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क्या भारत का विरोध करना थाईलैंड पर भारी पड़ चुका है?

भारत का विरोध करना थाईलैंड पर अब भारी पड़ चुका है! विश्व व्यापार संगठन में भारत की चावल खरीद लेकर टिप्पणी करने वाली थाईलैंड की राजदूत पिमचानोक वॉनकोर्पोन पिटफील्ड को आखिरकार भारी पड़ गया। थाईलैंड ने पिटफील्ड को विश्व व्यापार संगठन डब्ल्यूटीओ 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन एमसी-13 से हटाकर वापस थाईलैंड आने के लिए कहा है। अब इस बैठक में थाईलैंड के विदेश सचिव ने उनका स्थान लिया है। विश्व व्यापार सगंठन की यह मंत्रिस्तरीय वार्ता पांचवें दिन प्रवेश कर गई। थाईलैंड की राजदूत ने कहा था कि भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पर चावल खरीद का कार्यक्रम लोगों के लिए नहीं, बल्कि निर्यात बाजार पर कब्जा करने के लिए है। भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद ही पिटफील्ड को वापस बुलाया गया। इस पूरे मामले में भारतीय अधिकारियों ने थाई प्रतिनिधि की मौजूदगी वाली मंत्रिस्तरीय बैठक का बहिष्कार किया था। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा मामला कुछ विकसित देशों के साथ मिलकर रचा गया है। जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की बैठकों के दौरान कुछ देशों ने इसी तरह का शोर मचाया था, सरकार ने भी इसे एक कहानी बनाने के प्रयास के रूप में देखा।साथ ही सरकार ने इस मामले को थाईलैंड के साथ भी उठाया था। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने अमेरिकी और यूरोपीय संघ के समकक्षों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जायौदी और डब्ल्यूटीओ प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला के साथ मीटिंग के दौरान इस मुद्दे पर बात की थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल कृषि व्यापार में सुधार, विशेष रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खाद्यान्न की खरीद के लिए सरकार को लचीलापन प्रदान करने पर एक बंद दरवाजे की बैठक की। सरकारी अधिकारी के अनुसार हकीकत यह है कि उनके तथ्य गलत थे, क्योंकि सरकार खाद्य सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए धान की उपज का केवल 40 प्रतिशत ही खरीदती है।

उन्होंने बताया कि बाकी हिस्से को सरकारी स्वामित्व वाली एजेंसियां नहीं खरीदती हैं। इसे भारत से बाजार कीमतों पर निर्यात किया जाता है।इस मीटिंग के दौरान भारत पिटफील्ड के हस्तक्षेप वाले आक्रामक स्वर से नाराज था। इसके अलावा, अमीर देशों के कुछ प्रतिनिधियों ने थाई राजदूत के बयान की सराहना की। भारत ने इसे अधिकारियों ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने सरकार पर पीडीएस के लिए खरीदे गए चावल का 40% निर्यात करने का आरोप लगाया था।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा मामला कुछ विकसित देशों के साथ मिलकर रचा गया है। जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की बैठकों के दौरान कुछ देशों ने इसी तरह का शोर मचाया था, सरकार ने भी इसे एक कहानी बनाने के प्रयास के रूप में देखा। इसके अनुसार भारत की तरफ से वैश्विक बाजारों में सब्सिडी वाले चावल की बाढ़ ला दी गई है, जो वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं है। सरकारी अधिकारी के अनुसार हकीकत यह है कि उनके तथ्य गलत थे, क्योंकि सरकार खाद्य सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए धान की उपज का केवल 40 प्रतिशत ही खरीदती है। उन्होंने बताया कि बाकी हिस्से को सरकारी स्वामित्व वाली एजेंसियां नहीं खरीदती हैं। इसे भारत से बाजार कीमतों पर निर्यात किया जाता है।

सरकार ने हाल ही में घरेलू कीमतों को कम करने के लिए गैर-बासमती चावल के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। भारत सब्सिडी सीमा के मुद्दे का समाधान तलाश रहा है, जिसकी गणना 1986-88 के स्तर पर तय कीमतों पर की गई है। इसमें 10% की सीमा का उल्लंघन किया है। भारत की तरह थाईलैंड भी एक प्रमुख चावल एक्सपोर्ट करने वाला देश है। बता दें कि भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद ही पिटफील्ड को वापस बुलाया गया। इस पूरे मामले में भारतीय अधिकारियों ने थाई प्रतिनिधि की मौजूदगी वाली मंत्रिस्तरीय बैठक का बहिष्कार किया था। साथ ही सरकार ने इस मामले को थाईलैंड के साथ भी उठाया था। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने अमेरिकी और यूरोपीय संघ के समकक्षों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जायौदी और डब्ल्यूटीओ प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला के साथ मीटिंग के दौरान इस मुद्दे पर बात की थी। विभिन्न मंचों पर कुछ विकसित और विकासशील देशों ने आरोप लगाया है कि भारत की तरफ से चावल जैसी जिंसों का सार्वजनिक भंडारण वैश्विक बाजार में रेट खराब कर देता है। भारत 2018 से 2022 तक दुनिया का सबसे बड़ा चावल एक्सपोर्ट करने वाला देश था। उसके बाद थाईलैंड और वियतनाम का स्थान था।

क्या कमजोरी सीटों पर भी जीत हासिल कर पाएगी बीजेपी?

वर्तमान में भाजपा कमजोर सीटों पर भी जीत हासिल कर सकती है! अब की बार 400 पार, बीजेपी इस स्लोगन के साथ चुनावी मैदान में उतर गई है। पीएम मोदी खुद चुनावी रैलियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। बीजेपी जल्द ही लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है। उम्मीदवारों के नाम पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की एक लंबी बैठक में तय किए गए। एक बीजेपी नेता ने कहा, ‘यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितने उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी, लेकिन सूची काफी बड़ी होने की उम्मीद है।’ पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों की लिस्ट में कुछ बड़े नाम, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और वो क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं जहां पिछली बार पार्टी हार गई थी। सत्तारूढ़ पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पिछली बार हारी हुई सीटों के लिए उसके उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार करने और मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिले। उत्तर प्रदेश में, एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, ‘मैंने सुना है कि कुछ सीटों पर जहां पार्टी को पिछली बार हार मिली थी, वहां बीजेपी ने अनौपचारिक रूप से कुछ प्रभारियों को तैनात किया है। पार्टी के महासचिव सुनील बंसल उन सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वो इन सीटों को जीत लेगी। पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश की 78 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। इस बार अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन, राष्ट्रीय लोक दल रालोद के एनडीए में शामिल होने और कमजोर विपक्ष को देखते हुए पार्टी को इन सीटों को जीतने की उम्मीद है।

एक बीजेपी नेता ने कहा कि ‘कांग्रेस अगर अपने उम्मीदवारों को चुनने से पहले हमारे बीजेपी उम्मीदवारों को भी जान ले, तब भी उनके लिए फायदा नहीं होगा, पीएम मोदी की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि बीजेपी आसानी से चुनाव जीत लेगी।’ एक और बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी ने चुनाव की तारीखों से पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। लोकसभा उम्मीदवारों के जल्दी ऐलान से यह संदेश जाएगा कि बीजेपी एक अनुशासित पार्टी है जिसका ‘दृढ़ नेतृत्व’ है।

यूपी में, जहां सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं, सूत्रों के मुताबिक, पहली लिस्ट में करीब 20 उम्मीदवारों के नाम हो सकते हैं। पार्टी राष्ट्रीय लोकदल रालोद के लिए भी दो सीटें छोड़ सकती है, जो पिछले महीने एनडीए में शामिल हुई थी। जयंत चौधरी की अगुवाई वाली रालोद ने 27 फरवरी के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के आठवें उम्मीदवार को भी वोट दिया था, जिससे उसे समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को हराने में मदद मिली थी। माना जा रहा है कि बीजेपी अपना दल एस के लिए एक या दो सीटें, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी एसबीएसपी के लिए एक सीट और निषाद पार्टी के लिए एक सीट भी छोड़ सकती है। हरियाणा में 10 लोकसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बीजेपी नेतृत्व को मिल गई है। इससे हरियाणा में एनडीए के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी एनडीए की सहयोगी पार्टी है और राज्य की सत्ता में भी शामिल है। हरियाणा के एक बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘हमने सभी 10 सीटों के लिए नामों की लिस्ट दे दी है, लेकिन ये केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वो जेजेपी के लिए कोई सीट छोड़ना चाहते हैं या नहीं. ये फैसला हम नहीं ले सकते।’ पिछले चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा की सभी 10 सीटें जीत ली थीं।

बीजेपी के सूत्रों ने खुलासा किया है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा से चुनाव लड़ सकते हैं। पार्टी के महासचिव सुनील बंसल उन सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वो इन सीटों को जीत लेगी। पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश की 78 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। इस बार अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन, राष्ट्रीय लोक दल रालोद के एनडीए में शामिल होने और कमजोर विपक्ष को देखते हुए पार्टी को इन सीटों को जीतने की उम्मीद है।बीजेपी की पहली सूची में 29 में से 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा होने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में, पहली सूची में सरगुजा और बस्तर, दो आदिवासी क्षेत्रों की सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम शामिल होने की संभावना है।

आखिर किस राज्य में खाई जाती है सबसे ज्यादा मछली?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस राज्य में सबसे ज्यादा मछली खाई जाती है! क्या आप जानते हैं कि देश में मछली की सबसे ज्यादा खपत किस राज्य में है? इसका जवाब है त्रिपुरा। एक स्टडी में यह बात सामने आई है। ‘भारत में मछली खपत: पैटर्न और रुझान’ नाम की इस स्टडी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और वर्ल्डफिश द्वारा कई सरकारी संस्थानों और संगठनों के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसके मुताबिक भारत में 96.69 करोड़ लोग मछली खाते हैं। यह देश की आबादी का 72.1% है। हरियाणा में मछली खाने वाली आबादी सबसे कम है। इस राज्य में केवल 20.55% लोग मछली खाते हैं। रोज मछली खाने के मामले में केरल पहले नंबर पर है। इस दक्षिणी राज्य में 53.5% लोग रोजाना मछली खाते हैं। आईसीएआर में उप महानिदेशक मत्स्य विज्ञान डॉ. ने कहा कि मछली की खपत की खपत को समझने के लिए व्यापक शोध जरूरी है। देश की खाद्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कुपोषण का मुकाबला करने में मछली की अहम भूमिका है। भारत के लिए वर्ल्डफिश कंट्री लीड डॉ. ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण रणनीतियों में मछली की खपत को इंटिग्रेट करने का आह्वान किया। उन्होंने वैल्यू चेन को बढ़ाने और जलीय खाद्य प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समग्र और अनुकूलनीय नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। अध्ययन ने मछली की खपत में अस्थायी रुझानों और क्षेत्रीय और लैंगिक अंतरों का भी विश्लेषण किया। अध्ययन में मछली की खपत में लैंगिक अंतर भी नोट किया गया। कम समग्र खपत दर वाले राज्यों में, पुरुषों और महिलाओं के बीच मछली की खपत में व्यापक अंतर है। इसकी वजह यह हो सकती है कि पुरुष अपने घरों के बाहर मछली का सेवन करते हैं।इसमें पाया गया कि त्रिपुरा में मछली उपभोक्ताओं का अनुपात सबसे अधिक है। राज्य में 99.35% आबादी अपने आहार में मछली को शामिल करती है। दूसरी ओर, हरियाणा में मछली उपभोक्ताओं का अनुपात सबसे कम है। राज्य में केवल 20.55% आबादी मछली का सेवन करती है।

अध्ययन से पता चला कि पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों, तमिलनाडु, केरल और गोवा में मछली की खपत के प्रति एक मजबूत सांस्कृतिक झुकाव है।इन राज्यों में 90% से अधिक आबादी मछली का सेवन करती है। इसके विपरीत, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तरी राज्यों में मछली उपभोक्ताओं का प्रतिशत कम है, जो आहार संबंधी प्राथमिकताओं और संभवतः मछली की उपलब्धता और सांस्कृतिक स्वीकृति को दर्शाता है।केरल रोजाना मछली की खपत के मामले में पहले नंबर पर है। इस राज्य में 53.5% आबादी हर दिन मछली का सेवन करती है। इसके बाद गोवा (36.2%), पश्चिम बंगाल (21.9%), मणिपुर (19.7%), असम (13.1%) और त्रिपुरा (11.5%) है। असम और त्रिपुरा साप्ताहिक मछली की खपत में भी अग्रणी हैं। इनमें 69% आबादी साप्ताहिक आधार पर मछली का सबसे ज्यादा सेवन करती है।

स्टडी के मुताबिक जम्मू और कश्मीर में बढ़ती मछली की खपत बढ़ रही है। पिछले 15 वर्षों में वहां इसमें 20.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। दूसरी ओर, पंजाब में मछली उपभोक्ताओं में 3.9 प्रतिशत अंकों की कमी आई। अध्ययन में मछली की खपत में लैंगिक अंतर भी नोट किया गया। कम समग्र खपत दर वाले राज्यों में, पुरुषों और महिलाओं के बीच मछली की खपत में व्यापक अंतर है। इसकी वजह यह हो सकती है कि पुरुष अपने घरों के बाहर मछली का सेवन करते हैं।

भारत ने मांस के खपत के पैटर्न में भी एक उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। मछली को अपने आहार में शामिल करने वाली आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वैश्विक मछली उत्पादन में इसका लगभग 8% योगदान है।देश की खाद्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कुपोषण का मुकाबला करने में मछली की अहम भूमिका है। भारत के लिए वर्ल्डफिश कंट्री लीड डॉ. ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण रणनीतियों में मछली की खपत को इंटिग्रेट करने का आह्वान किया। उन्होंने वैल्यू चेन को बढ़ाने और जलीय खाद्य प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समग्र और अनुकूलनीय नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। अध्ययन ने मछली की खपत में अस्थायी रुझानों और क्षेत्रीय और लैंगिक अंतरों का भी विश्लेषण किया। हालांकि, प्रति व्यक्ति मछली खाद्य आपूर्ति के मामले में, भारत 183 देशों में 129वें स्थान पर है। अध्ययन का अनुमान है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे, तो भारत में मछली की खपत दोगुनी होने का अनुमान है। इसके भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047-2048 में 26.50 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें प्रति व्यक्ति वार्षिक मछली की खपत 16.07 किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है।

आखिर कैसे हुआ बेंगलुरु के एक कैफे में धमाका?

आज हम आपको बताएंगे कि बेंगलुरु के एक कैफे में धमाका कैसे हुआ था! बेंगलुरु में इंदिरानगर के पास एक कैफे में शुक्रवार को बम विस्फोट हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ब्लास्ट में कम तीव्रता वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया। ब्लास्ट में नौ लोगों के घायल होने की खबर है। इस हमले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। कई लोग इस ब्लास्ट को लोन वुल्फ अटैक से जोड़कर देख रहे हैं। बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी इस संबंध में ट्वीट कर लोन वुल्फ अटैक की आशंका जताई। लोन वुल्फ अटैक से आशय है कि अकेला व्यक्ति ही जमीनी स्तर पर पूरे ब्लास्ट को अंजाम देता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर इस हमले के पीछे कौन है। अभी तक किसी भी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने लिखा कि अभी कुछ दिन पहले, कांग्रेस एमएलसी बी के हरिप्रसाद ने पाकिस्तान के प्रति प्रेम का इजहार किया था। आज बेंगलुरु, यूपीए के दिनों की याद दिलाता है। संभवतः यह एक लोन वुल्फ अटैक है क्या? उन्होंने आगे लिखा कि कांग्रेस को तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सुरक्षा से समझौता करना बंद करना चाहिए। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुलिस इस घटना की सभी कोणों से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। आतंकी हमले के सवाल पर सरकार ने इस संबंध में इनकार किया है। सरकार का कहना है कि यह जानकारी नहीं है और इस मामले में अभी जांच चल रही है। एनआईए और खुफिया ब्यूरो को भी इस मामले की जानकारी दी गई है।

ब्रुकफील्ड आईटीपीएल रोड के पास में रामेश्वरम कैफे में दोपहर 12.55 बजे आईईडी विस्फोट हुआ। उस समय कैफे लगभग 250 ग्राहकों से भरा हुआ था। इनमें से ज्यादातर सॉफ्टवेयर कंपनियों और फाइनेंशियल फर्मों के कर्मचारी थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि कथित हमलावर 25-30 वर्ष की आयु का व्यक्ति है। सीसीटीवी वीडियो फुटेज का विश्लेषण करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नकाबपोश व्यक्ति को रेस्तरां के ठीक पास एक बस से उतरा था। उसे लगभग 11.30 बजे चलते हुए देखा गया था। उन्होंने कैश काउंटर पर रवा इडली की एक प्लेट के लिए पेमेंट करने के बाद टोकन लिया। वह बैग कूड़ेदान के पास रखकर करीब 11.45 बजे चला गया। एक घंटे बाद, टाइमर का उपयोग करके बम ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। शहर की पुलिस बैग छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान करने के लिए एआई-संचालित चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि संदिग्ध की पहचान कर ली गई है। उसके चेहरे की विशेषताओं को सीसीटीवी में कैद कर लिया गया है। उसे ट्रैक करने के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली का उपयोग करके मिलान किया जा रहा है। डिप्टी सीएम के अनुसार केंद्रीय अपराध शाखा को अपराध की जांच सौंपी गई है। एक-दो दिन में संदिग्ध को पकड़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, आठ टीमें तलाश में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध कहां से आया और कहां गया, यह जानने के लिए सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। मुझे विश्वास है कि हमारी पुलिस उसे पकड़ लेगी।

राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि धमाका दोपहर करीब एक बजे हुआ। यह घटना रामेश्वरम कैफे में हुई। कांग्रेस को तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सुरक्षा से समझौता करना बंद करना चाहिए। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुलिस इस घटना की सभी कोणों से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। आतंकी हमले के सवाल पर सरकार ने इस संबंध में इनकार किया है। सरकार का कहना है कि यह जानकारी नहीं है और इस मामले में अभी जांच चल रही है। एनआईए और खुफिया ब्यूरो को भी इस मामले की जानकारी दी गई है।28 से 30 वर्ष का एक युवक कैफे में आया और काउंटर पर रवा इडली खरीदी। एक-दो दिन में संदिग्ध को पकड़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, आठ टीमें तलाश में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध कहां से आया और कहां गया, यह जानने के लिए सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। मुझे विश्वास है कि हमारी पुलिस उसे पकड़ लेगी।इसके बाद बैग कैफे के सामने एक पेड़ के नजदीक रखकर चला गया। बैग रखने के करीब एक घंटे के बाद धमाका हुआ। घटना के बारे में राज्य के डिप्टी सीएम ने बताया कि यह कम तीव्रता का बम धमाका था। उसने व्यक्ति एक घंटे के बाद धमाका होने के लिए टाइमर लगाया था।

जानिए कौन था लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी आजम चीमा?

आज हम आपको लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी आजम चीमा के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं! लश्कर-ए-तैयबा के इंटेलिजेंस चीफ आजम चीमा का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। उसका निधन पाकिस्तान के फैसलाबाद में हार्ट अटैक की वजह से हुआ। चीमा की मौत की खबर ने पाकिस्तान में जिहादी हलकों के बीच हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा के कई आतंकियों की रहस्यमयी हत्याओं को देखते हुए नई अटकलों को जन्म दे दिया। चीमा मुंबई हमले समेत भारत के खिलाफ कई बड़े आतंकी साजिशों में शामिल था। उसके पाकिस्तान में होने की बात से इस्लामाबाद लगातार इनकार करता रहा। उसकी मौत के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा झटका जरूर लगा है। पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों में सिलसिलेवार रहस्यमयी तरीके से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कई आतंकियों की हत्या हुई। पाकिस्तान ने इन हत्याओं के लिए भारतीय एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन भारत ने ऐसे दावों का खंडन किया है। भारत ने सख्त लहजे में कहा है कि उसने कोई किलिंग लिस्ट नहीं बनाई है। अगर ऐसी कोई लिस्ट होती तो चीमा, जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के साथ एक बड़ा टारगेट होता।

बता दें कि चीमा ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम देने में बड़ी भूमिका निभाई। इसमें 26/11 मुंबई आतंकी हमले और जुलाई 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट शामिल हैं। भारतीय एजेंसियों के लिए, चीमा की मौत केवल पाकिस्तानी की धरती पर नामित आतंकवादियों की मौजूदगी बताती है। जबकि इस्लामाबाद बार-बार आतंकियों के पाकिस्तान में शरण लेने के दावे से इनकार करता है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीमा को लंबी दाढ़ी वाले एक शख्स के रूप में पहचाना गया, जो पंजाबी भाषा बोलता था। वो लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेताओं में शामिल रहा। चीमा 2000 के दशक की शुरुआत में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पाकिस्तान के बहावलपुर में रहता था। बताया जाता है कि वह अक्सर अपने 6 बॉडी गार्ड्स के साथ लैंड क्रूजर में सफर करता था। चीमा बहावलपुर कैंप में आतंकी ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों का ब्रेनवॉश करने के लिए पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल हमीद गुल, ब्रिगेडियर रियाज और कर्नल राफिक को लाने के लिए जिम्मेदार था। उसने कराची और लाहौर में आतंकी ट्रेनिंग कैंपों का भी दौरा किया।2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में वो लश्कर के सीनियर नेता जकी-उर-रहमान लखवी का सलाहकार बना और 26/11 मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।

कहा जाता है कि चीमा को अफगान युद्ध की कमान संभालने वालों में शामिल था। वो नक्शे पढ़ने में एक्सपर्ट था, खासतौर पर उसे भारत के नक्शे में दिलचस्पी थी। चीमा ने जिहादियों को नक्शे पर भारत की प्रमुख जगहों के बारे में सिखाया और 2000 के दशक के मध्य में सैटेलाइट फोन के माध्यम से पूरे भारत में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को निर्देश दिए।

2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में वो लश्कर के सीनियर नेता जकी-उर-रहमान लखवी का सलाहकार बना और 26/11 मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। चीमा बहावलपुर कैंप में आतंकी ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों का ब्रेनवॉश करने के लिए पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल हमीद गुल, ब्रिगेडियर रियाज और कर्नल राफिक को लाने के लिए जिम्मेदार था। उसने कराची और लाहौर में आतंकी ट्रेनिंग कैंपों का भी दौरा किया।2008 में चीमा को पाकिस्तान के बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था।अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। मुंबई हमलों के लिए रूट, योजना और ट्रेनिंग में प्रमुख भूमिका निभाई। अमेरिकी ने चीमा को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य कमांडर बताया, जिसके आतंकी ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा नेटवर्क से संबंध थे। लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।लश्कर-ए-तैयबा को दिसंबर 2001 में अमेरिका द्वारा और मई 2005 में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था।

क्या है राज कपूर के फिल्मों में गाना रखने का रहस्य?

आज हम आपको राज कपूर के फिल्मों में गाना रखने का रहस्य बताने जा रहे हैं! बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर और फिल्ममेकर राज कपूर। जिनका जिक्र होते ही उनके काम, उनके गाने और उनकी तस्वीर, या यूं कहें उनसे जुड़ी हर चीज आंखों के सामने बाइस्कोप की फिल्मों की तरह घूमने लगती है। उन्होंने ही सिनेमा की परिभाषा दी। उन्होंने ही मनोरंजन जगत को एक नया आयाम दिया। आज भी लोग उन्हें और उनके काम को याद करते हैं। उनका उदाहरण देते हैं। उनकी फिल्मों के गानों को आज भी कोई कलाकार टक्कर नहीं दे सका है। मगर क्या आप उनके एवरग्रीन गानों का किन्नरों संग कनेक्शन जानते हैं? आइए बताते हैं। फिल्ममेकर राज कपूर की पार्टियां बेहद फेमस हुआ करती थीं। आज भी उसकी चर्चा होती है। बताया जाता है कि उनके सभी पार्टियां सितारों से भरी रहती थी। इतना ही नहीं, स्टूडियो में होने वाली पार्टी में तो किन्नरों को भी बुलाया जाता था। राज कपूर उनके साथ जमकर इस त्योहार को मनाते थे। उनके साथ नाचते-गाते थे। और बात सिर्फ सेलिब्रेशन तक ही सीमित नहीं रहती थी। वह उनसे काम के सिलसिले में सलाह मश्वरा भी किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि राज कपूर अंधविश्वासी थे। वह अपनी फिल्मों के लिए गए गानों को फाइनल खुद नहीं करते थे। बल्कि ये काम वह किन्नरों से करवाते थे। वह पहले उन्हें सुनाते और जब उनकी तरफ से उस पर मुहर लग जाती, तभी उसे मूवीज में इस्तेमाल करते। अगर वो मना कर देते तो वह उस गाने को फौरन रिजेक्ट कर देते थे। फिर चाहे उसे कितने भी बड़े सिंगर ने क्यों न लिखा हो।

ऐसा ही एक वाकया काफी चर्चित है। रविंद्र जैन ने फिर नया गाना बनाया, जो था ‘सुन साहिबा सुन’, जिसे किन्नरों ने सुना और वो खुश हो गए। उन्होंने ये भी कहा कि ये गाने सालों तक चलेगा। और ऐसा ही हुआ। जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए। आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। इसलिए वह ऐसा करते थे। उनके बताए हर काम सफल होते थे। जाता है कि मंदाकिनी और राजीव कपूर की 1985 में आई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ के गाने के साथ ऐसा ही हुआ था। जब इस फिल्म के गानों को किन्नरों को सुनवाया था। और उन्होंने सभी गानों को पास कर दिया था लेकिन एक उन्हें पसंद नहीं आया था। जिसके बाद राज कपूर ने कुछ नहीं सोता और उसे मूवी से हटा दिया। फिर संगीतकार रविंद्र जैन को बुलाया और उनसे एक नए गाने की फरमाइश कर दी। रविंद्र जैन ने फिर नया गाना बनाया, जो था ‘सुन साहिबा सुन’, जिसे किन्नरों ने सुना और वो खुश हो गए। उन्होंने ये भी कहा कि ये गाने सालों तक चलेगा। और ऐसा ही हुआ। जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए।

आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। वह उनसे काम के सिलसिले में सलाह मश्वरा भी किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि राज कपूर अंधविश्वासी थे। वह अपनी फिल्मों के लिए गए गानों को फाइनल खुद नहीं करते थे। बल्कि ये काम वह किन्नरों से करवाते थे। बता दें कि जब मूवी रिलीज हुई तो वो सुपरहिट हो गई। उसके बाद इसके गाने भी मानो अमर हो गए। आज भी उसे पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, रविंद्र जैन को फिल्मफेयर भी मिला था। इस गाने को फिर लता मंगेशकर ने गाया था। खैर। बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। वह पहले उन्हें सुनाते और जब उनकी तरफ से उस पर मुहर लग जाती, तभी उसे मूवीज में इस्तेमाल करते।बताया जाता है कि ऐसा ही राज कपूर ने कई गानों के साथ किया था। और उनके वो गाने हिट हुए थे। राज कपूर किन्नरों को लकी मानते थे। इसलिए वह ऐसा करते थे। उनके बताए हर काम सफल होते थे।

क्या विकास के नाम पर उत्तराखंड में हो रही है तबाही?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विकास के नाम पर उत्तराखंड में तबाही हो रही है या नहीं! उत्तराखंड के ‘जागेश्वर’ में एक हजार पेड़ों के मौत के फरमान पर एक शायर की ये लाइनें सटीक बैठती हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का अल्मोड़ा जिला आजकल बेहद टेंशन में है। दरअसल जिले के ‘जागेश्वर’ में उत्तराखंड सरकार ने देवदार के 1000 पेड़ों को काटने का फरमान जारी किया है। पेड़ों के सीने पर खंजर से मौत का नंबर भी डाल दिया है। पौराणिक पेड़ों की छाती पर मौत का बिल्ला देख स्थानीय लोग और जागेश्वर धाम मंदिर के पुजारी बेहद नाराज और दुखी हैं। सोशल एक्टिविस्ट भी विकास के नाम पर पेड़ों की हत्या को रोकने के लिए सरकार पर दवाब बना रहे हैं। जागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी, हेमंत भट्ट का कहना है, ‘देवदार पेड़ों का संबंध सीधे-सीधे हिंदू धर्म की आस्था और मान्यता से है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अगर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई गई तो यह विकास नहीं विनाश की दस्तक होगी। केदारनाथ त्रासदी हम देख चुके हैं, उससे सबक लेने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा, ‘कुमाऊं कमिश्नर के संज्ञान में पूरा मामला है, उत्तराखंड सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द पेड़ों के कटान के फैसले को रद्द किया जाए।’ जागेश्वर धाम के मुख्य आचार्य गिरीश भट्ट बताते हैं कि दारूक वन की वजह से ‘जागेश्वर धाम’ का महत्व है। उन्होंने कहा, ‘शिवपुराण में स्पष्ट है कि 8वां नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ‘दारुक वन’ में है। दारुक वन का उल्लेख भारतीय महाकाव्यों, जैसे काम्यकवन, द्वैतवन, दंडकवन में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि जागेश्वर धाम देवदार के जंगल के बीच स्थित है। इसे दारुक वन के नाम से ही पहचान मिली है। यहां सात ऋषियों- कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज ने तपस्या की है। देवदार का संधि विच्छेद देव और दार है। देव का मतलब ‘देवता’ और दार का मतलब ‘वृक्ष’ होता है। देवदार के पेड़ों में देवता का स्वरूप होता है। भट्ट कहते हैं, ‘अगर इन्हें काटा गया तो 110% संभावना है कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुल जाएगा और कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आएगी, जिसके लिए सरकार तैयार रहे।’

जागेश्वर धाम के मुख्य आचार्य गिरीश भट्ट बताते हैं कि यहां रोजाना देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु भी पेड़ों की कटाई की खबर को सुनकर परेशान हैं। वहीं जागेश्वर में रहने वाले 100 से अधिक परिवारों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर पेड़ों को काटा गया तो कोई बड़ी आपदा आएगी और लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् लगातार धामी सरकार को आने वाली आपदा को लेकर आगाह कर रहे हैं।

उत्तराखंड के जागेश्वर में मास्टर प्लान के तहत हो रहे सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 1000 देवदार के पेड़ों को काटने की तैयारी से पर्यावरणविद चिंतित हैं। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने चौड़ीकरण की जद में आ रहे पेड़ों की पहचान शुरू कर दी है। इस क्षेत्र के लोग भी इसके विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े दारुक वन में खड़े इन पेड़ों की वे पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह दारुक वन भगवान शिव का निवास स्थान है, लेकिन धाम के विकास के लिए मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए आरतोला से जागेश्वर तक तीन किमी सड़क का चौड़ीकरण होना है। टू-लेन सड़क बनाने के लिए इसकी जद में आ रहे 1000 से अधिक देवदार के पेड़ों का कटान होना है। उधर स्थानीय लोग आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

नागरिक निगरानी मंच,अल्मोड़ा के संयोजक गोविंद गोपाल का कहना है कि उत्तराखंड सरकार हजारों देवदार के पेड़ों को काटने के साथ ही कई हेक्टेयर जमीन को भी बर्बाद कर देगी। जागेश्वर के लोगों के सामने जैव विविधता का खतरा मंडराने लगेगा। उनका कहना है कि सरकार ने यह फैसला पर्यावरणविदों से बिना पूछे लिया है। स्थानीय लोगों की भावना का ख्याल नहीं रखा गया है। उन्होंने बताया कि ये वन सदियों से हैं। अंग्रेजों ने भी उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में देवदार के वनों को उजाड़ा, लेकिन लोगों की धार्मिक भावना को देखते हुए कभी भी जागेश्वर और धौलादेवी के वनों को नहीं छेड़ा। लेकिन उत्तराखंड की मौजूदा सरकार ये हिमाकत कर रही है।

गोविंद गोपाल बताते हैं कि जागेश्वर के लोगों को एक अस्पताल की जरूरत है। जागेश्वर की जनता कई सालों से सीवर लाइन की मांग कर रही है। अभी सीवर का पानी जटा गंगा में गिर रहा है। उधर पेड़ों के काटे जाने से जटा गंगा की हालत और खराब हो जाएगी। जटा गंगा का अस्तित्व अभी भी खतरे में है। सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए, लेकिन सरकार मास्टर प्लान के नाम पर तबाही वाला प्लान तैयार कर रही है।

वन संरक्षण अधिनियम 1976 के अनुसार, 12 प्रजातियों के किसी भी पेड़ को काटने वाले को जेल जाना पड़ सकता है। इनमें अखरोट, अंगू, साल, पीपल, बरगद, देवदार, चमखड़िक, जमनोई, नीम, बांज, महुआ और आम के पेड़ शामिल हैं। उत्तराखंड में 12 प्रजातियों के पेड़ों को काटना पूरी तरह से मना ही नहीं बल्कि यह गैरकानूनी है। इन पेड़ों को काटने वाले को जुर्माने के साथ-साथ 6 महीने की जेल होती हो सकती है। हालांकि पिछले साल गैरसैंण के विधानसभा में वन संरक्षण अधिनियम को लेकर सदन में इस पर बात की गई थी, जिसमें पेड़ काटने पर लोगों को जेल की सजा छोडकर जुर्माना देना हो, लेकिन अभी इसपर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

आखिर भारतीय एप्स से क्या चाहता है गूगल?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गूगल भारतीय एप्स से क्या चाहता है! गूगल के अपने प्ले स्टोर से कुछ ऐप हटाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने शनिवार को कहा कि भारतीय ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सरकार ने इस संबंध में गूगल और संबंधित स्टार्टअप को बैठक के लिए अगले सप्ताह बुलाया है। आईटी और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की कुंजी है और उनके भाग्य का फैसला किसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता है। गूगल ने अपने प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने की पॉलिसी में बदलाव किए थे। इसके चलते गूगल ने सर्विस चार्जेस को 11 फीसदी से बढ़ा कर 26 फीसदी कर दिया था। इसके बाद गूगल ने सर्विस चार्ज ना देने वाली कंपनियों पर ऐक्शन के तहत उन्हें प्ले स्टोर से हटाने का फैसला लिया था। इससे पहले देश की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने पुराना सिस्टम खत्म करने का आदेश दिया था।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले को लेकर गूगल ने कहा था कि कई जानी-मानी फर्म और कंपनियों ने उनकी बिलिंग के नियमों का उल्लंघन किया है। गूगल ने बताया था कि कुछ कंपनियां बिक्री पर लागू होने वाले सर्विस चार्ज नहीं दे रहीं हैं। गूगल ने पहले ही इन एप्स को लेकर कह दिया था कि वो इन्हें प्ले स्टोर से हटाने में जरा भी संकोच नहीं करेगा। Shaadi.com, Matrimony.com, Bharat Matrimony, Naukri.com, 99acres, Kuku FM, Stage, Alt Balaji’s (Altt), QuackQuack

भारत मैट्रिमोनी.कॉम के फाउंडर मुरुगवेल जानकीरमन ने गूगल के इस कदम को भारतीय इंटरनेट का काला दिन बताया। उन्होंने बताया कि उनके एप्स एक-एक करके डिलीट किए जा रहे हैं। वहीं, शादी.कॉम के संस्‍थापक अनुपम मित्‍तल ने कहा, आज भारतीय इंटरनेट के लिए काला दिन है। गूगल ने अपने ऐप स्टोर से प्रमुख ऐप्स को हटा दिया है। यह और बात है कि भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग और सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। गूगल के झूठे नैरेटिव और दुस्साहस से पता चलता है कि उसे भारत के प्रति बहुत कम सम्मान है। यह नई डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी है। इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

मामले को लेकर IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव का भी बयान सामने आया है। मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने डेवलपर्स से बात की है। अगले हफ्ते उनके साथ मीटिंग है। उनका कहना है कि भारतीय स्टार्टअप्स को जरूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसे लेकर उन्होंने पहले ही गूगल और ऐप डेवलपर्स जिन ऐप को हटाया गया है को कॉल कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस तरह से ऐप हटाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बता दें कि भारत मैट्रिमोनी.कॉम के फाउंडर मुरुगवेल जानकीरमन ने गूगल के इस कदम को भारतीय इंटरनेट का काला दिन बताया। उन्होंने बताया कि उनके एप्स एक-एक करके डिलीट किए जा रहे हैं। वहीं, शादी.कॉम के संस्‍थापक अनुपम मित्‍तल ने कहा, आज भारतीय इंटरनेट के लिए काला दिन है। गूगल ने अपने ऐप स्टोर से प्रमुख ऐप्स को हटा दिया है। यह और बात है कि भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग और सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। गूगल के झूठे नैरेटिव और दुस्साहस से पता चलता है कि उसे भारत के प्रति बहुत कम सम्मान है। यह नई डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी है। इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।इस लगान को रोका जाना चाहिए! QuackQuack के संस्‍थापक और सीईओ रवि मित्‍तल ने कहा कि गूगल की ओर से ऐप को बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हटाने से हैरानी है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के बावजूद गूगल की कठोर रणनीति के कारण हमारे पास उनकी मनमानी नीतियों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

सीएसके के कप्तान एमएस धोनी आईपीएल 2024 में दोहरी भूमिका निभा सकते हैं.

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धोनी का ‘डबल रोल’! मौजूदा आईपीएल में माही चेन्नई के लिए किन दो भूमिकाओं में नजर आएंगे? इसी महीने आईपीएल शुरू हो रहा है. महेंद्र सिंह धोनी एक नहीं बल्कि दो भूमिकाओं में नजर आ सकते हैं. ऐसा खुद धोनी ने कहा था. महेंद्र सिंह धोनी इस साल आईपीएल में दो भूमिकाओं में नजर आएंगे. लेकिन क्या उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स का कप्तान बनने के अलावा कोई और ज़िम्मेदारी भी संभालनी होगी? हालाँकि, इस बारे में अभी तक कुछ भी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है।

अटकलें खुद धोनी ने शुरू कीं. उन्होंने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “नए सीज़न और नई भूमिका का इंतज़ार नहीं कर सकते।” पोस्ट तेजी से वायरल हो गई. समर्थकों को समझ नहीं आया कि धोनी का मतलब क्या है? वे इंतज़ार कर रहे थे.

धोनी ने आखिरकार बुधवार को सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया। वो है आईपीएल का विज्ञापन. उस वीडियो में धोनी दो उम्र में नजर आ रहे हैं. एक युवक एक और बूढ़ा आदमी. धोनी ने कैप्शन में लिखा, ”नए सीजन में दोहरी भूमिकाएं. आईपीएल के बारे में सब कुछ जियो सिनेमा पर देखा जा सकता है। क्योंकि, यही सब कुछ है.” धोनी के विज्ञापन से यह साफ नहीं है कि वह दोनों में से किस भूमिका की बात कर रहे हैं. इस सीजन में वह खुद ही कप्तान हैं. इसके अलावा धोनी के फैंस उन्हें किसी और भूमिका में देखने का भी इंतजार कर रहे हैं या नहीं.

इस साल का आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. पहले मैच में पिछली बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स मैदान में उतर रही है. धोनी पहला मैच विराट कोहली की आरसीबी के खिलाफ खेलेंगे. महेंद्र सिंह धोनी भारत ही नहीं आईपीएल के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं. उनके नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल जीता है। टीम के साथी कप्तान धोनी की बात मानते हैं. विरोधी क्रिकेटरों ने भी उनकी तारीफ की. सभी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें. धोनी ने आईपीएल में कप्तानी करने के अपने अनुभव के बारे में बात की.

आईपीएल के ब्रॉडकास्टर को दिए इंटरव्यू में धोनी ने कहा कि आईपीएल ने उन्हें विदेशी खिलाड़ियों को जानने और समझने का मौका दिया है. धोनी ने कहा, ”2008 में चेन्नई टीम का संतुलन बहुत अच्छा था. टीम में कई ऑलराउंडर थे. अनुभव भी भरपूर था. टीम में मैथ्यू हेडन, माइक हसी, मुथैया मुरलीथॉर्न, मखाया एनतिनी, जैकब ओरम जैसे क्रिकेटर थे. ऐसे सभी क्रिकेटरों का एक ड्रेसिंग रूम में होना एक शानदार अनुभव है। लेकिन असली चुनौती यह जानना था कि मैदान के बाहर वे कैसे हैं।

अगर मैदान पर प्रदर्शन अच्छा है तो ऐसा होगा. पेशेवर क्रिकेट में किस तरह का व्यक्ति महत्वपूर्ण है? धोनी ने कहा, ”मुझे लगता है कि किसी टीम का नेतृत्व करने के लिए आपको उस टीम के सभी लोगों को अच्छे से समझना होगा. किसी को व्यक्तिगत रूप से जानने, उसकी ताकत और कमजोरियों के बारे में जानने से टीम को सही दिशा में आगे ले जाना आसान हो जाता है।” मैं प्रतिद्वंद्वी क्रिकेटरों के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता. लेकिन आईपीएल ने दूसरे क्रिकेटरों को जानने का मौका दिया है. मुझे क्रिकेट के बारे में उनके विचार जानने को मिले।’ मुझे उनकी संस्कृति के बारे में पता चला. कुल मिलाकर आईपीएल का ये चरण बहुत अच्छा है.

कुछ दिन पहले धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ जामनगर गए थे. मुकेश अंबानी के बेटे अनंत के प्री-वेडिंग फंक्शन में शामिल हुए। उस प्रकरण को पूरा करने के बाद चेन्नई के कप्तान ने क्रिकेट में प्रवेश किया है। आईपीएल के पहले मैच में धोनी की चेन्नई मैदान पर उतरेगी. 22 मार्च को घरेलू मैदान पर उनका मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से होगा। महेंद्र सिंह धोनी आगामी आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए नई भूमिका में नजर आ सकते हैं. इस बात का संकेत खुद चेन्नई के कप्तान ने सोशल मीडिया पर दिया. सोमवार को उनके 12 शब्दों के पोस्ट को लेकर नई अटकलें लगाई गई हैं.

धोनी ने अभी संन्यास का फैसला नहीं किया है. इस साल के आईपीएल में भी वह चेन्नई का नेतृत्व करने वाले हैं। 42 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज अभी भी 22 गज की दूरी पर लड़ने के लिए पर्याप्त फिट हैं। लेकिन उनके इस पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू हो गई. धोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”नए सीजन का इंतजार नहीं कर सकते. नई भूमिकाओं के लिए भी. इस पर नजर रखें.” क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि धोनी अनावश्यक अटकलें फैलाने वाले व्यक्ति नहीं हैं. इस संदेश से उन्हें स्पष्ट नेतृत्व वाली नई भूमिका में देखा जा सकता है. वह जिम्मेदारी क्या हो सकती है? या फिर वो चेन्नई की कप्तानी छोड़कर आम क्रिकेटर बनकर खेलेंगे! ऐसी अटकलें शुरू हो गई हैं. 26 फरवरी 2022 के बाद धोनी ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन के अलावा कुछ भी पोस्ट नहीं किया. ऐसे में सोमवार को की गई उनकी पोस्ट का खास मतलब माना जा रहा है.

भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने राजकोट टेस्ट के दौरान अस्पताल में भर्ती अपनी मां के बारे में बात की.

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‘बीमार मां ने मुझे खेलने के लिए कहा था’, भारतीय स्पिनर ने अश्विन को बताई राजकोट टेस्ट में वापसी की वजह अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उन्होंने अपने बेटे को भारतीय टीम में लौटने का आदेश दिया। अश्विन ने वह बात रखी. राजकोट टेस्ट के दौरान रविचंद्रन अश्विन की मां चित्रा बीमार पड़ गईं. टेस्ट के बीच में भारतीय स्पिनर अपनी मां के पास गए. अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उन्होंने अपने बेटे को भारतीय टीम में लौटने का आदेश दिया। अश्विन ने वह बात रखी. वह वापस गये और टीम में शामिल हो गये।

अश्विन ने राजकोट में अपना 500वां टेस्ट विकेट लिया. वह अनिल कुंबले के बाद 500 टेस्ट विकेट लेने वाले पहले भारतीय बने। अश्विन ने कहा, ”मैं चेन्नई गया और अस्पताल गया. माँ को कोई ज्ञान नहीं था. जब उसे होश आया तो उसने मुझसे कहा, “तुम क्यों आये?” कुछ देर बाद मां फिर बेहोश हो गई। अगली चेतना मुझे वापस लौटने के लिए कहती है, “तुम वापस जाओ। टेस्ट मैच चल रहा है।” अश्विन 100वां टेस्ट खेलने जा रहे हैं. धर्मशाला में वह इस मुकाम को छूने जा रहे हैं. अश्विन ने कहा, ”मेरा पूरा परिवार क्रिकेट का प्रशंसक है. वे भी मेरे साथ सभी भावनाओं से गुज़रे। मेरी उम्र 37 साल है. अब भी मेरे पिता खेल ऐसे देखते हैं जैसे यह मेरा पहला मैच हो. ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. ऐसा लगता है कि वे मुझसे ज्यादा क्रिकेट पसंद करते हैं।’ अगर मेरे और क्रिकेट के बीच कुछ भी आया तो उन्होंने उसे हटा दिया।’ ऐसा लगता है जैसे यह मेरे जन्म के बाद से ही हो रहा है।”

रविचंद्रन अश्विन पूर्व क्रिकेटरों का सम्मान नहीं करते. इसी बात को लेकर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने शिकायत की थी. वह अश्विन को शुभकामनाएं देने के लिए बार-बार उनसे संपर्क नहीं कर सके. शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया पर यही लिखा है।

अश्विन 100वां टेस्ट खेलने जा रहे हैं. वह मैच धर्मशाला में होगा. शिवरामकृष्णन ने उससे पहले अश्विन को बुलाया। लेकिन अश्विन ने फोन नहीं उठाया. इसके बाद शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”मैंने अश्विन को कई बार फोन किया. मैं बस 100वें टेस्ट से पहले बधाई देना चाहता था। उसने मेरा फ़ोन काट दिया. मैंने एक संदेश भेजा. लेकिन कोई जवाब नहीं आया. पूर्व क्रिकेटरों को ऐसे सम्मान मिलते हैं. सज्जन लोग सम्मान दिखाना जानते हैं.” यह पहली बार नहीं है, शिवरामकृष्णन इससे पहले भी अश्विन की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने पहले कहा था, “भारत में पिचें अश्विन को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। जिसका खामियाजा भारतीय बल्लेबाजों को भुगतना पड़ा. आर्मी देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में अश्विन के पास कितने विकेट हैं। वह बहुत आत्मकेंद्रित क्रिकेटर हैं।”

रविचंद्रन अश्विन ने प्रतिद्वंद्वी के अभ्यास के लिए एक ‘जासूस’ भेजा। उनकी मदद से, उन्होंने प्रतिद्वंद्वी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की योजना सीखी। अश्विन धर्मशाला में अपना 100वां टेस्ट खेलेंगे. इससे पहले उन्होंने अपने गुप्त हथियार के बारे में बताया.

एक इंटरव्यू में अश्विन ने कहा, ”मीडिया में मेरे कुछ दोस्त हैं। उनका उपयोग करें। वे प्रतिद्वंद्वी के अभ्यास में जाते हैं और वीडियो बनाते हैं। उसके बाद मैंने वो वीडियो देखा. जब मैं ऑस्ट्रेलिया में था, मैंने मार्नाश (लाबुशेन) और स्मिथ (स्टीव) के पैरों का उपयोग करते हुए वीडियो देखे। अपने प्रतिद्वंद्वी की योजना को जानना आधी लड़ाई जीतने के बराबर है। मैं ऐसा करने की कोशिश करता हूं।”

इसके बाद भी अश्विन ने जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने उनके खिलाफ बल्लेबाजी की, उसकी तारीफ की. भारतीय स्पिनर ने कहा, ”ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड पिछले कुछ सालों में स्पिनरों से अच्छी गेंदबाजी करा रहे हैं। उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती दिख रही है. वे जानते हैं कि भारत में स्पिन को विकेट मिलेंगे। इसलिए वे खुद को पहले से ही तैयार कर लेते हैं. जैसे हम विदेश जाने से पहले हरी विकेटों पर अभ्यास करते हैं, वे भी वैसा ही करते हैं।” मील के पत्थर के सामने खड़े अश्विन को खुद से ज्यादा अपने परिवार की याद आती है. क्योंकि अश्विन के मुताबिक इस मिसाल से उनका परिवार उनसे भी ज्यादा खुश होगा. अश्विन ने कहा, ”मेरे लिए 100वां मैच काफी अहम है. लेकिन मेरे पिता, मां, पत्नी और बच्चों के लिए मुझसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। मेरे बच्चे मुझसे भी अधिक उत्साही हैं। क्योंकि उन्होंने मेरी सफलता के लिए बहुत त्याग किया है।’ अन्यथा मैं वहां नहीं पहुंच पाता जहां मैं आज हूं। मेरे पिता आज भी हर दिन 50 कॉल लेते हैं। वह अपने बेटे के बारे में बात करते हैं। इसलिए मैं उन्हें और अधिक याद करता हूं।”

अश्विन ने भारत के लिए अब तक कुल 280 मैच खेले हैं. इनमें 99 टेस्ट मैचों में 507 विकेट, 116 वनडे मैचों में 156 विकेट और 65 टी20 मैचों में 72 विकेट शामिल हैं.