Sunday, March 8, 2026
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जब तीसरे चरण से ठीक पहले मोदी पहुंचे अयोध्या!

हाल ही में तीसरे चरण से ठीक पहले मोदी अयोध्या पहुंच गए थे! लोकसभा चुनाव के बीच राम मंदिर की गूंज सुनाई पड़ रही है। बीजेपी और पीएम मोदी की ओर से बार-बार चुनावी सभाओं में राम मंदिर का जिक्र किया जा रहा है। पीएम मोदी की अगुवाई में इस साल 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री रामलला की प्राणप्रतिष्ठा की गई। 22 जनवरी के इस कार्यक्रम के बाद पहली बार पीएम मोदी रविवार फिर अयोध्या में थे। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण से दो दिन पहले मोदी को श्रीरामलला के समक्ष साष्टांग दंडवत करते देखा गया। मोदी ने फैजाबाद संसदीय क्षेत्र (अयोध्या) से बीजेपी उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो किया। रोड शो के लिए मोदी का रथ जैसे ही आगे बढ़ा ‘जय श्री राम’, ‘हर हर मोदी-घर घर मोदी’, ‘फिर से मोदी सरकार-अबकी 400 पार’ जैसे नारे गूंज रहे थे। भीड़ काफी थी और एक बार फिर लोगों को 22 जनवरी वाले दिन का एहसास हो रहा था। पीएम मोदी का रोड शो भले ही एक प्रत्याशी के लिए था लेकिन इसके मायने अलग थे। अभी 5 चरणों का चुनाव बाकी है और बीजेपी इस माहौल को भुनाने की कोशिश जरूर करेगी। पीएम मोदी ने रविवार को अयोध्या में भगवान श्री रामलला का दर्शन पूजन करने के बाद सुग्रीव किला से लता मंगेशकर चौक तक रोड शो कर जनता-जनार्दन का आशीर्वाद लिया। मोदी ने सोशल मीडिया ‘एक्‍स’ पर अपने रोड शो का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि अयोध्यावासियों का हृदय भी प्रभु श्री राम जैसा विशाल है। रोड शो में आशीर्वाद देने आई जनता-जनार्दन का अभिनंदन। मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग करीब चार-पांच घंटे पहले से सड़क के दोनों किनारे खड़े थे। उनका रोड शो शुरू होने के बाद मोदी को देखने के लिए लोगों में होड़ लग गई। मोदी लोगों के अभिवादन का जवाब दे रहे थे। जो लोग अयोध्या दर्शन के लिए आए थे वह भी रोड शो के लिए रूक गए थे। अयोध्या के इस रोड शो के चुनावी मायने मतलब भी निकाले जा रहे हैं। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि यह रोड शो सिर्फ एक सीट के लिए नहीं था।

दो चरणों का मतदान अब तक हो चुका है। इन दो चरणों में यूपी की 16 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है लेकिन यूपी की अब भी 64 सीटों पर वोटिंग बाकी है। बीजेपी की ओर से इस बार 80 की 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तीसरे चरण में मंगलवार को दस सीटों पर वोटिंग है। इसमें संभल, हाथरस, आगरा, मैनपुरी, एटा, बरेली जैसी सीटें शामिल हैं। इसके बाद के चरणों में अवध और पूर्वांचल के सीटों पर वोटिंग होनी है। अयोध्या का इलाका अवध और पूर्वांचल दोनों के बीच का है। 13 और 20 मई के चुनाव में अयोध्या के आस-पास की कई सीटें शामिल हैं। लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, कन्नौज, कानपुर, इलाहाबाद, बस्ती, संत कबीर नगर, जौनपुर, आजमगढ़, भदोही की सीटें शामिल हैं।

एक ओर विपक्ष के कई नेताओं का कहना है कि राम मंदिर कोई मुद्दा नहीं है। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी अपनी चुनावी सभाओं में राम मंदिर का जिक्र बार-बार कर रहे हैं। बिहार, बंगाल, यूपी की चुनावी सभाओं में मोदी ने राम मंदिर का जिक्र कर विपक्ष पर जमकर हमला बोला। चुनाव के बीच कुछ राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 22 जनवरी के आस-पास राम मंदिर के जरिए जो माहौल बना था उसका असर धीरे-धीरे थोड़ा कम हुआ। हालांकि इनका यह भी कहना है कि मोदी के रोड शो के बाद एक बार फिर वैसा ही नजारा देखने को मिला। पीएम मोदी बिना बोले ही अयोध्यावासियों का हृदय भी प्रभु श्री राम जैसा विशाल है। रोड शो में आशीर्वाद देने आई जनता-जनार्दन का अभिनंदन। मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग करीब चार-पांच घंटे पहले से सड़क के दोनों किनारे खड़े थे। उनका रोड शो शुरू होने के बाद मोदी को देखने के लिए लोगों में होड़ लग गई।अपने मन की बात यहां से कह गए। राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा से पहले दिसंबर 2023 में भी मोदी ने रोड शो किया था। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मोदी फिर अयोध्या में रोड शो में शामिल हुए। साधु-संत भी सड़क के किनारे खड़े होकर मोदी के स्वागत में उत्साहित दिखे। मोदी के स्वागत में बच्चे, बड़े और महिलाएं भी मौजूद रहीं। जो नजारा दिखा उसका असर आने वाले चरणों में दिख सकता है!

आखिर कैसे सुलझ पाएगी विनय त्यागी की मर्डर मिस्ट्री?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विनय त्यागी की मर्डर मिस्ट्री कैसे सुलझा पाएगी! टाटा स्टील के अधिकारी विनय त्यागी के हत्या की गुत्थी सुलझ नहीं सकी है। एक ओर पुलिस जहां 3 घंटे वाले सवाल पर जांच को आगे बढ़ा रही है तो वहीं परिवारवालों का कुछ अलग ही कहना है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि किसी ने हत्या की योजना बनाई होगी। विनय के पिता विशम्भर सिंह त्यागी ने बताया कि उनका बेटा 17 अप्रैल को कोलकाता से स्टील कंपनी के दिल्ली ऑफिस में जॉइन किया। वह अपने कुछ सहकर्मियों और डिस्ट्रीब्यूटर के प्रदर्शन से खुश नहीं था और उनके खिलाफ एक्शन लिया। उन्होंने बताया कि एक रेस्टोरेंट मालिक ने शिकायत की थी कि उत्तराखंड के एक वितरक ने नए स्टील के दरवाजे लगाने के लिए उससे 70 लाख रुपये लिए थे, लेकिन कई दिनों बाद भी काम शुरू नहीं किया। उन्होंने बताया कि मेरे बेटे ने रेस्टोरेंट का दौरा किया और डिस्ट्रीब्यूटर को हटा दिया। पुलिस का कहना है कि त्यागी पर लूटपाट के प्रयास में हमला किया गया होगा, उनका लैपटॉप, पर्स और फोन गायब था। त्यागी को उनके परिवार के सदस्यों ने शालीमार गार्डन में खेतान पब्लिक स्कूल के पीछे सड़क किनारे एक गड्ढे में पाया। परिवारवालों का कहना है कि शुक्रवार को त्यागी ने रात 11.21 बजे अपनी पत्नी रुचि को फोन किया और राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन से उसे पिक करने के लिए कहा। उसने व्हाट्सएप पर अपनी लोकेशन उसके साथ शेयर की, लेकिन थोड़ी देर बाद उसे डिलीट कर दिया और कहा कि वह पैदल घर लौटेगा। जब वह एक घंटे बाद भी घर नहीं आया, तो हमने उसे फोन करना शुरू किया, लेकिन उसका फोन बंद था। हम मेट्रो स्टेशन पहुंचे, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला।

मेट्रो स्टेशन त्यागी के घर से डेढ़ किलोमीटर दूर है। परिवार ने त्यागी की तलाश शुरू कर दी। सुबह 3 से 3.30 बजे के बीच वे खेतान स्कूल के पास से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने अपने घर से बमुश्किल 200 मीटर दूर एक नाले से एक हाथ बाहर निकलता देखा। जब हम वहां पहुंचे, तो हमने विनय को नाले में पड़ा पाया। हमने उसे बाहर निकाला और पाया कि उसके सीने में दो चाकू के घाव थे। हम उसे पास के अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

विशम्भर सिंह ने कहा कि विनय की हत्या से पहले उसने 1 लाख 40 हजार रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर किए थे। उन्होंने कहा हमारा मानना है कि उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया होगा। वहीं पुलिस ने बताया कि त्यागी के फोन की आखिरी लोकेशन लोनी में कहीं थी। आरोपी ने त्यागी के सिम को करीब तीन मिनट के लिए दूसरे फोन में ट्रांसफर किया था और फिर डिवाइस को बंद कर दिया था। हालांकि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने के बाद त्यागी ने करीब तीन घंटे तक क्या किया।

डीसीपी ट्रांस-हिंडन निमिष पाटिल के अनुसार, त्यागी रात 8.17 बजे राजेंद्र नगर स्टेशन से बाहर आकर पास की शराब की दुकान पर गए। वहां जाकर वोदका की एक बोतल खरीदी। इसके अलावा, हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। हालांकि परिवार ने कहा कि त्यागी ने रात 11.21 बजे उन्हें फोन किया और अपनी पत्नी से उसे मेट्रो स्टेशन से लेने के लिए कहा। बता दें कि वितरक ने नए स्टील के दरवाजे लगाने के लिए उससे 70 लाख रुपये लिए थे, लेकिन कई दिनों बाद भी काम शुरू नहीं किया। उन्होंने बताया कि मेरे बेटे ने रेस्टोरेंट का दौरा किया और डिस्ट्रीब्यूटर को हटा दिया। पुलिस का कहना है कि त्यागी पर लूटपाट के प्रयास में हमला किया गया होगा, उनका लैपटॉप, पर्स और फोन गायब था। त्यागी को उनके परिवार के सदस्यों ने शालीमार गार्डन में खेतान पब्लिक स्कूल के पीछे सड़क किनारे एक गड्ढे में पाया।फिर डिवाइस को बंद कर दिया था। हालांकि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने के बाद त्यागी ने करीब तीन घंटे तक क्या किया। परिवारवालों का कहना है कि शुक्रवार को त्यागी ने रात 11.21 बजे अपनी पत्नी रुचि को फोन किया और राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन से उसे पिक करने के लिए कहा। लेकिन स्टेशन से बाहर निकलने के बाद से उन तीन घंटों का क्या हुआ? हमें इसका पता लगाना है। सीसीटीवी फुटेज खंगालने वाली पुलिस टीम बाइक पर सवार तीन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जो उस इलाके में घूम रहे थे जहां त्यागी मृत पाए गए थे।

आखिर जंगलों में लगी भीषण आग क्यों नहीं बुझ पाती?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जंगलों में लगी भीषण आग बुझ क्यों नहीं पाती है! उत्तराखंड के जंगल धू-धूकर जल रहे हैं। हालत यह है कि 24 घंटे में अगलगी की 24 घटनाएं सामने आई हैं। उत्तराखंड की आग ने अमेरिकी राज्य कैलिफॉर्निया में हाल में हुई वारदात की याद दिला दी है। कैलिफॉर्निया में भी आग से कई दिनों तक दहशत का माहौल रहा जिसकी चर्चा दुनियाभर में होती रही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली तो जंगल की आग पर जल्द काबू पाने में हम असफल क्यों रहते हैं? भारत तो फिर विकासशील देश है, लेकिन अमेरिका तो सुपर पावर है, फिर भी कैलिफॉर्निया के जगंलों में इतने लंबे समय तक आग क्यों फैलती रही? क्या विज्ञान के इतने विकास के बावजूद हमारे पास वो तकनीक हाथ नहीं लग सकी है जिससे जंगल की आग को कुछ घंटों में ही काबू कर लिया जाए? उत्तराखंड के विभिन्न जंगलों में आग की कई घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रदेश में नवंबर से अब तक 910 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रदेश में 1,145 हेक्टेअर से अधिक वन क्षेत्र में लगी आग ने अब तक पांच जिंदगियां लील ली हैं जबकि पांच अन्य लोग उसकी चपेट में आकर आंशिक रूप से जल गए हैं। पहली आग लगभग छह महीने पहले भड़की थी और अब तक फैल ही रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि उत्तराखंड की भयावहता भी कैलिफॉर्निया के जंगल की आग से अलग नहीं है।

दरअसल, उत्तराखंड में लगी आग, दुनिया भर में लगी आग की तरह ही, कई कारकों के कारण महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करती है। जंगल का इलाका ऊबड़-खाबड़ और खड़ी ढलान वाला है जहां घनी वनस्पतियां हैं। इस कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने और वहां इधर से उधर आ-जा पाना आसान नहीं है। उत्तराखंड में कई वन क्षेत्रों की तरह अक्सर सूखे और तेज हवाएं चलती हैं, जो जंगल की आग को भड़काने में काफी मददगार होती हैं। सूखी वनस्पति आग के लिए ईंधन का काम करती है, जबकि तेज़ हवाएं तेजी से लपटों और अंगारों को आगे बढ़ाती हैं, जिससे आग अप्रत्याशित रूप से और बड़े क्षेत्रों में फैल सकती है। अधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड में जंगल की आग की घटनाएं मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण होती हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग कभी-कभी कृषि या पशुधन चराने के लिए क्षेत्रों को खाली करने के लिए घास के मैदानों में आग लगा देते हैं। इससे अनजाने में बड़ी जंगल की आग भड़क जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, इस प्री-मानसून सीजन में कम बारिश के कारण मिट्टी की नमी की कमी और जंगल में मौजूद सूखी पत्तियों, चीड़ की सुइयों और अन्य ज्वलनशील पदार्थों की उपस्थिति ने भी ऐसी घटनाओं में योगदान दिया है। उत्तराखंड के चमोली पुलिस ने गैरसैण इलाके में स्थित एक जंगल में आग लगाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने कथित तौर पर जंगल में लगी आग की घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर लाइक, व्यू और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए शेयर कर दिया।

हालांकि आग बुझाने के लिए तकनीक मौजूद है, लेकिन जंगल की विशेष परिस्थितियों के कारण ये बहुत कारगर साबित नहीं हो पातीं। उदाहरण के लिए, पानी की बाल्टियों या टैंकों से लैस हेलीकॉप्टर आग की लपटों और हॉटस्पॉट पर पानी गिराने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग उपलब्धता, मौसम की स्थिति और जल स्रोतों की पहुंच जैसे कारकों से सीमित हो सकता है। इसी तरह, जंगल की आग की प्रगति को धीमा करने के लिए विशेष अग्निरोधी रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल में कई तरह की समस्याएं हैं।

हालांकि, अग्निशमन कर्मियों और संसाधनों के सामूहिक प्रयासों के बावजूद जंगल में तेजी से फैलती आग को बुझाना एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है। आग कितनी भीषण है, मौसम की स्थिति कैसी है और आग बुझाने के संसाधन कैसे हैं, बता दे कि सूखी वनस्पति आग के लिए ईंधन का काम करती है, जबकि तेज़ हवाएं तेजी से लपटों और अंगारों को आगे बढ़ाती हैं, जिससे आग अप्रत्याशित रूप से और बड़े क्षेत्रों में फैल सकती है। अधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड में जंगल की आग की घटनाएं मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण होती हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग कभी-कभी कृषि या पशुधन चराने के लिए क्षेत्रों को खाली करने के लिए घास के मैदानों में आग लगा देते हैं। इन सब कारकों से तय होता है कि आग पर काबू पाना कितना कठिन या आसान होगा। कुल मिलाकर कहें तो जंगल की आग को नियंत्रित करने में अक्सर उपयुक्त संसाधन, रणनीतिक योजना और अनुकूल परिस्थितियों के मिले-जुले कारकों की भूमिका होती है।

महेंद्र सिंह धोनी के करीबी दोस्त के साथ रिलेशनशिप में हैं कृति शैनन?

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हाल ही में कृति-कबीर की कुछ तस्वीरें एक माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर वायरल हुईं। इस जोड़े ने लंदन में जश्न मनाया।
कृति शैनन महेंद्र सिंह धोनी की करीबी दोस्त के साथ रिलेशनशिप में हैं। ऐसी फुसफुसाहटें वेदी के अंदर सुनाई देती हैं। कबीर बहिया, लंदन के एक सफल उद्योगपति। संयोग से हार्दिक पंड्या भी कबीर के अच्छे दोस्त हैं. हाल ही में कृति-कबीर की कुछ तस्वीरें एक माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर वायरल हुईं। इस जोड़े ने लंदन में जश्न मनाया। ज्ञात हो कि कबीर के पिता लंदन के एक प्रमुख उद्योगपति हैं।

हाल ही में एक इंटरव्यू में कृति ने बताया कि वह अपने पार्टनर में क्या खूबियां चाहती हैं। उनके शब्दों में, ”मेरा पार्टनर ऐसा होगा, वैसा होगा. ये क्या हैं?” दो के एक जैसे होने का कोई मतलब नहीं है!” इसके बाद वह कहते हैं कि पार्टनर को यह बताना कि उसे क्या बनना है, उस पर दबाव डालना है। वह सोचता है कि सच्चा साथी वही है जिसके साथ घंटों बातें की जा सकें, जिसके साथ हंसी-मजाक किया जा सके। “उसे मेरे काम का सम्मान करना होगा। मेरे लिए, आदर्श साथी वह है जो बिना किसी दिखावे के अंदर के असली इंसान को देख सके,” अभिनेत्री ने कहा।

फिलहाल कृति शैनन फिल्म ‘क्रू’ की सफलता का आनंद ले रही हैं। फिल्म में कृति के अलावा करीना कपूर खान और तब्बू भी हैं। हाल ही में कृति ने अपने करियर के उतार-चढ़ाव के बारे में बात की। संयोग से, उन्होंने सितारों के बच्चों पर भी टिप्पणी की।

कृति ने कहा कि करियर की शुरुआत में कई बार इंडस्ट्री के स्टार्स को उनसे ज्यादा मौके मिलते थे। अभिनेत्री ने यह भी टिप्पणी की कि यह विषय कभी-कभी उन्हें उदास कर देता है। कृति ने कहा, ”एक समय मुझे पता था कि मेरी क्षमता बहुत अधिक है। मैं एक गहरे किरदार का इंतजार कर रहा था।’ मैं खुद को फिर से साबित करना चाहता था।’ लेकिन ऐसा नहीं होता.” कृति मामले को समझाते हुए कहती हैं, ”दरअसल घड़ी के आकार के मुताबिक आप इसे भर सकते हैं. यदि बर्तन छोटा है, तो आप कम पानी पकड़ेंगे। मुझे बड़े के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

कृति ने टाइगर श्रॉफ के साथ हीरोपंती से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। कृति ने कहा कि जब उनके पास मौके कम होते थे तो कई स्टार किड्स को आसानी से काम मिल जाता था। कृति ने कहा, ‘मैं फिल्मी परिवार के साम्राज्य में नए लोगों को देखती थी कि उन्हें बिना कुछ किए कितनी आसानी से काम मिल जाता है। मैं हैरान हो जाती.” एक अन्य इंटरव्यू में फिल्म ‘मिमी’ की एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री की एकता पर भी कमेंट किया. कृति ने कहा, ‘अगर हम एक-दूसरे की मदद करें, एकता की राह पर चलें तो हम दूसरे लेवल पर पहुंच सकते हैं।’ अगर तारीफ करनी है तो दिल से की जानी चाहिए. मुझे इंडस्ट्री में एकता नजर नहीं आती. मैं नहीं जानता कि जब कोई फिल्म अच्छा कारोबार करती है तो कितने लोग वास्तव में खुश होते हैं।”

ये चाहत बहुत दिनों से थी. आख़िरकार कंगना रनौत चुनावी राजनीति के मैदान में उतर गईं। पिछले कुछ वर्षों से एक भी हिट नहीं हुई है। आखिर में एक्ट्रेस ने वैकल्पिक पेशे के तौर पर राजनीति को चुना? इस बार वह लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी के उम्मीदवार बने हैं. उस खबर के बाद इस बार कृति शैनन राजनीति में जा रही हैं! वह इस समय बॉलीवुड की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक हैं। एक के बाद एक नौकरी की पेशकश. हाल ही में उनकी और शाहिद कपूर स्टारर ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ ने बॉक्स ऑफिस पर ओवरऑल अच्छा प्रदर्शन किया है। उनकी फिल्म ‘क्रू’ जल्द ही रिलीज होगी. फिल्म का प्रमोशन शुरू हो चुका है. इस बीच एक्ट्रेस के चुनाव लड़ने की नई अटकलें सामने आ रही हैं. वोट से पहले कृति ने इस बारे में खुलकर बात की।

गोविंदा गुरुवार को महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिंदेसेना पार्टी में शामिल हुए। इस पार्टी के सूत्रों के मुताबिक उन्हें लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इसके बाद एक और खबर जंगल में आग की तरह फैल गई. कपूर खानदान की दोनों बेटियां करिश्मा और करीना लड़ेंगी आगामी लोकसभा चुनाव! इस बार कृति को लेकर अटकलें तेज हैं. आख़िरकार नायिका ने चुप्पी तोड़ी. उनके शब्दों में, ”मैंने कभी राजनीति में आने के बारे में नहीं सोचा था. मुझे नहीं लगता कि मैं तब तक काम कर सकता हूं जब तक मुझे अपने दिमाग के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। जब तक वह कॉल न आये मैं ऐसा नहीं करता. हां, इस बार अगर मेरा दिल इजाजत देगा तो मैं राजनीति में शामिल हो जाऊंगा।”

प्रियंका ने राहुल पर ‘शहजादा’ की जगह ‘शहंशा’ बोलकर मोदी के सिलसिलेवार प्रहारों का जवाब दिया

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उस युद्ध के मुख्य सेनानियों के प्रचार को मापने के लिए, ‘प्रोपेगेशन मीटर’ नामक एक विशेष खंड है। इस बार कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा. कांग्रेस के वफादार उन्हें देखकर इंदिरा गांधी को याद करते थे. जब वह अपनी दादी की तरह संकीर्ण बॉर्डर वाली एकवर्णी खादी साड़ी पहनकर निकलती थीं तो गैर-कांग्रेसी भी प्रशंसा की दृष्टि से देखते रह जाते थे। लेकिन ये सब ‘ब्रह्मास्त्र’ एपिसोड से पहले की बात है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ (राहुल गांधी के मुकाबले) प्रियंका गांधी वाड्रा को सक्रिय राजनीति में उतारा था. उत्तर प्रदेश को संभालने की जिम्मेदारी. उसके बाद कभी भी इंदिरा-पोती को उस तरह साड़ी में नहीं देखा गया। ‘इंदिरा की तरह’ प्रियंका जल्द ही ‘आई लाइक मी’ बन गईं और केजो ने पकड़ लिया। राजस्थानी ब्लॉक प्रिंट सूती कुर्ता-पायजामा और घूंघट। प्रियंका इसी पोशाक में दादा राहुल के लिए प्रचार करते हुए रायबरेली में नजर आई थीं. हालाँकि, प्रियंका ने गर्मियों में समुद्री हरे रंग का कुर्ता-पायजामा चुना। उसने सफेद प्रिंटेड घूँघट भी लिया और उसे एक स्कूली लड़की की तरह आड़ा-तिरछा मोड़ लिया। गर्दन की छाप, कंधे को न छूने वाले बालों को थोड़ा ढीला छोड़ दिया गया था और पीछे बांध दिया गया था। कान में एक छोटा सा पेंडेंट.

तार्किक ढंग से बोलता है. लेकिन नरम अंदाज में कहा. प्रियंका को एक हाथ अपनी कमर पर रखकर और दूसरा हाथ अपने चेहरे के सामने लहराते हुए बात करते हुए देखकर, किसी को भी अचानक पड़ोस की कहानी-प्रेमी किशोरी जैसा महसूस हो सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो नेता जैसा खुरदरापन नहीं है। परिणामस्वरूप, गरमागरम भाषणों का अभाव हो गया है। चैनल की भाषा में जिसे ‘विस्फोटक’ कहा जाता है, प्रियंका बिल्कुल नहीं हैं। राहुल ने प्रचार मंच से कई बार मोदी पर हमला बोला. उन्होंने लोगों की समस्याओं के बारे में और भी बातें कहीं. पिछले पांच साल से वह उत्तर प्रदेश में क्या चल रहे हैं, यह बात भाषण में कैद हो गई. उन्होंने ज़मीन के करीब रहने वाले लोगों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनका तथाकथित ‘ग्लैमरस’ समाधान संभव नहीं है. प्रियंका के भाषण में कृषि क्षेत्रों में आवारा जानवरों की समस्या के समाधान के रूप में गोबर एकत्र करने के सरकार के वादे का भी जिक्र किया गया।

सभा में समाज के निचले तबके के लोगों की अच्छी खासी भीड़ थी. कांग्रेस के चिन्ह वाली नेहरू टोपी पहनकर उन्होंने इंदिरा और राजीव गांधी के नाम पर नारे लगाए। प्रियंका ने उनके परिवार के साथ रायबरेली के पुराने रिश्ते का इतिहास बताया तो नारेबाजी का स्तर और बढ़ गया. निवर्तमान रायबरेली सांसद सोनिया गांधी ने बीमारी के कारण इस बार अपनी सीट अपने बेटे राहुल के लिए छोड़ दी। भीड़ से राहुल के नाम के नारे भी सुनाई दिए. लेकिन केवल कुछ ही बार.

लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत से ही वह लगातार राहुल गांधी को ‘शहजादा’ कहते रहे हैं. गौरतलब है कि हर सार्वजनिक सभा में अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उस विशेषण का इस्तेमाल करने के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ‘कांग्रेस की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति’ की ओर बढ़ रहे हैं!

कभी प्रधानमंत्री कहते हैं, ”राजाओं, सुल्तानों, निज़ामों, नवाबों ने भारतीयों पर जो अत्याचार किए हैं, उस पर चुप रहो शहजादा.” कभी कहते हैं, ”आज़ादी के बाद से कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की राजनीति की है.” एक बार फिर, “कांग्रेस की योजना देश की संपत्ति छीनकर मुसलमानों के बीच बांटने की है,” उसने चेतावनी दी, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने मुसलमानों को अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) और अन्य से बाहर रखा है। पिछड़ा समुदाय (ओबीसी) कोटा उन्होंने शिकायत की कि वह आरक्षण का हिस्सा देना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने शनिवार को मोदी पर हमला बोला. उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करने के लिए ‘शहंशा’ शब्द का इस्तेमाल किया.

शनिवार को झारखंड में बीजेपी की बैठक में मोदी ने कहा, ”अब पाकिस्तान चाहता है कि कांग्रेस के शहजादा भारत के प्रधानमंत्री बनें.” इसके कुछ घंटे बाद प्रियंका ने मोदी के राज्य गुजरात पर निशाना साधा. उन्होंने बनासकांटा में कांग्रेस की ‘नया संकल्प सभा’ ​​में कहा, ”इस राज्य में एक शहंशाह है. वह महल में रहता है. उन्हें लोगों का दुख-दर्द नजर नहीं आता. लेकिन मेरे दादा राहुल लोगों की समस्याओं को समझने के लिए 4,000 किलोमीटर तक चले।”

जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने क्या कहा?

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जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, ‘हेमंत सोरेन को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था’
केजरीवाल और सोरेन दोनों को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली एक्साइज मामले में पहला शख्स गिरफ्तार. भूमि घोटाला मामले में दूसरे शख्स को ईडी ने गिरफ्तार किया है.
जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कई मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ सुर बुलंद करना शुरू कर दिया. उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया. केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि हेमंत सोरेन को झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था.

केजरीवाल और सोरेन दोनों को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली एक्साइज मामले में पहला शख्स गिरफ्तार. भूमि घोटाला मामले में दूसरे शख्स को ईडी ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार होने से पहले सोरेन राजभवन गए और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन केजरीवाल उस रास्ते पर नहीं चले. उनकी गिरफ्तारी के बाद से आम आदमी पार्टी (यूपी) ने बार-बार दावा किया है कि केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे।

50 दिन जेल में बिताने के बाद केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को जमानत पर बाहर आये. देश की शीर्ष अदालत ने लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें 21 दिनों की अंतरिम जमानत दी है. दिल्ली के मुख्यमंत्री शनिवार सुबह से ही कई कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं. शनिवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कई मुद्दों पर मोदी और उनकी सरकार पर हमला बोला.

शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘अगर आप लोकतंत्र को कैद करोगे तो लोकतंत्र जेल से ही जारी रहेगा.’ यहां तक ​​कि, हेमंत सोरेन को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।” इसके बाद केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। उनके शब्दों में, “मैं बिना इस्तीफा दिए जेल से अत्याचार के खिलाफ लड़ रहा हूं।” जब मैं जेल में था तो कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं? आम आदमी पार्टी को दिल्ली में 75 साल के इतिहास में सबसे बड़ा बहुमत मिला है. इस नतीजे को देखकर उन्हें (बीजेपी को) एहसास हो गया कि आप को हराया नहीं जा सकता. इसलिए केजरीवाल को जेल भेजने की साजिश की गई. सोचा था सरकार गिर जाएगी. लेकिन हम उस जाल में नहीं फंसे। मोदी पर हमला करते हुए केजरी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं, लेकिन सभी चोर उनकी पार्टी में हैं। केजरीवाल को गिरफ्तार करके वे यह संदेश देना चाहते थे कि वे जिसे चाहें, गिरफ्तार कर सकते हैं। भाजपा सभी विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर राजनीति खत्म कर देगी।

बता दें कि केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. वहीं, बीते 31 जनवरी को दोपहर में ईडी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता हेमंत के रांची स्थित घर पर छापेमारी की थी. करीब सात घंटे की तलाश के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. हालाँकि, गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। ईडी की हिरासत के बाद से हेमंत झारखंड जेल में हैं. उनकी जमानत का मामला हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. हालाँकि, किसी भी अदालत ने अभी तक झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री को जमानत नहीं दी है।

अगर नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने तो इस बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी जेल भेजेंगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेल से छूटने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा दावा किया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केजरी को शुक्रवार शाम अस्थायी तौर पर जेल से रिहा कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने शनिवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. वहीं, केजरी ने कहा, ”अगर बीजेपी सत्ता में लौटी तो देश के सभी विपक्षी नेताओं को जेल जाना होगा.” केजरी ने कहा, तमिलनाडु के एमके स्टालिन से लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता तक किसी को नहीं छोड़ा जाएगा . लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार किया था. इससे पहले ईडी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी गिरफ्तार किया था. शनिवार को केजरीवाल ने कहा, ‘अगर बीजेपी सत्ता में आई तो वह सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल देगी और देश की राजनीति को बर्बाद कर देगी।’

केजरी ने कहा, ”अब हमारे (यूपी) मंत्री, हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री ममता के मंत्री सभी जेल में हैं। और अगर वे इस बार सत्ता में वापस आते हैं, तो वे ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, तेजस्वी यादव, पिनाराई विजयन, उद्धव ठाकरे सहित सभी विपक्षी नेताओं को जेल भेज देंगे।

हालांकि, केजरी ने दावा किया कि बीजेपी का एक खास नेता है जो मोदी पर निशाना साध रहा है. उन्होंने कहा, ”अब बीजेपी में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शिवराज सिंह चौहान, बशुंधरा राजे, एमएल खट्टर, रमन सिंह की राजनीति खत्म हो गई है. उनका अगला निशाना योगी आदित्यनाथ हैं. सत्ता में वापसी के दो महीने के भीतर बीजेपी योगी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा देगी.

करीना द्वारा लिखी किताब के नाम में ‘बाइबिल’ का जिक्र क्यों! मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने करीना को भेजा नोटिस

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करीना कपूर खान ने तीन साल पहले अपने मातृत्व के अनुभव को एक किताब में दर्ज किया था। एक्ट्रेस के फैंस ने भी इस किताब को लेकर काफी उत्साह जताया है. इस बार मुझे उस किताब के लिए कोई कानूनी नोटिस नहीं मिला.

करीना द्वारा लिखी गई किताब का नाम ‘करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल: द अल्टीमेट मैनुअल फॉर मॉम्स टू बी’ है। मध्य प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने किताब के शीर्षक में ‘बाइबिल’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है. उनकी शिकायत के आधार पर, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में बेबो को कानूनी नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने करीना और उनकी किताब के प्रकाशक के खिलाफ नोटिस जारी किया। बाइट के शीर्षक में ‘बाइबिल’ शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया है, इस पर अदालत ने दोनों पक्षों से इसके पीछे का कारण पूछा। शिकायतकर्ता की याचिका में कहा गया है, “बाइबिल दुनिया भर के ईसाइयों की पवित्र पुस्तक है और करीना कपूर खान की मातृत्व स्थिति की तुलना इसके साथ करना बेतुका है।”

2021 में प्रकाशित इस किताब में करीना ने मातृत्व के अपने विभिन्न अनुभवों के बारे में लिखा है। उन्होंने गर्भवती माताओं के लिए प्रेरणा बनने के लिए यह पुस्तक लिखी। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. लेकिन जब पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया तो उन्होंने निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया. वह अपर सत्र न्यायालय गए, वहां भी कोई लाभ नहीं मिला। लेकिन अदालत को उनके आरोपों के पीछे पर्याप्त सबूत नहीं मिले.

अभी तक करीना ने इस नोटिस का जवाब नहीं दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी.

करीना कपूर और शाहिद कपूर बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय जोड़ों में से एक थे। फिलहाल दोनों खुशहाल शादीशुदा जिंदगी में हैं। लेकिन एक समय में उनके अलग होने का चलन भी कम नहीं था. सुनने में आया है कि फिल्म ‘जॉब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान करीना और शाहिद के बीच रिलेशनशिप की शुरुआत हुई थी। डायरेक्टर इम्तियाज अली ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस घटना के बारे में बात की.

‘जॉब वी मेट’ 2007 में रिलीज़ हुई थी। शाहिद और करीना की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री से दर्शक भी काफी प्रभावित हुए. लेकिन पर्दे के पीछे की तस्वीर बिल्कुल अलग थी. उस वक्त दोनों का रिश्ता टूट रहा था। लेकिन शाहिद-करीना की परफॉर्मेंस में इसका संकेत सामने नहीं आया. वे कभी भी अपनी समस्याएँ फिल्म सेट पर नहीं लेकर आये। इम्तियाज ने इंटरव्यू में दोनों के प्रोफेशनल आचरण की तारीफ की.

शाहिद और करीना कई सालों तक रिलेशनशिप में थे। 2006 में वे अलग हो गए। ब्रेकअप के दो दिन बाद उनकी मुलाकात हुई। इम्तियाज कहते हैं, ”फिल्म की शूटिंग खत्म होने पर उन्होंने अपना रिश्ता खत्म कर लिया। पूरी फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी. अलग होने के बाद भी शूटिंग के लिए दो दिन बचे थे. हमें अपना काम ख़त्म करना था. लेकिन वे पूरी तरह प्रोफेशनल थे. उनकी निजी जिंदगी में क्या चल रहा है इसका फिल्म पर कोई असर नहीं पड़ा है.

इम्तियाज ने यह भी खुलासा किया कि ‘जॉब वी मेट’ में ‘गीत’ और ‘आदित्य’ की भूमिकाओं के लिए उनकी पहली पसंद बॉबी देओल और प्रीति जिंटा थे। लेकिन बॉबी दूसरे काम में बिजी होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। फिर इम्तियाज ने शीर्ष दो भूमिकाओं के लिए शाहिद और करीना को चुना। उस समय शाहिद और करीना के बीच रिश्ते के समीकरण बिल्कुल भी अच्छे नहीं थे। लेकिन फिल्म पर उनका कोई असर नहीं हुआ.

ध्यान दें कि करीना ने 2012 में सैफ अली खान से शादी की थी। वहीं शाहिद ने 2015 में मीरा राजपूत से शादी की.

बैसाख महीना आधा बीत चुका है. हालाँकि, कालबैसाखी नहीं देखी जाती है। वाप्सा गरम है. शहरवासियों को दमघोंटू हालात में जूझना पड़ रहा है। तो शादी के दिन में देरी हो गई? या फिर शादी की दावत से खासी झोल गायब है? जब सब कुछ हो रहा है, तो सज-धज कर क्यों नहीं? एक दोस्त की शादी में साड़ी पहनने का प्लान था. लेकिन तब उन्हें ये समझ नहीं आया कि कोलकाता अचानक ‘मरुशहर’ बन जाएगा. अब इस गर्मी में सिल्क गाडोवाल, इक्कत या कांजीवरम- कुछ भी पहनें, संभाला नहीं जा सकता। अगर आप इस पर अपने बाल खुले रखती हैं तो कोई सवाल ही नहीं उठता। लेकिन आप कॉटन प्रिंट या मलमल नहीं पहन सकतीं क्योंकि ये शादी में आरामदायक रहेगा। इसलिए क्या करना है? अभिनेत्री करीना कपूर खान ने समाधान की पुष्टि की है।

किसी की बर्थडे पार्टी हो या कपूर परिवार में कोई उत्सव, एक्ट्रेस करीना कपूर खान ग्लैमरस लुक में छा जाती हैं। चाहे वह विंटेज साड़ी हो या पाकिस्तानी सूट, यह सब अद्वितीय पटौदी घर के बारे में है। उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर पोस्ट की है. उन्होंने सोने का वर्क किया हुआ सफेद रंग का अनारकली-चूड़ीदार पहना हुआ था। कमीज़ गर्दन पर गोल्डन पाइपिंग का काम। छाती और पीठ पर सुनहरे रंग की मोटी लेस का काम। ऐसा लग सकता है मानो ऊपर से जैकेट पहन रखी हो. दरअसल, ऐसा नहीं है, इसे कमीज से ही सिल दिया जाता है। चूड़ीदार पायजामा के साथ एक लंबी लटकती हुई कमीज़ थी। गले में सुनहरी किनारी वाला सफेद घूँघट। पैरों में सफेद, सुनहरे वर्क वाले जूते।

अगर पोशाक में गर्दन या छाती के पास फैंसी काम है तो आमतौर पर भारी गहने पहनने की कोई ज़रूरत नहीं है। लेकिन गर्दन, कंधों और कानों से मेल खाने के लिए थोड़ा बड़ा झुमका पहनना अच्छा लगता है। करीना ने कानों में कंधे को छूने वाले पेंडेंट भी पहने हुए थे। सुनहरे झुमके के नीचे कई छोटे, सफेद मोती हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शहर कितना गर्म है, आपको इस पोशाक में कूल रहना होगा। अगर आप गर्मियों में अपने बालों को खुला नहीं रखना चाहती हैं, तो आप इसे एक अच्छा जूड़ा या जूड़ा बना सकती हैं। हल्का मेकअप, न्यूड लिपस्टिक, धुँधली आँखें और माथे पर एक छोटी सी नोक – हाँ, शादी का जोड़ा पूरा हो गया है!

आईपीएल प्लेऑफ, फाइनल में कोलकाता को नहीं मिलेंगे ड्रेरस, क्यों?

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केकेआर का आखिरी ‘घरेलू’ मैच शनिवार को. मुंबई इंडियंस के खिलाफ जीत हासिल करने पर श्रेयसेरा आईपीएल प्लेऑफ में पहुंच जाएंगे। इस मैच से पहले एक खबर ने केकेआर खेमे में चिंता पैदा कर दी है.
ईडन गार्डन्स में मुंबई इंडियंस से भिड़ने से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए बुरी खबर है। श्रेयस अय्यर को आईपीएल के प्लेऑफ और फाइनल में इन-फॉर्म ऑलराउंडर मिलने की संभावना नहीं है। उन्हें टी20 वर्ल्ड कप के लिए स्वदेश लौटना है.

आंद्रे रसेल इस आईपीएल में केकेआर के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. बल्ले और गेंद से टीम को जरूरी आत्मविश्वास देना. वेस्टइंडीज का अनुभवी ऑलराउंडर देश के लिए टी20 वर्ल्ड कप खेलेगा. रसेल को तैयारी के लिए देश लौटना होगा. सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि वेस्टइंडीज टी20 वर्ल्ड कप टीम के सभी क्रिकेटरों को 22 मई तक स्वदेश लौटना है. हालांकि, कोलकाता एक अन्य इन-फॉर्म क्रिकेटर सुनील नरेन को लेकर चिंतित नहीं है। क्योंकि वह वेस्टइंडीज की विश्व कप टीम में नहीं हैं. दक्षिण अफ्रीका ने भी विश्व कप टीम के क्रिकेटरों को उसी दिन वेस्टइंडीज पहुंचने का आदेश दिया। टी20 विश्व कप की तैयारी के लिए वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका 23 से 26 मई के बीच तीन मैचों की सीरीज खेलेंगे। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड ने वर्ल्ड कप टीम के सभी क्रिकेटरों को उस सीरीज में खेलने का आदेश दिया है. ऐसे में अगर सनराइजर्स हैदराबाद प्लेऑफ में पहुंचती है तो पैट कमिंस के पास हेनरिक क्लासेन नहीं होंगे।

आईपीएल का पहला क्वालीफायर 21 मई को होगा. 22 मई को पहला एलिमिनेटर. दूसरा क्वालीफायर 24 मई और फाइनल 26 मई को है। इसका मतलब है कि वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका की विश्व कप टीमों के क्रिकेटरों को पहले क्वालीफायर तक आईपीएल फ्रेंचाइजी मिल सकती है, अगर उनकी संख्या बहुत अधिक है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड से बात कर रहे हैं।

इंग्लैंड के क्रिकेटर भी चिंतित हैं. इंग्लैंड और पाकिस्तान को 22 मई से चार मैचों की टी20 अभ्यास श्रृंखला खेलनी है। तो केकेआर के फिल साल्ट, राजस्थान रॉयल्स के जोस बटलर को भी देश वापस लौटना पड़ सकता है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी इंग्लैंड क्रिकेट अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं. अभी भी आईपीएल के अंत तक साल्ट, बटलर की उपलब्धता पर संदेह है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अभी तक अंतिम फैसले की घोषणा नहीं की है. परिणामस्वरूप, उनका भी 21 मई तक इंग्लैंड लौटने का कार्यक्रम है।

अगर ऐसा है तो केकेआर को आईपीएल प्लेऑफ में रसेल और साल्ट नहीं मिलेंगे. ये दोनों क्रिकेटर इस प्रतियोगिता में टीम के प्रमुख प्रदर्शनकर्ताओं में से एक हैं। गौतम गंभीर की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ती जा रही है.

धीमी ओवर गति के लिए शुबमन गिल पर जुर्माना लगाया गया. गुजरात टाइटंस के कप्तान को 24 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. उनकी टीम को जुर्माना भी भरना होगा. अगर शुबमन ने एक बार और ऐसी गलती की तो उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है.

शुक्रवार को गुजरात टाइटंस का मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स से था. उस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात ने 231 रन बनाए थे. जवाब में चेन्नई की पारी 196 रन पर रुकी. चेन्नई ने 35 रन से जीत दर्ज की. लेकिन उस मैच में गुजरात समय पर 20 ओवर पूरे नहीं कर पाई. इसके परिणामस्वरूप शुबमन पर जुर्माना लगाया गया। टीम के बाकी खिलाड़ियों की मैच फीस का 25 फीसदी या 6 लाख रुपये, जो भी कम हो, काटा जाएगा.

इस आईपीएल में दूसरी बार धीमी ओवर गति के लिए शुभमन को सजा दी गई. गुजरात ने पहले भी चेन्नई के खिलाफ ये गलती की थी. वह मैच 26 मार्च को हुआ था. उस समय शुबमन पर 12 लाख टका का जुर्माना लगाया गया था. दूसरी बार जब उसने यह गलती की तो जुर्माने की रकम बढ़ गई. बोर्ड के नियमों के मुताबिक अगर वह तीसरी बार यह गलती करते हैं तो उन पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया जाएगा.

मैच में शुबमन ने शतक लगाया. उन्होंने 55 गेंदों पर 104 रन बनाए. दूसरे ओपनर साई सुदर्शन ने 51 गेंदों पर 103 रन बनाए. दोनों ने 210 रनों की जोड़ी बनाई. उनके प्रभाव में गुजरात ने 231 रन बनाए. उस रन का पीछा करते हुए चेन्नई ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 196 रन बनाए. डेरिल मिशेल ने 34 गेंदों पर 63 रन बनाए. मोईन अली ने 36 गेंदों पर 56 रन बनाए. धोनी 11 गेंदों पर 26 रन बनाकर नाबाद रहे। लेकिन टीम जीत नहीं सकी.

जब राजनेताओं के सेक्स स्कैंडल आए थे बाहर!

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर राजनेताओं के सेक्स स्कैंडल कब-कब बाहर आए थे! कर्नाटक की सियासत में उठे तूफान ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लोकसभा चुनाव के दौरान ‘प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल’ ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पक्ष और विपक्ष के नेता आमने-सामने हैं। राज्य सरकार ने रेप की धाराओं में केस दर्ज कर प्रज्वल रेवन्ना की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। मामले की जांच एसआईटी कर रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रज्वल रेवन्ना भारत में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद वह जर्मनी भाग गए हैं। नेताओं के सेक्स स्कैंडल का यह कोई नया मामला नहीं है। भारतीय राजनीति में नेताओं और सेक्स स्कैंडल के बीच काफी पुराना नाता रहा है। एनडी तिवारी से लेकर गोपाल कांडा तक, कई नेता यौन उत्पीड़न के आरोप में घिर चुके हैं। साल 2009 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल हुआ करते थे। एक दिन टीवी पर उनकी एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। हर तरफ इस वीडियो की चर्चा होने लगी। उस सीडी में एनडी तिवारी तीन महिलाओं संग आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे। उस वीडियो क्लिप को तेलुगू चैनल ने प्रसारित किया था। इस सीडी के सियासत ने ऐसा रंग दिखाया कि एनडी तिवारी को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस लौटना पड़ा। सीडी कांड को उन्होंने अपने खिलाफ विरोधियों की साजिश बताया था।

उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में अमरमणि त्रिपाठी का कद कितना ऊंचा था, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि वह अपने दौर में हर राजनीतिक पार्टी की जरूरत बन गए थे। बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी का एक कवयित्री मधुमिता शुक्ला के साथ अवैध संबंध था। मधुमिता 7 महीने की गर्भवती थीं, जब उन्हें उनके घर में मृत पाया गया। अमरमणि और उनकी पत्नी को 2007 में मधुमिता की हत्या का दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। पिछले साल, दोनों को यूपी जेल प्रशासन के आदेश पर रिहा कर दिया गया था।

एयर होस्टेस गीतिका शर्मा ने 5 अगस्त 2012 को दिल्ली के अशोक विहार फेज-3 में अपने घर के अंदर सुसाइड कर लिया था। उन्होंने सुसाइड से पहले एक काली रंग की डायरी में दो नोट लिखे थे। जिसमें उन्होंने हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा और MDLR कंपनी में सीनियर मैनेजर रहीं अरुणा चड्ढा पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। गीतिका ने सुसाइड करने की वजह गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा को बताया था। उसने लिखा था, ‘आज मैं खुद को खत्म कर रही हूं। मैं अंदर से टूट गई हूं। मेरे साथ विश्वासघात हुआ है। मेरा भरोसा टूटा है। मैं ठगा हुआ महसूस कर रही हूं।बता दें कि प्रज्वल रेवन्ना भारत में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि उनकी एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। हर तरफ इस वीडियो की चर्चा होने लगी। उस सीडी में एनडी तिवारी तीन महिलाओं संग आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे। उस वीडियो क्लिप को तेलुगू चैनल ने प्रसारित किया था। इस सीडी के सियासत ने ऐसा रंग दिखाया कि एनडी तिवारी को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस लौटना पड़ा। सीडी कांड को उन्होंने अपने खिलाफ विरोधियों की साजिश बताया था।आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद वह जर्मनी भाग गए हैं। नेताओं के सेक्स स्कैंडल का यह कोई नया मामला नहीं है। भारतीय राजनीति में नेताओं और सेक्स स्कैंडल के बीच काफी पुराना नाता रहा है। एनडी तिवारी से लेकर गोपाल कांडा तक, कई नेता यौन उत्पीड़न के आरोप में घिर चुके हैं।

साल 2009 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल हुआ करते थे। एक दिन टीवी पर उनकी एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। हर तरफ इस वीडियो की चर्चा होने लगी। मुझे धोखा दिया गया है। मेरी मौत के जिम्मेदार गोपाल कांडा और अरुणा अरुणा हैं। दोनों ने मेरी जिंदगी के साथ खेला। मेरा विश्वास तोड़ा और अपने फायदे के लिए मेरा यूज किया। दोनों ने मुझे बर्बाद कर दिया। अब ये लोग मेरे परिवार को नुकसान पहुंचान की कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’ हालांकि इस मामले में दोनों आरोपी पिछले साल कोर्ट से बरी हो गए हैं।

रॉबर्ट वाड्रा ने राहुल गांधी के चुनाव लड़ने पर क्या कहा?

हाल ही में रॉबर्ट वाड्रा ने राहुल गांधी के चुनाव लड़ने पर एक बयान दिया है! कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने लोकसभा चुनाव के बीच एक इमोशनल पोस्ट किया है। रॉबर्ट का यह पोस्ट कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रायबरेली से नामांकन के बाद आया है। इस पोस्ट में उन्होंने राजनीति की ताकत और परिवार के संबंधों का जिक्र किया है। माना जा रहा है कि रॉबर्ट वाड्रा का यह पोस्ट अमेठी से टिकट नहीं मिलने के बाद की अभिव्यक्ति है। पोस्ट में रॉबर्ट ने जनता के समर्थन और शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया भी अदा किया है। दरअसल रॉबर्ट वाड्रा अमेठी के अमेठी से चुनाव लड़ने की अटकलें काफी तेज थी। इसी बीच स्मृति का कहना था कि पहले कांग्रेस के लोग राहुल गांधी की मांग कर रहे थे, लेकिन अब ये लोग जीजाजी की मांग कर रहे हैं। अमेठी की जनता को एक बात समझ लेनी चाहिए कि अगर जीजाजी यहां आते हैं, तो आप लोगों को अपने कागज छुपाने होंगे। जीजाजी की नजर जगदीशपुर पर है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अमेठी में जीजा हो या साला, हर वोटर मोदी का मतवाला है। उनके नाम के अमेठी में पोस्टर तक लग गए थे। रॉबर्ट वाड्रा ने पोस्ट में लिखा, राजनीति की कोई भी शक्ति, पद हमारे परिवार के बीच नहीं आ सकता। हम सभी अपने महान राष्ट्र की जनता और जनता की बेहतरी के लिए हमेशा काम करेंगे, करेंगे और करते रहेंगे। आपके समर्थन और शुभकामनाओं के लिए सभी को धन्यवाद। रॉबर्ट ने आगे लिखा कि मैं सदैव अपनी जनसेवा के माध्यम से यथासंभव लोगों की मदद करूंगा। इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा का टिकट कटने पर बीजेपी की तरफ से तंज भी कसा गया था। पार्टी का कहना था कि वाड्रा परिवार को किनारे लगा दिया गया है।

लोकसभा चुनाव में यूपी से कांग्रेस ने आखिरी दिन अमेठी और रायबरेली से अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। कांग्रेस ने अमेठी से पार्टी के करीबी रहे किशोरी लाल शर्मा को टिकट दिया। वहीं, रायबरेली से राहुल गांधी ने खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया। पार्टी ने रायबरेली में सोनिया गांधी की विरासत को राहुल को सौंप दी। वहीं, पार्टी ने अमेठी से अपने परिवार के किसी व्यक्ति को टिकट देने के बजाय गैर-गांधी को चुनाव लड़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ने का फैसला किया। दरअसल, प्रियंका गांधी भी खुद भी अमेठी या रायबरेली से चुनाव लड़ने को इच्छुक नहीं थीं।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा अमेठी से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं। बीते दिनों रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीति में आने के संकेत भी दिए थे। उन्होंने कहा था कि वो और उनका परिवार देश के विकास में जीजान से लगा हुआ है। ऐसे में अगर उन्हें देश के विकास में योगदान देने का मौका मिलेगा, तो वो अपने आपको भाग्यशाली समझेंगे। इसके बाद से माना जा रहा था कि वो बीजेपी की स्मृति ईरानी के खिलाफ अमेठी से ताल ठोक सकते हैं। अमेठी में तो रॉबर्ड वाड्रा को लेकर पोस्टर तक लग गए थे। बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा अमेठी के अमेठी से चुनाव लड़ने की अटकलें काफी तेज थी। उनके नाम के अमेठी में पोस्टर तक लग गए थे। रॉबर्ट वाड्रा ने पोस्ट में लिखा, राजनीति की कोई भी शक्ति, पद हमारे परिवार के बीच नहीं आ सकता। हम सभी अपने महान राष्ट्र की जनता और जनता की बेहतरी के लिए हमेशा काम करेंगे, करेंगे और करते रहेंगे। आपके समर्थन और शुभकामनाओं के लिए सभी को धन्यवाद। पोस्टर में कहा गया था कि ‘अमेठी की जनता करे पुकार, रॉबर्ट वाड्रा अबकी बार, निवेदक अमेठी की जनता। यह पोस्टर अमेठी कांग्रेस कार्यालय, गौरीगंज कांग्रेस कार्यालय, हनुमान तिराहा, स्टेशन तिराहा और स्टेशन पर लगाए गए हैं। इसके बाद से माना जा रहा था कि रॉबर्ट की राजनीति में एंट्री तय है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में चुनावी सभा को संबोधित करने के क्रम में रॉबर्ट वाड्रा पर निशाना साधा था। स्मृति का कहना था कि पहले कांग्रेस के लोग राहुल गांधी की मांग कर रहे थे, लेकिन अब ये लोग जीजाजी की मांग कर रहे हैं। अमेठी की जनता को एक बात समझ लेनी चाहिए कि अगर जीजाजी यहां आते हैं, तो आप लोगों को अपने कागज छुपाने होंगे। जीजाजी की नजर जगदीशपुर पर है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अमेठी में जीजा हो या साला, हर वोटर मोदी का मतवाला है।