Friday, March 13, 2026
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क्या आने वाले समय में मानसून देगा दस्तक?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आने वाले समय में मानसून दस्तक देगा या नहीं! भीषण गर्मी की मार झेल रहे दिल्लीवालों को थोड़ी राहत मिली है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई है। वहीं मॉनसून ने भी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ इलाकों में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने कल भी दिल्ली में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी का अनुमान जताया है। इसके अलावा मॉनसून भी बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में असर दिखाएगा। जानिए कल यानी 21 जून को आपके शहर में कैसा मौसम रहेगा। दिल्ली एनसीआर के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और हवाओं के बाद मौसम सुहावना हो गया। तापमान में 6 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कल भी दिल्ली में गर्मी से राहत जारी रहेगी। देशभर में पड़ रही गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश के सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज दिया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो एक मार्च से हीट स्ट्रोक के मामले और उससे मरने वालों के आंकडे डेली जारी करें।मौसम विभाग ने दिल्ली में शुक्रवार और शनिवार को भी बादल छाए रहने और आंधी-बारिश की संभावना जताई है। साथ ही बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ धूल भरी आंधी चलने का भी अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, कल 21 जून को बिहार, झारखंड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों और गुजरात में भी कल भारी बारिश का अनुमान है। भले ही वेस्टर्न डिस्टरबेंस के बाद हुई बारिश से दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहल मिली है, लेकिन कल से उत्तर भारत के राज्यों में फिर से लू की वापसी हो रही है। मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 21 जून यानी शुक्रवार से फिर से पश्चिमी यूपी सहित कई इलाकों में भीषण लू चल सकती है। वहीं 21 से 23 जून के बीच पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

बता दे कि गर्मी से मरने वालों की संख्या पर एक अधिकारिक सूत्र ने बताया कि ये आंकड़े राज्यों की ओर से दिए गए अंतिम आंकडें नहीं हैं। इसलिए यह संख्या बढ़ भी सकती है। बता दें कि सिर्फ 18 जून को ही हीट स्ट्रोक से मरने वालों की संख्या 6 थी। बता दें कि उत्तर और पूर्वी भारत के अधिकांश इलाके लंबे समय से भीषण लू की चपेट में है। जिसकी वजह से लोगों के बीमार होने का जो सिलसिला शुरू हुआ था वो मौत तक पहुंच रहा है। देशभर में पड़ रही गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश के सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज दिया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो एक मार्च से हीट स्ट्रोक के मामले और उससे मरने वालों के आंकडे डेली जारी करें।

हीट स्ट्रोक से बचने के लिए बेहतर होगा कि सीधे धूप में न निकलें। अगर आपको बाहर निकलना है, तो ध्यान रखें कि प्यास न लगने पर भी आप पानी पीते रहें। बता दें कि दिल्ली एनसीआर के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और हवाओं के बाद मौसम सुहावना हो गया। तापमान में 6 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कल भी दिल्ली में गर्मी से राहत जारी रहेगी। मौसम विभाग ने दिल्ली में शुक्रवार और शनिवार को भी बादल छाए रहने और आंधी-बारिश की संभावना जताई है। बता दें कि भले ही वेस्टर्न डिस्टरबेंस के बाद हुई बारिश से दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहल मिली है, लेकिन कल से उत्तर भारत के राज्यों में फिर से लू की वापसी हो रही है। मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 21 जून यानी शुक्रवार से फिर से पश्चिमी यूपी सहित कई इलाकों में भीषण लू चल सकती है। वहीं 21 से 23 जून के बीच पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। लस्सी, नींबू पानी, छाछ या ओआरएस जैसे अन्य हाइड्रेटिंग तरल पदार्थों का सेवन करें जो इलेक्ट्रोलाइट स्तर को बनाए रख सकते हैं। इसके साथ ही शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड शीतल पेय का सेवन न करें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और चश्मे, छाते और जूतों का इस्तेमाल करें।

आखिर किन लोकसभा सीटों पर आई गरीबी में कमी?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किन लोकसभा सीटों पर गरीबी में कमी आई है! लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान बीजेपी ने लगातार गरीबी कम करने के मुद्दे पर जोर दिया। ये बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में से एक था। लेकिन इस मुद्दे से बीजेपी को फायदा होता नहीं दिखा। बीजेपी सरकार के दौरान जिन इलाकों में गरीबी में गिरावट आई, वहां पार्टी को बड़ा झटका लगा। 2015-2016 से गरीबी में कमी देखी गई 517 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 232 सीटें जीतीं, जो 2019 में 295 सीटें जीतने के बाद से 63 सीटों की गिरावट है। दूसरी ओर कांग्रेस 2019 में यहां 42 सीटों से बढ़कर 2024 में 92 तक पहुंच गई। एनडीए ने कुल 282 सीटें जीतीं और विपक्षी इंडिया ब्लॉक 226 सीटें जीतने में सफल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी भाषणों में अक्सर गरीबी कम करने का दावा करते थे। उन्होंने पिछले दशक में सरकार द्वारा करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की बात अपने कई भाषणों में की। इसके लिए उन्होंने नीति आयोग का हवाला दिया। नीति आयोग हर पांच साल में इकट्ठा किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के डेटा का इस्तेमाल करके गरीबी, स्वास्थाय, शिक्षा और जीवन स्तर में कमी को मापती है। रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसवी सुब्रमणियन की टीम ने लोकसभा क्षेत्रों के लिए एक डेटाबेस बनाया। इस डेटाबेस में 2015-16 से 2019-21 के बीच गरीबी के आंकड़े शामिल किए गए। इस रिपोर्ट के अनुसार 517 लोकसभा सीटों में गरीबी कम हुई, जबकि बाकी 26 सीटों में गरीबी बढ़ी। जिन सीटों पर गरीबी कम हुई, उनमें से 314 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही बीजेपी गठबंधन जीता। वहीं, 203 सीटों पर विपक्ष के उम्मीदवार चुनाव जीते। केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी ने चुनाव अभियान के दौरान गरीबी कम करने पर काफी जोर दिया था। लेकिन, जिन 517 सीटों पर गरीबी कम हुई, वहां भाजपा को सिर्फ 232 सीटें मिलीं। इनमें से 5 सीटों पर 2019 वाले ही दल जीते। सिर्फ यूपी की श्रावस्ती सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से समाजवादी पार्टी (सपा) के पास गई। इन सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन को बराबर 3-3 सीटें मिलीं।ये 2019 के चुनाव से 63 सीटें कम हैं। वहीं, कांग्रेस को 2019 में 42 सीटों के मुकाबले 2024 में 92 सीटें मिलीं। यानी गरीबी कम होने के बावजूद कई सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि यहां कांग्रेस को ज़्यादा फायदा हुआ।

डेटाबेस के मुताबिक, जिन सीटों पर 2015 से 2021 के बीच गरीबी बढ़ी, उन 26 सीटों में से सिर्फ 6 सीटों पर इस बार विपक्षी पार्टियां जीतीं। बाकी सीटों पर पिछली बार जीती पार्टी ही फिर से चुनाव जीती। हालांकि, सिर्फ 7 सीटों पर ही गरीबी 1% से ज़्यादा बढ़ी। इनमें मेघालय की शिलांग सीट पर सबसे ज़्यादा (6.01%) गरीबी बढ़ी। जिन 26 सीटों पर गरीबी बढ़ी, उनमें से 9 पर बीजेपी जीती, जो पिछले चुनाव से दो ज्यादा है। कांग्रेस 7 सीटों पर जीती और तृणमूल कांग्रेस 3 सीटों पर। कुल मिलाकर, एनडीए को इन 26 सीटों में से 11 और इंडिया गठबंधन को 14 सीटें मिलीं। भाजपा ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से एक-एक सीट छीन ली। कांग्रेस को 3 सीटें कम मिलीं। केरल में एक सीट बीजेपी को मिली, एक सीट सीपीआई(एम) को और मेघालय में एक सीट वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी को मिली। देशभर में सिर्फ 6 सीटें ऐसी हैं, जहां आधे से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इनमें से 3 सीटें बिहार में, 2 सीटें उत्तर प्रदेश में और 1 सीट झारखंड में हैं। इनमें से 5 सीटों पर 2019 वाले ही दल जीते। सिर्फ यूपी की श्रावस्ती सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से समाजवादी पार्टी (सपा) के पास गई। इन सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन को बराबर 3-3 सीटें मिलीं।

इसके अलावा 152 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां सिर्फ 5% से कम आबादी गरीबी में रहती है। इनमें से सिर्फ 46 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही पार्टी जीती है, बाकी 106 सीटों पर पार्टी बदल गई। 314 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह ही बीजेपी गठबंधन जीता। वहीं, 203 सीटों पर विपक्ष के उम्मीदवार चुनाव जीते। केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी ने चुनाव अभियान के दौरान गरीबी कम करने पर काफी जोर दिया था। लेकिन, जिन 517 सीटों पर गरीबी कम हुई, वहां भाजपा को सिर्फ 232 सीटें मिलीं। ये 2019 के चुनाव से 63 सीटें कम हैं। वहीं, कांग्रेस को 2019 में 42 सीटों के मुकाबले 2024 में 92 सीटें मिलीं।बीजेपी ने इनमें से 45 सीटें जीतीं, जबकि उनकी सहयोगी पार्टियों (एनडीए) ने 15 और सीटें जीतीं। कांग्रेस को इन सीटों में से 43 सीटें मिलीं, जबकि अन्य इंडिया गठबंधन दलों को 39 सीटें मिलीं। इस तरह, कम गरीबी वाली सीटों पर विपक्षी दलों (इंडिया गठबंधन) को सत्ताधारी पार्टी (एनडीए) से ज़्यादा सीटें मिलीं।

आखिर कौन है लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष?

आज हम आपको लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष के बारे में जानकारी देने वाले हैं! सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को गुरुवार को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने यह जानकारी दी। रिजीजू ने कहा कि कटक से भाजपा सांसद महताब को लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव होने तक पीठासीन अधिकारी के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 95 (1) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम) नियुक्त किया गया है। अठारहवीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्य अस्थायी अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेंगे। बता दें कि कुमार अब केंद्रीय मंत्री हैं और इसलिए यह उम्मीद थी कि कोडिकुनिल सुरेश अस्थायी अध्यक्ष होंगे। रमेश ने कहा, उनकी जगह सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। वह छह बार बीजू जनता दल से सांसद रहे और अब भाजपा सांसद हैं। जिसने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा। नवनिर्वाचित सदस्य 24-25 जून को शपथ लेंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को होना है रिजीजू ने बताया कि अस्थायी लोकसभा अध्यक्ष की सहायता पीठासीन अधिकारियों का एक पैनल करेगा जिसमें कांग्रेस नेता के. सुरेश, द्रमुक नेता टीआर बालू, भाजपा के राधा मोहन सिंह और फग्गन सिंह कुलस्ते तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हैं। महताब लोकसभा चुनाव से पहले बीजू जनता दल (बीजद) छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

भर्तृहरि महताब के प्रोटेम स्पीकर बनाने का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस ने कहा कि उसके आठ बार के सांसद कोडिकुनिल सुरेश के बजाय बीजेपी के सांसद भर्तृहरि महताब को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना संसदीय मानदंडों को नष्ट करने का एक और प्रयास है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सुरेश बतौर सांसद अपने अपने 8वें कार्यकाल में प्रवेश करेंगे।’ उन्होंने कहा, यह एक निर्विवाद मानदंड है कि अध्यक्ष के विधिवत चुनाव से पहले सबसे वरिष्ठ सांसद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है। यह हमारी पार्टी के लिए बेहद गर्व की बात है कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के नेता के सुरेश ने आठ बार सांसद रहने की यह उपलब्धि हासिल की है।

रमेश ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने के सुरेश को नजरअंदाज क्यों किया, वह कौन सा कारण था जिसने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी कहा, ’18वीं लोकसभा में सबसे वरिष्ठ सांसद कोडिकुनिल सुरेश कांग्रेस और वीरेंद्र कुमार भाजपा हैं, दोनों अब अपना 8वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। कुमार अब केंद्रीय मंत्री हैं और इसलिए यह उम्मीद थी कि कोडिकुनिल सुरेश अस्थायी अध्यक्ष होंगे।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रमेश ने कहा, उनकी जगह सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। वह छह बार बीजू जनता दल से सांसद रहे और अब भाजपा सांसद हैं। अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा। नवनिर्वाचित सदस्य 24-25 जून को शपथ लेंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को होना है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई के दौरे पर, अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर गए.

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जयशंकर सबसे पहले अबू धाबी में हिंदू मंदिर का दौरा करेंगे। सोमवार को वह BAPS हिंदू मंदिर गए। यह पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा मंदिर है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया. वह उस देश के विदेश मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय चर्चा में बैठेंगे. लेकिन देश पहुंचते ही जयशंकर सबसे पहले अबू धाबी में BAPS (बोचासनबासी श्री अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण सोसायटी) हिंदू मंदिर गए। यह पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इसी साल इसका उद्घाटन किया गया.

जयशंकर अबू धाबी में यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक करेंगे। वहां भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय संबंध, कूटनीति, आपसी सहयोग आदि पर चर्चा हो सकती है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध की बात भी उठ सकती है. जयशंकर गाजा की समग्र स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं और भारत की स्थिति व्यक्त कर सकते हैं। जयशंकर ने रविवार को अबू धाबी में मंदिर का दौरा किया और अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने मंदिर के भिक्षुओं से मुलाकात की. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ”मैं अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर का दौरा करने के लिए भाग्यशाली हूं। यह भारत और यूएई की दोस्ती का प्रतीक है. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध का सेतु बनकर खड़ा यह मंदिर पूरी दुनिया को एक सकारात्मक संदेश दे रहा है।

इस मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी को अबू धाबी में BAPS मिशनरियों की पहल पर किया गया था। इसका उद्घाटन भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। यह मंदिर अबू धाबी के मध्य में 27 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। यूएई में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं। वहां करीब 35 लाख भारतीयों का देश का सबसे बड़ा प्रवासी समूह बन गया है. पिछले कुछ वर्षों में इस देश के साथ भारत के रिश्ते मधुर हुए हैं। मोदी ने पहली बार 2015 में संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था। दोनों देशों के बीच 2022 में आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। विभिन्न क्षेत्रों में करों में कमी के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ा है। यूएई का भारत में भारी निवेश है।

भारत ने चार महीने के अंदर दो विदेशी पत्रकारों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया
सरकार. गृह मंत्रालय ने उनकी काम करने की कानूनी अनुमति वापस ले ली है.

आज फ्रांसीसी पत्रकार सेबेस्टियन फ़ारसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस देश में 13 साल काम करने के बाद अब उन्हें कानूनी तौर पर यहां काम करने की अनुमति नहीं है। नतीजा यह हुआ कि उन्हें भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

विभिन्न यूरोपीय रेडियो चैनलों के लिए दक्षिण एशियाई पत्रकार सेबेस्टियन एक्स हैंडल ने लिखा, ‘तीन महीने पहले, 7 मार्च को, भारत सरकार ने देश में काम करने के लिए आवश्यक परमिट को नवीनीकृत करने से इनकार कर दिया। नतीजा ये हुआ कि मेरी पत्रकारिता और कमाई का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया. बार-बार अनुरोध के बावजूद गृह मंत्रालय ने इस फैसले का कोई कारण नहीं बताया है। मैंने कई बार आवेदन किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.’

इससे पहले, पिछले फरवरी में एक अन्य फ्रांसीसी पत्रकार वैनेसा डनक की भारत में काम करने की कानूनी अनुमति रद्द कर दी गई थी। वैनेसा 25 साल पहले एक छात्र के रूप में इस देश में आई थीं। 20 वर्षों से अधिक समय तक पत्रकार के रूप में कार्य किया। वह इस देश में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विदेशी पत्रकार थे। उन्होंने 16 फरवरी को भारत छोड़ दिया।

अप्रैल में, भारतीय मूल की ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार अवनी डायस की भी देश में काम करने की कानूनी अनुमति रद्द कर दी गई थी। आख़िरकार वह रुकने में सक्षम हो गया क्योंकि भारत छोड़ने से 24 घंटे पहले परमिट का नवीनीकरण किया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है. केंद्रीय गृह मंत्रालय यह तय करता है कि किसी विदेशी नागरिक को वीजा या वर्क परमिट दिया जाएगा या नहीं, कितने दिनों के लिए दिया जाएगा और क्या वीजा बढ़ाया जाएगा। सरकार के मुताबिक, मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए वे किसी भी विदेशी नागरिक को माफ करने के लिए बाध्य नहीं हैं। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का कोई भी देश दूसरे देश के नागरिक को वीजा या वर्क परमिट देने के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है।

हालांकि, अमित शाह के इस फैसले से एस जयशंकर का मंत्रालय थोड़ा असहज है. यह सच है कि जयशंकर का विदेश मंत्रालय इस फैसले का दोष शाह के गृह मंत्रालय पर मढ़ रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों का मानना ​​है कि गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच समन्वय की कमी है.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने फ्रांस के साथ रणनीतिक संबंध सफलतापूर्वक बनाए रखे हैं, इतना ही नहीं बल्कि यूरोपीय संघ के इस देश ने भारत के अधिकांश विवादास्पद अंतरराष्ट्रीय पदों पर बिना शर्त मोदी सरकार का समर्थन किया है। दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और पारंपरिक संबंध भी फ्रांस के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। नतीजतन, भले ही आंतरिक मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर अपना मुंह नहीं खोला, लेकिन विदेश मंत्रालय फ्रांसीसी पत्रकारों को इस देश में काम करने की अनुमति नहीं देने की दुविधा में है।

संयोग से, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा, परमाणु और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए पिछले शुक्रवार को फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं की मुलाकात इटली में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर हुई।

विपक्षी खेमे के मुताबिक अमित शाह अभी भी दिल से यह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी पार्टी हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में बहुमत खो चुकी है. नतीजा यह हो रहा है कि ऐसे विवादित ‘तुगलकी’ फैसले लिए जा रहे हैं।

आगामी लोकसभा अध्यक्ष कौन होगा, इस पर अटकलें तेज.

अठारहवीं लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव बुधवार को। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन मंगलवार दोपहर 12 बजे तक जमा करना होगा। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की ओर से कल स्पीकर पद के लिए उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया जाएगा. राजधानी में अटकलें तेज, अगले पांच साल के लिए कौन बनेगा लोकसभा अध्यक्ष? विपक्षी मंच ‘भारत’ की ओर से कौन लड़ेगा मुकाबला? उनकी इस आत्मविश्वास भरी भूमिका के साथ ही आज मनीष तिवारी की स्पीकर की कुर्सी पर उंगली उठाने से अटकलें तेज हो गई हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिरी समय में आश्चर्य में विश्वास रखते हैं। नतीजतन, राजनीतिक खेमे को लगता है कि स्पीकर के तौर पर कोई और दिखे तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. स्पीकर पद के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद का नाम भी सामने आया है. बीजेपी खेमे के एक वर्ग का मानना ​​है कि पूर्व कानून मंत्री लोकसभा को मजबूती से संभाल सकते हैं.

इसी कड़ी में चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आज एक अहम कदम उठाया है. शपथ लेने के बाद अपनी सीट की ओर जाते समय वह ट्रेजरी बेंच पर बैठे पूर्व स्पीकर ओम बिरला के सामने रुके। देखा जा सकता है कि वह हाथ हिलाकर स्पीकर की कुर्सी की ओर इशारा करके कुछ कह रहे हैं. बिड़ला ने भी मुस्कुराते हुए सिर हिलाया.

सियासी खेमे की हवा में ओम बिड़ला का नाम तैर रहा था. विपक्षी खेमे को यह भी लगता है कि 18वीं लोकसभा के अध्यक्ष के तौर पर नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में निरंतरता की नीति को खारिज नहीं किया जा सकता. राजस्थान की कोटा लोकसभा सीट जीतने के बाद बिड़ला ने खुद सरकारी अधिकारियों के साथ घरेलू बैठक की। उन्हें बताया गया कि उन्हें परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए धन प्राप्त करने के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। संसद सत्र शुरू होने पर वह सभी संबंधित मंत्रियों से बात करेंगे और कोटा के विकास के लिए जरूरी इंतजाम करेंगे. उनकी इस आत्मविश्वास भरी भूमिका के साथ ही आज मनीष तिवारी की स्पीकर की कुर्सी पर उंगली उठाने से अटकलें तेज हो गई हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिरी समय में आश्चर्य में विश्वास रखते हैं। नतीजतन, राजनीतिक खेमे को लगता है कि स्पीकर के तौर पर कोई और दिखे तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. स्पीकर पद के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद का नाम भी सामने आया है. बीजेपी खेमे के एक वर्ग का मानना ​​है कि पूर्व कानून मंत्री लोकसभा को मजबूती से संभाल सकते हैं.

वहीं, ‘इंडिया’ खेमे के एक बड़े वर्ग के मुताबिक स्पीकर पद के लिए उम्मीदवार न खड़ा करना ही बेहतर है, क्योंकि जीतने की कोई संभावना नहीं है. लोकसभा चुनाव में ‘चारों पार’ नारे के बाद जल गया मोदी का चेहरा! विपक्ष की एक सकारात्मक छवि बनी है. ऐसे में भारत की सहयोगी पार्टियों में से एक तृणमूल नहीं चाहती कि मैच हारकर प्रतिद्वंद्वी के मनोबल पर असर पड़े. लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में अभी विचार-विमर्श चल रहा है, अंतिम फैसला कांग्रेस का ही होगा. हालांकि, आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने आज कहा, “अगर सरकार स्पीकर पद के लिए सर्वसम्मत उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश नहीं करती है, तो विपक्ष चुनाव लड़ेगा।”

उधर, विपक्षी मंच इंडिया ने 18वीं लोकसभा के पहले दिन से ही विपक्ष की राह पर चलने का फैसला किया. चूंकि एनडीए गठबंधन भाजपा सांसद भर्तृहरि मोहताब को प्रोटेम स्पीकर बनाने पर अड़ा हुआ था, इसलिए प्रोटेम स्पीकर पैनल में नामित तीन विपक्षी सांसदों ने जवाबी कदम के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करने का फैसला किया। लोकसभा में आज मौजूद सांसदों में सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम पुकारा गया. इसके बाद स्पीकर के पैनल में नामित तीन विपक्षी सांसदों कांग्रेस के के सुरेश, डीएमके के टीआर बालू और तृणमूल के सुदीप बनर्जी को शपथ लेने के लिए बुलाया गया. ऐसा देखा जा रहा है कि तीनों सांसद उस वक्त लोकसभा में अनुपस्थित हैं. बाद में सुरेश ने प्रोटेम स्पीकर के कार्यालय को पत्र लिखकर कहा कि आमतौर पर सबसे ज्यादा बार जीतने वाले सांसद को प्रोटेम स्पीकर का पद दिया जाता है. लेकिन इस मामले में सत्ताधारी खेमे ने उस परिपाटी को तोड़ दिया है. इसलिए उन्होंने प्रोटेम स्पीकर के पैनल सदस्य के रूप में सहयोग नहीं करने का फैसला किया है. आज सत्र शुरू होने से पहले के सुरेश को प्रोटेम स्पीकर बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश की सोशल मीडिया पर केंद्रीय संसदीय मंत्री किरण रिजिजू से तीखी बहस हो गई.

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी अभी भी अपने पद पर क्यों बने हुए हैं?

संघ के करीबी जोशी लीक कांड के बाद भी एनटीए के अध्यक्ष पद पर क्यों हैं? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अटल बिहारी, मुरली मनोहर जैसे बीजेपी नेताओं के करीबी और आरएसएस प्रचारक माने जाने वाले प्रदीप कुमार जोशी एनटीए चेयरमैन बनने से पहले यूपीएससी चेयरमैन थे. एनईईटी और यूजीसी-नेट परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने पर असहजता का सामना करते हुए, मोदी सरकार ने डीजी सुबोधकुमार सिंह को उन परीक्षाओं की आयोजन संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी या एनटीए के पद से हटा दिया है। लेकिन कांग्रेस ने आज सवाल किया कि एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी अभी भी अपने पद पर क्यों हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी जैसे भाजपा नेताओं और आरएसएस प्रचारकों के करीबी माने जाने वाले प्रदीप कुमार जोशी ने एनटीए के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने से पहले यूपीएससी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इससे पहले वह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार के दौरान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे थे. उस समय भी उनकी योग्यता, उनके लिए आरएसएस की सिफ़ारिश पर सवाल उठे थे.
आज कांग्रेस के जनसंपर्क अध्यक्ष पवन खेड़ा ने आरोप लगाया, ”एनटीए के बारे में इतने सारे सवालों के बावजूद, इसके अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वह विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों के पद के लिए चुपचाप साक्षात्कार लेते रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, वर्धार के कुलपति और भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक पद के लिए साक्षात्कार दिया। कांग्रेस नेता का सवाल है कि जब एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक की जांच चल रही हो तो क्या एनटीए या उसके अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी को ऐसी चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए?

जोशी के खिलाफ सवालों पर न तो मोदी सरकार और न ही बीजेपी खेमा कोई टिप्पणी करना चाहता है. कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बचाने के लिए आईएएस अधिकारी सुबोधकुमार सिंह को एनटीए के डीजी पद से हटाया गया है. लेकिन एनटीए चेयरमैन को नहीं हटाया जा रहा है क्योंकि वह आरएसएस के करीबी हैं. लोकसभा में विपक्षी बेंच की दूसरी या तीसरी पंक्ति की कोने की सीट – नरेंद्र मोदी युग के दौरान पिछले 10 वर्षों में राहुल गांधी को हमेशा इस सीट पर बैठे देखा गया है। आज नई लोकसभा के पहले सत्र के पहले दिन वह सबसे आगे की पंक्ति में नजर आए. समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव और तृणमूल के कल्याण बनर्जी एक ही पायदान पर हैं। वहीं, रायबरेली से सांसद ने शपथ ग्रहण के दौरान मोदी को संविधान दिखाया.

राहुल के फ्रंटफुट गेम को देखकर कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि इस बार वह लोकसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं. क्योंकि विपक्षी बेंच की अगली पंक्ति जहां वह आज अपनी परिचित सफेद टी-शर्ट में बैठे थे, वह विपक्ष के नेता के लिए आरक्षित है। आज प्रियंका गांधी वाद्रा के पति रॉबर्ट वाद्रा ने कहा, ”मैं राहुल को अपने भाई की तरह जानता हूं. मैं जानता हूं कि वह दिल से क्या करता है. मुझे लगता है कि वह विपक्ष के नेता की जिम्मेदारियों को समझते हैं।’

कांग्रेस कार्यसमिति में पहले ही एक प्रस्ताव पारित किया जा चुका है जिसमें राहुल से लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद संभालने को कहा गया है। उनकी रुचि पार्टी संगठन में अधिक है. आज लोकसभा सत्र के बाद राहुल ने इस साल के अंत में झारखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए राज्य के नेताओं के साथ बैठक की. वह इस हफ्ते महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पर बैठक करेंगे. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संगठनात्मक जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष राहुल के कंधे पर छोड़ दें. बल्कि उन्हें नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने पर ध्यान देना चाहिए. जो कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. अगर कांग्रेस में कोई और विपक्ष का नेता होगा तो अखिलेश जैसे अन्य दलों के विपक्षी नेता प्रचार की रोशनी लेकर चलेंगे.

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल के उत्तर प्रदेश से लोकसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद कल विपक्ष के नेता के बारे में आधिकारिक घोषणा की जाएगी. पिछले 10 वर्षों में कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद नहीं मिला क्योंकि उसके पास लोकसभा की दस प्रतिशत सीटें भी नहीं थीं। पहली मोदी सरकार में मल्लिकार्जुन खड़गे, दूसरी मोदी सरकार में अधीर चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। भले ही राहुल विपक्ष के नेता हों, लेकिन मनीष तिवारी जैसे कांग्रेस नेता को लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में देखा जा सकता है।

नीट घोटाला: सीबीआई चार चरणों में करेगी जांच.

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कुल चार दौर की सीबीआई जांच, संदिग्धों की सूची में एक हजार नाम! सवाल, परीक्षा रद्द क्यों नहीं कर देते? गुजरात के गोधरा में 5 मई को नेट परीक्षा के दिन अनियमितता के आरोप लगे थे. गोधरा पुलिस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात सहित कई शिकायतें दर्ज की गईं। नेट पर प्रश्न लीक होने समेत कई अनियमितताएं नेट पर गड़बड़ी से भी केंद्र की बेचैनी बढ़ती जा रही है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, तरह-तरह की विसंगतियां सामने आ रही हैं। गिरफ्तारियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इस वजह से कई लोगों का सवाल है कि क्यों न नेट की तरह नेट को भी रद्द कर दिया जाए? नीट प्रश्न लीक मामले की जांच का जिम्मा पहले ही सीबीआई को सौंपा जा चुका है। बिहार, गुजरात और राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है.

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जांच चार चरणों में जारी रहेगी. प्रश्नपत्र की तैयारी, छपाई और देश के विभिन्न केंद्रों तक डिलीवरी के विभिन्न स्तरों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि परीक्षा शुरू होने से पहले विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा की तैयारी, प्रश्नों की छपाई, प्रश्नों की डिलीवरी और प्रश्न पत्रों को सुरक्षित रखने में कोई अनियमितता तो नहीं हुई है। यदि हां तो इसमें कौन-कौन शामिल है।

शुरुआत में सीबीआई के डेटाबेस में हजारों संदिग्धों के नाम और फोन नंबर हैं. उससे पता चलेगा कि प्रश्न किसने लीक किया! यह डेटाबेस व्यापमं जैसी विभिन्न परीक्षाओं में शामिल या भ्रष्टाचार में शामिल संदिग्धों का बनाया गया है। ताकि शिक्षा में भ्रष्टाचार के चक्र को आगे बढ़ाया जा सके।

गुजरात के गोधरा में 5 मई को नेट परीक्षा के दिन अनियमितता के आरोप लगे थे. गोधरा पुलिस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात सहित कई शिकायतें दर्ज की गईं। आरोप लगाया कि 27 अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से पास कर दिया गया। पंचमहल के पुलिस अधीक्षक ने आज बताया कि सीबीआई की एक टीम गोधरा पहुंची और स्थानीय पुलिस से संपर्क किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें पूरा सहयोग दिया जायेगा. सीबीआई अधिकारियों ने जलाराम स्कूल का भी दौरा किया, जो शिकायत के केंद्र में है। उस स्कूल के प्रिंसिपल समेत तीन लोगों पर गंभीर आरोप हैं.

पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र ने भी शिक्षकों पर NEET प्रश्न लीक में शामिल होने का आरोप लगाया। महाराष्ट्र पुलिस ने दो शिक्षकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. लातूर के उन दो शिक्षकों संजय तुकाराम यादव और जलील पठान को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें रविवार को रिहा कर दिया गया लेकिन बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। एफआईआर के मुताबिक, आरोपी पैसे के बदले परीक्षा से जुड़ी कई जानकारियां बेचता था। गिरफ्तार दोनों शिक्षकों के फोन से अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी कई जानकारियां मिलीं. इस जांच में दिल्ली योगा का भी नाम सामने आया. गिरफ्तार लोगों में दिल्ली का रहने वाला गंगाधर भी शामिल है. वह ही परीक्षार्थियों को संजय और उमर खान से संपर्क कराता था। वहां बड़ी रकम के बदले सफलता की गारंटी का वादा किया गया था। इससे पहले बिहार पुलिस ने भी प्रश्न लीक के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया था.

इस ओर से आयोजक संस्था एनटीए के अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया गया, जिसमें ओएमआर में हेरफेर का आरोप लगाया गया और सीबीआई और ईडी जांच का अनुरोध किया गया. हालाँकि, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने याचिका पर सवाल उठाया। कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत यह आवेदन कैसे किया जा सकता है? साथ ही हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने और सुप्रीम कोर्ट में पेश होने की भी बात कही है. आज सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ में सीबीआई और ईडी को नोटिस भेजने की गुहार लगाई गई, लेकिन जस्टिस एएस ओका ने कहा कि तत्काल आधार पर सुनवाई की जरूरत नहीं है. मामले की सुनवाई 8 जुलाई को होगी.

ठीक उसी समय जब केंद्र नेट-नेट गड़बड़ी में है, भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में भर्ती भ्रष्टाचार पर प्रश्न लीक करने के आरोप में चार इंजीनियरों को गिरफ्तार किया गया है। प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्न लीक हो गए. कथित तौर पर इसके पीछे चार इंजीनियरों का हाथ है!

विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के लीक होने में शामिल एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि NEET प्रश्नपत्र लीक प्रक्रिया को कैसे अंजाम दिया गया। इंडिया टुडे की विशेष जांच टीम ने उस शख्स को ढूंढ निकाला. नाम है विजेंद्र गुप्ता. वह क्विज़ के ‘गुरुओं’ में से एक हैं।

प्रश्न लीक मामले में विजेंद्र को पहले भी दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है. लेकिन बाद में उन्हें यह मिल गया. प्रश्नपत्र लीक मामले के ‘गुरु’ ने खोला मुंह! मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले मार्च में विजेंद्र का एक वीडियो वायरल हुआ था. उस वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि NEET के प्रश्न लीक होने वाले हैं. संयोग से देखने में आया है कि नीट का प्रश्नपत्र लीक हो गया है. जिसे लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विजेंद्र कई राज्य सरकार परीक्षाओं के लीक प्रश्नपत्रों के पीछे के मास्टरमाइंड में से एक है। विजेंद्र पर 2023 में ओडिशा कर्मचारी चयन आयोग, बिहार लोक सेवा आयोग और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के प्रश्न लीक में शामिल होने का आरोप है। कहा जाता है कि वह 24 साल से इस कारनामे में शामिल हैं। विजेंद्र का दावा, इस तरह के काम में नेटवर्क है असली!

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दी गई जमानत पर रोक लगा दी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की केजरी की जमानत आप प्रमुख की आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर जवाब दिया और शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने केजरीवाल की जमानत पर रिहाई पर रोक लगा दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को उस मामले में अपना फैसला सुनाया. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (यूपी) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को जमानत नहीं मिली. दिल्ली हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. इसके चलते केजरीवाल को फिलहाल तिहाड़ में ही रहना होगा.

ईडी ने केजरी को एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया है. दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें जमानत दे दी. ईडी ने केजरी की जमानत को 48 घंटे की मोहलत देने की मांग की थी। जिसे स्वीकार नहीं किया गया. जज न्याय बिंदु ने केजरी को जमानत दे दी. केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार सुबह आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में केस दायर किया. दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी की याचिका के जवाब में केजरीवाल की जमानत निलंबित कर दी.

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तत्काल आधार पर ईडी के मामले की सुनवाई की. हालाँकि, सुनवाई के बाद फैसले को निलंबित कर दिया गया। जस्टिस सुधीर कुमार जैन और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की अवकाश पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा, ‘ट्रायल कोर्ट को ऐसा कोई निर्देश नहीं देना चाहिए था, जो हाई कोर्ट के फैसले के विपरीत हो।’ हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि एक बार उनकी (अरविंद केजरीवाल) गिरफ्तारी को चुनौती देने वाले एक मामले को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. परिणामस्वरूप, यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता में कटौती हुई है।

केजरी को 21 मार्च को उत्पाद शुल्क मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था. लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया. बाद में उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई। उस अवधि के अंत में, वह तिहाड़ जेल वापस चले गये। आम आदमी पार्टी प्रमुख को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थायी जमानत दे दी गई। ईडी के वकील और केंद्र के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि राउज़ एवेन्यू अदालत को गैरकानूनी वित्तीय लेनदेन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत का विरोध करते हुए ईडी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर उचित रूप से विचार करना चाहिए था। लेकिन उनकी समीक्षा किए बिना ही आप प्रमुख को एकतरफा जमानत दे दी गई है. इसके बाद ईडी ने केजरी की जमानत के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में केस दायर किया. शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई में ईडी के वकील ने यह बात उठाई. हालांकि, केजरी के वकील ने दावा किया कि जांच एजेंसी उनके मुवक्किल के खिलाफ अवैध वित्तीय लेनदेन का कोई सबूत नहीं दे सकी। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए रविवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी अगले बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वे देखना चाहते हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार तक ईडी मामले में फैसला सुनाता है या नहीं. उसके बाद सुनवाई पर निर्णय लिया जायेगा. अब देखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में जमानत पर रिहा किया जाएगा या नहीं, इस पर दिल्ली हाईकोर्ट मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की सेवानिवृत्त पीठ फैसला सुनाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर जवाब देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने शुक्रवार को केजरीवाल की जमानत पर रोक लगा दी। नतीजतन, उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में आरोपी दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अभी भी तिहाड़ जेल में हैं। हालांकि, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को केजरी की स्थायी जमानत याचिका मंजूर कर ली। गुरुवार को ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में केजरी की जमानत 48 घंटे के लिए टालने की अर्जी दाखिल की. लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. न्यायाधीश न्याय बिंदु ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी. फैसले को चुनौती देते हुए मामले की जांच कर रही एजेंसी ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की. दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की अवकाश पीठ ने ईडी के अनुरोध पर रोक न लगाते हुए कहा कि तिहाड़ जेल में बंद केजरी को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई तक रिहा नहीं किया जाएगा. शुक्रवार दोपहर को तत्काल आधार पर सुनवाई शुरू हुई। शुरुआत में, ईडी के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने कहा, राउज़ एवेन्यू अदालत को ‘गैरकानूनी वित्तीय लेनदेन रोकथाम अधिनियम’ (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत का विरोध करते हुए ईडी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर उचित रूप से विचार करना चाहिए था।

क्या 1951 तक का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है अब की गर्मी ?

अब की गर्मी पिछले 1951 तक का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है! प्रचंड गर्मी से देश का आधा हिस्सा झुलस रहा है। दिन में चिलचिलाती धूप के साथ लू के थपेड़ों ने आम लोगों की मुश्किलें पहले ही बढ़ा रखी हैं। अब तो रातें भी बुरी तरह से तप रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1951 के बाद इस साल सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही। सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर-पश्चिम भारत के 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सों में दिख रहा। आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल की प्रचंड गर्मी ने देश भर में लाखों लोगों के लिए कष्टकारी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं। उत्तर-पश्चिम भारत के कम से कम 50 फीसदी हिस्सों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में शायद अब तक की सबसे लम्बी गर्मी पड़ रही है। देश के उत्तर, पूर्व और उत्तर-पश्चिम में पड़ रही यह गर्मी इसलिए बेहद कष्टकारी है, क्योंकि रात के समय भी तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक इसे ‘गर्म रातें’ कह रहे, जिसके गवाह आम लोग बन रहे हैं। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का कहना है कि दिन और रात के समय हाई टेम्प्रेचर से ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं, जो शरीर पर अत्यधिक गर्मी का प्रभाव डालती हैं। इससे सबसे ज्यादा वो लोग प्रभावित हो रहे हैं जिनके पास एयर कंडीशनर या कूलर नहीं हैं। ठंडे पानी की उपलब्धता की कमी से यह और भी बढ़ जाता है।

उदाहरण के लिए, दिल्ली के कई इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर रही। इस दौरान पानी का संकट उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ा रही। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर-पश्चिमी भारत के आधे से ज्यादा हिस्से में पिछले 33 दिनों यानी 16 मई से 17 जून के बीच लगभग रोजाना अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा रहा। यह दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के ज्यादादातर हिस्सों में 1951 के बाद से सबसे लंबा 40 डिग्री प्लस तापमान है। गुजरात का लगभग आधा हिस्सा और उत्तर प्रदेश का एक तिहाई से अधिक भाग इस बार 1951 के बाद से सबसे खराब गर्मी का सामना कर रहा। 1951 वो सबसे पहला वर्ष है जिसके गर्मी को लेकर आंकड़े उपलब्ध हैं। इससे पता चलता है कि कितनी भीषण गर्मी का सामना इस बार लोगों को करना पड़ रहा है।

दिन का तापमान अत्यधिक होना समस्या का एक हिस्सा है, लेकिन यह पूरी तरह से यह नहीं बताता कि इस साल की गर्मी इतनी कष्टदायक क्यों है। इसके लिए मौसम वैज्ञानिक रात में भी उच्च तापमान की ओर इशारा कर रहे। यही वह समय है जब लोग राहत की उम्मीद करते हैं। आईएमडी के महानिदेशक एम. महापात्रा ने कहा कि दिन का तापमान बहुत अधिक है। इसलिए स्वाभाविक रूप से रातें उतनी ठंडी नहीं हो पाती हैं। अगर अधिकतम तापमान 45-46 डिग्री सेल्सियस के बीच है, तो आप रात के तापमान के सामान्य रहने की उम्मीद नहीं कर सकते। गर्म रातों की घोषणा तभी की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है। इसे वास्तविक न्यूनतम तापमान में अंतर के आधार पर परिभाषित किया जाता है। गर्म रातें तब होती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है।

स्काईमेट वेदर के जलवायु और मौसम विज्ञान के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि इस समय रातें अधिक गर्म हो रही हैं। 11 जून से मॉनसून मध्य भारत से आगे नहीं बढ़ पाया है, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पलावत ने कहा कि हमें उम्मीद है कि कुछ दिनों में मानसून जोर पकड़ेगा, जिससे बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इस बीच, डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से संबंधित बीमारियों और आपात स्थिति में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही। अधिकतम तापमान के विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तरी मैदानी इलाकों के ज्यादातर हिस्सों में मौसम गर्म रहा। राजस्थान, हरियाणा, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे गया हो।

इस साल भीषण गर्मी से हिमालय भी अछूता नहीं रहा। सोमवार को जम्मू के कठुआ में 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो जम्मू-कश्मीर में किसी भी स्थान के लिए सबसे अधिक तापमान था। जम्मू क्षेत्र में 18 मई से लगभग हर दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। हिमाचल प्रदेश के शिमला और धर्मशाला और उत्तराखंड के मसूरी और नैनीताल जैसे पर्वतीय स्थलों पर 23 मई से तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जबकि हिमाचल प्रदेश के ऊना और उत्तराखंड के रुड़की जैसे कुछ स्थानों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। आईएमडी ने अनुमान लगाया है कि कम से कम 20 जून तक लू की स्थिति बनी रहेगी। उत्तर प्रदेश में 20 जून तक अत्यधिक गर्मी के लिए रेड कैटेगरी की चेतावनी जारी की गई है। रेड कैटेगरी की चेतावनी का मतलब है कि स्थानीय अधिकारियों को गर्मी से जुड़ी आपात स्थितियों को रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। वहीं पूरे देश में जून महीने की औसत बारिश इस बार सामान्य से कम रहने की संभावना है।

क्या कांग्रेस जीत पाएगी संसद का रण?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस संसद का रण जीत पाएगी या नहीं! लोकसभा चुनाव का जनादेश क्या कहता है? कांग्रेस कहती है कि भाजपा को इस जनादेश पर ध्यान देना चाहिए। उसके इस सुझाव में दम है। हालांकि, यह भी खतरा है कि खुद कांग्रेस जनादेश की गलत व्याख्या कर सकती है। हरियाणा से लेकर यूपी और महाराष्ट्र तक, कांग्रेस की सीटें बढ़ने का मुख्य कारण भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी भावना का गहरना था। इसमें कोई संदेह नहीं कि न कांग्रेस के सपोर्ट बेस में वृद्धि हुई है और ना गांधी परिवार ने करिश्मा किया है। इसलिए, नतीजों के भ्रम में पड़कर कांग्रेस नेतृत्व पिछली गलतियां दोहराता रहा तो बेहतर हुआ प्रदर्शन फिर से खराब हो सकता है। इस बार गरीब दोगुनी हुई सीटों से उत्साहित कांग्रेस के सामने मेन टास्क मोमेंटम बनाए रखकर अपना वोटर बेस बढ़ाना है। उसे अपने प्रदर्शन में सुधार को बरकरार रखने के लिए पार्टी को दो रणनीतिक गलतियों से बचना होगा। सबसे पहले तो यह ध्यान देना होगा कि पार्टी अपने नेतृत्व के करिश्मे पर ज्यादा निर्भर नहीं होकर संगठन को मजबूत करे।

गांधी परिवार का फिर से उभरना कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। संभव है कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हों और प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़कर संसद पहुंच जाएं। राहुल-प्रियंका का उभार कांग्रेस पार्टी के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है। यदि गांधी परिवार की बढ़ी हुई शक्ति का उपयोग केवल सभी सांगठनिक फैसले लेने और राष्ट्रीय स्तर पर वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर उभारने या विधानसभा चुनावों में गांधी केंद्रित प्रचार अभियान चलाने के लिए किया जाता है, तो यह कांग्रेस की प्रगति रोकने का सबब हो सकता है। 2009 के लोकसभा चुनावों में हिंदी पट्टी में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने यही गलती की थी। राहुल को ‘प्रिंस-इन-वेटिंग’ के रूप में पेश करते हुए कांग्रेस ने यूपी और बिहार में होने वाले चुनावों में लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। दोनों ही राज्यों में उसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। 2022 में उत्तर प्रदेश में प्रियंका की मेहनत से केवल दो विधानसभा सीटें मिल पाईं। तब कांग्रेस ने एक दर्जन सीटों को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर जमानत खो दी।

गांधी परिवार की मजबूत राजनीतिक पूंजी पार्टी को बढ़ावा देने में तभी सहायक होगी जब इसका उपयोग संगठन मजबूत करने और पार्टी में नई जान फूंकने के लिए काफी सावधानी से किया जाएगा। इस रास्ते पर बढ़ते हुए सबसे पहला कदम गुटबंदी के हो रहे आपसी खींचतान पर रोक लगाना है। तभी तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें स्थिर हो पाएंगी जबकि हरियाणा और केरल में सरकार बनाने की संभावनाओं को हकीकत में बदल पाएगी। दूसरा, गांधी परिवार की पकड़ का उपयोग उदयपुर शिविर के संकल्पों के मुताबिक संगठनात्मक बदलावों को आगे बढ़ाने और निर्णय लेने वाले सभी इकायों में युवाओं और विविध विचारों वाले नेताओं को जगह देने में करना होगा।

कर्नाटक में जीत के कुछ महीने बाद पिछले साल कांग्रेस कार्यसमिति का पुनर्गठन इसी तर्ज पर किया गया था, जो अच्छी मिसाल थी। पार्टी को ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जरूरत है, जहां थके हुए पुराने नेताओं ने पार्टी को तहस-नहस कर दिया है। अशोक गहलोत और कमल नाथ के बेटों और खुद भूपेश बघेल की हार ने इन राज्यों में नई शुरुआत करने का बड़ा अवसर दिया है, जहां पिछले साल इन क्षत्रपों के नेतृत्व में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा था।

दूसरी गलती जिससे पार्टी को बचना चाहिए, वह है राज्य केंद्रित रणनीति के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित रणनीति का अनुसरण करना। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि वह अब इंदिरा गांधी के दौर को नहीं दोहरा सकती, जब करिश्माई नेतृत्व और केंद्र से निर्धारित अभियान कमजोर संगठन और घटते सामाजिक आधार की संरचनात्मक समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त थे। पार्टी ने यूपी और बिहार में जो नौ सीटें जीती हैं, वो मुख्य रूप से क्रमशः सपा और राजद से मिले समर्थन के कारण हैं। पार्टी को इसका इस्तेमाल संगठनात्मक ताकत और लंबे समय तक एक कोर वोटर बेस बनाने के लिए पुल के रूप में करना चाहिए।

उदाहरण के लिए, भाजपा ने 1990 के दशक के मध्य से ही बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में आगे बढ़ने के लिए स्थिर गठबंधन और सामूहिक नेतृत्व की धैर्यपूर्ण रणनीति अपनाई। इसने महसूस किया कि हार्डकोर हिंदुत्व और नेतृत्व का करिश्मा सीमित सफलता ही दिला सकते हैं। तब से दलित-ओबीसी मतदाता बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की रणनीति पर कदम बढ़ाया, जहां वो पारंपरिक रूप से कमजोर रही थी। दूसरी तरफ, उसने उच्च जाति और मध्य वर्ग के मतदाताओं के बीच एक कोर बेस तैयार कर लिया।