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क्या भारत और मालदीव के अब बढ़ सकते हैं रिश्ते?

आने वाले समय में भारत और मालदीव के रिश्ते अब बढ़ सकते हैं! भारत ने सोमवार को कहा कि मालदीव के साथ उसके दोस्ताना संबंध बने रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने व्यापक आर्थिक और समुद्री सहयोग के लिए एक खाका पेश किया। यह दोनों देशों के बीच पिछले साल आई कुछ खटास के बाद रिश्तों के फिर से बेहतर होने का संकेत है। मोदी और मुइज्जू ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और मुद्रा अदला-बदली समझौते पर सहमति जतायी। इसके तहत भारत, मालदीव को 40 करोड़ डॉलर की सहायता देगा। साथ ही 3,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में बातचीत के बाद मुइज्जू ने कहा, ‘मैं 40 करोड़ डॉलर के द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली समझौते के अलावा 30 अरब रुपये (3,000 करोड़ रुपये) के रूप में सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार का आभारी हूं। यह विदेशी मुद्रा से जुड़े मुद्दों का हल करने में सहायक होगा।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक आयाम जोड़ने के लिए व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी को अपनाया है।’ दोनों नेताओं ने मालदीव में रुपे कार्ड जारी किया। इसके अलावा डिजिटल रूप से हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नये रनवे का उद्घाटन किया और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जतायी। बता दें कि पिछले साल दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आई थी। मोदी ने कहा, ‘आने वाले समय में हम भारत और मालदीव को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) से जोड़ने की दिशा में काम करेंगे।’ इससे पहले, रविवार को पांच दिन के राजकीय दौरे पर आए मुइज्जू का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे।

मालदीव के राष्ट्रपति गुरुवार को माले लौटेंगे। उससे पहले मंगलवार को आगरा और मुंबई जाएंगे। बुधवार को बेंगलुरु जाएंगे। मुइज्जू ने पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव जीता था और भारत से इस साल मई तक वहां तैनात अपने सैन्य कर्मियों को वापस लेने के लिए कहा था। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को उस समय झटका लगा जब मालदीव के मंत्रियों ने मोदी के बारे में आलोचनात्मक टिप्पणियां कीं।

हालांकि, मुइज्जू ने उन मंत्रियों को बर्खास्त करते हुए अपने भारत विरोधी रुख को कुछ नरम किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री से पूछा गया कि भारत पिछले साल द्विपक्षीय संबंधों में आई खटास को दूर करने कैसे कामयाब रहा, तो इसपर उन्होंने कहा, ‘याराना जारी रहेगा।’ विदेश सचिव ने कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध कई महत्वपूर्ण स्तंभों पर आधारित हैं। मिस्री ने कहा, ‘इस यात्रा में हमारा प्रयास पहले से मौजूद इस मजबूत रिश्ते को और प्रगाढ़ करने तथा कई साझा हितों को आगे बढ़ाने का है। आज दोनों नेताओं ने इस रिश्ते के महत्व को पहचाना।’

बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के बीच सोमवार मुलाकात हुई। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब हाल के कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच रिश्ते ठीक नहीं रहे। पीएम मोदी ने मालदीव को एक मित्र देश बताया साथ ही कहा कि भारत ने हमेशा पड़ोसी होने के दायित्व को निभाया है। मीटिंग में भारत और मालदीव के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। कुछ वक्त पहले मुइज्जू का झुकाव चीन की ओर अधिक था लेकिन देश की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हुई तब मुइज्जू के तेवर बदल गए। मुइज्जू को इसका फायदा भी मिला है। भारत ने कुछ समझौतों पर हामी भरकर मुइज्जू को रिटर्न गिफ्ट भी दिया है।

भारत और मालदीव ने रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के मकसद से 40 करोड़ डॉलर की मुद्रा अदला-बदली को लेकर समझौता किया। इससे मालदीव को विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में रुपे कार्ड भी जारी किया। RuPay कार्ड की लॉन्चिंग के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वक्त में भारत और मालदीव यूपीआई के जरिए जुड़ जाएंगे। करेंसी स्वैप और रुपे कार्ड के अलावा दोनों देशों के बीच कई और भी समझौते हुए।

हम थिलाफुशी में एक नये वाणिज्यिक बंदरगाह के विकास में सहायता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव ने अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया है। भारत और मालदीव के बीच संबंधों में तब से तनाव आ गया जब से मुइज्जू (जिन्हें चीन समर्थक माना जाता है) ने पिछले साल नवंबर में शीर्ष पद का कार्यभार संभाला है। मुइज्जू ने पिछले साल ‘इंडिया आउट’ अभियान के तहत राष्ट्रपति चुनाव जीता था और नई दिल्ली से इस साल मई तक द्वीपसमूह में तैनात अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने को कहा था। जब मालदीव के मंत्रियों ने मोदी की आलोचना की थी, तब और भी द्विपक्षीय संबंधों में खटास आई थी।

हालांकि मुइज्जू के भारत विरोधी रुख में बदलाव आया है। मुइज्जू ने उन मंत्रियों को बर्खास्त भी कर दिया है, जो भारतीय प्रधानमंत्री की आलोचना करते थे। चूंकि मालदीव गंभीर आर्थिक मंदी से जूझ रहा है, इसलिए भारत ने एक और साल के लिए 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल को आगे बढ़ाते हुए मालदीव सरकार को महत्वपूर्ण बजटीय सहायता देने का फैसला किया है।

 

क्या जम्मू कश्मीर में मनोनीत सदस्य बन सकते हैं किंग मेकर ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जम्मू कश्मीर में मनोनीत सदस्य किंग मेकर बन सकते हैं या नहीं! विधि विशेषज्ञों की इस बारे में अलग-अलग राय है कि क्या जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल सरकार गठन के समय या बाद में मंत्रिपरिषद की सलाह पर पांच विधायक मनोनीत कर सकते हैं। जम्मू कश्मीर में 90 विधानसभा सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान हुए हैं और चुनाव परिणाम मंगलवार को घोषित किये जाने वाले हैं। उपराज्यपाल द्वारा पांच सदस्यों को मनोनीत किये जाने पर विधानसभा सदस्यों की संख्या बढ़कर 95 हो जाएगी और सदन में बहुमत का आंकड़ा 48 होगा। एग्जिट पोल में, केंद्र शासित प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान जताए जाने के मद्देनजर पांच विधायकों को मनोनीत करने की उपराज्यपाल की शक्ति काफी मायने रखती है। वहीं एक जटिल प्रश्न भी उठता है कि क्या मनोनीत विधायक सदन में बहुमत तय करने में भूमिका निभाएंगे। पांच सदस्यों को मनोनीत करने संबंधी उपराज्यपाल की शक्ति और मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना इसका प्रयोग किये जा सकने के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा ने कहा कि चुनाव परिणामों का इंतजार करना होगा और इस समय यह मुद्दा उठाना जल्दबाजी होगी।राजनीतिक हस्तक्षेप को सदा के लिए समाप्त कर दिया जाए। हमने देखा है कि दिल्ली और पुडुचेरी में प्रशासन किस तरह ठप हो गया है, जिससे नागरिकों के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

न्यायमूर्ति ढींगरा ने कहा कि हम वास्तविक परिणामों का इंतजार कर सकते हैं क्योंकि यह मुद्दा नतीजे पर निर्भर करता है। इस मुद्दे पर, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि केंद्र को केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह की कार्रवाइयां (जनता द्वारा) चुनी गईं सरकारों के कामकाज को प्रभावित करती हैं। उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने शीर्ष अदालत के 2018 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन उपराज्यपाल किरण बेदी द्वारा पुडुचेरी विधानसभा में तीन सदस्यों को मनोनीत करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019, जिसे 2023 में संशोधित किया गया था, इस मुद्दे पर अस्पष्ट है कि मनोनीत विधायकों की सरकार गठन में भूमिका होगी या नहीं।

इस सवाल के जवाब में कि क्या जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल की पांच विधायकों को मनोनीत करने की शक्ति को मंत्रिपरिषद की सलाह से निर्देशित किया जाना चाहिए, वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने कहा कि इसका जवाब सुप्रीम कोर्ट ने पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश और संघ की अधीन होने के संदर्भ में दिया था। उन्होंने कहा कि जहां तक कश्मीर का सवाल है, जब उच्चतम न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल के इस बयान को स्वीकार कर लिया है कि इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा, तो यह सवाल ही नहीं उठता है। यह माना गया कि किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील करना अस्वीकार्य है और इसलिए जम्मू कश्मीर की तुलना पुडुचेरी से नहीं की जा सकती।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा,वक्त आ गया है कि चुनी हुईं सरकारों के कामकाज में केंद्र द्वारा इस तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप को सदा के लिए समाप्त कर दिया जाए। हमने देखा है कि दिल्ली और पुडुचेरी में प्रशासन किस तरह ठप हो गया है, जिससे नागरिकों के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 239ए का हवाला देते हुए, दुबे ने कहा कि अधिनियम में राज्य विधानसभा में पांच सदस्यों – दो महिलाएं, दो प्रवासी समुदाय से और एक पीओजेके (पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के) शरणार्थियों – को मनोनीत करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा लेकिन यह ‘सरकार गठन या अविश्वास प्रस्ताव’ के दौरान, मनोनीत सदस्यों के मताधिकार के मुद्दे पर अस्पष्ट/चुप है।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान उस समय किया गया था जब केंद्र शासित प्रदेश में कोई विधानसभा नहीं थी। बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान जताए जाने के मद्देनजर पांच विधायकों को मनोनीत करने की उपराज्यपाल की शक्ति काफी मायने रखती है। वहीं एक जटिल प्रश्न भी उठता है कि क्या मनोनीत विधायक सदन में बहुमत तय करने में भूमिका निभाएंगे। पुडुचेरी मामले में 2018 के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह कहा गया था कि केंद्र सरकार को विधानसभा में सदस्यों को मनोनीत करने के लिए राज्य से परामर्श करने की आवश्यकता नहीं है और मनोनीत सदस्यों को निर्वाचित सदस्यों के समान वोट देने का अधिकार है।

 

क्या पाकिस्तान में बढ़ते जा रहे हैं आतंकी संगठन?

वर्तमान में पाकिस्तान में आतंकी संगठन बढ़ते ही जा रहे हैं! आतंकी घुसपैठ करवाकर देश में अशांति फैलाने की बात पुरानी हो चुकी है। पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले तत्व और अलगाववादी अब देश में ही सक्रिय गैंगस्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गैंगों को आधुनिक हथियार और मोटी रकम देकर ललचाया जा रहा है। इन्हीं गैंगों के जरिए नार्को टेरर को भी अंजाम दिया जा रहा है। विदेश से भारी तादाद में ड्रग्स की सप्लाई में गैंगों के नेटवर्क को इस्तेमाल किया जा रहा है। पंजाब पुलिस ने देश की खुफिया एजेंसियों को इसे लेकर आगाह किया है। हरविंदर सिंह रिंदा, यह 2008 से 2019 तक पंजाब समेत कई राज्यों में सीधे तौर पर कई आपराधिक केसों में शामिल रहा है। यह 2019 में पाकिस्तान भागा, जहां बब्बर खालसा इंटरनैशनल से जुड़ गया। इसे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का सपोर्ट है। रिंदा को फरवरी 2023 में भारत सरकार ने आतंकी घोषित किया था। लखबीर सिंह लांडा, यह 2017 में कनाड़ा भाग गया। इस पर हत्या, जानलेवा हमला, एक्सटॉर्शन, किडनैपिंग, आर्म्स और ड्रग्स तस्करी के कई केस थे। यह रिंदा का पुराना साथी है। 2022 से रिंदा के साथ मिलकर पंजाब में टेरर मॉड्यूल खड़ा कर रहा है और आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है।

हरप्रीत सिंह उर्फ हैपी पसीया, यह मानव तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए अवैध रूप से 2021 में अमेरिका में घुस गया। इसके बाद इसने 2023 में रिंदा से गठजोड़ कर लिया, ताकि पंजाब में टेरर मॉड्यूल को बढ़ाया जा सके। अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला, पंजाब समेत कई राज्यों में यह 33 केसों में वॉन्टेड है। इसने हरदीप सिंह निज्जर (मर चुके) से नजदीकी बनाई, जो 2019-20 में खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का चीफ था। इसे यूएपीए के तहत जनवरी 2023 में आतंकी घोषित किया जा चुका है। अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत बल, यह 2014 में अमेरिका चला गया था। पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया गैंग का एक्टिव मेंबर है। लोकल नेटवर्क के जरिए पंजाब में अवैध गतिविधियों में लिप्त रहता है। इसने 2023 में परमजीत सिंह पम्मा के साथ मिलकर टेरर मॉड्यूल को बढ़ावा दिया।

हरविंदर सिंह रिंदा के 2019 में पाकिस्तान जाने और बीकेआई जॉइन करने के बाद से आतंकी ग्रुप के साथ गैंगस्टर का गठजोड़ के ट्रेंड की शुरुआत हुई। रिंदा ने 2022 में लखबीर लांडा और 2023 मे हैपी पसीया को जोड़ा। इसे देखते हुए गैंगस्टर अर्श डाला ने निज्जर से तो अमृत बल ने बीकेआई टेररिस्ट पम्मा से हाथ मिला लिए। देश में इस समय दो बड़े क्राइम सिंडिकेट बने हुए हैं। दोनों की अगुआई पंजाब के गैंग कर रहे हैं। एक तरफ लॉरेंस बिश्नोई गिरोह है तो दूसरी तरफ बंबीहा ग्रुप है। दोनों सिंडिकेट में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के गैंगस्टर, हथियार माफिया और नशा तस्कर तक जुड़ चुके हैं।

विदेश से लॉरेंस बिश्नोई गैंग को ऑपरेट कर रहे गोल्डी बराड़ को भी जनवरी में भारत सरकार आतंकी घोषित कर चुकी है। इसके तार भी सीधे बब्बर खालसा इंटरनैशनल से जुड़े मिले हैं। रिंदा-लांडा से इसके गठजोड़ के संकेत हैं। इस वक्त लॉरेंस का सिंडिकेट काफी बड़ा हो चुका है। इसके तार कई राज्यों से लेकर विदेश तक फैल चुके हैं। दूसरी तरफ, खालिस्तान टाइगर फोर्स के चीफ अर्श डाला का सीधा संबंध बंबीहा ग्रुप से है, जिससे नॉर्थ इंडिया के कई गिरोह जुड़े हुए हैं। इन दोनों क्राइम सिंडिकेट के जरिए देश में आतंकी गतिविधियां तेज करने की साजिश चल रही है।

पाकिस्तान के बड़े हथियार और नशा तस्करों से भी गैंगस्टरों का गठजोड़ बना है। इनके जरिए भारत में आतंक फैलाने के लिए हथियार और नार्को टेरर के लिए ड्रग्स की तस्करी हो रही है। पाकिस्तान के आसिफ डागर से अर्श डाला के रिश्ते हैं, जबकि बिलाल मनेशाह से जर्मनी बेस्ड गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी ढिल्लो और मलयेशिया बेस्ड जकेपाल सिंह उर्फ लाली के तार जुड़े हैं। सिद्धू मूसेवाला के मई 2022 में हुए मर्डर में इस्तेमाल आधुनिक हथियार भी बिश्नोई गैंग ने पाक से मंगवाए थे।

पंजाब पुलिस का दावा है कि पाकिस्तान से भारत में आधुनिक हथियार और ड्रग्स की सप्लाई ड्रोन के जरिए हो रही है। इसके अलावा समुद्री रास्ते का भी इस्तेमाल हो रहा है। यह सारा माल गुजरात पहुंचता है, जहां से इसे देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाया जाता है। गैंगस्टरों के हथियार का दूसरा सबसे बड़ा सोर्स मध्य प्रदेश है। वहां के तस्कर नॉर्थ इंडिया के गिरोहों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर सीधा मार्केटिंग कर रहे हैं।

 

क्या गैर जाटों पर फोकस करना बीजेपी को कम आ गया?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बीजेपी का गैर जाटों पर फोकस करना काम आया है या नहीं!हरियाणा में इस बार के विधानसभा चुनाव के शुरुआत रुझानों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। पहले जहां कांग्रेस का बहुमत मिलता दिखाई दे रहा था। वहीं, ईवीएम की गणना के बाद से सत्तारूढ़ भाजपा तेजी से बहुमत हासिल करती दिखाई दे रही है। बीजेपी को इस चुनाव में जहां अपनी साख बचाने की टेंशन है तो वहीं, कांग्रेस 10 साल बाद सत्ता में वापसी के सपने देख रही है। पंजाब से अलग होकर 1966 में हरियाणा का गठन हुआ और उसके बाद से राज्य में जाटों की सियासत बेहद प्रभावशाली रही है। बीते 58 साल के इतिहास की बात करें तो हरियाणा में 33 सालों तक जाट समुदाय के नेताओं ने राज किया है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा के लिए मंगलवार को हो रही मतगणना के शुरुआती नतीजों में बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है। हालांकि, यह शुरुआती रुझान है, मगर यह पूरे चुनावी नतीजों का ट्रेलर जरूर कहा जा सकता है। इसे समझते हैं। चुनावी विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि हरियाणा में जाट आबादी करीब 27 फीसदी तो गैर-जाट 73 फीसदी है। इसके बाद भी जाट सबसे प्रभावशाली बने हुए हैं। वजह यह है कि 90 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से लगभग 36 पर जाटों की मजबूत मौजूदगी है। वहीं, 10 लोकसभा सीटों में से 4 पर उनका असर काफी ज्यादा है। 2019 के विधानसभा चुनाव में जाट प्रभाव वाली ज्यादातर सीटें कांग्रेस जीतने में कामयाब रही और कुछ सीटें जेजेपी के खाते में गई थी। बीजेपी के कई दिग्गज जाट नेता चुनाव हार गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में जाट प्रभाव वाली तीन लोकसभा सीटें कांग्रेस ने जीती हैं।

प्रदेश के सियासी समीकरण को देखते हुए कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आगे कर रखा है। इसके अलावा चौधरी बीरेंद्र सिंह से लेकर रणदीप सुरेजवाला जैसे जाट चेहरा भी हैं। बीजेपी ने जाट वोटों को साधने के लिए जरूर किरण चौधरी को आगे किया है। लेकिन जाट बेल्ट में पार्टी को वोट हासिल करने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, बीजेपी के पास फिलहाल मजबूत और प्रभावशाली जाट चेहरा नहीं है। माना जा रहा है कि कारोबारियों और गैर जाट लोगों के बीच बीजेपी की यही रणनीति बेहद कारगर रही है।

हरियाणा में बीजेपी पिछले 10 सालों से सत्ता में है। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रदेश की 90 सीटों में से 47 सीटें जीतकर बहुमत की सरकार बनाई थीं। तब इंडियन नेशनल लोकदल ने 19 और कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं। साल 2019 में बीजेपी ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस चुनाव में बीजेपी केवल 40 सीटें जीत पाई थी। तब 10 सीटें जीतने वाली जेजेपी के साथ बीजेपी ने गठबंधन सरकार बनाई थी। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने 5-5 सीटें जीती थीं। पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी इन गैर-जाट समुदायों को लुभाकर सत्ता हासिल करती रही है।

डॉ. राजीव रंजन गिरि के अनुसार, बीजेपी को गैर-जाट पार्टी माना जाता रहा है। पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी इन गैर-जाट समुदायों को लुभाकर सत्ता हासिल करती रही है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की 10 में से 5 सीटें बीजेपी और 5 सीटें कांग्रेस जीतने में सफल रही है। इस चुनाव में जाट और दलित समीकरण कांग्रेस के पक्ष में लामबंद रहा है और इसी फार्मूले पर विधानसभा चुनाव में उतरने का रोडमैप तैयार किया है। माना जा रहा है कि गैर जाटों पर फोकस करने की बीजेपी की रणनीति बेहद कारगर रही है। हरियाणा में जाट समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है। कुल आबादी में 27 फीसदी संख्या जाटों की है। हरियाणा विधानसभा की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 32 सीटों पर जाट समुदाय का काफी दबदबा है। साथ ही बाकी की 17 और सीटें पर भी जाटों का काफी प्रभाव है।

इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी लोकल पार्टी जेजेपी से गठबंधन नहीं कर पाई है। इस चुनाव में बीजेपी को अपने वोट से ज्यादा भरोसा जाट वोट के बंटने पर है। इसी वजह से लोकसभा चुनाव में भी जेजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था। भाजपा इस बार दलित और गैर जाट वोटों को साधने की कोशिश में लगी है। हरियाणा में अधिकतर किसान जाट हैं। ऐसे में हो सकता है कि जेजेपी से गठबंधन न करना भी बीजेपी की रणनीति मानी जा सकती है, ताकि जाट वोट बंट जाएं।

बताया जा रहा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए तीन मुद्दे मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। पहला-किसानों की नाराजगी, दूसरा-महिला पहलवानों के मामले में बढ़ा असंतोष और तीसरा-सत्ता विरोधी लहर। राजीव रंजन कहते हैं कि इस चुनाव में बीजेपी को इन तीनों मुद्दों पर थोड़ा नुकसान हो सकता है, मगर जातियों का गणित ऐसा है कि शायद उसे इससे ज्यादा फर्क पड़े।

राजीव रंजन गिरि के अनुसार, अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बांग्लादेश में हुए आंदोलन को भारत के किसान आंदोलन से जोड़ दिया था। उन्होंने कहा था-जो बांग्लादेश में हुआ है, वो यहा (भारत में) होते हुए भी देर नहीं लगती, अगर हमारा शीर्ष नेतृत्व सशक्त नहीं होता। यहां पर जो किसान आंदोलन हुए, वहां पर लाशें लटकी थीं, वहां रेप हो रहे थे, किसानों की बड़ी लंबी प्लानिंग थी, जैसे बांग्लादेश में हुआ। चीन, अमेरिका, इस तरह की विदेशी शक्तियां यहां काम कर रही हैं। इससे भी जाटों और किसानों में काफी नाराजगी थी। हालांकि, बीजेपी ने कंगना के बयान से दूरी बना ली थी। इस बयान को भी सोशल मीडिया पर एक धड़े ने जबरदस्त समर्थन दिया था।

 

एक छोटी सी गलती कैंसर का कारण! शिकागो विश्वविद्यालय ने इस पर एक अध्ययन किया, जिससे एक भयानक सत्य आया सामने

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डीएनए को एक कोशिका के अंदर कैसे ‘पैकेज’ और संग्रहित किया जाता है, इसमें आरएनए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक कोशिका के अंदर, प्रत्येक नाभिक के आवरण में, मानव ‘जीवन रक्त’ निहित है। वहां प्रोटीन और डीएनए की गतिविधि लगातार चलती रहती है. एक छोटी सी गलती बन जाएगी कैंसर का कारण! शिकागो विश्वविद्यालय ने इस पर एक अध्ययन किया, जिसने एक अज्ञात क्षितिज खोल दिया। शोध पत्र हाल ही में ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

इस शोध का नेतृत्व शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चुआन हो ने किया। सैन एंटोनियो में टेक्सास विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर मिंगज़ियांग शू ने अपनी टीम के साथ संयुक्त रूप से काम किया। अपने शोध में, उन्होंने पाया कि डीएनए को एक कोशिका के अंदर ‘पैकेज’ और संरक्षित करने में आरएनए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बात यह है कि, प्रोटीन संश्लेषण में शामिल आरएनए कोशिकाओं की तुलना में लंबे डीएनए को छोटे स्थानों (जिसे डीएनए पैकेजिंग कहा जाता है) में संपीड़ित करने में एक विशेष भूमिका निभाता है। इस मामले में, डीएनए पैकेजिंग में आरएनए की मदद करने वाले जीन को टेट-2 कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध ने लंबे समय से चली आ रही पहेली का उत्तर दे दिया है – कैंसर या अन्य विकारों के कारण की खोज करते समय Tet2-संबंधित उत्परिवर्तन अक्सर पाइपलाइन में क्यों आते हैं। लंबे समय तक वैज्ञानिकों को इस बात की स्पष्ट समझ नहीं थी कि टीईटी मिथाइल एटोसिन डाइऑक्सीजिनेज 2 या टेट-2 का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि जब ‘अपराधी’ की पहचान हो जाएगी तो समाधान मिल जाएगा. इलाज के नये क्षितिज खुलेंगे। हालाँकि, चुआन ने कहा, यह एक ‘वैचारिक सफलता’ है। एक महत्वपूर्ण जीन की ‘पहचान’ स्पष्ट कर दी गई है।

चुआन और उनके सहयोगियों ने जीन-अभिव्यक्ति पर कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। 2011 के एक अध्ययन में, उन्होंने दिखाया कि डीएनए और प्रोटीन की तरह, आरएनए में परिवर्तन से जीन की अभिव्यक्ति बदल जाती है। तब से वे आरएनए और जीन अभिव्यक्ति पर काम कर रहे हैं। इस तरह काम करते समय उनकी नजर टेट-2 जीन पर पड़ी। वैज्ञानिकों को पता था कि टेट-2 या टेट-2 संबंधित जीन में उत्परिवर्तन मानव शरीर में विभिन्न बीमारियों का कारण बनता है। ल्यूकेमिया या अस्थि मज्जा कैंसर तब होता है जब टेट-2 जीन के डीएनए न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम का 10-60 प्रतिशत परिवर्तित या उत्परिवर्तित होता है। इसके अलावा उस जीन का उत्परिवर्तन अन्य प्रकार के कैंसर का भी कारण बनता है।

चुआन ने कहा, टेट परिवार के अन्य सदस्य भी डीएनए को प्रभावित करते हैं। इसलिए कई वर्षों तक, शोधकर्ताओं ने केवल डीएनए पर टेट-2 के प्रभावों को देखा। लेकिन यह गलत है. टीईटी-2 वास्तव में आरएनए को प्रभावित करता है। हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट में रसायन विज्ञान विभाग और जैव रसायन और आणविक जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर जॉन टी. विल्सन ने कहा, “यह शोध चिकित्सा में नए रास्ते खोलेगा। हमें उम्मीद है कि इस शोध का पूरी दुनिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।”

स्तन कैंसर का पता चलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर, लिडिया को डॉक्टरों ने बताया कि उसे स्तन की सर्जरी करानी होगी। यानी सर्जरी करके दो स्तन हटा दिए जाएं. मास्टेक्टॉमी के बाद लीडर का कैंसर शायद ठीक हो गया होगा। लेकिन वह अपनी पिछली सामान्य जिंदगी में वापस नहीं लौट सके. पति से शारीरिक दूरी बन गई। अपने तीन साल के बच्चे को सीने से लगाकर भी उसे खालीपन महसूस हो रहा था।

शिकागो विश्वविद्यालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ स्टेसी टेस्लार लिंडौ ऐसी महिलाओं से प्रभावित हुईं। स्टेसी ने कहा कि सर्जरी के बाद कोई न्यूरोलॉजिकल उत्तेजना नहीं है। कोई अहसास नहीं है. शरीर के साथ जुड़कर एक अतिरिक्त कृत्रिम अंग जैसा महसूस होता है। लेकिन ब्रेस्ट सिर्फ लड़कियों की जिंदगी का एक अंग नहीं है। उनके मुताबिक, ब्रेस्ट भी लड़कियों की सेक्स लाइफ का अहम हिस्सा हैं। स्टेसी ने कहा, अमेरिका में स्तन कैंसर से उबरने वाली कम से कम एक तिहाई महिलाओं को एक या दोनों स्तनों को हटाने के लिए मास्टेक्टॉमी करनी पड़ती है। यह पाया गया है कि 77 प्रतिशत महिलाओं को सर्जरी के बाद अपने सामान्य यौन जीवन में व्यवधान का अनुभव होता है। कई लोग अवसाद से पीड़ित हैं।

परिणामस्वरूप, स्टेसी और उनकी टीम इस बात से जूझ रही है कि कृत्रिम अंग में सामान्य अनुभूति कैसे बहाल की जाए। इसमें न्यूरो वैज्ञानिक, कैंसर विशेषज्ञ, बायोमेडिकल इंजीनियर और कई अन्य लोग शामिल हैं। लंबे शोध के बाद ‘बायोनिक ब्रेस्ट’ बनाया गया है। यह कैसे काम करेगा? स्टेसी ने कहा कि बायोनिक ब्रेस्ट इम्प्लांट का पहला चरण मास्टेक्टॉमी के समय शुरू होगा। एक उपकरण बांह के नीचे तंत्रिका जड़ से जुड़ा होगा। दूसरे चरण में, सी-फाइन नामक उपकरण अंग में उत्पन्न उत्तेजना को विद्युत संकेत के रूप में मस्तिष्क तक भेजता है। परिणामस्वरूप, सामान्य अंग की तरह ही बायोनिक स्तन में भी स्पर्श का एहसास महसूस किया जा सकता है। लेकिन अब पूरा क्लिनिकल ट्रायल का इंतजार कर रहा है.

स्टेसी का शोध यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और शिकागो विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किया गया था। हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान को 39.9 मिलियन डॉलर का अनुदान मिला है। नतीजतन, वैज्ञानिक क्लिनिकल परीक्षण की पूरी तैयारी कर रहे हैं।

हालाँकि, इस अध्ययन में शिकागो विश्वविद्यालय के न्यूरोवैज्ञानिकों में से एक स्लीमेन बेंसमैया का उल्लेख नहीं किया गया है। इसी साल अगस्त में उनका निधन हो गया. स्लीमेन लंबे समय से इस बात पर शोध कर रहे थे कि क्या कृत्रिम या कृत्रिम अंगों में न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया को बहाल किया जा सकता है। 2016 में, स्टेसी और उनकी टीम उनके साथ अध्ययन में शामिल हुई। स्टेसी ने कहा कि उनका शोध किसी कृत्रिम अंग पर था। और मेरा शोध मुख्यतः स्तन के बारे में है।

मैं कोलकाता में कैंसर सर्जन गौतम मुखर्जी से बात कर रहा था। वह
उन्होंने कहा, ‘आजकल हम कोशिश करते हैं कि पूरा ब्रेस्ट न हटाएं। कभी-कभी स्तन पुनर्निर्माण या मैमोप्लास्टी की जाती है। लेकिन उस स्थिति में भी स्पर्श का कोई एहसास नहीं होता. लेकिन अगर कृत्रिम स्तनों से संवेदना बहाल की जा सके, तो यह अभूतपूर्व शोध होगा। ठीक होने के बाद महिलाएं अपनी पिछली सामान्य जिंदगी में लौट आएंगी।”

7 अक्टूबर हमास-हाना: ‘हमारा कोई हाथ नहीं था’, ईरान ने इजराइल के दावे को खारिज किया

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने इज़राइल की मांगों के जवाब में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा के हमास नेतृत्व ने पिछले साल 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमला करने का फैसला किया था. तेल अवीव ने पिछले साल 7 अक्टूबर को इज़राइल पर हमास के हमले के पीछे ईरान पर आरोप लगाया था। इस बार तेहरान ने उस दावे को खारिज कर दिया। इजराइल ने दावा किया कि इस हमले के पीछे ईरान और उसके समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह की भूमिका थी.

हाल ही में इजराइल ने दावा किया था कि उसकी सेना ने हमास की गुप्त बैठकों के अंश वाले कई दस्तावेज जब्त कर लिए हैं. दावा ये भी है कि 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमले की पूरी योजना है. यह भी दावा किया जाता है कि यह योजना हमास के राजनीतिक प्रमुख याह्या शिनवार ने ईरान और हिजबुल्लाह को सूचित करके बनाई थी। इजराइल का यह दावा हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में एक रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित हुआ था. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने इज़राइल की मांगों के जवाब में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा के हमास नेतृत्व ने पिछले साल 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमला करने का फैसला किया था. तेहरान ने कहा कि हमले के नेतृत्व, योजना में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. ईरान के मुताबिक, हिजबुल्लाह और हमले में उनकी संलिप्तता के बारे में जो कुछ भी कहा जा रहा है, वह झूठ है।

हमास के खिलाफ ऑपरेशन के बहाने गाजा पट्टी में आम फिलिस्तीनी नागरिकों की हत्या पिछले एक साल से जारी है. एक महीने से सशस्त्र शिया संगठन हिजबुल्लाह को दबाने के नाम पर इजरायली सेना लेबनान में नागरिकों पर बम और मिसाइलों से हमला कर रही है। इस बार लेबनान में उनका निशाना संयुक्त राष्ट्र शांति सेना है.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सेना ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना निगरानी चौकी पर हवाई हमला किया। कई पश्चिम एशियाई मीडिया ने बताया कि इस घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इज़राइल रक्षा बल (आईडीएफ) ने भी एक बयान में घटना की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हमला लापरवाही के कारण हुआ। दो शांतिरक्षक घायल हो गए. शुक्रवार को इजरायली विमानों ने लेबनान के बेरूत पर हमला कर दिया. 23 लोग मारे गए और कम से कम 71 घायल हो गए। दूसरी ओर, शुक्रवार को गाजा में आईडीएफ के हवाई हमलों और मिसाइल हमलों में 61 फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए। घायलों की संख्या करीब 250 है. लेबनान में एक ज़मीनी ऑपरेशन के दौरान हिज़्बुल्लाह गुरिल्लाओं के साथ आमने-सामने की मुठभेड़ में एक इज़रायली सैनिक मारा गया। संयोग से, पिछले साल गाजा में इजरायली हमले में भारतीय मूल के संयुक्त राष्ट्र अधिकारी अनिल वैभव काले की मौत हो गई थी।

3 अक्टूबर की सुबह से ही इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के विभिन्न ठिकानों पर “ग्राउंड ऑपरेशन” शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन का ऑपरेशनल नाम ‘ऑपरेशन नॉर्दर्न एरो’ है. पिछले शुक्रवार (27 सितंबर) को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिण में दहिया इलाके में इजरायली हमले में हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की मौत हो गई थी. संगठन की केंद्रीय परिषद के नेताओं में से एक, नबील कौक भी मारा गया। इसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ऐलान किया कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की गुप्त सुरंग-डेरा में एक ऑपरेशन चलाया जाएगा. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा के हालात की याद दिलाकर लेबनानियों को चेतावनी दी। लेबनानी लोगों को उनका संदेश, “यदि आप देश को बचाना चाहते हैं, तो हिज़्बुल्लाह को लेबनान से बाहर निकालें। नहीं तो आने वाले दिनों में लेबनान को उसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा जो गाजा में हुआ था.

कुछ दिन पहले इजराइल ने लेबनान में 10,000 सैनिक भेजे थे. हवाई हमलों के अलावा इजरायली सेना ने लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए. दक्षिणी लेबनान में दो पक्षों के बीच जमकर लड़ाई हो रही है. वह लड़ाई उत्तर तक भी फैल गई है. इज़रायली सैनिक उत्तरी लेबनान में भी प्रवेश कर गए हैं। परिणामस्वरूप, विभिन्न हलकों का मानना ​​है कि इज़राइल आने वाले दिनों में हिजबुल्लाह पर हर तरफ से हमला करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। ऐसे में इजराइल के प्रधानमंत्री ने मंगलवार को लेबनानी लोगों को एक संदेश दिया. नेतन्याहू ने लेबनानी नागरिकों को आने वाले दिनों में और अधिक विनाश से बचने के लिए खुद को हिजबुल्लाह की पकड़ से मुक्त करने की सलाह दी। उसके बाद अगर वे हिजबुल्लाह का समर्थन करेंगे, उनके साथ खड़े होंगे तो संघर्ष और लंबा चलेगा. विनाश, मृत्यु बढ़ेगी। आने वाले दिनों में लेबनान की हालत भी गाजा जैसी हो सकती है। उनके शब्दों में, ”लेबनानी, देश को हिज़्बुल्लाह से आज़ाद कराओ ताकि ये लड़ाई ज़्यादा दिनों तक न चले.” आपके पास लेबनान को बचाने का मौका है। इससे पहले कि लड़ाई लंबी चले, गाजा जैसी स्थिति पैदा हो जाए, लेबनान को बचाने की तैयारी करें।”

हिजबुल्लाह का गढ़ दक्षिणी और पूर्वी लेबनान माना जाता है। पिछले कुछ दिनों में इजराइल ने वहां अपने हमले तेज कर दिए हैं. इजरायली सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक-एक कर कब्जा कर लिया गया है और उन्हें नष्ट कर दिया गया है. इजराइली सेना तटीय इलाके की ओर बढ़ रही है. उनका लक्ष्य दक्षिण पश्चिम लेबनान में हिजबुल्लाह के अड्डे पर कब्ज़ा करना है। इजरायली सेना लेबनान की राजधानी बेरूत में लगातार हवाई हमले कर रही है। शहर के दक्षिणी किनारे पर स्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक के बाद एक बमबारी और गोले दागे जा रहे हैं। हालाँकि, हिज़्बुल्लाह के शीर्ष नेताओं में से एक नईम काशेम ने दावा किया कि वे हमले के बावजूद जवाब दे रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया से 9 रन से हारकर भारत महिला टी20 वर्ल्ड कप से लगभग बाहर हो गया है

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भारत महिला टी20 वर्ल्ड कप से लगभग बाहर हो गया है. रविवार को शारजाह में ऑस्ट्रेलिया से 9 रन से हार गई. हरमनप्रीत कौर ने क्रीज से आखिर तक संघर्ष किया लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सकीं. भारत महिला टी20 वर्ल्ड कप से लगभग बाहर हो गया है. रविवार को शारजाह में ऑस्ट्रेलिया से 9 रन से हार गई. हरमनप्रीत कौर ने क्रीज से आखिर तक संघर्ष किया लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सकीं. भारत का दोहरा शीर्ष क्रम और क्षेत्ररक्षण विफलता। भारत अभी भी चार मैचों में चार अंकों के साथ बचा हुआ है. हालाँकि, अगर न्यूजीलैंड सोमवार को पाकिस्तान को हरा देता है, तो वे आधिकारिक तौर पर बाहर हो जाएंगे। अगर पाकिस्तान न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हरा देता है तो भारत के बचने की संभावना कम है। हालांकि, अगर पाकिस्तान बड़े अंतर से जीतता है, तो वह भारत और न्यूजीलैंड दोनों को पछाड़कर सेमीफाइनल में पहुंच सकता है। ऑस्ट्रेलिया चार मैचों में आठ अंकों के साथ पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है।

जब ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया तो साफ था कि भारत का काम आसान नहीं होगा. क्योंकि नेट रन रेट बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने जितने रन बनाए, भारत उससे भी कम समय में बना लेता. टॉस के बाद भारत ने मारी बाजी. चलते समय आशा शोवनार का टखना मुड़ जाता है. ऑस्ट्रेलिया की अनुमति से, भारत ने उनकी जगह राधा यादव को पहली एकादश में शामिल किया।

शुरुआत ख़राब नहीं थी. पहले दो ओवर में सिर्फ 9 रन बने. तीसरे ओवर में रेणुका सिंह ने लगातार दो गेंदों पर दो विकेट लिए. चौथी गेंद पर बेथ मूनी (2) राधा के हाथों कैच कराकर लौटीं। अगली गेंद जॉर्जिया वेयरहैम (0) एलबीडब्ल्यू है। ऑस्ट्रेलिया ने समीक्षा नहीं की. लेकिन रीप्ले में पता चला कि गेंद लेग स्टंप के बाहर जा रही थी.

दो विकेट खोकर ऑस्ट्रेलिया किसी दबाव में नहीं था. सलामी बल्लेबाज ग्रेस हैरिस और ताहलिया मैक्ग्रा ने खेलना जारी रखा। भारत का कोई भी गेंदबाज आउट नहीं हो सका. नौवें ओवर में अरुंधति रेड्डी की गेंद पर दीप्ति शर्मा ने हैरिस का कैच पकड़ा। तीसरे विकेट की जोड़ी आसानी से 50 के पार चली गई. मैक्ग्रा का कैच हरमनप्रीत कौर ने लपका।

राधा ने 12वें ओवर में मैक्ग्रा (32) को वापस भेजा। 14वें ओवर में हैरिस (40) लौटे और ऑस्ट्रेलिया थोड़ा दबाव में आ गया. एशले गार्डनर (6) को भी रन नहीं मिला. 17वें ओवर में एक एलबीडब्ल्यू को लेकर विवाद खड़ा हो गया. दीप्ति की गेंद पर फोबे लीचफील्ड रिवर्स स्वीप खेलने गईं। गेंद उनके पैड पर लगी. जब अंपायर आउट देता है तो ऑस्ट्रेलिया रिव्यू लेता है। लेकिन तीसरे अंपायर ने कहा कि गेंद लेग स्टंप के बाहर गिरी है. भारत ने विरोध किया. उनका दावा है कि चूंकि लिचफील्ड रिवर्स स्वीप के लिए गया था, इसलिए यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि गेंद लेग स्टंप के बाहर गिरी थी। हालांकि, दोबारा रिव्यू देखने के बाद भी तीसरे अंपायर ने फैसला नहीं बदला.

एलिस पेरी ने ऑस्ट्रेलिया का रन रेट कम किया. दीप्ति ने पेरी (32) को पारी में कोई गेंद शेष रहते ही वापस भेज दिया। लीचफील्ड ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर ऑस्ट्रेलिया के 150 रन पूरे किए.

इससे पहले भारत ने टी20 वर्ल्ड कप में अधिकतम 150 रनों का पीछा करते हुए जीत हासिल की थी. टी20 में सबसे ज्यादा रन चेज 174 रन का है. ये ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ है. तो यह कठिन काम नहीं था. भारत की पारी शुरू होने से पहले ही दिखा दिया गया था कि भारत को ऑस्ट्रेलिया के रन रेट में शीर्ष पर पहुंचने के लिए 10.2 ओवर या उससे पहले जीत की जरूरत है. अगर वे हारते भी हैं, तो रन रेट को न्यूजीलैंड से अधिक बनाए रखने के लिए उन्हें कम से कम 139 रन बनाने होंगे।

भारतीय ओपनर रन रेट बढ़ाने के मकसद से शुरू से ही जोखिम लेने की राह पर चलते हैं। पहले तीन ओवर में 25 रन बने. मरमुखी शेफाली वर्मा थीं. लेकिन चौथे ओवर (20) में खराब शॉट खेलकर उन्हें वापस लौटना पड़ा. स्मृति प्रतिधारण का ख़राब रूप जारी है. यहां तक ​​कि अहम मैचों में भी वह 12 गेंदों पर 6 रन से ज्यादा नहीं बना सके. सातवें ओवर में जेमाइमा रोड्रिग्ज (16) भी लौटीं. तीन विकेट खोने के बावजूद भारत का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया. कप्तान हरमनप्रीत और दीप्ति शर्मा ने मुश्किल वक्त में टीम का नेतृत्व किया. हालांकि धीरे-धीरे दोनों ने नियमित अंतराल पर रन बनाना जारी रखा. हालाँकि, जैसे ही भारत की चार-छह हिट्स की निरंतरता कम हुई, ‘पूछने की दर’ तेजी से बढ़ने लगी।

दो बल्लेबाजों ने दबाव में खेलना जारी रखने की कोशिश की. यहीं पर ख़तरा आता है. 16वें ओवर में सोफी मोलिनेउ को छक्का मारने के बाद दीप्ति (29) आउट हो गईं. अगले ओवर में ऋचा घोष (1) रन आउट हो गईं. विपरीत दिशा में कोई अन्य स्थापित बल्लेबाज नहीं होने के कारण, हरमनप्रीत ने रन बनाने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने 19वें ओवर में अपना अर्धशतक पूरा किया. लेकिन यह काम नहीं किया. आखिरी ओवर में भारत को 14 रन चाहिए थे. एनाबेल सदरलैंड ने सिर्फ तीन रन दिए। दो विकेट लिए. एक रन आउट हो गया है. हरमनप्रीत 54 रन बनाकर नाबाद रहीं.

बांग्लादेश टी20 सीरीज के सर्वश्रेष्ठ फील्डर वाशिंगटन, एक वजह से हार्दिक, रयान से आगे

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भारत ने बांग्लादेश को टी20 सीरीज में हराया. मैच के बाद भारतीय टीम ने ‘इम्पैक्ट फील्डर’ चुना। वॉशिंगटन सुंदर ने वो अवॉर्ड जीता. हार्दिक पंड्या और रियान पराग एक कारण से अच्छे खिलाड़ी हैं। भारत ने बांग्लादेश को टी20 सीरीज में हराया. शनिवार को तीसरा मैच 133 रन से जीत लिया। कई मिसालें भी कायम की गई हैं. मैच के बाद भारतीय टीम ने ‘इम्पैक्ट फील्डर’ चुना। वॉशिंगटन सुंदर ने वो अवॉर्ड जीता. हार्दिक पंड्या और रियान पराग एक कारण से अच्छे खिलाड़ी हैं।

फील्डिंग कोच टी दिलीप ने पुरस्कार देने से पहले इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि हार्दिक पहले दावेदार थे. दिलीप ने अपनी फील्डिंग की तुलना ‘टॉप गियर में फॉर्मूला वन कार’ से की। रयान ‘मुश्किल कैच को आसान बनाने’ के दूसरे दावेदार थे।

दिलीप ने रियान के बारे में कहा, ‘रियान तंग कोणों से दौड़ने या रन बचाने के अलावा मुश्किल कैच भी आसानी से पकड़ सकता है। मुझे पसंद है कि जिस तरह से वह मैदान पर एक प्रतिशत मौका चूक जाने पर भी पछताते हैं। इसलिए रियान पराग दूसरे दावेदार हैं।”

लेकिन वाशिंगटन ने ‘सीमा रेखा पर उत्तम क्षेत्ररक्षण’ के लिए पुरस्कार जीता। उन्होंने मौजूदा सीरीज में तीन कैच पकड़े हैं. उन्होंने गेंद हाथ में लेकर प्रति ओवर केवल पांच रन दिये. दिलीप कहते हैं, “वह पूर्वानुमान लगाने और क्षेत्ररक्षण में एक अलग शैली बनाने के मामले में असाधारण हैं। जब आप टीम में आते हैं तो आपको लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करनी होती है।’ मैं हर बार वाशिंगटन में उस प्रयास को देखता हूं।”

कोच गौतम गंभीर के बगल में खड़े दिलीप ने कहा, “जब भी साहस और ताकत मिलती है, हम हर गेंद पर मौके तलाशने की कोशिश करते हैं। हमने इस श्रृंखला में यह बहुत अच्छा किया है।’ उत्तम क्षेत्ररक्षण, खराब रोशनी के अनुकूल ढलना, विभिन्न क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटना अच्छे से किया गया है। हम यही आक्रामक रुख चाहते हैं।’ मैंने कैच पकड़ने और गलतियाँ करने दोनों के मामले में टीम में भाईचारा देखा।” बांग्लादेश के खिलाफ तीसरे टी20 मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 297 रन बनाए. हालांकि, भारत की पारी समाप्त होने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टीम के गेंदबाजों के सामने 170 रन का लक्ष्य रखा। उन्होंने ब्रेक के समय स्पष्ट कर दिया कि प्रतिद्वंद्वी को 170 रन के अंदर ही रखना होगा.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि टीम के गेंदबाज स्कोरबोर्ड को देखकर आत्मसंतुष्ट न हो जाएं, सूर्यकुमार ने शनिवार को अपना लक्ष्य निर्धारित किया। पर्याप्त रन हाथ में होने के कारण, रवि बिश्नोई, मयंक यादव, वरुण चक्रवर्ती को निरंतरता बनाए रखने का निर्देश दिया गया। भारतीय गेंदबाजों ने हैदराबाद की बैटिंग सपोर्ट विकेट पर बांग्लादेश को 164 रन पर रोककर कप्तान द्वारा दी गई चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया. मैच के बाद बिश्नोई ने सूर्यकुमार की चुनौती के बारे में बात की. युवा लेग स्पिनर ने कहा, ‘हम गेंदबाजी के लिए उतरे, उससे पहले सूर्यकुमार ने हमसे कहा कि हम अपने दिमाग में 300 रन के बारे में न सोचें. उन्होंने कहा, ‘160-170 रन की गेंदबाजी करनी चाहिए. हमें विपक्षी टीम को कम रनों पर रोकने की आदत विकसित करनी होगी।’ आप कह सकते हैं, हम तैयारी के तौर पर देखना चाहते थे. पिच बल्लेबाजी के लिए मददगार थी. लेकिन हम कोशिश करना चाहते थे।

टीम के आक्रामक रवैये के बारे में बिश्नोई ने कहा, ‘टीम में लगभग सभी लोग नई पीढ़ी के हैं. हर कोई अंतर देख सकता है. उन्हें जीत के लिए 298 रन बनाने थे. लेकिन हम गेंद से आक्रामक होना चाहते थे। लक्ष्य था 160 रन के अंदर ऑल आउट करना. शीर्ष पर रहना ही सब कुछ नहीं है. बिश्नोई ने कहा कि भारत की इस नई टीम को अतीत की चिंता नहीं है. उन्होंने कहा, ”यह भारतीय टीम युवा है. हमें बताया गया है कि हर दिन एक नया दिन है। पिछला मैच ख़त्म हो गया, यानी ख़त्म हो गया. लगे रहने पर नहीं होगा. नया मिलान, पुनः प्रयास करें।” अर्थात जो हो गया सो हो गया। वैसे भी अब इस बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. हर मैच नया और अलग है. कोच गौतम गंभीर चाहते हैं कि क्रिकेटर इसी तरह सोचें.

बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज में हार्दिक पंड्या बने सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर. बड़ौदा के ऑलराउंडर ने बल्ले और गेंद से सफलता हासिल की है. इस सीरीज में खासकर हार्दिक की बल्लेबाजी ने ध्यान खींचा है. हार्दिक इस सफलता का श्रेय भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव को देते हैं।

गंभीर को आक्रामक क्रिकेट पसंद है. उन्होंने क्रिकेटरों को अपने हिसाब से खेलने की आजादी दी. उन्होंने कहा कि परिणाम के बारे में सोचे बिना प्रयास करें. परीक्षा में असफल होने पर भी उन्होंने टीम में बनाये रखने का आश्वासन दिया। कोच के पास कप्तान सूर्यकुमार भी हैं. हार्दिक ने शनिवार को मैच के बाद यह बात कही.

भारतीय टीम के हरफनमौला खिलाड़ी ने कहा, ”कोच और कप्तान ने हमें आजादी दी. यह टीम में सभी के लिए बहुत अच्छा है। हर कोई अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है. यही नतीजा है.” हार्दिक ने यह भी कहा, ”यह एक खेल है. हम खेल का आनंद लेना चाहते हैं. मैं अपनी सारी ताकत मैदान में लगाना चाहता हूं.’ अगर ड्रेसिंग रूम का माहौल आनंददायक हो तो एक-दूसरे की सफलता का आनंद भी उठाया जा सकता है। ऐसे माहौल में हर कोई ज्यादा देने की कोशिश करता है. यह महत्वपूर्ण हो जाता है.”

हार्दिक ने यह भी कहा कि शारीरिक और मानसिक रूप से तरोताजा रहना सफलता का एक कारण है। उन्होंने कहा, ”मेरा शरीर इस समय बहुत अच्छी स्थिति में है। मैंने कुछ भी नहीं बदला. उसी प्रक्रिया को अपनाते हुए. आप कह सकते हैं, मुझे भगवान का आशीर्वाद मिल रहा है. मैं मानसिक रूप से सही जगह पर हूं।’ कुल मिलाकर, मैं इसका आनंद ले रहा हूं।

पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच भारत को अर्थव्यवस्था की चिंता सता रही है

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दिल्ली इस्राइल-निंदा पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करती
इजराइल पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इजराइल ने आरोप लगाया कि गुटेरेस ने ईरान के मिसाइल हमले की निंदा नहीं की. इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। यूरोप और अफ्रीका सहित दुनिया भर के 104 देशों ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के समर्थन में एक पत्र प्रकाशित किया है, लेकिन भारत ने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। आज कांग्रेस नेतृत्व ने मोदी सरकार के इस रुख पर सवाल उठाया है. हालाँकि, भारत ने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन वह लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना पर हमले की निंदा करने वाले बयान में शामिल हो गया।

इजराइल पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इजराइल ने आरोप लगाया कि गुटेरेस ने ईरान के मिसाइल हमले की निंदा नहीं की. संयुक्त राष्ट्र और अफ़्रीकी संघ के 104 देशों ने पत्र प्रकाशित कर इसराइल के इस क़दम की निंदा की. यूरोप, अफ़्रीका, दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों के साथ-साथ अधिकांश विकासशील देशों ने इस पर हस्ताक्षर किये। इस पत्र पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 10 सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किये हैं, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश की टिप्पणी मोदी सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहती है, “स्वयंभू प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्रालय को यह रुख अपनाने का निर्देश क्यों दिया, क्या इसके पीछे कोई रहस्य है?” शर्मनाक।” कांग्रेस नेता पी. चिदम्बरम ने टिप्पणी की, ”इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि भारत ने इस पत्र पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किये. इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की पहुंच पर रोक लगाकर गंभीर गलती की। भारत को पहले हस्ताक्षर करना चाहिए था।”

हालाँकि, पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं होने के बावजूद, भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना पर हमले की निंदा करने वाले इज़राइल के बयान का समर्थन किया है। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली ऑपरेशन में पांच शांति सैनिकों के घायल होने के बाद, शांति सेना में सेना भेजने वाले देशों ने बयान जारी कर इसकी निंदा की है। भारत ने इसका समर्थन किया. बयान में कहा गया है, ”संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की भूमिका इस समय बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए हम शांति सेना पर हमले की निंदा करते हैं। इजरायल पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद मोदी सरकार को डर है कि अगर पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति पैदा हुई तो इसका अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। भारत ने आज सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया। हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहूदी नववर्ष के मौके पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जो शुभकामना संदेश दिया है, उसमें शांति के शब्द भी शामिल हैं.

अमेरिका ने ईरान को इजरायल से जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं. केंद्र सरकार काफी समय से कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा उठाकर देश के बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने का रास्ता तलाश रही थी. यमन के हौथी उग्रवादियों के ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। हौथिस ने लाल सागर में मालवाहक जहाजों पर हमला किया। भारत स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ व्यापार करता है। भारत के निर्यातक लंबे समय से चिंतित हैं कि अगर इजरायल-ईरान संघर्ष बढ़ा तो इस रास्ते पर जाने में दिक्कतें होंगी। अब मालवाहक जहाज को दूसरे रूट पर चलाना पड़ा तो लागत बढ़ जाएगी. सामान की कीमत भी बढ़ेगी.

आज विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इजरायल को पिछले अक्टूबर में हमास के आतंकी हमले का जवाब देने की जरूरत है. लेकिन मानवाधिकार कानूनों के बारे में जागरूक होना भी जरूरी है। जयशंकर ने कहा, ”हम संघर्ष बढ़ने को लेकर चिंतित हैं. यह सिर्फ लेबनान का मामला नहीं है – हौथिस, लाल सागर की घटना, ईरान और इज़राइल के बीच कुछ भी जो चिंतित है।” ईरान के मिसाइल हमले के बाद भारतीयों को ईरान की यात्रा करने से बचने के लिए कहा गया है।

अवैध धार्मिक निर्माण के लिए क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध धार्मिक निर्माण के लिए एक बयान दे दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सबसे जरूरी है। अगर कोई भी धार्मिक ढांचा, चाहे वो मंदिर हो, दरगाह हो या गुरुद्वारा, अगर सड़क, पानी या रेलवे लाइन पर कब्जा करता है तो उसे हटाया जाना चाहिए। सर्वोच्च कोर्ट ने जोर देकर कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। बुलडोजर एक्शन और अतिक्रमण विरोधी अभियान सभी नागरिकों पर लागू होंगे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें क्राइम केस में आरोपी लोगों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। इस कार्रवाई को ‘बुलडोजर जस्टिस’ नाम दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह संपत्तियों को ध्वस्त किए जाने के मुद्दे पर सभी नागरिकों के लिए दिशा निर्देश जारी करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिनमें आरोप लगाया गया है कि कई राज्यों में आरोपियों की संपत्ति ध्वस्त की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि उसके दिशा निर्देश पूरे भारत में लागू होंगे। यह स्पष्ट कर रहा है कि किसी व्यक्ति का महज आरोपी या दोषी होना संपत्ति के ध्वस्तीकरण का आधार नहीं हो सकता।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि हम जो कुछ भी तय कर रहे हैं। सभी नागरिकों, सभी संस्थानों के लिए इसे जारी कर रहे हैं न कि किसी खास समुदाय के लिए। किसी खास धर्म के लिए अलग कानून नहीं हो सकता है। वह सार्वजनिक सड़कों, सरकारी जमीनों या जंगलों में किसी भी अनधिकृत निर्माण को संरक्षण नहीं देगा। कोर्ट ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि हमारे आदेश से किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने वालों को मदद न मिले।

पीठ ने मामले पर सुनवाई के बाद कहा कि आदेश सुरक्षित रखा जाता है। कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले में फाइनल डिसीजन लेने तक बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगा। इससे पहले, कोर्ट ने कहा था कि अगर अवैध रूप से ध्वस्तीकरण का एक भी मामला है तो यह हमारे संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है। अदालत ने कहा कि वह यह स्पष्ट करेगी कि किसी अपराध में आरोपी होना संपत्ति को ध्वस्त करने का आधार नहीं हो सकता।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह केवल नागरिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में ही किया जा सकता है। अदालत ने बिना अनुमति के किए गए विध्वंस पर अंतरिम रोक बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‘बुलडोजर न्याय’ पर अपनी स्थिति दोहराई और कहा कि केवल आरोप या जघन्य अपराध के लिए दोषी ठहराया जाना संपत्ति को ध्वस्त करने का आधार नहीं हो सकता है। बता दें कि बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन नहीं रुकेगा। सड़क के बीच धार्मिक निर्माण गलत है। अवैध मंदिर, दरगाह को हटाना होगा। लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी शख्स आरोपी या दोषी है यह डेमोलेशन का आधार नहीं हो सकता है। देश भर के लिए इस मामले में गाइडलाइंस जारी होगा। कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुरक्षित रखा। फैसला सुनाए जाने तक बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी।

डेमोलेशन मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सर्वोच्च कोर्ट ने इस दौरान कहा कि वह इस केस में दिशा-निर्देश जारी करेंगे। कोई भी शख्स आरोपी या दोषी है यह डेमोलेशन का आधार नहीं हो सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अवैध निर्माण हटाने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन वह इसके लिए गाइडलाइंस जारी करेंगे। हमारा देश धर्म निरपेक्ष है और सभी नागरिकों की रक्षा के लिए निर्देश जारी होगा।

देश के कई राज्यों में चल रहे बुलडोजर एक्शन पर जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सभी नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे। अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है। हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों। सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी।

जस्टिस गवई ने कहा कि अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक स्ट्रक्चर है चाहे मंदिर हो या दरगाह या फिर गुरुद्वारा, यह सभी के लिए बाधा नहीं बन सकी। सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है। अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, तो बुलडोजर एक्शन हो सकता है। हालांकि, तोड़-फोड़ के लिए समय देना होगा। यही नहीं कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। 17 सितंबर का अंतरिम आदेश जारी रहेगा।