Friday, March 6, 2026
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क्या किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर सकती है ED? जानिए नियम!

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ED किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर सकती है या नहीं! एक बार फिर जांच एजेंसी ईडी और विपक्षी नेताओं के बीच टकराव तेज हो गया है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को ईडी का समन मिला, लेकिन वे नहीं गए। दोनों ने अंदेशा जताया कि ईडी उन्हें अरेस्ट कर सकती है। तब से यह सवाल उठा है कि ईडी किसी मामले में समन कब करती है? कितनी बार करती है? अरेस्ट करने के पीछे क्या तर्क होता है? क्या किसी सीएम को भी ईडी अरेस्ट कर सकती है? एक बार फिर इन सवालों के इर्द-गिर्द सियासत भी शुरू हो गई है। ईडी कथित शराब घोटाले में केजरीवाल को तीन बार समन भेज चुकी है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी ईडी जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सात पर समन भेज चुकी है। दिल्ली और झारखंड के मुख्यमंत्रियों का कहना है कि केंद्र ईडी का गलत इस्तेमाल कर रही है और उन्हें राजनीतिक वजहों से समन भेजा जा रहा है। दोनों का यह दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जिससे वे चुनाव प्रचार ना कर सकें। दिल्ली सरकार के दो मंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पहले ही शराब घोटाला मामले में जेल में है। केजरीवाल ने दिल्ली में लोगों की राय भी लेनी शुरू की है कि अगर वह गिरफ्तार होते हैं तो क्या उन्हें सीएम रहना चाहिए। इससे पहले उनकी पार्टी के विधायक प्रस्ताव पास कर चुके हैं कि केजरीवाल को सीएम रहना चाहिए। झारखंड में भी हेमंत सोरेन ने जेल जाने की सूरत में नेतृत्व को लेकर पार्टी के साथ मीटिंग कर ली है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के वक्त वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के करीबियों पर भी ईडी की तरफ से छापेमारी की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में ईडी ने कांग्रेस नेता नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित तेजस्वी यादव, संजय राउत, अभिषेक बनर्जी सहित कुछ और लोगों पर शिकंजा कसा है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी विपक्षी एकता से डर रही है। विपक्ष को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। बीजेपी इसे करप्शन पर वार करार दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने हर भाषण में करप्शन के खिलाफ जंग का जिक्र करते हैं। वह विपक्ष पर तंज कसते हुए कहते हैं कि जिन लोगों के करप्शन की दुकान बंद हो रही है वे परेशान हैं। बीजेपी करप्शन के खिलाफ जंग को एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बना रही है।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA का सेक्शन 50 जांच एजेंसी ईडी को किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने का अधिकार देता है। इस सेक्शन के तहत डायरेक्टर, अडिशनल डायरेक्टर, जॉइंट डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर या असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी के पास समन जारी करने की शक्ति होती है। सेक्शन 50 के तहत किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने और दस्तावेजों को पेश करने और बयान दर्ज करने की जरूरत होती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक फैसले के मुताबिक गिरफ्तार करने की शक्ति PMLA के सेक्शन 50 में मौजूद ही नहीं हैं। हालांकि सेक्शन 19 ईडी के अधिकारियों को शर्तों को पूरा करने पर किसी शख्स को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। इसके अलावा समन के बाद भी किसी शख्स के पेश न होने पर ईडी कोर्ट को भी अप्रोच कर सकती है और किसी के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल कर सकती है। इसके लिए ईडी को कोर्ट में यह साबित करना होगा कि प्रथम दृष्टया उसके पास सबूत हैं। जिसके खिलाफ समन किया गया है, वह जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य का कहना है कि ईडी शक होने पर PMLA के अंदर समन जारी कर सकती है। किसी मामले में जानकारी हासिल करने के लिए गवाह के तौर पर भी बुला सकती है। अब सवाल यह है कि समन इशू करने पर अगर कोई नहीं आते हैं तो क्या अरेस्ट किया जा सकता है? एजेंसी को लिखित में बताना होता है कि आखिर किन कारणों के चलते एक्शन लिया जा रहा है, ऐसा नहीं है कि किसी को केवल शक के आधार पर अरेस्ट कर लो। एजेंसी को दिखाना पड़ेगा कि किस ग्राउंड पर ईडी को शक हुआ है। लिखित में शक के आधार को बताना होगा। किस हैसियत से बुलाया है, गवाह या आरोपी के तौर पर बुलाया है, ये साफ करना होगा। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कितनी बार समन जारी किया जा सकता है। सीएम को अरेस्ट करने का कोई प्रोटोकॉल नहीं है।

पूर्व सचिव, भारत सरकार विजय शंकर पाण्डेय का कहना है कि ये जितनी भी जांच होती है, सब एक्ट, रूल्स में दिए हुए है। आपको जांच के लिए बुलाया जा रहा है, तो आपकी ये जिम्मेदारी है कि जाएं और जो भी सवाल पूछे जा रहे हैं बताएं। यह स्थितियों पर निर्भर करता है कि एजेंसी किसी के घर जाकर पूछताछ कर लें। जहां तक दिल्ली और झारखंड के सीएम को समन की बात है तो उनको सवालों के जवाब देने ही होंगे। सीएम को एजेंसी के सामने अपीयर होना पड़ेगा और अगर ऐसा नहीं होता है तो एजेंसी उनको अरेस्ट भी कर सकती है। कोर्ट में जाकर बता सकती है कि जांच में सहयोग नहीं हो रहा है या एजेंसी खुद भी अरेस्ट कर सकती है।

क्या पुलवामा अटैक के बाद बौखला गया था पाकिस्तान?

आज हम आपको उसे कहानी के बारे में बताएंगे जिसमें पुलवामा अटैक के बाद पाकिस्तान बौखला गया था! 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकियों ने अपनी नापाक हरकतों को अंजाम दिया था। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने आक्रामक कूटनीति से पाकिस्तान को दिन में तारे दिखा दिए थे। भारत के आक्रामक रवैये ने पाकिस्तान को इतना डरा दिया कि उसे अपनी आतंकी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। घबराए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आधी रात पीएम मोदी को फोन किया, लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया। उस रात की इनसाइड स्टोरी आज हम बता रहे हैं। भारतीय सेना किसी भी क्षण हमले करने के लिए तैयार थी। पाकिस्तान की तरफ 9 भारतीय मिसाइलों ने निशाना साध लिया था। पाकिस्तान को जब इसकी खबर हुई तो वो पूरी पाक सरकार घबरा गई। आनन फानन में आधी रात को तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया के दरवाजे पर पाक के अधिकारियों ने दस्तक दी, ताकि बातचीत से स्थिति को शांत किया जा सके। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना चाहते थे। ये कहानी जिस रात की है उसे पीएम मोदी ने खुद ‘कत्ल की रात’ बताया है। ये रात थी 27 फरवरी 2019 की। ये वो रात थी जिसमें भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान पाकिस्तान की हिरासत में थे। अटकलें लगाई जा रही थी कि भारत कभी भी हवाई हमला कर सकता है। इस घटना का जिक्र अजय बिसारिया ने अपनी किताब एंगर मैनेजमेंट में किया है। उन्होंने भारत की शानदार कूटनीति का जिक्र करते हुए विंग कमांडर अभिनंदन वाले मामले के बारे में बताया है कि कैसे भारत की कूटनीति के चलते पाक ने अभिनंदन को दो दिन में ही रिहा कर दिया।

बिसारिया ने खुलासा किया कि उन्हें आधी रात को इस्लामाबाद में भारत में पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त सोहेल महमूद का फोन आया, उन्होंने कहा कि इमरान पीएम मोदी से बात करना चाहते हैं। बिसारिया ने दिल्ली में लोगों से पूछताछ की और वापस महमूद के पास पहुंचे और कहा कि मोदी उस समय उपलब्ध नहीं थे और कोई भी जरूरी संदेश खुद उच्चायुक्त को दिया जा सकता है। उस रात बिसारिया ने महमूद से दोबारा बात नहीं की। अगले दिन, 28 फरवरी को इमरान खान ने अभिनंदन को रिहा करने के पाकिस्तान के फैसले की घोषणा करते हुए संसद में कहा, उन्होंने शांति के हित में मोदी को फोन करने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। पाकिस्तान ने मूंछों वाले भारतीय लड़ाकू पायलट की रिहाई को शांति संकेत कहा, लेकिन भारत और पाकिस्तान में अमेरिका और ब्रिटेन के दूतों सहित पश्चिमी राजनयिकों ने इस्लामाबाद को बताया कि पायलट को नुकसान पहुंचाने पर हालात कितने खराब हो सकते थे। भारत की धमकी कितनी गंभीर थी, इसका अंदाजा पाक को हो गया था। पाकिस्तान वास्तव में डरा हुआ लग रहा था। पाकिस्तान ने 26 फरवरी की घटनाओं के बाद इनमें से कुछ राजनयिकों को लगातार तीन बार तलब किया था।

इनमें से कुछ राजदूतों ने रात भर भारत के विदेश सचिव को फोन करके बताया कि पाकिस्तान न केवल अभिनंदन को रिहा करने के लिए तैयार है, बल्कि भारत के पुलवामा डोजियर पर कार्रवाई करने और आतंकवाद के मुद्दे पर बात करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने उनसे कहा कि इमरान खान अगले दिन संसद में ये घोषणाएं करेंगे। बिसारिया के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन के दूतों ने डीजी आईएसआई असीम मुनीर वर्तमान सेना प्रमुख और विदेश सचिव तहमीना जंजुआ के साथ बातचीत में पाकिस्तान के इस दावे को खारिज कर दिया कि यह एक फेक ऑपरेशन था। उन्होंने न केवल पाकिस्तानी राजनयिकों को बल्कि जीएचक्यू, रावलपिंडी को भी भारत के कड़े संदेश से अवगत कराया।

बिसारिया कहते हैं, ‘भारत की आक्रामक कूटनीति प्रभावी थी, भारत की पाकिस्तान और दुनिया से अपेक्षाएं स्पष्ट थीं, संकट को बढ़ाने के विश्वसनीय संकल्प द्वारा समर्थित थी।’ किताब में यह भी खुलासा किया गया है कि कैसे इमरान के एक करीबी दोस्त ने एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर बिश्केक में इमरान और मोदी के बीच मुलाकात और बातचीत के लिए बिसारिया से संपर्क किया था, जिसके जरिए पाकिस्तान के पीएम इमरान खान प्रधानमंत्री मोदी को ये बता सकें कि आतंकवाद से निपटने के लिए वो कितने ईमानदारी से काम कर रहे हैं। सैन्य कार्रवाई का संकेत देते हुए 2019 में एक चुनावी रैली में पीएम मोदी ने कहा था कि सौभाग्य से पाकिस्तान ने अभिनंदन को रिहा कर दिया वरना वह कत्ल की रात होती।

भारत ने आधिकारिक तौर पर कभी नहीं कहा कि अभिनंदन की रिहाई के लिए उसने पाकिस्तान पर मिसाइलें दागीं, लेकिन बिसारिया ने खुलासा किया कि कैसे इस खतरे ने सेना और इमरान सरकार को परेशान कर दिया था। जंजुआ ने अभिनंदन के पकड़े जाने के बाद भारत की मांगों पर चर्चा के लिए 27 फरवरी को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांसीसी दूतों को बुलाया था। बैठक के बीच में, शाम करीब 5.45 बजे, जंजुआ ने सेना का एक संदेश पढ़ने के लिए बातचीत रोक दी कि भारत के पास पाकिस्तान की ओर 9 मिसाइलें हैं, जिन्हें उस दिन किसी भी समय लॉन्च किया जा सकता है। उन्होंने दूतों से इस विश्वसनीय जानकारी को अपनी राजधानियों में रिपोर्ट करने और भारत पर तनाव न बढ़ाने के लिए दबाव डालने को कहा। इनमें से एक दूत ने उनसे इसे सीधे भारत के साथ उठाने के लिए कहा, जिसके तुरंत बाद भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त को भी बुलाया गया। इसके बाद इमरान खान ने मोदी से बात करने की कोशिश की।

अल कायदा ने अपने ऑपरेटिव जाकिर मूसा की हत्या का बदला लेने के लिए यह हमला किया था। मुनीर के नेतृत्व में आईएसआई स्पष्ट रूप से न केवल सैन्य स्तर पर इस पर चर्चा करने के लिए उत्सुक थी, बल्कि यह भी चाहती थी कि इसे भारत सरकार तक पहुंचाने के लिए इसे उच्चायुक्त तक पहुंचाया जाए। यह एक गुप्त सूचना थी, यह तब स्पष्ट हो गया जब हमला अनुमानित समय और स्थान के आसपास हुआ। बिसारिया ने निष्कर्ष निकाला कि इनपुट या तो पाकिस्तान द्वारा एक और पुलवामा नहीं चाहने का नतीजा था या बाजवा उस साल जून में एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले माहौल को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे थे।

किताब में बालाकोट एयर स्ट्राइक से पहले भारत सरकार के भीतर हुई बातचीत का भी जिक्र किया गया है। बिसारिया ने मोदी और तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दोनों को बताया था कि पुलवामा जैसे आतंकी हमले से निपटने में भारत के राजनयिक विकल्प सीमित थे। जहां स्वराज ने उन्हें बताया कि कुछ कड़ी कार्रवाई होने वाली है, वहीं सेना प्रमुख बिपिन रावत ने उन्हें बताया कि भारत का जवाबी हमला 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक से कहीं बड़ा होगा। हालांकि रावत इस बात से सहमत थे कि बाजवा भारत के साथ शांति में रुचि रखते थे, लेकिन अक्सर आईएसआई और पाकिस्तान कोर कमांडरों को एजेंडा तय करने देते थे, जो बाजवा के सिद्धांत से खुश नहीं थे।

क्या लोकसभा चुनाव से पहले लालू परिवार की बढ़ सकती है मुश्किलें?

लोकसभा चुनाव से पहले लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती है! लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव, समेत कई विपक्षी नेताओं की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सांसदों, विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उन्हें एक सप्ताह से अधिक स्थगित नहीं करेगी। इसके बाद स्पेशल कोर्ट ने साप्ताहिक तारीखें देना शुरू कर दिया है ताकि मामलों के अंतिम फैसले में कोई देरी न हो। अदालत के निर्देश के बाद, लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ आईआरसीटीसी और नौकरी के बदले जमीन मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाएगी। उन पर, अन्य लोगों के साथ, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सीबीआई और ईडी द्वारा मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के दिवंगत सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में भी तेजी आ सकती है। आरोप तय हो चुके हैं और दोनों पक्षों की ओर से विशेष अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किये जा रहे हैं। एक अन्य मामला राजद सांसद एडी सिंह के खिलाफ है, जिन पर ईडी ने कथित उर्वरक सब्सिडी घोटाले में मामला दर्ज किया है। अन्य मामले दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और आप नेता संजय सिंह के खिलाफ हैं, जिन्हें कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले में जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है।

एडिशनल सेशन जज विशाल गोगने ने विधायकों के खिलाफ मामलों पर फैसला देने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नामित स्पेशल जज, ने पिछले सप्ताह एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में कहा गया था कि इस अदालत के समक्ष सभी ट्रायल/कार्यवाहियों में तेजी लाने की आवश्यकता है और स्थगन से बचा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को एक रिट याचिका में नामित अदालतों को निर्देश जारी किए थे। नामित अदालतें “पहले सांसदों और विधायकों के खिलाफ मौत या आजीवन कारावास की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देंगी। इसके बाद पांच साल या उससे अधिक कारावास की सजा वाले मामलों को प्राथमिकता देंगी। इसके बाद अन्य मामलों की सुनवाई करें। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि ट्रायल कोर्ट दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों को छोड़कर मामलों को स्थगित नहीं करेंगी।

उक्त फैसले के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 दिसंबर को विशेष नामित अदालतों को निर्देश पारित किए। आदेश में कहा गया है कि नामित अदालतें, जहां तक संभव हो, ऐसे मामलों को सप्ताह में कम से कम एक बार सूचीबद्ध करेंगी। इसके अलावा जब तक बहुत जरूरी न हो, इसमें कोई स्थगन नहीं देगी। साथ ही ऐसे मामलों के शीघ्र निपटान के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। जहां भी जांच हो किसी गवाह की जिरह दिए गए दिन से आगे तक चलती है, मामले को, जहां तक संभव हो, ऐसे गवाह की गवाही समाप्त होने तक दिन-प्रतिदिन के आधार पर सूचीबद्ध किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, विशेष जज ने सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में साप्ताहिक तारीखें देना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियों के वकीलों को मौखिक रूप से निर्देश दिया है कि यदि सहायता के लिए आवश्यकता हो तो जांच अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। वहीं आपको बता दें कि दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार किया हुआ है। इस मामले में अब संजय सिंह ने जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। जमानत याचिका सोमवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पिछले साल 4 अक्टूबर को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए राज्यसभा सदस्य ने मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के 22 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी है।

निचली अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ मामला वास्तविक है। यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। हालांकि बाद में नीति को रद्द कर दिया गया था। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सिफारिश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को, जो इस समय कथित उत्पाद शुल्क नीति घोटाले के सिलसिले में जेल में हैं, दूसरी बार ऊपरी सदन के चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर में जाकर नामांकन दाखिल करने की इजाजत दे दी। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने शुक्रवार को सिंह को उनके राज्यसभा नामांकन के लिए फॉर्म और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी थी। न्यायाधीश ने शनिवार को जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह सिंह को नामांकनपत्र जमा करने और उसकी जांच के लिए 8 और 10 जनवरी को रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में जाने की सुविधा दें। अदालत ने निर्दिष्ट किया कि सिंह नामांकन और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उस कार्यालय में रह सकते हैं। हालांकि, अदालत ने इन यात्राओं के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल, मामले के अन्य आरोपियों, संदिग्धों या गवाहों के साथ संचार और प्रेस को संबोधित करने या सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सिंह को पुनर्नामांकन और जांच प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए अपने वकील और परिवार के सदस्यों से मिलने की भी अनुमति दी गई है। सिंह ने एक आवेदन दायर कर कहा था कि राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका मौजूदा कार्यकाल 27 जनवरी को खत्‍म हो रहा है।

क्या अब विश्व भी देख पा रहा है भारत का दमखम?

वर्तमान में अब विश्व भी भारत का दमखम देख पा रहा है! पीएम मोदी के लक्षद्वीप जाने के बाद फोटो पोस्ट करना, लक्षद्वीप की सुंदरता की देशभर में चर्चा शुरू होने के बाद मामला मालदीव तक पहुंचा। मालदीव को ऐसी मिर्ची लगी कि उसके मंत्रियों ने भारत के बारे में भला-बुरा कहने के साथ ही पीएम मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी तक कर दी। इसके बाद तो मानों मालदीव की मुश्किलें शुरू हो गईं। सोशल मीडिया पर तो #BoycottMaldive ट्रेंड करने लगा। भारत में पर्यटन के लिए मालदीव की बजाय लक्षद्वीप के समर्थन में फोटो से लेकर वीडियो तक पोस्ट होने लगे। बॉलीवुड स्टार भी इसमें पीछे नहीं रहे। दूसरी तरफ, भारत ने तो आधिकारिक रूप से मालदीव के सामने इस मुद्दे पर विरोध तक दर्ज करा दिया। पर्यटन में नुकसान के साथ ही कूटनीति में खुद को घिरता देख मालदीव घुटने पर आ गया। उसने बयान जारी कर सफाई दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों का मुद्दा भारतीय उच्चायोग ने उठाया। इसके बाद रविवार को मालदीव की सरकार ने अपने तीन उप मंत्रियों को कथित तौर पर निलंबित कर दिया। मालदीव के स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि युवा मंत्रालय में उप मंत्रियों – मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महजूम माजिद को उनके पदों से निलंबित कर दिया। इसके अलावा मालदीव सरकार ने टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया। सरकार ने कहा कि ये सांसदों के निजी विचार हैं। सरकार ने कहा कि ये टिप्पणियां सरकार का आधिकारिक रुख नहीं है।

पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर मालदीव सरकार अपने ही देश में घिर गई। इस मुद्दे पर मालदीव की पूर्व डिप्टी स्पीकर इवा अब्दुल्ला ने पीएम मोदी पर टिप्पणियों को ‘शर्मनाक और नस्लवादी’ करार दिया है। ईवा ने कहा कि इस मुद्दे पर कहा कि मुइज्जू सरकार को भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने सोशल मीडिया पर मालदीव सरकार के अधिकारियों द्वारा भारत के खिलाफ ‘घृणास्पद भाषा’ के इस्तेमाल की निंदा की। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत हमेशा मालदीव का एक अच्छा दोस्त रहा है और हमें इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियों के जरिये हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालने देना चाहिए। पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी मोदी के खिलाफ टिप्पणियों को ‘निंदनीय और घृणित’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि वे अब ‘सोशल मीडिया एक्टिविस्ट’ नहीं हैं और अब उन्हें लोगों और देश के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व खेल मंत्री अहमद महलूफ ने कहा कि भारतीयों द्वारा मालदीव का बहिष्कार किए जाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हम भारत और भारतीयों को प्रेम करते हैं, उनका हमेशा मालदीव में स्वागत है।

मालदीव के मंत्रियों की ‘अपमानजनक टिप्पणियों’ पर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री से बॉलीवुड स्टार्स और क्रिकेटर ने भी मोर्चा संभाला। सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक्स पर पोस्ट किया कि मेरे देश के सभी युवाओं, यात्रा के प्रति उत्साही लोगों और खोजकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि आप पहले अपने देश का पता लगाएं, अपनी भूमि की सुंदरता और हमारे पास मौजूद विविध संस्कृति और व्यंजनों को देखें। वहीं, सलमान खान, अक्षय कुमार और श्रद्धा कपूर जैसी बॉलीवुड हस्तियों और क्रिकेटर ने प्रशंसकों से भारतीय पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने की रविवार को अपील की। बॉलीवुड हस्तियों के अलावा क्रिकेटर हार्दिक पांड्या और वेंकटेश प्रसाद ने भी सोशल मीडिया मंच पर लोगों से भारतीय पर्यटन क्षेत्र का समर्थन करने का आग्रह किया। फिल्मकार मधुर भंडारकर और अभिनेताओं जॉन अब्राहम तथा रणदीप हुड्डा और अभिनेत्री कंगना रनौत भी सोशल मीडिया के माध्यम से लक्षद्वीप का प्रचार करने वाली कुछ भारतीय फिल्मी हस्तियों में शामिल रहे।

प्रधानमंत्री मोदी कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए 2-3 जनवरी को लक्षद्वीप में थे। मोदी ने लक्षद्वीप द्वीप समूह की अपनी यात्रा के दौरान समुद्र के नीचे के जीवन का पता लगाने के लिए ‘स्नॉर्कलिंग’ का लुत्फ उठाया। मोदी ने ‘एक्स’ पर समुद्र के नीचे का जीवन पता लगाने संबंधी तस्वीरें पोस्ट की थीं। साथ ही अरब सागर में स्थित द्वीपों में प्रवास के अपने ‘उत्साहजनक अनुभव’ को शेयर किया था। उन्होंने लिखा था कि जो लोग रोमांचकारी अनुभव लेना चाहते हैं, लक्षद्वीप उनकी सूची में जरूर होना चाहिए। मेरे प्रवास के दौरान, मैंने स्नॉर्कलिंग की भी कोशिश की। यह कितना उत्साहजनक अनुभव था!

क्या लोकसभा चुनाव से पहले लागू होगा CAA?

अब लोकसभा चुनाव से पहले ही CAA लागू हो सकता है! 2024 में आम चुनाव से पहले एक बार फिर से नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने का मुद्दा गरमाने लगा है। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आम चुनावों से पहले नियमों को नोटिफाई कर इसे लागू करने की बात कही थी। मतलब साफ है कि सरकार सीएए को जल्द से जल्द लागू करने की तैयारी में है। लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि इसे लागू करने से पहले केंद्र सरकार की चुनौती और मंशा क्या है? पूर्व आईएस विजय शंकर पाण्डेय कहते हैं कि सीएए काननू से जुड़ा बिल 2019 दिसंबर में संसद से पास हुआ था। इसका एक ही मकसद था कि जो भी लोग 31 दिसंबर, 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ाना की वजह से भारत आए थे, उनमें मुस्लिम को छोड़कर बाकी को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था। तब इसका विरोध हुआ था। विरोध के पीछे वजह यह था कि धर्म के आधार पर इसे क्यों लाया गया? वह सवाल आज भी वैसे ही खड़ा है? इसलिए इस कानून को लागू करने में चुनौतियां कम नहीं हुई हैं और ना ही होने वाली हैं। इस मामले में कुछ जानकार मानते हैं कि देश का संविधान सेकुलर है। इसलिए धर्म के आधार पर कुछ चीज लागू नहीं कर सकते। इसी सवाल का जवाब देने की चुनौती अभी भी सरकार के सामने रहेगी। दरअसल तब जो मुद्दे थे, वह अभी भी बने हुए हैं, उनका समाधान नहीं हो पाया है। कोई भी ऐक्ट तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक की इसके लिए रूल्स नहीं बन जाते। चार साल हो गए सरकार इसे नोटिफाई नहीं कर पाई है। मूल मुद्दा यह है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले जो लोग धार्मिक प्रताड़ना की वजह से तीन पड़ोसी देशों से भारत आए हैं उन्हें नागरिकता देना है। इसमें गैर मुस्लिमों को प्राथमिकता के आधार पर इन्हें नागरिकता देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

सीएए कानून के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से जो लोग 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए। वह देश की नागरिकता लेने के लिए इसमें अप्लाई कर सकेंगे। इनमें हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को शामिल किया गया है। नागरिकता देने के लिए सरकार ने एक पोर्टल भी लगभग तैयार कर लिया है। ताकि सबकुछ डिजिटल और आसानी से हो सके। कुछ चीजों को 26 जनवरी से पहले भी सामने लाने की कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन लगता है कि इसके बारे में उचित रूप से जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाई, बड़ा गैप रह गया है। वह कहते हैं कि यह तो भारत के नागरिकों के लिए कानून है ही नहीं, तो फिर ऐसा हंगामा क्यों?

पहली बार 2015 में यह कानून सामने आया था। तब कानून में पड़ोसी मुल्कों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की बात थी। उसमें किसी धर्म का जिक्र नहीं था। लेकिन 2019 के बिल में इसमें धर्म का नाम जोड़ा गया। सरकार का तर्क था कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि जिन देशों के लिए कानून है वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। लेकिन इसके विरोधी इसमें धर्म के जिक्र को गलत मानते हैं। साथ ही इससे NRC के भी जुड़ने की आशंका ने विवाद और बढ़ा दिया। लेकिन अभी सरकार सिर्फ सीएए की बात कर रही है। आम चुनाव से पहले यह मुद्दा सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों पर इसका असर हो सकता है।

बता दे कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों से आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता में सहूलियत देने वाला कानून लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू हो सकता है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्स्प्रेस ने सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए नियमों का नोटिफिकेशन लोकसभा चुनावों के ऐलान से काफी पहले ही जारी कर दिए जाएंगे। स्वाभाविक है कि सीएए लागू हुआ तो यह लोकसभा चुनाव का भी बड़ा मुद्दा बनेगा। बीजेपी इसे अपने पक्ष में भुनाने का भरपूर प्रयास करेगी जबकि विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी कदम बताकर अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण करने की जुगत लगाएंगे। सूत्रों ने कहा, ‘हम आने वाले दिनों में सीएए के लिए नियम जारी करने जा रहे हैं। एक बार नियम जारी होने के बाद कानून लागू किया जा सकता है और जो पात्र हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जा सकती है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या नियम लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले अधिसूचित किए जाएंगे, सूत्रों ने कहा, ‘सब कुछ तैयार है और हां, उन्हें चुनाव से पहले लागू किए जाने की संभावना है। आवेदकों को बिना यात्रा दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने का वर्ष घोषित करना होगा। आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। 2014 के बाद आवेदन करने वाले आवेदकों के अनुरोधों को नए नियमों के अनुसार बदला जाएगा।’

क्या 2024 में वापस फैन्स के दिलों में अधिकार जमाएंगे अक्षय कुमार?

अक्षय कुमार 2024 में वापस फैन्स के दिलों में अधिकार जमा सकते हैं! नए साल 2024 में जहां खान सितारों शाहरुख, सलमान व आमिर खान की कोई फिल्म रिलीज नहीं हो रही है। वहीं बीते साल बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले फिल्म स्टार्स रणबीर कपूर व रणवीर सिंह की भी कोई फिल्म रिलीज के लिए तैयार नहीं है। फिलहाल सबकी नजरें अक्षय कुमार पर हैं, जिनकी इस साल करीब आधा दर्जन फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। बॉक्स ऑफिस पर किसी दूसरे बड़े सितारे की गैर मौजूदगी में अक्षय ने साल की तमाम बड़ी रिलीज डेट्स अपने नाम कर ली हैं। जानकार कहते हैं कि अमूमन बड़े फिल्मी सितारे ज्यादा से ज्यादा तीन बड़ी रिलीज डेट अपने नाम कर पाते हैं। लेकिन अक्षय ने आधा दर्जन रिलीज डेट्स अपने नाम करके नया रेकॉर्ड बनाया है। इस साल उनकी फिल्म ‘स्टार्टअप वैलंटाइंस डे’ वीकेंड पर रिलीज होगी। वहीं टाइगर श्रॉफ के साथ उनकी फिल्म बड़े मियां छोटे मियां ईद पर रिलीज होगी। इंडिपेंडेंस डे पर अक्की अजय देवगन व रणवीर सिंह के साथ रोहित शेट्टी की फिल्म सिंघम अगेन में नजर आएंगे। जबकि गांधी जयंती पर अक्षय की फिल्म स्काई फोर्स बड़े पर्दे पर आएगी। दिवाली पर अक्षय की फिल्म हाउसफुल 5 रिलीज होनी थी, लेकिन अब उसके पोस्टपोन होने पर शिवाजी पर आधारित उनकी मराठी फिल्म के रिलीज होने की चर्चा है। यह फिल्म हिंदी समेत कई भाषाओं में डब होकर रिलीज होगी। वहीं अक्षय की सुपरहिट वेलकम फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म ‘वेलकम टु द जंगल’ को क्रिसमस वीकेंड पर रिलीज किया जाएगा।

अमूमन जहां फिल्मी सितारे एक साल में एक या दो फिल्में रिलीज करने के लिए जाने जाते हैं। वहीं अगर कोई सितारा शाहरुख खान की तरह लंबी तैयारी करे, तो भी वह साल में ज्यादा से ज्यादा तीन फिल्में रिलीज कर पाता है। लेकिन करीब एक-डेढ़ महीने में अपनी ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग पूरी कर लेने वाले अक्षय कुमार एक साल में पांच से छह फिल्में रिलीज करने के जाने जाते हैं। यही वजह है कि अक्षय अपनी इस साल 2024 में रिलीज होने वाली फिल्मों का ज्यादातर काम पूरा कर चुके हैं। वहीं अब उन्होंने अगले साल के लिए प्लान की गई फिल्मों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। बात अगर अक्की की अगले साल रिलीज होने वाली फिल्मों की करें, तो इनमें हाउसफुल 5 की रिलीज पहले से ही जून 2025 के लिए घोषित हो चुकी है। इसके अलावा अक्षय अपनी सुपरहिट हेराफेरी व जॉली एलएलबी फ्रेंचाइजी की अगली फिल्मों पर भी काम शुरू कर चुके हैं। यही नहीं अक्की के पिछले दिनों अपने फेवरिट कॉमेडी डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ भी एक कॉमेडी फिल्म करने की खबर आई थी। वहीं दूसरी ओर उनके एक बायॉपिक फिल्म शंकरा की भी शूटिंग शुरू करने की चर्चा है।

बता दे कि 2024 में स्टार्टअप वैलंटाइंस डे, बड़े मियां छोटे मियां ईद, सिंघम अगेन इंडिपेंडेंस डे, स्काई फोर्स गांधी जयंती, मराठी फिल्म शिवाजी, दिवाली, वेलकम टु द जंगल क्रिसमस आदि फ़िल्में रिलीज होने वाली है! वहीं अगर बात अगले साल की करे तो अगले साल के लिए है चर्चा हाउसफुल 5, हेराफेरी 3, शंकरा, जॉली एलएलबी 3, प्रियदर्शन फिल्म इत्यादि फ़िल्मों की है! 

 नए साल में अक्षय कुमार के जबर्दस्त लाइनअप के बारे में बात कर करने पर प्रोड्यूसर और फिल्म बिजनेस एनालिस्ट गिरीश जौहर कहते हैं, ‘पिछला साल 2023 शाहरुख खान के नाम रहा। उनकी दो फिल्मों पठान और जवान ने दुनियाभर में 1000 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। लेकिन अगले साल 2024 में तीनों खान सितारों आमिर, शाहरुख और सलमान में से किसी की कोई फिल्म रिलीज नहीं हो रही है। ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर कमाई का सारा दारोमदार अक्षय कुमार के जिम्मे होगा। उनकी करीब आधा दर्जन से ज्यादा फिल्में 2024 में रिलीज होने वाली हैं। लेकिन अब उसके पोस्टपोन होने पर शिवाजी पर आधारित उनकी मराठी फिल्म के रिलीज होने की चर्चा है। यह फिल्म हिंदी समेत कई भाषाओं में डब होकर रिलीज होगी। वहीं अक्षय की सुपरहिट वेलकम फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म ‘वेलकम टु द जंगल’ को क्रिसमस वीकेंड पर रिलीज किया जाएगा।अक्षय कुमार की ईद पर बड़े मियां छोटे मियां, गांधी जयंती पर स्काई फोर्स और क्रिसमस पर वेलकम 3 जैसी बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा उनकी कई और फिल्में इसी साल रिलीज होंगी। अक्षय के अलावा इस साल बॉक्स ऑफिस पर रितिक रोशन, सनी देओल व अजय देवगन की फिल्मों के भी कमाल करने की संभावना है।’

क्या अब कांग्रेस के लिए भी चुनौती बन गई है भारत जोड़ो न्याय यात्रा?

अब भारत जोड़ो न्याय यात्रा कांग्रेस के लिए भी चुनौती बन गई है! लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी एक बार फिर भारत न्याय यात्रा निकालने जा रहे हैं। यह यात्रा करीब 11 दिन उत्तर प्रदेश में रहेगी।जानकारों का मानना है कि उनकी यह यात्रा सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के लिए भी चुनौती बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इसके रूट प्लान से साफ है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर फोकस कर रहे हैं। वे इसी बहाने अमेठी भी लौट रहे हैं। इस यात्रा के दौरान सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष का इस बात पर ध्यान रहेगा कि राहुल गांधी का उत्तर और दक्षिण की राजनीति को लेकर जनता के बीच क्या स्टैंड रहता है और वे यात्रा के दौरान इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को कितना साथ लेकर चल पाते हैं। इसके अलावा, अयोध्या में बने माहौल के बीच उन्हें सनातन पर भी अपना रुख स्पष्ट करना होगा। साथ ही स्टालिन की पार्टी के गठबंधन की बात को भी सही साबित करना होगा। भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का जो रूट मैप जारी किया है। उसमें राहुल गांधी सबसे ज्यादा समय उत्तर प्रदेश में गुजारेंगे। यूपी में वह 11 दिन में 1,074 किलोमीटर की यात्रा तय करेंगे। इस दौरान 20 जिलों की 23 लोकसभा सीटों को छुएंगे। राहुल गांधी यूपी में चंदौली से प्रवेश करेंगे और उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी होते हुए अपने गढ़ अमेठी और रायबरेली पहुंचेगे। भारत न्याय यात्रा जिन राज्यों से गुजरेगी, वहां कांग्रेस और ‘इंडिया’ के सहयोगियों से सीटों का तालमेल एक बड़ी चुनौती है। जिन राज्यों में कांग्रेस और इंडिया के सहयोगी दलों में शामिल दलों के बीच सीटों का तालमेल एक बड़ा मुद्दा हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी जिन सीटों पर चुनाव लड़ने की सोच रही उन्हीं 22 जिलों से राहुल गांधी की यात्रा गुजरेगी। इसी कारण कांग्रेस अपनी फोकस सीटों के रास्ते से राहुल गांधी को ले जाने का प्लान बनाया है। पूर्वांचल से लेकर अवध, रुहेलखंड से पश्चिमी यूपी और बृज क्षेत्र तक को मथने की रणनीति है।

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस की प्रदेश इकाई कई सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। वहीं गठबंधन से बात करने के लिए बनी समिति ने करीब दो दर्जन सीटें छांटी हैं, जिन पर वह मजबूत दावा पेश करेगी। साथ में यह भी कहा है कि भाजपा को हराने के लिए दोनों दल पूरी तरह साथ आएंगे तभी बात बनेगी। लेकिन यह साथ केवल कहने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि सीटों में उसे भी बड़ी हिस्सेदारी देनी पड़ेगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी कहते हैं कि राहुल गांधी की पहले निकल चुकी भारत जोड़ो यात्रा ने पूरे देश में व्यापक असर डाला था। इस बार की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 11 दिन रहकर 1,074 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दौरान यह बनारस से शुरू होकर आगरा पहुंचकर लगभग पूरे प्रदेश के सभी अंचलों में पहुंच जाएगी। इस यात्रा से प्रदेश के सभी वर्गों में इसका व्यापक असर होगा। हमारे इंडिया गठबंधन के सहयोगी सपा आरएलडी या अन्य दलों से भी उम्मीद है कि वह सब यात्रा को अपना भरपूर समर्थन देंगे। यह न्याय यात्रा प्रदेश के 2024 के चुनाव में कांग्रेस सहित पूरे इंडिया गठबंधन को ताकत देगी।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में मरणासन्न पड़ी कांग्रेस को जिंदा करने की पूरी कोशिश करेंगे। न्याय यात्रा सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के लिए भी चुनौती बनेगी, क्योंकि सपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई तकरार भले ही सार्वजनिक क्षेत्र में न दिख रही हो, लेकिन अंदर खाने में टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता। तीन राज्यों के चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के ऊपर क्षेत्रीय दलों का दबाव होगा। वैसे भी अखिलेश यादव ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने अंदर खाने कई उम्मीदवार भी तय कर रखे है। चूंकि यह यात्रा पूरी तरह राजनीतिक है इस कारण इसके बयान और गठबंधन पर लेकर आगे की भूमिका क्या होगी इस पर विपक्षी दलों की पूरी नजर रहेगी। रावत कहते हैं कि भाजपा अयोध्या में राम मंदिर के सहारे माहौल को गरमाने में लगी है‌। 22 तारीख को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद देशभर से राम भक्तों का अयोध्या आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इससे उत्तर भारत में भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटरों की लामबंदी का माहौल बनता दिख रहा है। ऐसे में राहुल गांधी के सामने अयोध्या के सहारे पैदा किये जा रहे हिंदुत्व की नई लहर को रोक पाने की बड़ी चुनौती होगी।

भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव उन्हीं जिलों पर पड़ा था जहां से यात्रा गुजरी थी। क्योंकि यह यात्रा मध्यप्रदेश और राजस्थान भी गई वहां पर कुछ इसका विशेष असर नहीं दिखा। कर्नाटक में बदलाव की बयार बह रही थी जिस कारण वहां पर कांग्रेस की सरकार बन गई। इसका पूरा प्रभाव प्रदेश में नहीं पड़ता है। इस तरह की यात्रा जब तक बहुत व्यापक उद्देश्य के साथ नहीं चलती है, तब तक राजनीतिक असर नहीं होता है। 2012 में अखिलेश यादव ने जो यात्रा निकाली थी, सपा का प्रभाव पूरे प्रदेश में था। उस समय लोग मायावती से बदलाव चाहते थे। उन्होंने अपने को विकल्प के तौर पर प्रस्तुत किया था, जिस कारण उन्हें सफलता मिली थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने को बड़े विकल्प के तौर पर अभी तक प्रोजेक्ट नहीं कर पा रही है। इंडिया गठबंधन के जो आंतरिक गतिरोध हैं, उसके कारण कांग्रेस ऐसा कर भी नहीं पाएगी। इसी कारण कांग्रेस से लोगों को बहुत अपेक्षा नहीं है। इसका प्रभाव बहुत सीमित रहेगा। एक-दो जिलों के बाद यह तय हो जायेगा कि इसमें स्थानीय लोगों का कितना जुड़ाव है। उसके बाद अन्य दल तय करेंगे कि इस यात्रा को कितनी गंभीरता से लिया जाए। रतनमणि लाल कहते हैं कि इस यात्रा में राहुल गांधी के बयानों पर भी नजर होगी। एक बात तो तय है कि सिर्फ यात्रा किसी चुनाव का पैमाना नहीं हो सकती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस यात्रा को लेकर कहा कि कांग्रेस लगातार राहुल गांधी को रीलांच करने की कोशिश करती रहती है। लेकिन वह सफल नहीं हो पा रही है। पहले से जुड़े देश को वह फिर जोड़ने निकले हैं। उनकी पहली यात्रा विफल रही है। जिन लोगों ने 70 साल तक जनता के साथ अन्याय किया है, वे न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। आने वाले समय में कांग्रेस सिर्फ पुरातात्विक समाग्री बनकर रहेगी जो इतिहास में पढ़ाने के काम आयेगी।

आखिर कैसे लुप्त हो रहे हैं साइबेरियन क्रेन पक्षी?

आज हम आपको बताएंगे कि साइबेरियन क्रेन पक्षी कैसे लुप्त हो रहे हैं! हर साल सर्दियों के मौसम में, नवंबर के पहले हफ्ते के आसपास, साइबेरियन पक्षी ओमिद घड़ी की तरह ईरान के उत्तरी इलाके कैस्पियन के मैदानों में लौट आता था। कुछ ही समय में, यह ईरान का एक बहुप्रतीक्षित उत्सव बन गया, अखबारों में उसके आगमन की खबरें छपतीं। पूरे 15 साल तक, इस मेल साइबेरियन क्रेन ने सर्दियों से पहले पश्चिमी साइबेरिया से ईरान तक 5,000 किलोमीटर की खतरनाक उड़ान भरी, और वसंत में वापस साइबेरिया की यात्रा की। लेकिन इस साल, ऐसा नहीं हुआ। हफ्तों इंतजार के बाद, दिसंबर के अंत में ईरान के पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने दुखद खबर दी कि इंटरनेशनल क्रेन फाउंडेशन के सदस्यों के मुताबिक, ओमिद यानी साइबेरियन क्रेन के बारे में कोई खबर नहीं है। तो फिर यह पक्षी कहां गया ? क्या दुनिया का सबसे तन्हा परिंद जिंदा है? सवाल कई उठे पर जवाब किसी के पास नहीं। फारसी में, ‘ओमिद’ का अर्थ है आशा – उर्दू में ‘उम्मीद’ के समान – यह नाम इस पक्षी के लिए बिल्कुल सटीक था, जो अपने थके हुए पंखों पर साइबेरियन क्रेन की पश्चिमी आबादी के पुनरुद्धार की एक किरण लिए उड़ता था। उसका यह बोझ उठाने वाला और कोई नहीं था। 2008 के अंत या 2009 की शुरुआत में, जब उसकी साथी अरज़ू की मृत्यु हो गई, तब से ओमिद जंगल में उस कड़ी का आखिरी बचा हुआ सदस्य था।

एक अधिकारी के शब्दों में कभी-कभी दुनिया का सबसे अकेला पक्षी कहलाने वाला ओमिद फिर भी अपनी जीवित रहने की अद्भुत क्षमता दर्शाता था। अकेले ही, उसने खतरनाक प्रवास की राह पार की, पश्चिमी साइबेरिया के जंगलों से, कजाकिस्तान होते हुए रूस के वोल्गा डेल्टा तक और फिर दक्षिण में अजरबैजान से ईरान तक – हर साल, बिल्कुल “घड़ी की कल की तरह। उसकी अविश्वसनीय दृढ़ता और विलुप्त होने के खिलाफ उसके दिल को छू लेने वाले संघर्ष ने दुनिया भर के लोगों को भावुक किया, जिससे ओमिद ईरान में और अंतरराष्ट्रीय पक्षी देखने वालों के बीच एक प्रकार का सेलिब्रिटी बन गया। इसने भी उम्मीद जगाई कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय: साइबेरियन क्रेन की पश्चिमी प्रवासी आबादी को किसी तरह जीवित रखा जा सकता है। ICF के सह-संस्थापक जॉर्ज आर्चिबाल्ड ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि 15 शरद ऋितुओं के लिए, एक अकेला नर साइबेरियन क्रेन, ओमिद, ईरान लौटा है। इस सर्दी में उसका न आना शायद उस क्षेत्र में प्रवास करने वाले साइबेरियन क्रेन के अंत का संकेत देता है।

पक्षी विज्ञानियों को निस्संदेह इस असाधारण पक्षी के लिए शोकगीत लिखने से पहले कम से कम एक और साल इंतजार करना होगा। लंबी प्रवास उड़ानें कई जटिल संकेतों पर निर्भर करती हैं, जिनमें से सभी को स्पष्ट रूप से समझा नहीं जा सकता है। ओमिद का गायब होना इसलिए और भी दुखद है क्योंकि उसके साथी को खोजने के लिए एक योजना बनाई गई थी। आर्चिबाल्ड ने कहा, ‘यह एक दुखद क्षण है, खासकर जब से बेल्जियम में क्रेकिड संरक्षण और प्रजनन केंद्र की ओर से प्रदान की गई एक कैदकर पाली गई मादा, रोया , ईरान में ओमिद के आने का इंतजार कर रही थी। पिछले साल, आईसीएफ ने एक उपयुक्त साथी की पहचान की थी, सात साल की रोया, जिसे ओमिद के निकट ईरान के फेरेयडुंकेनार आर्द्रभूमि में छोड़ा गया था, जहां अकेला पक्षी अपना सर्दी का मौसम बिताता था। ईरानी वन्यजीव अधिकारियों ने बताया था कि इस जोड़े ने अच्छा बंधन बनाया था। ईरान बर्ड रिकॉर्ड कमेटी के सदस्य केरामत हफीजी बिरगानी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि वे वेटलैंड के चारों ओर एक साथ उड़ते थे। वे नाचते और पुकारते थे।

उम्मीद थी कि ओमिद और रोया साथ-साथ साइबेरिया के पश्चिमी इलाकों में अपने घोंसले बनाने की जगह तक जाकर एक परिवार शुरू करेंगे। ईरानी पक्षी देखने वालों के मुताबिक, 5 मार्च, 2023 को 34 दिन साथ बिताने के बाद, दोनों ने उड़ान भर ली। लेकिन सफर वैसा नहीं रहा जैसा सोचा गया था। सात दिनों के बाद, रोया को मजंदरान प्रांत के टोनेकाबोन शहर में अकेला देखा गया। माना जाता है कि रोया में अभी भी लंबी यात्रा के लिए शारीरिक शक्ति की कमी थी, जिसके लिए पक्षियों को वसा भंडारण और मांसपेशियों के विकास के मामले में पूरी तरह से तैयार रहने की आवश्यकता होती है। इस बीच, ओमिद का भाग्य अटकल का विषय बना हुआ है। पिछले हफ्ते, ईरान डेली ने देश के वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन कार्यालय के प्रमुख के हवाले से कहा कि इस साल कम कठोर सर्दी के कारण क्रेन अपने प्रवास मार्ग के बीच में ही रुक गया होगा। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यह आकलन आशावादी था।

बर्डिंग वेबसाइट ने रिपोर्ट दी कि पिछले साल मार्च में, अजरबैजान में एक रास्ते के चौराहे पर जहाँ साइबेरियन क्रेन को 2022 और 2020 में देखा गया था ओमिद और रोया के ईरान से आने का इंतजार कर रहे पक्षी देखने वालों ने उसे नहीं देखा। ओमिद के गायब होने का मतलब है कि प्रवास की याद और साइबेरिया और ईरान के बीच पक्षियों की लंबी उड़ान के लिए मार्गदर्शन करने वाले मानसिक नक्शे भी खो गए हैं। क्योंकि, ओमिद न सिर्फ पश्चिमी साइबेरिया का आखिरी जीवित क्रेन था, बल्कि झुंड के सामूहिक ज्ञान का भी आखिरी भंडार था। यह एक बड़ी क्षति है और यह हमें इस प्रजाति के संरक्षण के महत्व को याद दिलाती है। वैज्ञानिक अब भी साइबेरियन क्रेन को पुनर्जीवित करने के तरीकों पर शोध कर रहे हैं, और उम्मीद है कि एक दिन इस असाधारण पक्षी के वंशज फिर से आसमान में उड़ते दिखाई देंगे।

भारत में सर्दियां बिताने वाले साइबेरियन क्रेन अब लुप्त हो चुके हैं, लेकिन क्या इन खूबसूरत पक्षियों को उनके प्राचीन घर वापस लाना संभव है? हां, यह मुश्किल ज़रूर होगा, लेकिन असंभव नहीं! भारत में चीते जैसे स्तनधारी के पुनर्वास की तुलना में, पक्षियों को उनके पूर्वजों के लंबे और कठिन प्रवास मार्ग पर ले जाने में अलग तरह की चुनौतियां हैं। लेकिन ऐसा पहले भी किया जा चुका है।उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1941 में प्रवासी हूपिंग क्रेन की आबादी केवल 21 रह गई थी, लेकिन अब जंगल में इनकी संख्या 800 से भी ज़्यादा है। यह कैसे संभव हुआ? दरअसल, पायलटों ने हल्के हवाई जहाजों में क्रेन की पोशाक पहनकर, कैद में पली-बढ़े क्रेन के बच्चों को 15 साल से ज़्यादा समय तक प्रवास मार्ग सिखाया।

इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल उत्तरी गंजा इबिस को मध्य यूरोप में फिर से लाने के लिए किया गया था, जहां 17वीं सदी में शिकार के कारण यह विलुप्त हो गया था।भारत या ईरान में साइबेरियन क्रेन को फिर से लाने की किसी भी योजना में कई देशों के सहयोग की आवश्यकता होगी। मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पूर्व निदेशक, असद रहमानी कहते हैं कि उदाहरण के लिए, अफगानिस्तान की स्थिति भारतीय मार्ग पर एक बड़ी बाधा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसे नहीं कर सकते। यद्यपि चुनौतियां निश्चित रूप से मौजूद हैं, सफलता की कहानियां हमें आशा देती हैं। वैज्ञानिक और संरक्षणवादी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं लुप्तप्राय: प्रजातियों की मदद करने के लिए, और शायद एक दिन, हम भारत के आसमान में एक बार फिर से साइबेरियन क्रेन के सुंदर नृत्य को देख पाएंगे।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू!

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सारी रात बाघ की दहाड़! पैरों के निशान दिखे, कुलतली में दक्षिणराय के आगमन की खबर से उत्साह फैल गया
स्थानीय निवासियों को अलर्ट करने के लिए माइकिंग शुरू कर दी गई है. इसके अलावा वन क्षेत्र को जाल से घेरने का काम भी शुरू हो गया है. ताकि कोई बाघ मोहल्ले में प्रवेश न कर सके। सुंदरवन इलाके में बाघ का आतंक. इस बार भी घटना स्थल कुलतली ही है. बाघों की लगातार दहाड़ से रहवासी रात में सो नहीं पाते। पैरों के निशान भी देखे गए। जैसे-जैसे दिन का उजाला होता है, डर और भी अधिक मंडराने लगता है। जंगल को जाल से घेरने का काम शुरू हो गया है.

पिछले हफ्ते ही पत्थर की मूर्ति पर बाघ के पैरों के निशान देखे गए थे. कुलतली में भी बाघ की दहाड़ सुनकर लोग जाग गए। महीनों बाद वह फिर प्रकट हुआ। कुलटाली ब्लॉक के मोइपीठ तटीय पुलिस स्टेशन के गुरुगुरिया भुवनेश्वर क्षेत्र के गौडरचक इलाके में क्षेत्र के निवासियों ने बाघ के पैरों के निशान देखे। कई लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने रात भर बाघ की दहाड़ सुनी है. मामले की जानकारी होते ही वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची. स्थानीय निवासियों को अलर्ट करने के लिए माइकिंग शुरू कर दी गई है. इसके अलावा वन क्षेत्र को जाल से घेरने का काम भी शुरू हो गया है. ताकि कोई बाघ मोहल्ले में प्रवेश न कर सके। वन विभाग के एक वर्ग को शुरू में लगता है कि बाघ भोजन की तलाश में इलाके में आया होगा। उसे वापस गहरे जंगल में लौटाने का प्रयास किया गया है।

इधर बाघ की दहशत से क्षेत्रवासी रतजगा कर उठे। कुछ दिन पहले इस इलाके में एक बाघ आ गया था. स्थानीय लोग बाघ के दोबारा आने से डरे हुए हैं. वन विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाघों को घने जंगल से इलाके में प्रवेश करने से रोकने के लिए जाल लगाए गए हैं। बाघ आमतौर पर जाल नहीं फाड़ते। लेकिन स्थानीय निवासी विभिन्न जरूरतों के लिए जंगल के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करते हैं और जाल फाड़ देते हैं। लेकिन वह फटा हुआ जाल अब ठीक नहीं होता। वह खबर हमेशा वन विभाग के पास नहीं होती. और बाघ फटे हुए जाल का फासला तोड़कर वहां घुस गया. क्या यही घटना कुलतली में भी हुई, इसकी जांच की जा रही है.

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं। कुलटाली ब्लॉक के मोइपीठ थाना क्षेत्र का भुवनेश्‍वरी इलाका. वहां इलाके के लोगों ने रात भर बाघ की दहाड़ सुनी. नतीजा यह हुआ कि रात को पूरा गांव एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहा था। डर के मारे किसी की घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई। सुबह होते ही क्षेत्रवासी जंगल के सामने एकत्र हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बाघ बस्ती से सटे जंगल में घूम रहा है।

वन विभाग और पुलिस को भी सूचना दी गई। मोइपिथ पुलिस और वन विभाग के कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। वे अलग-अलग जगहों पर बाघों की तलाश कर रहे हैं. लेकिन शुरुआत में वन विभाग को लगता है कि बाघ वापस गहरे जंगल में चला गया है. हालाँकि, पुष्टि होने तक निगरानी जारी रहेगी।

संयोग से, सरकारी आंकड़े कहते हैं कि पिछले पांच वर्षों में बाघ के हमलों के कारण देश में 302 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से सबसे ज्यादा जान महाराष्ट्र में गई। पश्चिम बंगाल में 29 लोगों की जान चली गई. इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि राज्यों में संख्या में काफी कमी आई है. 2018 में बंगाल में 15 लोग बाघ के पेट में समा गये. लेकिन 2022 में यह संख्या घटकर एक रह गई है. हालाँकि, ये सभी डेटा और आँकड़े जंगल में बाघ की प्राकृतिक सीमा के संदर्भ में हैं। इसलिए, भोजन की तलाश में बाघों के गांवों में घुसने और लोगों को मारने की जानकारी इन आंकड़ों में शामिल नहीं है.

बेटे आर्यन के ड्रग्स केस में शाहरुख खान ने घटना पर खोला था मुंह!

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बेटे आर्यन के ड्रग केस ने शाहरुख खान को बहुत कुछ सिखाया। पिछले साल बादशा को आसमान छूती सफलता मिली। लेकिन उन काले दिनों का सबक नहीं भूले. शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को 2021 में ड्रग मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह करीब एक महीने तक जेल में रहे. हाल ही में एक अवॉर्ड लेते समय शाहरुख ने इस घटना के बारे में खुलकर बात की। पिछले साल शाहरुख की तीनों फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली। लेकिन साथ ही शाहरुख ने मीडिया से बातचीत भी कम कर दी है. इसके बजाय, वह इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों से सीधे बात करते हैं। लेकिन हाल ही में एक पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपने भाषण में उन्होंने अपने जीवन के कुछ सबसे बुरे समय का जिक्र किया।

“पिछले 4-5 वर्षों की यात्रा हमारे परिवार के लिए काफी कठिन रही है। मैं जानता हूं कि कोविड के कारण कई अन्य लोगों के लिए भी ऐसा ही होगा। मेरी सारी तस्वीरें फ्लॉप हो गईं. कई लोगों ने मेरे करियर के खत्म होने पर श्रद्धांजलि भी लिखी!” शाहरुख ने मजाक में फिल्म विशेषज्ञों को ‘बेवकूफ’ कहा। इसके बाद उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात की.

उन्होंने कहा, ”निजी जीवन में कम से कम कुछ अप्रिय और परेशान करने वाली घटनाएं घटी हैं। लेकिन मैंने एक सबक सीखा. शांत रहो, बहुत शांति से काम करो, अपने स्वाभिमान के साथ चुपचाप काम करो। क्योंकि, कई बार जब ऐसा लगता है कि जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा है तो आप समझ ही नहीं पाते कि जिंदगी आपका कैसे इम्तिहान लेगी! लेकिन यह अपनी कहानी अधिक ईमानदारी और आशा के साथ लिखने का समय है।” हालाँकि, कॉर्डेलिया क्रूज़ मामले में सभी आरोपों को बाद में अदालत ने खारिज कर दिया और एरियन को पूरी तरह से निर्दोष पाया गया। लेकिन उस वक्त उन्हें करीब एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था. कई दरवाजे खटखटाने के बावजूद शाहरुख अपने बेटे की जमानत नहीं करा सके।

उन्होंने भाषण का समापन अपनी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के एक डायलॉग से किया. “जब तक आनंद का अंत है, तब तक वह खत्म नहीं हुआ है।”

उसी कार्यक्रम में, शाहरुख ने पठान और जवान की अद्वितीय बॉक्स ऑफिस सफलता के लिए दर्शकों को धन्यवाद भी दिया। वह मानते हैं कि जिन लोगों ने ये फ़िल्में देखी हैं उनमें से कई लोग उनके अभिनय के प्रशंसक नहीं होंगे। लेकिन उनके बगल में खड़े होकर उनके सिनेमा हॉल में चले गए. वह इसके लिए आभारी हैं. पिछले साल ‘पठान’, ‘जवान’ और ‘डंकी’ ने मिलकर दुनिया भर में 2500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था। शाहरुख ने अभी तक अपनी अगली फिल्म के बारे में कोई घोषणा नहीं की है.

वह दक्षिणी मनोरंजन जगत का एक जाना माना चेहरा हैं। अभिनेता विजय सेतुपति ने फिल्म ‘सुपर डीलक्स’, ‘विक्रम वेधा’, ‘पेट्टा’, ‘विक्रम’ की बदौलत भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने हिंदी मनोरंजन जगत में भी काम करना शुरू कर दिया है. वह इससे पहले साउथ डायरेक्टर एटली की फिल्म ‘जवां’ में शाहरुख खान के साथ नजर आ चुके हैं। विजय ने शाहरुख की पहली फिल्म ‘पैन इंडियन’ में विलेन का किरदार निभाया था। जवान पिछले साल रिलीज हुई थी. सेतुपति की अगली हिंदी फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ नए साल में रिलीज होने वाली है। ‘अंधाधुन’ फेम श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 जनवरी को हिंदी और तमिल में रिलीज होगी। उस फिल्म में विजय ने बॉलीवुड स्टार कैटरीना कैफ के साथ काम किया था। विजय फिलहाल उस फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं. ‘जवान’ के प्रमोशन में विजय नजर नहीं आए. एक्टर फिल्मों की शूटिंग के अलावा कैमरे से दूर रहना पसंद करते हैं. लेकिन क्यों?

‘मेरी क्रिसमस’ के एक प्रमोशनल इवेंट में विजय को ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा। एक्टर ने कहा कि जब वह फिल्म की शूटिंग के अलावा किसी और वजह से कैमरे के सामने आए तो भी गिर पड़े. विजय ने कहा कि उन्हें पहले अपनी शक्ल को लेकर कई बातें सुननी पड़ी थीं। इतना ही नहीं कई लोगों ने उनके कपड़ों का मजाक भी उड़ाया है. इतना सब सुनने के बाद वह कैमरे के सामने सख्त हो गए. अभिनेता के शब्दों में, ”मैं ऐसा ही था. कई लोग मेरी शक्ल को लेकर काफी बातें करते थे. मैंने कई लोगों को यह कहते सुना है कि मैं किसी पार्टी में जाते समय या किसी से मिलते समय चप्पल पहनता था।” लेकिन हाल ही में उन्होंने उस जड़ता पर काबू पा लिया है। विजय के अनुसार, “अच्छी बात यह है कि दर्शक वास्तव में आपको वैसे ही स्वीकार करते हैं जैसे आप हैं। मैं खुद को वैसे ही स्वीकार करता हूं जैसे मैं हूं।’ अब दर्शकों ने भी मुझे उसी तरह स्वीकार कर लिया है.’ मैं बहुत खुश हूं।”