Thursday, March 5, 2026
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आखिर क्या है स्पाइसजेट के अधिकारियों का कारनामा?

आज हम आपको स्पाइसजेट के अधिकारियों का कारनामा बताने जा रहे हैं! कम किराये वाली एयरलाइन स्पाइसजेट एक बार फिर से चर्चा है। चर्चा की वजह कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की धोखाधड़ी है। आरोप है कि कंपनी के कुछ सीनियर आफिसर्स ने एयरलाइन की शिड्युल्ड फ्लाइट्स को कैंसिल कर उस विमान से चार्टर फ्लाइट ऑपरेट किया। पता चला कि ये अधिकारी मार्केट में चल रही प्राइस से कम पर चार्टर बुकिंग कर रहे थे। इससे कंपनी को तो नुकसान हुआ ही, इसके ग्राहकों को भी अंतिम समय में भारी असुविधा का समाना करना पड़ा। इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े अधिकारियों ने बताया कि ऑडिट में इन अधिकारियों की कारगुजारी का पता चला। जांच में पाया गया कि अधिकारी बाजार दर से भी कम कीमत पर चार्टर फ्लाइट बुक कर रहे थे। ऐसा करने के लिए वे एजेंटों से कमीशन ले रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि इस सिलिसले में एयरलाइन ने तीन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं, और बिक्री और राजस्व प्रबंधन जैसे अपने वाणिज्यिक विभाग पर नियंत्रण कड़ा कर रही है।

स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया कि कंपनी में किसी घोटाले का पता चला है। उनका कहना था “क्वेरी में साझा की गई जानकारी गलत और भ्रामक है”। हालांकि, मंगलवार को एक बयान में, एयरलाइन ने कहा कि रणनीतिक पुनर्गठन के हिस्से के रूप में, वाणिज्यिक टीम के कई सदस्यों ने तत्काल प्रभाव से कंपनी छोड़ दी है। मंगलवार को बाजार खुलने के बाद तुरंत यह बयान आया था। और इसके बाद बीएसई पर एयरलाइन के शेयर 8.90% गिरकर ₹55.19 पर बंद हुए थे। आज भी कंपनी का शेयर करीब पांच फभ्सदी गिर कर 52 रुपये 65 पैसे पर ट्रेड कर रहा था।

एविएशन इंडस्ट्री में दो तरह के फ्लाइट होते हैं। एक तो शिड्यूल जिसका टाइम टेबल सरकार अनुमोदित करती है। दूसरा चार्टर फ्लाइट। मतलब कि किसी ने पूरे हवाई जहाज को रिजर्व कर लिया है। यह अनिर्धारित उड़ानें हैं जो ग्राहकों के एक समूह की विशिष्ट मांग पर संचालित की जाती हैं। आमतौर पर चार्टर फ्लाइट महंगी होती है। यह ऐसा ही होता है कि आप बस में सवारी बन कर जाने के बजाय अपनी बारात के लिए बस रिजर्व कर लें तो वह महंगा पड़ता है। COVID के दौरान चार्टर फ्लाइट एविएशन कंपनियों के रेवेन्यू का एक प्रमुख स्रोत बन गया क्योंकि लोगों ने भीड़-भाड़ से दूर रह कर ट्रेवल करना पसंद किया था। साल 2022-23 के दौरान स्पाइसजेट ने 1568 चार्टर फ्लाइट ऑपरेट किया था, जिनमें दो लाख 48 हजार से भी ज्यादा पैसेंजर्स ने ट्रेवल किया था।

ऑडिट के बाद, एयरलाइन ने पाया स्पाइसजेट के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर ईटी को बताया “एयरलाइंस अपनी आगे की बुकिंग forward bookings का विश्लेषण करती हैं। यदि उन्हें पता चलता है कि एक निश्चित उड़ान संचालन की निर्धारित लागत को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो उन उड़ानों को पर्याप्त समय और ग्राहकों को मुआवजे के साथ रद्द कर दिया जाता है। लेकिन यह तो मामला ही अलग था। उन्होंने बताया “चार्टर उड़ानें बाजार दर से आधी कीमत पर बेची गईं। यदि निर्धारित उड़ानें संचालित की जातीं तो कंपनी को अधिक कमाई होती।” उक्त अधिकारी ने बताया, एयरलाइन ने यह भी पाया कि कुछ अधिकारी कम कीमत पर चार्टर फ्लाइट बेचने के लिए एजेंटों से कमीशन खा रहे थे। जाहिर है कि यह रकम कंपनी के अकाउंट में नहीं जा रही थी बल्कि संबंधित कर्मचारियों की जेब में जा रही थी। कंपनी के ही एक अन्य अधिकारी ने बताया “निर्धारित उड़ानों को रद्द करना और उसके बजाय चार्टर का संचालन करना एक बहुत ही खराब प्रथा है। न केवल आप ग्राहक को असुविधा पहुंचा रहे हैं, बल्कि आपको पैसे खोने का भी खतरा है क्योंकि यात्रा की तारीख के करीब ट्रैफिक बढ़ जाता है जब टिकट अधिक कीमत पर बेचे जा सकते हैं।” कंपनी के एक दूसरे अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

स्पाइसजेट ने हाल ही में लगभग ₹1,000 करोड़ जुटाए हैं और नकदी संकट से निपटने के लिए एक बड़े पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। इसने स्रोत पर कर कटौती टीडीएस, वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी, भविष्य निधि पीएफ और विक्रेताओं को भुगतान जैसे वैधानिक भुगतान में चूक की है।

एयरलाइन ने अपने बेड़े के आकार में दो-तिहाई की कमी के बाद, अब पैसे बचाने के लिए अपने लगभग 15% कर्मचारियों को हटाने का भी फैसला किया है। उसे इन उपायों से प्रति वर्ष लगभग ₹100 करोड़ बचाने की उम्मीद है। कंपनी के सूत्रों ने बताया कि निवेश की घोषणा के बाद, प्रमोटर अजय सिंह कंपनी के साथ और अधिक जुड़ गए हैं और हर विभाग के प्रदर्शन की जांच कर रहे हैं।

जानिए आतंकी गढ़ से कैसे विकसित बना उत्तर प्रदेश?

आज हम आपको बताएंगे कि एक आतंकी गढ़ से उत्तर प्रदेश कैसे विकसित गढ़ बना है! उत्‍तर प्रदेश को उद्योग प्रदेश बनाने का संकल्प पूर्वांचल की धरती से आगे बढ़ता दिख रहा है। 18 मंडलों के 75 जिलों में धरातल पर उतरे टॉप 5 निवेश के मामले में पूर्वांचल का मीरजापुर मंडल सबसे ऊपरी पायदान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब हुआ है। इसमें भी सभी 75 जिलों में हुए टॉप 5 निवेश के मामले में सोनभद्र का पलड़ा सबसे भारी है। कभी नक्सल गतिविधियों के लिए देशभर में कुख्यात रहे इस जिले ने गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर नोएडा/ग्रेटर नोएडा को भी पछाड़ दिया है। 5 सबसे भारी भरकम प्रोजेक्ट के मामले में मीरजापुर मंडल के सोनभद्र में 81 हजार करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर रहा है। वहीं मंडल के तीनों जिलों मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही में होने वाले निवेश को जोड़ लें तो ये रकम 86 हजार करोड़ से भी अधिक है। वहीं टॉप 5 निवेश के मामले में मेरठ, झांसी, लखनऊ और मुरादाबाद मंडल क्रमश: दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें पायदान पर हैं। गत 19 फरवरी को ही योगी सरकार ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए एक ही दिन में प्रदेश में 10 लाख 24 हजार करोड़ के निवेश को धरातल पर उतारकर नया कीर्तिमान रचा है। अपने नाम के ही अनुरूप सोनभद्र यूपी में निवेश के मामले में स्वर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है। मीरजापुर मंडल में शामिल यूपी के पूर्वी छोर पर स्थित इस जनपद की सीमाएं बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से लगती हैं। खनिज संसाधन की प्रचुरता वाला ये जनपद आजादी के बाद कई दशकों तक नक्सल गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है। आदिवासी और जनजातीय बहुलता वाला ये जनपद अब बड़े उद्योग समूहों की पसंद बनकर उभरा है। सोनभद्र और मीरजापुर में नक्सलियों के खिलाफ चलाई गई प्रभावी कार्रवाई के बाद मंडल के तीनों जिलों में स्थापित हो रहीं पांच-पांच बड़ी परियोनाओं ने 86207 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किये हैं। सोनभद्र में निवेश करने वाले टॉप 5 प्रोजेक्ट्स थर्मल पावॅर और पम्प्ड स्टोरेज प्लांट के हैं। खास बात ये है कि सोनभद्र में टॉप 5 निवेशक कंपनियों में कोई भी ऐसी नहीं है जिसने 13 हजार करोड़ से कम का निवेश किया हो। वहीं मीरजापुर में सिमेंट, इथेनॉल, खनिज के क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनियों ने निवेश किया है। इसी प्रकार भदोही में कालीन उद्योग में सबसे अधिक निवेश किया गया है। मीरजापुर मंडल में टॉप 5 निवेश से ही 16,197 रोजगार सृजित होंगे।

मेरठ मंडल के 6 जनपदों में टॉप 5 निवेश से 76,204 करोड़ का निवेश किया गया है। इसमें भी गौतमबुद्ध नगर नोएडा/ग्रेटर नोएडा में सर्वाधिक 56,800 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इसके अलावा मंडल के अन्य जिलों में शामिल बागपत में 1,558 करोड़, बुलंदशहर में 7,553 करोड़, गाजियाबाद में 4,900 करोड़, मेरठ में 2,777 करोड़ और हापुड़ में 2,616 करोड़ का निवेश किया गया है। रोजगार के दृष्टिकोण से देखें तो मेरठ मंडल इन मामले में प्रदेश में सबसे ऊपर है। यहां के सभी 6 जिलों में लग रहे 5-5 बड़े निवेश से ही 1,25,047 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

टॉप 5 निवेश के मामले में झांसी मंडल तीसरे स्थान पर है। मंडल में शामिल तीन जिले झांसी, जालौन और ललितपुर में 20,548 करोड़ का निवेश धरातल पर उतर रहा है। तीनों जिलों में हो रहे 5-5 बड़े निवेश से 6,550 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसी प्रकार टॉप 5 निवेश के मामले में चौथे पायदान पर लखनऊ मंडल शामिल है। प्रदेश की राजधानी समेत 6 जिले वाले इस मंडल में 18,347 करोड़ की टॉप 5 परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। मंडल के सभी जिलों में उतरने वाली टॉप 5 परियोजनाओं की बात करें तो हरदोई में 2,628 करोड़, लखीमपुर खीरी में 719 करोड़, लखनऊ में 7,374 करोड़, रायबरेली में 539 करोड़, सीतापुर में 3,502 करोड़ और उन्नाव में 3,585 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं। लखनऊ मंडल में टॉप 5 निवेश से 21,650 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसी प्रकार पांचवें पायदान पर मुरादाबाद मंडल शामिल है। मंडल के पाच जनपदों में हुए टॉप 5 निवेश से 16,369 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं। सोनभद्र में टॉप 5 निवेशक कंपनियों में कोई भी ऐसी नहीं है जिसने 13 हजार करोड़ से कम का निवेश किया हो। वहीं मीरजापुर में सिमेंट, इथेनॉल, खनिज के क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनियों ने निवेश किया है। इसी प्रकार भदोही में कालीन उद्योग में सबसे अधिक निवेश किया गया है। मीरजापुर मंडल में टॉप 5 निवेश से ही 16,197 रोजगार सृजित होंगे।पांचों जनपदों में टॉप 5 प्रोजेक्ट की बात करें तो बिजनौर में 2,319 करोड़, अमरोहा में 3,472 करोड़, मुरादाबाद में 6,978 करोड़, रामपुर में 2,822 करोड़ और संभल में 778 करोड़ का निवेश हुआ है। मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में हो रहे टॉप 5 निवेश से 22,520 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

जानिए क्रिकेटर ऋषभ पंत की अनदेखी अनसुनी कहानी!

आज हम आपको क्रिकेटर ऋषभ पंत की अनदेखी अनसुनी कहानी बताने जा रहे हैं! भारत में लोग सो रहे थे। खबर आई कि महान पेले नहीं रहे। फुटबॉल की दुनिया में ब्राजील के पेले का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। अगली सुबह लोग ऑफिस जाने की तैयारियों में जुटे थे कि तभी एक खबर ने हर किसी को रुला दिया। भारतीय क्रिकेट इतिहास के टेस्ट में सबसे बड़े मैच विनर ऋषभ पंत का बिल्कुल सुबह ही रुड़की में भयंकर एक्सीडेंट हुआ था। उनकी लग्जरी कार की हालत खराब थी। उसे देखकर हर कोई डरा हुआ था। पंत की चोट की सही-सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। लेकिन, कार को देखकर इस पर सवालिया निशान था कि पंत बचेंगे भी या नहीं, बचेंगे तो क्या क्रिकेट खेलने लायक रहेंगे… हर कोई इस पर चर्चा कर रहा था। पेले की कोई चर्चा नहीं थी। वह मनहूस दिन था 30 दिसंबर, 2022 और अब 446 दिन बाद 12 मार्च को वह न केवल बैटिंग, बल्कि विकेटकीपिंग के लिए भी फिट घोषित किए गए। यकीन मानिए, ऋषभ पंत और उनके चाहने वालों के लिए ये 446 दिन बहुत ही खौफनाक थे। हालांकि, एक बात जो सही है वह यह कि 30 दिसंबर 2022 को एक्सीडेंट के बाद से आज तक पंत की जिद, जुनून और देश के लिए फिर खेलने का जज्बा ही सबसे बड़ा कारण था, जिससे वह एक बार फिर चोट, असहनीय दर्द और भयानक एक्सीडेंट से फिट हो सके। कई बार खिलाड़ी छोटी चोट से ही टूट जाते हैं। क्रिकेट छोड़ देते हैं, लेकिन यहां पंत ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उनकी इस उम्मीद को बल दिया उनके चाहने वालों ने। साथ खेलने वालों ने। हमेशा अपने खिलाड़ियों के लिए खड़ा होने वाला क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई और उनकी फैमिली। हर किसी का पंत के मैदान पर वापसी को लेकर बराबर योगदान है।

30 दिसंबर 2022, सबसे पहले तो उस दिन से शुरुआत करते हैं, जिस दिन पंत अपने देहरादून घर जा रहे थे। उनका सुबह ही रुड़की में एक्सीडेंट हो गया। सिर, पीठ और पैर में गंभीर चोट लगने के बावजूद वह आग लगने से पहले कार से बाहर निकलने में सफल रहे। इसमें कुछ लोकल लोगों ने उनकी मदद की। उन्हें तत्काल देहरादून में हॉस्पिटल ले जाया गया। 4 जनवरी, 2023, उन्हें देहरादून से हवाई मार्ग से मुंबई के एक अस्पताल में ले जाया गया। बोर्ड चाहता था कि पंत को बेहतर सुविधा मिले, जिससे कि वह तेजी से रिकवरी कर सकें। 6 जनवरी, 2023: डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने उनका ऑपरेशन किया। उनका दाहिना घुटना गंभीर चोट से बुरी तरह खराब हो चुका था। मेडियल कोलेटरल लिगामेंट एमसीएल, क्रूसिएट लिगामेंट एसीएल और पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट पीसीएल की सर्जरी की गई। फिर प्लास्टिक सर्जरी भी हुई।

10 फरवरी, 2023, सर्जरी के बाद अपनी पहली सैर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए फैंस को अपनी रिकवरी के बारे में जानकारी दी। इस दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान, खिलाड़ी और बोर्ड के अधिकारी उनसे लगातार मिलते रहे और सांत्वना देते रहे। 26 अप्रैल, 2023, भारतीय बोर्ड ने एक बयान में कहा- पंत ने एनसीए, बेंगलुरु में रिकवरी शुरू कर दी है। यहां वह लगातार कोशिश करते रहे और धीरे-धीरे ठीक होते रहे। 14 जून, 2023, पंत ने बिना किसी सहारे के सीढ़ियां चढ़ने का वीडियो पोस्ट किया और कैप्शन दिया- बुरा नहीं है यार… सरल चीजें मुश्किल हो सकती हैं। 15 जून, 2023, पंत अपने रिहैब को एक्वा थेरेपी, हल्की स्विमिंग और टेबल टेनिस के सत्रों से गुजरते नजर आए। इस दौरान वह एनसीए में आयोजित तमाम सत्रों में भी हिस्सा लेते रहे।

16 जनवरी, 2024, पंत लगभग मैच के लिए तैयार। एम चिन्नास्वामी में 20 मिनट तक बल्लेबाजी की। विराट कोहली और रिंकू सिंह से मुलाकात भी। 1 मार्च, 2024, बीसीसीआई सचिव जय शाह ने धर्मशाला में मीडिया को बताया कि अगर वह फिट हुए तो विश्व कप खेल सकते हैं। देखते हैं कि वह आईपीएल में कैसा प्रदर्शन करता है। 3 मार्च, 2024, बीसीसीआई ने आगामी आईपीएल के लिए पंत को विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में फिट घोषित किया, जिसकी रिपोर्ट 12 मार्च को ऑफिशली घोषित की गई।

पंत इस जर्नी को लेकर कहते भी हैं कि ऐसे एक्सीडेंट से लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। पंत मैदान पर लौटने के बाद पहले की तरह छक्के लगा पाते हैं या नहीं, विकेटकीपिंग में वो पुराना स्पाइडी नजर आता है या नहीं, इस बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन पंत का मैदान पर उतरना ही अपने आप में चमत्कार होगा। जिस तरह से युवराज सिंह ने कैंसर को हराकर मैदान पर वापसी की थी पंत भी कुछ उसी तरह के हीरो हैं। एक भारतीय क्रिकैट फैन के रूप में हम सभी चाहते हैं कि पंत न केवल आईपीएल में पुराने अंदाज में नजर आएं, बल्कि टी-20 विश्व कप 2024 में खेलकर भारत को चैंपियन बनाएं।

कांग्रेस की नई लिस्ट में कौन-कौन है उम्मीदवार? जानिए!

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी नई लिस्ट निकाल दी है! जानिए उनके नए-नए उम्मीदवार! आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को 43 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, जिसमें कुछ बड़े नेताओं के बेटे सहित कई अहम नाम शामिल थे। इनमें अहम नामों में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से मौजूदा सांसद नकुल नाथ, जालौर सिरोही से राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और असम के जोरहाट से मौजूदा सांसद गौरव गोगोई शामिल हैं। मंगलवार को सामने आई सूची में पांच राज्यों असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड व केंद्र शासित प्रदेश दमन व दीव में उम्मीदवारी का ऐलान किया गया। इस सूची में असम के 14 सीटों, राजस्थान व मध्य प्रदेश की 10-10 सीटें, गुजरात की सात, उत्तराखंड की तीन और दमन-दीव की एक सीट शामिल है। कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने यह सूची जारी की। कांग्रेस की पहली सूची में 39 नाम शामिल थे। उन्होंने बताया कि दूसरी सूची में 10 सामान्य समुदाय के13 ओबीसी, 10 एससी, 9 एसटी और एक मुस्लिम उम्मीदवार है। राजस्थान की दस सीटों में चर्चित नामों में वैभव के अलावा, हाल ही में बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए राहुल कस्वां का नाम भी शामिल है, जो चुरू से चुनाव लडेंगे। वह मौजूदा चुरू सांसद हैं। दरअसल, उनका इस सीट से बीजेपी में टिकट कट गया था, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा। वहीं वैभव दूसरी बार लोकसभा के चुनावी मुकाबले में हैं। पिछली बार वह जोधपुर संसदीय सीट से लड़े थे, लेकिन हार गए। राजस्थान में बाकी उम्मीदवारों में बीकानेर से गोविंद मेघवाल, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, अलवर से ललित यादव, भरतपुर से संजना जाटव, टोंक से हरीश मीणा, जोधपुर से करण सिंह उचियारड़ा, उदयपुर से ताराचंद मीणा, चित्तौड़ से उदयलाल आंजना शामिल हैं।

नकुल नाथ मध्य प्रदेश से कांग्रेस के इकलौते सांसद हैं। पिछले दिनों नकुल और उनके पिता कमल नाथ के बीजेपी में जाने के चर्चे थे। छिंदवाड़ा कमलनाथ का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस ने बेतूल से रामू टेकाम, खरगोन से पोरलाल खर्ते, धार से राधेश्याम मुवाल, देवास से राजेंद्र मालवीय, मंडला से ओमकार सिंह मकराम, सतना से सिद्धार्थ कुशवाहा, टिकमगढ़ से पंकज अहिरवार और भिंड से फूल सिंह बरैया को उम्मीदवार बनाया है। वहीं गुजरात में अहमदाबाद पूर्व से कांग्रेस प्रवक्ता रोहन गुप्ता, अहमदाबाद पश्चिम से भरत मकवाना, बनासकांडा से जेनीबेन ठाकोर, पाेरबंदर से ललितभाई वसोया, बारदोली से सिद्धार्थ चौधरी, कच्छ से नीतिशभाई लालन व वलसाड से अनंत भाई पटेल को टिकट मिला है। जबकि असम में गौरव गोगोई के अलावा प्रमुख नामों में गुवााहाटी से मीरा बरठाकुर गोस्वामी तो कोकराझाड़ से गर्जन मशहरी व धुबरी से रकीबुल हुसैन को टिकट दिया गया है। दमन-दीव में केतन दहयाभाई को टिकट मिला है। वहीं उत्तराखंड में पिछली बार एक भी सीट न जीतने वाली कांग्रेस ने राज्य की पांच में तीन सीटों पर उम्मीदवारी का ऐलान किया है। इनमें गढ़वाल, टिहरी व अल्मोड़ा की सीट शामिल है। जबकि नैनीताल-उधमसिंह नगर व हरिद्वार पर उम्मीदवारी का ऐलान नहीं हुआ है।

गढ़वाल सीट से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष गणेश गोदियाल, टिहरी से जोत सिंह गुनसोला और अल्मोड़ा से पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा का नाम फाइनल किया गया है। गणेश गोदियाल ने पिछली बार पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह बीजेपी के तीरथ सिंह रावत से हार गए थे। नैनीताल व हरिद्वार को लेकर पेंच फंसा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, स्क्रीनिंग कमिटि की ओर से नैनीताल के लिए कांग्रेस के पूर्व सचिव प्रकाश जोशी का नाम भेजा गया था। कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने यह सूची जारी की। कांग्रेस की पहली सूची में 39 नाम शामिल थे। उन्होंने बताया कि दूसरी सूची में 10 सामान्य समुदाय के13 ओबीसी, 10 एससी, 9 एसटी और एक मुस्लिम उम्मीदवार है। राजस्थान की दस सीटों में चर्चित नामों में वैभव के अलावा, हाल ही में बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए राहुल कस्वां का नाम भी शामिल है, जो चुरू से चुनाव लडेंगे। वह मौजूदा चुरू सांसद हैं।लेकिन सीईसी में कांग्रेस के एक बेहद अहम नेता द्वारा जोशी के नाम का विरोध हुआ।कहा जाता है कि वह एक स्थानीय विधायक का नाम बढ़ाना चाहते हैं। दमन-दीव में केतन दहयाभाई को टिकट मिला है। वहीं उत्तराखंड में पिछली बार एक भी सीट न जीतने वाली कांग्रेस ने राज्य की पांच में तीन सीटों पर उम्मीदवारी का ऐलान किया है। इनमें गढ़वाल, टिहरी व अल्मोड़ा की सीट शामिल है।वहीं दूसरी ओर हरिद्वार की सीट पर पूर्व सीएम हरीश रावत भी दावेदार बताए जा रहे हैं।

क्या मुख्य चुनाव आयुक्त करा सकते हैं अकेले चुनाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव करा सकते हैं या नहीं! भारतीय चुनाव आयोग से इस साल फरवरी में रिटायर हुए चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के बाद एकाएक नौ मार्च को दूसरे चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के इस्तीफा देने से सब स्तब्ध हैं। सवाल है कि क्या आयोग के टॉप-थ्री पिलर में से दो के नहीं रहने से अकेले पड़ गए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार लोकसभा चुनावों की घोषणा करने, फिर चुनावी प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए पर्याप्त होंगे? क्या टॉप-3 का कोरम पूरा किए बिना निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकते हैं? या चुनाव आयुक्तों की कोई जरूरत नहीं है, अकेले चीफ इलेक्शन कमिश्नर ही चुनावी प्रक्रिया पूरा कराने के लिए काफी हैं? मामले में चुनाव आयोग और संविधान की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान में ऐसा जिक्र कहीं नहीं है, जिसमें कहा गया हो कि भारतीय निर्वाचन आयोग को चलाने और किसी भी तरह की चुनावी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर के अलावा दो और इलेक्शन कमिश्नर की जरूरत है। वर्तमान नियमों की बात की जाए तो इसमें यही है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के लिए जरूरी चीफ इलेक्शन कमिश्नर हैं, न कि दो अन्य चुनाव आयुक्त। बिना चुनाव आयुक्त के आयोग का तमाम कार्य सुचारू रूप से चलाया जा सकता है, लेकिन बिना मुख्य चुनाव आयुक्त के यह अधूरा है।

मामले में भारतीय चुनाव आयोग के पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर ओपी रावत ने बताया कि असल में अभी तक संविधान में कहीं भी आयोग के लिए कोरम व्यवस्था नहीं है। संविधान कहता है कि आयोग में सीईसी भी अकेले हो सकते हैं। फिर 1993 तक तो आयोग में अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त सीईसी ही होते थे। 1990 में जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बने, तब भी अकेले ही सीईसी होते थे। 1993 में तत्कालीन सरकार ने दो चुनाव आयुक्त को अपॉइंट किया था। इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग के कार्य पूरा करने के लिए अकेले सीईसी काफी नहीं हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के बिना भारतीय चुनाव आयोग स्टैंड नहीं करेगा। इसलिए ऐसे में दो चुनाव आयुक्त के होने या ना होने से चुनावी प्रक्रिया पूरी करने पर कोई भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

इस मामले में मामला तभी अटक सकता है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा एक से अधिक चुनाव आयुक्त और हों। एक्सपर्ट का कहना है कि कोरम की जगह रूल्स ऑफ बिजनेस में बताया गया है कि अगर आयोग में एक से अधिक चुनाव आयुक्त हैं तो फिर आयोग से संबंधित लिए जाने वाला कोई भी फैसला सबों की अनुमति से होना चाहिए। अगर किसी मुद्दे पर टॉप-3 में सहमति नहीं बन पा रही है तो फैसला बहुमत से होना चाहिए। यानी किसी भी फैसले पर दो की सहमति जरूरी है। अगर आयोग में अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त ही हैं तो वही पूर्ण कोरम होंगे और वही बहुमत। उनका फैसला अंतिम माना जाएगा। वैसे, आयोग में दो चुनाव आयुक्त बनाए जाते हैं, लेकिन नियमों में इसकी कोई लिमिट तय नहीं की गई है।

आयोग में दो चुनाव आयुक्तों में से एक के रिटायर होने और दूसरे के इस्तीफा देने के बाद से अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त ही बचे हैं। ऐसे में एक या दो चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने के लिए 15 मार्च को हाई लेवल मीटिंग हो सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और पीएम की ओर से नॉमिनेट एक केंद्रीय मंत्री की कमिटी कोई फैसला ले सकती है। मीटिंग में दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्त के लिए नामों को रखा जा सकता है। कानून मंत्रालय और दो अधिकारी नामों को शॉर्टलिस्ट करेंगे। इलेक्शन कमिश्नर के अलावा दो और इलेक्शन कमिश्नर की जरूरत है। वर्तमान नियमों की बात की जाए तो इसमें यही है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के लिए जरूरी चीफ इलेक्शन कमिश्नर हैं, न कि दो अन्य चुनाव आयुक्त। बिना चुनाव आयुक्त के आयोग का तमाम कार्य सुचारू रूप से चलाया जा सकता है, लेकिन बिना मुख्य चुनाव आयुक्त के यह अधूरा है।फिर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस कमिटी में नाम आएंगे। यहां बहुमत से फैसला होने के बाद नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए नाम राष्ट्रपति की अनुशंसा के लिए भेज दिए जाएंगे। वहां से अंतिम मुहर लगने के बाद नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति हो जाएगी। इसके बाद ही लोकसभा चुनावों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।

जानिए किस देश में है सबसे बड़े बुजुर्ग नेता?

आज हम आपको बताएंगे कि किस देश में सबसे बड़े बुजुर्ग नेता है! दुनिया के 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में सिर्फ दस साल पहले भारत ही ऐसा देश था जिसे 70 साल से ज्यादा उम्र का नेता चला रहा था। 2014 में अपने आखिरी कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 81 साल के थे। उस वक्त अमेरिका में बराक ओबामा 52 साल के राष्ट्रपति थे। चीन के शी जिनपिंग और रूस के व्लादिमीर पुतिन 60 साल के आसपास थे। मगर 2024 में दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं की उम्र काफी बढ़ गई है। अब इन 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में सभी नेता 70 साल से ज्यादा उम्र के हैं। दुनियाभर के ताकतवर देशों के प्रमुख उम्रदराज हैं आखिर इसकी वजह क्या है। सत्ता के गलियारों में उम्रदराज का एक कारण तानाशाहों का बढ़ना हो सकता है। चीन में शी जिनपिंग ने परंपरा तोड़ते हुए 2022 में कम्युनिस्ट पार्टी चीफ के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया।दुनियाभर के देशों की तरह भारत में भी उम्रदराज नेता बढ़ते जा रहे हैं। आजाद भारत की पहली लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 50 साल से काफी कम थी। 1977 से 1979 तक कार्य करने वाली छठी लोकसभा तक आते-आते ये औसत 50 साल को पार कर गया। 12वीं लोकसभा 1998-99 में 46.4 साल की औसत आयु के साथ सबसे युवा मानी जाती है, लेकिन इसके बाद रिकॉर्ड में दूसरी सबसे उम्रदराज लोकसभा आई, जिसकी औसत आयु 55.5 साल थी। 16वीं लोकसभा 2014-19 के सांसदों की औसत आयु सबसे ज्यादा 55.6 साल रही। उस वक्त उनकी उम्र 69 साल थी। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक केवल 43 साल के हैं। जियोर्जिया मेलोनी सिर्फ 45 साल की थीं, जब 2022 में इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की 46 साल के हैं।पुतिन तो 47 साल की उम्र में ही रूस के सर्वेसर्वा बन गए थे। 25 साल बाद भी वो सत्ता में बने हुए हैं। उनके मुख्य विरोधी, 47 साल के अलेक्सी नवलनी को पिछले महीने साइबेरिया की जेल में मार दिया गया।

वहीं अगर अमेरिका का बात करें तो वहां दो पार्टियां की शासन व्यवस्था रहती है। आमतौर पर युवा नेता किसी एक पार्टी, रिपब्लिकन या डेमोक्रेट से जुड़ते हैं। लेकिन पार्टी के शीर्ष तक पहुंचने में वक्त लगता है। ऐसे में कम उम्र में देश की सत्ता तक पहुंचना मुश्किल होता है। दूसरे अन्य देशों में भी अनुभवी और राजनीति से जुड़े उम्रदराज नेताओं के लिए चुनाव लड़ना, युवा नेताओं के मुकाबले आसान होता है। इन नेताओं के पास चुनाव की फंडिंग जुटाने वाले लोगों से भी अच्छे संबंध होते हैं। ये बात सही है कि पूरे यूरोप में उम्नदराज नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं। उदाहरण के तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने युवा नेता के तौर पर अपना नई राजनीतिक पार्टी बनाई और 39 साल की उम्र में देश के सबसे युवा राष्ट्रपति बने। अब उन्होंने 34 साल के गेब्रियल एटल को फ्रांस का प्रधानमंत्री बना दिया है। वहीं ब्रिटेन में प्रधानमंत्री ऋषि सुनक केवल 43 साल के हैं। जियोर्जिया मेलोनी सिर्फ 45 साल की थीं, जब 2022 में इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की 46 साल के हैं।

दुनियाभर के देशों की तरह भारत में भी उम्रदराज नेता बढ़ते जा रहे हैं। आजाद भारत की पहली लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 50 साल से काफी कम थी। 1977 से 1979 तक कार्य करने वाली छठी लोकसभा तक आते-आते ये औसत 50 साल को पार कर गया। 12वीं लोकसभा 1998-99, 46.4 साल की औसत आयु के साथ सबसे युवा मानी जाती है, आबादी वाले देशों में सभी नेता 70 साल से ज्यादा उम्र के हैं। दुनियाभर के ताकतवर देशों के प्रमुख उम्रदराज हैं आखिर इसकी वजह क्या है। सत्ता के गलियारों में उम्रदराज का एक कारण तानाशाहों का बढ़ना हो सकता है। चीन में शी जिनपिंग ने परंपरा तोड़ते हुए 2022 में कम्युनिस्ट पार्टी चीफ के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया।दुनियाभर के देशों की तरह भारत में भी उम्रदराज नेता बढ़ते जा रहे हैं। आजाद भारत की पहली लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 50 साल से काफी कम थी।16वीं लोकसभा 2014-19 के सांसदों की औसत आयु सबसे ज्यादा 55.6 साल रही। उस वक्त उनकी उम्र 69 साल थी। पुतिन तो 47 साल की उम्र में ही रूस के सर्वेसर्वा बन गए थे। 25 साल बाद भी वो सत्ता में बने हुए हैं। उनके मुख्य विरोधी, 47 साल के अलेक्सी नवलनी को पिछले महीने साइबेरिया की जेल में मार दिया गया।लेकिन इसके बाद रिकॉर्ड में दूसरी सबसे उम्रदराज लोकसभा आई, जिसकी औसत आयु 55.5 साल थी। 16वीं लोकसभा 2014-19 के सांसदों की औसत आयु सबसे ज्यादा 55.6 साल रही।

आखिर इलेक्शन बॉन्ड के आंकड़ों से क्या पड़ सकता है असर? जानिए!

आज हम आपको बताएंगे कि इलेक्शन बॉन्ड के आंकड़ों से क्या फर्क पड़ सकता है! सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने चुनाव आयोग को इलेक्शन बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारी सौंप दी है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बात की पुष्टि की। निर्वाचन आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 15 फरवरी और 11 मार्च, 2024 के आदेश के सिलसिले में एसबीआई को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने निर्वाचन आयोग को 12 मार्च को चुनावी बॉन्ड पर डिटेल सौंपी है। अब सवाल है कि आखिर इन आंकड़ों और जानकारी से क्या सामने आएगा। जानते हैं इस मुद्दे से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब। भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुपालन में, चुनाव आयोग को प्रत्येक चुनावी बांड की खरीद की तारीख, खरीदार का नाम और खरीदे गए चुनावी बांड का मूल्य की जानकारी दे दी गई है। हलफनामे में कहा गया है कि बैंक ने चुनाव आयोग को चुनावी बांड के नकदीकरण की तारीख, योगदान प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों के नाम और उक्त बांड के मूल्य के बारे में डिटेल भी पेश कर दी है। एसबीआई का कहना है कि डेटा 12 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 के बीच खरीदे और भुनाए गए बॉन्ड के संबंध में प्रस्तुत किया गया है।

चुनाव आयोग को दो काम करने हैं। पहला, 13 मार्च किसी समय ईसी की वेबसाइट पर पार्टियों में इलेक्शन बॉन्ड योगदान पर अपना डेटा अपलोड करना होगा। दूसरा, 15 मार्च शाम 5 बजे तक EC को इलेक्शन बॉन्ड पर SBI डेटा अपलोड करना होगा। पहला डेटा सेट पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपलोड करने के लिए कहा ताकि इलेक्टोरल बॉन्ड से संबंधित सभी डेटा एक ही स्थान पर हो।

आवश्यक रूप से नहीं। इसके पीछे तीन कारण हैं। पहली वजह है यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह प्राप्तकर्ताओं के साथ दाताओं के मिलान के लिए नहीं कह रहा है। उदाहरण के लिए, यदि कंपनी X ने दर्शाया है कि उसने 100 रुपये का इलेक्शन बॉन्ड खरीदा है, और पार्टी Y ये कहती है कि हमे 100 रुपये मिले हैं, तो हम यह नहीं मान सकते कि X ने Y को दिया है। दूसरा, एसबीआई की तरफ से दिए गए डिटेल में प्रत्येक बॉन्ड को मिला ‘यूनिक नंबर’ शामिल हो भी सकता है और नहीं भी। यदि यह संख्या खरीददारों और प्राप्तकर्ताओं दोनों की जानकारी में है, तो किसी को भी पार्टियों को दिए गए दान का मिलान करने की अनुमति मिल जाएगी। तीसरा, यह मानते हुए भी कि यूनिक नंबर उपलब्ध हैं, हम डोनर की ‘सही’ कॉर्पोरेट पहचान के बारे में अधिक समझदार नहीं हो सकते हैं। क्योंकि जब इलेक्शन बॉन्ड पेश किए गए थे, तो कंपनी अधिनियम में संशोधन ने किसी भी कंपनी को, चाहे वह कितनी भी नई या कितनी घाटे में चल रही हो, इन बांडों को खरीदने की अनुमति दी थी। जैसा कि एक्सपर्ट कहते रहे हैं, यह प्रभावी रूप से एक बड़े कॉर्पोरेट को राजनीतिक फंडिंग के स्पष्ट उद्देश्य के लिए एक ‘शेल कंपनी’ स्थापित करने की अनुमति देता है। इसलिए, यदि आप देखते हैं, मान लीजिए, ‘फ्लेमिंगो’ नामक कंपनी एक बड़ी दाता है, और यदि आप ठीक से आश्वस्त हैं कि ‘फ्लेमिंगो’ एक स्थापित कंपनी नहीं है, तो यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कौन सा बड़ा कॉर्पोरेट दाता फ्लेमिंगो के पीछे है।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसले में केंद्र की चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया। अदालत निर्वाचन आयोग को दानदाताओं, उनके द्वारा दान की गई राशि और प्राप्तकर्ताओं का खुलासा करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह प्रणाली अपारदर्शिता का शीर्ष है। इसे हटाया जाना चाहिए। यह कैसे किया जाना है यह सरकार या विधायिका को तय करना है। यह मुख्य रूप से चंदा देने वालों को सक्रिय भूमिका में ला देता है। यानी यह विधायकों तक पहुंच बढ़ाता है। यह पहुंच नीति-निर्माण पर प्रभाव में भी तब्दील हो जाती है। इस बात की भी वैध संभावना है कि किसी राजनीतिक दल को वित्तीय योगदान देने से पैसे और राजनीति के बीच घनिष्ठ संबंध के कारण बदले की व्यवस्था हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से कहा था कि यहां तक कि आपके अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी संकेत देते हैं कि प्रत्येक खरीदारी के लिए आपके पास एक अलग केवाईसी होनी चाहिए। इसलिए, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि जब भी कोई खरीदारी करता है, तो केवाईसी अनिवार्य होता है। एसबीआई ने 2018 में योजना की शुरुआत के बाद से 30 किस्त में 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बॉण्ड जारी किए। एसबीआई ने विवरण का खुलासा करने के लिए 30 जून तक का समय मांगा था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने बैंक की याचिका खारिज कर दी और उसे मंगलवार को कामकाजी समय समाप्त होने तक सभी विवरण निर्वाचन आयोग को सौंपने को कहा था। राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बॉन्ड पेश किया गया था। चुनावी बॉन्ड की पहली बिक्री मार्च 2018 में हुई थी।

दूसरी बार पिता बनने के बाद विराट कोहली भारत पहुंच गए हैं.

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बेटे के जन्म के बाद स्वदेश लौटे कोहली, रविवार को बेंगलुरु में तैयारी शिविर में शामिल हो सकते हैं कोहली अपने दूसरे बच्चे के जन्म के लिए लंदन गए थे. भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज नहीं खेली. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान इतने दिनों से लंदन में थे. वह रविवार को देश लौट आये. विराट कोहली देश लौट आये. कोहली अपने दूसरे बच्चे के जन्म के लिए पत्नी अनुष्का शर्मा और बेटी भामिका के साथ लंदन गए थे। वह इतने लंबे समय तक वहां था. रविवार सुबह वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ आईपीएल खेलने के लिए घर लौटे।

क्रिकेट प्रेमी चिंता मुक्त हैं. कोहली आईपीएल की शुरुआत से उपलब्ध रहेंगे. कोहली, जो अपने दूसरे बच्चे के जन्म के लिए भारत-इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखला से हट गए थे, आईपीएल में खेलने के लिए स्वदेश लौट आए। वह रविवार को मुंबई पहुंचे। एयरपोर्ट पर कोहली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इस दिन उनका रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के ट्रेनिंग कैंप में शामिल होने का कार्यक्रम है. बेंगलुरु को 22 मार्च को आईपीएल के पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स से भिड़ना है।

अनुष्का 15 फरवरी को दूसरी बार मां बनीं। इसके बाद कोहली एक महीने तक अपनी पत्नी अनुष्का, बेटी भामिका और बेटे अकाय के साथ रहे। समय बिताकर देश लौटे कोहली को देखकर साक्षी काफी प्रभावित हुए. कोहली 22 गज की परिचित जिंदगी में लौटने जा रहे हैं. कोहली की बैंगलोर अभी तक आईपीएल में जीत का स्वाद नहीं चख पाई है. क्रिकेटर कोहली इस बार टीम को चैंपियन बनाने की कोशिश जरूर करेंगे.आईपीएल के बाद टी20 वर्ल्ड कप है. वह उस प्रतियोगिता में भी देश की जर्सी पर अहम भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक, उन्हें टी20 वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया जा सकता है. युवा क्रिकेटरों को मौका दिया जा सकता है. आईपीएल में कोहली के प्रदर्शन को देखने के बाद इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जा सकता है. मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर को कोहली से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

विराट कोहली और रोहित शर्मा के पास टी20 प्रारूप में कई मिसालें हैं। किसी के पास सबसे ज्यादा रन हैं तो किसी के पास सबसे ज्यादा छक्के हैं। हालाँकि, आयरलैंड के क्रिकेटर पॉल स्टर्लिंग ने इस प्रारूप में दुनिया में सबसे पहले एक मिसाल कायम की। वह टी20 में 400 चौके लगाने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर बन गये. उन्होंने शुक्रवार को आयरलैंड बनाम अफगानिस्तान के पहले टी20 मैच में यह मिसाल कायम की.

आयरलैंड ने यह मैच 38 रनों से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. स्टार्लिंग ने 27 गेंदों पर 25 रन बनाए. उन्होंने क्रीज पर रहते हुए दो चौके और एक छक्का लगाया. उन्होंने पहले चार हिट के साथ एक मिसाल कायम की। 135 टी20 मैचों में उनके नाम 3463 रन हैं.

उन्होंने टी20 फॉर्मेट में अब तक 401 चौके और 124 छक्के लगाए हैं. बाबर आजम चार हिट के मामले में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 395 चौके लगाए. कोहली 117 मैचों में 361 चौकों के साथ टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। रोहित चौथे नंबर पर हैं. उन्होंने 359 चौके और 159 छक्के लगाए. शुक्रवार को हुए मैच में अफगानिस्तान के कप्तान राशिद खान ने टॉस जीता और मैदान पर उतरे. उन्होंने तीन विकेट लिए. आयरलैंड ने 6 विकेट पर 149 रन बनाए. लेकिन अफगानिस्तान को चंद रन भी नहीं मिल सके. बेंजामिन व्हाइट के चार विकेट से अफगानिस्तान 111 रन पर सिमट गया।

विराट कोहली फिर से क्रिकेट में वापसी करने जा रहे हैं. भारत के पूर्व कप्तान ने अपने दूसरे बच्चे के जन्म के दौरान अपनी पत्नी के साथ रहने के लिए क्रिकेट से समय निकाला। वह इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में नहीं खेले थे. लेकिन आईपीएल में वापसी करेंगे. विराट 17 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से जुड़ेंगे।

19 मार्च को आरसीबी का इवेंट है. पार्टी का नाम बदलने का भी हो सकता है ऐलान. विराट उस इवेंट में शामिल हो सकते हैं. लेकिन उससे पहले वह 17 मार्च को टीम के कैंप में शामिल हो सकते हैं. आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. पहले दिन ही विराट की टीम का मुकाबला है. वो भी चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम. पिछली बार चेन्नई ने आईपीएल जीता था.

विराट अपने दूसरे बच्चे के जन्म के बाद पहली बार मैदान पर उतरेंगे. 22 मार्च के बाद उनका मैच 25 मार्च को है. वे उस दिन पंजाब किंग्स के खिलाफ खेलेंगे. विराट कोहली का 29 मार्च को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच है. चौथा मैच 2 अप्रैल को है. विराट का मुकाबला लखनऊ सुपर जाइंट्स से है. उम्मीद है कि आईपीएल की शुरुआत से ही आरसीबी को विराट मिल जाएंगे। विराट कोहली 6 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलेंगे. अब तक जो शेड्यूल घोषित हुआ है उसमें विराट के ये पांच मैच हैं.

पति-पत्नी के रूप में कृति खरबंदा पुलकित सम्राट की पहली तस्वीर.

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कृति खरबंदा और पुलकित सम्राट 15 मार्च को शादी के बंधन में बंध गए। हालांकि कृति और पुलकित दोनों मुंबई में काम करते हैं, लेकिन शादी का कोई भी समारोह मुंबई में नहीं हुआ। संगीत, समलैंगिकता, कॉकटेल पार्टी और शादी कुल मिलाकर चार कार्यक्रम हैं। उनका विवाह समारोह दिल्ली एनसीआर के पास ‘आईटीसी ग्रैंड भारत’ होटल में आयोजित किया गया था। सितारों ने आम शादी के कुछ ही घंटों में तस्वीरें दीं. लेकिन कृति-पुलकित उस रास्ते पर नहीं चले. एक दिन बाद उनकी शादी की तस्वीरें सामने आईं। पति के माथे पर किस कर एक्ट्रेस ने क्या लिखा? आम बॉलीवुड स्टार्स की शादी की तस्वीरों पर कई तरह की पाबंदियां होती हैं। हालांकि, पुलकित-कृति ने मुंबई से दूर शादी की और इस तरह फोटो खिंचवाने वालों से थोड़ा बच गए। हालांकि, शादी के अगले दिन कृति ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर पोस्ट की। एक्ट्रेस ने पिंक लहंगे के साथ मैचिंग कुंदन ज्वैलरी पहनी थी। पुलकित ने सिर पर पगड़ी के साथ पिस्ता शेरवानी पहनी है। पगड़ी पर दुल्हन के लहंगे से मेल खाते हुए गुलाबी धागे का काम किया गया है। इस जोड़े ने शादी की कई तस्वीरें जारी की हैं। कृति-पुलकित का रिश्ता 2019 से है। इस बार जब रिश्ता खत्म हुआ तो कृति ने लिखा, ‘सुबह का सूरज आसमान से चमकता है, जीवन का अच्छा और बुरा, किसी भी स्थिति में, केवल आप ही हैं।’ जीवन के हर पल में, मेरे दिल की हर धड़कन में, केवल तुम ही हो।”

पुलकित सम्राट और कृति खरबंदा 15 मार्च को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। पुलकित की ये पहली नहीं, बल्कि दूसरी शादी है। एक्टर पुलकित काफी समय से सलमान खान की ‘राखी बहन’ श्वेता रोहिरा से प्यार करते थे। सलमान की ट्रेनिंग के तहत पुलकित ने 2012 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। श्वेता से शादी के बाद एक्टर ने शादीशुदा जिंदगी में सिर्फ एक साल ही बिताया। पुलकित-श्वेतार अलग हो गए। तब से काफी समय बीत चुका है. कई बार एक्टर का नाम कई एक्ट्रेस के साथ जुड़ जाता है. 2019 से कृति से रिश्ता. इस बार वो रिश्ता ख़त्म होने की कगार पर है. लेकिन उनकी शादी की सभी रस्में मुंबई छोड़कर दिल्ली में होंगी।

वे 15 मार्च को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। लेकिन उनकी शादी का समारोह 13 तारीख से शुरू होगा. पुलकित-कृति की शादी करीब चार दिनों तक चलने वाला ग्रैंड इवेंट होगा. कृति और पुलकित – दोनों का जन्म दिल्ली में हुआ। इसलिए सभी विवाह समारोह वहीं आयोजित किए जाएंगे।’ हालांकि, उनकी शादी में बॉलीवुड से बहुत कम मेहमान शामिल होंगे। जिनमें पुलकित अभिनीत फिल्म ‘फुकरे’ की टीम भी शामिल है। जैसे ऋचा चड्ढा, अली फजलरा. दूसरी ओर, फरहान अख्तर और उनके शिबानी दांडेकर और संगीतकार मीका सिंह निमंत्रण सूची में हैं। हालांकि कृति और पुलकित दोनों मुंबई में काम करते हैं, लेकिन शादी का कोई भी समारोह मायानगरी में नहीं होगा। संगीत, समलैंगिकता और शादी ये तीन आयोजन हैं. उनका विवाह समारोह दिल्ली एनसीआर के पास ‘आईटीसी ग्रैंड भारत’ होटल में आयोजित किया जाएगा।

पुलकित सम्राट और कृति खरबंदा ने जनवरी में सगाई की थी। इस बार दो सितारे शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। वे 15 मार्च को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। लेकिन उनकी शादी का समारोह 13 तारीख से शुरू होगा. पुलकित-कृति की शादी करीब चार दिनों तक चलने वाला ग्रैंड इवेंट होगा. हालांकि, उनकी शादी में बॉलीवुड से बहुत कम मेहमान शामिल होंगे। वे मुंबई में शादी भी नहीं करते। शादी से लेकर रिसेप्शन तक सब कुछ दिल्ली में होगा। क्योंकि कृति और पुलकित दोनों का जन्म वहीं हुआ था. साथ ही पुलकित का भी घर है.

बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर एक शादी के निमंत्रण की फोटो वायरल हो गई. कई लोगों ने दावा किया है कि यह पुलकित और कृति की शादी का निमंत्रण पत्र है। हालांकि मार्च के अंत में कृति ने पुलकित को लिखा था, ”चलो मार्च में करते हैं.” हालांकि, शादी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. पुलकित की ये पहली नहीं, बल्कि दूसरी शादी है। एक्टर पुलकित काफी समय से सलमान खान की ‘राखी बहन’ श्वेता रोहिरा से प्यार करते थे। सलमान की ट्रेनिंग के तहत पुलकित ने 2012 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। श्वेता से शादी के बाद एक्टर ने शादीशुदा जिंदगी में सिर्फ एक साल ही बिताया। पुलकित-श्वेतार अलग हो गए। तब से काफी समय बीत चुका है. श्वेता से ब्रेकअप के बाद एक्ट्रेस यामी गौतम के रोमांटिक रिलेशनशिप में होने की अफवाह थी। पत्नी श्वेता को पुलिकत से कई शिकायतें थीं। जब गर्भपात के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब उनका साथ देना तो दूर, पुलकित ने रिश्ता तोड़ने का रास्ता बना लिया। उस वक्त एक्टर यामी गौतम के साथ वक्त बिताने में बिजी थे. हालाँकि, वह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका। इस रिश्ते के टूटने के बाद पुलकित को कृति से प्यार हो जाता है। करीब पांच साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद ये कपल एक साथ एक रिश्ते में है।

केंद्र सरकार ने यूएपीए के तहत जम्मू-कश्मीर में कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कई और संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यासीन मलिक की पार्टी जेकेएलएफ पर पांच साल के लिए प्रतिबंध बढ़ाया गया. केंद्र ने यह घोषणा लोकसभा चुनाव की सटीक घोषणा से कुछ घंटे पहले की है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि वे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे। इस चरण में अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से संबद्ध जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ्रीडम लीग और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स लीग के सभी समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अधिसूचना में केंद्र का दावा है कि ये संगठन भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के सूत्रों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ्रीडम लीग के प्रमुख शेख अजीज 2010 में उत्तरी कश्मीर के उरी में एक अन्य आतंकवादी समूह के हमले में मारे गए थे। तभी से उस संगठन की ताकत घटने लगी.

पुलवामा हमले के बाद एनआईए ने सभी अलगाववादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. उनके सभी कार्यालय बंद थे. ज्यादातर नेता अभी भी दिल्ली की तिहाड़ जेलों या दूसरे राज्यों की जेलों में कैद हैं. जवाब देने के लिए कविता. फेक न्यूज़ की निरर्थकता बताने वाली कविता. फिर, चुनाव प्रचार में बुरे शब्द, व्यक्तिगत हमलों के परिणामों को बताने वाली कविताएँ। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को चुनाव घोषणापत्र के प्रकाशन के दिन अपने बयान को समझाने के लिए कविता का सहारा लिया.

विपक्ष बार-बार ईवीएम को लेकर संदेह जताता रहा है. विभिन्न खेमे इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या केंद्र में सत्तारूढ़ दल वोटिंग मशीन में धांधली के कारण बार-बार मसनद पर कब्जा कर रहा है। आयोग टेबल पर आ गया है. ईवीएम पर संदेह जताने वाले और आयोग पर उंगली उठाने वालों को राजीव का संदेश, ‘अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना तक नहीं, वफ़ा खुद से नहीं होती, खटा ईवीएम की कहते हो, और बुरी नौकरी परीणम आता है तो उसपे’ .” कायम वी नेही रहते.” यानी उम्मीद पूरी न होने पर आयोग को दोष देना ठीक नहीं है. कैंपेन में बुरे शब्दों के डर से राजीव ने कहा, “दुश्मनी जाम के करो, लेकिन ये गुंजायश रहे, जब कवि हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हो।” लेकिन अगर आप दोस्त बन जाते हैं, तो आपको शर्मिंदा न होने का अवसर लेना चाहिए।

राजीव ने फिर रहीम की कविता का जिक्र करते हुए कहा, ‘रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाए, टूटे पे फिर ना जाए, गांठ परि जाए।’ निशान बने हुए हैं)।

फर्जी खबरों के कारण देश ने कई अप्रिय घटनाएं देखी हैं। चुनाव के दौरान फर्जी खबरें खूब चलती हैं. इस पर उनका बयान था, “झूठ के बाजार में रौनक बहुत है, गोवा बुलबुले जैसे तूरंत ही फट जाते हैं…पाकार्ड वी लोगे तो क्या हासिल होगा धोखे के।” .झूठ यदि आप सफल हो गए तो क्या होगा? आपको धोखे के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।)”

राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने हिंसा-मुक्त चुनाव कराने के प्रति अपना दृढ़ संकल्प बताते हुए स्वीकार किया कि उनके सामने चुनौती ‘फोर एम’ है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने इनसे निपटने के लिए क्लस्टर योजना की भी घोषणा की. आयोग ने शनिवार को 18वीं लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ‘फोर एम’ के बारे में बात की थी. ये चार ‘एम’ क्या हैं? राजीव ने कहा, मसल, मनी, मिसइनफॉर्मेशन और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, ”हम मतदान से पहले, चुनाव के दौरान और बाद में खून-खराबा नहीं चाहते.” हम हिंसा मुक्त चुनाव के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन हमारे सामने ‘फोर एम’ की चुनौती है. हम इससे निपटेंगे और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के इस त्योहार को हिंसा मुक्त रखने के लिए काम करेंगे।” आयोग ने शनिवार को साफ कर दिया कि आयोग उन राज्यों पर विशेष ध्यान दे रहा है.

हालाँकि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बाद वाला बिंदु पश्चिम बंगाल पर लक्षित है, कई लोग सोचते हैं कि यह हो सकता है। क्योंकि, 2021 विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में ‘आतंकवाद’ के आरोप लगे थे. चुनावों के दौरान पहले ही आरोप लगते रहे हैं कि आतंकवाद पश्चिम बंगाल की ‘परंपरा’ है। इसीलिए पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की 920 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। जो जम्मू-कश्मीर से भी ज्यादा है.

चुनाव कक्ष ने हिंसा की रोकथाम के संबंध में देश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और समग्र प्रशासन को एक संदेश भेजा है। चुनाव की घोषणा होते ही देशभर में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है. आयोग ने साफ कर दिया है कि पुलिस-प्रशासन को जो भी करना है वह जल्दी किया जाए. उनमें से जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्य कर रहा हो, उसका स्थानांतरण दूसरे स्थान पर कर दिया जाए।