Sunday, March 15, 2026
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क्या एनडीए में हो रही है गड़बड़?

वर्तमान में एनडीए में गड़बड़ होती हुई नजर आ रही है! 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। कांवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में सीएम योगी एक बड़ा फैसला लेते हैं। फैसले के बाद से ही मुख्य विपक्षी दल से लेकर एनडीए के सहयोगी दलों में बेचैनी दिखने लगती है। फैसले को लेकर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ ही बीजेपी के मुस्लिम नेता भी अपने तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगते हैं। खास बात है कि एनडीए के प्रमुख सहयोगी जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी के साथ ही राष्ट्रीय लोकदल भी इस फैसले की आलोचना करने लगते हैं। दरअसल, योगी सरकार ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों के संचालक या मालिक को अपनी पहचान लिखनी होगी। सरकार का कहना है कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार की तरफ से ये फैसला लिया गया है। फैसले के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों पर नेम प्लेट लगानी होगी।चिराग ने कहा, उनका मानना है कि समाज में अमीर और गरीब दो श्रेणियों के लोग मौजूद हैं। विभिन्न जातियों एवं धर्मों के व्यक्ति इन दोनों ही श्रेणियों में आते हैं। साथ ही दुकानों पर मालिक का नाम लिखना होगा। योगी सरकार इस फैसले के बाद कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया तो कई संगठनों ने इसका समर्थन भी किया है।

योगी सरकार के इस फैसले पर विपक्ष के साथ ही एनडीए की प्रमुख सहयोगी जनता दल यूनाइटेड की प्रतिक्रिया आई। इस प्रतिक्रिया ने दिखाया कि योगी सरकार के फैसले से एनडीए में खटपट दिख रही है। यह पहली बार है जब किसी मुद्दे को लेकर एनडीए में सरकार गठन के बाद मतभेद दिखे। खास बात है कि यह खटपट भी केंद्र के फैसले से नहीं बल्कि एक राज्य सरकार के फैसले से दिख रही है। अब सवाल है कि एनडीए का अगुआ दल होने के नाते बीजेपी इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करती है। एनडीए के सहयोगी दल ही सरकार से आदेश वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इसे ऐच्छिक कर दिया है।

जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों पर मालिकों का नाम प्रदर्शित करने के मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। त्यागी का कहना था कि इससे सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। त्यागी ने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जदयू नेता ने कहा कि धर्म के आधार पर इस तरह का भेदभाव गलत है और इससे सांप्रदायिक विभाजन ही बढ़ेगा। त्यागी ने कहा कि यह फरमान प्रधानमंत्री मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ वाली अवधारणा के विरूद्ध है। इससे सांप्रदायिक विभाजन होता है।

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भोजनालयों के मालिकों से उनके नाम प्रदर्शित करने संबंधी मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश का खुलकर विरोध किया। चिराग ने कहा कि वह जाति या धर्म के नाम पर भेद किए जाने का कभी भी समर्थन नहीं करेंगे। मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश से सहमति के सवाल पर चिराग ने कहा कि नहीं, मैं बिलकुल सहमत नहीं हूं। चिराग ने कहा, उनका मानना है कि समाज में अमीर और गरीब दो श्रेणियों के लोग मौजूद हैं। विभिन्न जातियों एवं धर्मों के व्यक्ति इन दोनों ही श्रेणियों में आते हैं।

रालोद की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रामाशीष राय ने आदेश का विरोध करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रशासन का दुकानदारों को दुकान पर अपना नाम और धर्म लिखने का निर्देश देना जाति और सम्प्रदाय को बढ़ावा देने वाला कदम है। प्रशासन इसे वापस ले, यह असंवैधानिक निर्णय है। बिजनौर लोकसभा सीट से रालोद सांसद चंदन चौहान ने कहा कि ”गंगा-जमुनी तहजीब’ को बचा कर रखना चाहिए। फैसले के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों पर नेम प्लेट लगानी होगी। साथ ही दुकानों पर मालिक का नाम लिखना होगा। योगी सरकार इस फैसले के बाद कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया तो कई संगठनों ने इसका समर्थन भी किया है।हम सब चौधरी चरण सिंह के अनुयायी हैं और उन्हीं के मार्ग पर चलेंगे। वो हमेशा धर्म और जाति व्यवस्था के खिलाफ थे। चौधरी चरण सिंह कभी नहीं चाहते थे कि समाज धर्म और जाति के आधार पर बंटे।

क्या कांग्रेस को मिल चुका है बीजेपी पर तंज कसने का मौका?

वर्तमान में कांग्रेस को भाजपा पर तंज कसने का मौका मिल चुका है! लोकसभा चुनाव में बीजेपी अभी अयोध्या के हार को भूल भी नहीं पाई थी कि उपचुनाव में एक ऐसी ही और हार का सामना करना पड़ा है। उत्तराखंड की बद्रीनाथ सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। जैसी ही एक और धर्म नगरी में बीजेपी को हार मिली तो विपक्ष को एक और मौका निशाना साधने का मिल गया। विपक्षी दलों ने इसे अयोध्या की हार से जोड़ दिया। उत्तराखंड में बद्रीनाथ में मिली जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के बाद बाबा बद्री ने बीजेपी को करारी शिकस्त दी है। बीजेपी ने बद्रीनाथ में हुए उपचुनाव में कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भंडारी को चुनाव में उतारा था। राज्यसभा सांसद ने परोक्ष रूप से बीजेपी की अयोध्या में हुई हार की तरफ से इशारा किया। उत्तराखंड की दोनों ही सीटों पर 10 जुलाई को वोटिंग हुई थी। बीजेपी के लिए उत्तराखंड में दोनों सीटों पर हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है।भंडारी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी को कांग्रेस उम्मीदवार लखपत बुटोला के हाथों 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की हार पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि यह हार बीजेपी के लिए सबक है। बद्रीनाथ में बद्री बाबा ने बीजेपी को करारी हार दिलाई है। माहरा इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में केदारनाथ से भी इसी तरह का संदेश जाने वाला है।

बीजेपी की बद्रीनाथ में मिली हार पर सोशल मीडिया पर लोगों ने बीजेपी पर निशाना साधा। एक यूजर ने लिखा कि अयोध्या के बाद बीजेपी बद्रीनाथ भी हार गई। बद्रीनाथ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। महादेव जी राहुल गांधी के साथ हैं। एक अन्य यूजर ने लिखा कि मोदी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, आरएसएस पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, बीजेपी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है। अयोध्या के बाद बद्रीनाथ ने भी साबित कर दिया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तो बस शुरुआत थी, अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ में कांग्रेस पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की। मैंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या वह मनुष्य हैं, क्योंकि उन्होंने खुद कहा था कि वह नॉन बायोलॉजिकल हैं और उनका भगवान से सीधा संबंध है। अगर आप सीधे भगवान से जुड़े हैं, तो अयोध्या में आप कैसे हार गए?

बद्रीनाथ में बीजेपी की हार पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी तंज कसा। शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जय बाबा बद्रीनाथ, नॉन बाइलॉजिकल पार्टी यहां भी हारी। राज्यसभा सांसद ने परोक्ष रूप से बीजेपी की अयोध्या में हुई हार की तरफ से इशारा किया। उत्तराखंड की दोनों ही सीटों पर 10 जुलाई को वोटिंग हुई थी। बीजेपी के लिए उत्तराखंड में दोनों सीटों पर हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

लोकसभा में उत्तर प्रदेश की फैजाबाद सीट पर हुई हार को लेकर तब राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि बीजेपी अयोध्या में हार गई, वे उत्तर प्रदेश में हार गए। राहुल ने कहा था कि वे हार गए क्योंकि वे भारत के विचार पर हमला कर रहे थे। हमारे संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है। राहुल गांधी का कहना था कि भारत राज्यों, भाषाओं, इतिहास, संस्कृति, धर्म और परंपराओं का एक संघ है। भंडारी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।

उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी को कांग्रेस उम्मीदवार लखपत बुटोला के हाथों 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की बद्रीनाथ में मिली हार पर सोशल मीडिया पर लोगों ने बीजेपी पर निशाना साधा। एक यूजर ने लिखा कि अयोध्या के बाद बीजेपी बद्रीनाथ भी हार गई। बद्रीनाथ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। महादेव जी राहुल गांधी के साथ हैं।बीजेपी की हार पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि यह हार बीजेपी के लिए सबक है।उन्होंने कहा था कि देश के प्रधानमंत्री को जनता ने संदेश दिया है कि आप संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि इंडिया गठबंधन ने अयोध्या में बीजेपी को हराकर राम मंदिर आंदोलन को पराजित कर दिया है जिसे लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था।

आखिर वर्तमान में राजनीति में क्यों उठ रहा है अहंकार का सवाल?

वर्तमान में राजनीति में अहंकार का सवाल उठ रहा है! केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस में ‘अहंकार बनाम अहंकार’ के मुद्दे पर एक अलग ही लड़ाई दिख रही है। पहले राहुल गांधी बीजेपी के साथ ही पीएम मोदी के अहंकारी होने की बात कह रहे थे। अब बीजेपी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को उसी के हथियार से जवाब देने की रणनीति अपनाई है। बीजेपी राहुल के शब्दों से ही कांग्रेस की काट की नीति पर चल रही है। इस नीति का बानगी शनिवार को झारखंड में अमित शाह के भाषण में दिखाई दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद ‘संसद में अहंकार दिखाने’ का आरोप लगाया।राहुल गांधी ने एक जनसभा के दौरान भगवान जगन्नाथ को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी को घेरा था। राहुल गांधी का कहना था कि बीजेपी ने ओडिशा के हर व्यक्ति का अपमान किया है। राहुल ने पीएम को लेकर कहा था कि नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि मैं भगवान का काम करता हूं। झारखंड के रांची में भारतीय जनता पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कई बार हम देखते हैं कि लोकतंत्र में जीत के बाद अहंकार आ जाता है, झारखंड में ऐसे लोग सत्ता में हैं। लेकिन मैं यह पहली बार देख रहा हूं कि हार के बाद कोई अहंकारी हो गया है।

शाह ने कहा कि हर कोई जानता है कि चुनाव किसने जीता, किसने सरकार बनाई। संसद में राहुल गांधी का आचरण पर शाह ने कहा कि दो तिहाई सीटें जीतने के बाद भी लोग इतने अहंकारी नहीं होते। शाह ने कांग्रेस नेताओं को सीधे संदेश में कहा कि मैं आज इस मंच से कांग्रेस नेताओं को बताना चाहता हूं कि इस चुनाव में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला है। भाजपा को अकेले 240 सीटें मिलीं जो कि इंडिया गठबंधन की संयुक्त सीटों से भी अधिक है। उन्होंने पूछा कि तो फिर यह अहंकार क्यों?

शाह ने रांची में पार्टी की बैठक में कहा कि बीजेपी को इस लोकसभा चुनाव में 2014, 2019 और 2024 में कांग्रेस की संयुक्त सीटों से अधिक सीटें मिली हैं। उन्होंने कहा कि हम लगातार तीसरी बार जीते हैं, लेकिन उनके नेता अभी भी हार स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। शाह ने हेमंत सोरेन की सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में झामुमो नीत सरकार देश में सबसे भ्रष्ट सरकार है जो करोड़ों रुपये के भूमि, शराब, खनन घोटाले में शामिल है। राज्य में लोकसभा चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि बीजेपी झारखंड में सरकार बनाएगी क्योंकि लोकसभा चुनावों में 81 विधानसभा क्षेत्रों में से 52 में कमल खिला है। इससे पहले राहुल गांधी ने बीजेपी के अहंकारी होने की बात कही थी। राहुल गांधी ने एक जनसभा के दौरान भगवान जगन्नाथ को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी को घेरा था। राहुल गांधी का कहना था कि बीजेपी ने ओडिशा के हर व्यक्ति का अपमान किया है। राहुल ने पीएम को लेकर कहा था कि नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि मैं भगवान का काम करता हूं। उनके बीजेपी के नेता कहते हैं कि जगन्नाथ जी मोदी जी के भक्त हैं। राहुल का कहना था कि आप सोचिए कि इनके दिमाग में कितना अहंकार आ गया है।

लोकसभा चुनाव से पहले भी लगातार बीजेपी पर अहंकारी होने के आरोप लगाए थे। राहुल गांधी का कहना था कि देश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई के बीच युवा और गरीब आदमी पढ़ाई, कमाई और दवाई के बोझ के नीचे दब रहा है। झारखंड के रांची में भारतीय जनता पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कई बार हम देखते हैं कि लोकतंत्र में जीत के बाद अहंकार आ जाता है,कोई जानता है कि चुनाव किसने जीता, किसने सरकार बनाई। संसद में राहुल गांधी का आचरण पर शाह ने कहा कि दो तिहाई सीटें जीतने के बाद भी लोग इतने अहंकारी नहीं होते। शाह ने कांग्रेस नेताओं को सीधे संदेश में कहा कि मैं आज इस मंच से कांग्रेस नेताओं को बताना चाहता हूं कि इस चुनाव में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला है। झारखंड में ऐसे लोग सत्ता में हैं। लेकिन मैं यह पहली बार देख रहा हूं कि हार के बाद कोई अहंकारी हो गया है।सरकार इसे ‘अमृतकाल’ बता कर उत्सव मना रही है। राहुल ने कहा था कि सत्ता के अहंकार में चूर शहंशाह जमीनी हकीकत से बहुत दूर हो गया है।

जेनिफर लोपेज ने अपने जन्मदिन पर पहने मनीष मल्होत्रा ​​के बनाए कपड़े! विक्टोरियन गाउन में शाही जश्न

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हॉलीवुड स्टार जेनिफर लोपेज एक बर्थडे थीम पार्टी में मनीष मल्होत्रा ​​द्वारा डिजाइन की गई ड्रेस में नजर आईं। उस तस्वीर को ड्रेस आर्टिस्ट ने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस चमकदार गाउन पर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं. उनके नृत्य, गायन, अभिनय ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। उनके शरीर की सलवटें, सीने की सलवटें कई पुरुषों को हंसने पर मजबूर कर देती हैं। उस मशहूर हॉलीवुड स्टार की 55वीं बर्थडे पार्टी बेहद भव्य है. इवेंट की सेंटरपीस जेनिफर लोपेज ने ऐसे खास दिन के लिए भारत के मशहूर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ​​की डिजाइन की हुई ड्रेस को चुना।

इस उम्र में भी जेनिफर की अदाएं और खूबसूरती देखने लायक है। उनके लुक को विक्टोरियन युग का गाउन कंप्लीट कर रहा था। जीवन के खास दिन पर मनीष द्वारा डिजाइन किए गए कपड़ों की पसंद से ड्रेसमेकर अभिभूत है। उन्होंने वह तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. मनीष के मुताबिक, इस ड्रेस को बनाने में 3 हजार 490 घंटे का समय लगा। विदेशी पोशाक का जन्म 40 कलाकारों के अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप हुआ।

पॉप स्टार जेनिफर के जन्मदिन पर ब्रिजर्टन थीम पार्टी रखी गई थी. उस इवेंट की मध्यमणि जेनिफर की ड्रेस भी क्लासी थी। विक्टोरियन स्कर्ट को विंटेज ब्रोकेड के साथ कॉर्सेट के साथ जोड़ा गया था। हजारों क्रिस्टल ने पोशाक को चमका दिया। स्कर्ट की सुंदरता सिलवटों को पकड़ने के लिए उपयोग की जाने वाली धातु सामग्री है।

जेनिफर की शाही पोशाक की तस्वीरें सामने आने के बाद सारा अली खान से लेकर मलायका अरोड़ा, भूमि पेडोंकर जैसी अभिनेत्रियों ने मनीष मल्होत्रा ​​को बधाई दी। मनीष के काम की कई बार तारीफ हो चुकी है. मनीष इससे पहले कई हॉलीवुड स्टार्स के लिए कपड़े बना चुके हैं। भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत की हाल ही में शादी हुई है। उस शादी में हॉलीवुड स्टार किम कार्दशियन और उनकी बहन मेहमान थीं। मनीष ने दो विदेशियों के लिए लहंगे बनाए। इससे पहले मनीष ने हॉलीवुड स्टार जेनिफर एनिस्टन के लिए लहंगे बनाए थे।

मनीष को भारत में सितारों के कपड़े डिजाइनर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ऐश्वर्या से लेकर अनगिनत अभिनेत्रियों के शाही लहंगे बनाए हैं।

अमेरिकी पॉप स्टार जेनिफर लोपेज और अभिनेता बेन एफ्लेक की शादी टूटने की अफवाह है। ये स्टार जोड़ी अब एक छत के नीचे नहीं रह रही है. बेन ने तलाक के लिए अर्जी दी है। हॉलीवुड पड़ोस में ऐसा ही लगता है। हालाँकि दोनों एक-दूसरे को कई सालों से जानते हैं, लेकिन कुछ साल पहले उन्होंने शादी कर ली। इस बीच जैसे ही अलगाव की बात सुनी गई तो तरह-तरह के सवाल उठने लगे.

उम्र के हिसाब से देखें तो दोनों वयस्कता की राह पर चल रहे हैं. दोनों 50 पार कर चुके हैं. युवा भावनाएँ, उन्माद, जल्दबाजी में निर्णय लेना इस समय आमतौर पर मौजूद नहीं होते हैं। लेकिन जेनिफर और बेन के रिश्ते के हालिया समीकरण से पता चलता है कि पुरानी शादियों में भी अलगाव का अंधेरा छा सकता है। 2020 में प्रकाशित एक शोध पत्र, ‘ए जर्नल ऑफ फैमिली इश्यूज’ में बताया गया है कि पचास से अधिक जोड़ों के बीच तलाक की संख्या अचानक बढ़ गई है। क्या कोई गलती है? जीवन के दूसरे अध्याय में अलगाव को कैसे रोकें?

रिश्ते की शुरुआत याद रखें

चाहे शादी अधिक उम्र में हो या वैवाहिक रिश्ते की उम्र अधिक हो, साथी के प्रति आकर्षण, उसे पसंद करने के कारणों को नहीं भूलना चाहिए। प्यार का रंग फीका न पड़े इसका ध्यान रखना होगा।

जिज्ञासा को शांत नहीं करना चाहिए

विपरीत पक्ष के व्यक्ति को पूरी तरह से जानने में पूरा जीवन लग जाता है। जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आपके पास कम उम्र का जिज्ञासु दिमाग नहीं रह जाता है। इसलिए पार्टनर को जानने की भूख को मरने नहीं दिया जा सकता। जिंदगी प्याज के छिलके की तरह है. पहनने के बाद खुल जाता है. अलग-अलग उम्र में इसके अलग-अलग रूप होते हैं। जिज्ञासा एक-दूसरे की नई खोजों को जन्म दे सकती है।

रिश्तों में सीमाएँ होना

पति-पत्नी को एक-दूसरे के निजी मामलों में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार नहीं है। कम से कम ऐसा न होना ही बेहतर है. रिश्ते की उम्र चाहे जो भी हो, उसे कायम रखने के लिए कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। ये उन नियमों में से एक है. एक-दूसरे को थोड़ा अपने जैसा जीने देना ज़रूरी है। रिश्तों का ख्याल तभी रहेगा जब आप खुद अच्छे होंगे।

दिमाग खुला रखना

पार्टनर से कोई अपेक्षा, मांग मन में न रखें. इसके बजाय, इसे सीधे कहें। इससे कई जटिलताएं दूर होंगी. दूसरी ओर, दूसरी ओर का व्यक्ति उस समय जो चाहता है उसे पूरा करने में सक्षम नहीं हो सकता है। अपने पार्टनर को भी ये बताएं. आपसी समझ ही रिश्तों की बुनियाद है.

शादी को रंगीन होने दें

बोरियत आ सकती है. लेकिन यह क्यों आया, इसका निर्णय करने का कोई मतलब नहीं है। इसके बजाय, योजना बनाएं कि इस बोरियत को कैसे दूर किया जाए। रिश्तों का जश्न मनाना बहुत ज़रूरी है. ऐसा करने के लिए कोई रूपरेखा नहीं है. यह सब व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है।

राज्यपाल के खिलाफ ममता के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में टल गई है, डिविजन बेंच शुक्रवार को इस पर सुनवाई करेगी

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राज्यपाल सीवी आनंद बोस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अस्थायी से स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय कॉलेजियम की मंजूरी पर कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के नौ अस्थायी जजों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त नहीं किया. 29 अप्रैल को हाई कोर्ट के कॉलेजियम ने उन जजों की स्थायी नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम से सिफारिश की. सुप्रीम कोर्ट ने उस सिफ़ारिश को नहीं माना.

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के मुताबिक उन 9 अस्थायी जजों को अब स्थायी तौर पर नियुक्त नहीं किया जा रहा है. उनका कार्यकाल अस्थायी तौर पर एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है. न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी, न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन, न्यायमूर्ति प्रसेनजीत विश्वास, न्यायमूर्ति उदय कुमार, न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति सुप्रतिम भट्टाचार्य, न्यायमूर्ति पार्थसारथी चट्टोपाध्याय, न्यायमूर्ति अपूर्बा सिंह रॉय और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर रशीदी कुछ समय के लिए उच्च न्यायालय के अस्थायी न्यायाधीश के रूप में काम करेंगे। एक वर्ष का. इन नौ जजों का अस्थायी जज के तौर पर एक साल का कार्यकाल 31 अगस्त से शुरू होगा.

नियमानुसार अस्थायी न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाने में राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे शीर्ष अधिकारियों से सलाह ली जाती है। यह राय एक निश्चित अवधि के भीतर देनी होगी. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक नौ जजों को कलकत्ता हाई कोर्ट का स्थाई जज बनाने के मामले में मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने तय अवधि में अपनी राय नहीं दी.

राज्यपाल के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच में स्थगित कर दी गयी. सुनवाई शुक्रवार सुबह 10:30 बजे जस्टिस इंद्रप्रसन्न मुखर्जी और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ में होगी. हालांकि मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन इस पर अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी। बुधवार को मुख्यमंत्री के वकील सौमेंद्रनाथ मुखर्जी ने दावा किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे में बिना किसी सबूत के अंतरिम आदेश पारित किया था।

राज्यपाल ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उस मामले में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अंतरिम आदेश में कहा था कि मुख्यमंत्री राज्यपाल के खिलाफ कोई मानहानिकारक टिप्पणी नहीं कर सकते. यह आदेश 14 अगस्त तक लागू रहेगा। ममता के वकील ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया। मामला 19 जुलाई को दर्ज किया गया था. हाई कोर्ट ने बताया कि मामले की सुनवाई जस्टिस मुखोपाध्याय की खंडपीठ में होगी. राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर मामले में तृणमूल के दो विधायक सायंतिका बनर्जी, रेयात हुसैन सरकार और तृणमूल नेता कुणाल घोष भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि, जैसा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया है, कई टिप्पणियों से उसकी गरिमा को ठेस पहुंची है। ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए. इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से डिवीजन बेंच में मामला दायर किया गया. बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच के जज ने सौमेंद्रनाथ के इस दावे पर आदेश दिया कि अंतरिम आदेश की बिना किसी टिप्पणी के अवमानना ​​की गई है. उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री ने जनता के हित में वह टिप्पणी की. राज्यपाल के प्रति उनकी कोई भी टिप्पणी मानहानिकारक नहीं थी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी में कुछ भी मानहानिकारक नहीं पाया गया. एकल पीठ ने मामले को देखे बिना ही अंतरिम आदेश दे दिया.” न्यायमूर्ति इंद्रप्रसन्ना मुखर्जी और न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ में बुधवार को समय की कमी के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी. गुरुवार को आगे की सुनवाई होने की संभावना थी. वह सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टलने वाली है।

राज्यपाल के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच में स्थगित कर दी गयी. सुनवाई शुक्रवार सुबह 10:30 बजे जस्टिस इंद्रप्रसन्न मुखर्जी और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ में होगी. हालांकि मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन इस पर अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी। बुधवार को मुख्यमंत्री के वकील सौमेंद्रनाथ मुखर्जी ने दावा किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे में बिना किसी सबूत के अंतरिम आदेश पारित किया था।

राज्यपाल ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उस मामले में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अंतरिम आदेश में कहा था कि मुख्यमंत्री राज्यपाल के खिलाफ कोई मानहानिकारक टिप्पणी नहीं कर सकते. यह आदेश 14 अगस्त तक लागू रहेगा। ममता के वकील ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया। मामला 19 जुलाई को दर्ज किया गया था. हाई कोर्ट ने बताया कि मामले की सुनवाई जस्टिस मुखोपाध्याय की खंडपीठ में होगी.

राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर मामले में तृणमूल के दो विधायक सायंतिका बनर्जी, रेयात हुसैन सरकार और तृणमूल नेता कुणाल घोष भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि, जैसा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया है, कई टिप्पणियों से उसकी गरिमा को ठेस पहुंची है। ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए. इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से डिवीजन बेंच में मामला दायर किया गया. बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच के जज ने सौमेंद्रनाथ के इस दावे पर आदेश दिया कि अंतरिम आदेश की बिना किसी टिप्पणी के अवमानना ​​की गई है. उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री ने जनता के हित में वह टिप्पणी की. राज्यपाल के प्रति उनकी कोई भी टिप्पणी मानहानिकारक नहीं थी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी में कुछ भी मानहानिकारक नहीं पाया गया. एकल पीठ ने मामले को देखे बिना ही अंतरिम आदेश दे दिया.” न्यायमूर्ति इंद्रप्रसन्ना मुखर्जी और न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ में बुधवार को समय की कमी के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी. गुरुवार को आगे की सुनवाई होने की संभावना थी. वह सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टलने वाली है।

बांग्लादेश में अभी नहीं खुल रहे स्कूल-कॉलेज, मरने वालों की संख्या पहुंची 200! कर्फ्यू लागू है, जिसे 1758 में अपनाया गया था

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रिया दीपक और ब्यूटी गोप की इकलौती संतान थी। शादी के पांच साल बाद उनकी एक बेटी हुई। गोप दम्पति ने इसी वर्ष रिया को स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में भर्ती कराया। मुर्दाघर के सामने खड़ा एक आदमी. रोते-रोते आँसू सूख गये होंगे। वह अकेले में अस्पष्ट आवाज में बड़बड़ा रहा था, ‘‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि कहां से क्या हो गया. मेरी गोद में बच्ची के सिर से खून बह रहा था।” इसके बाद वह रोने लगे. अपनी बेटी को खो चुके पिता की दुर्दशा देखकर पास खड़े रिश्तेदार अपने आंसू नहीं रोक सके। बांग्लादेश में अशांति की खबर सामने आने के बाद यह पहली बार है कि इतने छोटे बच्चे की हत्या की गई है.

कोटा सुधार आंदोलन को लेकर बांग्लादेश एक सप्ताह से अधिक समय से उथल-पुथल में था। आंदोलन चल रहा है. प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की झड़प, मौतें, आग, तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हुई हैं. उस आंदोलन और संघर्ष में कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों को खो दिया। उस झड़प ने एक छोटे बच्चे की जान भी ले ली. रिया गोप. साढ़े छह साल. बांग्लादेश के नारायणगंज सदर के नयमती इलाके में माता-पिता के साथ रहती थी। आंदोलन की आग बांग्लादेश के कोने-कोने में फैल गई. नारायणगंज को नहीं छोड़ा गया है.

बांग्लादेशी अखबार ‘प्रोथोम अलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नन्ही रिया पिछले शुक्रवार को लंच के बाद छत पर खेलने गई थी. थोड़ी देर बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. रियाद के घर के सामने झड़पें हुईं. दीपक कुमार गोप और उनकी पत्नी ब्यूटी घबरा गये. दीपक अपनी बेटी को छत से लाने के लिए दौड़ता है। सड़क से चली गोली बेटी को गोद में ले रही रिया के सिर में लगी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, दीपक ने देखा कि उसके कपड़े खून से भीग रहे हैं। बेटी के सिर से खून बह रहा है. नन्ही रिया दीपक के कंधे पर सिर रखकर निढाल होकर गिर पड़ी। दीपक अपनी बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचे। रिया को घर के पास ही एक क्लिनिक में ले जाया गया. लेकिन उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया। पीछे की सर्जरी भी जल्दी हो गई. डॉक्टरों ने भी गोप दंपत्ति को आश्वस्त किया.

‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि डॉक्टरों ने बताया कि 72 घंटे से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता. शुक्रवार को तीन दिन बीत चुके हैं। रिया की उंगली की हरकत देखकर गोप दंपत्ति को आशा की रोशनी दिखी. लेकिन वे सोच भी नहीं सकते थे कि उनकी बेटी को और किस चीज़ का इंतज़ार है. बुधवार को रिया की अस्पताल में मौत हो गई. अस्पताल में रिया की मौत की वजह ‘गनशॉट इंजरी’ लिखी गई. बेटी की मौत की खबर से गोप दंपत्ति टूट गये.

बुधवार को रिया के शव का पोस्टमार्टम किया गया. दीपक अस्पताल के मुर्दाघर के सामने इंतज़ार कर रहा था। कुछ रिश्तेदारों के साथ. मुर्दाघर के सामने खड़ा दीपक बड़बड़ाता रहा, ‘‘मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. मेरी गोद में लड़की के सिर से खून बह रहा था। रिश्तेदार उसे ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन दीपक चिल्लाता रहा, “मेरी छोटी माँ, तुमने हमें छोड़ दिया। हम तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे।”

रिया दीपक और ब्यूटी की इकलौती संतान थी। दीपक एक स्थानीय हार्डवेयर स्टोर में काम करता है। शादी के पांच साल बाद उनकी एक बेटी हुई। गोप दम्पति ने इसी वर्ष रिया को स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में भर्ती कराया।

कोटा सुधार आंदोलन के चलते पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में जो अशांति का माहौल बना था, वह अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है. पुलिस अभी भी ढाका की सड़कों पर गश्त कर रही है। सेना और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के सैनिक तैनात हैं. समाचार मीडिया बीबीसी बांग्ला के मुताबिक बुधवार तक पूरे देश में अशांति फैलाने के आरोप में 1758 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार सूची में बीएनपी और जमात के कई नेता भी शामिल हैं.

हालाँकि बांग्लादेश में आंशिक रूप से ढील दी गई है, फिर भी कर्फ्यू जारी है। गुरुवार को देशव्यापी कर्फ्यू का छठा दिन है. मंगलवार तक तीन दिन की सामान्य छुट्टी के बाद इसे दोबारा नहीं बढ़ाया गया। ढाका समेत चार जिलों में बुधवार से कर्फ्यू में सात घंटे की ढील दी गई है. कार्यालय चार घंटे के लिए खुला है. वाणिज्यिक बैंकों को भी सीमित सीमा तक खुले रहने की अनुमति है। हालाँकि, बांग्लादेश के शिक्षा मंत्री महिबुल हसन चौधरी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि शैक्षणिक संस्थान अभी नहीं खुल रहे हैं। हसीना की सरकार स्थिति के सामान्य लय में लौटने का इंतजार करना चाहती है. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से शिक्षण संस्थान खोले जाएंगे.

बांग्लादेश में कोटा सुधार आंदोलन को लेकर अशांति में मरने वालों की संख्या पहले ही दो सौ से अधिक हो चुकी है। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बुधवार दोपहर तक मरने वालों की संख्या 168 थी। प्रथम अलो ने गुरुवार सुबह खुलासा किया कि कोटा सुधार आंदोलन के आसपास केंद्रित विरोध प्रदर्शनों और विरोध प्रदर्शनों के बाद कम से कम 201 लोग मारे गए हैं।

ईयरफोन में अरबों कीटाणुओं का बसेरा, कैसे साफ करें डिवाइस से होगा बचाव?

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अगर आप गंदे इयरफ़ोन साफ़ करना चाहते हैं, तो डरें नहीं! बस पानी, या साबुन, या कुछ और, हेडफ़ोन को किससे साफ़ करें? कई लोग न सिर्फ सड़क पर बल्कि घर पर भी लंबे समय तक हेडफोन या ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उनमें से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि ये हेडफोन या ईयरफोन कीटाणुओं के पनपने की जगह हैं। इयरफ़ोन को किससे साफ़ करें?

कई लोग सफेद ईयरफोन के साथ जरबेरा का सेवन कर रहे हैं। क्योंकि ये ईयरफोन कुछ दिनों के बाद गंदे हो जाते हैं। दूसरों के सामने काले इयरफ़ोन या काले इयरफ़ोन का उपयोग करने में शर्म आती है। दोबारा सफ़ाई करना चाहो तो डरो, ख़राब मत करो! बस पानी, या साबुन, या कुछ और, हेडफ़ोन को किससे साफ़ करें?

1) सफेद रबर इयरफ़ोन या चार्जर केबल के लिए सबसे अच्छा सफाई एजेंट तरल डिश साबुन है।

2) इस लिक्विड साबुन को पानी में मिला लें. थोड़ा झाग बनाने के लिए पर्याप्त मिलाएं। पुनः, यदि साबुन की मात्रा अधिक है, तो साबुन के दाग तार पर बने रहेंगे।

3) इस बार मिश्रण में एक मुलायम कपड़ा भिगो लें. उस कपड़े से हेडफोन को साफ कर लें।

4) ईयरफोन या चार्जर केबल को पानी में न डुबोएं। या इसे नल के नीचे न रखें। पानी अंदर जा सकता है और उपकरण को नुकसान पहुंचा सकता है।

5) इस तार को स्प्रिट या अल्कोहल जैसी किसी चीज से साफ न करें. वे रबर के साथ प्रतिक्रिया करके उसे पिघला सकते हैं।

6) ईयरफोन के स्पीकर के बाहर गंदगी जमा हो सकती है, उस हिस्से को इस तरह से साफ नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सूखे टूथब्रश का इस्तेमाल करें।

घर में सबसे ज्यादा सफाई की जरूरत किचन को होती है। हेन्शेल की विभिन्न वस्तुओं पर तेल-पीले छींटों के अलावा विभिन्न दाग भी हैं। भोजन गर्म करने के लिए माइक्रोवेव ओवन को बाहर नहीं रखा गया है। दूसरी ओर, चूंकि काम पूरा होने पर इस ओवन का दरवाजा बंद कर दिया जाता है, इसलिए कई मामलों में सफाई के दौरान इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। लेकिन अगर आप माइक्रोवेव ओवन को दिन-प्रतिदिन साफ ​​नहीं करते हैं, तो वह माइक्रोवेव कीटाणुओं के लिए प्रजनन स्थल बन जाता है।

माइक्रोवेव साफ करने के नाम पर आता है आलस्य? यदि आप सही तरीका जानते हैं, तो आप डिवाइस को पांच मिनट में चमका सकते हैं! केवल तीन चरणों में माइक्रोवेव को कैसे साफ करें, यहां संकेत दिए गए हैं।

1) साबुन का पानी: सबसे पहले कांच की ट्रे को माइक्रोवेव से हटा लें. इसके बाद इसे साबुन के पानी में डुबो दें. एक बार जब जमा हुआ तेल-गंदगी ढीली हो जाए तो इसे ब्रश से साफ़ करें।

2) बेकिंग सोडा-नींबू और नमक: अब एक कटोरे में पानी के साथ नींबू का रस और बेकिंग सोडा मिलाएं। इसमें एक कपड़ा डुबोएं और उस कपड़े से माइक्रोवेव के अंदर और बाहर अच्छे से पोंछ लें। माइक्रोवेव ओवन पूरी तरह से चमक उठेगा.

3) सिरका: एक माइक्रोवेव सेफ बाउल में सिरका और पानी मिलाएं। फिर उच्चतम तापमान पर पांच मिनट तक माइक्रोवेव करना जारी रखें। इससे निकलने वाली भाप पूरे उपकरण की सारी गंदगी को नरम कर देगी।

घर पर मेहमानों के आने की खबर! पूरा घर पूरी तरह से नष्ट हो गया है. खिड़कियों और दरवाजों पर सुंदर पर्दे लगाने चाहिए। बिस्तर पर साफ चादरें बिछानी चाहिए। चाय की मेज पर रखे रसीले पौधों के चीनी मिट्टी के बर्तनों को गीले कपड़े से पोंछना चाहिए ताकि उन पर धूल न चिपके। मेज पर लगे शीशे या टीवी स्क्रीन पर तेल की एक बूंद भी नहीं गिरनी चाहिए। दीवारों के कोनों से लेकर बाथरूम की टाइलों तक – सब कुछ बिल्कुल चमकदार होना चाहिए। लेकिन क्या आपने कभी हेन्शेल सिंक और बाथरूम के कोने में लगे नल को देखा है? जंग और तलछट के कारण दोनों की हालत खराब हो गई है! उन्हें कैसे साफ़ करें?

1) सिरका

बेसिन में एक नया नल स्थापित किया। एक माह बाद पानी का बहाव कमजोर पड़ने लगा है. कई बार पानी में विभिन्न खनिजों या अन्य पदार्थों के कारण पानी की सतह पर जंग लग जाती है। नल के मुहाने पर लगी जाली का मुँह अवरुद्ध है। इस समस्या का समाधान है सिरका। अगर आप इसमें थोड़ा सा नमक मिला लें तो ये और भी अच्छा काम करेगा. इस मिश्रण को रात भर नल के मुँह पर लगा रहने दें। अगले दिन जल प्रवाह के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

2) नींबू का रस

नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है। हेन्शेल के स्टील सिंक दिन-ब-दिन अपनी चमक खोते जा रहे हैं। खोए हुए क्षेत्र को वापस लाने के लिए पतीलेबु का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जा सकता है। आप इसमें थोड़ा सा नमक भी मिला सकते हैं.

ओलंपिक में दूसरे दौर में जोकोविच बनाम नडाल? सरलेन मरे, कर्बर ने सेवानिवृत्ति की घोषणा की

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रियो और टोक्यो ओलिंपिक के बाद पेरिस में एक शरणार्थी टीम भी है. 37 खिलाड़ी हिस्सा लेने वाले हैं. ये देशविहीन खिलाड़ी 12 अलग-अलग खेल खेलेंगे. इन 37 लोगों ने पेरिस के रास्ते में कई बाधाओं को पार किया।

सिंडी गाम्बा शरणार्थी टीम की ध्वजवाहक हैं। उनका जन्म कैमरून में हुआ था। लेकिन अब वह शरणार्थी हैं. वह शुक्रवार को उद्घाटन समारोह में शरणार्थी टीम के लिए झंडा लहराएंगे। गाम्बा ने कहा, ”हम सभी एक समूह के रूप में शरणार्थी हैं। हम खिलाड़ी हैं. साथ ही हम योद्धा भी हैं. हम सभी भूखे खिलाड़ी हैं. हर कोई एक परिवार है. हमें शरणार्थी के तौर पर देखा जाता है. लेकिन हम खिलाड़ी हैं. दूसरे देशों के खिलाड़ियों की तरह हम भी जीतने आए हैं।’ हम भी पदक जीतने के भूखे हैं।”

2015 में, शरणार्थियों को पहली बार ओलंपिक के लिए विचार किया गया था। इसे 2016 रियो ओलंपिक में लागू किया गया था. 10 खिलाड़ियों ने शरणार्थी के तौर पर हिस्सा लिया. इस बार तैराकी, कुश्ती जैसे विभिन्न खेलों में 37 खिलाड़ी भाग लेंगे। इस बार ओलिंपिक में ब्रेक लग गया है. मनिझा तलास उस खेल में भाग लेंगे। 21 वर्षीया को सड़क पर एक आदमी को नाचते हुए देखकर प्रेरणा मिली। उनका जन्म काबुल में हुआ था. लेकिन 2021 से अफगानिस्तान का शासक तालिबान है. उसके लिए उस देश में रहना असंभव हो गया। वह शरणार्थी के रूप में स्पेन गये।

फरज़ाद मंसूरी एक शरणार्थी के रूप में तायक्वोंडो में प्रवेश करेंगे। वह ब्रेक लगाना को पीड़ा से बचने के एक हथियार के रूप में देखता है। मंसूरी ने टोक्यो में भी खेला। इसके बाद वह अफगानिस्तान के लिए खेले। तालिबान द्वारा देश पर कब्ज़ा करने के बाद वह ब्रिटेन चले गए। इस साल शरणार्थी के तौर पर खेलूंगा. मंसूरी को दूसरी बार ओलंपिक में जाने का मौका मिल रहा है. लेकिन उनके दोस्त मोहम्मद जान सुल्तानी को वह मौका नहीं मिला. पिछली बार वह टोक्यो ओलंपिक में अफगानिस्तान के लिए खेले थे. लेकिन काबुल हवाईअड्डे पर एक आत्मघाती हमले में सुल्तानी की मौत हो गई. मंसूरी ने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि हमारे देश में शांति लौटेगी. पूरी दुनिया में शांति लौट आएगी।”

विंबलडन में नहीं मिले. पेरिस ओलंपिक के दूसरे दौर में नोवाक जोकोविच और राफेल नडाल की भिड़ंत हो सकती है. दूसरी ओर, एंडी मरे ने एकल से नाम वापस ले लिया है। तीन महिला ग्रैंड स्लैम की विजेता एंजेलिक कर्बर ने भी संन्यास की घोषणा की।

ओलंपिक में टेनिस एकल के पहले दौर में ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू एब्डेन का सामना सर्बिया के जोकोविच से होगा। स्पेन के नडाल हंगरी के मार्टन फुकसोविक्स के खिलाफ खेलेंगे। अगर पहले राउंड में दोनों अपना-अपना मैच जीत जाते हैं तो दूसरे राउंड में जोकोविच-नडाल एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगे। नडाल ने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था. जोकोविच ने दोनों बार कांस्य पदक जीता।

महिलाओं की शीर्ष वरीयता प्राप्त पोलैंड की इगा शियोनटेक ओलंपिक में एकल के पहले दौर में रोमानिया की इरिना कैमेलिया बेगू से खेलेंगी। दूसरी वरीयता प्राप्त अमेरिका की कोको गॉफ का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अजाला टॉमलियानोविक से होगा। दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता मरे ने कहा कि उन्होंने एकल से संन्यास ले लिया है। ब्रिटिश टेनिस स्टार केवल युगल खेलेंगे। वहां उनके पार्टनर डैन इवांस हैं। पिछले कुछ सालों में उन्हें बार-बार चोटें लगी हैं. उन्होंने विंबलडन में सिंगल्स से अपना नाम वापस ले लिया. डबल्स में खेला. इस बार वह ओलिंपिक में सिर्फ डबल्स खेलेंगे।

कर्बर ने संन्यास की घोषणा कर दी है. तीन बार के ग्रैंड स्लैम विजेता ने कहा कि वह ओलंपिक के बाद अपना रैकेट लटका देंगे। ओलंपिक में एकल के पहले दौर में कर्बर की प्रतिद्वंद्वी जापान की नाओमी ओसाका हैं। चार बार की ग्रैंड स्लैम विजेता के खिलाफ कर्बर की लड़ाई आसान नहीं होगी। भारत की महिला तीरंदाजों ने सबका ध्यान खींचा. पेरिस ओलंपिक में भारत को पहली सफलता मिली. भारतीय महिला तीरंदाजी टीम ने क्वालीफाइंग राउंड खेलने के बाद सीधे क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। दीपिका कुमारी, अंकिता भक्त और भजन कौर सीधे अंतिम आठ में खेलेंगी।

हालाँकि ओलंपिक 26 जुलाई को शुरू हुआ, लेकिन कुछ प्रतियोगिताएँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। गुरुवार को तीरंदाजी में महिलाओं की व्यक्तिगत और टीम रैंकिंग स्पर्धाएं थीं। वहीं, दीपिका, अंकिता और भजन चौथे स्थान पर रहे। उन्होंने कुल 1983 अंक अर्जित किये। इनमें अंकिता ने सबसे ज्यादा 666 अंक हासिल किए। भजन ने 659 रन बनाए। दीपिका ने 658 अंक हासिल किए.

क्या भारत वंश की कमला हैरिस बन सकती है अमेरिका की राष्ट्रपति?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत वंश की कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बन सकती है या नहीं! अमेरिका में नवंबर में होने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन की उम्मीदवारी खतरे में है। 81 साल के बाइडन पर बुढ़ापा हावी हो रहा है। साथ में वह डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी से भी जूझ रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बाइडन वैसे तो पूरा दम-खम लगा रहे हैं, मगर उनकी याददाश्त और फिटनेस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में बाइडन वॉशिंगटन में एक कन्वेंशन सेंटर में संबोधन के दौरान उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को राष्ट्रपति पुतिन कह दिया। यहां तक कि वो उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को डोनाल्ड ट्रंप कह बैठे। इससे पहले वह खुद को ही ब्लैक वुमन बता चुके हैं। ऐसे में भुलक्कड़ बाइडन को डेमोक्रेट उम्मीदवारी से हटाए जाने की मांग खुद उनकी पार्टी के ही लोग कर रहे हैं। पार्टी के ज्यादातर लोग उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को डेमोक्रेट पार्टी की प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। 5 नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अगर कमला जीतती हैं तो वह देश की पहली वुमन होंगी, जो इस पद पर काबिज होंगी। बाइडन इस वक्त अपनी उम्मीदवारी के भविष्य को लेकर बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं। उनकी कैंपेन टीम चुपचाप एक वोटर सर्वे के माध्यम से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की लोकप्रियता का पता लगाने की कोशिश कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह सर्वे गुप्त रूप से किया गया है। बाइडन को अपना नामांकन वापस लेने के लिए मनाने के तौर-तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है। दरअसल, बाइडन अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वह कह चुके हैं कि अब ईश्वर ही उन्हें इसके लिए मना सकता है।

दो हफ्ते पहले बाइडेन और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में अमेरिकी राष्ट्रपति के खराब प्रदर्शन से डेमोक्रेट्स काफी परेशान हैं। बाइडन पर प्रत्याशी से हटने का दबाव है। मगर, बाइडन बार-बार डेमोक्रेट्स से एकजुट रहने की नसीहत दे रहे हैं और ट्रंप को हराने का दावा कर रहे हैं। बाइडन ने 9 जुलाई को कांग्रेस के डेमोक्रेट्स को लिखे एक पत्र में कहा कि वह अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बढ़ती चिंताओं के बावजूद अपनी चुनावी रेस जारी रखेंगे।

27 जून को प्रेसीडेंशियल बहस के बाद राष्ट्रपति बाइडन की जमकर फजीहत हुई। तभी से भारतीय मूल की कमला हैरिस अपने बॉस का लगातार बचाव करती रहीं। कमला ने कहा कि 90 मिनट की बहस से किसी को कमतर आंका नहीं जा सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एडम स्किफ और जिम क्लिबर्न जैसे बड़े नाम 59 वर्षीय कमला हैरिस की उम्मीवारी के समर्थन में हैं। ये सांसद यह मानते हैं कि बाइडन की जगह कमला हैरिस ज्यादा बेहतर उम्मीदवार हैं। एडम स्किफ ने तो यहां तक कहा कि ट्रंप को कमला ही हरा सकती हैं।सार्क यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर देवनाथ पाठक के अनुसार, बाइडन के सहयोगी रहे कुछ डेमोक्रेट्स ऐसे भी हैं जो कमला हैरिस को साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डमोक्रेटिक उम्मीदवारी की दौड़ में वोटिंग से पहले ही पिछड़ जाने वाले शख्स के रूप में देखते हैं। वो मानते हैं कि कमला का व्हाइटस हाउस में रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा और उनकी अप्रूवल रेटिंग कम रही है। डेमोक्रेट समर्थकों का मानना है कि चुनावी सर्वेक्षणों में भी यह सामने आया है कि बाइडन की तुलना में कमला हैरिस ट्रंप के खिलाफ ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। पाठक बताते हैं कि कमला का कद खुद उनकी पार्टी में ही बढ़ा है। बाइडन का बचाव करते-करते वह खुद मजबूत होकर उभरी हैं। विपक्षी भी उनकी वकालत कर रहे हैं। यहां तक कि ट्रंप के कुछ समर्थक तो ये भी कह रहे हैं कि ट्रंप का मुकाबला कमला से ही होने वाला है।

दरअसल, कमला हैरिस की एक राष्ट्रीय छवि है। उनके पास चुनाव प्रचार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर है और वे युवा मतदाताओं को अपील कर सकती हैं। इससे चुनाव के चार महीने पहले बिना किसी अड़चन के उम्मीदवार बदला जा सकता है।

ट्रंप के साथ प्रेसीडेंशियल डिबेट में पिछड़ने के बाद बाइडन के साथ कमला हैरिस हर जगह नजर आ रही हैं। इससे खुद उनकी छवि मजबूत हो रही है। यह एक तरह से उनकी छद्म उम्मीदवारी को पुष्ट करता है। 4 जुलाई यानी अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर बार कमला हैरिस अपने लॉस एंजिलिस स्थित अपने घर में फायर फाइटर्स और सीक्रेट सर्विस एजेंट्स के लिए हॉटडॉग बनाती और खिलाती हैं। मगर, इस बार वह सबकुछ छोड़कर व्हाइट हाउस में बाइडन के साथ आजादी का जश्न मना रही थीं। उनका बाइडन का बचाव करना ही अमेरिकी लोगों को रास आ रहा है। पाठक बताते हैं कि हाॅट डॉग ग्रिल करना छाेड़कर व्हाइट हाउस में जाना ये सांकेतिक रूप से कमला की छवि की मजबूती है। इससे डेमोक्रेट्स के बीच उनकी स्वीकार्यता और ज्यादा बढ़ेगी।

अगर बाइडन नॉमिनेशन वापिस लेते हैं और उसके बाद पार्टी हैरिस के अलावा किसी और को मैदान में उतारती है तो ये बात डेमोक्रेट्स के ताकतवर ब्लैक कॉकस को नागवार गुजरेगी। खास बात यह है कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी भी कमला को ही सबसे ज्यादा योग्य मानती है, जो बाइडन की जगह ले सकती हैं। डोनाल्ड ट्रंप तो पहले ही कमला हैरिस को अपना प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार मानने लग गए हैं और उनको ‘निराश करने वाली शख्स’ करार दिया है। हाल में हुए सीएनएन पोल में कहा गया था कि ट्रंप के खिलाफ कमला राष्ट्रपति बाइडन से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इस पोल में कमला को ट्रंप से बस 2 अंक पीछे बताया गया, जबकि बाइडन को ट्रंप से 6 अंक पीछे बताया गया है।

क्या अमेरिका में महिला राष्ट्रपति बन सकती है?

इस बार अमेरिका में राष्ट्रपति महिला भी बन सकती है! अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवारी छोड़ने के लिए बढ़ रहे दबाव के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी के अधिकतर नेताओं को लगता है कि उपराष्ट्रपति कमला हैरिस राष्ट्रपति पद के लिए सबसे अच्छी उम्मीदवार हैं। एपी-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के एक नए सर्वेक्षण में पता चला है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के 10 में से छह नेताओं को लगता है कि कमला हैरिस राष्ट्रपति पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। 10 में से लगभग दो नेताओं ने कहा कि उन्हें नहीं लगता की कमला हैरिस सही उम्मीदवार हैं जबकि 10 में से दो अन्य ने कहा कि उन्हें इस बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है कि वे कुछ कह सकें। 27 जून को हुई बहस में बाइडन के खराब प्रदर्शन को देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं का कभी गुपचुप तरीके से तो कभी खुले तौर पर मानना है कि हैरिस को बाइडन की जगह राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। इन नेताओं का मानना है कि वह सबसे पुराने दल रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को बाइडन से ज्यादा कड़ी टक्कर दे सकती हैं। बता दें कि इस साल की शुरुआत में, उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि अमेरिकी विदेश नीति को अगले 40 वर्षों के लिए पूर्वी एशिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।कुछ परेशानियां पैदा कर सकता है। मैटमैन ने कहा कि हैरिस अधिक प्रभावी उम्मीदवार होंगी, क्योंकि बाइडन अपने प्रतिद्वंद्वी पर ‘दबाव डालने’ और उनकी कमजोरियों का फायदा उठाने में असमर्थ हैं। जहां तक हैरिस की बात है तो वह बाइडन का पूरी तरह से समर्थन करती रही हैं। बहस में खराब प्रदर्शन के बाद भी उन्होंने बाइडन का बचाव किया था।

मिसूरी के ग्रीनवुड में डेमोक्रेटिक पार्टी के एक नेता ओकली ग्राहम ने कहा कि वह बाइडन के कार्यकाल में हासिल हुईं उपलब्धियों को लेकर ‘काफी खुश’ हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए हैरिस का समर्थन करके उन्हें ज्यादा खुशी होगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि एक महिला देश की राष्ट्रपति बने। डेमोक्रेटिक पार्टी के लगभग तीन-चौथाई नेता हैरिस के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जबकि बाइडन के लिए भी वे ऐसा ही दृष्टिकोण रखते हैं। 10 में से सात लोग उनके बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

टेम्पा में रहने वाली डेमोक्रिटक पार्टी की नेता शैनन बेली ने राष्ट्रपति के तौर पर बाइडन की उपलब्धियों, खासकर बुनियादी ढांचा कानून और महंगाई को काबू में रखने के लिए उनकी तारीफ की और कहा कि उन्हें ‘प्रेमपूर्वक याद’ किया जाएगा।वेंस को ट्रम्प की तुलना में एक अधिक प्रखर ट्रेड वॉरियर के रूप में देखा जाता है।वेंस ने पिछले वर्ष एक ऐसे कानून को सह-प्रायोजित किया था, जिसके तहत चीन की सरकार के लिए अमेरिकी पूंजी बाजारों तक पहुंच को रोकने करने की मांग की गई थी। ऐसा चीन के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून का पालन करने में विफल रहने की सूरत में था।

 हालांकि वह बाइडन की तुलना में हैरिस का ज्यादा समर्थन करती दिखीं। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हैरिस राष्ट्रपति पद संभालने के लिए ज्यादा सक्षम नजर आती हैं। बेली ने कहा, ‘यहां बात सिर्फ शारीरिक ऊर्जा की नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर मजबूत होने की भी है।’

कैलिफोर्निया के चिको में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता थॉमस मैटमैन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि वह गर्भपात की बहुत मजबूत समर्थक रही हैं और आगे भी रहेंगी।’ मैटमैन (59) ने कहा कि उनका मानना है कि बाइडन रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को नहीं हरा पाएंगे। बता दें कि इस बात को लेकर टेंशन है कि ट्रंप-वेंस एडमिनिस्ट्रेश इमिग्रेशन पर बैन लगा सकता है। इसका संभावित असर शिक्षा और नौकरी के लिए अमेरिका जाने के सपने देखने वाले भारतीयों पर पड़ सकता है। व्यापार के लिए अधिक लेन-देन वाला दृष्टिकोण, जिसमें ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के अनुरूप भारतीय वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क और टैरिफ शामिल हैं, विदेश नीति पर अपने भाषणों में सीनेटर वेंस ने चीन को एक प्राइमरी रणनीतिक प्रतिस्पर्धी के रूप में बताया है। इसके साथ ही बीजिंग के बढ़ते प्रभाव के लिए अमेरिका से अधिक मुखर प्रतिक्रिया का आह्वान किया है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि अमेरिकी विदेश नीति को अगले 40 वर्षों के लिए पूर्वी एशिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।कुछ परेशानियां पैदा कर सकता है। मैटमैन ने कहा कि हैरिस अधिक प्रभावी उम्मीदवार होंगी, क्योंकि बाइडन अपने प्रतिद्वंद्वी पर ‘दबाव डालने’ और उनकी कमजोरियों का फायदा उठाने में असमर्थ हैं।