Sunday, March 8, 2026
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देश की जनता से क्या बोली सोनिया गांधी?

हाल ही में सोनिया गांधी ने देश की जनता से एक अपील की है! देश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के बीच कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने देश की जनता से एक भावुक अपील की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर देश की जनता से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। इस दौरान वह बीजेपी पर भी हमलावर नजर आईं। उन्होंने कहा, ‘मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।भ्रष्टाचार में अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाए और आजीविका और नौकरियों को उस गति से नष्ट कर दिया जो भारत ने पहले कभी नहीं देखा था।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।” सोनिया ने आगे कहा, ‘ऐसा माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीयत की वजह से है। उनका ध्यान किसी भी कीमत पर सिर्फ सत्ता हासिल करने के पीछे है। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए नफरत को बढ़ावा दिया है।’ आज मैं एक बार फिर आपका समर्थन मांगती हूं। हमारे ‘न्याय पत्र’ गारंटी का उद्देश्य हमारे देश को एकजुट करना और भारत के गरीबों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों के लिए काम करना है।

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।’कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और मैंने हमेशा सभी की तरक्की और वंचितों को न्याय दिलाने के साथ ही देश को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा न्याय पत्र और हमारी गारंटियों का मकसद भी देश को एकजुट रखना और गरीबों, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों को ताकत देना है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए समर्पित है। सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए कांग्रेस को वोट दें और साथ मिलकर मजबूत और एकजुट भारत बनाएं।’

सोनिया गांधी ने कहा, ‘हमारा संविधान और लोकतंत्र के खतरे में होने, गरीबों को पीछे छोड़ दिए जाने और हमारे समाज के ताने-बाने को कमजोर किए जाने का दृश्य मुझे पीड़ा से भर देता है।’ उन्होंने कहा, ‘आज मैं एक बार फिर आपका समर्थन मांगती हूं। हमारे ‘न्याय पत्र’ (घोषणापत्र) और गारंटी का उद्देश्य हमारे देश को एकजुट करना और भारत के गरीबों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और वंचित समुदायों के लिए काम करना है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के वीडियो पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पलटवार किया है। राजीव चंद्रशेखर ने कहा, ‘यह बहुत अजीब वीडियो है क्योंकि वह एक महिला हैं, जिन्होंने 2004 से 2014 के बीच दस साल तक यूपीए सरकार चलाई। उन राज्यों में आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं।यूपीए सरकार ने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया , भ्रष्टाचार में अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाए और आजीविका और नौकरियों को उस गति से नष्ट कर दिया जो भारत ने पहले कभी नहीं देखा था।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा मेरे प्यारे भाइयों और बहनों.. आज देश के हर कोने में युवाओं में बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार, दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनॉरिटी भयंकर भेदभाव झेल रहे हैं।’ सोनिया ने आगे कहा, ‘ऐसा माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीयत की वजह से है। उनका ध्यान किसी भी कीमत पर सिर्फ सत्ता हासिल करने के पीछे है। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए नफरत को बढ़ावा दिया है।’

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और मैंने हमेशा सभी की तरक्की और वंचितों को न्याय दिलाने के साथ ही देश को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया है।कि वह कहती है कि बेरोजगारी है। वह फिर से झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि वह जानती है कि केवल वे राज्य हैं जहां I.N.D.I.A गठबंधन है, वहां सबसे अधिक बेरोजगारी है। गठबंधन शासित राज्यों में सबसे ज्यादा खाद्य कीमतें और मुद्रास्फीति हैं। उन राज्यों में आज भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह संविधान की रक्षा की बात करती हैं, यह अच्छी तरह से जानते हुए भी कि पिछले दस वर्षों में , भारत दुनिया के लिए लोकतंत्र के प्रतीकों में से एक बन गया है।

क्या मुस्लिम आरक्षण विवाद पर बीजेपी को नीचे देखना होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मुस्लिम आरक्षण विवाद पर बीजेपी को नीचे देखना होगा या नहीं! आज लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान भी संपन्न हो गया है। अब चार चरण की वोटिंग शेष बची है, उसके बाद देश में नई सरकार का गठन होगा। लेकिन इससे पहले सियासी माहौल काफी गर्म है। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, राजनीतिक दल एक-दूसरे पर और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। वहीं सियासी दल एक के बाद एक दांव चलकर अपने विरोधियों के हौसलों को पस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। उसी क्रम में आज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत करके देश में सियासी भूचाल ला दिया। पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता लालू यादव के बयान की आलोचना करने में जुट गए। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने तीसरे चरण की वोटिंग समाप्त होने से पहले मुस्लिम आरक्षण वाले बयान पर यू-टर्न लेकर सबको चौंका दिया। लालू यादव भले ही मुस्लिम आरक्षण वाले बयान से पलट गए हों लेकिन इसके पीछे लालू यादव ने बड़ा दांव खेला है। आइए लालू के इस सियासी पैंतरे को समझते हैं। लालू के बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के अन्य चरणों में विपक्षी गठबंधन पुरजोर तरीके से बीजेपी को टक्कर देना चाहता है। यही कारण है कि लालू यादव ने तीसरे चरण के मतदान के बीच मुस्लिम आरक्षण का दांव खेला और मतदान खत्म होने से पहले पलटी भी मार ली। लालू के बयान के पीछे सिर्फ बीजेपी को मुस्लिम विरोधी जाहिर करने की मंशा हो सकती है। दरअसल लालू के बयान के बाद बीजेपी नेता खुलकर मुस्लिम आरक्षण के विरोध में उतर आए। राजनीतिक जानकार सोचते हैं कि लालू इस बयान के जरिए शेष चरणों में होने वाली वोटिंग में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि लालू के मुस्लिम आरक्षण वाले बयान से बीजेपी को कुछ खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन इंडिया गठबंधन के नेताओं के पास बीजेपी को मुस्लिम विरोधी बताने का एक और मौका मिल गया है।

हाल ही में राजस्थान के बांसवाड़ा में देश की संपत्ति मुस्लिमों में बांटने को लेकर पीएम मोदी के दिए बयान की कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने आलोचना की थी। बयान के अगले दिन कांग्रेस नेताओं का एक दल चुनाव आयोग के पास पहुंचा और मोदी के भाषण को लेकर आयोग के सामने अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। इस मामले ने बहुत तूल पकड़ा। विपक्षी दलों ने बीजेपी को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की। पीएम नरेंद्र मोदी ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की मुसलमानों को आरक्षण के बारे में टिप्पणी पर कहा, ‘विपक्षी गठबंधन खतरनाक खेल खेल रहा है।उन्होंने दावा किया कि विपक्ष अनुसचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने की योजना बना रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता है लेकिन इंडिया गठबंधन संविधान को बदलना चाहता है।’

राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत करने पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा हमला बोला है। बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लालू यादव को दो टूक कहा है कि किसी भी कीमत पर मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लालू यादव कितना भी प्रयास कर लें, लेकिन मुसलमानों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जाएगा। अति पिछड़े समाज, दलित समाज, पिछड़े समाज और गरीब सवर्ण समाज के लोगों का आरक्षण किसी भी कीमत पर भाजपा खत्म नहीं होने देगी।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मुस्लिम आरक्षण पर लालू प्रसाद की टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ता में आने पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ संविधान के मौलिक ढांचे में बदलाव करके अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण प्रदान करेगा। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) के खिलाफ बीजेपी का आरोप राजद अध्यक्ष के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मुसलमानों को आरक्षण का लाभ देने के पक्ष में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मुसलमानों को पूर्ण आरक्षण दिया जाना चाहिए। उनके द्वारा अपने वक्तव्य में प्रयुक्त यह शब्द ‘पूरा का पूरा’ बहुत गंभीर है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि वे (इंडिया गठबंधन) एससी, एसटी और ओबीसी के हिस्से से मुसलमानों को आरक्षण प्रदान करना चाहते हैं।’ उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के हिस्से से मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव की योजना के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ओर से जताया जा रहा संदेह प्रसाद के बयान से सही साबित होता है।

मुसलमानों को आरक्षण देने के पक्ष में लालू यादव के बयान की आलोचना करते हुए जनता दल (यूनाइटेड) ने मंगलवार को कहा कि उनका रुख संविधान की मूल भावना के साथ-साथ मंडल आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लंघन है। जद (यू) प्रवक्ता के. सी. त्यागी ने कहा कि इस तरह का बयान सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का लाभ ले रहे पिछड़े वर्गों के खिलाफ साजिश के समान है। उन्होंने कहा, ‘प्रसाद का बयान निंदनीय है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री प्रसाद जैसे शख्स जो मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए आंदोलन का हिस्सा रहे, ऐसा बयान दे रहे हैं। त्यागी ने कहा कि आयोग ने हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमानों के सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सिफारिश की थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आरक्षण का लाभ देने के लिए धर्म कभी भी मानदंड नहीं हो सकता।

लालू प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि वह मुसलमानों को आरक्षण का लाभ देने के पक्षधर हैं। लालू ने मुसलमानों को आरक्षण का लाभ दिए जाने की वकालत करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संविधान और लोकतंत्र को खत्म करके आरक्षण समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। यह बात जनता के जेहन में आ चुकी है।’

राम मंदिर के लिए क्या बोले रामगोपाल यादव?

हाल ही में विपक्षी नेता रामगोपाल यादव ने राम मंदिर के लिए एक बयान दे दिया है! देश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के बीच दो दिग्गज नेताओं के बयानों से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। पहला बयान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का ‘मुस्लिम आरक्षण’ की मांग से जुड़ा है। हालांकि वह इस बयान से पलट गए। वहीं दूसरा बयान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव का है जिन्होंने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर का नक्शा और वास्तु ठीक नहीं है। मंदिर ऐसे नहीं बनता। वो मंदिर बेकार है।’ इन दोनों बयानों साफ है कि विपक्षी दल लोकसभा चुनाव के अन्य चरणों में होने वाले मतदान में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन रामगोपाल यादव का बयान विपक्षी दलों की गले की हड्डी बन सकता है। दरअसल यूपी की जिन सीटों पर अभी मतदान होना है। वहां बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण को लेकर अच्छा खासा माहौल बना रखा है। ऐसे में रामगोपाल यादव का राम मंदिर को लेकर दिया गया विवादित बयान विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचा सकता है। चौथे चरण में प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। 13 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण में अकबरपुर, बहराइच, धौराहरा, इटावा, खीरी, फर्रूखाबाद, हरदोई ,कन्नौज, कानपुर, मिश्रिख, शाहजहांपुर, सीतापुर और उन्नाव सीट पर चुनाव होना है। इन सीटों पर मुस्लिम से ज्यादा हिंदू वोट बैंक ज्यादा है।राम मंदिर पर सपा नेता का विवादित बयान इंडिया गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है।

सपा नेता राम गोपाल यादव के ‘राम मंदिर’ को बेकार बताने पर भाजपा ने बड़ा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बयान की निंदा की है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इंडी गठबंधन की सहयोगी सपा के नेता रामगोपाल यादव ने राम मंदिर को ‘बेकार’ बताया है। अगर राम मंदिर बेकार है तो क्या सपा का बनवाया गया गाजियाबाद का हज हाउस, आगरा का मुगल गार्डन और उत्तर प्रदेश के हर जिले में बनवाए गए कब्रिस्तान अच्छे थे? उन्होंने कहा कि सपा नेताओं के अनुसार कब्रिस्तान अच्छा था, लेकिन राम मंदिर बेकार है। सपा के लिए मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, अबू सलेम और छोटा शकील के लिए कुख्यात तथा अपराध को सैद्धांतिक स्वीकार्यता देने वाला उत्तर प्रदेश अच्छा था, लेकिन अयोध्या, काशी, प्रयागराज, कुशीनगर के लिए प्रख्यात और उभरता हुआ उत्तर प्रदेश बेकार है। इनके अनुसार राम नवमी के दिन कठोर वैज्ञानिक गणनाओं से हुआ सूर्य तिलक, श्रीराम मंदिर के उद्घाटन के समय एक लाख करोड़ का व्यापार और अयोध्या में बना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बेकार है। इससे ये भी स्पष्ट हो गया है कि श्रीराम को काल्पनिक कहने से लेकर प्रभु श्रीराम और भगवान शिव में लड़ाई करवाने वाले, द्वारका में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भगवान श्री कृष्ण की पूजा का उपहास उड़ाने वालों के लिए सब कुछ बेकार है।

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि राम मंदिर बेकार है। दरअसल, जब राम गोपाल यादव से पूछा गया कि वह अयोध्या में राम मंदिर में दर्शन के लिए क्यों नहीं गए तो उन्होंने कहा, ‘वह मंदिर बेकार का है। क्या मंदिर ऐसे ही बनाए जाते हैं? पुराने मंदिर देखें, वे इस तरह नहीं बनाए गए। दक्षिण से उत्तर के मंदिरों को देखें। इस मंदिर का नक्शा उचित नहीं है और वास्तु के अनुरूप नहीं है।’ यादव के इस बयान पर CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामगोपाल यादव का बयान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ ‘इंडी’ गठबंधन की वास्तविकता को प्रदर्शित करता है। ये लोग वोट बैंक के लिए न केवल भारत की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि प्रभु श्रीराम की ईश्वरीय सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जिसने भी ईश्वरीय सत्ता को चुनौती दी है, उसकी दुर्गति हुई है। रामगोपाल यादव का बयान सनातन आस्था के साथ खिलवाड़, कोटि-कोटि राम भक्तों का अपमान है। जिन लोगों ने पूरा जीवन राम मंदिर के लिए समर्पित किया है, उनकी आस्था पर कुठाराघात है। भारतीय समाज इसे कतई स्वीकार नहीं कर सकता। यह तुष्टिकरण की नीति पर चलकर वोट बैंक को बचाए रखने की कवायद है।

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत मंगलवार सुबह सात बजे से मतदान जारी है। इसी बीच सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर विवादित बयान दिया है। रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राम जी के दर्शन वो रोज करते हैं। उन्होंने अयोध्या में दर्शन के लिए जाने के बारे कहा कि राम मंदिर का नक्शा और वास्तु ठीक नहीं है। मंदिर ऐसे नहीं बनता। वो मंदिर बेकार है।उन्होंने कहा कि पुराने मंदिर देख लीजिए, कैसे बने हैं। दक्षिण से लेकर उत्तर तक। नक्शा ठीक से नहीं बना है। मंदिर को वास्तु के लिहाज से ठीक नहीं बनाया गया।

रामगोपाल यादव के विवादित बयान पर अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने कहा है कि जो राम को मानता है वह सबका सम्मान करेगा, सबको न्याय देने की बात करेगा। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर वोट मांगना पूरी तरह गलत है। डिंपल यादव ने आगे कहा, ‘लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के दौरान बीजेपी के प्रत्याशी और कार्यकर्ता बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं होने वाली। जो अभी सत्ता में हैं, वो असुर प्रवृत्ति के लोग हैं, तीसरे चरण के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का पत्ता साफ होने वाला है। संविधान खत्म करने की साजिश है। मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की बंपर जीत होने जा रही है, इसलिए भाजपा के लोग बौखलाए हुए हैं।’

क्या मायावती की जगह संभाल पाएंगे आकाश आनंद?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आकाश आनंद मायावती की जगह संभाल पाएंगे या नहीं!बीते साल बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन मंगलवार देर रात मायावती ने इन दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से आकाश आनंद को मुक्त कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। यूपी में ताबड़तोड़ 10 रैलियां करके आकाश आनंद चर्चा में आए थे। उधर मायावती के इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव के बीच मायावती का फैसला काफी चौंकाने वाला है। अचानक मायावती ने इतना बड़ा फैसला क्यों किया? इस फैसले के पीछे असली वजह क्या है? ऐसे कई सवाल खड़े हो गए हैं। आइए समझने को कोशिश करते हैं कि मायावती को अपने भतीजे आकाश आनंद में अचानक परिपक्वता मैचुरिटी की कमी क्यों लगी। आकाश आनंद मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। मायावती ने आकाश आनंद को हटाने की सूचना एक्स पर दी। मायावती ने आकाश आनंद में परिपक्वता (मैचुरिटी) का अभाव बताया है। आकाश के पिता आनंद कुमार अपनी जिम्मेदारी पहले की तरह निभाते रहेंगे। मायावती ने तर्क दिया है कि बीएसपी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के आत्म सम्मान और स्वाभिमान को बनाए रखने और सामाजिक परिवर्तन के लिए काम कर रही है। मायावती ने यह भी कहा है कि बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए बसपा हर तरह का त्याग और कुर्बानी देने को तैयार है।

सीतापुर में एक चुनावी रैली में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद और चार अन्य के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जिला प्रशासन द्वारा दिन की शुरुआत में रैली में आनन्‍द के भाषण का स्वत: संज्ञान लेने के बाद यह कार्रवाई की गई। बसपा नेता ने अपने भाषण में कहा था, ‘यह सरकार बुलडोजर सरकार और गद्दारों की सरकार है। जो पार्टी अपने युवाओं को भूखा छोड़ती है और बुजुर्गों को गुलाम बनाती है वह आतंकवादी सरकार है।’ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बसपा ने बिना कोई कारण बताए पिछले दिनों आकाश आनन्द की सभी प्रस्तावित रैलियों को स्थगित कर दिया था। आकाश आनंद ने 6 अप्रैल को नगीना लोकसभा सीट से अपनी पार्टी का अभियान शुरू किया था। बाद में, उन्होंने आगरा, बुलंदशहर, मथुरा, वाराणसी, गोरखपुर, अंबेडकर नगर, आजमगढ़ और कौशांबी सहित पश्चिम और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई रैलियों को संबोधित किया।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस समेत कुछ अहम विपक्षी दलों ने बीते साल इंडिया गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इंडिया गठबंधन में अधिकांश राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। लेकिन बीएसपी ने इंडिया गठबंधन से आखिर तक दूरी बनाई रखी। साथ ही एनडीए में शामिल होने से भी इनकार किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मायावती एनडीए और इंडिया एलायंस के बीच बीएसपी को स्थिर रखकर आगे बढ़ने का प्रयास कर रही थीं। मायावती ने कभी भी बीजेपी के खिलाफ मुखर होकर कोई बयान नहीं दिया। वहीं इस बीच बीएसपी के इंडिया एलायंस में जाने की अटकलें भी बीच-बीच में तेज होती रहीं। मायावती बैलेंस पॉलिटिक्स करके हवा का रुख भांपने की कोशिश में लगी थीं। लेकिन इस बीच आकाश आनंद की एंट्री होती है और वह बीएसपी की रैलियों में बीजेपी के खिलाफ मुखर हो जाते हैं। आकाश आनंद का बीजेपी के खिलाफ तीखा रुख मायावती की रणनीति को प्रभावित कर रहा था। आकाश आनंद बीजेपी का स्टैंड क्लीयर करके मायावती की रणनीति पर पानी फेरने लगे थे। शायद यही वजह है कि मायावती ने आकाश आनंद को पूर्ण परिपक्व न होने तक अहम पदों की जिम्मेदारी से हटा दिया है।

आकाश आनंद बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे हैं। आकाश आनंद 28 साल के हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा नोएडा में हुई और फिर लंदन से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। बीते साल मार्च में मायावती ने उनकी शादी बहुत धूमधाम से की थी। पार्टी के ही वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा उनकी पत्नी हैं। आकाश पहली बार 2017 में सार्वजनिक मंचों पर नजर आए। सबसे पहली बार उनको मायावती के साथ सहारनपुर में एक सभा के दौरान देखा गया। उसके बाद मायावती ने लखनऊ में एक बैठक के दौरान उनका परिचय कराया था। इसके बाद से आकाश आनंद का कद पार्टी में धीरे-धीरे बढ़ता गया।

मनोज बाजपेयी ने खुलासा किया कि सुशांत सिंह राजपूत कुछ फर्जी लेखों से परेशान थे.

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अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से 10 दिन पहले उनसे बात की थी। तभी उन्हें एहसास हुआ कि सुशांत किसी बात को लेकर टूट रहे हैं! हाल ही में एक इंटरव्यू में मनोज कहते हैं, ”सुशांत कुछ खबरों को लेकर काफी परेशान थे। इन सभी खबरों के पीछे कोई सच्चाई नहीं थी. वह बहुत अच्छे इंसान थे. और एक अच्छे इंसान होने के नाते उन्हें ये सब खबरें पढ़कर बुरा लगा. वह अक्सर पूछते थे कि उन्हें क्या करना चाहिए। मैंने हमेशा उससे कहा कि इस बारे में ज्यादा मत सोचो।”

मनोज ने कहा कि उन बेबुनियाद खबरों के बारे में उन्होंने आखिरी बार सुशांत से बात की थी. एक्टर ने कहा, ”इन सभी बेबुनियाद खबरों को पढ़कर मैं अलग तरह से रिएक्ट करता हूं.” मनोज ने कहा, उन्होंने ये सारी खबरें लिखने वालों को समय पर जवाब दिया. लेकिन ऐसी खबरें पढ़कर सुशांत काफी टूट गए थे। मनोज कहते हैं, ”मुझसे 10 दिन बात करने के बाद सुशांत चला गया! मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि सुशांत और इरफान अब नहीं रहे।’ वे बहुत जल्दी इस दुनिया से चले गये. उनका वास्तविक कार्य समय अभी समाप्त नहीं हुआ है!”

14 जून, 2020 को सुशांत की मृत्यु हो गई। मुंबई पुलिस ने जानकारी दी कि एक्टर ने आत्महत्या की है. इस घटना से बॉलीवुड में हंगामा मच गया. यह घटना आत्महत्या थी या हत्या, इस पर विवाद चल रहा है. सुशांत का शव मुंबई स्थित उनके फ्लैट से बरामद किया गया था. उस फ्लैट में वह एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती के साथ रहते थे. घटना में नशाखोरी जैसे मामले भी सामने आते हैं. ध्यान दें कि सुशांत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ (2020) थी। ये फिल्म एक्टर के निधन के बाद रिलीज हुई थी. संदीप सिंह एक प्रोड्यूसर हैं जो कभी सुशांत सिंह राजपूत, अंकिता लोखंडे और मौनी रॉय के करीबी थे। हाल ही में संदीप हुड्डा अभिनीत फिल्म ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ के बाद प्रैक्टिस में वापस आ गए हैं। 2020 में सुशांत सिंह की अचानक मौत के बाद संदीप को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं। उन्होंने एक बार सुशांत और अंकिता के साथ काफी लंबा वक्त बिताया था। यह कहना अच्छा है, वे एक समय में अपने फ्लैट में रहते थे। स्वाभाविक तौर पर उन्हें लेकर तरह-तरह की अटकलें सामने आने लगी हैं. उस वक्त मौनी अपने दोस्त से दूर हो गईं! सभी संपर्क काट दें. इस बार संदीप ने मौनी के खिलाफ अपना मुंह खोला।

संदीप द्वारा निर्देशित पहली फिल्म ‘सफ़ेद’ थी। उन्होंने अपनी दो करीबी गर्लफ्रेंड मौनी और अंकिता को इस फिल्म के लिए प्रपोज किया था। मौनी ने स्क्रिप्ट पढ़ने में दिलचस्पी दिखाई. हालांकि, सुशांत सिंह की मौत के बाद संदीप का नाम विवादों में आया या एक्ट्रेस बदल गईं। उन्होंने सबसे पहले संदीप को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो किया। मौनी ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया। यहां तक ​​कि उनकी शादी में संदीप को भी नहीं बुलाया गया था.

हाल ही में एक इंटरव्यू में संदीप ने कहा, ”मैंने उनके साथ काफी वक्त बिताया. मैं किसी भी बड़े डायरेक्टर के साथ जाऊंगी. मैं उनके दूल्हे सूरज नांबियार को उनकी शादी से बहुत पहले से जानता हूं। लेकिन जिसने सुशांत सिंह राजपूत को लेकर हुए विवाद में मेरा नाम शामिल किया, उसने सबसे पहले मुझसे रिश्ता तोड़ा था.” पिछले साल की विवादास्पद फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की बदौलत अदा शर्मा अब देश में सबसे चर्चित नामों में से एक हैं। एक्ट्रेस न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर हैं. अपनी छवि के अलावा वह एक और वजह से प्रैक्टिस कर रहे हैं. सुनने में आ रहा है कि एक्ट्रेस ने मुंबई में चार कमरों का एक आलीशान फ्लैट खरीदा है। लेकिन वह फ्लैट नहीं, वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का फ्लैट था। जून 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से यह फ्लैट लगभग खाली पड़ा था। एक्टर का फ्लैट मुंबई के संभ्रांत बांद्रा इलाके के जॉगर्स पार्क में था। हालांकि सुशांत वहां किराएदार के तौर पर रहते थे लेकिन उन्होंने घर के हर कोने को अपने हाथों से सजाया था। उस वक्त 3600 वर्ग फुट के सी फेसिंग फ्लैट के लिए सुशांत करीब चार लाख रुपये चुका रहे थे। इस बार सुनने में आया है कि अदा ने फ्लैट खरीद लिया है! सुशांत की मौत के बाद से यह फ्लैट खाली पड़ा हुआ था। हालांकि, कभी-कभी ऐसी खबरें आती हैं कि किसी विदेशी ने सुशांत का फ्लैट किराए पर लिया है। लेकिन अब पता चला है कि एक्ट्रेस ने मोन ब्लैंक नाम का फ्लैट करीब 15 करोड़ रुपये में खरीदा है.

इजरायली सेना द्वारा हमास के खिलाफ उत्तरी गाजा के जबालिया पर आक्रमण के दौरान भीषण झड़पें हुईं.

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गाजा में इजरायली हमले में 35 हजार की मौत! जान बचाने के लिए निकले राफा ढाई लाख फिलिस्तीनियों राफा के साथ इजरायली सेना ने रविवार रात से गाजा के उत्तरी हिस्से जबालिया में आजादी समर्थक फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह हमास के डेरे पर ऑपरेशन शुरू कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी अपील को खारिज करते हुए दक्षिणी शहर राफा पर कब्जा करने का अभियान पिछले हफ्ते शुरू हुआ। इस बार इजरायली सेना ने गाजा के उत्तरी हिस्से जबालिया में आजादी समर्थक फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह हमास के डेरे के खिलाफ अभियान चलाया.

पिछले 24 घंटों में इज़रायली सेना के छियासी हमलों में कम से कम 40 फ़िलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं। परिणामस्वरूप, पश्चिम एशिया के मीडिया आउटलेट अल जज़ीरा के अनुसार, पिछले सात महीनों में इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या 35 हजार है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि कम से कम 260,000 फिलिस्तीनी शरणार्थी बनकर भाग गए हैं इजरायली बमों और गोलाबारी से बचने के लिए पूर्वी राफा में शिविर। इनमें से अधिकतर मिस्र की सीमा से लगे इलाकों में जमा हुए हैं. पिछले साल 7 अक्टूबर से, उत्तरी और मध्य गाजा पर इजरायली हमलों से विस्थापित हुए 100,000 से अधिक आम फिलिस्तीनियों ने राफा में विभिन्न शरणार्थी शिविरों में शरण ली है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने पहले आशंका व्यक्त की थी कि अगर इजरायली सेना ने राफा पर कब्जा करने के लिए अपना अभियान शुरू किया तो कई नागरिक मारे जाएंगे। लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना ऑपरेशन का आदेश दे दिया. 6 मई से, इजरायली सेना ने गाजा पट्टी के दक्षिण में राफा में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अंतिम गंतव्य पर जमीनी हमला शुरू कर दिया है। इसके विरोध में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इजरायल को हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति रोकने की घोषणा की है। इज़रायली सेना ने रफ़ा सहित गाजा पट्टी के बड़े क्षेत्रों पर बमबारी शुरू कर दी। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मध्य गाजा पट्टी के दीर अल-बाला शहर में आज कम से कम 21 लोग मारे गए। मृतकों में दो डॉक्टर भी शामिल हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि वे स्थानीय फ़िलिस्तीनी थे या किसी राहत संगठन के साथ यहाँ आए थे। आज हुए बम विस्फोट में कई लोग घायल हो गए. उन्हें स्थानीय अल अक्सा शहीद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई की हालत गंभीर है. जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

इलाके में काम कर रहे पत्रकारों, डॉक्टरों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रविवार सुबह से ही इजरायली सेना ने भारी हमला करना शुरू कर दिया. एक तरफ बमबारी तो दूसरी तरफ इजरायली सेना ने हेलिकॉप्टर से लगातार फायरिंग की. अधिकांश फ़िलिस्तीनी पहले ही इस क्षेत्र को छोड़ चुके हैं और इज़राइल की धमकी के तहत दक्षिण की ओर भाग गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा कि यह इलाका एक तरफ से समुद्र से और तीन तरफ से इजरायली सेना से घिरा हुआ है. नतीजतन राहत भेजना संभव नहीं हो पा रहा है. इस स्थिति को संयुक्त राष्ट्र द्वारा “अभूतपूर्व मानवीय संकट” के रूप में वर्णित किया गया है। इजरायली सेना ने दक्षिण में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अंतिम गंतव्य राफा शहर पर कब्जा करने के लिए जमीनी अभियान का अंतिम चरण शुरू कर दिया है। गाज़ा पट्टी। तेल अवीव का दावा है कि इज़रायली सेना ने पहले ही रफ़ा क्षेत्र के आधे हिस्से को घेर लिया है, जिसमें वह सड़क भी शामिल है जो इसे पूर्व और पश्चिम में गाजा के बाकी हिस्सों से जोड़ती है।

पश्चिम एशिया के कई मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि लाखों आम फिलिस्तीनी नागरिक इजरायली बमों और गोलाबारी से अपनी जान बचाने के लिए राफा के विभिन्न शरणार्थी शिविरों से भाग गए। उन्होंने मिस्र की सीमा से लगे रेगिस्तानी इलाके में अस्थायी तंबुओं में शरण ले रखी है. बेहद गंदगी भरे माहौल में खाने-पीने की कमी के कारण इनकी मौत होने का डर है, ऐसे में अमेरिका ने शुक्रवार को एक बार फिर इजरायल को चेतावनी दी है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने टिप्पणी की, “इस तरह की सैन्य कार्रवाई से हमास का हाथ ही मजबूत होगा।” अमेरिका का नहीं।” राफा के विभिन्न शरणार्थी शिविर अब पिछले सात महीनों में उत्तरी और मध्य गाजा पर इजरायली हमलों से विस्थापित हुए 10 लाख से अधिक आम फिलिस्तीनियों का घर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समेत विभिन्न मानवाधिकार संगठन पहले ही आशंका जता चुके हैं कि अगर वहां लड़ाई शुरू हुई तो कई नागरिकों के मरने का खतरा है.

किशन रेड्डी का कहना है, ‘सत्ता में आने पर कांग्रेस अनुच्छेद 370, तीन तलाक वापस लाएगी’.

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सत्ता में आई तो कश्मीर में 370 लौटा देगी कांग्रेस‘, मोदी को अपने ही मंत्री की ‘चुनौती’ पर शक? मोदी के मंत्री किसान रेड्डी ने आरोप लगाया है कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और तीन तलाक वापस लाएगी और मुसलमानों के लिए आरक्षण भी लाएगी। लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर कांग्रेस को खुली चुनौती दी है. कुछ हफ्ते पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ”अगर कांग्रेस समेत विपक्ष सत्ता में है तो उन्हें अनुच्छेद 370 वापस लाने के बारे में बात करनी चाहिए.” लेकिन उनके कैबिनेट सदस्य जी किसान रेड्डी ने सीधे तौर पर बताया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन केंद्र में सत्ता संभालने पर ही अनुच्छेद 370 वापस लाएंगे।

तेलंगाना बीजेपी नेता और केंद्रीय पर्यटन मंत्री किसन ने द प्रिंट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो वे अनुच्छेद 370 और तीन तलाक वापस लाएंगे। यह मुसलमानों के लिए आरक्षण भी पेश करेगा। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले ही मुस्लिमों के लिए आरक्षण बढ़ा चुकी है. कांग्रेस का लक्ष्य मुसलमानों को खुश करना है. हालाँकि, हमारा नेतृत्व उस रणनीति का मुकाबला करने में सक्षम है।” वहां सोमवार को चुनाव हुए थे. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के मुताबिक, केंद्र की बीजेपी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था. साथ ही, जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों-जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। कश्मीर घाटी की दो प्रमुख पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के साथ-साथ कांग्रेस, तृणमूल और लेफ्ट ने आपत्ति जताई.

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल मार्च में श्रीनगर की अपनी पहली यात्रा में कांग्रेस समेत विपक्ष पर कश्मीर घाटी के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था. इसके बाद हाल ही में एक इंटरव्यू में मोदी ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर कांग्रेस में ताकत है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताएं कि अगर वे केंद्र में सत्ता में आए तो जम्मू-कश्मीर में 370 वापस लाएंगे।’ चंद्रबाबू नायडू ने घोषणा की है कि अगर वह राज्य में सत्ता में आते हैं तो मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षित करेंगे (आंध्र प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव हो रहे हैं)। लेकिन न तो मोदी और न ही किसी अन्य बीजेपी नेता ने सहयोगी पार्टी नेता के वादे पर कोई टिप्पणी की है.

विपक्ष का आरोप है कि 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के बाद स्थिति को प्रतिकूल समझकर मोदी समेत बीजेपी नेता तेजी से ध्रुवीकरण का कार्ड खेल रहे हैं. 21 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में बीजेपी की बैठक में मोदी ने कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहले कहा था कि देश की संपत्ति पर सबसे बड़ा हक मुसलमानों का है. इसीलिए कांग्रेस ने सर्वे कराने की योजना बनाई है. ताकि देशवासियों की मेहनत की कमाई को मुसलमानों और घुसपैठियों में बांटा जा सके.” बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि अगर कांग्रेस सत्ता में लौटी तो वह अनुसूचित जाति के कोटे में कटौती करेगी और मुसलमानों को आरक्षण देगी.

इसके बाद 22 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में उन्होंने कहा, ”कांग्रेस की नजर आपकी संपत्ति पर है. जब वे सत्ता में आएंगे तो माताओं-बहनों का मंगलसूत्र छीन लेंगे।’ आप जानते हैं कि आप इसे किसे देंगे।” 30 अप्रैल को, तेलंगाना और महाराष्ट्र में अभियान के दौरान, मोदी ने शिकायत की कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता पर कब्जा कर लेती है, तो वह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति और ओबीसी का आरक्षण छीन लेगी। उन्हें मुसलमानों को दे दो. तेलंगाना के ज़हीराबाद में उन्होंने कहा, “जब तक मैं जीवित हूं, मैं धर्म के आधार पर मुसलमानों को दलितों का आरक्षण नहीं दूंगा, नहीं दूंगा!” कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी, अपने कान खोलकर सुन लें।”

हालांकि मनमोहन ने प्रधानमंत्री रहते हुए कहा था, ”देश के संसाधनों में प्राथमिकता पिछड़े समुदाय के लिए है.” मोदी पहले ही लोकसभा चुनाव प्रचार में राम मंदिर को लेकर विपक्ष पर निशाना साध चुके हैं. पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश की धार लोकसभा सीट पर बीजेपी की बैठक में मोदी ने कहा था, ”कांग्रेस का लक्ष्य बाबरी मस्जिद का खुला ताला लाकर राम मंदिर में लटकाना है. बीजेपी को यह सुनिश्चित करने के लिए 400 सीटें जीतने की जरूरत है कि कांग्रेस बाबरी मस्जिद का ताला तोड़कर राम मंदिर में न लटका सके.

आखिर मुलायम सिंह यादव को क्यों याद कर बैठे पीएम मोदी?

हाल ही में पीएम मोदी ने मुलायम सिंह यादव को भी याद कर लिया है! उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव प्रचार मैदान में एक बार फिर नेताजी मुलायम सिंह यादव चर्चा में आ गए हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी ने संसद सत्र के आखिरी दिन सपा सांसद मुलायम सिंह यादव की ओर से दिए गए आशीर्वाद का खूब जिक्र किया था। अब एक बार फिर वे उस मुद्दे को उठाते दिख रहे हैं। 22 नवंबर 1939 को जन्मे मुलायम का निधन 10 अक्टूबर 2022 को करीब 82 साल की आयु में हो गया। इसके बाद यह पहला बड़ा चुनाव हो रहा है। इसमें पीएम मोदी ने उतरने के बाद सपा संस्थापक को अपने ही अंदाज में याद किया। पीएम मोदी ने इटावा की चुनावी जनसभा में 2019 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जब यहां आया हूं तो 2019 के आखिरी पार्लियामेंट सत्र की बात याद आ रही है। मुलायम सिंह जी भाषण देने के लिए खड़े हुए और कहा था कि मोदी जी आप तो दोबारा जीतकर आने वाले हैं। उनके ये वचन भाजपा के लिए आशीर्वाद बन गए। अब नेताजी तो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन संयोग देखिए कि उनके सगे भाई अब बीजेपी को जिताने की अपील कर रहे हैं। उनके दिल की बात जुबान पर आ ही गई। दरअसल, पीएम मोदी ने शिवपाल यादव की फिसली जुबान से भाजपा को जिताने की अपील का जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटावा की जनसभा में नेताजी को याद किया। इटावा, कन्नौज और मैनपुरी के लोगों को राम-राम करते हुए पीएम मोदी ने मुलायम की लोकसभा चुनाव 2019 से पहले संसद में कही बात याद दिलाई। पीएम मोदी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने संसद में कहा था कि मोदी जी आप दोबारा जीतकर आएंगे। 2019 में उनका आशीर्वाद मुझे लगा और मैं दोबारा प्रधानमंत्री बना। सशक्त भारत की नींव तैयार कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मोदी रहे या न रहे लेकिन देश हमेशा रहेगा। ये सपा-कांग्रेस वाले चुनाव लड़ रहे हैं अपने भविष्य के लिए। अपने बच्चों के लिए। लेकिन मोदी-योगी ने अपने आगे-पीछे कुछ रखा ही नहीं। हम खप रहे हैं आपके बच्चों के लिए। पीएम मोदी ने कहा कि हम खप रहे हैं आपके बच्चों का भविष्य बनाने के लिए। यही विकसित भारत का संकल्प है। विपक्ष पर बरसते हुए पीएम ने कहा, मोदी की विरासत, गरीबों का घर, शौचालय, मुफ्त अनाज, मुफ्त इलाज, राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। मोदी की विरासत सबकी है और सबके लिए है। शाही परिवार का ही बेटा पीएम-सीएम बनेका यह कुप्रथा चाय वाले ने तोड़ दी है। पीएम मोदी ने कहा, मोदी ने तुष्टीकरण की पोल खोली। पीएम मोदी ने शिवपाल यादव पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने संसद में जो कहा था, अब उनके भाई शिवपाल के मन की बात जुबां पर आ गई। तभी तो वह भाजपा को जिताने की अपील कर रहे हैं। इसीलिए मैं आपकी जमीन आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं।

शिवपाल यादव ने बदायूं की एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को भारी जीत दिलाने की अपील कर दी थी। बदायूं से समाजवादी पार्टी ने आदित्य यादव को चुनावी मैदान में उतारा है। वह शिवपाल यादव के बेटे हैं। ऐसे में बेटे के लिए आयोजित जनसभा में बीजेपी के लिए वोटिंग अपील का मुद्दा खूब गरमाया। हालांकि, शिवपाल ने कुछ ही क्षण में अपनी बातों को संभाला था। उन्होंने सपा उम्मीदवार को जीत दिलाने की अपील की। पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल यादव के बयान पर तंज कसा था। अब पीएम मोदी ने इस बयान के जरिए भाजपा की स्थिति यादवलैंड में मजबूत करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव अपने संबंध निभाने के लिए जाने जाते थे। 13 फरवरी 2019 को 16वीं लोकसभा के अंतिम सत्र में सदस्यों का विदाई भाषण चल रहा था। मुलायम सिंह यादव ने जब बोलना शुरू किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोबारा जीत की कामना कर दी। मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में कहा था कि प्रधानमंत्री जी ने सबको खुश करने का और जायज काम करने का हमेशा प्रयास किया है। सभी माननीय सदस्यों के बारे में मेरी कामना है कि जितने माननीय सदस्य हैं, सबके सब दोबारा फिर जीतकर आएं, ये हमारी इच्छा है। मैं तो यह भी चाहता हूं कि हमलोग तो इतने बहुमत से नहीं आ सकते हैं प्रधानमंत्रीजी आप फिर से प्रधानमंत्री बनें। मुलायम सिंह यादव के इतना कहते ही पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया था। उनका आभार जताया था। मुलायम सिंह यादव की इस कामना का जिक्र प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपने भाषण में भी किया था। उन्होंने कहा था कि आदरणीय मुलायम सिंह यादव का स्नेह हमारे लिए बहुत मूल्यवान हैं। उन्होंने अपने भाषण में दो बार मुलायम सिंह यादव का जिक्र किया था। अब 2024 के चुनावी मैदान में इस मुद्दे को पीएम फिर उठाते दिख रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी और सीनियर समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव की जुगलबंदी खूब दिखी थी। कई मौकों पर दोनों साथ-साथ नजर आए। प्रधानमंत्री बनने के बाद मुलायम के बड़े भाई के पोते तेज प्रताप यादव की शादी के दौरान साथ दिखे थे। इसके बाद यूपी में 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद पर योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण के बाद पीएम मोदी और मुलायम साथ दिखे थे। योगी के शपथ ग्रहण मंच पर मुलायम पीएम मोदी के कान में कुछ कहते नजर आए थे। राजनीतिक परिदृश्य में वह खबर और तस्वीर लंबे समय तक चर्चा में रही थी। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि मुलायम के चुनावी मैदान में उतरने तक यानी लोकसभा चुनाव 2019 तक पीएम मोदी ने कभी भी मैनपुरी लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार नहीं किया। इसे मुलायम के लिए उनके सम्मान के तौर पर बताया जाता रहा है।

क्या तीसरे चरण के चुनाव से पहले बदल गई यूपी की सियासत?

हाल ही में तीसरे चरण के चुनाव से पहले यूपी की सियासत बदल चुकी है! यूपी में मंगलवार को तीसरे चरण की 10 सीटों पर मतदान हुआ है। इसमें सैफई परिवार की नाक का सवाल बनी बदायूं, फिरोजाबाद और मैनपुरी की भी सीट शामिल है। तीसरे चरण के बाद चुनाव सेंट्रल, अवध और पूर्वांचल की ओर बढ़ जाएगा। इस बीच पिछले 24 से 48 घंटे में घटे घटनाक्रम यूपी में पक्ष और विपक्ष के सियासी समीकरण को सुलझा और उलझा दोनों रहे हैं। खास बात यह है कि मंगलवार को मैनपुरी और फिरोजाबाद में चुनाव है। मैनपुरी से डिंपल यादव और फिरोजाबाद से अक्षय यादव चुनाव लड़ रहे हैं। यहां ठाकुर वोटरों की प्रभावी तादाद हे। भाजपा ने दोनों ही सीटों पर ठाकुर उम्मीदवार दिए हैं। पहले दो चरणों के चुनाव में ठाकुरों की भाजपा से नाराजगी को मुद्दा बनाने वाली समाजवादी पार्टी अब खुद उनके निशाने पर आती दिख रही है। चौथे चरण में सपा मुखिया अखिलेश यादव की उम्मीदवारी वाली कन्नौज में चुनाव है, यहां भी विधुना सहित कुछ विधानसभाओं में ठाकुर वोटर प्रभावी हैं।

सैफई परिवार से एक और चेहरे की इस बार सियासत में सीधी एंट्री हुई है। बदायूं से शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार इस सीट से सपा को हार मिली थी। शिवपाल के भतीजे धर्मेंद्र यादव को भाजपा की संघमित्रा मौर्या ने हरा दिया था। बेटे आदित्य यादव को जिताने के लिए शिवपाल अपनी पूरी ताकत लगाए हुए हैं। इसी बीच, रविवार को उनके खिलाफ बदायूं के बसपा जिलाध्यक्ष ने पूर्व सीएम मायावती के अपमान का मुकदमा दर्ज करा दिया है। मतदान के दो दिन पहले हुए इस मुकदमे के जरिए माया के ‘अपमान’ का मुद्दा बसपा से अधिक भाजपा जमीन पर पहुंचाने में लगी है। बदायूं में लगभग 2 लाख दलित वोटर हैं, जिसे साधने में सपा और भाजपा दोनों जुटे हुए हैं।

राजनीतिक समीकरण दुरुस्त करने में केवल भाजपा ही नहीं लगी है। अखिलेश यादव ने भी मतदान के पहले चेहरा बदलने का दांव खेला है। सपा ने नरेश उत्तम पटेल की जगह प्रयागराज के प्रतापपुर के रहने वाले श्याम लाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। अभी वह प्रदेश उपाध्यक्ष थे। सपा नरेश उत्तम पटेल की फतेहपुर से उम्मीदवारी व चुनावी व्यस्तता का हवाला दे रही है लेकिन संकेत कुछ और पढ़े जा रहे हैं। अगले चरणों के चुनाव में पाल वोटर कुछ सीटों पर प्रभावी हैं। इसमें मंगलवार को मतदान वाली फिरोजाबाद, बदायूं, आगरा, मैनपुरी भी शामिल है। कन्नौज में भी पाल वोटरों की संख्या ठीक है जहां से खुद अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं। यहां चौथे चरण में मतदान होना है। प्रयागराज के वकील उमेश पाल की पत्नी जया पाल लगातार कन्नौज में सक्रिय हैं और सपा पर निशाना साध रही हैं। उमेश पाल की हत्या में अतीक अहमद के बेटे नामजद हैं। प्रयागराज के ही प्रतापपुर के रहने वाले श्यामलाल की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को ‘कवच’ के तौर पर देखा जा रहा है।

दो दिन पहले तक जौनपुर में भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बने धनजंय सिंह के भी मन बदलने की बात सामने आ रही है। ठाकुर-यादव बहुल जौनपुर से धनजंय की पत्नी श्रीकला से बसपा से पर्चा भरकर भाजपा के उम्मीदवार कृपाशंकर सिंह की मुसीबत बढ़ा दी थी। लेकिन, सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन बसपा ने श्रीकला का टिकट काटकर मौजूदा सांसद श्याम सिंह यादव को दे दिया है। बसपा का दावा है कि धनंजय की पत्नी ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। इसलिए, टिकट बदलना पड़ा। फिलहाल, इस फैसले से भाजपा की राह आसान हो गई है और सपा की कठिन। सपा ने जौनपुर से बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है। शिवपाल के भतीजे धर्मेंद्र यादव को भाजपा की संघमित्रा मौर्या ने हरा दिया था। बेटे आदित्य यादव को जिताने के लिए शिवपाल अपनी पूरी ताकत लगाए हुए हैं। इसी बीच, रविवार को उनके खिलाफ बदायूं के बसपा जिलाध्यक्ष ने पूर्व सीएम मायावती के अपमान का मुकदमा दर्ज करा दिया है।बसपा ने यादव उम्मीदवार उतार कर सपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की आशंका बढ़ा दी है। बसपा ने जौनपुर ही नहीं बस्ती में भी भाजपा के लिए राहत का रास्ता तैयार किया है। बसपा ने बस्ती से पहले दयाशंकर मिश्र को टिकट दिया था, जिससे भाजपा के हरीश द्विवेदी की दिक्कत बढ़ गई थी। अब दयाशंकर का टिकट काट लवकुश पटेल को दे दिया है। बस्ती से सपा ने भी कुर्मी चेहरा उतरा है।

देश की सुरक्षा और हित के लिए क्या बोले विदेश मंत्री?

हाल ही में विदेश मंत्री ने देश की सुरक्षा और हित के लिए एक बयान दिया है! पिछले एक दशक में भारत की डिप्लोमेसी ने बहुत बड़ा बदलाव देखा है। इन सालों में विश्व के सामने भारत ने खुद को एक मजबूत देश के रूप में सामने लाने में सफल कोशिश की जो दबाव के सामने नहीं झुकता है। इस कूटनीतिक बदलाव में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा योगदान माना गया। कई देशों में भारत के राजदूत रहे और मौजूदा देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में रहे। उनकी कोर टीम का हिस्सा माना गया। उन्होंने कहा कि देश में बदलाव आया है। पिछले दस वर्षों में देश की सोच अपने बारे में बदली है। हम दुनिया को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ देख रहे हैं। हम अपनी बात, अपना हित, अपनी बात, अपना पक्ष सामने रखने से अब डरते नहीं है। देश के हर हिस्से में जो माहौल है, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि हम एक तरह से टाइम के साथ चल रहे है। दूसरा बड़ा कारण राजनीतिक है। बीजेपी की विचारधारा राष्ट्रवादी है। कश्मीर की बात करें, चीन की बात करें, परमाणु हथियारों की बात करें या दूसरे देशों की बात करें तो बीजेपी के जहन में है कि हम अपनी बातों को सामने रखने से हिचकिचाते नहीं है। भारत को ग्लोबल डिप्लोमेसी के स्तर पर मिली कामयाबी का बहुत बड़ा कारण पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशिप और उनका व्यक्तित्व है। जो भी सरकार है, एक तरह से उस सरकार के लीडर पर काफी कुछ निर्भर करता है। पीएम नरेंद्र मोदी का प्रभाव पूरी कैबिनेट व पूरी टीम पर होता है। मोदी के विदेशी मंत्री हो, बीजेपी की सरकार हो, इस समय आज का भारत जो है, ये सब चीज साथ मिलाएंगे तो भारत बड़ी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और बिना किसी डर के अपनी बात दुनिया के सामने रख रहा है।

2020 से पहले दोनों फौजें अपने बेस से ऑपरेट करती थी। अपने कैंप या बेस से पेट्रोलिंग कर फिर बेस में वापस चले जाते थे। 2020 में चीन की ओर से वो अपने बेस से बाहर तो निकले और उनकी संख्या भी बहुत ज्यादा थी। उनके पास हथियार ज्यादा थे, इसके रिस्पांस में हमारी ओर से सरकार ने भी हमारी फौज को वहां भेजा। मई-जून 2020 में हम दोनों (भारत- चीन सेना) की बहुत क्लोजअप डिप्लॉयमेंट थी क्योंकि हम दोनों अपनी पोजिशन से आगे थे। ये नहीं था कि आमने सामने थे, क्रिस-क्रॉस थे। कोई आगे थे, कोई ऊपर था, कोई नीचे था, कोई साइड में था, बहुत नजदीक में थे। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए था कि हमें फिजिकल कॉन्टेक्ट में आना ही नहीं चाहिए था, हम तय प्रक्रिया के हिसाब से दूरी रखते, पर उसका उल्लंघन हुआ। हम बहुत क्लोज आ चुके थे इसलिए डिसइंगेजमेंट की बात हुई, हम भी अपने बेस पर वापस जाएं, वो भी अपने बेस पर वापस जाएं। ताकि आगे से कोई हिंसक घटना ना हो। इसके लिए दोनों के बीच समझौता हुआ। एस.जयशंकर ने कहा कि जिस तरह समझौता हुआ वह कोई नई बात नहीं थी। भारत- चीन बॉर्डर में देखें तो हमारा सबसे पहले जो विवाद था वह 1958 में उत्तराखंड के बाराहोती में था। उस वक्त बाराहोती में समझौता हुआ कि वे भी अपने बेस मे चलें जाएं और हम भी अपने बेस में चले जाएं और वहां पेट्रोलिंग रोका जाए। उसके बाद कुछ न कुछ होता रहा। राजीव गांधी के समय में सुमदोरॉग चू में भी यही हुआ कि वे आगे आए, हम भी आगे गए। फिर समाधान यह निकला कि वह भी अपने बेस में जाएं हम भी जाएं। जहां तनाव के चांस ज्यादा थे वहां कहा कि पेट्रोलिंग नहीं करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि 2013 में यूपीए सरकार के वक्त भी देपसांग में ऐसी स्थिति हुई। पहले दोनों आगे आए फिर दोनों पीछे गए, फिर तय हुआ कि जब तक दोनों डिसाइड नहीं करेंगे एक तरफा पेट्रोलिंग नहीं होगी। आजकल जो बातचीत चल रही है, वह डिसइंगेजमेंट की बातचीत नहीं है, वह पेट्रोलिंग को लेकर बात है। कुछ ऐसी जगह हैं जहां वे हमें पेट्रोलिंग (गश्ती) से रोकते हैं तो हम भी उन्हें पेट्रोलिंग से रोकते हैं’। अभी जो पेट्रोलिंग की बात हो रही है, ऐसी जगह पर हो रही है जहां हमने एक दूसरे को ब्लॉक किया हुआ है।

यही नहीं उन्होंने कहा कि चुनौती तो नहीं कहूंगा, दुनिया में क्या होता है, अलग अलग देश के अपने- अपने हित होते हैं। हम तो चाहेंगे कि ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ अच्छे संबंध हों। विवाद को कम करें। जहां साझेदारी मैक्सिमम है, समस्या सबसे कम है, वहां डिप्लोमेसी सफल रहती है और उसको सबसे अच्छे नंबर दिए जाने चाहिए। कोशिश तो होती है कि अलग- अलग देशों के साथ कॉमन पॉइंट हों, एक साथ काम करने से दोनो देशों को लाभ होता है, हमारे हित मिलते- जुलते हैं, काम करने से दोनो को लाभ होता है। दुनिया की स्थिति यह है कि तनाव होता है। आज यूक्रेन में पश्चिमी देशों को रूस से समस्या है। कभी- कभी खाड़ी में कोई एक देश के दूसरे देश से रिश्ते बिगड़े है। कोशिश है कि जितने लोगों को साथ ले जा सकें, उतना बेहतर है। भारत का हित को कैसे आगे करें, राजनीतिक- कूटनीतिक लक्ष्य तय करें। जिस तरह से देश में सबका साथ सबका विकास किया है, उसी तरह से देश से बाहर भी किया है।

वहां तनाव तो है। पर आजकल आप देखें तो भारत के अलावा पूरी दुनिया में तनाव है। यूक्रेन में युद्ध चल रहा है। पूरी दुनिया में आज अस्थिरता है। कहीं युद्ध है कहीं विवाद है। इसलिए मैं कहूंगा कि हमारे भारत, वोटर्स , लोगों को सोच समझकर फैसला लेना है। आने वाला तूफान दिखाई देता है कि हम तूफान में जा रहे हैं, दुनिया एक तूफान होगी। भारत सुरक्षित हाथों में रहे, यह लोगों को तय करना है। हमारे लिए क्या चाहेंगे कि सत्ता किसके हाथ में सौपेंगी। किसका जजमेंट, किसका अनुभव व किसके आत्मविश्वास पर भरोसा करेंगे। मानता हूं कि दुनिया मुश्किल स्थिति में है, आने वाले समय में मुश्किलें कम नहीं होगी। भारत की जनता को तय करना होगा कि किस व्यक्ति पर भरोसा करते हैं कि उनके कारण भारत सुरक्षित है। पिछले दस वर्षों में भारत ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई है और भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है।