Home Blog Page 619

हरियाणा हैट्रिक के बाद संबोधन के दौरान क्या बोले पीएम मोदी?

हाल ही में हरियाणा हैट्रिक के बाद संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक बड़ा बयान दे दिया है! हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। लोकसभा चुनाव में जहां बीजेपी अपने दम पर बहुमत तक हासिल नहीं कर पाई थी, उसके लिए ये चुनाव बेहद अहम था। लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस लगातार पीएम मोदी को निशाना बना रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद कुछ राज्यों के उपचुनाव में भी बीजेपी कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। कई बार ऐसा लगा कि बीजेपी बैकफुट पर आ गई है। लेकिन आज जब बीजेपी ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई तो पीएम मोदी एक बार फिर से फ्रंटफुट पर आ गए। उन्हें कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया। बीजेपी के विजय उत्सव पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस को जमकर घेरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे परजीवी पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह परजीवी पार्टी बन गई है। हरियाणा में अकेले थी तो करारी हार मिली। जम्मू कश्मीर में उसकी सहयोगी पार्टी पहले से कह रही थी कि कांग्रेस की वजह से उसे नुकसान हो रहा है और नतीजों में भी वही दिखा। लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने जितनी सीटें जीती उसमें से आधी से ज्यादा सीटें अपने सहयोगियों की वजह से जीती हैं। जहां सहयोगियों ने कांग्रेस पर भरोसा किया वहां उनकी ही नैया डूब गई।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हैं और इस खेल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय से भारत के खिलाफ कई तरह के षडयंत्र चल रहे हैं। भारत के लोकतंत्र, अर्थतंत्र और सामाजिक तानेबाने को कमजोर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिशें हो रही हैं। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी और उनके चट्टे बट्टे इस खेमे में, इस खेल में शामिल हैं।

मोदी ने कहा, देश के ज्यादातर राज्यों के लोगों ने कांग्रेस के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया है। पहले कांग्रेस सोचती थी कि वो चाहे काम करे या न करे, लोग तो उसको वोट देंगे ही। लेकिन अब कांग्रेस की पोल खुल चुकी है। कांग्रेस सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है। सरकार में न रहने पर कांग्रेस की हालत जल बिन मछली जैसी हो जाती है। इसलिए वो सरकार में आने के बाद देश और समाज को दांव पर लगाने से नहीं हिचकती। आज पूरा देश देख रहा है कि कैसे कांग्रेस हमारे समाज में जाति का जहर फैलाने पर उतर आई है। जो लोग सोने का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए, वो गरीब को जाति के नाम पर लड़वाना चाहते हैं।

हमारे दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज को भूलना नहीं है कि ये कांग्रेस ही है, जिसने उनपर सबसे ज्यादा अत्याचार किया है। ये कांग्रेस है, जिसने उन्हें इतने दशकों तक रोटी, पानी, मकान से वंचित रखा। कांग्रेस का परिवार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों से नफरत करता है, उनसे चिढ़ता है। आज जब दलित, पिछड़े, आदिवासी शीर्ष स्थान पर जा रहे हैं, तो इनके पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं। कांग्रेस के इस शाही परिवार ने तो डंके की चोट पर कहा कि वो आरक्षण खत्म कर देंगे। दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीनकर कांग्रेस अपने वोटबैंक को देना चाहती थी। हरियाणा में भी वो यही करने जा रही थी। उसका डिब्बा गोल हो चुका है।

पीएम मोदी ने जाति जनगणना के मसले पर कांग्रेस पर निशाना साधा। दरअसल कांग्रेस लगातार जाति जनगणना की मांग कर रही है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है। इसलिए सरकार में आने के बाद कांग्रेस देश को, समाज को दांव पर लगाने से नहीं हिचकती। मोदी ने कहा कि देश देख रहा है कि कांग्रेस कैसे समाज में जाति का जहर फैलाने पर उतर आई है। जो लोग सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए, पीढ़ी दर पीढ़ी फाइव स्टार लाइफ जीते आ रहे हैं वे गरीब को जाति के नाम पर लड़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दलितों, पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार किया। इतने दशकों तक उन्हें रोटी पानी मकान से वंचित रखा। ये वे लोग हैं जो 100 साल बाद भी किसी आदिवासी, दलित, पिछड़े को पीएम नहीं बनने देंगे। कांग्रेस का परिवार दलित, आदिवासियों, पिछड़ों से नफरत करता है। कांग्रेस दलित, पिछड़ों का आरक्षण छीनकर अपने वोट बैंक में देना चाहती थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारत में अराजकता फैलाकर देश को कमजोर करना चाहती है। इसलिए अलग अलग वर्गो को भड़का रहे हैं। लगातार आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों को भड़काने की कोशिश की लेकिन हरियाणा के किसानों ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया। कांग्रेस ने युवाओं को भी भड़काने की कोशिश की लेकिन उन्होंने भी करारा जवाब दिया।

पीएम ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में भी यही देखा था कि कांग्रेस ने जितनी सीटे जीती उसमें आधी से ज्यादा सीटें अपने सहयोगियों की वजह से जीती हैं। जहां सहयोगियों ने कांग्रेस पर भरोसा किया वहां उनकी ही नैया डूब गई। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ऐसा जैसे बनना चाहती है जहां लोग अपनी विरासत पर गर्व ना करें, अपने संस्थाओं पर शंका करें। चुनाव आयोग, सेना, पुलिस, न्यायपालिका हर संस्था पर कांग्रेस दाग लगाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश करती है। पीएम ने कहा कि जम्मू कश्मीर का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने पहली बार वोट डाला जिन्हें पहले वह हक नहीं दिया गया था। मोदी ने कहा कि कुछ लोगों ने कहते थे कि आर्टिकल 370 हटने पर कश्मीर जल जाएगा, लेकिन कश्मीर जला नहीं खिला है और खिलखिलाया है। मोदी ने कहा कि हमने जम्मू कश्मीर में संविधान की स्प्रिट फिर से स्थापित की है।

 

परिणाम के बाद कांग्रेस के लिए क्या बोले पीएम मोदी ?

हाल ही में पीएम मोदी ने परिणाम के बाद कांग्रेस के लिए एक बयान दे दिया है! हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। बीजेपी ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई है। एग्जिट पोल में जहां कांग्रेस की सरकार बनती हुई दिख रही थी, वहीं चुनावों के नतीजों ने सबको चौंका दिया। वहीं जम्मू-कश्मीर में भी बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आते ही बीजेपी मुख्यालय पर जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में बीजेपी मुख्यालय से पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा बीजेपी मुख्यालय पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी ने हरियाणा चुनाव के नतीजों के लिए जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा, हम सबने सुना है कि ‘जहां दूध दही का खाना, वैसा है अपना हरियाणा।’ हरियाणा के लोगों ने फिर कमाल कर दिया है और कमल-कमल कर दिया है। आज नवरात्रि का छठा दिन है। मां कात्यायनी की आराधना का दिन है। मां कात्यायनी शेर पर विराजमान होकर हाथ में कमल को धारण किए हुए हम सभी को आशीर्वाद दे रही है। ऐसे पावन दिन हरियाणा में तीसरी बार लगातार कमल खिला है। गीता की धरती पर सत्य की जीत हुई है। गीता की धरती पर विकास की जीत हुई है। गीता की धरती पर सुशासन की जीत हुई है। हर जाति, हर वर्ग के लोगों ने हमें वोट दिया है।’

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर चुनाव के नतीजों पर कहा, ‘ जम्मू-कश्मीर में दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार शांतिपूर्वक चुनाव हुए, वोटों की गिनती हुई, नतीजे आए। ये भारत के संविधान की जीत है, भारत के लोकतंत्र की जीत है। जम्मू-कश्मीर में जितनी भी पार्टियां चुनाव लड़ रही थीं, उनमें वोट शेयर के हिसाब से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मैं हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में जीत हासिल करने वाले सभी उम्मीदवारों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की जनता को भी बहुत बहुत बधाई देता हूं। मैं सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को उनके तप और तपस्या के लिए नमन करता हूं।’

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, हरियाणा का हृदय से आभार! भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर स्पष्ट बहुमत देने के लिए मैं हरियाणा की जनशक्ति को नमन करता हूं। यह विकास और सुशासन की राजनीति की जीत है। मैं यहां के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। इस महाविजय के लिए अथक परिश्रम और पूरे समर्पण भाव से काम करने वाले अपने सभी कार्यकर्ता साथियों को भी मेरी बहुत-बहुत बधाई! आपने ना केवल राज्य की जनता-जनार्दन की भरपूर सेवा की है, बल्कि विकास के हमारे एजेंडे को भी उन तक पहुंचाया है। इसी का नतीजा है कि भाजपा को हरियाणा में यह ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है।

पीएम मोदी ने कहा, आज हरियाणा में झूठ की घुट्टी पर विकास की गारंटी भारी पड़ी है। हरियाणा की जनता ने नया इतिहास रच दिया है। हरियाणा में अब तक 13 चुनाव हुए हैं। इनमें से 10 चुनाव में हरियाणा के लोगों ने हर 5 साल के बाद सरकार बदली। लेकिन इस बार हरियाणा के लोगों ने जो किया है, वो अभूतपूर्व है। पहली बार ऐसा हुआ है कि 5-5 साल के दो कार्यकाल पूरा करने वाली किसी सरकार को हरियाणा में फिर से मौका मिला है।

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, भाजपा दुनिया का सिर्फ सबसे बड़ा दल ही नहीं है… भाजपा सबसे ज्यादा दिलों में भी बसी हुई है। हरियाणा में जनता ने विकास के मुद्दे पर भाजपा की हैट्रिक लगाई। भाजपा ने कांग्रेस के कुशासन से मुक्ति दिलाई, इसलिए गुजरात और मध्य प्रदेश की जनता दो दशक से भी ज्यादा समय से अपना आशीर्वाद बनाए हुए है। देश के ज्यादातर राज्यों के लोगों ने कांग्रेस के लिए No Entry का बोर्ड लगा दिया है। पहले कांग्रेस सोचती थी कि वो चाहे काम करे या न करे, लोग तो उसको वोट देंगे ही। लेकिन अब कांग्रेस की पोल खुल चुकी है। उसका डिब्बा गोल हो चुका है। कांग्रेस सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है। सरकार में न रहने पर कांग्रेस की हालत जल बिन मछली जैसी हो जाती है। इसलिए वो सरकार में आने के बाद देश और समाज को दांव पर लगाने से नहीं हिचकती।

पीएम मोदी ने कहा, हमारे दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज को भूलना नहीं है कि ये कांग्रेस ही है, जिसने उनपर सबसे ज्यादा अत्याचार किया है। ये कांग्रेस है, जिसने उन्हें इतने दशकों तक रोटी, पानी, मकान से वंचित रखा। कांग्रेस का परिवार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों से नफरत करता है, उनसे चिढ़ता है। आज जब दलित, पिछड़े, आदिवासी शीर्ष स्थान पर जा रहे हैं, तो इनके पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं। कांग्रेस के इस शाही परिवार ने तो डंके की चोट पर कहा कि वो आरक्षण खत्म कर देंगे। दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीनकर कांग्रेस अपने वोटबैंक को देना चाहती थी। हरियाणा में भी वो यही करने जा रही थी।

 

‘सीनियर’ ममता के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे ‘जूनियर’ डॉक्टर! उसका अपना हथियार एक बूमरैंग था जो उस पर आया था

0

राज्य में भूख हड़ताल की बात हो तो ममता बनर्जी का जिक्र जरूर होता है. उन्होंने धर्मतल्ला में लगातार 26 दिनों तक उपवास किया। अब जूनियर डॉक्टरों ने अपना ‘हथियार’ चुन लिया है. उन्होंने लंबे समय तक उपवास किया है. कई भूख हड़तालें तोड़ीं. लेकिन इस बार ममता बनर्जी को अपने ही ‘भूख हथियार’ का सामना करना पड़ रहा है. ‘राजनीतिक सफलता’ के लिए उन्होंने जो रास्ता अपनाया, उसे चुनकर जूनियर डॉक्टर उनकी सरकार को गति दे रहे हैं। विपक्षी नेता ममता ने जिस हथियार से बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार को संकट में डाला था, वह हथियार अब बूमरैंग बनकर वापस आ गया है!

जब वह विपक्ष की नेता थीं तो ममता का स्वभाव मैदानी राजनीति का था. उन्होंने बार-बार राजनीति का रास्ता चुना है. सिंगूर आंदोलन के समय उन्होंने राष्ट्रीय मार्ग पर धरना दिया और 21 दिनों तक लगातार पाठ किया। करुणा की राजनीति के कई उदाहरण हैं। हालाँकि, आंदोलन के कई मील के पत्थर के बीच, सबसे उल्लेखनीय 2006 में मेट्रो चैनल पर 26 दिन का उपवास था। उस आन्दोलन में तत्कालीन वामपंथी शासकों को भारी दबाव में आना पड़ा। ममता की भूख हड़ताल ने राष्ट्रीय राजनीति की सुर्खियाँ भी छीन लीं।

संयोग से सात जूनियर डॉक्टर उनसे 50 मीटर की दूरी पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी 10 सूत्री मांग के समर्थन में. उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी. शनिवार रात से भूख हड़ताल शुरू हो गई। सोमवार दोपहर मुख्य सचिव मनोज पंत ने उनकी भूख हड़ताल हटाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, 10 अक्टूबर तक 90 फीसदी काम हो जायेगा. अब देखते हैं कि क्या जूनियर डॉक्टर उस अनुरोध को मानते हैं और भूख हड़ताल उठाते हैं। संयोग से, सत्ता में आने के बाद ममता को कई बार भूख हड़ताल के हथियार का भी सामना करना पड़ा। 2014 में जादवपुर विश्वविद्यालय की एक छात्रा से छेड़छाड़ की उचित जांच की मांग को लेकर जादवपुर में आंदोलन शुरू हुआ. कुलपति अभिजीत चक्रवर्ती ने घेराबंदी छुड़ाने के लिए पुलिस बुला ली. एक रात प्रदर्शनकारी छात्र परिसर में घुस आये और पुलिस ने उन्हें बुरी तरह पीटा। इसके बाद कुलपति के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हो गया. जनवरी 2015 में, छात्रों का एक समूह भूख हड़ताल पर चला गया। कुछ दिनों की भूख हड़ताल के बाद ममता खुद जादवपुर पहुंचीं. उन्होंने कुलपति के इस्तीफे के बदले में भूख हड़ताल की।

फरवरी 2015 में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की परीक्षा पास करने के बाद शिक्षक अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर चले गये. इसके साथ ही पूरे कोलकाता में संविदा शिक्षक, छात्रवृत्ति शिक्षक, सहायक शिक्षक समेत शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारी संगठनों की भूख हड़ताल शुरू हो गयी. तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने भूख हड़ताल उठाने की कोशिश की. उस समय ममता ने भूख हड़ताल पर चर्चा पर जोर दिया था. मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”इस मामले को शिक्षा मंत्री देख रहे हैं. वह तुम्हें बताएगा कि क्या कहना है. लेकिन आजकल लोग सिर्फ बातों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं. ऐसा करने वालों के संबंध में, मैं कहता हूं कि समस्या का समाधान चर्चा के माध्यम से होना चाहिए।”

उसी वर्ष अक्टूबर में, मदरसा शिक्षक संघ ने हाजी मोहम्मद मोहसिन चौराहे पर मुस्लिम संस्थान के पास भूख हड़ताल शुरू की। लेकिन यह एक ‘रिले भूख हड़ताल’ थी। उसके कारण, कुछ शिक्षक या शिक्षा कर्मचारी बीमार पड़ गए। मदरसा शिक्षा केंद्र (एमएसके) की सह-शिक्षक चंदा सहर की भूख हड़ताल में भाग लेने के बाद घर लौटने के बाद दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। हालाँकि, तृणमूल कार्यकर्ता मुकुल रॉय ने 497 एमएसके को मदरसा शिक्षा बोर्ड के तहत लाने और नियमित शिक्षकों के समान सुविधाएं देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की।

हालाँकि, मार्च 2019 में एसएससी नौकरी चाहने वालों की भूख हड़ताल से ममता को गति पकड़नी पड़ी। भावी शिक्षक मेयो रोड पर भूख हड़ताल पर बैठे और मांग की कि योग्यता सूची में होने के बावजूद उन्हें नौकरी से वंचित किया जा रहा है। उस आंदोलन में लगभग 80 एसएससी नौकरी चाहने वाले बीमार पड़ गए। उस वक्त ममता भूख हड़ताल पर बैठ गयी थीं. उन्होंने कहा, ”मुझे आपके प्रति पूरी सहानुभूति है. मुझ पर भरोसा कर सकते हैं भूख हड़ताल उठाओ.” मुख्यमंत्री का आश्वासन काम आया. भूख हड़ताल बढ़ती है. अगस्त 2019 में पार्श्व शिक्षकों ने भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी.

लेकिन ममता के अपने राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक उनका धर्मतल्ला के मंच पर अनशन करना है. लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद, ममता ने विभिन्न भाषणों में विपक्षी नेता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपनी भूख हड़ताल का बार-बार उल्लेख किया है।

हालांकि, बीजेपी जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन को ममता की भूख हड़ताल से नहीं जोड़ना चाहती. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के शब्दों में, ”वह कोई भूख हड़ताल नहीं थी! उनकी टीम के सदस्य इस बारे में बात करते हैं कि रात में पर्दे के पीछे क्या होता है। अभी जो भूख हड़ताल चल रही है, उसे पूरे राज्य के लोगों का समर्थन प्राप्त है. वहीं, सुकांत ने दावा किया, ”भूख हड़ताल को करुणा का ‘हथियार’ कहना आंदोलन के इस पथ का अपमान होगा.” हमारे देश में भूख हड़ताल की कई ऐतिहासिक मिसालें हैं. सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, ”पहाड़ पर चढ़ते समय आपको यह याद रखना होगा कि आपको उसी रास्ते से लौटना है. इसलिए परिवेश का अनादर करना उचित नहीं है। जैसा आपने किया है, आपको वैसा ही फल मिल रहा है.” वहीं, राज्य के मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती का कहना है, ”चार घंटे के उपवास से आप ममता बनर्जी नहीं बन सकतीं. इसके लिए उन्हें वाम मोर्चा या सीपीएम जैसे क्रूर शासकों के खिलाफ दशकों तक लड़ना होगा। मैंने सोचा कि मैं भूख हड़ताल करूंगा और बैठ गया! और सीपीएम पीछे से समर्थन करने उतरी. यह सब और कुछ भी, ममता बनर्जी का सामना नहीं किया जा सकता है।

क्या आप अपनी छुट्टियां समुद्र तट पर बिताएंगे, किन कपड़ों से आप आकर्षक बनेंगे?

यदि आप समुद्र में जाएं तो उपयुक्त कपड़े भी ले जाएं। लंबी बाजू वाली मैक्सी ड्रेस या डेनिम शॉर्ट्स – अपने साथ किस तरह के कपड़े ले जाएं? गंतव्य लक्षद्वीप. क्या आपने पहले से ही नीले समुद्र, सफेद रेत वाले समुद्र तट की यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है? मेपेजुप खा रहे हैं, जिम जा रहे हैं? छुट्टियाँ बिताने का मतलब सिर्फ घूमना-फिरना नहीं है, अगर आप सोशल मीडिया पर मनमोहक तस्वीरें नहीं देंगे तो क्या होगा? लेकिन अच्छा दिखने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है, आपको उपयुक्त कपड़े पहनने की भी जरूरत है। चाहे गोवा हो या पुडुचेरी या लक्षद्वीप, जब आप समुद्र तट पर जाएंगे तो किस तरह के कपड़े आकर्षक लगेंगे?

समुद्र में तैराकी के लिए बिकिनी या स्विमवीयर चुना जा सकता है, जो आरामदायक हो। हालाँकि, भले ही आप बिकनी या स्विमवीयर के ऊपर सारंग या काफ्तान से ‘कवर’ हों, आपको समुद्र तट पर चलते समय एक सुंदर तस्वीर मिलेगी। रंगीन साड़ियों को कई तरह से पहना जा सकता है। मनके हार या सीप के गहनों की एक जोड़ी इसके साथ अच्छी लगेगी। पारदर्शी काफ्तान को बिकनी या स्विमवीयर के ऊपर भी पहना जा सकता है। आप भी घुटने तक या टखने तक लंबाई वाले नीले कफ्तान में समुद्र तट पर हीरोइन बन सकती हैं।

जंपसूट

समुद्र तट की यात्रा का मतलब सिर्फ स्नॉर्कलिंग नहीं है। रात की पार्टियाँ, खाना-पीना, पर्यटन-भ्रमण – सब कुछ है। ऐसे मौकों के लिए आप कई तरह के जंपसूट चुन सकती हैं। चाहे रात को बाहर जाना हो या दिन में बाहर जाना हो, जंपसूट हर समय पहना जा सकता है। आप ऑफ-शोल्डर, छोटी बाजू वाले जंपसूट, साथ ही टखने-लंबाई वाले जंपसूट भी पहन सकते हैं। मैक्सी ड्रेस

अगर आप बिकिनी या शॉर्ट ड्रेस में सहज नहीं हैं तो मैक्सी ड्रेस रखें। समुद्र तट पर टहलने के लिए फ्लोरल मैक्सी ड्रेस आदर्श है। सफ़ेद या रंगीन, जो भी आपको पसंद हो उसे चुनें। हर दिन घूमने और पहनने के लिए विभिन्न प्रकार की मैक्सी ड्रेस अपने पास रखें।

शॉर्ट्स और टॉप

समुद्र तट का मतलब है लहरों के साथ चलना। तूफ़ानी लहरों में अपने पैर भिगो लें. ऐसे समय के लिए आप टी-शर्ट और डेनिम शॉर्ट्स चुन सकते हैं। शॉर्ट्स के साथ स्पेगेटी या ब्रैलेट, शर्ट या कोई अन्य टॉप चुनें।

तैराकी पोशाक

समुद्र के साथ-साथ स्विमिंग पूल में भी तैरने के लिए स्विमवीयर की आवश्यकता होती है। यदि आप बिकनी या आकर्षक स्विमसूट में सहज नहीं हैं, तो आप घुटनों तक लटकने वाले स्विमसूट का विकल्प चुन सकती हैं। स्विमवीयर के विभिन्न डिज़ाइन उपलब्ध हैं।

कपड़ों के साथ, एक समुद्र तट टोपी और धूप का चश्मा भी ले जाएं। टोपी और धूप का चश्मा आपको धूप से बचाएंगे, साथ ही खूबसूरत तस्वीरें भी लेंगे।

ड्राइविंग निश्चित रूप से मजेदार है. हालाँकि, अगर यह छोटा है, तो यह खतरनाक भी है। जबकि लंबी यात्राओं का तनाव वयस्कों के लिए कोई समस्या नहीं है, युवा सदस्य धैर्य खो सकते हैं। लगातार यात्रा से वह थक भी सकता है। कार में बच्चों के साथ यात्रा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

1. अगर आप बच्चे के साथ ट्रैफिक में फंस गए तो परेशानी का कोई अंत नहीं होगा। अगर आप सुबह बाहर जा सकें तो बेहतर होगा। इस समय सड़कें आमतौर पर खाली रहती हैं। परिणामस्वरूप, गंतव्य की ओर शीघ्रता से आगे बढ़ना संभव हो पाता है।

2. बच्चों को कोई भी स्ट्रीट फ़ूड नहीं खिलाना चाहिए। तो आप इसके साथ विभिन्न सूखे खाद्य पदार्थ रख सकते हैं। कभी-कभी, यदि बच्चा गंभीर या शरारती है, तो उसे पसंदीदा भोजन देकर चुप कराया जा सकता है। हालाँकि, इस सूची में स्वस्थ खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जाना चाहिए। 3. यदि आप बीच-बीच में ब्रेक लेते हैं, तो आप अपने बारे में अच्छा महसूस करेंगे और आपका छोटा बच्चा अधीर नहीं होगा। कुछ को मोशन सिकनेस या मोशन सिकनेस होती है। कार को रोककर कुछ देर खुली हवा में खड़ा रखने से ऐसी समस्याएं कम हो जाएंगी।

4. कार में जाते समय बच्चे की गंभीरता या चिंता को संभालने के लिए आप उसके कुछ पसंदीदा खिलौने, किताबें, चीजें रख सकते हैं। यह सब उसकी उंगलियों पर होने पर, उसे थोड़ी देर के लिए भुलाया जा सकता है।

5. ऐसा नहीं है कि सिर्फ खिलौनों की वजह से बच्चे गलत व्यवहार नहीं करेंगे। हमें भी उसे भूलने की कोशिश करनी चाहिए. आप गाने बजाकर, कहानियाँ सुनाकर या बाहरी दृश्य दिखाकर बच्चे को शांत रख सकते हैं। आप कहानी के बहाने बच्चे को उस जगह के बारे में बता सकते हैं जहां आप जा रहे हैं।

‘कीमो के साथ भी लोकल ट्रेन की सवारी’, हिना ने किसके बारे में बोला अपना दर्द?

0

एक्ट्रेस किसी भी तरह से काम से ब्रेक नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले हिना एक फंक्शन में जाते वक्त गिरते-गिरते बची थीं। हिना खान ब्रेस्ट कैंसर से लड़ रही हैं। एक के बाद एक कीमो लेना। पूरे शरीर में दर्द. लेकिन एक्ट्रेस किसी भी तरह से काम से ब्रेक नहीं ले रही हैं. वह अक्सर खुद को फोटो शूट समेत कई कामों में व्यस्त रखते हैं। हाल ही में एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि वह अपने काम के प्रति कितने समर्पित हैं.

कुछ दिन पहले हिना एक फंक्शन में जाते वक्त गिरते-गिरते बची थीं। एक्ट्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा, “कितना दुखद दिन है! आप सभी मेरे न्यूरोपैथिक दर्द के बारे में जानते हैं। इस दर्द के कारण एक मिनट से अधिक समय तक खड़े रहना बहुत मुश्किल हो जाता है। वास्तव में, मैं इस कार्यक्रम में शामिल होऊंगा, मैंने कुछ महीने पहले वादा किया था। फिर भी कैंसर के इलाज का कोई दुष्प्रभाव नहीं हुआ।” हिना ने कहा, शुरुआत में उन्होंने इवेंट कैंसिल करने और पैसे लौटाने के बारे में सोचा. क्योंकि इस इवेंट में स्टेज पर डेढ़ घंटे खड़े रहने का काम करना था. एक्ट्रेस ने लिखा, ”मैं बहुत डर गई थी. लेकिन भगवान मुझे शक्ति दे. मैं नहीं चाहता था कि उद्यमियों को मेरे स्वास्थ्य के लिए परेशानी उठानी पड़े।” लेकिन अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए हिना ने उस दिन हाई हील्स नहीं पहनीं. साड़ी के साथ पहनने के लिए स्नीकर्स की एक जोड़ी चुनी।

एक्ट्रेस ने लिखा, ”पिछले कुछ दिनों में कई कैंसर मरीजों से बात हुई. कोई मुझसे भी बेहतर है. कोई मुझसे भी बुरा है. लेकिन जिस तरह से वे इस बीमारी से लड़ रहे हैं वह मेरे लिए प्रेरणा है।’ कीमो लेने के बाद वे लोकल ट्रेन या बस से यात्रा करते हैं। उनके चेहरे पर भी मुस्कान है. कुछ अकेले ही डॉक्टर के पास आते हैं। उसके बाद ऑफिस जाना।” इन अनुभवों ने हिना को और हिम्मत दी.

उनके शरीर में वही रोग घर कर गया है। एक व्यक्ति उस बीमारी का स्पष्ट उत्तर देकर विजयी होता है। दूसरा लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है। इतने संघर्ष के बाद भी दोनों के चेहरे पर बड़ी मुस्कान है. ये हैं महिमा चौधरी और हिना खान। महिमा का जन्मदिन शुक्रवार 13 सितंबर को है. उस मौके पर हिना ने उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई दी थी. वह यह बताना भी नहीं भूले कि ‘परदेश’ की नायिका संघर्ष के पहले दिन से ही उनके साथ हैं।

महिमा चौधरी एक बार ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हो गई थीं। उन्हीं दिनों उन्हें अपनी बेटी अपने पास मिल गई। उनके अदम्य मन की शक्ति ने उन्हें जीवन पथ पर आगे बढ़ाया है। वह ‘कैंसर क्रूसेडर’ हैं। हिना कैंसर की तीसरी स्टेज में हैं। दवा, कीमो नियमित चल रहा है। जीतने के लिए मनोबल बढ़ाना होगा. हिना के साथ उनकी मां, उनका पूरा परिवार है। इसी हालत में एक्ट्रेस शूटिंग कर रही हैं. हिना का दावा है कि महिमा ने उनके मनोबल में अहम योगदान दिया है। वह उस योगदान को नहीं भूले. इसलिए अपने एक सच्चे दोस्त के जन्मदिन पर सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर की. अस्पताल में भर्ती होने की प्रारंभिक तस्वीर. एक फ्रेम में दो लड़ती महिलाएं. उस तस्वीर के साथ एक्ट्रेस ने लिखा, “मेरी जिंदगी का फरिश्ता. वह मेरे जीवन की प्रेरणा हैं. आने वाले गौरवशाली दिन और भी गौरवशाली हों। यही प्रार्थना है।”

हिना खान ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। इसलिये उनकी मन की शक्ति में तनिक भी कमी नहीं आयी। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी शारीरिक स्थिति फैन्स के साथ शेयर कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वह इस कठिन समय से डरने वाले नहीं हैं. वह काम से समझौता करने को तैयार नहीं हैं। कीमो लेने के अगले दिन वह शूटिंग पर चले गए।

हाल ही में हिना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है. जहां देखा जाए तो एक्ट्रेस ने अपने बालों के साथ विग लगाई हुई है. वीडियो में हिना काफी खुश मूड में नजर आ रही हैं. उन्होंने कहा, “जब मुझे कैंसर का पता चला, तो मुझे पता था कि मेरे बाल नहीं होंगे, सारे बाल झड़ जाएंगे।” इसलिए मैंने उन्हें तब काटा जब बाल अभी भी अच्छे थे। मैंने अपने बालों से एक विग बनाने का फैसला किया, मुझे पता था कि इस कठिन समय में यह विग मुझे ताकत देगी। मेरे इस फैसले से मुझे वाकई बहुत फायदा हुआ, अब मुझे खुद पर गर्व है।”

हिना का मानना ​​है कि उनकी लड़ाई इस कठिन समय में लोगों को प्रेरणा देगी। एक्ट्रेस ने कहा, ‘अगर मेरी तरह मुश्किल हालात से गुजर रही बहादुर महिलाओं को मेरा काम पसंद आता है तो मैं उनसे अनुरोध करती हूं कि वह यह काम पहले ही कर लें।’ तो आपको बाद में पछताना नहीं पड़ेगा. इस कठिन परिस्थिति में भी यह एक काम आपके दुःख के बोझ को थोड़ा कम कर देगा, आपको ताकत मिलेगी, आपको अच्छा महसूस होगा। इस विग का उपयोग करने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे खोए हुए बाल वापस आ गए हैं, यह बहुत अच्छा लगता है।”

मनोरंजन सितारों ने भी उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कैंसर विजेता महिमा चौधरी ने एक संदेश में कहा, “आप एक योद्धा हैं। और मुझे पता है तुम ठीक हो जाओगे. लाखों लोग आपके अच्छे होने की कामना कर रहे हैं. इस बार मैं तुम्हारा हाथ कसकर पकड़ लूँगा।” मौनी रॉय, करिश्मा तन्ना, जेनिफर विंगेट, दिशा परमार और सुनीता राजवार सहित अन्य लोगों ने इस कठिन समय में हिना के लिए समर्थन के संदेश दिए हैं।

मैदान में वरुण से क्या कह रहे थे गंभीर? कमेंटेटर शास्त्री सुन नहीं पाते थे तो भी समझ जाते थे

0

भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ कानपुर में आक्रामक क्रिकेट खेला. इंग्लैण्ड के ‘बज़बॉल‘ की नकल पर उस खेल का नाम ‘गैम्बल’ पड़ गया। गौतम गंभीर के समर्थकों का सुनील गौस्कर ने विरोध किया. भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ कानपुर में दूसरे टेस्ट की पहली पारी में आक्रामक क्रिकेट खेला। भले ही यह टेस्ट था, लेकिन बल्लेबाजों ने टी20 के अंदाज में खेला. रातों-रात इस खेल का नाम अंग्रेजी ‘बज़बॉल’ के बाद ‘गैम्बल’ हो गया। गौतम गंभीर के समर्थकों का सुनील गौस्कर ने विरोध किया.

इंग्लैंड ने टेस्ट में आक्रामक क्रिकेट खेला. इंग्लैंड के खेल का नाम ‘बज़बॉल’ वहां के कोच ब्रेंडन मैकुलम के उपनाम ‘बाज’ से लिया गया है। इसी तरह गंभीर के सरनेम के पहले अक्षर से ‘गैम्बल’ बना। हालांकि, इससे पहले इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने सोशल मीडिया पर लिखा था, ”भारत ब्लिट्जबॉल खेल रहा है.”

गॉस्कर ने एक अखबार के कॉलम में लिखा, ”भारत की बल्लेबाजी काफी रोमांचक और ताजगीभरी थी. लेकिन जो नाम दिया गया है वह बहुत पुराना है, बस्तापचा। 50 साल पहले अमेरिका में हुए वॉटरगेट कांड के बाद भारत की बल्लेबाजी रणनीति को अब ऐसे-बॉल, तमुक-बॉल कहा जाने लगा है, जैसे कोई भी घोटाला इस गेट, उस गेट से जुड़ा होता है. इसकी शुरुआत बिजली गिरने से हुई।” उन्होंने यह भी लिखा, ”मैंने एक अखबार में रोहित की तारीफ करते हुए देखा कि भारत के आक्रामक खेल को ‘बॉसबॉल’ कहा जाता है. क्योंकि टीम में कप्तान ही ‘बॉस’ होता है. यह सच है कि रोहित ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया है. हालाँकि, कुछ लोगों ने कोच का नाम उधार ले लिया है और इसे ‘गैम्बल’ कहना शुरू कर दिया है। जब से बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम ने एक साथ काम करना शुरू किया है तब से इंग्लैंड का खेल बदल गया है। लेकिन मैंने पिछले दो साल से रोहित को इसी तरह बल्लेबाजी करते देखा है।”

इसके बाद गॉस्कर का गुस्सा फूटा, ”गंभीर सिर्फ दो महीने के लिए भारत के कोच रहे हैं. मैं पैडलेहन को इस समय अपने नाम के साथ खेलने का सबसे अच्छा उदाहरण मानता हूं। मुझे नहीं पता कि क्या गंभीर ने कभी वैसी बल्लेबाजी की थी जैसी मैकुलम करते थे। अगर किसी को श्रेय देना है तो रोहित को दिया जाना चाहिए।’ कोई और नहीं।”

फिर खेल ख़त्म हो गया. गौतम गंभीर ग्वालियर में मैदान पर खड़े होकर वरुण चक्रवर्ती से बात कर रहे थे. भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल भी वहां थे. गंभीर वरुण से क्या कह रहे थे, ये रवि शास्त्री सुन तो नहीं पाए लेकिन समझ गए. कमेंट्री करते हुए उन्होंने इस बात की जानकारी भी दी.

गंभीर को वरुण से बात करते देख शास्त्री कहते हैं, ”आप वरुण को देख सकते हैं. गंभीर से भी बात हो रही है. वरुण ने 3 विकेट लिए. हालाँकि, गौतम ने वरुण को राष्ट्रीय टीम के बाहर केकेआर के लिए करीब से देखा है।”

इसके बाद शास्त्री ने कोच और क्रिकेटर के बीच हुई बातचीत को समझने की कोशिश की. भारत के पूर्व कोच ने कहा, “गंभीर वरुण को बता रहे होंगे कि किस गति से गेंदबाजी करनी है। या फिर फील्डर को गेंद कहां डालनी चाहिए और योजना बनानी चाहिए. वहां भारत के गेंदबाजी कोच मोर्कल भी थे. निश्चित रूप से वे वरुण की गेंदबाजी के बारे में बात कर रहे हैं।”

वरुण ने आईपीएल के पिछले सीजन में केकेआर के लिए सबसे ज्यादा 21 विकेट लिए थे. उन्होंने टीम को चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. उस वक्त केकेआर के मेंटर गंभीर थे. भारतीय टीम के कोच बनने के बाद वरुण की टी20 टीम में वापसी हुई. अपनी वापसी पर उन्होंने ध्यान खींचा. मैच के बाद वरुण ने बताया कि इस सफलता के पीछे उन्हें कितनी मेहनत करनी पड़ी. वरुण ने कहा, ”पहले मैं साइड स्पिन करता था. लेकिन अब यह बदल गया है. अब मैं घूम गया. मेरी गेंद की शैली बदल गई है. मेरा नियंत्रण अब पहले से काफी बेहतर है। इसलिए बल्लेबाज को मेरी गेंद खेलने में परेशानी होती है।”

हालाँकि, यह एक दिन में नहीं बदला। इसमें उन्हें दो साल लग गये. वरुण को लंबी प्रैक्टिस का फल मिला. आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने वाले स्पिनर ने कहा, ‘यह कैसा बदलाव दिख रहा है! लेकिन ऐसा करने में मुझे दो साल से अधिक का समय लग गया। शुरुआत में मैंने तमिलनाडु प्रीमियर लीग और आईपीएल में नई गेंदबाजी का अभ्यास किया. अब यह ख़त्म हो गया है।”

पूजा में खरीदे विभिन्न ऑक्सीडाइज्ड आभूषण? पहनते समय 5 गलतियों से बचें

ऑक्सीडाइज्ड गहनों के साथ समस्या यह है कि थोड़ी सी लापरवाही से आभूषण खराब हो सकते हैं। एक बार जब यह काला पड़ना शुरू हो जाए तो सौ कोशिशों के बाद भी इस तरह का आभूषण दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता। क्या आपने पूजा में डिब्बा भरकर ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी खरीदी थी? उस गहनों की देखभाल कैसे की जाएगी, यह देखना बाकी है। चाहे शादी हो या दुर्गा पूजा का पहनावा, साड़ी हो या ड्रेस – ऑक्सीडाइज़्ड आभूषण सभी प्रकार के परिधानों के साथ अच्छे लगते हैं। यदि आप सोने या चांदी के गहने नहीं पहनना चाहते हैं, तो ऑक्सीडाइज़्ड गहने पहनने से पूजा की भीड़ में भी ध्यान आकर्षित हो सकता है। लेकिन इन सभी गहनों के साथ समस्या यह है कि अगर आप थोड़ी सी भी लापरवाही बरतेंगे तो ज़ेला निकल जाएगा। एक बार जब यह काला पड़ना शुरू हो जाए तो सौ कोशिशों के बाद भी इस तरह का आभूषण दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता। क्या आपने पूजा में डिब्बा भरकर ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी खरीदी थी? उस गहनों की देखभाल कैसे की जाएगी, यह देखना बाकी है।

1) टैगोर को देखने के बाद कई लोगों की आदत होती है कि वे अपने गहने उतारकर ड्रेसिंग टेबल पर रख देते हैं। यदि आभूषण पर पसीना लग जाए तो वह आभूषण टिकेगा नहीं। पसीने में मौजूद नमक ऑक्सीकृत गहनों के साथ प्रतिक्रिया करके रंग को गहरा कर देता है। इसलिए गहनों को साफ कपड़े से पोंछ लें और फिर डिब्बे में रख दें।

2) टैगोर को देखने के बाद आप चाहे कितनी भी थकान महसूस करें, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी को खुले में न छोड़ें। आभूषणों को हमेशा जिपलॉक पाउच में रखें। नतीजतन, अगर ज्वेलरी बॉक्स को बार-बार खोला जाए तो भी हवा का असर सीधे तौर पर ज्वेलरी पर नहीं पड़ेगा।

3) यदि सोने का आभूषण गंदा हो तो उसे पीले पानी में डुबोया जाता है, चांदी के आभूषण को पेस्ट से साफ किया जाता है। लेकिन अगर ऑक्सीडाइज्ड गहनों पर गंदगी जमा हो जाए तो ये गलतियां न करें, इससे गहनों की हालत और खराब हो जाएगी।

4) सारे गहने एक ही डिब्बे में न रखें. इस गलती के कारण गहने जल्दी काले हो जाते हैं। इसलिए गहनों को अलग-अलग पाउच में रखने से वे लंबे समय तक इस्तेमाल लायक रहेंगे।

5) आउटफिट खत्म करने के बाद ही ज्वेलरी पहनें. अगर आप गहने पहनने के बाद परफ्यूम, डियो का इस्तेमाल करेंगी तो रंग जल्दी छूट जाएगा।

पूजा का मतलब है दावत और ढेर सारी सजावट। एक खूबसूरत साड़ी, गहने, सिर पर फूलों की सजावट – अगर आप बहुत ज्यादा सजना-संवरना नहीं चाहतीं तो इतना ही काफी है। हालांकि, अगर आप साड़ी के साथ मैचिंग ज्वेलरी नहीं पहनती हैं तो पूरा आउटफिट खराब हो सकता है। अगर आप चाहती हैं कि पूजा के दौरान भीड़ में भी सबकी निगाहें आप पर ही रहें तो आपको गहनों के बारे में थोड़ा सोचना होगा। जानिए किस तरह के आउटफिट के साथ कौन सी ज्वेलरी पहननी चाहिए।

1) कई लोगों को ज्यादा फैंसी ड्रेस पसंद नहीं होती। ऐसे में आप षष्ठी की सुबह हैंडलूम साड़ी के साथ जंक ज्वेलरी या अफगानी ज्वेलरी पहन सकती हैं। आप एक रंग की चूड़ियां पहन सकती हैं। कपड़े से बने आभूषण भी अब काफी ‘फैशन में’ हैं। इस तरह की ज्वेलरी आप हैंडलूम साड़ियों के साथ पहन सकती हैं।

2) सप्तमी की सुबह आप सिल्क साड़ी के साथ एंटीक ब्रश ज्वेलरी चुन सकती हैं. रेशम की साड़ियों के साथ मोती के आभूषण अच्छे लगते हैं। चाहे विष्णुपुरी हो या मुर्शिदाबादी सिल्क – आप इसे मोती के हार, पेंडेंट या कंगन के साथ पहन सकते हैं।

3) अगर आप अष्टमी के दिन बनारसी या जामदानी पहनते हैं तो इसके साथ सोने के आभूषण अच्छे लगते हैं। लंबे सीताहर या लहरी, कंबला, हाथ बाला या चूड़ को बिल्कुल पारंपरिक अंदाज में सजाया जा सकता है। हालाँकि, अब सोना चढ़ाया हुआ आभूषण भी बहुत ‘अंदर’ है। आप भी इन्हें पहन सकते हैं.

4) नवमी की सुबह टेम्पल ज्वेलरी या स्टोन जड़ी ज्वेलरी कटान या ब्रोकेड साड़ी के साथ अच्छी लगेगी. नवानी की रात नेट साड़ी के साथ स्टोन या डायमंड ज्वेलरी अच्छी लगेगी। भव्य हेवी वर्क आभूषणों के साथ हल्के वर्क वाली साड़ी चुनें। गहनों की खूबसूरती और भी निखर कर सामने आएगी. अगर आप जॉर्जेट साड़ी के साथ थोड़ा अलग दिखना चाहती हैं तो ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी चुन सकती हैं।

5) दशमी के दिन महिलाएं पुराने कपड़े पहनना पसंद करती हैं। शादी के दौरान सफेद लाल साड़ी के साथ सोने के आभूषण सबसे अच्छे लगते हैं।

क्या वोट बैंक के लिए हिंदू आस्था पर वार करना सही है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वोट बैंक के लिए हिंदू आस्था पर वार करना सही है या नहीं! आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के प्रमुख प्रसाद में मिलावटी घी का उपयोग किए जाने की खबर से हंगामा मच गया। गुजरात की लैब से आई रिपोर्ट में पुष्टि हो गई कि जिस घी से तिरुपति लड्डू बनाया जा रहा था, उसमें जानवरों की चर्बी मिली हुई है। एक तो पवित्र प्रसाद, वो भी तिरुपति जैसे प्रसिद्ध मंदिर का जहां देश-दुनिया से आस्थावान हिंदू भगवान वेंकटेश्वर का दर्शन करने आते हैं। सोचिए, उन हिंदुओं को प्रसाद के जरिए गाय की चर्बी खिलाई जा रही थी। कारतूस में गाय की चर्बी का इस्तेमाल होने की खबर ने अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ 1857 की पहली क्रांति करवा दी थी। गाय को माता मानने वाले हिंदुओं को अगर प्रसाद में चर्बी मिलाकर खिला दी जाए तो इससे बड़ा धार्मिक आक्रमण और क्या ही हो सकता है? लेकिन तिरुपति में ऐसा हुआ। टीडीपी की चंद्रबाबू नायडू सरकार का कहना है कि वाईएसआर कांग्रेस की पिछली जगनमोहन रेड्डी सरकार में तिरुपति लड्डू के लिए अशुद्ध और मिलावटी घी का उपयोग शुरू हुआ था। तिरुपति के तत्कालीन पुजारी रमना दीक्षितुलु ने दावा किया है कि उन्होंने घी की अशुद्धता का मुद्दा उठाया था, लेकिन तत्कालीन मंदिर प्रबंधन ने कोई सुनवाई नहीं की। जगनमोहन रेड्डी और उनका परिवार इसाई है। सोचिए अगर हिंदू मुख्यमंत्री की सरकार में अगर किसी गैर-हिंदुओं के साथ ऐसा होता, वो भी उनके धर्मस्थल के जरिए तो आज देश-दुनिया में क्या नैरेटिव गढ़ जा रहे होते! लेकिन बहुसंख्यक हिंदुओं के इस देश में हिदुओं की आस्था पर इतना बड़ा आक्रमण हुआ, लेकिन बात आई-गई हो गई। आखिर ऐसा कैसे हुआ? इसकी जड़ में हिंदुओं की आस्था पर लगातार चोट करने की प्रवृत्ति है। लगता है छोटे-बड़े अपमानों से गुजर रहे हिंदुओं ने धीरे-धीरे मान लिया है कि भारत में हमारी यही गति होनी है। तभी तो देश की सरकार और इसके मुखिया पर हिंदूवादी होने का आरोप है, तब भी हिंदुओं ने प्रसाद की आड़ में गाय की चर्बी खाकर भी चुप्पी ठान रखी है?

दरअसल, प्रसाद बनाने में गाय की चर्बी वाले घी के उपयोग का दुस्साहस इसलिए हो पाया क्योंकि हिंदुओं ने अपनी आस्था पर हो रहे हमलों का प्रतिकार करना छोड़ दिया। नीचे दी गई बातें याद कीजिए और अपने दिल पर हाथ रखकर पूछिए कि क्या ऐसी बात कभी गैर-हिंदुओं के लिए कही जा सकती है? क्या वही लोग गैर-हिंदुओं के लिए ऐसी हिम्मत कर सकते हैं जिन्होंने हिंदुओं के लिए ऐसी बातें कही हैं? समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला करते हुए कहा कि मठाधीश और माफिया में ज्यादा अंतर नहीं है। उसके बाद उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘भाषा से पहचानिए असली सन्त महन्त, साधु वेष में घूमते जग में धूर्त अनन्त।’

कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के मौजूदा नेता राहुल गांधी ने कहा कि जो लोग मंदिर जाते हैं वही लड़कियों को छेड़ते हैं। वो अपने पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 70वीं जयंती पर महिला कांग्रेस की ओर से आयोजित संकल्प सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पम्फ्लेट छपवाकर मां दुर्गा को वेश्या बताया गया जिन्होंने महिषासुर का धोखे से वध किया। फिर दिल्लू यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रफेसर केदार कुमार मंडल ने फेसबुक पोस्ट में मां दुर्गा के लिए लिखा, ‘दुर्गा भारतीय पौराणिक कथाओं में बहुत ही सेक्सी वेश्या है।’

तमिलनाडु के सत्ताधारी दल डीएमके के नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने हिंदू धर्म की तुलना भयंकर बीमारियों से की। तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि ने ‘सनातन धर्म को मिटाने’ को लेकर आयोजित सम्मेलन में न केवल भाग लिया बल्कि यहां तक कहा कि ‘सनातन धर्म मलेरिया डेंगू की तरह है जिसे मिटाना जरूरी है।’ उन्होंने कहा, ‘ऐसी कुछ चीजें होती हैं जिनका विरोध करना काफी नहीं होता, हमें उन्हें समूल मिटाना होगा। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना होगा। सनातन भी ऐसा ही है।’

सोशल मीडिया पर अनेक हैंडल हैं जो आए दिन हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाते रहते हैं। वो बेहिचक हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। इन सोशल हैंडल्स की प्रोफाइलों में अक्सर यही रहता है कि वो आंबेडकरवादी हैं, जातिवाद के खिलाफ हैं और भीम-मीम के नारे के साथ हैं। इनकी टिप्पणियां देखकर कोई भी समझ सकता है कि उन्हें कानून की जरा भी पर परवाह नहीं है। ऐसा लगता है कि खास जाति में पैदा होने और खास विचारधारा में विश्वास करने की वजह से उन्हें हिंदुओं की आस्था पर बेधड़क चोट करने का उनका अधिकार है।

हिंदुओं पर ऐसे हमले होते हैं तो कहा जाता है कि सनातन धर्म इतना कमजोर नहीं कि इन बातों का कुछ नकारात्मक असर हो जाए। फिर हिंदू आज इतने बड़े विश्वासघात के बाद जोरदार प्रतिक्रिया तक क्यों नहीं दे पाया? क्या यह नेताओं और धर्मविरोधियों के ऐसे ही लगातार हमलों का असर नहीं है कि हिंदू अपनी आस्था पर बड़े से बड़े चोट को भी सामान्य मान चुका है? आक्रमण के खिलाफ एकजुट होना तो दूर, चूं तक करने की भी ताकत खो चुके हिंदू समाज से आखिर सनातन की रक्षा की उम्मीद लगाई जाए तो कैसे? फिर जो लोग हिंदू आस्था के अपमान पर प्रतिक्रिया देने वालों को ही सनातन की सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने लगते हैं, उनसे यह पूछने का वक्त नहीं आ गया कि क्या सनातन कमजोर हुआ या नहीं? क्या उनसे यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि मुलायम रस्सी के बार-बार घर्षण से बेहद कठोर पत्थर भी घिस सकता है तो लगातार हमलों से सनातन कमजोर नहीं होगा, यह ज्ञान उन्हें कहां से मिला क्योंकि इतिहास से लेकर आजतक प्रमाण तो बिल्कुल उलट हैं।

 

आखिर तिरुपति जैसे शुद्ध स्थान पर कैसे पहुंचा गौमांस?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि तिरुपति जैसे शुद्ध स्थान पर गौमांस कैसे पहुंचा है! विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी के मंदिर में लड्डू बनाने में गोमांस, मछली का तेल और पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल की बात सामने आने पर सनसनी मच गई है। सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह दावा किया था। उनकी पार्टी ने कहा है कि गुजरात स्थित पशुधन प्रयोगशाला में इस मिलावट की पुष्टि की गई है। नायडू ने आरोप लगाया था कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने पवित्र मिठाई तिरुपति लड्डू बनाने में घटिया सामग्री और पशु चर्बी का इस्तेमाल किया था।

टीडीपी ने आरोप लगाया है कि जब आंध्र प्रदेश में YSR कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तो उस वक्त मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी थे। तब इस समिति ने मंदिर के प्रसाद के लड्डुओं में खराब और मिलावटी घी का इस्तेमाल किया। हालांकि, वाईएसआरसीपी ने इससे इनकार किया है। वहीं, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस मामले में जांच कराने का भरोसा देते हुए नेशनल लेवल पर एक सनातन धर्म रक्षा बोर्ड बनाए जाने की वकालत की है। आइए-जानते हैं पूरा मामला, रिपोर्ट में क्या है और तिरुपति मंदिर कितना दौलतमंद है। इसका अंग्रेजी राज से कनेक्शन भी समझते हैं। लड्डू में गोमांस के कथित इस्तेमाल को लेकर यह विवाद हो रहा है। इसमें गोमांस, दुम, पसलियों से हासिल फैट से घी बनाए जाने की बात सामने आई है, जिससे लड्डू तैयार किए जाते हैं। लैब रिपोर्ट में इनसे बने घी में मछली के तेल और पशुओं की चर्बी के भी इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। इन चीजों से बने घी को ठंडा किए जाने पर नरम मक्खन जैसा हो जाता है।

टीडीपी प्रवक्ता अनम वेंकट रमण रेड्डी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कथित प्रयोगशाला रिपोर्ट दिखाई, जिसमें दिए गए घी के नमूने में गोमांस की चर्बी की मौजूदगी की पुष्टि की गई थी। इस रिपोर्ट में लार्ड यानी सुअर की चर्बी और मछली के तेल की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। नमूने लेने की तारीख नौ जुलाई, 2024 थी और प्रयोगशाला रिपोर्ट 16 जुलाई की थी। इस रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि अगर गाय बीमार हो, अगर गाय को वेजिटेबल ऑयल्स और पाम ऑयल दिया गया हो या कुछ केमिकल्स दिए गए हों या गाय कुपोषित हो, तब भी ऐसी स्थिति में फाल्स पॉजिटिव रिजल्ट्स आ सकते हैं और इनके कारण गाय के घी में जानवरों की चर्बी और उनके फैट के अंश पहुंच सकते हैं।

बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि ब्लैकलिस्टेड कॉन्ट्रैक्टर से घी क्यों मंगवाए जा रहे थे। टीटीडी के सूत्रों ने कहा कि जहां गाय का घी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार से 320 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीदा जाता था। अब तिरुपति ट्रस्ट कर्नाटक महासंघ से 475 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से घी खरीद रहा है। तिरुपति देवस्थानम के एक रिकॉर्ड के अनुसार, भगवान बालाजी के नाम पर कई बैंकों में 11,225 किलो सोना रखा गया है, जो उन्हें श्रद्धालुओं से चढ़ावे में मिला है। इसके अलावा मंदिर में सभी देवों पर सोने की आभूषण चढ़ाए गए हैं, जिनका वजन 1088.2 किलो है। वहीं, चांदी के गहनों का कुल वजन 9071.85 किलो है। भगवान बालाजी के पास 6,000 एकड़ की जंगल भूमि है। 75 जगहों पर 7,636 एकड़ की अचल संपत्ति है। यही नहीं, उनके पास 1,226 एकड़ की खेतिहर भूमि है और 6409 एकड़ गैर कृषि जमीन है। तिरुपति से जुड़े देशभर में 535 संपत्तियां और 71 मंदिर हैं, जिनमें से 159 को लीज पर दिया गया है। इनसे सालाना 4 करोड़ की इनकम होती है। इतनी ही कमाई उसे मंडपम को लीज पर देने से होती है। श्रद्धालुओं से हर साल 1,021 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिलते हैं।

2022 के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि तिरुमाला में भगवान बालाजी की हुंडी की सालाना इनकम 1,400 करोड़ रुपए है। वहीं, यह कमाई सचिन तेंदुलकर की सालाना इनकम 1,300 करोड़ रुपए और विराट कोहली की सालाना इनकम करीब 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। टीटीडी तिरुमाला में हर दिन लगभग 3 लाख लड्डू तैयार करता है और श्रद्धालुओं को बांटता है। अकेले लड्डू की बिक्री से ट्रस्ट को हर साल करीब 500 करोड़ रुपए की कमाई होती है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम लड्डू पोटू में एक दिन में औसतन 3 लाख लड्डू तैयार करता है। मौजूदा वक्त में पोटू की क्षमता प्रतिदिन 8 लाख लड्डू बनाने की है।

पोटू में तीन तरह के प्रोक्तम, अस्थानम और कल्याणोत्सवम लड्डू बनाए जाते हैं। प्रोक्तम लड्डू मंदिर में आने वाले सभी आम तीर्थयात्रियों को नियमित रूप से बांटा जाता है। यह आकार में छोटा है और इसका वजन 60-75 ग्राम है। ये लड्डू बड़ी संख्या में तैयार किये जाते हैं। वहीं, अस्थानम लड्डू केवल विशेष उत्सव पर ही बनाया जाता है। यह आकार में बड़ा है और इसका वजन 750 ग्राम है। इसे अधिक काजू, बादाम और केसर से तैयार किया जाता है। वहीं, कल्याणोत्सवम लड्डू कुछ खास पर्व पर हिस्सा लेने वाले श्रद्धालुओं को ही बांटा जाता है। आमतौर पर इन लड्डुओं की शेल्फ लाइफ लगभग 15 दिनों की है।

जनवरी, 1857 ई. से ब्रिटिश सेना में ‘नई एनफील्ड राइफल’ का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इसमें गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग होता था। भारतीय सैनिकों को इन कारतूसों का इस्तेमाल करने से पहले मुंह से काटना पड़ता था। माना जाता है कि यह भारत की हिंदू-मुस्लिम जनता के बीच बांटों और राज करो की नीति का प्रयोग था। 29 मार्च, 1857 को तत्कालीन कलकत्ता के 34-नेटिव इन्फैंट्री बैरकपुर के सैनिक मंगल पांडे के नेतृत्व में कुछ सैनिकों ने बगावत करते हुए इन कारतूसों के इस्तेमाल से मना कर दिया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ पहली गोली चला  दी।

 

आखिर कौन है स्पेस में जाने वाले इंडियन एस्ट्रोनॉट?

आज हम आपको स्पेस में जाने वाले इंडियन एस्ट्रोनॉट के बारे में जानकारी देने वाले हैं! भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इतिहास रचने के लिए तैयार हैं। वह 2025 में Axiom-4 (Ax-4) मिशन के पायलट होंगे। इस मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहली बार कोई भारतीय एस्ट्रोनॉट पहुंचेगा। यह ऐतिहासिक मिशन अमेरिका के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। यह चार दशकों से भी ज्यादा समय में भारत की दूसरी सरकार द्वारा प्रायोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान होगी। इससे पहले 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा की थी। Axiom-4 मिशन भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय पहल के तहत हो रहा है।Ax-4 अंतरिक्ष यात्री मिशन की तैयारी के लिए नासा, एलोन मस्क द्वारा स्थापित स्पेस-एक्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी , जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी और अन्य साझेदार सुविधाओं में कड़ी ट्रेनिंग करेंगे। इस ट्रेनिंग में सुरक्षा प्रोटोकॉल, स्वास्थ्य प्रबंधन और आईएसएस सिस्टम संचालन शामिल हैं। पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के आधिकारिक दौरे के दौरान घोषणा की थी कि एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा करेगा। इसके बाद इसरो ने एक अमेरिकी मानव अंतरिक्ष उड़ान सर्विस प्रोवाइडर और बुनियादी ढांचा डेवलपर, Axiom Space के साथ एक अंतरिक्ष उड़ान समझौते पर हस्ताक्षर किए।

शुभांशु शुक्ला और उनके बैकअप साथी ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर दोनों भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं। वे इस मिशन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दल में शामिल हुए हैं। इसके कमांडर पैगी व्हिटसन ने ईमेल पर टीओआई के साथ शुक्ला की भूमिका, मिशन और अन्य जरूरी बातों को शेयर किया। उन्होंने बताया, ‘Ax-4 पायलट के रूप में, शुक्ला नेविगेशन और डॉकिंग प्रक्रियाओं जैसे जरूरी अंतरिक्ष यान संचालन में मेरी मदद करेंगे। उन्हें दी गई ट्रेनिंग आपात स्थिति को संभालने और महत्वपूर्ण सिस्टम जांच करने के लिए तैयार करेगा। इसके अलावा शुक्ला माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों और मैनेजमेंट करके साइंस्टिफिक रिसर्च का काम भी देखेंगे। इस भूमिका में अंतरिक्ष यान के तकनीकी और परिचालन दोनों पहलुओं में व्यापक ट्रेनिंग शामिल है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वह मिशन के लक्ष्यों और समग्र सफलता में योगदान करने के लिए अच्छी तरह से तैयार हैं।’

हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव पर इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री मिशन के हिस्से के रूप में आईएसएस पर पांच प्रयोग करेंगे। यह मिशन भारत को अपने गगनयान कार्यक्रम के लिए अंतरिक्ष उड़ान संचालन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भी मदद करेगा। व्हिटसन ने कहा कि Axiom Space ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तकनीकी कौशल और आपातकालीन तैयारी दोनों पर जोर देते हुए गहन ट्रेनिंग की है। इसरो प्रमुख ने बताया, ‘हम आईएसएस मिशन के लिए NASA और अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा Axiom मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री की हेल्थ की निगरानी और रखरखाव के लिए अत्याधुनिक मेडिकल रिसर्च और टेक्नलॉजी में निवेश करता है। इन रणनीतियों का लाभ उठाकर, Axiom Space का लक्ष्य जोखिमों को कम करना और हमारे मिशनों की सफलता सुनिश्चित करना है।’

तैयारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए, उन्होंने कहा कि Ax-4 अंतरिक्ष यात्री मिशन की तैयारी के लिए नासा, एलोन मस्क द्वारा स्थापित स्पेस-एक्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी , जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी और अन्य साझेदार सुविधाओं में कड़ी ट्रेनिंग करेंगे। इस ट्रेनिंग में सुरक्षा प्रोटोकॉल, स्वास्थ्य प्रबंधन और आईएसएस सिस्टम संचालन शामिल हैं।व्हिटसन अंतरिक्ष में 675 दिनों के प्रभावशाली इतिहास के साथ अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। वो दो बार की आईएसएस कमांडर रह चुके हैं। Axiom Space के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान के निदेशक के रूप में उनकी वर्तमान स्थिति कॉरपोर्ट स्पेस को आगे बढ़ाने में मिशन के महत्व पर जोर देता है। शुभांशु शुक्ला और उनके बैकअप साथी ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर दोनों भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं। वे इस मिशन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दल में शामिल हुए हैं। इसके कमांडर पैगी व्हिटसन ने ईमेल पर टीओआई के साथ शुक्ला की भूमिका, मिशन और अन्य जरूरी बातों को शेयर किया।बता दें कि पहले 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा की थी। Axiom-4 मिशन भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय पहल के तहत हो रहा है। पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के आधिकारिक दौरे के दौरान घोषणा की थी कि एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा करेगा। आईएसएस के लिए Ax-4 मिशन का हिस्सा पोलैंड के स्लावोस्ज़ उज़्नानस्की और हंगरी के टिबोर कापू भी हैं।