Sunday, March 8, 2026
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क्या भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है मालदीव?

वर्तमान में मालदीव भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है! मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात भी की। इस मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी विश्वास से जुड़े हैं और हमारी अपने पड़ोसी देशों के साथ नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा रहा है। विदेश मंत्री ने ये कहा कि मालदीव में डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट में योगदान को लेकर भारत अगुवा की भूमिका में रहा है। इन प्रोजेक्ट से वहां के लोगों की ज़िंदगी के स्तर में पॉजिटिव बदलाव आया है। इन प्रोजेक्ट्स मे ना सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट बल्कि कई सामाजिक पहल के प्रोजेक्ट भी हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने मालदीव में मेडिकल ऑपरेशन्स के साथ साथ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को भी सुचारू रूप से चलाया है। विदेश मंत्री ने भारत की ओर मालदीव को दी गई वित्तीय सहायता का भी जिक्र किया और कहा कि कई मौकों पर मालदीव की मदद के लिए हम सबसे पहले एक्शन में आए हैं। आखिर में जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक मुश्किल वक्त से गुजर रही है। ऐसे में पड़ोसियों के साथ नजदीकी रिश्ते रखना जरूरी है।

दरअसल पिछले साल के आखिर में इंडिया आउट के नारे पर राष्ट्रपति मुइज्जू के चुनाव लड़ने और जीतने के बाद भारत और मालदीव के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव आया है, इस दौरान मालदीव सरकार ने लगातार अपने बयानों के जरिए चीन परस्ती दिखाई। मुइज्जू के मंत्रियों ने भारत के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट भी किए, जिन्हें लेकर खासा बवाल भी हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार हर्ष पंत कहते हैं कि मालदीव को आर्थिक तौर पर भारत की जरूरत है और इससे वो इनकार नहीं कर सकता। वो कहते हैं कि ये यात्रा वहां हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद हो रही है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर मुइज्जू सरकार की कोई मजबूरी नहीं है कि वो इंडिया का कार्ड लेकर पॉलिटिक्स करे। ऐसे में इंडिया आउट कार्ड का प्रभाव उनकी विदेश नीति में थोड़े समय के लिए कम प्रभावकारी हो गया है।

बात साफ है कि जिस आर्थिक परेशानी से मालदीव गुज़र रहा है। ऐसे में भारत के साथ की जरूरत और बढ़ जाती है। ये बात मुइज्जू पहले भी कह चुके हैं कि ये जरूरी है कि भारत के साथ आर्थिक संबंध सुधरें। वहीं भारत ने लगातार मुइज्जू की ओर से भड़काऊ बयानों के बाद भी सयंम बरता है। ऐसे में रिश्तों में सहजता कायम करने को लेकर ज्यादा जिम्मेदारी मालदीव की है, ना कि भारत की। और वो वही करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि जानकार ये भी कहते हैं कि इस यात्रा का मतलब ये नहीं है कि मालदीव अपनी चीन परस्त नीति से परे हट रहा है। लेकिन चीन और भारत के बीच उसे डिप्लोमैटिक बैलेंस बनाना उसके हित में है। यह, यात्रा इसी सिलसिले का का एक हिस्सा है। बता दें कि विदेश मंत्री मूसा ने भारत के लिए रवाना होने से पहले कहा था कि वो भारत-मालदीव के बीच सहयोग को बढ़ाने का प्रयास करेंगे, जिससे दोनों देशों को फायदा हो। ध्यान रहे कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर करने की आखिरी तारीख भी 10 मई ही तय की गई थी। ऐसे में इस यात्रा को दोनों विदेश मंत्रियों की युगांडा में हुई बैठक से आगे का कदम माना जा रहा है।

मालदीव में महज़ दो हफ्तों पहले ही संसदीय चुनाव हुए हैं। इन चुनाव में मुइज्जू के दल को बड़ी जीत हासिल हुई है, यानि मुइज्जू जानते हैं कि उनका इंडिया आउट एजेंडा चल रहा है और ऐसे में वो दीर्घकालिक तौर पर भारत विरोधी सेंटीमेंट का इस्तेमाल करना राजनीतिक तौर पर नहीं छोड़ेंगे। लेकिन देशों में एक डिप्लोमैटिक बैलेंस बनना रणनीतिक प्राथमिकताओं का तकाजा होता है। यात्रा वहां हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद हो रही है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर मुइज्जू सरकार की कोई मजबूरी नहीं है कि वो इंडिया का कार्ड लेकर पॉलिटिक्स करे। ऐसे में इंडिया आउट कार्ड का प्रभाव उनकी विदेश नीति में थोड़े समय के लिए कम प्रभावकारी हो गया है।खासकर इस क्षेत्र में जब भी चीन और भारत, दो बड़ी महाशक्तियों का बैलेंस बिगड़ता है, तो येचाहे अनचाहे वो मालदीव जैसे किसी भी तीसरे देश के लिए दिक्कत भरा हो सकता है। विदेश मंत्री की इस यात्रा से पहले मालदीव के पर्यटन मंत्री इब्राहिम फैसल भारतीय पर्यटकों से मालदीव आने की अपील पहले भी कर चुके हैं।

आखिर प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल की जमानत पर क्यों किया विरोध?

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल की जमानत पर विरोध जाहिर किया है! आबकारी नीति घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट का शुक्रवार को फैसला आने से पहले ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा है कि चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को जमानत नहीं दी जा सकती है। चुनाव प्रचार का अधिकार ना तो संवैधानिक अधिकार है और ना ही कानूनी अधिकार। सुप्रीम कोर्ट में ईडी की ओर से दाखिल नए हलफनामा में केजरीवाल की अंतरिम जमानत की मांग वाली अर्जी का विरोध किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि आम चुनाव के मद्देनजर वह केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर विचार करेंगे। इसके बाद अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई थी। पिछले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे। सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा कि अगर केजरीवाल को चुनाव के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है तो इससे एक नजीर पेश होगा और इस कारण वैसे राजनीतिक शख्स जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है उन्हें भी अंतरिम जमानत की इजाजत मिलेगी और चुनाव के नाम पर वह छानबीन के दायरे से बाहर होंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच इस मामले में शुक्रवार को फैसला देने वाली है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे।इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर वह अंतरिम जमानत पर केजरीवाल को रिलीज करेंगे तो वह इस दौरान सरकारी कामकाज नहीं करेंगे तब केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि वह फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे बशर्ते कि एलजी फाइल पर दस्तखत ना होने के आधार पर काम ना रोकें। ईडी ने अंतरिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए हलफनामा दायर किया है और कहा है कि चुनाव प्रचार का जो अधिकार है वह ना तो मौलिक अधिकार है और ना ही यह संवैधानिक अधिकार है। ईडी ने कहा कि यहां तक कि चुनाव प्रचार का अधिकार कानूनी अधिकार के दायरे में भी नहीं है। साथ ही ईडी ने कहा है कि कोई भी राजनीतिक व्यक्ति किसी भी साधारण व आम जनता से ज्यादा अधिकार का दावा नहीं कर सकता है। कोई राजनीतिक व्यक्ति इस बात का अधिकार नहीं रखता है कि उसे किसी आम जनता से अलग ट्रीट किया जाए और ना ही वह आम जनता से ज्यादा अधिकार रखने का दावा कर सकता है।

ईडी ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी के नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं गई है चाहे वह पॉलिटिकल लीडर खुद चुनाव ही क्यों ना लड़ रहे हों। यहां तक कि कंटेस्ट करने वाले कैंडिडेट को भी चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा कि अगर केजरीवाल को चुनाव के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है तो इससे एक नजीर पेश होगा और इस कारण वैसे राजनीतिक शख्स जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है उन्हें भी अंतरिम जमानत की इजाजत मिलेगी और चुनाव के नाम पर वह छानबीन के दायरे से बाहर होंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच इस मामले में शुक्रवार को फैसला देने वाली है।

केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी और रिमांड को केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत और हाई कोर्ट से मामले में राहत नहीं मिलने के बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई में वक्त लग रहा है ऐसे में वह आम चुनाव के मद्देनजर केजरीवाल की अंतरिम जमानत की अर्जी पर विचार करेंगे। हलफनामा में केजरीवाल की अंतरिम जमानत की मांग वाली अर्जी का विरोध किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि आम चुनाव के मद्देनजर वह केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर विचार करेंगे। इसके बाद अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई थी। पिछले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे।इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर वह अंतरिम जमानत पर केजरीवाल को रिलीज करेंगे तो वह इस दौरान सरकारी कामकाज नहीं करेंगे तब केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि वह फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे बशर्ते कि एलजी फाइल पर दस्तखत ना होने के आधार पर काम ना रोकें।

आखिर वर्तमान में क्यों उठा है हिंदू मुसलमान का विवाद?

हाल ही में वर्तमान में फिर से हिंदू मुसलमान का विवाद उठ चुका है! प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक रिपोर्ट पर सियासी घमासान मचा हुआ है। रिपोर्ट में 167 देशों में 1950 से 2015 के बीच आए डेमोग्राफिक बदलावों का विश्लेषण किया गया है। लेकिन बवाल मचा है भारत में मुस्लिमों की बढ़ती और हिंदुओं की घटती आबादी पर। रिपोर्ट के अनुसार 1950 से 2015 के बीच भारत में हिंदुओं की आबादी 7.82 प्रतिशत घट गई है जबकि इसी दौरान मुस्लिमों की आबाद में 43.15 फीसदी का इजाफा हुआ है। हिंदू, जैन, पारसी इनकी आबादी घटी है जबकि मुस्लिम, ईसाई और सिखों की आबादी बढ़ी है। रिपोर्ट में आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं और फल-फूल रहे हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान आई इस रिपोर्ट ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। बीजेपी जनसांख्यिकी में आए इस बदलाव को लेकर सीधे-सीधे कांग्रेस पर हमलावर है। ‘गजवा-ए-हिंद’ की तैयारी बता रही है। यही हाल रहने पर हिंदुओं के लिए कोई देश नहीं बचने की आशंका जता रही है। दूसरी तरफ, विपक्ष के नेता इस रिपोर्ट को भटकाने वाला करार दे रहे हैं। कोई इस रिपोर्ट को ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ की रिपोर्ट बताकर खारिज कर रहा है तो कोई इसे नफरत फैलाने और जनता को गुमराह करने की कोशिश करार दे रहा है। आखिर रिपोर्ट में क्या-क्या है और इससे क्यों मचा है सियासी बवाल, आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की हालिया रिपोर्ट में 1950 से 2015 के बीच जनसांख्यिकी में आए बदलाव का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी में 7.82 प्रतिशत की कमी आई है जबकि मुसलमानों की आबादी में 43.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिससे पता चलता है कि देश में विविधता को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल है। ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी: एक राष्ट्रव्यापी विश्लेषण 1950-2015’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आबादी में जैन समुदाय के लोगों की हिस्सेदारी 1950 में 0.45 प्रतिशत थी जो 2015 में घटकर 0.36 प्रतिशत रह गई।

ईएसी-पीएम की सदस्य शमिका रवि के नेतृत्व वाली एक टीम ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 से 2015 के बीच बहुसंख्यक हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में 7.82 प्रतिशत की कमी आई है जो संबंधित अवधि में 84.68 प्रतिशत से घटकर 78.06 प्रतिशत रह गई। इसमें कहा गया कि 1950 में देश में मुसलमानों की आबादी 9.84 प्रतिशत थी और 2015 में बढ़कर यह 14.09 प्रतिशत हो गई जो संबंधित अवधि में 43.15 प्रतिशत बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 1950 और 2015 के बीच ईसाइयों की आबादी 2.24 प्रतिशत से बढ़कर 2.36 प्रतिशत हो गई और संबंधित अवधि में इसमें 5.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें कहा गया कि 1950 में सिखों की आबादी 1.24 प्रतिशत थी जो बढ़कर 2015 में 1.85 प्रतिशत हो गई यानी इस अवधि के दौरान उसमें 6.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पारसी आबादी में 85 प्रतिशत की भारी कमी आई है। इस समुदाय की आबादी 1950 में कुल जनसंख्या का 0.03 प्रतिशत थी लेकिन 2015 में यह केवल 0.004 प्रतिशत रह गई।

रिपोर्ट के मुताबिक इन 65 वर्षों में गैर-मुस्लिम देशों में बहुसंख्यक समुदाय की आबादी घटी है। हालांकि, ये बात मुस्लिम-बहुल देशों पर लागू नहीं होती। मुस्लिम देशों में बहुसंख्यक संप्रदाय की आबादी बढ़ी है. सिर्फ मालदीव एक अपवाद है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘दक्षिण एशियाई पड़ोस के व्यापक संदर्भ में यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की आबादी बढ़ी है, और बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान तथा अफगानिस्तान जैसे देशों में अल्पसंख्यक आबादी में चिंताजनक रूप से कमी आई है।’ इसमें कहा गया कि यह आश्चर्य की बात नहीं है, इसीलिए तो पड़ोस से अल्पसंख्यक आबादी दबाव के समय भारत आती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सभी मुस्लिम बहुल देशों में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की आबादी में वृद्धि देखी गई। हालांकि, मालदीव ऐसा मुस्लिम बहुल देश है जहां बहुसंख्यक समूह (शाफी सुन्नियों) की हिस्सेदारी में 1.47 प्रतिशत की गिरावट आई है। बांग्लादेश में, बहुसंख्यक धार्मिक समूह की हिस्सेदारी में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो भारतीय उपमहाद्वीप में इस तरह की सबसे बड़ी वृद्धि है। 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के बावजूद पाकिस्तान में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय (हनफ़ी मुस्लिम) की हिस्सेदारी में 3.75 प्रतिशत की वृद्धि और कुल मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक देशों में म्यांमा, भारत और नेपाल में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। ये स्टडी रिपोर्ट दुनिया भर में अल्पसंख्यकों की स्थिति का एक विस्तृत राष्ट्रव्यापी विश्लेषण है जिसमें 1950 और 2015 के बीच 65 वर्षों में किसी देश की जनसंख्या में उनकी बदलती हिस्सेदारी को मापा गया है। विश्लेषण में शामिल 167 देशों के लिए, 1950 के आधारभूत वर्ष में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की हिस्सेदारी का औसत आंकड़ा 75 प्रतिशत है, जबकि 1950 और 2015 के बीच बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की आबादी में परिवर्तन का औसत 21.9% है।

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी से जब कुछ पत्रकारों ने इस रिपोर्ट के बारे में पूछा तो उन्होंने इसे ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ की रिपोर्ट बताकर खारिज कर दिया। ओवैसी ने कहा, ‘मुझे रिपोर्ट दीजिए तब मैं बोलूंगा। किसकी रिपोर्ट है ये? किसने ये रिपोर्ट बनाई है? वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट। किसने ये रिपोर्ट बनाई है?’ आरजेडी लीडर तेजस्वी यादव ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये लोगों को भ्रम में डालने और नफरत फैलाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का यही अजेंडा है। 10 साल तक लोगों को ठगा है और फिर ठगना चाहते हैं। उन्होंने 2011 के बाद जनगणना नहीं होने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 2021 में जनगणना होनी चाहिए थी लेकिन 2024 तक नहीं हुई।

जब चीन ने किया थर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर का पहला सी-ट्रायल पूरा!

हाल ही में चीन ने थर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर का पहला सी-ट्रायल पूरा कर लिया है! चीन ने अपने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का पहला सी-ट्रायल पूरा कर लिया है। यह ट्रायल 8 दिन का था और चीनी मीडिया के मुताबिक यह सफल रहा। चीन ने कुछ महीने पहले ही अपना चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने का ऐलान किया है। चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर न्यूक्लियर पावर सुपर कैरियर होगा।चीन ने पहला एयरक्राफ्ट कैरियर Liaoning 2012 में कमिशन किया था। 2017 में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च किया। तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर Fujian का पहला ट्रायल हो गया है और करीब दो साल तक इसके ट्रायल होंगे। चीन का ये अबतक का सबसे बड़ा और अडवांस्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसका वजन 79000 टन है। इसका फाइटर जेट लॉन्च सिस्टम – इलैक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम है। अभी यूएस के पास जो दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है, जैराल्ड फोर्ड उसमें यह लॉन्च सिस्टम है। चीन के पास जो दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं उनमें स्की जंप सिस्टम है। EMALS सबसे अडवांस्ड सिस्टम है और इससे एयरक्राफ्ट आराम से टेकऑफ कर सकते हैं और भारी फाइटर जेट को भी टेकऑफ किया जा सकता है। जिससे पे लोड कैपिसिटी बढ़ जाती है। चीन ने पहले ही ऐलान किया है कि उसका टारगेट 2030 तक अपनी नेवी में 5 से 6 एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल करने का है।

चीन अपनी नेवी का लगातार विस्तार कर रहा है। 1990 के बाद से चीन ने अपनी आर्मी की जगह पर नेवी के विस्तार पर ज्यादा फोकस किया है। इंडियन ओशन रीजन में भी चीन अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। एयरक्राफ्ट कैरियर किसी भी देश की नेवी को वह क्षमता देता है कि वह एयरक्राफ्ट लगातार बिना किसी रुकावट के ऑपरेट कर सके। एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरकर जब एयरक्राफ्ट दूसरे शिप को एक प्रोटेक्टिव अंब्रैला देता है तो दूसरे वॉर शिप जैसे फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर अपना ऑफेंसिव टास्क पूरा कर सकते हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर एक तरह से पानी में तैरता एयरबेस है और समंदर में बादशाहत के लिए अहम है।

चीन की तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर में इलैक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) है जो ज्यादा अडवांस्ड है। इंडियन नेवी के पास अभी दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, आईएनएस विक्रमादित्य और स्वदेशी आईएनएस विक्रांत। दोनों में ही स्टोबार सिस्टम है। जमीन पर जो रनवे होते हैं उनके मुकाबले कैरियर डेक का रनवे बहुत छोटा होता है। इसलिए एयरक्राफ्ट का इंजन जो फोर्स पैदा करता है वह एयरक्राफ्ट को टेकऑफ करने के लिए काफी नहीं होता है। इसलिए उसे बाहर से भी मदद की जरूरत पड़ती है। ऐसे में स्टोबार या कैटोबार सिस्टम मदद करता है। स्टोबार मतबल शॉर्ट टेकऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी। इसमें डेक का आगे का हिस्सा उठा हुआ होता है। इसे स्की जंप कहते हैं। दूसरा सिस्टम है कैटोबार। इसका मतलब है कैटापुल्ट असिस्टेड टेक ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी। इसमें कैरियर का डेक पूरा फ्लैट होता है। इसलिए इसे फ्लैट टॉप्ड एयरक्राफ्ट कैरियर भी कहते हैं। कैटोबार सिस्टम एयरक्राफ्ट की कैपिसिटी बढ़ा देता है साथ ही इससे एयरक्राफ्ट की पेलोड कैपिसिटी भी बढ़ जाती है यानी एयरक्राफ्ट कैरियर से टेकऑफ करने वाला एयरक्राफ्ट ज्यादा विस्फोटक या सामग्री साथ ले जा सकता है। अमेरिका की नेवी के पास ज्यादातर एयरक्राफ्ट कैरियर कैटोबार सिस्टम वाले हैं।

इंडियन नेवी के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं जिसमें एक स्वदेशी है। दूसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए नेवी ने केस आगे बढ़ाया है। पिछले साल सितंबर में डिफेंस प्रॉक्योरमेंट बोर्ड ने इसकी जरूरत को मंजूरी दी है। इसे अभी रक्षा अधिग्रहण समिति यानी डीएसी की मंजूरी का इंतजार है। लोकसभा चुनाव चल रहे हैं इसलिए अब इस पर बात नई सरकार बनने के बाद ही आगे बढ़ेगी। लेकिन क्या सही में नेवी के पास तीन एयरक्राफ्ट कैरियर होंगे? नए एयरक्राफ्ट कैरियर की मंजूरी मिलने के बाद भी इसे बनाने में करीब 8-10 लग जाएंगे और तब आईएनएस विक्रमादित्य रिटायरमेंट की कगार पर होगा। इस तरह जो नया एयरक्राफ्ट कैरियर मिलेगा वह दरअसल विक्रमादित्य की जगह लेगा और कुल मिलाकर नेवी के पास फिर भी दो ही एयरक्राफ्ट कैरियर रहेंगे।

इंडियन नेवी को अगर वक्त रहते दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं मिला तो फिर नेवी की जरूरतें पूरी करने में एक बार फिर से गैप आने का अंदेशा है। नेवी को पहला एयरक्राफ्ट कैरियर 1961 में मिला था जिसने 1971 युद्ध में अहम रोल निभाया था। दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विराट 1987 में कमिशन हुआ और 2016 में रिटायर हुआ। इससे पहले 2013 में आईएनएस विक्रमादित्य नेवी में कमिशन हो गया था। 2016 में आईएनएस विराट के रिटायर होने के बाद 2022 तक नेवी के पास सिर्फ एक ही एयरक्राफ्ट कैरियर बचा था। ऐसे में इसके मेंटेनेंस में जाने पर नेवी बिना किसी एयरक्राफ्ट कैरियर के अपनी ड्यूटी निभा रही थी। अगर दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर जल्द नहीं आया और आईएनएस विक्रमादित्य के रिटायर होने का वक्त हो गया तो ऐसा गैप फिर से पैदा होने का खतरा बना हुआ है। एयरक्राफ्ट कैरियर समंदर में पूरे ऑपरेशन के कमांड, कंट्रोल और कॉर्डिनेशन की रीढ़ है और इसलिए बेहद अहम है।

आखिर कौन है केएस राजन्ना? जिन्हें राष्ट्रपति ने प्रदान किया पद्मश्री?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर केएस राजन्ना कौन है जिन्हें राष्ट्रपति ने पद्मश्री प्रदान किया है! गुरुवार, राष्ट्रपति भवन, पद्मश्री पुरस्कार के लिए डॉ. केसी राजन्ना का नाम उद्घोषित होता है। उद्घोषणा के बाद हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। हॉल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम मोदी से लेकर कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद हैं। सभी पूरे उत्साह और सम्मान के साथ उस व्यक्ति को स्वागत कर रहे हैं जो हौसले और जज्बे का पर्याय बन चुका है। राजन्ना जब 11 महीने के थे तभी पोलियो के कारण हाथ और पैर गंवाना पड़ा था। आज जब राष्ट्रपति की तरफ पद्म पुरस्कार लेने बढ़ रहे थे तो आंखों में चमक भी थी और सम्मान पाने की खुशी भी। गर्व से सीना चौड़ा भी था और उन लोगों के प्रति आभार भी दिख रहा था जो उनकी खुशी में खुश थे।2003 में पैरालंपिकक में दो मेडल भी जीत चुके हैं। राजन्ना को 54 साल की उम्र में साल राज्य में कमिश्नर नियुक्त किया गया था। राजन्ना मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है। पुरस्कार ग्रहण करने से पहले वे पीएम मोदी के पास गए। इस पर पीएम ने उनका हाथ पकड़ लिया। इसके बाद राजन्ना ने राष्ट्रपति के सामने मंच पर जाने से पहले शीश झुकाया। उन्होंने राष्ट्रपति का भी विशेष रूप से अभिवादन किया। राष्ट्रपति जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित कर रही थी तब पूरा हॉल में शायद ही कोई होगा जो उनकी उपलब्धि पर गर्व ना कर रहा है। डॉ. राजन्ना को सम्मानित करने वाले पत्र में दिव्यांजनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में वर्णित किया गया था।

डॉ. केएस राजन्ना को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग डॉ. राजन्ना के हौंसले की खूब तारीफ कर रहे हैं।1980 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी हासिल कर लिया। डॉ. राजन्ना ने साल 2003 में पैरालंपिकक में दो मेडल भी जीत चुके हैं। राजन्ना को 54 साल की उम्र में साल राज्य में कमिश्नर नियुक्त किया गया था। राजन्ना मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है। एक यूजर @Bitt2DA ने लिखा कि आज पद्मश्री पुरस्कार भी धन्य हो गया ऐसे महान इंसान को मिलकर… यह होता है असली सम्मान ! भावुक कर दिया इस वीडियो ने। एक अन्य यूजर ने लिखा कि यह इस व्यक्ति का सम्मान नहीं है बल्कि यह पद्मश्री पुरस्कार का सम्मान है। …यह एक वास्तविक सम्मान है!

डॉ. केएस राजन्ना कर्नाटक के मांड्या जिले के रहने वाले हैं। वह अपने मात-पिता की सातवीं संतान हैं। 11 साल की उम्र में पोलियो की वजह से हाथ-पैर गंवाने के बावजूद उनका उत्साह कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने ना सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि लेखन, हस्तशिल्प के साथ ही डिस्कस थ्रो, ड्राइविंग और स्विमिंग भी सीखी। 1975 में उन्होंने स्टेट सिविल सर्विस की परीक्षा पास की। 1980 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी हासिल कर लिया। डॉ. राजन्ना ने साल 2003 में पैरालंपिकक में दो मेडल भी जीत चुके हैं। राजन्ना को 54 साल की उम्र में साल राज्य में कमिश्नर नियुक्त किया गया था। राजन्ना मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है।

उन्होंने 2002 में पैरालिंपिक में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक और तैराकी में सिल्वर पदक जीतकर एक खिलाड़ी के रूप में प्रशंसा हासिल की है। उन्होंने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया। इसमें उन्होंने शारीरिक रूप से विकलांगों सहित 500 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया। डॉ. राजन्ना के अनुसार विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए कोई राजनीतिक आरक्षण नहीं है। बता दें कि महीने के थे तभी पोलियो के कारण हाथ और पैर गंवाना पड़ा था। आज जब राष्ट्रपति की तरफ पद्म पुरस्कार लेने बढ़ रहे थे तो आंखों में चमक भी थी और सम्मान पाने की खुशी भी। गर्व से सीना चौड़ा भी था और उन लोगों के प्रति आभार भी दिख रहा था जो उनकी खुशी में खुश थे। पुरस्कार ग्रहण करने से पहले वे पीएम मोदी के पास गए। इस पर पीएम ने उनका हाथ पकड़ लिया। इसके बाद राजन्ना ने राष्ट्रपति के सामने मंच पर जाने से पहले शीश झुकाया। उन्होंने राष्ट्रपति का भी विशेष रूप से अभिवादन किया। राष्ट्रपति जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित कर रही थी तब पूरा हॉल में शायद ही कोई होगा जो उनकी उपलब्धि पर गर्व ना कर रहा है। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुरस्कार राज्य और केंद्र सरकार को एक विकलांग व्यक्ति को विधान परिषद या राज्यसभा के सदस्य के रूप में नियुक्त करने के लिए प्रेरित करेगा।

क्या देश में मुसलमान की संख्या बढ़ी है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या देश में वर्तमान में मुसलमान की संख्या बढ़ी है या नहीं! बीजेपी ने देश में मुस्लिम आबादी बढ़ने की रफ्तार पर चिंता जताई। पार्टी ने हैरानी जताई कि मुसलमानों को आरक्षण देने पर तुली कांग्रेस अगर सत्ता में आती है, तो इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिले आरक्षण पर क्या असर पड़ेगा। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PMAC) की ओर से हाल में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 1950 से 2015 के बीच हिंदू आबादी का हिस्सा 7.82 फीसदी घटा। मुसलमानों की आबादी 43.15 फीसदी बढ़ी है। इसमें कहा गया है कि 1950 में देश में आबादी में जैन समुदाय की हिस्सेदारी 0.45 फीसदी थी। ये 2015 में घट कर 0.36 फीसदी रह गई। यह रिपोर्ट लोकसभा चुनाव के चौथे चरण की वोटिंग से पहले आई है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस रिपोर्ट पर कहा, ‘अगर आप 1951 की जनगणना को देखें तो हिंदुओं की आबादी 88 फीसदी और मुसलमानों की 9.5 फीसदी थी। 2011 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी 80 फीसदी से घटकर 79.8 फीसदी रह गई जबकि मुसलमानों की आबादी 14.5 फीसदी से अधिक हो गई।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर इस रफ्तार से देश की आबादी बढ़ती है और जिस प्रकार से कांग्रेस मुस्लिमों को आबादी के आधार पर आरक्षण देने पर तुली हुई है तो वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के हिस्से में कटौती करेंगे।’

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ भविष्य में आरक्षण के हिस्से में बदलाव करना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, ‘इसकी ज्यादा संभावना है क्योंकि उनमें मुसलमानों में कई शादियों का चलन है।’ उन्होंने कहा कि धर्मांतरण और घुसपैठ के कारण भी आरक्षण में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़ती रहेगी, क्योंकि उन्हें कांग्रेस का धर्मनिरपेक्ष कवर मिल गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह रिपोर्ट कई सवाल उठाती है, क्योंकि एक विशेष समुदाय अपनी जनसंख्या को इस तरह से बढ़ा रहा है जिससे भारत की जनसांख्यिकी के बदल जाने की संभावना है। चंद्रशेखर ने पूछा, ‘मुस्लिमों की आबादी में इस बढ़ोतरी का अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और अवसरों (उपलब्ध) पर क्या प्रभाव पड़ा है? जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई भी हैं। क्या इन समुदायों पर असर पड़ा है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक दल संविधान को बदलने और धर्म आधारित आरक्षण लाने का बड़ा प्रयास कर रहे हैं।

1950 से 2015 तक अल्पसंख्यकों के मुकाबले हिंदुओं की आबादी कम होने के संबंध में जारी रिपोर्ट की टाइमिंग को लेकर सियासी घमासान तेज होने लगा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, CPI-M और कांग्रेस सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने रिपोर्ट पर सवाल उठाया है। इन राजनीतिक दलों ने रिपोर्ट को लोकसभा चुनाव के बीच राजनीतिक चाल बताया। CPI-M पोलित ब्यूरो के सदस्य और पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट जारी करने के बजाय सरकार को जनगणना करानी चाहिए। सलीम ने कहा कि 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। अगर जनगणना हो जाती तो जनसंख्या की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाती। उन्होंने कहा कि आरएसएस के अजेंडे के तहत चुनाव के बीच यह रिपोर्ट जारी की गई है।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य समीरुल इस्लाम ने कहा कि चुनाव के बीच जारी इस रिपोर्ट से पता चलता है कि बीजेपी में हार का डर बैठ गया है। उन्होंने कहा, ‘इसी डर की वजह से बीजेपी हर तरह के कार्ड खेल रही है। यह कवायद काफी समय पहले शुरू हुई थी और चुनावों के बीच भी जारी है। लेकिन ये चालें इस बार काम नहीं करेंगी।’ पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के सदस्य शुभंकर सरकार ने कहा, ‘2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में हिंदू आबादी में वृद्धि मुसलमानों की तुलना में अधिक थी। तो वे कैसे कह सकते हैं कि भारत में हिंदू खतरे में हैं?’

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट पर संदेह जताया। उन्होंने पूछा कि बिना जनगणना कराए केंद्र ने कैसे हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या रिपोर्ट तैयार कर ली। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार मौजूदा लोकसभा चुनाव के दौरान देश के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार पैदा कर रही है। उन्होंने पूछा, ‘आप जनगणना कराए बिना ही आंकड़ों पर (कैसे) पहुंच गए? क्या 2021 में जनगणना नहीं होनी थी? आप देश के प्रधानमंत्री हैं…कृपया हिंदू-मुस्लिम की भावना त्यागें और मुद्दों पर बात करें।’

तेजस्वी ने कहा, ‘न तो प्रधानमंत्री और न ही बीजेपी नेता बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कई अन्य अहम मुद्दों पर बात करेंगे। प्रधानमंत्री बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के बारे में बात नहीं करेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सिर्फ समाज में दरार पैदा करने की कोशिश कर रही है। वे संविधान बदलना चाहते हैं। हम विभाजनकारी ताकतों को समाज में दरार पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे।’

गांधी परिवार की मध्यभूमि कही जाने वाली अमेठी सीट पर राहुल गांधी की हार! वोटों का अंतर 55 हजार से ज्यादा l

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पिछले लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार की मध्यभूमि कही जाने वाली इसी अमेठी सीट पर स्मृति राहुल गांधी की हार हुई थी. वोटों का अंतर 55 हजार से ज्यादा था.
“अगर प्रियंकादीदी चुनाव लड़तीं तो कांग्रेस कम से कम एक लाख वोटों से जीतती।”

अमेठी की आंगनबाडी कार्यकत्री रेनू यादव की अफसोस की आवाज। अभी-अभी अमेठी के तिलोई उपखण्ड में प्रियंका गांधी वाड्रा का महिला सम्मेलन संपन्न हुआ है. दिवंगत कांग्रेस नेता शिव प्रताप सिंह के पिछवाड़े में तिलोई भर से महिलाओं की भीड़ अभी कम नहीं हुई है।

चालीस डिग्री की गर्मी में पसीना बहाते हुए प्रियंका बोल रही थीं. दो-तीन बार माइक्रोफोन में दिक्कत आई। प्रियंका मंच से उतरकर सीधे महिलाओं के सामने चली गईं। और उन्होंने अमेठी के मतदाताओं का सामना करते हुए शिकायत की, “आपने पिछले लोकसभा चुनाव में मेरे दादा को खो दिया था।”

बार-बार गुलाबी सलवार-कमीज़ के घूँघट पर पसीना पोंछना पड़ता था। बैठक खत्म करने से पहले प्रियंका ने कहा, ”20 मई को वोटिंग मशीन पर कांग्रेस के हाथ के निशान के आगे वाला बटन दबाना ही काफी नहीं है! वोटिंग मशीन की आवाज सुनकर यह पुष्टि कर लेनी चाहिए कि वोट पड़ा है या नहीं। वह वोट कांग्रेस को गया या नहीं, इसकी पुष्टि वीवीपैट मशीन से निकलने वाले कागज को देखकर की जाएगी।”

रेनू यादव कह रही थीं कि अगर प्रियंका खुद उम्मीदवार होतीं तो इतना सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने स्मृति ईरानी को कम से कम एक लाख वोटों से हराया होगा.

और अब? “कांटे का टक्कर”!

देश की वीवीआईपी लोकसभा सीटों में से एक अमेठी की धूल भरी सड़कें, संकरी गलियों से भरी गलियां, मक्खियों से भरा ‘प्योर वेज’ ढाबा, गुल्तानी कहते हैं, इस बार ‘कांटे का टक्कर’ अमेठी में। बीजेपी की स्मृति ईरानी बनाम कांग्रेस के किशोरीलाल शर्मा बराबरी का मुकाबला है.

पिछले लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार की मध्यभूमि कही जाने वाली इसी अमेठी सीट पर स्मृति राहुल गांधी की हार हुई थी. वोटों का अंतर 55 हजार से ज्यादा था. इस बार जाति के मामले में पलड़ा थोड़ा कांग्रेस की तरफ झुका हुआ है. कांग्रेस ने पिछले चालीस सालों से अमेठी-रायबरेली में गांधी परिवार के दूत और सोनिया गांधी के संसदीय प्रतिनिधि किशोरलाल शर्मा को मैदान में उतारा है. किशोरलाल ब्राह्मण. अमेठी में करीब 8 फीसदी ब्राह्मण वोट हैं. इनका एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से नाराज है. क्योंकि टैगोर योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में ब्राह्मणों को सम्मान नहीं मिल रहा है! इससे 26 फीसदी दलित वोट और करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोट कांग्रेस के साथ जुड़ सकते हैं. सीट समझौते में समाजवादी पार्टी के अपने यादव वोट भी कांग्रेस के पास आएंगे. अगर प्रियंका इसके शीर्ष पर खड़ी होतीं तो उन्हें अपने ‘करिश्मे’ के दम पर अधिक वोट मिलते. गांधी परिवार के पुराने वोट बैंक का क्षरण भी वापस आएगा.

खान दिन भर में 10 पीआर कार्यक्रमों और आधा दर्जन सार्वजनिक सभाओं के जरिए बार-बार प्रियंका गांधी को गांधी परिवार के पुराने रिश्ते की याद दिलाते रहे। सिंचाई के पानी से अब अमेठी के खेत हरे-भरे हो गए हैं। पिता जी प्रधानमंत्री होते हुए भी अहंकारी नहीं थे। अमेठी के माता-पिता ने कितनी बार पिता को कोई बात पसंद न होने पर डांटा था। बाबा कहते थे कि अमेठी की जनता का ये अधिकार है.”

कटाक्ष करने वाली स्मृति ईरानी यूं ही अमेठी में नहीं बैठीं. उन्होंने अपना घर अमेठी के जिला मुख्यालय गौरीगंज में बनाया है। मतदान से पहले पूजा-अर्चना कर गृह प्रवेश किया गया. मोदी सरकार की गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन, पीएम-किसान प्रति वर्ष 6,000 रुपये तक पहुंचता है। आवास योजना से उज्ज्वला- स्मृति सारी उपलब्धियां बटोर रही हैं. इस सरकारी योजना का लाभार्थी उनका वोट बैंक है. और गांधी परिवार के सामने सवाल ये है कि ‘पिछले पांच साल में गांधी परिवार का कोई सदस्य कितनी बार अमेठी आया, इसकी गिनती कौन करेगा?’ कांग्रेस नेता इस बात से सहमत हैं कि यह ‘लाभार्थी वोट बैंक’ एक कठिन चुनौती है। प्रियंका का कहना है, ”राशन दे रहे हैं, अच्छी बात है.” लेकिन उस राशन की गारंटी के लिए, यूपीए सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिनियम बनाया गया था। और सिर्फ राशन देने से काम नहीं चलेगा! आमदनी कहां है? राशन या आमदनी, आप किसे चुनेंगे?” भले ही सारे वादे पूरे नहीं हुए, लेकिन स्मृति ईरानी से अभी भी अमेठी के लोग नाराज नहीं हैं। उनकी चुनौती भाजपा के बाहर नहीं, बल्कि भीतर है। जो बीजेपी नेता अब स्मृति के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं, उससे बीजेपी के अंदर गुस्सा पैदा हो गया है.

कांग्रेस के गारंटी कार्ड के साथ घर लौटने से पहले, रेनू यादव ने कहा, “अगर प्रियंका चुनाव लड़तीं, तो जीत सुनिश्चित होती। लेकिन..!” अमेठी का मलाल दूर हो गया.

भाजपा नेतृत्व चिंतित है कि उत्तर प्रदेश में जीती हुई सीटों को बरकरार रखना चुनौती हैl

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भाजपा नेतृत्व को यकीन है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले चार चरणों में जीती गई कई सीटें खोने जा रही है। शेष तीन चरणों में, वे अब उन परिणामों को बरकरार रखने के लिए बेताब हैं जो टीम ने पांच साल पहले हासिल किए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लड़ाई ख़त्म हो गई है. अगले तीन चरणों का चुनाव उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड और पूर्वांचल क्षेत्रों में होगा, जिन्हें पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता है। भाजपा नेतृत्व को यकीन है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले चार चरणों में जीती गई कई सीटें खोने जा रही है। अब वे सत्ता की लड़ाई में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए शेष तीन चरणों में पार्टी द्वारा पांच साल पहले हासिल किए गए परिणामों को बरकरार रखने के लिए बेताब हैं।

2014 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें जीती थीं. 2019 में वह सीट घटकर 62 रह गई. भले ही इस यात्रा में 80 सीटों का लक्ष्य हासिल कर लिया जाए, लेकिन बीजेपी नेतृत्व का मुख्य लक्ष्य अगले तीन चरणों में नई सीटें जीतना और कमी पूरी करने से बचना है. पहले चार चरणों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 39 सीटों पर मतदान हुआ, जहां मुख्य रूप से किसानों, जाटों और मुसलमानों का वर्चस्व है. अगले सोमवार को बुन्देलखण्ड और मध्य उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। पांच साल पहले बीजेपी ने रायबरेली को छोड़कर बाकी सभी 14 सीटों पर जीत हासिल की थी. बाकी दो चरणों में बची 27 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगियों ने कुल 23 सीटें जीतीं. बाकी चार सीटों पर मायावती की पार्टी बीएसपी ने जीत हासिल की. कुल बची हुई 41 सीटों में से गेरुआ खेमे ने पांच साल पहले 36 सीटें जीती थीं. परिणामस्वरूप, टीम को यह एहसास हो रहा है कि उस क्षेत्र में नए अच्छे परिणाम प्राप्त करना काफी कठिन है। इसके अलावा इस बार योगी आदित्यनाथ के राज्य में देश के अन्य हिस्सों की तरह मोदी की आंधी नहीं है. ऐसे में बीजेपी नेतृत्व भी बुंदेलखण्ड और पूर्वी क्षेत्र में पार्टी के नतीजों को लेकर चिंतित है. खासकर उत्तर प्रदेश की कम से कम 20 लोकसभाओं में जीत का अंतर 10 हजार से कम था. उन निर्वाचन क्षेत्रों में मोदी तूफान की अनुपस्थिति में, परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी के उम्मीदवार अपने करिश्मे के दम पर कितने वोट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, पांच साल पहले बसपा ने उत्तर प्रदेश की 37 सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे, जिससे भाजपा को काफी राहत मिली थी। नतीजा यह हुआ कि पिछले लोकसभा चुनाव में दलित और जाटव वोटों का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी उम्मीदवार को मिला. लेकिन इस दौर में दलित समाज का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से दूर हो गया. इसके अलावा अगर बीजेपी को 400 सीटें मिलती हैं तो वह संविधान बदल सकती है और आरक्षण खत्म कर सकती है, विपक्ष की उस मुहिम का असर भी दलित समाज पर पड़ा है.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पिछली बार बीजेपी उम्मीदवारों को भारी दलित वोट मिले थे, लेकिन इस बार उन्होंने मुंह मोड़ लिया है. यहां तक ​​कि जिन केंद्रों पर बसपा का कोई उम्मीदवार नहीं है, वहां भी दलित उम्मीदवार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देने से नहीं हिचकिचाते, भले ही वह ‘वर्ग-शत्रु’ ही क्यों न हो। लेकिन दारा सिंह चौहान और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभरे का एनडीए में शामिल होना भाजपा के लिए सकारात्मक बात है। बीजेपी नेतृत्व के मुताबिक, दारा सिंह के शामिल होने से पूरे उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर नान्या-चौहान वोट बीजेपी के पक्ष में जाएंगे. और चूंकि ओमप्रकाश राजभड़ पीछे हैं, इसलिए पूर्वी क्षेत्र में राजभड़ यानी पिछड़े समुदाय का वोट बीजेपी उम्मीदवारों को मिलने वाला है.

लेकिन बीजेपी के लिए एक अतिरिक्त चुनौती पूर्वी क्षेत्र में मायावती से निपटना है. पिछली बार मोदी की आंधी के बावजूद मायावती की पार्टी ने पूर्वी क्षेत्र की चार सीटों पर कब्जा कर लिया था. इस बार स्थिति अलग है. कोई मोदी तूफान नहीं है, उल्टे सत्ता विरोध की हवा हर जगह है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, इस बार के चुनाव में बंटवारे की राजनीति भी नहीं चल पाई। दूसरी ओर, यादव वोट की तरह दलित वोट भी कई कारणों से बीजेपी के खिलाफ हो गया है. भाजपा नेतृत्व अच्छी तरह से जानता है कि एकजुट दलित वोट कई गणनाओं को बिगाड़ सकता है। इसीलिए अब मोदी ने 400 सीटों का लक्ष्य छोड़कर अलग-अलग मुद्दों पर प्रचार पर ध्यान केंद्रित किया है. और 400 सीटों की बात करते हुए ये भी जता रहे हैं कि सत्ता में आने पर वो संविधान नहीं बदलेंगे.

आईपीएल के बाद भारतीय महिला टीम घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी सीरीज l

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आईपीएल खत्म होने के बाद भारतीय महिला टीम घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज खेलेगी. सभी बेंगलुरु और चेन्नई में खेले जाएंगे. भले ही आईपीएल खत्म हो गया हो लेकिन बेंगलुरु और चेन्नई में होने वाले मैचों पर कोई ब्रेक नहीं है. क्योंकि, आईपीएल खत्म होने के बाद भारतीय महिला टीम देश में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज खेलेगी. सभी बेंगलुरु और चेन्नई में खेले जाएंगे. दूसरे शब्दों में कहें तो स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी के होम ग्राउंड पर खेलेंगी.

दक्षिण अफ्रीकी महिला टीम भारत के खिलाफ तीन फॉर्मेट की सीरीज खेलने आ रही है. सबसे पहले वनडे सीरीज है. उस परीक्षण के बाद. आखिरी टी20 सीरीज. सभी मैच दो दक्षिणी राज्यों में खेले जाएंगे।

दक्षिण अफ्रीका भारत में पहली वनडे सीरीज खेलेगा. तीन मैचों की सीरीज होगी. पहला मैच 16 जून को है. दूसरा मैच 19 जून को है. वनडे सीरीज का तीसरा मैच 23 जून को खेला जाएगा. तीनों मैच बेंगलुरु में खेले जाएंगे. वनडे सीरीज के बाद दोनों टीमों के बीच सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला जाएगा. इससे पहले मंधाना ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ देश की धरती पर टेस्ट खेले थे. इस बार वे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलेंगे. यह गेम 28 जून से 1 जुलाई तक खेला जाएगा. टेस्ट चेन्नई में होगा.

आखिर में होगी टी20 सीरीज. इस सीरीज में तीन मैच होंगे. सभी चेन्नई में खेले जाएंगे. पहला टी20 5 जुलाई को. दूसरा मैच 7 जुलाई को होगा. सीरीज 9 जुलाई को तीसरे और आखिरी टी20 के साथ खत्म होगी. न्यूजीलैंड के बाद भारत की महिला हॉकी टीम ने इटली को हराकर अगले ओलंपिक में खेलने की अपनी उम्मीदें बरकरार रखीं. पहले मैच में अमेरिका से हार के बाद भारत थोड़ा दबाव में था. भारत अगले दो मैच जीतकर पेरिस 2024 क्वालीफायर के सेमीफाइनल में पहुंच गया। भारत ने मंगलवार को इटली को 5-1 से हराया. प्रतियोगिता में शीर्ष तीन टीमें पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेंगी। गुरुवार को दूसरे सेमीफाइनल में भारत का प्रतिद्वंद्वी शक्तिशाली जर्मनी है। दूसरे सेमीफाइनल में अमेरिका और जापान होंगे।

मंगलवार को पूल बी के पहले मैच में न्यूजीलैंड की अमेरिका से हार से भारत की अंतिम चार में पहुंचने की राह आसान हो गई. भारतीय टीम को सिर्फ ड्रॉ की जरूरत थी. भारत ने इटली पर जीत के साथ पूल में दूसरी टीम के रूप में सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया। इस दिन संगीता कुमारी, निक्की प्रधान, सलीमा टेटेरा ने इटली के खिलाफ मैच की शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेलना शुरू कर दिया था. भारत को पहले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला. उदिता ने गोल करने में कोई गलती नहीं की. शुरुआती बढ़त लेने के बाद भी भारतीय टीम ने मैच की लय ढीली नहीं होने दी.

भारत की आक्रामक हॉकी ने पूरे मैच में इटली को दबाव में रखा. हालांकि, भारतीय महिला टीम ने इस दिन गोल करने के कई आसान मौके गंवाए. अन्यथा जीत का अंतर अधिक होता. खासकर मैच के 18वें मिनट में उदिता ने दिन का सबसे आसान मौका गंवा दिया. 32वें मिनट में ज्योति ने गोल करने का एक और आसान मौका गंवा दिया। हालाँकि गोल का दरवाज़ा खोलने में असफल रहने के बावजूद भारतीयों ने पूरे मैच में इटली को दबाव में रखा। दीपिका ने 41वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक से भारत के लिए दूसरा गोल किया. भारत को पेनल्टी स्ट्रोक तब मिला जब इटली की सोफिया लोरिटो ने अवैध रूप से लालरेम्सियामी को ‘डी’ के अंदर धकेल दिया। दूसरे गोल के 2 मिनट बाद दीपिका ने आसान मौका गंवा दिया. फील्ड गोल के मामले में भारतीय टीम की कमजोरी इटली के खिलाफ भी बार-बार साबित हुई है। हालांकि, 45वें मिनट में सलीमा ने योजनाबद्ध हमले में शानदार गोल कर भारत को 3-0 की बढ़त दिला दी. तीसरे क्वार्टर के ख़त्म होने तक भारत की सेमीफ़ाइनल में जगह लगभग पक्की हो गई. 54वें मिनट में नवनीत कौर ने चौथा गोल किया. उदिता ने 56वें ​​मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से टीम का पांचवां और अपना दूसरा गोल किया। मैच के आखिरी मिनट में इटली ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल कर इसका बदला चुकाया।

170 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त, पैसे गिनने में लगे 14 घंटेl

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आयकर विभाग ने टैक्स चोरी मामले की जांच शुरू कर दी है. आयकर विभाग ने नंद्रे में भंडारी फाइनेंस पर छापेमारी में 8 किलो सोना और 14 करोड़ कैश समेत 170 करोड़ की संपत्ति जब्त की.
170 करोड़ रुपये! महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी, किलो किलो सोना बरामद किया गया. सूत्रों के मुताबिक, भंडारी फाइनेंस और आदिनाथ को-ऑपरेटिव बैंक में 72 घंटे तक लगातार ‘ऑपरेशन’ चला। कैश गिनने में लगे सिर्फ 14 घंटे!

आयकर विभाग के मुताबिक भंडारी परिवार का नांदेड़ में निजी निवेश कारोबार है. उस कारोबार में टैक्स चोरी के आरोप लगे थे. उसके आधार पर, महाराष्ट्र के छह जिलों पुणे, नासिक, नागपुर, परभणी, छत्रपति शंभाजीनगर और नांदेड़ में सैकड़ों आयकर अधिकारियों की तलाशी ली गई। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक नांदेड़ के गोदाम मालिकों के ‘भंडार’ से कुल 170 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति जब्त की गई है. इसमें 14 करोड़ कैश है. पैसे गिनने के लिए बैंक से पैसे गिनने की मशीन लायी जाती है। उस मशीन का उपयोग करके सारे पैसे गिनने में लगभग 14 घंटे लगते हैं! इसके अलावा 8 किलो सोना और कई दस्तावेज बरामद हुए. जिन दस्तावेजों को आयकर अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से सत्यापित किया जा रहा है। उन्हें संदेह है कि दस्तावेज़ों से और भी अवैध संपत्तियों का खुलासा हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, 25 गाड़ियों में सौ से ज्यादा आयकर अधिकारी नांदेड़ पहुंचे. आयकर विभाग ने नांदेड़ में अली भाई टावर नाम की बिल्डिंग में भंडारी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर में जाकर तलाशी शुरू की. मालूम हो कि आयकर विभाग भविष्य में भी विशेष जानकारी के आधार पर इसी तरह से सर्च ऑपरेशन जारी रखेगा.

तेलंगाना में सरकारी अधिकारी के घर से करीब 100 करोड़ बरामद, तलाश अभी भी जारी
एंटी करप्शन विंग ने बुधवार सुबह 5 बजे से कुल 20 जगहों पर सर्चिंग शुरू की. बालकृष्ण के घर और दफ्तर के अलावा उनके रिश्तेदारों के घरों की भी तलाशी ली गई. तेलंगाना पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने तेलंगाना में एक सरकारी अधिकारी के घर से करीब 100 करोड़ रुपये बरामद किए हैं. सरकारी अधिकारी का नाम शिव बालकृष्ण है. वह वर्तमान में तेलंगाना हाउसिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी (TSRERA) के सचिव और हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के पूर्व निदेशक हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी विंग ने आरोप लगाया है कि उन्होंने करोड़ों रुपये के बदले विभिन्न हाउसिंग संस्थाओं को परमिट दिए हैं. कई जगहों पर अभी भी तलाश जारी है. एंटी करप्शन विंग ने बुधवार सुबह 5 बजे से कुल 20 जगहों पर सर्चिंग शुरू की. बालकृष्ण के घर और दफ्तर के अलावा उनके रिश्तेदारों के घरों की भी तलाशी ली गई. भ्रष्टाचार निरोधी विंग ने कहा, बालकृष्ण के पास बहुत सारी संपत्ति है जो आय के अनुरूप नहीं है। एसीबी अधिकारियों ने एचएमडीए और रेरा के कार्यालयों में भी तलाशी ली। बालकृष्ण के खिलाफ बेहिसाब संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है. एसीबी को संदेह है कि उन्होंने अपने सरकारी पद का इस्तेमाल भारी संपत्ति अर्जित करने के लिए किया।

तलाशी के दौरान सोना, फ्लैट, बैंक जमा और बेनामी होल्डिंग्स सहित 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति मिली। जब्त किए गए सामानों में 40 लाख रुपये नकद, दो किलोग्राम सोने के आभूषण, 60 महंगी घड़ियां, संपत्ति के दस्तावेज और बैंक जमा पर्चियां शामिल हैं। इसके अलावा 14 फोन, 10 लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त किए गए।

एसीबी अब बालकृष्ण के बैंक लॉकर और अन्य अघोषित संपत्तियों की तलाश कर रही है। जांच की गति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह खोज प्रक्रिया गुरुवार सुबह तक जारी रहेगी.

संदेशखाली में दिनभर चली तलाशी के दौरान सीबीआई ने हथियार और कारतूस बरामद किये. बरामद हथियारों में विदेशी आग्नेयास्त्रों के साथ-साथ पुलिस रिवाल्वर भी शामिल हैं। इसके अलावा कारतूस, देशी बम भी बरामद किये गये. सीबीआई की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में तस्वीरों के साथ दावा किया गया है कि हथियारों के साथ कुछ दस्तावेज भी बरामद किये गये हैं. जेल में बंद तृणमूल नेता शाहजहां का सचित्र पहचान पत्र भी है. दिन भर की तलाशी के बाद रात 9.54 बजे सीबीआई और एनएसजी संदेशखाली से रवाना हुईं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर संदेशखाली मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. 5 जनवरी को दापूत इलाके में तृणमूल नेता शाहजहां के घर पर तलाशी के दौरान ईडी के अधिकारियों को नेता के समर्थकों से मारपीट का शिकार होना पड़ा था. ईडी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात केंद्रीय सेना के जवानों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। ईडी अधिकारियों का सामान भी खो गया है. कुछ दिनों की शांति के बाद, संदेशखाली की महिलाएं फरवरी की शुरुआत में क्षेत्र में कुछ तृणमूल नेताओं के ‘अत्याचार’ के विरोध में सड़कों पर उतर आईं। इस आंदोलन से राज्य में अराजकता फैल गयी। राज्य पुलिस ने शाहजहाँ को मिनाखान से गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आंदोलन कम नहीं हुआ। इसी सिलसिले में देश में दूसरे चरण के लोकसभा चुनाव के दिन ईडी के खोए हुए सामान को ढूंढने के लिए सीबीआई ने संदेशखाली में तलाशी अभियान चलाया. दिन भर तलाश जारी रही. हथियार, पहचान पत्र, दस्तावेज बरामद किये गये।