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भारत के पड़ोसियों को विदेश मंत्री ने क्या दी नसीहत?

हाल ही में विदेश मंत्री ने भारत के पड़ोसियों को एक नसीहत दे दी है! यह स्वीकार करना जरूरी है कि चीन भारत के पड़ोसी देशों को प्रभावित करेगा और भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति से नहीं डरना चाहिए। यह कहना है विदेश मंत्री एस. जयशंकर का। मंगलवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई में छात्रों के साथ संवाद सत्र में मालदीव से तनावपूर्ण संबंधों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर पड़ोसी देश में समस्याएं हैं, लेकिन अंततः पड़ोसियों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा है, लेकिन इसे भारतीय कूटनीति की विफलता कहना गलत होगा। उन्होंने कहा, ‘हमें समझना चाहिए, चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में, प्रतिस्पर्धी राजनीति के तहत इन देशों को प्रभावित करेगा। मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए। मुझे लगता है कि हमें यह मानना चाहिए वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है। आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा।’ जयशंकर ने कहा कि एक प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के नाते, चीन संसाधनों का इस्तेमाल करके चीजों को अपने तरीके से आकार देने की कोशिश करेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज कहना चाहता हूं… हमें प्रतिस्पर्धा से डरना नहीं चाहिए। हमें प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए कि मुझमें प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है।’ मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान के बारे में एक सवाल पर जयशंकर ने भारतीय कूटनीति पर भरोसा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘हर देश के पड़ोस में समस्याएं हैं। समस्याएं तो होंगी। हमारा काम अनुमान लगाना, आकलन करना और प्रतिक्रिया देना है। अंत में पड़ोसियों के एक-दूसरे के साथ संबंध रहते हैं।’ उन्होंने बताया कि राजनीति में तीखे रुख अपनाए जाते हैं और कूटनीति हमेशा उन तीखे रुख से नहीं चलती। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, पड़ोसियों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। इतिहास और भूगोल बहुत शक्तिशाली ताकतें हैं। इससे कोई बच नहीं सकता।’ इस महीने की शुरुआत में, मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से कहा था कि वह 15 मार्च तक मालदीव में तैनात सभी भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुला ले।

यही नहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रेड सी में नेवी की ओर से युद्धपोतों को तैनात किए जाने को लेकर कहा है कि भारत की क्षमता के साथ ये उसके हितों के लिए जरूरी है कि वो मुश्किल हालात में मददगार की भूमिका में आए। IIM-मुंबई में छात्रों के साथ बात करते हुए एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारतीय नेवी ने इस क्षेत्र में अपने 10 पोत तैनात किए हैं। लाल सागर के इलाके में समुद्री पायरेट्स के साथ-साथ मर्चेंट नेवी के जहाजों पर भी हमले हो रहे हैं। उन्होंने बीते कुछ समय में विकसित हुए भारत की नैरेटिव का विस्तार से जिक्र करते हुए मददगार वाली नीति पर जोर देते हुए कहा कि अगर हमारे पड़ोस में कुछ ठीक नहीं हो रहा है और हम कहें कि हमारा इससे कोई लेना देना नहीं है तो हमें जिम्मेदार देश नहीं माना जाएगा। जब आप मुसीबत में होंगे तो पड़ोसी देश भी ऐसे ही कहेंगे। चीन को लेकर सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि चीन की प्रतिद्वंद्विता की पॉलिटिक्स से डरने की जरूरत नहीं है।

विदेश मंत्री ने इस दौरान कई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने तुर्किये में आए भूकंप से लेकर कोविड महामारी के दौरान टीके और डॉक्टरी मदद मुहैया करवाने में भारत की भूमिका को लेकर बात की। इसके अलावा मालदीव के साथ द्विपक्षीय संबंधों में आ रही चुनौतियों को लेकर जयशंकर ने कहा कि लोगों को डिप्लोमेसी पर भरोसा करना चाहिए। कई बार देश बेहद विपरीत पोजिशन लेते हैं, लेकिन डिप्लोमेसी में इसे ऐसे नहीं देखा जाता। डिप्लोमेसी के जरिए मुद्दों का अध्ययन, विश्लेषण और प्रतिक्रिया करने का काम होता है।

जयशंकर ने चीन की विस्तारवादी विदेश नीति पर किए गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये समझना जरूरी है कि वह पड़ोसी देशों पर असर डालने की कोशिश करता रहेगा। ऐसे में किसी को प्रतिद्वंदिता वाली पॉलिटिक्स से डरना नहीं चाहिए। ग्लोबल पॉलिटिक्स एक प्रतिद्वंदी गेम है, ऐसे में यही होना चाहिए कि हर कोई बेहतर करे। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों को एक दूसरे की जरूरत पड़ती है क्योंकि इतिहास और ज्योग्राफी बेहद पावरफुल फोर्सेस हैं। इसके अलावा भारत की G-20 अध्यक्षता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दुनिया में किसी को ऐसा नहीं लगा था कि बीस देश एकमत हो जाएंगे, लेकिन फिर पीएम नरेंद्र मोदी को कौन मना करता? उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने अलग अलग विचार रखने वाले देशों को एकजुट किया, ये काबिले तारीफ है। इसके अलावा विदेश मंत्री ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ी भारत की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में इसे लेकर खासी उत्सुकता और उत्साह है।

आखिर कहां है भारत के संविधान की मूल प्रति?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत के संविधान की मूल प्रति आखिर कहां है! गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इस साल, हमने गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ मनाई। ये वही दिन था जब नए आजाद भारत के संस्थापक कठिन प्रयास से एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर पहुंचे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को कॉन्स्टीट्यूशन ड्राफ्टिंग का काम पूरा किया और 26 जनवरी, 1950 को ये लागू हुआ। संविधान सभा ने इस संविधान का मसौदा तैयार किया। दो साल से अधिक समय की मेहनत से संविधान की दो लिखित प्रतियों को पेश किया गया था। इस पर स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गजों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, वो सुलिखित संविधान के वॉल्यूम्स कहां हैं? वास्तव में, भारत के संविधान की मूल सुलेखित प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में प्रदर्शन के लिए संरक्षित हैं। इन प्रतियों को उसी तरह से संरक्षित किया गया है जैसे काहिरा में मिस्र के संग्रहालय में शाही ममियों को संरक्षित किया गया है। संविधान के अंग्रेजी और हिंदी संस्करणों को 45 फीसदी सापेक्ष आर्द्रता ह्यूमिडिटी पर 1 फीसदी से कम ऑक्सीजन के माइक्रो वातावरण में डिजाइन किए गए सील ग्लास रिसेप्टेकल्स में रखा गया है। पूरा ग्लास केस सुनिश्चित करता है कि ये दस्तावेज नमी, तापमान या प्रदूषण से प्रभावित नहीं हो।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर की नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला एनपीएल की ओर से अमेरिका के गेटी कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट जीसीआई के सहयोग से बनाए गए ये ग्लास केस 1994 से संसद लाइब्रेरी के एक स्ट्रांग रूम में रखे गए हैं। ये दोनों ग्लास रिसेप्टेकल्स संसद की लाइब्रेरी में एक सुरक्षात्मक तिजोरीनुमा कमरे के अंदर हैं। ये रूम 180 सेमी चौड़ा, 180 सेमी गहरा और 305 सेमी ऊंचा है। पूरे साल 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और 30 फीसदी सापेक्ष आर्द्रता बनाए रखने के लिए कमरे को जलवायु-नियंत्रित किया जाता है। प्रत्येक बॉक्स 55 सेमी चौड़ा, 70 सेमी लंबा और 25 सेमी ऊंचा है।

सीएसआईआर-एनपीएल के निदेशक वेणुगोपाल अचंता ने टीओआई को बताया कि ‘इन रिसेप्टेकल्स का समय-समय पर एनपीएल वैज्ञानिकों की एक टीम जांच करती है। पार्लियामेंट लाइब्रेरी भी साप्ताहिक आधार पर इनकी निगरानी करती है। दोनों प्रतियां बहुत अच्छी स्थिति में हैं और मॉनिटरिंग पैरामीटर्स को पर्याप्त रूप से बनाए रखा गया है। संविधान की दोनों मूल सुलेखित कॉपी की बड़ी ही ऐतिहासिक वैल्यू है क्योंकि इसमें संविधान के संस्थापकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। प्रारंभ में इन्हें किसी भी अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज की तरह संसद पुस्तकालय में रखा गया था। लेकिन 1980 के दशक के मध्य में यह महसूस किया गया कि इन ऐतिहासिक वॉल्यूम्स को बेहतर ढंग से संरक्षित करने की आवश्यकता है। तभी एनपीएल ने इसमें एंट्री मारी, इसका काम इन दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए खास केस का निर्माण करना था।

1988-89 में टेम्पर्ड ग्लास और उपयुक्त सीलेंट का इस्तेमाल करके एनपीएल केस का निर्माण किया गया था। हालांकि, स्थायित्व के मुद्दों की वजह से ये उपयुक्त नहीं माने गए थे। करंट साइंस पत्रिका में बाद के प्रयासों का विवरण देते हुए, एनपीएल के पूर्व निदेशक डीके असवाल और इसकी पूर्व मुख्य वैज्ञानिक रंजना मेहरोत्रा ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने भली-भांति सील किए गए कांच के केस को डेवलप करने के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की मांग की थी।

1989 में, एनपीएल वैज्ञानिक अंततः जीसीआई के दरवाजे पर पहुंचे, जिसने मिस्र के संग्रहालय की ममियों के ‘भंडारण और प्रदर्शन के लिए लगभग वैसे ही केस’ डेवलप किए थे। एनपीएल और जीसीआई ने भारत के संविधान के लिए डिस्प्ले केस के निर्माण को लेकर जुलाई 1993 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस बात पर सहमति हुई कि संविधान के अंग्रेजी और हिंदी संस्करणों के लिए दो समान ग्लास केस गढ़े जाएंगे। ये ग्लास रिसेप्टेकल्स अमेरिका में जीसीआई ने बनाए थे। फिर संसद की लाइब्रेरी में भेजा गया था। इन्हें मार्च 1994 में स्थापित किया गया था।

एनपीएल ने हर्मेटिकली सीलबंद ग्लास केस को डेवलप करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग का प्रयास किया था। 1992-93 में, एनपीएल वैज्ञानिक हरि किशन ने सेंट-गोबेन कंपनी, पेरिस का दौरा किया। वह दो डिस्प्ले केस बनाने में सक्षम थे। एक को सोल्डरिंग प्रक्रिया से सील किया गया और दूसरे को ओ-रिंग्स से सील किया गया। हालांकि, उन्हें दीर्घकालिक संरक्षण के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया।

हरि किशन ने इस मुद्दे पर जॉर्जेस एम्सेल प्रसिद्ध लौवर संग्रहालय, पेरिस में संरक्षण पहलुओं के विशेषज्ञ के साथ चर्चा की। उन्होंने जीसीआई से संपर्क करने का सुझाव दिया, क्योंकि 1989 में उन्होंने मिस्र के संग्रहालय में 27 शाही ममियों के भंडारण और प्रदर्शन के लिए काहिरा इसी तरह के केस डेवलप किए थे।

नवंबर 1992 में, एनपीएल ने एमए कोर्जो निदेशक, जीसीआई से संपर्क किया, जो संयुक्त रूप से ‘हर्मेटिकली सीलबंद ग्लास केस’ विकसित करने के लिए सहमत हुए। मार्च 1994 में, इन केस को संसद पुस्तकालय में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। केस को व्यक्तिगत रूप से पॉलिश किया गया, स्टेनलेस-स्टील स्टैंड लगभग 1 मीटर ऊंचाई पर वार्निश टीक कैबिनेट-वर्क के साथ लगाया गया था। केस को मेटल फ्रेम से कवर किया गया। एनपीएल में स्टैंड और कैबिनेट का निर्माण किया गया था। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र बीएआरसी में स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण समूह के निदेशक के रूप में तैनात असवाल ने टीओआई को बताया कि चूंकि वे बॉक्स पुराने हो रहे हैं, इसलिए नए बक्से बनाने का प्रस्ताव जल्द से जल्द लिया जाना चाहिए।

हाल ही में हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए क्या बोले केजरीवाल?

हॉकी में हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए केजरीवाल ने एक बयान दिया है! सबसे ज्यादा पार्षद होने के बावजूद चंडीगढ़ मेयर पद के लिए I.N.D.I.A के कांग्रेस-आप गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा। मंगलवार को नगर निकाय में सत्तारूढ़ बीजेपी ने 4 वोटों से जीतकर मेयर की सीट बरकरार रखी। उधर आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि यह जीत बीजेपी ने बेईमानी से हासिल की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ‘आज लोकतंत्र के लिए काला दिन है जिस तरह से बीजेपी गुंडागर्दी करके सारे आम बेईमानी करके चंडीगढ़ मेयर चुनाव में अपना मेयर बनाया है और उनकी यही बेईमानी वीडियो में कैप्चर हो गई। पूरा देश आज वो वीडियो सोशल मीडिया पर देख रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘मेयर आते जाते रहते हैं, पार्टियां आती जाती रहती हैं, लेकिन मुद्दा ये है कि इन्होंने गुंडागर्दी करके ये चुनाव जीता। अगर इसे पूरे देश ने मिलकर नहीं रोका गया तो आने वाले समय में ये देश के लिए बहुत खतरनाक है।’ सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘इस तारीख को गांधीजी की हत्या हुई थी और 76 साल बाद उन्होंने बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या की है, यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उनकी यह प्रतिक्रिया मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के मनोज सोनकर द्वारा ‘आप’ के कुलदीप कुमार को हराकर महापौर पद जीतने के बाद आई। कुमार को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद महापौर पद के लिए चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया था। नतीजे घोषित होते ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के घटक दल आप और कांग्रेस के पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया।उन्होंने खुलेआम गुंडागर्दी की और यह कैमरे में कैद हो गया। पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में महापौर पद के लिए हुए चुनाव में सरेआम ‘बेईमानी’ की गई और जिन लोगों ने ऐसा किया वे राष्ट्रीय चुनाव में किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के मनोज सोनकर द्वारा ‘आप’ के कुलदीप कुमार को हराकर महापौर पद जीतने के बाद आई। कुमार को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद महापौर पद के लिए चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया था। नतीजे घोषित होते ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के घटक दल आप और कांग्रेस के पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद चुनाव हो रहे हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के सदस्य कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आप के एक साथ चुनाव लड़ने के कारण यह चुनाव महत्वपूर्ण हैं। बता दें कि कांग्रेस ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में BJP की जीत पर कहा कि उसे हैरानी नहीं है कि लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना गया। पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था पर निर्लज्ज तरीके से कब्जा किया गया। चंडीगढ़ में मेयर चुनाव जीतने के लिए विपक्षी वोटों को अवैध घोषित करना दर्शाता है कि लोकतांत्रिक जनादेश को खत्म करना BJP की दूसरी प्रकृति है।’ कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि BJP ने चंडीगढ़ में लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना।’ 

दोनों दलों में हालांकि पंजाब में लोकसभा चुनावों के लिए सीटों की साझेदारी पर अभी सहमति नहीं बनी है। सोनकर को 16 मत मिले जबकि कुमार के पक्ष में 12 मत आए। आठ मतों को अवैध घोषित कर दिया गया।खुलेआम गुंडागर्दी की और यह कैमरे में कैद हो गया। पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’ नवनिर्वाचित महापौर वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के पद पर चुनाव कराएंगे। कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने महापौर पद के लिए प्रत्याशी खड़ा किया था। कांग्रेस ने वरिष्ठ उपमहापौर और उपमहापौर पदों के लिए अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं।

आखिर क्यों हुआ चंडीगढ़ मेयर चुनाव में घमासान?

हाल ही में चंडीगढ़ मेयर चुनाव में घमासान देखने को मिला था! कांग्रेस, AAP और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के अन्य दलों ने चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है। विपक्षी दलों ने कहा कि जनादेश को खत्म करना बीजेपी की आदत बन गई है। बीजेपी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में महापौर चुनाव में मेयर समेत सभी तीन पदों पर जीत हासिल की है और कांग्रेस-आप गठबंधन को हरा दिया। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार मनोज सोनकर ने कांग्रेस समर्थित आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को हराकर जीत हासिल की। सोनकर को 16 मत मिले, जबकि कुमार के पक्ष में 12 मत आए। आठ मतों को अवैध घोषित कर दिया गया। उधर कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने इस जीत को बेईमानी और गुंडागर्दी करार देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर बीजेपी पर तंज कसा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या हुआ। उन्होंने कहा, ‘यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। सभी ने देखा कि उन्होंने किस तरह वोट चुराए और अपने उम्मीदवार को बलपूर्वक जिताया। मुद्दा यह नहीं है कि मेयर कौन बनता है, लेकिन देश नहीं हारना चाहिए और लोकतंत्र नहीं हारना चाहिए।’ केजरीवाल ने कहा, ‘कांग्रेस-AAP गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत था और यह सीधा चुनाव था। आठ वोट या कुल वोटों का 25 प्रतिशत अवैध घोषित कर दिया गया। यह किस तरह का चुनाव था?’

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘इस दिन को हमारे देश के इतिहास में काले दिन के रूप में याद किया जाएगा।’ मेयर पद के लिए परिणाम घोषित होते ही विपक्षी गठबंधन INDIA के दोनों दो दलों के पार्षदों ने चंडीगढ़ नगर निगम सदन में हंगामा किया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह पर काउंटिंग के दौरान मतपत्रों पर कुछ निशान बनाकर उन्हें अवैध करार देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अनिल मसीह BJP के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी हैं जिन्हें निर्वाचन अधिकारी बनाया गया। मान ने कहा, ‘मेरी मांग है कि निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है।’

कांग्रेस ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में BJP की जीत पर कहा कि उसे हैरानी नहीं है कि लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना गया। पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था पर निर्लज्ज तरीके से कब्जा किया गया। चंडीगढ़ में मेयर चुनाव जीतने के लिए विपक्षी वोटों को अवैध घोषित करना दर्शाता है कि लोकतांत्रिक जनादेश को खत्म करना BJP की दूसरी प्रकृति है।’ बता दे कि सोनकर को 16 मत मिले, जबकि कुमार के पक्ष में 12 मत आए। आठ मतों को अवैध घोषित कर दिया गया। उधर कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने इस जीत को बेईमानी और गुंडागर्दी करार देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर बीजेपी पर तंज कसा है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘इस तारीख को गांधीजी की हत्या हुई थी और 76 साल बाद उन्होंने बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या की है, यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उन्होंने खुलेआम गुंडागर्दी की और यह कैमरे में कैद हो गया। पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या हुआ। उन्होंने कहा, ‘यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उन्होंने दावा किया कि अनिल मसीह BJP के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी हैं जिन्हें निर्वाचन अधिकारी बनाया गया। मान ने कहा, पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’‘मेरी मांग है कि निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है।’कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि BJP ने चंडीगढ़ में लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना।’

क्या चीन पैदा कर सकता है नए वायरस?

चीन अब फिर से नए वायरस पैदा कर सकता है! चीन एक नए घातक कोविड जैसे वायरस पर प्रयोग कर रहा है। यह वायरस चूहों के लिए 100 प्रतिशत घातक है। आशंका है कि यह वायरस मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकता है। यह दावा प्री-पीयर रिव्यूड जर्नल में किया गया है। 3 जनवरी को बायोरेक्सिव वेबसाइट पर प्रकाशित पेपर में दावा किया गया कि चीनी सेना के प्रशिक्षित डॉक्टर तथाकथित “पैंगोलिन कोरोनावायरस” का अपना वेरिएंट बनाया है। इस वेरिएंट को उन्होंने चूहों के एक समूह पर यह देखने के लिए डाला कि उन पर क्या असर होता है। पेपर में कहा गया है, “चार चूहों को निष्क्रिय वायरस का टीका लगाया गया और चार को संक्रमित चूहों को नियंत्रण के रूप में इस्तेमाल किया गया। हैरानी की बात यह है कि सभी चूहे वायरस वाली वैक्सीन के 7-8 दिनों के भीतर संक्रमण का शिकार हो गए।” विशेषज्ञों ने पाया कि जिन चार चूहों को वायरस दिया गया, संक्रमित होने के बाद पांच दिनों के भीतर उनका वजन कम हो गया। सातवें दिन चूहे सुस्त होने लगे और उनकी आंखें सफेद हो गईं।

पेपर में यह भी कहा गया है कि “जीवित वायरस से संक्रमित चूहों में, फेफड़ों में वायरल लोड छठे दिन तक काफी कम हो गया; मस्तिष्क के नमूनों में वायरल आरएनए लोड और वायरल टाइटर्स दोनों ही तीसरे दिन अपेक्षाकृत कम थे, लेकिन छठे दिन काफी हद तक बढ़ गए। इस खोज से पता चला संक्रमण के बाद के चरणों के दौरान गंभीर मस्तिष्क संक्रमण इन चूहों में मृत्यु का प्रमुख कारण हो सकता है।”

शोधकर्ताओं ने कहा कि मौत का कारण देर से होने वाले मस्तिष्क संक्रमण से जुड़ा हो सकता है। वायरस न केवल चूहों के शरीर में फैल गया था बल्कि मस्तिष्क, आंखों और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक भी पहुंच गया था शोधकर्ताओं ने कहा, “हमारी जानकारी के अनुसार, यह पहली रिपोर्ट है जो दिखाती है कि SARS-CoV-2 से संबंधित पैंगोलिन कोरोना वायरस hACE2 चूहों में 100% मृत्यु का कारण बन सकता है, जो GX_P2V के मनुष्यों में फैलने के जोखिम का संकेत देता है।”

बता दे कि भारत सहित दुनिया के कुछ देशों में कोराना ने चेहरा बदलकर नए वैरिएंट JN.1 के रूप में एंट्री ली है। लोगों में फिर से इस खतरनाक वायरस के नए स्वरूप के आने के बाद डर बैठ गया है। दूसरी ओर चीन फिर कुछ ऐसा कर रहा है जिससे एक्सपर्ट भी परेशान हैं। उन्होंने चीन के इस एक्सपेरिमेंट को पागलपन करार दिया है। दरअसल, एक स्टडी में यह दावा किया जा रहा है कि चीन के वैज्ञानिक एक जानलेवा वायरस के साथ प्रयोग कर रहे हैं, जो चूहों में 100% घातक साबित हुआ है। इस खतरनाक वायरस का नाम GX_P2V है और वैज्ञानिकों ने इसे bioRxiv नामक रिसर्च साइट पर प्रकाशित अध्ययन में बताया है। यह वायरस चूहों के दिमाग पर हमला करता है, जिनकी जेनेटिक बनावट को इंसानों के दिमाग से मिलती-जुलती बनाया गया था। ड्रैगन के इस घातक कदम से भारत में चिंता बढ़ गई है। चिंता बढ़ने का एक और कारण यह भी है कि 2019 के दिसंबर में चीन में सबसे पहले कोरोना वायरस पाया गया था, जिसके बाद 2020 मार्च में इसने खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया था। 2020-21 में भारत ने जो इस महामारी के दौरान झेला, उससे अबतक नहीं उबर पाया है। ऐसे में चीन से आ रहे एक और खतरे ने टेंशन बढ़ा दी है।

रिसर्चर्स ने पाया कि वायरस से संक्रमित होने के पांच दिनों के भीतर चूहों का वजन काफी कम हो गया, वो सुस्त हो गए और उनकी आंखें सफेद हो गईं। अध्ययन में आगे बताया गया है कि संक्रमित होने के सिर्फ आठ दिनों के बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। वैज्ञानिक इस तेजी से हुई मौत से आश्चर्यचकित हैं। यह खबर चिंताजनक है क्योंकि GX_P2V वायरस कोरोनावायरस से मिलता-जुलता है और इसके फैलने का खतरा है। कई विशेषज्ञों ने इस अध्ययन के बाद चिंता जताई है और कहा है कि चीन के इस पागलपन को रोकना ही होगा। वैज्ञानिकों ने स्टडी में बताया कि अध्ययन इस बात की ओर इशारा करता है कि GX_P2V वायरस इंसानों में भी फैल सकता है। उन्होंने आगे बताया कि इस नए वायरस से हमें SARS-CoV-2 जैसे वायरसों के काम करने का तरीका समझने में भी मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि चूहों के शरीरों का परीक्षण करने के बाद, उन्होंने पाया कि वायरस ने फेफड़ों, हड्डियों, आंखों, श्वासनली और दिमाग पर हमला किया था। दिमाग का संक्रमण इतना गंभीर था कि इसी वजह से जानवरों की मृत्यु हो गई। स्टडी के मुताबिक, यह वायरस सार्स-सीओवी-2 जैसा है और इसे 2017 में कोविड के फैलने से पहले पैंगोलिन में पाया गया था।

क्या भारत की जनसंख्या को नियंत्रित करेगी सरकार?

सरकार अब भारत की जनसंख्या को नियंत्रित कर सकती है! सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण और डेमोग्राफिक चेंज के आकलन के लिए एक कमिटी के गठन करने का प्रस्ताव किया है। इस कमिटी के पास उच्च अधिकार होंगे। कमिटी सरकार को इस स्थिति से निटपने के लिए अपनी अनुशंसा भी देगी। वित्त मंत्री निर्मला ने कहा कि सरकार जनसंख्या वृद्धि और डेमोग्राफिक चेंज से पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि सामाजिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ये प्रस्ताव कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए ये समिति अपनी अनुशंसा देगी। गौरतलब है कि देश की आबादी इस वक्त 140 करोड़ से ज्यादा है। भारत आबादी के मामले में दुनिया में नंबर वन पर पहुंच चुका है। भारत ने पिछले साल आबादी के मामले में चीन को पछाड़कर नंबर वन बना है। जनसंख्या वृद्धि भारत के लिए आने वाले वक्त में एक मुश्किल समस्या बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक समिति का गठन किया है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में डेमोग्राफी चेंज का भी जिक्र किया है। यानी आबादी का असंतुलन। माना जा रहा है कि सरकार ने इसके जरिए दो अहम चीजों की तरफ अपना ध्यान लगाया है। हाल के दिनों में बढ़ती जनसंख्या पर रोक की बात जोरशोर से उठती रही है।चीन में 9.02 मिलियन शिशुओं का जन्म हुआ, जबकि 2022 में 9.56 मिलियन बच्चों का जन्म हुआ था। चीन में काम करने वालों लोगों की उम्र यानी 16 से 59 आयु वर्ग के लोग 2022 के मुकाबले 10.75 मिलियन कम हो गए जबकि 60 से ऊपर के बुजुर्गों की संख्या 2022 से 16.93 मिलियन बढ़ गई। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष भी इसके लिए सुर में सुर मिलता रहा है।

बता दे कि चीन की जनसंख्या 2023 में लगातार दूसरे साल कम हुई है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो एनबीएस ने बुधवार को आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि 2023 में देश की जनसंख्या गिरकर 1.409 बिलियन हो गई है। ये बीते साल यानी 2022 में 1.4118 बिलियन थी। एक साल में चीन की आबादी करीब 27 लाख घटी है। अर्थव्यवस्था में गिरावट से जूझ रहे चीन में घटती आबादी से जनसांख्यिकीय चुनौतियां गहरा रही हैं, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी। चीन की जन्म दर प्रति 1,000 लोगों पर 6.39 जन्मों के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई, जो एक साल पहले 6.77 से कम थी, जो 1949 के बाद से सबसे निचला स्तर था। 2023 में चीन में 9.02 मिलियन शिशुओं का जन्म हुआ, जबकि 2022 में 9.56 मिलियन बच्चों का जन्म हुआ था। चीन में काम करने वालों लोगों की उम्र यानी 16 से 59 आयु वर्ग के लोग 2022 के मुकाबले 10.75 मिलियन कम हो गए जबकि 60 से ऊपर के बुजुर्गों की संख्या 2022 से 16.93 मिलियन बढ़ गई।

चीन में जन्म दर में बीते काफी सालों से लगातार गिर रही है, जिसका मुख्य कारण एक बच्चे की पॉलिसी और तेजी से हुआ शहरीकरण है। चीन ने बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए साल 1980 वन चाइल्ड पॉलिस लागू की थी, तब बढ़ती आबादी देश के विकास में बाधा बन रही थी। अब घटती आबादी चीन के लिए मुश्किल पैदा कर रही है। अर्थव्यवस्था में गिरावट बढ़ती बेरोजगारी लोगो बच्चे पैदा करने से हतोत्साहित कर रहे हैं। बच्चे पैदा होने के बाद बढ़े वाले खर्च की वजह से लोग इससे भाग रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि लगातार घटती जन्म दर देश के आर्थिक विकास के लिए खतरा साबित हो सकती है। चीन में जनसंख्या दर 2016 से ही कम हो रही है। गौरतलब है कि देश की आबादी इस वक्त 140 करोड़ से ज्यादा है। भारत आबादी के मामले में दुनिया में नंबर वन पर पहुंच चुका है। भारत ने पिछले साल आबादी के मामले में चीन को पछाड़कर नंबर वन बना है। जनसंख्या वृद्धि भारत के लिए आने वाले वक्त में एक मुश्किल समस्या बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक समिति का गठन किया है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में डेमोग्राफी चेंज का भी जिक्र किया है। यानी आबादी का असंतुलन।बीते कुछ समय में चीन में बड़े परिवार के लिए प्रोत्साहित भी किया गया है लेकिन इसका जमीन पर असर होता नहीं दिखा है। चीन में आबादी घटने का क्रम जारी रहा तो देश बूढ़ा हो जाएगा और काम करने वाले लोग घट जाएंगे। इससे चीन की इकोनॉमी पर बड़ा संकट आ जाएगा।

क्या टीवी स्टार्स भी झेलते हैं कई मुसीबतें?

आज हम आपको टीवी स्टार्स की कई मुसीबतें बताने वाले हैं! उम्मीद पर दुनिया कायम है और हर पल उम्मीद से भरा होना जरूरी है, मगर कई बार हालात निराश कर देते हैं, ऐसे में आशावादी रवैया ही जीवन को आगे बढ़ाता है। एक फरवरी को वर्ल्ड ऑप्टिमिस्ट डे यानी उम्मीद का दिन है। दुनिया भर में इस दिन को फरवरी महीने के पहले गुरुवार को मनाया जाता है। इस मौके पर हमने टीवी स्टार्स से जाना कि उनके लिए आशावादी होने के मायने क्या हैं और उनकी जिंदगी में कौन सी ऐसी घटनाएं रहीं, जब वो निराश हो गए, पर आगे बढ़ते रहे। किसी ने डिप्रेशन झेला, तो किसी को जेल जाना पड़ा। वहीं कुछ ऐसे भी रहे, जिन्हें पैसों की तंगी झेलनी पड़ी। ‘बिग बॉस 17’ में नजर आईं रिंकू धवन और जिग्ना वोरा से लेकर एक्टर अनिरुद्ध दवे और अंश बागरी ने अपनी जिंदगी के किस्से शेयर किए। आपको अपने जीवन के हर दिन और हर पल में आशावादी रहना होगा। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, और इसीलिए इसे जीवन कहा जाता है। हर किसी को सकारात्मक रहना चाहिए और कभी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। जब हम अपने सबसे लो फेज में होते हैं तो हमें चीजें समझ में नहीं आती हैं, लेकिन खुद पर भरोसा रखना चाहिए। हम अपने बुरे समय से सबक सीखते हैं।अपने जीवन में, मैंने कई कठिन क्षणों का सामना किया है। आर्थिक कठिनाइयां भावनात्मक संघर्ष और बहुत सारा तनाव, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई। हां, मुझे परेशानियों का सामना इस हद तक करना पड़ा कि घर में खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं था। मैंने उस तरह से पैसों की तंगी का सामना किया है, जो मानसिक तनाव में बदल जाता है, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई। मेरे करीबी लोग जो इसके बारे में जानते थे, सराहना की कि मैंने बहुत खूबी से इस सिचुएशन को हैंडल किया।

जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। यदि आप नकारात्मक विचारों को मन में रखेंगे, तो आप स्वयं को और भी अधिक डूबता हुआ पाएंगे। अपने जीवन के सकारात्मक पहलुओं पर फोकस करें, जिसमें यह पहलू भी शामिल है कि आप शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, चल सकते हैं और देख सकते हैं। जब मैंने अपना करियर शुरू किया, तो एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया और मुझे ऑपरेशन कराना पड़ा था। मेरे पैर में प्लेटें डाली गईं। मुझे विश्वास था कि मैं ठीक हो जाऊंगा। हालांकि, छह महीने के बाद, मुझे एक और ऑपरेशन से गुजरना पड़ा और मैं यह सोचकर काफी निराश हो गया कि मैं कभी एक्टर नहीं बन पाऊंगा। उस चुनौतीपूर्ण समय में, मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने लिए लड़ना होगा क्योंकि अगर मैं ऐसा नहीं करता, तो यूनिवर्स भी मुझे इससे उबरने में मदद नहीं करेगा। मैंने उम्मीद और सकारात्मकता बनाए रखी। आज, मैं 20 वर्षों से अधिक एक्सपीरियंस वाला एक एक्टर हूं। अपने करियर के चुनौतीपूर्ण क्षणों के दौरान भी, मैंने कभी भी नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत के साथ आशावादी होना जरूरी है।

मेरा मानना है कि कि हमें हर दिन आशावादी रहना चाहिए। 2017 में, मैं डिप्रेशन में था, चीजें बिखर रही थीं, कोई काम नहीं था और मैंने अपने जीवन में प्यार की कमी और ब्रेकअप का भी अनुभव किया। उस मुश्किल समय के दौरान भी मैं सकारात्मकता और आशा से जुड़ा रहा, जिसने मुझे वापसी करने के काबिल बनाया। हताशा से उम्मीद की ओर बढ़ने का दौर पूरे एक वर्ष तक चला था, जिसके दौरान मुझमें शारीरिक परिवर्तन आया, उसके बाद मानसिक परिवर्तन हुआ। फिर मैंने अपना जीवन पूरी तरह से बदल दिया और खुद को निरंतर काम के लिए समर्पित कर दिया। उसके बाद मैंने हमेशा खुद को एक्टिव रखा। यह मेरा आशावादी रवैया ही था, जिसने मुझे आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

जब मैं मुंबई आया, तो मैं अपने सर्वाइवल के लिए एक या दो शो में नजर आने वाले किरदारों को निभाने को तैयार था। दिल्ली में थिएटर और टेलीविजन में अनुभव के साथ एक प्रशिक्षित अभिनेता होने और अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल्स में मुख्य भूमिकाएं निभाने के बावजूद, मैं कैमरे के सामने मुख्य किरदार हासिल करने को लेकर आश्वस्त नहीं था। हालांकि, मैंने उम्मीद बनाए रखी और मेन रोल निभाने का सपना देखा। महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मुझे छोटे परदे पर राजकुमार आर्यन का लीड रोल मिलाष। ब से, मैंने टीवी पर लगातार लीड रोल प्ले किए। कभी भी साइड रोल या एक या दो दिन वाले किरदारों से समझौता नहीं किया। मैं हर प्राइम लीग चैनल का हिस्सा रहा हूं। हर शो में एक साल बिताता हूं। भारतीय टेलिविजन पर महिला केंद्रित कंटेंट का बोलबाला होने के बावजूद, मैंने लीड किरदार और कुछ सबसे पसंदीदा मेल किरदारों को निभाया है। निराशावाद जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन अपने दिल और आत्मा का ख्याल रखते हुए हमें पॉजिटिविटी को बढ़ावा देना चाहिए। उम्मीद पर दुनिया कायम है।

सकारात्मक दृष्टिकोण से ही हमें जीवन में आगे बढ़ने की आशा मिलती है और यही नजरिया एक दिन दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है। मेरे जीवन में कई घटनाओं ने मुझे ऐसा महसूस कराया है कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन फिर मुझे लगता है कि मेरे पास केवल एक ही जीवन है। अगर मैं हार मान लूं तो फिर जीवन का कोई उद्देश्य नहीं बचेगा। मसलन, जेल का माहौल बेहद नकारात्मक था। हालांकि मैंने वहां चुप्पी की अहमियत सीखी, धैर्य को जिंदगी से जोड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने लोगों को जज करना बंद कर दिया। उन्हें वैसे ही स्वीकार करना सीखा जैसे वो हैं।

जब चीजें हमारे मुताबिक नहीं होतीं तो हम दुखी हो जाते हैं। मेरा मानना है कि जीवन में स्वाभाविक रूप से कुछ भी नकारात्मक नहीं है, यह महज हमारे दिमाग की उपज है। बाहरी रूप से कुछ भी नकारात्मक नहीं है, यह सब हमारे दिमाग द्वारा बनाया गया है। हर चीज को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है और यदि कुछ चीजें काम नहीं कर रही हैं, तो इसे सीखने के अनुभव के रूप में लें। जब मैं उदास महसूस करता हूं तो मैं अपने काम पर फोकस करता हूं, क्योंकि यह मेरे जीवन में सकारात्मकता लाता है। मैं सचेत रूप से सकारात्मक चीजों के बारे में सोचता हूं और सफलता की कल्पना करता हूं। अपने लक्ष्यों के लिए कड़ी मेहनत करने से मुझे सकारात्मकता का अहसास होता है। एक बार जब आप अपना लक्ष्य अपने सामने रख लेते हैं, तो सब कुछ सकारात्मक हो जाता है।

अमेरिका में कनाडा के लिए क्या बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर?

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका में जाकर कनाडा के लिए एक बयान दे दिया है! विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा के हालिया व्यवहार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अपील के बावजूद कनाडा ने अपनी किसी भी चिंता के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने हमारे अनुरोध को भी नजरअंदाज किया। इसके बजाय जून 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कई आरोप लगाए। विदेश मंत्री ने ये बातें एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा है। उन्होंने ये भी कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच एक बड़ा राजनयिक विवाद पैदा कर दिया था। जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर ‘भारत सरकार के एजेंटों’ की ओर से कथित तौर पर हरदीप निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एस जयशंकर ने इंटरव्यू में भारत के प्रति कनाडा के हालिया व्यवहार पर निशाना साथा। उन्होंने इसकी मुख्य वजहों के रूप में कनाडा की राजनीतिक स्थिति को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें चरमपंथी तत्व शामिल हो गए हैं। जयशंकर ने बताया कि कनाडा कुछ वर्षों से चरमपंथियों और आतंकवादियों को अपनी राजनीति में जगह दे रहा है। लेकिन फिर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए। इसकी तुलना में, अमेरिका का उदाहरण देखें। अमेरिका ने हमें बताया कि उनके पास अपराधियों के बारे में कुछ जानकारी है, और वे हमें अपनी तरफ से इसे जांचने के लिए कुछ जानकारी देंगे। हम उनकी जानकारी की पड़ताल करेंगे, मामले की जांच करेंगे।मेरा मानना है कि यह उनकी राजनीति की कमजोरी है। इसके कारण वहां बहुत सारी समस्याएं हो रही हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए था।

एस. जयशंकर ने आगे कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से हमारे खिलाफ आरोप लगाए। इससे पहले, दोनों देशों के प्रधानमंत्री की मुलाकात हुई थी, और मैं भी वहां था। तब हमारी स्थिति यह थी कि अगर आपके मन में कोई बात है जो आपको चिंतित कर रही है, कोई जानकारी आपको मिली है, तो कृपया हमें बताएं। अगर आप हमें सब कुछ नहीं बताना चाहते हैं, तो भी कम से कम कुछ तो कहें, ताकि हम अपनी तरफ से जांच कर सकें। विदेश मंत्री ने आगे कहा कि कनाडा के पीएम ने उस समय हमसे कुछ भी साझा नहीं किया, लेकिन फिर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए। इसकी तुलना में, अमेरिका का उदाहरण देखें। अमेरिका ने हमें बताया कि उनके पास अपराधियों के बारे में कुछ जानकारी है, और वे हमें अपनी तरफ से इसे जांचने के लिए कुछ जानकारी देंगे। हम उनकी जानकारी की पड़ताल करेंगे, मामले की जांच करेंगे।

एस. जयशंकर ने कहा कि कनाडा की राजनीति में अलगाववाद, उग्रवाद और हिंसा को जगह दी गई है। अमेरिका में ऐसी कोई समस्या नहीं है। हां, उनके पास अन्य मुद्दे हैं, लेकिन कनाडा और अमेरिका के बीच उनकी राजनीति और उनके दृष्टिकोण कई अंतर देखने को मिले हैं। जैसे कि वो कैसे द्विपक्षीय संबंधों को संभालते हैं। जयशंकर ने अमेरिका में खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की कथित साजिश पर विवाद का जिक्र करते हुए ये बात कही। इसी के साथ भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘बेतुका’ बताकर खारिज भी कर दिया था। बता दें कि इस कदम की शुरुआत ट्रूडो की गठबंधन सहयोगी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के कट्टरपंथी जगमीत सिंह ने की है। साथ ही उन्होंने कनाडा की राजनीति में चीनी हस्तक्षेप से ध्यान भटकाने की ट्रूडो सरकार की कोशिश से इंकार नहीं किया है। इसके बजाय जून 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कई आरोप लगाए। विदेश मंत्री ने ये बातें एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा है। उन्होंने ये भी कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच एक बड़ा राजनयिक विवाद पैदा कर दिया था।मेरा मानना है कि यह उनकी राजनीति की कमजोरी है। इसके कारण वहां बहुत सारी समस्याएं हो रही हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए था।कनाडा पर नजर रखने वालों के अनुसार, सिंह पर ट्रूडो की खालिस्तान समर्थक राजनीति को प्रभावित करने का आरोप है। ट्रूडो-जगमीत गठबंधन कनाडाई पीएम की बढ़ती अलोकप्रियता के बीच वोट बैंक की राजनीति में लगा हुआ है क्योंकि ट्रूडो-जगमीत की जोड़ी को कनाडाई अर्थव्यवस्था में मंदी के लिए मतदाताओं के क्रोध का सामना कर रही है।

क्या नीतीश कुमार के आने से बीजेपी को होगा फायदा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बीजेपी को नीतीश कुमार के आने से फायदा होगा या नहीं! आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी ने तो उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी कर दी। उधर केंद्र में सत्ता संभाल रही बीजेपी इस बार ‘मिशन 400 पार’ पर काम कर रही है। इसके लिए पार्टी नेता अगले महीने अहम बैठक की तैयारी में हैं, जिसमें देशभर से आए बीजेपी नेताओं को चुनावी रणनीति के मद्देनजर फाइनल ब्लूप्रिंट सौंपा जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सत्ताधारी पार्टी लोकसभा चुनाव में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी को भरोसा है कि देश का मूड उसके पक्ष में है। बावजूद इसके बीजेपी आलाकमान 2004 के आम चुनाव वाली गलती नहीं करना चाहती। अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की ऊंची छलांग से केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी को बड़ी उम्मीदें जगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मतदाताओं को यह विश्वास दिलाया है कि कैसे उनकी सरकार लगातार विकास के मुद्दे पर काम कर रही। इसके साथ ही बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही। आगामी आम चुनाव में स्ट्रॉन्ग नजर आ रही बीजेपी इस सबके बावजूद कोई कमी नहीं रहने देना चाहती। यही वजह है कि बीते दिनों बिहार में जिस तरह से सियासी घटनाक्रम हुआ पार्टी नेतृत्व ने उसे बड़ी गंभीरता से संभाला। नीतीश कुमार के आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में रहने से बीजेपी को बिहार में वो स्विंग मिलता नहीं दिख रहा था जैसा 2019 में जेडीयू के साथ रहने पर मिला था। यही वजह है कि पार्टी ने नीतीश के एनडीए में लौटने पर कोई देरी नहीं की।

बीजेपी ने एक बार फिर नीतीश की जेडीयू से गठबंधन किया और बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार बन गई। नीतीश कुमार को फिर सीएम पद दिया गया। बीजेपी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को साथ लाने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनके मिशन 400 पार सीट के लिए बिहार अहम राज्य है। पार्टी की नजर बिहार के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल पर भी है। यहां के चुनावी नतीजे भी अहम माने जा रहे। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान इन सभी राज्यों में एनडीए गठबंधन ने 123 सीट अपने नाम किया था। जब अगस्त 2022 में जेडी (यू) गठबंधन से बाहर हो गई, तो एनडीए ने अपने 17 सांसद खो दिए। ग्राउंड सर्वे में भी बीजेपी के लिए भारी नुकसान का संकेत दिया गया। इसमें पार्टी केवल 24 सीटों पर जीत हासिल करती नजर आ रही थी। उधर जेडीयू की भी हालत खास अच्छी नहीं बताई जा रही थी। पार्टी नेताओं का आंकलन यही था कि अगर जेडीयू महागठबंधन के साथ रहते हुए चुनाव में गई तो उनके सांसदों की संख्या 5-6 से ज्यादा नहीं होगी। सीटों की स्थिति देखते हुए दोनों पार्टियों के फिर से एक साथ आने का मतलब समझ में आया। बीजेपी के लिए हिंदी भाषी राज्य बिहार पर फोकस बढ़ाना बेहद जरूरी था। ऐसे में नीतीश की एनडीए वापसी सही समय पर हुई।

बीजेपी नेताओं ने तर्क दिया कि 22 जनवरी को राम मंदिर अभिषेक के बाद बिहार में सियासी गणित बदला। बीजेपी सूत्रों ने ये भी बताया कि यह पीएम मोदी ही थे जिन्होंने पहल की और नीतीश कुमार से बात की। उन्हें एनडीए में वापस आने के लिए कहा। बीजेपी नेतृत्व ने आकलन किया कि बिहार में लगभग 15 फीसदी वोट बेस वाला जेडीयू, नीतीश कुमार के बाद बिखर सकता है। अगर बीजेपी ने जेडीयू को अपने साथ जोड़े नहीं रखा तो आरजेडी कम से कम उसके समर्थन वाले वोटर बेस के बड़े हिस्से पर कब्जा कर सकती है। एक बार नीतीश कुमार की लीडरशिप खत्म हुई तो इससे आरजेडी और मजबूत हो सकती है। खास तौर पर 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता।

उधर बीजेपी ने कर्नाटक में भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कवायद शुरू किया है। 2019 में लोकसभा की 28 में से 25 सीटें बीजेपी ने जीतीं थीं। हालांकि, पिछले साल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत से इस टैली के प्रभावित होने की संभावना नजर आ रही। यही वजह है कि पार्टी उन नेताओं को वापस लाने के लिए बातचीत कर रही, जिन्होंने असेंबली चुनावों से पहले पार्टी छोड़ दी थी। लगभग एक दर्जन नेता बीजेपी से बाहर चले गए थे। उनमें सबसे प्रमुख जगदीश शेट्टार को पिछले हफ्ते ही पार्टी अपने पाले में वापस ले आई है।

इन सबके बावजूद बीजेपी के शीर्ष नेताओं को 2004 में पार्टी की हार अब भी याद है। उस समय पार्टी नेतृत्व को ये उम्मीद थी की बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करेगी, बावजूद इसके वह हार गई थी। उन्होंने समग्र माहौल को अपनी चुनावी रणनीति के आधार पर नहीं लिया। उस समय लीडरशिप ने प्रत्येक राज्य में राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण किया लेकिन रिजल्ट अनुकूल नहीं आए। 2004 में बीजेपी के ‘पक्ष में सकारात्मक माहौल’ के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सत्ता में लौटने में विफल रही थी। उसी स्थिति और कारणों को देखते हुए बीजेपी के एक नेता ने दावा किया कि मौजूदा नेतृत्व उस गलती को दोहराना नहीं चाहता और आगामी लोकसभा चुनाव में कोई मौका नहीं लेना चाहता।

आखिर लद्दाख में क्यों दखल दे रहा है चीन?

वर्तमान में चीन लद्दाख में लगातार दखल दे रहा है!लद्दाख में 2020 में चीनी सेना के बीच खतरनाक झड़प के बाद भारतीय सेना ने बेहद सख्त रुख दिखाते हुए ड्रैगन को जैसे का तैसा जवाब दे रहा है। इसका असर अब दिख भी रहा है और चीनी सैनिकों की हिमाकत को अब वहां रह रहे चरवाहे भी करार जवाब दे रहे हैं। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में इसकी बानगी भी देखने को मिली। लद्दाख में भारतीय चरवाहों ने चीनी सैनिकों के साथ सख्ती करते दिखे। दरअसल, चरवाहे चारागाहों में अपने जानवर को ले जा रहे थे। यहीं पर चरवाहे और चीनी सैनिकों के बीच बहस हो रही थी। भारतीय चरवाहे अपने पारंपरिक चारागाहों में अंदर तक जा रहे हैं। जब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पीएलए के सैनिक उन्हें वापस धकेलने की कोशिश करते हैं तो चरवाहे अपनी जमीन पर डटे रहते हैं। इससे पहले, अक्सर सेना ही चरवाहों की आवाजाही को सीमित कर देती थी ताकि चीनी सैनिकों के साथ टकराव से बचा जा सके। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में ऐसे ही एक घटना के अनुसार, निडर चरवाहे पीएलए के सैनिकों का विरोध करते दिख रहे हैं, जो हल्के बख्तरबंद गाड़ियों के साथ उनके पास आए थे। बताया जा रहा है कि यह घटना 2 जनवरी को हुई थी! 

खबरों के मुताबिक चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर का कागजंग तक आ गए थे। चुशूल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लद्दाख हिल काउंसिल के पार्षद कोंचोक स्टैनजिन ने घटना की पुष्टि करते हुए एक्स लिखा कहा, ‘कोई शक नहीं है कि हमारी सेना हमेशा नागरिकों के साथ है। चीनी सैनिक हिमाकत की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हमारे चरवाहों ने उनका मजबूती के साथ सामना किया।

गौरतलब है कि गलवान झड़प के बाद से लगभग हर सर्दियों में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। हर बार, चीनी सैनिकों की हिमाकत को वहां मौजूद गांव वाले और चरवाहों ने ही रोका था। या फिर स्थानीय लोगों के दावे के अनुसार सादे कपड़ों में आए भारतीय सैनिकों ने। पिछले साल, जब डेमचोक के आसपास सीएनएन जंक्शन क्षेत्र में चरवाहों को पीएलए ने रोका तो सेना ने हस्तक्षेप किया था। कुछ साल पहले इसी तरह की घुसपैठ के एक वीडियो में दिखता है कि कैसे गांव वाले और नागरिक लाठी और पथराव के साथ घुसपैठियों की ओर दौड़ रहे थे। कगजंग और दमचुले इलाकों में ये घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। क्योंकि यहां चारागाहों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। ये क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सर्दियों में जब पशु अपने बच्चे को जन्म देते हैं तो यही चारागाह उनके लिए एकमात्र भोजन का स्रोत होते हैं।

बता दे कि यह न्योमा गांव के पास एलएसी का इलाका है। गांववालों के मुताबिक वे इस जगह पर अपने जानवरों को हमेशा ले जाते हैं। लेकिन चीनी सैनिक उसे अपना इलाका बताते हुए उन्हें रोकने लगे। गांव वालों ने चीनी सैनिकों से कहा कि ये जगह उनकी है और ये उनका चरागाह है। गांव वालों ने चीनी सैनिकों से खूब बहस भी की और चीनी सैनिकों की गाड़ी पर पत्थर भी मारे। वीडियो में चीनी सैनिक पूरे घटनाक्रम को रेकॉर्ड करते दिख रहे हैं और चरवाहों से वापस जाने को कह रहे हैं। चीनी सैनिकों के आर्मर्ड वीइकल भी दिखाई दे रहे हैं। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास के चरागाह सिर्फ वहां आसपास रहने वाले गांव वालों और उनके पशुओं के लिए ही अहम नहीं है बल्कि यह भारत की सीमा की सुरक्षा के लिहाज से भी अहम हैं। इसलिए आए दिन कभी चीन के सैनिक भारत के लोगों को वहां अपने पशु ले जाने से रोकते हैं तो कभी भारतीय सैनिक चीन की तरफ से आए लोगों को अपने पशु वहां से दूर ले जाने के लिए कहते हैं। कगजंग और दमचुले इलाकों में ये घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। क्योंकि यहां चारागाहों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। ये क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सर्दियों में जब पशु अपने बच्चे को जन्म देते हैं तो यही चारागाह उनके लिए एकमात्र भोजन का स्रोत होते हैं।चरागाह इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इसके जरिए दोनों देश उस जगह पर अपना दावा पुख्ता करते हैं। जिन जगहों पर भारत के लोग अपने पशुओं को लेकर जाते हैं वह भारत का इलाका है और भले ही चीन उसे अपना बताता है लेकिन भारतीय चरवाहे उस जगह पर भारतीय दावे को पुख्ता करते हैं।