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पीरियड्स में छुट्टी देने के मामले में क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स में छुट्टी देने के मामले पर एक बयान दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान छुट्टी कानून द्वारा जरूरी कर देना उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें नौकरियों से दूर रखा जा सकता है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि ये फैसला लेना सरकार का काम है, अदालत का नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श कर महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश पर एक मॉडल नीति तैयार करे। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि यह मुद्दा नीति से संबंधित है और अदालतों के विचार करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, महिलाओं को ऐसी छुट्टी देने के संबंध में अदालत का फैसला प्रतिकूल और ‘हानिकारक’ साबित हो सकता है, क्योंकि कंपनियां उन्हें काम पर रखने से परहेज कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह की छुट्टी अधिक महिलाओं को कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगी। कोर्ट ने कहा, इस तरह की छुट्टी अनिवार्य करने से महिलाएं कार्यबल से दूर हो जाएंगी।…हम ऐसा नहीं चाहते।’

कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में कई सरकारी नीतियों का सवाल है और अदालत को इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। अदालत ने महिला याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से संपर्क करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने ये भी कहा कि वो सचिव से ये उम्मीद करते हैं कि वो सभी लोगों से बात करके देखें कि क्या इस मामले पर कोई आदर्श नीति बनाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया, ‘हम सचिव से अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले पर नीतिगत स्तर पर विचार करें और सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद निर्णय लें तथा देखें कि क्या एक मॉडल नीति बनाई जा सकती है।’ अदालत ने साफ किया कि अगर राज्य इस संबंध में कोई कदम उठाते हैं, तो केंद्र की परामर्श प्रक्रिया उनके रास्ते में नहीं आएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले देशभर में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश देने का अनुरोध करने वाली याचिका का निपटारा कर दिया था। अदालत ने तब कहा था कि चूंकि,सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह की छुट्टी अधिक महिलाओं को कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगी। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा नीति से संबंधित है और अदालतों के विचार करने के लिए नहीं है. पीठ ने कहा कि इसके अलावा महिलाओं को ऐसी छुट्टी देने के संबंध में अदालत का निर्णय प्रतिकूल और हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि नियोक्ता उन्हें काम पर रखने से परहेज कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा, इस तरह की छुट्टी अनिवार्य करने से महिलाएं कार्यबल से दूर हो जाएंगी।…हम ऐसा नहीं चाहते।’ यह मुद्दा नीतिगत है, इसलिए केंद्र को एक अभ्यावेदन सौंपा जा सकता है। वरिष्ठ वकील ने कहा कि अभी तक केंद्र की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है।

पीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह की छुट्टी अधिक महिलाओं को कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह की छुट्टी अनिवार्य करने से महिलाएं कार्यबल से दूर हो जाएंगी. हम ऐसा नहीं चाहते. पीठ ने कहा, ‘यह वास्तव में एक सरकारी नीतिगत मुद्दा है अदालतों के विचार करने के लिए नहीं है.’ कोर्ट ने कहा, ‘याचिकाकर्ता का कहना है कि मई 2023 में केंद्र को एक अभ्यावेदन सौंपा गया था. चूंकि, मुद्दा सरकारी नीति के विविध उद्देश्यों को उठाता है, इसलिए इस अदालत के पास हमारे पिछले आदेश के आलोक में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है.’ बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर राज्य इस संबंध में कोई कदम उठाते हैं, तो केंद्र की परामर्श प्रक्रिया उनके रास्ते में नहीं आएगी. कोर्ट ने इससे पहले देशभर में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश देने का अनुरोध करने वाली याचिका का निपटारा कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि चूंकि, यह मुद्दा नीतिगत है, इसलिए केंद्र को एक अभ्यावेदन सौंपा जा सकता है. वरिष्ठ वकील ने कहा कि अभी तक केंद्र की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है.

क्या जापानी कैशलेस पेमेंट नहीं करते हैं?

खबरों के मुताबिक जापानी लोग कैशलेस पेमेंट बिल्कुल भी नहीं करते हैं! 2019 की बात है, जब जापान में जब एक पेमेंट सर्विस लॉन्चिंग के कुछ समय बाद ही हैक कर ली गई थी। उस वक्त से ही जापानी कैशलेस पेमेंट को लेकर काफी टेंशन में आ गए थे। दरअसल, जिन लोगों ने इस ऐप से खरीदारी की थी, उनके अकाउंट से ही कुछ और पैसे काट लिए गए थे। वो भी बिना उनकी पूर्व अनुमति के। इस बात से जापानी इतना डर गए थे कि उन्होंने कैशलेस खरीदारी करना ही बंद कर दिया। उस वक्त करीब 5.5 करोड़ येन महज 900 यूजर्स के अकाउंट से ही चुरा ले गए थे। तभी से जापानियों के मन में यह डर बैठ गया कि मोबाइल से कैशलेस पेमेंट करना बेहद खतरनाक हो सकता है। हाल ही में जापान में नए येन नोटों का चलन शुरू हुआ है। इसे लेकर सबसे ज्यादा संकट वेंडिंग मशीनों पर मंडरा रहा है, जिन्हें रिप्लेस किया जाना है। माना जा रहा है कि भारत में नोटबंदी की तरह ही जापान की ये ‘नोटबंदी’ लोगों को संकट में डाल देगी। इसे समझते हैं। जापान में 55 लाख से ज्यादा वेंडिंग मशीनें हैं। यानी देश में हर 23 लोगों पर एक 1 वेंडिंग मशीन है। इन मशीनों की पॉपुलैरिटी ऐसे समझी जा सकती है कि दुनिया को तरह-तरह के रोबोट देने वाले जापानी किसी भी कीमत पर सुविधा चाहते हैं। वेंडिंग मशीनों की निरंतर वृद्धि और सफलता को अब उनकी आबादी में गिरावट से भी समझा जा सकता है। कई ग्रामीण इलाकों में छोटी दुकानों या कन्फेक्शनरी कियोस्क में काम करने के लिए कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं हैं। जापान को दुनिया की वेंडिंग मशीनों की राजधानी कहा जाता है।

कई रेस्तरां में ग्राहक अपना ऑर्डर देते हैं और वेंडिंग मशीन में नकदी के जरिए भुगतान करते हैं। उन्हें एक छोटा सा कागज़ का टिकट मिलता है जिसे वे काउंटर के पीछे खड़े व्यक्ति को देते हैं जो उनका खाना तैयार करवाकर उनकी टेबल पर पहुंचा देता है। इस तरह खाना बनाने वाले व्यक्ति को कभी भी पैसे नहीं छूने पड़ते और इस तरह रेस्तरां की साफ-सफाई में भी काफी सुधार आता है। जापान में जहां तापमान 40 डिग्री से लेकर माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो सकता है, वहीं जगह और समय के आधार पर ताजगी देने वाले शीतल और ताजगी देने वाले गर्म पेय दोनों की मांग है। जापान ने अपने खास कुशल तरीके से वेंडिंग मशीनें विकसित की हैं जो एनर्जी बचाने वाली थर्मो रिसाइकिलिंग तकनीक का इस्तेमाल करके एक ही मशीन में पेय को ठंडा और गर्म दोनों तरह से बनाती हैं। नीचे दिए ग्राफिक से समझते हैं कि भारत में दुनिया के मुकाबले कैशलेस पेमेंट कितना है।

वेंडिंग मशीनें पूरी दुनिया में हैं, मगर जापान में व्यापार का आकार और उनकी लॉजिस्टिक्स की चमक इतनी अधिक है कि वहां किसान बाजार खुल गए हैं। जहां मुफ्त में मिलने वाले अंडे से लेकर सलाद या ताजे फल तक सब कुछ वेंडिंग मशीनों से बेचा जाता है। जापान में सिगरेट और बियर भी वेंडिंग मशीनों से ही बेची जा रही हैं। जापान में बहुत से लोग अकेले रहते हैं और लंबे समय तक काम करते हैं, इसलिए अक्सर घर पहुंचने पर वे आखिरी काम करना चाहते हैं, वह है गर्म खाना पकाना। उनके लिए यह बेहद मुश्किल काम लगता है। ऐसे में ये वेंडिंग मशीनें ही लोगों की इस जरूरत को भी पूरा करती हैं। देशभर में सड़क के कोनों या ट्रेन प्लेटफॉर्म पर 60 सेकंड के भीतर कई फास्ट फ़ूड और गर्म खाना खरीदे और तैयार किए जा सकते हैं।

जापानी लोगों को कागजी नोटों से बेहद प्यार है। 2020 में स्टेटिस्टा के एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भुगतान के कैशलेस तरीकों का इस्तेमाल करते समय निजी जानकारी लीक होने, क्रेडिट कार्ड के चोरी होने और दुरुपयोग होने का डर और क्रेडिट कार्ड पर अधिक खर्च करने की चिंता प्रमुख है। जिस वजह से जापान में कैश ही अभी किंग बना हुआ है। नए नोटों के जारी होने से कई लोगों को परेशानी में डाल दिया है। जापान की मौजूदा लाखों वेंडिंग मशीनें अब चलन से बाहर हो जाएंगी। या तो उन्हें पूरी तरह से बदलना होगा या उन्हें अपग्रेड करने के लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी। 2016 में भारत में 500 और 1000 के पुराने नोट बदल दिए गए थे, जिसकी वजह से भारत में लोगों को काफी संकट का सामना करना पड़ा था। यह चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बना था।

नीति निर्माताओं का कहना है कि जालसाजी को रोकने के लिए यह एक आवश्यक कदम था। नए नोटों में देश में वित्तीय सुरक्षा बढ़ेगी। इस निर्णय के पीछे एक और तर्क अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ाने की सुविधा प्रदान करना भी है। नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी अर्थशास्त्री और जापान बोर्ड के पूर्व सदस्य ताकाहिदे किउची ने कहा कि बैंक नोटों के आने से देश की अर्थव्यवस्था पर 1.5 ट्रिलियन येन से अधिक का प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे सकल घरेलू उत्पाद में लगभग एक चौथाई प्रतिशत की वृद्धि होगी।

आखिर दिल्ली में पहले के मुकाबले क्यों कम है बारिश?

दिल्ली में इस बार पहले के मुकाबले बारिश बहुत कम है! देशभर में ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। जिसकी वजह से कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। हालांकि राजधानी दिल्ली से मॉनसून कुछ रूठ सा गया है। बीते वीकेंड भी बारिश के इंतजार में बैठे दिल्लीवासी उमस से परेशान रहे। मॉनसून की इस बिगड़ी चाल को देखकर दिल्ली के लोग हैरान हैं। वहीं यूपी- बिहार और मुंबई में लगातार बारिश से कुछ इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। मॉनसून के आने के बाद कई राज्यों में नदियां उफान पर हैं तो कुछ जगहों पर इतना पानी बरस गया है कि बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी के लोग अभी भी उमस से जूझ रहे हैं। दरअसल मॉनसून तो दिल्ली में आ गया है लेकिन बारिश दिल्ली के लोगों से मुंह फुला कर बैठी हुई है। जिसकी वजह से एक बार फिर से दिल्ली के लोग उमस और गर्मी से परेशान हैं। मौसम विभाग के अनुसार कल भी दिल्ली में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश पड़ सकती है। वहीं दिल्ली का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रहने की उम्मीद है।

मॉनसून तो असली रंग उत्तर प्रदेश में दिखा रहा है। पूर्वी यूपी के कई इलाकों में रोजाना झमाझम बारिश पड़ रही है। जिसकी वजह से वहां के लोगों को गर्मी से राहत मिल गई है। वहीं मौसम विभाग ने कल और परसो यानी 9 और 10 जुलाई के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऐसे में कल और परसो भी यूपी के कई शहरों में बारिश देखने को मिल सकती है।

महाराष्ट्र में भी मॉनसूनी बारिश का असर दिखने लगा है। हालांकि अब बारिश की वजह से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। आज मुंबई में कई जगहों पर रेलवे ट्रैक पर पानी जमा हो गया था। जिसकी वजह से मुंबई लोकल की रफ्तार भी सुस्त हो गई। मौसम विभाग के अनुसार कल भी मुंबई में बारिश का जोर देखने को मिल सकता है। IMD ने 9 जुलाई के लिए मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी कर दी है। वहीं कल मुंबई का अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।

मैदानी ही नहीं पहाड़ी इलाकों में मॉनसून की बारिश का प्रकोप देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश की वजह से मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है। बारिश की वजह से उत्तराखंड में 200 से अधिक रास्ते बंद गए हैं। वहीं नैनीताल , पिथौरागढ़, बागेश्वर जिले में सभी स्कूलों की भी छुट्टी कर दी गई है। बता दें कि मौसम विभाग के अनुसार अभी आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा यानी कि बारिश होती रहेगी और भूस्खलन का भी खतरा बना रहेगा। बता दें कि मॉनसून के आने के बाद से जहां देशभर के कई राज्यों में झमाझम बरसात हो रही है और तापमान में गिरावट आई है। वहीं दिल्ली का हाल इसके बिल्कुल विपरीत है। दरअसल दिल्ली में बीते कुछ दिनों से बारिश नहीं हो रही है जिसकी वजह से राजधानी का तापमान भी बढ़ गया और और उमस भी काफी ज्यादा महसूस हो रही है। वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो बिहार-यूपी और मुंबई में कई जगहों पर बारिश की वजह से जनजीवन बेहाल हो गया है। मौमस विभाग ने तो आज भी मुंबई में भारी बारिश का अनुमान जताया है। 

दिल्ली के आसमान में रोजाना सुबह बादल तो छाए रहते हैं लेकिन बारिश नहीं होती है। जिसकी वजह से राजधानी में एक बार फिर से मॉनसून पर उमस भारी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि बीते कुछ दिनों से मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर उमस अपनी गर्मी फेर दे रहा है। जिसकी वजह से दिल्लीवासी काफी परेशान हो गए हैं। बता दें कि मौसम विभाग ने दिल्ली- NCR में 11-12 जुलाई को जोरदार बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान में दक्षिण पश्चिम मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है और ज्यादातर इलाकों में बारिश का दौर जारी है। IMD के अनुसार 9 से 10 जुलाई को भी दक्षिणी राजस्थान के जोधपुर, उदयपुर व कोटा संभाग के कुछ भागों में गरज के साथ छींटे पड़ने के अलावा मध्यम से तेज बारिश जारी रहने की संभावना है। जिसके बाद 11 जुलाई को बारिश के कम होने के आसार हैं। पहाड़ों पर भी इस साल मॉनसून में खूब बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही राज्यों के लिए आने वाले कुछ दिनों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 10 से 12 जुलाई और उत्तराखंड में 9 से 12 जुलाई के बीच बारिश हो सकती है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में मौसम विभाग ने लैंड स्लाइड का भी खतरा बताया है।

आखिर पहली बार क्यों बनाया गया एडिशनल एनएसए का पोस्ट?

आज हम आपको बताएंगे कि देश में पहली बार एडिशनल एनएसए का पोस्ट क्यों बनाया गया है! क्या भारत के जेम्स बॉन्ड कहे जाने वाले अजित डोभाल के बाद राजिंदर खन्ना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) होंगे? बीते दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में कई बदलाव हुए। नरेंद्र मोदी 9 जून, 2014 को तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो अगले ही दिन 10 जून से अजित डोभाल का भी तीसरा कार्यकाल शुरू हो गया। वो 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त होते रहे। लेकिन पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में एनएससीएस में एक नई बात हुई है। वो यह कि पहली बार एडिशनल एनएसए की नियुक्ति हुई है। यह नया पद राजिंदर खन्ना को दिया गया है जो डेप्युटी एनएसए के पोस्ट से प्रमोट हुए हैं। राजिंदर खन्ना देश की एक्सटर्नल इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ के प्रमुख रह चुके हैं। दरअसल, मोदी सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय का पुनर्गठन कर दिया है। बदलावों में रिपोर्टिंग सिस्टम में चेंज भी शामिल है। रिपोर्टिंग में बदलाव दोनों स्तरों पर हुए हैं- पहला सचिवालय के अंदर और दूसरा एनएसए ऑफिस एवं केंद्रीय मंत्रियों के बीच। एनएसए पहले से बड़े संगठन के मुखिया बन गए हैं। अब तक उनके अंदर सिर्फ तीन डेप्युटी हुआ करते थे, लेकिन अब एक एडिशनल एनएसए भी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबीआई) रहे संजय बारू बताते हैं कि अब एनएसए का मुख्य काम एडवाइजरी का हो गया है जबकि ऑपरेशनल मामलों में उनकी भूमिका घटी है। बारू ने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि अब एनएसए डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबीआई) और स्ट्रैटिजिक पॉलिसी ग्रुप (एसपीजी) जैसे सलाहकार संस्थाओं के साथ डील करेंगे।

बारू कहते हैं कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ-साथ रक्षा, गृह और विदेश समेत कुछ और विभागों के सचिव एनएसए को रिपोर्ट तो करते ही हैं, ये सभी अपने मंत्रियों को भी रोजमर्रा की रिपोर्टिंग करते हैं। ऐसे में देखना होगा कि इन विभागों के मंत्री नए बदलावों को किस नजरिए से देखते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल तक या फिर अगले आदेश तक अपने पद पर बने रहेंगे। बारू का कहना है कि वैसे तो प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार सिविल ब्यूरोक्रेसी से डील करते हैं, लेकिन अगर एनएसए ने अति-सक्रियता दिखाकर कैबिनेट सेक्रेटरी और सरकार के अन्य सेक्रेटरीज की मीटिंग लेने लगे तो खींचतान की स्थिति हो सकती है।

संजय बारू को मुताबिक, एडिशनल एनएसए का जो पद क्रिएट किया गया है, वो अब एनएस और मिड लेवल के छह यूनिट हेड्स के बीच गेटकीपर की भूमिका निभाएगा। ये यूनिट हेड तीन डिप्टी एनएसए और तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं। इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री और रोजमर्रा के स्तर पर राष्ट्रीय सुरक्षा की मॉनिटरिंग करने वालों के बीच नौकरशाही का एक और लेयर बन गया है। सवाल है कि क्या अब भी प्रधानमंत्री को हर दिन एनएसए ही ब्रीफ करेंगे या फिर यह जिम्मेदारी अब एडिशनल एनएसए के पास चली गई है या फिर एनएसए और एडिशनल एनएसए दोनों मिलकर पीएम को ब्रीफ करेंगे? एक और सवाल है कि रॉ और आईबी के प्रमुखों का और फिर सीडीएस का पीएम के साथ रिश्ते कैसे होंगे?

बारू का कहना है कि इन बदलावों ने सिविल और मिलिट्री दोनों ब्यूरोक्रेसीज के अंदर कई तरह से सवाल खड़े कर दिए हैं। अटकलें तो इस बात की भी लग रही हैं कि क्या मोदी सरकार ने राजिंदर खन्ना को प्रमोट करके एनएसए डोभाल को कोई संदेश दिया है। इन्हीं अटकलों के बीच यह भी कहा जा रहा है कि संभव है कि अजित डोभाल अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, उसके बाद ही राजिंदर खन्ना को उनकी जगह दी जाएगी। बता दें कि सभी अपने मंत्रियों को भी रोजमर्रा की रिपोर्टिंग करते हैं। ऐसे में देखना होगा कि इन विभागों के मंत्री नए बदलावों को किस नजरिए से देखते हैं। बारू का कहना है कि वैसे तो प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार सिविल ब्यूरोक्रेसी से डील करते हैं, लेकिन अगर एनएसए ने अति-सक्रियता दिखाकर कैबिनेट सेक्रेटरी और सरकार के अन्य सेक्रेटरीज की मीटिंग लेने लगे तो खींचतान की स्थिति हो सकती है। डोभाल की तीसरी नियुक्ती में कहा गया है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल तक या फिर अगले आदेश तक अपने पद पर बने रहेंगे।

आखिर क्या थी कारगिल की एक डरा देने वाली कहानी?

आज हम आपको कारगिल की एक डरा देने वाली कहानी बताने जा रहे हैं! 25 साल पहले कारगिल की जंग की कहानियां आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं। इस युद्ध में सेना के बहादुर जवानों की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है 8 सिख रेजिमेंट के सिपाही सतपाल सिंह की। दुश्मन की AK- 47 से चार गोलियां लगने के बावजूद, सतपाल सिंह ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। कारगिल युद्ध के दौरान कई मिनट तक चली एक भयंकर आमने-सामने की लड़ाई के बाद पाकिस्तानी सेना के कैप्टन शेर खान और तीन अन्य को सतपाल सिंह ने मार डाला। कैप्टन शेर खान को मरणोपरांत पाकिस्तान के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार निशान-ए-हैदर से सम्मानित किया गया, जो भारत के परमवीर चक्र के बराबर है। जानकर हैरानी होगी कि यह पुरस्कार भी शेर खान को सतपाल के सीनियर अधिकारी की सिफारिश पर मिला जिन्होंने खान की बहादुरी की पुष्टि की थी। कारगिल क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटियों में से एक टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना की नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री का कब्जा था और इसे वापस जीतने का मिशन 8 सिख रेजिमेंट को सौंपा गया था। सिपाही सतपाल, जो अब 51 साल के हैं, याद करते हैं कि कैसे नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री के शेर खान और दूसरे पाकिस्तानी सैनिक लड़ाई के दौरान गालियां देते रहे। सतपाल कहते हैं कि सिख सैनिकों में वीरता कूट-कूट कर भरी होती है और वे डरने वाले नहीं थे। हमारी 8 सिख रेजिमेंट को टाइगर हिल पर फिर से कब्जा करने का काम दिया गया था। एक टीम बनाई गई जिसमें 52 सैनिक शामिल थे, जिनमें दो अधिकारी, चार जेसीओ (जूनियर कमीशन अधिकारी) और 46 अन्य रैंक के सैनिक शामिल थे।

सतपाल कहते हैं कि 4 जुलाई 1999 की रात को हमारी घातक पलटन ने पाठ किया,अरदास की और फिर टाइगर हिल के उस पॉइंट की ओर बढ़ गए, जिस पर पाकिस्तानी सेना ने कब्जा कर रखा था। 5 जुलाई की सुबह,’बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ के नारों के बीच, हमने टाइगर हिल के करीब इंडिया गेट पर कब्जा कर लिया। हमारे कुछ दुश्मन मारे गए जबकि अन्य भागने में सफल रहे। सतपाल याद करते हैं कि अगली सुबह 6 जुलाई हमें पाकिस्तानी सेना की ओर से जवाबी हमले का सामना करना पड़ा। संख्या में कम होने के बावजूद, सिख सैनिकों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और पाकिस्तानियों को पीछे कर दिया। लेकिन यह उस लड़ाई का अंत नहीं था। सतपाल कहते हैं पाकिस्तानी कैप्टन शेर खान ने फिर जवाबी हमले के लिए तीसरी बार अपनी सेना एकत्र की। यह जानते हुए भी किया कि वह सिख सैनिकों को हरा नहीं पाएंगे।

उस दिन को याद करते हुए सतपाल कहते हैं कि शेर खान को ट्रैक सूट पहने देखा। उस समय हमें नहीं पता था कि वह कौन है। पांच मिनट से अधिक समय तक हमारे बीच गोलीबारी हुई और हम एक-दूसरे को गालियां देते रहे। मैंने उस पर गोलियां चलाईं जिससे वह घायल हो गया और फिर उस पर झपट पड़ा। लेकिन कुछ ही सेकंड में मुझे एके 47 से चार गोलियां लगीं, जो मेरे दाहिने पैर, पेट, बाएं हाथ और बाएं कंधे में लगीं। मैंने किसी तरह खुद को संभाला और शेर खान को कवर कर रहे तीन गार्डों पर गोलियां चला दीं। आमने-सामने की लड़ाई के बाद मैं शेर खान को गोली मारने में कामयाब रहा। हम दोनों ने बहादुरी से मुकाबला किया।

लगभग 50 मिनट तक चले इस लड़ाई में हमारी टीम के 18 जवान शहीद हो गए, जिनमें तीन जेसीओ और 15 अन्य रैंक के जवान शामिल थे जबकि दुश्मन पक्ष के 85 से अधिक जवान मारे गए। 7 जुलाई की सुबह, मुख्यालय से हमारी टीम हमें अस्पताल ले जाने के लिए पहुंची। सतपाल ने भले ही शेर खान से लड़ाई की हो, लेकिन वह उसकी बहादुरी को स्वीकार करते हैं। सतपाल कहते हैं कि शेर खान बहादुर और मजबूत था। हमारे कमांडर ने मृत पाकिस्तानी कप्तान की जेब में एक पर्ची भी डाल दी, जिसमें उल्लेख था कि उसने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। बट ने कहा संख्या में कम होने के बावजूद, सिख सैनिकों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और पाकिस्तानियों को पीछे कर दिया। लेकिन यह उस लड़ाई का अंत नहीं था। सतपाल कहते हैं पाकिस्तानी कैप्टन शेर खान ने फिर जवाबी हमले के लिए तीसरी बार अपनी सेना एकत्र की। सतपाल कहते हैं कि उन्हें अपने पिता स्वर्गीय अजायब सिंह से युद्ध की भावना विरासत में मिली है, जिन्होंने पंजाब के फिरोजपुर सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध में लड़ाई लड़ी थी।

जब बारिश के चलते दिल्ली के पीडब्ल्यूडी का सिस्टम बह गया!

हाल ही में दिल्ली के पीडब्ल्यूडी का सिस्टम बारिश के चलते बह गया है! अंडरपास में जलभराव न हो, इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने जो इंतजाम किए हैं, वह पहली बारिश में ही फेल हो गए। सभी अंडरपास में घंटों पानी भरा रहा और इस दौरान ट्रैफिक भी बंद रहा। पानी निकासी के लिए लगे मोटर पंप भी कई जगह काम नहीं कर रहे थे। ड्रेन भी ब्लॉक थे जिससे पानी नाले के जरिए आगे जा ही नहीं पा रहा था। आजादपुर अंडरपास, लामपुर अंडरपास, शालीमार बाग अंडरपास, प्रेमबाड़ी पुल अंडरपास, मधुबन चौक अंडरपास सभी जगह जलभराव की समस्या रही। पहली बारिश में मिंटों ब्रिज के नीचे भी पानी जमा हो गया। पानी निकासी के लिए यहां दो पंप हाउस बनाए गए हैं, जिसमें से एक पंप हाउस में 5 व दूसरे में 8 मोटर पंप लगे हैं। लेकिन इसमें से पांच मोटर पंप काम ही नहीं कर रहे थे, जिससे अंडरपास के नीचे दोनों तरफ जलभराव की समस्या गंभीर हो गई। पहाड़गंज और पुरानी दिल्ली की ओर से आने वाला पानी भी अंडरपास के नीचे जमा हो गया।

बारिश के बाद द्वारका अंडरपास में भी जलभराव की स्थिति गंभीर रही। पानी निकासी के लिए अंडरपास में 10 -12 मोटर पंप लगे हैं। लेकिन, जैसे ही बारिश का पानी अंडरपास में जमा होने लगा, मोटर पंप चले ही नहीं। करीब दो घंटे तक मोटर पंप न चलने की वजह से द्वारका अंडरपास लगभग डूब-सा गया। पीडब्ल्यूडी अफसरों का कहना है कि सुबह बिजली नहीं थी, जिसके चलते मोटर पंप 2 घंटे नहीं चले और इसी के चलते अंडरपास में पानी भर गया। लेकिन, जैसे ही बिजली आई, दोपहर 2 बजे तक अंडरपास से पानी निकाल दिया गया। बारिश के बाद पीडब्ल्यूडी के इस अंडरपास में जलभराव की समस्या रही। अंडरपास के नीचे जलभराव न हो, इसके लिए दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने संप-वेल बनाया था और मोटर पंप भी लगाया है। लेकिन, ये तमाम इंतजाम काम नहीं आए। जैसे ही बारिश हुई, अंडरपास में दोनों तरफ पानी जमा हो गया। अंडरपास से पानी को मोटर से जल बोर्ड के नाले में फ्लड किया जाने लगा। लेकिन, नाला ही जाम था, जिससे पानी आगे जा ही नहीं रहा था। इसके चलते कई घंटे तक अंडरपास में पानी जमा रहा और ट्रैफिक बंद रहा।

जखीरा अंडरपास में जलभराव की समस्या रही। अंडरपास में पानी निकासी के लिए पीडबल्यूडी ने 9 मोटर पंप लगाए हैं। लेकिन, कई मोटर पंप तो पानी में ही डूब गए थे। कुछ मोटर पंप जो बाहर लगे थे, वह चल तो रहे थे लेकिन, उससे पानी जिस नाले में फेंका जा रहा था, वह नाला ही जाम था। जिससे पानी आगे की ओर नहीं बढ़ रहा था। किसी तरह से नाले से गाद हटाकर पानी के जाने का रास्ता बनाया गया और इसके बाद अंडरपास से पानी निकासी हो पाया।

आजाद मार्केट अंडरपास में भी शुक्रवार को जलभराव की स्थिति गंभीर रही। जलभराव के चलते सुबह एक बस फंस गई। यात्रियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। रस्सी और राफ्ट का इस्तेमाल कर यात्रियों को बस से सुरक्षित बाहर निकाला गया।सीनियर आप नेता और जल मंत्री आतिशी ने कहा कि दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 228 मिलीमीटर वर्षा हुई जो जून माह में 1936 से अबतक सर्वाधिक है। उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब है कि दिल्ली में कुल मॉनसूनी बारिश (800 मिमी) का 25 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ 24 घंटे में बरसा है। इसके कारण कई इलाकों में नाले उफना गए और पानी निकलने में समय लगा।’

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि पानी की कमी के कारण दिल्ली के तीन महीने तक अराजकता झेलने के बाद अब मॉनसून की तैयारी में आप सरकार की विफलता दर्शाती है कि उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। दक्षिण दिल्ली के बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मांग की कि दिल्ली सरकार को तत्काल बर्खास्त किया जाए । उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी ‘लापरवाही, अक्षमता एवं अकार्यकुशलता के कारण’ शहर में बाढ़ आ गयी है।

आतिशी के बंगले में पानी भर जाने के बाद उनपर कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली के लोगों का उनपर से भरोसा उठ गया है । उन्होंने आरोप लगाया कि नालों से गाद नहीं निकाले जाने के लिए दिल्ली सरकार और एमसीडी में भ्रष्टाचार जिम्मेदार है और वर्षा से इसे सही साबित कर दिया है । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने अंडरपास में फंसी बस से अग्निशमन कर्मियों द्वारा एक व्यक्ति को बाहर निकाले जाने का वीडियो साझा करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा कि दिल्ली सरकार की इससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है।

आखिर उत्तराखंड के मजबूत गढ़ से कैसे हारी बीजेपी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि उत्तराखंड के मजबूत गढ़ से बीजेपी कैसे हारी है! उत्तराखंड में चल रहे विधानसभा उपचुनाव के वोटों की गिनती में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। 10 जुलाई को दोनों सीटों पर वोट डाले गए थे। आज चुनाव परिणाम घोषित किया जा रहा है। दोनों ही सीटों के शुरुआती रुझानों में भाजपा पिछड़ती नजर आ रही है। भाजपा को बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। वहीं, मंगलौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर खिसकती दिख रही है। मंगलौर सीट पर विधायक सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है। वहीं, बद्रीनाथ विधानसभा सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी के पाला बदलने के बाद उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी दोनों सीटों पर बाहरी दूसरे दलों से आए उम्मीदवारों पर भरोसा करती दिख रही है। इस कारण कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ ढीली बनती दिख रही है। उपचुनाव के शुरुआती रुझान इसी तरफ इशारा करते दिख रहे हैं। बद्रीनाथ निवर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई थी। भाजपा ने उन्हें पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन, उपचुनाव के मैदान में वह पिछड़ते दिख रहे हैं। वहीं, मंगलोर सीट पर विधायक के निधन के बाद सहानुभूति की लहर का असर नहीं दिख रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार यहां पर भी आगे चल रहे हैं। हालांकि, मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस और बसपा के बीच चुनावी टक्कर होती दिख रही है। भाजपा यहां तीसरे स्थान पर की पिछड़ती नजर आ रही है।

बद्रीनाथ सीट पर भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बद्रीनाथ से राजेंद्र सिंह भंडारी विधायक चुने गए। हालांकि, उन्हें भाजपा अपने पाले में लाने में कामयाब रही। ऐसे में यह सीट खाली हो गई। यहां से राजेंद्र भंडारी को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा गया। हालांकि, इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर होती दिख रही है। बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा ने पूर्व विधायक राजेंद्र भंडारी को उम्मीदवार बनाया। उनके समर्थन में पुष्कर सिंह धामी तक चुनावी मैदान में प्रचार करने उतरे। वहीं, मंगलौर विधानसभा सीट से करतार सिंह भड़ाना को प्रत्याशी बनाया गया। करतार सिंह भड़ाना हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विधायक रह चुके हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सदस्यता ली थी। इस प्रकार भाजपा ने बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया।

वहीं, कांग्रेस अलग रणनीति के साथ उपचुनाव के मैदान में उतरी। कांग्रेस ने मंगलौर सीट पर अनुभवी और बद्रीनाथ सीट पर नए चेहरे को चुनावी मैदान में उतारा। मंगलौर सीट से काजी मोहम्मद निजामुद्दीन और बद्रीनाथ सीट से प्रत्याशी लखपत बुटोला भाजपा को कड़ी टक्कर देते दिखे। उत्तराखंड उपचुनाव के चार राउंड के वोटों की गिनती के बाद असर साफ दिख रहा है। मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की बढ़त लगातार बड़ी हो रही है। कांग्रेस उम्मीदवार काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने 4898 वोटों की बढ़त बना ली है। तीसरे राउंड के वोटों की गिनती के बाद काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 16,696 वोटों के साथ आगे निकलते दिख रहे हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के उबैदुर रहमान मोंटी 11,798 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। भारतीय जनता पार्टी के करतार सिंह भड़ाना 7630 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर हैं।बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर तीसरे राउंड में भी कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला बढ़त बनाई हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला लगातार पहले नंबर पर बने हुए हैं। उन्हें अब तक 7223 वोट मिले हैं। वहीं, भाजपा के राजेंद्र सिंह भंडारी 6062 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इस प्रकार कांग्रेस उम्मीदवार ने 1161 वोटों की बढ़त बनाई हुई है।

बीजेपी ने पिछले समय में दूसरे दलों से नेताओं को लेकर चुनावी मैदान में उतारा है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान ऐसे मामले कई सीटों पर देखने को मिले। इन उम्मीदवारों से पार्टी का आम कार्यकर्ता कनेक्ट ही नहीं कर पाया। उत्तराखंड में भी यह होता दिख रहा है। बद्रीनाथ सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा ने कब्जा जमाया था। लेकिन, 2022 में पार्टी हार गई। इसके बाद विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी को अपने पाले में ले आए। फिर उम्मीदवार बना दिया। इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी थी। वहीं, मंगलौर में भी कारतार सिंह भड़ाना को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में कोई खुशी नहीं दिखी थी। कार्यकर्ता उदासीन हुए तो फायदा विपक्ष को मिलता दिख रहा है।

जब देश में हुआ पहली बार रेनल ऑटोट्रांसप्लांट सफल!

हाल ही में देश में पहली बार रेनल ऑटोट्रांसप्लांट सफल हो चुका है! एम्स दिल्ली में सात साल के एक बच्चे की दुर्लभ किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई, जो सक्सेसफुल रही। यह बच्चा रेसिस्टेंट रेनोवास्कुलर हाइपरटेंशन नाम की बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में उसकी किडनी की धमनियों के सिकुड़ने से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो जाती थी। एम्स के डॉक्टरों ने यह ऑपरेशन 29 जून को किया। इसमें बच्चे की अपनी किडनी को निकालकर उसके शरीर के ही दूसरे हिस्से में ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक भारत में ऐसी सर्जरी पहली बार हुई है, वहीं दुनिया में ऐसा तीसरी बार हुआ है। पश्चिम बंगाल के रहने वाले 7 वर्षीय प्रणिल चौधरी की धमनी में एक एन्यूरिज्म पाया गया था, जिसकी वजह से उसकी दाहिनी किडनी में खून का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पा रहा था। इस वजह से उसका ब्लड प्रेशर 150/110 तक पहुंच जाता था। पिछले साढ़े तीन साल में दो बार उसके यूरिन में खून भी आया था। डॉक्टरों ने आगाह किया कि लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से दिमाग, हार्ट और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के एडिशनल प्रोफेसर डॉक्टर मंजुनाथ मारुति पोल ने बताया कि एन्यूरिज्म के लक्षण दिखने पर उसका इलाज स्टेंटिंग या सर्जरी से किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एन्यूरिज्म किडनी हिलम (डिस्टल) के पास स्थित था और उसका फ्यूसीफॉर्म आकार स्टेंटिंग को अव्यवहारिक और अप्रभावी बना रहा था। इसी के कारण सर्जिकल इलाज का निर्णय लिया गया। आठ घंटे तक चली इस सर्जरी को डॉ पोल और एम्स में सीवीटीएस कार्डियक सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने अंजाम दिया। सात दिन बाद बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उसके टेस्ट से पता चला है कि सर्जरी के बाद उसकी किडनी दूसरी किडनी की तरह ही ठीक से काम कर रही है।7 साल का मासूम पिछले एक साल से हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने के लिए रोजाना दवा ले रहा था। हालांकि, सर्जरी के बाद अब उसे इसके लिए दवा लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ऑटोट्रांसप्लांटेशन प्रक्रिया का उद्देश्य गुर्दे की शारीरिक रचना को बहाल करना, रेनोवास्कुलर हाइपरटेंशन का इलाज करना शामिल है।’

इस दुर्लभ सर्जरी की जटिलता के बारे में बताया। हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को उन्होंने बताया कि ऑटोट्रांसप्लांटेशन का पहला उदाहरण 2014 में कोरिया में आया था, जब एक 13 वर्षीय मरीज की सर्जरी की गई थी। लेकिन ये प्रक्रिया असफल रही और सर्जरी के तुरंत बाद किडनी को निकालना पड़ा। दूसरा मामला 2021 में लंदन में एक चार साल की बच्ची का था। डॉ. पोल ने कहा कि सात साल का इस मरीज की सर्जरी का केस दुनिया का तीसरा मामला है। ये पहला सफल राइट किडनी एन्यूरिज्मकेटोमी और ऑटोट्रांसप्लांटेशन है।

यही नहीं बीएमसी के केईएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने पहली बार सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया है। केईएम देश का पहला बीएमसी अस्पताल है, जिसने हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी करके इतिहास रचा है। मरीज इस वक्त डॉक्टरों की टीम की निगरानी में है। 56 साल पहले भी यहां एक बार हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था लेकिन वह सफल नहीं हुआ था। यह अस्पताल के इतिहास में पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट है। औरंगाबाद के रहने वाले 38 वर्षीय राहुल चौहान (बदला हुआ नाम) को 35 की उम्र में पहली बार हार्ट अटैक आया था। एंजियोप्लास्टी की गई, लेकिन कुछ महीने बाद फिर दिल से जुड़ी दिक्कतें सामने आने लगीं। उन्हें जो स्टेंट लगाया गया था उसमें ब्लॉक पाया गया। हार्ट की पंपिंग कैपेसिटी भी कम हो गई थी। हार्ट फैल्योर से बचाने के लिए उन्हें दवाओं पर रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, अब केवल हार्ट ट्रांसप्लांट से ही उनकी जान बचाई जा सकती थी। ऐसे में राहुल ने पहले पुणे के अस्पताल का रुख किया, लेकिन उन्हें केईएम जाने का सुझाव दिया गया। केईएम में राहुल दो महीने तक एडमिट थे। हार्ट का वेट किया जा रहा था, लेकिन अचानक वह नाउम्मीद हो गए और उन्होंने अस्पताल से जाने का निर्णय लिया। इस पर केईएम अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मुंबई में ही रहने की सलाह दी। परिवार डोंबिवली में किराए के घर में रुका हुआ था। आखिरकार अस्पताल से फोन आया। एक महिला का ब्रेन डेड हुआ था। उनका हार्ट राहुल का लगाया जा सकता था। 

राहुल का हार्ट ट्रांसप्लांट हो गया, लेकिन इसके पीछे परिवार का 2.5 साल का पहाड़ जैसा संघर्ष था। राहुल के पिता कहते हैं, राहुल निजी कंपनी में सिक्युरिटी गार्ड हैं। तबीयत खराब होने के बाद काम छूट गया। घर चलाने के लिए ऑटो रिक्शा चलाना शुरू किया, लेकिन तबीयत खराब होती गई और वह काम करने स्थिति में नहीं रहा। केईएम हमारे लिए स्वर्ग है। यहां के डॉक्टर हमारे लिए भगवान। ईश्वर ने जो मेरे बेटे के लिए लिखा है, वो होगा। कुछ बुरा भी हुआ तो जिम्मेदार अस्पताल नहीं होगा, क्योंकि मैंने देखा है कि 3-4 महीने में एक परिवार की तरह डॉक्टरों ने हमारे साथ व्यवहार किया है।

क्या आतंकवादियों से हार चुकी है पाकिस्तान की सरकार?

वर्तमान में पाकिस्तान की सरकार आतंकवादियों से पूरी तरह हार चुकी है! पाकिस्तान की सरकार ने एक बार फिर चरमपंथियों के आगे घुटने टेक दिए हैं। ऑपरेशन-ए-इस्तेहकाम को हरी झंडी दिए जाने के दो दिन बाद ही शहबाज शरीफ सरकार बैकफुट पर आ गई है। सोमवार देर रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम पर सफाई दी और कहा कि ‘देश में कोई बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान नहीं किया जा रहा है।’ पीएमओ के बयान में कहा गया है कि ‘हाल ही में घोषित अज्म-ए-इस्तेहकाम को गलत तरीके से समझा जा रहा है और इसकी तुलना पहले शुरू किए गए सशस्त्र अभियान जर्ब-ए-अज्ब, राह-ए-नजात आदि से की जा रही है।’ पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान का फैसला चीन के वरिष्ठ मंत्री के पाकिस्तान दौरे के एक दिन बाद लिया था। चीनी मंत्री लियु जियानचाओ ने साफ कर दिया था कि सुरक्षा स्थिति बहाल हुए बिना चीन आगे पाकिस्तान में निवेश नहीं करेगा।बयान में आगे कहा गया है कि ‘पिछले अभियानों में प्रभावित क्षेत्रों से आतंकवाद का पूरी तरह से सफाया करने के लिए स्थानीय आबादी को बड़े पैमाने पर विस्थापित करना पड़ा था। वर्तमान में देश में ऐसा कोई निषिद्ध क्षेत्र नहीं है।’ पाकिस्तान ने 15 जून 2014 को अफगानिस्तान सीमा से लगे उत्तरी वजीरिस्तान इलाके में आतंकवाद विरोधी एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, इसमें सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पहले से जारी ऑपरेशनों के अलावा राजनीतिक, कूटनीतिक, कानूनी और सूचना संबंधी पहलू शामिल होंगे।’ इसमें यह भी कहा गया है स्पष्टीकरण से सभी गलतफहमियों को दूर होने के साथ ही इस विषय पर अनावश्यक बहस बंद हो जानी चाहिए।जिसे जर्ब-ए-अज्ब नाम दिया गया था। अभियान शुरू होने के एक महीने के भीतर इलाके से 80 हजार परिवारों से जुड़े लगभग 9.5 लाख लोगों को विस्थापित किया गया था।

शहबाज शरीफ सरकार का ये बयान ऐसे समय में आया है जब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), जमीयत-ए-उलेमा इस्लाम फजल (JUI-F), अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) और अन्य विपक्षी दलों ने नए सैन्य अभियान का विरोध किया है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले संसद को विश्वास में लिया जाना चाहिए। पीएमओ ने कहा, ‘ऐसे किसी बड़े पैमाने के सैन्य अभियान पर विचार नहीं किया जा रहा है, जिसमें आबादी के विस्थापन की आवश्यकता होगी।’ इसमें कहा गया है कि ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम पाकिस्तान में स्थायी स्थिरता के लिए एक बहु-क्षेत्रीय, बहु-एजेंसी, संपूर्ण-प्रणाली राष्ट्रीय दृष्टिकोण है।

बयान में आगे कहा गया है कि नए ऑपरेशन का उद्देश्य पहले से ही मौजूद खुफिया-आधारित गतिशील ऑपरेशनों को सक्रिय करना है, जिससे देश में हिंसक चरमपंथ को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके। ताकि देश में आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए एक समग्र सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। बयान में कहा गया है, ‘इसमें सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पहले से जारी ऑपरेशनों के अलावा राजनीतिक, कूटनीतिक, कानूनी और सूचना संबंधी पहलू शामिल होंगे।’ इसमें यह भी कहा गया है स्पष्टीकरण से सभी गलतफहमियों को दूर होने के साथ ही इस विषय पर अनावश्यक बहस बंद हो जानी चाहिए।

पाकिस्तान सरकार ने शनिवार नेशनल ऐक्शन प्लान की एपेक्स कमेटी की बैठक में ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पाकिस्तान के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी शामिल हुए थे। इसके बाद कहा जा रहा था कि पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान का फैसला चीन के वरिष्ठ मंत्री के पाकिस्तान दौरे के एक दिन बाद लिया था।पाकिस्तान ने 15 जून 2014 को अफगानिस्तान सीमा से लगे उत्तरी वजीरिस्तान इलाके में आतंकवाद विरोधी एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसे जर्ब-ए-अज्ब नाम दिया गया था। पीएमओ ने कहा, ‘ऐसे किसी बड़े पैमाने के सैन्य अभियान पर विचार नहीं किया जा रहा है, जिसमें आबादी के विस्थापन की आवश्यकता होगी।’ इसमें कहा गया है कि ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम पाकिस्तान में स्थायी स्थिरता के लिए एक बहु-क्षेत्रीय, बहु-एजेंसी, संपूर्ण-प्रणाली राष्ट्रीय दृष्टिकोण है।अभियान शुरू होने के एक महीने के भीतर इलाके से 80 हजार परिवारों से जुड़े लगभग 9.5 लाख लोगों को विस्थापित किया गया था। चीनी मंत्री लियु जियानचाओ ने साफ कर दिया था कि सुरक्षा स्थिति बहाल हुए बिना चीन आगे पाकिस्तान में निवेश नहीं करेगा। पाकिस्तान के नए अभियान के पीछे चीन के दबाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

क्या पाकिस्तान को चीन दे रहा है स्टील्थ पनडुब्बियां?

वर्तमान में चीन पाकिस्तान को स्टील्थ पनडुब्बियां दे रहा है! चीन इन दिनों पाकिस्तान के लिए हंगोर क्लास की पनडुब्बियां बनाने में व्यस्त है। इस क्लास की पहली पनडुब्बी दो महीने पहले ही समुद्री ट्रायल के लिए लॉन्च की गई थी। हंगोर क्लास की पनडुब्बियां उन्नत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस हैं, जिन्हें समुद्र में डिटेक्ट करना मुश्किल होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि चीन इतने कम पैसे में पाकिस्तान जैसे कंगाल मुल्क को इतनी ताकतवर तकनीक से लैस पनडुब्बी क्यों दे रहा है। अब पता चला है कि दरअसल, चीन के पाकिस्तान को हंगोर क्लास की पनडुब्बी देने का कारण हिंद महासागर और अरब सागर में शक्ति संतुलन बदलना है, जिसका लाभ बीजिंग को होगा। चीन ने पाकिस्तान के लिए बनाई गई पहली हंगोर क्लास पनडुब्बी की लॉन्चिंग अप्रैल 2024 में वुहान में की थी। दोनों देशों ने पनडुब्बियों के लिए अनुबंध पर 2015 में हस्ताक्षर किए थे, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पाकिस्तान की यात्रा पर थे। इस सौदे के तहत, चार पनडुब्बियों का निर्माण चीन के डब्ल्यूएसआईजी द्वारा किया जाना है, जबकि शेष चार का निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते के तहत पाकिस्तान में कराची शिपयॉर्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में किया जाना है। एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस, ये पनडुब्बियां पाकिस्तान को अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत पर रणनीतिक बढ़त दिलाती हैं, जिसके पास ऐसी कोई स्टील्थ पनडुब्बी नहीं है।

पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AIP प्रणाली गैर-परमाणु पनडुब्बियों को वायुमंडलीय ऑक्सीजन की आवश्यकता के बिना संचालित करने की अनुमति देती है। AIP प्रणाली से लैस पनडुब्बियां लगभग शोर रहित होती हैं, जिससे वे परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बियों की तुलना में अधिक स्टील्थ होती हैं। अपने पुराने सहयोगी पाकिस्तान को स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति करने में बीजिंग का लक्ष्य हिंद महासागर पर प्रभुत्व की दौड़ में भारत को पीछे छोड़ना हो सकता है। ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि चीन के साथ भारत का पुराना सीमा विवाद है। वहीं, अमेरिका भी चीन के खिलाफ भारत को हथियारों से लैस कर रहा है।

चीन की वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा हिंद महासागर में उसकी बढ़ी हुई सैन्य उपस्थिति पर निर्भर करती है, जिसमें तेल और माल के लिए महत्वपूर्ण शिपिंग लेन हैं। 2017 में, चीन ने हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा खोला था। चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक मजबूत पाकिस्तानी नौसेना को महत्वपूर्ण मानता है। 2022 में, पाकिस्तानी नौसेना ने अपने सबसे उन्नत युद्धपोत तुगरिल को सेवा में शामिल किया। शंघाई शिपयार्ड में निर्मित और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस, तुगरिल एक बहुमुखी पोत है जो कई मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है।

उसी वर्ष, पाकिस्तान ने चीन से चार शक्तिशाली गाइडेड मिसाइल युद्धपोतों में से दूसरा तैमूर को खरीदा। शंघाई में निर्मित, तैमूर पाकिस्तान की नौसेना बलों की भौगोलिक पहुंच का विस्तार करता है। पाकिस्तान के साथ चीन की साझेदारी उसे हिंद महासागर में पैर जमाने का मौका देती है, जिसने भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन की तरह, भारत भी कच्चे तेल और माल के परिवहन के लिए हिंद महासागर पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव में नौसैनिक ठिकानों और बंदरगाहों में चीन के निवेश को हिंद महासागर के समुद्री क्षेत्र की घेराबंदी के रूप में देखता है। 2022 में, भारत ने श्रीलंका के हंबनटोटा में एक चीनी शोध पोत के डॉकिंग का विरोध किया, इस डर से कि जहाज भारत की रक्षा क्षमताओं की निगरानी कर सकता है।

पाकिस्तानी नौसेना को स्टील्थ पनडुब्बियों से लैस करके, चीन पाकिस्तान और भारत के बीच नौसैनिक प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है। चूंकि भारत ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका जैसे क्वाड का हिस्सा है, इसलिए हिंद महासागर में भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तेज हो सकती है। हिंद महासागर पर प्रभुत्व की दौड़ में भारत को पीछे छोड़ना हो सकता है। ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि चीन के साथ भारत का पुराना सीमा विवाद है। वहीं, अमेरिका भी चीन के खिलाफ भारत को हथियारों से लैस कर रहा है।हिंद महासागर में अपनी सामरिक उपस्थिति बढ़ाकर, चीन अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों का भी विस्तार कर रहा है। चीन के तेल का अस्सी प्रतिशत मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है – इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच एक संकरा जलमार्ग जो हिंद महासागर के पूर्व में स्थित है।