार मछली बाजार में लगभग 3,000 किलोग्राम हिलसा पाए जाने की सूचना मिली है।

आर्टदार समिति के सचिव जगननाथ सरकार के शब्दों में, ”हिल्सा सीज़न की शुरुआत में ही नेट में आ गई है. मात्रा में कम होने के बावजूद हिल्सा आकार में काफी बड़ी होती है। दो महीने तक मछली पकड़ना बंद कर दिया गया। मछुआरे फिर से समुद्र पार कर रहे हैं. मछुआरों के जाल में अच्छे आकार की हिल्सा फंस रही है।” मछुआरों को भी उम्मीद है कि इस साल अन्य वर्षों की तुलना में बेहतर हिल्सा पकड़ी जाएगी।

एक्वेरियम की देखभाल करने का तरीका क्या है! मछलियों की देखभाल कैसे करें?

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एक्वेरियम की देखभाल करने का तरीका क्या है, मछलियों की देखभाल कैसे करें, यहां कुछ आवश्यक जानकारी दी गई है
मछली की देखभाल करना आसान नहीं है। एक्वेरियम को कैसे साफ रखें, मछलियों को खाना खिलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें, यहां जानकारी दी गई है। आपका घर का एक्वेरियम सिर्फ घर की सजावट का उपकरण नहीं है, बल्कि कई रंगीन और सुंदर प्राणियों का घर भी है। इसलिए इसकी अच्छे से देखभाल करना बहुत जरूरी है।

एक्वेरियम की स्थापना:

आकार का चयन: मछली की प्रजाति और संख्या के आधार पर एक्वेरियम का आकार चुना जाना चाहिए। यदि एक्वेरियम बड़ा है, तो आमतौर पर कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन, यदि यह छोटा है, तो आपको ढेर सारी मछलियाँ नहीं रखनी चाहिए।

स्थान का चयन: एक्वेरियम को कमरे में ऐसे स्थान पर रखें, जहां सीधी धूप न पहुंचती हो। खड़ी या ऊबड़-खाबड़ जगहों से बचें। एक्वेरियम को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ वह स्थिर बैठ सके।

उपकरण: आवश्यक उपकरण जैसे फिल्टर, हीटर, थर्मामीटर, एयर-पंप आदि इकट्ठा करें और इसे घर में स्टॉक करके रखें। एक्वेरियम की देखभाल के लिए इनकी आवश्यकता होगी।

पानी की तैयारी:

जल का डीक्लोरीनीकरण या डीक्लोरीनीकरण: एक्वेरियम के पानी का डीक्लोरीनीकरण आवश्यक है। मछली क्लोरीनयुक्त पानी में नहीं रह सकती।

तापमान: एक्वेरियम के पानी को ऐसे तापमान पर रखें जो मछली के लिए उपयुक्त हो। इसके लिए 24-26.5 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त होता है.

पीएच स्तर: पानी का पीएच स्तर 6.5 और 8.5 के बीच होना चाहिए।
मछली का चयन:

आरंभ करने के लिए: विशेषज्ञों की सलाह से ऐसी मछली प्रजातियों का चयन करें जो आसानी से जीवित रह सकें। कोई ‘टेट्रास’, ‘प्लेट्स’, ‘मौली’, ‘कैटफ़िश’ से शुरुआत कर सकता है।

मछली की विभिन्न प्रजातियों का चयन करने में: उन प्रजातियों के चयन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है जो एक साथ रह सकती हैं।

मछलियों की संख्या: एक्वेरियम के आकार के अनुसार मछलियों की संख्या सीमित होनी चाहिए।

खाना:

मछली की प्रजातियों को उचित भोजन खिलाएं। अधिक भोजन करने से बचें, नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में भोजन करें। मछली की भोजन की आदतों और व्यवहार को देखकर भोजन की मात्रा नियंत्रित करें।

स्वच्छता:

नियमित पानी बदलना: एक्वेरियम का 25 प्रतिशत पानी सप्ताह में एक बार बदलना पड़ता है।

फ़िल्टर साफ़ करें: एक्वेरियम के पानी को नियमित रूप से फ़िल्टर किया जाना चाहिए।

नम मलबा: एक्वेरियम के नीचे से नम मलबा नियमित रूप से हटा दें।

अन्य मामलों:

नियमित निगरानी: मछली के व्यवहार, पानी की स्थिति की नियमित रूप से निगरानी करें।

स्वास्थ्य समस्याएं: बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर त्वरित कार्रवाई करें। मछली की देखभाल के बारे में नियमित ज्ञान प्राप्त करें।

इसका नियमित अध्ययन करना अच्छा होगा। एक्वेरियम का रखरखाव और मछलियों की देखभाल करना धैर्य का विषय है। नियमित देखभाल से मछलियाँ स्वस्थ और सुंदर रहेंगी। यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञ की सलाह लें।

कई घरों में रंगीन मछलियों से भरा एक मछलीघर होता है जो घर के प्रवेश द्वार या एक कोने को रोशन करता है। इस एक्वेरियम में मछलियों की नई प्रजाति के अलावा यह कुछ लोगों के लिए सिर्फ शौक है तो कुछ के लिए लत। जो लोग इस मामले में अनुभवी हैं, वे जानते होंगे कि अगर कोई मछली अच्छी दिखती है, तो उसे खरीदा नहीं जा सकता। एक मछली किस प्रकार की जलवायु में रह सकती है, अगर वह बड़ी है तो उसे कितनी जगह चाहिए या मछली की कई प्रजातियाँ एक साथ रह सकती हैं या नहीं, इन बातों को जानने के बाद ही मछली खरीदनी चाहिए। इसके अलावा एक्वेरियम के लिए मछली खरीदने से पहले कुछ अन्य बातें भी जानना जरूरी है।

1) किस प्रकार की मछली?

बहुत से लोग आमतौर पर घर में रखने के लिए गोल्ड फिश, गप्पी, गौरामी, किसिंग फिश, ज़ेबरा या एंजेल जैसी मछलियाँ चुनते हैं। लेकिन हाल ही में मछली खरीदने के विकल्प में बदलाव आया है। गहरे समुद्र में विभिन्न प्रकार की ‘उष्णकटिबंधीय’ मछलियाँ पाई जाती हैं। इन सभी को खरीदने का चलन बढ़ा है. लेकिन खरीदने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि मछलियों की सभी प्रजातियां हर तरह के मौसम के अनुकूल नहीं हो सकतीं। चाहे एक्वेरियम में कितने भी फिल्टर, एयर पंप या हीटर हों, मछलियों को समस्या हो सकती है।

2) भोजन का प्रकार

सभी मछलियाँ एक ही प्रकार का भोजन नहीं खातीं। दरअसल, प्रत्येक प्रकार की मछली पानी की एक ही परत से भोजन एकत्र करती है। इसलिए, एक्वैरियम मछली की भोजन संबंधी आदतों के बारे में जागरूक होना बहुत महत्वपूर्ण है। जिस तरह उचित भोजन की कमी मछलियों के लिए स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है, उसी तरह बहुत अधिक भोजन भी उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

3) शांत या क्रोधित

अन्य जानवरों की तरह मछली का भी अपना क्षेत्र होता है। विशाल समुद्र के तल पर वे अपना स्थान चुनते हैं और अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं। लेकिन एक्वेरियम जैसी छोटी जगह में यह संभव नहीं है। इसलिए बेहतर है कि ‘गोल्डफिश’ की शांत नस्ल को क्रोधित ‘फाइटर’ के साथ न रखा जाए।

4) किस प्रकार के पानी की आवश्यकता है

एक्वेरियम में नल का पानी भरने से उसमें मछलियाँ नहीं छोड़ी जा सकतीं। मछली छोड़ने से पहले एक्वेरियम के लिए अलग से पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पानी के पीएच स्तर का भी ध्यान रखना चाहिए। पानी में अमोनिया, नाइट्रेट या नाइट्राइट यौगिकों के स्तर को मापना महत्वपूर्ण है। साथ ही, मछलियों की सभी प्रजातियाँ एक ही पानी में नहीं रह सकतीं। एक्वेरियम में प्रजातियों के अनुसार पानी को अलग करना संभव नहीं है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किस तरह की मछलियां पानी में रह सकती हैं।

5) अधिकतम संख्या में मछलियाँ रखी जा सकती हैं

एक्वेरियम के आकार और आयतन के आधार पर, एक साथ रखी जा सकने वाली मछलियों की अधिकतम संख्या जानना आवश्यक है। मछलियों की संख्या अधिक नहीं होनी चाहिए.

राधिका! होने वाली दुल्हन ने अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन की गई ड्रेस पहनी

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पीले रंग की पोशाक में कोलकाता योगा करती दिखीं राधिका! होने वाली दुल्हन ने अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन की गई ड्रेस पहनी थी राधिका की इस हल्के रंग की पोशाक के पीछे कलकत्ता की बेटी अनामिका खन्ना का हाथ था। ड्रेसमेकर अनामिका ने राधिका को पीले रंग की पोशाक पहनाई। चाहे बालीपारा हो या नेटपारा, मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी की शादी की धूम मची हुई है। फैशन प्रेमियों के बीच इस बात को लेकर काफी उत्सुकता थी कि उनकी होने वाली पत्नी राधिका गयहालुद की ड्रेस कैसी होगी. काफी इंतजार के बाद आखिरकार राधिका की न्यूड तस्वीर सामने आ गई है, जिसने फैशन प्रेमियों का ध्यान खींच लिया है। राधिका ने कलकत्ता योगा की पीली पोशाक पहनी हुई थी। आप क्या सोचते है?

राधिका ने पीले रंग का लहंगा-चोली और फ्लोरल ड्रेस पहनी हुई थी। राधिका के आउटफिट का सबसे आकर्षक पहलू उनका घूंघट है। उसका घूँघट ताजे फूलों से बना था। पूरे घूंघट को गेंदे की कलियों से डिजाइन किया गया था और बॉर्डर पर गेंदे के फूल का काम था। राधिका का पहनावा निस्संदेह होने वाली दुल्हनों के लिए एक नया ‘ट्रेंड’ पैदा करेगा। राधिका की इस फैंसी ड्रेस के पीछे थीं कोलकाता की बेटी अनामिका खन्ना। ड्रेसमेकर अनामिका ने राधिका को पीले रंग की पोशाक पहनाई। अनामिका कोलकाता के बालीगंज की रहने वाली लड़की है। कोलकाता से फैशन जगत तक, अब वह मुंबई के अग्रणी फैशन डिजाइनरों में से एक हैं। सिर्फ राधिका का आउटफिट ही नहीं अनामिका ने अंबानी परिवार की बड़ी पत्नी श्लोका का आउटफिट भी डिजाइन किया था। गेहलुद के दिन श्लोका पीले कपड़े नहीं पहनती थीं. श्लोका ने कलरफुल लहंगा पहना था. लहंगे में हर तरफ रंग-बिरंगे धागे और चुमकी का काम था। कॉन्सर्ट के दिन अनामिका ने श्लोका का लाल लहंगा भी डिजाइन किया था।

चाहे कान्स फिल्म फेस्टिवल हो या अंबानी परिवार की शादी, गुमनाम काम अब फैशन की दुनिया में हर जगह है। सोनम कपूर से लेकर दीपिका पादुकोण तक, अनामिका बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों की पसंद की ड्रेसमेकर बन गई हैं।

गेहलुद के समारोह में फूलों की पोशाक में सजी-धजी राधिका! अंबानी की दुल्हन की पोशाक में क्या था सरप्राइज?
फैशन प्रेमियों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता ज्यादा थी कि राधिका पीला रंग कैसे पहनेंगी। काफी छुपाने के बाद आखिरकार राधिका का पीला आउटफिट सबके सामने आ गया, जो देखने लायक है। बालीपारा हो या नेटपारा, मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी की शादी की धूम जोरों पर है। शादी की तारीख 12 जुलाई थी लेकिन प्री-वेडिंग सेरेमनी मार्च से शुरू हुई। अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की प्री-वेडिंग सेरेमनी गुजरात के जामनगर में धूमधाम से और करीब तीन दिनों तक करोड़ों रुपये की लागत से आयोजित की गई थी। इसके बाद इटली में एक लग्जरी क्रूज किराए पर लेकर दूसरी प्री-वेडिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया। शादी की सभी रस्में एक हफ्ते पहले से ही शुरू हो गई हैं. संगीत समारोह में दुल्हन बनीं राधिका के आउटफिट से हर कोई प्रभावित हुआ। हालांकि, फैशन प्रेमियों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता ज्यादा थी कि राधिका का आउटफिट कैसा होगा। सम्मान के बाद आख़िरकार राधिका का पीला पहनावा सबके सामने आया, जो ध्यान खींचने वाला है. राधिका की गोरी त्वचा में पीलेपन का स्पर्श था। राधिका ने कॉस्ट्यूम डिजाइनर अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन किया हुआ पीला लहंगा पहना था। राधिका के लहंगे का सबसे दिलचस्प पहलू था उनके द्वारा पहना गया घूंघट। पीले फूलों वाली ज्वेलरी पहनना कई सालों से फैशन में है। हालांकि, इस मौके पर पीले रंग की पोशाक पहने हुए राधिका का घूंघट ताजे फूलों से बना हुआ था। पूरे घूंघट को गेंदे की कलियों से डिजाइन किया गया था और बॉर्डर पर गेंदे के फूल का काम था। स्टाइलिस्ट रिया कपूर राधिका के आउटफिट की प्रभारी थीं। ड्रेपिंग आर्टिस्ट डॉली जैन उनके घूंघट को ड्रेप करने की प्रभारी थीं।

राधिका ने ड्रेस से मैच करती हुई फ्लोरल ज्वेलरी पहनी हुई थी। कान में पुष्प लाकेट, गले में हार, हाथ में हथेली। राधिका का पहनावा साधारण था लेकिन उसमें शाही स्पर्श था। -राधिका को कभी भी ज्यादा मेकअप करना पसंद नहीं है। पीले लहंगे के साथ उन्होंने लाइट मेकअप भी किया हुआ था. विंग्ड आईलाइनर, झिलमिलाता आईशैडो, लिक्विड हाइलाइटर, छोटी काली टिप और हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक, अंबानी की भावी दादी की पोशाक।

भले ही नीता अंबानी की ड्रेस की चर्चा इतने लंबे समय से हो रही है, लेकिन इस बार उनकी होने वाली दादी उन्हें बराबर का इक्का दे रही हैं। फैशन के मामले में राधिका नीता से कम नहीं हैं।

क्या आप ट्रिमर से एक पेशेवर नाई की तरह शेव करना चाहते हैं, लेकिन नहीं कर सकते? यहाँ सरल विधि है

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दाढ़ी के घनत्व को पूरी तरह एक समान बनाए रखने के लिए ट्रिमर का उपयोग करना आसान नहीं है। हालाँकि, कुछ बातों को ध्यान में रखने से आप एक पेशेवर सैलून कर्मचारी की तरह डिवाइस का उपयोग कर सकेंगे। डेमी को एक दोस्त से जन्मदिन के उपहार के रूप में एक महंगा ट्रिमर मिला। डिवाइस का उपयोग करना बहुत आसान लग रहा था। लेकिन वाकई में नहीं। जब भी वह अपनी दाढ़ी ट्रिम कराने जाता तो गड़बड़ हो जाती। दाढ़ी ट्रिम करते समय कहीं ज्यादा, कहीं कम ट्रिम की जाती है। दाढ़ी के घनत्व को पूरी तरह एक समान बनाए रखने के लिए ट्रिमर का उपयोग करना आसान नहीं है। हालाँकि, कुछ बातों को ध्यान में रखने से आप एक पेशेवर सैलून कर्मचारी की तरह डिवाइस का उपयोग कर सकेंगे।

1) ट्रिम करने से पहले दाढ़ी को गर्म पानी से अच्छी तरह धो लें. बेहतर होगा कि माइल्ड फेसवॉश का इस्तेमाल करें। बहुत घनी दाढ़ी वाले लोगों के लिए, मोटे बालों को गर्म पानी या साबुन का उपयोग करके नरम किया जाता है। लेकिन ट्रिम करने से पहले दाढ़ी को अच्छी तरह से सुखा लेना सुनिश्चित करें।

2) आप दाढ़ी को कितना छोटा करना चाहते हैं उसके अनुसार ट्रिमर ब्लेड और कंघी को सेट करें। बॉक्स में विभिन्न ब्लेड, कंघियों और उनके कार्यों पर विस्तृत निर्देश हैं। बेहतर होगा कि इस्तेमाल से पहले इसे ध्यान से पढ़ लें।

3) अगर आप अपनी दाढ़ी को बहुत छोटा नहीं करना चाहते हैं, तो पहले बहुत संकरी कंघी न करें। ट्रिमर का उपयोग ऐसी कंघी के साथ करें जो त्वचा से कुछ दूरी बनाए रखे।

4) दाढ़ी के आकार के अनुसार ट्रिमर का इस्तेमाल करना चाहिए। इसी तरह ट्रिमर को उल्टा खींचने से भी कभी-कभी समस्या हो सकती है।

5) गाल ट्रिमर से ज्यादा दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हालाँकि, गर्दन, जबड़े की हड्डी, कान और होठों के आसपास ट्रिमर का उपयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। यदि नहीं, तो खतरे की संभावना अधिक है.

6) दाढ़ी को ट्रिम करने के बाद भी चेहरे को गुनगुने पानी में एंटीसेप्टिक घोल मिलाकर धोएं। इसके बाद आफ्टर शेव लोशन लगा सकते हैं। अगर आपकी त्वचा रूखी है तो आप मॉइस्चराइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप दाढ़ी संवारने वाले तेल का उपयोग कर सकते हैं।

7) ट्रिमर का इस्तेमाल सिर्फ इतना ही नहीं किया जाता है. दाढ़ी को ट्रिम करने के बाद उसे अच्छे से साफ करना चाहिए। ट्रिमर, दाढ़ी के छोटे हिस्सों के खांचे में मृत कोशिकाएं रह सकती हैं। बाद में वहां से संक्रमण हो सकता है.

क्या आप अपने प्रियजनों को उनके जन्मदिन पर ‘ट्रिमर’ उपहार देंगे? उस डिवाइस को ऑनलाइन खरीदने से पहले क्या ध्यान रखें? पुरुषों को इस ट्रिमर के इस्तेमाल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दुकान पर जाकर खरीदारी करना बहुत जोखिम भरा है। उससे कहीं ज्यादा आसान है ऑनलाइन ऑर्डर करना. धूप का चश्मा, घड़ियाँ, बटुए, इत्र, डिजाइनर कपड़े या पतलून – उपहार के रूप में बुरा नहीं है। लेकिन प्रिय व्यक्ति के जन्मदिन पर, उन्होंने हर साल उनमें से लगभग सभी को दिया। इस साल क्या पेश करूं, यह सोचते हुए मुझे अचानक ट्रिमर की याद आ गई। रेज़र कैंची की परेशानी के बिना आपकी दाढ़ी को ट्रिम करने का सबसे आसान तरीका है।

काम के दबाव के कारण सैलून जाने का समय नहीं मिलता। उन्हें दाढ़ी रखना पसंद है. सात-पांच बार सोचने के बाद यह उपकरण उपहार के तौर पर खराब नहीं है। हालांकि पुरुषों को इस काम की चीज के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। दुकान पर जाकर खरीदारी करना बहुत जोखिम भरा है। उससे कहीं ज्यादा आसान है ऑनलाइन ऑर्डर करना. लेकिन, बाजार में अलग-अलग क्वालिटी और कीमत के ट्रिमर उपलब्ध हैं। खरीदने से पहले कुछ जानने की जरूरत है? 1) बैटरी कैसी है?

किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को खरीदने की प्राथमिक शर्त उसकी बैटरी लाइफ की जांच करना है। वह सारी जानकारी बॉक्स पर विस्तार से लिखी हुई है। हालांकि, ट्रिमर खरीदने से पहले जांच लें कि बैटरी एक घंटे के अंदर फुल चार्ज हुई है या नहीं। एक बार चार्ज करना बहुत कम होना चाहिए, लेकिन ट्रिमर एक सप्ताह तक चलना चाहिए। हालाँकि खरीदारी के समय यह समझ में नहीं आ सकता है, लेकिन एक काफी अच्छी कंपनी के ट्रिमर को एक बार चार्ज करने पर कम से कम 80 मिनट तक लगातार इस्तेमाल किया जा सकता है।

2) ब्लेड:

यदि ट्रिमर का मस्तिष्क बैटरी है, तो ब्लेड ट्रिमर की रीढ़ है। इसलिए जब भी ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रिमर खरीदें तो ब्लेड के बारे में जागरूक होना जरूरी है। दाढ़ी की मोटाई के आधार पर ब्लेड भी विभिन्न प्रकार के होते हैं। इसके बारे में पहले से थोड़ा जानना जरूरी है. इसके अलावा दो अन्य बातें भी विचारणीय हैं। सबसे पहले, ब्लेड में जंग लगती है या नहीं। क्योंकि कई बार स्टील या महंगे टाइटेनियम ब्लेड में भी जंग लग जाती है। तो, इसके बारे में पहले से ही जागरूक रहें। खरीदने से पहले वारंटी अवधि की जाँच करें।

दूसरा, कई ट्रिमर ब्लेड स्वयं-तीक्ष्ण होते हैं। जांच लें कि आप जिस कंपनी से ट्रिमर खरीद रहे हैं उसके पास ऐसी सुविधा है या नहीं। चूंकि ट्रिमर लंबे समय तक अच्छा रहेगा, इसलिए इसके इस्तेमाल के दौरान चोट लगने का खतरा भी नहीं रहेगा। 3) ताररहित या नहीं?

उपयोग की सुविधा के बावजूद, कई लोगों का मानना ​​है कि कॉर्ड वाले उपकरणों का जीवनकाल कॉर्डलेस उपकरणों की तुलना में अधिक होता है। ऐसा नहीं है कि ये पूरी तरह से गलत है. हालांकि, अगर शेविंग के दौरान अचानक लोड शेडिंग हो जाए तो आप खतरे में पड़ सकते हैं। फिर, बाथरूम में दर्पण के बगल में स्विचबोर्ड न होना एक समस्या हो सकती है। इसके बजाय, ऐसा ट्रिमर खरीदना बेहतर है जिसमें थोड़ी अधिक कीमत पर बैटरी और बिजली दोनों का लाभ हो।

4) कीमत

अच्छी चीजें खरीदने पर थोड़ा अधिक खर्च होगा। चाहे जो भी हो, लेकिन ट्रिमर खरीदने से पहले यह जांच लें कि आप जो फायदे तलाश रहे हैं वे पूरे हुए हैं या नहीं। एक ही वस्तु की कीमत ऑनलाइन विभिन्न साइटों पर भिन्न हो सकती है। खरीदने से पहले आप सभी विश्वसनीय साइटों पर जा सकते हैं।

5) संगठन

बाजार में कई तरह के ट्रिमर उपलब्ध हैं। उनकी अलग-अलग विशेषताएं हैं. उस हिसाब से कीमत कम या ज्यादा हो सकती है. ‘वेगा’, ‘बॉम्बे शेविंग कंपनी’, ‘नोवा’, ‘हैवेल्स’, ‘बीर्डू’, ‘शाओमी’, ‘मॉर्फी रिचर्ड्स’ जैसे पॉकेट ट्रिमर ऑनलाइन के साथ-साथ ‘फिलिप्स’, ‘पैनासोनिक’, ‘उच्च गुणवत्ता’ में भी उपलब्ध हैं। ब्राउन’, ‘एमआई’, ‘मैनहुड’ जैसी उन्नत सुविधाओं वाले ट्रिमर भी उपलब्ध हैं। कीमत 700 से 7000 रुपये के बीच है.

विंबलडन के सेमीफाइनल में जोकोविच को क्वार्टर फाइनल नहीं खेलना पड़ा l

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घुटने की सर्जरी के बाद जोकोविच लंदन आ गए। विंबलडन शुरू होने से दो दिन पहले खेलने का फैसला किया. उन्हें अभी तक इतनी कड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा है.’ क्वार्टर फाइनल भी नहीं खेलना पड़ा. नोवाक जोकोविच बिना क्वार्टर फाइनल खेले विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंच गए. उनके प्रतिद्वंद्वी एलेक्स डी मिनौर चोट के कारण प्रतियोगिता से हट गए। इसके साथ ही जोकोविच 13 बार विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंचे।

एक समय पर, जोकर के लिए विंबलडन अनिश्चित था। घुटने की चोट के कारण उन्हें फ्रेंच ओपन से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। सर्जरी की आवश्यकता है. हालाँकि, विंबलडन 24 ग्रैंड स्लैम के मालिक को परिचित रूप में देखता है। चौथे राउंड तक उन्हें किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं करना पड़ा. क्वार्टर फाइनल में भी उन्हें कोर्ट नहीं जाना पड़ा. उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष ने चोट के कारण नाम वापस ले लिया।

मिनौर ने सोमवार को चौथे दौर के मैच में फ्रांस के आर्थर फिल्स को 6-2, 6-4, 4-6, 6-3 से हराया। वह मैच खेलते समय घायल हो गये थे. ऑस्ट्रेलियाई अगले ओलंपिक के बारे में सोचकर जोखिम नहीं लेना चाहते थे। नाम वापस लेने का फैसला किया. नतीजतन, जोकोविच बिना कोई पसीना बहाए विंबलडन के अंतिम चार में पहुंच गए। साथ ही उन्हें जरूरी आराम भी मिला. विंबलडन की तैयारी के लिए जोकोविच जर्मनी में यूरो कप मैच देखने गए थे. ग्रुप स्टेज में सर्बिया का आखिरी मैच देखने गया था. हालाँकि, उनका देश यूरोज़ के ग्रुप चरण से बाहर हो गया।

कार्लोस अलकराज विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंच गए। वह मंगलवार को क्वार्टर फाइनल में टॉमी पॉल से हार गए। इस बार भी स्पेनिश खिलाड़ी पहला सेट हार गया. अंत में अलकराज ने गेम 5-7, 6-4, 6-2, 6-2 से जीत लिया। इससे उन्हें लगातार तीन मैचों में प्रतिद्वंद्वी की कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने संयम बरता और तीन घंटे 11 मिनट की लड़ाई में मैच जीत लिया।

अलकराज ने मैच जीतने के बाद कहा, “पॉल हाल ही में ग्रास कोर्ट पर शानदार टेनिस खेल रहे हैं। क्वींस ने प्रतियोगिता जीती. इतने लंबे समय तक विंबलडन में अच्छा खेला। अच्छे खिलाड़ी हार गए।”

उन्होंने यह भी कहा, “पहले और दूसरे सेट की शुरुआत में ऐसा लगा जैसे सुर्की के कोर्ट पर खेल रहे हों। बड़ी रैली, प्रत्येक अंक के लिए 10-15 शॉट। इसलिए पहला सेट हारने के बाद मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी था. काम काफी कठिन था. लेकिन मुझे पता था कि मैच लंबा चलने वाला है और मुझे वहीं रुकना होगा। समझ गया।”

शुरुआत में पॉल के खेल से ऐसा लग रहा था कि उनका लक्ष्य अल्कराज को हराना है। शुरुआत में अलकराज ने ब्रेक लिया और 2-0 की बढ़त ले ली. प्रोम सेट अपने नाम करने के बाद भी बाकी मैच अमेरिकी खिलाड़ी के लिए अच्छा नहीं रहा। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता गया, अलकराज तेज होते गए। अलकराज ने दूसरे से चौथे सेट में सात बार पॉल की सर्विस तोड़ी। तीन बार के ग्रैंड स्लैम विजेता ने 27 में से आठ ब्रेक प्वाइंट बदले। वह सेमीफाइनल में मेदवेदेव के खिलाफ खेलेंगे। एक साल पहले अलकराज ने विंबलडन में अंतिम चार में मेदवेदेव को हराया था। आप उस मैच में केवल नौ गेम हारे। लेकिन इस बार क्वार्टर फाइनल में मेदवेदेव मजबूत दिखे. उन्होंने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी को हराया. पहले दो मैच सीधे सेटों में जीतने के बाद, फ्रांसिस टियाफो पांच सेटों में और ह्यूगो हम्बर्ट और पॉल चार सेटों में हार गए।

अल्काराज़ ने कहा, “मुझे विश्वास है कि मैं और मजबूती से वापसी कर सकता हूं। मैच के दौरान अगर कोई समस्या आती है तो हम तुरंत समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं. उम्मीद है कि हम अगले मैच में भी मुस्कान के साथ समापन कर सकेंगे।” दोनों खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम में चार बार एक-दूसरे से भिड़ चुके हैं। 2021 में विंबलडन और 2023 में यूएस ओपन रूसी खिलाड़ियों ने जीता।

विंबलडन से पहले वह पुरुषों के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बने थे। लेकिन वो विंबलडन चैंपियन नहीं बन पाए. पुरुषों की शीर्ष वरीयता प्राप्त यानिक सिनेर विंबलडन से हट गए। वह क्वार्टर फाइनल में पांच सेटों (7-6, 4-6, 6-7, 6-2, 3-6) से हार गए। डेनियल मेदवेदेव सिनार को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचे।

पहले सेट में साफ था कि मेदवेदेव की दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी सिनर से लड़ाई आसान नहीं होगी. लड़ाई चल रही थी. दोनों अपनी सेवाएं दे रहे थे. खेल टाईब्रेकर में जाता है। सिनार ने वहां खेला। उन्होंने टाईब्रेकर में 16 अंकों से जीत हासिल कर पहला सेट अपने नाम किया।

दूसरे सेट में मेदवेदेव ने खेल में वापसी की। उन्होंने लंबी रैली खेलना शुरू कर दिया. सीना गलतियाँ करते रहे। पुरुषों की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ने कुछ अप्रत्याशित गलतियाँ कीं। मेदवेदेव ने इसका फायदा उठाया. उन्होंने सिनर की एक सर्विस तोड़ी. मेदवेदेव ने दूसरा सेट 6-4 से जीतकर बराबरी कर ली.

आखिर सूरज ना हो तो क्या होगा?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर अगर सूरज ना हो तो क्या होगा! सूर्य भगवान, हिंदू पुराणों में सूर्य को देवता कहा जाता है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर सूर्य अगर ना हो तो क्या होगा? साथ ही साथ सूर्य के निर्माण में कैसा वातावरण चाहिए? तो आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं!

आपको बता दें कि पृथ्वी पर जीवन होने का सबसे बड़ा कारण सूर्य है। कभी आपने सोचा है कि सूर्य अगर न हो तो क्या होगा। आपका ये जवाब होगा कि सूर्य ना हो तो दुनिया में अंधेरा छा जाएगा। तो आपका सोचना सच है। सूर्य है तो सबकुछ है अगर सूरज ना हो तो धरती पर सबकुछ खत्म हो जाएगा। सूर्य के कारण ही पेड़ पौधों में प्रकाश संश्लेषण होता है, जिससे हमें ऑक्सीजन मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में सूर्य को राजा माना गया गया है और विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की उपासना की परंपरा रही है। सूर्य को भले ही पूजें लेकिन यह धधकता हुआ एक तारा है जो हमारे सौरमंडल में सबसे बड़ा है। इस आग के धधकते गोले में 70 प्रतिशत से अधिक हाइड्रोजन और 26 प्रतिशत तक हीलियम गैस मौजूद हैं, क्योंकि हाइड्रोजन के परमाणु घने वातावरण में फ्यूजन की क्रिया करते हैं और हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया में वह ऊर्जा छोड़ते हैं जिससे बड़ी मात्रा में प्रकाश उत्सर्जित होता है और सूर्य जलता हुआ दिखाई देता है। लेकिन सूर्य पर कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन भी प्रचुर मात्रा हैं।

सूर्य आकार में इतना बड़ा है कि इसमें हमारी पृथ्वी जैसे सैकड़ों या उससे भी अधिक ग्रह समा सकते हैं। सूर्य का व्यास करीब 13 लाख 90 हजार किलोमीटर है। पृथ्वी के मुकाबले देखा जाए तो यह लगभग 109 गुना बड़ा है लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे ब्रह्मांड में सूर्य जैसे खरबों या उससे भी अधिक पिंड मौजूद हैं। बता दें कि सूर्य का जो प्रकाश हमें धरती पर मिलता है, इसे हमतक पहुंचने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लगता है और आग के धधकते इस गोले के अन्दर का तापमान 14,999,726 डिग्री सेल्सियस होता है। यही वजह है कि उसके करीब पहुंचना आसान ही नहीं नामुमकिन सा लगता है। अनुमान है कि यह आग का गोला करीब 4.6 अरब साल पुराना है। साथ ही इसका जीवन 10 अरब साल या उससे अधिक हो सकता है और यह पृथ्वी से करीब 13 लाख गुना बड़ा है और इसका गुरुत्वाकर्षण बल भी पृथ्वी से 27 गुना ज्यादा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारी आकाशगंगा में करीब 5 फीसदी तारे ऐसे हैं, जो सूर्य के मुकाबले ज्यादा चमकदार और बड़े हैं। सूर्य केवल गैसों से बना हुआ एक पिंड है, ये पृथ्वी या किसी और ग्रह की तरह ठोस नहीं है यहां सिर्फ गैस है।बता दें कि नॉर्वे एक ऐसा देश है जहां सूर्यास्त नहीं होता है क्योंकि यह आर्कटिक सर्कल में स्थित है। इसका गुरुत्वाकर्षण ही पूरे सौर मंडल को अपनी-अपनी कक्षा में बनाए रखता है यानी इसके चारो ओर बड़े से बड़े पिंड से लेकर किसी अंतरिक्ष यान के मलबे के एक छोटे से हिस्से को अंतरिक्ष में एक कक्षा में बनाए रखने में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की अहम भूमिका होती है।

सूर्य में अधिकतम तपामान उसके केंद्र में होता है, जहां का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस होता है। सूर्य अत्यधिक गर्म और आवेश युक्त कणों के गैस से बना हुआ है जिसे प्लाज़्मा कहते हैं। ये प्लाज़्मा सूर्य के भूमध्य रेखा पर इसका एक चक्कर पृथ्वी के 25 दिनों में पूरा होता है जबकि ध्रुवों पर 36 पृथ्वी दिवस लगते हैं।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहां सूरज 6 महीने चमकता है और 6 महीने नहीं उगता। ये देश है अंटार्कटिका जहां सिर्फ दो मौसम सर्दी और गर्मी ही होते हैं।ये हिस्‍सा पूरे 6 महीने अंधेरे में डूबा रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, धरती के इस हिस्‍से में 6 महीने दिन और 6 महीने रात रहने का कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर टेढ़ी होकर घूमना है। पृथ्वी पर किरिबाती का टाइम जोन सबसे पहले आता है. यह UTC+14 है। सालभर के अधिकतम समय किरिबाती में ही सबसे पहले सूर्योदय होता है। इस स्थान को लैंड ऑफ द मिडनाइट सन कहा जाता है। वहीं, नॉर्वे एक ऐसा देश है जहां सूर्यास्त नहीं होता है क्योंकि यह आर्कटिक सर्कल में स्थित है।