Home Blog Page 935

फरवरी महीने के लिए क्या है मौसम विभाग की भविष्यवाणी?

आज हम आपको फरवरी महीने के लिए दी गई मौसम विभाग की भविष्यवाणी बताने वाले हैं! दिल्ली समेत उत्तर भारत में इस साल मौसम में कई बदलाव देखने को मिले हैं। हालत यह है कि 123 साल में यह पहली बार हुआ है जब उत्तर भारत में जनवरी के महीने में 91 फीसदी कम बारिश हुई है। इस साल जनवरी में महज 3.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह 1901 के बाद दूसरी सबसे कम बारिश है। वहीं, पूरे देश में इस महीने में सामान्य से 58% कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने यह अनुमान लगाया गया है कि फरवरी के दौरान पूरे देश में ‘सामान्य से ऊपर’ बारिश होने की संभावना है। फरवरी महीने में होने वाली रबी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस बारिश से किसानों को राहत मिल सकती है। तापमान के मोर्चे पर, यह भविष्यवाणी की गई है कि देश के अधिकांश हिस्सों में फरवरी में सामान्य से अधिक न्यूनतम तापमान सामान्य रात से अधिक गर्म रहने की संभावना है। वहीं,उत्तर-पश्चिम, पश्चिम मध्य, उत्तर-पूर्व और पूर्व-मध्य भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य अधिकतम सामान्य दिन से अधिक गर्म के ऊपर रहने की संभावना है। मासिक वर्षा और तापमान का पूर्वानुमान जारी करते हुए, आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में ‘सामान्य से सामान्य से अधिक’ वर्षा होने की संभावना है, लेकिन दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में ‘सामान्य से कम’ वर्षा होने की संभावना है।

आईएमडी के निदेशक महापात्र ने कहा कि फरवरी के दौरान मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम शीत लहर वाले दिन होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस दौरान मजबूत अल नीनो स्थितियां – मध्य प्रशांत महासागर में सतही जल का असामान्य रूप से गर्म होना – लगातार कमजोर होने और वसंत ऋतु के अंत तक ईएनएसओ-तटस्थ स्थितियों में बदलने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में बुधवार को हिमपात शुरू हो गया है। इस वजह से सामान्य जनजीवन बाधित रहा। वहीं, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश से क्षेत्र में ठंड बढ़ गयी। भारत मौसम विभाग विभाग आईएमडी पूरे देश में फरवरी में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। आईएमडी के अनुसार, उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी में सामान्य से अधिक शुष्क मौसम के बाद फरवरी में सामान्य और सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है।महापात्र के अनुसार अधिकांश मॉडल जुलाई-सितंबर के आसपास भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल मानी जाने वाली ला नीना स्थितियों में बदलाव का संकेत देते हैं। 25 दिसंबर से 30 जनवरी तक गंगा के मैदानी इलाकों में कोहरा छाया रहा। यह हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक रहने वाले दौरों में से एक था। मौसम विज्ञानियों ने इसका कारण इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कम पश्चिमी विक्षोभ को बताया।

हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में बुधवार को हिमपात शुरू हो गया है। इस वजह से सामान्य जनजीवन बाधित रहा। वहीं, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश से क्षेत्र में ठंड बढ़ गयी। भारत मौसम विभाग विभाग आईएमडी पूरे देश में फरवरी में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। आईएमडी के अनुसार, उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी में सामान्य से अधिक शुष्क मौसम के बाद फरवरी में सामान्य और सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने यह अनुमान लगाया गया है कि फरवरी के दौरान पूरे देश में ‘सामान्य से ऊपर’ बारिश होने की संभावना है। फरवरी महीने में होने वाली रबी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस बारिश से किसानों को राहत मिल सकती है।स्थानीय मौसम कार्यालय ने 31 जनवरी और एक फरवरी को पांच जिलों -शिमला, कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल और स्पीति में भारी हिमपात और बारिश की ओरेंज चेतावनी जारी की है।25 दिसंबर से 30 जनवरी तक गंगा के मैदानी इलाकों में कोहरा छाया रहा। यह हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक रहने वाले दौरों में से एक था। मौसम विज्ञानियों ने इसका कारण इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कम पश्चिमी विक्षोभ को बताया। जम्मू कश्मीर में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर जोजिला अक्ष रेखा समेत ऊपरी इलाकों में फिर बर्फबारी हुई जबकि मैदानी हिस्सों में बारिश हुई।

क्या मोदी सरकार ने बजट में चौंका दिया है?

वर्तमान में मोदी सरकार ने बजट में चौंका कर रख दिया है! मोदी सरकार ट्रेंड तोड़ने की माहिर है। अक्‍सर देखने को मिला है कि वह अपने फैसलों से चौंका देती है। यही कारण है क‍ि उसके फैसलों के बारे में अनुमान लगा पाना मुश्किल होता है। बात चाहे राजनीति की हो या आर्थिक नीतियों की। इस मामले में उसका रिकॉर्ड एक जैसा है। यह सरकार परिपाटियों को तोड़ने के लिए जानी जाती है। मोदी 1.0 में तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट को पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा तोड़ी थी। बजट को फरवरी के अंत में पेश करने के बजाय इसे फरवरी के पहले दिन पेश करना शुरू किया गया था। फिर मोदी 2.0 में ब्रीफकेस की जगह बही-खाता जैसे प्रयोग किए गए। 2019 से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने के लिए ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े से ढके बही-खाते का इस्तेमाल करती रही हैं। यह बदलाव प्रतीकात्मक है। इसका मकसद भारत की समृद्ध विरासत और पारंपरिक मूल्यों को दर्शाना है। गुरुवार को पेश होने वाला बजट अंतरिम बजट है। यह लोकसभा चुनाव से पहले पेश किया जा रहा है। इसी के चलते ज्‍यादातर लोगों को उम्‍मीद है कि यह लोकलुभाव होगा। इसमें भी चार ‘जातियों’ पर ज्‍यादा फोकस हो सकता है। इन चार ‘जातियों’ में गरीब, युवा, महिला और किसान शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कहते रहे हैं कि उनके लिए सिर्फ यही चार जातियां हैं। सवाल यह है कि ट्रेंड तोड़ने की माहिर मोदी सरकार बजट में चौंकाएगी तो नहीं! क्‍या ऐसी भी उम्‍मीद की जा सकती है कि नई स्‍कीमों पर बड़े खर्च करने के ट्रेंड को छोड़ बजट गैप को कम करने पर फोकस हो। अर्थव्यवस्था को बम-बम रखने के लिए बुनियादी ढांचे पर ध्यान द‍िया जाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसके जरिये पॉलिटिकल मैसेज भी दिया जाएगा। ऐसे में मोदी सरकार ग्रोथ की पिच पर बैटिंग कर सकती है। इस कड़ी में उसकी ओर से खर्चों को काबू में रखने का नजरिया भी अपनाया जा सकता है।सिटीग्रुप के इकनॉमिस्‍ट समीरन चक्रवर्ती की मानें तो सरकार शायद चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश दे। वह खर्चों और आर्थिक मजबूती के बीच संतुलन बनाकर रख सकती है।

मसलन, सरकार महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए महिला किसानों को वार्षिक भुगतान दोगुना कर 12,000 रुपये कर सकती है। इसे लागू करने में सरकारी खजाने पर करीब 1,195 करोड़ का बोझ पड़ेगा। यह सरकार के कुल खर्च में एक छोटी रकम है। लेकिन, इसका मैसेज बहुत बड़ा होगा। सरकार सब्सिडी के मद में होने वाले खर्च को भी मौजूदा स्‍तर पर रख सकती है। मोदी सरकार पहले ही मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम को अगले पांच साल के लिए बढ़ा चुकी है। इसमें भी बहुत कम अतिरिक्त खर्च आएगा। कारण है कि सालों से यह सब्सिडी वाली स्‍कीम चली रही है।

सरकार अपने राजकोषीय घाटे को कम करने की कोशिश में है। यह खर्च और राजस्व के बीच का अंतर होता है। वह इसे चालू वित्तीय वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद के 5.9 फीसदी के लक्ष्य से कम से कम आधा फीसदी घटाना चाहती है।

सरकार से यह उम्‍मीद भी है कि वह युवाओं में बेरोजगारी को लेकर विपक्ष की आलोचना पर ध्यान देगी। बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च को जारी रखेगी। जबकि विदेशी और घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन के जरिये निवेश करने के लिए लुभाने की कोशिश करेगी। यह इस उम्मीद में किया जा सकता कि इससे नौकरियां पैदा होंगी। चुनावी साल में राजकोषीय घाटा कम होने की कोशिश से पता चलेगा कि सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए सामाजिक खर्च पर बहुत अधिक निर्भर नहीं हो सकती है। अलबत्‍ता, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर भरोसा कर रही है। इसने सत्तारूढ़ पार्टी को हाल के राज्य चुनावों में जीत हासिल करने में मदद की है।

सार्वजनिक खर्च के बूते भारत की अर्थव्यवस्था जुलाई-सितंबर तिमाही में 7.6 फीसदी बढ़ी। ऐसे में मोदी सरकार ग्रोथ की पिच पर बैटिंग कर सकती है। इस कड़ी में उसकी ओर से खर्चों को काबू में रखने का नजरिया भी अपनाया जा सकता है।सिटीग्रुप के इकनॉमिस्‍ट समीरन चक्रवर्ती की मानें तो सरकार शायद चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश दे। वह खर्चों और आर्थिक मजबूती के बीच संतुलन बनाकर रख सकती है।31 मार्च को समाप्त होने वाले पूरे वर्ष के लिए 7.3 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। यह प्रमुख अर्थव्यवस्‍थाओं में दुनिया की सबसे तेज रफ्तार है।

क्या एलन मस्क के प्रयोग से इंसानी दिमाग पर होगा मशीनों का राज?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एलन मस्क के प्रयोग से इंसानी दिमाग पर मशीनों का राज होगा या नहीं! एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने हाल ही में पहली बार किसी इंसान के दिमाग में ‘टेलीपैथी’ नाम का एक नया उपकरण लगाया है। इससे पहले भी ऐसे प्रयास हो चुके हैं, लेकिन न्यूरालिंक की टेक्नोलॉजी काफी अलग है। आमतौर पर इम्प्लांट की ऐसी कोशिशें दिमाग के ऊपर उपकरण फिट करने के लिए होती थीं। लेकिन न्यूरालिंक का ये चिप सीधे दिमाग के अंदर जाता है। ये चिप बहुत पतले तारों का इस्तेमाल करता है जो दिमाग की अलग-अलग कोशिकाओं से जुड़ सकते हैं। इससे भविष्य में हमें अपने दिमाग से ही मोबाइल फोन और कंप्यूटर चलाने में मदद मिल सकती है। खासकर, ये उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं कर पाते। हालांकि, न्यूरालिंक का असली मकसद इंसानों और कंप्यूटरों को एक-दूसरे से जोड़ना है। यानी भविष्य में हम सोचकर ही चीजों को कंट्रोल कर सकेंगे, ये मानो साइंस फिक्शन की फिल्मों जैसा लगता है। लेकिन अभी इसे लेकर काफी सवाल भी हैं। मसलन, कहीं इस टेक्नॉलजी का गलत इस्तेमाल तो नहीं होने लग सकता है? फिलहाल, ये टेक्नॉलजी शुरुआती दौर में है और इसके दूरगामी असर को समझने के लिए अभी और वक्त लगेगा।

अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तरक्की करता रहे जैसा कि कहा जा रहा है, तो न्यूरालिंक जैसे उपकरण इंसानों को पूरी तरह बदलकर रख सकते हैं। कल्पना कीजिए, हम सीधे ड्रोन, सेल्फ-ड्राइविंग कारों को भी अपने दिमाग से कंट्रोल कर सकेंगे। सुपर कंप्यूटर जैसा शतरंज खेल पाएंगे या प्रोटीन संरचना जैसे जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों की देखरेख कर सकेंगे।

ऐसा करना भी बहुत मुश्किल नहीं है, क्योंकि आज की तकनीक भी काफी हद तक ये कर सकती है। हम बिना तार के मोबाइल और लैपटॉप चलाते हैं, उनकी बैटरी भी बिना किसी तार के चार्ज करने की तकनीक पहले से मौजूद है ही। ऐसे में ये कल्पना करना मुश्किल नहीं कि भविष्य में हमारे दिमाग में लगा एक चिप आसपास के उपकरणों को कंट्रोल कर सकेगा और उसे बिना तार के ही चार्ज किया जा सकेगा। लेकिन ये टेक्नोलॉजी अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। न्यूरालिंक का कहना है कि वो 2024 में 11 लोगों पर ये चिप लगाएगा और इससे इस तकनीक को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इंसानों पर प्रयोग से पहले उन्होंने बंदरों पर टेस्ट किया था। यानी ये माना जा सकता है कि ये सर्जरी मेडिकल रूप से सुरक्षित है।

हालांकि, इस टेक्नोलॉजी के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। जैसे अगर किसी का दिमाग हैक हो जाए तो काफी खतरनाक हो सकता है। लेकिन कुल मिलाकर, ये डिवाइस दिव्यांग लोगों की जिंदगी को आसान बना सकते हैं, इसलिए इस पर रिसर्च जरूरी है। मगर ये टेक्नोलॉजी कुछ सवाल खड़े करती है, खासकर नैतिकता के लिहाज से।

न्यूरालिंक जैसी टेक्नोलॉजी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं: सुपर इंटेलिजेंस वाला AI: सबसे पहला सवाल ये है कि क्या सचमुच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतना ज्यादा उन्नत हो जाएगा कि वो इंसानों से भी ज्यादा तेज दिमाग वाला बन जाएगा? अभी तो ये सिर्फ एक अनुमान है। ये बेशक कई कामों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन क्या AI ही सामान्य बुद्धि जनरल इंटेलिजेंस में तब्दील हो जाएगा और इंसानों से ज्यादा जनरल इंटेलिजेंस वाल हो जाएगा? फिलहाल तो ये कहना मुश्किल है। इंसान और AI का मेल: दूसरा सवाल ये है कि क्या मेडिकल साइंस और न्यूरोलॉजी इतनी तरक्की कर पाएंगे कि इंसान और AI का मानसिक रूप से जुड़ाव हो सकेगा? तकनीकी तौर पर कंप्यूटरों को आपस में जोड़ना संभव है, क्योंकि हमारा दिमाग भी एक तरह का कंप्यूटर ही है। लेकिन इसमें दिमाग और शरीर से जुड़ी कई दिक्कतें आ सकती हैं। इसका पता लगाने के लिए अभी और रिसर्च करनी होगी।

तीसरा सवाल ये है कि अगर दिमाग में चिप लगा ली जाए तो क्या इंसान और भी ज्यादा बुद्धिमान बन जाएगा? क्या वो AI से भी ज्यादा समझदार हो पाएगा, या फिर इंसानी भावनाओं और व्यवहार को ज्यादा गहराई से समझ सकेगा? ताकत का ट्रांसफर? चौथा सवाल ये है कि क्या ये सुपर बुद्धिमान इंसान AI और बाकी इंसानों के बीच नैतिक मध्यस्थता कर पाएगा? या अगर जरूरत पड़ी तो क्या वो AI को काबू में रख पाएगा? ये सभी सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि न्यूरालिंक जैसी टेक्नोलॉजी भविष्य में काफी बदलाव ला सकती है। इसलिए इस पर गंभीरता से सोचना और रिसर्च करना जरूरी है। यहां तक कि अगर सब कुछ न्यूरालिंक के हिसाब से हो भी जाए, तब भी कई नैतिक सवाल उठते हैं।क्या ये सही है कि हम किसी के दिमाग में चिप लगाकर उसे ‘साइबर वंडर वूमन’ या ‘साइबर कैप्टन मार्वल’ बना दें? क्या ये गारंटी है कि ऐसा इंसान नैतिक होगा या ‘इंसानियत’ की तरफ खड़ा होगा?

क्या ताज से भी भव्य बनने वाली है अयोध्या की मस्जिद?

वर्तमान में अयोध्या की मस्जिद ताज से भी भव्य बनने वाली है! एक तीखे धार्मिक विवाद से पैदा हुए धर्मस्थल को भाई-चारे और समावेशी परिवेश का केंद्र बनाया जा सकता है? इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन आईआईसीएफ अयोध्या के धन्नीपुर में बनाई जा रही मस्जिद से ऐसी ही उम्मीद कर रहा है। अयोध्या के प्रसिद्ध बाबरी मस्जिद विवाद में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए अलग जगह देने का आदेश दिया था। इसके बाद अयोध्या से 25 किमी दूर धन्नीपुर में आईआईसीएफ मस्जिद के साथ-साथ अस्पताल, वृद्धाश्रम और स्कूल के निर्माण पर काम कर रहा है। फाउंडेशन ने तय किया है कि इस मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं बल्कि पैगंबर मोहम्मद साहब के पिता मुहम्मद बिन अब्दुल्ला के नाम पर रखा जाएगा। धन्नीपुर गांव में 11 एकड़ की जगह को ‘दवा’ और ‘दुआ’ का बहुसांस्कृतिक स्थल बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मस्जिद बोर्ड को सरकार से 5 एकड़ जमीन मिली थी। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उसके साथ 6 एकड़ का प्लॉट और जोड़ दिया है। आईआईसीएफ यहां पर 500 बिस्तरों वाला एक कैंसर अस्पताल, 2 कॉलेज, 1 वृद्धाश्रम और एक पूर्ण शाकाहारी रसोईघर के अलावा बगीचों और फव्वारों के बीच भव्य मस्जिद बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

मस्जिद डिवेलपमेंट समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष हाजी अरफात शेख चाहते हैं कि यह एक ऐसी जगह हो जहां सभी धर्मों के लोग आना चाहें। उन्होंने कहा कि शाकाहारी कैंटीन, अस्पताल, कॉलेज सभी सही फैसले हैं। इससे सभी धर्मों के लोगों को यहां भोजन मिलेगा। कोई भी भूखा नहीं लौटेगा। ये जगह पर्याप्त सब्सिडी वाले मॉडर्न एजुकेशन और चिकित्सा का केंद्र भी होगा। मुंबई के भाजपा नेता और महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष शेख ने कहा कि आईआईसीएफ धन्नीपुर में भव्य मस्जिद के लिए धन जुटाएगा, जो “भव्यता में ताजमहल को भी मात देगा। वे इस महीने क्यूआर कोड-आधारित क्राउडफंडिंग ऑपरेशन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि लोग सड़कों पर खड़े हों और मस्जिद के लिए दान मांगें, इसमें हर भारतीय योगदान दे सकेगा, पैसा कैसे और कहां खर्च किया जाए, इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। दानकर्ता मस्जिद निर्माण के लिए एक-एक ईंट भी दान कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हर ईंट को एक नंबर दिया जाएगा और दानदाताओं को सूचित किया जाएगा कि मस्जिद में उनकी ईंट कहां रखी गई है। शेख ने कहा कि इसके लिए लागत अभी तय नहीं की गई है।

मस्जिद में पांच मीनारें होंगी जो इस्लाम के पांच केंद्रीय सिद्धांतों कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसके प्रार्थना कक्ष में एक समय में 9,000 लोगों के लिए जगह होगी, जो संभवतः दिल्ली की जामा मस्जिद के बाद भारत में दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद होगी। जामा मस्जिद में एक साथ 25,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है। मस्जिद को लेकर चर्चा का एक विषय भगवा रंग में बंधी 21 बाई 36 फीट की कुरान है। यह रंग अजमेर के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के साथ जुड़ा हुआ है जो मुसलमानों के बीच ‘चिश्तिया’ के नाम से जाने जाते थे। शेख ने बताया कि अगर आपको याद हो तो गरीब नवाज (चिश्ती) की शॉल और पगड़ी चिश्तिया हैं।

शेख ने मस्जिद का जो डिजाइन शेयर किया है, उसमें एक पूरी तरह से सफेद संगमरमर की मस्जिद दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, मस्जिद बनाने में अन्य पत्थरों का भी उपयोग किया जाएगा। डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है क्योंकि कुछ लोगों ने बदलाव की मांग की है। बावजूद इसके मस्जिद देखने लायक होगी। यह ताज से भी ज्यादा खूबसूरत होगा। शेख चाहते हैं कि सभी धर्मों के लोग यहां आएं। पर्यटकों के लिए एक बड़े मछलीघर की योजना बनाई गई है और दिन की आखिरी नमाज के साथ फव्वारे जीवंत हो उठेंगे।

उन्होंने कहा कि यहां उन सभी निर्दोष लोगों के लिए प्रार्थना करने की जगह होगी जो बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दौरान हुई झड़पों के दौरान मारे गए थे। कॉलेजों को लेकर शेख ने कहा कि यहां पर सभी धर्मों और बैकग्राउंड के छात्रों को प्रवेश मिलेगा। हालांकि उन्होंने मुसलमानों के लिए कम कटऑफ पर फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हम उम्रदराज़ मुस्लिम छात्रों, विशेषकर लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। हालांकि सरकार ने खुद ही धन्नीपुर में मस्जिद के लिए जमीन आवंटित की है, लेकिन मस्जिद समिति इस बात को लेकर आश्वस्त होना चाहती है कि वह किसी विवाद में न पड़े। शेख ने कहा कि मस्जिद निर्माण का काम शुरू करने से पहले हम चाहेंगे कि राज्य सरकार हमें एक प्रमाण पत्र दे जिसमें कहा गया हो कि भूमि का मालिकाना हक साफ है। हम यहां बाबरी मस्जिद की पुनरावृत्ति नहीं चाहेंगे। परियोजना के डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है और मंजूरी के लिए यूपी सरकार को प्रस्ताव भी लगभग तैयार है। उन्होंने कहा कि हम इस साल फरवरी में साइट पर अपना निर्माण कार्यालय खोलेंगे और मई में रमज़ान के बाद निर्माण शुरू करेंगे।”

मस्जिद की पहली ईंट एक भव्य समारोह में रखी जाएगी। शेख ने कहा कि मस्जिद के नाम और उस पर लिखी ‘दुआ’ वाली एक बड़ी ईंट को देश भर की मस्जिदों में आशीर्वाद देने के बाद एक जुलूस के रूप में धन्नीपुर लाया जाएगा। शेख ने कहा कि संत सरकार पीर आदिल, जिनकी कब्र बीजापुर में है, उनके एक वंशज के हाथों मुंबई से नींव के लिए पहली ईंट लाई जाएगी। हम सब ट्रेन से अयोध्या जाएंगे और प्रत्येक स्टेशन पर ईंट की पूजा की जाएगी।

उन्होंने बताया कि मस्जिद का निर्माण पांच से छह साल तक चल सकता है और ट्रस्ट मस्जिद में पहली नमाज के लिए मक्का से इमाम को बुलाएगा। यह पूछे जाने पर कि क्या उनका मानना है कि मस्जिद सभी धर्मों के लोगों को एक साथ ला सकती है, शेख ने कहा कि ये वो प्रतिबद्धता है जो उन्होंने और आईआईसीएफ ने खुद से की है। मुझे उम्मीद है कि हम पुराने घावों को भरने और उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ने में सक्षम हैं।

क्या अयोध्या में होने जा रहा है मस्जिद निर्माण?

वर्तमान में अयोध्या में मस्जिद निर्माण होने वाला है! उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला का धाम बनने के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां उमड़ रही है। वहीं, धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनी इस नगरी में एक और धार्मिक स्थल का निर्माण कराने की योजना तैयार की गई है। प्रभु रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा और राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अब धन्नीपुर मस्जिद के निर्माण की योजना पर कार्य तेज हो गया है। धन्नीपुर मस्जिद विकास समिति के प्रमुख और इंडो- इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सदस्य हाजी अरफात शेख ने कहा कि मस्जिद का निर्माण इस साल अप्रैल से शुरू होगा। धन्नीपुर मस्जिद के नवनिर्मित ब्लूप्रिंट को उन्होंने एक मीडिया चैनल से साझा किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की पहली मस्जिद होगी, जिसमें पांच मीनारें और दुबई से भी बड़ा एक मछलीघर होगा। आईआईसीएफ यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बाबरी मस्जिद के बदले आवंटित पांच एकड़ भूमि पर मस्जिद के निर्माण की देखरेख के लिए गठित ट्रस्ट है। हाजी अरफात शेख को यूपी के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने धन्नीपुर में मस्जिद के विकास के लिए नामित किया था। हाजी शेख भाजपा नेता और महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं, जिन्होंने कई सामाजिक पहल की हैं। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पांच एकड़ जमीन आवंटित किए हुए काफी लंबा समय हो गया है। राम मंदिर का निर्माण हाल ही में पूरा कराया गया है। इसके बाद भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन 22 जनवरी को किया गया। इसके बाद से धन्नीपुर मस्जिद के निर्माण की योजना पर कार्य किया जा रहा है। देश ने भगवान राम की मूर्ति की भव्य प्रतिष्ठा और अयोध्या मंदिर के उद्घाटन का गवाह बनाया।

हाजी अरफात शेख ने मस्जिद निर्माण पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि यह एक बड़ी परियोजपना है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि पवित्र मस्जिद की स्थापना के इस कार्य के लिए मुझे 25 करोड़ मुसलमानों में से चुना गया है। उन्होंने दावा किया कि यह मस्जिद इस्लामी संरचना का उत्कृष्ट नमूना होगी। हम इसे दुनिया की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में से एक के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। ऐसी परियोजनाओं में समय लगता है। आखिरकार इस रमजान के बाद काम शुरू कराया जाएगा। इस बीच हम तकनीकी और अन्य संबंधित औपचारिकताओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले स्ट्रक्चर का नाम धन्नीपुर मस्जिद था। कुछ लोगों ने मस्जिद- ए- अमन नाम भी सुझाया। इसका नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी मौलवी अहमदुल्ला शाह फैजाबादी के नाम पर रखा गया।

धन्नीपुर मस्जिद का नाम अब बदलकर मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद कर दिया गया है। हाजी शेख ने कहा कि मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद अंतिम नाम है। उन्होंने बताया कि पवित्र नाम का गहरा महत्व है। इसमें हमारे प्यारे पैगंबर मोहम्मद के पिता का नाम शामिल है। यह धन्य नाम राष्ट्र को विपत्तियों से बचाने और उसके सभी लोगों को ब्लेसिंग देने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि एक दिन दुनिया खत्म हो जाएगी। लेकिन, यह पवित्र मस्जिद प्रकाश की किरण के रूप में अपनी चमक बिखेरता रहेगा। यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि सीमाओं के पार तक अपनी चमक से लोगों को प्रकाशमान करेगा।

मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद को लेकर हाजी शेख ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद मुसलमानों के लिए एक पवित्र जगह होगी। विशेष रूप से सुन्नियों, शियाओं, तब्लीगियों के लिए विशेष जगह के स्थान पर सभी वर्गों के लिए यहां कोई भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अभी मुसलमान संप्रदायों में विभाजित हो गया हैं। यह मस्जिद सांप्रदायिक विभाजन को पाट देगी। यह मस्जिद अपनी विशेषताओं के लिए जानी जाएगी। 340 फीट की ऊंचाई तक पांच मीनारें यहां होंगी। ये मीनारें इस्लाम के पांच सिद्धांतों- शाहदा विश्वास की घोषणा, सलाह प्रार्थना या नमाज, सॉम उपवास या रोजा, जकात दान और हज को प्रदर्शित करेंगी। हाजी अरफात शेख ने कहा कि यह मस्जिद मुस्लिम भाइयों के लिए पवित्र स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मस्जिद दो भागों में विभाजित की जाएगी। इसमं बेसमेंट क्षेत्र और ग्राउंड फ्लोर का निर्माण किया जाएगा। बेसमेंट में एक मल्टीपरपस हॉल होगा। वहीं, ग्राउंड फ्लोर पर एक विशाल नमाज हॉल होगा, जिसमें एक समय में 9,000 से अधिक नमाजियों को नमाज पढ़ने की सुविधा होगी। नमाज हॉल में पांच प्रवेश होंगे। यह पूरी तरह से नमाज अदा करने के लिए होगा। महिला नमाजियों के लिए भी खास इंतजाम हैं। सीढ़ियों और एक छोटी खिड़की के साथ ऊंची मीनारें, मस्जिद के नए डिजाइन का एक अनिवार्य हिस्सा होंगी।

इस्लामिक वास्तुकला की एक और अनिवार्य विशेषता डोम, नए डिजाइन के अनुसार प्रस्तावित मस्जिद का हिस्सा होगी। दीवारों पर अरबी सुलेख लिपियां या कुरान की आयतें अंकित की जाएंगी। हमने मस्जिद के ताले और चाबी के डिजाइन पर भी विशेष ध्यान दिया है। सजावटी लकड़ी के काम के साथ-साथ दीवार के अंदरूनी और बाहरी हिस्से पर प्लास्टर का काम होगा, जो संरचना को और अधिक सुंदर बना देगा। बगीचे और फव्वारे और जलाशयों के साथ भव्य आंगन शामिल हैं। नमाजियों को नमाज अदा करने से पहले स्नान करने में मदद करेंगे।

मस्जिद में शुद्ध शाकाहारी रसोईघर होगा। यह अजमेर शरीफ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। हाजी शेख ने कहा कि शाकाहारी सामुदायिक रसोई चलाने के पीछे हमारा उद्देश्य लोगों को इस्लाम की शिक्षाओं से अवगत कराना है जो पूरी तरह से प्रेम और शांति फैलाने में विश्वास करता है। हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम ख्वाजा गरीब नवाज को मानने वाले हैं, बाबर के नहीं, जो भारत को लूटने आया था। 5000 से अधिक लोग रसोई में ताजा पका हुआ शाकाहारी भोजन खा सकते हैं जो अनंत काल तक क्रियाशील रहेगा। मस्जिद में 500 बेड का अस्पताल भी बनाया जाएगा। यह कैंसर अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा।

आखिर क्या है चुनाव के लिए अखिलेश यादव का नया दाव?

आज हम आपको अखिलेश यादव का चुनाव के लिए अपनाया गया नया दाव बताने वाले हैं! लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर समाजवादी पार्टी की प्रत्याशियों की पहली लिस्ट सामने आ चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 16 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में पत्नी डिंपल यादव, चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव के टिकट फाइनल कर दिए हैं। वहीं बसपा और कांग्रेस से आए कुछ नेताओं को भी टिकट का उपहार मिला है। प्रत्याशी ऐलान के अखिलेश के इस कदम को एक तरफ इंडिया गठबंधन की आपसी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस ऐलान को कहीं न कहीं भाजपा के दांव से उस पर ही मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश से भी जोड़ा जा रहा है। पहले बात करते हैं इंडिया गठबंधन की। समाजवादी पार्टी की लिस्ट पर नजर डालें तो इस लिस्ट में कुछ ऐसे नेताओं को भी टिकट दिया गया है, जो कुछ समय पहले कांग्रेस छोड़कर पार्टी में पहुंचे हैं। इनमें अन्नू टंडन का नाम सबसे ऊपर है। अन्नू टंडन पुरानी कांग्रेसी मानी जाती हैं। उन्नाव से वह सांसद भी रह चुकी हैं। हालांकि इस सीट पर अब भाजपा के साक्षी महाराज सांसद हैं। 2019 के लाेकसभा चुनाव में अन्नू टंडन कांग्रेस से प्रत्याशी थीं और तीसरे स्थान पर रही थीं। समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। अब अन्नू टंडन को सपा से टिकट मिला है। इसी तरह अकबरपुर लोकसभा सीट से सपा ने राजाराम पाल को प्रत्याशी बनाया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजाराम कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। वह तीसरे नंबर पर रहे थे। उस चुनाव में ये सीट सपा-बसपा गठबंधन के तहत बसपा के खाते में गई थी। बसपा दूसरे नंबर पर रही थी और जीत भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले की हुई थी।

इसी तरह से समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को झटका देते हुए फर्रूखाबाद से डॉ नवल किशोर शाक्य को प्रत्याशी बना दिया है। फर्रूखाबाद सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद चुनाव लड़ते रहे हैं। 2019 में सलमान खुर्शीद तीसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट पर भी गठबंधन के तहत बसपा ने मनोज अग्रवाल को टिकट दिया था, जो दूसरे नंबर रहे थे। भाजपा के मुकेश राजपूत ने यहां से जीत दर्ज की थी। इसी तरह से कांग्रेस लखनऊ लोकसभा सीट पर भी हर बार जोर लगाती रही है। पिछली बार प्रमोद कृष्णम को यहां से प्रत्याशी बनाया गया था। लेकिन काफी कोशिश के बाद भी कांग्रेस यहां तीसरे स्थान पर रही थी। पिछली बार सपा-बसपा गठबंधन के तहत इस सीट पर सपा ने पूनम सिन्हा को मैदान में उतारा था लेकिन वह भी दूसरे स्थान पर ही रही थीं। इस बार समाजवादी पार्टी ने आगे बढ़ते हुए पहले ही रविदास मेहरोत्रा काे प्रत्याशी ऐलान कर दिया है। अब देखना ये होगा कि क्या कांग्रेस इन्हें समर्थन देती है?

ये ताे रही इंडिया गठबंधन की बात भाजपा की बात करें तो वह प्रत्याशियों का ऐलान हमेशा से पहले करती रही है। हाल ही में हुए राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब भाजपा ने छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश चुनाव में पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा कर मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली थी। यूपी में वैसे तो बहुजन समाज पार्टी का सबसे पहले प्रत्याशियों के ऐलान का इतिहास रहा है। कई बार तो ये स्थिति देखी गई जब चुनाव के कई महीने पहले ही प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया गया और चुनाव आते-आते दो बार टिकट बदल भी दिया गया। इसी तरह अकबरपुर लोकसभा सीट से सपा ने राजाराम पाल को प्रत्याशी बनाया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजाराम कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। वह तीसरे नंबर पर रहे थे। उस चुनाव में ये सीट सपा-बसपा गठबंधन के तहत बसपा के खाते में गई थी। बसपा दूसरे नंबर पर रही थी और जीत भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले की हुई थी।लेकिन पिछले कुछ चुनावों से बसपा का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। इस बार समाजवादी पार्टी ने आगे बढ़ते हुए पहले ही रविदास मेहरोत्रा काे प्रत्याशी ऐलान कर दिया है। अब देखना ये होगा कि क्या कांग्रेस इन्हें समर्थन देती है?इसका सीधा असर टिकट बंटवारे में भी देखने को मिलता रहा है। बहरहाल, जानकारों के अनुसार अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सबसे पहले टिकट का ऐलान कर सभी दलों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने की कोशिश जरूर की है। अब इसका कितना लाभ चुनाव में मिलेगा ये देखने वाली बात है।

क्या हिमाचल से चुनाव लड़ सकता है गांधी परिवार?

गांधी परिवार इस बार हिमाचल से चुनाव लड़ सकता है! राज्यसभा चुनाव के लिए सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा है। इस तरह की अटकलें हैं कि गांधी परिवार से कोई व्यक्ति हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट के लिए चुनाव लड़ सकता है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मंगलवार को यह कहकर चर्चा को बढ़ा दिया कि यदि उनकी इच्छा हो तो सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा राज्य से राज्यसभा के लिए चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि ‘यह संभव है। हम उनसे चर्चा करेंगे और अगर उन्हें यह उचित लगेगा तो यह सीट उन्हें दी जा सकती है। पांच बार लोकसभा सांसद रहीं और अब रायबरेली का प्रतिनिधित्व कर रहीं सोनिया ने पिछले कुछ समय से लगातार बीमार रही हैं। स्वास्थ्य कारणों से रोजमर्रा की राजनीति गतिविधियों में उतनी सक्रिय नजर नहीं आती हैं। संभव है कि वह इस बार रायबरेली से चुनाव भी ना लड़ें। हाालंकि, इस संबंध में अभी तक आधिकारिक रूप से पार्टी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। ऐसे में यदि वह राज्यसभा का विकल्प चुनती हैं, तो मुख्य सवाल यह होगा कि क्या प्रियंका लोकसभा चुनाव में उनकी जगह लेंगी। प्रतिभा के सकारात्मक बयान को देखते हुए दूसरी संभावना यह है कि प्रियंका गांधी राज्यसभा में आएंगी। वहीं, सोनिया फिर से पारिवारिक क्षेत्र से चुनाव लड़ सकती हैं। सोनिया गांधी ने वर्ष 2019 के आम चुनाव में रायबरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था जबकि प्रियंका गांधी न तो लोकसभा से सांसद हैं और न ही राज्यसभा की सदस्य।

हिमाचल प्रदेश की एक सीट सहित राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है। कांग्रेस के पास 68 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 40 सीट हैं। राज्यसभा की यह सीट दो अप्रैल को नड्डा के छह साल के कार्यकाल की समाप्ति के बाद खाली हो रही है जो राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद 2018 में चुने गए थे। राज्य में इस एकमात्र सीट के लिए मतदान अगले महीने राज्य विधानसभा के बजट सत्र 14 से 29 फरवरी के दौरान होगा। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। फिलहाल राज्य की तीनों राज्यसभा सीट बीजेपी के पास हैं। नड्डा के अलावा, राज्य से दो अन्य राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी और सिकंदर कुमार हैं।

गौरतलब है कि सोनिया गांधी 5 बार की लोकसभा सांसद हैं। अभी वो रायबरेली से कांग्रेस की सांसद हैं। हाल के दिनों में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने रोजाना के राजनीतिक गतिविधियों से दूर कर लिया है। अगर वह राज्यसभा सीट के लिए अपनी मंजूरी देती हैं तो बड़ा सवाल ये होगा कि क्या प्रियंका रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी? हालांकि, प्रतिभा सिंह के बयान से लगता है कि एक और स्थिति ये हो सकती है कि प्रियंका गांधी राज्यसभा चली जाएं और सोनिया गांधी रायबरेली से फिर से चुनाव मैदान में उतरें।

हिमाचल की ये सीट 2 अप्रैल को खाली हो रही है। जेपी नड्डा का 6 साल का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। यही नहीं बता दे कि कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा। पीएम मोदी ने राम-राम के जरिए विपक्ष को इशारा तो कर ही दिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति के भाषण में तीन जगह राम मंदिर का जिक्र इतना बताने के लिए काफी है कि जब पीएम मोदी चुनाव प्रचार को उतरेंगे तो उनका रुख किस तरफ होगा। बीजेपी ने कुछ दिन पहले ही अपने एक्स हैंडल पर संकल्प से लेकर सिद्धि तक की तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें टेंट में रामलला से लेकर राम मंदिर में बाल राम की मूर्ति को दिखाया गया है। बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा काफी बड़ा था। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण हुआ तो बीजेपी के लिए ये किसी बड़े आशीर्वाद से कम नहीं रहा। 

2018 में बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद वह इस सीट से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। बजट सत्र 14 से 29 फरवरी के दौरान होगा। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। फिलहाल राज्य की तीनों राज्यसभा सीट बीजेपी के पास हैं। नड्डा के अलावा, राज्य से दो अन्य राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी और सिकंदर कुमार हैं।इस समय राज्य की सभी तीन सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। माना जा रहा है कि अगर सोनिया या प्रियंका ने अपनी सहमति दे दी तो हिमाचल से वो राज्यसभा जा सकते हैं।

पीएम मोदी ने बजट के दौरान क्या दिया है इशारा?

हाल ही में पीएम मोदी ने बजट के दौरान एक इशारा दे दिया है! बजट सत्र के ठीक पहले संसद भवन के बाहर पीएम नरेंद्र मोदी की राम-राम और संसद के भीतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही बीजेपी इस मुद्दों को हर मंच पर उठा रही है। बीजेपी के घोषणापत्र का सबसे बड़े मुद्दों में से एक राम मंदिर के पूरा होने के बाद भगवा दल इसके जरिए 24 की चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। बजट सत्र से पहले पीएम मोदी ने पत्रकारों से बातचीत में विपक्षी सांसदों को जमकर सुना दिया। पीएम ने कहा कि संसद में हुड़दंग करने वाले सांसदों के पास बजट सत्र में पश्चाताप का मौका है। अपनी बात खत्म कहते हुए उन्होंने सबको राम-राम भी कह दिया। पीएम के इस संबोधन को विशेषज्ञ चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। पीएम जिस आक्रामक मूड में विपक्ष पर निशाना साधा वो निश्चित ही बीजेपी के लोकसभा चुनाव की तैयारी को दिखाने के लिए काफी है। राम-राम के जरिए पीएम मोदी ने देश की जनता तक संदेश दे दिया कि इस चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा बेहद अहम रहने वाला है।

बीजेपी के घोषणापत्र का सालों से बेहद अहम हिस्सा रहे राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही बीजेपी इसका फायदा उठाने की तैयारी में है। सभी राज्यों से बीजेपी यूनिट हजारों लोगों को राम मंदिर के दर्शन कराने का प्लान बना चुकी है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान बीजेपी ने देश के घर-घर में अक्षत बंटवा दिया। जाहिर है पार्टी की तैयारी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की है। पीएम मोदी राम मंदिर उद्घाटन के मुख्य यजमान थे। 2024 लोकसभा चुनाव के एनडीए के पीएम पद का वही चेहरा हैं। मतलब साफ है कि राम के रथ पर भगवा दल संसद के तट तक पहुंचना चाहती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण की इच्छा सदियों से थी आज ये साकार हो चुका है। उनके इतना बोलते ही सदन में जय श्रीराम के उद्घोष तैरने लगा। अपने भाषण के मध्य में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या में 5 दिन में 13 लाख श्रद्धालु गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या धाम में ही प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 दिनों में ही 13 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए जा चुके हैं। इसके बाद सदस्यों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सभ्यता के कालखंड में ऐसे समय आते हैं जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस साल 22 जनवरी को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा में अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजमान हैं। ये करोड़ों देशवासियों की इच्छा और आस्था का प्रश्न था।

कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा। पीएम मोदी ने राम-राम के जरिए विपक्ष को इशारा तो कर ही दिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति के भाषण में तीन जगह राम मंदिर का जिक्र इतना बताने के लिए काफी है कि जब पीएम मोदी चुनाव प्रचार को उतरेंगे तो उनका रुख किस तरफ होगा। बीजेपी ने कुछ दिन पहले ही अपने एक्स हैंडल पर संकल्प से लेकर सिद्धि तक की तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें टेंट में रामलला से लेकर राम मंदिर में बाल राम की मूर्ति को दिखाया गया है। बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा काफी बड़ा था। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण हुआ तो बीजेपी के लिए ये किसी बड़े आशीर्वाद से कम नहीं रहा।

पिछले 10 सालों में मोदी सरकार ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए ओबीसी, ईबीसी, एससी और एसटी जातियों को साध लिया है। मंडल के नाम से जाने जानी वाली ये जातियां इन दिनों बीजेपी की कोर वोटर में शामिल है। अब राम मंदिर के जरिए बीजेपी अपने उन वोटरों को भी साध चुकी है जो कमंडल के जरिए उससे जुड़ी थी। यानी 24 के चुनाव में विकास से राम तक या यों कहें मंडल से कमंडल के साथ बीजेपी चुनावी मैदान में उतरेगी। पीएम मोदी ने आज उसका साफ-साफ इशारा कर दिया है।

बजट से पहले क्या बोली राष्ट्रपति मुर्मू?

आज हम आपको बताएंगे कि बजट से पहले राष्ट्रपति मुर्मू क्या बोली है! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 17वीं लोकसभा के अंतिम सत्र को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने नरेंद्र मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। महामहिम ने राम मंदिर, आर्टिकल 370, तीन तलाक और युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए मोदी सरकार की योजनाओं एवं कामों का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र से लेकर शिक्षा क्षेत्र में मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से ‘सदियों की आकांक्षा पूरी होने’ जैसा है। उन्होंने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण की इच्छा सदियों से थी आज ये साकार हो चुका है। उनके इतना बोलते ही सदन में जय श्रीराम के उद्घोष तैरने लगा। अपने भाषण के मध्य में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या में 5 दिन में 13 लाख श्रद्धालु गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या धाम में ही प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 दिनों में ही 13 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए जा चुके हैं। इसके बाद सदस्यों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सभ्यता के कालखंड में ऐसे समय आते हैं जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस साल 22 जनवरी को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा में अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजमान हैं। ये करोड़ों देशवासियों की इच्छा और आस्था का प्रश्न था।

राष्ट्रपति ने विश्व की वर्तामान परिस्थितियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि संक्रमण काल में एक मजबूत सरकार होने का क्या मतलब होता है, ये हमने देखा है। बीते 3 वर्षों से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दरारें पड़ गई हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘इस कठिन दौर में, मेरी सरकार ने, भारत को विश्व-मित्र के रूप में स्थापित किया है। विश्व मित्र की भूमिका के कारण ही आज हम ग्लोबल साउथ की आवाज़ बन पाए हैं।’ उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण कानून लागू होने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार नारी शक्ति का सामर्थ्य बढ़ाने के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। मुर्मू ने कहा कि तीन दशक बाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने के लिए मैं आपकी सराहना करती हूं। इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि यह महिला नीत विकास के सरकार के संकल्प को मजबूत करता है और सरकार ने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ की अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी को लेकर युवाओं की चिंता से अवगत है, इसलिए ऐसे गलत तरीकों पर सख्ती के लिए नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘सरकार मानती है कि विकसित भारत की भव्य इमारत 4 मजबूत स्तंभों पर खड़ी होगी। ये स्तंभ हैं – युवाशक्ति, नारीशक्ति, किसान और गरीब। देश के हर हिस्से, हर समाज में इन सभी की स्थिति और सपने एक जैसे ही हैं। इसलिए इन 4 स्तंभों को सशक्त करने के लिए मेरी सरकार निरंतर काम कर रही है। भारत द्वारा विज्ञान एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में की गई शानदार प्रगति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार AI मिशन पर काम कर रही है जिससे नये स्टार्ट अप्स के लिए संभावनाएं खुलेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार AI मिशन पर काम कर रही है जिसके कारण भारत के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम’ से डिजिटल स्पेस और सुरक्षित होने वाला है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन अधिनियम से देश में अनुसंधान को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यस्थाओं में से एक बनाया है। इससे करोड़ों युवाओं को रोज़गार मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का एक और बड़ा सुधार डिजिटल इंडिया का निर्माण है। डिजिटल इंडिया ने भारत में जीवन और व्यापार, दोनों को बहुत आसान बना दिया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वास्थ क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना, जन औषधि केंद्र, मुफ्त डायलिसिस अभियान समेत अनेक योजनाओं के कारण देश के नागरिकों के हजारों करोड़ रुपये खर्च होने से बचे हैं और इनका देश के नागरिकों के पूरे जीवन-चक्र पर सकारात्मक असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थस्थलों के विकास के लिए जो काम किए हैं उससे देश में तीर्थयात्रा आसान हुई है, वहीं दुनिया भी भारत में ‘हैरिटेज टूरिज्म’ को लेकर आकर्षित हुई है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में आठ करोड़ से अधिक लोग काशी गए हैं। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ से अधिक लोगों ने उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि 19 लाख से अधिक लोगों ने केदारनाथ धाम की यात्रा की है। राष्ट्रपति ने बताया कि अयोध्याधाम में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पांच दिन में 13 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

पीएम मोदी की परीक्षा पर चर्चा का क्या होता है मकसद?

आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी की परीक्षा पर चर्चा का मकसद क्या होता है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जनवरी को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बातचीत की। बातचीत के दौरान परीक्षा के तनाव को कम करने और परीक्षा की रणनीति पर चर्चा होगी। परीक्षा पे चर्चा 2024 के लिए रेकॉर्ड एक करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूली छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का यह सातवां संस्करण होगा। इस वर्ष यह कार्यक्रम 29 जनवरी को सुबह 11 बजे से भारत मंडपम, प्रगति मैदान में होगा। कार्यक्रम में लगभग 4000 प्रतिभागी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे। हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से दो छात्रों और एक शिक्षक के अलावा कला उत्सव और वीर गाथा प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। आजकल तो पूरा परिवार मोबाइल में लगा रहता है, घर में बराबर में बैठकर एक दूसरे को मैसेज करते हैं। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए पूरे परिवार को नियम बनाने होंगे। हम खाने के वक्त कोई गैजेट्स का इस्तेमाल न करें, ऐसा नियम बना सकते हैं। टेक्नोलॉजी से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसका सही उपयोग सीखना बेहद जरूरी है। हमारे मोबाइल पर लगा पासवर्ड परिवार के सभी सदस्यों को पता होगा, तो काफी सुधार हो जाएगा। इसके अलावा हमें स्क्रीन टाइम अलर्ट को मॉनीटर करना चाहिए।

परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की शुरुआत साल 2018 में की गई थी। उसके बाद से हर साल, कभी ऑनलाइन मोड में तो कभी ऑफलाइन मोड में इसका आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) कार्यक्रम 29 जनवरी को ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा, जहां प्रधानमंत्री देश और विदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत करेंगे। पीएम मोदी से सवाल पूछने के लिए छात्र, अभिभावक और टीचर्स वर्चुअल मोड में भी कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।

यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें देश और विदेश दोनों के ही छात्र, शिक्षक और अभिभावक प्रधानमंत्री मोदी के साथ परीक्षाओं और स्कूली जीवन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा करते हैं। परीक्षा पे चर्चा युवाओं के लिए तनाव मुक्त माहौल तैयार करने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बड़ी पहल ‘एग्जाम वॉरियर्स’ का हिस्सा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों का एग्जाम प्रेशर कम करना है। बोर्ड परीक्षा 2024 से पहले छात्रों में तनाव होना स्वाभाविक है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम के जरिए उसे कम करने की कोशिश करते हैं। वह बच्चों को बोर्ड परीक्षा में बेस्ट मार्क्स स्कोर करने के टिप्स देते हैं, उन्हें मोटिवेट करते हैं और उनके सवालों के जवाब भी देते हैं।

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस खास कार्यक्रम में भाग लेने और प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करने के लिए छात्रों में बहुत उत्‍साह है। देशभर के साथ-साथ विदेशों से भी छात्र, अभिभावक और शिक्षक परीक्षाओं और स्कूल के बाद के जीवन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा करने के लिए पीएम के साथ बातचीत करते हैं। ​चेन्नई के एक छात्र ने पीएम मोदी से सवाल किया कि वो प्रधानमंत्री के रूप में बड़े-बड़े प्रेशर कैसे हैंडल कर पाते हैं? इसके जवाब देते हुए पीएम मोदी ने हंसते हुए छात्र से पूछा कि क्या आप भी PM बनना चाहते हैं। पीएम ने कहा कि मैं चुनौतियों को ही चुनौतियां देता हूं। मैं मानता हूं कि कुछ भी क्यों न हो, मेरे साथ 140 करोड़ देशवासियों का साथ है। हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से दो छात्रों और एक शिक्षक के अलावा कला उत्सव और वीर गाथा प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। आजकल तो पूरा परिवार मोबाइल में लगा रहता है, घर में बराबर में बैठकर एक दूसरे को मैसेज करते हैं। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए पूरे परिवार को नियम बनाने होंगे। हम खाने के वक्त कोई गैजेट्स का इस्तेमाल न करें, वह बच्चों को बोर्ड परीक्षा में बेस्ट मार्क्स स्कोर करने के टिप्स देते हैं, उन्हें मोटिवेट करते हैं और उनके सवालों के जवाब भी देते हैं।ऐसा नियम बना सकते हैं।मैं अपनी शक्ति देश के सामर्थ्य बढ़ाने में लगा रहा हूं।परीक्षा पे चर्चा 2024 के लिए अब तक MyGov पोर्टल पर एक करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं, जबकि 2023 में 38.80 लाख प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।