Tuesday, March 10, 2026
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जब मरकर जिंदा हुई पत्नी ने लिया मौत का बदला!

एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना जिसमें मरकर जिंदा हुई पत्नी ने मौत का बदला लिया! दिन वो काफी खुश थी, जब उसे पता चला कि वो गर्भवती है। ये बात उसने अपने पति को बताई, तो सुनकर उसका पति भी काफी खुश हुआ। उसने वादा कर दिया कि इस खुशी के मौके पर वह उसे बाहर घुमाने ले जाएगा। उसे जैसे जमाने भर की खुशियां एक साथ मिल गईं। वो 9 जून 2019 का दिन था, जब उसका पति उसे थाईलैंड के कोंग चियाम इलाके की ऊंची पहाड़ियों पर सुबह का उगता हुआ सूरज दिखाने ले गया। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि सूर्योदय के बहाने उसका पति उसकी जिंदगी को हमेशा के अस्त करने जा रहा है। वो नहीं जानती थी कि जिसका हाथ थामे वो आगे बढ़ रही है, उसका वही हमदम उसकी मुलाकात मौत से कराने जा रहा है। दोनों पहाड़ी पर पहुंच चुके थे। कुछ पलों के इंतजार के बाद पहाड़ियों के पीछे से सूरज की किरणें दिखाई दीं। उसने अपने पति का हाथ फिर से थामा और उगते सूरज को देखने के लिए आगे बढ़ी। उसकी निगाहें सूरज की उस लाल रोशनी को निहार ही रही थीं वांग को तुरंत कोंग चियाम जिले के अस्पताल पहुंचाया गया और उनका इलाज शुरू हुआ। अस्पताल के बिस्तर पर कई दिनों तक वांग बेहोश रहीं। इसके बाद जब उन्हें होश आया, तो उस पल को याद कर उनकी आंखें भीग गईं।कि तभी उसे पीछे से एक तेज धक्का लगा। उसकी चीख गूंजी और पलभर में वो करीब 34 मीटर ऊंचाई की उस पहाड़ी से नीचे खाई में जा गिरी। उसे पहाड़ी से धक्का देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसका अपना पति था। कुछ देर बाद उसकी चीख उन पहाड़ियों के बीच गुम हो गई। पति ने नीचे खाई की तरफ देखा और जब उसे एहसास हो गया कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है, तो चेहरे पर साजिश भरी एक मुस्कान लिए वो वापस लौट आया।

ये कहानी है 33 साल की चीनी महिला वांग यान की, जिसे उसके पति ने एक साजिश के तहत उस चट्टान से धक्का दिया था। वांग को जिस वक्त उसके पति ने धक्का दिया, वो तीन महीने की गर्भवती थी। पति को लगा कि वो अपने मंसूबे में कामयाब हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं था। पहाड़ी से गिरने के बाद वांग को काफी चोटें आईं। उनकी बाईं जांघ, बाएं हाथ, बाएं कॉलर बोन, कूल्हे की हड्डी और घुटनों में फ्रैक्चर हुआ। उनके शरीर की 17 हड्डियां टूट गईं। यहां तक कि गर्भ में उनके बच्चे की भी मौत हो गई। लेकिन, किस्मत से वांग की जान बच गई।

बैंकॉक पोस्ट’ के मुताबिक, पहाड़ी से गिरने के बाद वांग बेहोश हो चुकी थीं। तभी वहां घूमने आए एक पर्यटक की नजर उनके ऊपर पड़ी। वो फौरन पार्क के अधिकारियों को वहां बुलाकर लाया। वांग को तुरंत कोंग चियाम जिले के अस्पताल पहुंचाया गया और उनका इलाज शुरू हुआ। अस्पताल के बिस्तर पर कई दिनों तक वांग बेहोश रहीं। इसके बाद जब उन्हें होश आया, तो उस पल को याद कर उनकी आंखें भीग गईं। उन्हें याद आया कि उस दिन चट्टान पर खड़े होकर कैसे पहले उनके पति ने धीरे से गाल पर चूमा और किनारे पर धक्का देने से पहले कहा- ‘मरो’।

अस्पताल में जब वांग को होश आया, तो पुलिस उसके बयान दर्ज करने पहुंची। वांग ने अपने पति का सारा काला चिट्ठा पुलिस के सामने खोल दिया। इसके बाद पुलिस ने वांग के पति को गिरफ्तार कर उसके ऊपर हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया। अदालत में ये बात साबित हुई कि वांग के पति ने दौलत के लालच में उसकी हत्या करने की कोशिश की। ‘उसने अपने पति का हाथ फिर से थामा और उगते सूरज को देखने के लिए आगे बढ़ी। उसकी निगाहें सूरज की उस लाल रोशनी को निहार ही रही थीं कि तभी उसे पीछे से एक तेज धक्का लगा। उसकी चीख गूंजी और पलभर में वो करीब 34 मीटर ऊंचाई की उस पहाड़ी से नीचे खाई में जा गिरी। उसे पहाड़ी से धक्का देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसका अपना पति था।स्ट्रेट्स टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड के सुप्रीम कोर्ट ने वांग के पति को उसकी इस करतूत के लिए 33 साल 4 महीने जेल की सख्त सुजा सुनाई। करीब 5 साल बाद अब वांग उस पार्क में उन लोगों से भी मिलने आईं, जिन्होंने उसकी जान बचाई थी।

जब एक समलैंगिक रिश्ता बना मौत की वजह!

एक ऐसी घटना जिसमें एक समलैंगिक रिश्ता मौत की वजह बन गया! 8 मई की शाम तकरीबन 6 बजे का वक्त रहा होगा। मेरठ के खरखौदा इलाके में बुलंदशहर हाईवे से सटे आम के एक बाग में, सायरन बजाती हुई पुलिस की कई गाड़ियां दाखिल हुईं। खबर मिली थी कि बाग के अंदर दो लोगों की लाशें पड़ी हैं। कुछ ही देर में पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। लाश 22 से 24 साल की उम्र के दो नौजवानों की थी। पुलिस ने पंचनामा किया और दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। खबर फैली और कुछ ही देर में लाशों की पहचान हो गई। लाशें दीपक उर्फ मोंटी और मनोज नाम के युवकों की थीं। जो शादी पार्टियों में लड़की बनकर नाचते थे…दोनों को गला घोंटकर कत्ल किया गया था। आखिर किसने कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया? कत्ल की वजह क्या थी? अपने डांस के वीडियो ये दोनों सोशल मीडिया पर भी अपलोड करते थे। ऐसी ही एक डांस पार्टी में इन दोनों की मुलाकात अंकुश और नवीन से हुई। चारों ने आपस में मोबाइल नंबर शेयर किए और बातचीत होने लगी।ये दोनों युवक उस आम के बाग में क्यों गए थे? सवाल बहुत थे। मेरठ पुलिस इन सवालों में उलझी ही थी कि तब तक दोनों युवकों के परिजन भी थाने पहुंच जाते हैं। परिजनों की शिकायत पर केस दर्ज किया जाता है और तफ्तीश के लिए पुलिस की टीमों का गठन किया जाता है। पुलिस ने सबसे पहले दोनों युवकों के मोबाइल खंगाले। उनकी कॉल डिटेल निकाली गई। इस बीच पुलिस को उन दोनों के मोबाइल में एक वीडियो मिला। वीडियो काफी आपत्तिजनक था और इसमें दोनों के साथ दो अजनबी युवक नजर आ रहे थे।

पुलिस को इस केस में पहला सुराग मिल गया। दोनों अजनबी युवकों के बारे में परिजनों से पूछताछ हुई, तो कहानी धीरे-धीरे पुलिस की समझ में आने लगी। अब पुलिस इन दोनों युवकों की तलाश में जुट गई। मुखबिरों को एक्टिव कर दिया गया और कुछ ही घंटों बाद अंकुश और नवीन नाम के ये दोनों युवक पुलिस की हिरासत में थे। दोनों को उनका वो वीडियो दिखाया गया और पूछा गया कि आखिर मामला क्या है? थोड़ी सी सख्ती करते ही दोनों टूट गए और इसके बाद सामने आई वो कहानी, जिसे सुनकर शायद आपके पैरों तले से भी जमीन खिसक जाए।

मेरठ पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दीपक उर्फ मोंटी और मनोज डांस पार्टियों में लड़की बनकर नाचते थे। दोनों को शुरू से ही लड़कियों की तरह डांस करने का शौक था। अपने डांस के वीडियो ये दोनों सोशल मीडिया पर भी अपलोड करते थे। ऐसी ही एक डांस पार्टी में इन दोनों की मुलाकात अंकुश और नवीन से हुई। चारों ने आपस में मोबाइल नंबर शेयर किए और बातचीत होने लगी। इसके कुछ दिन बाद अंकुश के साथ मोंटी और नवीन के साथ मनोज के समलैंगिक रिश्ते बन गए। दोनों ने इन पलों को अपने मोबाइल में भी रिकॉर्ड कर लिया। इस बीच अंकुश की शादी तय हुई और इसकी भनक मोंटी को लग गई।

मोंटी ने अंकुश की शादी पर ऐतराज जताया। साथ ही मोंटी और मनोज अब अंकुश और नवीन के ऊपर उनके साथ शादी करने का दबाव बनाने लगे। दोनों ने धमकी कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो वे उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। अंकुश और नवीन अब इन दोनों से परेशान हो चुके थे। दोनों ने इनसे पीछा छुड़ाने का प्लान बनाया। बता दें कि शादी पार्टियों में लड़की बनकर नाचते थे…दोनों को गला घोंटकर कत्ल किया गया था। आखिर किसने कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया? कत्ल की वजह क्या थी? ये दोनों युवक उस आम के बाग में क्यों गए थे? सवाल बहुत थे। मेरठ पुलिस इन सवालों में उलझी ही थी कि तब तक दोनों युवकों के परिजन भी थाने पहुंच जाते हैं। परिजनों की शिकायत पर केस दर्ज किया जाता है और तफ्तीश के लिए पुलिस की टीमों का गठन किया जाता है। 8 मई को अंकुश और नवीन ने मोंटी और मनोज को मिलने के लिए बुलंदशहर हाईवे से सटे आम के एक बाग में बुलाया। यहां पहले इन दोनों ने मोंटी और मनोज को समझाने की कोशिश की, और जब बात नहीं बनी, तो बेल्ट से गला घोंटकर दोनों का कत्ल कर दिया। इस तरह मोंटी और मनोज के कत्ल की गुप्थी को मेरठ पुलिस ने 24 घंटों के भीतर सुलझा लिया।

आखिर क्यों हुआ सीतापुर का हत्याकांड?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सीतापुर का हत्याकांड क्यों किया गया! सुबह लगभग 5 बजे का वक्त, यूपी के सीतापुर का पल्हापुर गांव और उस दो मंजिला मकान के बाहर लगी लोगों की भीड़। माहौल में गहरा सन्नाटा था। लोगों के चेहरे पर एक अजीब सी दहशत थी। तभी पुलिस की गाड़ियों के सायरन सुनाई देते हैं। भीड़ के बीच एक हलचल होती है और ये गाड़ियां उसी मकान के सामने आकर ठहर जाती हैं। खाकी वर्दी वाले धड़ाधड़ गाडियों से उतरकर घर की तरफ दौड़ते हैं। लेकिन, घर में दाखिल होते ही पुलिसवालों के पैर थम जाते हैं। उनकी आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। आंगन में तीन बच्चे खून से लथपथ पड़े मिलते हैं। देखने से ही अंदाजा हो जाता है कि बच्चों को दूसरी मंजिल से नीचे फेंका गया है। इधर-उधर नजरें घुमाई तो एक कमरे में बेड पर एक लाश मिलती है। लाश के पास ही मिलता है 315 बोर का एक अवैध असलहा। साथ के कमरे में ही एक बुजुर्ग महिला की लाश और मिलती है। कमरे के सामने की तरफ सीढ़ियां थी। ऊपर जाकर देखा तो एक और लाश मिलती है। ये लाश भी महिला की थी, जिसे पहले गोली मारी गई और फिर बेहद बेदर्दी से सिर कुचला गया। लाश के पास ही खून से सना एक हथौड़ा भी पड़ा था।

पुलिस पंचनाम करती है और सभी लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया जाता है। घर के बाहर जमा लोगों के बीच सुगबुगाहट थी, लेकिन खुलकर कोई कुछ नहीं बोल रहा था। आखिर किसने एक ही परिवार के इन 6 लोगों की जान ली? तीन मासूम बच्चों को बेरहमी के साथ छत से फेंककर किसने मारा? आखिर वो कौन था, जिसने छत पर सोई महिला को गोली मारने के बाद उसका सिर भी हथौड़े कुचल दिया? घर के अंदर मिली लाश के पास वो अवैध असलहा किसका था? क्या उसी असहले से इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया? सवाल बहुत थे… और जब तफ्तीश हुई तो इस हत्याकांड की हैरान कर देने वाली वजह सामने आई।

ये परिवार था अनुराग सिंह का, जिसकी लाश पुलिस को घर के बाहर मिली। उसने ही गोली मारकर अपनी मां और पत्नी की जान ली थी। तीनों बच्चों को भी उसी ने छत से फेंककर मारा था। गांव वालों से पूछताछ हुई तो इस हत्याकांड की कहानी सुनकर पुलिस के आला अधिकारी भी चौंक गए। घर में किसी तरह की कोई आर्थिक समस्या नहीं थी। अनुराग सिंह के पास 100 बीघा के खेत थे। पत्नी लखनऊ में एक इंश्योरेंस कंपनी में अच्छी नौकरी करती थी। तीन बच्चों के साथ हंसता खेलता परिवार था। पिता का निधन हो चुका था और मां अनुराग के साथ ही रहती थी। तो फिर क्यों अनुराग अपनों का हत्यारा बन गया?

गांव वालों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों से अनुराग को शराब की लत लग गई थी। शराब की वजह से उसने खेती पर ध्यान देना भी कम कर दिया था। वो हर दिन शराब पीकर आता और किसी ना किसी बात को लेकर घर में झगड़ा होता। शराब की वजह से ही उसका स्वभाव काफी उग्र रहने लगा था। पत्नी और मां ने उससे शराब छोड़ने को कहा, लेकिन जब उसने नहीं उनकी बात नहीं सुनी तो दोनों ने उसे नशा मुक्ति केंद्र ले जाने का फैसला लिया। इस बात से अनुराग काफी नाराज हुआ। उसे लगने लगा था कि अगर वो नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती हुआ, तो गांव में उसकी बदनामी होगी। उसने नशा मुक्ति केंद्र जाने से साफ मना कर दिया।

वहीं, अनुराग और उसकी पत्नी के बीच अक्सर नौकरी की बात को लेकर भी झगड़ा होता था। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनुराग की पत्नी अक्सर उसकी शराब की आदत और खेतों पर ध्यान ना देने को लेकर टोकती थी। उसकी पत्नी कहती थी कि आखिर कब तक वो इस तरह नौकरी करती रहेगी। उसे खेतों की तरफ ध्यान देना चाहिए। अगर वो इसी तरह शराब के नशे में डूबा रहा, तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा। ऐसे में अनुराग को लगने लगा था कि उसकी पत्नी उसके ऊपर नौकरी की धौंस जमाती है।

शुक्रवार की रात को भी परिवार के बीच काफी झगड़ा हुआ। शोर सुनकर गांव के लोग पहुंचे और अनुराग को समझाने की कोशिश की। काफी देर तक समझाने के बाद भी जब अनुराग शांत नहीं हुआ तो गांव के लोग लौट आए। घर के अंदर से रात के करीब ढाई बजे तक चिल्लाने की आवाजें आती रहीं। इसके बाद सुबह 5 बजे के आसपास अनुराग ने पहले अपनी पत्नी को गोली मारी और इसके बाद हथौड़े से उसका सिर कुचला। छत पर ही सोए अपने तीनों बच्चों को उसने दूसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इसके बाद वो नीचे आया और मां की भी गोली मारकर हत्या कर दी। परिवार को खत्म करने के बाद अनुराग ने खुद को भी गोली मारकर खुदकुशी कर ली।

जब एक ट्रांसजेंडर ने किया हाई प्रोफाइल कत्ल!

एक ऐसी घटना जिसमें एक ट्रांसजेंडर ने हाई प्रोफाइल कत्ल कर दिया! 3 मई 2024 को गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में रात के लगभग तीन बजे अचानक एक हलचल हुई। कुछ लोगों को इलाके के खेतान पब्लिक स्कूल के पास एक आदमी खून से लथपथ पड़ा मिला। पुलिस को खबर दी गई तो कुछ ही देर में पीसीआर वैन मौके पर पहुंच गई। घायल शख्स को तुरंत पास के नरेंद्र मोहन हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घायल शख्स ने दम तोड़ दिया। तब तक हॉस्पिटल के बाहर एक भीड़ जमा हो गई। शिनाख्त हुई तो पता चला कि मरने वाला टाटा स्टील का नेशनल बिजनेस हेड विनय त्यागी है। मामला हाई प्रोफाइल मर्डर का था। पुलिस के आला अफसर भी कुछ देर बाद हॉस्पिटल पहुंचे और मामले की जानकारी ली। परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी। विनय त्यागी का ट्रांसफर हाल ही में कोलकाता से दिल्ली हुआ था। वो हर दिन मेट्रो से ही साहिबाबाद के राजेंद्र नगर इलाके में स्थित अपने घर आते थे। कत्ल वाली रात मेट्रो से उतरने के बाद करीब 11 बजे उन्होंने फोन पर अपने परिजनों से बात भी की, लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

पुलिस ने सबसे पहले मौका-ए-वारदात के आसपास की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। काफी छानबीन के बाद पुलिस को एक सीसीटीवी कैमरे में संदिग्ध बाइक नजर आई। बाइक पर चार लोग सवार थे। वारदात वाली रात ये बाइक कई बार इस इलाके में घूमती दिखी। पुलिस ने अब इस बाइक का डिजिटल फुटप्रिंट निकालना शुरू किया। आस-पास के तकरीबन 200 सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए, तो पता चला कि ये बाइक वारदात वाली जगह से निकलकर लोनी के रास्ते दिल्ली की तरफ गई है। रास्ते में कई जगह ये लोग बाइक से रुके भी। मामले में पुलिस को अब पहला सुराग मिल चुका था।

पुलिस की टीमें इन चारों की तलाश में जुट गई। कड़ियां जोड़ी गईं और कुछ दिन बाद पुलिस को इनका सुराग मिल गया। मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि ये चारों 9 मई की रात को दिल्ली से भागने की फिराक में हैं। पुलिस ने अपना जाल बिछा दिया। दिल्ली से यूपी में एंट्री के सभी पॉइंट्स पर पुलिस ने अपनी निगाहें जमा दी। शुक्रवार यानी 9 मई की रात करीब साढे तीन बजे पुलिस को लोनी से राजनगर एक्सटेंशन की तरफ आने वाले रोड पर एक बाइक आती दिखी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, तो बाइकसवार भागने लगे। पुलिस ने भी अपनी गाड़ी बाइक के पीछे लगा दी।

कुछ दूर जाकर पार्श्वनाथ बिल्डिंग के पास बाइक फिसल गई। पुलिस की गाड़ी उनके पास पहुंचने ही वाली थी कि बाइकसवार बदमाशों ने पुलिस के ऊपर फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की तरफ से 9 राउंड फायरिंग हुई और एक गोली यूपी पुलिस के एक सब इस्पेक्टर को लगी। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। पुलिस की गोली से एक बदमाश वहीं ढेर हो गया। अपने एक साथी को मरता देख, बाकी तीन भागने लगे। पुलिस ने पीछा किया और दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान मौके का फायदा उठाकर एक बदमाश फरार होने में कामयाब हो गया।

गिरफ्तार किए गए बदमाशों से पूछताछ हुई तो विनय त्यागी मर्डर केस की पूरी कहानी खुल गई। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया था। लवकुश, युग, दक्ष उर्फ अक्की और आमिर। इनमें से अक्की को ट्रांसजेंडर बताया जा रहा है। बता दें कि परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी। विनय त्यागी का ट्रांसफर हाल ही में कोलकाता से दिल्ली हुआ था। वो हर दिन मेट्रो से ही साहिबाबाद के राजेंद्र नगर इलाके में स्थित अपने घर आते थे। कत्ल वाली रात मेट्रो से उतरने के बाद करीब 11 बजे उन्होंने फोन पर अपने परिजनों से बात भी की, लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इन चारों को ड्रग्स के नशे की लत थी। चारों पहले भी दिल्ली में कई वारदात को अंजाम दे चुके हैं। 3 मई की रात को इन्होंने पहले दिल्ली के सीलमपुर इलाके में ड्रग्स ली और इसके बाद चारों एक बाइक से गाजियाबाद पहुंच गए। यहां भी इन्होंने नशा किया। ये चारों और नशा करना चाहते थे, लेकिन इनके पास रुपए नहीं थे। ऐसे में इन्होंने लूट की योजना बनाई।

जब पत्नी देती थी पति की काफी में धीमा जहर!

एक ऐसी घटना जिसमें पत्नी अपने ही पति की काफी में धीमा जहर देती थी! इश्क अंधा होता है, ये तो सुना होगा आपने… लेकिन अगर वही इश्क जालिम, बेरहम और कातिल निकल जाए, तो क्या होगा? वो तो उसके हुस्न का मुरीद था। उसकी एक-एक अदा पर जान छिड़कता था। उसकी आंखों के सामने से अगर वो गुजर भी जाए, तो पलकें झपकना भूल जाता था। ड्यूटी पर होता, तो उसके ख्यालों में खो जाता। फोन पर उसकी आवाज सुनता। छुट्टी पर घर आता, तो उसे सामने बिठाकर घंटों प्यारभरी बातें करता। लेकिन, उसे अंदाजा भी ना था कि जिसके लिए वो अपने दिल में मोहब्बत का गुलशन सजाए बैठा है, उसकी वही हमराज इस गुलशन को तबाह करने पर तुल जाएगी। कहानी है एक ऐसी महिला की, जिसकी हरकत जानकर आप बिजनौर की बेरहम बीवी को भूल जाएंगे। उसका मकसद इतना खतरना था, कि सोचकर ही रूह कांप जाती है। उसकी ये पोल शायद कभी खुलती भी नहीं, अगर उसका पति घर में छिपाकर कैमरे ना लगाता। मामला एरिजोना का है, जहां इस महिला को अपने फौजी पति को कॉफी में धीमा जहर मिलाकर पिलाते हुए पकड़ा गया है। उसका मकसद था, लाखों की वो रकम हासिल करना, जो उसके पति के मरने के बाद इंश्योरेंस कंपनी से उसे मिलने वाली थी।

मेलोडी फेलिसियानो जॉनसन नाम की इस महिला का पति रॉबी जॉनसन अमेरिकी एयरफोर्स में है। उसकी तैनाती इस वक्त जर्मनी में है। रॉबी को पिछले साल मार्च के महीने में अपनी पत्नी के ऊपर उस वक्त शक हुआ, जब उन्हें कॉफी का टेस्ट कुछ अजीब लगा। शुरुआत में उन्होंने इसे नजरअंदाज किया, लेकिन जब ये जारी रहा, तो उन्हें कुछ गड़बड़ महसूस हुई।28 जून को रॉबी अपनी पत्नी के साथ अमेरिका वापस लौटे। यहां टक्सन, एरिजोना में वायु सेना बेस पर अपने घर में उन्होंने फिर से खुफिया कैमरे लगाए। रॉबी बाजार से पूल केमिकल टेस्टिंग स्ट्रिप्स लेकर आए और सबसे पहले उस पानी को चेक किया, जिसमें कॉफी बनती थी। स्ट्रिप्स की टेस्टिंग में नल के पानी में कुछ भी गड़बड़ नहीं मिला।

लेकिन जब, रॉबी ने कॉफी पॉट को चेक किया, तो उसमें हाई मात्रा में क्लोरीन मिली। उनका माथा ठनक गया। रॉबी ने खुफिया कैमरे खरीदे और घर में बिना किसी को बताए फिट कर दिए। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, शाम को जब रॉबी ने फुटेज चेक की, तो देखा कि उनकी पत्नी मेलोडी कॉफी पॉट में अलग से कुछ मिला रही है। वो समझ गए कि उनकी पत्नी उन्हें मारना चाहती है। उनका दिल टूट गया। रॉबी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते हैं, वही उनकी जान की दुश्मन कैसे बन गई।

रॉबी जॉनसन ने अपनी पत्नी से इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन उस बर्तन में बनी कॉफी पीना छोड़ दिया। वो इस तरह से दिखाते रहे, जैसे उन्हें कुछ नहीं पता। वो उस बर्तन में बनी कॉफी पीने का नाटक करते रहे। दरअसल, रॉबी नहीं चाहते थे कि जर्मनी में उनके अधिकारियों को इस बारे में पता चले। वो उसे अमेरिका जाकर सजा दिलाना चाहते थे। 28 जून को रॉबी अपनी पत्नी के साथ अमेरिका वापस लौटे। यहां टक्सन, एरिजोना में वायु सेना बेस पर अपने घर में उन्होंने फिर से खुफिया कैमरे लगाए।

यहां भी रॉबी की पत्नी एक बर्तन में ब्लीच डालने और फिर उसे रॉबी जॉनसन के कॉफी मेकर में खाली करते हुए नजर आई। इसके बाद रॉबी पुलिस के पास गए और अपनी पत्नी के ऊपर केस दर्ज कराया। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें शक है कि उनके इंश्योरेंस की रकम हड़पने के लिए उनकी पत्नी उन्हें धीमा जहर देकर मारना चाहती है। पुलिस ने 18 जुलाई को मेलोडी जॉनसन को गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि उसकी ये पोल शायद कभी खुलती भी नहीं, अगर उसका पति घर में छिपाकर कैमरे ना लगाता। मामला एरिजोना का है, जहां इस महिला को अपने फौजी पति को कॉफी में धीमा जहर मिलाकर पिलाते हुए पकड़ा गया है। उसका मकसद था, लाखों की वो रकम हासिल करना, जो उसके पति के मरने के बाद इंश्योरेंस कंपनी से उसे मिलने वाली थी। इस मामले ने पूरे अमेरिका को हैरान करके रख दिया। कोर्ट में केस चला और शुरुआत में उनके ऊपर हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज हुआ। हालांकि बाद में आरोप कम किए गए और मेलोडी को तीन साल के प्रोबेशन की सजा सुनाई गई।

जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से एक मुख्यमंत्री ने लिया पंगा!

कहानी एक ऐसी घटना की जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मुख्यमंत्री ने पंगा ले लिया था! 2 दिसंबर, 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के प्रधानमंत्री बनने के अगले ही दिन इस बात पर विचार करने के लिए एक बैठक बुलाई गई कि पूर्व पीएम राजीव गांधी और उनके परिवार को एसपीजी सुरक्षा दी जाए या नहीं। तब कैबिनेट सचिव रहे टीएन शेषन ने सलाह दी कि राजीव गांधी को एसपीजी कैटेगरी की सिक्योरिटी दी जानी चाहिए। मगर, वीपी सिंह सरकार ने राजीव गांधी को सुरक्षा नहीं दी। इसी के साथ शेषन को कैबिनेट सचिव की जगह योजना आयोग का सदस्य बना दिया गया। 1990 में जब वीपी सिंह की सरकार गिर गई तब नए पीएम बने चंद्रशेखर ने उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनने का प्रस्ताव भेजा। इसी के साथ देश में चुनाव सुधार की नई इबारत लिखी गई। जब टीएन शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का प्रस्ताव मिला तो उन्होंने इसे फौरन लपका नहीं। उन्होंने इस बारे में पूर्व पीएम राजीव गांधी, पूर्व राष्ट्रपति आर वेंकटरमण और कांची के शंकराचार्य से इस बारे में सलाह ली। तीनों ने अपनी सहमति दे दी। शंकराचार्य ने कहा कि ये सम्मानजनक पद है। इसे लेना चाहिए।

टीएन शेषन चुनाव आयुक्त बनने से पहले पर्यावरण मंत्रालय में सचिव थे। उनके काम से खुश होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें सुरक्षा सचिव बना दिया। वो सुरक्षा सचिव से ज्यादा सिक्योरिटी एक्सपर्ट की तरह बन गए। एक बार उन्होंने राजीव गांधी मुंह से ये कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो कोई चीज नहीं खानी चाहिए, जिसकी पहले से जांच नहीं की गई हो। शेषन ने 2 अगस्त, 1993 को 17 पेज का आदेश जारी किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक सरकार चुनाव आयोग की शक्तियों को मान्यता नहीं देती, तब तक देश में कोई भी चुनाव नहीं कराया जाएगा।आईडेंटिटी कार्ड से चुनाव कराने की शुरुआत की तो तत्कालीन सरकार इसके विरोध में थी। तब शेषन ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट के नियम-37 के तहत चुनाव रोकने की धमकी दी। आखिरकार कोर्ट ने मामला सुलझाया और फोटो आईडेंटिटी कार्ड जारी होने लगे। उनकी इस मांग पर सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। उनका कहना था कि मुझसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कानून मंत्री के दफ्तर के बाहर बैठ कर मुलाकात के लिए इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने अपने समय में चाहे वो प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव हों या बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सबसे पंगा लिया।

शेषन बूथ कैप्चरिंग और बैलेट पेपर लूटने पर रोक लगाने में काफी हद तक कामयाब रहे। उन्होंने फर्जी वोटर आईडी बनाने पर रोक लगाई। इसके लिए फोटो आईडेंटिटी कार्ड जारी करवाए। पात्रता पूरी करने वालों को ही आईडी जारी करवाना शुरू किया। चुनाव आयोग की मशीनरी को ऑटोनॉमस करने का काम किया। रिश्वत रोकने, शराब बांटने, वोटर्स को लालच देने जैसे कामों को रोकने के लिए ऐसा किया गया। प्रत्याशियों के खर्चे की लिमिट तय की। लाउडस्पीकर से प्रचार करने पर पहले लिखित में अनुमित लेने को अनिवार्य किया।जब शेषन ने फोटो आईडेंटिटी कार्ड से चुनाव कराने की शुरुआत की तो तत्कालीन सरकार इसके विरोध में थी। तब शेषन ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट के नियम-37 के तहत चुनाव रोकने की धमकी दी। आखिरकार कोर्ट ने मामला सुलझाया और फोटो आईडेंटिटी कार्ड जारी होने लगे।

चुनाव करारने के दौरान जरा सी लापरवाही पर आज चुनाव आयोग अफसरों के ट्रांसफर कर देता है। यह परिपाटी भी टीनए शेषन ही लेकर आए थे। उनके समय में लापरवाही बरतने या आचरण के विरुद्ध काम करने पर सीनियर पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक का ट्रांसफर कर दिया जाता था। नवंबर, 2022 की बात है, जब सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग में नियुक्तियों को लेकर पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई चल रही थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, अब तक कई मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं, मगर टीएन शेषन जैसा कोई कभी-कभार ही होता है। जब तक सरकार चुनाव आयोग की शक्तियों को मान्यता नहीं देती, तब तक देश में कोई भी चुनाव नहीं कराया जाएगा। उनकी इस मांग पर सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। उनका कहना था कि मुझसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कानून मंत्री के दफ्तर के बाहर बैठ कर मुलाकात के लिए इंतजार करना पड़ता था।हम नहीं चाहते कि कोई उन्हें ध्वस्त करे। तीन लोगों मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के नाज़ुक कंधों पर बड़ी शक्ति निहित है। हमें CEC के पद के लिए सबसे योग्य व्यक्ति खोजना होगा।

स्वास्थ्य के अधिकार के लिए क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार के लिए एक बयान दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राइट टु हेल्थ में कंस्यूमर को प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी के बारे में भी जानने का हक है। इस तरह कोर्ट ने राइट टु हेल्थ का दायरा बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कहा, प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी के बारे में जानकारी देना ना सिर्फ निर्माता, सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है, बल्कि प्रॉडक्ट का प्रचार प्रसार करने वाले माध्यम, सिलेब्रिटी और एनफ्लूएंसर की भी ज़िम्मेदारी बनती है। एडवरटाइजर और एडवरटाइजिंग एजेंसी और उस प्रॉडक्ट को प्रमोट करने वाले जिम्मेदारी से काम करें। सभी मेडिकल डिवाइस लाइसेंस होल्डर और निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वह लाइफ सेविंग मेडिकल डिवाइस के किसी भी साइड इफेक्ट को सरकार के एमवीपीआई प्लैटफॉर्म पर रिपोर्ट करें, यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें।उन्हें भी गाइडलाइंस के तहत जिम्मेदारी लेनी होगी, ताकि कंस्यूमर का जो भरोसा है वह न तोड़ा जाए। उनका शोषण ना हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गुमराह करने वाले विज्ञापन के मामले में कोई ठोस मेकेनिजम नहीं है, जहां कंस्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। कोर्ट ने राइट टु हेल्थ के दायरे में कंस्यूमर के अधिकार को प्रोटेक्ट करने के लिए निर्देश दिया कि विज्ञापन को जारी करने से पहले एडवरटाइजर और एडवरटाइजिंग एजेंसी केबल टेलिविजन नेटवर्क रूल्स का पालन करें।वहीं जलावायु परिवर्तन मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि स्वच्छ पर्यावरण के बिना जीवन के अधिकार पूरी तरह से साकार नहीं होते हैं। अब मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसके बाद इन फैसलों से राइट टु हेल्थ का दायरा काफी व्यापक हो गया है। इसका सीधा सरोकार आम लोगों से है, जिन्हें इस अधिकार को लेकर जागरुक रहने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हीमा कोहली की अगुवाई वाली बेंच ने पतंजलि केस में दिए गए ऑर्डर में कंज्यूमर राइट्स के बारे में व्यवस्था दी है। इस मामले में आईएमए की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि गुमराह करने वाले विज्ञापन पर रोक लगाई जाए और रेगुलेशन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हीमा कोहली की अगुवाई वाली बेंच ने पतंजलि केस में दिए गए ऑर्डर में कंज्यूमर राइट्स के बारे में व्यवस्था दी है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पतंजलि और अन्य के खिलाफ कंटेप्ट नोटिस जारी किया था और मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।

समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट राइट टु हेल्थ को लेकर कई फैसले दिए हैं।सभी मेडिकल डिवाइस लाइसेंस होल्डर और निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वह लाइफ सेविंग मेडिकल डिवाइस के किसी भी साइड इफेक्ट को सरकार के एमवीपीआई प्लैटफॉर्म पर रिपोर्ट करें, यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें।व्यापक तौर पर परिभाषित किया है। कोविड के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर 2020 को अहम फैसले में कहा है कि राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार है। राइट टु हेल्थ में इलाज आम लोगों की जेब के दायरे में होना चाहिए। वहीं जलावायु परिवर्तन मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि स्वच्छ पर्यावरण के बिना जीवन के अधिकार पूरी तरह से साकार नहीं होते हैं। अब मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसके बाद इन फैसलों से राइट टु हेल्थ का दायरा काफी व्यापक हो गया है। इसका सीधा सरोकार आम लोगों से है, जिन्हें इस अधिकार को लेकर जागरुक रहने की जरूरत है।

कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डीसीजीआई ने मेडिकल डिवाइस के साइड इफेक्ट को रिपोर्ट करने की अपील की है। बता दें कि गुमराह करने वाले विज्ञापन के मामले में कोई ठोस मेकेनिजम नहीं है, जहां कंस्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। कोर्ट ने राइट टु हेल्थ के दायरे में कंस्यूमर के अधिकार को प्रोटेक्ट करने के लिए निर्देश दिया कि विज्ञापन को जारी करने से पहले एडवरटाइजर और एडवरटाइजिंग एजेंसी केबल टेलिविजन नेटवर्क रूल्स का पालन करें। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हीमा कोहली की अगुवाई वाली बेंच ने पतंजलि केस में दिए गए ऑर्डर में कंज्यूमर राइट्स के बारे में व्यवस्था दी है। सभी मेडिकल डिवाइस लाइसेंस होल्डर और निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वह लाइफ सेविंग मेडिकल डिवाइस के किसी भी साइड इफेक्ट को सरकार के एमवीपीआई प्लैटफॉर्म पर रिपोर्ट करें, यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें।

जब राहुल गांधी ने दी खुलेआम डिबेट की चुनौती!

हाल ही में राहुल गांधी ने खुलेआम डिबेट की चुनौती दे दी है! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुले मंच से डिबेट की चुनौती दी है। उन्होंने बुद्धिजीवियों की ओर से लिखे पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे और मोदी को चिट्ठी लिखी है कि मोदी जी और राहुल गांधी को बहस करनी चाहिए। राहुल ने कहा कि वे बहस के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री कहीं भी, किसी भी समय बहस कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से पूछा, क्या आपको लगता है कि मोदी जी डिबेट के लिए आएंगे? वो मेरे से बहस नहीं करेंगे। क्योंकि वो आए तो मेरा पहला ही सवाल होगा कि आपका अडानी से क्या संबंध है? उसके बाद इलेक्टोरल बॉन्ड पर सवाल होगा कि आप इसे समझा दो? इसी में फांस जाएंगे। किसानों से जुड़ा सवाल। कोरोना में जब लोग मर रहे थे तो आप ने थाली बजाने को क्यों कहा? चीन के अतिक्रमण और अग्निपथ स्कीम पर भी सवाल पूछेंगे। इतने सवाल है कि वो जवाब नहीं दे पाएंगे। राहुल शनिवार को अशोक विहार स्थित रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभा कर रहे थे। इस दौरान कन्हैया ने कहा कि इस बार अजीब होगा कि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस को वोट करेंगे और मैं आम आदमी पार्टी का बटन दबाऊंगा। मैं यहां बता दूं कि चार सीटों पर आम आदमी पार्टी और तीन सीटों पर कांग्रेस लड़ रही है। मैं अपने कार्यकर्ताओं को भी यह बताना चाह रहा हूं कि वो तीन सीटों पर अपने नेताओं का समर्थन करें और चार सीटों पर आप का समर्थन करना है।

राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनके उद्योगपति मित्रों ने कांग्रेस को टेंपो भरकर पैसा दिया है, तो वे अपनी एजेंसियों से इसकी जांच क्यों नहीं करा लेते। राहुल ने कहा कि अब प्रधानमंत्री को पता चल गया है कि उनको ‘बाय बाय’ करने का समय आ गया है। पत्रकारों के साथ प्रधानमंत्री के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि मोदी जी ने पत्रकारों को बताया कि जब वे छोटे थे, तो मुसलमान भाई उनके घर खाना भेजते थे। प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी, आप तो शाकाहारी हैं। सभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव, पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन, पी. चिदंबरम, के.सी. वेणुगोपाल के अलावा पार्टी के तीनों उम्मीदवार जयप्रकाश अग्रवाल, उदित राज और कन्हैया कुमार भी मौजूद थे।

राहुल गांधी ने कहा कि संविधान बचाने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इस चुनाव में एक साथ आए हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के कई नेताओं ने खुलकर कहा है कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे संविधान को फाड़कर फेंक देंगे। हमारा पहला काम संविधान को बचाने का है, क्योंकि यही आपका भविष्य है और यही आपका सपना है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि दिल्ली में कांग्रेस के तीन और आम आदमी पार्टी के चार उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करके दिल्लीवाले उन्हें विजयी बनाएंगे।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सिर्फ 20-25 उद्येागपतियों के लिए ही काम किया है। छोटे व्यापारियों के लिए प्रधानमंत्री ने 10 साल में क्या किया? चांदनी चौक, दिल्ली के व्यापारियों ने लिए क्या काम किया? पहले नोटबंदी से छोटे व्यापारियों का नुकसान हुआ। हजारों कारोबार बंद हो गए और फिर गलत तरीके से जीएसटी लागू की, जिसकी वजह से भी बड़ा नुकसान हुआ। छोटे व्यापारियों का एक रुपया भी माफ नहीं किया, लेकिन उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिए। ये इतनी रकम है, जिससे कई साल मनरेगा योजना चलाई जा सकती है। यूपीए सरकार ने किसानों का जो कर्ज माफ किया, उससे कहीं अधिक यह रकम है। उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि वह रेलवे समेत पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग का निजीकरण कर रही है। यहां तक कि देशभक्ति के प्रतीक लाल किले का भी ठेका किसी को दे दिया।

उन्होंने लोगों से अपील की कि एक होकर मेड इन चाइना का मुकबाला करना है और मेड इन इंउिया, मेड इन चांदनी चौक, मेड इन न्यू दिल्ली बनाना है। अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का भी राहुल गांधी ने जिक्र किया और कहा कि उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। लवली का नाम लिए बिना ही राहुल ने कहा कि जो लोग डरपोक हैं, वे चले जाएं तो बेहतर है। क्योंकि कांग्रेस को बब्बर शेर लोगों की जरूरत है।

मनोज बाजपेयी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, आखिर क्यों इंकार किया था इस फिल्म क लिए?

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मनोज ने कहा, ‘भैयाजी’ की स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैंने फिल्म न करने का फैसला किया।’
मनोज बाजपेयी की 100वीं फिल्म ‘भैयाजी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। अभिनेता ने फिल्म के प्रमोशन के दौरान मुंबई में झटिका टूर के दौरान से बात की
प्रश्न: जब आपने भैयाजी पर काम करना शुरू किया तो क्या आपके मन में 100वीं फिल्म का विचार आया था?

मनोज: हमारे युवा निर्देशक अपूर्बा सिंह कार्की सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। अपूर्वा जान सकती हैं कि ‘भैयाजी’ मेरे करियर की 100वीं फिल्म है। इसलिए हम इस नंबर का इस्तेमाल फिल्म को प्रमोट करने के लिए कर रहे हैं।’ 100वीं फिल्म के साथ-साथ यह भी बता दूं कि मैंने इंडस्ट्री में 30 साल पूरे कर लिए हैं। जब मैंने ‘वैयाजी’ की कहानी सुनी तो मुझे यकीन हो गया कि मैं इस फिल्म में वैसे भी काम नहीं करूंगी. लेकिन ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ को अपूर्व ने डायरेक्ट किया था। उन्होंने इसे बिना सोचे-समझे लिया। उन्होंने मुझसे कहा, अगर तुम यह फिल्म करोगे तो केवल मेरे साथ करोगे। मैंने बहुत बड़ी व्यावसायिक फिल्मों में कम ही काम किया है। क्योंकि, मैं कभी भी खुद को उस स्टाइल में नहीं ढाल सका।’ लेकिन अपूर्वा की जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा. यदि मैं ऐसा नहीं करता तो यह चित्र अद्भुत नहीं होता।

सवाल: ‘भैयाजी’ में मनोज बाजपेयी नए लुक में। धुन्धुमा के एक्शन दृश्यों में कितने बॉडी डबल या स्टंट का उपयोग किया गया था?

मनोज: साउथ के मशहूर एक्शन मास्टर विजयन ने इस फिल्म के एक्शन सीन्स को डायरेक्ट किया था. पूरी फिल्म में मैंने जो कुछ भी किया, सब कुछ खुद ही किया। जीत की शर्त यह थी कि तुम मेरे साथ सब कुछ करोगी। मेरे घुटने में अभी भी दर्द है! सेटर्ज की गर्दन की मांसपेशियों में अब भी तनाव है. मैं सेट पर आने से पहले हर दिन ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करता था। सौभाग्य से चोट का प्रभाव बहुत अधिक नहीं था।

प्रश्न: अपने करियर में इतना आगे आने के बाद, भाग्य, कड़ी मेहनत, दृढ़ता – आप सबसे अधिक श्रेय किसे देंगे?

मनोज: मैंने इस उद्योग में विभिन्न माध्यमों और विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। ऐसा लगता है कि किस्मत से भी बड़ा अगर कोई काम होता है तो वह है काम के प्रति समर्पण। मैंने 30 वर्षों में 100 चित्र बनाए हैं क्योंकि मैं कभी भी संख्याओं के पीछे नहीं रहा। जब मैंने अपने करियर में गिरावट देखी तो भगवान के बाद मेरे मैनेजरों ने ही मुझे सबसे ज्यादा संभाला। और मैं हमेशा से बहुत जिद्दी रहा हूं. मैं ज़मीन से चिपका हुआ था. सफलता हो या असफलता, मैंने कुछ भी मन में नहीं आने दिया. जीवन का एक सामान्य नियम – जब मैं बहुत परेशान होता हूं तो 6 घंटे से ज्यादा चुप नहीं रहता। इसके पीछे तर्क वही है, मैं आधे दिन से ज्यादा उदास नहीं रहूँगा।

प्रश्न: हिंदी व्यावसायिक फिल्म के नायक को उसके लुक के कारण खारिज किया गया, आपके नहीं। आपने अस्वीकृति को कैसे संभाला?

मनोज: यह सच है कि हमारी इंडस्ट्री में आरामदायक लुक की बहुत मांग है। लेकिन इसी बीच जब नाना पाटेकर जैसे एक्टर इंडस्ट्री में आए तो दर्शकों ने उन्हें खूब प्यार दिया. यहां तक ​​कि नाना पाटेकर को भी एक समय सबसे ज्यादा वेतन मिलता था। हम ये भी जानते हैं कि जब अमिताभ जी ने इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया था तो उन्हें भी काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. तथाकथित हैंडसम अभिनेताओं की चर्चा आज भी होती है। इसी अंतराल में आते हैं वो अभिनेता जो अपनी मेहनत और किस्मत से सभी बाधाओं को पार कर लेते हैं। मुट्ठी भर निर्देशक मेरे साथ काम करने से कतराते हैं। मैं इसे लेकर परेशान होकर बैठने को सहमत नहीं हूं. मनोज बाजपेयी के अपने दर्शक वर्ग हैं. मैं उनके लिए काम करूंगा. और हां, दुनिया के सामने, अपनी मां और पत्नी की नजरों में मैं सबसे हैंडसम हूं (हंसते हुए)।

प्रश्न: क्या आप अगागोरा में रोमांटिक भूमिका में नजर आएंगे?
मनोज: उन्हीं शब्दों में कहें तो हिंदी फिल्मों की पहचान इस आधार पर होती है कि हीरो कितना हैंडसम है। जो लोग सीधे-सादे, सादे दिखते हैं, उन्हें आमतौर पर इंडस्ट्री में भगवान या रोमांटिक हीरो के रोल के लिए नहीं चुना जाता।

प्रश्न: आप विभिन्न किरदार निभाते हैं। क्या कोई किरदार आपके निजी जीवन को प्रभावित करता है?

मनोज: प्रभाव के बाद. हम जीवन में बहुत कुछ करते हैं। इसके हमेशा फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। चरित्र मुझ पर भी प्रभाव डालता है।

सवाल: इतने सालों बाद शुक्रवार को रिलीज के दिन मन की स्थिति कैसी है?

मनोज: एक बार फिल्म की शूटिंग खत्म हो जाए तो डबिंग के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखते। मैं शूटिंग के समय मॉनिटर देखना भी पसंद नहीं करता। मैं बस उत्सुक हूं कि मेरे दर्शकों को कैसा लगा, हमसे कहां गलती हुई? आइए इन्हें जानकर आगे बढ़ें। मैं कभी इसकी चिंता नहीं करता कि आलोचक क्या कहते हैं। उसके आधार पर, मैं अभिनय छोड़ दूंगा और जेनजी-जांगिया की दुकान खोलूंगा? उन चीज़ों के बारे में सोचने का कोई मतलब नहीं है जिन्हें नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न: आपके करियर का सबसे कठिन समय कौन सा था?
मनोज: ‘बैंडिट क्वीन’ की रिलीज के बाद जब मैं मुंबई आया तो मेरे पास करने के लिए कोई काम नहीं था। 4 साल के लंबे इंतजार के बाद मुझे ‘सच्ची’ तस्वीर मिली। मैं मानसिक रूप से बहुत टूट गया था. ‘पिंजर’ और ‘1971’ फ्लॉप होते ही हाथ फिर खाली हो गए। धैर्य, प्रतीक्षा करने के लिए धैर्य। उस वक्त मैंने प्रोड्यूसर्स को फोन किया और काम मांगा, मुझे कोई शर्म नहीं आई।’ जब कोई काम नहीं था तो खुद पर काम किया।

प्रश्न: आप सेवानिवृत्ति में क्या करते हैं?

मनोज: परिवार के साथ समय बिताने (घूमने) और उनकी जरूरतों को पूरा करने से बड़ी कोई संतुष्टि नहीं है।

प्रश्न: क्या बेटी एवा नायला को आपकी तस्वीरें देखना पसंद है?

मनोज: हां, ‘फैमिली मैन’ उनकी पसंदीदा सूची में सबसे ऊपर है। ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ तीन बार देखी। मैं और शबाना (पत्नी) चाहते थे कि वह यह तस्वीर देखें।’ मुझे लगता है कि हर लड़की को यह फिल्म देखनी चाहिए।’ ‘गुलमोहर’ देखने के बाद मैं बाथरूम में गई और खूब रोई। क्योंकि शर्मिला टैगोर को देखकर बार-बार उनकी दादी की याद आती रहती थी।

क्या बॉलीवुड सितारे लग रहे हैं अपने ऊपर पहरा?

वर्तमान में बॉलीवुड सितारे अपने ऊपर पहरा लगा रहे हैं! बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और ‘झक्कास’ अनिल कपूर के बाद अब ‘भिड़ू’ जैकी श्रॉफ ने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की मांग के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। जग्गू दादा ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करके अपने नाम, फोटो, आवाज के साथ-साथ मशहूर तकिया कलाम ‘भिड़ू’ के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। जैकी ने यह केस बिना उनकी अनुमति के अपने आर्थिक फायदों के लिए उनकी फोटो या आवाज का इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं और आपत्तिजनक जीआईएफ/मीम बनाने वाले प्लेटफॉर्मों के खिलाफ किया है। इससे पहले अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन भी अपनी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट का सहारा ले चुके हैं। देखा जाए, तो फिल्मी सितारों की नकल उतारना, उनके फोटो, स्टाइल और डायलॉग्स का अपने-अपने ढंग से इस्तेमाल करना आम बात रही है, मगर पिछले कुछ समय से बॉलीवुड स्टार्स अपनी पर्सनैलिटी को लेकर कुछ ज्यादा ही गंभीर नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अचानक ये सितारे ऐसा कदम क्यों उठा रहे हैं? और इससे किन लोगों की परेशानी बढ़ने वाली है।

जैकी श्रॉफ से पहले इस ‘राम’ के ‘लखन’ अनिल कपूर की याचिका पर भी बीते साल कोर्ट ने बिना अनुमति उनकी फोटो, नाम, आवाज़, निक नेम AK, फिल्‍मी किरदारों जैसे ‘लखन’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘मजनू भाई’, ‘नायक’ और ‘झक्कास’ के उपयोग पर रोक लगा दी थी। अनिल ने AI, डीपफेक, कंप्यूटर जेनरेटेड ग्राफिक्‍स (CGI) जैसे तकनीक के दुरुपयोग से सुरक्षा की भी मांग की थी। वहीं, 2022 में बिग बी ने अपनी पर्सनैलिटी राइट की सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर कोर्ट ने उनके नाम, आवाज, फोटो और केबीसी के मशहूर कंप्यूटर जी और लॉक कर दिया जाए जैसे डायलॉग को उनकी परमिशन के बिना इस्तेमाल करने पर रोक लगाई थी। यानी इन स्टार्स की परमिशन के बिना उनकी फोटो, आवाज़, स्टाइल या इन डायलॉग का इस्तेमाल किया तो भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।

वैसे, लोग हैरान भी हैं कि बॉलीवुड के ये सुपरस्टार अचानक लोगों को उनकी नकल न करने से बाध्य क्यों कर रहे हैं‌? मगर इसकी कई अहम वजहें सामने आई हैं। जैसे, एक तो कई छोटी-बड़ी कंपनियां स्टार्स की इजाजत के बिना उनकी फोटो, आवाज का इस्तेमाल करके अपना प्रॉडक्ट बेचकर मुनाफा कमाती हैं, जो गलत है। जैसे, बिग बी ने यह कदम एक जूलरी कंपनी को अनाधिकारिक रूप से उनकी फोटो इस्तेमाल करने से रोकने के लिए उठाया था। इसके अलावा, उनके फोटो और आवाज के जरिए ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की तर्ज पर फर्जी लॉटरी बेचकर लोगों को गुमराह भी किया जा रहा है। तब कोर्ट ने उन ऑनलाइन लिंक्स को हटाने के आदेश दिए थे।

इसके अलावा, डिजिटल युग में फर्जी विडियो, AI जनरेटेड गुमराह करने वाले कॉन्टेंट, डीपफेक आदि का भी खतरा है, जिसके चलते सिलेब्स अपने व्यक्तित्व के अधिकार को कानूनी तौर पर सुरक्षित कर रहे हैं। जैसे, जैकी श्रॉफ के वकील ने बताया कि उनकी तस्वीर के जरिए आपत्तिजनक JIF/मीम बनाए गए हैं। इससे पहले अनिल कपूर के वकील ने भी उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करके सामान की अनधिकृत बिक्री और शुल्क वसूलने, उनकी तस्वीर के साथ अपमानजनक तरीके से छेड़छाड़ करने और ‘झक्कास’ लिखे फर्जी ऑटोग्राफ और फोटो बेचे जाने की बात कही थी। पिछले दिनों, रश्मिका मंदाना, अल्लू अर्जुन, रश्मिका मंदाना जैसे ऐक्टर्स के डीपफेक विडियो वायरल भी हुए थे।

बिग बी, अनिल कपूर और जग्गू दादा मिमिक्री कलाकारों के भी फेवरेट हैं। बहुत से कॉमेडियन मिमिक्री आर्टिस्ट उनकी नकल उतारकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। इस फैसले का उन पर क्या असर पड़ेगा? इस बाबत विराग गुप्ता बताते हैं, ‘मिमिक्री, आलोचना और व्यंग्य में यह लागू नहीं होगा। बेशक इन एक्टर्स ने उनकी आवाज और स्टाइल के इस्तेमाल पर रोक के लिए कोर्ट से ऑर्डर लिए हैं, लेकिन स्वस्थ आलोचना करना या मिमिक्री करना दूसरे व्यक्ति का रचनात्मक अधिकार है। वो कोई फ्रॉड नहीं कर रहे हैं कि मैं बिग बी या अनिल कपूर बोल रहा हूं। वो बता रहे हैं कि भई, मैं उनकी नकल कर रहा हूं तो इस पर रोक नहीं लगा सकते। यह जरूर है कि अगर दूसरा व्यक्ति अपने शो से आर्थिक लाभ कमा रहा है तो ये सिलेब्रिटीज हिस्सा मांग सकते हैं या अगर मिमिक्री आपत्तिजनक है तो उस पर मानहानि का केस कर सकते हैं।’