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जानिए कितनी खतरनाक है सर्वाइकल कैंसर की बीमारी?

आज हम आपको बताएंगे कि सर्वाइकल कैंसर की बीमारी कितनी खतरनाक है! केंद्र सरकार ने इस बार के अंतरिम बजट में महिलाओं की सेहत को लेकर काफी ध्यान देने की बात कही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए एक बड़ा ऐलान किया था। बजट भाषण के दौरान निर्मला ने घोषणा की कि देशभर में इसके लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। हाल के बरसों में सर्वाइकल कैंसर एक महामारी की तरह बढ़ रहा है। मशहूर मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से मौत ने इस बीमारी के खतरे को बताने के लिए काफी है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देशभर में 9-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में HPV वैक्सीन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्य मकसद सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की शुरुआत मिशन इंद्रधनुष के जरिए किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर के कारण हर साल हजारों महिलाओं की जान जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। अगर सही उम्र में इस वैक्सीन को लगवा लिया जाए तो इस गंभीर बीमारी को 98 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच होनी चाहिए। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसर और दुनिया भर में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस के संक्रमण की वजह से होता है। सर्वाइकल कैंसर को रोकने के कई तरीके हैं। उनमें वैक्सीनेशसन सबसे ज्यादा कारगर है। यूट्रस के सर्विक्स में होता है। ये बीमारी कितना खतरनाक है कि आप इससे समझ सकते हैं कि इसके कोई लक्षण भी जल्दी नहीं दिखते हैं। बाद में केवल जांच पर ही इस बीमारी का पता चलता है। दुनिया के कई देशों में इस बीमारी से बचने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगवाई जाती है।

मशहूर मॉडल पूनम पांडे की मौत भी सर्वाइकल कैंसर की वजह से हुई है। वो महज 32 साल की थीं। इससे आप समझ सकते हैं कि ये बीमारी किसी भी उम्र में महिलाओं को जकड़ लेती है। अगर इस बीमारी से बचना है तो वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है। ये महिलाओं में होने वाली दूसरी सबसे कॉमन कैंसर है। पहला ब्रेस्ट कैंसर है। पूनम की मौत ने इस खतरनाक बीमारी के प्रति अब लोगों को सोचने पर मजबूर करेगा। हालांकि पूनम की मौत सच नहीं थी, उसके बाद पूनम ने अगले दिन पोस्ट करके अपनी मौत का सच भी बता दिया था, लेकिन यह बीमारी सच में खतरनाक है इस बात का अंदाजा हम इसी से लगा रहे हैं कि लगातार इससे मौतें होती जा रही है! इस बीमारी के खतरनाक रूप को देखते हुए ही सरकार ने बच्चियों को इसकी वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। महिलाओं के लिए दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी सर्वाइकल कैंसर है। महिलाओं में हर तरह के कैंसर के करीब 18 प्रतिशत मामले सामने आते हैं।ये बीमारी कितना खतरनाक है कि आप इससे समझ सकते हैं कि इसके कोई लक्षण भी जल्दी नहीं दिखते हैं। बाद में केवल जांच पर ही इस बीमारी का पता चलता है। दुनिया के कई देशों में इस बीमारी से बचने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगवाई जाती है। हर साल करीब 1 लाख 20 हजार नए मामले सर्वाइकल कैंसर के आते हैं। जिसमें 77 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है। देश में सर्वाइकल कैंसर की जांच महज एक फीसदी महिलाएं कराती हैं। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच होनी चाहिए। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसर और दुनिया भर में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। बता दें कि हाल के बरसों में सर्वाइकल कैंसर एक महामारी की तरह बढ़ रहा है। मशहूर मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से मौत ने इस बीमारी के खतरे को बताने के लिए काफी है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देशभर में 9-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में HPV वैक्सीन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्य मकसद सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की शुरुआत मिशन इंद्रधनुष के जरिए किया जाएगा। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस के संक्रमण की वजह से होता है। सर्वाइकल कैंसर को रोकने के कई तरीके हैं। उनमें वैक्सीनेशसन सबसे ज्यादा कारगर है।

आखिर क्या है तोशाखाना मामला?

आज हम आपको तोशाखाना मामलें के बारे में बताने जा रहे है! पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. किसी भी वक्त उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. तोशाखाना मामले में इमरान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लाहौर स्थित जमां पार्क आवास पर पहुंची है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इमरान खान तोशाखाना मामले की सुनवाई के दौरान लगातार गैर-मौजूद रहे हैं. इस वजह से इमरान खान को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए इस्लामाबाद पुलिस अपनी समकक्ष पंजाब पुलिस को साथ लेकर पहुंची है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल वजीराबाद में एक जानलेवा हमले में गोली लगने के बाद से जख्म से उबर रहे इमरान खान इस्लामाबाद के सत्र न्यायालय में तोशाखाना मामले की सुनवाई में तीन बार मौजूद नहीं रहे. इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के कार्यकर्ताओं की ओर से पुलिस का विरोध किया जा रहा है. पीटीआई कार्यकर्ता बड़ी तादाद में इमरान खान के आवास के बाहर जमा हैं. पीटीआई नेता फवाद चौधरी के आह्वान पर वे इकट्ठा हुए हैं. पीटीआई ने व्यापक आंदोलन की धमकी दी है. वहीं पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह के मुताबिक, इमरान खान के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट अदालत के आदेश पर जारी हुआ है, इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है. आखिर क्या है तोशाखाना मामला जो इमरान खान के गले के हड्डी बन गया. आइए जानते हैं.

तोशाखाने का मतलब ऐसे कमरे से है जहां राजा या अमीरों के कपड़े, गहने और महंगी चीजें जैसे कि उपहार आदि संभालकर रखे जाते हैं. पाकिस्तान में सरकार के संग्रहस्थान को तोशाखाना नाम दिया गया है, जिसे अंग्रेजी में स्टेट डिपॉजिटरी भी कहते हैं.इमरान को प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं या किसी प्रकार की आधिकारिक यात्रा के दौरान करीब साढ़ 14 करोड़ रुपये के ऐसे उपहार मिले थे. उपहारों को तोशाखाने में जमा भी कर दिया गया था पाकिस्तान के कानून के मुताबिक, विदेशों से या विदेशी मेहमानों से मिले उपहारों को इसी तोशाखाने में जमा कर दिया जाता है. प्रधानमंत्री अगर उपहार अपने पास रखना चाहे तो उसे उसका मूल्य चुकाना होगा. इन उपहारों की नीलामी भी की जा सकती है. नीलामी से अर्जित धन सरकारी खजाने में ही जाएगा. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री को मिले उपहार राष्ट्र की संपत्ति हैं!

इमरान को प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं या किसी प्रकार की आधिकारिक यात्रा के दौरान करीब साढ़ 14 करोड़ रुपये के ऐसे उपहार मिले थे. उपहारों को तोशाखाने में जमा भी कर दिया गया था. आरोप है कि इमरान खान ने तोशाखाने में जमा किए उपहारों को सस्ते में 2.15 करोड़ रुपये में खरीद लिया और फिर ज्यादा कीमत में बाजार में उन्हें बेच दिया और पांच करोड़ रुपये से ज्यादा धन मुनाफे के तौर कमा लिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन उपहारों में एक ग्राफ घड़ी, एक जोड़ा कफलिंक, एक कीमती पेन, एक अंगूठी और रोलेक्स की चार घड़ियां भी शामिल थीं. यह भी आरोप है कि इमरान ने इस पूरे काम को अंजाम देने के लिए सरकारी कानून में परिवर्तन भी किया! पिछले साल इमरान खान की सरकार गिरने के कुछ महीनों बाद, सत्तारूढ़ पीएमएल-एन गठबंधन वाली सरकार के कुछ सांसदों ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ के सामने तोशाखाना मामले को उठाया था और इमरान खान पर आरोप लगाए थे. उन्होंने एक आरोपपत्र तैयार किया था, जिसमें कहा था कि इमरान खान ने उन्हें मिले उपहारों की डिटेल तोशाखाने को नहीं सौंपी थी. उन्होंने कहा कि इमरान ने उपहार बेंचकर रुपये कमा लिए. नेशनल असेंबली ने जांच का आदेश दिया था. आठ सितंबर को इमरान को एक नोटिस भेज दिया गया था. नोटिस के जवाब में इमरान ने चार उपहारों को बेचने की बात कबूली थी! 

वहीं, इमरान ने दलील दी थी कि उपहार उन्हें निजी तौर पर मिले थे, इसलिए वो उनका कुछ भी करें. इमरान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया था. मामला कोर्ट में पहुंच गया. उपहारों को इसी तोशाखाने में जमा कर दिया जाता है. प्रधानमंत्री अगर उपहार अपने पास रखना चाहे तो उसे उसका मूल्य चुकाना होगा. उन्होंने कहा कि इमरान ने उपहार बेंचकर रुपये कमा लिए. नेशनल असेंबली ने जांच का आदेश दिया था. आठ सितंबर को इमरान को एक नोटिस भेज दिया गया था. नोटिस के जवाब में इमरान ने चार उपहारों को बेचने की बात कबूली थी! इन उपहारों की नीलामी भी की जा सकती है. नीलामी से अर्जित धन सरकारी खजाने में ही जाएगा. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री को मिले उपहार राष्ट्र की संपत्ति हैं!इसी मामले में पूर्व पीएम इमरान के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी हुआ है! 

क्या करदाताओं को होने वाला है फायदा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या करदाताओं को फायदा होने वाला है या नहीं! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण 2024 के दौरान टैक्सेशन से जुड़ा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसके बावजूद करीब एक करोड़ लोगों को टैक्स से जुड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि वित्त मंत्री ने पुराने टैक्सेशन से जुड़े पुराने विवादों के समाधान की दिशा में एक बड़ा एलान किया है। वित्त मंत्री ने वर्षों से लंबित बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का फैसला किया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा है कि उन्होंने परंपरा को निभाते हुए अंतरिम बजट 2024 के दौरान टैक्स दरों को अपरिवर्तित रखा है।  वित्त मंत्री के ताजा एलान से कराधान से जुड़े सभी पुराने विवादित मामलों में करदाताओं को राहत नहीं मिलेगी। वित्त मंत्री के अनुसार वर्ष 1962 से जितने पुराने करों से जुड़े विवादित मामले चले आ रहे हैं उनमें वर्ष 2009-10 तक लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 25000 रुपये तक के मामलों को वापस लिया जाएगा। इसी तरह 2010-11 से 2014-15 के बीच लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 10 हजार रुपये तक के मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है।

वित्त मंत्री के अनुसार सरकार की ओर से पुराने विवादों को सुलझाने का कदम उठाने से कम से कम एक करोड़ करदाताओं को फायदा होगा। उन्होंने कहा है कि इससे ईमानदार करदाताओं को लाभ मिलेगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के साथ-साथ इंपोर्ट ड्यूटी के लिए भी समान दरों को बरकरार रखा गया है। स्टार्टअप्स और सॉवरेन वेल्थ व पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को टैक्स सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। वित्त मंत्री की ओर से पुराने विवादों के समाधान के एलान से टैक्स रिफंड की प्रक्रिया में सुगमता आएगी। वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान जीवन की सुगमता और व्यापारिक सुगमता में सुधार करने की सरकार की परिकल्पना के तहत करदाताओं की सुविधा के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा, “बड़ी संख्या में कई छोटी-छोटी, गैर-सत्यापित, गैर-समायोजित या विवादित प्रत्यक्ष कर मांग बही खातों में लंबित हैं। इनमें से कई मांग तो वर्ष 1962 तक के भी पुराने समय से मौजूद हैं। इनके कारण ईमानदार करदाताओं को परेशानी होती है तथा बाद के वर्षों में रिफंड जारी करने की प्रक्रिया में भी बाधा आती है। मैं वित्तीय वर्ष 2009-10 तक की अवधि से संबंधित पच्चीस हजार रुपए (25,000) तक तथा वित्तीय वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 से संबंधित दस हजार रुपए (10,000) तक की ऐसी बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का प्रस्ताव करती हूं। इससे लगभग एक करोड़ करदाताओं के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।”

वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स और पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को मिलने वाले कर लाभ की समयसीमा 31 मार्च 2024 से बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दी है। ऐसे में स्टार्टअप्स को इस बजट से एक साल का अतिरिक्त कर लाभ मिलेगा। इसके अलावे वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कराधान के संबंध में किसी भी बदलाव से जुड़े प्रस्ताव का एलान नहीं किया है। वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष कर तथा आयात शुल्कों सहित अप्रत्यक्ष करों के संबंध में कर दरों को पहले के समान बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप और सावरेन संपदा या पेंशन फंड द्वारा किए गए निवेशों के लिए कुछ कर लाभ तथा कुछ आईएफएससी यूनिटों की कतिपय आय पर कर छूट की समय सीमा 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है। कराधान में निरंतरता बनाए रखने के लिए मैं समय सीमा की इस तारीख को 31 मार्च 2025 तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में करदाताओं को आश्वस्त किया कि उनके योगदान का देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए विवेकपूर्ण उपयोग किया गया है। उन्होंने करदाताओं के सहयोग के लिए उनकी सराहना भी की। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने कर दरों में कटौती की है और इन्हें विवेकपूर्ण बनाया है। नई कर योजना के तहत अब 7 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में 2.2 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं थी। वित्त मंत्री ने बताया कि खुदरा व्यापार के लिए प्रीजम्प्टिव कराधान की सीमा 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ की गई है। इसी प्रकार प्रीजम्प्टिव कराधान के पात्र व्यवसायियों के लिए यह सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख की गई। साथ ही कारपोरेट कर की दर मौजूदा स्वदेशी कंपनियों के लिए 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई और कुछ नई विनिर्माण कंपनियों के लिए यह दर 15 प्रतिशत की गई है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि पिछले पांच वर्षों में करदाता सेवाओं में सुधार करने पर हमारा विशेष जोर रहा है। पहचान रहित निर्धारण और अपील की शुरुआत कर, क्षेत्राधिकार आधारित निर्धारण प्रणाली को बदल दिया गया जिससे कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। अद्यतन की हुई आयकर विवरणियां, नया फार्म 26एएस और पहले से भरी हुई कर विवरणियां शुरू किए जाने से कर विवरणियां दाखिल करने की प्रक्रिया अधिक सरल और आसान हो गई है।

क्या दही से भी पा सकते हैं बीमारियों से मुक्ति?

दही खाने से भी बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है! दही हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। आयुर्वेद में दही के गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है और हड्डियों को मजबूती मिलती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि किसी भी शुभ काम से पहले दही चीनी का सेवन करने से वो काम अच्छे से संपन्न होता है। आज भी कई घरों में लोग घर से बाहर निकलने से पहले दही-चीनी खाकर निकलते हैं। दही को लेकर अधिकांश लोगों को यह भ्रम रहता है कि तासीर ठंडी होने की वजह से दही के सेवन से खांसी या जुकाम बढ़ सकता है। वास्तविकता में देखा जाए ऐसा कुछ भी नहीं है बशर्ते आप फ्रिज में रखी ठंडी दही का सेवन ना कर रहे हों। आयुर्वेद के अनुसार दही भारी, चिकनाई युक्त, कफ और पाचन शक्ति बढ़ाने वाला होता है। दही को बहुत ही पौष्टिक आहार माना गया है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके लिए दही का सेवन फायदेमंद है। दही में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। अगर आप खाने के साथ में दही खाते हैं तो इससे खाना आसानी से पच जाता है।

रोजाना दही का सेवन करने से पाचन तंत्र सही रहता है और पेट से जुड़ी समस्याओं से बचाव होता है। पाचन तंत्र दुरुस्त करने के अलावा दही खाने के और भी कई फायदे हैं। आइये उनमें से प्रमुख फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं। दही की तासीर ठंडी होती है। इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार सामान्यतया रात में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही का सेवन करते समय इसमें घी, शहद, चीनी, मूंग की दाल, आंवला चूर्ण या लवण भास्कर चूर्ण आदि में से कुछ ना कुछ ज़रूर मिला देना चाहिए। इन पदार्थों को बिना मिलाये दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही को आग या धूप आदि में गर्म करके नहीं खाना चाहिए, दही में कफ और पित्त को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसीलिए गर्मी, बसंत और शरद ऋतु में दही खाने से मना किया गया है। मानसून, हेमंत और शिशिर ऋतु में दही का सेवन अच्छा माना गया है। दही सेहत के लिए फायदेमंद तो है लेकिन कुछ ख़ास चीजों के साथ अगर आप दही का सेवन करते हैं तो इससे आपको सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। आयुर्वेद में ऐसे आहारों को विरूद्ध आहार कहा गया है। आइये दही के विरुद्ध संयोगो के बारे में जानते हैं।

दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है। आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है। दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है।

आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं।इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने क्या दिए संदेश?

वर्तमान में लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने कुछ संदेश दे दिए हैं! केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा सरकार का आखिरी बजट पेश किया। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ये अंतरिम बजट है। इस दौरान वित्त मंत्री का बजट भाषण करीब एक घंटे चला। मोदी 2.0 सरकार के इस अंतरिम बजट में करदाताओं को खुश होने के लिए बहुत कुछ नहीं मिला। सरकार पूंजीगत व्यय और अन्य सामाजिक कल्याण सेवाओं में निरंतर रुचि के साथ राजकोषीय कंसोलिडेशन के मार्ग पर आगे बढ़ती नजर आई है। जिस तरह से पीएम मोदी किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों पर खास फोकस की बात करते हैं। निर्मला सीतारमण ने भी एक बार फिर अलग-अलग वर्ग के समर्थन में आवाज बुलंद की। वित्त मंत्री ने अपना बजट भाषण शुरू करने से पहले ही साफ कर दिया कि उनका पूरा फोकस देश के विकास पर केंद्रित रहेगा। बजट रखने पहले पहले निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले पांच साल बेहद अहम हैं, ये अभूतपूर्व विकास और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के सुनहरे पल होंगे।

फिस्कल प्रूडेंस के रास्ते पर चलते हुए, सरकार की ओर से बार-बार कहा गया कि वह वित्त वर्ष 2026 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 फीसदी तक कम करना चाहती है। अंतरिम बजट के दौरान, फाइनेंस मिनिस्टर सीतारमण ने राजकोषीय घाटे को लेकर बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद के 5.9 फीसदी के पिछले लक्ष्य से घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 5.8 प्रतिशत कर दिया है। वहीं वित्त वर्ष 2025 के लिए ये लक्ष्य GDP का 5.1 फीसदी निर्धारित किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए शुद्ध उधारी 11.75 लाख करोड़ रुपये देखने को मिली है जबकि केंद्र की सकल उधारी 14.13 लाख करोड़ रुपये देखी गई है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के लिए रक्षा क्षेत्र में आवंटन को 4 फीसदी बढ़ाकर 6.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। ये वित्त वर्ष 2024 के बजटीय अनुमान 5.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, चाहे वह प्रत्यक्ष कर हो या अप्रत्यक्ष। हालांकि, सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 के लिए पूंजीगत व्यय परिव्यय का बजट 11 फीसदी बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.4 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में पूंजीगत व्यय तीन गुना होने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर कई गुना प्रभाव पड़ा है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए लगभग 40,000 सामान्य रेल बोगियों को वंदे भारत मानकों में परिवर्तित किया जाएगा। इसके अलावा, तीन प्रमुख आर्थिक रेलवे कॉरीडोर यानी ऊर्जा, खनिज, और सीमेंट कॉरीडोर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरीडोर और हाई ट्रैफिक डेंसिटी कॉरीडोर्स लागू किए जाएंगे। सरकार ने महिला उद्यमियों को 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण उपलब्ध कराए हैं। एसटीईएम पाठ्यक्रमों में अब 43 फीसदी नामांकन लड़कियों और महिलाओं का है। ये दुनिया में सबसे ज्यादा है। वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम आवास योजना के तहत 70 फीसदी से अधिक घर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को दिए गए हैं। सरकार लड़कियों 9-14 वर्ष के लिए सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण को प्रोत्साहित करेगी। बेहतर पोषण वितरण के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 में तेजी लाई जाएगी।

सरकार अगले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अतिरिक्त 2 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रख रही है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि नागरिकों को घर खरीदने या बनाने में मदद के लिए मध्यम वर्ग के लिए एक नई आवास योजना शुरू की जाएगी। सरकार राज्यों को प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्र विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।इसके अलावा, विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यों को दीर्घकालिक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किया जाएगा। सरकार ने कहा कि लक्षद्वीप सहित आईलैंड्स में बंदरगाह कनेक्टिविटी, पर्यटन बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।

कैसा रहा आर्मी के लिए आवंटित बजट?

आज हम आपको आर्मी के लिए आवंटित बजट के बारे में जानकारी देने वाले हैं! सरकार रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक पर लगातार जोर दे रही है। इस बार तो डीप-टेक के लिए नई स्कीम का भी ऐलान किया गया है। लेकिन लगातार दो सालों से उस फंड का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है जो स्वदेशी कंपनियों को प्रोटाइप विकसित करने में मदद देने के लिए बनाया गया है। पिछले बार की तरह ही इस बार भी आर्मी के लिए दिए इस फंड का महज एक पर्सेंट ही खर्च हो पाया। लगातार दो बार से यही स्थिति रही है और अब इस बार आर्मी के लिए यह फंड घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछली बार इस मद में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।

पिछले साल आर्मी के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड 100 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था। यह उन स्वदेशी कंपनी या स्टार्टअप या युवाओं को मिलता जो आर्मी की जरूरत के हिसाब से कोई वेपन या उपकरण तैयार कर रहे हैं और उन्हें उसका प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए आर्थिक मदद दी जाती। लेकिन यह 100 करोड़ रुपये का बजट संशोधित बजट में 1 करोड़ रुपये हो गया। ऐसा तब होता है, जब फंड दिया जाता है और करीब आधा साल गुजरने के बाद भी उस दिशा में कोई प्लानिंग ना हुई हो और बजट का इस्तेमाल ना किया गया हो। ऐसा ही पिछली बार भी हुआ था। पिछले बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए 1131 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन ये भी संशोधित बजट में घटकर 388 करोड़ रह गया। इस बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड में 1697 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिफेंस पर कहा कि नई डीप-टेक टेक्नोलॉजी को लाया जाएगा। आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाएंगे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।डीप टेक टेक्नोलॉजी यानी क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और एयरोस्पेस जैसे उद्योग शामिल हैं। देश की रक्षा के क्षेत्र में अब निजी कंपनियों को ज्यादा मौके मिलने वाले हैं। सरकार की योजना देश को ज्यादा ताकतवर बनाने की है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी साल के अंत की समीक्षा में कहा था कि रक्षा अधिग्रहण परिषद डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2023 में कहा था कि साल 2047 तक जब हम आजादी के 100 साल मनाएंगे, तब एक विकसित देश बनने के लिए भारत को आधुनिक उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत है। अगर हम एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं,डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। तो हमें आधुनिक हथियारों और उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत पड़ेगी। अभी दुनिया में चौथी सबसे ताकतवर मिलिट्री भारत के पास है। भारत इस मामले में जापान और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों से आगे है। चीन तीसरी सबसे बड़ी मिलिट्री ताकत है।

आखिर कब होंगे 2024 के लोकसभा चुनाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव कब होने वाले हैं! दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि 16 अप्रैल को लोकसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। दिल्ली के चीफ इलेक्शन कमिश्नर की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा गया है, ‘दिल्ली चुनाव आयोग की तरफ से जारी एक सर्कुलर के संदर्भ में मीडिया से कुछ सवाल आ रहे हैं, जिसमें यह पूछा जा रहा है कि क्या 16 अप्रैल, 2024 लोकसभा चुनाव की संभावित तारीख है, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस तारीख का उल्लेख केवल अधिकारियों के लिए केंद्रीय निर्वाचन आयोग ईसीआई के चुनाव योजना के अनुसार गतिविधियों की योजना बनाने के ‘संदर्भ’ के लिए किया गया था।’ दिल्ली सीईओ कार्यालय की ओर से एक फॉलो-अप पोस्ट में भारत के चुनाव आयोग को भी टैग किया गया। लोकसभा चुनाव के लिए वास्तविक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अप्रैल या मई में मतदान हो सकता है। बता दें कि 2019 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था, जो 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई को समाप्त हुआ था, जिसके नतीजे 23 मई को घोषित किए गए थे।

अनुमान के मुताबिक, इस साल लोकसभा चुनाव के लिए देशभर में कुल 11.80 लाख मतदान केंद्र बनाने की आवश्यकता होगी। अब चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी की है. वायरल लेटर पर चुनाव आयोग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर साफ किया कि लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने और उसे समय पर पूरा करने की जरूरत है. चुनाव आयोग के योजनाकार इस संबंध में योजनाएं बना रहे हैंलोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने के दौरान, प्रत्येक मतदान केंद्र पर ईवीएम के दो सेट की आवश्यकता होगी–एक, लोकसभा सीट के लिए और दूसरा, विधानसभा सीट के लिए आयोग ने सरकार को भेजे गए पत्र में पूर्व के अनुभवों के आधार पर कहा है कि मतदान के दिन विभिन्न स्तर पर त्रुटिपूर्ण इकाइयों को बदलने के लिए कुछ प्रतिशत ‘कंट्रोल यूनिट’ सीयू, ‘बैलट यूनिट’ बीयू और ‘वोटर-वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ वीवीपैट मशीनों की आवश्यकता होती है।

बता दे कि सोशल मीडिया पर लोकसभा चुनाव की तारीख वाला एक लेटर खूब वायरल हो रहा है. इस लेटर के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है. विभिन्न संबंधित अधिकारियों को संबोधित करते हुए लेटर में ऐसा संकेत दिया गया है कि 2024 का लोकसभा चुनाव 16 अप्रैल से शुरू होगा. वायरल नोटिफिकेशन में संबंधित अधिकरियों को इसी तारीख को ध्यान में रखकर बाकी चीजें प्लान करने का सुझाव दिया गया है. अब चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी की है. वायरल लेटर पर चुनाव आयोग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर साफ किया कि लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने और उसे समय पर पूरा करने की जरूरत है. चुनाव आयोग के योजनाकार इस संबंध में योजनाएं बना रहे हैं…

चुनाव आयोग ने दोहराया कि वायरल लेटर में दी गई तारीख बस एक सुझाव है, और यह जरूरी नहीं है कि इसी तारीख से चुनाव होंगे. तारीख इसलिए दी गई थी ताकि संबंधित अधिकारी जिला स्तर पर चुनाव की योजनाओं को समय पर पूरा कर सकें और व्यवस्था बना सकें. आयोग ने बताया कि चुनाव को लेकर चुनाव आयोग द्वारा पूरा शेड्यूल जारी किया जाएगा. इस स्पष्टीकरण के साथ ही आयोग ने उम्मीद जताई की चुनाव की तारीख को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस पर विराम लग जाएगा, इस बात पर जोर देते हुए कि इनमें से अधिकांश गतिविधियों को जिला चुनाव अधिकारियों/रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा जिला स्तर पर किया जाता है, तो इसी संबंध में उन्हें 19 जनवरी को एक लेटर जारी किया गया था. दिल्ली सीईओ कार्यालय की ओर से एक फॉलो-अप पोस्ट में भारत के चुनाव आयोग को भी टैग किया गया। लोकसभा चुनाव के लिए वास्तविक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अप्रैल या मई में मतदान हो सकता है। बता दें कि 2019 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था, जो 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई को समाप्त हुआ था, जिसके नतीजे 23 मई को घोषित किए गए थे।चुनाव आयोग ने बयान में स्पष्ट किया कि चुनाव की संभावित तारीख 16 अप्रैल जो कि सोशल मीडिया पर भी वायरल है, वो चुनाव की संभावित तारीख के तौर पर सुझाव दिया गया था!

आखिर क्या है कल्कि धाम शिलान्यास समारोह?

आज हम आपको कल्कि धाम शिलान्यास समारोह के बारे में जानकारी देने वाले हैं! कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी को कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह का निमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी न्योते को सहर्ष स्वीकार करते हुए प्रमोद कृष्णम का धन्यवाद किया है। मोदी ने कहा कि आस्था और भक्ति से जुड़े इस पावन अवसर का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आचार्य प्रमोद ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पीएम के साथ निमंत्रण देते हुए कि तस्वीर भी साझा की है।

कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कृष्णम ने अपने एक्स हैंडल पर पीएम संग तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि 19 फरवरी को आयोजित श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री,आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, मेरे इस पवित्र भाव को स्वीकार करने के लिये माननीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार एवं साधुवाद।

प्रधानमंत्री मोदी ने उस ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि आस्था और भक्ति से जुड़े इस पावन अवसर का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। निमंत्रण के लिए आपका हृदय से आभार आचार्य प्रमोद जी। पीएम के इस ट्वीट पर आचार्य प्रमोद ने दोबारा ट्वीट करते हुए लिखा कि श्री हरि विष्णु के दशम और अंतिम अवतार भगवान श्री कल्कि नारायण की अवतरण स्थली संभल की पावन धरा पर आपका स्वागत है प्रभु। प्रमोद कृष्णम और पीएम मोदी के बीच ट्विटर संवाद के बाद राजनीतिक हलको में चर्चा तेज होने वाली है। कांग्रेस के इस सीनियर नेता ने राम मंदिर के सफल प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद भी पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं।

यही नहीं आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बनना उनके जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों में था और वह वहां से एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटे हैं जो कभी उनसे दूर नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे दो पन्नों के एक पत्र में यह बात कही। पत्र की प्रति एक्स पर साझा करते हुए मोदी ने कहा, दो दिन पूर्व मुझे आदरणीय राष्ट्रपति जी का एक बहुत ही प्रेरणादायी पत्र मिला था। मैंने आज अपनी कृतज्ञता पत्र के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश भर में जश्न का माहौल भारत की शाश्वत आत्मा की एक निर्बाध अभिव्यक्ति और देश के पुनरुत्थान में एक नए चक्र की शुरुआत है। इसके जवाब में मोदी ने लिखा,अयोध्या धाम में अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों का साक्षी बनकर लौटने के बाद मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं। मैं एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटा हूं। एक ऐसी अयोध्या, जो कभी मुझसे दूर नहीं हो सकती।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को उनकी शुभकामनाओं और स्नेह के लिए आभार जताया तथा कहा कि उन्होंने पत्र के हर शब्द में अपने करुणामयी स्वभाव और प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन पर असीम प्रसन्नता को व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि जिस समय उन्हें यह पत्र मिला था उस वक्त वह एक अलग ही भाव यात्रा में थे और इस पत्र ने उन्हें उनके मन की भावनाओं को संभालने और उनमें सामंजस्य बिठाने में अपार सहयोग और संबल दिया। उन्होंने कहा, मैंने एक तीर्थयात्री के रूप में अयोध्या धाम की यात्रा की। जिस पवित्र भूमि पर आस्था और इतिहास का ऐसा संगम हुआ हो वहां जाकर मेरा मन अनेक भावनाओं से विह्वल हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए एक सौभाग्य भी है और एक दायित्व भी है।

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा लिखे गए पत्र में प्रधानमंत्री के 11 दिन के व्रत अनुष्ठान और इससे जुड़े यम-नियमों के उल्लेख पर मोदी ने कहा, हमारा देश ऐसे अनगिनत लोगों का साक्षी रहा है जिन्होंने शताब्दियों तक अनेक संकल्प व्रत किए जिससे कि रामलला पुनः अपने जन्मस्थान पर विराज सकें। उन्होंने कहा सदियों तक चले इन व्रतों की पूर्णाहुति का संवाहक बनना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था और इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के साथ रामलला के साक्षात दर्शन, उनके रूप से साक्षात्कार और उनके स्वागत का वह क्षण अप्रतिम था। उन्होंने कहा वह क्षण प्रभु श्रीराम और भारत के लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुआ और इसके लिए मैं कृतज्ञ रहूंगा। राष्ट्रपति द्वारा लिखे गए पत्र में पीएम-जनमन और जनजातीय समाज में अति पिछड़ों के सशक्तीकरण का उल्लेख किए जाने पर मोदी ने कहा कि इसके जैसे कई अभियान आज देशवासियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।

आखिर कैसा था इस बार का अंतरिम बजट?

आज हम आपको बताएंगे कि इस बार का अंतरिम बजट कैसा था! लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के अंतरिम बजट से लोगों को राहत की फुहारों की उम्मीदें थीं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों को उम्मीद थी पीएम किसान सम्मान निधि की रकम बढ़ने की। सैलरीड क्लास को उम्मीद थी टैक्स में राहत की। महिला, गरीब, युवा, किसान सबने सीधे-सीधे कुछ रियायतों की आस लगा रखी थी। ये चार तो पीएम मोदी के लिए सबसे बड़ी जातियां हैं। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में भी बताया कि सरकार का मुख्य फोकस इन्हीं चार वर्गों पर है। ये प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। लेकिन कुछ खास नहीं मिला। न किसान सम्मान निधि बढ़ी और न ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव हुआ। इनकम टैक्स ही नहीं, सभी डायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ। इनडायरेक्ट टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं हुआ। विपक्ष बजट की आलोचना कर रहा। समाजवादी पार्टी के मुखिया तो वित्त मंत्री के बजट भाषण को मोदी सरकार का ‘विदाई भाषण’ करार दिया है। आखिर इस बजट के सियासी निहितार्थ क्या हैं? बजट के जरिए समझा जा सकता है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी के दिमाग में आखिर क्या चल रहा। सरकार की 10 साल की उपलब्धियों का बखान, पिछली सरकार को कोसकर विपक्ष पर हमला, किसी भी तरह की नई लोकलुभावन योजना से परहेज और भविष्य में और ‘अच्छे दिन’ के सपने। मोटे तौर पर ये 4 बातें ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का निचोड़ हैं।

मुद्रा योजना से लेकर पीएम किसान योजना तक, मुफ्त राशन स्कीम से लेकर अभूतपूर्व इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर आर्थिक मोर्चे पर देश के शानदार प्रदर्शन तक…निर्मला ने बजट भाषण में मोदी सरकार की पिछले 10 साल की उपलब्धियों का बखान किया। ‘पहले और अब’ के जरिए उन्होंने मोदी सरकार के आने के बाद इकॉनमी से लेकर तमाम क्षेत्रों में क्या-क्या बदलाव आया, इसके जरिए भारत की बुलंद तस्वीर दिखाने की कोशिश की। नजीर के तौर पर, 2013-14 में 2.2 लाख रुपये की आय इनकम टैक्स के दायरे से बाहर थी जबकि अब 7 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस तरह उन्होंने पिछली सरकारों को भी कोसा। यहां तक कि 2014 से पहले के कथित आर्थिक कुप्रबंधन पर श्वेत पत्र लाने का ऐलान किया।

बजट भाषण में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं हुआ जिसे मुफ्त की रेवड़ी कहा जा सके। ये संकेत है कि लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी मुफ्त की रेवड़ियों के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करने वाले हैं। निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में भविष्य को लेकर और ‘अच्छे दिन’ के सपने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का वादा हो या रूफटॉप सोलर स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा हो, किराये के घर या स्लम, चॉल या फिर अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को घर देने के लिए नई हाउसिंग स्कीम का ऐलान हो या 2047 तक विकसित भारत बनाने का वादा…बजट भाषण सुनहरे भविष्य का सपना भी दिखाता है।

रूफटॉप सोलर स्कीम यानी छत पर सौर ऊर्जा वाली स्कीम का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन को शाम में की थी। इस महत्वाकांक्षी स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार का दावा है कि इससे हर लाभार्थी परिवार को सालाना 15 से 18 हजार रुपये का फायदा पहुंचेगा। ये ऐसी स्कीम है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में जमकर भुनाने वाले हैं, भले ही अभी इसका ऐलान हुआ है, धरातल पर उतरना बाकी है। इसके जरिए ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर उनका प्रहार और धारदार होगा। इसके जरिए उन्होंने मुफ्त में दिए बिना ही मुफ्त की बिजली के इंतजाम का विजन पेश किया है जो मुफ्त बिजली-मुफ्त पानी पॉलिटिक्स पर सीधा प्रहार है।

बजट में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं करने और सीधे-सीधे किसी वर्ग को नई रियायत नहीं देने की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री मोदी का केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक लगाने का पूर्ण भरोसा है। ये बताता है कि मोदी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वह फिर सत्ता में आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट भाषण में इस भरोसे का ये कहकर पुरजोर इजहार भी किया कि जुलाई में वह पूर्ण बजट पेश करेंगी। इस भरोसे की बड़ी वजह संभवतः ‘राम लहर’ है। निर्मला ने भले ही परंपरा का हवाला देकर अंतरिम बजट में किसी तबके के लिए बड़ी रियायत का ऐलान नहीं किया लेकिन अंतरिम बजट तो 2019 में भी पेश हुआ था। मोदी सरकार का ही था। तब पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था और उसमें पीएम किसान सम्मान निधि के बारे में ऐलान था। ये स्कीम गेमचेंजर साबित हुई और 2019 में मोदी सरकार रिपीट में उसका बड़ा योगदान माना गया। लेकिन इस बार इस तरह की किसी गेमचेंजर स्कीम का ऐलान नहीं होना बताता है कि नरेंद्र मोदी सरकार को पक्का भरोसा है कि चुनाव बाद वही फिर सत्ता में आएगी। इस भरोसे की एक बड़ी वजह अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूरे देश में एक जबरदस्त ‘राम लहर’ बनी है। नरेंद्र मोदी को अपनी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में किए गए कामकाज और ‘राम’ पर भरोसा है।

आखिर कौन-कौन से बड़े नेता हो रहे हैं राज्यसभा से रिटायर?

आज हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा से कौन-कौन से बड़े नेता रिटायर हो रहे हैं! राज्यसभा की 56 सीटों अप्रैल के पहले हफ्ते में खाली होने जा रही हैं। इन्हें लेकर सोमवार केंद्रीय चुनाव आयोग ने चुनावों को ऐलान किया। इन सीटों के लिए आगामी 27 फरवरी को चुनाव होगा। इन खाली सीटों पर राजनीति के बड़े बड़े चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, एसपी की जया बच्चन, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, उद्योग मंत्री नारायण राणे, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, अखिलेश प्रताप सिंह, नासिर हुसैन जैसे लोग शामिल हैं। रिटायर हो रहे अन्य प्रमुख चेहरों में आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, बीजेपी के मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी, सीनियर बीजेपी लीडर मुरलीधर, सुशील कुमार मोदी, पार्टी प्रवक्ता जीबी नरसिम्हा राव, सुधांशु त्रिवेदी, शिवसेना के अनिल देसाई, एनसीपी की वंदना चव्हाण, कांग्रेस के कुमार केतकर, आरजेडी के मनोज कुमार झा व अशफाक करीम, जेडीयू के अनिल प्रसाद हेगड़े और वशिष्ठ नारायण सिंह शामिल हैं। राज्यसभा के इन चुनावों के मद्देनजर माना जा रहा है कि उच्च सदन में सियासी तस्वीर कुछ बदल सकती है। जहां कुछ सीटों में बीजेपी को नुकसान होगा तो वहीं कुछ राज्यों में उसे फायदा हो सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हुई बीजेपी की जीत उसकी सीटों में इजाफा करने में मददगार साबित होगी। जहां एक ओर लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हो रहे इन चुनावों को लेकर तमाम सियासी दलों के सामने कई तरह के प्रश्न व समीकरण घूम रहे हैं। ज्यादातर पार्टियां इन सीटाें के लिए ऐसे उम्मीदवार देना चाहेंगी, जिसके जरिए वह आने वाले लोकसभा चुनाव में एक संकेत दे सकें। राजनीतिक दल मान रहे हैं कि राज्यसभा में उम्मीदवारों को चयन चुनाव के मद्देनजर कई तरह के संकेत देगा। इसीलिए विभिन्न पार्टियां जातिगत, सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अपने उम्मीदवारों को चुनेंगी। वहीं कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी रिटायर हो रहे अपने कई सांसदों को लोकसभा लड़वा सकती है।

उल्लेखनीय है कि सदन में फिलहाल सबसे ज्यादा सदस्य बीजेपी के हैं, जिनकी तादाद 93 है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर कांग्रेस की संख्या 30 है। इस चुनाव में कांग्रेस की नौ सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन उसे दस सीटें मिलने का अनुमान है। इसमें कुछ राज्यों में जहां उसे नुकसान हो रहा है तो वहीं कुछ राज्यों में सीटों का फायदा है। बिहार में वह अपनी एक सीट बचा रही है। गुजरात में दो सीटों का तो बंगाल में एक सीट का नुकसान होगा, वहीं हिमाचल प्रदेश व राजस्थान में एक-एक सीट तो तेलंगाना में दो सीटों का फायदा होने जा रहा है। जबकि कर्नाटक में पार्टी अपनी तीनों सीटें और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में अपनी एक-एक सीट बचा पाने में कामयाब दिख रही है।

यहां देखना भी अहम होगा, जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, क्या उनके दल फिर से उन्हें मौका देंगे। इनमें अहम नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, जया बच्चन व प्रकाश जावड़ेकर जैसे नामों का है। छह बार के राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय मनमोहन सिंह का अपनी नरम सेहत के चलते अब फिर से राज्यसभा में लौटना मुश्किल लग रहा है। उनकी सेहत के चलते अब शायद ही कांग्रेस उन्हें मौका दे। वह फिलहाल राजस्थान से सांसद हैं। पिछली बार भी कांग्रेस ने 86 साल की उम्र में उन्हें सम्मान स्वरूप प्रतीकात्मक रूप से राज्यसभा भेजा था। राजनीतिक दल मान रहे हैं कि राज्यसभा में उम्मीदवारों को चयन चुनाव के मद्देनजर कई तरह के संकेत देगा। इसीलिए विभिन्न पार्टियां जातिगत, सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अपने उम्मीदवारों को चुनेंगी। वहीं कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी रिटायर हो रहे अपने कई सांसदों को लोकसभा लड़वा सकती है।वहीं जया बच्चन पर नजर रहेगी कि एसपी उन्हें फिर से मौका देती है या नहीं। इनमें अहम नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, जया बच्चन व प्रकाश जावड़ेकर जैसे नामों का है। छह बार के राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय मनमोहन सिंह का अपनी नरम सेहत के चलते अब फिर से राज्यसभा में लौटना मुश्किल लग रहा है।इसके अलावा, जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी पिछली बार टीएमसी के समर्थन से वेस्ट बंगाल से जीते थे। देखना होगा कि पार्टी उन्हें कहां से भेजती है। हालांकि कपिल सिब्बल के पार्टी छोड़ने के बाद बड़े वकीलों में सिंघवी सबसे अहम हैं, जो पार्टी के मुश्किल वक्त में खड़े होते रहे हैं।