Wednesday, March 4, 2026
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क्या कोबरा सांप के काटने से हो सकता है नशा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कोबरा सांप के काटने से नशा हो सकता है या नहीं! चरम सुख, बेकाबू यौन इच्छा, मदहोशी और परमानंद की तलाश या कहें कोकीन से कई मायनों में बेहतर अनुभव। ‘स्नैकबाइट’ यानी ‘ड्रैगन ड्रॉप्स’ या ‘K72’ से नशे का आनंद लेने वालों से बात कीजिए, उनके वर्णन का कुछ यही अंदाज मिलेगा। यूं तो दिल्ली-एनसीआर में पार्टी के लिए ऐसे मादक पदार्थों की कोई कमी नहीं होती है लेकिन यूट्यूबर एल्विश यादव की गिरफ्तारी से इसकी चर्चा तेज हो गई। इसकी उपलब्धता और असर के बारे में सोशल मीडिया पर बढ़ती बातचीत के कारण पुलिस सावधान है। उधर, नशीली दवाओं के कारोबार पर नजर रखने वाली एजेंसियां भी काफी सक्रिय रहती हैं। वो सांप पकड़ने वालों और इसके जहर का कारोबार करने वालों पर पैनी नजर रखते हैं, बावजूद इसके वो संगठित गैंग या कार्टेल तक पहुंच नहीं पाते हैं। वो अब तक पता नहीं कर पाए कि आखिर कौन सा गैंग या कार्टेल सांपों के जहर के कारोबार में जुटा है। उनका कहना है कि उन्हें केवल एक पार्टी में सांप के जहर की बिक्री के अकेले मामले का पता चला है।

अधिकारियों ने कहा कि कुछ साल पहले ऐसे मामले सामने आए थे जहां उन्हें एक्सटैसी और अन्य ड्रग्स के कारोबार में लिप्त पेडलर्स के फोन में फरीदाबाद, ग्वालपहाड़ी और पश्चिमी यूपी के कुछ इलाकों के कई सांप पकड़ने वालों के नंबर मिले थे। एक सूत्र ने कहा, ‘लेकिन हमें अभी तक इस व्यापार में लगे किसी संगठित कार्टेल का पता नहीं चला है।’ मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘K ड्रग लगभग एक दशक से बाजार में है और इसकी मांग बढ़ रही है, खासकर वेलेंटाइन डे के आसपास। नशेड़ी पहले वोदका या जिन में एक पाउडर मिलाते थे और अब वो धीरे-धीरे सीधे सांप के जहर तक पहुंच गए।’ पुलिस ने कहा कि बड़े पैमाने पर वितरण के लिए कार्टेल द्वारा दवा को नहीं अपनाने के कई कारण थे। एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘ग्राहक आधार बहुत विशिष्ट है और कीमत अधिक है – कोकीन से कहीं अधिक महंगा – जिससे सभी आयु समूहों के लिए इस दवा को प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है।’

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि नशे के लिए स्टूडेंट्स के बीच कई तरह के सिंथेटिक ड्रग्स और केमिकल्स का प्रचलन है, लेकिन वो K72/76 भी ले रहे हैं, इसकी आशंका बहुत कम है। पेडलर्स से पूछताछ से जानकारियों के आधार पर लगता है कि K72/76 की सबसे ज्यादा मांग वर्किंग प्रफेशनल और बिजनसमेन के बीच है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘ऊंची कीमत के कारण इसे बहुत खास लोग ही खरीद पाते हैं। एक हिट की कीमत 35 से 50 हजार रुपये के बीच होती है। ऐसे मामले सामने आए हैं जहां नशेड़ी को यह कम कीमत में मिला है, लेकिन वह जहर आसानी से उपलब्ध सांपों के रहे हैं। कोबरा और करैत के जहर की बहुत मांग है और इन्हें खरीद पाना बहुत कठिन है।’

पुलिस ने कहा कि K72/76 लेने वाले ज्यादातर लोग वो हैं जो कॉलेज टाइम या उससे भी पहले से ही नशे के आदि हो गए। सूत्र ने कहा, ‘वैसे तो रेव या पार्टियों के दौरान कई बार लोग संगी-साथी के दबाव में इसका यूज कर लेते हैं, लेकिन इसका यूज करने वाले अधिकरत लोग वो होते हैं जिन्हें यूजुअल ड्रग्स से बहुत ज्यादा नशा नहीं चढ़ता है। इसलिए, नए स्तर के आनंद की तलाश उन्हें सांप के जहर तक पहुंचा देती है।’

K72/76 की एक खास बात यह है कि यह शरीर से बाहर का परमानंद दिलाता है। इसी वजह से यह 2010 और 2012 के बीच बैंकॉक और इबीसा में डिस्को में बहुत लोकप्रिय हो गया। सांप पकड़ने वालों और इसके जहर का कारोबार करने वालों पर पैनी नजर रखते हैं, बावजूद इसके वो संगठित गैंग या कार्टेल तक पहुंच नहीं पाते हैं। वो अब तक पता नहीं कर पाए कि आखिर कौन सा गैंग या कार्टेल सांपों के जहर के कारोबार में जुटा है। उनका कहना है कि उन्हें केवल एक पार्टी में सांप के जहर की बिक्री के अकेले मामले का पता चला है।उस समय ‘न्यू लव ड्रग’ के रूप में इसका प्रचार किया गया था। कुछ ही समय में, इसने भारत में भी अपना रास्ता खोज लिया। पहले-पहल संभवतः विदेशी पर्यटक ही इसे हमारे देश में लेकर आया करते थे।

क्या अब पेट्रोल पंप पर भी होगी चार्जिंग स्टेशंस की व्यवस्था?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब पेट्रोल पंप पर भी चार्जिंग स्टेशंस की व्यवस्था होगी या नहीं! इलेक्ट्रिक कार की कीमत अब धीरे-धीरे घटने लगी है। बीते फरवरी महीने में ही टाटा मोटर्स ने अपने इलेक्ट्रिक कार के दो मॉडलों की कीमत में करीब सवा लाख रुपये तक की कटौती की थी। बताया जा रहा है कि कई इलेक्ट्रिक कार की कीमत अब पेट्रोल कार के बराबर हो गई है। लेकिन ई-कार के खरीदारों को जो सबसे बड़ा टेंशन होता है, वह इसकी चार्जिंग की है। एक बार घर से निकल गए तो फिर ईवी चार्जिंग स्टेशन मिले ना मिले, क्या ठिकाना। ऐसे कार मालिकों के लिए बड़ी खबर आई है। यह खबर आई है पेट्रोल पंप चलाने वाली सरकारी कंपनियों की तरफ से। ये कंपनियां देश भर में करीब 15,000 पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन खोल ली हैं या खोलने वाली हैं। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस समय इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी ऑयल कंपनियों के 14,450 पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन खुल चुके हैं। एक साल पहले चार्जिंग सुविधा वाले पंपों की संख्या महज 6,700 ही थी। मतलब कि यह एक साल में ही दोगुनी से अधिक हो गई है। उल्लेखनीय है कि देश में जितने पेट्रोल पंप हैं, उनमें 95 फीसदी पंप इन्हीं सरकारी कंपनियों के हैं। शेष पांच फीसदी की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के कंपनियों की है। इनमें रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी के पास ईवी चार्जर वाले अधिकांश निजी क्षेत्र की कंपनियों के पेट्रोल पंप हैं। यदि सबमें देखें तो भारत में इस समय करीब 89,000 पेट्रोल पंप चल रहे हैं। इनमें से 17% पंपों पर अब ईवी चार्जिंग सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। देश में पेट्रोलियम ईंधन के सबसे बड़े रिटेलर इंडियन ऑयल के पास ईवी चार्जिंग की सुविधा वाले 8,760 फिलिंग स्टेशन हैं। इस कंपनी के पास अभी कुल 32,000 पंप हैं। मतलब कि इस कंपनी के करीब एक चौथाई पंपों पर ईवी चार्जिंग फैसिलिटी है। इस समय एचपीसीएल के 3,050 पंप और बीपीसीएल के 2,640 पंपों पर भी ईवी चार्जिंग की सुविधा है।

पेट्रोल पंप चलाने वाली कंपनियां आंख मूंद कर तो पेट्रोल पंप पर ईवी चार्जिंग फैसिलिटी डेवलप कर नहीं रही हैं। इसके लिए वे डायवर्स स्ट्रेटेजी पर काम काम कर रही हैं। कुछ कंपनियां कुछ हाईवेज पर फोकस कर रही हैं तो कुछ कंपनियां कुछ इलाकों पर, जहां ईवी की संख्या ज्यादा है। ये कंपनियां बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी बना रही हैं जहां मुख्य रूप से टू व्हीलर और थ्री व्हीलर को सुविधा मिलेगी।

सरकारी तेल कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन तो खोल दिया है, लेकिन उसका उपयोग बहुत कम हो रहा है। एक सरकारी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारिक सूत्र का कहना है कि इस समय ईवी चार्जिंग स्टेशनों पर क्षमता का उपयोग बहुत कम है। देखा जाए तो इन दिनों मुख्य रूप से टू व्हीलर ही चार्ज हो रहे हैं। उनका कहना है “यदि आपके पास पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं नहीं हैं, तो लोग ईवी नहीं खरीदेंगे। और यदि आपके पास सड़क पर पर्याप्त ईवी नहीं हैं, तो चार्जिंग सुविधाओं का सीमित उपयोग होगा। यह मुर्गी और अंडे की समस्या है। हालांकि, हम चार्जिंग समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंततः ईवी बिक्री को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

सरकारी ऑयल कंपनियां यथा इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने अपने 22,000 पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग सुविधाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। अभी तक करीब 15 हजार पंपों पर यह सुविधा बनाई जा चुकी है। मतलब कि उन्होंने अपने लक्ष्य का दो-तिहाई हासिल कर लिया है। उनके स्टेशनों में स्लो और फास्ट चार्जर का मिक्स होता है। उन्होंने चार्जिंग बुनियादी ढांचे के निर्माण और संचालन के लिए कार निर्माताओं, फ्लीट मालिकों और बिजली कंपनियों के साथ भी समझौता किया है। कुछ तेल कंपनियां पंपों से परे चार्जिंग बुनियादी ढांचे का भी संचालन कर रही हैं।

सरकार चाहती है कि लोग पारंपरिक ईंधन वाले मोटर वाहनों के बजाए ईवी खरीदे। इसलिए तो केंद्र सरकार की तरफ से ईवी को मिलने वाली सब्सिडी की अवधि बढ़ाई गई। मतलब कि इस कंपनी के करीब एक चौथाई पंपों पर ईवी चार्जिंग फैसिलिटी है। इस समय एचपीसीएल के 3,050 पंप और बीपीसीएल के 2,640 पंपों पर भी ईवी चार्जिंग की सुविधा है।इसका असर भी दिखा। साल 2023 के दौरान भारत में लगभग 1.53 मिलियन इलेक्ट्रिक व्हीकल बेचे गए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 50% अधिक है। इनमें लगभग 860,000 टू व्हीलर, 580,000 थ्री व्हीलर और 82,000 कारें शामिल थीं।

आखिर कितने प्रकार के होते हैं पासपोर्ट? जानिए दुनिया में पाए जाने वाले अलग-अलग पासपोर्ट की कहानी!

दुनिया में अलग-अलग रंग के अलग-अलग प्रकार के पासपोर्ट पाए जाते हैं, जिनका उपयोग आप एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए करते हैं. लेकिन एक सवाल जो सभी के मन में उठता है वह यह कि आखिर भारत में कितने रंग के पासपोर्ट पाए जाते हैं तथा उन पासपोर्ट के अलग-अलग रंग होने का कारण क्या है? तो आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं,आपको बता दें कि आप अपने पासपोर्ट के बारे में तो सब कुछ जानते होंगे, लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि इन पासपोर्ट के रंग हर देश में अलग-अलग क्यों होते हैं? वैसे तो दुनियाभर में केवल चार रंग के ही पासपोर्ट है – रेड, ग्रीन, ब्लू और ब्लैक, लेकिन इन रंगों का अपना महत्व है। आज हम आपको पासपोर्ट के इन अलग-अलग रंगों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां देने वाले हैं। दुनियाभर में ज्यादातर पासपोर्ट के स्टैंडर्ड रंग चार ही हैं, लेकिन इनके शेड्स और वेरिएशन हजारों हैं। कई देश हैं, जो इन चारों रंग के पासपोर्ट भी अपने यहां जारी करते हैं।

पहला रंग लाल, लाल रंग का पासपोर्ट ज्यादातर उन देशों ने अपनाया है, जिनका साम्यवादी इतिहास रहा है या अभी भी साम्यवादी सिस्टम है। लाल रंग का पासपोर्ट दुनिया में सबसे लोकप्रिय है। यूरोपीय संघ के सदस्यों क्रोएशिया को छोड़कर ने “यूरोपीय संघ के देशों के लिए एक सामान्य पासपोर्ट मॉडल” पेश करने के लिए ये लाल रंग का पासपोर्ट चुना है। सोल्वेनिया, चीन, सर्बिया, रूस, लात्विया, रोमानिया, पोलैंड और जॉर्जिया के नागरिकों के पास लाल रंग के पासपोर्ट हैं। यूरोपीय यूनियन में शामिल होने के इच्छुक देश जैसे तुर्की, मखदूनिया और अल्बानिया ने भी कुछ साल पहले लाल रंग के पासपोर्ट को अपनाना शुरू किया है। साथ ही बोलिविया, कोलंबिया, अक्वॉडर और पेरू के पास भी लाल रंग का पासपोर्ट है। लाल रंग के पासपोर्ट के बाद अब रंग आता है नीला, ये रंग पासपोर्ट के लिए दुनिया में दूसरा सबसे आम रंग है। नीला रंग “नई दुनिया” का प्रतिनिधित्व करता है। अमेरिकी महाद्वीप के देश नीले रंग को विशेष रूप से पसंद करते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, कोस्टा रिका, अल सल्वाडोर ब्राजील, कनाडा, वेनेजुएला, ग्वाटेमाला, पराग्वे, उरुग्वे, जैसे देशों के पास नीला रंग का पासपोर्ट है। आपको बता दें, 15 कैरिबियाई देशों के पास नीला रंग का पासपोर्ट है। अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट के नीले रंग को 1976 में अपनाया गया था। अब बात हरे रंग के पासपोर्ट की…. बता दे कि ज्यादातर मुस्लिम देशों के पास हरे रंग के पासपोर्ट हैं क्योंकि इस रंग को पैगंबर मुहम्मद का पसंदीदा माना जाता है। इन देशों में मोरक्को, सऊदी अरब और पाकिस्तान आते हैं, जिनके पास हरे रंग का पासपोर्ट है। मुस्लिम धर्म में हरा रंग प्रकृति एवं जीवन का प्रतीक है। ग्रीन कई पश्चिम अफ्रीकी देशों, जैसे नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट, बुर्किना फासो, घाना और सेनेगल के साथ-साथ पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय के सदस्यों से भी संबंधित है। आखरी में बात काले रंग के पासपोर्ट की, तो बता दे कि बहुत ही कम देशों के पासपोर्ट का रंग काला है, काला रंग का पासपोर्ट अपनाने वाले देशों ने बेहद ही दुर्लभ रंग अपनाया है।

यह रंग मलावी, ताजिकिस्तान गणराज्य, डोमिनिकन गणराज्य और त्रिनिदाद और टोबैगो की पसंद है। कुछ अफ्रीकी देशों जैसे बोत्सवाना, जांबिया, बुरुंडी, गैबन, अंगोला, कॉन्गो, मलावी एवं अन्यों का पासपोर्ट काले रंग का होता है। न्यूजीलैंड के नागरिकों के पास भी काले रंग का पासपोर्ट देखा जा सकता है, क्योंकि ये उनका राष्ट्रीय रंग है। अगर भारत की बात करे तो भारतीय पासपोर्ट कुल तीन अलग-अलग रंगों का होता है. नागरिकों के महत्व से लेकर इन पासपोर्ट का असल मकसद भी अलग होता है. नीले, सफेद और मैरून रंग के पासपोर्ट भारत में पाए जाते हैं…. यूरोपीय यूनियन में शामिल होने के इच्छुक देश जैसे तुर्की, मखदूनिया और अल्बानिया ने भी कुछ साल पहले लाल रंग के पासपोर्ट को अपनाना शुरू किया है। साथ ही बोलिविया, कोलंबिया, अक्वॉडर और पेरू के पास भी लाल रंग का पासपोर्ट है। लाल रंग के पासपोर्ट के बाद अब रंग आता है नीला, ये रंग पासपोर्ट के लिए दुनिया में दूसरा सबसे आम रंग है।बता दें कि नीले रंग के पासपोर्ट को देश के आम लोगों के लिए बनाया गया है. जबकि सफेद रंग के पासपोर्ट को किसी सरकारी काम की वजह से विदेश जाने वाले आधिकारिक व्यक्ति को दिया जाता है… वहीं भारत के डिप्लोमैट्स और सीनियर अधिकारियों को ही मरून रंग का पासपोर्ट जारी किया जा सकता है. इनमें आईएएस और सीनियर आईपीएस रैंक के अधिकारी शामिल होते हैं!

आखिर शहरों के नाम के पीछे क्यों लगाया जाता है “पुर” शब्द? जानिए क्या है इस “पूर” शब्द का महत्व!

आज हम आपको शहरों के पीछे लगने वाले पुर शब्द का प्रयोग बताने वाले हैं… भारत में कई शहर और कई गांव है… जिनके अलग-अलग नाम है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई ऐसी शहर है, जिनके नाम के पीछे पुर शब्द का प्रयोग किया जाता है… जैसे जयपुर, रायपुर, कानपुर, गंगापुर… लेकिन आखिर ऐसा क्यों है कि उनके पीछे पुर शब्द का प्रयोग किया जाता है…. तो आज हम आपको इसी पुर शब्द का महत्व बताने वाले हैं! आपको बता दें कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, और इस विशाल लोकतांत्रिक देश में कई शहरों का अपना ऐतिहासिक महत्व है. इन शहरों के नाम से भारत की पहचान पूरे विश्व में होती है. भारत में कई ऐसे शहर और गांव हैं, जिनके नाम में आपने शायद “पुर” शब्द देखा होगा. जैसे, जयपुर, रायपुर, रामपुर, कानपुर आदि. लेकिन क्या आपको पता है कि इन जगहों के नाम में “पुर” शब्द का अर्थ क्या होता है? तो आज हम आपको यही बताने वाले हैं…. तो बता दे कि पुर” शब्द को प्राचीन काल से ही भारतीय शहरों के नाम में शामिल किया जाता है और यह शब्द आमतौर पर नाम के अंत में प्रयोग होता है.

प्राचीनकालीन दौर में, कई राजा महाराजों ने अपने नाम के साथ “पुर” शब्द जोड़कर शहरों के नाम रखे थे. उदाहरण के लिए, जयपुर शहर का निर्माण राजा जयसिंह ने कराया था. उन्होंने अपने नाम के साथ “पुर” को जोड़कर शहर का नाम जयपुर रखा था. इसी तरह अन्य शहरों के नामों में भी “पुर” शब्द का प्रयोग किया जाता है…. पुर” शब्द का अर्थ होता है “शहर” या “किला”. इस शब्द का प्राचीन संस्कृत में प्रयोग होता था, और इसे कई वर्षों तक भारतीय शहरों के नाम में जोड़ा जाता रहा है. प्राचीनकाल में, राजा-महाराजाओं ने अपने राज्य की राजधानी और अन्य महत्वपूर्ण शहरों को उनके नाम के साथ “पुर” शब्द से सम्बोधित किया. इसे उनकी संघर्षों, यद्यपि इतिहास में बदलते युगों के साथ, अपने मूल्यवान और सांस्कृतिक विरासत का संकेत माना जाता है. बस समय के साथ अलग अलग शहरों और गांवों में नाम में ये शब्द जुड़ता चला गया. आज न जाने कितने शहरों और गांवों के नाम में यह शब्द जुड़कर उनकी पहचान बना हुआ है.वैसे शहरों के नाम भी उस जगह की किसी खास चीज पर ही रखा जाता है. अधिकतर शहरों के नाम की भी कोई ना कोई हिस्ट्री होती है और उस नाम में कोई ना कोई राज छुपा होता है. ऐसे ही पुर, गढ़ या आबाद लगाने का भी एक कारण है और इस वजह से यह शहरों के पीछे लगाया जाता है. तो आइए जानते हैं इन पुर, गढ़ और आबाद लगाने का क्या मतलब है.

बता दें कि अक्सर किसी शहर या किसी स्थान का नाम रखने के लिए एक खास शब्द के पीछे किसी स्थान विशेष के लिए उपयोग होने वाले शब्द लगा दिए जाते हैं. जैसे- कई शहरों के नाम के पीछे नगर आदि लगा होता है और इसे छोटे स्तर पर देखें तो वास, मोहल्ला आदि लगाया जाता है. ऐसे ही पुर का इस्तेमाल भी किया जाता है. दरअसल, पुर शब्द का मतलब होता है शहर या किला. इसका जिक्र ऋग्वेद में मिलता है और ऐसे में किसी खास नाम के पीछे पुर लगाकर उस शहर का नाम रख दिया जाता है.कुछ भाषा-विद्वानों का मानना है कि “पुर” शब्द का प्रयोग अरबी भाषा में भी होता है. पुर और गढ़ के अलावा आपने कई शहरों के नाम के पीछे आबाद लिखा देखा होगा. दरअसल, यह एक फारसी शब्द है और यह आब शब्द से बना है. ये उन शहरों के लिए इस्तेमाल होता है जो फसल के लिए काफी योग्य जगह हो. साथ ही कई शहर में मुगल सल्तनत की छाप छोड़ने को लेकर शहर के पीछे आबाद शब्द लगा दिया जाता था. जिस तरह शहरों के नाम के पीछे पुर लगता है, वैसे आबाद लगा दिया जाता है. जैसे-फिरोजाबाद, इलाहाबाद.इस कारण से अफगानिस्तान और ईरान के कुछ शहरों में भी “पुर” शब्द का उपयोग किया जाता है… शब्द को प्राचीन काल से ही भारतीय शहरों के नाम में शामिल किया जाता है और यह शब्द आमतौर पर नाम के अंत में प्रयोग होता है.यानी अगर सीधी बात करें तो पुर का उपयोग अपने नाम के पीछे लगाने से वह क्षेत्र उस राजा का माना जाता था… इसलिए हर राजा अपने नाम के पीछे पुर लगाकर उस क्षेत्र को अपना बताता था! 

आखिर क्या है शराब घोटाला मामला? क्या है इसका पूरा सच?

आज हम आपको शराब घोटाला मामला के बारे में सब कुछ जानकारी देने वाले हैं… हाल ही में शुक्रवार के दिन तेलंगाना के पूर्व सीएम चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है… जिसके बाद यह सवाल उठने लगे कि आखिर आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और के कविता जब यह तीनों बड़े नेता इस मामले में अगर शामिल है… तो आखिर यह शराब घोटाला मामला है क्या? और इसमें इतने हाई प्रोफाइल नेता कैसे जुड़े? आपको बता दें कि तेलंगाना के पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी और BRS नेता के कविता को शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया. के कविता को ईडी ने दिल्ली के कथित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. इससे पहले ईडी की टीम ने शुक्रवार को उनके आवास पर छापेमारी की थी. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है.  बता दें कि के कविता को हैदराबाद से दिल्ली लाया जा रहा है, जहां जांच एजेंसी उनसे पूछताछ करेगी. उधर, के कविता की गिरफ्तारी के बाद उनके भाई केटी रामा राव और उनके पिता केसीआर उनके आवास पर पहुंच गए हैं…. चलिए आगे जानकारी दें, उससे पहले आपको बताते हैं कि आखिर यह शराब घोटाला है क्या? तो आपको बता दे कि केजरीवाल सरकार ने 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई शराब नीति लागू की थी. सरकार ने तर्क दिया था कि इस नीति से रेवेन्यू बढ़ेगा और ब्लैक मार्केटिंग पर भी लगाम लगेगी और यह ग्राहकों के लिए भी नीति फायदेमंद होगी. हालांकि, यह नीति जल्द ही विवादों में आ गई और इसमें घोटाले का आरोप लगा. 30 जुलाई, 2022 को केजरीवाल सरकार ने इसे वापस ले लिया. दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को आरोपों पर रिपोर्ट सौंपी.रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि नीति को गलत तरीके से तैयार किया गया और कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. इसके बाद इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए गए. ईडी आबकारी नीति में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच कर रही है. .. तो यह तो था यह हाई प्रोफाइल मामला शराब घोटाला मामला…. लेकिन, अब आपको बताते हैं कि आखिर इस मामले में किस-किस नेता की गिरफ्तारी हो चुकी है? तो आपको बता दें कि दिल्ली के शराब नीति मामले में अब तक कई नेताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है. ईडी ने नवंबर 2022 में आप के कम्यूनिकेशन इंचार्ज और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ओनली मच लाउडर के पूर्व सीईओ विजय नायर को गिरफ्तार किया था. 26 फरवरी, 2023 को मनीष सिसोदिया और 5 अक्टूबर को संजय सिंह की गिरफ्तारी हुई. इनके अलावा, पर्नोर्ड रिकर्ड के पूर्व कर्मचारी मनोज राय, इंडोस्पिरीट के मालिक समीर महेंद्रू, बड्डी रिटेल के मालिक अमित अरोड़ा, अरविंदो ग्रुप के प्रमोटर पी सरथ चंद्र रेड्डी, रिकॉर्ड इंडिया के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख बेनॉय बाबू और साउथ ग्रुप के सदस्य अभिषेक बोनपल्ली भी गिरफ्तार हो चुके हैं. इस मामले में अकाली दल के पूर्व विधायक के बेटे गोतम मल्होत्रा, चैरियट प्रोडक्शन के डायरेक्टर राजेश जोशी और साउथ ग्रुप के सदस्य राघव मागुंटा का नाम भी सामने आ चुका है….आइए अब बताते हैं कि आखिर के कविता के ऊपर कौन-कौन सी धाराएं लगी है? बता दे कि ईडी के मुताबिक, दिल्ली शराब नीति घोटाले में ‘साउथ ग्रुप’ भी शामिल था, जिसमें के कविता ने अहम भूमिका निभाई थी. ईडी के मुताबिक, इस ग्रुप में हैदराबाद के व्यवसायी सरथ रेड्डी, वाईएसआर कांग्रेस सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, उनके बेटे राघव मगुंटा रेड्डी  भी शामिल थे. इतना ही नहीं इस कार्टेल की अगुआई व्यवसायी अरुण पिल्लई और अभिषेक बोइनपल्ली और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट बुचीबाबू ने की थी. ईडी ने के कविता की गिरफ्तारी के बाद बयान जारी कर बताया कि उन्हें PMLA के सेक्शन 3 और सेक्शन 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है…. दिल्ली के कथित शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के बाद ये तीसरी हाई प्रोफाइल गिरफ्तारी है. सिसोदिया और संजय सिंह आम आदमी पार्टी के नेता हैं और अभी जेल में बंद हैं. इसके अलावा इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी जांच के घेरे में हैं. केजरीवाल ईडी के सभी हालिया समन पर पेश नहीं हुए. इस मामले में कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है…. यानी सीधी सी बात यह है कि शराब घोटाला एक बड़ा मामला बनता जा रहा है…. जिसमें बड़े-बड़े नेताओं की गिरफ्तारी हो रही है और अभी होनी बाकी है! 

रिपोर्ट में कहा गया है कि तापसी पन्नू ने उदयपुर में मैथियास बो से शादी की.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि तापसी पन्नू ने उदयपुर में मैथियास बो से शादी की और बॉलीवुड में एक के बाद एक शादियां कर रही हैं। हाल ही में रकुल प्रीत सिंह की शादी हुई है, कृति खरबंदा भी शादी के बंधन में बंध गईं। इस बार इस लिस्ट में शामिल हुईं एक्ट्रेस तापसी पन्नू। एक्ट्रेस ने चुपचाप शादी कर ली. एक अखिल भारतीय मीडिया का दावा है कि तापसी ने 23 मार्च को शादी कर ली है। बॉयफ्रेंड बैडमिंटन स्टार मैथियास बोए हैं। कुछ दिनों से तापसी की शादी की अफवाहें सुनने को मिल रही थीं। अगर उनसे शादी के बारे में कोई भी सवाल पूछा जाए तो वह या तो उसे टाल देते हैं या फिर नाराजगी जाहिर करते हैं। लेकिन इस बार ना तो तापसी और ना ही मैथियास ने उदयपुर में अपनी शादी की खबरों पर कोई टिप्पणी की है. डेनमार्क का यह बैडमिंटन खिलाड़ी करीब 10 साल से तापसी के साथ रिलेशनशिप में है। इतने सालों के प्रेम संबंध के बाद भी उन्होंने कभी किसी प्रेमी को इस तरह सबके सामने नहीं लाया। तापसी ने कुछ महीने पहले पहली बार इस रिश्ते पर मुहर लगाई थी। लेकिन, तापसी हमेशा अपनी जिंदगी को लेकर काफी शांत रही हैं। एक्ट्रेस को अपने बारे में ज्यादा बातें करना पसंद नहीं है. वह अभिनय संबंधी खबरों को छोड़कर अपने जीवन को गुप्त रखना पसंद करते हैं। इसलिए तापसी अपनी शादी के बारे में बात नहीं करना चाहती थीं। सुनने में आया है कि उनकी प्री-वेडिंग सेरेमनी बुधवार से शुरू हो गई है. उनकी शादी में केवल उनका परिवार और करीबी दोस्त ही मौजूद थे। लगभग 48 घंटे बीत चुके हैं, फिर भी तापसी ने शादी की खबर पर मुहर नहीं लगाई है। नवविवाहित जोड़े की कोई तस्वीर अभी तक जारी नहीं की गई है।

तापसी की शादी में नहीं दिखी सेलेब्स की भीड़! मालूम हो कि शादी में तापसी के ‘दोबारा’ और ‘थप्पर’ के को-स्टार पावेल गुलाटी मौजूद थे। डायरेक्टर अनुराग कश्यप मौजूद रहे. अनुराग तापसी के करीबी दोस्त हैं। उन्होंने ‘मनमर्जिया’, ‘सांड की आंख’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है।

बॉलीवुड में इस वक्त शादी का सीजन है। एक के बाद एक हीरोइनें शादी कर रही हैं। रकुल प्रीत सिंह हाल ही में शादी कर रही हैं। कृति खरबंदा जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। सबसे चर्चित खबरों में से एक है तापसी पन्नू की शादी। ऐसी खबर थी कि अभिनेत्री मई में अपने लंबे समय के बॉयफ्रेंड बैडमिंटन स्टार मैथियास बोवे के साथ शादी के बंधन में बंध रही हैं। हालांकि, न तो तापसी और न ही उनके बॉयफ्रेंड मैथ्यूज ने खुद आधिकारिक तौर पर कुछ भी घोषित किया है। इस बार एक्ट्रेस ने शादी को लेकर खुलकर बात की है. स्पष्ट उत्तर, “मेरे निजी जीवन के बारे में लगातार परेशान होने का कोई मतलब नहीं है। जब आवश्यक होगा मैं स्वयं सूचित कर दूंगा।

सुनने में आया था कि तापसी-मैथियास की शादी का समारोह उदयपुर में होगा. डेनमार्क का यह बैडमिंटन खिलाड़ी करीब 10 साल से तापसी के साथ रिलेशनशिप में है। इतने सालों के प्रेम संबंध के बाद भी उन्होंने कभी किसी प्रेमी को इस तरह सबके सामने नहीं लाया। तापसी ने कई महीनों पहले पहली बार इस रिश्ते पर मुहर लगाई थी। हालांकि, ऐसा नहीं है कि उसने प्रेमी को मना कर दिया. लेकिन तापसी हमेशा अपनी जिंदगी को लेकर काफी शांत रही हैं। और एक्ट्रेस को ज्यादा प्रैक्टिस करना भी पसंद नहीं है. वह अभिनय संबंधी खबरों को छोड़कर अपने जीवन को गुप्त रखना पसंद करते हैं। तापसी को निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बारे में बात करते नहीं सुना गया। नतीजतन, कई लोग यह सुनने के लिए उत्सुक थे कि अभिनेत्री की शादी की खबर सामने आने के बाद तापसी क्या कहती हैं। इस बार एक्ट्रेस ने अपनी शादी को लेकर उठी जिज्ञासा को शांत किया. तापसी ने कहा, वह ऐसा कुछ भी नहीं कर रही हैं जो गैरकानूनी हो। इसलिए लोगों को जानकारी देने की जरूरत नहीं है. जब समय सही लगे तो अपने आप को सब कुछ बताएं। लेकिन उन्होंने इस बात को लेकर अटकलें छोड़ दीं कि एक्ट्रेस शादी कर रही हैं या नहीं. पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘एनिमल’ पर विवाद जारी है। बॉलीवुड सितारे अलग-अलग समय पर इस फिल्म के पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रख चुके हैं. रणबीर कपूर अभिनीत इस फिल्म को लेकर इस बार तापसी पन्नू ने अपना रुख जाहिर किया है.

पिछले साल सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही फिल्म ‘एनिमल’ को लेकर दर्शक दो खेमों में बंट गए हैं। किसी को चित्र पसंद आया. अन्य लोगों ने अत्यधिक हिंसा और स्त्रीद्वेष के लिए संदीप रेड्डी बंगा निर्देशित फिल्म की आलोचना की है। हाल ही में एक इंटरव्यू में तापसी से इस तस्वीर के बारे में पूछा गया। एक्ट्रेस ने कहा, ”मुझे कई लोगों ने इस फिल्म के बारे में कई बातें बताई हैं. मैं स्वयं अतिवादी नहीं हूं. लेकिन हॉलीवुड से तुलना करना भी स्वीकार्य नहीं है.” एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है. उन्होंने तर्क दिया, “हॉलीवुड में, कोई भी फिल्म की कहानी या सितारों की हेयर स्टाइल की नकल नहीं करता है। लेकिन हमारे देश में ऐसा किया जाता है. इसलिए हम ‘गॉन गर्ल’ जैसी फिल्मों के दर्शकों से तुलना नहीं कर सकते।’

हार्दिक का रोहित की पत्नी और बेटी से झगड़ा, ऋत्विक ने क्या किया?

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रविवार के मैच के बाद से ही हार्दिक और रोहित के रिश्ते को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. मुंबई कैंप के माहौल को लेकर संदेह जताया गया है. हार्दिक शायद हालात को देखते हुए माहौल को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं. गुजरात टाइटंस और मुंबई इंडियंस के बीच आईपीएल मैच को लेकर कम से कम तीन अटकलें हैं। नए कप्तान हार्दिक पंड्या और पुराने कप्तान रोहित शर्मा के बीच रिश्ते खराब होते जा रहे हैं. रोहित के साथ मैदान पर मतभेदों के बावजूद, हार्दिक को उनकी पत्नी रितिका सजदे और बेटी समायरा के साथ हल्के-फुल्के मूड में देखा गया।

रविवार को आईपीएल मैच हारने के बावजूद मुंबई इंडियंस के क्रिकेटरों ने सोमवार को रंगों का त्योहार मनाया। हार्दिक का होली खेलते हुए एक वीडियो सामने आया है. इससे पता चलता है कि हार्दिक रोहित की पत्नी रितिका और बेटी समायरा के संपर्क में थे। मुंबई के कप्तान ने रितिका को पीछे से बुलाया. ऋत्विक ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया. इसके बाद उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया. होली की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया। हार्दिक नन्हीं समीरा से भी बातचीत करते हैं। रोहित की बेटी ने मुंबई के कप्तान को पिच में भिगोया.

एक अन्य वीडियो में रोहित अपनी पत्नी, बेटी और दोस्तों के साथ खेलते भी नजर आ रहे हैं. भारतीय टीम के कप्तान को काफी खुशमिजाज और खुशमिजाज दिखाया गया है. रविवार के मैच के बाद से ही हार्दिक और रोहित के रिश्ते को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. मुंबई इंडियंस के खेमे में माहौल को लेकर भी संशय है. सोमवार के दो वीडियो क्रिकेट प्रशंसकों को कुछ आश्वासन दे सकते हैं। शायद हार्दिक स्थिति को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं। रविवार को अहमदाबाद में गुजरात टाइटंस बनाम मुंबई इंडियंस मैच के दौरान भीड़ के एक वर्ग ने हार्दिक पंड्या का मजाक उड़ाया। मुंबई के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के साथ हार्दिक का व्यवहार भी दर्शकों को पसंद नहीं आया। गैलरी में भी उत्साह है. हार्दिक और रोहित के समर्थक भी झगड़ पड़े.

मैदान पर हार्दिक के एक फैसले से रोहित हैरान रह गए. उन्होंने बाउंड्री के पास फील्डिंग के लिए भेजे जाने पर सार्वजनिक रूप से कुछ नाराजगी भी व्यक्त की। क्रिकेट प्रशंसकों के एक वर्ग को हार्दिक का भारतीय टीम के साथ व्यवहार पसंद नहीं आया. खासकर रोहित के फैंस. अहमदाबाद के क्रिकेट दर्शकों का एक वर्ग पहले से ही हार्दिक के गुजरात छोड़कर मुंबई में शामिल होने से थोड़ा नाखुश था। रोहित के साथ ऐसा व्यवहार देखकर उनका गुस्सा और बढ़ गया. उन्होंने हार्दिक का विरोध करना शुरू कर दिया.

रोहित समर्थकों की हरकत देख हार्दिक समर्थक गरम हो गए. क्रिकेट प्रेमियों के दो पक्षों में विवाद शुरू हो गया. तनाव बढ़ रहा है. एक बार तो दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। नरेंद्र मोदी स्टेडियम की गैलरी में क्रिकेट प्रेमियों की मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

घटना में आठ से 10 लोग शामिल नजर आ रहे हैं. हालाँकि, यह ज्ञात नहीं है कि वास्तव में किस कारण से स्थिति उस स्तर तक पहुँची। हालांकि सुरक्षा गार्डों ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया. रविवार को हुए मैच में शुबमन गिल की गुजरात ने हार्दिक की मुंबई को हरा दिया.

वे पिछले दो सीज़न से एक ही टीम में थे। गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पंड्या का सबसे अच्छा हथियार मोहम्मद शमी थे. लेकिन इस बार हार्दिक ने मुंबई में टीमें बदल दीं. हार्दिक बतौर कप्तान अपनी पुरानी टीम गुजरात टाइटंस के खिलाफ हार गए। मैच के बाद शमी ने हार्दिक को मुक्का मारा। उन्होंने उनकी कप्तानी पर सवाल उठाए.

गुजरात के खिलाफ 169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई 6 रन से हार गई। रनों का पीछा करते हुए हार्दिक सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए. उनसे पहले उन्होंने डेवॉल्ट ब्रूइस, तिलक वर्मा, टिम डेविड्स को हराया था। लेकिन हार्दिक आमतौर पर गुजरात के लिए चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। यह बताते हुए कि वह इतने नीचे बल्लेबाजी करने क्यों उतरे, हार्दिक ने दाएं हाथ, बाएं हाथ की जोड़ी के बारे में बात की। शमी ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया.

शमी ने एक क्रिकेट वेबसाइट से कहा, ”मैं बाएं हाथ के बल्लेबाजों, दाएं हाथ के बल्लेबाजों को नहीं समझता। कप्तान को एक कदम आगे रहना चाहिए. उन्हें मैच जीतने की जिम्मेदारी किसी और को देने की बजाय खुद ही यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’ यह कप्तान का काम है. आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं।” इसके बाद शमी ने हार्दिक पर सवाल दागा। उन्होंने कहा, ”हार्दिक, आपने गुजरात के लिए नंबर तीन और नंबर चार पर बल्लेबाजी की है। यदि हां, तो इस मैच में वह सातवें नंबर पर क्यों है? ऐसा करने से आप सारा दबाव अपने ऊपर ले लेते हैं। यदि आप पहले ही उतर जाते तो शायद खेल इतना आगे नहीं बढ़ता। यह उससे पहले ही ख़त्म हो गया होता।”

डोल के कोलकाता में नशे के आरोप में 305 लोग गिरफ्तार, पुलिस ने 46.7 लीटर शराब जब्त कीl

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हर साल डोल और होली के दिन कोलकाता में यातायात उल्लंघन की खबरें आती हैं। बिना हेलमेट के तेज गति से वाहन चलाने का भी आरोप है। इससे हादसा हो गया. झूले के दिन कोलकाता पुलिस सक्रिय. दिनभर शहर में धरपकड़ चलती रही। नशे और उच्छृंखल आचरण के लिए 305 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 46.7 लीटर शराब जब्त की गयी. हर साल डोल और होली के दिन कोलकाता में यातायात उल्लंघन की खबरें आती हैं। बिना हेलमेट के तेज गति से वाहन चलाने का भी आरोप है। इससे हादसा हो गया. ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए लालबाजार सक्रिय है। शहर में अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई. शहर को कई प्रभागों में विभाजित किया गया है और एसी रैंक के एक अधिकारी को प्रत्येक का प्रभार दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शहर में 350 स्थानों पर विशेष पुलिस पिकेट बनाये गये थे. इसके अलावा सादे लिबास में भी पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे. पीसीआर वैन और मोटरसाइकिल से भी गश्त की गयी. महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष बल भी था.

इन सबके बावजूद शहर में सड़क हादसों को पूरी तरह से टाला नहीं जा सका। पुलिस ने मा उदलपूल से एक युवक का शव बरामद किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हादसा सोमवार दोपहर एजेसी बोस रोड से पार्क सर्कस की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ. शव फ्लाईओवर पर औंधे मुंह पड़ा था। माना जा रहा है कि हादसे का शिकार युवक ही हुआ है।अमिताभ ने अपनी पोती नव्या के साथ क्या किया, पानी के नशे में धुत कोई, फूलों से झूलती शिल्पा, बाकी स्टार ने क्या किया?
बॉलीवुड के हीरो और हीरोइन अपने सभी दोस्तों या परिवार के साथ वसंत उत्सव मनाते हैं। उन्होंने उन सभी खूबसूरत पलों को अपने प्रशंसकों के साथ साझा किया। बॉलीवुड में व्यस्तता भरा साल एक तरफ है। वहीं दूसरी ओर रंग भी पहनूंगी. किसी का परिवार. कोई जोड़े में. किसी के साथ या दोस्तों के साथ. जिस तरह से वह जश्न मनाने में कामयाब रहे. किसी के हाथ में स्टार-ड्राय बोतल, किसी के हाथ में टूटा हुआ शरबत। अमिताभ बच्चन से लेकर रणबीर कपूर, शिल्पा शेट्टी, सोहा अली खान, अक्षय कुमार ने कैसे मनाया यह दिन?

अमिताभ-जया: ‘सिलसिला’ में अमिताभ बच्चन ने को-स्टार रेखा को रंग दिया। दरअसल, उनकी होली की साथी हैं उनकी 50 साल पुरानी पार्टनर जया बच्चन। ‘शहंशाह’ ने अपनी पोती नव्या और पत्नी जया के साथ घर के गार्डन में झूले का दिन बिताया. रणबीर-आलिया: ये बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर स्टार कपल में से एक हैं। हालांकि कुछ ही महीनों में उनकी डेढ़ साल की बेटी राहा कपूर माता-पिता की सार्वजनिक लोकप्रियता को मात दे रही हैं। रणवीर-आलिया ने होली का दिन अपने घर के लोगों के साथ रंग खेलकर बिताया। उनके साथ नन्ही राहा भी थी. रणवीर अपनी पत्नी और बेटी के साथ मुंबई के पाली हिल इलाके में एक आलीशान फ्लैट में रहते हैं।

शिल्पा शेट्टी: शिल्पा शेट्टी ने पूरे जोश के साथ खेला। हीरोइन अपने पति राज कुंद्रा, बेटे वियान, बेटी समिशा के साथ होली मना रही हैं।

अक्षय कुमार: अक्षय कुमार की झूला खेलते हुए फोटो सुबह से ही सोशल मीडिया पेज पर वायरल है. परिवार के साथ नहीं, बल्कि टाइगर श्रॉफ और दिशा पटानी के साथ। और फिर से मुंबई के समुद्र तट पर! दरअसल, झूला झूलते हुए उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म बड़े मिया छोटे मिया का प्रमोशन किया। कुणाल-सोहा: एक्ट्रेस सोहा अली खान ने भी अपने परिवार के साथ होली खेली. सोहा अपने पति कुणाल खेमू और बेटी इनाया के साथ बिजी हैं. वह सफेद चूड़ीदार पहनते हैं और उनकी कमर पर लाल रंग का घूंघट बंधा होता है। कुणाल स्वच्छंद का हाफ पैंट और टी-शर्ट पहनता है। सोहर ने इस साल होली का दिन परिवार के साथ बिताया.

रकुल प्रीत-जैकी: शादी के बाद उनकी पहली होली। रकुल प्रीत सिंह ने अपने पति जैकी भगनानी के साथ बेहद पुरानी ड्रेस में तस्वीर दी. उन्होंने एक दूसरे को अबीर के रंग में रंग दिया. विक्की-अंकिता: अंकिता लोखंडे ने भी पति विक्की जैन के साथ होली खेली. सफेद चूड़ीदार पहने हुए, भिन्न-भिन्न रंगों का घूँघट डाले हुए। विक्की भी अपनी पत्नी के साथ रंगों से मेल खाते हुए होली के लिए तैयार हुए। इस साल अंकिता की होली रंग-बिरंगे अबीर, भान के शर्बत, दूल्हे के साथ कुछ अंतरंग पल और दोस्तों के साथ ढेर सारे प्यार में बीती।

केंद्रीय बल क्या कर रहे हैं, कहां हैं, नई गाइडलाइंस के बारे में गृह मंत्रालय को रोजाना रिपोर्ट देनी होगी

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बंगाल में केंद्रीय बलों के मूवमेंट पर दैनिक रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाए। अगले शुक्रवार से हर दिन की रिपोर्ट राज्य बल समन्वय अधिकारी को दी जाएगी। सीआरपीएफ ने दिए ऐसे निर्देश. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों की स्थिति और मूवमेंट की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को ई-मेल और हार्ड कॉपी के जरिए दी जाए. यह कदम इसलिए उठाया जाना है ताकि राज्य में केंद्रीय बलों का सही तरीके से इस्तेमाल हो सके. आयोग ने हर जगह जल्द फोर्स तैनात करने का फैसला किया है.

सीआरपीएफ के दिल्ली कार्यालय के मुताबिक, केंद्रीय बलों के प्रतिनिधि को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और पुलिस महानिदेशक से परामर्श करके यह तय करना होगा कि कहां और कितनी फोर्स तैनात की जाएगी. केंद्र सरकार ने रेलवे से स्पेशल ट्रेनें उपलब्ध कराने को कहा है. उनके द्वारा बताया गया है कि राज्य को वहां बलों की तैनाती के लिए विशेष ट्रेन प्रमुखता से देनी चाहिए. दो चरणों में केंद्रीय बलों की कुल 150 कंपनियां पहले ही राज्य में आ चुकी हैं। पहले चरण में एक मार्च को केंद्रीय बलों की 100 कंपनियां पहुंचीं। 7 मार्च को दूसरे चरण में 50 कंपनी बल और पहुंचे। इन्हें मतदान दिवस की घोषणा से पहले ही राज्य में भेज दिया गया है. उन्होंने जिले में काम भी शुरू कर दिया है। सैनिक इलाके में गश्त कर रहे हैं. आयोग ने दावा किया कि आम लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए राज्य में पहले से ही केंद्रीय बलों को भेजा जा रहा है. ऐसे में चुनाव आयोग ने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में केंद्रीय बलों की 27 और कंपनियां पश्चिम बंगाल आएंगी. इनमें सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की 15 कंपनियां, बीएसएफ (सीमा रक्षक बल) की पांच कंपनियां और सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की सात कंपनियां शामिल हैं। आयोग ने सरकार से अनुरोध किया कि वह केंद्रीय बलों की इन 27 कंपनियों को राज्य में कहां तैनात किया जाएगा, इस पर शीघ्र निर्णय ले.

बीजेपी की कैंडिडेट लिस्ट में कंगना रनौत का नाम, छोटे पर्दे के राम भी हैं शामिल, किस केंद्र से हैं ये उम्मीदवार?
बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पांचवीं सूची जारी की. रविवार को देश भर में कुल 111 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल के 19 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार भी शामिल हैं। इस सूची में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और छोटे पर्दे के अभिनेता अरुण गोविल भी शामिल हैं। गौरतलब है कि अरुण ने एक समय छोटे पर्दे के रामायण टेली सीरियल में अभिनय से लोकप्रियता हासिल की थी।

कंगना हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से पद्म प्रतीक पर चुनाव लड़ रही हैं. अरुण को उत्तर प्रदेश के मेरठ केंद्र से टिकट दिया गया है. उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की घोषणा होते ही कंगना ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट कर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद दिया। पिल्विट में इस बार बीजेपी ने वरुण गांधी को टिकट नहीं दिया. उनकी जगह पूर्व कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद उस सीट से पद्म उम्मीदवार हैं. हालांकि, हालांकि वरुण को टिकट नहीं मिला, लेकिन मेनका गांधी को फिर से उनके पुराने निर्वाचन क्षेत्र सुल्तानपुर से उम्मीदवार बनाया गया। केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन वायनाड में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.

हालाँकि, जिन लोगों के नामों की घोषणा अब तक नहीं की गई है उनमें केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और अश्विनी चौबे उल्लेखनीय हैं। हालांकि, पार्टी के कई नेता और मंत्री इस बार भी अपने पुराने केंद्रों से ही चुनाव लड़ रहे हैं. नित्यानंद राय उजियारपुर, गिरिराज सिंह बेगुसराय, रविशंकर प्रसाद पटना साहिब, जगदीश सेटर बेलगाम, धर्मेंद्र प्रधान संबलपुर, प्रताप सारंगी बालेश्वर, संबित पात्रा पुरी से चुनाव लड़ रहे हैं। भारतीय दिग्गज और उद्योगपति नवीन जिंदल बीजेपी में शामिल हो गए. कुछ ही घंटों में बीजेपी ने लोकसभा उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा कर दी. पूर्व कांग्रेस सांसद अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र कुरुक्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे।

नवीन जिंदल हरियाणा के कुरूक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद हैं। नवीन 2004 से 2014 तक लगातार 10 साल तक कुरुक्षेत्र से सांसद रहे. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2004 और 2009 में लगातार दो लोकसभा चुनाव जीते। लेकिन 2014 में नवीन बीजेपी के उम्मीदवार से हार गए. वह 2019 में चुनाव में खड़े नहीं हुए। हालांकि, नवीन ने कांग्रेस नहीं छोड़ी. आख़िरकार, यह भारतीय अरबपति 2024 के लोकसभा चुनाव में पद्मा में शामिल हो गया।

अम्बानी-अडानियों से भाजपा की नजदीकियां जगजाहिर है। इस बार पद्मा ने जिंदल को भी अपने साथ मिला लिया. जिंदल स्टील एंड पावल लिमिटेड के अध्यक्ष नवीन हैं। वह ओपी जिंदल विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं। हालाँकि, नवीन को छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि थी। डलास में टेक्सास विश्वविद्यालय में रहते हुए वह एक छात्र नेता थे। छात्र सरकार के अध्यक्ष होने के अलावा, नवीन को डलास में ‘स्टूडेंट लीडर ऑफ द ईयर’ का सम्मान भी मिला। बाद में उन्होंने अपने पिता के राजनीतिक मामलों को भी संभाला। बाद में वे स्वयं सक्रिय राजनीति में शामिल हो गये।

बच्चन परिवार में रोजाना अशांति की खबरें, ऐश्वर्या-अभिषेक ने कैसे बिताया होली का पर्व!

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विश्व सुंदरी के अभिषेक बच्चन से ब्रेकअप की अटकलें फिर से शुरू हो गई हैं। लेकिन रंग दिवस पर ही सच्चाई सामने आ गई.
दिन-ब-दिन ऐश्वर्या राय बच्चन की अपने ससुराल वालों से अनबन बढ़ती जा रही है। बच्चन परिवार में रोजाना आतंरिक उथल-पुथल की खबरें, अभिषेक बच्चन के साथ विश्व सुंदरी का घर टूटने की अटकलें फिर से शुरू हो गई हैं। लेकिन बच्चन का मुंह बंद है. कानाफूसी चल रही है, उनके पारिवारिक जीवन की उलझनें बढ़ती जा रही हैं या अब चरम पर हैं। सुनने में आया है कि ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या बच्चन के साथ पहले ही बच्चन परिवार का घर छोड़ चुकी हैं। क्या एक्ट्रेस अपनी मां के साथ रह रही हैं? मायानगरी में ऐसी खबर. लेकिन अभिषेक-ऐश्वर्या-जया ने झूले वाले दिन ही सब कुछ साफ कर दिया. बच्चन परिवार की होली एक समय बॉलीवुड में काफी मशहूर थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से इस दिन को परिवार के सभी सदस्य एक साथ मनाते हैं। बाहर से ज्यादा मेहमान नहीं आते हैं। कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि इस साल क्या होगा। जिस तरह से बच्चन परिवार के झगड़े की खबरें हर तरफ हैं। हालाँकि, उन्होंने शत्तूर के मुँह में राख डालकर होलिका जला दी।

अभिषेक की बहन की बेटी नव्या नंदा के सोशल मीडिया पर होलिका दहन समारोह की झलकियां सामने आई हैं। माथे पर अबीर लगाए सफेद सलवार में नव्या। श्वेता-कन्या ने चाचा अभिषेक के माथे पर अबीर लगाकर मनाया होली का त्योहार. श्वेता की एक पोस्ट में ऐश्वर्या की झलक देखने को मिली. लेकिन नव्या ने मामी के साथ कोई तस्वीर पोस्ट नहीं की. बल्कि वो थोड़ा दूर था. इस दिन ऐश्वर्या सफेद कुर्ते में नजर आईं, उनका माथा भी रंगा हुआ था. जया ने गुलाबी सलवार कमीज और गले में सफेद घूंघट पहनकर पूजा की। नव्या द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में श्वेता की झलक भी देखने को मिली. हालाँकि, होलिका दहन के दिन, वे कड़वाहट से उबर गए और फिर से एक हो गए!

बालीपारा में बच्चन परिवार के बवाल की चर्चा सुनने को मिल रही है. ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन का तलाक हो रहा है। सुरगाराम मायानगरी. हालांकि, परिवार से किसी ने भी अभी तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है. इतना ही नहीं, कभी-कभी ऐसा भी सुनने में आया था कि ससुर अमिताभ बच्चन ने भी बाउमा को अपने इंस्टाग्राम से अनफॉलो कर दिया था. हालाँकि, इन सभी घटनाओं के बाद, बच्चन परिवार के सभी लोगों को एक साथ देखा गया है। कभी आर्ची के प्रीमियर पर तो कभी आराध्या बच्चन के स्कूल फंक्शन में. एक बार फिर ऐश्वर्या अपने पति की कबड्डी टीम को चीयर करती नजर आईं. कैमरे के सामने सब कुछ कितना भी सामान्य क्यों न हो, जूनियर बच्चन ने अलग होने की अटकलों को जिंदा रखा हुआ है. एक्ट्रेस का हालिया पोस्ट विवादों में घिर गया है.

अभिषेक और ऐश्वर्या ने पिछले साल अप्रैल में अपनी 16वीं शादी की सालगिरह मनाई थी। लेकिन उसके बाद से उनके परिवार में दरार आ गई है. हालांकि, वेदी में फैली फुसफुसाहट के बावजूद ऐश्वर्या शांत हैं। इन सबके बीच पोस्ट डेब्यू असफलता के साथ हुआ। वह लिखते हैं, “असफलता का डर कभी-कभी सपनों को नष्ट कर देता है। लेकिन उस असफलता से सीखने से सपने सच होते हैं।” जब से अभिषेक की पोस्ट नेट पर चर्चा में है, तब से अभिनेता ने ऐश्वर्या के साथ अपने रिश्ते पर संकेत दिया होगा। लेकिन सच क्या है! ये तो सिर्फ बच्चन परिवार ही जानता है.

उनकी शादी की उम्र करीब 16 साल है. ऐश्वर्या राय बच्चन हाल ही में 50 साल की हो गईं। अभिषेक बच्चन एक्ट्रेस से दो साल छोटे हैं। फिल्म ‘धूम 2’ की शूटिंग के दौरान उनकी दोस्ती हुई और प्यार हो गया। दोस्ती उनके रिश्ते की कुंजी है। दो दशकों के वैवाहिक जीवन के बाद अचानक लय में गिरावट आई। सुनने में आया है कि एक्ट्रेस पहले ही बच्चन परिवार का घर छोड़ चुकी हैं और अपनी बेटी आराध्या बच्चन के साथ अपनी मां के पास रह रही हैं. कुछ दिनों पहले एक इवेंट में अभिषेक की शादी की अंगूठी न होना कई लोगों की नजर में आया था। इसके बाद खबर आई कि अमिताभ बच्चन ने खुद ऐश्वर्या को सोशल मीडिया पर ‘अनफॉलो’ कर दिया है! दिन-ब-दिन बच्चन परिवार में कलह बढ़ती ही जा रही है। अभिषेक-ऐश्वर्या के अलग होने की अटकलें दिन-ब-दिन तेज होती जा रही हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब जूनियर बच्चन हमेशा अपनी पत्नी की तारीफों से भरे रहते थे। हालाँकि, अब स्थिति बदल गई है।