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क्या विनेश फोगाट के हक के लिए लड़ेगी भारत सरकार?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विनेश फोगाट के हक के लिए भारत सरकार लड़ेगी या नहीं! ओलंपिक में भारतीय पहलवान विनेश फोगाट के 50 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतियोगिता से अयोग्य ठहराए जाने के बाद केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में बयान दिया। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि आखिर विनेश के साथ क्या हुआ था। मांडविया ने बताया कि विनेश का वजन 50 किलो 100 ग्राम पाया गया। भारत ने इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ से कड़ा विरोध जताया है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय ओलंपिक संघ की प्रमुख पी टी उषा से बात करके इस मामले में उचित कार्रवाई के लिए कहा है। केंद्रीय खेल मंत्री ने लोकसभा में बताया कि विनेश मंगलवार 6 अगस्त को 3 मुकाबले जीतकर 50 Kg रेसलिंग ओलिंपिक में फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय महिला रेसलर बनी थीं। सेमीफाइनल में उन्होंने क्यूबा की पहलवान गुजमान लोपेजी को, क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन की ओकसाना लिवाच और प्री-क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड चैंपियन जापान की युई सुसाकी को 3-2 से मात दी थी।

उन्हें बुधवार 7 अगस्त की रात करीब 10 बजे गोल्ड मेडल के लिए अमेरिकी रेसलर सारा एन हिल्डरब्रांट से मुकाबला करना था। जहां तक उनकी तैयारी हेतु सहायता का प्रश्न है, भारत सरकार ने विनेश फोगाट की उनकी आवश्यकता के अनुसार हर संभव सहायता प्रदान की है। उनके लिए पर्सनल स्टाफ भी नियुक्त किए गए हैं जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। उनके साथ हंगरी के विख्यात कोच वोलेर अकोस और फिजियो अश्विनी पाटिल हमेशा रहते हैं। इनको ओलम्पिक के लिए इनके अतिरिक्त व्यक्तिगत सहायक स्टाफ जैसे विभिन्न स्पारिंग पार्टनर्स, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग विशेषज्ञ, के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई!

खेल मंत्री ने आगे बताया कि पेरिस ओलंपिक के लिए कुल 70.45 लाख रुपये दिए गए। इनमें टॉप्स के तहत 53.35 लाख रुपये और ACTC के तहत 17.10 लाख रुपये दिए गए। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक के लिए 1.66 करोड़ रुपये दिए गए थे। वहीं बुल्गारिया में 23 दिनों की ट्रेनिंग के लिए 5.44 लाख रुपये दिए गए, बुडापेस्ट में 16 दिनों की ट्रेनिंग 10.54 लाख रुपये दिए गए।

गौरतलब है कि विनेश को 50 किलो से ज्यादा भार के कारण इस प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इस बार विनेश का मेडल पक्का हो चुका था बस उसका रंग बदलना बाकी थी। लेकिन वजन के कारण विनेश समेत पूरे 140 करोड़ देशवासियों का सपना टूट गया। इस घटना के बाद विनेश के चाचा महावीर फोगाट ने कहा कि अब इसमें कुछ नहीं हो सकता है और कोई मेडल नहीं आने वाला है। विनेश के प्रतियोगिता से बाहर होने के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर उन्हें असली चैंपियन बताया था। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट कर उन्हें चैंपियन बताया है। बता दें कि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के तय नियमों के तहत पहलवानों का वजन मुकाबले के पहले दिन लिया जाता है। मुकाबले से पहले हर दिन वजन लिया जाता है। जो लोग किसी भी दिन अपनी तय कैटेगरी में वजन कायम रख पाने में फेल हो जाते हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाता है और पूरी प्रतियोगिता में अपनी रैंक खो देते हैं। फोगाट ने प्रतियोगिता के पहले दिन अपना वजन बढ़ा लिया था, दूसरे दिन फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन अधिक पाया गया, जिस वजह से पहले दिन अपने सभी विरोधियों को सफलतापूर्वक हराकर फाइनल में पहुंचने के बावजूद उन्होंने अपनी रैंक गंवा दी।

इस बीच, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि इस मामले में विनेश की कोई गलती नहीं है। बता दें कि इस वजह से फाइनल में पहुंचने के लिए जीते गए मुकाबले के बावजूद वह सिल्वर मेडल के लिए योग्य नहीं रह गई थीं।UWW के अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों के चैप्टर 3 की धारा 11 में कहा गया है कि सभी प्रतियोगिताओं के लिए हर सुबह संबंधित भार वर्ग में वजन मापा जाता है। वेट इन और मेडिकल प्रॉसेल करीब 30 मिनट तक चलता है। दूसरे दिन सुबह संबंधित भार वर्ग में केवल रेपेचेज और फाइनल में भाग लेने वाले पहलवानों को ही वजन के लिए आना होता है। फोगाट ने अपने एडवोकेट के माध्यम से यह तर्क दिया है कि क्वॉर्टर फाइनल और सेमी फाइनल मुकाबले जब उन्होंने जीत लिए थे तो दूसरे दिन के फाइनल मुकाबले के आधार पर उन्हें सिल्वर मेडल से क्यों वंचित किया जा रहा है? दूसरा, फोगाट यह भी दावा कर सकती हैं कि अधिक वजन होने के कारण उन्हें प्रतियोगिता के दूसरे दिन ही अयोग्य ठहराया जा सकता है और इसका प्रतियोगिता के पहले दिन के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि इसके लिए कोच और न्यूट्रिनिस्ट जिम्मेदार हैं।

क्या खाली पेट के फूलने से भी बढ़ सकता है वजन?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या खाली पेट के फूलने से भी वजन बढ़ सकता है या नहीं! रेसलर विनेश फोगाट को 100 ग्राम ज्यादा वजन पाए जाने के बाद पेरिस ओलंपिक में अयोग्य घोषित कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मैच खेलने के बाद मंगलवार शाम को उनका वजन उनकी 50 किलोग्राम कैटेगरी में लिमिट से दो किलोग्राम अधिक था। बताया जा रहा है कि इस बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए विनेश और उनके साथ की पूरी टीम ने जी-जान लगा दी, मगर बुधवार तक उनका वजन 50 किलो से 100 ग्राम ज्यादा निकला। इसके बाद ओलंपिक नियमों के अनुसार, विनेश को फाइनल मुकाबला खेलने पर रोक लगा दी गई। इस फैसले से निराश आखिरकार विनेश ने भी संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। सोशल मीडिया और विपक्ष का एक वर्ग ऐसा है जो विनेश की अयोग्यता को लेकर कॉन्सिपिरेशी थ्योरी पेश कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- बहादुर विनेश ने सत्ता से लड़ाई लड़ी, उसे न्याय मिलना चाहिए। कुछ गड़बड़ है। बहुत गड़बड़ है। सच्चाई सामने आनी चाहिए। इस स्टोरी में हेल्थ एक्सपर्ट और कुश्ती कोच से जानते हैं कि विनेश के वजन बढ़ने में कितनी साजिश हे और क्या है हकीकत, इसे समझते हैं। विनेश के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक धड़ा बार-बार यह सवाल उठा रहा है कि 12 घंटे में खासकर पहला मैच जीतने के बाद उनका वजन तय सीमा से 2 किलो ज्यादा कैसे बढ़ गया। यानी शाम तक विनेश का वजन 52 किलो से ज्यादाचुका था। ओलंपिक में विनेश ने छह अगस्त की रात को महिला कुश्ती के 50 किलोग्राम के भार वर्ग मुकाबले में क्यूबा की पहलवान को शिकस्त दी थी। इसके बाद विनेश की तरफ से गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतने की उम्मीद बंध गई थी।

अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वालीं शिवानी पंवार और अर्जुन अवॉर्डी दिव्या काकरान जैसी एथलीट्स के इंटरनेशनल कोच रहे विक्रम सोनकर के अनुसार, 2018 में भी जकार्ता में हुए एशियाई खेलों के वक्त भी विनेश फोगाट का वजन 3-3.5 किलो बढ़ गया था। उस वक्त भी विनेश 50 किलोग्राम की फ्री स्टाइल रेसलिंग में हिस्सा ले रही थीं। उस वक्त भी उनके कोच ने उन्हें कंबल ओढ़ाकर रेसलिंग हॉल के भीतर खूब दौड़ाया था, जिससे जमकर पसीना निकला था। हालांकि, उस वक्त उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था।

विक्रम सोनकर पुरानी दिल्ली स्थित गुरु प्रेमनाथ अखाड़े में लड़के-लड़कियों दोनों को ही कुश्ती के दांव-पेंच सिखाते हैं। इस अखाड़े को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने अडॉप्ट भी किया हे। उनके अनुसार, विनेश के साथ साजिश की बात कहना बेकार की बात है। ओलंपिक के नियम सबको पहले से पता होते हैं। वजन बढ़ने से लेकर हर चीज का ख्याल रखा जाता है। विनेश का ध्यान रखने वाली टीम को भी यह चीज अच्छे से पता होती हे कि उनका एक भी गलत कदम उन्हें प्रतिस्पर्धा से बाहर कर सकता है।

सोनकर कहते हें कि विनेश क्या किसी भी खिलाड़ी का वजन कभी भी बढ़ सकता है। इसके पीछे खान-पान से लेकर कई कारण हो सकते हैं। विनेश तो 53 किलो के वर्ग में खेलती थीं। पेरिस ओलंपिक के लिए वह अपना वजन 50 किलो से नीचे लाने में कामयाब रही थीं। इसीलिए उन्होंने इसी कैटेगरी में खेलने का फैसला किया था। वह अपना वजन 56-57 किलो से घटाकर 50 किलो से नीचे लेकर आई थीं। ऐसे में जरा सी भी चूक से वजन रातोंरात बढ़ सकता है। यह एक सामान्य सी प्रक्रिया है। जरा सा भी कुछ खाया-पिया या पानी भी पिया तो 2-3 किलो वजन बढ़ सकता है।

वहीं, रांची में इंटरनेशनल मेडिसिन के डॉक्टर रविकांत चतुर्वेदी कहते हैं कि किसी एथलीट का रात भर में या 12 घंटे में वजन बढ़ सकता है। वजह ये है कि उस एथलीट का मौजूदा वजन उसका सामान्य औसत वजन नहीं है। उसे वह कड़ी मेहनत के बाद हासिल करता है। ऐसा वजन किसी भी वजह से बढ़ सकता है। यहां तक कि अगर एथलीट ने पानी भी पी लिया तो भी उसका वजन बढ़ सकता है। यहां तक कि वो कुछ भी न खाए या भूखे रहे तो भी पेट में गैस बनने या पेट फूलने से भी वजन बढ़ सकता है, क्योंकि इससे भी पेट में प्रेशर बढ़ जाता है।

मुकाबले से पहले महिला रेसलर का वजन होता है। दिन के मुकाबले के लिए सुबह वजन किया जाता है। यह वजन तकनीकी टीम और कोच की देखरेख में होता है। खिलाड़ी को एक तय समयसीमा में ही वजन देता होता है। अगर पहलवान वजन देने में देरी करता है, तो भी वजन लेने से मना किया जा सकता है। अगर मैच जीत कर कोई खिलाड़ी सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंचता है, तो सुबह के वक्त उसका वजन किया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि खिलाड़ी के प्रयास करने के बाद भी वजन कम नहीं होता। पहले से ही वजन दो-तीन किलो बढ़ा है, तो उसे कम करने में बेहद मुश्किल आती है। ऐसे में प्रैक्टिस या खून देने या बाल कटाने जैसी कोशिशों से भी वजन घट नहीं पाता है।

क्या आने वाले समय में विनेश फोगाट को मिल सकता है सिल्वर मेडल ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आने वाले समय में विनेश फोगाट को सिल्वर मेडल मिल सकता है या नहीं! रेसलर विनेश फोगाट को क्या सिल्वर मेडल मिल सकता है? आखिर उन्होंने पहला मुकाबला तो जीता ही था। भले ही वो 100 ग्राम वजन ज्यादा पाए जाने पर फाइनल मुकाबले से बाहर हो गई हों, मगर उनका पिछला जीता हुआ मेडल तो मिलना ही चाहिए…कुछ ऐसा ही सवाल सोशल मीडिया पर पूरा देश पूछ रहा है? विनेश ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय खेल पंचाट न्यायालय यानी कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (CAS) का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने भी उनकी अपील मंजूर कर ली है। विनेश ने अपनी अपील में संयुक्त रूप से सिल्वर मेडल से सम्मानित किए जाने का अनुरोध किया है। इससे विनेश के सिल्वर पाने की उम्मीद लगाने वालों के लिए एक किरण दिखाई दे रही है। आइए- जानते हैं कि क्या है खेल पंचाट न्यायालय, इसके नियम क्या हैं और क्या इसका फैसला बाध्यकारी होगा? क्योंकि विनेश की पूरी लड़ाई अब गोल्ड से हटकर सिल्वर पर आ गई है। खेल पंचाट न्यायालय एक अंतरराष्ट्रीय और सर्वोच्च अपीलीय निकाय है, जिसकी स्थापना 1984 में खेल से संबंधित विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से निपटाने के लिए की गई थी। यह कोर्ट स्विट्जरलैंड के लॉजेन में स्थित है। यह किसी भी खेल संगठन से स्वतंत्र रूप से काम करता है। इस कोर्ट के पास एथलीटों, कोच और खेल महासंघों से जुड़े विवादों पर अधिकार क्षेत्र है। न्यायालय को खेल-संबंधी विवादों को सुलझाने और खेलों में निष्पक्ष खेल और न्याय के सिद्धांतों को कायम रखने के लिए सर्वोच्च प्राधिकरण के रूप में मान्यता प्राप्त है। CAS में 87 देशों के लगभग 300 एक्सपर्ट्स हैं, जिन्हें मध्यस्थता और खेल कानून के उनकी विशेषाता के लिए चुना गया है। हर साल CAS लगभग 300 मामले दर्ज करता है। इसका फैसला बाध्यकारी माना जाता है।

पेरिस, 2024 ओलंपिक खेलों के लिए CAS के पेरिस में दो अस्थायी कार्यालय हैं। उनमें से एक सीएएस अस्थायी डिवीजन है, जिसका काम खेलों के दौरान पैदा होने वाले किसी भी कानूनी विवाद को हल करना है। इस तरह के अस्थायी न्यायाधिकरण 1996 से ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन ओलंपिक खेलों के हर संस्करण के साथ-साथ अन्य प्रमुख खेल आयोजनों में भी मौजूद हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पेरिस बार ने पेरिस में सीएएस के तदर्थ डिवीजन के समक्ष फोगाट का प्रतिनिधित्व करने के लिए हरीश सॉल्वे समेत चार एडवोकेट मुहैया कराए हैं, जिसकी सुनवाई आज से शुरू होनी है। हालांकि, इस मामले में फैसला आने में कुछ समय लग सकता है।

बताया जा रहा है कि फोगाट ने अपने एडवोकेट के माध्यम से यह तर्क दिया है कि क्वॉर्टर फाइनल और सेमी फाइनल मुकाबले जब उन्होंने जीत लिए थे तो दूसरे दिन के फाइनल मुकाबले के आधार पर उन्हें सिल्वर मेडल से क्यों वंचित किया जा रहा है? दूसरा, फोगाट यह भी दावा कर सकती हैं कि अधिक वजन होने के कारण उन्हें प्रतियोगिता के दूसरे दिन ही अयोग्य ठहराया जा सकता है और इसका प्रतियोगिता के पहले दिन के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसा कहा जा रहा है कि विनेश फोगाट की टीम ने कोर्ट के समक्ष यह अनुरोध किया है कि प्रतियोगिता के पहले दिन में उनकी रैंकिंग को बरकरार रखते हुए उन्हें संयुक्त रजत पदक दिया जाए, क्योंकि उन्होंने सभी नियमों के मुताबिक उस दिन तीनों मुकाबले जीते थे।

ओलंपिक में कुश्ती आयोजनों की देखरेख करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) का नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि कोई भी एथलीट जो प्रतियोगिता के दोनों दिनों में अपना वजन बढ़ा लेता है तो उसे खुद ही अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा और पूरी प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रखा जाएगा। दरअसल, फोगाट को 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अंतिम मुकाबले में प्रतिस्पर्धा करने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जबकि 50 किलोग्राम वर्ग के लिए प्रतिस्पर्धा करते समय उनका वजन 50.1 किलोग्राम था।

यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के तय नियमों के तहत पहलवानों का वजन मुकाबले के पहले दिन लिया जाता है। मुकाबले से पहले हर दिन वजन लिया जाता है। जो लोग किसी भी दिन अपनी तय कैटेगरी में वजन कायम रख पाने में फेल हो जाते हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाता है और पूरी प्रतियोगिता में अपनी रैंक खो देते हैं। फोगाट ने प्रतियोगिता के पहले दिन अपना वजन बढ़ा लिया था, दूसरे दिन फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन अधिक पाया गया, जिस वजह से पहले दिन अपने सभी विरोधियों को सफलतापूर्वक हराकर फाइनल में पहुंचने के बावजूद उन्होंने अपनी रैंक गंवा दी। इस वजह से फाइनल में पहुंचने के लिए जीते गए मुकाबले के बावजूद वह सिल्वर मेडल के लिए योग्य नहीं रह गई थीं।

UWW के अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों के चैप्टर 3 की धारा 11 में कहा गया है कि सभी प्रतियोगिताओं के लिए हर सुबह संबंधित भार वर्ग में वजन मापा जाता है। वेट इन और मेडिकल प्रॉसेल करीब 30 मिनट तक चलता है। दूसरे दिन सुबह संबंधित भार वर्ग में केवल रेपेचेज और फाइनल में भाग लेने वाले पहलवानों को ही वजन के लिए आना होता है। यह वेट-इन 15 मिनट तक चलेगा। फोगाट भी नियमों के तहत दी गई 15 मिनट की अवधि के दौरान अपना वजन 50.1 किलोग्राम से कम करने में असमर्थ रही, जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।

वक्फ संशोधन बिल 2024 के लिए क्या बोल जदयू?

हाल ही में वक्फ संशोधन बिल 2024 के लिए जदयू ने भी अपना बयान दे दिया है ! वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार की ओर से नया बिल लाया गया है। गुरुवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश कर दिया गया। कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने ये बिल लोकसभा में पेश किया। जैसे ही ये बिल सदन के पटल पर रखा गया कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, सपा समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध किया। वहीं एनडीए में शामिल जेडीयू ने बिल का सपोर्ट कर दिया है। जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि ये बिल कहां मुसलमान विरोधी है। मंदिर-संस्था में फर्क मालूम नहीं है। ललन सिंह ने कहा कि कई माननीय सदस्यों की मैंने बात सुनी। जेडीयू एक पार्टी है। हमें अपनी बात कहनी होगी। कई सदस्यों की बात सुनने से जैसे यह जो संशोधन लाया गया वो मुसलमान विरोधी है, कहां से मुसलमान विरोधी है। यहां अयोध्या मंदिर का उदाहरण दिया जा रहा है, मंदिर और संस्था में फर्क नहीं मालूम है। आपके मस्जिद को छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है, यह एक कानून से बना हुआ संस्था है।

ललन सिंह ने कहा कि उस संस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कानून बनाया जा रहा है, कोई निरंकुश, कोई भी कानून से वक्फ बोर्ड किसी कानून से बना है, कानून से बना कोई भी संस्ता निरंकुश होगा, तो उसमें सरकार को हक है कानून बनाने का। इसका मंदिर से कहां मतलब है। कोई धर्म के नाम पर बंटवारा नहीं हो रहा है।मुंगेर से जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि ये अल्पसंख्यक की बात कर रहे हैं, केसी वेणुगोपाल अल्पसंख्यक की बात करते हैं। इस देश में हजारों पंजाबी सिखों को किसने मारने का काम किया था। आपकी पार्टी ने किया था, हम उसके गवाह हैं। कौन सा सिख ड्राइवर था जिसने सिखों की हत्या की थी। इस बिल को आना चाहिए, पारदर्शिता आनी चाहिए, कोई भी संस्था पारदर्शी तरीके से काम करे यही आग्रह है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वक्फ बोर्ड के अधिकारों को कम करने का प्लान बना रही। जल्द ही वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन का बिल संसद में पेश किया जाएगा। ऐसी उम्मीद है कि 5 अगस्त को ही सरकार इसे संसद में लाने जा रही है। इस नए बिल में किसी जमीन को अपनी संपत्ति यानी वक्फ की संपत्ति बताने वाली पावर पर रोक लगेगी। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में वक्फ कानून से जुड़े 40 संसोधन पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दे दी गई। प्रस्तावित बिल में मौजूदा कानून से जुड़े कई क्लॉज हटाए जा सकते हैं। आइये समझते हैं कि वक्फ बोर्ड क्या है, इसे कौन-कौन सी पावर मिली हुई है। वक्फ का मतलब होता है ‘अल्लाह के नाम’, यानी ऐसी जमीनें जो किसी व्यक्ति या संस्था के नाम नहीं है। वक्फ बोर्ड का एक सर्वेयर होता है। वही तय करता है कि कौन सी संपत्ति वक्फ की है, कौन सी नहीं। इस निर्धारण के तीन आधार होते हैं- अगर किसी ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी, अगर कोई मुसलमान या मुस्लिम संस्था जमीन की लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है या फिर सर्वे में जमीन का वक्फ की संपत्ति होना साबित हुआ। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समाज की जमीनों पर नियंत्रण रखने के लिए बनाया गया था। जिससे इन जमीनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने और गैरकानूनी तरीकों से बेचने पर रोक के लिए बनाया गया था।

वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति करार दे देता है। इन मजारों और आसपास की जमीनों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा हो जाता है। चूंकि 1995 का वक्फ एक्ट कहता है कि अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की संपत्ति है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होती है कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। 1995 का कानून यह जरूर कहता है कि किसी निजी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड अपना दावा नहीं कर सकता, लेकिन यह तय कैसे होगा कि संपत्ति निजी है? अगर वक्फ बोर्ड को सिर्फ लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो उसे कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं करना है। सारे कागज और सबूत उसे देने हैं जो अब तक दावेदार रहा है। कौन नहीं जानता है कि कई परिवारों के पास जमीन का पुख्ता कागज नहीं होता है। वक्फ बोर्ड इसी का फायदा उठाता है क्योंकि उसे कब्जा जमाने के लिए कोई कागज नहीं देना है।

क्या अब सरकार करेगी वक्फ बोर्ड की हैसियत कम?

आने वाले समय में अब सरकार वक्फ बोर्ड की हैसियत काम करने जा रही है! केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश होने जा रहा है। इसे लेकर लोकसभा के बिजनेस अडवाइजरी कमिटि में चर्चा हुई। जब से इस बिल के संसद में आने की बात और बिल के मसौदा सामने आया है, मुस्लिम समाज से लेकर मुस्लिम नेताओं और विपक्ष में इसे लेकर खासा रोष दिखाई दे रहा है। इसकी वजह मानी जा रही है कि संशोधित बिल के जरिए सरकार वक्फ बोर्ड की ताकत व हैसियत कम करने जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस बिल के जरिए सरकार देश के वक्फ बोर्ड्स की पूरी प्रक्रिया जवाबदेह व पारदर्शी बनाना चाहती है। हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने इस बिल के मद्देनजर कहा है कि वह मौजूदा वक्फ कानून में किसी तरह का कोई बदलाव मंजूर नहीं करेगा। इस बिल को लेकर विवाद का सबसे बड़ा बिंदु वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। दरअसल, देश में कुल 32 वक्फ बोर्ड हैं। इनके बीच तालमेल के लिए केंद्र सरकार के अल्पसंयख्क मामलों के मंत्रालय की ओर से सेंट्रल वक्फ काउंसिल बनाया गया। यह वक्फ बोर्डों के कामकाज के मामलों में केंद्र सरकार को सलाह देती है। वर्ष 1995 में वक्फ एक्ट में बदलाव भी किया गया और हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ बोर्ड बनाने की मंजूरी दी गई। है। देश के कुल वक्फ बोर्ड के पास फिलहाल आठ लाख एकड़ जमीन है। साल 2009 में यह संपत्ति चार लाख एकड़ हुआ करती थी। इन जमीनों में ज्यादातर हिस्सों में मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान हैं। दिसंबर 2022 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 8,65,644 अचल संपत्तियां थीं। अचल सपंत्ति के लिहाज से देखा जाए तो वक्फ बोर्ड देश में रेल व सेना के बाद तीसरे सबसे बड़े जमीन के मालिक हैं।

दरअसल, 2013 में यूपीए सरकार के समय में वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन कर इन्हें असीमित अधिकार दे दिए गए थे। मौजूदा कानून के तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकार या कोर्ट तक संपत्ति विवाद के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। अगर किसी जमीन को लेकर कोई विवाद होता है तो उसे साबित करने की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड की नहीं, बल्कि दूसरी पार्टी की होती है। बोर्ड को अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए किसी तरह तरह का कोई सबूत या दस्तावेज नहीं देना होता। बिल लाने की वजह यह भी है कि इनके पास जितनी जमीन है और इनके द्वारा जो रेवेन्यु दिखाया जा रहा है, उनमें आपस में मेल नहीं दिखता। वक्फ बोर्ड महज साल का 200 करोड़ का राजस्व दिखाता है। इन्हीं बिंदुओं के चलते वक्फ बोर्ड के पास मौजूद इन असीम शक्तियों को लेकर कई ओर से विरोध के सुर उठते रहे। यहां तक कि सच्चर कमिटि ने भी अपनी रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता की बात कही। उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार में हुए बदलाव के बाद से आम मुस्लिम, गरीब मुस्लिम महिलाएं, तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के बच्चे, शिया व बोहरा जैसे समुदाय लंबे समय से मौजूदा कानून में बदलाव की मांग कर रहे थे। इन लोगों की दलील थी कि वक्फ में आज आम मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, सिर्फ रसूखदार लोगों को ही जगह मिलती है।

बिल पर मुस्लिम समुदाय के अलावा राजनीतिक स्तर पर इसका विरोध देखा जा रहा है। एआईएमआईएम चीफ व हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते है कि वक्फ एक्ट में प्रस्तावित संशोधन वक्फ संपत्तियों को छीनने के इरादे से किया जा रहा है। उन्होंने इन संशोधनों को संविधान में दिए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रहार करार देते हुए कहा कि संघ की मंशा शुरू से ही वक्फ संपत्तियों को छीनने की रही है। जबकि आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए मीडिया में कहा कि केंद्र सरकार की निगाह कहीं, निशाना कहीं और है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी धर्म विशेष को टारगेट करना और विवादित मुद्दों पर बहस करना असल मकसद है। असली मुद्दों पर चर्चा ना हो, इसलिए सरकार इन मुद्दों पर बहस करती है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा की बिजनेस अडवाइजरी कमिटि में विपक्षी दलों द्वारा कहा गया है कि इस बिल को सदन में पेश करने के बाद इसे संसद की स्थायी समिति के पास विचार के लिए भेजा जाए।

यह बिल मोदी सरकार के तीसरे टर्म का पहला शक्ति परीक्षण होगा। जहां एक ओर विपक्ष इसे स्थायी समिति के पास भेजने की अपनी मांग पर खड़ा दिखेगा, वहीं देखना होगा कि एनडीए सरकार में बीजेपी के दो प्रमुख घटक दल जेडीयू व टीडीपी सदन के भीतर इस बिल पर अपना क्या रुख अपनाते हैं। इन दोनों ही दलों को मुस्लिम समुदाय में अपना वोट आधार है। ऐसे में उनके सरोकारों की अनदेखी कर क्या ये दोनों दल बीजेपी के साथ खड़े होना चाहेंगे? दरअसल, लोकसभा व राज्यसभा दोनों ही जगह बीजेपी के पास इतना संख्याबल नहीं है कि वह अपने दम पर बिल पास करा ले जाए। बिल को पास कराने के लिए उसे लोकसभा में जेडीयू व टीडीपी की जरूरत पड़ेगी, वहीं राज्यसभा में भी उसे एनडीए के घटक दलों का साथ चाहिए होगा।

आखिर वक्फ संशोधन बिल में क्या क्या है खास?

आज हम आपको बताएंगे कि वक्फ संशोधन बिल में आखिर क्या-क्या खास है! वक्फ संशोधन बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश हो गया। बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल पहली बार इस सदन में पेश नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘आजादी के बाद 1954 में एक्ट लाया गया। उसके बाद एक्ट में कई संशोधन हुए। हम 1995 के कानून में संशोधन के लिए बिल ला रहे हैं क्योंकि 2013 में ऐसे प्रावधान लाए गए, जिसने वक्फ एक्ट 1995 का स्वरूप बदल दिया है।’ किरेन रिजिजू ने कहा, ‘आज जो विधेयक लाया जा रहा है वह सच्चर समिति की रिपोर्ट (जिसमें सुधार की बात कही गई थी) पर आधारित है, जिसे आपने (कांग्रेस ने) बनाया था।’ केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में जानकारी दी है कि वक्फ संशोधन बिल पहली बार नहीं लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘1954 में आजादी के बाद ये कानून लाया गया था। फिर इसमें कई बार संशोधन भी हुए।’ रिजिजू ने आगे बताया कि 2013 में वक्फ कानून 1995 में कुछ बदलाव हुए थे, जिसके कारण अब 1995 के कानून में बदलाव के लिए ये नया बिल लाया गया है। यानी पुराने कानून में 2013 में जो बदलाव हुए थे, उनमें सुधार के लिए सरकार ये नया बिल लाई है।

किरने रिजिजू ने कहा, ‘वक्फ बोर्ड के अंदर में 12792 केस आज पेंडिंग हैं। ट्राइब्यूनल में कुल 19207 केस पेंडिंग हैं। क्यों इसको हम खत्म नहीं कर सकते हैं। टाइम लाइन बहुत जरूरी है, न्याय मिलना चाहिए लेकिन समय पर न्याय मिलना चाहिए। अब हमने टाइमलाइन सेट कर दिया है। अपील 90 दिन के अंदर, 6 महीने के अंदर डिस्पोजल होना चाहिए।’ रिजिजू ने अपने भाषण के दौरान शोर करने वाले विपक्षी सांसदों से कहा, ‘अगर सुनना नहीं चाहते हैं तो इतना सवाल क्यों पूछा। इस बिल में सरकार यह प्रावधान कर रही है कि गैर मुस्लिम भी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हो सकते हैं।आप सवाल पूछकर भाग जाना चाहते हो, ऐसा नहीं होने देंगे।’ करीब एक घंटा बोलने के बाद किरेन रिजिजू ने इस बिल को जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस बिल को जेपीसी के लिए भेजने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने कि वो इस मामले में कमिटी बनाने का काम करेंगे।

वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन बिल पास होने के बाद वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को अपना नहीं बता सकेगा। अभी वक्फ के पास किसी भी जमीन को अपनी संपत्ति घोषित करने की शक्ति है। जमीन पर दावे से पहले उसका वेरिफिकेशन करना होगा। इससे बोर्ड की मनमानी पर रोक लगेगी। बोर्ड के पुनर्गठन से बोर्ड में सभी वर्गों समेत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी। मुस्लिम बुद्धिजीवी, महिलाएं और शिया और बोहरा जैसे समूह लंबे समय से मौजूदा कानूनों में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कुछ नेता इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसका विरोध कर रहे हैं। इस बिल पर राजनीतिक दलों के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आ रही है, जिससे सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर एतराज जताया। उन्होंने बिल को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार बंटवारे की राजनीति कर रही है, इस तरह की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि वक्फ के पास दान की गई संपत्ति आती है। इस बिल में सरकार यह प्रावधान कर रही है कि गैर मुस्लिम भी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हो सकते हैं।

डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि इस बिल के पास होने के बाद नॉन मुस्लिम भी बोर्ड के सदस्य बन सकेंगे, जो गलत है। उन्होंने कहा कि कोई पसंद नहीं करेगा कि जो आपके धर्म का नहीं है, वो आपके धर्म में हस्तक्षेप करे। इस बिल के माध्यम से विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। यह बिल मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ है। टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इस बिल को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान विरोधी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर कहा कि मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं। विधेयक के जरिए संविधान की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की जा रही है। वक्फ बोर्ड की संपत्ति को खत्म करके आप डीएम राज लाकर बोर्ड की संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं।

आखिरकार पेरिस ओलंपिक में छाई गई देश की बेटी मनु भाकर?

आखिरकार पेरिस ओलंपिक में देश की बेटी मनु भाकर वर्तमान में छा चुकी है! पेरिस ओलंपिक में महिला 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीतने पर देशभर से मनु भाकर को जीत की बधाई मिल रही हैं। पीएम मोदी, राष्ट्रपति, खेल मंत्री मनसुख मांडविया समेत कई दिग्गज हस्तियों ने मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में भारत का खाता खोलने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने मोदी ने इस मेडल को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने लिखा कि पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक जीतने के लिए मनु भाकर को बधाई। कांस्य (पदक) के लिए बधाई। यह सफलता इसलिए और भी खास है क्योंकि वह भारत के लिए निशानेबाजी में पदक जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं। कमाल की उपलब्धि।वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मनु भाकर की ऐतिहासिक जीत पर उनको बधाई देते हुए एक्स पर लिखा- उनकी उपलब्धि कई खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। मनु के पिता रामकिशन ने कहा कि उनकी बेटी की कड़ी मेहनत रंग लाई। उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि हम बहुत खुश हैं और हमारे सभी दोस्त हमें बधाई दे रहे हैं। उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई और मनु ने आखिरकार यह कर दिखाया। वहीं मनु की मां सुमेधा ने कहा कि मैं उसका समर्थन करने के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं और मुझे उम्मीद है कि आप सभी उसे आशीर्वाद देते रहेंगे। मनु के चाचा प्रताप सिंह ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मैंने उसे बहुत प्रेरित किया। मैंने उसे बड़ों का सम्मान करने और खुद पर विश्वास करने के लिए कहा। ओलंपिक में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनकी दादी दया कौर ने कहा कि मेरा आशीर्वाद उस पर है।

वहीं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने लिखा कि गर्व का पल,मनु भाकर ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक में भारत का पहला पदक जीता। उन्होंने लिखा मनु को बधाई, आपने अपना कौशल और समर्पण दिखाया है। आप ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला निशानेबाज बन गई हैं। भारत के एकमात्र निशानेबाजी स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने कहा कि इस 22 साल की निशानेबाज के अथक समर्पण, कड़ी मेहनत और जुनून ने सचमुच रंग दिखाया।

वहीं नीता अंबानी ने इसे अविश्वसनीय पल करार करते हुए कहा कि हमारी सबसे कम उम्र की महिला निशानेबाज ने कांस्य पदक के साथ पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का खाता खोला। बधाई हो, मनु भाकर। ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल जीतने वाली पहली भारतीय महिला और ऐसा करने वाली हमारी सबसे कम उम्र की भारतीय निशानेबाज बनकर आपने इतिहास रच दिया। मुझे विश्वास है कि आज आपकी सफलता भारत भर के युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करेगी। भारतीय तिरंगे को ऊंचा रखें। ‘

गो इंडिया गो’ हम सभी को गौरवान्वित करें। यही नहीं पेरिस ओलंपिक का समापन स्टेड डी फ्रांस स्टेडियम में रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात हुआ. रंगारंग समारोह के बीच आयोजन समिति के अध्यक्ष टोनी एस्तांगुएट और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के अध्यक्ष थॉमस बाख ने संबोधित किया. टोनी एस्टांगुएट ने कहा कि यह ओलंपिक गेम्स का समापन नहीं, बल्कि उद्घाटन समारोह की समाप्ति है. खेल तो अनवरत होते रहेंगे. थॉमस बाक ने लॉस एंजिल्स के मेयर को ओलंपिक ध्वज सौंपा. पेरिस ओलंपिक का समापन समारोह तीन घंटे तक चला. शुरुआत फ्रेंच गीत से हुई. इसके बाद परेड ऑफ नेशंस हुई. फिर बेल्जियम की पॉप सिंगर एंजेले वान वीक ने परफॉर्म किया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के गोल्डन वॉयजर बैंड ने ओलिंपिक की खोज दिखाई. फ्रांस के बैंड फिनिक्स की परफॉर्मेंस में एंजेले, कमिस्की और रैपर वनाडा ने भी परफॉर्म किया. फिर पांच ग्रैमी अवॉर्ड विनर गैब्रिएला सरमिएंटो विल्सन ने अमेरिका का नेशनल एंथम गाया.

इसी बीच हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज ने भी समारोह में परफॉर्म किया. वे स्टेडियम की छत से एक रोप के जरिये नीचे उतरे. फिर सिमोन बाइल्स और लॉस एंजिल्स के मेयर से ओलंपिक फ्लैग लिया और बाइक से उसे लेकर चले गए. अगले ही सीन में उन्होंने एक प्लेन से फ्लैग के साथ जंप किया और लॉस लॉस एंजिल्स में उतरे (यह सीन पहले ही शूट कर लिया गया था). इसके बाद अमेरिका के महान एथलीट माइकल जॉनसन को फ्लैग सौंपा गया. आखिर में ओलंपिक मशाल बुझाकर समारोह का अंत किया गया. क्लोजिंग सेरेमनी में एक वक्त ऐसा आया कि जब स्टेडियम में घुप्प अंधेरा छा गया. इसके बाद लाइट शो शुरू हुआ. लाइट शो की थीम ‘गोल्डन वॉयजर’ थी. शो में एक कहानी दिखाई गई. एक ट्रैवलर, गोल्डन मैन, जिसका सारा शरीर सोने का बना हुआ है. वह दुनिया की सैर पर निकलता है. ग्रीस पहंचता है, जहां, 2800 साल पहले ओलंपिक गेम्स की शुरुआत हुई थी.

भारत से अब कहां जाने का विचार रखती है शेख हसीना?

 

आज हम आपको बताएंगे कि भारत से अब कहां जाने का शेख हसीना विचार रखती है! बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां पर बहुत कुछ बदल गया है। अंतरिम सरकार का गठन हो जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की कमान संभालेंगे। इसी बीच बांग्लादेश के हालात पर भारतीय विदेश मंत्रालय की भी प्रतिक्रिया आ गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में हर पल हालात बदल रहे हैं। अपने लोगों का ध्यान रखना हर सरकार की जिम्मेदारी होती है। भारत इसे लेकर चिंतित है। हमारी बातचीत वहां की सरकार से भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चल रही है। हम आशा करते हैं कि वहां के हालात जल्द ही सुधर जाएं।इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के आगे के प्लान को लेकर उठ रहे सवाल पर का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक शेख हसीना के भारत में ही रहने या कहीं और जाने की बात है तो यह फैसला उनको करना है। हमें उनके प्लान के बारे में अभी नहीं पता है। इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए समूहों और संगठनों द्वारा विभिन्न पहल की गई हैं। मैं संसद में विदेश मंत्री द्वारा कही गई बातों को दोहराना चाहूंगा कि हम इन कदमों का स्वागत करते हैं, लेकिन स्वाभाविक रूप से कानून और व्यवस्था के स्पष्ट रूप से बहाल होने तक हम बहुत चिंतित रहेंगे।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश में करीब 19,000 भारतीय थे जिनमें से छात्रों की संख्या 9,000 थी। वहां पर प्रदर्शन के उग्र होने पर अधिकांश छात्र भारत लौट आए हैं। छात्रों के अलावा कई भारतीयों ने भी दूतावास से मदद की गुहार लगाई थी। जिनकी मदद की जा रही है। इसी बीच शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने एक बड़ा ऐलान किया है। सजीब वाजेद जॉय न कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होते ही उनकी मां अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनके देश में अशांति फैलाने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है।

जॉय ने कहा कि हालांकि 76 वर्षीय हसीना निश्चित रूप से बांग्लादेश लौटेंगी, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि वह सेवानिवृत्त नेता के रूप में लौटेंगी या सक्रिय नेता के रूप में। उन्होंने यह भी कहा कि शेख मुजीब (शेख मुजीबुर रहमान) परिवार के सदस्य न तो अपने लोगों को छोड़ेंगे और न ही संकटग्रस्त अवामी लीग को बेसहारा छोड़ेंगे।जॉय ने अपनी मां की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भारत से अंतरराष्ट्रीय राय बनाने में मदद करने और बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के लिए दबाव बनाने की अपील की। इधर भारत अपने अहम पड़ोसी को लेकर वेट एंड वॉच की नीति पर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में साफ कहा था कि भारत सरकार ने वहां की राजनीतिक ताकतों से हमेशा संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए कहा है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। दरअसल, इस वक्त भारत सरकार की प्राथमिकता वहां रह रहे भारतीयों की वापसी को लेकर भी है।

इस बीच जेल से रिहा हुईं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने ढाका में अपनी पार्टी की एक विशाल रैली को संबोधित किया। 79 साल की जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोप में 17 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने तीसरे देश में शरण मांगने वाले सवाल पर बुधवार को कहा, ‘ये सभी अफवाहें हैं। उन्होंने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। वह कुछ और समय के लिए दिल्ली में ही रहेंगी। मेरी बहन उनके साथ हैं।’ क्या उनकी राजनीति में आने की कोई योजना है? इस सवाल पर जॉय ने कहा, ‘ऐसी योजना नहीं है। यह तीसरी बार है जब परिवार के खिलाफ तख्तापलट किया गया है।’

बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक, वहां सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और BNP के सेक्रेटरी जनरल एक एम महबूब की ओर से कहा गया कि भारत को शेख हसीना और उनकी बहन रेहाना को वापस बांग्लादेश भेज देना चाहिए। ऐसे में हसीना की भारत में मौजूदगी भारतीय डिप्लोमेसी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली हैं। बांग्लादेश में वैसे भी पहले से एंटी इंडिया भावना बीते कुछ समय से उभार पर रही है। ऐसे में भारत नहीं चाहेगा कि वहां इस तरह की भावना को और जगह मिले। वह भी तब जबकि वहां नई सरकार के गठन के लिए चहल-पहल शुरू हो गई है।

क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को बचाएगी भारत सरकार?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारत सरकार बचाएगी या नहीं! बांग्लादेश के मौजूदा हालात में वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने भी चिंता जताई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत सरकार से मांग की है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। संघ के पूर्व सरकार्यवाहक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि बांग्लादेश एक अलग देश है और वहां स्वंयसेवी संगठन के तौर पर काम करने में हमारी कुछ मर्यादा है। उन्होंने कहा कि हमने सरकार से अपील की है कि वहां के हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और हमें विश्वास है कि सरकार जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से जो खबरें सामने आ रही है, उससे ऐसा दिख रहा है कि वहां हिंदू टारगेट हो रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदूमहाजोत के जनरल सेक्रेटरी गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने मंगलवार को एक वीडियो मैसेज जारी करते हुए कहा कि यह खबरें आ रही थी कि कई मंदिरों में तोड़फोड़ हुई हैं, हमने भी यह सुना, फिर जब चेक किया तो पता चला कि ढाका के एक मंदिर में ऐसा हुआ है लेकिन वहां पर जमीन को लेकर विवाद था। इस्कॉन टेंपल के डैमेज होने की रिपोर्ट आई लेकिन यह फेक न्यूज थी। अल्पसंख्यकों को नुकसान ना पहुंचाएं, वे हमारे दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य नहीं है लेकिन धीरे धीरे नॉर्मल हो रही है। अंतरिम सरकार बनने तक देश में टेंशन रहेगी कि आगे क्या होगा।उन्होंने कहा कि यहां विरोध तानाशाह शेख हसीना के खिलाफ है न कि किसी हिंदू या अल्पसंख्यक के खिलाफ। आवामी लीग के कुछ हिंदू नेताओं के घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हमला हुआ और आग लगाई गई लेकिन अब स्थिति ठीक हो रही है। स्टूडेंट्स हिंदू मंदिरों को गार्ड कर रहे हैं।

बांग्लादेश के सीनियर जर्नलिस्ट मकसूद-उन-नबी ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि हसीना के देश छोड़ने के बाद लोगों ने सेलिब्रेट किया, इसे दूसरी आजादी की तरह मना रहे हैं। कुछ तोड़फोड़, हिंसा की घटनाएं हुई हैं, कुछ ग्रुप ने जानबूझकर हिंसा की। कुछ आवामी लीग के ऑफिस में आग लगाई। सिक्योरिटी क्राइसेस है क्योंकि पुलिस काम नहीं कर रही, पुलिस खुद सिक्योरिटी चाहते हैं क्योंकि लोग पुलिस के खिलाफ हैं। पुलिस भी सरकार का पार्ट थी और उन्होंने लोगों पर फायरिंग की थी जिससे बहुत मौतें हुई। हालांकि अब पुलिस के प्रमुख को चेंज कर दिया गया है। मकसूद ने कहा कि दशकों से यहां लोग चाहे किसी भी धर्म के हों वे एक साथ मिलकर शांति से रह रहे हैं। कभी कभी घटनाएं हुई हैं लेकिन जिस तरह की बातें की जा रही हैं कि बड़ी संख्या में रिफ्यूजी भारत की तरफ जा रहे हैं, यह गलत है।

उन्होंने कहा कि दो दिन पहले हालात ज्यादा खराब थे लेकिन अब कई स्टूडेंट्स, सोशल संगठन यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हिंदू मंदिरों की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। स्टूडेंट्स खुद सुरक्षा दे रहे हैं, लोगों से कह रहे हैं कि नुकसान न पहुंचाएं। मस्जिदों से इमाम भी अनाउंस कर रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि अल्पसंख्यकों को नुकसान ना पहुंचाएं, वे हमारे दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य नहीं है लेकिन धीरे धीरे नॉर्मल हो रही है। अंतरिम सरकार बनने तक देश में टेंशन रहेगी कि आगे क्या होगा।

वह कहते हैं कि मैं यह नहीं कह रहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का डर नहीं है, कई जगह हिंसा हुई है लेकिन ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में हैं जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। कई इस्लामिक संगठन अल्पसंख्यकों को और मंदिर को सुरक्षा दे रहे हैं।बता दें कि इस्कॉन टेंपल के डैमेज होने की रिपोर्ट आई लेकिन यह फेक न्यूज थी। उन्होंने कहा कि यहां विरोध तानाशाह शेख हसीना के खिलाफ है न कि किसी हिंदू या अल्पसंख्यक के खिलाफ। आवामी लीग के कुछ हिंदू नेताओं के घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हमला हुआ और आग लगाई गई लेकिन अब स्थिति ठीक हो रही है। हसीना के देश छोड़ने के बाद लोगों ने सेलिब्रेट किया, इसे दूसरी आजादी की तरह मना रहे हैं। कुछ तोड़फोड़, हिंसा की घटनाएं हुई हैं, कुछ ग्रुप ने जानबूझकर हिंसा की। कुछ आवामी लीग के ऑफिस में आग लगाई।स्टूडेंट्स हिंदू मंदिरों को गार्ड कर रहे हैं। मैं खुद कई मंदिरों में गया और देखा कि वहां स्टूडेंट्स ही सुरक्षा कर रहे हैं। वे रात भर वहीं रह रहे हैं ताकि कोई अराजक तत्व वहां तोड़फोड़ ना कर सके।

महिला कुश्ती बाज के लिए क्या सोच रहा है पूरा देश ?

आज हम आपको बताएंगे कि महिला कुश्ती बाज के लिए पूरा देश आखिर क्या सोच रहा है! विनेश बेहोश हो गईं। उन्हें पता चला कि फाइनल मुकाबला नहीं खेल सकतीं। क्यों? क्योंकि उनका वजन तय सीमा से 100-150 ग्राम ज्यादा है। यह खबर फ्रांस से भारत पहुंची और पूरा देश बदहवास, हर कोई सन्न… ये क्या हुआ! कल ओलिंपिक के सेट पर धड़ाधड़ पटखनी दे रहीं विनेश फोगाट यूं गेम से बाहर हो जाएंगी, ये कौन सोच सकता है! भारतीय कुश्ती के इतिहास में पहला ओलिंपिक गोल्ड मेडल मिलने का सपना देख रहा पूरा देश ये कैसे विश्वास करे कि गोल्ड क्या कोई मेडल नहीं मिल पाएगा! सपनों पर इतना बड़ा आघात, उम्मीदों पर इतना बड़ा प्रहार, आकांक्षाओं को इतना बड़ा झटका! ये महज नियम पर खरा उतरने में चूक का मामला नहीं, एक त्रासदी है। पेरिस में मिले जख्म ने विनेश को अस्पताल ही नहीं पहुंचाया, भारत की भावनाओं को रौंद दिया। सोशल मीडिया के घरौंदे में करोड़ों आहत मन का चित्कार गूंज रहा है।जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, “एक ही दिन में दुनिया की तीन धुरंधर पहलवानों को हराने के बाद आज विनेश के साथ-साथ पूरा देश भावुक है। किसी को नियम की आड़ में बेईमानी की बू आ रही है तो कोई ओलिंपिक का बहिष्कार करने तक का मन बना चुका है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा मंगलवार की रात एक्स पर पोस्ट करते हैं और विनेश की यात्रा को तस्वीरों में दिखाते हैं। वो लिखते हैं, ’17 अगस्त, 2023 को विनेश की एसीएल सर्जरी हुई। 25 अगस्त, 2023 को विनेश ने 29वीं जन्मदिन मनाया। हमने विनेश को पेरिस ओलिंपिक के लिए पूरी तरह तैयार करने का संकल्प लिया। 6 अगस्त, 2024 को विनेश ओलिंपिक्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। अब तो सिर्फ गोल्ड पर नजर है। सपनों का एकमात्र लक्ष्य तिरंगा।’

सोचिए, आज विरेन के दिल पर क्या बीत रही होगी? फिर विरेन ही क्यों, यही सपना तो पूरा भारत देख रहा था। सोहोम लिखते हैं, ‘विनेश फोगाट फाइनल में पहुंचने के बाद रातभर नहीं सोईं और अतिरिक्त दो किलो वजन घटाने के लिए कड़ी मेहनत करती रहीं। लेकिन 100 ग्राम से छंट गईं और अब अस्पताल में हैं। आखिर हम भी इस सदमे से कैसे उबर पाएंगे? यह भारतीय खेल इतिहास का संभवत: सबसे निष्ठुर, विनाशकारी और हृदय विदारक घटना है।’

विनेश, आप चैंपियनों की चैंपियन हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, पूरे देश समवेत स्वर यही है। आप अभी अस्पताल में हैं और हम सदमें में। लेकिन हर व्यक्ति, समाज, राष्ट्र के जीवन में उतार-चढ़ाव भरा दौर आता है। प्रकृति का यह नियम स्वीकार करके आपको, हमको, सबको उबरना होगा। हम उबरेंगे, आप फिर मैदान में होंगी। विजेता तो हम एक-एक भारतीय आपको मान ही चुके हैं, बस सुनहरे तमगे के लिए और चार बरस का इंतजार कर लेंगे। 100 ग्राम वजन का बढ़ना, आपका गौरव नहीं घटा सकता। हमें आप पर करोड़ों-अरबों टन का गर्व है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेरिस ओलंपिक में फाइनल में स्थान बनाने के लिए महिला पहलवान विनेश फोगाट को मंगलवार को बधाई दी और कहा कि आज भारत की बहादुर बेटी के सामने सत्ता का वो पूरा तंत्र धराशाई पड़ा था, जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, “एक ही दिन में दुनिया की तीन धुरंधर पहलवानों को हराने के बाद आज विनेश के साथ-साथ पूरा देश भावुक है।

राहुल ने कहा कि जिन्होंने भी विनेश और उसके साथियों के संघर्ष को झुठलाया, उनकी नीयत और काबिलियत तक पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए, उन सभी को जवाब मिल चुका है। उन्होंने कहा कि आज भारत की बहादुर बेटी के सामने सत्ता का वो पूरा तंत्र धराशाई पड़ा था जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। कांग्रेस नेता ने कहा, “चैम्पियंस की यही पहचान है, वो अपना जवाब मैदान से देते हैं। बहुत शुभकामनाएं विनेश। पेरिस में आपकी सफलता की गूंज, दिल्ली तक साफ सुनाई दे रही है।”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विनेश के फाइनल में पहुंचने से पहले एक्स पर पोस्ट किया, “शाबाश विनेश फोगाट। मैं जानती हूं कि आपके लिए यह सिर्फ ओलंपिक का कठिन मुकाबला भर नहीं है। आपने दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी को तो हराया ही, यह मैदान के भीतर और बाहर आपके संघर्षों की भी जीत है।” उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आपके हाथों में लहराता हुआ तिरंगा देख रही है। आप इस देश का गौरव हैं और हमेशा रहेंगी। खूब शुभकामनाएं। जय हो! विजय हो!