मध्यप्रदेश में सरकार युवाओं को लुभाने का भरपूर प्रयास कर रही है! मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर बेरोजगारों के लिए बड़ी घोषणा की है। मंगलवार को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर शिवराज ने कहा कि सरकार नवंबर महीने में 40 हजार भर्तियां करेगी। शिवराज पहले ही एक लाख भर्तियां करने की घोषणा कर चुके हैं। अब इसकी प्रक्रिया शुरू हो रही है। दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रोजगार मेले में युवाओं को बड़े पैमाने पर नौकरियां देने का ऐलान कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 10 लाख से ज्यादा रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। इनके लिए भर्तियां भारत सरकार के 38 अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में की जाएंगी। कर्मचारी चयन आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड और अन्य विभाग जैसी एजेंसियां योग्य उम्मीदवारों के चयन और नियुक्ति की दिशा में काम करेंगी। अब जबकि मध्य प्रदेश में विधानसभा और देश में लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, केंद्र और राज्य की सरकारें युवाओं को लुभाने के लिए नौकरियों का पिटारा खोलने को तैयार हो रही हैं।

चुनावी मौसम में युवाओं को लुभाने की चिंता लाजिमी है क्योंकि मध्य प्रदेश में बेरोजगारों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2020 में एमपी में 24.72 लाख बेरोजगार थे, लेकिन 2021 में यह संख्या बढ़कर 30.23 लाख हो गई। यानी एक साल के अंदर राज्य में 5.46 लाख बेरोजगार बढ़ गए। ज्यादा चिंता की बात यह है कि नौकरी की तलाश कर रहे शिक्षित बेरोजगारों का अनुपात भी बढ़ रहा है। 2020 में 93.37 फीसदी बेरोजगार शिक्षित थे जो 2021 में बढ़कर 95.07 प्रतिशत हो गए। राज्य के कुल बेरोजगारों में करीब 35 प्रतिशत ग्रेजुएट हैं। ये वैसे युवा हैं जो नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें मिल नहीं रही।

एमपी में 20 से 29 साल की उम्र के करीब 30 प्रतिशत जबकि 30 से 39 साल की उम्र के 25 फीसदी से ज्यादा वोटर हैं। राज्य में करीब 2.75 करोड़ वोटर युवा हैं। इनमें 50 लाख से ज्यादा वोटर 18 साल से अधिक उम्र के हैं जो अगले चुनाव में पहली बार वोट डालेंगे। बीजेपी सरकार की नजर इन वोटर्स पर है क्योंकि ये निर्णायक साबित हो सकते हैं। इन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए बीजेपी पहले ही कई तरह के अभियान शुरू कर चुकी है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी युवा वोटर्स को अपने पाले में करने के लिए खास रणनीति तैयार की है। इसकी काट के लिए शिवराज सरकार अब नौकरियों का लॉलीपॉप देने की तैयारी कर रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 55 में से 44 विभागों में तीन लाख से ज्यादा पद खाली हैं। इनमें 1 लाख 1 हजार 958 पद सिर्फ स्टेट कैडर के हैं, जबकि अनुमान है कि संभाग और जिला कैडर में यह संख्या दो लाख से ज्यादा होगी। सबसे ज्यादा 45 हजार 767 पद स्कूल शिक्षा में टीचर्स व सपोर्टिंग स्टॉफ के रिक्त हैं। इसमें कुल स्वीकृत पद 2 लाख 63 हजार 565 हैं, जबकि भरे हुए पदों की संख्या 2 लाख 17 हजार 798 हैं। स्टेट कैडर के कुल रिक्त पदों में बैकलॉग के ही 21 हजार 96 पद हैं। सर्वाधिक बैकलॉग भी स्कूल शिक्षा विभाग में 15 हजार 233 है। दूसरे नंबर पर जनजातीय कार्य विभाग में 1141 पद बैकलॉग के खाली हैं।

मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह चौहान के चौथे कार्यकाल में सरकारी भर्तियों में काफी कमी आई है। व्यापमं विवाद, अदालती केस, आर7ण जैसी उलझनों के चलते कई भर्तियों की प्रक्रिया पांच-पांच साल से अटकी हुई है। 18 हजार चयनित शिक्षक 2018 से नियुक्ति की बाट जोह रहे थे। इनकी परीक्षा 2018 में हुई थी। रिजल्ट में देरी और फिर कोरोना के चलते इन्हें इस साल 18 सितंबर को नियुक्ति पत्र दिए गए। वो भी तब जबकि सरकार ने 62 हजार पदों पर भर्ती का आश्वासन दिया था। इसी तरह, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं आरक्षण के नियमों में उलझी हुई हैं। कई युवा ऐसे हैं जो प्रीलिमिनरी और मेन्स परीक्षा क्लियर कर इंतजार में हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं कि उन्हें नौकरी मिलेगी या नहीं।

समस्या यह है कि सीएम शिवराज पिछले चार महीने में ही कम से कम तीन बार एक लाख सरकारी भर्तियां करने का ऐलान कर चुके हैं। जुलाई और सितंबर में ऐलान के दौरान भी उन्होंने कहा था कि इसके लिए प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी। अब स्थापना दिवस पर उन्होंने फिर यही बात कही है।बीच के 15 महीनों को छोड़ दें तो साल 2003 से एमपी में लगातार बीजेपी की सरकार है। बीजेपी सरकार के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इससे मुकाबले के लिए पार्टी की नजर युवाओं पर है। डर केवल इस बात का है कि कहीं पहले की घो,णाओं की तरह इस बार भी यह कोरा आश्वासन ही न साबित हो।