Thursday, March 5, 2026
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आखिर कैसे हुआ बेंगलुरु के एक कैफे में धमाका?

आज हम आपको बताएंगे कि बेंगलुरु के एक कैफे में धमाका कैसे हुआ था! बेंगलुरु में इंदिरानगर के पास एक कैफे में शुक्रवार को बम विस्फोट हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ब्लास्ट में कम तीव्रता वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया। ब्लास्ट में नौ लोगों के घायल होने की खबर है। इस हमले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। कई लोग इस ब्लास्ट को लोन वुल्फ अटैक से जोड़कर देख रहे हैं। बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी इस संबंध में ट्वीट कर लोन वुल्फ अटैक की आशंका जताई। लोन वुल्फ अटैक से आशय है कि अकेला व्यक्ति ही जमीनी स्तर पर पूरे ब्लास्ट को अंजाम देता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर इस हमले के पीछे कौन है। अभी तक किसी भी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने लिखा कि अभी कुछ दिन पहले, कांग्रेस एमएलसी बी के हरिप्रसाद ने पाकिस्तान के प्रति प्रेम का इजहार किया था। आज बेंगलुरु, यूपीए के दिनों की याद दिलाता है। संभवतः यह एक लोन वुल्फ अटैक है क्या? उन्होंने आगे लिखा कि कांग्रेस को तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सुरक्षा से समझौता करना बंद करना चाहिए। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुलिस इस घटना की सभी कोणों से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। आतंकी हमले के सवाल पर सरकार ने इस संबंध में इनकार किया है। सरकार का कहना है कि यह जानकारी नहीं है और इस मामले में अभी जांच चल रही है। एनआईए और खुफिया ब्यूरो को भी इस मामले की जानकारी दी गई है।

ब्रुकफील्ड आईटीपीएल रोड के पास में रामेश्वरम कैफे में दोपहर 12.55 बजे आईईडी विस्फोट हुआ। उस समय कैफे लगभग 250 ग्राहकों से भरा हुआ था। इनमें से ज्यादातर सॉफ्टवेयर कंपनियों और फाइनेंशियल फर्मों के कर्मचारी थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि कथित हमलावर 25-30 वर्ष की आयु का व्यक्ति है। सीसीटीवी वीडियो फुटेज का विश्लेषण करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नकाबपोश व्यक्ति को रेस्तरां के ठीक पास एक बस से उतरा था। उसे लगभग 11.30 बजे चलते हुए देखा गया था। उन्होंने कैश काउंटर पर रवा इडली की एक प्लेट के लिए पेमेंट करने के बाद टोकन लिया। वह बैग कूड़ेदान के पास रखकर करीब 11.45 बजे चला गया। एक घंटे बाद, टाइमर का उपयोग करके बम ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। शहर की पुलिस बैग छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान करने के लिए एआई-संचालित चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि संदिग्ध की पहचान कर ली गई है। उसके चेहरे की विशेषताओं को सीसीटीवी में कैद कर लिया गया है। उसे ट्रैक करने के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली का उपयोग करके मिलान किया जा रहा है। डिप्टी सीएम के अनुसार केंद्रीय अपराध शाखा को अपराध की जांच सौंपी गई है। एक-दो दिन में संदिग्ध को पकड़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, आठ टीमें तलाश में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध कहां से आया और कहां गया, यह जानने के लिए सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। मुझे विश्वास है कि हमारी पुलिस उसे पकड़ लेगी।

राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि धमाका दोपहर करीब एक बजे हुआ। यह घटना रामेश्वरम कैफे में हुई। कांग्रेस को तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सुरक्षा से समझौता करना बंद करना चाहिए। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुलिस इस घटना की सभी कोणों से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। आतंकी हमले के सवाल पर सरकार ने इस संबंध में इनकार किया है। सरकार का कहना है कि यह जानकारी नहीं है और इस मामले में अभी जांच चल रही है। एनआईए और खुफिया ब्यूरो को भी इस मामले की जानकारी दी गई है।28 से 30 वर्ष का एक युवक कैफे में आया और काउंटर पर रवा इडली खरीदी। एक-दो दिन में संदिग्ध को पकड़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, आठ टीमें तलाश में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध कहां से आया और कहां गया, यह जानने के लिए सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। मुझे विश्वास है कि हमारी पुलिस उसे पकड़ लेगी।इसके बाद बैग कैफे के सामने एक पेड़ के नजदीक रखकर चला गया। बैग रखने के करीब एक घंटे के बाद धमाका हुआ। घटना के बारे में राज्य के डिप्टी सीएम ने बताया कि यह कम तीव्रता का बम धमाका था। उसने व्यक्ति एक घंटे के बाद धमाका होने के लिए टाइमर लगाया था।

जानिए कौन था लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी आजम चीमा?

आज हम आपको लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी आजम चीमा के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं! लश्कर-ए-तैयबा के इंटेलिजेंस चीफ आजम चीमा का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। उसका निधन पाकिस्तान के फैसलाबाद में हार्ट अटैक की वजह से हुआ। चीमा की मौत की खबर ने पाकिस्तान में जिहादी हलकों के बीच हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा के कई आतंकियों की रहस्यमयी हत्याओं को देखते हुए नई अटकलों को जन्म दे दिया। चीमा मुंबई हमले समेत भारत के खिलाफ कई बड़े आतंकी साजिशों में शामिल था। उसके पाकिस्तान में होने की बात से इस्लामाबाद लगातार इनकार करता रहा। उसकी मौत के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा झटका जरूर लगा है। पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों में सिलसिलेवार रहस्यमयी तरीके से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कई आतंकियों की हत्या हुई। पाकिस्तान ने इन हत्याओं के लिए भारतीय एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन भारत ने ऐसे दावों का खंडन किया है। भारत ने सख्त लहजे में कहा है कि उसने कोई किलिंग लिस्ट नहीं बनाई है। अगर ऐसी कोई लिस्ट होती तो चीमा, जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के साथ एक बड़ा टारगेट होता।

बता दें कि चीमा ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम देने में बड़ी भूमिका निभाई। इसमें 26/11 मुंबई आतंकी हमले और जुलाई 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट शामिल हैं। भारतीय एजेंसियों के लिए, चीमा की मौत केवल पाकिस्तानी की धरती पर नामित आतंकवादियों की मौजूदगी बताती है। जबकि इस्लामाबाद बार-बार आतंकियों के पाकिस्तान में शरण लेने के दावे से इनकार करता है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीमा को लंबी दाढ़ी वाले एक शख्स के रूप में पहचाना गया, जो पंजाबी भाषा बोलता था। वो लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेताओं में शामिल रहा। चीमा 2000 के दशक की शुरुआत में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पाकिस्तान के बहावलपुर में रहता था। बताया जाता है कि वह अक्सर अपने 6 बॉडी गार्ड्स के साथ लैंड क्रूजर में सफर करता था। चीमा बहावलपुर कैंप में आतंकी ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों का ब्रेनवॉश करने के लिए पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल हमीद गुल, ब्रिगेडियर रियाज और कर्नल राफिक को लाने के लिए जिम्मेदार था। उसने कराची और लाहौर में आतंकी ट्रेनिंग कैंपों का भी दौरा किया।2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में वो लश्कर के सीनियर नेता जकी-उर-रहमान लखवी का सलाहकार बना और 26/11 मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।

कहा जाता है कि चीमा को अफगान युद्ध की कमान संभालने वालों में शामिल था। वो नक्शे पढ़ने में एक्सपर्ट था, खासतौर पर उसे भारत के नक्शे में दिलचस्पी थी। चीमा ने जिहादियों को नक्शे पर भारत की प्रमुख जगहों के बारे में सिखाया और 2000 के दशक के मध्य में सैटेलाइट फोन के माध्यम से पूरे भारत में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को निर्देश दिए।

2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में वो लश्कर के सीनियर नेता जकी-उर-रहमान लखवी का सलाहकार बना और 26/11 मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। चीमा बहावलपुर कैंप में आतंकी ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों का ब्रेनवॉश करने के लिए पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल हमीद गुल, ब्रिगेडियर रियाज और कर्नल राफिक को लाने के लिए जिम्मेदार था। उसने कराची और लाहौर में आतंकी ट्रेनिंग कैंपों का भी दौरा किया।2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था।अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।

क्या है राज कपूर के फिल्मों में गाना रखने का रहस्य?

आज हम आपको राज कपूर के फिल्मों में गाना रखने का रहस्य बताने जा रहे हैं! बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर और फिल्ममेकर राज कपूर। जिनका जिक्र होते ही उनके काम, उनके गाने और उनकी तस्वीर, या यूं कहें उनसे जुड़ी हर चीज आंखों के सामने बाइस्कोप की फिल्मों की तरह घूमने लगती है। उन्होंने ही सिनेमा की परिभाषा दी। उन्होंने ही मनोरंजन जगत को एक नया आयाम दिया। आज भी लोग उन्हें और उनके काम को याद करते हैं। उनका उदाहरण देते हैं। उनकी फिल्मों के गानों को आज भी कोई कलाकार टक्कर नहीं दे सका है। मगर क्या आप उनके एवरग्रीन गानों का किन्नरों संग कनेक्शन जानते हैं? आइए बताते हैं। फिल्ममेकर राज कपूर की पार्टियां बेहद फेमस हुआ करती थीं। आज भी उसकी चर्चा होती है। बताया जाता है कि उनके सभी पार्टियां सितारों से भरी रहती थी। इतना ही नहीं, स्टूडियो में होने वाली पार्टी में तो किन्नरों को भी बुलाया जाता था। राज कपूर उनके साथ जमकर इस त्योहार को मनाते थे। उनके साथ नाचते-गाते थे। और बात सिर्फ सेलिब्रेशन तक ही सीमित नहीं रहती थी। वह उनसे काम के सिलसिले में सलाह मश्वरा भी किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि राज कपूर अंधविश्वासी थे। वह अपनी फिल्मों के लिए गए गानों को फाइनल खुद नहीं करते थे। बल्कि ये काम वह किन्नरों से करवाते थे। वह पहले उन्हें सुनाते और जब उनकी तरफ से उस पर मुहर लग जाती, तभी उसे मूवीज में इस्तेमाल करते। अगर वो मना कर देते तो वह उस गाने को फौरन रिजेक्ट कर देते थे। फिर चाहे उसे कितने भी बड़े सिंगर ने क्यों न लिखा हो।

ऐसा ही एक वाकया काफी चर्चित है। रविंद्र जैन ने फिर नया गाना बनाया, जो था ‘सुन साहिबा सुन’, जिसे किन्नरों ने सुना और वो खुश हो गए। उन्होंने ये भी कहा कि ये गाने सालों तक चलेगा। और ऐसा ही हुआ। जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए। आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। इसलिए वह ऐसा करते थे। उनके बताए हर काम सफल होते थे। जाता है कि मंदाकिनी और राजीव कपूर की 1985 में आई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ के गाने के साथ ऐसा ही हुआ था। जब इस फिल्म के गानों को किन्नरों को सुनवाया था। और उन्होंने सभी गानों को पास कर दिया था लेकिन एक उन्हें पसंद नहीं आया था। जिसके बाद राज कपूर ने कुछ नहीं सोता और उसे मूवी से हटा दिया। फिर संगीतकार रविंद्र जैन को बुलाया और उनसे एक नए गाने की फरमाइश कर दी। रविंद्र जैन ने फिर नया गाना बनाया, जो था ‘सुन साहिबा सुन’, जिसे किन्नरों ने सुना और वो खुश हो गए। उन्होंने ये भी कहा कि ये गाने सालों तक चलेगा। और ऐसा ही हुआ। जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए।

आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। वह उनसे काम के सिलसिले में सलाह मश्वरा भी किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि राज कपूर अंधविश्वासी थे। वह अपनी फिल्मों के लिए गए गानों को फाइनल खुद नहीं करते थे। बल्कि ये काम वह किन्नरों से करवाते थे। बता दें कि जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए। आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। वह पहले उन्हें सुनाते और जब उनकी तरफ से उस पर मुहर लग जाती, तभी उसे मूवीज में इस्तेमाल करते।बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। इसलिए वह ऐसा करते थे। उनके बताए हर काम सफल होते थे।

क्या विकास के नाम पर उत्तराखंड में हो रही है तबाही?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विकास के नाम पर उत्तराखंड में तबाही हो रही है या नहीं! उत्तराखंड के ‘जागेश्वर’ में एक हजार पेड़ों के मौत के फरमान पर एक शायर की ये लाइनें सटीक बैठती हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का अल्मोड़ा जिला आजकल बेहद टेंशन में है। दरअसल जिले के ‘जागेश्वर’ में उत्तराखंड सरकार ने देवदार के 1000 पेड़ों को काटने का फरमान जारी किया है। पेड़ों के सीने पर खंजर से मौत का नंबर भी डाल दिया है। पौराणिक पेड़ों की छाती पर मौत का बिल्ला देख स्थानीय लोग और जागेश्वर धाम मंदिर के पुजारी बेहद नाराज और दुखी हैं। सोशल एक्टिविस्ट भी विकास के नाम पर पेड़ों की हत्या को रोकने के लिए सरकार पर दवाब बना रहे हैं। जागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी, हेमंत भट्ट का कहना है, ‘देवदार पेड़ों का संबंध सीधे-सीधे हिंदू धर्म की आस्था और मान्यता से है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अगर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई गई तो यह विकास नहीं विनाश की दस्तक होगी। केदारनाथ त्रासदी हम देख चुके हैं, उससे सबक लेने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा, ‘कुमाऊं कमिश्नर के संज्ञान में पूरा मामला है, उत्तराखंड सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द पेड़ों के कटान के फैसले को रद्द किया जाए।’ जागेश्वर धाम के मुख्य आचार्य गिरीश भट्ट बताते हैं कि दारूक वन की वजह से ‘जागेश्वर धाम’ का महत्व है। उन्होंने कहा, ‘शिवपुराण में स्पष्ट है कि 8वां नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ‘दारुक वन’ में है। दारुक वन का उल्लेख भारतीय महाकाव्यों, जैसे काम्यकवन, द्वैतवन, दंडकवन में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि जागेश्वर धाम देवदार के जंगल के बीच स्थित है। इसे दारुक वन के नाम से ही पहचान मिली है। यहां सात ऋषियों- कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज ने तपस्या की है। देवदार का संधि विच्छेद देव और दार है। देव का मतलब ‘देवता’ और दार का मतलब ‘वृक्ष’ होता है। देवदार के पेड़ों में देवता का स्वरूप होता है। भट्ट कहते हैं, ‘अगर इन्हें काटा गया तो 110% संभावना है कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुल जाएगा और कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आएगी, जिसके लिए सरकार तैयार रहे।’

जागेश्वर धाम के मुख्य आचार्य गिरीश भट्ट बताते हैं कि यहां रोजाना देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु भी पेड़ों की कटाई की खबर को सुनकर परेशान हैं। वहीं जागेश्वर में रहने वाले 100 से अधिक परिवारों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर पेड़ों को काटा गया तो कोई बड़ी आपदा आएगी और लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् लगातार धामी सरकार को आने वाली आपदा को लेकर आगाह कर रहे हैं।

उत्तराखंड के जागेश्वर में मास्टर प्लान के तहत हो रहे सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 1000 देवदार के पेड़ों को काटने की तैयारी से पर्यावरणविद चिंतित हैं। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने चौड़ीकरण की जद में आ रहे पेड़ों की पहचान शुरू कर दी है। इस क्षेत्र के लोग भी इसके विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े दारुक वन में खड़े इन पेड़ों की वे पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह दारुक वन भगवान शिव का निवास स्थान है, लेकिन धाम के विकास के लिए मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए आरतोला से जागेश्वर तक तीन किमी सड़क का चौड़ीकरण होना है। टू-लेन सड़क बनाने के लिए इसकी जद में आ रहे 1000 से अधिक देवदार के पेड़ों का कटान होना है। उधर स्थानीय लोग आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

नागरिक निगरानी मंच,अल्मोड़ा के संयोजक गोविंद गोपाल का कहना है कि उत्तराखंड सरकार हजारों देवदार के पेड़ों को काटने के साथ ही कई हेक्टेयर जमीन को भी बर्बाद कर देगी। जागेश्वर के लोगों के सामने जैव विविधता का खतरा मंडराने लगेगा। उनका कहना है कि सरकार ने यह फैसला पर्यावरणविदों से बिना पूछे लिया है। स्थानीय लोगों की भावना का ख्याल नहीं रखा गया है। उन्होंने बताया कि ये वन सदियों से हैं। अंग्रेजों ने भी उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में देवदार के वनों को उजाड़ा, लेकिन लोगों की धार्मिक भावना को देखते हुए कभी भी जागेश्वर और धौलादेवी के वनों को नहीं छेड़ा। लेकिन उत्तराखंड की मौजूदा सरकार ये हिमाकत कर रही है।

गोविंद गोपाल बताते हैं कि जागेश्वर के लोगों को एक अस्पताल की जरूरत है। जागेश्वर की जनता कई सालों से सीवर लाइन की मांग कर रही है। अभी सीवर का पानी जटा गंगा में गिर रहा है। उधर पेड़ों के काटे जाने से जटा गंगा की हालत और खराब हो जाएगी। जटा गंगा का अस्तित्व अभी भी खतरे में है। सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए, लेकिन सरकार मास्टर प्लान के नाम पर तबाही वाला प्लान तैयार कर रही है।

वन संरक्षण अधिनियम 1976 के अनुसार, 12 प्रजातियों के किसी भी पेड़ को काटने वाले को जेल जाना पड़ सकता है। इनमें अखरोट, अंगू, साल, पीपल, बरगद, देवदार, चमखड़िक, जमनोई, नीम, बांज, महुआ और आम के पेड़ शामिल हैं। उत्तराखंड में 12 प्रजातियों के पेड़ों को काटना पूरी तरह से मना ही नहीं बल्कि यह गैरकानूनी है। इन पेड़ों को काटने वाले को जुर्माने के साथ-साथ 6 महीने की जेल होती हो सकती है। हालांकि पिछले साल गैरसैंण के विधानसभा में वन संरक्षण अधिनियम को लेकर सदन में इस पर बात की गई थी, जिसमें पेड़ काटने पर लोगों को जेल की सजा छोडकर जुर्माना देना हो, लेकिन अभी इसपर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

आखिर भारतीय एप्स से क्या चाहता है गूगल?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गूगल भारतीय एप्स से क्या चाहता है! गूगल के अपने प्ले स्टोर से कुछ ऐप हटाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने शनिवार को कहा कि भारतीय ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सरकार ने इस संबंध में गूगल और संबंधित स्टार्टअप को बैठक के लिए अगले सप्ताह बुलाया है। आईटी और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की कुंजी है और उनके भाग्य का फैसला किसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता है। गूगल ने अपने प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने की पॉलिसी में बदलाव किए थे। इसके चलते गूगल ने सर्विस चार्जेस को 11 फीसदी से बढ़ा कर 26 फीसदी कर दिया था। इसके बाद गूगल ने सर्विस चार्ज ना देने वाली कंपनियों पर ऐक्शन के तहत उन्हें प्ले स्टोर से हटाने का फैसला लिया था। इससे पहले देश की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने पुराना सिस्टम खत्म करने का आदेश दिया था।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले को लेकर गूगल ने कहा था कि कई जानी-मानी फर्म और कंपनियों ने उनकी बिलिंग के नियमों का उल्लंघन किया है। गूगल ने बताया था कि कुछ कंपनियां बिक्री पर लागू होने वाले सर्विस चार्ज नहीं दे रहीं हैं। गूगल ने पहले ही इन एप्स को लेकर कह दिया था कि वो इन्हें प्ले स्टोर से हटाने में जरा भी संकोच नहीं करेगा। Shaadi.com, Matrimony.com, Bharat Matrimony, Naukri.com, 99acres, Kuku FM, Stage, Alt Balaji’s (Altt), QuackQuack

भारत मैट्रिमोनी.कॉम के फाउंडर मुरुगवेल जानकीरमन ने गूगल के इस कदम को भारतीय इंटरनेट का काला दिन बताया। उन्होंने बताया कि उनके एप्स एक-एक करके डिलीट किए जा रहे हैं। वहीं, शादी.कॉम के संस्‍थापक अनुपम मित्‍तल ने कहा, आज भारतीय इंटरनेट के लिए काला दिन है। गूगल ने अपने ऐप स्टोर से प्रमुख ऐप्स को हटा दिया है। यह और बात है कि भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग और सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। गूगल के झूठे नैरेटिव और दुस्साहस से पता चलता है कि उसे भारत के प्रति बहुत कम सम्मान है। यह नई डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी है। इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

मामले को लेकर IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव का भी बयान सामने आया है। मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने डेवलपर्स से बात की है। अगले हफ्ते उनके साथ मीटिंग है। उनका कहना है कि भारतीय स्टार्टअप्स को जरूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसे लेकर उन्होंने पहले ही गूगल और ऐप डेवलपर्स जिन ऐप को हटाया गया है को कॉल कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस तरह से ऐप हटाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बता दें कि भारत मैट्रिमोनी.कॉम के फाउंडर मुरुगवेल जानकीरमन ने गूगल के इस कदम को भारतीय इंटरनेट का काला दिन बताया। उन्होंने बताया कि उनके एप्स एक-एक करके डिलीट किए जा रहे हैं। वहीं, शादी.कॉम के संस्‍थापक अनुपम मित्‍तल ने कहा, आज भारतीय इंटरनेट के लिए काला दिन है। गूगल ने अपने ऐप स्टोर से प्रमुख ऐप्स को हटा दिया है। यह और बात है कि भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग और सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। गूगल के झूठे नैरेटिव और दुस्साहस से पता चलता है कि उसे भारत के प्रति बहुत कम सम्मान है। यह नई डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी है। इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

सीएसके के कप्तान एमएस धोनी आईपीएल 2024 में दोहरी भूमिका निभा सकते हैं.

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धोनी का ‘डबल रोल’! मौजूदा आईपीएल में माही चेन्नई के लिए किन दो भूमिकाओं में नजर आएंगे? इसी महीने आईपीएल शुरू हो रहा है. महेंद्र सिंह धोनी एक नहीं बल्कि दो भूमिकाओं में नजर आ सकते हैं. ऐसा खुद धोनी ने कहा था. महेंद्र सिंह धोनी इस साल आईपीएल में दो भूमिकाओं में नजर आएंगे. लेकिन क्या उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स का कप्तान बनने के अलावा कोई और ज़िम्मेदारी भी संभालनी होगी? हालाँकि, इस बारे में अभी तक कुछ भी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है।

अटकलें खुद धोनी ने शुरू कीं. उन्होंने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “नए सीज़न और नई भूमिका का इंतज़ार नहीं कर सकते।” पोस्ट तेजी से वायरल हो गई. समर्थकों को समझ नहीं आया कि धोनी का मतलब क्या है? वे इंतज़ार कर रहे थे.

धोनी ने आखिरकार बुधवार को सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया। वो है आईपीएल का विज्ञापन. उस वीडियो में धोनी दो उम्र में नजर आ रहे हैं. एक युवक एक और बूढ़ा आदमी. धोनी ने कैप्शन में लिखा, ”नए सीजन में दोहरी भूमिकाएं. आईपीएल के बारे में सब कुछ जियो सिनेमा पर देखा जा सकता है। क्योंकि, यही सब कुछ है.” धोनी के विज्ञापन से यह साफ नहीं है कि वह दोनों में से किस भूमिका की बात कर रहे हैं. इस सीजन में वह खुद ही कप्तान हैं. इसके अलावा धोनी के फैंस उन्हें किसी और भूमिका में देखने का भी इंतजार कर रहे हैं या नहीं.

इस साल का आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. पहले मैच में पिछली बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स मैदान में उतर रही है. धोनी पहला मैच विराट कोहली की आरसीबी के खिलाफ खेलेंगे. महेंद्र सिंह धोनी भारत ही नहीं आईपीएल के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं. उनके नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल जीता है। टीम के साथी कप्तान धोनी की बात मानते हैं. विरोधी क्रिकेटरों ने भी उनकी तारीफ की. सभी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें. धोनी ने आईपीएल में कप्तानी करने के अपने अनुभव के बारे में बात की.

आईपीएल के ब्रॉडकास्टर को दिए इंटरव्यू में धोनी ने कहा कि आईपीएल ने उन्हें विदेशी खिलाड़ियों को जानने और समझने का मौका दिया है. धोनी ने कहा, ”2008 में चेन्नई टीम का संतुलन बहुत अच्छा था. टीम में कई ऑलराउंडर थे. अनुभव भी भरपूर था. टीम में मैथ्यू हेडन, माइक हसी, मुथैया मुरलीथॉर्न, मखाया एनतिनी, जैकब ओरम जैसे क्रिकेटर थे. ऐसे सभी क्रिकेटरों का एक ड्रेसिंग रूम में होना एक शानदार अनुभव है। लेकिन असली चुनौती यह जानना था कि मैदान के बाहर वे कैसे हैं।

अगर मैदान पर प्रदर्शन अच्छा है तो ऐसा होगा. पेशेवर क्रिकेट में किस तरह का व्यक्ति महत्वपूर्ण है? धोनी ने कहा, ”मुझे लगता है कि किसी टीम का नेतृत्व करने के लिए आपको उस टीम के सभी लोगों को अच्छे से समझना होगा. किसी को व्यक्तिगत रूप से जानने, उसकी ताकत और कमजोरियों के बारे में जानने से टीम को सही दिशा में आगे ले जाना आसान हो जाता है।” मैं प्रतिद्वंद्वी क्रिकेटरों के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता. लेकिन आईपीएल ने दूसरे क्रिकेटरों को जानने का मौका दिया है. मुझे क्रिकेट के बारे में उनके विचार जानने को मिले।’ मुझे उनकी संस्कृति के बारे में पता चला. कुल मिलाकर आईपीएल का ये चरण बहुत अच्छा है.

कुछ दिन पहले धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ जामनगर गए थे. मुकेश अंबानी के बेटे अनंत के प्री-वेडिंग फंक्शन में शामिल हुए। उस प्रकरण को पूरा करने के बाद चेन्नई के कप्तान ने क्रिकेट में प्रवेश किया है। आईपीएल के पहले मैच में धोनी की चेन्नई मैदान पर उतरेगी. 22 मार्च को घरेलू मैदान पर उनका मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से होगा। महेंद्र सिंह धोनी आगामी आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए नई भूमिका में नजर आ सकते हैं. इस बात का संकेत खुद चेन्नई के कप्तान ने सोशल मीडिया पर दिया. सोमवार को उनके 12 शब्दों के पोस्ट को लेकर नई अटकलें लगाई गई हैं.

धोनी ने अभी संन्यास का फैसला नहीं किया है. इस साल के आईपीएल में भी वह चेन्नई का नेतृत्व करने वाले हैं। 42 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज अभी भी 22 गज की दूरी पर लड़ने के लिए पर्याप्त फिट हैं। लेकिन उनके इस पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू हो गई. धोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”नए सीजन का इंतजार नहीं कर सकते. नई भूमिकाओं के लिए भी. इस पर नजर रखें.” क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि धोनी अनावश्यक अटकलें फैलाने वाले व्यक्ति नहीं हैं. इस संदेश से उन्हें स्पष्ट नेतृत्व वाली नई भूमिका में देखा जा सकता है. वह जिम्मेदारी क्या हो सकती है? या फिर वो चेन्नई की कप्तानी छोड़कर आम क्रिकेटर बनकर खेलेंगे! ऐसी अटकलें शुरू हो गई हैं. 26 फरवरी 2022 के बाद धोनी ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन के अलावा कुछ भी पोस्ट नहीं किया. ऐसे में सोमवार को की गई उनकी पोस्ट का खास मतलब माना जा रहा है.

भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने राजकोट टेस्ट के दौरान अस्पताल में भर्ती अपनी मां के बारे में बात की.

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‘बीमार मां ने मुझे खेलने के लिए कहा था’, भारतीय स्पिनर ने अश्विन को बताई राजकोट टेस्ट में वापसी की वजह अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उन्होंने अपने बेटे को भारतीय टीम में लौटने का आदेश दिया। अश्विन ने वह बात रखी. राजकोट टेस्ट के दौरान रविचंद्रन अश्विन की मां चित्रा बीमार पड़ गईं. टेस्ट के बीच में भारतीय स्पिनर अपनी मां के पास गए. अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उन्होंने अपने बेटे को भारतीय टीम में लौटने का आदेश दिया। अश्विन ने वह बात रखी. वह वापस गये और टीम में शामिल हो गये।

अश्विन ने राजकोट में अपना 500वां टेस्ट विकेट लिया. वह अनिल कुंबले के बाद 500 टेस्ट विकेट लेने वाले पहले भारतीय बने। अश्विन ने कहा, ”मैं चेन्नई गया और अस्पताल गया. माँ को कोई ज्ञान नहीं था. जब उसे होश आया तो उसने मुझसे कहा, “तुम क्यों आये?” कुछ देर बाद मां फिर बेहोश हो गई। अगली चेतना मुझे वापस लौटने के लिए कहती है, “तुम वापस जाओ। टेस्ट मैच चल रहा है।” अश्विन 100वां टेस्ट खेलने जा रहे हैं. धर्मशाला में वह इस मुकाम को छूने जा रहे हैं. अश्विन ने कहा, ”मेरा पूरा परिवार क्रिकेट का प्रशंसक है. वे भी मेरे साथ सभी भावनाओं से गुज़रे। मेरी उम्र 37 साल है. अब भी मेरे पिता खेल ऐसे देखते हैं जैसे यह मेरा पहला मैच हो. ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. ऐसा लगता है कि वे मुझसे ज्यादा क्रिकेट पसंद करते हैं।’ अगर मेरे और क्रिकेट के बीच कुछ भी आया तो उन्होंने उसे हटा दिया।’ ऐसा लगता है जैसे यह मेरे जन्म के बाद से ही हो रहा है।”

रविचंद्रन अश्विन पूर्व क्रिकेटरों का सम्मान नहीं करते. इसी बात को लेकर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने शिकायत की थी. वह अश्विन को शुभकामनाएं देने के लिए बार-बार उनसे संपर्क नहीं कर सके. शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया पर यही लिखा है।

अश्विन 100वां टेस्ट खेलने जा रहे हैं. वह मैच धर्मशाला में होगा. शिवरामकृष्णन ने उससे पहले अश्विन को बुलाया। लेकिन अश्विन ने फोन नहीं उठाया. इसके बाद शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”मैंने अश्विन को कई बार फोन किया. मैं बस 100वें टेस्ट से पहले बधाई देना चाहता था। उसने मेरा फ़ोन काट दिया. मैंने एक संदेश भेजा. लेकिन कोई जवाब नहीं आया. पूर्व क्रिकेटरों को ऐसे सम्मान मिलते हैं. सज्जन लोग सम्मान दिखाना जानते हैं.” यह पहली बार नहीं है, शिवरामकृष्णन इससे पहले भी अश्विन की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने पहले कहा था, “भारत में पिचें अश्विन को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। जिसका खामियाजा भारतीय बल्लेबाजों को भुगतना पड़ा. आर्मी देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में अश्विन के पास कितने विकेट हैं। वह बहुत आत्मकेंद्रित क्रिकेटर हैं।”

रविचंद्रन अश्विन ने प्रतिद्वंद्वी के अभ्यास के लिए एक ‘जासूस’ भेजा। उनकी मदद से, उन्होंने प्रतिद्वंद्वी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की योजना सीखी। अश्विन धर्मशाला में अपना 100वां टेस्ट खेलेंगे. इससे पहले उन्होंने अपने गुप्त हथियार के बारे में बताया.

एक इंटरव्यू में अश्विन ने कहा, ”मीडिया में मेरे कुछ दोस्त हैं। उनका उपयोग करें। वे प्रतिद्वंद्वी के अभ्यास में जाते हैं और वीडियो बनाते हैं। उसके बाद मैंने वो वीडियो देखा. जब मैं ऑस्ट्रेलिया में था, मैंने मार्नाश (लाबुशेन) और स्मिथ (स्टीव) के पैरों का उपयोग करते हुए वीडियो देखे। अपने प्रतिद्वंद्वी की योजना को जानना आधी लड़ाई जीतने के बराबर है। मैं ऐसा करने की कोशिश करता हूं।”

इसके बाद भी अश्विन ने जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने उनके खिलाफ बल्लेबाजी की, उसकी तारीफ की. भारतीय स्पिनर ने कहा, ”ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड पिछले कुछ सालों में स्पिनरों से अच्छी गेंदबाजी करा रहे हैं। उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती दिख रही है. वे जानते हैं कि भारत में स्पिन को विकेट मिलेंगे। इसलिए वे खुद को पहले से ही तैयार कर लेते हैं. जैसे हम विदेश जाने से पहले हरी विकेटों पर अभ्यास करते हैं, वे भी वैसा ही करते हैं।” मील के पत्थर के सामने खड़े अश्विन को खुद से ज्यादा अपने परिवार की याद आती है. क्योंकि अश्विन के मुताबिक इस मिसाल से उनका परिवार उनसे भी ज्यादा खुश होगा. अश्विन ने कहा, ”मेरे लिए 100वां मैच काफी अहम है. लेकिन मेरे पिता, मां, पत्नी और बच्चों के लिए मुझसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। मेरे बच्चे मुझसे भी अधिक उत्साही हैं। क्योंकि उन्होंने मेरी सफलता के लिए बहुत त्याग किया है।’ अन्यथा मैं वहां नहीं पहुंच पाता जहां मैं आज हूं। मेरे पिता आज भी हर दिन 50 कॉल लेते हैं। वह अपने बेटे के बारे में बात करते हैं। इसलिए मैं उन्हें और अधिक याद करता हूं।”

अश्विन ने भारत के लिए अब तक कुल 280 मैच खेले हैं. इनमें 99 टेस्ट मैचों में 507 विकेट, 116 वनडे मैचों में 156 विकेट और 65 टी20 मैचों में 72 विकेट शामिल हैं.

अमित शाह ने मुंबई में आशा भोसले की नई किताब की लॉन्च.

दिग्गज संगीतकार आशा भोसले ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. अमित शाह इस समय आगामी लोकसभा चुनाव की बैठक के लिए मुंबई में हैं। गृह मंत्री आशा ने बुधवार को ‘बेस्ट ऑफ आशा भोसले’ पुस्तक का आधिकारिक विमोचन किया।

आशा बुधवार को अमित से मिलीं और उन्हें कपड़े में लपेटकर किताब दी। स्वरास्त्र मंत्री ने इसका खुलासा किया और कुछ देर तक कलाकार के साथ संगीत पर चर्चा की. बाद में अमित ने अपने एक्स हैंडल पर तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “महान गायिका आशा दीदी से मिलना हमेशा एक बेहतरीन पल होता है। आज मुंबई में हमने उनसे अपने संगीत और संस्कृति के बारे में ढेर सारी बातें कीं. वह हम सभी के लिए प्रेरणा हैं और उनकी आवाज हमारे संगीत जगत के लिए वरदान है।” आशा ने बुधवार को सफेद साड़ी पहनी थी। एक मैचिंग शॉल थी. कलाकार के साथ उनकी अपनी टीम के सदस्य भी थे। स्वराष्ट्र मंत्री के अनुरोध पर आशा ने उनके लिये गाना भी गाया। वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल होने में देर नहीं लगी. इसमें दिख रहा है कि आशा 1961 में रिलीज हुई देव आनंद की फिल्म ‘हम दोनों’ का मशहूर गाना ‘अवी ना जाओ छोड़ कर’ गा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, आशा की किताब में कलाकार द्वारा विभिन्न क्षणों में ली गई तस्वीरों का संग्रह है। लोकप्रिय फोटोग्राफर गौतम राजदक्षा तस्वीरें शूट कर रहे हैं। इस पुस्तक के अलावा, कलाकार के जीवन की कई घटनाएँ और लोकप्रिय गीतों से संबंधित कथाएँ भी सामने आई हैं। महान संगीतकार राहुल देव बर्मन और संगीतकार आशा भोसले की प्रेम कहानी लंबे समय से मायानगरी में चलन में है। राहुल ने 1980 में आशा से शादी की। दोनों की ये दूसरी शादी है.

उनका रिश्ता संगीत में जितना मजबूत था, निजी जिंदगी में भी उतना ही मजबूत था। आशा ने एक इंटरव्यू में राहुल से अपनी पहली मुलाकात के बारे में बताया। प्रतिभाशाली राहुल तब युवा थे. सभी लोग उन्हें प्यार से पंचम बुलाते थे। इस पुस्तक के अलावा, कलाकार के जीवन की कई घटनाएँ और लोकप्रिय गीतों से संबंधित कथाएँ भी सामने आई हैं। महान संगीतकार राहुल देव बर्मन और संगीतकार आशा भोसले की प्रेम कहानी लंबे समय से मायानगरी में चलन में है। राहुल ने 1980 में आशा से शादी की। दोनों की ये दूसरी शादी है.

एक पतला, पीला युवक. मोटे शीशे। आशा को वह पाँचवाँ मालूम था। गायिका के शब्दों में, “उस लड़के ने मुझसे ऑटोग्राफ मांगा। उन्हें रेडियो पर मेरा मराठी थिएटर संगीत सुनना पसंद था।’ इसके बाद उनकी दोस्ती और गहरी हो गई. आशा को पता चला कि राहुल ने कोलकाता में कॉलेज छोड़ दिया है. याद करते हुए आशा ने कहा, ‘मैं उनके भविष्य को लेकर चिंतित थी। मैंने कहा, ग्रेजुएशन तो कर लूं. उन्होंने रिकॉर्डिंग के दौरान मेरा अपमान किया. नहीं बोला ”

राहुल एक मज़ाकिया इंसान थे. वह कई लोगों की आवाज़ की नकल कर सकता था। आशा को तोहफे में गुलाब के फूल के साथ झाड़ू भी दी गई. मशहूर संगीत निर्देशक सचिन देव बर्मन के बेटे राहुल संगीत में एक नया चलन लेकर आए। संगीत उनमें इस कदर व्याप्त हो गया कि आशा को लगा कि अस्तित्व के अन्य पहलू इसकी छाया में आ गए हैं। एक पति के रूप में, एक बच्चे के रूप में, उन्हें समाज में मान्यता नहीं मिल सकी। आशा ने कहा, ”उन्हें फर्श पर सोना पसंद था. लेकिन उनका म्यूजिक सिस्टम, स्टीरियो बरकरार रखा गया. उसने यह नहीं सोचा कि वह क्या खा रहा है। वह संगीत में रहते थे, खाते थे और सोते थे। अब ऐसा लगता है कि मैंने उनके जैसी प्रतिभा को समाज के ज्ञात पटल पर बांधने के लिए बाध्य करने का प्रयास नहीं किया था.

आशा को लगता है कि राहुल ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने एक गायक के रूप में उनकी प्रतिभा की सराहना की थी। जबकि ओपी नायर या शंकर-जयकिशन ने उनकी प्रतिभा की सराहना की, वह राहुल ही थे जिन्होंने एक गायक के रूप में उनकी सीमा की खोज की। उन्होंने अपनी आवाज के साथ कई तरह के प्रयोग किए हैं. उनका 25 साल पुराना संगीत संबंध था। आशा ने राहुल से अपनी आखिरी मुलाकात के बारे में भी बताया. राहुल अपने दर्द के बारे में बात करना चाहते थे. आशा ने कहा, ‘वह मुझे मेरे नाम से बुलाना चाहते थे, लेकिन खत्म नहीं कर सके।’ 4 जनवरी 1994 को 54 वर्ष की आयु में राहुल का निधन हो गया।

पुलकित सम्राट कृति खरबंदा की शादी दिल्ली में हुई?

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चंदनताला कृति-पुलकित, सलमान की एक्स भाभी कब कर रही हैं दोबारा शादी? कृति-पुलकित का रिश्ता 2019 से है। लंबे सफर के बाद इस बार इनका रिश्ता खत्म होने जा रहा है। पुलकित सम्राट और कृति खरबंदा ने जनवरी में सगाई की थी। इस बार दो सितारे शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। वे 15 मार्च को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। लेकिन उनकी शादी का समारोह 13 तारीख से शुरू होगा. पुलकित-कृति की शादी करीब चार दिनों तक चलने वाला ग्रैंड इवेंट होगा. हालांकि, उनकी शादी में बॉलीवुड से बहुत कम मेहमान शामिल होंगे। वे मुंबई में शादी भी नहीं करते। शादी से लेकर रिसेप्शन तक सब कुछ दिल्ली में होगा। क्योंकि कृति और पुलकित दोनों का जन्म वहीं हुआ था. साथ ही पुलकित का भी घर है.

बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर एक शादी के निमंत्रण की फोटो वायरल हो गई. कई लोगों ने दावा किया है कि यह पुलकित और कृति की शादी का निमंत्रण पत्र है। हालांकि मार्च के अंत में कृति ने पुलकित को लिखा था, ”चलो मार्च में करते हैं.” हालांकि, शादी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. पुलकित की ये पहली नहीं, बल्कि दूसरी शादी है। एक्टर पुलकित काफी समय से सलमान खान की ‘राखी बहन’ श्वेता रोहिरा से प्यार करते थे। सलमान की ट्रेनिंग के तहत पुलकित ने 2012 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। श्वेता से शादी के बाद एक्टर ने शादीशुदा जिंदगी में सिर्फ एक साल ही बिताया। पुलकित-श्वेतार अलग हो गए। तब से काफी समय बीत चुका है. श्वेता से ब्रेकअप के बाद एक्ट्रेस यामी गौतम के रोमांटिक रिलेशनशिप में होने की अफवाह थी। पत्नी श्वेता को पुलिकत से कई शिकायतें थीं। जब गर्भपात के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब उनका साथ देना तो दूर, पुलकित ने रिश्ता तोड़ने का रास्ता बना लिया। उस वक्त एक्टर यामी गौतम के साथ वक्त बिताने में बिजी थे. हालाँकि, वह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका। इस रिश्ते के टूटने के बाद पुलकित को कृति से प्यार हो जाता है। करीब पांच साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद ये कपल एक साथ एक रिश्ते में है।

अभिनेता पुलकित सम्राट लंबे समय तक सलमान खान की ‘राखी बहन’ श्वेता रोहिरा से प्यार करते थे। सलमान की ट्रेनिंग के तहत पुलकित ने 2012 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। श्वेता से शादी के बाद एक्टर ने शादीशुदा जिंदगी में सिर्फ एक साल ही बिताया। पुलकित-श्वेतार अलग हो गए। तब से काफी समय बीत चुका है. श्वेता से ब्रेकअप के बाद एक्ट्रेस यामी गौतम के रोमांटिक रिलेशनशिप में होने की अफवाह थी। पत्नी श्वेता को पुलिकत से कई शिकायतें थीं। जब गर्भपात के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब उनका साथ देना तो दूर, पुलकित ने रिश्ता तोड़ने का रास्ता बना लिया। उस वक्त एक्टर यामी गौतम के साथ वक्त बिताने में बिजी थे. 2016 में फिल्म ‘सनम रे’ की शूटिंग के दौरान यामी-पुलकित की बात हुई थी. वहीं से घनिष्ठता की शुरुआत हुई. पुलकित के तलाक के बाद भी उनका रिश्ता जारी रहा। इस रिश्ते के टूटने के बाद पुलकित को कृति खरबंदा से प्यार हो गया। इस बार एक्टर ने उनसे सगाई कर ली है. जोड़े की कुछ तस्वीरों को लेकर अटकलें।

पहली फिल्म ‘बिट्टू बॉस’ से पुलकित ने उम्मीदें जगाईं। ‘फुकरे’ और ‘डॉली की डोली’ में भी उनके अभिनय को सराहना मिली। लेकिन हीरो एक्टिंग से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे हैं. वहीं कृति ने 2016 में फिल्म ‘राज: रीबूट’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘शादी में जरूर आना’, ‘कारवां’, ‘हाउसफुल 4’ जैसी फिल्मों में काम किया। कैमरे के सामने विभिन्न भूमिकाओं में अभिनय करते हुए, कृति कैमरे के पीछे अपने मधुर स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। वह फैन्स से मुस्कुराते हुए बात करते, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते भी नजर आते हैं। वे 2019 से रिलेशनशिप में हैं। इनका रिश्ता बहुत जल्द खत्म होने वाला है. हाल ही में पुलकित की बहन ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक तस्वीर पोस्ट की है. वहां दिख रहा है कि पुलकित कृति से उलझा हुआ है. दो लोगों की अनामिका पर अंगूठी. कृति ने नीले रंग का अनारकली चूड़ीदार पहना था, पुलकित ने पंजाबी पायजामा पहना था। उनके साथ पूरा परिवार और दोस्त मौजूद हैं. हालांकि, पुलकित और कृति दोनों में से किसी ने भी अभी तक सगाई पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

ईडी ने एक्साइज पॉलिसी मामले में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज की है.

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बुलाया लेकिन नहीं आ रहे! ED ने इस बार केजरीवाल के खिलाफ कोर्ट में शिकायत दर्ज की, कोर्ट ने क्या कहा? दिल्ली एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में ईडी केजरीवाल को आठ बार तलब कर चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आठ बार समन का जवाब नहीं दिया. वह आधिकारिक समारोहों में भाग ले रहे हैं. वह वोट के लिए प्रचार भी कर रहे हैं. हालांकि, ईडी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक नहीं पहुंच पा रही है. उन्हें समन भेजने से तंग आकर केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है. इसके साथ दूसरी बार.

ईडी ने बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में यह शिकायत दर्ज की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि केजरीवाल समन का जवाब नहीं दे रहे हैं. वे ईडी के समन पर उनके कार्यालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं, उल्टे हर बार कोई न कोई कारण बताकर टाल रहे हैं. ऐसे में ईडी ने केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई है. इसके उलट दिल्ली कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को 16 मार्च तक ईडी दफ्तर में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होना होगा. इसके बाद ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. दिल्ली एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में ईडी केजरीवाल को आठ बार तलब कर चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आठ बार समन का जवाब नहीं दिया. केजरीवाल के खिलाफ ईडी की शिकायत है कि केजरी ने दिल्ली में एक शराब की दुकान को गैरकानूनी तरीके से मंजूरी देने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में ईडी की चार्जशीट में भी केजरी के नाम का जिक्र किया है.

ईडी की इस शिकायत के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई करेगी. ईडी की अर्जी पर गुरुवार को दिल्ली की इस अदालत की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ​​के घर में सुनवाई होगी. ‘लक्ष्मी भण्डार’ दिल्ली में भी है। अरविंद केजरीवाल की सरकार राजधानी की महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये भी देगी. वित्त मंत्री आतिशी ने सोमवार को राज्य का बजट पेश करते हुए यह बात कही. वित्तीय वर्ष 2024-25 से ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत महिलाओं को हर महीने वह पैसा मिलेगा। जैसा कि अब पश्चिम बंगाल में महिलाओं को मिलता है। दिल्ली में सभी महिलाओं को यह सुविधा नहीं मिलेगी. आतिशी ने यह भी बताया कि किसे नहीं मिलेगा.

आतिशी ने सोमवार को कहा, ”केजरीवाल सरकार 18 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह देगी. दिल्ली की महिलाओं को यह लाभ मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत मिलेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल सरकार ने रुपये आवंटित किए हैं. वित्त मंत्री आतिशी ने सोमवार को दिल्ली विधानसभा में यह स्पष्ट किया. 1000 रुपये प्रति माह पाने के लिए महिला की उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। इनकम टैक्स भरने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा. अगर कोई महिला किसी अन्य पेंशन योजना की लाभार्थी है या दिल्ली सरकार की कर्मचारी है तो उन्हें भी यह लाभ नहीं मिलेगा।

सोमवार को दिल्ली विधानसभा में बजट पेश किया गया. वहां वित्त मंत्री ने ‘राम राज्य’ की बात कही. आतिशी ने कहा, ”आज यहां जो भी लोग हैं वे राम से प्रेरित हैं। पिछले नौ वर्षों से हम राम राज्य के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं। पिछले नौ वर्षों से हम दिल्ली के लोगों के लिए सुख और समृद्धि लाने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली में राम राज्य स्थापित करने के लिए अभी बहुत काम बाकी है, लेकिन पिछले नौ वर्षों में बहुत कुछ किया जा चुका है.” आतिशी ने बजट पेश करने से पहले दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया की मां का आशीर्वाद भी लिया. मनीष अब जेल में है.

पश्चिम बंगाल सरकार ने इस साल के बजट में लक्ष्मी भंडार परियोजना के लिए वित्तीय आवंटन बढ़ा दिया है। राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बजट पेश करते हुए कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाकर 1,200 रुपये प्रति माह और अन्य के लिए 1,000 रुपये प्रति माह की जाएगी। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए आवंटित जमीन पर कब्जा करने और पार्टी कार्यालय बनाने के लिए उनकी आलोचना की गई थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) को तुरंत कब्जा हटाने का आदेश दिया.

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेपी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राउज एवेन्यू क्षेत्र में कार्यालय बनाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए आवंटित भूमि को हड़पने के लिए आप नेतृत्व को फटकार लगाई। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की पार्टी को 15 जून तक दफ्तर खाली करने का आदेश दिया.