Friday, March 6, 2026
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क्या सच है Zombie बनने की कहानी? आखिर विदेशों में लोग क्यों ले रहे हैं Zombie drug?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सच में Zombie बनने की कहानी सच है या नहीं! हाल ही में कई ऐसी खबरें सामने आई जिसने बॉलीवुड मूवी गो गोवा गोन की याद दिला दी… आपने गो गोवा गोन तो जरूर देखी होगी जिसमें लोग अचानक अधमरे इंसान यानी Zombie की तरह एक्टिंग करने लग जाते हैं! हालांकि वह सिर्फ एक मूवी थी, लेकिन यह मूवी अब सच होने वाली है… जी हां, विदेशों में कई ऐसी घटनाएं देखने को मिली है जिसमें लोग एक ड्रग लेकर जॉम्बीज जैसी हरकतें करने लगे हैं! आपको बता दें कि पश्चिमी अफ्रीकी देश सिएरा लियोन के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यहां पर लोगों को इंसान की हड्डियों से बनाई जाने वाली साइकोएक्टिव ड्रग की लत लग गई है, जिसकी वजह से लोग कब्रों को खोद रहे हैं। इस भयानक खतरे से निपटने के लिए सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है।

राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो को जॉम्बी ड्रग कुश के कारण देश में आपातकाल लगाना पड़ा है। लोग इस ड्रग को बनाने के लिए कब्रों को खोद रहे हैं। सिएरा लियोन में लोग इस जॉम्बी ड्रग के आदी हो चुके हैं। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि सिएरा लियोन के अस्पतालों में 63 प्रतिशत मरीज इसी ड्रग के एडिक्ट भर्ती हैं। फ्रीटाउन में पुलिस अधिकारी ‘जोंबी’ ड्रग को बनाने के लिए लोगों को कब्रों को खोदने से रोकने के लिए कब्रिस्तानों की सुरक्षा कर रहे हैं। हालिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्रग ‘कुश’ को अलग-अलग प्रकार के विषाक्त पदार्थों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें एक प्रमुख हिस्सा मानव की हड्डियां भी हैं। इस ड्रग के आदी हो चुके लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ड्रग के सेवन से लोगों के शरीर में सूजन आ गई है। लोगों का कहना कि वह इस ड्रग की लत से छुटकारा पाना चाहते हैं।

पश्चिम अफ्रीकी देश में यह मादक पदार्थ पहली बार लगभग छह साल पहले सामने आया था। इसका सेवन करने वाला इंसान कई घंटों तक नशे में रहता है। यह ड्रग सिएरा लियोन में एक बेहद गंभीर समस्या बन गई है। इसके डीलर कथित तौर पर गंभीर लुटेरे बन चुके हैं, जो मांग पूरी करने के लिए हजारों कब्रों से कंकालों को चुरा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,  सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने अपने बयान में कहा, “हमारा देश वर्तमान समय में नशीली दवाओं और मादक द्रव्यों के सेवन, विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग कुश के प्रभाव की वजह से अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के इस्तेमाले करने वालों के मृत्यु दर में वृद्धि” हई है। बता दें कि सिएरा लियोन के अस्पतालों में 63 प्रतिशत मरीज इसी ड्रग के एडिक्ट भर्ती हैं। फ्रीटाउन में पुलिस अधिकारी ‘जोंबी’ ड्रग को बनाने के लिए लोगों को कब्रों को खोदने से रोकने के लिए कब्रिस्तानों की सुरक्षा कर रहे हैं। हालिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्रग ‘कुश’ को अलग-अलग प्रकार के विषाक्त पदार्थों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें एक प्रमुख हिस्सा मानव की हड्डियां भी हैं। इस ड्रग के आदी हो चुके लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ड्रग के सेवन से लोगों के शरीर में सूजन आ गई है। उन्होंने बताया कि नशे को खत्म करने के लिए एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। हर जिले में नशे की लत से पीड़ित लोगों की देखभाल और सहायता करने के लिए केंद्र बनाए जा रहे हैं, जहां प्रशिक्षित पेशेवरों का पर्याप्त स्टाफ होगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिएरा लियोन साइकेट्रिक अस्पताल के हेड डॉक्टर अब्दुल जल्लोह ने कहा कि राष्ट्रपति की आपातकालीन घोषणा “सही कदम” है, जिससे नशीली दवाओं के इस्तेमाल से निपटने के लिए बेहद अहम है। कुश ड्रग के सेवन से अभी तक आधिकारिक तौर पर मौतों की जानकारी नहीं है, लेकिन फ्रीटाउन के एक डॉक्टर ने बताया बीते कुछ महीनों में ड्रग का सेवन करने से कई युवाओं की ऑर्गन फेलियर के कारण मौत हुई है। 2020 और 2023 के बीच कुश से जुड़ी बीमारियों के साथ सिएरा लियोन मनोरोग अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या 4000 फीसदी बढ़ी है। यानी सीधी सी बात यह है कि यह drug सिर्फ एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है… इसके लिए सोचने और विचारने की बहुत आवश्यकता है!

क्या पुराने समय में दी जाती थी इंसानों की बलि?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पुराने समय में इंसानों की बलि दी जाती थी या नहीं! वर्तमान में हर एक धर्म में जानवरों की बलि जरूर दी जाती है… यह बलि भगवान को या अपने-अपने देवी देवताओं को खुश करने के लिए दी जाती है…. लेकिन कई सबूत ऐसे मिले हैं जिनसे यह पता चलता है कि पुराने समय में इंसानों की बलि दी जाती थी,आज हम आपको उन्हीं सबूत और इतिहास के बारे में जानकारी देने वाले हैं,

आपको बता दें कि प्राचीन समय में कई ऐसी प्रथाएं थीं, जिनका आज भी पालन किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी बलि देने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। लगभग हर धर्म में जानवरों की बलि देने की परंपरा रही है। अब वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे सूबतों की खोज की है, जिनसे पता चलता है एक समय धार्मिक अनुष्ठानों में इंसानों की भी बलि दी जाती थी। सबसे हैरान वाली बात यह है कि इस दौरान औरतों को बांधकर दफनाया जाता था। उनके साथ किए जाने वाले काम के बारे में जानकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। बता दें एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी फ्रांस के सेंट-पॉल-ट्रोइस-चैटो में एक मकबरे से तीन कंकाल निकाले गए थे। 20 साल पहले निकाले गए यह कंकाल 5,500 साल पुराने हैं। इनसे जानकारी मिलती है कि नवपाषाण युग में एक तरह का धार्मिक अनुष्ठान किया जाता था। इसके बाद महिलाओं को जिंदा बांधकर दफनाया जाता था। अनाज रखे जाने वाले गड्ढे में इन्हें दफना दिया जाता था। इनमें से 2 कंकालों की एक बार फिर व्याख्या की गई है। इनसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया है कि महिलाओं को जानबूझकर मारा जाता था। महिलाओं को इनकैप्रेटामेंटो नामक तरीके से बांधकर दफनाया जाता था। उनकी गर्दन को पैरों के बीच फंसा दिया जाता था और पीठ से बांधा जाता था। ऐसा करने से महिलाओं की सिर्फ कुछ घंटों में ही मौत जाती थी। कब्र में मिली तीसरी महिला की उम्र ज्यादा थी, तो हो सकता है कि उसकी मौत प्राकृतिक वजहों से हुई हो। इस महिला को बीच में दफनाया गया था। साइंस एडवांसेज जर्नल में हाल ही में एक शोध प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक, इस तरह के एक दर्जन से ज्यादा लोगों की पहचान हुई है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यूरोप के करीब सभी देशों में लगभग 2000 साल तक यह प्रथा थी।

शोध के मुखिया और पॉल सबेटियर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एरिक क्रुबेजी ने इस प्रथा के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने बताया कि कब्र में कई कृषि उपकरणों को भी दफनाया जाता था। इसलिए प्रतीत होता है कि खेती के लिए यह अनुष्ठान किया जाता था। हो सकता है कि यह मान्यता रही हो कि इससे पैदावार अच्छी होती है।  यही नहीं उन्होंने बताया कि सभी कब्र के ऊपर एक लड़की की संरचना रखी गई थी, जो सूर्य की तरह दिखती है। पास में अनाज पीसने वाले कई टूटे पत्थर भी रखे थे। यही नहीं गर्दन को पैरों के बीच फंसा दिया जाता था और पीठ से बांधा जाता था। ऐसा करने से महिलाओं की सिर्फ कुछ घंटों में ही मौत जाती थी। कब्र में मिली तीसरी महिला की उम्र ज्यादा थी, तो हो सकता है कि उसकी मौत प्राकृतिक वजहों से हुई हो। इस महिला को बीच में दफनाया गया था। साइंस एडवांसेज जर्नल में हाल ही में एक शोध प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक, इस तरह के एक दर्जन से ज्यादा लोगों की पहचान हुई है। यह सब देखकर लगता है कि यह एक कृषि अनुष्ठान था। बता दें कि 20 साल पहले निकाले गए यह कंकाल 5,500 साल पुराने हैं। इनसे जानकारी मिलती है कि नवपाषाण युग में एक तरह का धार्मिक अनुष्ठान किया जाता था। इसके बाद महिलाओं को जिंदा बांधकर दफनाया जाता था। अनाज रखे जाने वाले गड्ढे में इन्हें दफना दिया जाता था। इनमें से 2 कंकालों की एक बार फिर व्याख्या की गई है। इनसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया है कि महिलाओं को जानबूझकर मारा जाता था। उन्होंने बताया कि मानव बलि के लिए चेक गणराज्य से लेकर स्पेन तक इसी तरीके का पालन किया जाता था। इन्कैप्रेटामेंटो हत्या करने का एक अनोखा तरीका है, जिसका इस्तेमाल इटली में माफिया करते हैं। तो इस खुलासे से यह तो साफ हो गया कि पुराने समय में इस तरह से बलि दी जाती थी!

क्या पुतिन की राह पर चल रहे हैं मोदी, ऐसा क्यों बोले शरद पवार?

हाल ही में शरद पवार के द्वारा यह कहा गया कि मोदी पुतिन की राह पर चल रहे हैं! लोकसभा चुनाव के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष पर जुबानी जंग तेज होती जा रही है। इस दौरान एनसीपी, पवार गुट के मुखिया शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा अटैक किया है। उन्होंने पीएम मोदी पर देश में धीरे-धीरे लोकतंत्र को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनमें और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कोई फर्क नहीं है। पवार ने सोलापुर जिले में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नहीं चाहते कि विपक्ष से कोई भी निर्वाचित हो। प्रधानमंत्री का इस तरह का रुख दिखाता है कि उनमें और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन में कोई अंतर नहीं है। पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति पुतिन की राह पर चल रहे हैं। शरद पवार ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने पर मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी दिखाती है कि पीएम मोदी धीरे-धीरे संसदीय लोकतंत्र नष्ट कर रहे हैं। देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि पीएम मोदी धीरे-धीरे संसदीय लोकतंत्र नष्ट कर रहे हैं। चुनाव के बीच में हुई इस कार्रवाई को उन्होंने गलत करार दिया। शरद पवार की नाराजगी इसलिए भी है कि क्योंकि महाराष्ट्र में उनकी पार्टी दो खेमे में बंट चुकी है। उन्ही के भतीजे अजित पवार के साथ पार्टी के कई दिग्गज नेता और विधायक सूबे की शिंदे सरकार के साथ चले गए हैं।किसी भी लोकतंत्र में सत्ताधारी पार्टी की तरह उन्होंने गलत करार दिया। शरद पवार की नाराजगी इसलिए भी है कि क्योंकि महाराष्ट्र में उनकी पार्टी दो खेमे में बंट चुकी है। उन्ही के भतीजे अजित पवार के साथ पार्टी के कई दिग्गज नेता और विधायक सूबे की शिंदे सरकार के साथ चले गए हैं।विपक्ष भी बराबर का महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी नहीं चाहते कि विपक्ष से कोई चुनाव जीत सके। पवार ने पीएम मोदी और पुतिन में समानता बताते हुए कहा कि दोनों ही नेता देश में लोकतंत्र को धीरे-धीरे नष्ट करने में लगे हैं और विपक्ष का वजूद मिटाने की कोशिश कर रहे।

शरद पवार का पीएम मोदी को लेकर ये तीखा कमेंट ऐसे समय में आया जब चुनावी सरगर्मियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सत्तापक्ष हो या विपक्षी पार्टियां, सभी जमकर प्रचार अभियान में जुटे हैं। पवार का ये इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री इस आम चुनाव में हैट्रिक मारने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे। लगातार अलग-अलग राज्यों में रैलियां और रोड-शो में उतर रहे हैं। वो लगातार विपक्षी पार्टियों के गठबंधन INDIA ब्लॉक को टारगेट कर रहे। शरद पवार इंडी अलायंस का हिस्सा हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से शरद पवार बेहद आहत हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि मौजूदा मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी दिखाती है कि पीएम मोदी धीरे-धीरे संसदीय लोकतंत्र नष्ट कर रहे हैं। चुनाव के बीच में हुई इस कार्रवाई को उन्होंने गलत करार दिया। शरद पवार की नाराजगी इसलिए भी है कि क्योंकि महाराष्ट्र में उनकी पार्टी दो खेमे में बंट चुकी है। उन्ही के भतीजे अजित पवार के साथ पार्टी के कई दिग्गज नेता और विधायक सूबे की शिंदे सरकार के साथ चले गए हैं।

शरद पवार लगातार अपनी पार्टी को बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे। दूसरी ओर लोकसभा चुनाव में उनकी कोशिश पार्टी के प्रदर्शन को और बेहतर करने की है। पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति पुतिन की राह पर चल रहे हैं। शरद पवार ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने पर मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी दिखाती है कि पीएम मोदी धीरे-धीरे संसदीय लोकतंत्र नष्ट कर रहे हैं। देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी लोकतंत्र में पवार का ये इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री इस आम चुनाव में हैट्रिक मारने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे। लगातार अलग-अलग राज्यों में रैलियां और रोड-शो में उतर रहे हैं। वो लगातार विपक्षी पार्टियों के गठबंधन INDIA ब्लॉक को टारगेट कर रहे। शरद पवार इंडी अलायंस का हिस्सा हैं।सत्ताधारी पार्टी की तरह विपक्ष भी बराबर का महत्वपूर्ण है।क्या इसमें उन्हें कामयाबी मिलेगी ये देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल पवार का खेमा कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ गठबंधन में महाराष्ट्र चुनाव में उतर रही है। देखना होगा कि क्या शरद पवार एक बार फिर वापसी में सफल होंगे?

आखिर कैसा होगा इस साल के मौसम का हाल?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर इस साल के मौसम का हाल कैसा होगा! दिल्ली एनसीआर में मौसम खुशनुमा रहा। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दो दिनों तक दिल्ली एनसीआर ही नहीं उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में बारिश हो सकती है। बारिश के साथ ही तेज हवाओं के चलने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। इन सबके बीच मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर भी भविष्यवाणी कर रही है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने अपने पूर्वानुमान में सोमवार को बताया कि इस साल मॉनसून के दौरान पूरे देश में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। लेकिन विभाग ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरी और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार हैं।आईएमडी के महानिदेशक डीजी मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के तहत एक जून से 30 सितंबर के बीच मॉनसून ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत लांग पीरियड एवरेज एलपीए का 106 फीसदी होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस साल मॉनसून में अच्छी बारिश का अनुमान जता दिया है। इसके साथ ही उन 20 राज्यों के बारे में भी बताया है जहां इस मॉनसून में जमकर बारिश होगी। इस साल केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र , गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, प.बंगाल, सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पुड्डुचेरी, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षदीप, दादरा और नगर हवेली, दमन-दीव खूब बरसात देखने को मिलेगी।

महापात्र ने कहा कि आईएमडी अपने पूर्वानुमान में अल नीनो, ला नीनो, हिंद महासागर द्विध्रुव स्थितियां और उत्तरी गोलार्ध में बर्फीले आवरण संबंधी स्थिति के प्रभाव पर विचार करता है और यह सभी स्थितियां इस बार भारत में अच्छे मॉनसून के अनुकूल हैं।उन्होंने बताया कि उत्तर पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा वर्षा होने की प्रबल संभावना है।लेकिन आईएमडी प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना दिख रही है। उनके मुताबिक इसी तरह से पूर्वोत्तरी राज्यों–असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड और अरूणाचल प्रदेश के आसपास के इलाकों में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूर्वी राज्यों- ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों व पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदानी इलाकों में भी सामान्य से भी कम वर्षा होने का अनुमान है।

महापात्र ने कहा कि 1971 से 2020 तक के बारिश के आंकड़ों के आधार पर हाल के वर्षों में नया दीर्घावधि औसत पेश किया गया है जिसके तहत एक जून से 30 सितंबर के बीच पूरे देश में औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश होती है। उन्होंने कहा कि अगर ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत की 96 फीसदी से 104 प्रतिशत के बीच होती है तो वह सामान्य मानी जाती है।दीर्घावधि औसत की 106 फीसदी बारिश सामान्य से अधिक की श्रेणी में आती है और अगर वर्षा दीर्घावधि औसत की 105 फीसदी से 110 फीसदी के बीच होती है तो इसे सामान्य से अधिक माना जाता है।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगर बारिश एलपीए का 90-96 प्रतिशत के बीच होती है तो उसे सामान्य से कम माना जाता है।आईएमडी प्रमुख के मुताबिक, वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र पर अल नीनो की मध्यम स्थिति बनी हुई है तथा मॉनसून ऋतु के शुरुआती दौर में अल नीनो की स्थिति और कमजोर होकर तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) स्थितियों में परिवर्तित होने की संभावना है और इसके बाद अगस्त-सितंबर में ला नीना स्थितियां विकसित होने की संभावना है।उन्होंने कहा कि जब अल नीनो की स्थिति होती हैं जो ज्यादातर वर्षों में बारिश पर इसका नकारात्मक असर होता है।

वर्तमान में हिंद महासागर पर तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव आईओडी स्थितियां मौजूद हैं और सकारात्मक आईओडी स्थितियां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ऋतु के उत्तरार्ध के दौरान विकसित होने की संभावना है जो मॉनसून के लिए अच्छा है।महापात्र ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इन स्थितियों की वजह से मॉनसून की शुरुआत की तुलना में अगस्त-सितंबर में ज्यादा बारिश होने की संभावना है।नगालैंड और अरूणाचल प्रदेश के आसपास के इलाकों में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूर्वी राज्यों- ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों व पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदानी इलाकों में भी सामान्य से भी कम वर्षा होने का अनुमान है।आईएमडी प्रमुख ने कहा कि पिछले तीन महीनों जनवरी से मार्च 2024 के दौरान उत्तरी गोलार्ध, खासकर यूरोप और एशिया में कम बर्फबारी हुई। उन्होंने कहा कि उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया में बर्फ आवरण क्षेत्र सामान्य से कम था और सामान्य से कम हिमपात होना भारत में जून से सितंबर के दौरान बारिश के लिए अनुकूल है।

क्या भारत पर हुए हमले को झेल पाएगा भारत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि भारत पर हुए हमले को क्या भारत झेल पाएगा या नहीं! ईरान ने एकसाथ सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल पर हमला बोल दिया। हालांकि, गिनती की कुछ मिसाइलों के सिवा ईरान का एक भी हमला कामयाब नहीं हो सका। ईरान के एकमुश्त हमलों को नाकामयाब बनाने का श्रेय इजरायल के ‘आयरन डोम’ को जाता है। आयरन डोम इजरायल का वह कवच है जो आसमान से आने वाले घातक से घातक हथियारों को पहचानकर नेस्तनाबूद कर देता है। एक विदेशी पत्रकार ने सोशल मीडिया एक्स पर ईरानी हमलों के खिलाफ आयरन डोम की सफलता की गाथा लिखी है। उन्होंने बताया, ‘इजरायल की आयरन डोम एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम कमाल का है। इसने इजरायल पर ईरान से आई 331 मिसाइलों और ड्रोन में से सभी 185 कामिकेज ड्रोन को मार गिराया। इसने 110 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 103 को मार गिराया। साथ ही, सभी 36 क्रूज मिसाइलों को भी मार गिराया। सिर्फ 7 बैलिस्टिक मिसाइलों का ही असर इजराइली क्षेत्र पर हुआ।’ इस पर भारतीय उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इजरायल के पास आयरन डोम समेत एयर डिफेंस बाकी सिस्टम्स भी गिना दिए। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘इजरायल के पास आयरन डोम से भी ज्यादा है। उनके पास डेविड स्लिंग नामक एक लंबी दूरी का इंटरसेप्शन सिस्टम है। उनके पास एरो 2 और 3 सिस्टम भी हैं। लेजर का उपयोग करने वाला आयरन बीम भी है। अभेद्य डिफेंस इंटरसेप्शन सिस्टम होना आज आक्रामक हथियारों के जखीरे जितना ही महत्वपूर्ण है।’ महिंद्रा ने भारत में भी बेहद ताकतवर डिफेंस सिस्टम पर फोकस और खर्च बढ़ाने की जरूरत बताई है।

महिंद्रा का कहना सौ फीसदी सही है। भारत भी इजरायल जैसे ही चीन-पाकिस्तान जैसे दुश्मनों से घिरा है। दोनों ही पड़ोसी देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। हमारे पास भी परमाणु हथियार हैं। दरअसल, परमाणु हथियार युद्ध को एक सीमा तक सीमित रखने के लिए होते हैं ताकि संपूर्ण विनाश की नौबत नहीं आए। यही वजह है कि दुश्मन के हमलों को निष्प्रभावी करना ही सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, उनके इलाकों में ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाना दूसरी। यह स्वाभाविक ही है कि युद्ध की परिस्थिति में दुश्मन को नुकसान पहुंचाने से ज्यादा जरूरी खुद का बचाव करना है। तो सवाल है कि क्या भारत इसके लिए तैयार है? क्या भारत के पास भी आयरन डोम जैसा कोई एयर डिफेंस सिस्टम है जो दुश्मन के हथियारों को हवा में ही मार गिराए?

भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम एक दोहरी प्रणाली है जिसमें दो भूमि और समुद्र आधारित इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं। पृथ्वी वायु रक्षा PAD मिसाइल हाई अल्टिट्यूट पर इंटरसेप्शन जबकि उन्नत वायु रक्षा AAD मिसाइल लो अल्टिट्यूड पर इंटरसेप्शन के लिए है। यह द्वीस्तरीय ढाल 5,000 किलोमीटर दूर से छोड़ी गई किसी भी आने वाली मिसाइल को रोकने में सक्षम है। इस सिस्टम में प्रारंभिक चेतावनी और ट्रैकिंग रडार और कमांड एंड कंट्रोल पदों का एक ओवरलैपिंग नेटवर्क भी शामिल है।अब इसका नाम बदलकर प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर कर दिया गया है। इसे 50 किलोमीटर से ऊपर की ऊंचाई (एक्सो-वायुमंडलीय) पर आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एएडी के साथ भारत की द्वीस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का हिस्सा है।

भारत के बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम का एक हिस्सा एएडी एक एंटी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है जिसे 15-25 किलोमीटर की ऊंचाई पर एंडो एटमॉसफेयर में आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य शहरों और रणनीतिक संपत्तियों को बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाना है।

इनके अलावा, भारत आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली जैसी अन्य प्रणालियों के साथ अपनी मिसाइल रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसे 18 हजार मीटर तक की ऊंचाई पर 30 किमी दूर तक विमानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।इजरायल के पास आयरन डोम से भी ज्यादा है। उनके पास डेविड स्लिंग नामक एक लंबी दूरी का इंटरसेप्शन सिस्टम है। उनके पास एरो 2 और 3 सिस्टम भी हैं। लेजर का उपयोग करने वाला आयरन बीम भी है। अभेद्य डिफेंस इंटरसेप्शन सिस्टम होना आज आक्रामक हथियारों के जखीरे जितना ही महत्वपूर्ण है। आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी निचली और मध्यम ऊंचाई पर लड़ाकू जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर कर सकता है। आकाश को निचली और मध्यम ऊंचाई पर विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से बचाव के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक साथ कई लक्ष्यों को शामिल करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है।

भारत के भविष्य के लिए क्या बोले पीएम मोदी?

हाल ही में पीएम मोदी ने भारत के भविष्य के लिए एक बयान दिया है! 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग है। इससे ठीक पहले पीएम मोदी ने एएनआई को इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने चुनावी बॉन्ड से लकर सीएए तक हर मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस दौरान उनसे विकसित भारत @2047 के विजन पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें गति भी बढ़ानी है और स्केल भी बढ़ाना है। देश के सामने एक अवसर है, एक कांग्रेस सरकार का मॉडल है, एक बीजेपी सरकार का मॉडल है। उनका 5-6 दशक का कार्यकाल और मेरा सिर्फ 10 साल कार्यकाल। ANI को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे पास बड़ी योजनाएं हैं। किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे निर्णय किसी को डराने, दबाने के लिए नहीं हैं बल्कि वे देश के समग्र विकास के लिए हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर राहुल गांधी की ओर से किए जा रहे अटैक पर प्रधानमंत्री ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड थे तो आपको ट्रेल मिल रहा मनी का। किस कंपनी ने दिया, कैसे दिया, कहां दिया। इसलिए मैं कहता हूं सब लोग पछताएंगे। ईमानदारी से सोचेंगे तो सब लोग पछताएंगे। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर पीएम मोदी ने कहा कि ये हमारी प्रतिबद्धता है। कई लोगों ने समिति को अपने सुझाव दिए हैं। बहुत सकारात्मक और नवोन्मेषी सुझाव आए हैं। अगर हम इस रिपोर्ट को लागू कर पाए तो देश को बहुत फायदा होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि मेरा 25 साल का विजन है और मैं जो आज कर रहा हूं ऐसा नहीं है। जब मैं गुजरात में था तभी इस दिशा में सोचता था। 2024 का चुनाव देश के सामने एक अवसर है। एक कांग्रेस सरकार का मॉडल और एक बीजेपी सरकार का मॉडल। उनका 5-6 दशक का काल और मेरा एक दशक का काल… किसी में क्षेत्र में तुलना कर लीजिए, पता चल जाएगा। 2047 में देश की आजादी के 100 साल होंगे। ऐसे समय में देश में एक प्रेरणा जगनी चाहिए। ये अपने आप में बहुत इन्स्पायरेशनल है। जहां तक 2024 का सवाल है तो यह एक महापर्व है और इसे उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। 2047 का जो मेरा विजन है वो मोदी की बपौती नहीं है। इसमें 15-20 लाख लोगों के विचारों को समाहित किया है। एक प्रकार से इसकी ऑनरशिप देश की है। मैंने उसको डॉक्यूमेंट के रूप में बनाया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जब देशवासी आपको देश चलाने की जिम्मेदारी देते हैं तो आपका सिंगल माइंडेड फोकस होना चाहिए- देश। दुर्भाग्य से पहले के राजनीतिक कल्चर में परिवार को कैसे मजबूत बनाना है, उसी में शक्ति लगाते थे। जबकि मैं देश कैसे मजबूत हो, इस लक्ष्य के साथ काम कर रहा हूं। हर परिवार का सपना होता है और वो सपना कैसे पूरा हो, ये मेरे दिल में पड़ा हुआ है। इसलिए मैं कहता हूं कि जो हुआ है वो ट्रेलर है। लेकिन मैं और अधिक काम करना चाहता हूं। यह पूछे जाने पर कि क्या हम भारत में टेस्ला कारें, स्टारलिंक देखेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि एलन मस्क मोदी के प्रशंसक हैं यह एक बात है, लेकिन मूल रूप से भारत के प्रशंसक हैं।

डीएमके की हालिया ‘सनातन विरोधी’ टिप्पणी और उस पर जनता के आक्रोश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि सनातन के खिलाफ इतना जहर उगलने वाले लोगों के साथ बैठना उनकी क्या मजबूरी है? कांग्रेस की मानसिकता में ये कौन सी विकृति है। कांग्रेस ने अपना मूल कैरेक्टर गंवा दिया है क्या? जब संविधान बना तो उसमें सनातन का गौरवपूर्ण हिस्सा था। आज कांग्रेस उन्ही सनातन के खिलाफ कमेंट करने वालों के बीच बैठ रही है। ये देश के लिए चिंता का विषय है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज हमारे यहां शब्दों के प्रति कोई जिम्मेदारी ही नहीं है। मैंने एक नेता को कहते हुए सुना ‘एक झटके में मैं गरीबी हटा दूंगा’। जिनको 5-6 दशक तक देश पर राज करने को मिला और वे आज कहते हैं कि मैं एक झटके में गरीबी हटा दूंगा। उन्हें सुनकर लोग सोचते हैं कि ये क्या बोल रहे हैं। हम ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ की महान परंपरा से निकले हैं। नेताओं को जिम्मेदारी लेनी चाहिए… आज हम जो कहते हैं उस पर लोगों को भरोसा है।

तथाकथित ‘उत्तर-दक्षिण विभाजन’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को टुकड़ों में देखना देश के प्रति नासमझी का परिणाम है। अगर आप हिंदुस्तान में देखें प्रभु राम के नाम से जुड़े हुए गांव सबसे ज्यादा कहां है? तो वह तमिलनाडु में हैं। अब आप इसको कैसे अलग कर सकते हैं। विविधता हमारी ताकत है, हमें इसका जश्न मनाना चाहिए। वहीं कांग्रेस के आरोप पर कि ‘400 पार से संविधान रद्द हो जाएगा’ पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल का गुणगान करता है,किस आधार पर उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? समस्या उनमें (विपक्ष) है वे देश को एक ही सांचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं। हम इसका जश्न मनाते हैं।

क्या इसी प्रकार की मेहनत से बीजेपी को रोक पाएगी कांग्रेस?

यह सवाल उठाने रजमी है कि जो मेहनत कांग्रेस कर रही है क्या इसी मेहनत से बीजेपी को रोक पाएगी या नहीं! देश की 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। 7 चरणों में होने वाले चुनाव के लिए सभी पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। जहां नरेंद्र मोदी ने इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए 370 सीटों का और एनडीए के लिए 400 पार का लक्ष्य रखा है। वहीं कांग्रेस गठबंधन के कई नेताओं का कहना है कि केंद्र में बीजेपी की सत्ता जाती हुई दिख रही है। चुनाव माहौल के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बयानों की तीरंदाजी भी देखने को मिल रही है। हर कोई अपने तरकश से तीर निकालकर जीत का निशाना साध रहा है। हालांकि इस लोकसभा चुनाव में किसके सिर पर जीत का सेहरा सजेगा ये तो 4 जून को ही पता चल पाएगा। हालांकि उससे पहले विपक्ष एकजुट होकर चुनाव में मोदी फोबिया का नैरेटिव सेट करने में लगा है। लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दल एकजुट होकर बीजेपी को सत्ता से हटाना चाह रहे हैं। इसके लिए विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार तानाशाह तक करार दिया है। पिछले महीने जब अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया तो आप के कई नेताओं ने इसे केंद्र सरकार की तानाशाही बता दिया था। आप ही नहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कहा था कि डरा हुआ तानाशाह एक मरा हुआ लोकतंत्र बनाना चाहता है। वहीं जेल से जमानत पर बाहर आने पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि आप का एक एक कार्यकर्ता संघर्ष के लिए तैयार है। हम मिलकर संघर्ष करेंगे और तानाशाही हुकूमत को हटाएंगे। विपक्ष बार- बार केंद्र सरकार पर तानाशाही शब्दभेदी बाण चला रहा है। हालांकि विपक्षी नेताओं के इन सभी बयानों पर हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन्होंने आपातकाल के माध्यम से तानाशाही थोपी, वे हम पर तानाशाही होने का आरोप लगाते हैं।

विपक्षी नेता आरक्षण को लेकर भी केंद्र सरकार पर काफी लंबे वक्त हमला कर रहे हैं। हाल ही में संजय सिंह ने दावा किया कि बीजेपी के नेता दो-तिहाई बहुमत मांग रहे हैं ताकि वे संविधान बदल सकें। संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि बीजेपी सत्ता में आते आरक्षण खत्म कर देगी। विपक्षी नेताओं के दावों के उलट बीजेपी का कहना है कि आदिवासियों, दलितों व पिछड़े वर्गों का आरक्षण न तो खत्म करेंगे न ही होने देंगे।

ऐसे में विपक्षी नेताओं के हर बाण का बीजेपी नेता जमकर जवाब दे रहे हैं। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के नेताओं का मोदी फोबिया का नैरेटिव सेट करने की कोशिश कुछ खास कामयाब होती नहीं दिख रही है। ऐसे में विपक्षी नेताओं को लोकसभा चुनाव 2024 जीतने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से अलग भी कुछ मेहनत करनी पड़ेगी।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 37.7 फीसदी वोट शेयर के साथ 303 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस 19.7 फीसदी वोट पर ही सिमट गई थी। जबकि अन्य 30.9 फीसदी वोट हासिल कर पाई थी। ऐसे में इस बार विपक्षी गठबंधन को अपना वोट शेयर बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। कांग्रेस के सामने यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में अपने वोट शेयर बढ़ाना होगा। हम मिलकर संघर्ष करेंगे और तानाशाही हुकूमत को हटाएंगे। विपक्ष बार- बार केंद्र सरकार पर तानाशाही शब्दभेदी बाण चला रहा है। हालांकि विपक्षी नेताओं के इन सभी बयानों पर हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन्होंने आपातकाल के माध्यम से तानाशाही थोपी, वे हम पर तानाशाही होने का आरोप लगाते हैं।दरअसल साल 2019 में बीजेपी को इन राज्यों में 50 फीसदी या उससे अधिक वोट मिले थे। ऐसे में विपक्ष जीत हासिल करना चाहता है तो उसे अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा।

साल 2019 में कांग्रेस यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक-एक, पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर सिमट गई थी। इसके साथ ही कई राज्यों समेत केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में तो कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। ऐसे में पार्टी को अगर बीजेपी को कड़ी टक्कर देने के लिए इन राज्यों में अपना प्रदर्शन ठीक करना होगा।

क्या राम मंदिर जैसा हथियार विपक्ष के हाथ से निकल चुका है?

वर्तमान में राम मंदिर जैसा हथियार विपक्ष के हाथ से निकल चुका है! राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के राजनीतिकरण को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच लगातार जुबानी जंग सामने आती रही है। इस मुद्दे पर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर अटैक किए। एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राम मंदिर का राजनीतिकरण किसने किया। जब हमारा जन्म भी नहीं हुआ था और हमारी पार्टी पैदा नहीं हुई थी उस समय अदालत में ये मामला निपटाया जा सकता था। समस्या का समाधान हो सकता था। भारत विभाजन हुआ, उसी समय ये तय किया जा सकता था, वो नहीं किया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि ये एक ऐसा हथियार हाथ में है जो वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए बेहद अहम दांव है। बार-बार इसको भड़काया गया। जब ये मामला कोर्ट में चल रहा था तो बार-बार कोशिश हुई कि इस पर फैसला नहीं आए। अब राम मंदिर बन गया तो उनके हाथ से ये मुद्दा ही चला गया। पीएम मोदी ने एएनआई से खास बातचीत में विपक्ष को घेरते हुए कहा कि राम मंदिर बन गया, कुछ नहीं हुआ, कहीं कोई आग नहीं लगी। अब उनके हाथ से मुद्दा चला गया, आखिर डराएंगे कैसे। सोमनाथ मंदिर से लेकर अब तक की घटनाएं देखें तो वो भारत की मूलभूत आस्थाओं के प्रति निगेटिविटी लेकर ही वो देश में अपनी बात रखते थे। सोमनाथ मंदिर को लेकर क्या प्रॉब्लम था तो उसमें सरदार पटेल थे। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को जाना था। पीएम मोदी ने इस दौरान फिर कहा कि ये तो नामदार हैं, मैं तो कामदार हूं। मैं नॉर्थ ईस्ट जाऊं, वहां के कोई मुझे कपड़े पहना दे तो मैं पहन लेता हूं, उसका भी मजाक उड़ाना। तमिलनाडु जाऊं लूंगी पहनूं तो उस पर सवाल उठाना। इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए।उस समय न जनसंघ था, न भाजपा थी न कोई लड़ाई थी। लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया था जाने को। वो परंपरा आज भी चल रही कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिले और आप से उसे ठुकरा दें।

पीएम मोदी ने विपक्षी पार्टी खास तौर पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि सचमुच में आपको राम मंदिर के निर्माण पर गर्व होना चाहिए। राम मंदिर निर्माण जो भी लोग लगे जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया वे आपके सारे पाप भूल करके घर आकर आपको आमंत्रित कर रहे। आप उसको भी ठुकरा रहे तो लगता है कि आपके लिए वोट बैंक की मजबूरी है, इसी के चलते आप ऐसा कर रहे। किसी को नीचा दिखाना ये अपना अधिकार मानते हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान फिर कहा कि ये तो नामदार हैं, मैं तो कामदार हूं। मैं नॉर्थ ईस्ट जाऊं, वहां के कोई मुझे कपड़े पहना दे तो मैं पहन लेता हूं, उसका भी मजाक उड़ाना। तमिलनाडु जाऊं लूंगी पहनूं तो उस पर सवाल उठाना। इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए जब मुझे बुलाया गया तो पहले मैंने 11 दिन का अनुष्ठान किया। मैंने तय किया कि एक राम भक्त की तरह मैं इसे करना चाहता हूं। पीएम मोदी ने बताया कि इसके लिए मैंने अध्ययन किया, जमीन पर सोया, प्रभु राम जहां-जहां गए थे, मैं वहां गया। मैंने कंब रामायण का पाठ किया। मेरे लिए ये कोई इवेंट नहीं था, भारत विभाजन हुआ, उसी समय ये तय किया जा सकता था, वो नहीं किया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि ये एक ऐसा हथियार हाथ में है जो वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए बेहद अहम दांव है। बार-बार इसको भड़काया गया। जब ये मामला कोर्ट में चल रहा था तो बार-बार कोशिश हुई कि इस पर फैसला नहीं आए। अब राम मंदिर बन गया तो उनके हाथ से ये मुद्दा ही चला गया। पीएम मोदी ने एएनआई से खास बातचीत में विपक्ष को घेरते हुए कहा कि राम मंदिर बन गया, कुछ नहीं हुआ, कहीं कोई आग नहीं लगी।आस्था का विषय था। राम मंदिर के पीछे 500 साल का एक संघर्ष, लाखों लोगों का बलिदान, भाजपा थी न कोई लड़ाई थी। लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया था जाने को। वो परंपरा आज भी चल रही कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिले और आप से उसे ठुकरा दें।लंबी न्यायिक प्रक्रिया शामिल थी। इसमें ASI की खुदाई, हिंदुस्तान के लोगों का धन, जिन्होंने अपने पैसे से इस मंदिर को बनवाया। ये मंदिर सरकारी खजाने से नहीं बना है। ये मंदिर भारत की आने वाली पीढ़ी को बहुत बड़ी प्रेरणा देगा।

क्या मोदी आए तो संविधान को नुकसान होगा, क्या यह विपक्ष का आरोप सही है?

विपक्ष पीएम मोदी पर यह इल्जाम लगा रहा है कि अगर मोदी आए तो संविधान को नुकसान होगा… आज हम आपको इसकी सच्चाई बताने जा रहे हैं! क्या बीजेपी आरक्षण को खत्म करना चाहती है? क्या भारतीय जनता पार्टी 2024 में ‘400 पार’ का नारा इसलिए बुलंद कर रही जिससे वो संविधान को बदल सके? आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की मानें तो बीजेपी सत्ता में लौटी तो ऐसा कर सकती है। इस बात का जिक्र उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर रविवार को किया। संजय सिंह ने दावा किया कि बीजेपी नेता दो-तिहाई बहुमत इसलिए मांग रहे जिससे संविधान बदल सकें। बीजेपी सत्ता में आते ही आरक्षण खत्म कर देगी। संजय सिंह ही नहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी एक कमेंट कुछ ऐसी ही आशंका जताई है। उन्होंने भी कहा कि बीजेपी में सत्ता में आई तो आरक्षण खत्म किया जा सकता है। हालांकि, खुद पीएम मोदी ने कई मौकों पर ऐसी बातों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बीजेपी कभी आरक्षण को खत्म नहीं करेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे लेकर पार्टी का स्टैंड क्लीयर किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण को खत्म नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी और अमित शाह की ओर से इनकार के बाद भी विपक्ष लगातार 2024 लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा उठा रहा है। ऐसे में सवाल ये कि क्या सच में ऐसा हो सकता है और बीजेपी आरक्षण खत्म कर सकती है? 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग है। इससे ठीक पहले यानी अंबेडकर जयंती पर AAP मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। इसी दौरान राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी संविधान में संशोधन करना चाहती है। संजय सिंह ने इस दौरान बीजेपी सांसद के एक वीडियो का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस वीडियो में बीजेपी के एक सांसद खुलेआम कह रहे कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के लिखे गए संविधान को बदलने की जरूरत है। बीजेपी के सांसद कह रहे हैं कि 272 में काम नहीं चल रहा। अगर संविधान बदलना है तो दो-तिहाई बहुमत चाहिए, इसलिए ज्यादा से ज्यादा सीट दीजिए हमें संविधान बदलना है।

संजय सिंह ने कहा कि ये कितनी खतरनाक बात है। आम आदमी पार्टी कार्यालय से उन्होंने दो टूक कहा कि मैं बीजेपी और आरएसएस को बताना चाहता हूं कि जब तक आप कार्यकर्ता हैं, हम संविधान को बचाने के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे। हमने यह प्रतिज्ञा ली है और इसे पूरा करेंगे। संजय सिंह ने जिस तरह से ये दावा किया उसे लेकर सवाल उठना लाजमी है। क्या सच में आरक्षण को खत्म किया जा सकता है। ये कोई पहली बार नहीं है जब भारत में आरक्षण को लेकर राजनीति हो रही। 2019 के चुनावों में भी ऐसी ही चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि, उस समय पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा था कि आरक्षण खत्म करने का उनकी सरकार का कोई इरादा नहीं है।

महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली के दौरान अप्रैल 2019 में पीएम मोदी ने कहा था कि विपक्षी दल अफवाह फैला रहे कि अगर वह सत्ता में लौटे तो आरक्षण में बदलाव होगा। उन्होंने ये भी कहा था कि वो सुनिश्चित करेंगे कि आरक्षण में कोई छेड़छाड़ नहीं हो। जब तक मोदी यहां है, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की ओर से हमें दिए गए आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता। वहीं 2024 के चुनाव में जैसे ही विपक्ष की ओर से ये मुद्दा उठाया गया तो गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 14 अप्रैल यानी अंबेडकर जयंती पर कहा कि बीजेपी आरक्षण कभी खत्म नहीं होने देगी और न ही कांग्रेस को ऐसा करने देगी। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जब तक भाजपा राजनीति में है, हम आरक्षण को कुछ नहीं होने देंगे।

अगर आरक्षण के इतिहास को देखा जाए तो यह आजादी से पहले की व्यवस्था है। देश में आरक्षण का आधार जाति बनी क्योंकि कास्ट के आधार पर असमानताएं थीं इसीलिए जातिगत आरक्षण की व्यवस्था लागू हुई। आरक्षण पर 1953 में कालेलकर आयोग की रिपोर्ट में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की रिपोर्ट को स्वीकार किया गया। हालांकि, ओबीसी की सिफारिश अस्वीकार कर दी गई। 90 के दशक में ओबीसी आरक्षण भी लागू हुआ और गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण भी आ गया। आरक्षण का उद्देश्य था कि केंद्र और राज्य में सरकारी नौकरियों, कल्याणकारी योजनाओं, चुनाव और शिक्षा के क्षेत्र में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके। हालांकि, आरक्षण देने या हटाने का फैसला सियासी रूप से आसान नहीं होगा। वहीं इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि आरक्षण हमेशा के लिए नहीं हो सकता। समय सीमा तय करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ED के पक्ष में क्या कहा?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ED के पक्ष में एक बयान दिया है! लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के विपक्ष के आरोपों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट बेहतरीन काम कर रही है। मोदी ने कहा, एजेंसी के 97% केस ऐसे लोगों पर हैं, जो राजनीति में शामिल नहीं है। ED की तरफ से दर्ज सिर्फ 3% केस राजनीति से जुड़े लोगों के खिलाफ है। मोदी ने कहा, ED और CBI से जुड़े कोई भी कानून BJP के शासनकाल के दौरान नहीं आए हैं। विपक्ष के इस आरोप पर कि सभी संस्थाओं पर बीजेपी का कब्जा है, मोदी ने कहा, हमने चुनाव आयोग में सुधार किया है लेकिन एक कहावत है कि च न जाने आंगन टेढ़ा। इसलिए ये कभी EVM का बहाना बनाते हैं तो कभी कुछ। अब एजेंसियों पर आरोप के जरिए इन लोगों ने अपनी हार के लिए अभी से कुछ तर्क गढ़ने शुरू कर दिए हैं। क्या ‘400 पार’ से संविधान में बदलाव आएगा और देश की विविधता खत्म हो जाएगी? विपक्ष के इस आरोप पर मोदी ने कहा कि यह समस्या उनमें है, जो ऐसा आरोप लगा रहे हैं। वे देश को एक ही ढांचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं, हम इसका जश्न मनाते हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आप किस आधार पर उस व्यक्ति के खिलाफ ऐसे आरोप लगा रहे हैं, जिसने संयुक्त राष्ट्र में तमिल भाषा- सबसे पुरानी भाषा का जश्न मनाया था? जब मैं विभिन्न राज्यों की पोशाकें पहनता हूं, तो उन्हें दिक्कत होती है। समस्या यह है कि वे देश को एक ही सांचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं। हम इसका जश्न मनाते हैं। हमने कहा है, कोई अपनी मातृभाषा का उपयोग करके डॉक्टर या इंजिनियर क्यों नहीं बन सकता? मैं मातृभाषा के बारे में बोलता हूं, इसका मतलब है कि मैं इसका जश्न मना रहा हूं, मैं इसकी महानता को बढ़ा रहा हूं।

पीएम ने इलॉन मस्क के भारतीय बाजार में एंट्री पर कहा, ‘मस्क का मोदी समर्थक होना एक बात है, लेकिन वह मूलतः भारत के समर्थक हैं। …मैं चाहता हूं कि भारत में निवेश आए। पैसा किसी का भी लगे, पसीना मेरे देश का लगना चाहिए, उससे सुगंध मेरे देश की मिट्टी की आनी चाहिए, ताकि मेरे देश के नौजवान को रोजगार मिले…। राम के राजनीतिकरण के विपक्ष के आरोपों पर पीएम मोदी ने कहा, इस मुद्दे का राजनीतिकरण किसने किया? …वोट बैंक की राजनीति को मजबूत करने के लिए उन लोगों ने इस मुद्दे को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और बार-बार इसे भड़काया। जब यह मामला अदालत में चल रहा था तब कोशिश की गई कि फैसला ना आए…। उनके लिए यह एक राजनीतिक हथियार था। …अब राम मंदिर बन गया तो उनके हाथ से यह मुद्दा ही चला गया है…।

मोदी ने कहा कि आप अपना जीवन खो सकते हैं लेकिन अपना वचन नहीं। मेरा मानना है कि राजनेताओं को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मैं जो कहता हूं वह मेरी जिम्मेदारी है और मैंने इसकी गारंटी भी दी है। आर्टिकल 370 मामले को ही ले लीजिए, यह हमारी पार्टी की प्रतिबद्धता रही है। मैंने साहस दिखाया और 370 को हटाया। आज जम्मू-कश्मीर का भाग्य बदल गया है। मैं ‘मोदी की गारंटी’ कहकर लोगों को गारंटी दे रहा हूं। वे हर हाल में पूरे होंगे। पीएम ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर कहा कि यह हमारी प्रतिबद्धता है। देश में कई लोग हमारे साथ आए हैं। समिति को अपने सुझाव दिए हैं। अगर हम इस रिपोर्ट को लागू कर पाएं तो देश को बहुत फायदा होगा।

पीएम ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर भी चर्चा की। बताया कि किस तरह से उनके प्रयासों से यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाया जा सका। पीएम ने कहा कि दोनों ही देशों के राष्ट्रपतियों के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे हैं। युद्ध के दौरान जब भारतीय छात्र वहां फंस गए थे तो मैंने दोनों से बात करके रास्ता निकाला। मोदी ने कहा, संकट के दौरान भारतीय ध्वज की ताकत देखने को मिली। भारतीय ध्वज की ताकत इतनी थी कि एक विदेशी भी अगर अपने हाथ में तिरंगा पकड़ लेता था, तो उसके लिए भी जगह बन जाती थी। इसलिए मेरा झंडा मेरी गारंटी बन गया। मेरी ताकत बन गया। पीएम ने 2015 की घटना का भी जिक्र किया जब सऊदी अरब और उसके सहयोगियों द्वारा यमन पर बमबारी के दौरान वहां से भारतीय नागरिकों को निकालना मुश्किल था। पीएम ने कहा, ‘मैंने सऊदी किंग से बात की और उनसे कहा कि मैं यमन से लोगों को वहां लाना चाहता हूं। आपकी बमबारी से हम ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं। भारत के कहने पर बमबारी रोकी गई और हम अपने लोगों को हवाई जहाज से बाहर लेकर आ गए।