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क्या था कांग्रेस सांसद डीके सुरेश का बयान जिसकी वज़ह से भिड़े नेता?

आज हम आपको बताएंगे कि कांग्रेस सांसद डीके सुरेश का वह कौन सा बयान था जिसकी वजह से राज्यसभा में नेता भिड़ गए! कांग्रेस सांसद डीके सुरेश की ओर से कथित तौर पर दक्षिणी राज्यों के लिए ‘अलग राष्ट्र’ की मांग का मुद्दा उठाया, जिस पर हंगामा बढ़ने लगा है। राज्यसभा में शुक्रवार को ये मुद्दा उठाया गया। सत्तापक्ष ने इस बयान को देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर हमला करार दिया। इस मामले पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर दी। कांग्रेस ने साफ किया कि पार्टी देश की अखंडता के प्रति समर्पित है और इस तरह के किसी भी कमेंट को बर्दाश्त नहीं करेगी। राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने शून्यकाल आरंभ होते ही इस मुद्दे को उठाया। जिस पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर कोई भी देश को तोड़ने की बात करेगा तो कांग्रेस पार्टी उसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और उसके बाद गोयल को बोलने का मौका दिया।

पीयूष गोयल ने कहा कि प्रमुख विपक्षी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और कांग्रेस शासित राज्य के एक उपमुख्यमंत्री के भाई ने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक कमेंट किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का वक्तव्य देने वाला कांग्रेस का सांसद भी है। इसका जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि जिस सांसद के वक्तव्य की बात की जा रही है वह दूसरे सदन लोकसभा के सदस्य हैं, लिहाजा इसकी चर्चा उच्च सदन में नहीं की जा सकती। सभापति धनखड़ ने खरगे की इस बात को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस प्रकार की व्यवस्था दी है कि सदन में ऐसे मामलों पर चर्चा की जा सकती है।कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार को कथित तौर पर कहा कि अगर विभिन्न टैक्स से एकत्रित धनराशि के वितरण के मामले में दक्षिणी राज्यों के साथ हो रहे ‘अन्याय’ को दूर नहीं किया गया तो ये सूबे एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

गोयल ने कहा कि यह कांग्रेस की विभाजनकारी सोच को दर्शाता है। कांग्रेस पर समय-समय पर देश को बांटने का आरोप लगाते हुए गोयल ने कहा कि ताजा प्रकरण इसका यह एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब हम सदन के सदस्य बनते हैं तब देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने की शपथ लेते हैं और संविधान के अनुपालन की शपथ लेते हैं। यह देश के संविधान का अपमान है। देश की एकता और अखंडता पर यह हमला है।’सदन के नेता ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस विभाजनकारी सोच को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। इसका जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि जिस सांसद के वक्तव्य की बात की जा रही है वह दूसरे सदन लोकसभा के सदस्य हैं, लिहाजा इसकी चर्चा उच्च सदन में नहीं की जा सकती। सभापति धनखड़ ने खरगे की इस बात को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस प्रकार की व्यवस्था दी है कि सदन में ऐसे मामलों पर चर्चा की जा सकती है।

 इस पर खरगे ने कहा कि अगर सदस्य ने ऐसा कुछ कहा है तो उसका वीडियो लाकर उसे निचले सदन में सत्तापक्ष की ओर से ‘एक्सपोज’ किया जा सकता है। सभापति ने इस पर टोकते हुए कहा कि सभी ने संविधान के अंतर्गत शपथ ली है और सांसद ने जो बयान दिया है, वह उनके हिसाब से बहुत गंभीर, अप्रत्याशित और संविधान की भावना के खिलाफ है। सदन चाहे तो इस मामले को विशेषाधिकार हनन समिति को भेजे और उस पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई देश को तोड़ने की बात करेगा तो हम कभी सहन नहीं करेंगे। एक उपमुख्यमंत्री के भाई ने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक कमेंट किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का वक्तव्य देने वाला कांग्रेस का सांसद भी है। कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार को कथित तौर पर कहा कि अगर विभिन्न टैक्स से एकत्रित धनराशि के वितरण के मामले में दक्षिणी राज्यों के साथ हो रहे ‘अन्याय’ को दूर नहीं किया गया तो ये सूबे एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।चाहे वह मेरी पार्टी का हो या किसी और पार्टी का हो। इस देश की एकता के लिए… कोई कहे या नहीं कहे… मैं मल्लिकार्जुन खरगे कहूंगा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत एक है और एक रहेगा।’ डीके सुरेश, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई हैं।

क्या अब भारत के खेमे में आएंगे एडवांस्ड ड्रोन?

आने वाले समय में भारत के खेमे में एडवांस्ड ड्रोन शामिल होने वाले हैं! अमेरिका से भारत को 31 MQ-9B ड्रोन मिलने को लेकर जो कंफ्यूजन दिख रहा था वह दूर हो गया है। अमेरिकी सरकार ने भारत को ड्रोन बेचने को मंजूरी दे दी है। अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने इससे जुड़ा सर्टिफिकेट जारी कर इसे अमेरिकी कांग्रेस को नोटिफाई भी कर दिया है। यह डील करीब 3.99 बिलियन डॉलर की होगी। MQ-9B हाई एल्टीट्यूट लॉग एंड्योरेंस आर्म्ड अनमैन्ड एरियल वीइकल है। यानी यह लंबे वक्त तक हवा में रह सकता है और बेहद ऊंचाई में काम कर सकता है और यह रिमोटली ऑपरेट होता है। अमेरिकी कांग्रेस अब इस प्रस्तावित बिक्री का रिव्यू करेगी और इसके लिए उसके पास 30 दिन का वक्त है। अमेरिकी कांग्रेस के रिव्यू के बाद अमेरिका और भारत के बीच यह डील की जाएगी। जब कॉन्ट्रैक्ट हो जाएगा उसके तीन साल बाद यूएवी की डिलीवरी शुरू होगी। भारत को मिलने वाले 31 ड्रोन आर्म्ड होंगे और डील में ड्रोन के अलावा 170 एजीएम-114R हेलिफायर मिसाइल, 16 M36E9 हेलिफायर कैपटिव एयर ट्रेनिंग मिसाइल, 310 GBU-39B लेजर स्मॉल डायामीटर बॉम्ब, 8 GBU-39B गाइडेड टेस्ट वीइकल और लाइव फ्यूज भी शामिल होंगे। पिछले साल जून में रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। अमेरिकी कंपनी जनरल अटॉमिक्स से 31 यूएवी लिए जाने हैं।जिससे भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इंडियन नेवी ने 2020 में जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था। इनमें से 15 सी-गार्डियन हैं जो इंडियन नेवी को मिलेंगे और 16 स्काई गार्डियन हैं।इंडियन ओशन रीजन यानी हिंद महासागर रीजन की जिम्मेदारी नेवी के पास है। भारत की साइज से करीब तीन गुना बढ़े हिंद महासागर रीजन पर निगरानी रखना एक चुनौती भरा टास्क है। क्योंकि ईस्ट कोस्ट से करीब 5000 किलोमीटर आगे तक तो वेस्ट कोस्ट से करीब 8000 किलोमीटर आगे तक की पूरी निगरानी करनी होती है। लगातार निगरानी नहीं रखी जाएगी तो पता नहीं चलेगा कि दुश्मन के शिप की क्या मूवमेंट है। अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। इन 16 में से 8 इंडियन आर्मी को मिलेंगे और 8 इंडियन एयरफोर्स को।जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था। G20 लीडरशिप समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी प्रेजिडेंट जो बाइडन के बीच हुई बातचीत में भी इस डील को लेकर चर्चा हुई थी।

ड्रोन भारत में ही असेंबल किए जाएंगे। ड्रोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल अटोमिक्स भारत में ग्लोबल मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरऑल फैसिलिटी भी बनाएगी। जिससे भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इंडियन नेवी ने 2020 में जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था।

इंडियन ओशन रीजन यानी हिंद महासागर रीजन की जिम्मेदारी नेवी के पास है। भारत की साइज से करीब तीन गुना बढ़े हिंद महासागर रीजन पर निगरानी रखना एक चुनौती भरा टास्क है। क्योंकि ईस्ट कोस्ट से करीब 5000 किलोमीटर आगे तक तो वेस्ट कोस्ट से करीब 8000 किलोमीटर आगे तक की पूरी निगरानी करनी होती है। लगातार निगरानी नहीं रखी जाएगी तो पता नहीं चलेगा कि दुश्मन के शिप की क्या मूवमेंट है। अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। अमेरिकी कंपनी जनरल अटॉमिक्स से 31 यूएवी लिए जाने हैं। इनमें से 15 सी-गार्डियन हैं जो इंडियन नेवी को मिलेंगे और 16 स्काई गार्डियन हैं। इन 16 में से 8 इंडियन आर्मी को मिलेंगे और 8 इंडियन एयरफोर्स को। G20 लीडरशिप समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी प्रेजिडेंट जो बाइडन के बीच हुई बातचीत में भी इस डील को लेकर चर्चा हुई थी।हिंद महासागर रीजन से ही भारत की ऊर्जा जरूरतों और कमर्शल सामान का ट्रांसपोर्ट होता है। दूसरे देशों की प्राइमरी एनर्जी की जरूरत यहीं से होकर जाती है। हिंद महासागर रीजन की निगरानी में नेवी को मिलने वाले नए 15 प्रीडेटर ड्रोन अहम होंगे।

क्या रिटायर्ड जजों के पक्ष में जाएंगे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया?

वर्तमान में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रिटायर्ड जजों के पक्ष में जा रहे हैं! क्या आप जानते हैं कि राज्यों के कंज्यूमर फोरम के प्रमुखों के पद खाली क्यों हैं। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने के पीछे बड़ी वजह क्या है। सरकार इन पदों को भर ही नहीं पा रही है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इन पदों पर नियुक्ति को लेकर होने प्रक्रिया पर टिप्पणियां की है। सीजेआई ने साफ तौर पर इन फोरम के प्रमुखों के चयन के लिए होने वाली लिखित परीक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को नसीहत भी दी है। चीफ जस्टिस का मानना है कि राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेलेक्शन के लिए लिखित परीक्षा, उसके बाद इंटरव्यू देना और परीक्षा और मौखिक परीक्षा दोनों में न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना संवैधानिक अदालत के जजों की गरिमा को गिराने जैसा है। जस्टिस चंद्रचूड़ इस बात से पूरी तरह सहमत दिखे कि हाई कोर्ट का जज किसी भी मामले में हर मुद्दे और यहां तक कि शीर्ष नौकरशाहों की भी जांच कर सकते हैं लेकिन वे इस पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू देना ही नहीं चाहते हैं। सीजेआई का कहना है कि जजों की योग्यता को आंकना है तो इस बात को उसकी तरफ से दिए गए फैसलों से करनी चाहिए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को परीक्षाओं में बैठाना अशोभनीय है। अधिकांश सक्षम रिटायर्ड जज इस परीक्षा के खिलाफ हैं।उनकी क्षमता पर मौजूदा जज के रूप में उनकी तरफ से दिए गए निर्णयों के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि रिटायर्ड जिला जज भी ऐसी सेलेक्शन प्रक्रिया से गुजरने के लिए अनिच्छुक हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सीजेआई से सहमत थे, लेकिन बताया कि सरकार ने सेलेक्शन नियमों में संशोधन करके एससीडीआरसी अध्यक्ष बनने के लिए रिटायर्ड जजों को लिखित परीक्षा-मौखिक चयन प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण भेजा गया था। चीफ जस्टिस अयोध्या पर शीर्ष अदालत की फैसला सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रहे थे। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम चल रहा है। इधर, चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ अपने काम में लगे हुए हैं। दरअसल, आज अदालत में छुट्टी नहीं है और चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।मेहता ने कहा कि यह संशोधन था मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने योग्यता परीक्षा के प्रावधान को रद्द कर दिया।

100 अंकों के दो पेपर, सामान्य ज्ञान, संवैधानिक कानून और उपभोक्ता कानूनों में रिटायर्ड जजों की क्षमता, व्यापार और वाणिज्य के साथ-साथ उपभोक्ता-संबंधी मुद्दों या सार्वजनिक मामलों पर निबंध लिखने की उनकी क्षमता का परीक्षण करने के लिए थे। इसके साथ ही विश्लेषण और प्रारूपण में उसकी क्षमताओं को निर्धारित करने के लिए एक केस स्टडी लिखनी होती है। दो जजों की पीठ ने यह भी कहा था कि प्रत्येक पेपर में क्वालिफाई करने के लिए 50% अंक होंगे। साथ ही 50 अंकों की ओरल परीक्षा होगी। यही नहीं आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण भेजा गया था। चीफ जस्टिस अयोध्या पर शीर्ष अदालत की फैसला सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रहे थे। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम चल रहा है। इधर, चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ अपने काम में लगे हुए हैं। दरअसल, आज अदालत में छुट्टी नहीं है और चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था। फैसला देने वाली पांच जजों की संविधान पीठ में उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। इस बात से पूरी तरह सहमत दिखे कि हाई कोर्ट का जज किसी भी मामले में हर मुद्दे और यहां तक कि शीर्ष नौकरशाहों की भी जांच कर सकते हैं लेकिन वे इस पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू देना ही नहीं चाहते हैं। सीजेआई का कहना है कि जजों की योग्यता को आंकना है तो इस बात को उसकी तरफ से दिए गए फैसलों से करनी चाहिए।राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से इन सभी जजों को प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला था।

क्या भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान को दिलवा पाएगी सबक?

भारतीय वायु सेना अब चीन और पाकिस्तान को सबक दिलवा सकती है! भारतीय वायु सेना अपना सबसे बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रही है। इंडियन एयरफोर्स का अभ्यास वायुशक्ति-2024 17 फरवरी को पोखरण फायरिंग रेंज में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में 121 प्रकार के विमान भाग लेंगे। भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता के इस भव्य प्रदर्शन की जाएगी। इस दौरान देश की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास के जरिये चीन और पाकिस्तान को भी अपनी ताकत का अहसास कराएगी। इस अभ्यास की घोषणा करते हुए, IAF के उप-प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना के तेजस, सुखोई, मिराज, जगुआर जैसे लड़ाकू विमान भाग लेंगे। इसके अलावा राफेल, प्रचंड, ध्रुव और रुद्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि हमेशा की तरह, वायु शक्ति दिन और रात में भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का एक दिलचस्प प्रदर्शन होगा। यह अभ्यास भारतीय सेना के साथ संयुक्त अभियानों का भी प्रदर्शन करेगा।

सिंह ने कहा कि हर तीन साल में आयोजित होने वाले इस अभ्यास में 77 लड़ाकू विमान, 41 हेलीकॉप्टर, 5 परिवहन विमान, तीन प्रकार की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 12 यूएवी, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें आदि शामिल हैं। सटीक और गैर-सटीक मिसाइलें, हवा से हवा में मार करने वाली गाइडेड मिसाइलें और सतह से हवा में मार करने वाली गाइडेड मिसाइलें भी प्रदर्शित की जाएंगी। इस एक्सरसाइज के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल 14 फरवरी को होगी। वायु शक्ति एक्सरसाइज कई हवाई अड्डों से संचालन करते हुए लंबी दूरी, सटीक क्षमता के साथ-साथ पारंपरिक हथियारों को सटीक, समय पर और विनाशकारी प्रभाव से वितरित करने की भारतीय वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन होगा। भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर बेड़े की तरफ से विशेष अभियान, जिसमें गरुड़ और भारतीय सेना के तत्व भी शामिल होंगे, अपनी काबिलियत दिखाएंगे।

इस युद्धाभ्यास के जरिये चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर युद्ध के लिए भारतीय वायुसेना की तत्परता की तैयारी भी दिखेगी। आईएएफ के उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने एक्सरसाइज पर ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अभ्यास के दौरान दो घंटे की अवधि में, वायुसेना एक से दो किलोमीटर के दायरे में 40 से 50 टन विस्फोटक गिराएंगे।एयरफोर्स बड़े हमलों से लेकर हवाई प्रभुत्व के छोटे और गहन युद्ध की तैयारी में हर युद्धा कौशल का प्रदर्शन करेगी। भारत के इस युद्धाभ्यास पर चीन के साथ ही पाकिस्तान की भी नजर होगी। वायु शक्ति का अंतिम आयोजन फरवरी 2019 में पोखरण में हुआ था। उस समय लड़ाकू विमानों ने विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, सटीक-निर्देशित युद्ध सामग्री, बम और रॉकेटों के साथ गोला-बारूद के ढेर, पुलों और कमांड पोस्टों सहित नकली दुश्मन साइटों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर बेड़े की तरफ से विशेष अभियान, जिसमें गरुड़ और भारतीय सेना के तत्व भी शामिल होंगे, अपनी काबिलियत दिखाएंगे। इसमें भारतीय वायुसेना की जबरदस्त मारक क्षमता के साथ ही तेजी और सटीकता का प्रदर्शन हुआ।

बता दे कि हाइपरसोनिक मिसाइलों में हाई पावर्ड एयर ब्रीथिंग इंजन काम करता है। इसकी हाइपरसोनिक गति से युद्धाभ्यास वाले हथियारों को लॉन्च करने की क्षमता किसी भी सेना की ताकत को बढ़ा देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह वर्तमान में उपयोग में आने वाली किसी भी वायु रक्षा प्रणाली से बच सकती है। हाइपरसोनिक मिसाइलें रूस और चीन के जखीरे में अपनी ताकत दिखाने के नए घातक हथियार हैं। इसके अलावा राफेल, प्रचंड, ध्रुव और रुद्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि हमेशा की तरह, वायु शक्ति दिन और रात में भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का एक दिलचस्प प्रदर्शन होगा। भारत के इस युद्धाभ्यास पर चीन के साथ ही पाकिस्तान की भी नजर होगी। वायु शक्ति का अंतिम आयोजन फरवरी 2019 में पोखरण में हुआ था। उस समय लड़ाकू विमानों ने विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, सटीक-निर्देशित युद्ध सामग्री, बम और रॉकेटों के साथ गोला-बारूद के ढेर, पुलों और कमांड पोस्टों सहित नकली दुश्मन साइटों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया। इसमें भारतीय वायुसेना की जबरदस्त मारक क्षमता के साथ ही तेजी और सटीकता का प्रदर्शन हुआ।यह अभ्यास भारतीय सेना के साथ संयुक्त अभियानों का भी प्रदर्शन करेगा।हालांकि यूक्रेन-रूस युद्ध ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें अजेय हैं। चीन और रूस दावा करते रहे हैं लेकिन अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान का मानना है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें कोई हथियार नहीं हो सकते हैं।

क्या अब टूट जाएगी विपक्षी एकता?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब विपक्षी एकता टूट जाएगी या नहीं! देश में लोकसभा चुनाव में अधिक समय नहीं रहा गया है। केंद्र सरकार की तरफ से अंतरिम बजट आ चुका है। अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम भी खत्म हो चुका है। अब इंतजार है लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा का। दूसरी तरफ सत्ता की हैटट्रिक लगाने की तैयारी में लगी बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन के सामने मुकाबला कितना कड़ा है? विपक्षी दलों की तरफ से मोदी को कितनी मजबूत टक्कर मिलेगी। चुनाव से पहले इंडिया में मची उथल-पुथल के बाद यह सवाल मौजू है। विपक्षी दलों की तरफ से केंद्र के अंतरिम बजट पर पहली बार एक सुर में होने के बावजूद विपक्ष पूरी तरह बिखरा नजर आ रहा है। 28 दलों वाले इंडिया गठबंधन में चुनाव से पहले साथियों के छिटकने का सिलसिला शुरू हो चुका है। पिछले साल दिसंबर से ही कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों में सीटों के बंटवारें पर सहमति को लेकर बातचीत चल रही है। करीब 50 दिन बीतने के बाद भी अभी तक ठोस रूप से कुछ भी जनता के सामने नहीं आया है। वहीं, इंडिया गठबंधन के संयोजक की रेस में शामिल रहे प्रमुख चेहरे और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं। इससे एनडीए को कितनी मजबूती मिलेगी इस सवाल से कही अधिक अहम है कि इंडिया गठबंधन को कितनी बड़ी चोट पहुंची हैं। कांग्रेस भले ही इसके असर को कमतर करके आंक रही हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मोदी के खिलाफ लड़ाई में बड़ा झटका मान रहे हैं।

इंडिया गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ा दल है। ऐसे में गठबंधन का हिस्सेदार 28 दलों के बीच उसकी जिम्मेदारी काफी अहम है। कांग्रेस के सामने दिल्ली, पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल में दुविधा की स्थिति है। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की क्षेत्रीय इकाइयां गठबंधन पर मानसिक रूप से तैयार ही नहीं हो पा रही हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की तरफ से सभी सीटों पर चुनाव लड़ने तक की बात भी कह दी गई। वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी एकला लड़ो की बात कह चुकी हैं। अभी ये दो दलों की तरफ से असहमति के सुर निकल ही रहे थे कि इंडिया गठबंधन के लिए महाराष्ट्र से भी अच्छी खबर नहीं आ रही है। महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी में शामिल प्रकाश अंबेडकर ने साफ कह दिया है कि इंडिया गठबंधन लगभग खत्म हो चुका है। प्रकाश का कहना है कि राज्य में सीटों के बंटवारे पर शिवसेना और एनसीपी से बातचीत हो रही है। कांग्रेस से कोई बातचीत ही नहीं है।

बीजेपी की स्थिति इस समय समुद्र में एक बड़े जहाज के रूप में दिख रही है। मोदी सरकार किसान सम्मान निधि, मुफ्त अनाज योजना, पीएम आवास योजना, मुद्रा लोन जैसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं के साथ मजबूती से ताल ठोक रही है। वहीं, बिहार जैसे बड़े राज्य में इंडिया गठबंधन पूरी तरह से बिखरा नजर आ रहा है। नीतीश कुमार खुद इस बात को कह चुके हैं कि इंडिया गठबंधन बिल्कुल स्लो चल रहा है। कांग्रेस भले ही यह कह रही हो कि इंडिया गठबंधन को मकसद मोदी को सत्ता से हटाना है लेकिन जमीनी स्तर पर यह दूर की कौड़ी नजर आ रही है। विपक्ष महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को अभी तक घेरने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। इंडिया गठबंधन की तरफ से अभी तक संयुक्त रैली या प्रचार अभियान को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। करीब 50 दिन बीतने के बाद भी अभी तक ठोस रूप से कुछ भी जनता के सामने नहीं आया है। वहीं, इंडिया गठबंधन के संयोजक की रेस में शामिल रहे प्रमुख चेहरे और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं। इससे एनडीए को कितनी मजबूती मिलेगी इस सवाल से कही अधिक अहम है कि इंडिया गठबंधन को कितनी बड़ी चोट पहुंची हैं। कांग्रेस भले ही इसके असर को कमतर करके आंक रही हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मोदी के खिलाफ लड़ाई में बड़ा झटका मान रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जहां तक आम चुनाव में लोगों के बीच प्रमुख मुद्दे और परेसप्शन की लड़ाई है इसमें कांग्रेस नीत इंडिया गठबंधन पूरी तरह से पिछड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में इंडिया गठबंधन मोदी से मुकाबला कैसे कर पाएगा ये तो आने वाला समय ही तय करेगा।

क्या राजस्थान से भी राज्यसभा में जा सकती है सोनिया गांधी?

सोनिया गांधी अब राजस्थान से भी राज्यसभा में एंट्री ले सकती हैं! सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी का नाम इस लिस्ट में सबसे आगे चल रहा है। पार्टी राजनीतिक समीकरण के आधार पर तय करने में जुटी है कि सोनिया गांधी को हिमाचल प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाए या फिर राजस्थान से। यूपी की रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी को उतारने की तैयारी चल रही है! राजस्थान में तीन सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा और कांग्रेस जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां भाजपा की तरफ से हाईकमान फैसला करेगा। वहीं इस बार कांग्रेस की तरफ से भी एक नाम सबको चौंका सकता है। ऐसी चर्चा है कि पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी की उम्मीदवार बन सकती हैं या उनके अलावा कोई दिग्गज नेता राजस्थान से उच्च सदन में जाएगा। दरअसल, राजस्थान से बतौर राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने फिर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने की इच्छा कांग्रेस नेतृत्व के सामने जता दी है। खाली हो रही एक सीट पर पार्टी किसी दिग्गज नेता को उच्च सदन भेजने पर विचार कर रही है।  

सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी का नाम इस लिस्ट में सबसे आगे चल रहा है। पार्टी राजनीतिक समीकरण के आधार पर तय करने में जुटी है कि सोनिया गांधी को हिमाचल प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाए या फिर राजस्थान से। यूपी की रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी को उतारने की तैयारी चल रही है। पार्टी की सोनिया गांधी के स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने के बजाय राज्यसभा चुनाव के जरिए सांसद बनाए रखने की इच्छा जताई है।

इधर, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हाल ही सोनिया गांधी को लेकर बयान दिया कि वे तेलंगाना से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। उनके अलावा कोई दिग्गज नेता राजस्थान से उच्च सदन में जाएगा। दरअसल, राजस्थान से बतौर राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने फिर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने की इच्छा कांग्रेस नेतृत्व के सामने जता दी है। खाली हो रही एक सीट पर पार्टी किसी दिग्गज नेता को उच्च सदन भेजने पर विचार कर रही है।  साथ ही, रेड्डी के इस बयान से पहले तेलंगाना कांग्रेस कमेटी ने भी सोनिया गांधी से तेलंगाना से लोकसभा चुनाव लड़ने का आग्रह किया था।

पार्टी सोनिया के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन को भी राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है। माकन साल 2022 में राज्यसभा चुनाव में हरियाणा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे थे, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। माकन के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अच्छे संबंध रहे हैं, हालांकि नवंबर 2022 की विधायक दल की बैठक नहीं होने देने की घटना के बाद जरूर उनके संबंधों में कुछ खटास की खबरें आई थीं। सूत्रों के अनुसार अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ही लेगा, जो भी नाम तय करेगा, उसे लेकर अशोक गहलोत से जरूर चर्चा करेगा। राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रभावशाली नेता के हाथ ही फ्लोर मैनेजमेंट दिया जाएगा, ताकि क्रॉस वोटिंग नहीं हो।

भाजपा में भी भूपेंद्र यादव का कार्यकाल पूरा होने से सीट खाली होने जा रही है। किरोड़ी लाल मीणा के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद एक सीट पहले से खाली हो चुकी है। भाजपा में चौंकाने वाला नाम राजेंद्र राठौड़ का हो सकता है। हालांकि, संघ की ओर से सतीश पूनिया का नाम सुझाया गया है। वहीं, पार्टी की राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली की सह-प्रभारी अल्का गुर्जर के नाम की भी चर्चा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार भूपेंद्र यादव को अलवर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए जाने पर विचार चल रहा है।बता दें कि अशोक गहलोत से अच्छे संबंध रहे हैं, हालांकि नवंबर 2022 की विधायक दल की बैठक नहीं होने देने की घटना के बाद जरूर उनके संबंधों में कुछ खटास की खबरें आई थीं। सूत्रों के अनुसार अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ही लेगा, जो भी नाम तय करेगा, उसे लेकर अशोक गहलोत से जरूर चर्चा करेगा। राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रभावशाली नेता के हाथ ही फ्लोर मैनेजमेंट दिया जाएगा, ताकि क्रॉस वोटिंग नहीं हो। यादव वहां के सामाजिक समीकरण में भी फिट बैठते हैं। बाबा बालकनाथ के विधानसभा चुनाव लड़ने के कारण लोकसभा सीट खाली है।

आखिर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से कैसे बचा जाए?

आज हम आपको बताएंगे कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से कैसे बचा जा सकता है! कैंसर, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज का अनुमान है कि 2017 में कैंसर के कारण 9.56 मिलियन, 95.6 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो गई। दुनिया में हर छठी मौत कैंसर के कारण होती है। मेडिकल क्षेत्र में आधुनिकता और तकनीक विकास के चलते कैंसर अब लाइलाज बीमारी तो नहीं रही है, पर अब भी आम लोगों के लिए इसका इलाज काफी कठिन बना हुआ है। दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

कैंसर विश्वभर में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। शरीर के किसी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि और इसका अनियंत्रित रूप से विभाजन कैंसर का कारक हो सकती है। बता दें कि कैंसर, कोशिकाओं के भीतर डीएनए में उत्परिवर्तन के कारण होता है, इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जीवनशैली की कुछ गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब का सेवन, सूरज के अत्यधिक संपर्क में रहना, मोटापा और असुरक्षित यौन संबंध कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। आनुवांशिकी भी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर रह चुका है, उनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है।  आनुवांशिकता, पर्यावरणीय, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, रसायनों के अधिक संपर्क के कारण कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर जबकि पुरुषों में फेफड़े-प्रोस्टेट और कोलन कैंसर का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है।

कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह शरीर के किस हिस्से में विकसित हो रहा है। मुख्यरूप से कैंसर के कारण थकान, अस्पष्टीकृत वजन कम होने की समस्या, त्वचा में परिवर्तन जैसे त्वचा का पीला या काला पड़ना, निगलने में कठिनाई, अस्पष्टीकृत रक्तस्राव की समस्या कैंसर का संकेत हो सकती है। अगर आपके शरीर में कहीं भी असामान्य तरीके से गांठ महसूस हो रही है तो इसकी समय रहते जांच जरूर कराएं। कैंसर, करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।कोशिकाओं के भीतर डीएनए में उत्परिवर्तन के कारण होता है, इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जीवनशैली की कुछ गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब का सेवन, सूरज के अत्यधिक संपर्क में रहना, मोटापा और असुरक्षित यौन संबंध कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। आनुवांशिकी भी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर रह चुका है, उनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय पर अगर कैंसर का निदान हो जाए तो इसका उपचार और रोगी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर के कई उपचार उपलब्ध हैं। कैंसर का प्रकार और अवस्था जैसी स्थितियों के आधार पर दवाओं, थेरेपी, सर्जरी के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है। वर्तमान में इसका इलाज काफी कठिन बना हुआ है। दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर कहते हैं, सभी लोगों को कैंसर से बचाव को लेकर लगातार सावधानी बरतते रहना चाहिए। लाइफस्टाइल और आहार को पौष्टिक रखने के साथ शराब-धूम्रपान को छोड़कर कैंसर के खतरे से बचाव किया जा सकता है।

आखिर कौन है चंपई सोरेन? जिन्हें बनाया गया है झारखंड का नया मुख्यमंत्री!

आज हम आपको चंपई सोरेन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें झारखंड का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है ! चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ले ली है। हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई मुख्यमंत्री बने हैं। चंपई के साथ दो और मंत्रियों ने भी शपथ ली है। चंपई हेमंत सोरेन के करीबी बताए जाते हैं। हेमंत सरकार में चंपई कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरकार में झामुमो के अलावा कांग्रेस, राजद भी सहयोगी हैं।  चंपई सोरेन के अलावा कांग्रेस पार्टी के आलमगीर आलम ने मंत्री के रूप में शपथ ली। आलमगीर आलम पाकुड़ सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। 70 साल के आलमगीर ने स्नातक की शिक्षा हासिल की है। उन्होंने 2019 में अपनी संपत्ति ₹7.02 करोड़ बताई थी। कांग्रेस नेता ने राजनीति और समाज सेवा से होने वाली आमदनी को अपनी कमाई का जरिया बताया है।

राजद के नेता सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली। सत्यानंद चतरा सीट से राजद के विधायक हैं। वे झारखंड सरकार में राज्य के कृषि मंत्री थे। वहीं पिछली सरकार में श्रम मंत्री थे। 53 वर्षीय सत्यानंद ने 10वीं तक ही पढ़ाई की है। उन्होंने 2019 में अपनी संपत्ति ₹77.58 लाख बताई थी। राजद नेता को राजनीति और समाज सेवा से आमदनी होती है। चंपई सोरेन झारखंड विधानसभा के सदस्य हैं। वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा झामुमो और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।चंपई ने 1974 में जमशेदपुर स्थित राम कृष्ण मिशन हाई स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की थी।

जब बिहार से अलग झारखंड राज्य की मांग उठ रही थी उस दौरान चंपई का नाम खूब चर्चा में रहा। शिबू सोरेन के साथ ही चंपई ने भी झारखंड के आंदोलन में भाग लिया। इसके बाद ही लोग उन्हें ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से बुलाने लगे। चंपई संयुक्त बिहार में 1991 में उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे। सोरेन परिवार के बाहर जिन नामों पर चर्चा चल रही थी उनमें हेमंत सरकार के मंत्री का नाम सबसे आगे था। इनमें परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम सबसे आगे रहा है। वह हेमंत सोरेन के सबसे खास लोगों में शामिल हैं। चंपई ने शिबू सोरेन के साथ लंबे समय तक काम किया है।के.सी.मार्डी के इस्तीफा के बाद चंपई ने बतौर निर्दलीय चुनाव जीता था। फिर 1995 में झामुमो के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

वहीं 2005 में चंपई झारखंड विधानसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2009 में भी विधायक बने। उन्होंने अर्जुन मुंडा वाली सरकार में सितंबर 2010 से जनवरी 2013 तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, श्रम और आवास मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वहीं जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन कैबिनेट मंत्री थे। 2014 में फिर झारखंड विधानसभा के लिए चुने गए। वहीं 2019 में भी विधायक बने। इसके साथ ही वह हेमंत सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बन गए। 2019 में चंपई ने अपनी संपत्ति 2.55 करोड़ बताई थी।

अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा झामुमो और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।चंपई ने 1974 में जमशेदपुर स्थित राम कृष्ण मिशन हाई स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की थी। इससे पहले सोरेन परिवार के बाहर जिन नामों पर चर्चा चल रही थी उनमें हेमंत सरकार के मंत्री का नाम सबसे आगे था। इनमें परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम सबसे आगे रहा है। वह हेमंत सोरेन के सबसे खास लोगों में शामिल हैं। चंपई ने शिबू सोरेन के साथ लंबे समय तक काम किया है।

आखिर अब paytm का क्या होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि अब paytm का क्या होगा! ऑनलाइन पेमेंट ऐप पेटीएम को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम पेमेंट बैंक पर कार्रवाई कारते हुए बड़ा झटका दिया. जिसके बाद पेटीएम पेमेंट बैंक की कई सेवाओं पर रोक लगा दी जा चुकी है. आरबीआई ने टॉप अप से लेकर क्रेडिट ट्रांजैक्शन तक की कई सेवाओं को 29 फरवरी के बाद रोक लगाने का आदेश सुनाया. कंफ्यूजन हैं. क्या पेटीएम बंद हो जाएगा? पेटीएम का फास्टैग का क्या होगा? बता दे कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों की अनदेखी की. जिसके बाद उसके खिलाफ सख्त फैसला लिया गया.

आरबीआई की ये कार्रवाई पेटीएम ऐप पर नहीं पेटीएम पेमेंट बैंक पर हुआ है. यानी यदि आप पेटीएम ऐप का इस्तेमाल करते हैं और वह पेटीएम पेमेंट बैंक से सर्विस नहीं ले रहे हैं. तो एप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 29 फरवरी के बाद भी आपका पेटीएम ऐप पहले के जैसे ही काम करता रहेगा. 29 फरवरी के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक के वॉलेट में बचे बैलेंस के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए तय सीमा से पहले वॉलेट के बैलेंस को ट्रांसफर कर लें.

पेटीएम पेमेंट बैंक पर आरबीआई ने एक्शन लिया है. केवल इसी से जुड़ी सेवाएं प्रभावित होगी. पेटीएम पेमेंट बैंक से UPI का उपयोग 29 फरवरी के बाद नहीं कर पाएंगे. लेकिन आप चाहे तो भुगतान के लिए अन्य बैंकों की यूपीआई आईडी का इस्तेमाल कर सकते हैं. आरबीआई की कार्रवाई के बाद पेटीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस कार्रवाई का एनसीएमसी कार्ड पर प्रभाव नहीं पड़ेगा. कार्ड के बैलेंस का आप बाद में भी इस्तेमाल कर पाएंगे. पेटीएम अन्य बैंकों के साथ भुगतान की सुविधा के लिए सम्पर्क कर रहा है. पेटीएम फास्टैग का इस्तेमाल 29 फरवरी तक कर सकते हैं. इसके बाद वो निष्क्रिय हो जाएगा. फास्टैग सर्विस जारी रखने के लिए पेटीएम दूसरे बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है. यदि बैंकों के साथ डील नहीं हो पाती है तो दूसरा नया फास्टैग खरीदना पड़ सकता है.

यदि आपने पेटीएम पेमेंट बैंक से लोन लिया है तो लोन का रीपेमेंट पहले के जैसे ही रहेगा. इसके लिए पहले के जैसे ही किस्तों का भुगतान होगा. पेटीएम की प्रमोटर कंपनी वन97 कम्युनिकेशन अन्य बैंकों के साथ भी काम करते आई है. पेटीएम पेमेंट बैंक पर हुए एक्शन के बाद उन्होंने अन्य बैंकों के साथ काम करना तेज कर दिया है. कंपनी थर्ड पार्टी बैंकों के साथ पहले के जैसे ही काम करेगी. बता दे कि वन97 कम्युनिकेशंस की सहयोगी कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का अगर आप इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके काम की है। आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक की कुछ सेवाओं पर रोक लगाई है। हालांकि कस्टमर को ट्रांसफर और विड्रॉल की अनुमति होगी। यहां हम आपको बताते जा रहे हैं कि पेटीएम के खिलाफ आरबीआई के इस कदम का यूजर्स पर क्या असर पड़ने वाला है। पेटीएम में क्या चलेगा और क्या नहीं चलेगा यहां हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे है, जिससे आपको किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। पेटीएम के मुताबिक, कंपनी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से फाइनेंशियल सर्विसेज को लेकर निर्देश मिले हैं। वह आरबीआई की ओर से मिले निर्देशों का पालन करने के लिए तुरंत कदम उठा रही है, जिससे पेटीएम का इस्तेमाल कर रहे ग्राहकों को कोई समस्या न हो।

आरबीआई के एक्शन से उन यूजर्स को परेशानी हो सकती है जिन्होंने अपने पेटीएम पेमेंट्स बैंक अकाउंट को यूपीआई से लिंक किया है। अगर आपका यूपीआई एड्रेस एसबीआई या आईसीआईसीआई जैसे किसी दूसरे बैंक अकाउंट के साथ लिंक है तो आरबीआई के एक्शन से आप पर कोई असर नहीं होगा। जो दुकानदार अपने पेटीएम पेमेंट्स बैंक अकाउंट में पैसा रिसीव करते हैं, वे पेमेंट रिसीव नहीं कर पाएंगे। पेटीएम फास्टैग यूजर्स को दूसरे इश्यूर से नया टैग खरीदना होगा और अभी जिसका इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे डिएक्टिवेट करना होगा। पेटीएम के जरिए लोन लेने वालों को लगागार रिपेमेंट करते रहना होगा क्योंकि यह लोग थर्ड-पार्टी लेंडर का है, पेटीएम का नहीं।

पेटीएम पर जो बैन लगा है वो पेटीएम पेमेंट्स बैंक की सर्विसेस पर है, ना कि पेटीएम ऐप पर। इसका मतलब है कि पेटीएम ऐप के यूजर्स पहले की तरह ऐप की सर्विसेस का इस्तेमाल कर सकेंगे। पेटीएम के मुताबिक, कंपनी आरबीआई के निर्देशों का पालन करने के लिए तत्काल कदम उठा रही है। कंपनी ने बताया कि इससे यूजर्स के बचत खातों, वॉलेट, फास्टैग और एनसीएमसी खातों में जमा राशि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं कस्टमर यहां पर उपलब्ध अपने बैलेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। बताया कि पेटीएम पेमेंट कंपनी के रूप में कई बैंकों के साथ काम कर रही है।

आखिर बीजेपी और कांग्रेस की किस यात्रा का पड़ेगा लोकसभा चुनाव पर प्रभाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि बीजेपी और कांग्रेस की यात्रा का लोकसभा चुनाव पर कैसा प्रभाव पड़ेगा! इस समय देश में दो यात्राएं चल रही हैं.एक राहुल गांधी की ”भारत जोड़ो न्याय यात्रा” और दूसरी ”विकसित भारत संकल्प यात्रा”.राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी 2024 को मणिपुर से शुरू हुई और 20 मार्च 2024 को मुंबई में समाप्त होगी. जबकि विकसित भारत संकल्प यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को झारखंड के खूंटी में शुरू किया था.यह यात्रा 26 जनवरी 2024 को समाप्त होने वाली थी लेकिन लक्ष्य पूरा न होने के चलते इसे आगे ब़ढ़ा दिया गया है.अब यह यात्रा लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगी. इस यात्रा के तहत 2 लाख पचास हजार 362 आयोजन होने थे लेकिन 22 जनवरी 2024 तक 2 लाख 44 हजार 652 आयोजन ही हो सके.अब यह यात्रा तब तक चलेगी जब तक पूरे दो लाख पचास हजार 362 आयोजन नहीं हो जाते! इन दोनों यात्राओं में एक यात्रा राहुल गांधी वाली की तो खूब चर्चा हो रही है लेकिन दूसरी वाली विकसित भारत की बिल्कुल भी नहीं हो रही है.अब आप कह सकते हैं कि चूंकि राहुल गांधी की यात्रा राजनैतिक है और उसे कांग्रेस पार्टी आयोजित कर रही है इसलिए उसकी चर्चा हो रही है जबकि विकसित भारत संकल्प यात्रा सरकारी है, इसलिए उसकी चर्चा नहीं हो रही.लेकिन यह सच नहीं है.इन दोनों ही यात्राओं का मकसद राजनीतिक ही है.

आप याद करिये जब प्रधानमंत्री ने यह यात्रा शुरू की थी तब कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था. कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में सरकारी अफसरों को लगा दिया है. इस यात्रा का मकसद मोदी सरकार की योजनाओं को लोगों को बताना और इस बात की गारंटी करना कि इन योजनाओं का लाभ इन श्रेणी में आने वाले लोगों को मिले. इन योजनाओं में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जवाहर आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, पोषण अभियान, हर घर जल, जल जीवन मिशन, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना प्रमुख हैं. इस योजना के राजनैतिक होने का एक दूसरा उदाहरण भी दिया जा सकता है.

अभी पीछे जब पांच राज्यों के चुनाव हुए तो कांग्रेस ने विकसित भारत संकल्प यात्रा की शिकायत की. उसका कहना था कि इससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है. तब चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों में इस यात्रा पर रोक लगा दी थी. वैसे भी अधिकारी इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी सुविधा के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं की मदद लेते हैं.

तो आपने देखा कि इन दोनों ही यात्राओं का मकसद राजनैतिक ही है.अब अगर एक की चर्चा हो रही है और दूसरे की नहीं तो इसकी वजह भी है.राहुल गांधी की यात्रा जहां लोगों को आकर्षित कर रही है वहीं विकसित भारत संकल्प यात्रा में लोग बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे.भाजपा शासित राज्यों में तो इस यात्रा का थोड़ा असर दिख भी रहा है लेकिन जिन राज्यों में विपक्षी सरकारें हैं वहां तो यह यात्रा बिल्कुल लोट गई है.

उदाहरण के लिए ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल की सरकार है. वह सरकार विभिन्न मुद्दों पर केंद्र में मोदी सरकार का समर्थन भी करती है. इस तरह नवीन पटनायक को मोदी के सहयोगी के तौर पर मान सकते हैं. बावजूद इसके वहां विकसित भारत संकल्प यात्रा में महज पांच प्रतिशत लोगों ने दिलचस्पी दिखाई. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. वहां छह प्रतिशत लोगों ने रुचि ली तो पंजाब में आप की सरकार के लोगों ने भी इतनी ही दिलचस्पी दिखाई. बिहार में सात प्रतिशत तो तमिलनाडु और तेलंगाना में आठ प्रतिशत लोगों ने रुचि दिखाई. हां, बीजेपी शासित राज्यों में जरूर इस यात्रा का असर दिखा. वह भी उतना ज्यादा नहीं. बीजेपी को उन राज्यों में जितना वोट मिलता है उससे भी कम लोगों ने इस यात्रा में उत्साह दिखाया. हरियाणा में प्रति ग्राम पंचायत इस यात्रा में 33 प्रतिशत लोगों ने शिरकत की तो गुजरात में 35 प्रतिशत. उत्तर प्रदेश में 38 प्रतिशत तो मध्य प्रदेश में 47 प्रतिशत. राजस्थान में इस यात्रा को सबसे ज्यादा रिस्पांस मिला. वहां इस यात्रा को 68 प्रतिशत लोगों ने समर्थन दिया.

इसके विपरीत असम में इस यात्रा की स्थिति विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों जैसी दिखी. वहां महज पांच प्रतिशत लोगों ने इस यात्रा में दिलचस्पी दिखाई.आपने देखा कि जब राहुल गांधी असम पहुंचे तो वहां उनकी यात्रा में शामिल होने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. यहां तक कि वहां की सरकार ने जब राहुल गांधी को एक स्कूल के छात्रों से मिलने की इजाजत नहीं दी तो छात्र खुद क्लास छोड़कर उनसे मिलने सड़क पर आ गये. यह स्थिति निश्चित ही मोदी सरकार और भाजपा के लिए चिंतनीय है खासकर तब जब 2024 के आम चुनाव काफी नजदीक आ गये हैं.