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आखिर नेट जीरो या कार्बन न्यूट्रल के लक्ष्य को कौनसा देश करेगा प्राप्त?

नेट जीरो या कार्बन न्यूट्रल के लक्ष्य को कौन सा देश प्राप्त करेगा यह सबसे बड़ा सवाल है! नवंबर, 2021 की बात है, जब स्कॉटलैंड के ग्लासगो में COP26 शिखर सम्मेलन का आयोजन चल रहा था। उस वक्त इसमें हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरेआम मंच से ऐसा ऐलान कर दिया कि अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश भी हैरान रह गए। पीएम ने पहली बार इस मंच से नेट जीरो का संकल्प लिया। यह दुनिया से किया गया ऐसा वादा था कि जो उस वक्त दुनिया के प्रमुख अखबारों की सुर्खियां बना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 74वां बर्थडे है। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आयोजित चौथे ग्‍लोबल रिन्‍यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स मीट (RE-INVEST 2024) मोदी ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को डेडलाइन से पहले पूरा करने, 200 गीगावाट से ज्यादा गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जैसी उपलब्धियों और 2030 तक इसे 500 गीगावाट तक ले जाने के लक्ष्य को हासिल करने के उपायों पर चर्चा की। मोदी ने कहा कि ग्रीन फ्यूचर, नेट जीरो जैसे शब्द भारत की जरूरत और प्रतिबद्धता हैं। जानते हैं कि ये नेट जीरो क्या है? क्या नेट जीरो की वजह से भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों को पछाड़ देगा। पीएम मोदी ने 2070 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को नेट जीरो तक कम करने का वादा किया। आमतौर पर इस सम्मेलन में नेट जीरो का लक्ष्य 2050 तक हासिल करने का है। चीन ने 2060 तक कार्बन तटस्थता की योजना की घोषणा की। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने 2050 तक नेट जीरो हासिल करने का ऐलान किया। उस चक्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई हस्तियों ने जलवायु संकट से निपटने के लक्ष्य बताते हुए लंबे-चौड़े भाषण दिए थे। चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक है।

नेट जीरो या कार्बन न्यूट्रल बनने का मतलब है वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड, क्लोरो फ्लोरो कार्बन और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में बढ़ोतरी न करना। नेट जीरो का मतलब है कि जो भी कार्बन उत्सर्जन होता है, उसे वायुमंडल से उतनी ही मात्रा में निकालकर संतुलित किया जाता है। यानी हम नेट जीरो पर तब पहुंचेंगे जब हम जितना कार्बन उत्सर्जन करेंगे, वह उतनी ही मात्रा में हटाया जाएगा। इसे ऐसे समझिए कि यह लक्ष्य तब हासिल हो सकेगा, जब इंसानी गतिविधियों के चलते हो रहे प्रदूषण को वायुमंडल से हटाकर उसे संतुलित किया जाए।

यह लक्ष्य दो तरीकों से हासिल होगा। पहला तो यह है कि कारखानों, वाहनों जैसे होने वाले प्रदूषण को यथासंभव जीरो तक किया जाए। दूसरा, इसके साथ ही जंगलों को बढ़ाने जैसे प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए जो कार्बन प्रदूषकों को वायुमंडल से सोख लेते हैं। सरल शब्दों में ऐसे समझें कि आप ऐसे पेड़ लगा सकते हैं जो CO2 को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। वहीं, वायुमंडल से CO2 को बाहर निकालने के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि हम वायुमंडल में डाली जा रही CO2 की मात्रा घटाएं।

नेट जीरो का मतलब है इंसानी गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को संतुलित करना या हटाना। हम नेट जीरो पर तब पहुंचते हैं जब हमारी गतिविधियों से पैदा हुईं ग्रीनहाउस गैस की मात्रा हटाए गए कार्बन की मात्रा से अधिक नहीं होती। वहीं, जीरो कार्बन का मतलब है कि किसी उत्पाद या सेवा से होने वाले उत्सर्जन से है। यानी जीरो कार्बन में कोई कार्बन उत्सर्जन ही नहीं होता। जैसे कि पवन चक्कियों या सोलर पैनलों से हासिल बिजली। आबादी के हिसाब से बात करें तो भारत की इतनी बड़ी आबादी प्रदूषण फैलाने के मामले में दुनिया के कई बड़े देशों से काफी कम है। इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दुनिया की प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बहुत कम है। 2019 में प्रति व्यक्ति के लिहाज से भारत ने 1.9 टन CO2 उत्सर्जित किया, जबकि उसी साल अमेरिका ने 15.5 टन और रूस ने 12.5 टन कार्बन प्रदूषण फैलाया था।

भारत ने यह भी वादा किया है कि वह 2030 तक अपनी 50% एनर्जी अक्षय ऊर्जा जैसे सोर्स से हासिल कर लेगा और 2030 तक ही कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी लाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सना रहमान के अनुसार, भारत ने कोयला आधारित 500 गीगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता, अक्षय ऊर्जा से आधी बिजली, उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी जैसे ऐलान करके गेंद विकसित देशों के पाले में डाल दी।

नेट जीरो हासिल करने के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बनाए रखना होगा। जीरो कार्बन सोर्स के लिए 2050 तक 98% -100% बिजली की आपूर्ति अक्षय ऊर्जा से किए जाने की जरूरत होगी। वहीं, वाहनों से होने वाले धुएं को कम करने के लिए बैटरी और फ्यूल स्विचिंग जैसे उपाय करने होंगे। वहीं, खानपान की पूर्ति करने के लिए खाद्य उत्पादन की दक्षता में सुधार, आहार विकल्पों को बदलने, खराब भूमि को सही करने और खाने के नुकसान को कम करना होगा। साथ ही कोयले के इस्तेमाल में 2030 तक 6 गुना तेजी से गिरावट आनी चाहिए। दुनिया को 2030 तक वनों की कटाई को रोकने और वृक्ष आवरण को दो गुना तेजी से बढ़ाने की भी जरूरत है।

 

आखिर इसराइल ने यमन पर क्यों किया हमला?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि इसराइल ने यमन पर हमला क्यों किया है ! इजरायल के लेबनान पर हमले और हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद मध्य पूर्व एक बड़े खतरे की ओर बढ़ रहा है। इजरायल रक्षा बल (IDF) के लड़ाकू विमान लगातार लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के गढ़ वाले इलाकों पर बम बरसा रहे हैं। इस बीच इजरायल ने यमन में हूती चरमपंथियों के ठिकानों पर भी हमला किया है। रविवार को एक बयान में इजरायली सेना ने बताया कि फाइटर जेट ने यमन के रास ईसा और होदेइदाह बंदरगाह पर हमला किया है। हूती समूह से जुड़े मीडिया ने बताया कि इजरायल के हमले में कम से कम चार लोग मारे गए हैं। इनमें एक बंदरगाह कर्मचारी और तीन इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। ध्यान देने वाली है कि इजरायल ने हाल ही में दूसरी बार यमन पर हमला किया है। इसके पहले जुलाई में तेल अवीव में ड्रोन हमले के बाद इजरायली जहाजों ने होदेइदाह पोर्ट पर बम बरसाए थे। आखिर इजरायल और यमन एक दूसरे पर हमलें क्यों कर रहे हैं?

इजरायली सेना ने बताया कि रविवार को किया गया हमला, हाल ही में हूतियों के मिसाइल हमलों का जवाब था। हूती विद्रोहियों ने 28 सितम्बर को इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। आईडीएफ ने कहा था कि उसने यमन से दागी गई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया था। मिसाइल ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के विमान को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जब वह बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरने वाला था।

हूती नेता अब्दुल मलिक अल हूती ने कहा है कि हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत ‘बेकार नहीं जाएगी।’ इजरायल के गाजा में अभियान शुरू करने के बाद से ही हूती विद्रोही लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही हूतियों ने इजरायल के ऊपर ड्रोन भी भेजे हैं। हूतियों ने पिछले शुक्रवार को भी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागा था, जिसे आईडीएफ ने रोक दिया था।

हूती यमन के एक शिया मुस्लिम अल्पसंख्यकों से बना एक चरमपंथी समूह है, जिसकी अपनी सशस्त्र विंग है। 2010 के दशक की शुरुआत में अरब क्रांति की स्थिति का लाभ उठाकर इसने अपनी स्थिति मजबूत की। 2014 के आखिर में हूती लड़ाकों ने यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण कर लिया और फरवरी 2015 तक उन्होंने देश पर नियंत्रण घोषित कर दिया। बता दें कि इजरायल ने यमन के होदेइदाह बंदरगाह पर जबरदस्त हवाई हमला किया है। यह हमला लेबनान में हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की मौत के एक दिन बाद किया गया है। इन हमलों में सैकड़ों की संख्या में हूती विद्रोहियों के हताहत होने की सूचना है। यह बंदरगाह पिछले कई वर्षों से हूती विद्रोहियों के कब्जे में है। हूती विद्रोही इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान से हथियारों की तस्करी में भी करते हैं। इस बंदरगाह पर इजरायल पहले भी बमबारी कर चुका है। इजरायल ने यह हवाई हमला हूती विद्रोहियों के हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद किया है।

यमन का होदेइदाह बंदरगाह इजरायल के 1800 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी पर सटीक हमले करना काफी बड़ी बात मानी जाती है। हालांकि, पूरी दुनिया जानती है कि इजरायल के पास कई ऐसी मिसाइलें हैं, जो पिन पॉइंट एक्यूरेसी के साथ हमला करने में माहिर हैं। हालांकि, अभी तक इस बात की सूचना नहीं है कि इजरायल ने होदेइदाह बंदरगाह पर मिसाइल हमला किया है या फिर लड़ाकू विमानों से बम बरसाएं हैं। इससे पहले भी इजरायल ने लड़ाकू विमानों के जरिए यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए थे।

हूती विद्रोहियों की ताकत के दो प्रमुख राज हैं। पहला- उनका लोकेशन और दूसरा- उनको मिलने वाली सैन्य सहायता। हूती विद्रोही यमन में सक्रिय हैं। यमन दो तरफ से दो मुल्कों से घिरा है जबकि बाकी दो तरफ इसकी सीमा समुद्र से सटी हुई है। यमन की उत्तरी सीमा पर सऊदी अरब और पूर्वी सीमा ओमान स्थित है। वहीं, यमन दक्षिण में अदन की खाड़ी से सटा है जबकि पश्चिम में लाल सागर से। ऐसे में हूतियों को स्वेज नहर के रास्ते लाल सागर के होकर गुजरने वाले समुद्री जहाजों पर हमले का सटीक मौका मिलता है। वहीं, उसे ईरान से भारी मात्रा में सैन्य सहायता मिलती है, जिनमें अत्याधुनिक सैन्य ड्रोन, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं।

 

जब 1968 में लापता हुआ था IAF का प्लेन!

एक समय ऐसा था जब 1968 में IAF का प्लेन लापता हुआ था और अब वह मिल चुका है ! 1968 में रोहतांग दर्रे के पास हुए एक विमान हादसे में भारतीय सेना को चार और शव मिले हैं। यह हादसा 56 साल पहले हुआ था। एक सैन्य अभियान दल ने बर्फ से ढके पहाड़ों से ये शव बरामद किए हैं। यह अभियान ‘चंद्र भागा’ नाम के एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा था। यह हादसा 7 फरवरी, 1968 को हुआ था। जब चंडीगढ़ से 102 यात्रियों के साथ उड़ा भारतीय वायु सेना का एएन-12 विमान खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दशकों तक, विमान का मलबा और पीड़ितों के अवशेष बर्फीले इलाके में खोए रहे। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के पर्वतारोहियों ने विमान के मलबे को खोज निकाला। इसके बाद सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए। 2005, 2006, 2013 और 2019 में चलाए गए सर्च ऑपरेशन में डोगरा स्काउट्स सबसे आगे रहे। 2019 तक केवल पांच शव ही बरामद हो पाए थे। इस बार मिले चार शवों में से तीन शव सही सलामत मिले हैं जबकि चौथे के अवशेष मिले हैं। तीन सैन्यकर्मियों की पहचान उनके पास मिले दस्तावेजों से हो पाई है। ये जवान हैं सिपाही नारायण सिंह एएमसी, मलखान सिंह पायनियर कोर और थॉमस चेरियन सीईएमई।

एक अधिकारी ने बताया, ‘चौथे व्यक्ति के शरीर से मिले दस्तावेजों से उसकी पहचान तो नहीं हो पाई है, लेकिन उसके परिजनों का पता चल गया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘चंद्र भागा ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सेना अपने जवानों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए कितनी दृढ़ है। ऊंचाई वाले अभियानों में विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध डोगरा स्काउट्स ने इस अभियान का नेतृत्व किया है।’

अधिकारी ने कहा, ‘इन शवों के मिलने से उन परिवारों को सुकून मिला है जो दशकों से इंतजार कर रहे थे। अन्य यात्रियों के अवशेषों की तलाश जारी है। यह अभियान 10 अक्टूबर तक चलेगा।’ यह अभियान डोगरा स्काउट्स और तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू के प्रतिनिधियों के सहयोग से चलाया गया था। इसी बीच आपको बता दें कि हिमालय और लेह-लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर तैनात भारतीय सेना के जवान माइनस 40 डिग्री में भी सीमा प्रहरी बनकर डटे रहते हैं। अब इन जवानों को कठिन मौसम से बचाने के लिए ‘पीक पॉड्स’ विकसित किए गए हैं। ‘पीक पॉड्स’ माइनस 40 डिग्री की ठंड जैसे हालातों में जवानों के रहने के लिए बनाए गए हैं। फिलहाल सेना की 14 कॉर्पस के जवान इन ‘पीक पॉड्स’ में रहकर इसकी कुशलता जांच रहे हैं। सेना की यह यूनिट सियाचिन ग्लेशियर, कारगिल और लेह में तैनात है।

डीटेक 360 इनोवेशंस के प्रबंध निदेशक विनय मित्तल ने बताया कि डीआरडीओ ने गलवान घाटी में सैनिकों के रहने की व्यवस्था को लेकर उनसे संपर्क किया था। उस समय ऐसी कोई तकनीक या व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की तर्ज पर इन ‘पीक पॉड्स’ को विकसित किया। भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर की मदद से लेह में ‘पीक पॉड्स’ का ट्रायल किया गया। हिमालय के लद्दाख क्षेत्र में लेह, दुरबुक और डीबीओ के कठोर तथा ठंडे वातावरण में इसका इंटेंस टेस्टिंग की गई है। इस दौरान पॉड्स में 50 से अधिक सुधार किए गए हैं। फिजिकल टेस्ट में में पॉड्स सफल रहे हैं और यह शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस कम तापमान में कुशलतापूर्वक काम करता है।

खास बात यह है कि इसे तैयार करने में 100 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक और 93 प्रतिशत भारतीय उत्पाद इस्तेमाल किए गए हैं। बर्फीली चोटियों पर अस्थायी आवास के तौर पर लगाए जाने वाले इन ‘पीक पॉड्स’ में सोफा-कम-बेड, सामान और खाद्य पदार्थों के लिए अलग-अलग भंडारण, गर्म और ठंडा रखने की सुविधा, गर्म पानी की टंकी उपलब्ध हैं। इसमें उपयोग किए जा सकने वाले बायो टॉयलेट पूरी तरह से काम कर रहे हैं।

डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक ‘पीक पॉड्स’ दुनिया में अपनी तरह की एक नई पहल है। ‘पीक पॉड्स’ ऊंचाई वाले आर्मी बेस, रिसर्च स्टेशनों, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन आदि के लिए उपयोगी हैं। बाहर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर शेल्टर के अंदर का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहता है। सभी ‘पीक पॉड्स’ में अत्याधुनिक बायो टॉयलेट हैं। इसकी असेंबली और डिस्मेंटलिंग आसान है। इसे फास्ट ट्रैक अस्पताल के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 190 किमी प्रति घंटा तक की हवा की गति को झेलने में सक्षम है और बर्फ जमाव को रोकता है। यह बिना केरोसिन के भीतर से गर्म रहता है। साथ ही ऑक्सीजन लेवल को बरकरार रखते हुए वेंटिलेशन को बनाता है।

पीक पॉड्स’ ग्रीन स्ट्रक्चर हैं, जो सोलर एनर्जी से चलते हैं। इसलिए क्लाइमेट पर कम प्रभाव डालती हैं, जीरो इमिशन करते हैं। इसके साथ ही मोटर पंप, लाइट, चार्जिंग पॉइंट आदि सहित सभी जुड़े इक्यूपमेंट को चलाने के लिए सेल्फ डिपेंडेंट एनर्जी देते हैं। फिलहाल बर्फीले इलाकों में जवानों को केरोसिन-बेस्ड हीटर और पावर जेनसेट की आवश्यकता होती है। इसमें रेगुलर फ्यूल की आवश्यकता होती है। इससे ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। यहां टॉयलेट मुख्य तंबू से दूर रखे जाते हैं। सेना के लिए भविष्य में ऐसे शेल्टर के विकास की कल्पना की जा रही है जो एडवांस एआई सिस्टम से लैस होंगे। हाइड्रोजन, हवा और अन्य अक्षय ऊर्जा संसाधनों से ऊर्जा का दोहन करेंगे। ‘हाइड्रो कैप्चर’ की प्रोसेस से चलने वाले, साइट पर हाइड्रो प्रोडक्शन के लिए वातावरण में ह्यूमिडिटी को कंडेंस्ड करेंगे।

 

क्या कैटरीना बीमार है? एयरपोर्ट पर हीरोइन को देखकर फैंस का ऐसा क्यों हुआ मन?

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कैटरीना की दाहिनी कोहनी पर काला धब्बा। यह किसी भी तरह से पहनावे का हिस्सा नहीं है. जानकार लोगों को यह समझने में देर नहीं हुई कि यह एक हेल्थ पैच था। क्या कैटरीना कैफ बीमार हैं? ये सवाल फैंस के बीच घूम रहा है. पिछले कुछ महीनों में एक्ट्रेस की प्रेग्नेंसी की खबरें बार-बार सुर्खियों में रही हैं. जैसा कि बाद में पता चला, यह महज एक अफवाह थी। लेकिन कैटरीना काफी समय तक लोगों की नजरों से छुपी रहीं। वह अपने परिवार के साथ विदेश में दिन बिता रहे थे। उनकी सेहत को लेकर फिर सवाल उठा. लेकिन कैटरीना काफी समय तक लोगों की नजरों से छुपी रहीं। वह अपने परिवार के साथ विदेश में दिन बिता रहे थे। उनकी सेहत को लेकर फिर सवाल उठा.

शुक्रवार को कैटरीना को मुंबई के कलिना एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। फ्लोरल प्रिंटेड सिल्क साड़ी, कानों में बड़ा झुमका, माथे पर छोटा सा टीका लगाए वह बेहद खूबसूरत लग रही थीं। लेकिन इस बीच, नेटिज़न्स ने कैटरीना की दाहिनी कोहनी पर एक काला धब्बा देखा। यह किसी भी तरह से पहनावे का हिस्सा नहीं है. जानकार लोगों को यह समझने में देर नहीं हुई कि यह एक हेल्थ पैच था।

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ लेखन, उठने लगा सवाल, क्या बीमार हैं कैटरीना? एक नेटिज़न ने लिखा, “यह मधुमेह का रोग है। कैटरीना ठीक हैं?” आमतौर पर मधुमेह रोगी इस प्रकार के पैच का उपयोग करते हैं। त्वचा से जुड़े ये छोटे उपकरण मधुमेह के बारे में जानकारी देते हैं। ताकि कोई समस्या होने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके। साथ ही, जो लोग इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं उन्हें भी यह पैच लगाने से फायदा होता है। बाद में कैटरीना के करीबी सूत्रों से पता चला कि यह वास्तव में एक स्वास्थ्य पैच था। कैटरीना हमेशा से ही अपने शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर सजग रही हैं। माना जाता है कि वह इस गैजेट का उपयोग हृदय गति, कैलोरी गिनती, नींद के पैटर्न की निगरानी के लिए कर रहे हैं। हालांकि काफी समय से उन्हें स्क्रीन पर या किसी इवेंट में नहीं देखा गया था, लेकिन कई लोगों को शक है कि वह किसी न किसी तरह से बीमार रहे होंगे. पिछले जनवरी में कैटरीना विजय सेतुपति के साथ ‘मेरी क्रिसमस’ में नजर आई थीं। उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला. कहा गया कि वह लंदन में हैं। आखिरकार जुलाई में अनंत अंबानी की शादी में उनकी मुलाकात पति विक्की कौशल से हुई। इसके बाद वह ‘जी ले जरा’ और ‘टाइगर वर्सेस पठान’ में नजर आएंगे।

कैटरीना कैफ बॉलीवुड की व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक हैं। लेकिन सिर्फ पर्दे पर ही नहीं एक्ट्रेस अक्सर अपने पति विक्की कौशल के साथ नजर आती हैं. वे सोशल मीडिया पर परिवार और दोस्तों के साथ निजी समय बिताने की तस्वीरें साझा करते हैं। अभिनेत्री का मानना ​​है कि काम के दबाव के बावजूद प्रियजनों के साथ समय बिताना बहुत महत्वपूर्ण है।

हाल ही में एक इंटरव्यू में कैटरीना ने कहा कि उन्होंने धीरे-धीरे सीख लिया है कि काम के दौरान अपने लिए समय कैसे निकालना है। उनके शब्दों में, “भले ही आपके पास बहुत सारा काम हो, आपको अपने लिए कुछ समय निकालने की ज़रूरत है। यह समय परिवार के साथ या अपनी पसंद का कुछ करने में बिताया जा सकता है। यदि नहीं, तो आप कुछ देर के लिए अपने हाथ-पैर फैलाकर थोड़ा आराम कर सकते हैं। यह बहुत जरूरी है. पुराना उत्साह दोबारा मिलना संभव है। चाहे दिन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, मैं अपने लिए कुछ समय निकाल ही लेता हूं।”

अभिनेत्री का दावा है कि किसी प्रियजन के साथ रहने से दिल में प्यार की भावना पैदा होती है। उनके शब्दों में, ”उस वक्त मुझे संतुष्टि महसूस होती है, शांति मिलती है. उस समय अलगाव या भागदौड़ का कोई एहसास नहीं होता. लेकिन मैं किसके साथ समय बिताता हूं यह बहुत महत्वपूर्ण है।” लेकिन, ये वो महत्वपूर्ण समय हैं जिनसे लोग बचते हैं। अभिनेत्री को लगता है कि अगर आप इस समय को फिर से याद कर सकें, तो आप पूर्ण आनंद का एक हिस्सा कैद कर सकते हैं।

कैटरीना की फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ इसी साल जनवरी में रिलीज हुई थी। विजय सेतुपति के साथ उनके अभिनय के लिए अभिनेत्री की प्रशंसा की गई। इसके बाद ‘जी ले जरा’ आने वाली है। इस फिल्म में कैटरीना के साथ आलिया भट्ट और प्रियंका चोपड़ा नजर आएंगी.

धमकी संस्कृति: 10 डॉक्टरों को आरजी टैक्स से बाहर किया गया, 72 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली करने का आदेश

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10 डॉक्टरों को तत्काल आरजी टैक्स से छूट दी जाएगी। बाकी आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है. काउंसिल ने उन्हें अगले 72 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया. लंबी बैठक के बाद काउंसिल के फैसले के मुताबिक 10 डॉक्टरों को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से बाहर कर दिया गया. उन 10 लोगों पर रैगिंग समेत कई आरोप हैं. कॉलेज काउंसिल की बैठक में सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया कि डॉक्टरों को आजीवन हॉस्टल से निष्कासित कर दिया जायेगा. उनके घर भी आरोप पत्र भेजे जाएंगे।

काउंसिल की बैठक शनिवार को दोपहर से आरजी कर के प्लेटिनम जुबली भवन में शुरू हुई. बैठक में अधिकारी, डॉक्टर और प्रशिक्षुओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। मेडिकल छात्रों ने बाहर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया. उन्होंने मांग की कि अस्पताल में ‘थ्रेट कल्चर’ के आरोपी 59 लोगों को तुरंत सजा दी जाए. इसके बाद बैठक के अंत में काउंसिल ने फैसले की घोषणा की. बताया गया कि 10 डॉक्टरों को तत्काल आरजी टैक्स से छूट दी जायेगी. बाकी आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है.

निष्कासित डॉक्टरों में सौरभ पाल, आशीष पांडे, अभिषेक सेन, आयुश्री थापा, निरजन बागची, सारिफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं। उन्हें अगले 72 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है. आरोपियों के पंजीकरण प्रमाणपत्रों की जांच के लिए उनके नाम राज्य चिकित्सा परिषद को भी भेजे जाएंगे।

आरजी कर अस्पताल के अधिकारियों ने सभी आरोपियों के नामों की एक सूची भी जारी की। उन पर धमकी देने और भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया गया है. इसके अलावा आरोप है कि उनमें से कई डॉक्टर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी थे. उनकी बात न मानने पर छात्रों को परीक्षा में फेल करने की धमकी दी गई। हॉस्टल से निकाल देने की धमकियाँ सुनीं. रात तीन बजे हॉस्टल के कमरे में बुलाकर शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं। इसके अलावा, छात्रों को एक विशेष राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। सभाओं और जुलूसों में नहीं आने पर उत्पीड़न जारी रहा। हॉस्टल में अंधाधुंध रैगिंग होती थी. कभी-कभी अनुज को देर रात शराब लाने के लिए भेज दिया जाता था। कॉमन रूम में सीनियर्स को तरह-तरह के हाव-भाव दिखाने होते थे. न मानने पर माता-पिता उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे। ऐसी शिकायतों के आधार पर अस्पताल अधिकारियों ने उन 59 लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. 43 आरोपियों को हॉस्टल से निकाल दिया गया.

संयोग से, यह आंदोलन 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के आसपास शुरू हुआ। इसी संदर्भ में राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में ‘खतरे की संस्कृति’ के आरोप लग रहे हैं. इसके बाद आरजी कर अस्पताल के छात्रों ने कुछ डॉक्टरों के खिलाफ अधिकारियों को शिकायत लिखी. जूनियर डॉक्टरों की शिकायत पर 59 लोगों की पहचान की गयी. इनमें डॉक्टरों के अलावा हाउस स्टाफ, इंटर्न भी शामिल हैं। अस्पताल की जांच कमेटी ने उनमें से कई को बुलाकर पूछताछ की. आखिरकार शनिवार की बैठक के बाद काउंसिल ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की.

एक ओर जहां शनिवार को दोपहर में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्लेटिनम जुबली बिल्डिंग में काउंसिल की बैठक चल रही है. जिस कमरे में बैठक चल रही है उसके बाहर मेडिकल छात्र, जूनियर डॉक्टर नारे लगा रहे हैं. उनकी मांग है कि अस्पताल में ‘थ्रेट कल्चर’ के आरोपियों को तुरंत सजा दी जाए. इस बीच जांच समिति के सदस्यों ने ‘धमकी संस्कृति’ के आरोपी 59 लोगों से बात की है. इसके बाद भी वे यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इतने लंबे समय तक किसी को सजा क्यों नहीं हुई.

शनिवार दोपहर आरजी कर अस्पताल में काउंसिल की बैठक में अधिकारियों के डॉक्टरों, इंटर्न के प्रतिनिधि बैठे। सूत्रों के मुताबिक, आरजी टैक्स घोटाले के बीच अस्पताल में ‘खतरे की संस्कृति’ के आरोपों पर भी चर्चा होने की संभावना है. इस बीच प्लेटिनम जुबली बिल्डिंग के जिस कमरे में बैठक चल रही है, उसके बाहर जूनियर डॉक्टर, इंटर्न, मेडिकल छात्र नारे लगा रहे हैं. उनकी मांग है कि ‘धमकी संस्कृति’ के आरोपियों को सजा मिलनी चाहिए. अस्पताल में ‘धमकी संस्कृति’ के आरोपों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है. समिति के सदस्यों ने आरोपियों, शिकायतकर्ताओं और गवाहों से बात की। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इसके बाद भी आरोपियों को सजा क्यों नहीं दी जा रही है? आंदोलनरत डॉक्टरों की मांग है कि अनंत को उन लोगों के खिलाफ सजा मिलनी चाहिए जिनकी कई शिकायतें हैं. इसी मांग को लेकर उन्होंने बैठक वाले कमरे को घेर लिया और नारेबाजी की.

9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल के आपातकालीन विभाग के सेमिनार हॉल में एक महिला डॉक्टर का शव मिला था. उन पर रेप और हत्या का आरोप था. घटना सामने आने के बाद से आंदोलन शुरू हो गया है. वहीं, जूनियर डॉक्टरों ने राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में ‘खतरे की संस्कृति’ की शिकायत की. आरजी कर अस्पताल के छात्रों ने कुछ डॉक्टरों के खिलाफ अधिकारियों से लिखित शिकायत की है. जूनियर डॉक्टरों की शिकायत के आधार पर 50 से अधिक लोगों की पहचान की जा चुकी है. इनमें डॉक्टरों के अलावा हाउस स्टाफ, इंटर्न भी शामिल हैं। अस्पताल की जांच कमेटी ने उनमें से कई को बुलाकर पूछताछ की.

आरजी कोर अस्पताल के अधिकारियों ने उन लोगों के नामों की एक सूची भी जारी की है जिनके खिलाफ आरजी पर भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया गया है। कथित तौर पर इनमें से कई डॉक्टर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी हैं. कथित तौर पर संदीप अस्पताल में अपना ‘प्रभाव’ फैलाता था और विभिन्न ‘भ्रष्टाचारों’ का समर्थन करता था। अस्पताल में उनके रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था. उत्तर बंगाल, बर्दवान मेडिकल कॉलेज पर ‘खतरे की संस्कृति’ का आरोप। बर्दवान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर विरुपाक्ष विश्वास, अभिक डे का नाम सामने आया. जांच कमेटी ने आरोपी को अस्पताल बुलाया. आरजी कर अस्पताल के जूनियर डॉक्टर, इंटर्न, मेडिकल छात्र शनिवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए शिकायत कर रहे हैं कि उसके बाद किसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

फिर विवादों में रिया चक्रवर्ती! अभिनेत्री को पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में तलब किया है

रिया की पर्सनल लाइफ एक समय काफी चर्चा में रही थी. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी पॉपुलर हैं. उनके कई प्रशंसक हैं. वह विवाद भूलकर काम पर लौटने लगे। इसी बीच रिया चक्रवर्ती एक बार फिर मुसीबत में फंस गई हैं. दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में अभिनेत्री को समन भेजा है। समस्या एक ऐप से शुरू हुई. आरोप है कि इस ऐप के इस्तेमाल से ग्राहकों को कुल 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

रिया की पर्सनल लाइफ एक समय काफी चर्चा में रही थी. सोशल मीडिया पर अभी भी एक लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। उनके कई प्रशंसक हैं. रिया उक्त ऐप का चेहरा थीं। उन्होंने इस ऐप का प्रमोशन भी किया. इस मनी इन्वेस्टमेंट ऐप के जरिए यूजर्स को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, ऐसी शिकायत है। इस घटना में रिया को दिल्ली पुलिस ने समन भेजा था.

लेकिन सिर्फ रिया ही नहीं. कॉमेडियन भारती सिंह, नेटिज़न एल्विस यादव भी इस ऐप को प्रमोट करने के कारण मुसीबत में पड़ गए। पुलिस ने उनसे पूछताछ भी की. कई यूजर्स से शिकायत मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और कार्रवाई की. बढ़ोतरी के बाद यूजर्स को रिफंड कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बल्कि यूजर्स को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है.

इस ऐप को इसी साल फरवरी में लॉन्च किया गया था. कई नेटिज़न्स ने ऐप का प्रचार किया।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया विवादों में घिर गई थीं। सुशांत के परिवार ने रिया पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। रिया को ड्रग रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह कई दिनों तक जेल में रहे। इसके बाद वह कई दिनों तक मनोरंजन जगत से दूर रहे। उन्होंने हाल ही में अपना पॉडकास्ट शुरू किया है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती कई दिनों तक लाइमलाइट से दूर रहीं। उन्होंने हाल ही में अपना पॉडकास्ट शुरू किया है। अभिनेत्री ने बताया कि सुशांत की मौत के बाद उन्होंने कैसे समय बिताया। रिया ने कैद के वक्त के बारे में भी बात की. इस बार एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी भविष्य की शादी की योजनाओं के बारे में बात की।

रिया उद्यमी निखिल कामथ के साथ रिश्ते में हैं। लेकिन फिलहाल उनका शादी का कोई प्लान नहीं है. शादी के बारे में पूछे जाने पर अभिनेत्री ने कहा, ”सबसे पहली बात तो यह कि शादी की कोई सही उम्र नहीं होती। दूसरा, शादी क्यों करते हैं? शादी को लेकर तनाव क्यों? पुरुषों पर शारीरिक कारणों से ऐसा कोई दबाव नहीं होता! लेकिन महिलाएं अब अंडे भी स्टोर कर सकती हैं. हालाँकि वह भी काफी कठिन तरीका है। लेकिन एक रास्ता है।”

अपनी गर्लफ्रेंड्स का उदाहरण देते हुए रिया ने कहा, ‘मेरी ज्यादातर गर्लफ्रेंड्स की शादी 40 साल की उम्र के बाद हुई। या, 40 के बाद मां बनीं।” रिया ने कहा कि वह इस वक्त काम के साथ एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं। उनके शब्दों में, ”मेरे कुछ दोस्त हैं जिनकी शादी 20 से 30 साल के बीच हुई है। ऐसे दोस्त भी हैं जिनकी शादी 30 के बाद हुई। लेकिन मुझे लगता है कि जिन लोगों ने 40 के बाद शादी की, वे सही हैं। मैं अब 32 साल का हूं. मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूं क्योंकि मुझे बहुत काम करना है।”

रिया ने यह भी कहा कि वह कानूनी तौर पर शादी नहीं करना चाहतीं. उन्होंने कहा, ”मैं दोबारा अदालत नहीं जाना चाहता. कैसा प्यार कि कोर्ट से इजाजत लेनी होगी? मैं पासपोर्ट के लिए जाता हूं. लेकिन मैं इसके लिए नहीं जाना चाहता।”

 

सुशांत सिंह राजपूत की अचानक मौत से काफी हंगामा मचा। इस समय दिवंगत अभिनेता की मौत के लिए उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती पर मुकदमा चलाया गया। सोशल मीडिया पर इस घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया. इसके बाद एक्ट्रेस को गिरफ्तार कर लिया गया. रिया ने हाल ही में जेल में बिताए अपने दिनों के बारे में खुलकर बात की।

रिया के भाई सौविक चक्रवर्ती को भी गिरफ्तार किया गया था. ऐसे में उनके माता-पिता के लिए वह समय गुजारना मुश्किल हो गया। रिया ने बताया कि इस दौरान उनके दोस्त उनके परिवार के साथ थे. वे दोस्त तरह-तरह से रिया के माता-पिता को भूल जाते थे।

अभिनेत्री ने कहा कि जेल जाने के बाद उन्होंने देखा कि उनके माता-पिता और दोस्तों का वजन काफी बढ़ गया है। रिया की कैद के दौरान वे दोस्त हर दिन उसके माता-पिता से मिलने जाते थे। बैठ कर शराब पार्टी. वहाँ स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था थी। रिया ने कहा, ”मेरे कुछ दोस्त हर रात मेरे पिता के साथ शराब पीते थे। मैं और मेरा भाई जेल में थे। हम घर लौटे और पाया कि सभी का वजन बढ़ गया था।” वजन बढ़ने का कारण जानने पर रिया ने कहा, “अरे शैतानों, मैं जेल में हूं और तुम यहां दावत कर रहे हो और वजन बढ़ा रहे हो!” रिया के दोस्तों ने कहा कि वे इस वक्त एक्ट्रेस के माता-पिता के साथ रहने की कोशिश कर रहे हैं.

रिया ने कहा कि वह जीवन के इस बुरे दौर में साथ देने के लिए अपने दोस्तों की आभारी रहेंगी। उनके शब्दों में, “मेरे आसपास कुछ बहुत मजबूत महिलाएं हैं। जिस तरह से मेरी कुछ गर्लफ्रेंड्स मेरे साथ खड़ी रहीं, वह वाकई उल्लेखनीय था। वास्तव में किसी और चीज़ की आवश्यकता नहीं है। जिंदगी में एक अच्छा दोस्त ही काफी है. शिवानी (शिबानी दांडेकर) मेरी ऐसी ही एक दोस्त है।

ग्वालियर में गुगली! इस बार आईपीएल में मुंबई का लीडर? जवाब में भारतीय कप्तान ने क्या कहा?

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भारत बांग्लादेश के खिलाफ पहला टी20 मैच ग्वालियर में खेलेगा. इससे पहले सूर्यकुमार यादव को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा. भारतीय कप्तान ने क्या दिया जवाब? ग्वालियर में सूर्यकुमार यादव गुगली के सामने ढेर हो गए. मैदान पर नहीं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में. भारत रविवार को बांग्लादेश के खिलाफ पहला टी20 मैच खेलेगा. इससे पहले सूर्यकुमार को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा. सवाल उठा कि क्या वह इस बार आईपीएल में कप्तानी करना चाहते हैं? भारतीय कप्तान ने क्या दिया जवाब?

इस साल आईपीएल नीलामी. उससे पहले 10 टीमों को रिटेन क्रिकेटरों की सूची भेजी जानी चाहिए. सूर्या मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हैं। ये तय है कि मुंबई उन्हें रिटेन करेगी. प्रश्न कहीं और. क्या वे सूर्य की कप्तानी करेंगे? पिछली बार मुंबई ने रोहित शर्मा को हटाकर हार्दिक पंड्या को कप्तान बनाया था. उस फैसले की आलोचना हुई थी. सूर्या अब भारत के छोटे प्रारूप के कप्तान हैं। अगर हां तो क्या इस बार हार्दिक को हटाकर जिम्मेदारी दी जाएगी? वह क्या चाहता है?

इस सवाल के जवाब में सूर्या थोड़ा चौंक गए. उन्होंने कहा, ”आपने पूरी गुगली कर दी है. भारत की कप्तानी की जिम्मेदारी का आनंद ले रहा हूं।’ जब मैं रोहित भाई के नेतृत्व में खेला तो मैंने अपनी राय दी।’ जब भी मेरा मन हुआ मैंने कप्तान की मदद की।”

सूर्या ने सीधे तौर पर तो यह जवाब नहीं दिया कि वह अगले सीजन में मुंबई के कप्तान बनना चाहते हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया। उन्होंने कहा, ”मैंने श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की कप्तानी की. पिछले कप्तानों से सीखा कि खेल को कैसे आगे ले जाना है. देखते हैं आगे क्या होता है. बाकियों को सारी खबर मिल जाएगी।”

पिछली बार हार्दिक को कप्तान बनाने का खामियाजा मुंबई को भुगतना पड़ा था. तभी समर्थकों के एक वर्ग ने मांग की कि सूर्या को कप्तान बनाया जाना चाहिए। रोहित के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं. टी20 वर्ल्ड कप के बाद से हार्दिक मैदान पर ज्यादा नजर नहीं आए हैं. अब देखते हैं कि अगले सीजन में मुंबई की कप्तानी में कोई बदलाव होता है या नहीं। लेकिन सूरज ने धुंध को बरकरार रखा। जिससे अटकलें तेज हो गईं. भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज की टीम में सिर्फ एक ही ओपनर उतारा है. अभिषेक शर्मा के साथ कौन ओपनिंग करता नजर आएगा, इसे लेकर सूर्यकुमार यादव ने अपनी योजना स्पष्ट की. उन्होंने कहा, संजू सैमसन को अतिरिक्त जिम्मेदारी लेनी होगी.

2015 में भारतीय टी20 टीम में डेब्यू के बाद से संजू लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. मौका मिला. लेकिन ध्यान नहीं खींच पाए. गौतम गंभीरा ने इस बार संजू के कंधों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है. सूर्या ने टीम की योजना स्पष्ट की.

रविवार को ग्वालियर में पहले टी20 मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्या ने कहा, ”संजू इस सीरीज में खेलेंगे. वह अभिषेक के साथ पूरी सीरीज की शुरुआत करेंगे।” रोहित शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले लिया है. भारत के पास यशस्वी जयसवाल, रुतुराज गायकवाड़, शुबमन गिल जैसे ओपनर हैं. इसके बाद भी वे अभिषेक या संजू का किरदार निभाना चाहते हैं। गंभीर भविष्य के बारे में सोचकर यह योजना बना रहे हैं.

इस सीरीज में तेज गेंदबाज मयंक यादव डेब्यू कर सकते हैं। सूर्या भी उसे लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा, ”यह सीरीज युवाओं के लिए खुद को साबित करने का एक मंच है। मयंक में प्रतिभा है. मैंने अभी तक उसके खिलाफ नेट पर नहीं खेला है। लेकिन उसके पास अतिरिक्त गति है. मुझे नहीं पता कि वह रविवार को पदार्पण करेंगे या नहीं। पहली एकादश को लेकर चर्चा चल रही है. बढ़ी हुई गति जादू की शक्ति है. हमें उसकी शक्ति का सदुपयोग करना होगा।”

 

टेस्ट सीरीज के बाद भारत बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज खेलेगा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उस सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है. केकेआर के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम में बुलावा आया है. इसके अलावा मयंक यादव को पहली बार राष्ट्रीय टीम में बुलाया गया है.

आगामी टी20 फॉर्मेट में उन लोगों को लेकर टीम बनाई गई है जिन पर भारत निर्भर है. ध्यान भावी पीढ़ियों पर है। युवा क्रिकेटरों का चयन किया गया है. इसी तरह रियान पराग, हर्षित राणा, नितीश रेड्डी जैसे आईपीएल में अच्छा खेलने वाले क्रिकेटरों को टीम में मौका मिला।

महत्वपूर्ण बात वरुण को पाना है. 2020 में यूएई में आईपीएल में केकेआर के लिए अच्छा खेलने के बाद, वरुण को 2021 टी20 विश्व कप टीम में शामिल किया गया था। लगभग हर मैच खेलने के बावजूद वरुण यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सके। केवल छह टी20 मैचों के बाद उन्हें अचानक राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया गया। लेकिन पिछले आईपीएल में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. केकेआर को चैंपियन बनाने में वरुण ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने 15 मैचों में 21 विकेट लिए. अर्थव्यवस्था की दर आठ के आसपास। परिणाम बहुत बुरा प्रदर्शन नहीं है. वरुण को घरेलू मैदान पर उनकी स्पिन की प्रभावशीलता को देखते हुए चुना गया है।

मयंक यादव को बुलाना भी जरूरी है. लखनऊ सुपर जाइंट्स के इस गेंदबाज ने पिछले आईपीएल में लगातार 150 किलोमीटर से ज्यादा गेंदबाजी करके धूम मचा दी थी. लेकिन ज्यादा देर तक खींच नहीं सके. चोट लगना उस चोट से उबरने के लिए वह लंबे समय तक राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में रहे हैं। बोर्ड ने होनहार गेंदबाजों के साथ ‘धीमे चलो’ की नीति अपनाई। हाल ही में मयंक पूरे शबाब पर हैं. फिटनेस क्लीयरेंस मिलने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया.

आखिर पाकिस्तान को क्यों सता रहा है हमले का डर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि पाकिस्तान को हमले का डर क्यों सता रहा है! पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को हमले का डर सता रहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि भारत अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा। उनको डर है कि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया जा सकता है। भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को वापस लाने के लिए अनुच्छेद 370 को बहाल करने की चाहत रखने का आरोप लगाया।इसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से ध्यान देने की अपील की। जहां एक ओर शहबाज शरीफ को हमले का खौफ सता रहा, इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ ऐसी बात कही जिसे सुनकर पाकिस्तान के पीएम सन्न रह जाएंगे। जम्मू-कश्मीर की चुनावी रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पाकिस्तान तीन टुकड़े में बंट जाएगा।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में दो फेज की वोटिंग हो चुकी है। तीसरे और आखिर चरण के मतदान से पहले बीजेपी जमकर प्रचार अभियान में जुटी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चुनावी रैली में जुटे हैं। इसी बीच उन्होंने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर करारा अटैक किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जल्द ही तीन हिस्सों में बंट जाएगा और उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। सीएम योगी ने यह भी कहा कि जो लोग पाकिस्तान के कहने पर भारत में आतंक फैला रहे हैं, उन्हें न तो कफन मिलेगा और न ही दफनाने के लिए जमीन।

योगी आदित्यनाथ जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कहा कि ‘1960 की सिंधु जल संधि की समीक्षा के आदेश देते समय, भारत सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘पानी और आतंकवाद एक साथ नहीं बह सकते’। अब तक, पाकिस्तान भीख का कटोरा लिए हुए था, लेकिन जल्द ही यह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेगा।’ सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान वर्तमान में दो कारणों से पीड़ित है।

न केवल उसे अपने ही किए की सजा भुगतनी पड़ रही, बल्कि अब, बलूचिस्तान भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहना चाहता क्योंकि उसकी सरकार उनके साथ विदेशियों जैसा व्यवहार कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी पाकिस्तान के शासन को खारिज कर रहा है। वो भूख से मरने के बजाय, जम्मू और कश्मीर में शामिल होने और अखंड भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान देने की इच्छा जता रहे हैं।

कांग्रेस, PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियों पर निशाना साधते हुए, यूपी के सीएम ने कहा कि उन्होंने कश्मीर को धार्मिक कट्टरता के गोदाम में बदलकर जनता का शोषण किया है। उन्होंने इन पार्टियों पर आतंकवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, लेकिन बीजेपी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने से जम्मू-कश्मीर के विकास में तेजी आई है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह क्षेत्र एक आतंकवादी राज्य से पर्यटन स्थल में बदल गया है। देश का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा पुल वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में निर्माणाधीन है, और वंदे भारत जैसी विश्व स्तरीय ट्रेन सर्विस जम्मू से दिल्ली तक शुरू हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी ने युवाओं को बंदूकें दीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार उन्हें टैबलेट से लैस करके रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है।’

सीएम ने इन पार्टियों पर राज्य में आतंकवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को वापस लाने के लिए अनुच्छेद 370 को बहाल करने की चाहत रखने का आरोप लगाया। बता दें कि 1960 की सिंधु जल संधि की समीक्षा के आदेश देते समय, भारत सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘पानी और आतंकवाद एक साथ नहीं बह सकते’। अब तक, पाकिस्तान भीख का कटोरा लिए हुए था, लेकिन जल्द ही यह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेगा।’ सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान वर्तमान में दो कारणों से पीड़ित है।PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियों पर निशाना साधते हुए, यूपी के सीएम ने कहा कि उन्होंने कश्मीर को धार्मिक कट्टरता के गोदाम में बदलकर जनता का शोषण किया है। उन्होंने इन पार्टियों पर आतंकवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, लेकिन बीजेपी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने से जम्मू-कश्मीर के विकास में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों ने उन्हें अलविदा कहने का फैसला कर लिया है क्योंकि सत्ता में रहते हुए उनके नेता अपना ज्यादातर समय विदेशों में और बाकी समय दिल्ली में बिताते थे और इसलिए, जम्मू के लिए कुछ नहीं कर सके।

 

पाकिस्तान और पाकिस्तान की नीतियों के बारे में क्या बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह?

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और पाकिस्तान की नीतियों के बारे में एक बड़ा बयान दे दिया है! एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के सीएम और दिग्गज बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जल्द ही तीन हिस्सों में बंट जाएगा। उनका ये बयान ऐसे समय में आया जब पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को खुद पर हमले का डर सता रहा। उन्हें भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता से खौफ पैदा हो गया है। ये बात उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कही। अभी इस मुद्दे पर घमासान मचा ही था इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध होते तो भारत उसे बड़ा राहत पैकेज देता। जम्मू-कश्मीर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर पड़ोसी देश ने भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे होते तो भारत, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मांगे गए पैकेज से भी बड़ा राहत पैकेज देता। बांदीपुरा जिले के गुरेज विधानसभा क्षेत्र में केंद्रीय रक्षा मंत्री चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से 2014-15 में जम्मू-कश्मीर के लिए घोषित प्रधानमंत्री विकास पैकेज का जिक्र किया।

बीजेपी के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने 2014-15 में जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की थी। ये अब 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पैकेज पाकिस्तान के आईएमएफ से मांगी गई राशि (राहत पैकेज के रूप में) से कहीं अधिक है। राजनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चर्चित कमेंट का उल्लेख किया कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते। राजनाथ सिंह ने कहा कि मेरे पाकिस्तानी दोस्तों, हमारे बीच तनावपूर्ण संबंध क्यों हैं, हम पड़ोसी हैं। अगर हमारे बीच अच्छे संबंध होते, तो हम आईएमएफ से अधिक पैसे देते। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र जम्मू-कश्मीर को विकास के लिए धन देता है जबकि पाकिस्तान लंबे समय से वित्तीय सहायता का दुरुपयोग कर रहा है। वह अपनी धरती पर आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने के लिए दूसरे देशों से पैसे मांगता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जब घाटी में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत बहाल करने का वाजपेयी का सपना साकार होगा तो कश्मीर फिर से धरती का स्वर्ग बन जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाला पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ गया है। उसके कुछ विश्वस्त सहयोगी भी पीछे हट गए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी हमने आतंकवाद की जांच की है, तो हमें पाकिस्तान की संलिप्तता ही मिली है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सरकारों ने पाकिस्तान को यह समझाने की कोशिश की है कि उन्हें आतंकी शिविर बंद करने चाहिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान हताश है और आतंक को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रहा है। वे नहीं चाहते कि यहां लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हों। हालांकि, भारत इतना मजबूत है कि वह पाकिस्तान से उसकी धरती पर मुकाबला कर सकता है। अगर पाकिस्तान से कोई भारत पर हमला करता है, तो हम सीमापार करके जवाब दे सकते हैं।

दिग्गज बीजेपी नेता ने कहा कि यहां तक कि तुर्किये, जो पाकिस्तान का समर्थन करता था, उसने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का जिक्र नहीं किया। जब से केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार आई है, जम्मू-कश्मीर में शांति लौट आई है। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद का कारोबार अब ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला है। बीजेपी के चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री के तौर पर मैं आपको आश्वासन देता हूं कि अगर बीजेपी उम्मीदवार फकीर मोहम्मद खान जीतते हैं तो गुरेज से और अधिक लोगों को भारतीय सेना में भर्ती किया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने कहा कि गुरेज की सबसे बड़ी मांग राजदान दर्रे के माध्यम से एक सुरंग का निर्माण है, जिससे देश के बाकी हिस्सों के साथ सभी मौसम में संपर्क स्थापित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि अब क्षेत्र में चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है, इंटरनेट टावर लगाए गए हैं। सड़कें पहले से अच्छी हो गई हैं और उन्हें और बेहतर बनाया जाएगा। देश के रक्षा मंत्री के तौर पर मैं आपको आश्वासन देता हूं कि चुनाव के बाद मैं संबंधित मंत्री को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए यहां लाऊंगा।

 

आखिर जम्मू कश्मीर में अभी भी क्यों हो रही है आतंकियों से मुठभेड़?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि जम्मू कश्मीर में अभी भी आतंकियों से मुठभेड़ क्यों जारी है! जम्मू-कश्मीर में चुनावी माहौल के बीच शनिवार को बड़ी खबर सामने आई है। कुलगाम के आदिगाम देवसर में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में तीन जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक अधिकारी घायल हो गया। सेना के अधिकारियों ने बताया कि जिले के आदिगाम गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ समेत सुरक्षाबलों ने इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। यहां जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए 1 अक्टूबर को वोटिंग होगी। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया। जब आतंकियों ने खुद को घिरा देखा तो उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से सेना के तीन जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक अधिकारी घायल हो गया।आतंकवादियों को मार गिराया गया है और इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मारे गए आतंकवादियों की पहचान और समूह का पता लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षाबलों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी भागने के रास्ते बंद कर दिए हैं कि छिपे हुए आतंकवादी भागने में असमर्थ हों। मुठभेड़ स्थल पर पहले ही अतिरिक्त बल पहुंच चुके हैं। घायल सुरक्षाकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

माना जा रहा है कि ये आतंकवादी कट्टर विदेशी भाड़े के आतंकवादी हैं। इन आतंकवादियों ने पिछले तीन-चार महीनों के दौरान जम्मू डिवीजन के डोडा, कठुआ, राजौरी, पुंछ और रियासी जिलों में सेना, स्थानीय पुलिस और नागरिकों पर हमला कर उन्हें मार गिराया है। पहाड़ी इलाकों में सेना और अन्य लोगों पर घात लगाकर हमला करने के बाद आतंकवादी इन पहाड़ी जिलों के घने जंगलों और वन क्षेत्रों में भाग जाते हैं।

दरअसल हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ हुई हैं। इनमें कई आतंकवादी मारे गए हैं। 15 सितंबर को कठुआ जिले के बानी इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। आतंकी गतिविधियां पुंछ और राजौरी जिलों तक ही सीमित थी। लेकिन अब ये जम्मू के अन्य क्षेत्रों में फैल रही हैं। चिनाब घाटी, उधमपुर और कठुआ में भी आतंकी सक्रिय हैं। आतंकवादी वाहनों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं और ग्रेनेड, कवच-भेदी गोलियों के साथ-साथ एम4 असॉल्ट राइफलों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। कश्मीर में लगातार चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों ने आतंकवादियों को पहाड़ों की ओर धकेल दिया है, जहां वह छिप जाते हैं और सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए सही समय का इंतजार करते हैं।

बता दे कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादी मारे गए और एक अधिकारी सहित पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। देवसर इलाके के आदिगाम गांव में सुरक्षा बलों ने सुबह तलाशी अभियान शुरू किया था, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) मुमताज अली को मुठभेड़ स्थल के पास एक गोली लगी, जिससे वह मामूली रूप से घायल हो गए।

उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल चार अन्य सुरक्षाकर्मी भी मुठभेड़ में घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है और इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मारे गए आतंकवादियों की पहचान और समूह का पता लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तलाशी अभियान शुरू किया।

तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। इस मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादी मारे गए हैं। सुरक्षा बलों को अभी तक मारे गए आतंकवादियों की पहचान और उनके समूह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।ये आतंकवादी कट्टर विदेशी भाड़े के आतंकवादी हैं। इन आतंकवादियों ने पिछले तीन-चार महीनों के दौरान जम्मू डिवीजन के डोडा, कठुआ, राजौरी, पुंछ और रियासी जिलों में सेना, स्थानीय पुलिस और नागरिकों पर हमला कर उन्हें मार गिराया है। सभी घायल सुरक्षाकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि इलाके में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।