Friday, January 23, 2026
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वर्तमान में बच्चे क्यों कर रहे हैं भयावह हत्याएं?

वर्तमान में बच्चे भयावह हत्याएं करते जा रहे हैं! दिल्ली में एक लड़की हर रोज की तरह अपने भाई को स्कूल से लाने के लिए घर से निकलती है, उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं होता है अगले कुछ मिनटों में उसके साथ क्या होने वाला है। दरअसल स्कूल के पास अचानक एक 16 साल का नाबालिग लड़का उस मासूम पर तेजाब फेंक देता है। हैरान करने वाली बात है कि वह लड़की उसे जानती तक नहीं थी और उसने एसिड से अटैक कर दिया। यह वारदात हर किसी को परेशान कर रही है। हर किसी के मन सवाल उठ रहा है कि लड़के ने एक अनजान लड़की पर तेजाब क्यों फेंका? पुलिस के मुताबिक, इस लड़के का किसी अन्य लड़की से विवाद हुआ था। इसके बाद वो काफी तनाव में था। लड़की से विवाद के बाद उसने गुस्से में आकर किसी अन्य लड़की पर तेजाब फेंक दिया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 326B और 341 के तहत केस दर्ज किया है। यह पूरा मामला दिल्ली के बुराड़ी का है। बुराड़ी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से विडियो ग्राफिक्स बनवाकर आरोपी को पकड़ा। आरोपी इस लड़की को पहले से नहीं जानता था। उसने सामने आई इस लड़की पर अचानक हमला किया। घटना की जानकारी मिलने पर बुराड़ी थाने की पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर घटनास्थल और उसके आसपास सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। उसमें आरोपी के हुलिये को देखा, स्लो मोशन में उसके वीडियो ग्राफिक्स निकाले। जिसके बाद पुलिस आरोपी तक पहुंच पाई। डीसीपी ने कहा, ‘आरोपी के बारे में बताया गया है कि उसने नीली पैंट पहन हुई थी। बैकपैक और एडिडास स्पोर्ट्स जूते पहने हुए थे और चेहरे को सफेद रूमाल से ढका था।’ सावधानीपूर्वक जांच करने के बाद, सीसीटीवी टीम ने अपराध स्थल से लगभग दस मिनट की दूरी पर, लगभग एक किलोमीटर दूर भाग रहे एक लड़के की पहचान की। डीसीपी ने कहा, ‘हालांकि चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन लड़के का दिए गए विवरण से मेल खाता है।’ पीड़िता के इंस्टाग्राम अकाउंट की जांच से 5 संदिग्धों का पता चला जो उसके संपर्क में थे। सभी संदिग्धों की जांच के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली। भागते हुए संदिग्ध के फुटेज का उपयोग करके एक धीमी गति वाला वीडियो तैयार किया गया था, जो टीमों के लिए अतिरिक्त जानकारी प्रदान करता था। क्षेत्र के स्कूलों से, उपलब्ध सुरागों के आधार पर निगरानी के लिए दो को शॉर्टलिस्ट किया गया।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना 24 जनवरी को शास्त्री पार्क एक्सटेंशन में हुई थी। नाबालिग लड़की पर एक युवक ने केमिकल फेंका, जिसकी वजह से उसकी आंख, नाक और गले में चोट आई। घायल लड़की को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी मिल गई। पीड़ित लड़की ने इस घटना के लिए किसी पर शक जाहिर नहीं किया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की, जिसकी जांच करने पर एक लड़के को क्राइम सीन से भागते हुए देखा गया। इस फुटेज में लड़के का चेहरा नजर नहीं आ रहा था। इस बीच पुलिस ने पीड़ित लड़की के इंस्टाग्राम अकाउंट की हिस्ट्री से पांच संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाई। उनकी भूमिका को चेक किया गया। लेकिन वारदात में इनका हाथ नहीं मिला। पुलिस ने इस एरिया के दो स्कूलों की निगरानी शुरू की। सुबह सात बजे से दूसरी शिफ्ट खत्म होने तक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। पुलिस ने एक संदिग्ध को चिन्हित किया। उस लड़के ने क्राइम सीन के नजदीक वाले रास्ते को चुना। आखिर में उसके शरीर की कद-काठी और फुटेज में नजर आए संदिग्ध को देख उसे पकड़ा गया। उससे बातचीत की गई तो उसने अपराध में अपना हाथ होने की बात स्वीकार ली। उसने पानी में कास्टिक पाउडर मिलाकर बोतल में भरने के बाद फेंका था।

नाबालिग लड़की ने बताया कि वह बुधवार को दोपहर करीब 1 बजे अपने 10 वर्षीय चचेरे भाई को स्कूल से लेने गई थी। शास्त्री पार्क एक्सटेंशन पर एक युवक पीड़िता के पास आया और उसने उस पर केमिकल फेंक दिया, जिससे उसकी आंखों, गर्दन और नाक पर खुजली और जलन होने लगी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘पीड़िता को बुराड़ी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।’ पीड़िता ने व्यक्तिगत दुश्मनी, या किसी लड़के के साथ प्रेम संबंध से साफ इंकार किया है। पुलिस ने बताया कि अपराध स्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। पुलिस उपायुक्त मनोज कुमार मीना ने कहा, ‘इस केस को सुलझाने के लिए कई टीमें लगाई गईं। एक टीम ने पीड़िता की प्रोफाइलिंग, उसकी सोशल मीडिया हिस्ट्री, पिछले कॉन्टैक्ट्स और अन्य जानकारी पाने का प्रयास किया। एक अन्य टीम को अपराध स्थल की ओर जाने वाली 6 सड़कों के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करने, संदिग्ध द्वारा उठाए गए संभावित मार्गों का अस्थायी मानचित्र बनाने का काम सौंपा गया था।’ तीसरी टीम, सादे कपड़ों में स्कूलों के पास तैनात हो गई।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं देश में हत्याओं के मामले?

देश में वर्तमान में हत्याओं के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं! हाल ही में रिलीज हुई एनिमल मूवी का यह गीत इतने खून-खराबे के साथ पर्दे पर फिल्माया गया है, शायद ही कमजोर दिल के लोग इसे देख पाएं। हद तो तब हो जाती है जब फिल्म का हीरो विलेन की गर्दन को ISIS के आतंकी की तरह लहुलूहान कर देता है। यहां मसला एक फिल्म का नहीं है, बल्कि मिर्जापुर जैसी तमाम वेब सीरीज और पंजाबी एल्बम सॉन्ग में खुलेआम परोसी जा रही हिंसा का है। दरअसल अब पर्दे पर फिल्माए जा रहे क्राइम सीन आम जीवन में भी देखने को मिल रहे हैं। मामला अब गंभीर होता जा रहा है। ताजा उदाहरण आज ही देखने मिला है। दिल्ली में बेखौफ शूटर ने सैलून में घुसकर एक शख्स की खोपड़ी खोल दी है। इससे पहले फेसबुक लाइव के दौरान एक नेता की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक ने शिवसेना नेता को पुलिस स्टेशन के भीतर गोलियों से भून डाला। यह घटना डरा रही है। आखिर फिल्मी अंदाज में हो रहीं हत्याओं का जिम्मेदार कौन है? यह सवाल अब उठने लगा है। इस सवाल के जवाब में जितनी देरी होगी, उतनी ही जघन्य हत्याओं के मामलों में इजाफा होगा। समाज के अधिकांश बुद्धिजीवी मानते हैं कि इन हत्याओं के पीछे फिल्में और क्राइम वेब सीरीज हैं। उनका तर्क है कि फिल्मों में हीरो को सरेआम मर्डर करते हुए दिखाया जाता है। यह फिल्में और वेब सीरीज अपराध का महिमामंडन करती है। अपराध को ग्लैमर की तरह पेश करती हैं। जिसका सीधा असर लोगों के दिमाग पर पड़ता है। खासतौर पर युवाओं के दिमाग पर। उन्हें लगता है कि हत्या का मॉर्डन स्टाइल कूल है। लेकिन वह इस बात को भूल जाते हैं कि रील और रियल लाइफ में जमीन और आसमान का फर्क है, और अपराध की दुनिया में फंस जाते हैं। सोशल मीडिया साइट्स भी बढ़ते अपराध के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं, क्योंकि सोशल साइट्स पर भी हिंसा को बढ़ावा देने वाली रील दिनभर वायरल होती हैं। हाल ही में पब्लिक प्लेस में हुए मर्डर के कुछ वीडियो तो रोंगटे खड़े करने वाले हैं।

मुंबई में कैमरे पर दनादन फायरिंग और शिवसेना उद्धव गुट के एक नेता की लाइव हत्या का मंजर दहला देने वाला है। फेसबुक पर जिस किसी ने यह खौफनाक वीडियो देखा वह दंग रह गया। लाइव मर्डर की तस्वीरों को देखकर हर कोई दहल गया। मुंबई में हुए इस मर्डर में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के पूर्व नगर सेवक अभिषेक घोषालकर को गोली मारी गई और वो भी फेसबुक लाइव के दौरान।ऐसा मर्डर शायद ही इससे पहले कभी देखा गया हो। वहीं हाल ही में महाराष्ट्र के उल्हासनगर में हिल लाइन पुलिस स्टेशन के अंदर बीजेपी विधायक गणेश गायकवाड़ ने कथित तौर पर शिवसेना नेता महेश गायकवाड़ को गोली मार दी। दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की बीते साल 5 दिसंबर को जयपुर में गोली मार कर हत्या कर दी गई। सुखदेव सिंह को जयपुर के श्यामनगर इलाके में गोली मारी गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। वीडियो में बदमाश फिल्मी स्टाइल में फायरिंग करते हुए सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मौत के घाट उतार देते हैं। सुखदेव सिंह का राजनीति में काफी अच्छा वर्चस्व था। गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथी रोहित गोदारा ने ली।

दिल्ली में बीते साल हत्या की एक घटना को कुछ तरह से अंजाम दिया गया जिसे देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। हत्या की यह घटना तब सुर्खियों में आई जब इसका सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ। दिल्ली के वेलकम इलाके की मजदूर कॉलोनी में घटी हत्या की इस घटना की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सीसीटीवी फुटेज में एक लड़का गली के अंदर से कुछ घसीटकर लाते हुए दिखाई देता है। पहले तो वह कोई भारी सामान जैसा दिखता है, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह किसी व्यक्ति की लाश को घसीट कर ला रहा है। इसके बाद लड़का उस शख्स के ऊपर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला करता है। सीसीटीवी फुटेज में वह करीब 100 बार चाकुओं से हमला करता दिखाई देता है। जब शख्स के जिस्म में कोई हरकत नहीं होती है तो उसे मरा समझकर लड़का डांस करता है। दिल्ली में सरेराह इस तरह की हत्या ने लोगों को झकझोर के रख दिया।

रियल दुनिया के अपराध से पहले फिल्मों और बेव सीरीज में दिखाई जा रही हिंसा पर रोक लगाना बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन सवाल खड़ा होता है कि सेंसर बोर्ड के होते हुए फिल्मों और वेब सीरीज में इतनी हिंसा कैसे दिखाई जा रही है। यहां सरकार की भूमिका पर भी सवालियां निशान लगता है। उधर समाजिक संगठन का भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं हैं। समाज और सरकार के सुस्त रवैये की वजह से फिल्मों में जघन्य अपराध के सीन खुलेआम परोसे जा रहे हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि लोग इन फिल्मों को खूब सराहा भी रहे हैं। ऐसी फिल्मों का कारोबार भी 500-600 करोड़ से ज्यादा का हैं। लेकिन हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि हम हिंसा को ग्लैमर की तरह परोसने वाली जिन फिल्मों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं समाज में भयानक रूप धारण करके वापस आ रही हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले पाकिस्तान रेंजर्स ने जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ पोस्ट पर गोलीबारी की.

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मोदी के दौरे से पहले पाक रेंजर्स ‘सक्रिय’, जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ पोस्ट पर फायरिंग पाकिस्तान रेंजर्स बलों ने बुधवार शाम जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की पोस्ट पर हमला कर दिया। पाकिस्तान में चुनाव का मोड़ आते ही सीमा पर अशांति रोकने की कोशिशें फिर शुरू हो गईं. लेकिन ‘सामान्य प्रवृत्ति’ के अनुसार, सीधा हमला जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर नहीं, बल्कि चिह्नित अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होता है!

पाकिस्तान रेंजर्स ने बुधवार शाम जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की चौकी पर हमला कर दिया. बीएसएफ के मुताबिक, शाम करीब साढ़े पांच बजे मकवाल चौकी को निशाना बनाकर मशीन गन और मोर्टार से हमला किया गया. बीएसएफ के जवानों ने भी पाक हमले का जवाब दिया. हालांकि गोलीबारी करीब 20 मिनट तक जारी रही, लेकिन बीएसएफ का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ. संयोग से, पिछले नवंबर में, संघर्ष विराम समझौते को तोड़ते हुए, पाक बलों ने जम्मू के सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अकारण हमला किया। उस घटना में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 फरवरी को जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे. बीएसएफ का मानना ​​है कि यह हमला उससे पहले की योजना के मुताबिक किया गया है. उन्होंने बांग्लादेशी लड़की के लिए भारत में अपनी मृत मां का चेहरा देखने की पूरी व्यवस्था की। बांग्लादेश सेना ने बीजीबी से बात की और शवों को सीमा पर लाया गया. वहां बेटी जरीना मंडल ने नम आंखों से अपनी मां को अंतिम विदाई दी.

मार्टियारी भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित एक गांव है। उस गांव की एक लड़की जरीना मंडल की शादी बांग्लादेश के गोएशपुर गांव में हुई. तब सीमा पर कंटीले तार नहीं थे. बीएसएफ इतनी सख्त नहीं थी. फलस्वरूप उसका अपने पिता के घर आना-जाना सहज हो जाता था। कंटीले तारों की बाड़ लगने के बाद से वह रास्ता बंद है. जरीना की मां नूरजना मंडल (81) का रविवार को निधन हो गया। खबर बेटी जरीना को जाती है. वह आखिरी बार अपनी मां का चेहरा देखने के लिए तरस रहे थे. बहन की कहानी सुनने के बाद दादा ने बानपुर बीएसएफ कैंप के अधिकारियों से संपर्क किया। सारी बातें सुनने के बाद बीएसएफ ने बांग्लादेश के बीजीबी से संपर्क किया. दोनों सेनाओं के कमांडरों ने तय किया कि नूरजन मंडल के शव को सीमा की ‘जीरो’ लाइन पर ले जाया जाएगा. वहीं बेटी जरीना बांग्लादेश से आएंगी. अंत में शून्य रेखा पर माँ के अंतिम दर्शन करना
मत पीना. मृतक नूरजना मंडल के बड़े बेटे इस्लाम मंडल ने कहा, ”बहन को आखिरी बार अपनी मां का चेहरा देखने का मौका देने के लिए बीएसएफ और बीजीबी को बहुत-बहुत धन्यवाद. हम भी कितने दिन बाद जरीना
कुछ दिन पहले नादिया के कृष्णगंज में बांग्लादेश सीमा के पास एक गृहस्वामी के पिछवाड़े में लगभग 15 किलोग्राम अवैध सोना पाया गया था। ऐसी ही एक घटना हाल ही में मुर्शिदाबाद के जलांगी बॉर्डर पर भी हुई थी. कंटीले तारों की बाड़ से महज 500 मीटर की दूरी पर एक घर की खुदाई से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप निकला। इन दो घटनाओं के आधार पर, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जांचकर्ताओं ने तस्करी की नई तकनीकों की खोज की। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, जवानों को धूल चटाने के लिए तस्करी का सामान अब पिछवाड़े में दफनाया जा रहा है! बाद में मामला ठंडा होने पर सीमा पर निगरानी ढीली होने पर ही उसे गंतव्य तक पहुंचाया जाता है और गंतव्य तक पहुंचाया जाता है।

बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, गुप्त सूत्र से सूचना मिलने के बाद 32वीं बटालियन समेत कोलकाता के राजस्व खुफिया विभाग के अधिकारियों ने नदिया के कृष्णगंज थाने के विजयपुर गांव के एक घर में छापेमारी की. उन्होंने वहां तलाशी ली और 106 सोने के बिस्कुट बरामद किए। उस घटना में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के बाद पता चला कि उस घर में तस्करी के मकसद से बिस्किट छुपाए गए थे. बरामद सोने के बिस्कुट का वजन 14.296 किलोग्राम है। पूछताछ में पकड़े गए लोगों ने बताया कि उन्होंने सोने के बिस्कुट बांग्लादेश के नास्तिपुर गांव के रहने वाले मसूद और नासिर नाम के दो तस्करों से इकट्ठा किए थे. वे इन्हें विजयपुर क्षेत्र के पास गेडे गांव के निवासी संतोष हलदर को देने वाले थे। क्योंकि सीमा पर बीएसएफ बहुत सक्रिय थी इसलिए निगरानी से बचने के लिए सोने के बिस्कुट को कुछ दिनों के लिए तस्कर के घर में छिपा दिया गया था।

बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, एक अन्य घटना में मुर्शिदाबाद के जलांगी थाना क्षेत्र में परशपुर सीमा से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर एक गृहस्वामी के घर में प्रतिबंधित कफ सिरप का भंडार होने की सूचना मिली थी. पूरा घर छान मारा लेकिन कुछ नहीं मिला। लंबी तलाशी और पूछताछ के बाद पिछवाड़े से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया गया. घर के मालिक और मुख्य आरोपी टाइटन मंडल की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया. उससे पूछताछ के बाद पता चला कि वह तस्करों से फेंसिडिल की बोतलें खरीदकर रखता था। इसके बाद इस प्रतिबंधित कफ सिरप की बोतलों को बांग्लादेश में डिमांड पर सप्लाई किया जाता था. इस घटना में उसके खिलाफ मादक पदार्थ तस्करी निषेध के तहत मामला दर्ज किया गया है.

बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, दोनों घटनाओं में एक जैसी प्रवृत्ति देखी गई है, इसलिए सीमा पर नए ऑपरेशन शुरू किए गए हैं। सेना को भी उम्मीद है कि तस्करों की नई रणनीति को जल्द ही नाकाम कर दिया जाएगा. दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के डीआइजी एके आर्य ने कहा, ‘कई मामलों में, रणनीति में बदलाव के कारण सीमा के पास के गांवों के यार्डों से तस्करी का सामान खोदा गया है। पहले तो गति पकड़ना कठिन था, लेकिन कई बंदियों से पूछताछ से नई जानकारी प्राप्त हुई। हमें उम्मीद है कि तस्कर नई तरकीबें खोज लेंगे.

दीपिका पादुकोण को बाफ्टा 2024 में प्रस्तुतकर्ता के रूप में चुना गया.

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इस बार ऑस्कर के बाद स्टेज पर दीपिका! अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने डेविड बेकहम, दुआ लीपा और अतिथि सितारों के साथ प्रस्तुतकर्ता के रूप में 2023 में ऑस्कर में भाग लिया। इस बार बाफ्टर मंच पर नजर आएंगी बॉलीवुड की ‘मस्तानी’. अभिनेत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर खुशखबरी साझा की। दीपिका पादुकोण पहले ही हॉलीवुड में डेब्यू कर चुकी हैं। पिछले साल दीपिका ने ऑस्कर के मंच पर भी कदम रखा था. इस बार दीपिका बाफ्टा स्टेज पर नजर आएंगी. दीपिका ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स के पुरस्कार समारोह में शामिल होंगी। एक्ट्रेस ने मंगलवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर यह खबर दी. ‘बाफ्टा’ समारोह लंदन के रॉयल फेस्टिव ऑडिटोरियम में आयोजित होने जा रहा है।

स्टोरी में दीपिका ने ‘बफ्तार’ का इनविटेशन लेटर भी दिया। 19 फरवरी को दीपिका सिनेमा जगत की उत्कृष्टता का सम्मान करने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलख जगाएंगी. इस मंच पर दीपिका डेविड बेकहम, केट ब्लैंचेट, दुआ लीपा जैसे सितारों के साथ एक ही कतार में नजर आएंगी. दीपिका के एक बार फिर इंटरनेशनल मंच पर आने की खबर से एक्ट्रेस के फैंस खुश हैं. उस दिन के इवेंट में दीपिका क्या पहनेंगी इसे लेकर भी अटकलें चल रही हैं. हालांकि, दीपिका ने अभी तक इस संबंध में कोई अन्य जानकारी नहीं दी है। पूरे देश की नजर इस पर है कि बॉलीवुड की ‘मस्तानी’ 19 तारीख को क्या करेंगी. अभिनेत्री ने 2023 में ऑस्कर मंच पर एक प्रस्तुतकर्ता के रूप में भाग लिया था। दीपिका ने भारतीय फिल्म ‘आरआरआर’ के गाने ‘नाटू नाटू’ के साथ ऑस्कर मंच पर अपने ब्रॉडवे-शैली प्रदर्शन की घोषणा की। उन्होंने पूरे देश को गौरवान्वित किया. इस बार दीपिका की सफलता के ताज में एक नया पंख जुड़ने जा रहा है। वैलेंटाइन डे पर लाल रंग पहनने की योजना बना रहे हैं? उन लोगों के लिए जिन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि विशेष दिन पर कैसे कपड़े पहने जाएं, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पहनावे से प्रेरणा लें। रेड ड्रेस में अनन्या दीपिका की तरह दिख सकती हैं. लेकिन यह सिर्फ अच्छे कपड़े पहनने के बारे में नहीं है। ड्रेस के साथ-साथ आपका मेकअप और हेयर टाई भी आकर्षक होनी चाहिए आप भी दीपिका के बोल्ड लुक में सज सकती हैं। आप बिना ज्यादा मेकअप किए भी बोल्ड लुक ला सकती हैं। पश्चिम एशियाई देशों में पहले ही फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई थी. फिल्म की रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. इस बार ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण स्टारर ‘फाइटर’ के लिए एक नई मुसीबत आ गई है। वायुसेना के एक अधिकारी ने फिल्म के एक खास सीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए निर्माताओं को नोटिस भेजा है।

इंडियन एयरफोर्स फिल्म में रितिक और दीपिका का एक किस सीन है। आगंतुकों को कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक, किस के दौरान दोनों कलाकार एयरफोर्स की वर्दी में नजर आए। परिणामस्वरूप यह स्थिति देश की जनता में वायुसेना के प्रति गलत संदेश भेज सकती है। मालूम हो कि फिल्म के इस सीन पर असम के एक एयरफोर्स अधिकारी ने आपत्ति जताई थी और शिकायत की थी. फिल्म में ऋतिक और दीपिका जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी पर तैनात दो वायु सेना अधिकारियों की भूमिका में हैं। फिल्म में 2019 पुलवामा आतंकी हमले और पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय सेना के ऑपरेशन को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा फिल्म पिछले कुछ सालों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष के बारे में भी बात करती है।

‘फाइटर’ पिछले महीने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रिलीज हुई थी। लेकिन फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 350 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है, जो उम्मीद से काफी कम है. इसी सिलसिले में हाल ही में डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद के कमेंट पर हंसी का दौर शुरू हो गया है. सिद्धार्थ के मुताबिक देश में आने वाले पर्यटकों का एक बड़ा हिस्सा हवाई यात्रा नहीं करता है. इसलिए आम दर्शक फिल्म के कंटेंट से जुड़ नहीं पाते. नवंबर 2007. फरहा खान द्वारा निर्देशित यह फिल्म दिवाली सीजन के दौरान रिलीज हुई थी। उस फिल्म में बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने हीरो का किरदार निभाया था. उनके सामने एक नवोदित अभिनेत्री थीं। इनका नाम है दीपिका पादुकोण. दीपिका ने बॉलीवुड में फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से डेब्यू किया था। पहली ही फिल्म में एक्ट्रेस को शाहरुख के साथ काम करने का मौका मिला। इसके बाद दीपिका को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। दीपिका ने ‘लव आज कल’, ‘कॉकटेल’, ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘तमाशा’ जैसी फिल्मों में काम करके बॉलीवुड में अपनी जगह पक्की कर ली है। डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ में भी उनके काम को सराहा गया है। इसके अलावा शाहरुख के साथ ‘चेन्नई एक्सप्रेस’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’, ‘पठान’ जैसी फिल्मों में काम किया। हाल ही में आई फिल्म ‘जवां’ में भी वह शाहरुख के साथ एक खास रोल में नजर आए थे। शाहरुख उन्हें अपनी फिल्म के लिए ‘लकी चार्म’ मानते हैं। फिल्म में दीपिका हो तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट होती है बिस्वास बदशार! लेकिन शाहरुख नहीं, दीपिका के सपनों का हीरो कोई और है। एक्ट्रेस उस ‘स्टार’ के साथ हिंदी फिल्म में काम करना चाहती थीं। क्या आप जानते हैं कि वह कौन है?

शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को ईडी ने छठा समन भेजा है.

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ED ने केजरी को फिर किया तलब, केंद्रीय एजेंसी ने भेजे छह समन
इससे पहले केजरी पांच बार ईडी के समन को टाल चुके थे। ईडी ने आखिरी बार केजरीवाल को पूछताछ के लिए 2 फरवरी को पांचवां समन जारी किया था। लेकिन वह शामिल नहीं हुए. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल को फिर से तलब किया। छठी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री को पेश होने के लिए बुलाया गया है. ईडी के नोटिस में 19 फरवरी को पेश होने को कहा गया है.

इससे पहले केजरी पांच बार ईडी के समन को टाल चुके थे। ईडी ने आखिरी बार केजरीवाल को पूछताछ के लिए 2 फरवरी को पांचवां समन जारी किया था। लेकिन वह शामिल नहीं हुए. उन्होंने कहा, ”समन अवैध है.” केंद्रीय जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य उसे गिरफ्तार करना है. इससे पहले केजरी को 2 नवंबर, 21 दिसंबर, 3 जनवरी और 13 जनवरी को समन भेजा गया था. वह हर बार अनुपस्थित रहे हैं.

ईडी ने जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इस मामले की सुनवाई 7 फरवरी को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की जज दिव्या मल्होत्रा ​​की अदालत में हुई. सुनवाई के बाद जज ने कहा कि 17 फरवरी को केजरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताना होगा कि वह बार-बार ईडी के समन को क्यों टाल रहे हैं. संयोग से, दिल्ली उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में अब तक आप के दो वरिष्ठ नेताओं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। कथित तौर पर, 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति कई शराब व्यापारियों का पक्ष ले रही थी। इस नीति को बनाने के लिए रिश्वत देने वालों को सुविधा दी जा रही थी। आप सरकार ने उस शिकायत को स्वीकार नहीं किया. हालाँकि, बाद में उस नीति को हटा दिया गया। इन आरोपों के आधार पर दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. पिछले साल अप्रैल में सीबीआई ने मामले की जांच के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को तलब किया था. उनसे नौ घंटे तक पूछताछ की गई. बाद में ईडी ने शराब मामले में अवैध वित्तीय लेनदेन का पता लगाने के लिए एक अलग जांच शुरू की। उन्होंने उस मामले में पूछताछ के लिए केजरी को बार-बार बुलाया है। हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ईडी के समन का एक बार भी जवाब नहीं दिया है. वे आमतौर पर पश्चिम बंगाल में ‘बंधु’ पार्टी सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कहते हैं. पंजाब में सरकार बनने के बाद बंगाल में पार्टी की नई शाखाएँ और राज्य कार्यालय खोले गए, लेकिन राज्य में उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ लगभग न के बराबर हैं। संदेशखाली में महिला उत्पीड़न के आरोप सामने आने के बाद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) भी इसमें शामिल हो गई.

पार्टी के बयान के मुताबिक, संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटना “मध्ययुगीन स्थिति से मिलती जुलती है, जो 21वीं सदी में किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है”। आप नेतृत्व ने राज्य सरकार से देश की न्याय प्रणाली में आशा और विश्वास बहाल करने के लिए दोषियों के खिलाफ ‘कड़ी और त्वरित’ कार्रवाई करने की मांग की।

आरएसपी की महिला संगठन निखिलबंगा महिला संघ और युवा संगठन आरवाईएफ, छात्र संगठन पीएसयू ने आज सोमवार को संदेशखाली जाने की योजना बनाई है. इससे पहले महिला संघ की सचिव सरवानी भट्टाचार्य और अध्यक्ष सुचेता विश्वास ने आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि राज्य महिला आयोग संदेशखाली महिला दुर्व्यवहार मामले में सक्रिय भूमिका निभाए. उन्होंने सोमवार को आयोग से मिलने का समय भी मांगा. पिछले महीने केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें एक पत्र मिला है. उस पत्र में उन्हें सूचित किया गया था कि एक विशेष दल उनसे मिलने आएगा और उन्हें राम मंदिर में रामलला या शिशु राम की मूर्ति के समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगा। केजरीवाल ने कहा, लेकिन बाद में किसी ने उन्हें आमंत्रित नहीं किया। पत्र में आप प्रमुख ने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों से ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह में केवल एक व्यक्ति को आमंत्रित किया गया था। बाद में केजरीवाल ने कहा, बाद में वह पूरे परिवार के साथ राम मंदिर जाना चाहते हैं। आप सूत्रों के मुताबिक वह अगले सोमवार को पार्टी के एक और मुख्यमंत्री मान के साथ अयोध्या जा रहे हैं. पिछले 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. विदेश से भी कई प्रमुख लोग मौजूद थे. 23 जनवरी को राम मंदिर के दरवाजे जनता के लिए खोल दिए गए थे.

असम समान नागरिक संहिता ला सकता है.

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असम के मौजूदा बजट सत्र में राज्य सरकार ने बहुविवाह को रोकने के लिए एक विधेयक की घोषणा की। उन्होंने कहा, समान नागरिक संहिता की राह पर यह बिल लाया जा रहा है. लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने के बाद, असम सरकार भी बहुविवाह को रोकने के लिए एक अलग कानून के बजाय समान नागरिक संहिता विधेयक लाने की सोच रही है।

मुख्यमंत्री हिमंतविस्व शर्मा ने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा कि कैबिनेट बैठक में बहुविवाह विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विस्तार से चर्चा हुई. उनके शब्दों में, ”देश के पहले राज्य के रूप में उत्तराखंड विधानसभा द्वारा यूसीसी पारित करने के बाद हम दोनों कानूनों को मिलाकर एक मजबूत कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं. समान नागरिक संहिता ने बहुविवाह को भी गैरकानूनी घोषित कर दिया। विशेषज्ञ समिति इस मामले को देख रही है. मैं इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व से भी बात करूंगा.”

हालाँकि, विपक्षी यूडीएफ ने असम में समान नागरिक संहिता और बहुविवाह विरोधी कानून लागू करने का विरोध किया। अजमल ने मंगलवार को कहा, ”हम यूसीसी का पुरजोर विरोध करेंगे. हम किसी को भी बहुविवाह प्रथा के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर कोई बहुत छोटा है, उसकी पत्नी यौन गतिविधि या बच्चे पैदा करने में असमर्थ है, तो उनके मामले में बहुविवाह की अनुमति दी जानी चाहिए।” हरिद्वार-हृषिकेश-मायावती के नाम से मशहूर उत्तराखंड विधानसभा ‘समान नागरिक संहिता’ विधेयक पेश करने वाला देश का पहला राज्य है। क्या मोदी, असम, राजस्थान या अन्य भाजपा शासित राज्य शाह के भजन में उसी राह पर चलते हैं, यह एक अलग कहानी है। लेकिन उत्तराखंड अलग है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां के 82.97 प्रतिशत नागरिक हिंदू हैं। इनमें से 20 प्रतिशत हिंदू ब्राह्मण हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में ब्राह्मण आबादी केवल 14 प्रतिशत है। मैंने हिमाचल की भी मानों कान खींची, क्योंकि इन दोनों राज्यों में ब्राह्मणों की संख्या तो बहुत है ही, साथ ही लगभग हर घर से कोई न कोई सेना में है. इन दोनों के बीच, पिछले कुछ वर्षों से पुष्कर सिंह धामी की उत्तराखंड सरकार अक्षमता और अक्षमता का एक पैटर्न स्थापित कर रही थी। लोकसभा चुनाव से पहले ऐन वक्त पर समान नागरिक संहिता को इतने अतिसक्रिय तरीके से आश्चर्यचकित करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था.

ब्राह्मण हिंदू आबादी का 20 प्रतिशत हिस्सा हैं। और गढ़वाल, कुमाऊँ में कुल मिलाकर उत्तराखंड की अनुसूचित जनजातियाँ 18.7 प्रतिशत हैं। जानुसारी, भोटिया, थारूड को मिलाकर 2.89 प्रतिशत और जुड़ जाएगा। उत्तराखंड विधानसभा द्वारा प्रस्तावित नियमों में जनजाति को शामिल क्यों नहीं किया गया, यह इस बार जरूर स्पष्ट हो गया है। वोट की राजनीति!

वोट की राजनीति कौन नहीं करता? लेकिन उत्तराखंड की समस्या ‘लव जिहाद’ है. बंगालियों ने उत्तराखंड की दुहाई न देकर केवल केदार-बद्री की तीर्थयात्रा और ट्रैकिंग पर जाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है। पिछले डेढ़ साल से हरिद्वार से लेकर गोचर तक उत्तराखंड के लगभग हर हिस्से में ‘लव जिहाद’ के आरोप आए दिन लगते रहे हैं। सबसे बड़ी घटना पिछले 28 मई को घटी. पुरोला यमुनोत्री नदी पर एक छोटा सा शहर है। वहां ओबैद नाम का एक मुस्लिम और जीतेंद्र सैनी नाम का एक हिंदू नाम के दो युवक एक स्थानीय शिक्षक की चौदह वर्षीय बेटी के साथ जा रहे थे. ‘लव जिहाद’ का नारा वायरल हुआ, अगले दिन से पुरोला के मुस्लिम व्यापारियों पर हमले हुए, उनके घरों में आग लगा दी गई. ‘देवभूमि रक्षा अभियान’ नाम के यूटको संगठन के बैनर में लिखा है, पुरोला के मुस्लिम दुकानदारों को 15 जून तक इलाका खाली करना होगा। 42 मुस्लिम दुकानदार अपनी जान के डर से देहरादून और अन्य स्थानों पर भाग गए। तभी बिल्ली पिंजरे से बाहर आ जाती है. एक स्थानीय पत्रकार ‘बीबीसी खबर’ नाम से वेबसाइट चलाता है. कहने की जरूरत नहीं है कि बीबीसी के पास इस नाम से कोई वेबसाइट नहीं है। लेकिन अतिसक्रिय पत्रकार ने अनायास ही लव जिहाद की शिकायत थाने में कर दी और अपने चैनल से खबर फैला दी. अन्य ब्लॉग और चैनल भी सच्चाई जाने बिना अफवाहें फैलाते हैं। पूनम पांडे के कैंसर फैलने से पहले भी उत्तराखंड में आए दिन खबरों के नाम पर फर्जी अफवाहें चलती रहती थीं, हमने ध्यान नहीं दिया।

पुरोला क्या है? बद्री मार्ग पर गोचर से लेकर हर तरफ लव जिहाद की धूल है. पत्रकार ही नहीं, डॉक्टर, इंजीनियर भी नहीं बचे. कभी कोई वीडियो संदेश फैला रहा है कि उत्तराखंड इस बार कश्मीर होगा, तो कोई कह रहा है, नजीबाबाद के लोगों से अनाज मत खरीदो। हम जानते हैं कि सोशल मीडिया फर्जी खबरों का प्रजनक और प्रसारक है। लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने क्या किया? विरोध करने वालों को संबोधित करने के बजाय, उन्होंने कहा, “लाभ जिहाद के इन दोषियों में से किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”

लव जिहाद की लहर इतनी तेज थी कि बीजेपी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष को भी पुरोला में अपनी दुकान बंद करके भागने पर मजबूर होना पड़ा. पुरी गढ़वाल के बीजेपी नेता यशपाल बेनाम की बेटी की शादी पिछले साल मई में हुई थी. भावी दामाद, एक मुस्लिम, आईआईटी रूड़की में बेटी का सहपाठी था। शादी का कार्ड छप चुका था, लेकिन सोशल मीडिया पर ऐसा हंगामा मचा कि यशपाल को अपनी बेटी की शादी टालनी पड़ी.

गुरुवार को किसानों की केंद्र के साथ तीसरे दौर की बातचीत होगी.

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बुधवार को पूरे दिन सक्रिय रहे किसान, गुरुवार को केंद्र के साथ तीसरी बैठक संभव किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली बॉर्डर बुधवार को पूरे दिन गर्म रहा। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस छोड़ी. इससे बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने जमीन फैला दी. किसान आंदोलन के चलते बुधवार को राजधानी से सटा इलाका पूरे दिन गर्म रहा। आंदोलनरत किसानों के प्रतिनिधि गुरुवार को केंद्र के साथ तीसरी बैठक कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक तीसरी बैठक का दिन गुरुवार तय किया गया है. हालांकि, मुलाकात का समय अभी पता नहीं चला है. माना जा रहा है कि केंद्र गुरुवार दोपहर को किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगा.

किसानों ने केंद्र तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए मंगलवार से ‘दिल्ली चलो’ यात्रा शुरू की है. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से लगभग साढ़े तीन सौ छोटे-बड़े किसान संगठन शामिल हुए हैं. जिससे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से मंगलवार के बाद बुधवार को भी पूरे दिन सक्रिय रहे। सिंघु बॉर्डर पर सुबह से ही सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. पुलिस किसानों को रोकने पर आमादा थी. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है. पुलिस ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि किसानों के प्रति ‘नरम रवैया’ नहीं दिखाया जाएगा. अगर वे आक्रामक होंगे तो इसे सख्त हाथों से दबा दिया जाएगा।’ पुलिस ने यह भी कहा कि किसानों को राणामूर्ति पहनने से रोकने के लिए मिर्च पाउडर का इस्तेमाल किया जाएगा. सुबह सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ किसान शंभू बॉर्डर पर जुटना शुरू हो गए. तनाव फिर बढ़ गया. सिंघू के पास दिल्ली-सोनीपत और टिकरी बॉर्डर के पास दिल्ली-बहादुरगढ़ पर वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध कर दी गई। गुस्साए किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी. इससे बचने के लिए किसान मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करते हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया है कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो वे 16 फरवरी को ‘भारत बंद’ करेंगे।

किसान आंदोलन के केंद्र में किसानों के दो प्रमुख संगठन संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा हैं। पिछले दिसंबर में उन्होंने अपनी मांगें मनवाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ अभियान का आह्वान किया था. दोनों संगठनों के अंतर्गत मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के साढ़े तीन सौ छोटे-बड़े किसान संगठन हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की मांग है कि सरकार फसलों के उचित समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दे. साथ ही सभी कृषि ऋण माफ किये जाएं. स्वामीनाथन आयोग के प्रस्ताव के अनुरूप फसल का उचित समर्थन मूल्य देने की भी मांग की गयी है. प्रदर्शनकारियों ने 2020-21 के विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की मांग की। मंगलवार को दोनों राज्यों के बीच शंभू सीमा पर प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने ड्रोन से आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस और किसानों के साथ झड़पें हुईं. माहौल गर्म हो गया. बुधवार को किसान आंदोलन में लगभग यही तस्वीर देखने को मिली. किसानों ने केंद्र तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए मंगलवार को ‘दिल्ली चलो’ यात्रा शुरू की. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा- इन तीन राज्यों के किसान भाग लेंगे. इसमें करीब 350 छोटे-बड़े किसान संगठनों के हिस्सा लेने की उम्मीद है. 2020 में किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण पूरा देश उथल-पुथल में रहा। भारत के उत्तरी राज्यों में लगातार आंदोलन चल रहा था। उस आंदोलन के कारण अंततः नरेंद्र मोदी सरकार पीछे हट गयी। ‘विवादित’ कृषि बिल वापस लिया गया. किसान संगठन भी अपनी स्थिति से पीछे हट गये. तो फिर पंजाब-हरियाणा के किसानों ने क्यों खड़ा किया नया आंदोलन? किसान संगठन दिल्ली की सड़कों पर जो मांग कर रहे हैं उनमें से एक मांग यह है कि सरकार फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दे। स्वामीनाथन आयोग के प्रस्ताव के अनुरूप फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की भी मांग की गई है. वहीं, नाराज किसानों ने सभी कृषि ऋण माफ करने की भी मांग की है.

इसके अलावा, आंदोलनकारियों ने 2020-21 के विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को खारिज करने की मांग की। विद्युत अधिनियम 2020 को निरस्त करने और लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों के लिए मुआवजे की मांग की जानकारी दी गई है. इन मुद्दों पर केंद्र और किसान संगठनों के बीच सोमवार रात हुई बैठक बेनतीजा रही. सूत्रों के मुताबिक, बैठक सोमवार रात 11 बजे के बाद हुई. दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने किसान नेताओं को बिजली कानून 2020 को रद्द करने का आश्वासन दिया. यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी मामले में किसानों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जाएगा. लेकिन दोनों पक्ष किसानों की तीन मुख्य मांगों – फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि ऋण माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने – पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले सके। किसानों के एक प्रतिनिधि ने कहा, परिणामस्वरूप, किसान अपने दृढ़ संकल्प पर दृढ़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दो साल पहले केंद्र ने किसानों की आधी मांगें निपटाने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय बर्बाद किया, भले ही किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से समस्या का समाधान करने की कोशिश की.

आखिर किस कारण फंस गए उत्‍तराखंड कांग्रेस के नेता हरक सिंह रावत?

हाल ही में उत्तराखंड कांग्रेस के नेता हरक सिंह रावत एक घोटाले में फंस चुके हैं! जमीनी घोटाला और फॉरेस्ट लैंड पर निर्माण के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने कांग्रेस नेता और वन मंत्री रहे हरक सिंह रावत के ठिकानों पर छापामारी की है। दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तराखंड में 16 जगहों पर ईडी ने एकसाथ बुधवार को छापा मारा। हरक सिंह रावत वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। आज ईडी की छापेमारी दो अलग-अलग मामलों में हुई है। इसमें एक मामला फॉरेस्ट लैंड से जुड़ा हुआ है तो दूसरा मामला जमीनी घोटाले से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हरक सिंह रावत के घर पर आई ईडी की टीम पाखरो रेंज घोटाले के संबंध में जांच करने आई। ईडी की टीम ने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के आवास से दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी कब्जे में लिए है। भाजपा सरकार में वन मंत्री के रूप में कार्यकाल संभालने वाले हरक सिंह रावत और उनके कुछ अधिकारियों पर टाइगर सफारी परियोजना के तहत कॉर्बेट पार्क के पाखरो रेंज में अवैध पेड़ कटान और अवैध निर्माण के गंभीर आरोप लगे थे। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, पाखरो बाघ सफारी के लिए 163 की अनुमति के खिलाफ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 6000 से अधिक पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे। वन विभाग ने इन दावों का खंडन किया था और कहा था कि रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले तकनीकी मामलों को सुलझाया जाना जरूरी है।

उत्तराखंड में हरक सिंह रावत का विवादों से हमेशा ही नाता रहा है। यह पहली बार नहीं है कि हरक सिंह रावत से जुड़ी संपत्तियां ईडी के जांच के दायरे में आई है। इससे पहले भी 2023 में उत्तराखंड विजिलेंस ने देहरादून के शंकरपुर स्थित एक संस्थान और छिट्दवाला वाला में एक पेट्रोल पंप पर छापे मारे थे। 30 अगस्त, 2023 हुई कार्रवाई के मामले में राज्य सतर्कता प्रमुख वी मुरुगेशन ने कहा था कि टीम ने दोनों स्थानों पर जांच की तो पता चला कि दोनों संपत्तियां कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की हैं। शंकरपुर स्थित दून इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज और पेट्रोल पंप दोनों हरक सिंह रावत के बेटे के हैं। इस जांच में पाया गया था कि दोनों निजी स्थान पर लगाए गए दो जनरेटर सेट सरकारी पैसों से खरीदे गए थे। पिछले साल हुई कार्रवाई में विजिलेंस ने एक डीएफओ को जेल भी भेजा था।

यहां यह बात भी सामने आ रही है कि ईडी ने आठ आईएफएस अधिकारियों के बारे में जानकारी लेने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा था। लेकिन वन विभाग ने कोई जानकारी देने की बजाय शासन को पत्र देकर पूछा था कि अधिकारियों की जानकारी ईडी को दी जानी चाहिए की नहीं। डॉ हरक सिंह रावत के इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर को भी आज सुबह उनके घर से उठाकर लाई और इंस्टिट्यूट में ले जा कर उनसे पूछताछ की गई। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ईडी की छापेमारी ने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत को भी मुश्किलों में डाल दिया है। हरक सिंह रावत लोकसभा चुनाव के दावेदार हैं, लेकिन अब ईडी की कार्रवाई के बाद हरक सिंह रावत की दावेदारी पर भी संकट खड़ा हो गया है।

हरक सिंह रावत वर्ष 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश में मंत्री बने थे। वह तब मंत्री बनने वाले सबसे कम उम्र के नेता थे। उन्होंने पौड़ी से विधानसभा चुनाव जीता था। हरक सिंह रावत राज्य के उन कुछ नेताओं में से हैं जिनकी जनता में व्यापक पैठ है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप के चलते हरक सिंह रावत को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी बहू अनुकृति गुसाईं के साथ कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। उत्तराखंड में कहा जाता है कि हरक सिंह रावत विवादों का दूसरा नाम है। एनडी तिवारी की सरकार में मंत्री रहे हरक सिंह रावत 2003 में जैनी प्रकरण से चर्चा में आए थे। जैनी नामक एक महिला ने हरक सिंह रावत पर आरोप लगाया था कि उसके बच्चे के पिता हरक सिंह हैं। इस मामले में डीएनए टेस्ट भी कराया गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई और बाद में मामला रफा-दफा कर दिया गया।

हालांकि इन आरोपों के चलते 2003 में हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वर्ष 2013 में भी मेरठ निवासी एक महिला ने हरक सिंह रावत पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था। उस समय हरक सिंह रावत, विजय बहुगुणा की सरकार में मंत्री थे। इसके बाद 2014 में मेरठ की रहने वाली महिला ने दिल्ली के सफदरजंग थाने में ही हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था लेकिन यह मामला भी रफा दफा हो गया था। 2016 में मेरठ की महिला ने एक बार फिर रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। 18 मार्च 2016 को उत्तराखंड विधानसभा में हरीश रावत के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले बागियों में हरक सिंह रावत की भूमिका अग्रणी रही थी। इसके बाद उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हरीश रावत सरकार बहाल हो गई। हालांकि तब तक हरक सिंह रावत समेत सभी नौ बागियों ने भाजपा का दामन थाम लिया था।

आखिर क्या है पीएम मोदी का गंगातीरी प्रोजेक्ट?

आज हम आपको पीएम मोदी के गंगातीरी प्रोजेक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं! 10 साल पहले वर्ष 2014 में वाराणसी से पहली बार सांसद चुने जाने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए तमाम योजनाओं पर काम शुरू कर दिया। इसी में से एक अहम योजना थी गंगातीरी प्रोजेक्ट। काफी साल तक इस योजना पर तैयारी चलती रही। अब ये योजना जमीन पर उतारने की तैयारी है। दरअसल इस प्रोजेक्ट के तहत गाय की देसी नस्लों को संरक्षित करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत एक संरक्षण सेंटर वाराणसी में स्थापित किया जाना है। बड़ा प्लान ये है कि यहां गंगातीरी नस्ल के साथ ही मेवाती, केहरीगढ़, पोंवार गाय और भदावरी भैंस की नस्लों को संरक्षित किया जाएगा। गंगातीरी के संरक्षण के दिए ये देश का पहला केंद्र होगा। यहां गाय की नस्ल में अनुवांशिक सुधार और नस्ल के प्रसार के लिए कम किया जाएगा। राज्य सरकार केंद्र की मदद से इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि इसी महीने इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। ये एक साल में इसमें काम भी शुरू हो जाएगा। 2015 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह इस संबंध में वाराणसी आए थे। इस दौरान उन्होंने इस प्रोजैक्ट के बारे में बताया था कि दरअसल पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से जूझ रही है। तापमान में बदलाव के चलते ब्राजील और आस्ट्रेलिया सहित कई देश अब अपने यहां देसी नस्लों की गायों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। भारत भी अब इस दिशा में पीछे नहीं रहेगा।

दरअसल गंगातीरी गाय यूपी में पूर्वांचल से बिहार तक गंगा नदी के किनारे पाई जाती है। यूपी में मिर्जापुर गाजीपुर वाराणसी, बलिया और बिहार के रोहतास सहित कई जिलों में ये गाय पाई जाती है। इन गायों की खासियत ये है कि ये काफी दुधारू होती हैं और इन्हें पालने की लागत भी कम आती है। पहले गंगातीरी गाय पूर्वांचल और पश्चिमी बिहार में किसान घर-घर पालते थे। लेकिन क्रॉस ब्रीडिंग और ज्यादा दूध के लिए इस प्रजाति को भुला दिया गया। यही कारण है कि इनकी संख्या काफी कम हो गई है। साहीवाल जैसी ज्यादा दूध देने वाली गायों की नस्लों की वजह से गंगातीरी पर भारी असर पड़ा है।

अब वाराणसी में स्थापित होने वाले केंद्र में आईवीएफ और भ्रूण स्थानांतरण तकनीक ईटीटी का उपयोग करके उच्च अनुवांशिक योग्यता वाली गायों का उत्पादन करने में मदद ली जाएगी। अनुवांशिक रूप से बेहतर गायों के भ्रूण को अन्य मादाओं में वितरित किया जाएगा। योगी सरकार के अफसर इस योजना से काफी उत्साहित हैं। वह अनुवांशिक रूप से बेहतर गंगातीरी गायों के उत्पादन को बढ़ाने के कदम को गेम चेंजर मानते हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के कम से कम 30 जिलों और बिहार के 20 जिलों के किसानों को लाभ देगी। इससे दूध उत्पादन औश्र आय बढ़ाने के लिए स्थानीय नस्ल की उन्नत गायों को पालने में मदद मिलेगी।

जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में इन गायों की नस्ल का शुद्ध जर्मप्लाज्म भी है। दरअसल वाराणसी के शहंशाहपुर में राज्य पशुधन और कृषि फार्म में करीब 400 गंगातीरी गाय हैं, जिन्हें उच्च उत्पादकता स्तर पर बनाए रखा गया है। इस फार्म को 1950 में स्थापित किया गया था। गंगातीरी नस्ल को बढ़ाने पर जोर इसलिए और भी दिया जा रहा है क्योंकि ये इस क्षेत्र में उच्च अनुकूलनशीलता रखती है। यही नहीं इसके पालन में भी ज्यादा खर्च नहीं आता। इस तरह की देशी नस्लें कई बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी हैं। इस नस्ल को 2015 में राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो एनबीएजीआर द्वारा पंजीकृत किया गया था। योगी सरकार के अफसर इस योजना से काफी उत्साहित हैं। वह अनुवांशिक रूप से बेहतर गंगातीरी गायों के उत्पादन को बढ़ाने के कदम को गेम चेंजर मानते हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के कम से कम 30 जिलों और बिहार के 20 जिलों के किसानों को लाभ देगी।जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या करीब 2 से ढाई लाख है। इससे दूध उत्पादन औश्र आय बढ़ाने के लिए स्थानीय नस्ल की उन्नत गायों को पालने में मदद मिलेगी।वहीं बाजार में इनकी कीमत 40 से 60 हजार रुपये तक है। ये रोजाना करीब 8 से 10 लीटर दूध देती है। इसके दूध में फैट करीब 4.1 से 5.2 प्रतिशत तक होता है।

क्या पीएम मोदी की जाति के बारे में राहुल गांधी का दावा सच है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि पीएम मोदी की जाति के बारे में राहुल गांधी का दावा सच है या नहीं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन्म से ओबीसी नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस बयान के बाद एक बार फिर से प्रधानमंत्री के ओबीसी होने या फिर नहीं होने को लेकर बहस छिड़ गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले राहुल गांधी ने फिर से ओबीसी के मुद्दे छेड़ दिया था। 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री के सरनेम मोदी पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता गई थी। अब उन्होंने कहा है कि मोदी जी लोगों को यह कह कर गुमराह करते आ रहे हैं कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। मोदी का जन्म तेली जति में हुआ था, जिसे 2000 में गुजरात में बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान ओबीसी में शामिल किया गया। इस प्रकार से मोदी जी जन्म से ओबीसी नहीं हैं। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम ओबीसी से जुड़े लोगों से हाथ तक नहीं मिलाते वहीं अरबपतियों को गले लगाते हैं। यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने पर विवाद खड़ा हुआ है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों यह मुद्दा उठा चुक है। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति GPCC के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल भी पूर्व में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। जब शक्ति सिंह गोहिल ने यह मुद्दा उठाया था तब गुजरात सरकार ने स्पष्ट किया था कि 1994 से ही घांची समुदाय को ओबीसी अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा प्राप्त है। मोदी घांची जाति से हैं। राहुल गांधी से पहले कांग्रेस नेता शक्ति सिंह ने गुजरात सरकार के सर्कुलर को आधार बनाकर कहा था कि मोदी घांची जाति गुजरात में एक समृद्ध और समृद्ध जाति में गिनी जाती है। मोदी के मुख्यमंत्री बनने से पहले यह जाति ओबीसी में शामिल नहीं थी। गोहिल ने अपने दावे के पीछे आरटीआई के एक उत्तर को आधार बनाया था। इसमें उन्होंने पूछा गया था कि घांची जाति को ओबीसी में कब शामिल किया गया? गोहिल ने यह मामला मई, 2014 में भी उठाया था।

कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमला बोलने के लिए गुजरात सरकार के 1 जनवरी, 2022 को जारी हुए परिपत्र का हवाला देती है। जिसमें मोढ़ घांची को ओबीसी में शामिल करने के लिए सर्कुलर जारी किया था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार जब यह विवाद पहली बार उठा था तब उस वक्त के डिप्टी सीएम और सरकार के प्रवक्ता नितिन पटेल ने कहा था कि गुजरात सरकार के समाज कल्याण विभाग ने 25 जुलाई 1994 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें राज्य की 36 जातियों को ओबीसी की श्रेणी में शामिल किया गया था। इसके 25-बी में मोढ़ जाति का उल्लेख है। गुजरात के घांची समुदाय को दूसरे राज्यों में तेली और साहू के तौर पर जाना जाता है। यह समुदाय परंपरागत तौर पर तेल निकालने का काम करता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि गुजरात में घांची समुदाय हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में है। गुजरात के उत्तर के हिस्से में इस समुदाय के जो लोग मेहसाण सूर्य मंदिर के आसपास रहते हैं उन्हें मोढ़ घांची के नाम से जाना जाता है। जब यह विवाद पहली बार सामने आया था तब गुजरात के मशहूर समाजशास्त्री अच्युत याग्निक ने कहा था कि यह कहना गलत होगा कि नरेंद्र मोदी नकली ओबीसी है। तब याग्निक ने कहा था कि कांग्रेस का आरोप गलत है, क्योंकि घांची ओबीसी की सूची में पहले से शामिल है। मोदी जिस जाति से आते हैं, वह घांची की उपजाति है। इसलिए उनकी गिनती ओबीसी में होती है। तब गुजरात के मशहूर राजनीतिक चिंतक घनश्याम शाह ने अपनी सहमति व्यक्त की थी।

गुजरात सरकार ने जब घांची समेत जब 36 जातियों को ओबीसी में शामिल किया था। तब राज्य में कांग्रेस की सरकार की थी। उस वक्त पर छबीलदास मेहता मुख्यमंत्री थी। यह सही है जब गुजरात सरकार ने घांची समुदाय की उपजाति मोढ़ घांची के लिए सर्कुलर निकाला तब राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे। बीबीसी की रिपोर्ट में सामने आया था कि जब घांची समुदाय को ओबीसी की सूची में शामिल किया गया था, तो इसकी उपजाति को भी शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। इसीलिए मोढ़ घांची जाति को इस सूची में शामिल करने के लिए एक नया परिपत्र जारी करना पड़ा। बीबीसी ने यह दावा गुजरात सरकार एक अफसर के हवाले से किया था। अब ताजा विवाद के बीच बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मख्यमंत्री बनने से पहले दो साल पहले ही मोढ़ घांची को शामिल किया जा चुका था।

पिछले साल मोदी सरनेम मानहानि विवाद के बीच गुजरात के अहमदाबाद में मोदी समाज का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ था। इसके देशभर से मोदी समाज से जुड़े लोग पहुंचे थे। मोदी समाज में राष्ट्रीय सम्मेलन में सोमाभाई मोदी ने कहा कि सभी मोदी हैं लेकिन किसी का सरनेम राठौड़ है तो किसी का क्षत्रिय और साहू। सोमाभाई मोदी ने पहले कहा कि सभी मोदी लिखें, अगर इसमें कोई दिक्कत है तो अपने सरनेम के ब्रैकेट में मोदी लिखें। सोभाभाई मोदी यह भी कहा जो समाज अपनी पहचान की चिंता नहीं करता है वह बिखर जाता है। उन्होंने तब हाथ जोड़कर कहा था आप सभी से विनती है कि सभी लोग ऐसा करें। मोदी सरनेम विवाद के दौरान बीजेपी के विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि मोदी समाज की देशभर में आबादी 13 करोड़ है। गुजरात में ओबीसी की आबादी 50 फीसदी से अधिक है।