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डोडा में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए.

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जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़, सुरक्षा बलों के साथ झड़प में दो आतंकी ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी जुलाई की शुरुआत से ही कश्मीर में कई जगहों पर आतंकी हमलों की घटनाएं हो रही हैं. जम्मू के शिवखाड़ी मंदिर से कटरा के वैष्णो देवी मंदिर तक तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया. जम्मू-कश्मीर के डोडा में एक बार फिर सुरक्षा बलों की आतंकियों से झड़प हो गई. बुधवार को दोनों पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में दो आतंकवादी मारे गये. इस महीने की 12 तारीख को आतंकवादियों ने डोडा में एक सैन्य अड्डे पर अचानक हमला कर दिया। घटना में सेना के दो जवान भी घायल हो गये.

12 जुलाई के हमले के बाद सुरक्षा बलों ने डोडा के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान शुरू किया. इस ऑपरेशन के दौरान बुधवार सुबह गंदोह इलाके के बजाद गांव में आतंकियों के साथ उनकी मुठभेड़ शुरू हो गई. सेना के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में बताया कि डोडा में सुरक्षा गार्डों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए. हालांकि, अभी तक उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है. गोलीबारी नहीं रुकी. हालांकि, मारे गए आतंकियों के पास से कुछ आग्नेयास्त्र बरामद होने की खबर है।

जुलाई की शुरुआत से ही कश्मीर में कई जगहों पर आतंकी हमलों की घटनाएं हुई हैं. जम्मू के शिवखाड़ी मंदिर से कटरा के वैष्णो देवी मंदिर तक तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया. हमले के कारण बस अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी. 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई. इसके बाद एक ही रात में आतंकियों ने दोहरे हमले को अंजाम दिया. सबसे पहले, आतंकवादियों का एक समूह कठुआ जिले के हीरानगरी में एक निवासी के घर में घुस गया और गोलीबारी की। बताया जा रहा है कि इस घटना में एक शख्स घायल हो गया. इसके कुछ घंटों बाद आतंकियों ने डोडा जिले के छत्तरगला इलाके में सेना के एक कैंप पर हमला कर दिया. बार-बार हो रहे आतंकी हमलों से जम्मू-कश्मीर प्रशासन असहज हो गया है. इसके बाद से सुरक्षा बल राज्य के विभिन्न इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं.

उन्होंने तीर्थयात्रियों की बस को उग्रवादियों से मिलवाया। ऐसी शिकायत है. आरोपी युवक को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में उसकी संलिप्तता पाई गई थी. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार युवक ने उग्रवादियों को शरण दी थी. उन्होंने उन्हें खाना भी दिया. उसने उग्रवादियों को ऐसी जानकारी भी उपलब्ध करायी जो हमले में उपयोगी हो सकती थी। पुलिस उसकी गिरफ्तारी को इस मामले में बड़ी सफलता के तौर पर देख रही है.

रियासी बस हमले में बुधवार को गिरफ्तार किए गए युवक का नाम हाकम है। 45 वर्षीय व्यक्ति पर सीधे हमले का आरोप नहीं है। हालाँकि, पुलिस ने दावा किया कि उसने वही किया जो आतंकवादियों को हमले को अंजाम देने के लिए चाहिए था। मुख्य घटना के 10 दिन बाद बुधवार को उसे राजौरी से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने कहा कि युवक ने आतंकवादियों को बताया कि जब वे किसी स्थान पर पहुंचेंगे तो तीर्थयात्रियों की बस को कैसे खोजा जाएगा, 9 जून को आतंकवादियों ने वैष्णो देवी के मंदिर के रास्ते में जम्मू के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हमला किया था। आतंकियों ने बस को निशाना बनाकर फायरिंग की. ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया. बस सीधे खाई में जा गिरी. कथित तौर पर उग्रवादियों ने उसके बाद भी गोलीबारी बंद नहीं की. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों की योजना बस के सभी यात्रियों को मारने की थी. 15 से 20 मिनट तक बस पर लगातार फायरिंग की गई. इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई. कई अन्य घायल हो गये. उस बस में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के निवासी सवार थे.

बस पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने अब तक 50 लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है. बुधवार को जो भी पकड़ा गया, उससे आतंकियों के गुप्त ठिकाने के बारे में पूछताछ की जा सकती है.

तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात पर उच्च स्तरीय बैठक की. उन्होंने आतंकवाद के दमन में पूरी ताकत लगाने की बात कही. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बैठक की. घाटी के अलावा जम्मू में भी आतंकवाद से निपटने और सुरक्षा पर जोर दिया गया है. रियासी बस हमले के बाद कठुआ, डोडा जिलों के कई इलाकों में आतंकी हमले हुए. एक जवान की भी मौत हो गई. आतंक के इस माहौल में 29 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है. 19 अगस्त तक जारी रहेगा. उससे पहले सुरक्षा उपायों पर खास जोर दिया जा रहा है.

मध्य प्रदेश में दलित युवकों को नंगा कर पीटा गया, पुलिस ने तीन को हिरासत में लिया.

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मध्य प्रदेश में दलित युवक की निर्वस्त्र कर हत्या! सार्वजनिक वीडियो! पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया केचतरपुर के पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने बुधवार को कहा, “जब पीड़ित रात में घर लौट रहा था, तो आरोपी उसे जबरदस्ती ले गए और कोतवाली पुलिस स्टेशन की सीमा में उसकी पिटाई की।” छतरपुर जिले में हुई घटना में घायल युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. पुलिस ने घटना में शामिल होने के संदेह में पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि पीड़ित का सिर खून से लथपथ है. ऐसे में कुछ हमलावर उन्हें बेल्ट और पिस्तौल की बट से मार रहे हैं. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि तीन आरोपियों – देव उर्फ ​​​​देवेंद्र ठाकुर, लकी घोसी और अन्नू घोसी – को वीडियो देखने के बाद उनकी पहचान पर संदेह होने पर गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से एक पिस्तौल बरामद की गई. जैन ने कहा, ‘जांच में पता चला कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामला दर्ज किया गया था.’

बेटी के दलित युवक से शादी करने के फैसले पर माता-पिता, भाइयों ने जहर दे दिया, दो की मौत गुजरात की एक युवती ने दलित युवक से शादी की तो उसके परिवार वाले निराश हो गए। इसीलिए माना जा रहा है कि उन्होंने एक साथ जहर खाकर आत्महत्या करने का फैसला किया. लड़की ने एक दलित युवक से शादी कर ली. उनके इस फैसले से उनके पिता, मां और भाई हैरान रह गए। उस हताशा में पूरे परिवार ने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की. दो लोगों की मौत हो गई. अन्य दो का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

घटना गुजरात के अहमदाबाद की है. मृतकों में किरण राठौड़ (52) और उनका बड़ा बेटा हर्ष (24) हैं। किरण की पत्नी निताबेन और छोटे बेटे हर्षिल का इलाज चल रहा है। पुलिस के मुताबिक चारों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की. इस घटना में दंपति की बेटी, दामाद और उसके परिवार को आरोपी बनाया गया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, युवती ने कुछ साल पहले परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली थी. उन्होंने एक दलित युवक से शादी की. उनके परिजन इस घटना को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। कथित तौर पर यह परिवार बेटी की शादी के बाद से नाखुश था. उन्होंने मंगलवार को अंतिम कदम उठाया।

पड़ोसियों ने एंबुलेंस बुलाई और पुलिस को सूचना दी. अस्पताल में डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने लड़की और उसके ससुराल वालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस घटना में कुल 18 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. इस बात की जांच की जा रही है कि परिवार के चार सदस्यों ने आत्महत्या करने का फैसला क्यों किया, क्या किसी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था या नहीं। परन्तु जिसने आज्ञा दी, उसने न माना। इस ‘अपराध’ में एक दलित व्यक्ति की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई. घटना उत्तर प्रदेश के बांदा की है. आरोपी राजू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रेमचंद्र बंदर के जौराही गांव का रहने वाला है. पिछले रविवार को वह मकान का दावा लेकर बैठे थे। कथित तौर पर राजू नाम के शख्स ने उसे वहां देखा और शराब लाने का आदेश दिया. लेकिन प्रेमचंद्र नहीं माने. उसने बताया कि वह शराब लाने नहीं जा सकता. तभी गुस्से में राजू अग्निशर्मा बन गया. उसने अपनी जेब से चाकू निकाला और दलित के पेट और सीने में घोंप दिया. प्रेमचंद्र लहूलुहान हालत में जमीन पर गिर पड़े। यह देखकर राजू ने चिल्लाकर कहा।

गंभीर रूप से घायल प्रेमचंद्र को ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पुलिस ने हत्या के आरोपी राजू को गिरफ्तार कर लिया है. प्रेमचंद्र के पड़ोसियों का आरोप है कि राजू पर पहले भी कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लग चुका है. वह प्रेमचंद्र के लिए शराब लाता था। प्रेमचंद्र को भी अलग-अलग समय पर राजू के अलग-अलग आदेशों का पालन करना पड़ा। लेकिन जिस दिन उन्होंने आदेश का विरोध किया, उसी दिन हत्या हो गयी. कथित तौर पर यह परिवार बेटी की शादी के बाद से नाखुश था. उन्होंने मंगलवार को अंतिम कदम उठाया।

आखिर क्या होती है स्किल जनगणना?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर स्किल जनगणना क्या होती है! नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायड ने हाल ही में अपने राज्य में स्किल सेंसस कराने की बात कही है। चंद्रबाबू नायडू ने इंडिया गठबंधन के एजेंडे की आलोचना करते हुए कहा कि जाति जनगणना के बजाय कौशल जनगणना की ज्यादा जरूरत है। अगर नायडू की यह योजना रंग लाती है तो इस तरह की जनगणना कराने वाला आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। यह जनगणना हमें हमारे वर्कफोर्स की कैपेसिटी और खामियों को उजागर कर सकेगी। माना जा रहा है कि नायडू की इस पहल से मानव संसाधान का भरपूर इस्तेमाल किया जा सकेगा। सोशल मीडिया पर नायडू की इस पहल का स्वागत किया जा रहा है। ज्यादातर लोग इसे पूरे भारत में लागू करने की बात कर रहे हैं। दरअसल, आज जब हर ओर जब जाति जनगणना, धर्म आधारित जनगणना की बात हो रही है तो ऐसे में नायडू की यह पहल बेहद क्रांतिकारी साबित हो सकती है। एक्सपर्ट के अनुसार, नायडू की यह पहल इतनी अच्छी है कि यह पूरे देश के लिए नजीर बन सकती है। कौशल के मामले में भारत में मिली-जुली स्थिति है। भारत में आधी से ज़्यादा आबादी 25 साल से कम उम्र की है। यह बहुत बड़ी संभावना है। हालांकि, भारतीय युवा बेरोजगारी और कम रोजगार के हाई रेट का सामना कर रहे हैं। बहुत से लोगों के पास डिग्री तो है, लेकिन उपलब्ध नौकरियों के लिए जरूरी कौशल की कमी है। आागे बढ़ने से पहले ग्राफिक से ये समझते हैं कि देश में बेरोजगारी की क्या स्थिति है।

पीरियड लेबर फोर्स सर्वे, 2022-23 के अनुसार, ग्रेजुएट करने वाले युवाओं में बेरोजगारी की दर काफी ज्यादा है। इनमें 24 फीसदी के साथ आंध्र प्रदेश नंबर वन पर है। वहीं, बीमारू राज्यों में बेरोजगारी दर 16.6 फीसदी के साथ बिहार, 11 फीसदी के साथ उत्तर प्रदेश, 9.3 फीसदी के साथ मध्य प्रदेश और 23.1 फीसदी के साथ राजस्थान है। स्किल सेंसस से हम सटीक रूप से पता लगा सकते हैं कि देश भर की अलग-अलग इंडस्ट्री में किस तरह के कौशल की कितनी कमी है। इसे हम ट्रेनिंग देकर पूरी कर सकते हैं। मान लीजिए- किसी इंडस्ट्री को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से ट्रेंड लोगों की जरूरत है। ऐसे में हम ज्यादा लोगों को एआई की ट्रेनिंग देकर उस इंडस्ट्री की जरूरत पूरी कर सकते हैं।

स्किल सेंसस से वैश्विक स्तर पर किन स्किल्स की डिमांड ज्यादा है, इसका पता लगाया जा सकता है। इससे कोई भी देश अपने वर्कफोर्स को ट्रेनिंग देकर इन्हें ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि के अनुसार, नायडू की इस पहल का पूरे देश में स्वागत होना चाहिए। पीएम मोदी को भी इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए, ताकि भारत को अपने मानव संसाधन के बारे में सटीक जानकारी हो। यह भी जानकारी हो पाएगी कि यह मानव संसाधन कितना स्किलफुल है। स्किल जनगणना से प्रभावी ट्रेनिंग प्रोग्राम डेवलप किया जा सकता है। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं, जो जरूरी स्किल्स को पूरी कर सके। ऐसा तभी किया जा सकता है, जब स्किल सेंसस से इस बारे में पता लग सके कि कितने लोग स्किल से लैस हैं।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ह्मून कैपिटल इंडेक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा स्किल आबादी वाला देश फिनलैंड, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं, जो पहले, दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं। इन देशों में प्राइमरी स्कूलों की व्यवस्था काफी अच्छी है। युवाओं की साक्षरता बेहद अच्छी है और ऐसी पढ़ाई या ट्रेनिंग दी जाती है, जो उन्हें हर तरह की स्किल के लिए तैयार करती है। प्रोफेसर गिरि के अनुसार, भारत भी अगर स्किल सेंसस कराए और अपनी आबादी को इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से तैयार करे तो यह स्विट्जरलैंड या नॉर्वे जैसा देश बन सकता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि आंध्र प्रदेश में स्किल सेंसस की पहल काफी अच्छी योजना है। इससे सिर्फ आंध्र ही नहीं, पूरे भारत की तस्वीर बदल सकती है। जब हमें यह पता होगा कि हमारा वर्कफोर्स कितनी तरह की स्किल से लैस है तो हम दुनिया के दूसरे देशों को मनमुताबिक मानव संसाधनों को लेकर तोल-मोल कर सकते हैं। तब यह वर्कफोर्स सिर्फ लेबर नहीं रह जाएगा। वह अपनी शर्तों पर काम कर पाएगा। पीएम मोदी को स्किल सेंसस पूरे भारत में करानी चाहिए। जो मौजूदा राजनीति में जाति-धर्म आधारित जनगणना से इतर एक अलग नजीर पेश करेगा।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को प्रधानमंत्री यूथ ट्रेनिंग प्रोग्राम के नाम से भी जाना जाता है। भारत सरकार ने इस योजना को जुलाई 2015 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत 2020 तक एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) देने की योजना बनाई गई थी। इस योजना का मकसद ऐसे लोगों को रोजगार मुहैया कराना है जो कम पढ़े-लिखे हैं या बीच में स्कूल छोड़ देते हैं। इस योजना में तीन महीने, छह महीने और एक साल के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। कोर्स पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह प्रमाणपत्र पूरे देश में मान्य होता है।

नेट परीक्षा रद्द पर क्या बोले छात्र?

हाल ही में नेट परीक्षा रद्द पर छात्रों ने अपना दिल खोल कर रख दिया है! बड़ी खुशी-खुशी परीक्षा देकर लौटा था। उसका एग्जाम अच्छा गया था। इस बार उसे नेट क्लीयर होने का भरोसा था। लेकिन ये क्या NTA ने एक दिन बाद ही यूजीसी नेट की परीक्षा कैंसिल कर दी। मोहन जैसे कितने ही कैंडिडेट्स का दिल टूट गया। पेपर लीक की आशंका के बीच सरकार ने UGC-NET 2024 का एग्जाम कैंसिल कर दिया। इस परीक्षा को लेकर मोहन ने जमकर तैयारी की थी। उसे भरोसा ही नहीं हो रहा कि आखिर अचानक क्या हुआ। वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहा। उसका बस यही कहना है कि हमारी क्या गलती है…हम तो बड़ी मेहनत से तैयारी करके एग्जाम में शामिल होने पहुंचे थे। अब हमें फिर एग्जाम की तैयारी करनी होगी। इससे भी बड़ी टेंशन ये है कि आगे फिर ऐसा नहीं होगा। हम कैसे परीक्षा की तैयारी में जी-जान से जुटें। आंखों के सामने बस अंधकार ही नजर आ रहा। अकेले मोहन ही नहीं नेट की परीक्षा कैंसिल होने से उसके जैसे हजारों स्टूडेंट्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या करना है। नेट परीक्षा कैंसिल होने से इसमें शामिल स्टूडेंट्स के सामने वही पूरा शेड्यूल आंखों के सामने घूम गया। कैसे उन्होंने तैयारी की, कई किलोमीटर की यात्रा करके परीक्षा देने गए। इस दौरान उन्होंने भूख-प्यास की भी परवाह नहीं की। उनका टारगेट बस यही था कि नेट क्लीयर हो जाए। इससे उन्हें एक नई राह मिल जाएगी। हालांकि पेपर लीक और परीक्षा कैंसिल होने से मोहन जैसे हजारों को अपना भविष्य फिर अधर में नजर आ रहा। NEET हो या UGC-NET या फिर कोई और प्रतियोगी परीक्षा, हर छात्र इसी उम्मीद से तैयारी करता है कि एग्जाम में वो अच्छे नंबर लाएगा। खास तौर से मध्यम वर्गीय परिवार के कैबच्चों को तो इन परीक्षाओं से ज्यादा ही उम्मीदें होती हैं। ऐसा हो भी क्यों नहीं आखिर वो पूरी मेहनत से इस एग्जाम की तैयारी जो करते हैं लेकिन कुछ लोगों की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। पेपर लीक की आशंका पर सरकार या फिर एग्जाम कराने वाली एजेंसी परीक्षा कैंसिल करने में जरा भी देर नहीं करती। हालांकि, क्या वो उन स्टूडेंट्स के बारे में सोचती है जिनके लिए ये एग्जाम सबकुछ होता है। एक फैसले से इसमें शामिल छात्रों की पूरी मेहनत मानो बेकार चली जाती है।

इस तरह अचानक पेपर लीक से केवल मोहन जैसे छात्र ही परेशान नहीं हैं। उन छात्रों के परिजन भी आक्रोशित नजर आ रहे। उनका यही कहना है कि पेपर लीक की समस्या उनके जैसे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अभिशाप जैसा है। उनके बच्चे बड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं और जब परीक्षा देकर आते हैं तो पता चलता है पेपर लीक हो गया। इससे बच्चों की मेहनत पर पानी तो फिर ही जाता है। उनका हौसला भी टूट जाता है। सिर्फ बच्चों का हौसला नहीं टूटता उनके जैसे अभिभावकों का भी मनोबल प्रभावित होता है। कई परिजन लोन लेकर बच्चों की पढ़ाई कराते हैं लेकिन मेधावी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने इसका जिम्मेवार नेताओं और माफियाओं को बताया।

NEET पेपर लीक मामले में NTA पर जमकर सवाल उठे थे। अभी वो मामला थमा भी नहीं था कि नेट की परीक्षा कैंसिल होने से मोहन जैसे हजारों स्टूडेंट्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 18 जून को नेट का एग्जाम हुआ था। अगले ही दिन इसे कैंसिल कर दिया गया। यह एग्जाम भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA कराता है। पेपर लीक के लगातार बढ़ते मामलों को देखकर सवाल यही उठता है कि NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी या फिर सरकार किसी एग्जाम फुल प्रूफ तैयारी क्यों नहीं कर सकती। पेपर लीक का वाकई कोई निदान संभव है? कैसे इतनी अहम प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक हो रहे हैं। सरकार और एजेंसी इसे फुलप्रूफ क्यों नहीं कर पा रही?

आखिर पेपर लीक का कोई निदान है भी या नहीं। हर कोई सवाल खड़े कर रहे। एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसे मामलों में सिस्टम का फेल्योर जरूर होता है। इतनी बड़ी परीक्षा में शिक्षा माफिया अकसर ही जुगाड़ में लगे रहते हैं कि कैसे भी पेपर लीक हो सके। अगर नीट परीक्षा का ही उदाहरण लें तो इसमें 23 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र बनाए गए। इसी दौरान ये माफिया सेंधमारी की कवायद करते हैं और भुगतना पड़ जाता है उन स्टूडेंट्स को जो कड़ी मेहनत से एग्जाम में शामिल होते हैं। उनका टारगेट ही ये परीक्षा करना होता है। अब सोचिए ऐसे खेल में उन छात्रों का क्या कसूर है जो बेचारे रात दिन इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। उनकी कोशिश बस इतनी होती है कि एग्जाम क्लीयर हो जाए और वो अपना और अपने परिवार का सहारा बन सकें। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा कैंसिल से उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

आखिर क्यों है बिहार के बच्चे को 6 साल से सर्जरी का इंतजार?

आज हम आपको बताएंगे कि बिहार के एक बच्चे को 6 साल से सर्जरी का इंतजार क्यों है! एनएचआरसी यानी राष्ट्रीय मानवाधिकारी आयोग ने 6 साल के बच्चे के हार्ट सर्जरी में देरी पर दिल्ली एम्स को नोटिस भेजा है। बच्चे को 2019 से ही दिल की बीमारी है और तब से उसके माता-पिता एम्स के चक्कर काट रहे हैं। हर बार उन्हें सर्जरी की तारीख दी जाती है लेकिन ऑपरेशन नहीं होता। एनएचआरसी ने इस मामले को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रकाशित एक रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। एनएचआरसी ने एम्स को नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट में 6 साल के एक बच्चे के दिल के ऑपरेशन में लगभग छह साल की अभूतपूर्व देरी का मामला सामने आया था। बिहार के बेगूसराय का रहने वाला यह बच्चा 2019 में महज तीन महीने का था जब उसे दिल की बीमारी का पता चला था। बच्चे के माता-पिता का कहना है कि जब से उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला है, तब से लेकर अब तक वो कई बार एम्स का चक्कर लगा चुके हैं।

हर बार उन्हें डॉक्टरों ने सर्जरी की नई तारीख दे दी, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाया। एनएचआरसी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में जो कुछ भी कहा गया है, अगर वह सच है तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है।रहने-खाने में हर बार उन्हें 13,000 से 15,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। बच्चे की हालत ऐसी है कि वह बिना सांस फूले 15 कदम भी नहीं चल पाता। बीमारी की वजह से उसका शारीरिक विकास भी रुक गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स की तरफ से सर्जरी में देरी के अलग-अलग कारण बताए गए हैं, जिनमें बेड उपलब्ध न होना और डॉक्टरों की अनुपस्थिति शामिल है। स्वास्थ्य और मेडिकल सुविधाएं हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है। एम्स एक प्रतिष्ठित सरकारी हेल्थ संस्थान है, जहां देश भर से लोग अपने प्रियजनों का इलाज कराने के लिए आते हैं।

आयोग ने माना कि देश भर के सरकारी अस्पतालों में कई तरह की बाधाएं हैं, लेकिन यह जानकर दुख होता है कि बिहार का एक मासूम बच्चा गंभीर हालात के बावजूद छह साल से दिल की सर्जरी का इंतजार कर रहा है। यह बेहद चिंता का विषय है। एनएचआरसी ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और एम्स के निदेशक को नोटिस जारी कर एक हफ्ते के अंदर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने रिपोर्ट में बच्चे की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और एम्स के डॉक्टरों की ओर से बताई गई सर्जरी की निर्धारित तारीख का ब्योरा भी मांगा है।

रिपोर्ट का हवाला देते हुए एनएचआरसी के नोटिस में कहा गया है कि बच्चे के पिता की मासिक आय 8,000 रुपये है। इलाज के खर्च के कारण उन पर काफी आर्थिक बोझ है। दिल्ली आने-जाने और रहने-खाने में हर बार उन्हें 13,000 से 15,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। बच्चे की हालत ऐसी है कि वह बिना सांस फूले 15 कदम भी नहीं चल पाता। बीमारी की वजह से उसका शारीरिक विकास भी रुक गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स की तरफ से सर्जरी में देरी के अलग-अलग कारण बताए गए हैं, जिनमें बेड उपलब्ध न होना और डॉक्टरों की अनुपस्थिति शामिल है।

इस बीच, एम्स ने भी इन आरोपों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। एम्स मीडिया सेल की इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा ने दावा किया कि इस मामले में एक रिपोर्ट तैयार कर निदेशक कार्यालय को सौंप दी गई है। हालांकि, संपर्क के वक्त रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में क्या है, इसकी जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। उधर, बच्चे के पिता अंकित कुमार ने बताया कि एम्स के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया है और अगली बार दिल्ली आने पर ओपीडी में आने को कहा है। ‘बता दे कि हर बार उन्हें डॉक्टरों ने सर्जरी की नई तारीख दे दी, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाया। एनएचआरसी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में जो कुछ भी कहा गया है, अगर वह सच है तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है।

स्वास्थ्य और मेडिकल सुविधाएं हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है। बातचीत में अंकित कुमार ने बताया कि उन्होंने रोटरी पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी प्रोग्राम के संस्थापक डॉ. निश्चल से भी बात की है। डॉ. निश्चल ने अंकित कुमार को बताया है कि वह बच्चे की जांच के बाद ही उसके इलाज के बारे में कोई फैसला लेंगे। अंकित कुमार 27 जून को अपने बच्चे का इलाज कराने दिल्ली आने वाले हैं।

पीएम मोदी के बारे में क्या बोले राहुल गांधी?

हाल ही में राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बारे में एक बयान दे दिया है! कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर बड़ा निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी का जो कंसेप्ट था और वो गुजरात में शुरू हुआ था गुजरात मॉडल को नेशनल लेवल पर लाए, कंसेप्ट क्या था मार्केंटिंग हजारों करोड़ रुपये की मार्केटिंग और डर। एजेंसी का डर, मीडिया का डर सरकार का डर। अब हुआ क्या अब देश में उनसे कोई डरता ही नहीं है। मतलब एक तरीके से अब उनको कोई भाव नहीं देता है। जो पहले 56 इंच की छाती थी अब वो 30- 32 इंच की हो गई है। तो अब पूरा जो ढांचा था, इतना बड़ा गुब्बारा था वो इतना बड़ा हो गया। इससे नरेंद्र मोदी को मानसिक तौर पर काफी तनाव होगा। क्योंकि उनका जो काम करने का तरीका है, वो लोगों को डराने का है, धमकाने का है अब वो डर चला गया। आपलोगों ने पता नहीं देखा या नहीं, वाराणसी में किसी ने चप्पल मार दी। अब आप कल्पना करिए कि चुनाव से पहले अगर कोई मारना भी चाहता था तो डरता तो वो जो डर था वो खत्म हो गया है। और आंतरिक समस्या भी है, इनकी पार्टी में समस्या है, इनके पेरेंट संगठन में दिक्कत है। मोदी का कंसेप्ट था उसको विपक्ष ने खत्म कर दिया। मोदी की इमेज को हमने फाड़ दिया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में पेपर लीक होने बंद होने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक के गुनहगारों को तलाश कर उनपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।राहुल गांधी ने कहा, NEET पेपर और UGC-NET के पेपर लीक हुए हैं। कहा जा रहा था कि नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन की लड़ाई रोक दी थी। इजराइल और गाजा की लड़ाई को भी नरेंद्र मोदी ने रोक दिया था। लेकिन किसी न किसी कारण में हिन्दुस्तान में जो पेपर लीक हो रहे हैं उन्हें नरेंद्र मोदी नहीं रोक पा रहे या फिर रोकना नहीं चाहते। बिहार का हमने कहा है कि जांच होनी चाहिए और जिन्होंने भी पेपर लीक कराया है उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि NEET और UGC-NET पेपर लीक मुद्दे को कांग्रेस संसद में उठाएगी।

राहुल गांधी ने आगे कहा, मेडिकल परीक्षा नीट को लेकर पूरे देश में इस वक्त बवाल चल रहा है। परीक्षा के पेपर लीक के खबर के बाद तमाम राजनीतिक दल और छात्र संगठन इस वक्त विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी ओर एनटीए ने हाल ही में हुई ugc net परीक्षा को रद्द कर दिया है। इन सब हंगामे के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी नीट पेपर लीक को लेकर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की है और केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। नीट पर हंगामे और यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि पीएम मोदी पेपर लीक को नहीं रोक पा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में पेपर लीक होने बंद होने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक के गुनहगारों को तलाश कर उनपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान हजारों छात्रों ने पेपर लीक की शिकायत की थी। अब देश में NEET और UGC-NET के पेपर लीक हुए हैं। दावा किया जाता है कि नरेंद्र मोदी युद्ध रुकवा देते हैं, लेकिन वे पेपर लीक नहीं रुकवा पा रहे हैं या फिर वे पेपर लीक रोकना नहीं चाहते। मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाला हुआ, जिसे नरेंद्र मोदी पूरे देश में फैला रहे हैं। पेपर लीक का कारण है कि BJP ने पूरे सिस्टम को कैप्चर कर रखा है। जब तक ये कैप्चर रिवर्स नहीं होगा, पेपर लीक चलता रहेगा। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन की लड़ाई रोक दी थी। इजराइल और गाजा की लड़ाई को भी नरेंद्र मोदी ने रोक दिया था। लेकिन किसी न किसी कारण में हिन्दुस्तान में जो पेपर लीक हो रहे हैं उन्हें नरेंद्र मोदी नहीं रोक पा रहे या फिर रोकना नहीं चाहते। बिहार का हमने कहा है कि जांच होनी चाहिए और जिन्होंने भी पेपर लीक कराया है उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि NEET और UGC-NET पेपर लीक मुद्दे को कांग्रेस संसद में उठाएगी। पेपर लीक एक एंटी नेशनल गतिविधि है, क्योंकि इससे युवाओं को जबरदस्त चोट पहुंचती है। इसलिए पेपर लीक के जिम्मेदारों को पकड़ा जाना चाहिए और उनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए।

आखिर किन राज्यों में नोटिस की गई बरसात?

हाल ही में कुछ राज्यों में बरसात नोटिस की गई है!दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है। दिल्ली समेत उत्तर भारत में जहां वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से बूंदाबांदी होगी, तो वहीं दक्षिण भारत से मॉनसून भी आगे बढ़ने लगा है। मॉनसून करीब नौ दिनों तक एक ही जगह रुका रहा, लेकिन अब विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्र और बिहार के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अब मॉनसून की उत्तरी सीमा अमरावती, गोंदिया, दुर्ग, रायपुर (कलाहांडी), मालदा, भागलपुर और रक्सौल से होकर गुजर रही है।  आने वाले 3-4 दिनों में मॉनसून के और आगे बढ़ने की संभावना है। यह हिस्सा उत्तर अरब सागर, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी क्षेत्र के बचे हुए इलाके, झारखंड के कुछ हिस्से, बिहार के और ज़्यादा इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों में पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्र, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है। अगले 24 घंटों में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 25-35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज़ हवाएं चलने की संभावना है।वहीं, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 22 और 23 जून को तेज बारिश हो सकती है।

अगले पांच दिनों में गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं चलने की संभावना है। बिहार में 20 से 24 जून के दौरान, झारखंड में 20 और 21 जून को, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 23 और 24 जून को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। आज बिहार में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में अगले पांच दिनों में गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 20 से 24 जून के दौरान और गुजरात में 20 और 23 जून को कहीं ज़ोरदार तो कहीं बहुत ज़ोरदार बारिश होने का अनुमान है।

वहीं अगले पांच दिनों में कर्नाटक, केरल और माहे, और लक्षद्वीप में गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। अगले पांच दिनों में तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल में हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है। केरल और माहे, कर्नाटक के तटीय और दक्षिण आंतरिक इलाकों और तमिलनाडु में 20 से 24 जून के दौरान, कर्नाटक के उत्तरी आंतरिक इलाकों में 22 से 24 जून के दौरान और लक्षद्वीप में 22 और 23 जून को कहीं ज़ोरदार तो कहीं बहुत ज़ोरदार बारिश होने का अनुमान है। कर्नाटक के तटीय इलाकों में 22 और 23 जून को अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, वहीं 23 जून को कोंकण और गोवा, केरल और माहे और कर्नाटक के दक्षिण आंतरिक इलाकों में भी ऐसा ही हो सकता है। अगले पांच दिनों में मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में गरज, बिजली और 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। विदर्भ और छत्तीसगढ़ में 20 और 21 जून को तथा पश्चिम मध्य प्रदेश में 22 जून को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।

आज जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित- बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बिहार में 20 से 24 जून के दौरान, झारखंड में 20 और 21 जून को, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 23 और 24 जून को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। आज बिहार में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में अगले पांच दिनों में गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले सात दिनों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। उत्तराखंड में 23 और 24 जून को तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 जून को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। अगले 24 घंटों में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 25-35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज़ हवाएं चलने की संभावना है।

क्या आने वाले समय में मानसून देगा दस्तक?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आने वाले समय में मानसून दस्तक देगा या नहीं! भीषण गर्मी की मार झेल रहे दिल्लीवालों को थोड़ी राहत मिली है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई है। वहीं मॉनसून ने भी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ इलाकों में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने कल भी दिल्ली में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी का अनुमान जताया है। इसके अलावा मॉनसून भी बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में असर दिखाएगा। जानिए कल यानी 21 जून को आपके शहर में कैसा मौसम रहेगा। दिल्ली एनसीआर के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और हवाओं के बाद मौसम सुहावना हो गया। तापमान में 6 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कल भी दिल्ली में गर्मी से राहत जारी रहेगी। देशभर में पड़ रही गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश के सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज दिया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो एक मार्च से हीट स्ट्रोक के मामले और उससे मरने वालों के आंकडे डेली जारी करें।मौसम विभाग ने दिल्ली में शुक्रवार और शनिवार को भी बादल छाए रहने और आंधी-बारिश की संभावना जताई है। साथ ही बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ धूल भरी आंधी चलने का भी अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, कल 21 जून को बिहार, झारखंड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों और गुजरात में भी कल भारी बारिश का अनुमान है। भले ही वेस्टर्न डिस्टरबेंस के बाद हुई बारिश से दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहल मिली है, लेकिन कल से उत्तर भारत के राज्यों में फिर से लू की वापसी हो रही है। मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 21 जून यानी शुक्रवार से फिर से पश्चिमी यूपी सहित कई इलाकों में भीषण लू चल सकती है। वहीं 21 से 23 जून के बीच पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

बता दे कि गर्मी से मरने वालों की संख्या पर एक अधिकारिक सूत्र ने बताया कि ये आंकड़े राज्यों की ओर से दिए गए अंतिम आंकडें नहीं हैं। इसलिए यह संख्या बढ़ भी सकती है। बता दें कि सिर्फ 18 जून को ही हीट स्ट्रोक से मरने वालों की संख्या 6 थी। बता दें कि उत्तर और पूर्वी भारत के अधिकांश इलाके लंबे समय से भीषण लू की चपेट में है। जिसकी वजह से लोगों के बीमार होने का जो सिलसिला शुरू हुआ था वो मौत तक पहुंच रहा है। देशभर में पड़ रही गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश के सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज दिया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो एक मार्च से हीट स्ट्रोक के मामले और उससे मरने वालों के आंकडे डेली जारी करें।

हीट स्ट्रोक से बचने के लिए बेहतर होगा कि सीधे धूप में न निकलें। अगर आपको बाहर निकलना है, तो ध्यान रखें कि प्यास न लगने पर भी आप पानी पीते रहें। बता दें कि दिल्ली एनसीआर के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और हवाओं के बाद मौसम सुहावना हो गया। तापमान में 6 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कल भी दिल्ली में गर्मी से राहत जारी रहेगी। मौसम विभाग ने दिल्ली में शुक्रवार और शनिवार को भी बादल छाए रहने और आंधी-बारिश की संभावना जताई है। बता दें कि भले ही वेस्टर्न डिस्टरबेंस के बाद हुई बारिश से दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहल मिली है, लेकिन कल से उत्तर भारत के राज्यों में फिर से लू की वापसी हो रही है। मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 21 जून यानी शुक्रवार से फिर से पश्चिमी यूपी सहित कई इलाकों में भीषण लू चल सकती है। वहीं 21 से 23 जून के बीच पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। लस्सी, नींबू पानी, छाछ या ओआरएस जैसे अन्य हाइड्रेटिंग तरल पदार्थों का सेवन करें जो इलेक्ट्रोलाइट स्तर को बनाए रख सकते हैं। इसके साथ ही शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड शीतल पेय का सेवन न करें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और चश्मे, छाते और जूतों का इस्तेमाल करें।

आखिर किन लोकसभा सीटों पर आई गरीबी में कमी?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किन लोकसभा सीटों पर गरीबी में कमी आई है! लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान बीजेपी ने लगातार गरीबी कम करने के मुद्दे पर जोर दिया। ये बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में से एक था। लेकिन इस मुद्दे से बीजेपी को फायदा होता नहीं दिखा। बीजेपी सरकार के दौरान जिन इलाकों में गरीबी में गिरावट आई, वहां पार्टी को बड़ा झटका लगा। 2015-2016 से गरीबी में कमी देखी गई 517 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 232 सीटें जीतीं, जो 2019 में 295 सीटें जीतने के बाद से 63 सीटों की गिरावट है। दूसरी ओर कांग्रेस 2019 में यहां 42 सीटों से बढ़कर 2024 में 92 तक पहुंच गई। एनडीए ने कुल 282 सीटें जीतीं और विपक्षी इंडिया ब्लॉक 226 सीटें जीतने में सफल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी भाषणों में अक्सर गरीबी कम करने का दावा करते थे। उन्होंने पिछले दशक में सरकार द्वारा करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की बात अपने कई भाषणों में की। इसके लिए उन्होंने नीति आयोग का हवाला दिया। नीति आयोग हर पांच साल में इकट्ठा किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के डेटा का इस्तेमाल करके गरीबी, स्वास्थाय, शिक्षा और जीवन स्तर में कमी को मापती है। रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसवी सुब्रमणियन की टीम ने लोकसभा क्षेत्रों के लिए एक डेटाबेस बनाया। इस डेटाबेस में 2015-16 से 2019-21 के बीच गरीबी के आंकड़े शामिल किए गए। इस रिपोर्ट के अनुसार 517 लोकसभा सीटों में गरीबी कम हुई, जबकि बाकी 26 सीटों में गरीबी बढ़ी। जिन सीटों पर गरीबी कम हुई, उनमें से 314 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही बीजेपी गठबंधन जीता। वहीं, 203 सीटों पर विपक्ष के उम्मीदवार चुनाव जीते। केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी ने चुनाव अभियान के दौरान गरीबी कम करने पर काफी जोर दिया था। लेकिन, जिन 517 सीटों पर गरीबी कम हुई, वहां भाजपा को सिर्फ 232 सीटें मिलीं। इनमें से 5 सीटों पर 2019 वाले ही दल जीते। सिर्फ यूपी की श्रावस्ती सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से समाजवादी पार्टी (सपा) के पास गई। इन सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन को बराबर 3-3 सीटें मिलीं।ये 2019 के चुनाव से 63 सीटें कम हैं। वहीं, कांग्रेस को 2019 में 42 सीटों के मुकाबले 2024 में 92 सीटें मिलीं। यानी गरीबी कम होने के बावजूद कई सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि यहां कांग्रेस को ज़्यादा फायदा हुआ।

डेटाबेस के मुताबिक, जिन सीटों पर 2015 से 2021 के बीच गरीबी बढ़ी, उन 26 सीटों में से सिर्फ 6 सीटों पर इस बार विपक्षी पार्टियां जीतीं। बाकी सीटों पर पिछली बार जीती पार्टी ही फिर से चुनाव जीती। हालांकि, सिर्फ 7 सीटों पर ही गरीबी 1% से ज़्यादा बढ़ी। इनमें मेघालय की शिलांग सीट पर सबसे ज़्यादा (6.01%) गरीबी बढ़ी। जिन 26 सीटों पर गरीबी बढ़ी, उनमें से 9 पर बीजेपी जीती, जो पिछले चुनाव से दो ज्यादा है। कांग्रेस 7 सीटों पर जीती और तृणमूल कांग्रेस 3 सीटों पर। कुल मिलाकर, एनडीए को इन 26 सीटों में से 11 और इंडिया गठबंधन को 14 सीटें मिलीं। भाजपा ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से एक-एक सीट छीन ली। कांग्रेस को 3 सीटें कम मिलीं। केरल में एक सीट बीजेपी को मिली, एक सीट सीपीआई(एम) को और मेघालय में एक सीट वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी को मिली। देशभर में सिर्फ 6 सीटें ऐसी हैं, जहां आधे से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इनमें से 3 सीटें बिहार में, 2 सीटें उत्तर प्रदेश में और 1 सीट झारखंड में हैं। इनमें से 5 सीटों पर 2019 वाले ही दल जीते। सिर्फ यूपी की श्रावस्ती सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से समाजवादी पार्टी (सपा) के पास गई। इन सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन को बराबर 3-3 सीटें मिलीं।

इसके अलावा 152 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां सिर्फ 5% से कम आबादी गरीबी में रहती है। इनमें से सिर्फ 46 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही पार्टी जीती है, बाकी 106 सीटों पर पार्टी बदल गई। 314 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही बीजेपी गठबंधन जीता। वहीं, 203 सीटों पर विपक्ष के उम्मीदवार चुनाव जीते। केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी ने चुनाव अभियान के दौरान गरीबी कम करने पर काफी जोर दिया था। लेकिन, जिन 517 सीटों पर गरीबी कम हुई, वहां भाजपा को सिर्फ 232 सीटें मिलीं। ये 2019 के चुनाव से 63 सीटें कम हैं। वहीं, कांग्रेस को 2019 में 42 सीटों के मुकाबले 2024 में 92 सीटें मिलीं।बीजेपी ने इनमें से 45 सीटें जीतीं, जबकि उनकी सहयोगी पार्टियों (एनडीए) ने 15 और सीटें जीतीं। कांग्रेस को इन सीटों में से 43 सीटें मिलीं, जबकि अन्य इंडिया गठबंधन दलों को 39 सीटें मिलीं। इस तरह, कम गरीबी वाली सीटों पर विपक्षी दलों (इंडिया गठबंधन) को सत्ताधारी पार्टी (एनडीए) से ज़्यादा सीटें मिलीं।

आखिर कौन है लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष?

आज हम आपको लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष के बारे में जानकारी देने वाले हैं! सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को गुरुवार को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने यह जानकारी दी। रिजीजू ने कहा कि कटक से भाजपा सांसद महताब को लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव होने तक पीठासीन अधिकारी के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 95 (1) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम) नियुक्त किया गया है। अठारहवीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्य अस्थायी अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेंगे। बता दें कि कुमार अब केंद्रीय मंत्री हैं और इसलिए यह उम्मीद थी कि कोडिकुनिल सुरेश अस्थायी अध्यक्ष होंगे। रमेश ने कहा, उनकी जगह सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। वह छह बार बीजू जनता दल से सांसद रहे और अब भाजपा सांसद हैं। जिसने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा। नवनिर्वाचित सदस्य 24-25 जून को शपथ लेंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को होना है रिजीजू ने बताया कि अस्थायी लोकसभा अध्यक्ष की सहायता पीठासीन अधिकारियों का एक पैनल करेगा जिसमें कांग्रेस नेता के. सुरेश, द्रमुक नेता टीआर बालू, भाजपा के राधा मोहन सिंह और फग्गन सिंह कुलस्ते तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हैं। महताब लोकसभा चुनाव से पहले बीजू जनता दल (बीजद) छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

भर्तृहरि महताब के प्रोटेम स्पीकर बनाने का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस ने कहा कि उसके आठ बार के सांसद कोडिकुनिल सुरेश के बजाय बीजेपी के सांसद भर्तृहरि महताब को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना संसदीय मानदंडों को नष्ट करने का एक और प्रयास है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सुरेश बतौर सांसद अपने अपने 8वें कार्यकाल में प्रवेश करेंगे।’ उन्होंने कहा, यह एक निर्विवाद मानदंड है कि अध्यक्ष के विधिवत चुनाव से पहले सबसे वरिष्ठ सांसद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है। यह हमारी पार्टी के लिए बेहद गर्व की बात है कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के नेता के सुरेश ने आठ बार सांसद रहने की यह उपलब्धि हासिल की है।

रमेश ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने के सुरेश को नजरअंदाज क्यों किया, वह कौन सा कारण था जिसने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी कहा, ’18वीं लोकसभा में सबसे वरिष्ठ सांसद कोडिकुनिल सुरेश कांग्रेस और वीरेंद्र कुमार भाजपा हैं, दोनों अब अपना 8वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। कुमार अब केंद्रीय मंत्री हैं और इसलिए यह उम्मीद थी कि कोडिकुनिल सुरेश अस्थायी अध्यक्ष होंगे।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रमेश ने कहा, उनकी जगह सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। वह छह बार बीजू जनता दल से सांसद रहे और अब भाजपा सांसद हैं। अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा। नवनिर्वाचित सदस्य 24-25 जून को शपथ लेंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को होना है।