Friday, March 13, 2026
Home Blog Page 618

क्या देश में बढ़ते जा रहे हैं हीट स्ट्रोक के मामले?

वर्तमान में देश में हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ते ही जा रहे है! केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों के साथ भीषण गर्मी की स्थिति से जुड़ी तैयारियों को लेकर वर्चुअल समीक्षा बैठक की। देश भर के अस्पतालों में अपनाए गए आग और विद्युत सुरक्षा उपायों का आकलन भी इस बैठक में किया गया। पिछले महीने 27 मई मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जून में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश क्षेत्रों और मध्य भारत के आसपास के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। मंत्रालय ने राज्यों को हीट स्ट्रोक रूम, ओआरएस कॉर्नर बनाने के साथ- साथ सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। देश में हीट स्ट्रोक से लोगों की मौत भी हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी से संबंधित बीमारियों (एचआरआई) के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों की तैयारी को मजबूत करने पर दिशा-निर्देश दिए हैं। कुछ दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने भी सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा था कि बढ़ते तापमान के साथ अस्पतालों में आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है और आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए तुरंत प्रभाव से सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।

मंत्रालय ने गर्मी से जुड़ी बीमारियों को लेकर इमरजेंसी कूलिंग के लिए भी गाइडलाइंस जारी की है। मरीजों को अस्पतालों में कोई परेशानी न हो और उनको बेड मिलने में कोई दिक्कत नहीं हो, यह निर्देश भी जारी किया गया है। देश भर के सभी एम्स और मेडिकल कॉलेजों में गर्मी से हुई मौतों में शव परीक्षण निष्कर्षों पर भी गाइडलाइंस दी गई है। राज्यों में एंबुलेंस की कमी नहीं हो। हीट हेल्थ एक्शन प्लान के मुताबिक राज्यों को काम करना होगा ताकि लू लगने से बीमार व्यक्ति का प्राथमिकता के आधार पर इलाज हो और हर अस्पताल में इसके लिए पर्याप्त तैयारी हो। हर मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में हीट स्ट्रोक रूम होना चाहिए।

समीक्षा बैठक में राज्यों की ओर से बताया गया है कि उच्च अधिकारी स्थिति की कड़ी निगरानी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में आग से बचाव को लेकर मॉक- ड्रिल की है। ओडिशा में पूरे राज्य में हीट वेव कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए दस्तक घर-घर जाकर अभियान चलाया जा रहा है। हरियाणा ने सभी स्वास्थ्य देखभाल सुविधा केन्द्रों में आवश्यक दवाओं और लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय आवंटन किया है। राजस्थान में 104 और 108 से जुड़ी एंबुलेंस सेवाओं में कूलिंग उपकरण लगाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में अग्निशमन विभाग से अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र सुनिश्चित किए जा रहे हैं और मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है।

बता दे कि राष्ट्रीय राजधानी में इस बार भीषण गर्मी पड़ रही है। पारा लगातार 50 डिग्री के करीब पहुंचता दिख रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार अधिकतम तापमान ने पिछले 80 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। तपती गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक का कहर भी दिखने लगा है। दिल्ली में लू लगने से एक फैक्ट्री वर्कर की मौत हो गई। 40 वर्षीय ये शख्स बिहार के दरभंगा का रहने वाला था। सोमवार रात उसे तबीयत बिगड़ने पर राम मनोहर लोहिया आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक शख्स पाइपलाइन फिटिंग की एक फैक्ट्री में काम करता था।

डॉक्टरों ने बताया कि 40 वर्षीय फैक्ट्री वर्कर को उसके साथी और फैक्ट्री के दूसरे कर्मचारी सोमवार आधी रात को अस्पताल लेकर आए थे। उनका इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने बताया कि मृतक शख्स बिना कूलर या पंखे वाले एक कमरे में अपने साथियों के साथ रहता था। उसे जब अस्पताल लाया गया तो बहुत तेज बुखार था। उसके शरीर का तापमान 107 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर चला गया। 40 वर्षीय यह शख्स पिछले पांच सालों से दिल्ली में काम कर रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उसे तुरंत हीट स्ट्रोक यूनिट में भर्ती कराया गया। यह एक विशेष यूनिट है जिसे 8 मई को दिल्ली में बढ़ते तापमान के मद्देनजर पहली बार स्थापित किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि दरभंगा के इस मरीज को मंगलवार शाम तक यूनिट में रखा गया। बुधवार सुबह उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसी दौरान उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। दोपहर करीब 3 बजे उसकी मौत हो गई।

पिछले हफ्ते हीट स्ट्रोक यूनिट में 6-7 मरीज भर्ती हुए थे। डॉक्टर अजय चौहान इस यूनिट के प्रमुख भी हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज अस्पताल में आए थे उनमें दो मरीज अभी भी अस्पताल में ही हैं। उनमें से एक हीट एग्जॉशन का मामला है। डॉक्टर चौहान ने बताया कि ये मरीज मुख्य रूप से निम्न आय वर्ग से आते हैं। उनमें से एक प्लास्टिक पेलेट बनाने वाली कंपनी में काम करता है, और दूसरा बिना एसी या कूलर वाले घर की सबसे ऊपरी मंजिल पर रहता है। उन्होंने बताया कि दूसरे मरीज को तेज बुखार था, उसका शरीर बहुत तप रहा था। जब वह अस्पताल पहुंचा, तो उसकी हालत बिगड़ चुकी थी।

आखिर क्या कहता है चुनाव का मुस्लिम फैक्टर?

आज हम आपको बताएंगे कि चुनाव का मुस्लिम फैक्टर आखिर क्या कहता है! इस बार के चुनाव में महिला वोटरों का इजाफा देखने को मिला, लेकिन संसद में महिलाओं की संख्या कम ही हुई है। मंगलवार को आए 18वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि इस बार पिछली लोकसभा के मुकाबले कम महिला सांसद बैठेंगी। पिछली बार 78 फीसदी महिलाएं लोकसभा के लिए चुनी गई थी, जबकि इस बार महज 74 महिलाओं को लोकसभा में चुनकर भेजा गया है। यहां ममता बनर्जी का जिक्र करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि उसके 29 सांसदों में 11 महिला सांसद जीत कर आई हैं। यूं तो टीएमसी उन पार्टियों में से हैं, जिसकी पार्टी महिला सांसदों के प्रतिनिधित्व की लिस्ट में पहले भी अव्वल रही हैं।

साल 2019 में भी जिन दलों में 10 फीसदी से ज्यादा लोकसभा सांसद थे, उनमें बीजेडी की 42%, टीएमसी की 39% सांसद महिलाएं शामिल थी। टीएमसी ने टिकट बंटवारे में विवादों में रही सांसद महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर से लेकर जादवपुर से एक्ट्रेस और चुनावी राजनीति में पहली बार एंट्री कर रही सयानी घोष और मेदिनीपुर से जून मालिया को टिकट दिया था।देखें तो सबसे ज्यादा 35 उम्मीदवार बीएसपी ने खड़े किए हैं। इसके बाद 19 उम्मीदवारों के साथ कांग्रेस 19 उम्मीदवार वाली टीएमसी तीसरे नंबर पर आती है। यूपी की ही बात है, तो इस बार समाजवादी पार्टी की ओर से खड़े किए सभी 4 उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई, जबकि बीएसपी की ओर खड़े किए गए 20 उम्मीदवारों में से कोई जीत नहीं पाया।हालांकि नतीजे आने के बाद अपनी इस रणनीति पर बैकफुट लेते हुए कहा था कि मुस्लिम समुदाय सही तादाद में टिकट दिए जाने के बाद भी बीएसपी को समझ नहीं पाया, इसलिए आगे से पार्टी सोच समझकर टिकट देगी। इसके अलावा राजनीति में अनुभवी माला रॉय पर भी भरोसा जताया गया, जो कि सही साबित हुआ। हालांकि पिछली बार 11 महिला सांसद चुनकर भेजने वाले यूपी से इस बार आठ महिलाएं ही निचले सदन पहुंच पाई हैं, जिनमें से 5 समाजवादी पार्टी से हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार बीजेपी की 30 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। टीएमसी की 11 तो कांग्रेस की 14, वहीं समाजवादी पार्टी की पांच तो डीएमके की तीन महिला सांसद पार्लियामेंट पहुंची हैं।

चुनावी रिजल्ट बताते हैं कि इस बार 24 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है, हालांकि ये पिछली बार के 26 के आंकड़े से थोड़ा कम है। वहीं साल 2014 में ये आंकड़ा 24 था। चुनाव में इस बार कुल 78 मुस्लिम उम्मीदवार ही मैदान में थे, जबकि पिछली बार 115 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावों में टिकट मिला था। इस बार टिकट बांटे जाने को लेकर देखें तो सबसे ज्यादा 35 उम्मीदवार बीएसपी ने खड़े किए हैं। इसके बाद 19 उम्मीदवारों के साथ कांग्रेस 19 उम्मीदवार वाली टीएमसी तीसरे नंबर पर आती है। हालांकि नतीजे आने के बाद अपनी इस रणनीति पर बैकफुट लेते हुए कहा था कि मुस्लिम समुदाय सही तादाद में टिकट दिए जाने के बाद भी बीएसपी को समझ नहीं पाया, इसलिए आगे से पार्टी सोच समझकर टिकट देगी।

जहां तक यूपी की ही बात है, तो इस बार समाजवादी पार्टी की ओर से खड़े किए सभी 4 उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई, जबकि बीएसपी की ओर खड़े किए गए 20 उम्मीदवारों में से कोई जीत नहीं पाया। एक विश्लेषण के मुताबिक 2014 के बाद हिंदुत्वादी नीतियों की वजह से हिंदू वोटर कंसोलिडेट हुआ है और यही पैटर्न आगे बढ़ा। बता दें कि ममता बनर्जी का जिक्र करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि उसके 29 सांसदों में 11 महिला सांसद जीत कर आई हैं। यूं तो टीएमसी उन पार्टियों में से हैं, जिसकी पार्टी महिला सांसदों के प्रतिनिधित्व की लिस्ट में पहले भी अव्वल रही हैं।

साल 2019 में भी जिन दलों में 10 फीसदी से ज्यादा लोकसभा सांसद थे, उनमें बीजेडी की 42%, टीएमसी की 39% सांसद महिलाएं शामिल थी।टीएमसी ने टिकट बंटवारे में विवादों में रही सांसद महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर से लेकर जादवपुर से एक्ट्रेस और चुनावी राजनीति में पहली बार एंट्री कर रही सयानी घोष और मेदिनीपुर से जून मालिया को टिकट दिया था।देखें तो सबसे ज्यादा 35 उम्मीदवार बीएसपी ने खड़े किए हैं। इसके बाद 19 उम्मीदवारों के साथ कांग्रेस 19 उम्मीदवार वाली टीएमसी तीसरे नंबर पर आती है। 2019 में 40 फीसदी से ज्यादा हिंदू वोटर्स ने बीजेपी को वोट किया था, वहीं मुस्लिम वोटर का सेक्युलर वोट कई जगह बंट गया था। हालांकि इस बार ये पैटर्न बदल गया और नतीजों से लगता है कि इस बार समुदाय के वोटों में विभाजन नहीं हुआ।

क्या जंगलों की आग से नहीं निपट पाई है सरकार?

वर्तमान में सरकार जंगलों की आग से अब तक नहीं निपट पाई है! कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक हुई, जिसमें भीषण गर्मी और जंगल की आग से निपटने के लिए राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय ने देश भर में भीषण गर्मी और जंगल की आग की वर्तमान स्थिति पर विस्तार में रिपोर्ट पेश की और इनसे निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई। कैबिनेट सचिव ने मुख्य सचिवों से कहा कि वे लू से निपटने की तैयारियां बढ़ाने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों की नियमित समीक्षा और निगरानी करें। उन्होंने जोर दिया कि जलापूर्ति के स्रोत बनाए रखने और बढ़ाने के प्रयासों में तेजी लाई जानी चाहिए और सभी संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाना जरूरी है। कैबिनेट सचिव ने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लू चलने और जंगल की आग से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहने की जरूरत है ताकि जानमाल की हानि न हो और इनसे होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके। कैबिनेट सचिव ने राज्यों को आश्वासन दिया कि केंद्रीय मंत्रालय व विभाग उनकी सभी जरूरी मदद करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि अप्रैल से जून 2024 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी वाले 10-22 दिन देखे गए। जून महीने के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश क्षेत्रों और उत्तर मध्य भारत के आस-पास के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान वाले दिन रहने की संभावना है। इस वर्ष देश के अधिकांश भागों में मानसून सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। आईएमडी द्वारा भीषण गर्मी के बारे में नियमित रूप से राज्यों को अलर्ट भेजे जा रहे हैं।

बैठक के दौरान NDMA ने बताया कि राज्यों के साथ गर्मी और लू के हालात को लेकर लगातार बातचीत की जा रही है। राज्यों को नियंत्रण कक्ष को सक्रिय करने, भीषण गर्मी के लिए एसओपी लागू करने, पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी और बिना किसी रूकावट के बिजली आपूर्ति करने की सलाह दी गई है। इसके साथ-साथ आवश्यक दवाओं और ओआरएस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी एडवाइजरी दी गई है। राज्यों को स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों की नियमित रूप से फायर सेफ्टी ऑडिट करने तथा आग की घटनाओं को लेकर जवाबी कार्रवाई के समय में कमी लाने की भी सलाह दी गई है। राज्य सरकारों ने बताया कि संबंधित विभागों और जिला कलेक्टरों के साथ स्थिति की बारीकी से समीक्षा और निगरानी की जा रही है।

पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि जंगल की आग के बारे में मोबाइल एसएमएस और ईमेल के जरिए नियमित सतर्कता बरतने की चेतावनी दी जा रही है। जंगल की आग के खतरे में बारे में राज्‍यों और अन्‍य एजेंसियों की सहायता के लिए वन अग्नि नाम से चेतावनी देने वाली पोर्टल प्रणाली भी भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) द्वारा विकसित की गई है, जो आग लगने से पहले और जंगल की आग के लगभग वास्तविक समय की चेतावनी देती है।इस वर्ष देश के अधिकांश भागों में मानसून सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। आईएमडी द्वारा भीषण गर्मी के बारे में नियमित रूप से राज्यों को अलर्ट भेजे जा रहे हैं। कैबिनेट सचिव ने दोहराया कि 2 जून, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया था कि जंगल की आग के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। वनों की आग से निपटने के लिए तैयारी उपायों और वार्षिक अभ्यासों की एक नियमित व्‍यवस्‍था लागू की जानी चाहिए, जैसा कि बाढ़ के मामले में किया जाता है।

समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, एनडीएमए के सदस्य और विभागाध्यक्ष, सीआईएससी मुख्यालय (आईडीएस), बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्य सचिव तथा आंध्र प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

आखिर कैसा था पीएम मोदी का चुनावी अभियान?

आज हम आपको पीएम मोदी का चुनावी अभियान के बारे में बताने जा रहे हैं! इस बार का लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न हो रहा है और चुनाव का नतीजा 4 जून को घोषित होगा। 16 मार्च को चुनाव आयोग की तरफ से लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले से ही देश भर के लगभग सभी राज्यों का मैराथन दौरा कर रहे थे।चुनावी कार्यक्रम के साथ पश्चिम बंगाल में 20 रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही पीएम ने ओडिशा और मध्य प्रदेश में 10 चुनावी कार्यक्रम किए। वहीं, पीएम का फोकस झारखंड पर भी रहा, जहां उन्होंने 7 कार्यक्रम किए। पीएम मोदी के 2019 के चुनावी रैलियों की संख्या देखें तो आपको पता चलेगा कि उन्होंने उस चुनाव में 142 जनसभाएं की थी। लेकिन, चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ देश के दक्षिण छोर से शुरू हुआ उनका प्रचार अभियान उत्तर में स्थित पंजाब के होशियारपुर में आकर समाप्त हुआ। जहां पीएम मोदी ने गुरुवार को एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस चुनाव में पार्टी के पक्ष में पीएम मोदी की मेहनत साफ नजर आई। विपक्ष के फायर ब्रांड नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल जैसे नेता एक तरफ और पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी एक तरफ सबको अपनी ऊर्जा से टक्कर देते नजर आए। लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी 30 मई से 1 जून तक तमिलनाडु के कन्याकुमारी का दौरा करेंगे, जहां वे प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल का दौरा करेंगे।आंध्र प्रदेश के पालनाडु से चुनाव प्रचार की शुरुआत कर पीएम मोदी ने इस अभियान का समापन 30 मई को पंजाब के होशियारपुर में किया। यानी 75 दिन की इस अवधि में पीएम मोदी ने 180 रैलियां और रोड शो किए हैं।

पीएम मोदी की रैलियों के साथ उनके रोड शो और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने का आंकड़ा देखें तो यह संख्या 206 है। इसके साथ ही उन्होंने इस दौरान 80 से ज्यादा मीडिया चैनलों, अखबारों, यूट्यूबरों, ऑनलाइन मीडिया माध्यमों को अपना साक्षात्कार दिया। मतलब औसतन हर दिन पीएम मोदी ने दो से ज्यादा रैलियां और रोड शो के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं, पीएम मोदी मार्च में चुनाव की घोषणा से पहले फरवरी और मार्च की 15 तारीख तक 15 रैलियां कर चुके थे।

पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा 22 जनसभाएं और कुल 31 चुनावी कार्यक्रम यूपी में किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक में 11, तेलंगाना में 11, तमिलनाडु में 7, आंध्र प्रदेश में 5 और केरल में 3 रैलियां की हैं। पीएम मोदी ने बिहार में 20 चुनावी कार्यक्रम और महाराष्ट्र में 19 चुनावी कार्यक्रम के साथ पश्चिम बंगाल में 20 रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही पीएम ने ओडिशा और मध्य प्रदेश में 10 चुनावी कार्यक्रम किए। वहीं, पीएम का फोकस झारखंड पर भी रहा, जहां उन्होंने 7 कार्यक्रम किए। पीएम मोदी के 2019 के चुनावी रैलियों की संख्या देखें तो आपको पता चलेगा कि उन्होंने उस चुनाव में 142 जनसभाएं की थी।

लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी 30 मई से 1 जून तक तमिलनाडु के कन्याकुमारी का दौरा करेंगे, जहां वे प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री ने 30 मई की शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान मंडपम में ध्यान लगाने की योजना बनाई है; यह वही स्थान है जहां स्वामी विवेकानंद ने कभी ध्यान किया था। यह भारत का सबसे दक्षिणी छोर है। इसके अलावा, यह वह स्थान है जहां भारत की पूर्वी और पश्चिमी तट रेखाएं मिलती हैं। यह हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मिलन बिंदु भी है। कन्याकुमारी जाकर पीएम मोदी राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं। प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के अंत में आध्यात्मिक यात्रा करने के लिए जाने जाते हैं। इसी क्रम में वे 30 मई को कन्याकुमारी पहुंचेंगे और 1 जून तक वहीं रहेंगे।चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ देश के दक्षिण छोर से शुरू हुआ उनका प्रचार अभियान उत्तर में स्थित पंजाब के होशियारपुर में आकर समाप्त हुआ। जहां पीएम मोदी ने गुरुवार को एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस चुनाव में पार्टी के पक्ष में पीएम मोदी की मेहनत साफ नजर आई। 2019 में उन्होंने केदारनाथ और 2014 में शिवाजी के प्रतापगढ़ का दौरा किया था। प्रधानमंत्री ने इस साल 16 मार्च को कन्याकुमारी में चल रहे लोकसभा चुनाव के लिए अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी।

पीएम मोदी के चुनाव प्रचार में कौन-कौन से नाम उछले?

आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी के चुनाव प्रचार में कौन-कौन से नाम उछले हैं! लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए चुनाव प्रचार आज थम चुका है। एक मई को सातवें चरण के लिए वोटिंग होगी और 4 मई को चुनाव के नतीजे जारी होंगे। इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश की जनता चार जून को वैकल्पिक सरकार का जनादेश देगी और I.N.D.I.A गठबंधन पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए देश को एक समावेशी और राष्ट्रवादी सरकार देगा। खरगे ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, प्रधानमंत्री ने पिछले 15 दिनों में अपनी जनसभाओं में 232 बार कांग्रेस का नाम लिया, 758 बार अपना नाम लिया, 573 बार I.N.D.I.A गठबंधन और विपक्ष का नाम लिया, लेकिन बेरोजगारी के बारे में एक बार भी बात नहीं की। कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सभाओं में एक बार भी बेरोजगारी की बात नहीं की। उन्होंने पिछले 15 दिनों में 232 बार कांग्रेस का, 758 बार अपना, 573 बार I.N.D.I.A गठबंधन और विपक्ष का नाम लिया। खरगे ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान 421 बार मंदिर-मस्जिद और समाज को बांटने की बात की।खरगे ने कहा कि जनता ने विपक्ष एवं कांग्रेस की इस बात पर मुहर लगा दी है कि अगर मोदी सरकार फिर से आई, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में भाजपा ने बांटने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने असली मुद्दों को चुना। उन्होंने 224 बार मुस्लिम, अल्पसंख्यक जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया। लेकिन चुनाव आयोग ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की।

खरगे ने कहा, ‘कांग्रेस हमेशा जनता की समस्याओं को ध्यान में रखकर काम करती है। जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी यूपीए की प्रमुख थीं, तब हम गरीबों के लिए ऐसी योजनाएं लेकर आए, जिनसे गरीबों का फायदा हुआ। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता, संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग जैसे मुद्दों को बढ़ावा दिया।’ उन्होंने कहा, ‘हमने इन्हीं मुद्दों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसमें जनता का पूरा समर्थन मिला। इसलिए मैं अपने सभी साथियों को बधाई देता हूं, जो निडर होकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं।’

खरगे ने आरोप लगाया, ‘संसद में विपक्ष को नहीं बोलने देना, विपक्षी सांसदों को निलंबित करना, बिना चर्चा के विधेयक पारित करना, ये सब पिछली सरकार के लिए काले अक्षरों में लिखा जाएगा।’ उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री खुद को भगवान का अवतार मानते हैं। भाजपा के नेता भी उन्हें भगवान का स्वरूप बता रहे हैं।’ खरगे ने गुरुवार को कहा कि देश की जनता 4 जून को I.N.D.I.A गठबंधन की सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने कहा, I.N.D.I.A गठबंधन की जीत के बाद घटक दलों से बातचीत के आधार पर प्रधानमंत्री का फैसला होगा। खरगे ने कहा कि जनता ने विपक्ष एवं कांग्रेस की इस बात पर मुहर लगा दी है कि अगर मोदी सरकार फिर से आई, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में भाजपा ने बांटने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने असली मुद्दों को चुना।

खरगे ने ‘दलित प्रधानमंत्री’ से जुड़े सवाल पर कहा, ‘मैंने कभी भी यह नहीं कहा कि मैं दलित हूं, इसलिए दो। सबकुछ पार्टी ने दिया है। सोनिया गांधी की देन है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बनाया और एआईसीसी (अध्यक्ष) भी बनाया। हमारी पार्टी में जो भी निर्णय लिया जाता है, उसी के हिसाब से काम करेंगे। ऐसा नहीं है कि सिर्फ दलित हूं, इसलिए मांगने वाला हूं। अब तक भी नहीं मांगा।’

खरगे ने महात्मा गांधी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि या तो प्रधानमंत्री अनजान हैं या फिर उन्होंने पढ़ा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘सारी दुनिया महात्मा गांधी को जानती है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने उनकी प्रतिमा लगी है। दुनिया के बहुत सारे देशों में महात्मा गांधी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। उन्होंने पिछले 15 दिनों में 232 बार कांग्रेस का, 758 बार अपना, 573 बार I.N.D.I.A गठबंधन और विपक्ष का नाम लिया। खरगे ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान 421 बार मंदिर-मस्जिद और समाज को बांटने की बात की। उन्होंने 224 बार मुस्लिम, अल्पसंख्यक जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया। लेकिन चुनाव आयोग ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की।’उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, उनके काम के बारे में पता नहीं है, तो शायद संविधान के बारे में भी पता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चार जून के बाद खाली समय में प्रधानमंत्री को महात्मा गांधी की जीवनी ‘माई एक्सपेरीमेंट्स विथ ट्रूथ’ पढ़नी चाहिए।

आखिर संसद से क्यों हटाई गई गांधी और अंबेडकर की प्रतिमा?

हाल ही में संसद से गांधी और अंबेडकर की प्रतिमा को हटा दिया गया है! संसद भवन परिसर में महापुरुषों की मूर्तियां हटाए जाने को लेकर जो विवाद उठा, उस पर लोकसभा सचिवालय की सफाई आई है। सचिवालय की ओर से कहा गया कि सेंट्रल विस्टा के तहत सौंदर्यीकरण के चलते यह मूर्तियां हटाई गई हैं। काम खत्म होने के बाद उन्हें उचित तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। कहा गया कि संसद भवन परिसर से किसी भी महापुरुष की प्रतिमा को हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्‍हें संसद भवन परिसर के अंदर ही व्‍यवस्थित और सम्मानजनक रूप से स्थापित किया जा रहा है। बता दें कि इस प्रेरणा स्थल’ को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि संसद परिसर में भ्रमण के लिए आने वाले आगंतुक इन महापुरूषों की प्रतिमाओं का सुगमता से दर्शन कर सकें और उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सकें। इस ‘प्रेरणा स्थल’ में हमारे महापुरुषों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन व उनके योगदान के बारे में आगंतुकों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है। यही नहीं इन महापुरुषों और स्वतंत्रतता सेनानी महानायकों ने अपने जीवन दर्शन और अपने कृतित्व से देश के जनजातीय गौरव को स्थापित किया, शोषित-वंचित समाज के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। वे हमारे राष्ट्र की वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए शाश्वत प्रेरणा के स्रोत हैं। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत चल रहे काम के चलते संसद परिसर में लगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर और छत्रपति शिवाजी की प्रतिमाओं को उनकी जगह से हटाया गया है। जिसे लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को सवाल भी उठाया। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए निशाना साधा कि संसद भवन के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गांधी और बाबासाहेब अंबेडकर की मूर्तियों को उनके विशिष्ट स्थानों से हटा दिया गया है। यह बेहद अपमानजनक हरकत है।

इसके बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि संसद के नए भवन के निर्माण के पश्चात संसद परिसर में लैंडस्केपिंग और सौंदर्यीकरण की कार्य योजना बनायी गई है, ताकि इस परिसर को संसद की उच्च गरिमा और मर्यादा के अनुरूप भव्य और आकर्षक बनाया जा सके। संसद परिसर में देश के महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं कैंपस के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर स्थापित की गई थीं। इन महापुरुषों और स्वतंत्रतता सेनानी महानायकों ने अपने जीवन दर्शन और अपने कृतित्व से देश के जनजातीय गौरव को स्थापित किया, शोषित-वंचित समाज के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। वे हमारे राष्ट्र की वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए शाश्वत प्रेरणा के स्रोत हैं।

संसद परिसर में अलग अलग स्थानों पर स्थित होने की वजह आगंतुक इन प्रतिमाओं को सुविधाजनक रूप से नहीं देख पाते थे। इसलिए इन सभी प्रतिमाओं को संसद भवन परिसर में ही सम्मानजनक रूप से एक भव्य ‘प्रेरणा स्थल’ में स्थापित किया जा रहा है। इस प्रेरणा स्थल’ को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि संसद परिसर में भ्रमण के लिए आने वाले आगंतुक इन महापुरूषों की प्रतिमाओं का सुगमता से दर्शन कर सकें और उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सकें। इस ‘प्रेरणा स्थल’ में हमारे महापुरुषों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन व उनके योगदान के बारे में आगंतुकों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है।

जिसे लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को सवाल भी उठाया। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए निशाना साधा कि संसद भवन के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज, इसके बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि संसद के नए भवन के निर्माण के पश्चात संसद परिसर में लैंडस्केपिंग और सौंदर्यीकरण की कार्य योजना बनायी गई है,काम खत्म होने के बाद उन्हें उचित तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। कहा गया कि संसद भवन परिसर से किसी भी महापुरुष की प्रतिमा को हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्‍हें संसद भवन परिसर के अंदर ही व्‍यवस्थित और सम्मानजनक रूप से स्थापित किया जा रहा है। ताकि इस परिसर को संसद की उच्च गरिमा और मर्यादा के अनुरूप भव्य और आकर्षक बनाया जा सके। संसद परिसर में देश के महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं कैंपस के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर स्थापित की गई थीं।महात्मा गांधी और बाबासाहेब अंबेडकर की मूर्तियों को उनके विशिष्ट स्थानों से हटा दिया गया है। यह बेहद अपमानजनक हरकत है। जिससे विज़िटर्स उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा ले सकें।

अग्निवीर और जाति जनगणना के ऊपर क्या बोले नीतीश कुमार?

हाल ही में नीतीश कुमार ने अग्निवीर और जाति जनगणना के ऊपर एक बयान दिया है! बीजेपी की की मुख्य सहयोगी पार्टी, जेडीयू ने रक्षा बलों में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना की समीक्षा की मांग की है। नीतीश कुमार की पार्टी ने ये मांग ऐसे समय में की है, जब बुधवार को घोषित लोकसभा चुनाव के नतीजों में BJP को बहुमत से 32 सीटें कम मिली हैं, जिससे वह अकेले सरकार नहीं बना सकती। जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि कुछ मतदाता अग्निवीर योजना से नाराज हैं। हमारी पार्टी चाहती है कि जनता द्वारा उठाए गए सवालों पर विस्तार से चर्चा हो और योजना की कमियों को दूर किया जाए। त्यागी ने ये भी कहा कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यूसीसी के बारे में विधि आयोग के प्रमुख को पत्र लिखा था। हम इसके खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सभी संबंधित पक्षों से बात करके समाधान निकाला जाना चाहिए। हालांकि जेडीयू ने जाति आधारित जनगणना के लिए अपना समर्थन दोहराया और बिहार को स्पेशल दर्जा देने की भी मांग की।

त्यागी ने कहा, ‘देश में किसी भी पार्टी ने जाति आधारित जनगणना को ना नहीं कहा है। बिहार ने रास्ता दिखाया है। प्रधानमंत्री ने भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में इसका विरोध नहीं किया। जाति आधारित जनगणना समय की मांग है। हम इसे आगे बढ़ाएंगे।’ सरकार ने लगातार इस योजना का समर्थन किया है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि ‘यह युवाओं के लिए आकर्षक है, क्योंकि यह सशस्त्र बलों में उनकी चार साल की सेवा के बाद पूर्णकालिक नौकरी की गारंटी देता है।’उन्होंने यह भी कहा कि कोई पूर्व शर्त नहीं है। बिना शर्त समर्थन है। लेकिन बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना हमारे दिल में है।’ इंडिया ब्लॉक ने अपने चुनावी वादे में अग्निवीर योजना की निंदा की और चुनाव जीतने पर इसे खत्म करने का वादा किया। इस महीने की शुरुआत में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अग्निपथ योजना में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि मृतक सैनिकों के परिवारों को दिए जाने वाले लाभों में भेदभाव को दूर किया जा सके। विपक्ष ने भी जाति आधारित जनगणना की मांग की है और बिहार में भी इसे कराया गया है, जबकि महागठबंधन सरकार के तहत नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे।

अग्निपथ योजना के तहत साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार वर्ष की अवधि के लिए भर्ती किया जाता है, और 25 प्रतिशत को अतिरिक्त 15 वर्षों के लिए बनाए रखने का विकल्प दिया जाता है। सरकार ने लगातार इस योजना का समर्थन किया है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि ‘यह युवाओं के लिए आकर्षक है, क्योंकि यह सशस्त्र बलों में उनकी चार साल की सेवा के बाद पूर्णकालिक नौकरी की गारंटी देता है।’

बुधवार को नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एनडीए गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक की, जो गठबंधन द्वारा लोकसभा में बहुमत हासिल करने के बाद उनकी पहली बैठक थी। मोदी में अपने विश्वास की पुष्टि करते हुए, एनडीए नेताओं ने उन्हें गठबंधन के नेता के रूप में चुना, जिससे प्रधानमंत्री के रूप में उनके लगातार तीसरे कार्यकाल का मार्ग प्रशस्त हुआ। 12 सांसदों के साथ, जेडीयू तेलुगु देशम पार्टी के 16 सांसदों के बाद भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी है। बुधवार को एनडीए के सहयोगियों ने हिंदी में तीन पैराग्राफ का प्रस्ताव पारित किया बता दे कि जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि कुछ मतदाता अग्निवीर योजना से नाराज हैं। हमारी पार्टी चाहती है कि जनता द्वारा उठाए गए सवालों पर विस्तार से चर्चा हो और योजना की कमियों को दूर किया जाए। त्यागी ने ये भी कहा कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ नहीं है। ,लेकिन सभी संबंधित पक्षों से बात करके समाधान निकाला जाना चाहिए। हालांकि जेडीयू ने जाति आधारित जनगणना के लिए अपना समर्थन दोहराया और बिहार को स्पेशल दर्जा देने की भी मांग की। जिसमें कहा गया कि उन्होंने मोदी को ‘हमारा नेता’ चुना है। एनडीए की बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने मोदी से सरकार गठन पर तेजी से काम करने को कहा। वहीं दूसरी ओर टीडीपी प्रमुख नायडू ने कहा कि लगातार तीन बार चुनाव जीतना कोई साधारण बात नहीं है।

आखिर कैसे बनेगी बीजेपी और गठबंधन सरकारों के बीच बात?

आज हम आपको बताएंगे कि बीजेपी और गठबंधन सरकारों के बीच बात कैसे बनेगी! लोकसभा चुनाव के फाइनल नतीजों में जिस तरह से बीजेपी बहुमत से दूर रह गई, एनडीए में शामिल सहयोगी दलों ने मंत्रालयों को लेकर डिमांड तेज कर दी है। टीडीपी, जेडीयू और एनडीए के अन्य सहयोगी केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पदों पर नजर गड़ाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चर्चा में बीजेपी ने रक्षा मंत्रालय, वित्त विभाग, गृह और विदेश मंत्रालय पर अपनी दावेदारी जताई है। टीडीपी और जेडीयू दोनों ही दलों ने स्पीकर पद मांगा है, लेकिन कथित तौर पर बीजेपी इसके तैयार नजर नहीं आ रही। चुनाव नतीजों में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू एनडीए में प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पदों की डिमांड रख दी है। उधर मोदी के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार अपने सहयोगियों को अहम मंत्रालय आसानी से नहीं देना चाहेगा। टीडीपी और जेडीयू जिनके पास क्रमशः लोकसभा की 16 और 12 सीटें हैं, सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपने पसंदीदा मंत्रालयों की डिमांड बीजेपी आलाकमान के सामने रख दी है। यही नहीं उनकी निगाहें अपने पसंदीदा मंत्रालयों पर बनी हुई है। शुरुआती चर्चा के आधार पर सहयोगी दल हर चार सांसदों पर एक मंत्री की मांग कर रहे हैं।

कथित तौर पर, टीडीपी चार कैबिनेट पदों की मांग कर रही है, जबकि जेडीयू तीन मंत्रियों की मांग कर रही है। इसके अतिरिक्त, 7 सीटों के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और पांच सीटों के साथ चिराग पासवान की एलजेपी को दो-दो मंत्रालय मिलने की उम्मीद है। चंद्रबाबू नायडू भी लोकसभा अध्यक्ष पद पर नजर गड़ाए हुए हैं, लेकिन बीजेपी इस मांग को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रही है। टीडीपी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की भी मांग कर सकती है।

बीजेपी को 240 सीटें मिली हैं, जो बहुमत से 32 सीटें कम हैं, मोदी 3.0 के लिए इन सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पास कुल मिलाकर 40 सांसद हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले दो मंत्रिमंडलों में, जहां बीजेपी ने अकेले ही बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया था, एनडीए के सहयोगी प्रमुख कैबिनेट पदों पर कब्जा नहीं कर सके थे। हालांकि, 2024 के रिजल्ट में बीजेपी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इसी के परिणामस्वरूप मंत्रिपरिषद में बीजेपी कोटे के मंत्रियों की संख्या कम हो सकती है और सहयोगी दलों के मंत्रियों की संख्या बढ़ जाएगी। हालांकि, यह संभावना कम ही है कि बीजेपी मुख्य मंत्रालयों पर समझौता करेगी। रक्षा, वित्त, गृह और विदेश मामलों के अलावा भाजपा बुनियादी ढांचा विकास, कल्याण, युवा मामले और कृषि से संबंधित मंत्रालय भी अपने पास रखना चाहेगी।

इसके अतिरिक्त, बीजेपी का दावा है कि पिछली एनडीए सरकारों के तहत रेलवे और सड़क परिवहन आदि में बड़े सुधार किए गए हैं। पार्टी इन्हें सहयोगियों को देकर सुधारों की गति को धीमा नहीं करना चाहती है। सूत्रों ने बताया कि रेलवे परंपरागत रूप से सहयोगी दलों के पास रहा है और बीजेपी ने काफी प्रयास के बाद इसे वापस अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। बीजेपी पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्रालय जेडीयू को देने पर विचार कर सकती है, जबकि नागरिक उड्डयन और इस्पात जैसे विभाग टीडीपी को दिए जा सकते हैं। भारी उद्योग का प्रभार शिवसेना को दिया जा सकता है।

चर्चा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एनडीए के सहयोगियों को वित्त और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में राज्य मंत्री नियुक्त किया जा सकता है। पर्यटन, एमएसएमई, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सामाजिक न्याय और अधिकारिता जैसे अन्य मंत्रालय भी सहयोगी दलों को सौंपे जाने की संभावना है।उधर मोदी के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार अपने सहयोगियों को अहम मंत्रालय आसानी से नहीं देना चाहेगा। टीडीपी और जेडीयू जिनके पास क्रमशः लोकसभा की 16 और 12 सीटें हैं, सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपने पसंदीदा मंत्रालयों की डिमांड बीजेपी आलाकमान के सामने रख दी है।हालांकि, यह संभावना कम ही है कि बीजेपी मुख्य मंत्रालयों पर समझौता करेगी। रक्षा, वित्त, गृह और विदेश मामलों के अलावा भाजपा बुनियादी ढांचा विकास, कल्याण, युवा मामले और कृषि से संबंधित मंत्रालय भी अपने पास रखना चाहेगी। चंद्रबाबू नायडू लोकसभा अध्यक्ष पद पर जोर देते रहेंगे तो बीजेपी उन्हें उपसभापति पद की पेशकश कर उन्हें मनाने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल आखिरी फैसला जल्द होने के आसार हैं।

सिक्किम में भारी बारिश ने मचाई तबाही! क्या डर है कि तीस्ता फिर पिछले साल जैसी तबाही मचाएगी?

0

उत्तर बंगाल ने कभी भी मानसून की शुरुआत में तीस्ता को इस तरह से बढ़ते हुए नहीं देखा है! रेल सुरंग और अक्टूबर आपदा के पीछे? अगले दो दिनों तक उत्तरी सिक्किम में भारी से भारी बारिश का अनुमान है, ऐसी आशंका है कि तीस्ता फिर से उफान पर होगी और पिछले साल की तरह तबाही लाएगी?
दिन चढ़ने के साथ तीस्ता का जलस्तर थोड़ा कम हुआ है. लेकिन कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि आपदा के बादल छंट गए हैं। अगले दो दिनों तक उत्तरी सिक्किम में भारी से भारी बारिश का अनुमान है, ऐसी आशंका है कि तीस्ता फिर से उफान पर होगी और पिछले साल की तरह तबाही लाएगी? हालाँकि मानसून के दौरान भूस्खलन एक आम घटना है, लेकिन मानसून की शुरुआत में तीस्ता का ऐसा रूप पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ी निवासियों द्वारा अनुभव नहीं किया गया है। संयोग से, कुछ पर्यावरणविदों का मानना ​​है कि इस स्थिति के पीछे पिछले अक्टूबर की आपदा हो सकती है। कई लोग रंगपो रेल सुरंग के निर्माण को दोषी मानते हैं.

उत्तरी सिक्किम में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है. दक्षिण सिक्किम से गंगटोक – कुछ भी नहीं बचा। अगले दो दिनों के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए उत्तरी सिक्किम में रेड अलर्ट जारी किया गया है. अन्यत्र नारंगी चेतावनियाँ लागू हैं। सिक्किम मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार को गंगटोक में 61 मिमी बारिश हुई. गेजिंग में 65 मिमी बारिश हुई. दक्षिण सिक्किम के रावंगला में 119.5 मिमी बारिश हुई. वहीं उत्तरी सिक्किम में केवल मंगन में 220 मिमी बारिश हुई. जिससे तीस्ता का जलस्तर बढ़ गया है. वह पानी तूफान की गति से नदी तल से होते हुए उत्तर बंगाल के मैदानी इलाकों में आ गया है. पहाड़ी इलाके से बहने वाली इस नदी ने न सिर्फ तिस्तापार में तबाही मचाई है. जलपाईगुड़ी के सरस्वतीपुर चाय बागान क्षेत्र से शुरू होकर, गजलडोबा बैराज को पार करते हुए, बोदागंज में मिल्नापल्ली चाड, गौरीकोन, बारोपटिया चाड, रंधामाली चाड और डोमोहनी ब्रिज, विभिन्न क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है।

उत्तर बंगाल में भी मानसून प्रवेश कर चुका है. दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पूरे तराई, डुआर्स में पिछले कुछ दिनों से बारिश हुई है। परिणामस्वरूप तीस्ता सूज गई है। जलपाईगुड़ी से पानी छोड़े जाने के कारण निचले तीस्ता बेसिन में जल स्तर भी बढ़ गया है। इससे तराई, डुआर्सवासियों को स्थिति और खराब होने का डर है. लेकिन मॉनसून की शुरुआत में कई लोग यह सोच भी नहीं पाते कि ऐसी बाढ़ की स्थिति पहले भी बन चुकी है. उत्तरी सिक्किम में भारी बारिश हुई, जबकि उत्तरी बंगाल में मध्यम बारिश हुई।

विस्तृत क्षेत्र पर क्यों है तीस्ता का यह भयानक रूप? सिलीगुड़ी कॉलेज के भूगोल के प्रोफेसर पार्थप्रतिम रॉय के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर में हरपा बान में भारी बारिश के कारण उत्तरी सिक्किम में चुंगथम बांध के टूटने से आई आपदा में पानी के साथ पत्थर, रेत, गाद और अन्य चीजें आ गईं। जैसे-जैसे नदी के तल में पत्थर, रेत और गाद जमा होते गए, नदी का जल स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ता गया। जिसके परिणामस्वरूप भारी बारिश न होने के बावजूद निचली घाटियाँ सूख रही हैं। पार्थपरम के अलावा, सेवक से रंगपो तक रेलवे सुरंग के निर्माण के दौरान नदी के किनारे बहुत सारा रेत-पत्थर जमा किया गया था। बाढ़ के दौरान वे भी नदी में गिर गये। उसकी वजह से नदी की ऊंचाई थोड़ी बढ़ गई होगी. हालाँकि, प्रोफेसर ने बताया कि सब कुछ उनकी प्रारंभिक धारणा है। उनके मुताबिक बिना परीक्षण के सटीक कारण बता पाना संभव नहीं है.

पर्यावरणविद् अनिमेष बसु भी बांध आपदा के बारे में बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ”पूरे उत्तर बंगाल में इतनी बारिश नहीं हुई कि तीस्ता इतना खतरनाक रूप ले लेगी. उत्तरी सिक्किम में बारिश हुई। अगर यही हाल है तो जब मानसून आएगा तो क्या स्थिति होगी? इसका एक कारण पिछले वर्ष बांध टूटने की आपदा के कारण बड़ी मात्रा में जमा हुई गाद है। फिर, उस इलाके में थोड़ी दूर स्थित बिजली उत्पादन संयंत्र में कितनी अधिक गाद जमा हो गई है, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है. तो कुल मिलाकर नदी ने अपनी नौगम्यता खो दी है। जिसका नतीजा आने वाले दिनों में भयावह स्थिति पैदा हो सकती है. हमें अधिक सावधान रहना चाहिए.”

सिक्किम में लगातार हो रही बारिश के कारण तीस्ता नदी में पानी बढ़ रहा है. तीस्ता कुछ स्थानों पर उत्तर की ओर बह रही है। शुक्रवार से उत्तरी सिक्किम का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है. रास्ता बंद है. शनिवार सुबह जैसे ही कुछ इलाकों में तीस्ता का पानी चिंताजनक रूप से बढ़ा, सेना ने हर यूनिट को अलर्ट जारी कर दिया है. ग़ज़लडोबा के तीस्ता बैराज अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। लेकिन वहां से इस दिन नहर में पानी छोड़ दिया गया।

‘सेट पर हर वक्त गॉसिप करते हैं अजय देवगन’, तब्बू की शिकायत पर एक्टर का क्या था जवाब?

0

तब्बू हार मानने वाली दुल्हन नहीं हैं। उन्होंने कहा, ”झूठ मत बोलो. आप मुझसे हर किसी की खबर जानना चाहते हैं।” पड़ोस के काकीमा से लेकर बॉलीवुड के अंदरूनी हलकों तक, गपशप का चलन कमोबेश हर जगह है। हाल ही में अजय देवगन और तब्बू अफवाहों के आधार पर एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे। लेकिन ये सब मजे में था. उन्होंने फिल्म ‘आरो में कहां दम था’ में साथ काम किया है। फिल्म के एक प्रमोशनल इवेंट में उन्होंने बताया कि सेट पर अभिनय के अलावा वे क्या करते हैं।

अजय देवगन ने कहा कि तब्बू शूटिंग फ्लोर पर गर्म मौसम की शिकायत करती रहीं। एक्ट्रेस ने पलटवार करते हुए कहा, ‘और अजय हर वक्त गॉसिप करते रहते हैं।’ अजय ने तुरंत खंडन करते हुए कहा, ”मुझे दूसरों की कोई खबर नहीं है. मैं बिल्कुल भी गपशप नहीं करता।”

तब्बू हार मानने वाली दुल्हन नहीं हैं। उन्होंने कहा, ”झूठ मत बोलो. तुम मुझसे सबके समाचार जानना चाहते हो.’’ अजय नहीं रुका. उन्होंने आगे कहा, ”तो सोचिए. सारी खबर किसे है!” अजय-तब्बू की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री हमेशा से दर्शकों की पसंदीदा रही है। उन्होंने पहली जोड़ी फिल्म ‘विजयपथ’ में बांधी थी. लेकिन उससे पहले अजय और तब्बू एक-दूसरे को टीनएज से जानते हैं। उनसे पूछा गया कि लंबे समय तक साथ काम करने के बाद सेट पर उनके रिश्ते का समीकरण कैसा है? बिना सोचे अजय ने जवाब दिया, “मैं अब कुछ नहीं सोचता. यह बताने की जरूरत नहीं है कि तब्बू फिल्म में मेरी सह-कलाकार हैं।”

साफ है कि बॉक्स ऑफिस पर ‘मैदान’ का सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा. हालांकि, इस फिल्म में अजय देवगन के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। शायद इसीलिए अजय एक बार फिर बायोपिक में वापसी कर रहे हैं। हालांकि, इस बार वह फुटबॉल छोड़कर क्रिकेट के मैदान में उतरने जा रहे हैं। लेकिन अजय का किरदार कौन निभाएगा? हाल ही में इस फिल्म के मेकर्स ने बताया कि अजय इसमें भारत के पहले दलित क्रिकेटर पलवंकर बालू का किरदार निभाएंगे. फिल्म का निर्देशन तिग्मांशु धूलिया करेंगे। फिल्म के निर्माताओं में से एक प्रीति सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम राम गुहा द्वारा लिखी गई किताब ‘ए कॉर्नर ऑफ ए फॉरेन फील्ड’ पर आधारित फिल्म बना रहे हैं।” फिल्म के निर्माता.

बालू का जन्म 1876 में तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी में हुआ था। बाद में उन्होंने पुणे क्रिकेट क्लब में एक विकेटकीपर के रूप में अपना करियर शुरू किया। बाद में उनकी प्रतिभा के कारण उन्हें 1896 में हिंदी जिमखाना क्लब में एक क्रिकेटर के रूप में मौका मिला। बालू ने 33 प्रथम श्रेणी मैचों में 753 रन और 179 विकेट लिए। यह फिल्म एक हाशिये के समाज से आने के बावजूद एक क्रिकेटर के रूप में उनके संघर्ष को उजागर करेगी।

हाल ही में अजय ने कश्मीर में ‘सिंघम आएं’ की शूटिंग पूरी की है। इसके बाद दर्शकों को नीरज पांडे द्वारा निर्देशित फिल्म ‘औरो में कहां दम था’ देखने को मिलेगी। सुनने में आ रहा है कि अजय अभिनीत इस बायोपिक की शूटिंग इस साल के अंत से शुरू हो सकती है. उन्होंने बॉलीवुड में एक कुशल अभिनेत्री के रूप में खुद को कई बार साबित किया है। इस बार तब्बू को हॉलीवुड में ‘बड़ा’ मौका मिला है। जैसे ही यह खबर फैलती है उनके प्रशंसकों का उत्साह बढ़ जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में हॉलीवुड में साइंस फिक्शन फिल्मों की शैली में ‘ड्यून’ फ्रेंचाइजी लोकप्रिय रही है। इस फ्रेंचाइजी की नई सीरीज (‘ड्यून: प्रोफेसी’) में तब्बू को मौका मिला है। सूत्रों के मुताबिक, डेनिस विलेन्यूवे द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ड्यून’ के प्रीक्वल की तैयारी शुरू हो गई है। सीरीज में एक्ट्रेस सिस्टर फ्रांसेस्का का किरदार निभाएंगी। मेकर्स के मुताबिक, सीरीज में तब्बू का किरदार शाही परिवार की शक्ति को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाएगा। तब्बू इससे पहले कई हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी हैं। इनमें ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘द नेमसेक’ भी एक है। इसके अलावा दर्शक उन्हें वेब सीरीज ‘द टेबल बॉय’ में भी देख चुके हैं। निर्माताओं ने इस सीरीज को फ्रैंक हारबट की ‘ड्यून’ द्वारा दिखाए गए समय से 10 हजार साल पहले के संदर्भ में व्यवस्थित किया है। हालांकि, यह सीरीज कब देखने को मिलेगी इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। फिल्म में एमिली वॉटसन, ओलिविया विलियम्स, मार्क स्ट्रॉन्ग और अन्य लोग होंगे। हाल ही में अजय ने कश्मीर में ‘सिंघम आएं’ की शूटिंग पूरी की है। इसके बाद दर्शकों को नीरज पांडे द्वारा निर्देशित