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आखिर मोदी सरकार के खिलाफ न्यायालय क्यों पहुंची झारखंड सरकार?

यह सवाल उठना लाजमी है कि झारखंड सरकार मोदी सरकार के खिलाफ न्यायालय क्यों पहुंची है!सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के कॉलेजियम की सिफारिश पर सरकार कबतक फैसला ले, इसकी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। इसीलिए ऐसा भी देखा जाता है कि कॉलेजियम की सिफारिशों पर सरकारें कभी-कभी देर तक कोई फैसला नहीं लेती। लेकिन अब इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई है। गुहार किसी और ने नहीं बल्कि एक राज्य सरकार ने लगाई है। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने। उसका आरोप है कि झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में केंद्र सरकार जानबूझकर देरी कर रही है। झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हेमंत सोरेन सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार जस्टिस एम. एस. रामचंद्र राव को झारखंड हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के 11 जुलाई के प्रस्ताव को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि जस्टिस बी. आर. सरंगी के 19 जुलाई को रिटायर होने के बाद से हाई कोर्ट में दो महीने से मुख्य न्यायाधीश नहीं है। याचिका में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस वैकेंसी को भरने के लिए सिफारिश भेजी थी। कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को सिफारिश की थी कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का तबादला झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में किया जाए। झारखंड सरकार का कहना है कि दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार ‘जानबूझकर’ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। यह स्थिति दिखाती है कि केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों की अवहेलना कर रही है।

झारखंड सरकार का कहना है कि कॉलेजियम के प्रस्ताव पर केंद्र की जानबूझकर की जा रही यह निष्क्रियता संविधान के अनुच्छेद 216 का भी उल्लंघन है। इस अनुच्छेद में कहा गया है, ‘प्रत्येक उच्च न्यायालय एक मुख्य न्यायाधीश और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा…’। संवैधानिक अदालतों को यह अधिकार है कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती हैं जो जानबूझकर ऐसी अदालतों के न्यायिक आदेशों की अवहेलना करता है या उनकी अनदेखी करता है।

हालांकि, यह देखना होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को न्यायिक आदेशों के समान ही दर्जा दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो केंद्र सरकार द्वारा असहमति या कार्यान्वयन में देरी करने पर अवमानना न्यायालय अधिनियम के प्रावधान लागू हो सकते हैं। कॉलेजियम की सिफारिशों के तेजी से क्रियान्वयन पर जोर देते हुए एक बार सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अदालत की अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी थी। तब जस्टिस संजय किशन कौल, जो अब रिटायर हो चुके हैं, ने केंद्र को चेताया था कि उसके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट ने 1990 के दशक में तीन अलग-अलग फैसलों के माध्यम से तय किया था कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति सिर्फ कॉलेजियम के माध्यम से होगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम की सिफारिश को कब तक मंजूरी दी जाए, इसकी कोई डेडलाइन तय नहीं की थी। इसके अलावा, केंद्र सरकार कॉलेजियम के फैसले को अस्वीकार तो नहीं कर सकती, लेकिन वह उन मुद्दों को उठाकर पुनर्विचार की मांग जरूर कर सकती है जो उसे लगता है कि कॉलेजियम के ध्यान में नहीं आए हैं या उन पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया है।

झारखंड द्वारा केंद्र के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की जानकारी सीजेआई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को दी। सीजेआई ने ये जानकारी उस वक्त दी जब अटॉर्नी जनरल ये गुजारिश कर रहे थे कॉलेजियम की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार की सुनवाई स्थगित कर दी जाए। याचिकाकर्ता हर्ष विहोर सिंह ने मांग की है कि हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर को लेकर कॉलेजियम की सिफारिशों पर समयबद्ध कार्यान्वयन हो।

अटॉर्नी जनरल ने CJI और जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच को बताया कि वह अगले हफ्ते उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर विवरण देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वे शुक्रवार को स्थगन का अनुरोध नए सिरे से करें क्योंकि मामला पहले ही सूचीबद्ध हो चुका है। 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस राव का हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से झारखंड तबादला करने की सिफारिश करने के अलावा 7 उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्र ने कुछ ‘संवेदनशील सामग्री’ का हवाला देते हुए कॉलेजियम से कुछ सिफारिशों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। इस सामग्री के आधार पर, कॉलेजियम ने 17 सितंबर को तीन उच्च न्यायालयों- हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख – में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर अपने प्रस्तावों में बदलाव किए थे।

 

क्या चंद्रयान और मंगलयान के बाद होने वाला है शुक्रयान?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब चंद्रयान और मंगलयान के बाद शुक्रयान होने वाला है या नहीं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने चंद्रयान 1, 2 और 3 की कड़ी में चंद्रयान 4 मिशन को भी हरी झंडी दे दी है। इसका मकसद चांद पर सफलतापूर्वक उतरने के बाद पृथ्वी पर वापस आने में प्रयोग होने वाली जरूरी टेक्नॉलजी का विकास करना है। साथ ही चंद्रमा से नमूने लाकर पृथ्वी पर उनका विश्लेषण करना है। चंद्रयान 4 मिशन चंद्रमा पर वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस आने के लिए मूलभूत तकनीकी क्षमताओं को हासिल करना है। कैबिनेट ने चंद्रमा और मंगल के बाद शुक्र पर मिशन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही गगनयान फॉलो ऑन मिशन और भारतीय अंतरिक्ष केंद्र के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। चंद्रयान 4′ मिशन के लिए तकनीक विकास के लिए कुल 2,104.06 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी इसरो की है। उद्योग और शिक्षा जगत की भागीदारी से इस अभियान को मंजूरी मिलने के 36 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। डॉकिंग/अनडॉकिंग, लैंडिंग, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी और चंद्रमा के नमूना जुटाना और उनके विश्लेषण को पूरा करने के लिए ज़रुरी तकनीक तैयार होगी। सरकार का कहना है कि चंद्रयान 3 लैंडर की चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग के सफल प्रदर्शन ने कुछ अहम टेक्नॉलजी को स्थापित किया है और उन क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जो केवल कुछ ही दूसरे देशों के पास है। चंद्रमा के नमूने एकत्र करने और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता के प्रदर्शन से ही सफल लैंडिंग मिशन का अगला कदम तय हो सकेगा। यह मिशन भारत को मानवयुक्त मिशनों, चंद्रमा के नमूनों की वापसी और चंद्रमा के नमूनों के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण मूलभूत प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर होने में सक्षम बनाएगा।

कैबिनेट ने शुक्र ग्रह संबंधी खोज और अध्ययन के लिए ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन (शुक्रयान)’ के विकास को भी मंजूरी दे दी। अंतरिक्ष विभाग से संचालित ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ में शुक्र ग्रह की कक्षा में एक अंतरिक्ष यान स्थापित करना शामिल होगा ताकि इसकी सतह व उपसतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शुक्र के वायुमंडल पर सूर्य के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके। चंद्रमा और मंगल के बाद भारत ने शुक्र ग्रह के संबंध में विज्ञान के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। कैबिनेट ने वैज्ञानिक जांच और शुक्र के वायुमंडल, भूविज्ञान को बेहतर ढंग से समझने तथा इसके घने वायुमंडल की जांच करके वैज्ञानिक डेटा जुटाने के लिए शुक्र पर मिशन को मंजूरी दी है। शुक्र, पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह है और माना जाता है कि इसका निर्माण पृथ्वी जैसी ही परिस्थितियों में हुआ है, यह इस बात को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करता है कि ग्रहों का वातावरण किस प्रकार बहुत अलग तरीके से विकसित हो सकता है।

कैबिनेट ने गगनयान कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए भारतीय अंतरिक्ष केंद्र की पहली इकाई के निर्माण को स्वीकृति दे दी है। भारतीय अंतरिक्ष केंद्र के पहले मॉड्यूल (बीएएस 1) के विकास और बीएएस के निर्माण और संचालन के लिए विभिन्न तकनीकों का विकास करने और मान्यता प्रदान करने के मिशन को मंजूरी दी गई है। भारतीय अंतरिक्ष केंद्र और पहले के मिशनों के लिए नए विकास और वर्तमान में जारी गगनयान कार्यक्रम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आवश्यकताओं को शामिल करने के लिए गगनयान कार्यक्रम के दायरे को बढ़ाया गया है। गगनयान कार्यक्रम में संशोधन करना और वर्तमान में जारी गगनयान कार्यक्रम के विकास के लिए एक अतिरिक्त मानव रहित मिशन और अतिरिक्त हार्डवेयर आवश्यकता को शामिल करना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान एनजीएलवी के विकास को भी मंजूरी दे दी, जिसकी पेलोड क्षमता भार ले जाने की क्षमता इसरो के लॉन्च वीइकल मार्क 3 की तुलना में तीन गुना अधिक है। बता दें कि अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी इसरो की है। उद्योग और शिक्षा जगत की भागीदारी से इस अभियान को मंजूरी मिलने के 36 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। डॉकिंग/अनडॉकिंग, लैंडिंग, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी और चंद्रमा के नमूना जुटाना और उनके विश्लेषण को पूरा करने के लिए ज़रुरी तकनीक तैयार होगी। उसने एनजीएलवी के विकास, तीन विकासात्मक उड़ानों, आवश्यक सुविधा, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान के लिए 8,240 करोड़ रुपये आवंटित किए।

 

बीफ को लेकर क्या बोले इस्लाम धर्म प्रचारक जाकिर नाइक?

हाल ही में इस्लाम धर्म प्रचारक जाकिर नाइक ने बीफ को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है ! इस्लाम धर्म प्रचारक जाकिर नाइक ने पाकिस्तान में बीफ को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इस बीच मौलाना तौकीर रजा ने बुधवार को नाइक के बीफ वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुसलमान गाय का मांस खाना पसंद नहीं करते। उन्होंने कहा कि जहां तक गाय के मांस का सवाल है, मैंने अभियान चलाया है। हम पर गाय का मांस खाने का आरोप लगाया जाता है। मगर मुसलमान गाय का मांस खाना पसंद नहीं करते हैं, क्योंकि पैगंबर ने हदीस में साफ तौर पर कहा है कि गाय का मांस बीमारी फैलाता है और गाय का दूध शिफा (रोग से मुक्ति दिलाना) करता है। इसलिए हमें बदनाम करने के लिए कहा जाता है कि मुसलमान गाय का मांस खाता है। कोई भी गाय का मांस नहीं खाता है और मैंने इस पर लगातार कार्यक्रम भी किए हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा मैं कहता हूं कि जिन लोगों पर देश में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही लोग झूठ फैलाकर और मुसलमानों पर झूठे आरोप लगाकर देश का माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर ईमानदारी से जांच की जाए तो जो लोग गाय के मांस का कारोबार करते हैं, उनमें आप पाएंगे कि बहुत से लोग गैर मुस्लिम हैं। कोई मुसलमान नहीं है। मुसलमान गाय के मांस को अपना कारोबार नहीं बनाते हैं। यह जो भी है, यह मुसलमानों और उन लोगों पर झूठा आरोप है जो यह तर्क देते हैं कि हम इसे नहीं खाते और इसे नहीं खाना चाहिए।

उन्होंने बताया, ‘हजरत अल्लामा फजले हक खैराबादी आखिरी मुगल बादशाह थे। हजरत मुफ्ती साहब ने मुगल बादशाह को सातवीं सलाह दी थी कि अगर कोई गाय काटते या गाय का मांस खाते हुए पाया जाए तो उसे रस्सी से बांधकर उड़ा दिया जाए। जिन्होंने ऐसा किया है, उनके मन में उनके प्रति रंजिश है। ये सारी झूठी बातें मुसलमानों पर झूठे आरोप लगाकर आम हिंदुओं के मन में नफरत पैदा करने के लिए की जा रही है। हमें जरूरत है कि इन बातों को समझाया जाए।

नवरात्र में मीट की दुकानें बंद रहने पर उन्होंने कहा कि वे जितना चाहें बेईमानी कर सकते हैं। सरकार बेईमान है। सरकार के संरक्षण में गुंडों को खुली छूट है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कानून अपने हाथ में ले लिया है। देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, पुलिस को संज्ञान लेना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। जो लोग देश में इस तरह का माहौल बना रहे हैं वे देश के दुश्मन हैं या देशभक्त हैं। अपने देश में शांति बनाए रखने के कारण मुसलमान इन बेईमान लोगों के इन सारे जुल्मों और अत्याचारों का जवाब नहीं दे रहे हैं, कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम बुजदिल हैं। हम साबित कर देंगे कि हम बड़े दिल वाले नहीं हैं, क्योंकि हम अपने देश में अमन और चैन चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एक निकम्मा आदमी हमारी मस्जिद में जाता है और हमारी मस्जिद के कागज मांगता है। उसको ये अधिकार किसने दिया? सरकार बेईमानी कर रही है। सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। सच तो ये है कि 2014 से पहले ये लोग बम फेंकते थे और कहते थे कि मुसलमानों ने बम फेंके हैं। वही लोग अब बम नहीं फेंक रहे हैं। वो आतंकवाद फैला रहे हैं। वो हर मोहल्ले में मस्जिदों पर बुलडोजर चला रहे हैं। ये सब बेईमानी या जो भी हो रहा है। उस समय उनको ब्लास्ट के काम पर लगा दिया गया था। बता दें कि हजरत मुफ्ती साहब ने मुगल बादशाह को सातवीं सलाह दी थी कि अगर कोई गाय काटते या गाय का मांस खाते हुए पाया जाए तो उसे रस्सी से बांधकर उड़ा दिया जाए। जिन्होंने ऐसा किया है, उनके मन में उनके प्रति रंजिश है। ये सारी झूठी बातें मुसलमानों पर झूठे आरोप लगाकर आम हिंदुओं के मन में नफरत पैदा करने के लिए की जा रही है। अब वो काम खत्म हो गया है क्योंकि सरकार बेईमान लोगों की है। तो अब उनको ये काम दे दिया गया है कि उनकी नफरत चलती रहे।

 

3 अंक: भारत भले ही पाकिस्तान से हार जाए, लेकिन वर्ल्ड कप के अंतिम चार में जाना है तो बराबरी करनी होगी

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महिला टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया. हालांकि इसका हरमनप्रीत कौर को कोई फायदा नहीं हुआ. क्योंकि उन्हें विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने में मुश्किल हो रही है। सेमीफाइनल अभी काफी दूर है. महिला टी20 वर्ल्ड कप में रविवार को भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया. हालांकि इसका हरमनप्रीत कौर को कोई फायदा नहीं हुआ. क्योंकि, वे नेट रन रेट में ज्यादा सुधार नहीं कर पाए. उनका वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचना मुश्किल है.

वर्ल्ड कप में अपने पहले मैच में भारत न्यूजीलैंड से 58 रनों के बड़े अंतर से हार गया था. दूसरे मैच में उसने पाकिस्तान को 6 विकेट से हराया. लेकिन 106 रनों का पीछा करते हुए भारत ने 18.5 ओवर खेले. परिणामस्वरूप उनका नेट रन रेट अभी भी बहुत कम है। प्रत्येक ग्रुप से दो टीमें नॉकआउट के लिए जाएंगी। इसीलिए भारत पर दबाव ज़्यादा है.

भारत के ग्रुप में न्यूजीलैंड शीर्ष पर रहा. एक मैच खेलने पर उनके अंक 2 हैं। नेट रन रेट 2.900. ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर है. उन्होंने एक मैच भी खेला और 2 अंक हासिल किए. नेट रन रेट 1.908। तीसरे नंबर पर पाकिस्तान है. दो मैच खेलने के बाद उनके अंक 2 हैं। नेट रन रेट 0.555। भारत चौथे नंबर पर है. उन्होंने दो मैच भी खेले और 2 अंक हासिल किए. हरमनप्रीत का नेट रन रेट -1.217 है. श्रीलंका ने दो मैच खेले और दोनों हारे। उनके अंक 0 हैं. नेट रन रेट -1.667.

ऐसे में भारत को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए तीन नंबरों का मिलान करना होगा.

चित्र 1 – श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया को बचे हुए दो मैचों में हार का सामना करना पड़ेगा। तब भारत के अंक 6 हो जायेंगे. न्यूजीलैंड को भी बाकी तीन मैच जीतने होंगे. तो उनके अंक 8 हो जायेंगे. ऐसे में न्यूजीलैंड और भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगे.

नंबर 2 – अगर ऑस्ट्रेलिया अपने बचे हुए सभी मैच जीतता है तो उसके 8 अंक होंगे। उस स्थिति में वे भारत को भी खो देंगे। श्रीलंका को हराने पर भारत को 4 अंक मिलेंगे. ऐसे में भारत को उम्मीद करनी होगी कि श्रीलंका और पाकिस्तान न्यूजीलैंड को हरा दें. ऐसे में भारत और पाकिस्तान दोनों के 4 अंक होंगे. अगर नेट रन रेट अच्छा रहा तो भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा.

चित्र 3 – यदि भारत शेष दो मैचों में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हरा देता है तो उसे 6 अंक मिलेंगे। अगर ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और पाकिस्तान को दोबारा हरा देता है तो उसके भी 6 अंक हो जाएंगे. अगर न्यूजीलैंड पाकिस्तान और श्रीलंका को हरा देता है तो उसके भी 6 अंक हो जाएंगे. फिर इन तीन टीमों में से नेट रन रेट के आधार पर दो टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी.

तीन में से दो मामलों में नेट रन रेट बड़ी भूमिका निभा सकता है. इसलिए भारत को न केवल जीतना होगा, बल्कि बड़े अंतर से जीतना होगा। हरमनप्रीत को पहले अपने बाकी दोनों मैच जीतने की कोशिश करनी होगी. तब स्थिति कुछ बेहतर होगी. ऐसे में भारत की अंतिम चार में जाने की संभावना बढ़ जाएगी.

जीत की खुशी में भी भारत की चिंताएं बढ़ गईं. भारत ने पाकिस्तान को हराकर महिला टी20 विश्व कप के नॉकआउट चरण में वापसी की। लेकिन इस जीत के रास्ते में कप्तान हरमनप्रीत कौर चोटिल हो गईं. उनकी चोट कितनी गंभीर है?

पाकिस्तान से मिले 106 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत कुछ समय के लिए दबाव में था. हरमनप्रीत ने वहां से टीम का नेतृत्व किया. उन्होंने कप्तानी पारी खेली. ऐसा लग रहा था कि भारत उनकी बल्लेबाजी से मैच जीत जाएगा. लेकिन जब टीम की जीत के लिए 2 रन बचे होते हैं तो उनके कंधे की मांसपेशियों में तनाव महसूस होता है. ऐसे हालात बन जाते हैं कि उन्हें मैदान छोड़ना पड़ता है. वह नीचे नहीं उतर सका. हरमनप्रीत 29 रन बनाकर नाबाद रहीं.

हरमनप्रीत मैच के बाद बात करने भी नहीं आ सकीं. उपकप्तान की जगह स्मृति मंधाना को लिया गया. उनसे सबसे पहले हरमनप्रीत की चोट के बारे में पूछताछ की गई. इसके जवाब में मंधाना ने कहा, ”मैं इतनी जल्दी कुछ नहीं कह सकती. डॉक्टर उनकी चोटों की जांच कर रहे हैं. मुझे आशा है कि कोई गंभीर चोट नहीं होगी. वह जल्द ही वापस आएंगे।” पाकिस्तान को हराने के बावजूद भारत नेट रन रेट में ज्यादा सुधार नहीं कर सका. 106 रनों का पीछा करते हुए उन्होंने 18.5 ओवर खेले। मंधाना को उम्मीद है कि वे अगले मैचों में अपना नेट रन रेट सुधारेंगे. उन्होंने कहा, ”हम नेट रन रेट के बारे में सोच रहे थे. लेकिन मैं और शेफाली गेंद को ठीक से हिट नहीं कर सके. शुरुआत अच्छी नहीं रही. इसलिए मैं तेजी से रन नहीं बना सका. लेकिन इस मैच में जीत अहम थी. हम शुरू कर चुके हैं। उम्मीद है कि अगले मैचों में नेट रन रेट बेहतर होगा।”

भारत का अगला मैच बुधवार 9 अक्टूबर को है. वे उस दिन श्रीलंका के खिलाफ खेलेंगे। भारत को नॉकआउट मुकाबले में बने रहने के लिए वह मैच जीतना होगा. लेकिन इस बात पर संदेह है कि हरमनप्रीत उस मैच में उपलब्ध होंगी या नहीं.

नहीं दिखीं दीपिका! रणवीर सिंह ने अपने फैंस को पर्दे के पीछे की ‘लेडी सिंघम’ की सच्चाई बताई

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यह खबर रविवार को सामने आई। ‘सिंघम अयान’ के प्रमोशनल फ्लैश की लंबाई पांच मिनट है! यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नई मिसाल है। सोमवार को यह अटकलें सच साबित हुईं। जब फिल्म की एक झलक जारी की गई तो यह 4 मिनट 58 सेकंड लंबी निकली। रोहित शेट्टी ने पहले कहा था कि वह ‘सिंघम आएं’ के साथ अपने पुलिस जगत को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं। टीज़र से पता चलता है कि फिल्म में कई आश्चर्य हैं।

‘सिंघम’ एक लोकप्रिय बॉलीवुड फ्रेंचाइजी है। रोहित शेट्टी की ‘कॉप यूनिवर्स’ यानी पुलिस यूनिवर्स की शुरुआत बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन से हुई थी। फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म ‘सिंघम’ 2011 में रिलीज हुई थी। 2014 में ‘सिंघम रिटर्न्स’ आई। दो फिल्मों की सफलता के बाद, रोहित ने ‘सिम्बा’, ‘सूर्यवंशी’ के साथ पुलिस जगत को आगे बढ़ाया। इस बार ‘सिंघम फर्स्ट’. फिल्म में दीपिका पादुकोण और टाइगर श्रॉफ भी पुलिसवाले की भूमिका में होंगे।

अभियान में शुरू से ही कार्रवाई की झलक दिखी। बाजीराव सिंघम की पत्नी अवनी (करीना कपूर खान) का अपहरण हो जाता है। इस बार अजय की नई मुहिम अपनी पत्नी को बचाने की है. निर्देशक ने समकालीन संदर्भ में ‘रामायण’ के मूल स्वर को कहानी में पिरोया है। श्रीलंका की बात आ गई. यदि बाजीराव रामचन्द्र हैं तो बाघ का पात्र लमशाना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘सिंबा’ रणवीर सिंह की तुलना हनुमान से की जा सकती है. खल चरित्र इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी के आकर्षणों में से एक है। अर्जुन कपूर हैं. प्रचार में उन्हें ‘रावण’ कहा जाता है। जैकी श्रॉफ का किरदार रहस्य से घिरा हुआ है। दीपिका भी हुईं हैरान. यह पहली बार है जब रोहित ने श्रृंखला में एक महिला पुलिसकर्मी की भूमिका निभाई। दीपिका द्वारा अभिनीत शक्ति, सिंघम को अपना ‘गुरु’ कहती है। फिल्म में जबरदस्त एक्शन के साथ-साथ रणवीर की कॉमेडी भी फिल्म का मुख्य आकर्षण होने वाली है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। आखिर में ‘सूर्यवंशी’ अक्षय कुमार नजर आते हैं।

फिल्म उद्योग विशेषज्ञों के एक समूह के अनुसार, स्टार कलाकारों की टोली ‘सिंघम आएं’ बॉलीवुड में साल की सबसे सफल फिल्मों में से एक हो सकती है। पहले सुनने में आया था कि फिल्म की रिलीज में देरी हो सकती है. लेकिन पहले से तय समय के मुताबिक फिल्म अगली दिवाली पर रिलीज होगी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कैसा बिजनेस करती है इस पर सबकी नजर रहेगी. एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण इसी साल 8 सितंबर को बेटी की मां बनीं। तब से वह छुपे हुए हैं. क्या वह अपने बच्चे के साथ अस्पताल से घर लौटा? उनके फैंस सवाल उठा रहे हैं. यह सच है कि आप सोशल मीडिया पर मातृत्व को लेकर कई चुटकुले पोस्ट कर रहे हैं। लेकिन, उनकी कहीं कोई तस्वीर नहीं है. कई लोग ‘सिंघम अगेन’ के ट्रेलर रिलीज पर उन्हें देखने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन नहीं, दीपिका ने फैंस को निराश कर दिया. हालांकि रणवीर सिंह स्वमहिमा में मौजूद थे. अकेले क्यों आए एक्टर? इवेंट में आने पर उन्होंने इसकी वजह बताई.

7 अक्टूबर को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में ट्रेलर रिलीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसी दिन के उपलक्ष्य में इलाही का आयोजन किया जाता है. रणवीर सिंह, अजय देवगन, अक्षय कुमार, करीना कपूर खान मौजूद रहे। लेकिन इस शो के आकर्षण का केंद्र दीपिका पादुकोण हैं. क्योंकि हर कोई ये देखना चाह रहा था कि मां बनने के बाद दीपिका कैसा महसूस करती हैं. लेकिन रणवीर ने कहा, ”दीपिका अपनी बेटी के साथ व्यस्त हैं, रात में उनकी देखभाल करना मेरा कर्तव्य है, इसलिए मैं अपनी पत्नी के बिना आने के बावजूद आ सका, रणवीर ने प्रवेश करते ही पोस्टर पर अपनी पत्नी की तस्वीर को लगभग झुका दिया।” आयोजन स्थल। फिर मुस्कुराते हुए पोज दें. दीपिका प्रेगनेंसी के दौरान इस फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। ऐसा एक्टर ने कहा. इस फिल्म के ट्रेलर का दर्शक कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं. यह फिल्म 1 नवंबर को रिलीज होने जा रही है.

अंतरिक्ष में बैठकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगी सुनीता, धरती तक कैसे पहुंचेगी बात?

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सुनितारा पृथ्वी की सतह से 400 किमी ऊपर आईएसएस में है। जून में वहां पहुंचने के बाद सुनीता और उनके साथियों को शोध पूरा करने के आठ दिन बाद धरती पर लौटना था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स तकनीकी समस्याओं के कारण जून से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में फंसी हुई हैं। इस बार वह वहीं बैठकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने जा रहे हैं। वह व्यवस्था अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र नासा ने की थी।

सुनितारा पृथ्वी की सतह से 400 किमी ऊपर आईएसएस में है। जून में वहां पहुंचने के बाद सुनीता और उनके साथियों को शोध पूरा करने के आठ दिन बाद धरती पर लौटना था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। वे जिस बोइंग कंपनी के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान पर थे, उस अंतरिक्ष यान में कुछ तकनीकी समस्याएं आ गईं। चूंकि हीलियम गैस लीक हो रही थी, इसलिए काम तो पूरा हो गया, लेकिन सुनीतारा उसे दबाकर धरती पर वापस नहीं लौट सकीं। इस बार अमेरिकी नागरिक सुनीता उस आईएसएस में बैठकर वोट करेंगी. 1997 से उस देश के नागरिक-अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में बैठकर संयुक्त राज्य अमेरिका के चुनावों में भाग लेने में सक्षम हैं। उस वर्ष टेक्सास विधायिका ने नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में मतदान करने की अनुमति देने वाला एक विधेयक पारित किया। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डेविड वोल्फ अंतरिक्ष में मतदान करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने मीर अंतरिक्ष स्टेशन पर बैठकर मतदान किया. 2020 में आखिरी बार केट रूबिंस ने ISS से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लिया था. सुनीता अंतरिक्ष में बैठकर कैसे वोट कर सकती हैं? सुनीता को सबसे पहले ‘फेडरल पोस्ट कार्ड’ आवेदन पत्र भरना होगा, जिसमें लिखा होगा कि वह व्यक्तिगत रूप से मतदान नहीं कर सकतीं। उस फॉर्म को भरने के बाद उसे आईएसएस के कंप्यूटर सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरना होगा। अंतरिक्ष से वोटिंग नासा के ‘स्पेस कम्युनिकेशन एंड नेविगेशन’ (SCAN) पर निर्भर करती है। सुनीता द्वारा मतपत्र भरने के बाद वह सूचना उपग्रह प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रसारित की जाती है। इलेक्ट्रॉनिक मतपत्र का डेटा न्यू मैक्सिको में नासा की व्हाइट सैंड्स टेस्ट सुविधा में एंटेना द्वारा कैप्चर किया जाएगा। इसके बाद इसे ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर के मिशन कंट्रोल सेंटर में सुरक्षित रूप से पहुंचाया जाएगा।

लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मतपत्र एन्क्रिप्टेड होगा. किसी को पता नहीं चलेगा कि सुनीता ने किसे वोट दिया। ह्यूस्टन से, इलेक्ट्रॉनिक मतपत्र नामित काउंटी क्लर्क को वितरित किया जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में सुनीता ने किसे वोट दिया, यह कार्यकर्ता के अलावा किसी को पता नहीं चलेगा। आख़िरकार आशा की किरण! नासा और अंतरिक्ष यान भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर को पृथ्वी पर वापस लाने की राह पर हैं। अंतरिक्ष यान शनिवार रात फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर गया। ‘क्रू-9’ अभियान शुरू हो रहा है.

दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से कुछ शोध करना है। इसके बाद वह अगले साल फरवरी में सुनीता के साथ धरती पर लौटने वाले हैं। जिस वाहन से उन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की थी उसमें खराबी के कारण सुनीतारा पिछले जून से आईएसएस में फंसी हुई हैं। इस बार उन्हें वापस लाने का अभियान शुरू हुआ.

सुनीता को वापस लाने का ऑपरेशन गुरुवार, 26 सितंबर को शुरू होना था। तूफान हेलेन के कारण फ्लोरिडा में मौसम बहुत खराब था। इसीलिए नासा और अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में नहीं जा सके। नासा के मुताबिक, ‘फाल्कन 9’ रॉकेट और ड्रैगन अंतरिक्ष यान इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए तैयार हैं। ‘क्रू-9’ मिशन का नेतृत्व अंतरिक्ष यात्री निक हॉग करेंगे. विशेषज्ञ के तौर पर अलेक्जेंडर गोर्बुनोव वहां मौजूद रहेंगे. वे दोनों अंतरिक्ष यान में सवार होकर आईएसएस जाएंगे. पांच माह तक करीब 200 शोध होंगे। एलन मस्क की कंपनी का अंतरिक्ष यान नासा के व्यावसायिक प्रोजेक्ट के तहत नौवीं बार इस पर रवाना हो रहा है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अंतरिक्ष यान का ड्रैगन अंतरिक्ष यान 30 सितंबर को भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे आईएसएस पर उतरेगा। यह अंतरिक्ष यान चार लोगों को ले जा सकता है। हालांकि, अंतरिक्ष में फंसी सुनीता और बुच के लिए जगह बनाने के लिए दो सीटें खाली छोड़ी जा रही हैं। वे छह जून से आईएसएस में फंसे हुए हैं। हालाँकि उसे आठ दिन बाद लौटना था, लेकिन वह नहीं लौट सका। वे जिस बोइंग कंपनी के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान पर थे, उस अंतरिक्ष यान में कुछ तकनीकी समस्याएं आ गईं। चूंकि हीलियम गैस लीक हो रही थी, इसलिए काम तो पूरा हो गया, लेकिन सुनीतारा उसे दबाकर धरती पर वापस नहीं लौट सकीं। नासा ने कहा कि वापस लौटना जोखिम भरा होता. इसीलिए स्टारलाइनर 6 सितंबर को सुनीतास के बिना अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौट आया।

क्रू-9 के आईएसएस पहुंचने से पहले, सुनीता और बुच क्रू-8 ड्रैगन कैप्सूल में सवार होते हैं। कैप्सूल अब आईएसएस के अंदर है। काम पूरा करने के बाद अंतरिक्ष यान फरवरी 2025 में चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर पृथ्वी के लिए रवाना होगा।

पूजा की दावत के लिए अब साधारण लूची नहीं, 3 अलग-अलग तरह की पूड़ी बनाकर अपने स्वाद को संतुष्ट करें, ये है रेसिपी

त्योहारी सीज़न के दौरान, भोजन थोड़ा आश्चर्य से रहित नहीं है। और अगर लूची में थोड़ा ट्विस्ट लाया जा सके तो कोई सवाल ही नहीं है. अगर आप मैदा से बनी लूची को पूजा के एक दिन के लिए रखते हैं तो बाकी दिनों के लिए थोड़े अलग तरीके से बनाएं. यहाँ कुछ व्यंजन हैं. पूजा का अर्थ है दावत करना। अगर आप पूरे साल डाइट पर रहते हैं तो भी यह जरूरी नहीं है कि आप दुर्गा पूजा के कुछ दिनों तक पेटपूजो न करें। दावत की तैयारी नाश्ते से शुरू हो जाती है. छुट्टियों के दिन नाश्ते में थोड़ी लूची खाए बिना मन नहीं भरता. और पूजा के दौरान लूची के साथ मांस खाना भी जरूरी है।

त्योहारी सीज़न के दौरान, भोजन थोड़ा आश्चर्य से रहित नहीं है। और अगर लूची में थोड़ा ट्विस्ट लाया जा सके तो कोई सवाल ही नहीं है. अगर आप मैदा से बनी लूची को पूजा के एक दिन के लिए रखते हैं तो बाकी दिनों के लिए थोड़े अलग तरीके से बनाएं. यहाँ कुछ व्यंजन हैं.

मसाला मूंग पूरी: मूंग को एक रात पहले भिगो दें. मूंग दाल को पकाने से पहले पीस लें. – अब एक बड़े बाउल में 1 कप मूंग दाल का घोल, दो कप आटा, 2 बड़े चम्मच सूजी, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला पाउडर, कसौरी मेथी, नमक और पानी डालकर अच्छी तरह मिला लें. जब मांड बन जाए तो मांड पर तेल लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें और सूती कपड़े से ढक दें। – इसके बाद मसाला मूंग पूरी बनाने के लिए लीची को काट कर तेल में तल लें. झाल झाल आलूर दम के साथ परोसें।

पालक लूची: एक कटोरे में 1 कप आटा, 2 बड़े चम्मच सुचि, 1/2 कप पालक का पेस्ट, 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 1 छोटा चम्मच हरी मिर्च का पेस्ट, 1/2 छोटा चम्मच धनिया, 1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1 डालें. /2 चम्मच जीरा पाउडर, नमक और पर्याप्त पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इस बार लीची को काटकर तेल में तलकर पालक की प्यूरी बनाई जाएगी. पालक की प्यूरी धनिया आलू या धनिया चिकन के साथ अच्छी लगती है.

आलू पूरी: एक बाउल में 3 उबले आलू, नमक, भुना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, कसौरी मेथी, अमचूर पाउडर, हरा धनियां और आटा अच्छी तरह मिला लें. त्वचा पर तेल लगाकर दस मिनट के लिए ढक दें। लीची को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर तेल में तल लीजिये. गर्म आलू की प्यूरी उबले हुए आलू या सीताफल की चटनी के साथ बहुत अच्छी लगेगी। कई लोगों को पका हुआ केला खाना बहुत पसंद होता है. लेकिन जब कांच की बात आती है तो यह बहुत अच्छा नहीं लगता। लेकिन केल के कई पोषण संबंधी लाभ हैं। हालाँकि बहुत से लोगों को केल पसंद नहीं है, लेकिन यह विटामिन, खनिज और शर्करा का एक स्रोत है जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। जब कांचकला घर में आती है तो जीरे के घोल के साथ मछली का पतला शोरबा पकाया जाता है। हालाँकि, इस कांचला से कुछ स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा सकते हैं। आगे पूजा करो. उन दिनों कई घरों में शाकाहारी भोजन पकाया जाता था। ऐसे में आप रोजाना चने या पंचीशेली की सब्जी न खाकर कांचला से कई तरह के पाड़े बना सकते हैं. ऐसे ही कुछ पोस्ट हैं.

काले कबाब: उबले हुए काले और आलू को अच्छे से मैश कर लीजिए. इस बार उस मिश्रण में एक-एक करके बेरेस्टा (तली हुई प्याज), कबाब मसाला, कटी हुई हरी मिर्च, कटी हुई धनिया पत्ती, नमक और चुट्टू डालें। इस बार मिश्रण की थोड़ी मात्रा लें और इसे कबाब का आकार दें। इस बार कबाब को थोड़े से तेल में तलें. कांचकला कबाब को पुदीना और धनिये की चटनी के साथ परोसिये.

काले खसखस: एक पैन में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें काला जीरा और हरी मिर्च डालें। इस बार इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कटे हुए हरे केलों के साथ अच्छे से भून लीजिए. – इसके बाद इसे कटे हुए प्याज से थोड़ी देर के लिए ढक दें. जब प्याज लाल हो जाए तो उसमें खसखस, मिर्च पाउडर, नमक और हरी मिर्च डालकर हिलाएं। ऊपर से स्वादानुसार चीनी छिड़कें. पांच मिनट बाद सरसों का तेल फैला दें और गैस की आंच बंद कर दें. कांचकला खसखस ​​को गर्म चावल के साथ परोसें।

केला कोप्ता: सबसे पहले केले को अच्छी तरह उबाल कर छील लें. -आलू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर उबाल लें. उबले हुए चने में हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, गरम मसाला पाउडर, मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक और चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें. – अब मिश्रण को हथेली में लें और हल्के हाथों से दबाते हुए कोफ्ता बना लें. गरम तेल में कोप्ते तल लीजिये. इस बार एक पैन में तेल गरम करें और उसमें साबुत मसाले और तेजपत्ता डालें. – इसके बाद इसमें अदरक का पेस्ट, टमाटर का पेस्ट, चार्मगोज पेस्ट, नमक और चीनी डालकर अच्छे से मैश कर लीजिए. – जब मसाले से तेल निकलने लगे तो इसे थोड़े से पानी के साथ उबाल लें. – जब शोरबा गाढ़ा हो जाए तो इसमें तले हुए कोप्ते डालें और पांच मिनट तक उबालें. – इसके बाद कांचकला कोप्ता बनाने के लिए ढक्कन खोलें और थोड़ा सा घी और गरम मसाला फैलाएं.

रेप और हत्या के मामले में RG ने बनाई चार्जशीट! मुख्य आरोपी के तौर पर एक ही शख्स का नाम आया सामने

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महिला डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले में सीबीआई ने बनाई चार्जशीट. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने चार्जशीट में सिर्फ एक ही शख्स को मुख्य आरोपी बताया है. आरजी टैक्स मामले में सीबीआई ने पहली चार्जशीट गठित की. उस आरोप पत्र को लेकर सीबीआई के वकील सियालदह कोर्ट के लिए रवाना हो चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, रेप और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर चार्जशीट में सिर्फ एक ही शख्स का नाम दर्ज है. इसके अलावा वहां सबूतों को खोने के आरोप समेत कई मुद्दों का जिक्र किया गया है. पूछताछ में उन बयानों के दस्तावेज चार्जशीट में पेश किए गए हैं.

पीड़िता की मौत के 58 दिन बाद सीबीआई ने यह आरोप पत्र तैयार किया. आरजी टैक्स पीड़ित महिला डॉक्टर की मौत के बाद से राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर न्याय की मांग को लेकर लगातार आंदोलन पर हैं. उपवास का कार्यक्रम चल रहा है. जूनियर डॉक्टरों ने भी सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया है. कभी-कभी उन्होंने न्याय की मांग के लिए सीबीआई कार्यालय पर भी छापा मारा। धर्मतला में भूख हड़ताल से भी जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि वे अब सीबीआई पर भरोसा नहीं कर सकते. इस बीच केंद्रीय जांच एजेंसी ने रेप और हत्या मामले की जांच में सोमवार को पहली चार्जशीट कोर्ट में भेज दी.

हालांकि आंदोलनरत जूनियर डॉक्टर सीबीआई की इस चार्जशीट पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. जूनियर डॉक्टर सोमवार की दोपहर धर्मतल्ला स्थित अनशन मंच से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. उस समय आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों में से एक, देबाशीष हलदर ने कहा, “मीडिया से मुझे मिली जानकारी के अनुसार, यह एक प्रारंभिक आरोप पत्र है। उसके आधार पर इस समय हमारे लिए टिप्पणी करना संभव नहीं है। हम वकीलों से बात करेंगे. उसके बाद हम इस मामले पर प्रतिक्रिया देंगे.” आरजी में महिला डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले में अब तक मुख्य आरोपी एक ही शख्स है. सीबीआई द्वारा जांच की कमान संभालने से पहले उन्हें कलकत्ता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में, आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले की जांच प्रक्रिया में सीबीआई ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया – आरजी कर के तत्कालीन प्रिंसिपल और ताला पुलिस स्टेशन के तत्कालीन ओसी। हालांकि सीबीआई पहले ही सियालदह कोर्ट को बता चुकी है कि उनके खिलाफ रेप और हत्या के मामले में सीधे तौर पर शामिल होने का कोई आरोप नहीं है. घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश के आरोप में केंद्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

यह सवाल कि क्या आरजी टैक्स घटना में केवल एक ही व्यक्ति शामिल था, या एक से अधिक, विभिन्न हलकों में घूमना शुरू हो गया। हालाँकि, अब तक सीबीआई की जाँच प्रक्रिया के जवाब में उनके वकीलों ने निचली अदालत या सुप्रीम कोर्ट में जो जानकारी पेश की है, उसमें एक से अधिक लोगों की संलिप्तता का संकेत नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, रेप और हत्या के मामले में सीबीआई ने पहली चार्जशीट में सिर्फ एक ही शख्स को मुख्य आरोपी बताया है.

संयोग से, आरजी टैक्स मामले की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई में कुछ विशेष टिप्पणी नहीं की थी। हालांकि, जांच की प्रगति को लेकर कई स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच को सौंपी जा चुकी है. रिपोर्ट की जांच के बाद चीफ जस्टिस ने सीबीआई की जांच पर संतुष्टि जताई.

लगभग दो महीने बीत गये. आरजी टैक्स, अस्पताल के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर बंगाल के जूनियर डॉक्टर लगातार आंदोलन पर हैं। दो चरणों की हड़ताल के बाद इस बार उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी है. दिल्ली ईएमएस के डॉक्टर भी इस बार बंगाल के जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में खड़े हो गये. दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर 9 अक्टूबर को आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मोमबत्ती जुलूस निकालेंगे। उस दिन आरजी टैक्स की सुनवाई की मांग को लेकर आंदोलन 2 महीने में खत्म हो जाएगा. उनका कैंडल मार्च बुधवार शाम 6 बजे दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू थिएटर के सामने से शुरू होगा.

9 अगस्त को आरजी की महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने लगातार हड़ताल शुरू कर दी. उस विरोध और आंदोलन की आंच पूरे देश के चिकित्सा जगत में फैल गई। बंगाल के बाहर भी विभिन्न अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की घोषणा की है. दिल्ली एमसी में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल भी 11 दिनों तक चली. बाद में सुप्रीम कोर्ट के अनुरोध के बाद उन्होंने हड़ताल ख़त्म कर दी.

राज्य सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद बंगाल के जूनियर डॉक्टर भी काम पर लौट आये. हड़ताल आंशिक रूप से समाप्त कर दी गई। लेकिन सागर दत्त अस्पताल के डॉक्टरों पर हमले के बाद उन्होंने फिर से पूर्ण हड़ताल की घोषणा कर दी. लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका. वरिष्ठजनों की सलाह और मरीज के हित को देखते हुए वे काम पर लौट आए। आंदोलन का तरीका बदल जाता है. शनिवार रात साढ़े आठ बजे से जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल शुरू हो गयी है. धर्मतला में जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के प्रति एकजुटता दिखाते हुए दिल्ली एम.एस. के रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस बार मोमबत्ती जुलूस का आह्वान किया है। दिल्ली ईएमएस के रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक बयान में कहा कि वे पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के साथ खड़े हैं। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सरकार और जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने ‘साहसिक फैसले’ की सराहना की.

कार्तिक ने सूर्यकुमार के हाथों में देखी ‘पारस्पथर’, अगले मैच से पहले सुधार करना चाहते हैं कप्तान

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मयंक यादव, वरुण चक्रवर्ती, सूर्या ने जीता गोल्ड. कप्तान का लक्ष्य इस टीम को चमकाना और आने वाले दिनों में इसे और अधिक प्रामाणिक बनाना है। लेकिन क्या बांग्लादेश वह आग बन सकता है? उन्हें एक युवा टीम दी गई है. वह खुद एक कप्तान के तौर पर नये हैं. लेकिन कमेंटेटर मुरली कार्तिक के शब्दों में, ”सूर्यकुमार यादव ने रविवार को जो कुछ भी छुआ, वह सुना गया है.” कार्तिक ने भले ही सत्यजीत रे की पारसपत्थर नहीं देखी हो, लेकिन उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा। मयंक यादव, वरुण चक्रवर्ती, सूर्या ने जीता गोल्ड. कप्तान का लक्ष्य इस टीम को चमकाना और आने वाले दिनों में इसे और अधिक प्रामाणिक बनाना है। लेकिन क्या बांग्लादेश वह आग बन सकता है?

टी20 वर्ल्ड कप के बाद रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जड़ेजा ने टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले लिया. कुछ दिन पहले टेस्ट खेलने वाले सीनियर क्रिकेटर टी20 टीम में नहीं हैं. रविवार को बांग्लादेश के खिलाफ खेलने उतरी भारतीय टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज अर्शदीप सिंह हैं. इससे बाकी गेंदबाजों के अनुभव का पता चलता है.’ लेकिन उस गेंदबाजी आक्रमण के साथ खेलने और मैच जीतने पर कप्तान सूर्यकुमार ने कहा, “अगर आपके पास फील्डिंग करते समय बहुत सारे विकल्प हैं, तो यह अच्छा है। ये सिरदर्द भी अच्छा है।”

रविवार को भारत के लिए अर्शदीप और हार्दिक पंड्या ने गेंदबाजी की शुरुआत की. इसके बाद वरुण चक्रवर्ती, मयंक यादव, नितीश कुमार रेड्डी और वाशिंगटन सुंदर एक-एक करके गेंदबाजी करने आए। नीतीश को छोड़कर सभी ने विकेट लिए। अर्शदीप और वरुण ने तीन-तीन विकेट लिए। बाकी एक करो. डेब्यू मैच खेलने के बाद मयंक ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. इस मैच में उनके साथ नीतीश ने डेब्यू किया था. सूर्या ने कहा, “दोनों नवोदित खिलाड़ियों को देखकर अच्छा लग रहा है। मैं उन्हें अगले मैच में भी देखने के लिए उत्सुक हूं।”

बल्लेबाजी में भी भारत का दिन खराब नहीं रहा. ओपनर अभिषेक शर्मा धमाकेदार पारी की ओर इशारा कर रहे थे. दुर्भाग्य से वह रन आउट हो गया. सूर्यकुमार (14 गेंदों पर 29 रन) और हार्दिक पंड्या (16 गेंदों पर 39 रन बनाकर नाबाद) ने बल्ले से तूफान मचाया. उन्हें संजू सैमसन (19 गेंदों पर 29 रन) और नितीश (15 गेंदों पर 16 रन पर नाबाद) ने मदद की। हालांकि सूर्या पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा, ”हर मैच से कुछ नया सीखने को मिलता है। कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है. हम उनके बारे में बात करेंगे. मैं अगले मैच से पहले उन सभी पहलुओं में सुधार करना चाहूंगा।”

भारत ने रविवार को पहले टी20 मैच में बांग्लादेश को 127 रन पर आउट कर दिया. हार्दिक ने 49 गेंद शेष रहते तीन विकेट खोकर विजयी रन बनाया।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को भारत-बांग्लादेश मैच देखने पहुंचे. ग्वालियर में नए मैदान का नाम उनके पिता माधवराव सिंधिया के नाम पर रखा गया है। श्रीमंत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम की शुरुआत रविवार को भारत-बांग्लादेश मैच के साथ हुई। ग्वालियर को मिला नया अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने बांग्लादेश को मैदान पर 7 विकेट से हरा दिया.

ब्रिटिश शासन के दौरान जयाजीराव सिंधिया ग्वालियर के अंतिम राजा थे। उनके पुत्र माधव भी देश के मंत्री थे। 56 वर्ष की आयु में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इस क्षेत्र का नाम माधवराव के नाम पर रखा गया है। अब 30 हजार विजिटर। आने वाले दिनों में इसके बढ़कर 50 हजार होने की उम्मीद है. उस मैदान पर बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 127 रन बनाए. भारत को यह रन हासिल करने में ज्यादा समय नहीं लगा। सूर्यकुमार ने 49 गेंद शेष रहते मैच जीत लिया.

भारत ने बांग्लादेश को टेस्ट सीरीज में 2-0 से हराया. उस टीम में से किसी को भी टी20 टीम में शामिल नहीं किया गया. फिर भी भारत ने उतनी ही तीव्रता से खेला। रविवार को डेब्यू करने वाले हैं नीतीश कुमार रेड्डी और मयंक यादव। फैंस देख रहे थे कि सूर्यकुमार की कप्तानी में युवा भारत कैसा खेलता है. शुरुआत ख़राब नहीं थी. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने तीन विकेट लिए और वरुण चक्रवर्ती की तीन साल बाद टीम में वापसी हुई। मयंक, हार्दिक पंड्या और वॉशिंगटन सुंदर को एक-एक विकेट मिला.

वरुण ने अपना आखिरी मैच 2021 में स्कॉटलैंड के खिलाफ दुबई में खेला था। भारत ने बीच के तीन वर्षों में 86 ट्वेंटी-20 मैच खेले हैं, जब वह रविवार को भारतीय जर्सी में ग्वालियर में बांग्लादेश के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। खलील अहमद 2019 के बाद 2024 में खेले. उनके दो मैचों के बीच भारत ने 104 मैच खेले. इस लिस्ट में वरुण दूसरे स्थान पर रहे। वरुण ने रविवार को 4 ओवर में 31 रन देकर 3 विकेट लिए। उन्होंने तोहिद हृदय, जकर अली और रिशाद हुसैन को आउट किया। भारत के लिए 54 टी20 मैच खेलने वाले अनुभवी अर्शदीप ने तीन विकेट भी लिए.

मयंक ने देखा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने पहले मैच में उन्होंने टी20 की शुरुआत मेडन ओवर से की. मयंक ने आईपीएल में अपनी गति से सबका ध्यान खींचा। उन्होंने आईपीएल में 156 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी. आईपीएल में खेलते वक्त चोट लग गई. आईपीएल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए मयंक ने भले ही रविवार को 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद नहीं फेंकी हो, लेकिन उनकी गेंदबाजी से पता चला कि वह आने वाले दिन के लिए तैयार हैं। मयंक ने 4 ओवर में 21 रन देकर एक विकेट लिया। उन्होंने बांग्लादेश के महमूदुल्लाह का विकेट लिया.

भारत के सामने 128 रन से ज्यादा का लक्ष्य नहीं रख सका. और अभिषेक शर्मा वो रन बनाने के लिए उतरे. उन्होंने 7 गेंदों पर 16 रन बनाए. इसमें दो चौके और एक छक्का. दुर्भाग्य से उन्हें रन आउट होना पड़ा. रविवार को भारत की नई नवोदित जोड़ी बनी. अभिषेक के साथ संजू सैमसन ने ओपनिंग की. उनमें समझ की कमी दिखी. उनकी गलतफहमी के कारण अभिषेक रन आउट हो गए। लेकिन इससे भारत के लिए जीतना मुश्किल नहीं हुआ. कप्तान सूर्यकुमार ने 14 गेंदों पर 29 रन बनाये. हार्दिक पंड्या 16 गेंदों पर 39 रन बनाकर नाबाद रहे। तस्कीन अहमद जिस दिशा में गेंद मार रहे थे, उस दिशा में देखे बिना हार्दिक ने शॉट खेला. वो शॉट इस बात का सबूत हो सकता है कि भारत ने कितनी ताकत से जीत हासिल की

बस्तर में ऑपरेशन के बाद माओवादी नेता नीति समेत 22 लोगों के शवों की हुई पहचान, सिर की कीमत 1 करोड़ से ज्यादा

बस्तर के जंगलों में संयुक्त बलों की कार्रवाई में 31 नक्सली मारे गये. इस सूची में माओवादी नेता नीति उर्फ ​​​​उर्मिला का नाम भी शामिल है। उसके सिर की कीमत 25 लाख थी. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शुक्रवार को सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में 31 नक्सली मारे गए. अब तक 22 मृत माओवादियों के शवों की पहचान हो चुकी है. बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि इन्हें ढूंढने के लिए कुल 1 करोड़ 67 लाख रुपए का इनाम था. पुलिस आईजी ने यह भी कहा कि मृतकों में माओवादी नेता नीति उर्फ ​​उर्मीलाओ भी शामिल हैं. वह माओवादियों की स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था. उसके सिर की कीमत 25 लाख थी.

नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों में शुक्रवार से एसटीएफ और डीआरजी का संयुक्त ऑपरेशन शुरू हुआ। ओरछा और बारसूर थाना क्षेत्र के नेनपुर-थुलथुली के जंगल में दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई। पुलिस ने दावा किया कि उस ऑपरेशन में सीपीआई (माओवादी) की सशस्त्र शाखा पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) के कम से कम 31 लोग मारे गए थे। स्पेशल टास्क फोर्स और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड के संयुक्त अभियान में बड़ी संख्या में आग्नेयास्त्र भी बरामद किए गए। इस सूची में एके-47, 7.62 एसएलआर, आईएनएसएस जैसी स्वचालित राइफलों सहित विभिन्न हथियार शामिल हैं। विस्फोटक भी मिले.

नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा से लगे जंगल में करीब 48 घंटे तक माओवादी दमन अभियान चला. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के गठन के बाद किसी ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की यह सबसे बड़ी सफलता है. ऐसा पहली बार हुआ है कि एक साथ इतने सारे माओवादी मारे गए. करीब पांच महीने पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक ऑपरेशन में 29 नक्सली मारे गए थे.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में रविवार सुबह से माओवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक मुठभेड़ में एक माओवादी की मौत हो गयी. पुलिस ने बताया कि बैरमगढ़ पुलिस थाने के तहत केशकुतुल गांव के पास जंगल में माओवादियों का एक समूह इकट्ठा हुआ। बैरमगढ़ पुलिस को गुप्त सूत्रों से सूचना मिली. इसके बाद पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक टीम रात के अंधेरे में जंगल में पहुंची. सुरक्षा बलों की मौजूदगी का आभास होते ही माओवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी. सुरक्षा बलों ने भी जवाबी फायरिंग की. सुबह साढ़े पांच बजे से गोलीबारी शुरू हो गई. पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हुई झड़प में एक माओवादी मारा गया.

एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि माओवादी कमांडर कवासी पंडारू और 15-20 अन्य सदस्य केशकुतुल-कुशमंडी जंगल में एकत्र हुए थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस और डीआरजी के संयुक्त बल ने जंगल में छापेमारी की. जब दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी बंद हुई, तो संयुक्त बलों ने एक माओवादी का शव बरामद किया।

16 अप्रैल को कांकेरे में माओवादी सुरक्षा बलों के साथ झड़प में 29 माओवादी मारे गये थे. उस झड़प में उत्तर बस्तर माओवादी कमांडर शंकर राव मारा गया था. राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, अकेले बस्तर क्षेत्र में इस साल अब तक अलग-अलग झड़पों में 80 माओवादी मारे गए हैं। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा गार्डों के साथ झड़प में नौ माओवादी मारे गए. वे जंगल में छिप गये। घटना मंगलवार सुबह छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुई.

पुलिस को गुप्त सूत्रों से पहले ही जानकारी मिल गई थी कि दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमा पर जंगल में नक्सली छिपे हुए हैं. इसके बाद उन्हें पकड़ने के लिए तलाशी शुरू हुई. मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे सुरक्षा गार्डों ने कार्रवाई शुरू की. दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई. अंततः माओवादी मुठभेड़ में हार गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, झड़प में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई. मारे गए सभी लोग माओवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के सदस्य थे। उनके शव बरामद कर लिए गए हैं. उनके डेरे से काफी संख्या में आग्नेयास्त्र भी बरामद किये गये.

गोलीबारी के बाद भी सुरक्षा गार्ड सुरक्षित हैं। हालांकि, वे अभी भी यह पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं कि क्या इलाके में और भी माओवादी छिपे हुए हैं.

संयोग से, पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादियों के हमले में तीन ग्रामीणों की जान चली गई थी। पुलिस जासूस होने के संदेह में उनकी हत्या कर दी गई। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 वर्षों में माओवादियों द्वारा 6,617 सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे गए। लेकिन अब यह संख्या घटकर 70 प्रतिशत रह गई है। माओवाद को कुचलने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने एक अंतरराज्यीय समन्वय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी. शाह का दावा है कि दो साल से भी कम समय में देश से माओवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा, उनकी पहचान कर कड़ी सजा देने के साथ ही आत्मसमर्पण नीति में भी बदलाव किये जायेंगे.