Home Blog Page 930

सबसे पहले कौन लाएगा भारत में समान नागरिक संहिता?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि भारत में सबसे पहले समान नागरिक संहिता कौन लाएगा! उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता की ड्राफ्ट रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी गई है है। मई 2022 में उत्तराखंड सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति ने 20 महीने तक चले एक वृहत पब्लिक आउटरीच एक्सरसाइज के बाद शुक्रवार को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड के इस ड्राफ्ट को कानूनी जामा पहनाते हुए लागू किया गया तो उत्तराखंड ऐसा करने वाला पहला राज्य बन जाएगा। कमिटी की मुख्य जिम्मेदारी उत्तराखंड के निवासियों के लिए विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, रख-रखाव, हिरासत और संरक्षकता जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को विनियमित करने वाले प्रासंगिक कानूनों की जांच करना था। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमिटी को पिछले साल के अंत में ही अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। आखिरी समय में निर्णय हुआ कि मूल रूप से अंग्रेजी में लिखे गए मसौदे का हिंदी में अनुवाद किया जाना चाहिए। देवभूमि के सार को सुरक्षित रखा जाना जरूरी माना गया। कमिटी को लगा कि अगर राज्य विधायी विभाग अनुवाद करेगा तो कुछ बिंदुओं की गलत व्याख्या हो सकती है। इसलिए, बड़ी जिम्मेदारी कमिटी के सदस्यों शत्रुघ्न सिंह, मनु गौड़ और डॉ. सुरेखा डंगवाल पर आ गई। अधिकारियों का कहना है कि इससे ड्राफ्ट जमा करने में देरी हुई। विशेषज्ञ समिति की ओर से दो उप- समितियां बनाई गई। रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, मनु गौड़ और शत्रुघ्न सिंह के पहले पैनल कोड का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दूसरी सब कमिटी में मनु गौर, शत्रुघ्न सिंह और डॉ. सुरेखा डंगवाल शामिल थे। उन्हें हितधारकों से परामर्श करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कमिटी ने पब्लिक मीटिंग की। इसके अलावा हरिद्वार में हिंदू धार्मिक नेताओं से मुलाकात की गई। उन्होंने सभी हिंदू अखाड़ों से बात की। कमिटी ने कलियर शरीफ, मैंगलोर, रामनगर, हलद्वानी, काशीपुर और विकास नगर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बैठकें कीं। कमिटी ने अन्य देशों में नागरिक मामलों पर कानूनों का भी अध्ययन किया। इसमें वे देश भी शामिल हैं, जहां धार्मिक आधार पर एक समान कानून नहीं है। साथ ही, उन देशों के कानून का अध्ययन किया गया, जहां कानून धर्म के आधार पर तैयार किए गए हैं।

कमिटी ने नागरिक कानूनों से संबंधित विभिन्न आयोगों के समक्ष विभिन्न मामलों के साथ-साथ व्यक्तिगत और धार्मिक कानूनों एवं धार्मिक रीति- रिवाजों का भी अध्ययन किया। पैनल ने राज्य में सक्रिय सभी 10 राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया। इनमें से कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीपीआई को छोड़कर सात ने भाग लिया। दलों ने मसले पर अपने विचार और सुझाव साझा किए। इसने सभी वैधानिक आयोगों को भी पूरा किया। आईए इस कमिटी के सदस्यों के बारे में जानते हैं।

पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में कमिटी का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई वर्ष 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री पूरी करने के बाद कानूनी पेशे में आईं। उन्हें 1979 में बॉम्बे हाई कोर्ट में सरकारी वकील और फिर हाई कोर्ट में निवारक हिरासत मामलों के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था। 1996 में बॉम्बे हाई कोर्ट और 2011 में सुप्रीम कोर्ट में उन्हें प्रमोट किया गया। केंद्र सरकार ने उन्हें एक पैनल की सिफारिश करने के लिए गठित खोज समिति का अध्यक्ष बनाया। इसमें लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों को चुना जाना है। उन्होंने 6 मार्च 2020 में जम्मू और कश्मीर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड के लिए परिसीमन आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्यभार संभाला।

उत्तराखंड यूसीसी कमिटी के सदस्य में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली शामिल हैं। जस्टिस कोहली ने 1972 में जम्मू विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। वर्ष 1990 में राज्यपाल शासन की अवधि के दौरान उन्हें जम्मू और कश्मीर का अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। बाद में उन्होंने तत्कालीन राज्य के महाधिवक्ता के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने संवैधानिक, नागरिक, कराधान और कानून की अन्य शाखाओं पर मामले चलाए। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के कानूनी सलाहकार बने। वर्ष 2003 तक वे इस पद पर रहे। जनवरी 2003 में उन्हें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 2006 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। 2011 में जस्टिस कोहली सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर प्रमोट किए गए। वहां से वह 2013 में सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट के बाद उन्हें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड कमिटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह आईआईटीयन आईएएस हैं। वे 1983 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। वह नवंबर 2015 में उत्तराखंड के 13वें मुख्य सचिव बने और एक साल तक इस पद पर रहे। सेवानिवृत्ति के बाद शत्रुघ्न सिंह को तत्कालीन भाजपा सरकार ने राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया था। सीआईसी पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्हें तत्कालीन सीएम तीरथ सिंह रावत का मुख्य सलाहकार नामित किया गया। शत्रुघ्न सिंह अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्य भी हैं।

उत्तराखंड के रहने वाले मनु गौड़ पेशे से कृषक हैं। वह टैक्सपेयर्स एसोसिएशन ऑफ भारत के अध्यक्ष भी हैं। यह करदाताओं के कल्याण, जनसंख्या नियंत्रण, सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के पुनरुद्धार और भारत के विकास के मुद्दे पर काम करने वाला एक राष्ट्रीय स्तर का पंजीकृत संगठन है।अएक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर मनु गौर को जनसंख्या नियंत्रण पर पहले जिम्मेदार पितृत्व विधेयक का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। इसे दिसंबर 2018 में एक निजी सदस्य विधेयक के रूप में पेश किया गया था। इस विधेयक को 125 सांसदों का समर्थन मिला। 2012 से यूसीसी और जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर मनु गौड़ काम कर रहे हैं। यूसीसी ड्राफ्ट कमिटी की सदस्य डॉ. सुरेखा डंगवाल देहरादून में दून विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। इससे पहले उन्होंने उत्तराखंड के श्रीनगर शहर में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंग्रेजी, आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाओं के एचओडी के रूप में कार्य किया। डॉ. डंगवाल के पास 34 वर्षों का शिक्षण और अनुसंधान अनुभव है। वह प्रतिष्ठित जर्मन डीएएडी फेलोशिप हासिल कर चुकी हैं। उनकी शोध रुचि दक्षिण एशियाई महिला अध्ययन, प्रवासी साहित्य और साहित्यिक सिद्धांत पर केंद्रित है।

मॉडल पूनम पांडे की मौत के झूठे नाटक के लिए क्या बोले लोग?

मॉडल पूनम पांडे की मौत के झूठे नाटक के लिए लोगों ने सोशल मीडिया पर कॉमेंट्स की बहार ला दी है! मजाक करने की भी एक सीमा होती है लेकिन पूनम पांडे ने तो सारी हदें ही पार कर दीं। मजाक भी ऐसा कि लोग अब तक इसे नहीं पचा पा रहे हैं। कैंसर जैसी घातक और जानलेवा बीमारी के लिए कोई ऐसे जागरुकता फैलाता है भला! वो कैंसर जिसका नाम सुनकर देश ही नहीं दुनियाभर के लोगों की सांसें ऊपर नीचे होने लगती हैं, जिससे जूझते हुए मरीज ही नहीं पूरा घर टूट जाता है, ऐसा रोग जिससे लड़ते-लड़ते हर साल भारत में 10 लाख लोग काल के गाल में समा जाते हैं। आपने उसके नाम पर ऐसा भद्दा मजाक किया? कैंसर के जिस प्रकार के नाम पर आपने अपने मौत की झूठी स्क्रिप्ट लिखी, उससे जूझने वाली महिलाओं के दर्द की कल्पना मात्र भी कर लेतीं तो शायद आपको यह सब न करना पड़ता। 24 घंटे पहले(शुक्रवार), सर्वाइकल कैंसर की बीमारी के चलते अपने फैंस को अलविदा कहने वाली पूनम ठीक 24 घंटे बाद यानी आज शनिवार को कैमरे पर आती हैं और कहती हैं कि मेरी मौत की अफवाह झूठी थी और मुझे सर्वाइकल कैंसर नहीं था। मैं तो बस महिलाओं में तेजी से फैल रहे इस रोग के लिए जागरूक करना चाहती थी। इस चीप कहें या सस्ती पब्लिसिटी, आपको क्या मिला? फैंस ही नहीं, बाकी लोग भी आपके इस कृत्य से गुस्से में हैं। पूरा सोशल मीडिया आप पर गुस्सा निकाल रहा है। आपको अंदाजा भी नहीं है कि आपने जो किया है, उसका क्या रिजल्ट निकल सकता है। पूनम जी जिस बीमारी के बारे में जागरुकता फैलाने के नाम पर आपने अपने आपको ही मार दिया, उस कैंसर की गंभीरता को आप समझिए। शायद आप ऐसा चीप स्टंट करने से पहले 100 बार सोचें। पूनम पांडे का फैन बेस क्या है, किसी से छिपा नहीं है। जो पूनम पांडे को जानते हैं उन्हें यह भलीभांति मालूम है। इसे विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। चूंकि पूनम मॉडल भी हैं तो फिल्म इंडस्ट्री से भी उनका थोड़ा बहुत नाता है। शुक्रवार को जो फैंस उनकी झूठी मौत पर शॉक थे, सांत्वना दे रहे थे, आंसू बहा रहे थे, वही 24 घंटे बाद गुस्सा निकाल रहे हैं। गुस्सा इस बात का कि जिस कैंसर के बाद महिलाएं अपना जीवन गंवा बैठती हैं, उसके नाम पर पूनम ने अपने मौत की फर्जी कहानी गढ़ी थी। सिर्फ इसके लिए कि वह इस घातक बीमारी के बारे में जागरुक कर सकें। सोशल मीडिया पर लोग भड़के हुए हैं। ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा कपूर ने कहा कि यह बेहद असंवेदनशील कैंपेन था। बहुत गिरा हुआ था। अरविंद तोंडे नामक यूजर ने लिखा कि जागरुकता ऐसी फैलाओ कि 4 लोग गाली दें। कई इंस्टा यूजर ने तो लिखा की पूनम आपको शर्म आनी चाहिए।

डॉक्टर क्यूटरस के नाम से मशहूर डॉक्टर तान्या ने भी पूनम का विरोध करते हुए कहा कि मुझे अपने इस घटिया जागरुकता अभियान से मत जोड़ो। मैं बहुत दिनों से इस सर्वाइकल कैंसर को लेकर दी जाने वाली वैक्सीन के लिए जागरुकता अभियान चला रही हूं। तब तक शायद आपके इस घटिया सोच का जन्म भी नहीं हुआ था। यह कदम बेहद असंवेदनशील था। जाने-माने फिल्मकार और इंडियन फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने कहा कि यह बहुत ही दुखद और चौंकाने वाला है। जिस तरह से एक एक्ट्रेस ने सर्वाइकल कैंसर के चलते अपनी मौत की खबर का एलान किया। उन्होंने लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने मॉडल पूनम पांडे और उनके मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मुंबई के विक्रोली पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को पत्र लिखा है।

अब सर्वाइकल कैंसर क्या है और कैसे शरीर पर हमला कर उसे कमजोर कर देता है, समझते हैं। डॉक्टर के शब्दों में समझेंगे तो आसानी से बात समझ आ जाएगी। मशहूर गायनेकोलॉजिस्‍ट डॉ. शारदा जैन ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर HPV मतलब ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण होता है। यह वायरस पहले महिला के शरीर में प्रवेश कर गर्भाशय के अंदर के हिस्से को संक्रमित करता है। यह इतनी खामोशी से अंदर घुसता है कि महिलाओं को इसका इल्म भी नहीं होता। शरीर में घुसते ही यह अपने आपको बढ़ाने लगता है। कैंसर का रूप ले लेता है। यह किसी भी उम्र में महिलाओं को अपना शिकार बना लेता है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि 70 फीसदी महिलाओं में यह 30 साल में ही डायग्नोस हो जाता है। यह वायरस शारीरिक संपर्क बनाने की वजह से भी शरीर के अंदर घुस सकता है।

सर्वाइकल कैंसर से जुड़े आंकड़े डराते हैं। महिलाओं में हर तरह के कैंसर के मामले 18 फीसदी हैं। आंकड़े गवाह हैं कि भारत में हर साल 1 लाख 20 हजार महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़िक हो जाती हैं। जिसमें 74 हजार महिलाएं दम तोड़ देती हैं। प्रतिदिन के हिसाब से बात करें तो हर दिन 211 महिलाएं इस जानलेवा कैंसर से अपनी जान गंवा देती हैं। जांच का भी हाल समझिए। देश में ऐसी 1 फीसदी महिलाएं ही हैं जो इस घातक कैंसर की जांच कराती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने बताया कि कम से कम 70 फीसदी महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच होनी चाहिए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार की सफलता के बारे में बात की.

0

राम मंदिर निर्माण के बाद तीन तलाक की प्रथा समाप्त कर दी गई। महिलाओं को आरक्षण से लेकर दंड संहिता बिल पास. मौजूदा लोकसभा के आज आखिरी दिन आखिरी वक्ता के तौर पर बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने सरकार की पांच साल की उपलब्धियां गिनाईं. विरोधियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के प्रचार के लिए लोकसभा के मंच का इस्तेमाल किया.

आमतौर पर पिछले दस सालों में जब भी मोदी ने लोकसभा या राज्यसभा को संबोधित किया है, विपक्ष पर हमला बोला है. आज मोदी थोड़ा अलग रास्ते पर चलते हैं. प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर हमला करने के बजाय शुरुआत से ही सरकार की सफलता की कहानी को उजागर करने की रणनीति अपनाई. मोदी ने पांच साल पहले सत्ता में आने पर कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द कर दिया था। आज अपने भाषण में, जहां उन्होंने कश्मीर में ‘शांत’ स्थिति के बारे में बात की, वहीं मोदी ने महामारी के दौरान सरकार की भूमिका के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ”इस सरकार के कई सुधार-उन्मुख निर्णय अभूतपूर्व हैं। कश्मीर के लोग सामाजिक न्याय से वंचित थे। यह सरकार उन्हें न्याय दिलाने में सक्षम है.

मोदी ने दावा किया कि भावी पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए महिला संरक्षण विधेयक, तीन तलाक का उन्मूलन या डेटा संरक्षण अधिनियम जैसे कदम उठाए गए हैं। तीन तलाक को लेकर मोदी ने कहा, ‘हालांकि कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. लेकिन ये लोकसभा पीढ़ियों से मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को रोकने में सक्षम है.” इसके अलावा मोदी ने ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह नए कानून लाने, कारोबार में सहूलियत, नई शिक्षा नीतियां, रिसर्च पर जोर देने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ”दंड संहिता में कई अनावश्यक कानूनों को खत्म कर दिया गया है. व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए कम से कम 60 कानूनों को निरस्त कर दिया गया है।

अंतरिम बजट सत्र आज खत्म हो गया. चुनाव आयोग कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा देगा. बीजेडी सांसद भर्तृहरि मोहताब के शब्दों में, “वार्षिक परीक्षा के दौरान चिंता यह होती है कि क्या सभी छात्र उत्तीर्ण होकर अगली कक्षा में जाएंगे या नहीं।” ऐसा माहौल अब लोकसभा में भी है.” कुछ सांसदों को चिंता सताने लगी है. मैं जितनी अधिक चुनौतियों का सामना करता हूँ, मैं भीतर से उतना ही मजबूत होता जाता हूँ। लोकतंत्र में चुनाव जरूरी है. मुझे लगता है कि हमारी चुनाव प्रणाली को देखकर दुनिया में इस देश के प्रति सम्मान बढ़ेगा।” वह बहस इस शहर में एक चर्चा बैठक में सामने आई। एक पक्ष का दावा है कि रामलला की प्राणप्रतिष्ठा का लाभ लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक गेरुआ खेमे को मिलेगा. दूसरे पक्ष का प्रतिदावा यह है कि आम लोगों के जीवन की अहम समस्याओं को छुपाने के लिए मंदिर को राजनीति के केंद्र में स्थापित किया जा रहा है!

एक यूट्यूब चैनल और एक संगठन के सहयोग से तथा जादवपुर विश्वविद्यालय के ‘सांस्कृतिक विविधता और कल्याण अध्ययन केंद्र’ के सहयोग से नजरूल भवन में ‘मंदिर और भारतीय राजनीति का भविष्य’ विषय पर एक चर्चा आयोजित की गई। वहीं, बीजेपी नेता स्वपन दासगुप्ता ने पूरे मामले को भारत की पहचान, हिंदू ‘वर्चस्व’ को फिर से हासिल करने का संघर्ष बताया। भाजपा के इस ”विश्वास” का कारण बताते हुए कि राम मंदिर की स्थापना से लोकसभा चुनाव में फायदा होगा, उन्होंने दावा किया, ”राम मंदिर की स्थापना ने लोगों के दिलों को छू लिया है।”

इसी बिंदु से कांग्रेस के वकील अरुणाभ घोष ने राम को राजनीतिक सशक्तिकरण का एक उपकरण बताने की कोशिश की. उनके शब्दों में, ”जो लोग राम की बात करते हैं, वे दरअसल सत्ता की ओर देखकर राम की बात कर रहे हैं. राम के प्रति प्रेम के कारण नहीं।” दूसरे पहलू में भी लगभग यही बयान तृणमूल प्रतिनिधि अरूप चक्रवर्ती का है. रामलला की ‘अधूरे मंदिर’ में स्थापना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बिना नाम लिए बीजेपी पर तंज कसा, “अगर चुनाव से पहले भगवान राम को नहीं बदला गया तो चुनाव से कोई फायदा नहीं होगा!”पत्रकार परंजॉय गुहाठाकुरता ‘नरम हिंदुत्व बनाम कठोर हिंदुत्व’ के बीच तुलना करते हैं। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ने या मध्य प्रदेश चुनाव से पहले कमल नाथ की मंदिर-यात्रा जैसे ‘नरम हिंदुत्व’ के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा, ”हम सोचते हैं कि कट्टर और नरम हिंदुत्व के बीच लड़ाई में, कट्टर हिंदुत्व हमेशा रहेगा जीतना।”

संसद में अयोध्या राम मंदिर पर बातचीत में बीजेपी नेतृत्व ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की

सीधे तुलना ही नहीं, शाह ने लोकसभा में बताया, मोदी में हैं राम के सारे गुण! संसद के दोनों सदनों में बीजेपी समेत सत्ता पक्ष के सांसदों ने राम का गुणगान किया. दिल्ली से गायक-सांसद हंस राज ने भी लोकसभा में हंस राम का भजन गाया. वह ‘सर्वव्यापी’ है. वह ‘प्रजावत्सल’ है। वह एक ‘हीरो’ हैं. वह एक ‘अच्छे शासक’ हैं. उन्होंने न सिर्फ नरेंद्र मोदी की तुलना सीधे तौर पर राम से की. भले ही उन्होंने ऐसा नहीं किया, लेकिन आज अमित शाह ने लोकसभा में खड़े होकर बताया कि राम के सारे गुण नरेंद्र मोदी में हैं. ऐसे ‘सर्वगुण संपन्न’ प्रधानमंत्री का इंतजार पूरा देश कई वर्षों से कर रहा था. और इसलिए राम मंदिर का निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के बिना संभव नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन करने और राम लला को विराजमान करने के बाद सवाल उठा कि क्या भारत ने बहुलवाद और तानाशाही की राह पर एक और कदम बढ़ा दिया है?

अमित शाह ने आज संसद में खड़े होकर दलील दी कि दुनिया के किसी भी देश में बहुसंख्यक समुदाय ने अपने धर्म के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं किया है. इसने भारत के ‘लोकतांत्रिक मूल्यों’ और ‘धर्मनिरपेक्ष चरित्र’ को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया है। राम मंदिर के लिए संघर्ष 1528 से शुरू हुआ. 1858 से कानूनी लड़ाई शुरू हुई. वह संघर्ष 22 जनवरी को राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला के निधन के साथ समाप्त हुआ। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के फैसले के बाद ‘सौहार्दपूर्ण माहौल’ में राम मंदिर का निर्माण हुआ.

लोकसभा चुनाव से पहले शनिवार को संसद सत्र का आखिरी दिन था. उसी दिन, समझदार भाजपा नेतृत्व ‘ऐतिहासिक राम मंदिर के निर्माण और राम लला की मृत्यु’ पर चर्चा के लिए लोकसभा और राज्यसभा में एक प्रस्ताव लाया। इसका उद्देश्य संसद के अंदर राम मंदिर के आसपास की भावना को लाना और मोदी सरकार की सफलता के रूप में राम मंदिर की स्थापना पर संसद की मुहर लगवाना था। बीजेपी नेताओं को पता था कि विपक्ष राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं कर सकता.

संसद के दोनों सदनों में बीजेपी समेत सत्ता पक्ष के सांसदों ने राम का गुणगान किया. दिल्ली से गायक-सांसद हंस राज ने भी लोकसभा में हंस राम का भजन गाया. उस पर सभी ने ताली बजाई। बीजेपी सांसदों ने राम मंदिर के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी. और उनके जरिए राम मंदिर की स्थापना की चर्चा दरअसल नरेंद्र मोदी को ‘सर्वगुण संपन्न’ शासक के रूप में स्थापित करने का मंच बन गई है. लोकसभा में इसका नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्यसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने किया। अमित शाह ने आज लोकसभा में कहा कि चैतन्यदेव और रामानंद जैसे अनेक लोगों ने इस देश में भक्ति आंदोलन किया है. इससे देश मजबूत हुआ. पारंपरिक धर्म के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है. भक्ति आंदोलन ने जन-जन को दिशा दिखाई है। परंतु भारत के हजारों वर्षों के सांस्कृतिक एवं राजनीतिक इतिहास में किसी अन्य शासक या जन-प्रतिनिधि ने भक्ति भावना के पुनरुद्धार का इस प्रकार नेतृत्व नहीं किया। राम मंदिर के भूमि पूजन से लेकर मंदिर निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा तक जो काम नरेंद्र मोदी ने किया है. उन्होंने कहा, ”लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर को लेकर जनजागरण किया. नरेंद्र मोदी ने भक्ति की भावना जगाई है.” अमित शाह ने उस दिन संसद में बताया, मोदी ने भारत में एक राजा और ऋषि की तरह आध्यात्मिक चेतना जगाई है. यहां अमित शाह ने राम मंदिर आंदोलन के सफर और कानूनी लड़ाई की तुलना की. प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के दस साल. तर्क दिया, मोदी ने एक अच्छे शासक की तरह कोविड महामारी के दौरान नेतृत्व किया। बासठ वर्षों तक जब चीन ने आक्रमण किया तो उसे एक वीर की भाँति रोका गया। जब पुंछ से पुलवामा पर हमला हुआ तो मोदी ने पाकिस्तान के घर में घुसकर जवाब दिया. यह देखकर कि छात्र दबाव में आकर आत्महत्या करना पसंद कर रहे हैं, ‘प्रजावत्सल’ नरेंद्र मोदी ने अपने पिता की तरह उनके साथ ‘परीक्षा का अभ्यास’ किया। अमित शाह के भाषण के दौरान लोकसभा में बार-बार ‘जय श्री राम’ के नारे लगे.

शाह ने कहा, मोदी के नेतृत्व के बिना राम मंदिर की स्थापना संभव नहीं होती. क्योंकि कई लोगों को राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में खून-खराबे और हिंसा की आशंका थी. प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जीत-हार के नजरिये से नहीं देखा. देश की 1.4 अरब जनता के प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने राम मंदिर और राम लला का भूमि पूजन किया है. इसलिए ‘जय श्री राम’ का मंत्र, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान रामायण की वानर सेना का युद्ध मंत्र था, राम मंदिर के उद्घाटन पर भक्ति के मंत्र ‘जय सियाराम’ में बदल गया। कांग्रेस-एनसीपी जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने आज कहा कि बीजेपी अकेले राम की प्रशंसक नहीं है. हर कोई राम का भक्त है. मोदी ने सरकार की सफलता पर सवाल उठाए लेकिन वे विवाद में नहीं पड़ना चाहते थे. लेकिन एमआईएम नेता असदुद्दीन वैसी ने कहा, जहां राम मंदिर बना है, वहां बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी. उन्होंने लोकसभा में ‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ का नारा भी लगाया. अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि विपक्ष को यज्ञ में बाधा डाले बिना इस आध्यात्मिक जागृति के साथ चलना चाहिए. इसी में देश की भलाई है. क्योंकि राम मंदिर की स्थापना एक नये युग की शुरुआत है. 2024 में फिर बनेगी नरेंद्र मोदी सरकार. उसके बाद विकसित भारत की ओर यात्रा शुरू होगी। शाह ने राम मंदिर को कट्टरता के सामने आध्यात्मिकता के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया है। बीजेपी नेताओं ने लगाए नारे, इस बार वेसी भी बोलें ‘जय श्री राम’!

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल ने अपना पांचवां टी20 शतक लगाया.

0

ग्लेन मैक्सवेल ने रोहित शर्मा का वर्ल्ड रिकॉर्ड साझा किया. उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में शतक लगाया. मैक्सवेल ने पिछले तीन टी20 मैचों में दो शतक लगाए. उनके नाम अब टी20 क्रिकेट में पांच शतक हो गए हैं. रोहित के समान. मैक्सवेल एडिलेड में वेस्टइंडीज के खिलाफ आक्रामक मूड में थे. उन्होंने शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलना शुरू कर दिया. उन्होंने महज 55 गेंदों पर 120 रनों की नाबाद पारी खेली. 12 चौके और 8 छक्के लगाए. मैक्सवेल के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 241 रन बनाए. यह टी-20 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया का सबसे ज्यादा रन है। टी20 वर्ल्ड कप जून में शुरू होगा. उससे पहले मैक्सवेल की फॉर्म ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों के चेहरे पर मुस्कान ला देगी. इससे पहले टी20 में सबसे ज्यादा शतक रोहित के नाम थे. उन्होंने 151 मैचों में पांच शतक लगाए. मैक्सवेल ने 103 मैचों में पांच शतक लगाए। इस लिस्ट में अगला नाम सूर्यकुमार यादव का है। उन्होंने 60 मैचों में चार शतक लगाए. बाबर आजम के नाम 109 मैचों में तीन शतक हैं. पिछले साल वनडे वर्ल्ड कप के दौरान भी मैक्सवेल फॉर्म में थे। उन्होंने भारतीय धरती पर अफगानिस्तान के खिलाफ दोहरा शतक लगाया था. मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया को विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई. वह उस फॉर्म को टी20 वर्ल्ड कप में भी बरकरार रखना चाहते हैं. मैक्सवेल यही कर रहे हैं. जलसा में शराब पीने के बाद ग्लेन मैक्सवेल को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर के मामले में वहां के बोर्ड ने जांच शुरू कर दी है. बुधवार को उनकी टी20 टीम में वापसी हुई. इसके बाद कोच ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि मैक्सवेल को भविष्य में ऐसी हरकतें न करने की चेतावनी दी गई है.

ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 14 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है. मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस और स्टीव स्मिथ को आराम दिया गया है। टीम का नेतृत्व मिचेल मार्श करेंगे. वे इस सीरीज को टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं. मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने कहा, ”यह सीरीज हमें बताएगी कि टी20 वर्ल्ड कप में किसे लेना है.”

कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने मैक्सवेल के बारे में कहा, “मैंने ग्लेन से बात की है। बहुत अच्छी चर्चा. यह देखना हमारा कर्तव्य है कि वह अपना ख्याल रखे।’ हमने उसे टीम में शामिल होने के लिए आराम और पुनर्वास का समय दिया। लेकिन मुझे लगता है कि ये घटना उनके लिए एक अच्छा सबक है. आपको यह समझना होगा कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है। तुम्हें भी अपना ख़याल रखना चाहिए। मैक्सवेल आस्ट्रेलियाई सफेद गेंद क्रिकेट का अहम हिस्सा हैं। मुझे नहीं पता कि वह 2027 विश्व कप में नजर आएंगे या नहीं।’ लेकिन अगर वह खेलना चाहता है तो उसे सोचना होगा।’ एक ऑस्ट्रेलियाई दैनिक के मुताबिक, मैक्सवेल पिछले हफ्ते एडिलेड में एक कॉन्सर्ट में गए थे और शराब पी थी। देर रात उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ समय तक इलाज चला. हालाँकि, वह उस रात अस्पताल में नहीं रुके। बताया गया कि उन्होंने अगले दिन से अभ्यास शुरू कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कॉन्सर्ट में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बाकी क्रिकेटरों को भी आमंत्रित किया गया था. लेकिन मैक्सवेल उनके साथ नहीं गये. अकेले गए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के बैंड ‘सिक्स एंड आउट’ ने वहां परफॉर्म किया. बाद में मैक्सवेल को रॉयल एडिलेड अस्पताल में भर्ती कराया गया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक बयान में कहा कि बोर्ड को मैक्सवेल के साथ हुई घटना की जानकारी है. अधिक जानकारी के लिए खोज रहे हैं. लेकिन इसका वनडे सीरीज से बाहर होने से कोई लेना-देना नहीं है.’ बीबीएल के प्रदर्शन और भविष्य के सितारों को लाने को ध्यान में रखते हुए मैक्सवेल को बरकरार नहीं रखा गया। मालूम हो कि वह टी20 सीरीज में वापसी कर सकते हैं.

मैक्सवेल ने आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच 15 जनवरी को खेला था. कुछ दिन पहले उन्होंने मेलबर्न स्टार्स का कप्तान पद छोड़ दिया था. होबार्ट ने हरिकेन के विरुद्ध खेला। उन्होंने शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलना शुरू कर दिया. उन्होंने महज 55 गेंदों पर 120 रनों की नाबाद पारी खेली. 12 चौके और 8 छक्के लगाए. मैक्सवेल के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 241 रन बनाए. यह टी-20 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया का सबसे ज्यादा रन है। टी20 वर्ल्ड कप जून में शुरू होगा. उससे पहले मैक्सवेल की फॉर्म ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों के चेहरे पर मुस्कान ला देगी. इससे पहले टी20 में सबसे ज्यादा शतक रोहित के नाम थे.

दिल्ली कोर्ट ने कोरोना मरीज की कार्डियक अरेस्ट से मौत का दावा करने पर सरकार को फटकार लगाई.

दिल की बीमारी से हुई कोरोना मरीज की मौत! कोर्ट ने सरकार की दलील नहीं मानी, राज्य सरकार ने मृत्यु प्रमाण पत्र को ‘साधन’ के तौर पर इस्तेमाल कर मुआवजा देने से इनकार कर दिया. मृतक की पत्नी का दावा है कि उनकी मौत दिल की बीमारी से नहीं बल्कि कोरोना से हुई है. एक महिला को तीन साल बाद ‘न्याय’ मिला। कोरोना के दौरान उन्होंने अपने पति को खो दिया. लेकिन सरकार से मुआवजा नहीं मिला. सरकार ने तर्क दिया कि मृतक की मौत कोरोना से नहीं हुई. उनकी मृत्यु हृदय रोग से हुई। महिला को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. जज ने उस मामले में दिल्ली सरकार की भूमिका पर असंतोष जताया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिकाकर्ता के पति की 19 जून 2021 को अस्पताल में मौत हो गई. इससे पहले उनका दो महीने तक अस्पताल में इलाज चला था. इलाज के दौरान वह कोरोना से संक्रमित हो गए थे. लेकिन शारीरिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. लेकिन डेथ सर्टिफिकेट में लिखा गया कि उनकी मौत कोरोना से नहीं बल्कि दिल की बीमारी से हुई है.
कथित तौर पर राज्य सरकार ने इस सर्टिफिकेट को ‘टूल’ की तरह इस्तेमाल कर मुआवजा देने से इनकार कर दिया. मृतक की पत्नी ने दावा किया कि उसका पति परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उनकी मौत दिल की बीमारी से नहीं बल्कि कोरोना से हुई है. महिला ने उस शिकायत के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट में केस दायर किया. हाईकोर्ट में काफी समय तक मामला चला। हाल ही में जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया. फैसले के दौरान जज ने कहा, ”मृतक की मेडिकल जानकारी से यह स्पष्ट है कि वह कोरोना से संक्रमित था.” उपचार से कोई शारीरिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल में उनकी मौत हो गई. तथ्य यह है कि मृत्यु प्रमाण पत्र में हृदय रोग का उल्लेख है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह कोविड की जटिलताओं से पीड़ित नहीं थे।” कोरोना से मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को कम से कम 50,000 रुपये देने को कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोरोना से मरने वालों के परिवारों को मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है. कोविड से मरने वालों के परिजनों को राज्य सरकार के आपदा राहत कोष से मुआवजा दिया जाये. यह राज्य की किसी भी जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है लेकिन राज्य सरकार चाहे तो ज्यादा मुआवजा दे सकती है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 2021 के आदेश का जिक्र किया. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अपने चेहरे को मास्क से ढकें, घबराएं नहीं, सीएम ममता की सलाह
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के निजी अस्पतालों को कोरोना वायरस फैलने के खिलाफ चेतावनी दी है. उनके मुताबिक, निजी अस्पतालों में आईसीसीयू को अच्छे से साफ करने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी. देश के कई राज्यों से लगातार कोविड संक्रमण की खबरें आ रही हैं. कोरोना के नए वैरिएंट JN.1 ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में कई कोविड मरीजों में यह स्वरूप पाया गया है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाते हुए सावधान रहने की सलाह दी. गुरुवार को नवान्न में प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ममता ने कोविड का विषय उठाया. उन्होंने कहा, ”हमें कोविड को लेकर थोड़ा सावधान रहना होगा. हम कोई आधिकारिक दिशानिर्देश जारी नहीं कर रहे हैं. लेकिन जो लोग मास्क पहन सकते हैं। कई बाहर से आते हैं. हमें नहीं पता कि बीमारी कौन ला रहा है. इसलिए हमें यथासंभव सावधान रहना होगा.” मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस फैलने के मामले में राज्य के निजी अस्पतालों को चेतावनी दी है. उनके मुताबिक, निजी अस्पतालों में आईसीसीयू को अच्छे से साफ करने की जरूरत है. वहां से संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा है. ममता ने कहा, ”कोविड निजी नर्सिंग होम में आईसीसीयू से फैल रहा है। मैं उन्हें दोष नहीं देता. इतने सारे मरीज़ तनावग्रस्त होते हैं, उन्हें ठीक से सफाई करने का मौका नहीं मिल पाता है। सरकारी अस्पतालों की प्रतिदिन सफाई होती है। मैं निजी अस्पतालों को आईसीसीयू को साफ रखने के लिए कहूंगा। हालांकि, मुख्यमंत्री को अभी कोरोना के वापस आने की संभावना नहीं दिख रही है. उनके शब्दों में, ”घबराने की कोई वजह नहीं है. अमेरिका, स्पेन में संक्रमण बढ़ रहा है. हमने इस बीमारी से अपने कई प्रियजनों को खोया है। शायद अब मृत्यु दर कम है. लेकिन यह बीमारी अत्यधिक संक्रामक है। इसलिए हमें अभी से सावधान रहना होगा.”

हरियाणा के सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद, सड़कों पर बैरिकेड लगाकर बैठे किसान.

0

देश के किसानों ने कई मांगों को लेकर मार्च की धमकी दी है. पंजाब, हरियाणा के कई जिलों से किसानों ने ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया है. उनका अगले मंगलवार को राजधानी में मार्च और विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम है. हरियाणा सरकार ने किसानों के इस आंदोलन को ‘रोकने’ के लिए दो दिन पहले ही कदम उठाना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. इतना ही नहीं पुलिस ने सड़क पर बैरिकेड्स भी लगाने शुरू कर दिए हैं. किसानों के आंदोलन से पहले हरियाणा के सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद, सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए फसल, किसानों के लिए पेंशन, फसल बीमा और उनके खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर 13 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना है। कई लोगों को डर है कि राजधानी की सड़कें फिर से गर्म हो जाएंगी. मालूम हो कि इस आंदोलन में 200 से ज्यादा किसान संगठन शामिल होंगे. मनोहर लाल खट्टर सरकार पहले ही अधिसूचना जारी कर इंटरनेट सेवाएं बंद करने की घोषणा कर चुकी है. अधिसूचना के मुताबिक, अशांति से बचने के लिए अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं मंगलवार रात तक निलंबित रहेंगी. ग्राहक केवल वॉयस कॉल कर सकते हैं।

इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों को अन्य जिलों से हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। पुलिस की अतिरिक्त 50 कंपनियां तैनात की गई हैं। जिसके चलते यात्रियों को चंडीगढ़ और दिल्ली के बीच सफर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, पुलिस ने वैकल्पिक सड़कों का भी जिक्र किया है. पुलिस ने हरियाणा में लोगों को सलाह दी है कि जब तक जरूरी न हो पंजाब और दिल्ली की यात्रा न करें। गौरतलब है कि 2020 में किसानों के विरोध प्रदर्शन से पूरा देश उथल-पुथल रहा. उत्तर भारत के राज्यों में लगातार हलचल जारी है. उस आंदोलन के कारण अंततः नरेंद्र मोदी सरकार पीछे हट गयी। ‘विवादित’ कृषि बिल वापस लिया गया.

40 साल की पारिवारिक दुश्मनी, बदला चुकाने के लिए युवक को यमुना के पानी में डुबाकर मारने के आरोप में गिरफ्तार पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था . दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। दोनों परिवारों के बीच चालीस साल तक दुश्मनी चलती रही. चार दशक तक चली इस दुश्मनी के चलते एक शख्स ने युवक को यमुना के पानी में डुबा दिया. हरियाणा की एक अदालत ने शुक्रवार को आरोपी आरिफ को जेल की सजा सुनाई. घटना हरियाणा के करनाल के मुंडी गढ़ी गांव की है. मृतक का नाम शरीफ है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था. दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक शरीफ ने अत्यधिक नशीली दवाएं ली थीं. ऐसे में आरिफ ने शरीफ को यमुना के पानी में डुबाकर मार डाला। पुलिस के मुताबिक, उस वक्त शरीफ के पास 40 हजार कैश था, जो यमुना के पानी में बह गया. आरिफ ने शरीफ की हत्या कर दी और मौके से भाग गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था. दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक शरीफ ने अत्यधिक नशीली दवाएं ली थीं. ऐसे में आरिफ ने शरीफ को यमुना के पानी में डुबाकर मार डाला। पुलिस के मुताबिक, उस वक्त शरीफ के पास 40 हजार कैश था, जो यमुना के पानी में बह गया. आरिफ ने शरीफ की हत्या कर दी और मौके से भाग गया।

पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी गठबंधन पर आप की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने रविवार को हरियाणा में आम आदमी पार्टी की एक रैली को संबोधित किया. वहां उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी गठबंधन बनाकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. हालांकि, केजरीवाल ने कांग्रेस का नाम नहीं लिया, हालांकि विपक्षी गठबंधन ने भारत का नाम लिया। उस बैठक से केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव बिना गठबंधन किए अकेले लड़ेगी. लोकसभा चुनाव के बाद इस साल के अंत तक हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है. रविवार को केजरीवाल ने कहा, ”लोकसभा चुनाव आ रहे हैं। आप जानते हैं कि हमने देश के आम चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ बनाया है. इसलिए, हम गठबंधन सहयोगियों के साथ समझदारी से चुनाव लड़ेंगे।” इसके बाद उन्होंने कहा, ”विधानसभा चुनाव में हम हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ेंगे.” उन्होंने उम्मीद जताई कि आप हरियाणा में सरकार बनाएगी, जहां फिलहाल भाजपा का शासन है।

विकसित भारत के सपने पर क्या बोली विपक्ष?

विकसित भारत के सपने पर विपक्ष ने एक बड़ा बयान दे दिया है! संसद के बजट सत्र के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर खूब निशाना साधा। विपक्ष ने कहा कि सरकार पर हर मोर्चे पर विफल हुई है। केंद्र की मोदी सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा से लेकर विभिन्न समस्याओं को हल करने के बजाय वह अपनी पीठ खुद ही थपथपा रही है। यही नहीं विपक्ष ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास करने का उसका दावा सच से परे है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि मोदी सरकार तोहफे बांटने में विश्वास नहीं करती बल्कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। भाजपा की कविता पाटीदार ने उच्च सदन में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने देश की महिलाओं की किस्मत को संवारने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दस करोड़ से अधिक माताओं को उस धुएं से मुक्ति मिली जो उन्हें दमा जैसी बीमारी के कगार पर पहुंचा देता है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने यह भी दावा किया सामाजिक न्याय विभाग से इन बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति भी कई लाभार्थियों को नहीं मिल पा रही है। उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा कि एक व्यक्ति जो पार्टी बदल चुका है और अब एक मुख्यमंत्री है उसने एक विवादास्पद बयान दिया है। इसके बाद जब खरगे ने वह बयान पढ़ा तो सभापति धनखड़ ने इस बयान को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया। खरगे ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोग पढ़े लिखे हैं किंतु उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में बेरोजगारी के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है।

उन्होंने कहा कि पिछड़े इलाकों में बहुत कुछ किया जाना है। उन्होंने कहा कि आज पब्लिक सेक्टर लगातार बंद हो रहे हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। निजी क्षेत्र पर ध्यान देने के बजाय पब्लिक सेक्टर पर ध्यान दिया जाना चाहिए और इसे खत्म करने की जगह इसकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए। सेना में भर्ती की अल्पकालिक ‘अग्निपथ’ योजना का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा,‘अग्निवीर चार साल के बाद कहां जाएंगे ? पहले कहा गया कि 100 लोगों में से केवल 25 को हटाया जाएगा, शेष 75 को रखा जाएगा। लेकिन आज हालत इसके बिल्कुल उलट है।’

कांग्रेस अध्यक्ष ने महंगाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘टमाटर, प्याज, तेल, अनाज, दाल… ऐसी कौन सी चीज है जिसके दाम दोगुने नहीं हुए।’ उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से आम आदमी चौतरफा परेशानियों का सामना कर रहा है। खरगे ने किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी आमदनी दोगुना करने का और न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का भी वादा किया था लेकिन यह वादा ही रहा और किसानों की आमदनी में सालाना 1.5 फीसदी की गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में कृषि के बजट में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि लौटाई गई है। उन्होंने कहा कि वह सामाजिक न्याय के लिए जातीय जनगणना चाहते हैं क्योंकि इससे वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और फिर जरूरी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। जो लोग सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं, वे जरूर इसे मानेंगे।

भाजपा सदस्य ने ध्यान दिलाया कि अमृत काल की शुरुआत में बने नये संसद भवन में अपने जीवन को कर्म से गढ़ने वाली नारी शक्ति की परिचायिका राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अयोध्या में राम मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा के मनोभाव को ध्यान में रखते हुए सरकार के देश को विकसित बनाने के संकल्प को दोहराया जो रामराज्य की स्थापना की ओर एक कदम होगा। पाटीदार जब अपनी बात रख रही थीं, उसी दौरान कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करने के बाद उस पर संशोधन पेश किए जाते हैं। किंतु सभापति जगदीप धनखड़ ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया। सभापति ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश हो जाने के बाद इन पर विभिन्न सदस्यों के संशोधन रखवाये।

भाजपा सदस्य पाटीदार ने सेना, कोविड संकट के समय टीका निर्माण तथा चंद्रयान अभियान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नारी के अधिकारों में वृद्धि कर उनके सम्मान को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि युवा, महिला, किसान एवं गरीब ऐसे चार वर्ग हैं जो सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि आज गांवों में चार लाख किलोमीटर सड़कें बिछाने का काम हो या नये हवाई अड्डों का निर्माण या रेलवे पटरियों एवं बंदरगाह का निर्माण, सरकार हर क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात को बताने में खुशी होती है कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग से हैं और इसकी योजनाएं ओबीसी हितैषी हैं।

क्या आपराधिक मानहानि क्रिमिनल लॉ में होगा विग्रह?

आपराधिक मानहानि का क्रिमिनल लॉ से विग्रह हो सकता है! लॉ कमिशन ने अपनी सिफारिश में कहा है कि आपराधिक मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में बने रहना चाहिए। इससे फर्जी और झूठे आरोपों और बयान देने वालों में डर बना रहेगा। साथ ही लॉ कमिशन ने अपनी एक अन्य सिफारिश में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को तभी जमानत मिले जब वह नुकसान की भरपाई के लिए उतनी रकम जमा कर दें। लॉ कमिशन ने 284 वीं और 285 वीं रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं। लॉ कमिशन ने अपनी 284 वीं रिपोर्ट में कहा है कि सा्र्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में आरोपी को तभी जमानत मिलनी चाहिए जब वह नुकसान के बराबर की राशि जम कर दे। जस्टिस रितु राज अवस्थी की अगुवाई वाले लॉ कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकार के राजस्व का नुकसान होता है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकारी राजस्व को नुकसान और लोगों को इस कारण परेशानी होती है। इस मामले में लॉ कमिशन ने तमाम जजमेंट और मसले की गंभीरता को देखते हुए लॉ कमिशन ने प्रीवेंशन ऑफ डैमेज ऑफ पब्लिक प्रोपर्ट एक्ट 1984 में बदलाव की सिफारिश की है।

इसके लिए कहा गया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जमानत के प्रावधान कड़े किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रावधान किया जा सकता है कि नुकसान जितने का हुआ है उसके बराबर की राशि जमा करने पर ही जमानत हो। ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे कड़े प्रावधान करने से लोग ऐसे अपराध करने से बचेंगे। लॉ कमिशन ने अपनी 285 वीं रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि क्रिमिनल मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में बने रहना चाहिए। लॉ कमिशन ने रिपोर्ट में कहा है कि विचार और अभिव्यक्ति का जो अधिकार है वह लोगों को संविधान के तहत मिला हुआ है वहीं दूसरी तरफ लोगों को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिला हुआ है और अनुच्छेद-21 के तहत यह अधिकार लोगों को मिला हुआ है। समाज में शांति और सौहार्द बना रहे इसके लिए प्रावधान किए गए हैं। कोई भी अधिकार पूर्ण नहीं है। लोगों की गरिमा और मान प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट करने के लिए आराधिक मानहानि का अपराध कानून के किताब में है। यह जरूरी है कि लोगों की गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट किया जाए और कोई किसी और की प्रतिष्ठा का हनन न करे। इसे अपराध के तौर पर इसलिए रखा गया है ताकि फर्जी और झूठे बयान से किसी की प्रतिष्ठा का हनन न किया जा सके।

आईपीसी और नए भारतीय न्याय संहिता में अपराधिक मानहानि अपराध के तौर पर रखा गया है। यह ध्यान रहे कि नए भारतीय न्याय संहिता में आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी करार शख्स को सोशल सर्विस करने जैसी सजा देने का भी प्रावधान किया गया है। पहले जुर्माना, जेल की सजा का प्रावधान था और अब सोशल सर्विस जैसी सजा भी जोड़ी गई है। यही नहीं आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी तक स्थगित कर दी। इसमें उन्होंने अपनी कथित टिप्पणी ‘केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं’, को लेकर अहमदाबाद की एक मजिस्ट्रेट अदालत में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि की शिकायत को गुजरात के बाहर किसी अन्य स्थान पर, संभव हो तो दिल्ली, स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने प्रतिवादी के वकील द्वारा समय दिए जाने का अनुरोध करने के बाद मामले पर सुनवाई स्थगित की।

पीठ ने कहा, ‘जब उन्होंने तेजस्वी ने बयान वापस ले लिया है तो अभियोजन को मुकदमा जारी क्यों रखना चाहिए? आप निर्देश लें वरना हम अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करेंगे।’ शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘प्रतिवादी के वकील ने 19 जनवरी को याचिकाककर्ता तेजस्वी यादव के दर्ज कराए बयान पर निर्देश लेने के लिए वक्त मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय करें।’ उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय जनता दल राजद के नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले आपराधिक मानहानि की शिकायत में सुनवाई पर रोक लगा दी थी और याचिका दायर करने वाले गुजरात निवासी को नोटिस जारी किया था। कथित आपराधिक मानहानि के लिए यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। गुजरात की एक अदालत ने अगस्त में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत यादव के खिलाफ प्रारंभिक जांच की थी और एक स्थानीय व्यवसायी और कार्यकर्ता हरेश मेहता द्वारा दायर शिकायत पर उन्हें तलब करने के लिए पर्याप्त आधार पाया था। शिकायत के अनुसार, यादव ने मार्च 2023 में पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा था, ‘वर्तमान स्थिति में केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं, और उनकी धोखाधड़ी को माफ कर दिया जाएगा।’ बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कथित तौर पर पूछा था, ‘अगर वे एलआईसी या बैंकों का पैसा लेकर भाग गए तो कौन जिम्मेदार होगा?’ मेहता ने दावा किया था कि यादव की टिप्पणी ने सभी गुजरातियों की मानहानि की।

आखिर राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को ध्यान से क्यों सुन रहे थे पीएम मोदी?

हाल ही में राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को पीएम मोदी बड़े ध्यान से सुन रहे थे! राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का स्वागत किया, साथ ही इसकी कमियों को भी बताया। खरगे ने अपनी बात जब शुरू की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने मौजूद थे। जेपी नड्डा, पीयूष गोयल भी प्रधानमंत्री के साथ सदन में मौजूद थे। इस दौरान खरगे ने अपनी बात हिमांशु वाजपेयी की एक कविता से शुरू की। उन्होंने कहा, ‘न खाता न बही है, जो तुम बोले वही सही है। न्यूज एक छप रही है सब कुछ बिल्कुल सही है। सच पर FIR क्यों, राशन की मार क्यों, झूठ की जय जयकार क्यों, निष्ठुर है सरकार क्यों। मगर मेरे शहर के लोग देश के लोग ये सवाल मुझसे पूछ रहे हैं।’ खरगे ने अभिभाषण पर बोलते हुए कहा कि मैं यही पूछना चाहता हूं कि एक तरफ तो आप अपनी बातों को बहुत सी एडजेक्टिव्स लगाकर बोले। सही है कि हर सरकार अपनी बात को राष्ट्रपति के माध्यम से कहलाती है। लेकिन इस राष्ट्र के जो निर्माता हैं उनको कभी भी हमें नहीं भूलना चाहिए। समृद्धि की इस राह पर जाने के लिए सबको मिल के काम करना है। देश के लोगों को ऊपर लाने के लिए शिक्षा जरूरी है। उनका शिक्षित होना जरूरी है। जब तक वो शिक्षित नहीं होंगे तब तक उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शिक्षा पर खास प्राथमिकता दी। लोगों को शिक्षित करने के लिए योजनाएं तैयार की। स्कूल, कॉलेज, आईआईटी खोले। ये इंस्टीट्यूशन देश के लिए विजन बने।

खरगे ने आगे कहा कि टेक्निकल एजुकेशंस हों, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज हों, इसका लाभ सबको मिलना चाहिए। संविधान में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए भी रिजर्वेशन बनाया है। लेकिन इसमें आज ओबीसी के लिए 27 पर्सेंट रिजर्वेशन है, वो उनको मिलना चाहिए जो नहीं मिल रहा। कोई कारण लगा के वो घट जाते हैं। एससी-एसटी के साथ भी ऐसा है। उनको घटाने की कोशिश हो रही। कैसे इसमें कटौती की जाए ये किया जा रहा। कोई सरकार इसके लिए जांच नहीं करती, ये हमारे देश के लिए बड़ा नुकसान है। इन चीजों को मैं आपके सामने लाना चाहता हूं। ये समाज की मानसिकता है।

इस दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के एक मुख्यमंत्री के बयान का जिक्र राज्यसभा में किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के एक चीफ मिनिस्टर जो पहले कांग्रेस में थे अब वो बीजेपी के साथ हैं। उनका ये कमेंट एससी-एसटी से जुड़ा था, इस एक कमेंट का जिक्र उन्होंने सदन में उठाया जिस पर काफी विवाद हुआ है। खरगे ने फिर इस पर कहा कि हम इस मुद्दे को उठा रहे और प्रधानमंत्री से इस मामले में अपील करेंगे कि कार्रवाई करें। हालांकि सदन के सभापति जगदीप धनखड़ ने खरगे की इन बातों को कार्रवाई से अलग कर दिया।

खरगे ने प्राइवेट सेक्टर को जोर देने की सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने पब्लिक सेक्टर को और आगे बढ़ाने की अपील की। इसे खत्म नहीं करना चाहिए। पब्लिक सेक्टर्स गरीबों और देश के लिए अच्छा है। अग्निपथ योजना पर भी खरगे ने अपनी बात रखी। लोग ये समझे कि जैसा कि स्टाइपेंड के बाद लोग परमानेंट हो जाएंगे। लगा वो 4 साल बाद मिलिट्री में जाएंगे, लेकिन आज स्थिति क्या है आप 75 लोगों को बाहर कर रहे। 25 लोग ही लिए जा रहे। पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ मनोज नरवणे का जिक्र करते हुए खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नरवणे ने बताया कि अग्निपथ योजना सिर्फ आर्मी में आना था लेकिन सरकार इसे एयरफोर्स, नेवी के लिए भी ले आई। परेशान हैं अग्निवीर से जुड़े लोग। इस दौरान खरगे ने फिर कहा कि ‘अच्छे दिनों की आस लगाते हुए हबीब हम बेहतरीन दिन भी गंवाते चले गए।’ अग्निपथ में जवानों को चार साल बाद जाना पड़ रहा। महंगाई का मुद्दा भी मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाया। इस दौरान खरगे ने बिल्किस बानो का मुद्दा भी उठाया।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस सांसद डीके सुरेश के ‘अलग देश की मांग करने के लिए मजबूर’ बयान पर भी रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘अगर कोई देश को तोड़ने की बात करेगा, तो हम इसे कभी सहन नहीं करेंगे। चाहे वह किसी भी पार्टी का हो। मैं खुद कहूंगा कि कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक हम एक हैं और एक रहेंगे।’