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लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में क्या बोले राहुल गांधी?

हाल ही में राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एक बात बताई है! लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में दिए अपने भाषण के कुछ हिस्सों को सदन की कार्यवाही से निकाले जाने पर मंगलवार को अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा। उन्होंने खत में कहा कि यह चुनिंदा ढंग से की गई कार्रवाई है जो तर्कसंगत नहीं है। रायबरेली सांसद ने बिरला से आग्रह किया कि उनके भाषण से हटाए गए अंश को फिर से कार्यवाही के रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। राहुल गांधी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर देश में सांप्रदायिक आधार पर विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया था जिस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार तरीके से विरोध जताया था। राहुल गांधी का कहना था, ‘देश के लोगों के प्रति अपने दायित्वों का पालन करते हुए मैं कल इस अधिकार का उपयोग कर रहा था।’ उन्होंने बिरला को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘मेरी सुविचारित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाना संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।’प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना बहुत गंभीर विषय है।राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा था कि हिंदू कभी हिंसा नहीं कर सकता, कभी नफरत और डर नहीं फैला सकता। इस दौरान बिरला सदन में अग्रिम पंक्ति में बैठे थे। वह सच्चाई है। जितना एक्सपंज करना है करें, सच्चाई तो सच्चाई होती है।’उनके भाषण के कुछ अंश आसन के निर्देशानुसार सदन की कार्यवाही से हटा दिए गए।

बिरला को लिखे अपने पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि सभापति को सदन की कार्यवाही से कुछ टिप्पणियों को हटाने की शक्तियां प्राप्त हैं, लेकिन यह केवल उन शब्दों के लिए है, जिनकी प्रकृति प्रक्रिया और आचरण के नियमों के नियम 380 में निर्दिष्ट की गई है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह देखकर स्तब्ध हूं कि किस तरह से मेरे भाषण के काफी हिस्से को कार्यवाही से हटा दिया गया है।’ कांग्रेस नेता ने यह भी कहा, ‘मैं यह कहने के लिए बाध्य हूं कि हटाए गए हिस्से नियम 380 के दायरे में नहीं आते हैं। मैंने सदन में जो कहना चाहा वह जमीनी हकीकत और तथ्यात्मक स्थिति है। सदन का प्रत्येक सदस्य जो लोगों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करता है, उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 105(1) में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हासिल है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की चिंताओं को सदन में उठाना प्रत्येक सदस्य का अधिकार है। राहुल गांधी का कहना था, ‘देश के लोगों के प्रति अपने दायित्वों का पालन करते हुए मैं कल इस अधिकार का उपयोग कर रहा था।’ उन्होंने बिरला को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘मेरी सुविचारित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाना संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘इस संदर्भ में मैं अनुराग ठाकुर (भाजपा सांसद) के भाषण पर भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, जिनका भाषण आरोपों से भरा था। हालांकि, हैरानी की बात ये है कि उनके भाषण से केवल एक शब्द को हटाया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं अनुरोध करता हूं कि कार्यवाही से निकाली गई टिप्पणियों को फिर से शामिल किया जाए।’ इससे पहले कांग्रेस नेता ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं कहा, ‘ मोदी जी की दुनिया में सच्चाई एक्सपंज हो सकती है, लेकिन वास्तविकता में सच्चाई एक्सपंज नहीं हो सकती। जो मुझे कहना था, मैंने कह दिया। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अध्यक्ष पद के लिए बिरला के नाम का प्रस्ताव रखा जिसका रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अनुमोदन किया। इस प्रस्ताव को प्रोटेम स्पीकर, कार्यवाहक अध्यक्षnभर्तृहरि महताब ने सदन में मतदान के लिए रखा और इसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस सांसद कोडिकुन्नील सुरेश को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन सदन में मत-विभाजन कराने पर जोर नहीं दिया।सदन का प्रत्येक सदस्य जो लोगों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करता है, उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 105, 1  में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हासिल है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की चिंताओं को सदन में उठाना प्रत्येक सदस्य का अधिकार है। इसके बाद कार्यवाहक अध्यक्ष महताब ने बिरला को लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘मैं ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष घोषित करता हूं।’ इस दौरान बिरला सदन में अग्रिम पंक्ति में बैठे थे। वह सच्चाई है। जितना एक्सपंज करना है करें, सच्चाई तो सच्चाई होती है।’

आखिर सुनीता विलियम्स के साथ अंतरिक्ष में क्या हुआ?

आज हम आपको बताएंगे कि सुनीता विलियम्स के साथ अंतरिक्ष में क्या-क्या हुआ है! भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में सवार होकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) अंतरिक्ष में बीते तीन हफ्तों से फंसी हुई हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा सुनीता और उनके सहयोगी बुच विलमोर की सकुशल वापसी की तमाम कोशिशें कर रही है। एक हफ्ते के इस मिशन तीन बार बढ़ाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि नासा मिशन को 45 से 90 दिनों तक के लिए बढ़ा सकता है। 5 जून को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान में हीलियम की लीकेज की समस्या आई थी। साथ ही इसके 5 थ्रस्टर भी खराब हो गए थे। यहां तक कि यान को बिजली देने वाला सर्विस मॉड्यूल में भी दिक्कतें आई हैं। इस बारे में हमने बात की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक विनोद कुमार श्रीवास्तव से, जिन्होंने कई अहम जानकारी शेयर की। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, सुनीता और उनके सहयोगी जिस स्पेसक्रॉफ्ट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे हैं। यह स्पेस स्टेशन अमेरिका और रूस की संयुक्त कोशिश का नतीजा है। जिस कैप्सूल से अंतरिक्ष यात्रियों को वहां भेजा जाता है, उसे भेजने के लिए थ्रस्टर्स का यूज करते हैं। थ्रस्टर्स मिनी रॉकेट होते हैं, जिन्हें फायर किया जाता है। हीलियम गैस रॉकेट के टैंक को प्रेशराइज्ड किया जाता है और जरूरत के मुताबिक दबाव के अनुसार ये फायर किया जाता है। हीलियम को हाई प्रेशर पर रखा जाता है।

हीलियम को कई टैंकों में रखा जाता है, जिसे हाई प्रेशर पर इन टैंकों में रखा जाता है। यानी कम जगह में ज्यादा गैस रखी जाती है। इसे आमतौर पर 300-400 किलो पर सेंटीमीटर वर्ग में स्टोर किया जाता है। इंजन को कंट्रोल करने और रॉकेट को फायर करने के लिए हीलियम को उच्च दाब से निम्न दाब पर लाया जाता है। ये हीलियम गैस बॉटल में स्टोर है। एक्सपर्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, हीलियम नापने के लिए हीलियम लीक डिटेक्टटर सेंसर्स होते हैं, जो यान के इंजन में फिट होते हैं। ये जो बुलबुला निकल रहा है, उसे ही लीक कहा जाता है। इसे खुली आंखों से देखा नहीं जा सकता है। अगर महीने भर भी लीक होता है तो भी मिशन में खराबी नहीं आ सकती है। ये लीकेज 10 हजार लीटर में चंद बूंदों जितनी होती हैं, जिनके निकलने पर यान में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। हां, ये है कि बाद में ये समस्या और बढ़ सकती है।

गैस सिलेंडर तकनीकी रूप में कहा जाता है। मुंह पर वॉल्व लगा होता है, वो बंद होता है। इस गैस में 300 से 400 किलोग्राम पर सेंटीमीटर वर्ग प्रेशर होता है। जैसे कार के टायर में हवा भरी होती है। यानी कम जगह में ज्यादा गैस भरी जाती है। जहां ज्यादा गैस होती है, उसे रिलीज कर दिया जाता है। उसका इस्तेमाल थ्रस्टर में किया जाता है। ISS पर मौजूदा वक्त में 8 कैप्सूल डॉक किया जा सकता है। अभी वहां पर रूस का ही कैप्सूल मौजूद है, जो इमरजेंसी में काम आता है। पहले अमेरिका का भी कैप्सूल होता था। मगर, अभी सारे कैप्सूल रूस के ही हैं। ये कैप्सूल स्टेशन पर डॉक हैं। अगर खराब से खराब स्थिति आती है तो रूस का कैप्सूल वहां पर है, जिससे एकसाथ 5 अंतरिक्ष यात्री धरती पर लौट सकते हैं। 5 यात्री स्टेशन पर हैं, जबकि बाकी सुनीता और बुच के आने से स्टेशन पर 7 यात्री हो गए हैं।

एक वक्त में स्टेशन पर ऐसे 8 पोर्ट हैं, जहां कैप्सूल लगा सकते हैं। अभी की तारीख में दो कैप्सूल हैं, जिसमें से एक रूस का है। चूंकि अमेरिका और रूस के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं, इसलिए अमेरिका अभी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है। अमेरिका के पास 45 से 72 दिन का समय है, जिसमें वो यान की खामी में सुधार कर सकता है। यह भी हो सकता है कि स्टारलिंक के पास भी इमरजेंसी सिचुएशन के लिए एक कैप्सूल हो, जिसका अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर लाने में किया जा सकता है। स्पेस स्टेशन के मेनटेनेंस के लिए 2025 तक के एक एग्रीमेंट के अनुसार, हर 6 महीने में रूस को स्पेस स्टेशन पर कैप्सूल भेजना होता है। अगर अमेरिका अपनी कोशिश में नाकाम रहता है तो वह रूस से इस बारे में आग्रह कर सकता है। वह खाली कैप्सूल स्टेशन पर भेजेगा और यात्रियों को धरती पर लेकर आएगा। जब कैप्सूल को अनडॉक किया जाता है तो कम से 15-16 थ्रस्टर को एकसाथ फायर करना होगा। अनडॉक करने के लिए गैस से थ्रस्ट पैदा करते हैं, वो जब स्पेस स्टेशन से दूर चला जाता है तब थ्रस्टर्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा नहीं करने पर अगर फायर कर दिया तो स्टेशन को नुकसान पहुंच सकता है।

धरती पर एंट्री करने के दौरान यान एक विशेष एंगल से प्रवेश करता है। यह एंगल 94.71 डिग्री से लेकर 99.80 डिग्री तक होता है। हर एंट्री एंगल से धरती के वातावरण में प्रवेश करने के बाद कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा पूरा जल जाएगा और नीचे का हिस्सा, जिसमें यात्री रहते हैं वो पैराशूट से नीचे आ जाते हैं।

कंचनजंगा ट्रेन हादसे पर क्या बोली ममता बनर्जी?

हाल ही में ममता बनर्जी ने कंचनजंगा ट्रेन हादसे पर एक बयान दिया है! पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में हुए रेल हादसे में घायल यात्रियों से राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुलाकात की। सीएम ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनका हाल जाना। घायलों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशंका जताई कि कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसा बड़ा हो सकता था। ममता ने यह भी कहा कि राज्य प्रशासन आज सुबह से ही पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और वह खुद इसकी निगरानी कर रही हैं। ममता ने यह भी कहा कि वह सुबह से ही उत्तर बंगाल जाने की कोशिश कर रही थीं हालांकि टिकट नहीं मिला। ममता ने कहा कि अस्पताल पहुंचकर मैंने मरीजों से मुलाकात की है। हमने लोकल विधायक को कहा है कि आप घटनास्थल पर जाइए और जो भी करना है करिए। हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दस-दस लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है।

इसके अलावा गंभीर रूप से घायल यात्रियों को ढाई-ढाई लाख और मामूली रूप से घायल यात्रियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है।बता दें कि ड्राइवर को नींद आ जाए तो भी अलार्म बज जाएगा। अगर दोनों ट्रेनें करीब आईं तो वे इसे रोक देंगे। आज ममता बनर्जी को यह टिप्पणी करते हुए सुना गया कि रेलवे ‘संरक्षक विहीन’ हो गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज सुबह कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना के मद्देनजर एक्स हैंडल पर पोस्ट किया था। दउत्तर बंगाल जाने की कोशिश कर रही थीं लेकिन विमान नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि उड़ानों की इतनी दुर्दशा मुझे नहीं मालूम थी। सुबह 12:40 की फ्लाइट बुक है। फिर बीच में कोई उड़ान नहीं है लेकिन हमने फ्यूल चार्ज फ्री दिया। अब मैं सोचूंगी।रअसल पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में सोमवार सुबह करीब नौ बजे एक मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी थी। यह हादसा रंगापानी स्टेशन के पास हुआ। लोगों ने महज दो से तीन घंटे में पूरा रेस्क्यू कर लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दमदम एयरपोर्ट पर कहा कि भारत सरकार को खबर तक नहीं लगी तभी से हमारा प्रशासन सक्रिय था। हम तुरंत घटनास्थल पर एंबुलेंस भेजते हैं। भारत सरकार को खबर तक नहीं लगी तभी से हमारा प्रशासन सक्रिय था। हम तुरंत घटनास्थल पर एंबुलेंस भेजते हैं। यह हादसा रंगापानी स्टेशन के पास हुआ।डॉक्टर भेजते हैं।

मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की व्यवस्था करते हैं। हम पूरा काम करते हैं। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह सुबह से ही उत्तर बंगाल जाने की कोशिश कर रही थीं लेकिन विमान नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि उड़ानों की इतनी दुर्दशा मुझे नहीं मालूम थी। सुबह 12:40 की फ्लाइट बुक है। फिर बीच में कोई उड़ान नहीं है लेकिन हमने फ्यूल चार्ज फ्री दिया। अब मैं सोचूंगी।

हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि वह दुर्घटनास्थल पर नहीं जाएंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि वह इसके बजाय उत्तर बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज में जाएंगी। टकराव रोधी उपकरण के बारे में बात करते हुए ममता ने कहा कि यह हर ट्रेन में लगाया गया था। अगर ड्राइवर को नींद आ जाए तो भी अलार्म बज जाएगा। अगर दोनों ट्रेनें करीब आईं तो वे इसे रोक देंगे। आज ममता बनर्जी को यह टिप्पणी करते हुए सुना गया कि रेलवे ‘संरक्षक विहीन’ हो गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज सुबह कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना के मद्देनजर एक्स हैंडल पर पोस्ट किया था।

हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दस-दस लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल यात्रियों को ढाई-ढाई लाख और मामूली रूप से घायल यात्रियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है। दरअसल पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में सोमवार सुबह करीब नौ बजे एक मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी थी।यह हादसा रंगापानी स्टेशन के पास हुआ। लोगों ने महज दो से तीन घंटे में पूरा रेस्क्यू कर लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दमदम एयरपोर्ट पर कहा कि भारत सरकार को खबर तक नहीं लगी तभी से हमारा प्रशासन सक्रिय था। हम तुरंत घटनास्थल पर एंबुलेंस भेजते हैं। यह हादसा रंगापानी स्टेशन के पास हुआ।

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया और ममता बनर्जी ने क्या कहा?

हाल ही में एक मंच सांझा करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और ममता बनर्जी ने एक बयान दे दिया है! पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का न्यायपालिका को दर्द सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के क्षेत्रीय सम्मेलन में हाथ जोड़कर कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए और शुद्ध, ईमानदार होना चाहिए। ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी करते हुए प्रार्थना की तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) चंद्रचूड़ मंच पर मौजूद थे। बता दें कि न्यायपालिका हमारे संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक, न्याय की किरण और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की आधारशिला के रूप में खड़ी है। ऐसे समय में पहले से कहीं अधिक हमें किसी भी राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त होकर, अपनी न्यायिक प्रक्रियाओं की शुद्धता और ईमानदारी को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। ममता बनर्जी ने जजों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे अपने परिवार का हिस्सा समझें। सीजेआई ममता बनर्जी की तरफ देखने लगे। ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी की तो वह काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को असहज करने करने का नहीं है लेकिन न्यायपालिका को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए। सीजेआई ममता बनर्जी की तरफ देखने लगे। ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी की तो वह काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को असहज करने करने का नहीं है लेकिन न्यायपालिका को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए।ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद लिखा है कि मुझे राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिला, जहां हमने समसामयिक न्यायिक विकास और हमारी न्यायपालिका की मजबूती पर सार्थक चर्चा की। भा

रत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ का हमारे बीच होना सौभाग्य की बात थी। न्यायपालिका हमारे संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक, न्याय की किरण और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की आधारशिला के रूप में खड़ी है। ऐसे समय में पहले से कहीं अधिक हमें किसी भी राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त होकर, अपनी न्यायिक प्रक्रियाओं की शुद्धता और ईमानदारी को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। ममता बनर्जी ने जजों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे अपने परिवार का हिस्सा समझें। सीजेआई ममता बनर्जी की तरफ देखने लगे। ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी की तो वह काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को असहज करने करने का नहीं हैममता बनर्जी ने जजों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे अपने परिवार का हिस्सा समझें। सीएम ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में विकास के कार्यों के कुछ केस लड़े हैं।

ममता बनर्जी ने आगे लिखा कि लोग न्यायपालिका में अत्यधिक विश्वास रखते हैं, इसे निष्पक्षता और सच्चाई के स्रोत के रूप में देखते हैं। यह वह विश्वास है जिसका हमें सम्मान और सुरक्षा करनी चाहिए। न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के सम्मानित न्यायाधीशों और अन्य दिग्गजों की उपस्थिति और योगदान ने इसे सफल बनाया। पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों ममता बनर्जी ने ओबीसी की लिस्ट रद्द करने पर कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर दिया था। बता दें कि ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी करते हुए प्रार्थना की तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ मंच पर मौजूद थे। सीजेआई ममता बनर्जी की तरफ देखने लगे। ममता बनर्जी ने जब यह टिप्पणी की तो वह काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को असहज करने करने का नहीं है लेकिन न्यायपालिका को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए।

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद लिखा है कि मुझे राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिला लोकसभा चुनावों में जब हाईकोर्ट के जस्टिस रहे अभिजीत गांगुली बीजेपी से चुनाव लड़े थे, तो तो ममता बनर्जी की अगुवाई की तृणमूल कांग्रेस ने काफी निशाना साधा था। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद लिखा है कि मुझे राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिला, जहां हमने समसामयिक न्यायिक विकास और हमारी न्यायपालिका की मजबूती पर सार्थक चर्चा की। भाइतना ही नहीं पार्टी के नेताओं ने उनके द्वारा पारित किए गए आदेश को राजनीतिक करार दिया था। इनमें कई नौकरियों में धांधली से जुड़े फैसले शामिल थे।

पहले भाषण में बीजेपी के लिए क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?

हाल ही में पहले भाषण में मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के लिए एक बयान दे दिया है! राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में अहंकारी नारों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में प्रजा ही मालिक है। देश के इतिहास में यह पहला चुनाव था, जिसमें संविधान की रक्षा मुद्दा बना। बीजेपी ने 400 पार का नारा दिया और उसके कई नेताओं ने तो यहां तक कहा कि बीजेपी संविधान बदलेगी। इस वजह से ‘इंडिया’ गठबंधन को संविधान बचाने की मुहिम चलानी पड़ी। खरगे ने कहा कि जनता ने ये महसूस किया कि बाकी मसले आते-जाते रहेंगे पर संविधान बचेगा तभी लोकतंत्र रहेगा और चुनाव भी होंगे। विपक्ष के नेता ने कहा कि इस सत्र की एक खूबी ये है कि जनादेश के डर से सत्तादल के लोग संविधान का जाप कर रहे हैं।उनमें ऐसे लोग भी हैं, जिनको “जय संविधान” नारे पर भी आपत्ति हो रही है। इसीलिए ये संविधान की रक्षा का मसला अभी भी कायम है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए राज्यसभा के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि “अग्निवीर जैसी अनियोजित और ‘तुगलकी’ योजना लाकर युवाओं का मनोबल तोड़ा गया है और मेरी मांग है कि अग्निवीर योजना को खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति संसद का सबसे अहम हिस्सा हैं, हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। अभिभाषण का कंटेंट सरकारी होता है। सरकार की ओर से यह नहीं बताया गया कि आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाएगा। इस साल राष्ट्रपति का पहला अभिभाषण 31 जनवरी और दूसरा 27 जून को हुआ था। पहला अभिभाषण चुनावी और दूसरा उसी की कापी जैसा था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में न तो कोई विजन और न ही कोई दिशा था। दलित, अल्पसंख्यक वर्ग और पिछड़े वर्ग के लिए कुछ नहीं था। खरगे ने कहा कि यह सरकार बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज करने और विफलताओं को छिपाने में माहिर है।

विपक्ष के नेता ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि दस साल पहले तक ये लोग कहते थे कि मिलीजुली सरकारों से देश की छवि खराब हो रही है। गठबंधन सरकारों को गाली देते थे और कहते थे कि खिचड़ी सरकार है। लेकिन देश की जनता ने इनको अल्पमत में लाकर गठबंधन सरकार बनाने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि ये लोग 400 पार की बात तो करते हैं लेकिन अब तो 200 पार की बात आई है। खरगे ने लोकसभा चुनाव के दौरान पिछले 10 साल के शासन को ‘महज ट्रेलर’ और ‘पिक्चर अभी बाकी है’ बताने वाले बयान के लिए सोमवार को प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। हाल की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि पिछले एक महीने में परीक्षा पेपर लीक, कई परीक्षाओं को रद्द करने, ट्रेन दुर्घटनाएं, जम्मू एवं कश्मीर में तीन आतंकी हमले, राम मंदिर में पानी का रिसाव, तीन हवाई अड्डों की छतों के कुछ हिस्सों का गिरना, टोल टैक्स में वृद्धि और रुपये में ऐतिहासिक गिरावट की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में पेपर लीक के कारण 30 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

सात साल में 70 बार पेपर लीक हुए हैं और इनसे दो करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि चाहे कर्नाटक हो, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर हर जगह तोड़फोड़ कर बीजेपी ने सरकार बनाई। इंडिया गठबंधन के दो सीएम को जेल में डाला गया। दिल्ली के सीएम अगर एक केस में बाहर आए तो दूसरे केस में फंसा दिया गया। उन्होंने कहा कि आज यदि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता होते तो चुनावों में मंगलसूत्र, मुजरा और भैंस चुराने जैसी बातें नहीं होती। उन्होंने कहा कि हम महंगाई पर बात करते हैं तो बीजेपी विदेश में महंगाई के बात करने लगती है। विपक्ष के नेता ने राज्यसभा में आरएसएस के बारे में कुछ टिप्पणियां कीं, जिस पर सभापति जगदीप धनखड़ और सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने आपत्ति जताई। सदन की कार्यवाही से उन टिप्पणियों को हटा दिया गया।

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि बीते एक दशक में संसदीय संस्थाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को लगातार कमजोर किया गया और विपक्ष को नजर अंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सोच में ऐसी संसद थी जिसमें कोई विपक्ष ना हो। ऐसी सोच नहीं होती तो 17वीं लोकसभा में पहली बार डिप्टी स्पीकर का पद खाली नहीं रहता। चुनावी नतीजे ने दिखा दिया है कि देश का संविधान और देश की जनता सब पर भारी है। लोकतंत्र में अहंकारी ताकतों को जगह नहीं है। मणिपुर एक साल से जल रहा है लेकिन पीएम वहां नहीं गए हैं। राज्यसभा में सोमवार को विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का माइक बंद कर दिया गया। इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि इसका क्या मतलब है कि माइक बंद कर दिया। माइक किसी ने बंद नहीं किया, यह ऑटोमैटिक है। उन्होंने कहा कि माइक बंद करने का किसी को अधिकार नहीं है। इस प्रकार की भ्रांति फैलाकर संसद को कलंकित करते हैं।

क्या आमने-सामने हुए स्पीकर ओम बिरला और राहुल गांधी?

हाल ही में स्पीकर ओम बिरला और राहुल गांधी आमने-सामने हो गए! अपने संबोधन में राहुल गांधी लोकसभा स्पीकर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बिरला से कहा कि जब आप स्पीकर चुने गए तो सदन की परंपरा के मुताबिक मैं व पीएम मोदी आपको छोड़ने के लिए आसन तब गए। आपने मुझसे खड़े होकर हाथ मिलाया, जबकि पीएम मोदी को आपने झुककर अभिवादन किया। इस पर स्पीकर ने सफाई दी कि वह अपने संस्कारों और संस्कृति का पालन करते हैं। प्रधानमंत्री सदन के नेता हैं। सार्वजनिक जीवन में और व्यक्तिगत जीवन में हमारे संस्कार हैं कि अपने से किसी बड़े से मिलें तो झुककर सम्मान करें, वहीं अपने समान लोगों या उम्र में छोटे लोगों से बराबर से मिलें। मैं इस संस्कृति और संस्कारों का पालन करता हूं। स्पीकर का कहना था कि यह बात मैं आसन से कह सकता हूं। मेरी संस्कृति है कि बड़ों का झुककर सम्मान करें और जरूरत पड़े तो पैर भी छूएं। इस सफाई पर राहुल गांधी ने स्पीकर से कहा कि वह उनकी बात का सम्मान करते हैं। लेकिन इस सदन में आपसे बड़ा कोई नहीं है। यहां आपकी बात आखिरी बात होती है। आप जो कहते हैं, वह भारतीय लोकतंत्र को परिभाषित करता है। सभी को आपका सम्मान करना चाहिए। मैं आपके सामने झुकूंगा और सारा विपक्ष आपके सामने झुकेगा। दूसरी ओर राहुल गांधी द्वारा विभिन्न धर्मों के ईश्वर व महान व्यक्तियों के चित्र सदन में दिखाने को लेकर स्पीकर ने राहुल गांधी से ऐसा करने से बचने की सलाह दी।गलतबयानी का आरोप लगाते हुए कहा कि एमएसपी पर आज भी खरीद जारी है। उन्होंने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह बताएं कि जब उनकी सरकार थी तो एमएसपी पर कितनी खरीदारी होती थी। उन्होंने राहुल को चुनौती देते हुए कहा कि वे सत्यापित करें कि एमएसपी पर खरीदारी नहीं हो रही। इस पर राहुल ने कहा कि बात सिर्फ एमएसपी की नहीं, एसएमपी विद लीगल गारंटी की है। राहुल गांधी के संबोधन के दौरान पक्ष बनाम विपक्ष के बीच खूब आरोप प्रत्यारोप व टीका टिप्पणी हुई। सदन में जहां अहम मुद्दों को लेकर राहुल कभी सरकार पर हमलावर दिखे तो कभी पीएम मोदी व उनकी सरकार पर तंज कसते दिखे, जिस पर सत्तापक्ष विरोध करता तो वहीं विपक्ष राहुल गांधी की चियर करता और मेजें थपथपाकर उनका समर्थन करता दिखा। सत्ता पक्ष की ओर से हाल ही मंडी से चुनकर पहुंची बॉलिवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत भी खूब टीका टिप्पणी करती दिखीं। राहुल गांधी ने जब पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कि रात आठ बजे जब ईश्वर की ओर से पीएम को आदेश हुआ तो कंगना ने तुरंत टोककर कहा कि श्रीराम की ओर से, इस पर राहुल ने कटाक्ष भरे ढंग से मुस्कुराते हुए कहा कि हां श्रीराम की ओर से आदेश हुआ।

राहुल गांधी ने जब किसानों को एमएसपी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार किसानों को एमएसपी नहीं दे रही तो इस आरोप पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी द्वारा गलतबयानी का आरोप लगाते हुए कहा कि एमएसपी पर आज भी खरीद जारी है। उन्होंने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह बताएं कि जब उनकी सरकार थी तो एमएसपी पर कितनी खरीदारी होती थी। उन्होंने राहुल को चुनौती देते हुए कहा कि वे सत्यापित करें कि एमएसपी पर खरीदारी नहीं हो रही। इस पर राहुल ने कहा कि बात सिर्फ एमएसपी की नहीं, एसएमपी विद लीगल गारंटी की है।

जिस वक्त राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद चर्चा प्रस्ताव पर बोलने के लिए राहुल आए तो उस समय दर्शक दीर्घा में उनकी मां व कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। बता दें कि उन्होंने कहा कि बड़ों का झुककर सम्मान करें और जरूरत पड़े तो पैर भी छूएं। इस सफाई पर राहुल गांधी ने स्पीकर से कहा कि वह उनकी बात का सम्मान करते हैं। लेकिन इस सदन में आपसे बड़ा कोई नहीं है। यहां आपकी बात आखिरी बात होती है। आप जो कहते हैं, वह भारतीय लोकतंत्र को परिभाषित करता है। सभी को आपका सम्मान करना चाहिए। मैं आपके सामने झुकूंगा और सारा विपक्ष आपके सामने झुकेगा। आरोप प्रत्यारोप के बीच दोनों बीच बीच में आपस में चर्चा करती दिखीं। इस संबोधन को देखने के लिए लोकसभा की गैलरी में राज्यसभा के कई सांसदों से लेकर बड़े नेता तक बैठे दिखे।

आखिर कैसा रहा राहुल गांधी का पहला संबोधन?

आज हम आपको बताएंगे कि राहुल गांधी का पहला संबोधन आखिर कैसा रहा है! मजबूत विपक्ष की ताकत और बानगी क्या होता है, इसकी एक झलक सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद चर्चा प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन के दौरान दिखाई दी, जहां राहुल गांधी और पीएम मोदी और उनके सरकार के मंत्री आमने-सामने दिखाई दिए। लगभग सवा घंटे संबोधन में राहुल गांधी ने नीट, अग्निवीर, महंगाई, समाज में डर व नफरत जैसे तमाम मुद्दों पर मोदी सरकार व बीजेपी को घेरने की कोशिश की। इस दौरान पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव व संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू को पीएम मोदी के आरोपों पर दखल देना पड़ा। रिजीजू व भूपेंद्र यादव जैसे नेता सदन में नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के आरोपों का विरोध किया। राहुल गांधी ने बीजेपी के हिंदुत्व पर प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग अपने आप को हिंदू कहते हैं वह 24 घंटे हिंसा, नफरत, और असत्य की बात करते रहते हैं। ये हिंदू हैं ही नहीं। आप हिंदू हो ही नहीं। हिंदू धर्म में साफ लिखा है कि सत्य के साथ खड़े होने चाहिए। सत्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। अहिंसा फैलाना चाहिए। इस पर पीएम मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह बात बहुत गंभीर है। पूरे हिंदू समुदाय को हिंसक कहना गंभीर विषय है। इस पर राहुल ने जवाब दिया कि मैंने बीजेपी को हिंसक कहा, नरेंद्र मोदी पूरा हिंदू समाज नहीं है। बीजेपी पूरा हिंदू समाज नहीं है। आरएसएस पूरा हिंदू समाज नहीं है। वहीं एक और मौके पर राहुल गांधी जब सरकार पर हमला बोल रहे थे तो पीएम मोदी ने उठकर कहा कि इस संविधान ने मुझे सिखाया है कि मुझे विपक्ष के नेता को गंभीरता से लेना चाहिए।

राहुल गांधी द्वारा हिंदुओं को हिंसक कहने का प्रतिरोध करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इनको शायद मालूम नहीं है कि करोड़ों लोग खुद को गर्व से हिंदू कहते हैं। क्या वे सभी लोग हिंसा करते हैं। हिंसा की भावना को किसी धर्म के साथ जोड़ना और इस सदन में संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ठीक नहीं है। मुझे लगता है उन्हें इसकी माफी मांगनी चाहिए। साथ ही, राहुल गांधी द्वारा विभिन्न धर्मों में अभय मुद्रा का जिक्र किए जाने पर तंज कसते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं उनसे (नेता प्रतिपक्ष) गुजारिश करना चाहता हूं कि इस्लाम में अभयमुद्रा पर इस्लाम के विद्वानों का एक बार मत ले लें। गुरु नानक साहब की अभयमुद्रा पर एसजीपीसी का मत ले लें। शाह ने राहुल पर पलटवार करते हुए कहा कि इनको अभय की बात करने का कोई हक नहीं है।

आपातकाल में पूरे देश को इन्होंने भयभीत किया है। लाखों लोगों को जेल में डाला गया। वैचारिक आतंक कभी था तो आपका आपतकाल था। रोचक है कि अमित शाह ने राहुल पर आरोप लगाते हुए आसन से कहा कि नेता प्रतिपक्ष (बतौर विपक्ष के नेता) पहली बार सदन में बोल रहे हैं, लेकिन वह नियम से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने स्पीकर से कहा कि हमें आपका संरक्षण चाहिए। सदन ऐसे नहीं चलता। वहीं अमित शाह ने राहुल गांधी से सदन, अग्निवीरों, हिंदू समाज और देश से माफी मांगने की मांग की। राहुल के संबोधन के बाद गृह मंत्री ने खड़े होकर स्पीकर से मांग की कि वह नियमों के मुताबिक राहुल गांधी से अपने भाषण को सत्यापित करने को कहें, क्योंकि कई मंत्रियों ने कहा है कि राहुल गांधी के भाषण में सही तथ्य नहीं हैं।

दूसरी ओर राहुल गांधी ने अग्निवीर योजना को लेकर जब सरकार पर हमला बोला कि इस योजना के जरिए सरकार सेना के जवानों में भेद करती है और ‘अग्निवीरो’ की मृत्यु पर उन्हें शहीद का दर्जा और एक आम सैनिक की तरह उनके परिवारों को पेंशन और सहायता राशि नहीं मिलती। इस पर राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नेता विपक्ष सदन में गलतबयानी कर रहे हैं, जबकि सच यह है कि जान गंवाने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कि अग्निवीर योजना सेना की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के दिमाग की उपज है। इस आरोप पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। रक्षा मंत्रालय ने इस योजना को लागू करने से पहले 158 संगठनों से संवाद किया था। उन्होंने यूके व यूएस का हवाला देते हुए कहा कि कई देशों में ऐसी योजना का प्रावधान है।

राहुल गांधी ने जब किसानों को एमएसपी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार किसानों को एमएसपी नहीं दे रही तो इस आरोप पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी द्वारा गलतबयानी का आरोप लगाते हुए कहा कि एमएसपी पर आज भी खरीद जारी है। उन्होंने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह बताएं कि जब उनकी सरकार थी तो एमएसपी पर कितनी खरीदारी होती थी। उन्होंने राहुल को चुनौती देते हुए कहा कि वे सत्यापित करें कि एमएसपी पर खरीदारी नहीं हो रही। इस पर राहुल ने कहा कि बात सिर्फ एमएसपी की नहीं, एसएमपी विद लीगल गारंटी की है।

अब धोखाधड़ी पर 420 नहीं 318 की धारा लगेगी!

जी हां, अब धोखाधड़ी पर 420 नहीं 318 की धारा लगाई जाएगी! राजकपूर की फिल्म श्री 420 काफी मशहूर हुई थी। आज भी लोग इसे पसंद करते हैं। जरा सोचिये, अगर यह फिल्म अब बनाई जाती तो इस फिल्म का नाम श्री 420 होता? शायद नहीं। इसका नाम श्री 318 होता! दरअसल, धोखाधड़ी और ठगी के लिए आईपीसी में धारा-420 के तहत सजा का प्रावधान है। अब धोखाधड़ी से संबंधित कानून की धारा का क्रम बदल गया है। नई भारतीय न्याय संहिता में धोखाधड़ी और ठगी करने वालों के खिलाफ धारा-318 लगेगी। यानी अब किसी भी ठग या धोखा देने वालों को 420 कहेंगे तो सटीक नहीं होगा। इसी तरह हत्या, रेप, डकैती, चोरी समेत हर धारा का नंबर भारतीय न्याय संहिता में बदल गया है। आईपीसी की दफा 302 बदलकर भारतीय न्याय संहिता में धारा 103 हो गया है। इसी तरह से तमाम बदलाव हुए हैं और बदले कानून के तहत ही अब एक जुलाई से मुकदमा दर्ज होगा और उसी के हिसाब से केस चलेगा। लेकिन, पहले से दर्ज मामले और उसका मुकदमा वैसे ही चलता रहेगा जैसा चल रहा है। क्रिमिनल लॉ में बदलाव के साथ ही आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम जगह लेगी। नए कानून में राजद्रोह को जगह नहीं मिली है लेकिन टेरर एक्ट, संगठित अपराध को भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है।

मौजूदा आईपीसी में 511 धाराएं हैं जबकि नए कानून यानी बीएनएस में 357 धाराएं हैं। करीब 175 धाराओं में बदलाव किया गया है। पुराने औपनिवेशिक काल के कई शब्दावली को हटा दिया गया है। ऐसे करीब 475 शब्दों को डिलीट किया गया है, जिनमें लंदन गजट, ज्यूरी, हर हैनिस आदि शामिल हैं। मॉब लिंचिंग के लिए अलग से प्रावधान किया गया है और मौत की स्थिति में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून में शादी का वादा कर संबंध बनाने को रेप के दायरे से बाहर अलग अपराध बनाया गया है। साथ ही 12 साल तक की बच्ची से रेप में फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, नए कानूनों में पीड़ितों को जहां जल्द से जल्द न्याय मिल सके, इसका प्रावधान किया गया है, वहीं देश में क्राइम करके विदेश भाग चुके दाउद इब्राहिम जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन और गैंगस्टर पर भी देश में ट्रायल चल सकेगा। कानून को विक्टिम सेंट्रिक भी बनाया गया है।

कानूनी जानकार और दिल्ली हाई कोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल संजय लॉ बताते हैं कि एक जुलाई के बाद जब कानून अमल में आएगा तो नया एफआईआर नए कानून के तहत दर्ज होगा और अदालती कार्रवाई भी उसी हिसाब से होगी।

एडवोकेट संजय लॉ बताते हैं कि वकील, पुलिस और जज तीनों को ही दोनों कानून को टिप्स पर रखना होगा। क्योंकि, 30 जून तक दर्ज केस जो देश भर की अदालतों में करोड़ो की संख्या में है उन केसों की सुनवाई पुराने कानून के तहत होगी। नए कानून के तहत दर्ज केस की सुनवाई नए कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। ऐसे में दोनों ही कानून पर हमें पकड़ रखनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विराग गुप्ता बताते हैं कि चूंकि यह मामला समवर्ती सूची का है ऐसे में इस कानून को लागू करने के मामले में राज्यों पर काफी कुछ निर्भर करेगा। लॉ एंड ऑर्डर राज्य का विषय है ऐसे में राज्यों को इसे लागू करना होगा।

कानून की भाषा को लेकर भी विवाद है। हिंदी और संस्कृत शब्द के इस्तेमाल कर तामिलनाडु के सीएम स्टालिन सवाल उठा चुके हैं। और सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक याचिका भी दाखिल हुई है और कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद-348 का उल्लंघन है।

एडवोकेट नवीन शर्मा बताते हैं कि पुराने आईपीसी के बदले नए कानून आने से वकीलो को नए सिरे से सबकुछ पढ़ना होगा, लेकिन जब नया कानून लागू होगा तभी के केस पर यह लागू होगा पुराने मामले मौजूदा कानून के तहत ही चलेंगे। बता दें कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता की अनुल्लंघनीयता को सुदृढ़ करना, पुलिस और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करना, सार्वजनिक पदाधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए बाध्य करना और उन्हें अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ आपराधिक न्याय प्रणाली को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत कर कुछ ऐसे आमूलचूल परिवर्तन हैं, जिनका उद्देश्य भारत के आपराधिक न्याय परिदृश्य में क्रमिक परिवर्तन को सुविधाजनक बनाना है। 

नियम के तहत जब भी कानून बदलता है तो वह भविष्य के केस के लिए होता है उसका भूतगामी प्रभाव नहीं होता।

क्या इंसाफ की समय सीमा हो चुकी है तय?

वर्तमान में इंसाफ की समय सीमा तय हो चुकी है!राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले कृत्यों के लिए नये कानून ने आतंकवादी कृत्य को ऐसी किसी भी गतिविधि के रूप में परिभाषित किया है, जो लोगों में आतंक फैलाने के इरादे से भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता या आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाती है। पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जायेगी और जुर्माना भी देना होगा। 1973 की दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) ने प्रक्रियात्मक कानून में महत्वपूर्ण बदलाव किये हैं। एक महत्वपूर्ण प्रावधान विचाराधीन कैदियों के लिए है, जो पहली बार अपराध करने वालों को उनकी अधिकतम सजा का एक तिहाई हिस्सा पूरा करने के बाद जमानत पाने की अनुमति देता है। अब कम से कम सात साल की सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य है, न्यायसंगत और सामंजस्यपूर्ण समाज के लिए प्रयासरत राष्ट्र की आकांक्षाओं के अनुरूप और भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन और लोगों की बदलती जरूरतों और मूल्यों के अनुरूप विकसित होने की क्षमता का प्रतीक साबित होंगे। पहली बार हमारी आपराधिक न्यायिक प्रणाली भारत द्वारा, भारत के लिए, भारतीय संसद द्वारा बनाये गये कानूनों से चलेगी और पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं के एक नये युग की शुरुआत होगी।जिससे यह सुनिश्चित होगा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थलों पर साक्ष्य एकत्र करें और रिकॉर्ड करें। यदि किसी राज्य में फोरेंसिक सुविधा नहीं है, तो उसे दूसरे राज्य में सुविधा का उपयोग करना होगा।

नये कानून में भारत में आपराधिक न्याय प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन किये गये हैं। विधेयक में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के लिए विशिष्ट समयसीमा निर्धारित की गयी है। बलात्कार पीड़ितों की जांच करनेवाले चिकित्सकों को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। बहस पूरी होने के 30 दिनों के भीतर निर्णय सुनाया जाना चाहिए, जिसे 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति की जानकारी देनी होगी। सत्र न्यायालयों को ऐसे आरोपों पर पहली सुनवाई से 60 दिनों के भीतर आरोप तय करना आवश्यक होगा।

साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के संबंध में महत्वपूर्ण अपडेट पेश किये गये हैं। यह कहा जा सकता है कि भारतीय स्वभाव के अनुरूप कानून बनाने की दिशा में, नये आपराधिक कानून और अधिक पीड़ित-केंद्रित बनने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के साथ लाये गये हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में पीड़ितों के अधिकारों को कई तरीकों से परिभाषित और संरक्षित किया गया है, जो पीड़ितों को आपराधिक कार्यवाही में सक्रिय भागीदार बनाता है। 30 से अधिक ऐसे प्रावधान हैं, जो पीड़ितों के अधिकारों को प्रभावी ढंग से प्राथमिकता देते हुए उनकी रक्षा करते हैं।

भारत की क्षेत्रीय अखंडता की अनुल्लंघनीयता को सुदृढ़ करना, पुलिस और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करना, सार्वजनिक पदाधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए बाध्य करना और उन्हें अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ आपराधिक न्याय प्रणाली को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत कर कुछ ऐसे आमूलचूल परिवर्तन हैं, जिनका उद्देश्य भारत के आपराधिक न्याय परिदृश्य में क्रमिक परिवर्तन को सुविधाजनक बनाना है।

आईपीसी (1860), सीआरपीसी (1973) और आइईए (1872) ब्रिटेन की संसद, लंदन गजट, कॉमनवेल्थ, हर मेजेस्टी ऑर द प्रिवी काउंसिल, ‘हर मेजेस्टी गवर्नमेंट, कोर्ट ऑफ जस्टिस इन इंग्लैंड, हर मेजेस्टीज़ डोमिनियन आदि जैसी शब्दावली से भरे हुए थे। आजादी के 76 साल बाद भी राष्ट्र के प्राथमिक आपराधिक कानून में इस भाषा का बने रहना एक उपहास था, जिसे बहुत लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।

नये आपराधिक कानूनों को पेश करना और संस्कृत नाम भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम ब्रिटिश राज से विरासत में मिली भारत की विरासत का अंत है और भारतीय लोकाचार के पुनरुत्थान की शुरुआत है। इन नये कानूनों को लेकर भविष्य के कई प्रश्न भी उपजेंगे, बावजूद इसके सकारात्मक उम्मीद की जानी चाहिये कि ये कानून एक अधिक न्यायसंगत और सामंजस्यपूर्ण समाज के लिए प्रयासरत राष्ट्र की आकांक्षाओं के अनुरूप और भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन और लोगों की बदलती जरूरतों और मूल्यों के अनुरूप विकसित होने की क्षमता का प्रतीक साबित होंगे। पहली बार हमारी आपराधिक न्यायिक प्रणाली भारत द्वारा, भारत के लिए, भारतीय संसद द्वारा बनाये गये कानूनों से चलेगी और पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं के एक नये युग की शुरुआत होगी।

क्या अब हो चुका है नए युग का आगाज?

वर्तमान में तीन नए कानून से नए युग का आगाज हो चुका है! देश में आज आधी रात से ब्रिटिश हुकूमत के तीन आपराधिक कानूनों का अंत हो गया। भारतीय संसद द्वारा बनाये गये नये कानून के साथ एक जुलाई का अरुणोदय, भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक नये युग का आगाज है। आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में तीन नये कानून भारतीय न्याय संहिता बीएनएस, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता बीएनएसएस और भारतीय साक्ष्य अधिनियम बीएसए एक जुलाई से लागू होंगे। ये कानून क्रमशः औपनिवेशिक युग के भारतीय दंड संहिता आईपीसी, दंड प्रक्रिया संहिता सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लिया। नये आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद एफआईआर से लेकर अदालत के निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है और भारत अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में आधुनिक तकनीक का सबसे अधिक इस्तेमाल करने वाला देश बन गया। यह कानून तारीख-दर-तारीख के चलन की समाप्ति सुनिश्चित करेंगे और देश में एक ऐसी न्यायिक प्रणाली स्थापित होगी, जिसके जरिये तीन वर्षों के भीतर न्याय मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।

भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, जवाबदेह, भरोसेमंद और न्याय प्रेरित बनाने का प्रयास है। 600 से अधिक संशोधनों और कुछ जोड़ने एवं हटाने के साथ आपराधिक कानूनों को पारदर्शी, आधुनिक और तकनीकी तौर पर कुशल ढांचे में ढाला गया है, ताकि वे भारत की आपराधिक न्याय व्यवस्था को कमजोर करनेवाली मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हों। तीनों नये आपराधिक कानून को वर्ष 2023 में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। नये कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस, जांच और न्यायिक व्यवस्था का चेहरा बदल जायेगा। कई तरह के मामलों में इन कानूनों का व्यापक असर पड़ेगा।

नये कानूनों में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गयी है। सूचना दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी होगी। अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से समन की तामील की जा सकेगी। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आयेगी। कागजी कार्रवाई कम होगी और सभी संबंधित पक्षों के बीच समुचित संवाद सुनिश्चित होगा। नये कानूनों में जांच, ट्रायल और अदालती कार्यवाहियों में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। नये कानूनों में पेश किये गये कुछ ठोस संशोधन केवल आरोपियों को दंडित करने के बजाय पीड़ित को न्याय देने को प्राथमिकता देकर हमारी सामूहिक चेतना को पुन: व्यवस्थित करने का प्रयास करते हैं।

पीड़ित, गवाह और बड़े पैमाने पर जनता के अधिकारों और भलाई की रक्षा के लिए कुछ खास चीजें जोड़ी गयी हैं और संशोधन किये गये हैं। इन तीनों कानूनों में जीरो एफआईआर, ऑनलाइन शिकायत एवं इलेक्ट्रानिक माध्यम से समन और सभी जघन्य अपराधों में घटना स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी का प्रावधान शामिल हैं। कोई भी व्यक्ति थाने जाये बिना घटना की ऑनलाइन शिकायत कर सकेगा। पीड़ित क्षेत्राधिकार की चिंता किये बिना देश के किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज करा सकता है। सबूत एकत्र करने के दौरान घटना स्थल की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी करायी जायेगी, ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न की जा सके। पीड़ित और आरोपी दोनों को ही एफआईआर की कॉपी, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट, बयान, स्वीकारोक्ति समेत मामले से जुड़े अन्य कागजात 14 दिन के भीतर हासिल करने के हकदार होंगे।

मामले को बेवजह लंबा नहीं खींचा जा सके, इसकी भी व्यवस्था की गयी है। कोई भी अदालत मामले को अधिकतम दो सुनवाई तक ही टाल सकती है। गवाहों की सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम किया गया है। इसके लिए सभी राज्य सरकारों को अनिवार्य रूप से गवाह सुरक्षा योजना लागू करनी होगी। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए बीएनएस में नया अध्याय जोड़ा गया है।

कई धाराएं और प्रावधान बदल गये हैं। आईपीसी में 511 धाराएं थीं, अब 356 बची हैं। 175 धाराएं बदल गयी हैं। आठ नयी जोड़ी गयीं, 22 धाराएं खत्म हो गयी हैं। इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं बची हैं। 160 धाराएं बदली गयी हैं, नौ नयी जुड़ी हैं, नौ खत्म हुई हैं। पूछताछ से ट्रायल तक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रावधान हो गया है, जो पहले नहीं था। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम तीन साल में देना होगा। भारतीय न्याय संहिता में 20 नये अपराध जोड़े गये हैं। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान। डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं। आईपीसी में मौजूद 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है। 33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ा दी गयी है। 83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ा दी गयी है। छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।

भारतीय न्याय संहिता 163 साल पुरानी आईपीसी की जगह ली है, जिससे दंड कानून में महत्वपूर्ण बदलाव आयेंगे। सजा के रूप में सामुदायिक सेवा एक उल्लेखनीय परिचय है। यौन अपराधों के लिए कड़े कदम उठाये गये हैं। कानून में उन लोगों के लिए दस साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है जो शादी का वादा करके धोखे से यौन संबंध बनाते हैं। संगठित अपराध में अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरन वसूली, भूमि हड़पना, अनुबंध हत्या, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध और मानव, ड्रग्स, हथियार या अवैध सामान या सेवाओं की तस्करी शामिल है। वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए मानव तस्करी, संगठित अपराध के रूप में परिभाषित करते हुए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भौतिक लाभ के लिए हिंसा, धमकी, डराने-धमकाने, जबरदस्ती या अन्य गैरकानूनी तरीकों से अंजाम दिये गये अपराधों के लिए कड़ी सजा दी जायेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले कृत्यों के लिए नये कानून ने आतंकवादी कृत्य को ऐसी किसी भी गतिविधि के रूप में परिभाषित किया है, जो लोगों में आतंक फैलाने के इरादे से भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता या आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाती है। पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जायेगी और जुर्माना भी देना होगा।