Sunday, March 8, 2026
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क्या हार्ट पेशेंट के साथ वर्तमान में हो रही है लापरवाही?

वर्तमान में हार्ट पेशेंट के साथ लापरवाही होती जा रही है! राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्यरत दो वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों सहित लगभग एक दर्जन लोगों की गिरफ्तारी ने फिर इस गंभीर समस्या को चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि कैसे ‘धरती का भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टर भी चंद सिक्कों के लिए हैवान का रूप धारण कर लेते हैं। एक खास कंपनी के स्टेंट और अन्य चिकित्सा उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले ने मेडिकल फ्रैटर्निटी पर आम लोगों का भरोसा तार-तार कर दिया है। यह साफ हो गया है कि हृदय रोगियों के इलाज में स्टेंट का जानबूझकर ज्यादा उपयोग किया जाता है ताकि डॉक्टर, कंपनी और विक्रेता को फायदा हो सके। इन सबके गठजोड़ में बीमारी से पूरी तरह परेशान मरीजों और उनके परिजनों का क्या हो रहा है, इसका अंदाजा लगाकर ही दिल बैठ जाता है। आरएमएल स्कैंडल में पुलिस जांच चल रही है। दूसरी तरफ, दुनियाभर के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर बेवजह स्टेंटिंग रेकमेंड कर रहे हैं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि हृदय को खून पहुंचाने वाली नसों के जाम होने की बीमारी (स्टेबल कोरोनरी आर्टरी डिजीज) वाले 20% मरीजों में पांच स्टेंट डाले गए। 2019 से 2021 के बीच किए गए इस अध्ययन से पता चला है कि मरीजों में 2,29,000 अनावश्यक स्टेंट लगाए गए। हालांकि भारत में ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया है, लेकिन कई डॉक्टर मानते हैं कि देश में भी इसी तरह का गोरखधंधा चल रहा है। ज्यादातर मामलों में इसका उद्देश्य मरीजों के अस्पताल और इलाज के बिलों को बढ़ाकर पैसे कमाना होता है। डॉक्टरों के अनुसार, कार्डियक स्टेंट बहुत जरूरी हैं, लेकिन इनकी जरूरत तभी पड़ती है जब हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनियों में 80% से ज्यादा रुकावट हो। रुकावट की वजह से सीने में दर्द (एनजाइना) जैसे लक्षण हो सकते हैं या दिल का दौरा पड़ सकता है।

यदि हृदय संबंधी स्थिति को इलाज से ठीक किया जा सकता है, तो स्टेंट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘स्टेंट केवल तभी उपयोग किए जाते हैं, जब रोगी को दवाओं से राहत नहीं मिलती। यदि आप स्टेंट का उपयोग तब करते हैं, जब रुकावट बहुत बड़ी नहीं होती या यह किसी सामान्य धमनी में होती है, तो यह दुरुपयोग और अनैतिक है।’ उन्होंने कहा कि स्टेंट का उपयोग जोरदार हर्ट अटैक के मामलों में किया जाना चाहिए क्योंकि यह जीवन रक्षक और बीमारी के लक्षणों को कम करने में प्रभावी माना जाता है। बैलून एंजियोप्लास्टी के 99% मामलों में धमनी को फिर से संकीर्ण होने से रोकने के लिए स्टेंट लगाया जाता है। हालांकि, दिल के दौरे के अलावा कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी में देरी की जा सकती है और दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है।’

स्टेंट के विभिन्न प्रकारों में बेयर-मेटल स्टेंट (बीएमएस) और ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (डीईएस) शामिल हैं। बीएमएस में धातु की जाली होती है और धमनी को खुला रखने के लिए संरचनात्मक सहायता प्रदान करती है। धर्मशिला नारायण अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार नायक ने कहा, ‘अपने अस्पताल में हम बीएमएस का उपयोग नहीं करते हैं। लेकिन डीईएस, जो दवा के साथ लेपित होते हैं, स्टेंट लगाए जाने के बाद धमनी को फिर से अवरुद्ध होने से रोकने में मदद करते हैं।’ उन्होंने बताया कि स्टेंट किस प्रकार और ब्रैंड का है, साथ ही हमारी सुविधाओं की आवश्यकता क्या है, इन सबके आधार पर स्टेंट की कीमत तय होती है।

दवा-लेपित गुब्बारे या लेजर-सहायता प्राप्त एंजियोप्लास्टी उपलब्ध हैं। ये विकल्प विशेष रूप से लंबे (25 मिमी से अधिक) और फैले हुए अवरोधों, पतली धमनियों (जो भारत में डाइबिटीज के रोगियों में आम है) और स्टेंट विफलता (जब स्टेंट वाली रक्त वाहिका अवरुद्ध हो जाती है) के मामलों में उपयुक्त हैं। चंद्रा ने कहा, ‘ऐसे विकल्प युवा रोगियों के लिए बेहतर हैं क्योंकि अगर कम उम्र में स्टेंट लगाया जाता है तो यह रोगी के पूरे जीवन के लिए शरीर के अंदर रहेगा और इसके अपने प्रभाव हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि स्टेंट शरीर में जितना अधिक समय तक रहेगा, फिर से अवरोध होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

इस बारे में विस्तार से बताते हुए चंद्रा ने कहा, ‘ड्रग-कोटेड बैलून स्टेंटलेस एंजियोप्लास्टी की एक नई अवधारणा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां धमनियां प्राकृतिक रहती हैं और डबल ब्लड थिनर का उपयोग करने की कम जरूरत होती है। यह अप्रोच धमनियों को भविष्य में जरूरत पड़ने पर बाईपास के लिए तैयार रखता है। लेजर-सहायता प्राप्त एंजियोप्लास्टी भी स्टेंटलेस होती है और दोबारा ब्लॉकेज को रोकती है।’

क्या आने वाले समय में अमित शाह बनेंगे प्रधानमंत्री?

वर्तमान में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आने वाले समय में अमित शाह प्रधानमंत्री बन सकते हैं! देश में लोकसभा चुनाव का चौथा चरण के मतदान की तारीख करीब आ चुकी है। बीजेपी नीत एनडीए और कांग्रेस नीत इंडिया एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। जेल से बाहर आते ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर हमला तेज कर दिया। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने एक बहुत ही खतरनाक मिशन शुरू किया हुआ है जिसका नाम है ‘वन नेशन, वन लीडर। प्रधानमंत्री जी “वन नेशन, वन लीडर” की राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इनकी सरकार बनी तो पहले अगले दो महीने में ये योगीजी को निपटाएंगे, उसके बाद मोदीजी के सबसे खास अमित शाहजी को प्रधानमंत्री बनाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि मोदीजी अपने लिए नहीं, अमित शाह के लिए वोट मांग रहे हैं। केजरीवाल के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने खुद स्थिति साफ कर दी। अमित शाह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी इंडिया गठबंधन वालों को आनंदित होने की जरूरत नहीं है। मोदी जी ही आगे देश का नेतृत्व करते रहेंगे। इसमें बीजेपी में कोई कन्फ्यूजन नहीं है। यह कन्फ्यूजन खड़ा किया जा रहा है। हम 400 पार की तरफ बढ़ रहे हैं। मोदी जी ही टर्म पूरी करेगे। मोदी के 75 साल पूरा करने के सवाल पर शाह ने कहा कि बीजेपी के संविधान में ऐसा कुछ नहीं है। इस तरह शाह ने विपक्ष के इस आरोप पर स्थिति साफ कर दी। दरअसल, केजरीवाल ने कहा था कि मोदी अगले साल 75 साल के हो जाएंगे। दिल्ली के सीएम ने कहा कि 2014 में मोदीजी ने रूल बनाया था कि बीजेपी के अंदर जो भी 75 साल का होगा, उसे रिटायर कर दिया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि मोदी ने सबसे पहले लालकृष्ण आडवाणी जी को रिटायर किया, फिर मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन, यशवंत सिन्हा को रिटायर किया गया। उन्होंने कहा कि अब मोदी जी अगले साल 17 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं।

अमित शाह ने एक बार फिर बीजेपी के अबकी बार, 400 पार का नारा दोहराया। दरअसल, विपक्ष की तरफ से आरोप लगाया जा रहा था कि तीन चरण में कम वोटिंग के बाद बीजेपी की टेंशन बढ़ गई है। अब वे 400 पार का नारा भूल गए हैं। शाह ने कहा कि हम 400 पार की तरफ बढ़ रहे हैं। नरेंद्र मोदी तीसरी बार पीएम बनेंगे। कांग्रेस वोट बैंक की पॉललिटिक्स कर रही है। वे आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं। शाह ने कहा कि बीआरएस, कांग्रेस भ्रष्टाचार की राजनीति करती है। बीजेपी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। दक्षिण में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी। रोहिंग्या के घुसपैठ का समर्थन करते हैं। चौथे चरण में बीजेपी क्लीन स्वीप करेगी।

अमित शाह ने संविधान के साथ छेड़छाड़ और आरक्षण खत्म करने को लेकर भी जवाब दिया। शाह ने कहा कि हमारे पास 10 साल से पूर्ण बहुमत है। उन्होंने कहा कि हमने कभी आरक्षण को कभी हाथ नहीं लगाया। शाह ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस झूठ बोलती है। कांग्रेस झूठ बोलकर राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि हमारे फेक वीडियो पर कांग्रेस राजनीति करती है। कांग्रेस ने मेरा वीडियो एडिट कर चलाया है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हमने पूर्ण बहुमत का यूज, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने, राम मंदिर का निर्माण करने और तीन तलाक कानून को बनाने में किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार एससी, एसटी और ओबीसी के लिए हानिकारक है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार केंद्र की सत्ता में वापस आएगी तो देश पीओके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस ले लेगा। उन्होंने कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है। मोदी के 75 साल पूरा करने के सवाल पर शाह ने कहा कि बीजेपी के संविधान में ऐसा कुछ नहीं है। इस तरह शाह ने विपक्ष के इस आरोप पर स्थिति साफ कर दी। दरअसल, केजरीवाल ने कहा था कि मोदी अगले साल 75 साल के हो जाएंगे। दिल्ली के सीएम ने कहा कि 2014 में मोदीजी ने रूल बनाया था कि बीजेपी के अंदर जो भी 75 साल का होगा, उसे रिटायर कर दिया जाएगा।पीओके से अपना अधिकार जाने नहीं देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर जैसे लोग पाकिस्तान के प्रति सम्मान दिखाने की बात कर रहे हैं क्योंकि वे एक परमाणु शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि क्या कश्मीर हमारा नहीं है? हम निर्णायक रूप से कार्रवाई करेंगे और पीओके लेंगे।

जेल से बाहर आए केजरीवाल के लिए क्या बोले जेपी नड्डा?

हाल ही में जेपी नड्डा ने जेल से बाहर आए केजरीवाल के लिए एक बयान दे दिया है! शराब घोटाला मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद देश का सियासी पारा हाई है। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल मोदी सरकार पर हमलावर हैं। वहीं बीजेपी भी केजरीवाल पर लगातार हमले कर रही है। उसी क्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा ने केजरीवाल और इंडिया गठबंधन को आड़े हाथ लिया है। नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘केजरीवाल और पूरा INDI गठबंधन चुनाव में विफलता का अहसास कर बौखला गए हैं। देश को भटकाना और भ्रमित करना ही इनका उद्देश्य है। पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण हर तरफ मोदी जी को जनता का प्रचंड आशीर्वाद मिल रहा है। प्रधानमंत्री जी के सामने न तो इनके पास कोई नीति है न ही कोई कार्यक्रम है। अब मोदी जी के उम्र का बहाना लेकर रास्ता ढूंढ रहे हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘भारतीय जनता पार्टी के संविधान में कहीं भी उम्र को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जनता जानती है मोदी जी का कण-कण और क्षण-क्षण भारत माता की सेवा के लिए समर्पित है। मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना साकार हो रही है और अपने अगले 5वर्षों के कार्यकाल में मोदी जी देश को नए शिखर पर ले जाएंगे। विपक्ष खुश न हों, कोई मुगालता ना पाले। मोदी जी हमारे नेता है और आगे भी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।’ उन्होंने कहा कि INDI गठबंधन और बेल पर जेल से बाहर आया नेता भी जानता है कि ‘आएगा तो मोदी ही, रहेगा तो मोदी ही, भारत को मजबूत बनाएगा तो मोदी ही।’

केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (आप) के मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा सत्ता में वापस नहीं आएगी और चार जून को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ‘ये लोग ‘इंडिया गठबंधन से उनके चेहरे के बारे में पूछते हैं। मैं भाजपा से पूछता हूं कि उनका प्रधानमंत्री कौन होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगले साल 17 सितंबर को 75 साल के हो रहे हैं। उन्होंने नियम बनाया था कि 75 साल की उम्र वालों को ‘रिटायर’ कर दिया जाएगा। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन को रिटायर (सेवानिवृत्त) कर दिया।’ उन्होंने कहा, ‘वह (मोदी) अगले साल रिटायर हो जाएंगे। वह अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं। क्या शाह मोदी जी की गारंटी पूरी करेंगे?’ केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो पार्टी दो महीने के भीतर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बदल देगी।

सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद संजय सिंह के साथ कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचकर बजरंगबली के दर्शन किए। सीएम केजरीवाल शनिवार से ही चुनाव प्रचार अभियान में भी उतरने जा रहे हैं। इस बीच भाजपा ने आम आदमी पार्टी मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक नया पोस्टर जारी कर जमकर निशाना साधा है। भाजपा के दिल्ली प्रदेश इकाई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केजरीवाल को ‘भ्रष्टाचार का बेताज बादशाह’ बताते हुए नया पोस्टर जारी कर कहा ‘भ्रष्टाचारी चाहे जेल के अंदर हो या बेल पर बाहर, भ्रष्टाचारी, भ्रष्टाचारी ही होता है!’

दरअसल, भाजपा यह मान कर चल रही है कि अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल अपने स्टाइल में चुनाव प्रचार अभियान को नई दिशा देने की कोशिश कर सकते हैं। बता दें कि मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना साकार हो रही है और अपने अगले 5वर्षों के कार्यकाल में मोदी जी देश को नए शिखर पर ले जाएंगे। विपक्ष खुश न हों, कोई मुगालता ना पाले। मोदी जी हमारे नेता है और आगे भी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।’ उन्होंने कहा कि INDI गठबंधन और बेल पर जेल से बाहर आया नेता भी जानता है कि ‘आएगा तो मोदी ही, रहेगा तो मोदी ही, भारत को मजबूत बनाएगा तो मोदी ही।’ इसलिए भाजपा एक बार फिर से केजरीवाल और आप को भ्रष्टाचार के ही मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही भाजपा आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी को ‘खालिस्तानी फंडिंग’ मिलने के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रही है। भाजपा केजरीवाल और आप के खिलाफ भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाकर दिल्ली के साथ-साथ पंजाब की जनता को भी एक संदेश देना चाहती है।

केजरीवाल ने मोदी को वोट देने के मायने क्या बताएं?

हाल ही में केजरीवाल ने मोदी को वोट देने के मायने बता दिए हैं! लोकसभा चुनाव के 13 मई को होने वाले चौथे चरण के मतदान से पहले देश का सियासी पारा नए मुद्दों के साथ चढ़ा हुआ है। दरअसल शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बीजेपी और पीएम मोदी पर काफी आक्रामक हैं। शनिवार को केजरीवाल ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट पर ही सवाल खड़ा दिया। केजरीवाल ने कहा, ‘बीजेपी वाले ‘इंडिया गठबंधन’ से उनके चेहरे के बारे में पूछते हैं। मैं भाजपा से पूछता हूं कि उनका प्रधानमंत्री कौन होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगले साल 17 सितंबर को 75 साल के हो रहे हैं। उन्होंने नियम बनाया था कि 75 साल की उम्र वालों को ‘रिटायर’ कर दिया जाएगा। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन को रिटायर (सेवानिवृत्त) कर दिया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘वह (मोदी) अगले साल रिटायर हो जाएंगे। वह अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं। क्या शाह मोदी जी की गारंटी पूरी करेंगे?’ केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव में नया मुद्दा छेड़कर पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे टर्म पर ही सवाल खड़ा कर दिया। दिल्ली में लोकसभा की सभी सात सीटों पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होना है। केजरीवाल जानते हैं कि चुनावी प्रचार के लिए काफी कम वक्त बचा है। ऐसे में केजरीवाल तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद से ही बीजेपी और पीएम मोदी पर तीखे तीर छोड़ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केजरीवाल पीएम मोदी पर सीधा अटैक करके दिल्ली और देश की जनता का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। केजरीवाल ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट का मुद्दा एकदम सटीक टाइमिंग के साथ उठाया है। राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि केजरीवाल का मुद्दा काफी प्रासंगिक है, क्योंकि बीजेपी में उम्रदराज नेता अभी सक्रिय राजनीति से दूर हैं। केजरीवाल ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट का जिक्र छेड़कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पहला केजरीवाल ने बीजेपी की रिटायरमेंट पॉलिसी को जनता के आगे रख दिया। इसके अलावा बीजेपी का पीएम फेस मोदी ही रहेंगे? इस बात को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का नया टॉपिक दे दिया है। केजरीवाल ने अपने बयान में अमित शाह का जिक्र कर बीजेपी के अन्य दिग्गज नेताओं को प्रभावित करने की कोशिश भी की है। हालांकि बीजेपी का स्टैंड क्लीयर है कि पीएम मोदी अपना तीसरा टर्म पूरा करेंगे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को मिली अंतरिम जमानत से इंडिया गठबंधन को फायदा पहुंचेगा। कल हमने देखा था कि कैसे हजारों की संख्या में लोग उन्हें रिसीव करने पहुंचे थे। हम अंतरिम जमानत का स्वागत करते हैं। बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत दी थी। आम आदमी पार्टी ने इसका स्वागत किया। आप नेता आतिशी मार्लेना ने कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिली अंतरिम जमानत से इंडिया गठबंधन को मजबूती मिलेगी। आगामी 25 मई को दिल्ली में वोट डाले जाएंगे। इससे पहले चुनाव प्रचार के लिए मुख्यमंत्री को अंतरिम जमानत मिली है।

जेल से बाहर आने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को हनुमान मंदिर पहुंचकर पहले पूजा अर्चना की और उसके बाद पार्टी दफ्तर में अपने नेताओं के साथ बैठक की। इसके बाद केजरीवाल ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा, दो राज्यों में हमारी सरकार है और महज 10 साल पुरानी पार्टी है। लेकिन इस पार्टी को खत्म करने और कुचलने में प्रधानमंत्री जी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने हमारी पार्टी के चार टॉप के नेता को एक साथ जेल भेज दिया। बड़ी-बड़ी पार्टियों के अगर चार टॉप के नेता जेल चले जाएं तो पार्टी खत्म हो जाती है। लेकिन आम आदमी पार्टी एक पार्टी नहीं, सोच है। जितना यह खत्म करना चाहते हैं, उतनी ही बढ़ती जाती है। केजरीवाल ने कहा कि मुझे गिरफ्तार कर प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश को एक मैसेज दिया है कि अगर अरविंद केजरीवाल को बिना किसी मामले के भी जेल में डाल सकता हूं तो मैं किसी को भी गिरफ्तार कर सकता हूं। प्रधानमंत्री जी ने एक बहुत ही खतरनाक मिशन शुरू किया हुआ है जिसका नाम है ‘वन नेशन, वन लीडर’। प्रधानमंत्री जी टवन नेशन, वन लीडरट की राह पर चल रहे हैं। मोदी जी पूरे विपक्ष को खत्म करना चाहते हैं, सभी को जेल में डाल दे रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल के इस दावे पर कि इस बार भाजपा के जीतने पर प्रधानमंत्री का पद नरेंद्र मोदी की जगह अमित शाह को दिया जाएगा, खुद केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्टीकरण दिया है। शाह ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे। वह 75 साल के हो जाने के बाद भी कुर्सी पर विराजमान रहेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘केजरीवाल एडं कंपनी ‘इंडिया’ गठबंधन वालों को खुश होने की जरूरत नहीं है। मोदी जी ही आगे देश का नेतृत्व करने जा रहे हैं। भाजपा में इसे लेकर कोई दुविधा नहीं है।’ शाह ने कहा, ‘भाजपा 400 पार के लक्ष्य को हासिल करेगी। इसमें कोई शक नहीं है कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। लोगों में उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखने का उत्साह है।’ उधर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केजरीवाल ने चाहे-अनचाहे यह मान लिया है कि मोदी सत्ता बरकरार रखने वाले हैं। त्रिवेदी का इशारा परोक्ष तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के उस दावे की ओर था कि मोदी अगले साल 75 वर्ष के होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री शाह को अगला प्रधानमंत्री बनाने की योजना बना रहे हैं।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि भाजपा के संविधान में उम्र को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और नरेंद्र मोदी ही आगे भी देश के प्रधानमंत्री रहेंगे। जेपी नड्डा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘केजरीवाल और पूरा इंडी गठबंधन चुनाव में विफलता का अहसास कर बौखला गए हैं। देश को भटकाना और भ्रमित करना ही इनका उद्देश्य है। पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण हर तरफ़ मोदी जी को जनता का प्रचंड आशीर्वाद मिल रहा है। प्रधानमंत्री के सामने न तो इनके पास कोई नीति है न ही कोई कार्यक्रम है। अब मोदी जी के उम्र का बहाना लेकर रास्ता ढूंढ रहे हैं।’ नड्डा ने पार्टी के संविधान का जिक्र करते हुए आगे कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के संविधान में कहीं भी उम्र को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जनता जानती है मोदी जी का कण-कण और क्षण-क्षण भारत माता की सेवा के लिए समर्पित है। मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना साकार हो रही है और अपने अगले 5वर्षों के कार्यकाल में मोदी जी देश को नए शिखर पर ले जाएंगे। विपक्ष खुश न हों, कोई मुगालता ना पाले। मोदी जी हमारे नेता हैं और आगे भी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे। इंडी गठबंधन और बेल पर जेल से बाहर आए नेता भी जानते हैं कि ‘आएगा तो मोदी ही, रहेगा तो मोदी है, भारत को मजबूत बनाएगा तो मोदी ही।’

जानिए चौथे चरण की वीआईपी सीट के बारे में सब कुछ!

आज हम आपको चौथे चरण की वीआईपी सीट के बारे में सब कुछ बताने जा रहे हैं! आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत 10 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की 96 लोकसभा सीट पर 13 मई को चौथे चरण के होने लिए चुनाव के लिए शनिवार शाम को प्रचार अभियान समाप्त हो गया। आंध्र प्रदेश में 13 हजार मई को सभी 25 लोकसभा सीट पर और सभी 175 विधानसभा सीट पर भी चुनाव हैं। लोकसभा चुनाव के इस चौथे चरण में आरक्षण, तुष्टिकरण नीति, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार में छाए रहे। इस चरण में प्रमुख उम्मीदवारों में समाजवादी पार्टी सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज- उप्र, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बेगूसराय-बिहार और नित्यानंद राय उजियारपुर-बिहार, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर-पश्चिम बंगाल, भाजपा की पंकजा मुंडे बीड – महाराष्ट्र, एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद-तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वाई एस शर्मिला चुनाव मैदान में हैं। केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा खीरी सीट से हैट्रिक बनाने की जुगत में हैं। उनका बेटा 2021 के लखीमपुरी हिंसा कांड में आरोपी है। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा भी पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से फिर संसद पहुंचने के प्रयास में लगी हुई हैं। उन्हें प्रश्न पूछने के बदले नकद लेने के मामले में लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था।

तेलंगाना की 17, आंध्र प्रदेश की 25, उत्तर प्रदेश की 13, बिहार की पांच, झारखंड की चार, मध्य प्रदेश की आठ, महाराष्ट्र की 11, ओडिशा की चार और पश्चिम बंगाल की आठ एवं जम्मू कश्मीर की एक लोकसभा सीट (श्रीनगर) पर सोमवार को मतदान होगा। भाजपा नीत राजग के इन 96 लोकसभा सीट में से 40 से अधिक पर वर्तमान में सांसद हैं। इसी के साथ आंध्र प्रदेश की 175 विधानसभा सीट पर भी मतदान होगा। राज्य में वाईएसआरसी, कांग्रेस नीत ‘इंडिया’ गठबंधन और राजग के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। राज्य में राजग में भाजपा, चंद्रबाबू नायडू की तेदेपा और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी शामिल हैं।

इस चरण के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रौदा द्वारा भारतीयों के बारे में दिये गये ‘नस्ली’ एवं ‘त्वचा के रंग’ संबंधी बयान को लेकर कांग्रेस पर प्रहार किया। उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों पर ‘हिंदू विरोधी’ होने तथा ‘लूट एवं तुष्टिकरण’ में लगे रहने एवं ‘वंशवादी राजनीति’ करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने मोदी के ‘टेंपो में नोटो की गड्डियां भरकर भेजने’ संबंधी बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उसने संविधान एवं आरक्षण की रक्षा करने के मुद्दे पर अपना आक्रामक तेवर जारी रखा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के उन्नाव, कन्नौज और कानुपर में चुनावी रैलियों को संबोधित किया, जबकि सपा ने कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में जन संपर्क अभियान किया। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का भाजपा के निवर्तमान सांसद सुब्रत पाठक से कड़ा चुनावी मुकाबला है, जबकि उन्नाव में निवर्तमान सांसद साक्षी महाराज का सपा की अनु टंडन से टक्कर है। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को कांग्रेस से मांग की थी कि पार्टी को लोगों को बताना चाहिए कि उसने ‘अंबानी-अडानी’ मुद्दा उठाना क्यों बंद कर दिया है जैसा कि उसके ‘शहजादे’ करते थे। उन्होंने पूछा कि क्या उसने कोई ‘सौदा’ कर लिया है।

इसपर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी को सीबीआई या ईडी से इस बात की जांच कराने की चुनौती दी कि अडाणी और अंबानी ने उनकी पार्टी को कालाधन भेजा है या नहीं। उन्होंने उनका यह कहते हुए उपहास उड़ाया कि क्या वह ‘अपने अनुभव से’ बोल रहे हैं कि वे ‘टेंपो से पैसा’ भेजते हैं। पित्रोदा ने उनके बयान पर भाजपा द्वारा कांग्रेस को घेरे जाने के बाद उसी दिन ‘इंडियन ओवरसीज कांग्रेस’ के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया। कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन पर प्रहार करते हुए मोदी ने पांच मई को कहा कि मुसलमान अब समझते हैं कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन उन्हें प्यादे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए अब यह समुदाय भाजपा द्वारा किये गये विकास कार्यों को देखकर उनसे (कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन से) दूरी बनाने लगा है। शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘इंडिया’ गठबंधन की आंधी आ रही है तथा नरेन्द्र मोदी फिर प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे।

बिहार में बेगूसराय, उजियारपुर , दरभंगा, समस्तीपुर और मुंगेर लोकसभा क्षेत्रों में सोमवार को मतदान है। इन पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में से तीन सीट बेगूसराय, उजियारपुर और दरभंगा वर्तमान में भाजपा के पास हैं। दरभंगा और मुंगेर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सबसे बड़े स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अलग-अलग रैलियों के बाद राजग इन सीट पर जीत को लेकर आशावादी है। श्रीनगर लोकसभा सीट पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शिया नेता गा सैयद रुहुल्ला मेहदी को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से युवा नेता वहीद पारा मैदान में हैं। अपनी पार्टी ने अशरफ मीर को अपना प्रत्याशी बनाया है। आम चुनाव के अगले तीन चरण के लिये मतदान 20 मई, 25 मई और एक जून को है। मतगणना चार जून को होगी।

आखिर क्यों छिड़ी है अल्पसंख्यकों की जनसंख्या में वृद्धि की बहस?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर अल्पसंख्यकों की जनसंख्या में वृद्धि की बहस वर्तमान में क्यों छिड़ी हुई है! भारत में अल्पसंख्यकों की जनसंख्या में वृद्धि पर चल रही बहस के बीच गैर सरकारी संगठन पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने रिएक्ट किया है। एनजीओ ने कहा है कि जनसंख्या वृद्धि दर का धर्म से कोई संबंध नहीं है। सभी धार्मिक ग्रुप्स में कुल प्रजनन दर टोटल फर्टिलिटी रेट में गिरावट आ रही है। इसमें सबसे ज्यादा कमी मुसलमानों में देखी गई है। दरअसल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ईएसी-पीएम की ओर से हाल ही में एक रिसर्च आई है। इसके अनुसार, भारत में 1950 से 2015 के बीच हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में 7.82 फीसदी की कमी आई है। वहीं मुसलमानों की संख्या में 43.15 फीसदी की वृद्धि हुई है। ये दर्शाता है कि देश में विविधता को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के इस अध्ययन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। राजनीतिक पार्टियों में जमकर बयानबाजी हुई, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ के कारण देश में मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, एनजीओ पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए। प्रजनन दर को कम करने में महिलाओं की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसलिए, धर्म की परवाह किए बिना शिक्षा और परिवार नियोजन जैसे जरूरी कदमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने आग्रह किया कि वह जनसंख्या से जुड़े रिसर्च का इस्तेमाल डर और विभाजन पैदा करने के लिए न करें।एनजीओ ने बयान में कहा कि वह हाल की मीडिया रिपोर्टों से बहुत चिंतित हैं। जिस तरह से देश की मुस्लिम जनसंख्या की बढ़ोतरी के बारे में रिसर्च के निष्कर्षों को ‘गलत तरीके से पेश किया गया है वो परेशान करने वाला है।

एनजीओ ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले तीन दशकों में मुसलमानों की वृद्धि दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। ये 1981-1991 में 32.9 फीसदी से घटकर 2001-2011 में 24.6 फीसदी हो गई है, जो हिंदुओं की तुलना में अधिक है। 1951 से 2011 तक के जनगणना आंकड़े रिसर्च के निष्कर्षों के अनुरूप हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ये संख्याएं नई नहीं हैं। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने इस बात पर फोकस किया कि सभी धार्मिक ग्रुप्स में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में कमी आ रही है।पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रजनन क्षमता में गिरावट धार्मिक संबद्धता के बजाय विकास कारकों से प्रभावित है। इसमें सबसे अधिक कमी मुसलमानों में और फिर हिंदुओं में देखी गई है। एनजीओ ने आंकड़ों की गलत व्याख्या के प्रति आगाह करते हुए कहा कि प्रजनन दर का सीधा संबंध शिक्षा और इनकम के स्तर से है, न कि धर्म से है। जिन राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक-आर्थिक विकास तक बेहतर पहुंच है, वहां सभी धार्मिक समूहों में कुल प्रजनन दर कम है। इससे यह पता चलता है कि विभिन्न समुदायों में प्रजनन दर एक समान है।

बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में सफल परिवार नियोजन कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप भारत की तुलना में जन्म दर कम हुई है। इन देशों ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देकर, रोजगार के अधिक अवसर और गर्भनिरोधक विकल्पों की बेहतर पहुंच के माध्यम से यह मुकाम हासिल किया है। बता दें कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ईएसी-पीएम की ओर से हाल ही में एक रिसर्च आई है। इसके अनुसार, भारत में 1950 से 2015 के बीच हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में 7.82 फीसदी की कमी आई है। वहीं मुसलमानों की संख्या में 43.15 फीसदी की वृद्धि हुई है। ये दर्शाता है कि देश में विविधता को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के इस अध्ययन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रजनन क्षमता में गिरावट धार्मिक संबद्धता के बजाय विकास कारकों से प्रभावित है।

जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका शिक्षा, आर्थिक विकास और लैंगिक समानता में फोकस करना है। हमारा विश्लेषण बताता है कि प्रजनन दर को कम करने में महिलाओं की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसलिए, धर्म की परवाह किए बिना शिक्षा और परिवार नियोजन जैसे जरूरी कदमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने आग्रह किया कि वह जनसंख्या से जुड़े रिसर्च का इस्तेमाल डर और विभाजन पैदा करने के लिए न करें।

अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बीजेपी नेतृत्व खुश नहीं है.

कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाकर अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में आये. आज अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के चांदनी चौक केंद्र पर कांग्रेस उम्मीदवार जेपी अग्रवाल के समर्थन में प्रचार किया. बीजेपी के बड़बोलेपन और ईमानदारी की बात करके सत्ता में आए केजरीवाल अब ‘भ्रष्ट’ इंडिया अलायंस का दामन थामकर बचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा अमित शाह ने केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत को ‘विशेष व्यवहार’ या विशेष विशेषाधिकार बताया. जिसे न्यायपालिका के प्रति सरकार का कड़ा संदेश माना जा रहा है.

केजरीवाल को उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में पिछले शुक्रवार को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने कल पंजाब के बाद पहली बार दिल्ली में कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार किया. पिछले दस साल से दिल्ली की सत्ता में रहने के बावजूद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पिछले दो लोकसभा में राजधानी में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही. दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ सीटें साझा कर लड़ने का फैसला किया है. आज चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में जाकर केजरीवाल ने कहा, ‘अगर आपने पद्मा को वोट दिया तो मुझे दोबारा जेल जाना पड़ेगा।’ और अगर मैं कांग्रेस को वोट दूंगा तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा.” केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दी गई है. एक राजनेता के रूप में, भाजपा नेतृत्व ने घर पर अपनी नाराजगी नहीं छिपाई कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए अतिरिक्त लाभ क्यों दिया। आज एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में केजरीवाल की जमानत के बारे में बात करते हुए अमित शाह ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट के पास कानून की व्याख्या करने की शक्ति है जैसा वह उचित समझे।” लेकिन मुझे लगता है, यह कोई सामान्य या रोजमर्रा का फैसला नहीं है। देश में कई लोग सोचते हैं कि केजरीवाल को विशेष लाभ दिया गया है.” बीजेपी नेताओं ने घरेलू स्तर पर सवाल उठाया है कि क्या किसी राजनेता को सिर्फ इसलिए अतिरिक्त लाभ मिल सकता है क्योंकि वह चुनाव प्रचार करेगा? और अगर राजनेताओं को वह लाभ मिलता है तो हमें क्यों नहीं?

जेल से बाहर आकर केजरीवाल ने दावा किया कि अगर बीजेपी 4 जून को लोकसभा चुनाव हार जाती है तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. अमित शाह ने आज कहा कि केजरीवाल की टिप्पणी कोर्ट की अवमानना ​​है. उन्होंने कहा, ”केजरीवाल यह बताना चाहते हैं कि भले ही वह दोषी हों, लेकिन अगर वह चुनाव जीतते हैं तो सुप्रीम कोर्ट उन्हें जेल नहीं भेजेगा.” केजरीवाल को जमानत देने वाले जजों को अब सोचना चाहिए कि उनके फैसले का दुरुपयोग कैसे किया जा रहा है।” सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जमानत शर्तों के उल्लंघन की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में ईडी जांच एजेंसी की ओर से सॉलिसिटर जेनरेश तुषार मेहता की याचिका पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा होने के बाद केजरी पिछले सोमवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी के समर्थन में पहले लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने निकले थे. रोड शो में दिल्ली की जनता को संबोधित करते हुए केजरी ने कहा, ”20 दिन बाद मुझे जेल जाना पड़ेगा. लेकिन आप ही मुझे जेल जाने से बचा सकते हैं.” उन्होंने कहा, ”अगर दिल्ली की जनता आप का चुनाव चिह्न झांटा चुनती है तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा.” गुरुवार को तुषार ने केजरी की टिप्पणी को ‘जमानत शर्तों का उल्लंघन’ बताया. उन्होंने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करते समय दिल्ली के मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि वह कानून के शासन के लिए जिम्मेदार होंगे. लेकिन अब वह लोगों से कह रहे हैं कि अगर वह चुनाव जीत गए तो उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्त की पीठ ने कहा कि केजरी ने जो कहा वह महज उनकी निजी अटकलें थीं। कोर्ट को इससे कोई लेना-देना नहीं है. केजरी को 21 मार्च को दिल्ली के एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था. 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आप प्रमुख को लोकसभा चुनाव में प्रचार करने की अनुमति देने के लिए 1 मई तक अंतरिम जमानत दे दी थी। बीजेपी के बड़बोलेपन और ईमानदारी की बात करके सत्ता में आए केजरीवाल अब ‘भ्रष्ट’ इंडिया अलायंस का दामन थामकर बचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा अमित शाह ने केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत को ‘विशेष व्यवहार’ या विशेष विशेषाधिकार बताया. जिसे न्यायपालिका के प्रति सरकार का कड़ा संदेश माना जा रहा है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में टीएमसी पर हमला बोला.

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नरेंद्र मोदी ने बंगाल के सियासी तार को उत्तर प्रदेश की जनसभा में खींच लिया. प्रधानमंत्री ने आज योगी आदित्यनाथ के राज्य पर लगभग अभूतपूर्व हमला करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। अखिलेश यादव ने यहां तक ​​तंज कसा कि वह बंगाल से ‘नई पीसी’ (बुआ) लाए हैं. विपक्ष के मुताबिक, मोदी ने बिना नाम लिए ही साफ कर दिया है कि उनके निशाने पर तृणमूल नेता ममता बनर्जी हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के वंशज और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ललितेशपति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के भदोही से ‘इंडिया’ मंच से चुनाव लड़ रहे हैं। आज उस केंद्र में जाकर, ललितेश का नाम लिए बिना, मोदी एक तरफ यह कहना चाहते थे कि तृणमूल नेता ‘बबुआ’ (अखिलेश) की ‘नई बुआ’ थीं। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल की राजनीति का मतलब बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना, हिंदुओं की हत्या करना, दलितों पर अत्याचार करना है. उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश को उसी राह पर ले जाना चाहती है. तृणमूल के राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन ने आज शाम प्रधानमंत्री के हमले का जवाब देते हुए कहा, ”नरेंद्र मोदी, आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं है. आपका वर्णन केवल एक संख्या में किया जा सकता है। यानी चार सौ बीस! आप महंगाई और बेरोजगारी पर बात नहीं करते. सिर्फ नफरत फैला रहे हैं. क्या कोई 2002 की घटना भूल गया है?” 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार के बाद डेरेक ने फिर शिकायत की कि बंगाल को सौ दिन के काम या आवास योजना के लिए एक भी रुपया नहीं दिया गया. प्रधानमंत्री से उनकी टिप्पणी, ”संदेशखाली के साथ आपका गंदा खेल सबके सामने उजागर हो गया है.”

प्रधानमंत्री ने आज भदोही में अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस और सपा के साथ-साथ विशेष रूप से तृणमूल की पहचान करके की। उन्होंने कहा, ”भदोही में सपा और कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई है. इसलिए वे मैदान छोड़कर भाग गये। उस मौके पर तृणमूल यहां बंगाली राजनीति का प्रायोगिक प्रयोग करना चाहती है.’ उन्होंने भीड़ की ओर सवाल दागते हुए खुद ही कहा, ”क्या आप जानते हैं कि बंगाल में तृणमूल कैसे राजनीति करती है?” ज़मीनी स्तर की राजनीति का मतलब है चापलूसी के ज़हरीले तीर फेंकना। राम मंदिर को नापाक बता रही तृणमूल की राजनीति! रामनवमी उत्सव का समापन. तृणमूल की राजनीति का मतलब है बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को आरक्षण देना, वोट-जिहाद को मुख्यधारा में लाना। हिंदुओं की हत्या, दलितों पर अत्याचार, महिलाओं पर अत्याचार।”

हाल ही में बहरामपुर के तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर के विवादित वीडियो को लेकर बीजेपी घिर गई थी. उस मुद्दे को उठाते हुए, मोदी ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि बंगाल में तृणमूल विधायक क्या कह रहे हैं? कह रहा हूं, हिंदुओं को गंगा में डुबाकर मार दूंगा। सपा वास्तव में उत्तर प्रदेश को इसी दिशा में ले जाना चाहती है।”

पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा नेता मायावती और अखिलेश ने मोदी के खिलाफ लड़ने के लिए गठबंधन बनाया था. नतीजों से गठबंधन को झटका लगा है. उसके बाद पिछले पांच सालों में मायावती एक बार भी बीजेपी और मोदी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाती नजर नहीं आईं. सूत्रों के मुताबिक उनके परिवार पर भी ईडी का दबाव बना हुआ है. हालांकि इस बार ‘बहनजी’ अलग लड़ रही हैं. मोदी ने तंज कसते हुए कहा, ”पहले बुआ (मायावती) का बाबू (अखिलेश) से गठबंधन था. लेकिन बुआ को जब बबुआ का असली चेहरा पता चला तो वह एसपी छोड़कर भाग गईं! इस बार पिताजी बंगाल से नई बुआ (ममता) ले आये! उत्तर प्रदेश में उनका खेल चल रहा है. आप उनसे सैकड़ों मील दूर होंगे।” मोदी के बयान ने हमला तेज कर दिया, ”सपा के शहजादा से सवाल पूछने को कहिए. बांग्ला बुआ आपके बहुत करीब हैं! एक बार उनसे पूछिए कि बिहार-उत्तर प्रदेश के लोग जब बंगाल जाते हैं तो उन्हें बाहरी क्यों कहा जाता है? एक देश, हम सब भारतीय हैं, भारत माता की संतान हैं। तो फिर तृणमूल उन्हें गाली क्यों देती है? दादाजी, मैं आपकी दादी से उत्तर जानना चाहता हूँ। बंगाल में उत्तर प्रदेश के लोगों को गाली देने के बाद आपको उस उत्तर प्रदेश में आकर वोट क्यों मांगना पड़ता है?”

इसी दिशा में आज आप नेता अरविंद केजरीवाल और सपा नेता अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा. केजरीवाल ने कहा, ”अमित शाह के प्रधानमंत्री बनने की राह में योगी आदित्यनाथ ही एकमात्र कांटा हैं.” अगर बीजेपी इस बार लोकसभा चुनाव जीतती है तो योगी को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाएगा. दो साल बाद मोदीजी 75 साल के होंगे, तब अमित शाह प्रधानमंत्री होंगे. मैं जानता हूं कि अमित शाह ने इससे इनकार किया है.’ यह स्वाभाविक है, क्योंकि मोदीजी अब नेता हैं। लेकिन मोदी जी अपने नियम के मुताबिक 75 के बाद रिटायर होने को बाध्य हैं. अगर वह इसे नहीं लेंगे तो लोग कहेंगे कि उन्होंने सिर्फ आडवाणीजी को हटाने के लिए 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्ति का नियम बनाया है।”

केजरीवाल-अखिलेश ने आरोप लगाया कि इस बार सत्ता में आए तो मोदी संविधान बदल देंगे. उनके शब्दों में, “वे 400 पार कहते हैं। मतलब, चार सौ (लोकसभा में) के बाद उन्हें वह नंबर मिलेगा! यानी 143 सीटें!” केजरीवाल के शब्दों में, “महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक- हर जगह बीजेपी की सीटें कम हो रही हैं. कुल मिलाकर उनकी कुल सीटें 230 से नीचे होंगी.’

जहां विपक्ष ने बीजेपी की सीटें कम होने की बात कही, वहीं मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक रैली में दावा किया कि उनकी तीसरी बार की सरकार मजबूत होगी. मोदी के शब्दों में, ”आज भारत जी20 जैसे बड़े आयोजन बड़ी सफलता के साथ कर रहा है. चांद की जमीन में दबा हुआ है तिरंगा झंडा. क्या आपने 10 साल पहले इस सफलता की कल्पना की थी? क्या आपको हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के अलावा कोई खबर मिलेगी? जो पहले असंभव था वह आज संभव हो गया है। लेकिन मोदी के लिए ऐसा नहीं हुआ. यह आपके वोट की ताकत के कारण है। और इसलिए आज पूरा देश कह रहा है कि इस सरकार का तीसरा चरण और भी मजबूत होगा।”

दिल्ली जा रहा एयर इंडिया का विमान पुणे हवाईअड्डे पर ट्रैक्टर से टकरा गया.

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विमान को ट्रैक्टर से मारो! दिल्ली जाने वाला एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त, यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल दिल्ली जाने वाला विमान पुणे हवाईअड्डे पर उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार था। विमान में 180 यात्री सवार थे. हादसा उड़ान भरने से ठीक पहले रनवे पर हुआ। आकाश में उड़ने से पहले बाधाएँ। विमान हवाई अड्डे के टैक्सीवे पर यात्रियों का सामान ले जा रहे एक ट्रैक्टर से टकरा गया। टक्कर से विमान का पंख और अगला पहिया क्षतिग्रस्त हो गया। हालाँकि, कोई हताहत नहीं हुआ। इस वजह से एयर इंडिया की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट तय समय पर पुणे एयरपोर्ट से रवाना नहीं हो सकी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली जाने वाली फ्लाइट पुणे एयरपोर्ट पर उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। विमान में 180 यात्री सवार थे. हादसा उड़ान भरने से ठीक पहले रनवे पर हुआ। हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने बताया कि चलते ट्रैक्टर से टकराने के बाद विमान के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि, सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं।

बताया जा रहा है कि एयर इंडिया की फ्लाइट AI-858 पुणे एयरपोर्ट से शाम 4 बजे उड़ान भरने वाली थी। लेकिन, किसी दुर्घटना के कारण यह निर्धारित समय से देर से निकलती है। यात्रियों को विमान से उतार दिया जाता है. मरम्मत के बाद विमान अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गया. घटना से यात्रियों में दहशत फैल गयी. हालांकि, घटना को लेकर एयर इंडिया की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. हालाँकि, भले ही बड़े हादसों को टाला जा सके, लेकिन यात्री सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि ऐसी घटना क्यों हुई या टक्कर किसकी गलती थी।

एयर इंडिया एक्सप्रेस के ‘बीमार’ कर्मचारी जल्द ही काम पर लौट रहे हैं. अधिकारी उन 25 लोगों को बहाल करने पर सहमत हुए जिनकी विरोध के कारण छंटनी की जा रही थी। श्रम आयोग ने कहा. माना जा रहा है कि इस बार संकट सुलझ जाएगा. इस जटिलता के कारण बुधवार से एयर इंडिया की 170 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। सैकड़ों यात्री परेशानी में हैं.

एयर इंडिया एक्सप्रेस अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठन की गुरुवार को श्रम आयोग के कार्यालय में बैठक हुई। यहीं निर्णय निहित है. बैठक में दोनों पक्षों ने एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये। दस्तावेज़ में लिखा है, “यह ज्ञात है कि संगठन के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने बीमारी का हवाला देते हुए एक साथ छुट्टी ले ली है। इससे सेवा बाधित हो गयी है. मुख्य श्रम आयुक्त की उपस्थिति में विस्तृत चर्चा के बाद श्रमिक संगठन ने बताया कि जिन लोगों ने छुट्टी ली है, वे जल्द ही काम पर लौटेंगे. फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करें.”

एयर इंडिया एक्सप्रेस के अधिकारी उन 25 लोगों को वापस लाने पर सहमत हो गए हैं जिन्हें 7 और 8 मई को छुट्टी लेने के कारण निलंबित कर दिया गया था। अधिकारियों ने भर्ती नीति के अनुसार इन 25 क्रू सदस्यों के मुद्दे की समीक्षा करने का भी आश्वासन दिया है। साथ ही अधिकारियों ने चर्चा के दौरान कर्मचारियों द्वारा उठाई गई मांगों पर भी गौर करने को कहा है. यह बात श्रम विभाग ने कही. एयर इंडिया द्वारा मामला सुलझने से यात्रियों को राहत मिली। बुधवार से कई उड़ानें रद्द होने से उन्हें परेशानी हो रही है. मंगलवार रात से एयर इंडिया एक्सप्रेस स्टाफ की कमी से जूझ रही है. एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक के बाद एक उड़ानें रद्द। करीब 300 केबिन क्रू ने बीमारी का हवाला देकर अचानक छुट्टी ले ली. उनके मोबाइल फोन भी बंद थे. केबिन क्रू से संपर्क नहीं हो सका. नतीजतन, अधिकारियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जब से टाटा ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया है, तब से कई समस्याएं आ गई हैं। नई भर्ती प्रणाली से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई लोगों का दावा है कि इंटरव्यू में जिस पद की बात की जा रही है, उस पद पर नियुक्ति ही नहीं हो रही है. कंपनी द्वारा कई कर्मचारियों को निचले पदों पर नियुक्त किया जाता है। इसके अलावा कई कर्मियों को अचानक बर्खास्त कर दिया गया. एयर इंडिया वर्कर्स यूनियन ने संगठन को पत्र लिखकर इन सभी समस्याओं को उजागर किया है। एयर इंडिया के कर्मचारी करीब एक हफ्ते से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि सार्वजनिक अवकाश पर जाना विरोध का हिस्सा है।

लोकसभा चुनाव 2024 के स्टार उम्मीदवार:

कामदार नहीं, नामदार .उपनाम ‘जॉयी’। लेकिन उन्होंने कॉलेज, यूनिवर्सिटी वोट के अलावा कोई वोट नहीं जीता है। 2021 में, वह हावड़ा विधानसभा चुनाव में खड़े हुए और हार गए। यह कोई नुकसान भी नहीं है. तीन में से तीसरा. तृणमूल के राणा चटर्जी जीते. दूसरे नंबर पर बीजेपी की वैशाली डालमिया हैं. दिप्सिता ‘बेचारी’ तीसरे स्थान पर हैं। लेकिन मतदान की संभावना को भूलना आसान है! पार्टी के निर्देश पर लोकसभा चुनाव में उतरे हैं. श्रीरामपुर लोकसभा में उनकी लड़ाई एक नहीं, बल्कि सात-सात विधानसभाओं से है। मुख्य प्रतिद्वंद्वी तृणमूल के कल्याण बनर्जी और भाजपा के कबीर शंकर बोस हैं। इस बार वह नामदार से कामदार बनेंगे?

लालेई मोहन दादू पद्मनिधि धर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार सीपीएम विधायक हैं। डिप्सिता का बाली घोषपारा घर भी डोमजूर विधानसभा क्षेत्र में है। पिता पीयूष धर सीपीएम के शिशु मोर्चा ‘किशोरवाहिनी’ के राज्य सचिव हैं. मां दीपिका ठाकुर चक्रवर्ती भी राजनीति में हैं. पिछले पंचायत चुनाव में वह सीपीएम के टिकट पर जिला परिषद सीट के उम्मीदवार थे. जीत नहीं हुई हालांकि, बेटी ने पंचायत चुनाव में अपनी मां के लिए कड़ा संघर्ष किया. यही वजह है कि उन्हें लोकसभा का टिकट मिला है.

टोटो कंपनी इस बार दिप्सिता के प्रचार में हुडखोला टोटो सबसे ज्यादा नजर आ रहा है. वह संकरी सड़क पर उसके ऊपर खड़े होकर उपदेश देता है। पैरों पर मगरमच्छ. अभियान की शुरुआत में पैरों में दर्द हो रहा था. अब यह समाप्त हुआ। दीप्सिता की तरह पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय भी ब्लैक क्रॉक्स पहने नजर आ रहे हैं

सिंगापुर दौरा श्रीरामपुर के मैदान पर ही दम तोड़ गया। जनवरी में तय हुआ कि डिप्सिता एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर बोलने के लिए सिंगापुर जाएंगी. लेकिन अब ऐसा नहीं हुआ क्योंकि पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार उतार दिए। बैठक 29 अप्रैल को हुई थी. सीपीएम के युवा उम्मीदवार प्रचार रोककर रात में घर लौटे और ऑनलाइन ‘पेपर प्रेजेंटेशन’ दिया.

डोफलीवाली लेकिन आप नाच सकते हैं. आप गा भी सकते हैं. डफली बजाकर नारा लगाना सबसे अच्छा है। डफली बजाते हुए ‘आजादी’ के नारे लगाने के उनके कई वीडियो भी कई बार वायरल हुए हैं। उसे अभी भी अनुरोध सत्र में वह सब सुनना पड़ता है। साथ ही बांग्ला, हिंदी, अंग्रेजी तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकते हैं। निजी प्रचार में नाक-भौं सिकोड़ने वाले कई सीपीएम नेताओं का मानना ​​है कि डिप्सिता की वजह से प्रचार में भीड़ बढ़ रही है.

महिलामहल क्या अगले सम्मेलन में एसएफआई को मिलेगी पहली महिला महासचिव? सीपीएम में हड़कंप मच गया है. जो लगातार मजबूत होता जा रहा है. आशुतोष कॉलेज में भूगोल की पढ़ाई के दौरान दिप्सिता ने एसएफआई में प्रवेश किया। वह इकाई अध्यक्ष थे. इसके बाद वह जेएनयू चले गये. वहां एमए, एमफिल करने के बाद फिलहाल वह पीएचडी कर रहे हैं। 2014 में, उन्हें एसएफआई के लिए जेएनयू में ‘काउंसलर’ चुना गया था। एसएफआई की जेएनयू इकाई के अध्यक्ष भी (एक बार यह पद सीताराम येचुरी के पास था)। बाद में एसएफआई की दिल्ली राज्य समिति के उपाध्यक्ष। उसके बाद वे केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे। अब एक अखिल भारतीय सेमी-बस। लेकिन संयुक्त. क्या अगले सम्मेलन में एसएफआई को अपनी पहली महिला बॉस मिलेगी? दीप्सिता का सीपीएम-अनुकूल उत्तर, “संगठन उन्हें प्राप्त करेंगे यदि वे उन्हें चाहते हैं।”

दिल्ली में डिप्सिता की सीपीएम सदस्यता राजधानी में छात्र आंदोलन के कारण है। लेकिन छात्र राजनीति के बाद सदस्यता कहां जायेगी? बंगाल या केरल? वह केरल को अपना ‘दूसरा घर’ कहते हैं। उन्होंने थोड़े गर्व के साथ कहा कि केरल के हर जिले में उनके कम से कम 10-15 परिचित हैं, जिनके घर वह जा सकते हैं। हालांकि, पार्टी बंगाल में सदस्यता लाना चाहती है. क्यों? जवाब में तृणमूल का नारा निकला, ‘बांग्ला को अपनी बेटी चाहिए.’

बी बी

चुनने के लिए दो चीज़ें. दो ‘बी’. बी और बी। बिल्ली और बिरयानी. कभी-कभी उनके व्हाट्सएप स्टेटस में बिल्ली की तस्वीर होती है। बिरयानी खाना बहुत पसंद है लेकिन बना नहीं पाती. खाना पकाने का मतलब है चावल और आमलेट.

तुम भी अच्छे – मैं भी अच्छा

दीप्सिता गायक शोभन गंगोपाध्याय की चचेरी बहन हैं। जिनके साथ एक समय में सिंगर इमोन चक्रवर्ती का रिश्ता था. अब शोभन का रिश्ता एक्ट्रेस सोहिनी सरकार के साथ है। शोभन भी सोहिनी के साथ दिप्सिता के घर गया। लेकिन तब दिप्सिता घर पर नहीं थी. लेकिन डिप्सिता को कौन पसंद करता है? इमोन या सोहिनी? सीपीएम-अनुकूल संतुलन में उत्तर आया, “इमोंडी एक महान गायक हैं। एसएफआई के पूर्व भी. और सोहिनिदी एक महान अभिनेत्री हैं। यानी सस्ता भी अच्छा-महंगा भी अच्छा. तुम अच्छे हो – मैं भी अच्छा हूँ.