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अपनी ही पार्टी कांग्रेस के बारे में क्या बोली राधिका खेड़ा?

हाल ही में कांग्रेस की पूर्व प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने अपनी ही पार्टी कांग्रेस के बारे में एक बयान दिया है! लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं। छत्तीसगढ़ कांग्रेस की नेता राधिका खेड़ा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेता सुशील आनंद शुक्ला और उनके दो साथियों ने उनके साथ अभद्रता करने की कोशिश की। इतना ही नहीं जब उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी के शीर्ष नेताओं से की तो उसके बाद भी उन पर कोई एक्शन नहीं लया गया। कांग्रेस की पूर्व नेता राधिका खेड़ा ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश तक सबको इस आपत्तिजनक घटना के बारे में बताया गया, लेकिन आरोपी नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। वह राम मंदिर जाने और राम लला की मूर्ति के दर्शन करने से खुद को रोक नहीं सकीं।मैंने अपने जीवन के 22 साल इस पार्टी को समर्पित किए हैं और एनएसयूआई से लेकर कांग्रेस के मीडिया विभाग तक पूरी ईमानदारी से काम किया है। उसके बाद भी मुझे विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि मैं अयोध्या में राम का समर्थन करती हूं।राधिका खेड़ा ने पार्टी पर आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर की यात्रा के कारण उन्हें पार्टी के नेताओं द्वारा काफी परेशान किया गया। इसकी शिकायत जब उन्होंने छत्तीसगढ़ इकाई में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सचिन पायलट, जयराम रमेश, भूपेश बघेल और पवन खेड़ा सहित अन्य नेताओं से की तो उसके बाद भी उनकी कोई सहायता नहीं की गई। उन्हें पार्टी के भीतर से आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह राम मंदिर जाने और राम लला की मूर्ति के दर्शन करने से खुद को रोक नहीं सकीं।मैंने अपने जीवन के 22 साल इस पार्टी को समर्पित किए हैं और एनएसयूआई से लेकर कांग्रेस के मीडिया विभाग तक पूरी ईमानदारी से काम किया है।जिसके बाद राधिका खेड़ा ने पार्टी के अंदर से पुरुषवादी मानसिकता को उजागर करने की कसम खा ली थी।

कांग्रेस की पूर्व नेता राधिका खेड़ा ने दावा किया कि उन्होंने जिस भी कांग्रेस नेता से बात की, उनमें से हर एक ने उन्हें चुप रहने की हिदायत दी और पार्टी के साथ तालमेल न रखने के लिए फटकार लगाई। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जिक्र करते हुए खेड़ा ने आरोप लगाया कि सुशील आनंद द्वारा अपमान और मौखिक दुर्व्यवहार के बारे में जानने के बाद, पूर्व ने उन्हें छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए कहा था। राधिका खेड़ा ने सुशील आनंद शुक्ला पर आरोप लगाया कि उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की और गाली भी दी। जब मैंने फोन पर रिकॉर्डिंग करने की धमकी दी तो उनके साथ कमरे में मौजूद दो लोगों ने कमरा बंद कर दिया और मुझे गालियां देने लेगे। मैं चिल्लाती रही लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी। उसके बाद मैंने दरवाजे को धक्का दिया और प्रदेश महासचिव के कमरे में चली गई और वहां उनकी शिकायत की लेकिन वो एक बार भी अपनी कुर्सी से नहीं उठे।

राधिका खेड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने इस्तीफे में कहा कि उन्हें पार्टी के भीतर से आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह राम मंदिर जाने और राम लला की मूर्ति के दर्शन करने से खुद को रोक नहीं सकीं।मैंने अपने जीवन के 22 साल इस पार्टी को समर्पित किए हैं और एनएसयूआई से लेकर कांग्रेस के मीडिया विभाग तक पूरी ईमानदारी से काम किया है। उसके बाद भी मुझे विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि मैं अयोध्या में राम का समर्थन करती हूं।

राधिका खेड़ा ने कांग्रेस नेता सुशील कुमार पर आरोप लगाया कि सुशील कुमार ने मुझे भारत जोड़ो यात्रा के दौरान शराब ऑफर की थी। उन्होंने मुझे बार बार फोन करके पूछा कि कौन सी शराब चाहिए। बता दें कि कांग्रेस की पूर्व नेता राधिका खेड़ा ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश तक सबको इस आपत्तिजनक घटना के बारे में बताया गया, लेकिन आरोपी नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। राधिका खेड़ा ने पार्टी पर आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर की यात्रा के कारण उन्हें पार्टी के नेताओं द्वारा काफी परेशान किया गया। वह मेरे कमरे को भी बार- बार खटखटाते थे। जब मैंने इसकी शिकायत शीर्ष नेताओं से की मेरी कोई मदद नहीं की। हालांकि मुझे बाद में एहसास हुआ कि उन्होंने कोई मदद नहीं दी गई क्योंकि उनकी विचारधारा कांग्रेस के हिंदू विरोधी और राम विरोधी विचारों से मेल नहीं खाती थी।

मालदीव के मंत्री ने कहा कि उनके पायलट भारत द्वारा दान किए गए विमान उड़ाने में असमर्थ हैं.

भारतीय सेना की वापसी से मुश्किल में घिरी मुइज्जू सरकार, मालदीव में भारत द्वारा दिए गए विमान को उड़ाने के लिए नहीं है कोई पायलट! मालदीव के रक्षा मंत्री ने सेना वापसी को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में अपनी परेशानी बताई. उन्होंने कहा, ”भारत द्वारा मुहैया कराए गए तीन विमानों को उड़ाने के लिए हमारी सेना में कोई कुशल पायलट नहीं है.” मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के अनुरोध पर उस देश में मौजूद भारतीय सैनिकों को वापस भारत लाया गया. लेकिन इसके बाद मुइज्जू सरकार संकट में है. मालदीव की सेना के पास भारत द्वारा उपहार में दिए गए तीन विमानों को उड़ाने के लिए उपयुक्त कर्मी नहीं हैं! यह बात वहां के रक्षा मंत्री घासन मौमुन ने कही।

राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद, मुइज्जू ने घोषणा की कि मालदीव के क्षेत्र में कोई भी भारतीय सैनिक नहीं होगा। भारत सरकार से सेना हटाने का अनुरोध किया। लंबी चर्चा के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने मुइज्जू का अनुरोध स्वीकार कर लिया. इसके बाद मालदीव से चरणबद्ध तरीके से 76 सैनिकों को भारत वापस लाया गया.

इन सैनिकों की वापसी को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में मालदीव के रक्षा मंत्री ने अपनी परेशानियों के बारे में बताया. उन्होंने कहा, ”हमारी सेना के पास भारत द्वारा मुहैया कराए गए तीन विमानों को उड़ाने के लिए कोई कुशल पायलट नहीं है. हमने अपने सैनिकों को उन विमानों को उड़ाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। इस प्रशिक्षण पद्धति के कई चरण हैं। लेकिन विभिन्न कारणों से प्रशिक्षण पूरा नहीं हो सका।” गौरतलब है कि भारतीय सैनिक दो हेलीकॉप्टरों और डोर्नियर विमानों के संचालन और रखरखाव के लिए मालदीव में तैनात थे। जिसे भारत ने द्वीप राष्ट्र को उपहार में दिया था। हालाँकि, मुइज्जू ने देश की जनता से मालदीव से भारतीय सेना को हटाने का वादा किया। मालदीव में तैनात भारतीय सेना की एक टीम 9 अप्रैल को स्वदेश लौट आई। वे मालदीव में एक विशेष हेलीकॉप्टर के संचालन और रखरखाव के प्रभारी थे। इसके बाद भारत लौटने के लिए सिर्फ एक और टीम बची थी. मुइज्जू के कार्यालय की प्रवक्ता हिना वालिद ने एक स्थानीय मीडिया में दावा किया कि उन्होंने 10 मई से पहले मालदीव भी छोड़ दिया था।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से 10 मई तक मालदीव से अपने सैनिक वापस बुलाने को कहा। भारत ने यह काम तय समय सीमा के भीतर किया. सभी भारतीय सैनिक द्वीप राष्ट्र से स्वदेश लौट आए हैं। मालदीव के राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद मुइज्जू ने यह दावा किया है.

भारतीय सैनिक मालदीव में दो हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान के संचालन और रखरखाव के लिए तैनात थे। जिसे भारत ने द्वीप राष्ट्र को उपहार में दिया था। हालाँकि, मुइज्जू ने देश की जनता से मालदीव से भारतीय सेना को हटाने का वादा किया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कई बैठकें हुईं. हालांकि, कूटनीतिक हलकों का मानना ​​है कि इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ।

मालदीव में तैनात भारतीय सेना की एक टीम 9 अप्रैल को स्वदेश लौट आई। वे मालदीव में एक विशेष हेलीकॉप्टर के संचालन और रखरखाव के प्रभारी थे। इसके बाद भारत लौटने के लिए सिर्फ एक और टीम बची थी. मुइज्जू के कार्यालय के प्रवक्ता ने दावा किया कि उन्होंने 10 मई से पहले मालदीव भी छोड़ दिया था। मीडिया “इंडिया टुडे” की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हिना वालिद ने एक स्थानीय मीडिया को बताया कि भारतीय सैनिकों का आखिरी समूह मालदीव में है। मालदीव ने द्वीप राष्ट्र छोड़ दिया है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने भारतीय सैनिक मालदीव छोड़कर भारत लौटे हैं। हिना ने कहा, “कितने सैनिकों को वापस भेजा गया है, इसकी जानकारी बाद में जारी की जाएगी।”

गौरतलब है कि मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर हाल ही में भारत दौरे पर आए हैं. उन्होंने गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की. दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ‘चर्चा’ हुई. इस बीच, मुइज्जू के कार्यालय के प्रवक्ता ने दावा किया कि मालदीव से सभी भारतीय सैनिकों को हटा दिया गया है।

गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि भारतीय सैनिकों का पहला और दूसरा बैच भारत लौट आया है. उनकी जगह कुशल भारतीय तकनीकी कर्मचारियों ने ले ली है।

क्या तीसरे चरण के मतदान में बीजेपी को मात दे पाई कांग्रेस?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या तीसरे चरण की मतदान में बीजेपी को कांग्रेस मात दे पाई है या नहीं! लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए जिन सीटों पर आज यानी 7 मई को वोटिंग शुरू है उसमें अधिकांश सीटों पर पिछली बार बीजेपी ने जीत हासिल की थी। तीसरे चरण में 11 राज्यों की 93 सीटों पर वोटिंग हो रही है और पिछले चुनाव में इन 93 लोकसभा सीटों में से 71 पर BJP ने जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को केवल चार सीटों पर जीत मिली थी। वहीं इन्हीं सीटों पर एनडीए के पिछले आंकड़े को देखा जाए तो जीती हुई सीटों की संख्या और भी अधिक थी। 2019 में एनडीए ने 78 सीटों पर बढ़त हासिल की। वहीं मौजूदा ‘इंडिया’ गठबंधन के विपक्षी दलों को 12 सीटों पर जीत मिली थी। अन्य दलों ने तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। इंडिया गठबंधन में इस बार कई दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और ऐसे में देखना होगा कि वह एनडीए को कितनी चुनौती दे पाते हैं। सीटों की संख्या के हिसाब से बीजेपी के लिए यह काफी महत्वपूर्ण फेज है। वहीं इंडिया गठबंधन के सामने चुनौती बड़ी है। 2019 में इन सीटों पर एनडीए का औसत जीत का अंतर 21 प्रतिशत था तो वहीं इंडिया गठबंधन का 11 फीसदी के करीब। जीत का अंतर दोनों गठबंधन के बीच अधिक था। इस चरण में जिन राज्यों में मतदान शुरू है उनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं – ये तीनों ही भारतीय जनता पार्टी के गढ़ हैं। ऐसे में कांग्रेस की संभावनाएं तभी बढ़ेंगी जब एनडीए के वोटों में भारी सेंध लगेगी। गुजरात में 25, कर्नाटक में 14, मध्य प्रदेश में नौ, महाराष्ट्र में 11, उत्तर प्रदेश में 10, पश्चिम बंगाल में चार, असम में चार, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में सात सीटों पर वोटिंग शुरू है। जिन 93 सीटों पर वोटिंग हो रही है उसमें बीजेपी अकेले 81 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से कांग्रेस 68 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस फेज में जिन दिग्गज उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा उनमें गांधीनगर से अमित शाह, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह राजगढ़ से, शिवराज सिंह चौहान विदिशा से वहीं यूपी की मैनपुरी सीट से डिंपल यादव, मनसुख मंडाविया पोरबंदर से, प्रहलाद जोशी धारवाड़ से और बारामती से सुप्रिया सुले प्रमुख हैं।

पिछले चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी के सीटों की संख्या अधिक है सिर्फ यही एक बात नहीं है बल्कि जीत का अंतर भी अधिक था। पिछले चुनाव में बीजेपी ने इन 93 सीटों में 38 सीटों पर 50-60 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। वहीं 20 सीटों पर उसका वोट शेयर 60 से 70 फीसदी के बीच था। वोट शेयर के लिहाज से देखें तो बीजेपी को जिन 20 सीटों पर जीत मिली वहां 70 फीसदी वोट शेयर था। 5 साल बाद चुनाव हो रहे हैं यह सही बात है लेकिन कांग्रेस के पक्ष में नतीजे आएं इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत होगी। इस चुनाव में पहले के दो चरणों में कम वोटिंग पर भी चर्चा हो रही है। विपक्षी दल इसको अपने पक्ष में बता रहे हैं। लेकिन 2019 के चुनाव नतीजों को देखा जाए तो जिन 62 सीटों पर मतदान में गिरावट आई थी, उनमें से 14 सीटों पर विजेता बदल गए। इसके अलावा जिन 31 सीटों पर ज्यादा वोटिंग हुई उनमें से नौ पर मौजूदा उम्मीदवार हार गए।

राज्य की 26 सीटों पर वोटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अहमदाबाद के पोलिंग बूथ पर अपना वोट डाला। गुजरात बीजेपी का मजबूत किला है। गुजराती अस्मिता की अहम भूमिका है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों ही इस राज्य से आते हैं। बीजेपी एक बार फिर यहां सभी 26 सीटों पर जीत की उम्मीद कर रही है क्योंकि वोट शेयर के मामले में कांग्रेस पर बीजेपी की पूरे देश में बढ़त 19 प्रतिशत है तो गुजरात में यह 30 फीसदी है।

पश्चिम बंगाल में जिन चार सीटों पर वोटिंग हो रही है उसमें तीन सीटें मालदा, मुर्शिदाबाद, जंगीपुर पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। 2019 में कांग्रेस को मालदा दक्षिण सीट पर जीत मिली थी वहीं कांग्रेस और तृणमूल के बीच वोटों के बंटवारे के कारण बीजेपी के खाते में मालदा उत्तर सीट मिल गई थी। इस बार कांग्रेस-वाम दलों का गठबंधन और अल्पसंख्यक वोटों पर उनकी नजर है। पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 63% मुस्लिम वोट मिले थे और टीएमसी फिर जीत का दावा कर रही है। नए मुख्यमंत्री और विदिशा से शिवराज सिंह चौहान के जुड़े होने के कारण मध्य प्रदेश भाजपा इकाई को नए नेतृत्व में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने की उम्मीद है। कांग्रेस, जिसने दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया जैसे पुराने दिग्गजों को मैदान में उतारा है, वह भी सांसदों के खिलाफ स्थानीय सत्ता विरोधी लहर के सहारे कुछ सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। महाराष्ट्र में बारामती सीट पर पारिवारिक कलह के चलते मुकाबला रोमांचक हो गया है, क्योंकि सुप्रिया सुले का मुकाबला उनकी भाभी और अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार से है। 11 सीटों पर जहां वोटिंग हो रही है उनमें 2019 में एनडीए ने 11 सीटों में से सात पर जीत हासिल की थी।

जानिए क्या है स्पूफ वीडियो विवाद?.

आज हम आपको वर्तमान राजनीति में हो रहे स्पूफ वीडियो विवाद के बारे में बताने जा रहे हैं! सोशल मीडिया पर एक स्पूफ वीडियो सामने आया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डांस करते दिखाई दे रहे हैं। पीएम मोदी ने इस वीडियो की तारीफ करते हुए कहा कि चुनावी गहमा-गहमी के बीच ऐसे वीडियो चेहरे पर मुस्कान लाते हैं। यह वीडियो ‘एथीस्ट कृष्णा’ आईडी से पोस्ट किया गया है। इसमें यूजर ने लिखा, ‘यह वीडियो पोस्ट कर रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि ‘द डिक्टेटर’ मुझे इसके लिए गिरफ्तार नहीं करेंगे।’ प्रधानमंत्री ने इसे पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए कहा कि आप सभी की तरह मुझे भी खुद को डांस करते हुए देखकर मजा आया। चुनाव की गहमा-गहमी के बीच इस प्रकार की रचनात्मकता वास्तव में आनंददायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने एक्स अकाउंट पर ये स्पूफ वीडियो शेयर किया। इसमें वो स्टेज पर चलते और डांस करते दिखाई दे रहे हैं। यह स्पूफ वीडियो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऐसे ही शेयर किए गए एक वीडियो के कुछ समय बाद आया। ममता का जो वीडियो शेयर किया गया, उनके यूजर्स को कोलकाता पुलिस ने नोटिस जारी कर दिया गया। पूरे मामले का ओरिजिनल वीडियो अमेरिकी रैपर लिल याचटी को स्टेज पर एंट्री करते हुए दिखाया गया है। 21 जून, 2022 को यूट्यूब पर पोस्ट किया गया यह वीडियो एक लोकप्रिय मीम टेम्प्लेट बन गया है। इसमें लोग सोरा AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके लिल याचटी की जगह अलग-अलग चर्चित हस्तियों को रखा जा रहा।

इससे पहले दो एक्स यूजर्स ने अपने हैंडल पर ममता बनर्जी का एक ऐसा ही मीम शेयर किया था। जिसमें उन्हें सीआरपीसी की धारा 149 संज्ञेय अपराधों की रोकथाम के तहत कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम टीम से नोटिस मिला था। ममता बनर्जी के स्पूफ को लेकर यूजर्स को पोस्ट का जवाब देते हुए, कोलकाता पुलिस ने कहा कि आपको नाम और एड्रेस समेत अपनी पहचान तुरंत देने का निर्देश दिया जाता है। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार कंगना रनौत ने कहा कि ममता दीदी जी इसे चिल पिल लेना कहते हैं, आप भी कभी ले लिया करो, हमेशा गुस्से में रहती हो, बच्चों ने आपका डांसिंग मीम क्या बना दिया, आप तो उनको जेल में डालने लगी। आप कितनी अनकूल हैं!! कहने में खेद है लेकिन आप बहुत सख्त, कठोर और अनकूल हैं। मांगी गई जानकारी का खुलासा नहीं किया जाता है, तो आप सीआरपीसी की धारा 42 के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे। हालांकि, बाद में पुलिस ने पोस्ट पर अपना जवाब हटा दिया। इधर पुलिस की सूचना के बावजूद, वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स में जमकर वायरल हो गया। ममता बनर्जी के स्पूफ वीडियो मामले पर बीजेपी ने निशाना साधा था।

बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कोलकाता पुलिस के नोटिस पर रिएक्ट करते हुए कहा कि रिलेक्स @कोलकाता पुलिस – आपके पास ममता बनर्जी की डोरमैट की तरह काम करने के बजाय अन्य अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उदाहरण के लिए, टीएमसी कार्यकर्ता सत्तारूढ़ पार्टी से अलग राजनीतिक विचार रखने पर कोलकाता भर में महिलाओं पर हमला कर रहे हैं। इससे भी बदतर उन्होंने ग्रेटर कोलकाता क्षेत्र में प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते हुए अश्लील पोस्टर भी चिपकाए हैं… आपने उनके बारे में क्या किया है?’

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार कंगना रनौत ने कहा कि ममता दीदी जी इसे चिल पिल लेना कहते हैं, बता दे कि प्रधानमंत्री ने इसे पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए कहा कि आप सभी की तरह मुझे भी खुद को डांस करते हुए देखकर मजा आया। चुनाव की गहमा-गहमी के बीच इस प्रकार की रचनात्मकता वास्तव में आनंददायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने एक्स अकाउंट पर ये स्पूफ वीडियो शेयर किया।कहने में खेद है लेकिन आप बहुत सख्त, कठोर और अनकूल हैं। मांगी गई जानकारी का खुलासा नहीं किया जाता है, तो आप सीआरपीसी की धारा 42 के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे। हालांकि, बाद में पुलिस ने पोस्ट पर अपना जवाब हटा दिया। इधर पुलिस की सूचना के बावजूद, वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स में जमकर वायरल हो गया। ममता बनर्जी के स्पूफ वीडियो मामले पर बीजेपी ने निशाना साधा था। आप भी कभी ले लिया करो, हमेशा गुस्से में रहती हो, बच्चों ने आपका डांसिंग मीम क्या बना दिया, आप तो उनको जेल में डालने लगी। आप कितनी अनकूल हैं!! कहने में खेद है लेकिन आप बहुत सख्त, कठोर और अनकूल हैं।

आज के समय भाजपा को कौन सी पार्टी दे रही है टक्कर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आज के समय भाजपा को कौन सी पार्टी टक्कर दे रही है! देश में लोकसभा चुनाव का आधा सफर हो चुका है। तीसरे चरण में 11 राज्यों की 93 सीटों पर वोटिंग के साथ ही लोकसभा की देश की 543 में 283 पर मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस पूरे चुनाव में पीएम मोदी ने एनडीए के साथ ही बीजेपी की तरफ जबरदस्त चुनाव प्रचार किया। पीएम मोदी की एनर्जी को लेकर लोग खूब तारीफ कर रहे हैं। पीएम मोदी रोज दो से तीन राज्यों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वे अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ ही कांग्रेस की कमियों को भी गिना रहे हैं। पीएम मोदी पूर्व में असम लेकर पश्चिम में गुजरात तक प्रचार कर रहे हैं। दक्षिण में वे तमिलनाडु और केरल में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। हालांकि, इस चुनाव में मोदी की एनर्जी के मामले में 80 पार के दो नेताओं शरद पवार और मल्लिकार्जुन खरगे ने जोरदार टक्कर दी है। 83 साल के शरद पवार अपनी सियासी पारी के अंतिम पड़ाव पर सबसे लड़ाई लड़ रहे हैं तो वहीं 81 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे भी सबसे पुरानी पार्टी के मुखिया के तौर पर विपक्ष की धुरी बने हुए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे या इंडिया शाइनिंग की तरह, अबकी बार-400 पार का नारा भी केवल नारा ही रह जाएगा। विपक्ष की कमान संभाल रहे राजनीति के इन दो दिग्गजों पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। 81 साल की उम्र में मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के चुनाव प्रचार की धुरी बने हुए हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक खरगे ने पार्टी के लिए प्रचार की जिम्मेदारी संभाली है। पार्टी के प्रचार कार्यक्रम से खरगे की व्यस्तता अंदाजा लगाया जा सकता है। खरगे राहुल गांधी के साथ मिलकर दक्षिण के राज्यों में चुनाव प्रचार पर खास फोकस किया है। वहीं प्रियंका गांधी के साथ मिलकर उत्तर के राज्यों में भी उतने ही एक्टिव नजर आते हैं। खरगे एक दिन में एक राज्य में दो से तीन रैलियां या दो राज्यों में दो रैलियां कर रहे हैं। खरगे ने पिछले तीन सप्ताह में महाराष्ट्र के अलावा अपने गृह नगर कलबुर्गी, बेंगलुरू, कोलार में भी रैलियां की हैं। उन्होंने तमिलनाडु के अलावा राजस्थान में जयपुर के अलावा चितौड़गढ़, बांसवाड़ा में भी पार्टी के लिए प्रचार किया। इतना ही नहीं खरगे बिहार के किशनगंज और कटिहार में भी रैली की है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि राहुल-प्रियंका अलावा चुनाव में प्रचार में खरगे की डिमांड सबसे अधिक है। खरगे ने पार्टी के लिए दक्षिण में चेहरा तो हैं ही उन्होंने छत्तीसढ़ से लेकर देहरादून में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। खरगे ने दिल्ली में चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया है। उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तो रोड शो भी किया। इतना ही नहीं खरगे इस उम्र में घर-घर जाकर पार्टी का मेनिफेस्टो भी बांट रहे हैं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के सीएम रह चुके शरद पवार ने इस चुनाव में जी-जान झोंक दी है। महाराष्ट्र में बारामती, सतारा से लेकर बीड तक पवार ने अपनी पार्टी के लिए मोर्चा संभाला हुआ है। वे अपनी पार्टी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 83 वर्षीय शरद पवार ने बारामती में अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए प्रचार किया था। पार्टी के लिए रणनीति बनाने से लेकर उनके लिए प्रचार बैठक आयोजित करने में शरद पवार की अहम भूमिका रही है। चुनाव प्रचार में शरद पवार लोगों से एनसीपी (शरद गुट) के पक्ष में ऐतिहासिक जनादेश की अपील कर रहे हैं। विधायक और शरद पवार के पोते रोहित का कहना है कि पिछले 20 दिन में सिर्फ 4 से 5 घंटे की ही नींद ले रहे हैं। हालांकि, इसका असर उनकी सेहत पर भी कुछ दिखा। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है लेकिन सीनियर पवार हैं कि वे थमने-रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। शरद पवार की सेहत को लेकर बीड से पार्टी उम्मीदवार बजरंग सोनवने ने लिखा, आप आराम करें, जीत आपके चरणों में है। आप बस अपनी सेहत का ध्यान रखे। इस उम्र में शरद पवार की सक्रियता और एनर्जी का अंदाजा 5 महीने पहले उस कार्यक्रम से लगाया जा सकता है कि जहां वह बारिश के दौरान भीगते हुए भाषण देते रहे थे। नवी मुंबई के उस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर बोला हमला, कांग्रेस ने दिया जवाब.

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जब से राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आमने-सामने बहस करने के आह्वान का जवाब दिया है, तब से इस मुद्दे पर बीजेपी खेमे के साथ-साथ विपक्षी मंच भारत में भी चर्चा शुरू हो गई है. ‘भारत’ मंच के नेताओं के एक वर्ग ने कहा कि राहुल को ऐसे प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए. क्योंकि मोदी और बीजेपी हमेशा लड़ाई को ‘राहुल बनाम मोदी’ दिखाना चाहते हैं. इसके अलावा राहुल ‘भारत’ मंच पर प्रधानमंत्री पद का चेहरा नहीं हैं. परिणामस्वरूप, यदि वह उस प्रस्ताव का जवाब देता है, तो एक और संदेश भेजा जाएगा। इस बार बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने भी उसी लहजे में सवाल उठाया, ‘क्या राहुल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं या नहीं?’ कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्ति के साथ आमने-सामने बहस में बैठना चाहते हैं? हालांकि, स्मृति के बयान को देखते हुए वे उनका मजाक उड़ाने से नहीं चूकते। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक स्मृति मीडिया में महत्व पाने के लिए इसलिए कूदी हैं क्योंकि राहुल गांधी ने अपना मुंह खोला है. लेकिन कांग्रेस को उनकी कोई परवाह नहीं है. इसके अलावा रेवन्ना के सेक्स स्कैंडल को लेकर भले ही पूरे देश में हंगामा मचा था, लेकिन स्मृति उस वक्त चुप रहीं। परिणामस्वरूप, उसे अनावश्यक महत्व देना व्यर्थ है।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने स्मृति पर हमला बोलते हुए कहा, ‘राहुल के मुंह खोलते ही मोदी कैबिनेट के राहुल मामलों के मंत्री दर्शकों के बीच गिर पड़े! हालांकि, प्रजल को लेकर उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘करोड़पति टेम्पोवालों’ के सुर में सुर मिलाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘कठपुतली राजा’ कहकर हमला बोला. तीन दिन पहले एक सार्वजनिक सभा में मोदी ने शिकायत की थी कि अंबानी-अडानियों ने कांग्रेस को बोरे भर पैसे दिए हैं. इसी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश की एक सभा से राहुल ने कटाक्ष करते हुए मोदी को ‘टेम्पो करोड़पतियों के हाथों की कठपुतली राजा’ कहा था. उन्होंने एक्स-हैंडल में अपने भाषण के अंश पर भी प्रकाश डाला और कहा, “वह प्रधान मंत्री नहीं हैं, वह राजा हैं। उन्हें संविधान, संसद, कैबिनेट से कोई लेना-देना नहीं है!

मौजूदा चुनाव प्रचार में मोदी के कई बयानों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिराया है. वहीं, प्रियंका ने आज यह भी शिकायत की कि बीजेपी ने राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान राष्ट्रपति को जाने नहीं दिया. जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से बार-बार यह आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने नियमों को तोड़ा है और मुट्ठी भर औद्योगिक समूहों को कई लाभ दिए हैं। राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने बार-बार नियमों को तोड़ने और गौतम अडानी के समूह को विशेषाधिकार देने की शिकायत की है, जो मोदी के बहुत करीबी माने जाते हैं। राहुल सहित विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी ने जंगलों, हवाई अड्डों, कोयला खदानों सहित देश के कई संसाधनों को अडानी समूह को सौंपने के लिए सभी मानदंडों का उल्लंघन किया। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि जो लोग सामने आए हैं उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है. ऐसे में मोदी ने कुछ दिन पहले एक चुनावी रैली में शिकायत की थी कि लोकसभा चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद से राहुल अब अडानी-अंबानी के बारे में बात नहीं कर रहे हैं. हालांकि कांग्रेस ने कई वीडियो जारी किए हैं, लेकिन मोदी का दावा सच नहीं है. इसके विपरीत, राहुल ने दोनों उद्योगपतियों के साथ मोदी की ‘नजदीकियों’ को लेकर कई बार लोकसभा में प्रचार किया।

मोदी ने आरोप लगाया कि दोनों उद्योगपतियों ने कांग्रेस को ‘टेंपो में भरे काले धन के बैग’ पहुंचाए थे, इसलिए राहुल उन पर चुप रहे. इसके बाद राहुल ने पलटवार करते हुए कहा, ”मोदी अपने हाथों में मौजूद ईडी-सीबीआई का इस्तेमाल उन दो उद्योगपतियों की जांच के लिए क्यों नहीं करते?” अन्य विपक्षी नेताओं ने भी मोदी की बात का समर्थन करते हुए दोनों उद्योगपतियों से मोदी की नजदीकियों को लेकर सुर बुलंद कर दिए.

उस हमले के आधार पर राहुल ने कल उत्तर प्रदेश की एक सभा में मोदी पर अमीर उद्योगपतियों की कठपुतली कहकर व्यंग्य किया. उन्होंने कहा, ”मोदी राजा हैं! वह प्रधानमंत्री नहीं, राजा हैं! उन्हें कैबिनेट, संसद, संविधान से कोई लेना-देना नहीं है. वह 21वीं सदी के राजा और दो-तीन करोड़पति हैं, जिनके हाथों में असली ताकत उनका चेहरा है!” अपने एक्स-हैंडल पर व्यावहारिक रूप से उसी भाषा में मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ”मोदी एक कठपुतली राजा हैं, जिनके धागा टेम्पो करोड़पतियों के पास है।”

इस बीच, राहुल ने चुनाव के दौरान मोदी और राहुल के बीच सार्वजनिक बहस में बैठने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर, उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह और अनुभवी पत्रकार एन राम के निमंत्रण का जवाब दिया। उन्होंने कहा, वह किसी भी दिन, कहीं भी मोदी से बहस करने को तैयार हैं. लेकिन राहुल यह सवाल पूछने से नहीं रुके कि क्या मोदी ऐसी सार्वजनिक बहस का जवाब देंगे या नहीं। दो नेताओं के बीच बहस में बैठने का यह मामला बिल्कुल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दो उम्मीदवारों के बीच बहस में बैठने जैसा है. राहुल की आज की प्रतिक्रिया से भारत के कुछ साझेदार नेता थोड़े नाराज हैं. उनके मुताबिक मोदी हमेशा चुनाव में ‘मोदी बनाम राहुल’ के मुद्दे को बढ़ावा देना चाहते हैं. इससे देश में अन्य विपक्षी नेताओं की अहमियत का पता चल सकता है. भारत के नेताओं के एक वर्ग ने कहा कि राहुल को ऐसे प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए. इसके अलावा वह भारत के प्रधानमंत्री का चेहरा भी नहीं हैं.

देश की जनता से क्या बोली सोनिया गांधी?

हाल ही में सोनिया गांधी ने देश की जनता से एक अपील की है! देश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के बीच कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने देश की जनता से एक भावुक अपील की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर देश की जनता से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। इस दौरान वह बीजेपी पर भी हमलावर नजर आईं। उन्होंने कहा, ‘मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।भ्रष्टाचार में अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाए और आजीविका और नौकरियों को उस गति से नष्ट कर दिया जो भारत ने पहले कभी नहीं देखा था।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।” सोनिया ने आगे कहा, ‘ऐसा माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीयत की वजह से है। उनका ध्यान किसी भी कीमत पर सिर्फ सत्ता हासिल करने के पीछे है। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए नफरत को बढ़ावा दिया है।’ आज मैं एक बार फिर आपका समर्थन मांगती हूं। हमारे ‘न्याय पत्र’ गारंटी का उद्देश्य हमारे देश को एकजुट करना और भारत के गरीबों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों के लिए काम करना है।

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।’कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और मैंने हमेशा सभी की तरक्की और वंचितों को न्याय दिलाने के साथ ही देश को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा न्याय पत्र और हमारी गारंटियों का मकसद भी देश को एकजुट रखना और गरीबों, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों को ताकत देना है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए समर्पित है। सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए कांग्रेस को वोट दें और साथ मिलकर मजबूत और एकजुट भारत बनाएं।’

सोनिया गांधी ने कहा, ‘हमारा संविधान और लोकतंत्र के खतरे में होने, गरीबों को पीछे छोड़ दिए जाने और हमारे समाज के ताने-बाने को कमजोर किए जाने का दृश्य मुझे पीड़ा से भर देता है।’ उन्होंने कहा, ‘आज मैं एक बार फिर आपका समर्थन मांगती हूं। हमारे ‘न्याय पत्र’ (घोषणापत्र) और गारंटी का उद्देश्य हमारे देश को एकजुट करना और भारत के गरीबों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों के लिए काम करना है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के वीडियो पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पलटवार किया है। राजीव चंद्रशेखर ने कहा, ‘यह बहुत अजीब वीडियो है क्योंकि वह एक महिला हैं, जिन्होंने 2004 से 2014 के बीच दस साल तक यूपीए सरकार चलाई। उन राज्यों में आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं।यूपीए सरकार ने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया , भ्रष्टाचार में अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाए और आजीविका और नौकरियों को उस गति से नष्ट कर दिया जो भारत ने पहले कभी नहीं देखा था।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।’ सोनिया ने आगे कहा, ‘ऐसा माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीयत की वजह से है। उनका ध्यान किसी भी कीमत पर सिर्फ सत्ता हासिल करने के पीछे है। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए नफरत को बढ़ावा दिया है।’

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और मैंने हमेशा सभी की तरक्की और वंचितों को न्याय दिलाने के साथ ही देश को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया है।कि वह कहती है कि बेरोजगारी है। वह फिर से झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि वह जानती है कि केवल वे राज्य हैं जहां I.N.D.I.A गठबंधन है, वहां सबसे अधिक बेरोजगारी है। गठबंधन शासित राज्यों में सबसे ज्यादा खाद्य कीमतें और मुद्रास्फीति हैं। उन राज्यों में आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह संविधान की रक्षा की बात करती हैं, यह अच्छी तरह से जानते हुए भी कि पिछले दस वर्षों में , भारत दुनिया के लिए लोकतंत्र के प्रतीकों में से एक बन गया है।

क्या मुस्लिम आरक्षण विवाद पर बीजेपी को नीचे देखना होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मुस्लिम आरक्षण विवाद पर बीजेपी को नीचे देखना होगा या नहीं! आज लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान भी संपन्न हो गया है। अब चार चरण की वोटिंग शेष बची है, उसके बाद देश में नई सरकार का गठन होगा। लेकिन इससे पहले सियासी माहौल काफी गर्म है। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, राजनीतिक दल एक-दूसरे पर और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। वहीं सियासी दल एक के बाद एक दांव चलकर अपने विरोधियों के हौसलों को पस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। उसी क्रम में आज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत करके देश में सियासी भूचाल ला दिया। पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता लालू यादव के बयान की आलोचना करने में जुट गए। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने तीसरे चरण की वोटिंग समाप्त होने से पहले मुस्लिम आरक्षण वाले बयान पर यू-टर्न लेकर सबको चौंका दिया। लालू यादव भले ही मुस्लिम आरक्षण वाले बयान से पलट गए हों लेकिन इसके पीछे लालू यादव ने बड़ा दांव खेला है। आइए लालू के इस सियासी पैंतरे को समझते हैं। लालू के बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के अन्य चरणों में विपक्षी गठबंधन पुरजोर तरीके से बीजेपी को टक्कर देना चाहता है। यही कारण है कि लालू यादव ने तीसरे चरण के मतदान के बीच मुस्लिम आरक्षण का दांव खेला और मतदान खत्म होने से पहले पलटी भी मार ली। लालू के बयान के पीछे सिर्फ बीजेपी को मुस्लिम विरोधी जाहिर करने की मंशा हो सकती है। दरअसल लालू के बयान के बाद बीजेपी नेता खुलकर मुस्लिम आरक्षण के विरोध में उतर आए। राजनीतिक जानकार सोचते हैं कि लालू इस बयान के जरिए शेष चरणों में होने वाली वोटिंग में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि लालू के मुस्लिम आरक्षण वाले बयान से बीजेपी को कुछ खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन इंडिया गठबंधन के नेताओं के पास बीजेपी को मुस्लिम विरोधी बताने का एक और मौका मिल गया है।

हाल ही में राजस्थान के बांसवाड़ा में देश की संपत्ति मुस्लिमों में बांटने को लेकर पीएम मोदी के दिए बयान की कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने आलोचना की थी। बयान के अगले दिन कांग्रेस नेताओं का एक दल चुनाव आयोग के पास पहुंचा और मोदी के भाषण को लेकर आयोग के सामने अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। इस मामले ने बहुत तूल पकड़ा। विपक्षी दलों ने बीजेपी को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की। पीएम नरेंद्र मोदी ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की मुसलमानों को आरक्षण के बारे में टिप्पणी पर कहा, ‘विपक्षी गठबंधन खतरनाक खेल खेल रहा है।उन्होंने दावा किया कि विपक्ष अनुसचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने की योजना बना रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता है लेकिन इंडिया गठबंधन संविधान को बदलना चाहता है।’

राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत करने पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा हमला बोला है। बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लालू यादव को दो टूक कहा है कि किसी भी कीमत पर मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लालू यादव कितना भी प्रयास कर लें, लेकिन मुसलमानों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जाएगा। अति पिछड़े समाज, दलित समाज, पिछड़े समाज और गरीब सवर्ण समाज के लोगों का आरक्षण किसी भी कीमत पर भाजपा खत्म नहीं होने देगी।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मुस्लिम आरक्षण पर लालू प्रसाद की टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ता में आने पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ संविधान के मौलिक ढांचे में बदलाव करके अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण प्रदान करेगा। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) के खिलाफ बीजेपी का आरोप राजद अध्यक्ष के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मुसलमानों को आरक्षण का लाभ देने के पक्ष में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मुसलमानों को पूर्ण आरक्षण दिया जाना चाहिए। उनके द्वारा अपने वक्तव्य में प्रयुक्त यह शब्द ‘पूरा का पूरा’ बहुत गंभीर है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि वे (इंडिया गठबंधन) एससी, एसटी और ओबीसी के हिस्से से मुसलमानों को आरक्षण प्रदान करना चाहते हैं।’ उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के हिस्से से मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव की योजना के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ओर से जताया जा रहा संदेह प्रसाद के बयान से सही साबित होता है।

मुसलमानों को आरक्षण देने के पक्ष में लालू यादव के बयान की आलोचना करते हुए जनता दल (यूनाइटेड) ने मंगलवार को कहा कि उनका रुख संविधान की मूल भावना के साथ-साथ मंडल आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लंघन है। जद (यू) प्रवक्ता के. सी. त्यागी ने कहा कि इस तरह का बयान सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का लाभ ले रहे पिछड़े वर्गों के खिलाफ साजिश के समान है। उन्होंने कहा, ‘प्रसाद का बयान निंदनीय है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री प्रसाद जैसे शख्स जो मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए आंदोलन का हिस्सा रहे, ऐसा बयान दे रहे हैं। त्यागी ने कहा कि आयोग ने हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमानों के सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सिफारिश की थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आरक्षण का लाभ देने के लिए धर्म कभी भी मानदंड नहीं हो सकता।

लालू प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि वह मुसलमानों को आरक्षण का लाभ देने के पक्षधर हैं। लालू ने मुसलमानों को आरक्षण का लाभ दिए जाने की वकालत करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संविधान और लोकतंत्र को खत्म करके आरक्षण समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। यह बात जनता के जेहन में आ चुकी है।’

राम मंदिर के लिए क्या बोले रामगोपाल यादव?

हाल ही में विपक्षी नेता रामगोपाल यादव ने राम मंदिर के लिए एक बयान दे दिया है! देश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के बीच दो दिग्गज नेताओं के बयानों से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। पहला बयान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का ‘मुस्लिम आरक्षण’ की मांग से जुड़ा है। हालांकि वह इस बयान से पलट गए। वहीं दूसरा बयान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव का है जिन्होंने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर का नक्शा और वास्तु ठीक नहीं है। मंदिर ऐसे नहीं बनता। वो मंदिर बेकार है।’ इन दोनों बयानों साफ है कि विपक्षी दल लोकसभा चुनाव के अन्य चरणों में होने वाले मतदान में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन रामगोपाल यादव का बयान विपक्षी दलों की गले की हड्डी बन सकता है। दरअसल यूपी की जिन सीटों पर अभी मतदान होना है। वहां बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण को लेकर अच्छा खासा माहौल बना रखा है। ऐसे में रामगोपाल यादव का राम मंदिर को लेकर दिया गया विवादित बयान विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचा सकता है। चौथे चरण में प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। 13 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण में अकबरपुर, बहराइच, धौराहरा, इटावा, खीरी, फर्रूखाबाद, हरदोई ,कन्नौज, कानपुर, मिश्रिख, शाहजहांपुर, सीतापुर और उन्नाव सीट पर चुनाव होना है। इन सीटों पर मुस्लिम से ज्यादा हिंदू वोट बैंक ज्यादा है।राम मंदिर पर सपा नेता का विवादित बयान इंडिया गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है।

सपा नेता राम गोपाल यादव के ‘राम मंदिर’ को बेकार बताने पर भाजपा ने बड़ा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बयान की निंदा की है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इंडी गठबंधन की सहयोगी सपा के नेता रामगोपाल यादव ने राम मंदिर को ‘बेकार’ बताया है। अगर राम मंदिर बेकार है तो क्या सपा का बनवाया गया गाजियाबाद का हज हाउस, आगरा का मुगल गार्डन और उत्तर प्रदेश के हर जिले में बनवाए गए कब्रिस्तान अच्छे थे? उन्होंने कहा कि सपा नेताओं के अनुसार कब्रिस्तान अच्छा था, लेकिन राम मंदिर बेकार है। सपा के लिए मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, अबू सलेम और छोटा शकील के लिए कुख्यात तथा अपराध को सैद्धांतिक स्वीकार्यता देने वाला उत्तर प्रदेश अच्छा था, लेकिन अयोध्या, काशी, प्रयागराज, कुशीनगर के लिए प्रख्यात और उभरता हुआ उत्तर प्रदेश बेकार है। इनके अनुसार राम नवमी के दिन कठोर वैज्ञानिक गणनाओं से हुआ सूर्य तिलक, श्रीराम मंदिर के उद्घाटन के समय एक लाख करोड़ का व्यापार और अयोध्या में बना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बेकार है। इससे ये भी स्पष्ट हो गया है कि श्रीराम को काल्पनिक कहने से लेकर प्रभु श्रीराम और भगवान शिव में लड़ाई करवाने वाले, द्वारका में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भगवान श्री कृष्ण की पूजा का उपहास उड़ाने वालों के लिए सब कुछ बेकार है।

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि राम मंदिर बेकार है। दरअसल, जब राम गोपाल यादव से पूछा गया कि वह अयोध्या में राम मंदिर में दर्शन के लिए क्यों नहीं गए तो उन्होंने कहा, ‘वह मंदिर बेकार का है। क्या मंदिर ऐसे ही बनाए जाते हैं? पुराने मंदिर देखें, वे इस तरह नहीं बनाए गए। दक्षिण से उत्तर के मंदिरों को देखें। इस मंदिर का नक्शा उचित नहीं है और वास्तु के अनुरूप नहीं है।’ यादव के इस बयान पर CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामगोपाल यादव का बयान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ ‘इंडी’ गठबंधन की वास्तविकता को प्रदर्शित करता है। ये लोग वोट बैंक के लिए न केवल भारत की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि प्रभु श्रीराम की ईश्वरीय सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जिसने भी ईश्वरीय सत्ता को चुनौती दी है, उसकी दुर्गति हुई है। रामगोपाल यादव का बयान सनातन आस्था के साथ खिलवाड़, कोटि-कोटि राम भक्तों का अपमान है। जिन लोगों ने पूरा जीवन राम मंदिर के लिए समर्पित किया है, उनकी आस्था पर कुठाराघात है। भारतीय समाज इसे कतई स्वीकार नहीं कर सकता। यह तुष्टिकरण की नीति पर चलकर वोट बैंक को बचाए रखने की कवायद है।

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत मंगलवार सुबह सात बजे से मतदान जारी है। इसी बीच सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर विवादित बयान दिया है। रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राम जी के दर्शन वो रोज करते हैं। उन्होंने अयोध्या में दर्शन के लिए जाने के बारे कहा कि राम मंदिर का नक्शा और वास्तु ठीक नहीं है। मंदिर ऐसे नहीं बनता। वो मंदिर बेकार है।उन्होंने कहा कि पुराने मंदिर देख लीजिए, कैसे बने हैं। दक्षिण से लेकर उत्तर तक। नक्शा ठीक से नहीं बना है। मंदिर को वास्तु के लिहाज से ठीक नहीं बनाया गया।

रामगोपाल यादव के विवादित बयान पर अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने कहा है कि जो राम को मानता है वह सबका सम्मान करेगा, सबको न्याय देने की बात करेगा। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर वोट मांगना पूरी तरह गलत है। डिंपल यादव ने आगे कहा, ‘लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के दौरान बीजेपी के प्रत्याशी और कार्यकर्ता बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं होने वाली। जो अभी सत्ता में हैं, वो असुर प्रवृत्ति के लोग हैं, तीसरे चरण के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का पत्ता साफ होने वाला है। संविधान खत्म करने की साजिश है। मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की बंपर जीत होने जा रही है, इसलिए भाजपा के लोग बौखलाए हुए हैं।’

क्या मायावती की जगह संभाल पाएंगे आकाश आनंद?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आकाश आनंद मायावती की जगह संभाल पाएंगे या नहीं!बीते साल बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन मंगलवार देर रात मायावती ने इन दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से आकाश आनंद को मुक्त कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। यूपी में ताबड़तोड़ 10 रैलियां करके आकाश आनंद चर्चा में आए थे। उधर मायावती के इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव के बीच मायावती का फैसला काफी चौंकाने वाला है। अचानक मायावती ने इतना बड़ा फैसला क्यों किया? इस फैसले के पीछे असली वजह क्या है? ऐसे कई सवाल खड़े हो गए हैं। आइए समझने को कोशिश करते हैं कि मायावती को अपने भतीजे आकाश आनंद में अचानक परिपक्वता मैचुरिटी की कमी क्यों लगी। आकाश आनंद मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। मायावती ने आकाश आनंद को हटाने की सूचना एक्स पर दी। मायावती ने आकाश आनंद में परिपक्वता (मैचुरिटी) का अभाव बताया है। आकाश के पिता आनंद कुमार अपनी जिम्मेदारी पहले की तरह निभाते रहेंगे। मायावती ने तर्क दिया है कि बीएसपी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के आत्म सम्मान और स्वाभिमान को बनाए रखने और सामाजिक परिवर्तन के लिए काम कर रही है। मायावती ने यह भी कहा है कि बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए बसपा हर तरह का त्याग और कुर्बानी देने को तैयार है।

सीतापुर में एक चुनावी रैली में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद और चार अन्य के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जिला प्रशासन द्वारा दिन की शुरुआत में रैली में आनन्‍द के भाषण का स्वत: संज्ञान लेने के बाद यह कार्रवाई की गई। बसपा नेता ने अपने भाषण में कहा था, ‘यह सरकार बुलडोजर सरकार और गद्दारों की सरकार है। जो पार्टी अपने युवाओं को भूखा छोड़ती है और बुजुर्गों को गुलाम बनाती है वह आतंकवादी सरकार है।’ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बसपा ने बिना कोई कारण बताए पिछले दिनों आकाश आनन्द की सभी प्रस्तावित रैलियों को स्थगित कर दिया था। आकाश आनंद ने 6 अप्रैल को नगीना लोकसभा सीट से अपनी पार्टी का अभियान शुरू किया था। बाद में, उन्होंने आगरा, बुलंदशहर, मथुरा, वाराणसी, गोरखपुर, अंबेडकर नगर, आजमगढ़ और कौशांबी सहित पश्चिम और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई रैलियों को संबोधित किया।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस समेत कुछ अहम विपक्षी दलों ने बीते साल इंडिया गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इंडिया गठबंधन में अधिकांश राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। लेकिन बीएसपी ने इंडिया गठबंधन से आखिर तक दूरी बनाई रखी। साथ ही एनडीए में शामिल होने से भी इनकार किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मायावती एनडीए और इंडिया एलायंस के बीच बीएसपी को स्थिर रखकर आगे बढ़ने का प्रयास कर रही थीं। मायावती ने कभी भी बीजेपी के खिलाफ मुखर होकर कोई बयान नहीं दिया। वहीं इस बीच बीएसपी के इंडिया एलायंस में जाने की अटकलें भी बीच-बीच में तेज होती रहीं। मायावती बैलेंस पॉलिटिक्स करके हवा का रुख भांपने की कोशिश में लगी थीं। लेकिन इस बीच आकाश आनंद की एंट्री होती है और वह बीएसपी की रैलियों में बीजेपी के खिलाफ मुखर हो जाते हैं। आकाश आनंद का बीजेपी के खिलाफ तीखा रुख मायावती की रणनीति को प्रभावित कर रहा था। आकाश आनंद बीजेपी का स्टैंड क्लीयर करके मायावती की रणनीति पर पानी फेरने लगे थे। शायद यही वजह है कि मायावती ने आकाश आनंद को पूर्ण परिपक्व न होने तक अहम पदों की जिम्मेदारी से हटा दिया है।

आकाश आनंद बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे हैं। आकाश आनंद 28 साल के हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा नोएडा में हुई और फिर लंदन से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। बीते साल मार्च में मायावती ने उनकी शादी बहुत धूमधाम से की थी। पार्टी के ही वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा उनकी पत्नी हैं। आकाश पहली बार 2017 में सार्वजनिक मंचों पर नजर आए। सबसे पहली बार उनको मायावती के साथ सहारनपुर में एक सभा के दौरान देखा गया। उसके बाद मायावती ने लखनऊ में एक बैठक के दौरान उनका परिचय कराया था। इसके बाद से आकाश आनंद का कद पार्टी में धीरे-धीरे बढ़ता गया।