Sunday, February 25, 2024
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क्या पीएम मोदी छीन लेंगे कांग्रेस से उसका सबसे बड़ा हथियार?

पीएम मोदी अब कांग्रेस से उसका सबसे बड़ा हथियार छीनने वाले हैं! किसी मौके को कैसे भुनाते हैं, ये कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीखे। मौका भले ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब का हो, लेकिन मोदी इस मौके को चुनाव से पहले जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए चतुराई से इस्तेमाल कर ही लेते हैं। अबतक के 10 साल के कार्यकाल की उपलब्धियां बयां कर देते हैं। आगे उनकी सरकार क्या करना चाहती है, मंशा क्या है, विजन क्या है, उसका खाका भी खींच देते हैं। विपक्ष की आलोचना का चुन-चुनकर जवाब देते हैं। पहले लोकसभा में और बाद में राज्यसभा में। पीएम मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में अपनी स्पीच के दौरान मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निर्मम हमले किए। लेकिन राज्यसभा में उनके भाषण का केंद्रीय बिंदु था आरक्षण के मुद्दे पर आक्रामक होती कांग्रेस पर तीखा हमला। वो भी उसी के हथियार से। नेहरू के कथित 'आरक्षण विरोध' से लेकर बाबा साहेब आंबेडकर के कथित अपमान के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चुनाव से लेकर अति पिछड़े सीताराम केसरी के कथित अपमान तक के मुद्दे पर कांग्रेस को कोसा। पीएम मोदी ने आरक्षण के मुद्दे पर अपने हमलों से कैसे कांग्रेस के हथियार की धार को खत्म करने की कोशिश की है, इसकी चर्चा आगे करते हैं। पहले ये देख लेते हैं कि आखिर कांग्रेस लोकसभा चुनाव में आरक्षण को एक बड़ा हथियार कैसे बना रही है? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले हुए हैं। लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। जाति गणना की बात करते हैं। 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' का नारा बुलंद करते हैं। ओबीसी की बात करते हैं। एससी, एसटी आरक्षण बढ़ाने की बात करते हैं। आरक्षण पर 50 प्रतिशत की लिमिट खत्म करने की बात करते हैं। इसकी गारंटी देते हैं। आरक्षण पर राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट से यह कहकर पोस्ट किया जाता है- आरक्षण पर 50 प्रतिशत की लिमिट खत्म कर देंगे, ये कांग्रेस की गारंटी है। क्लिप में राहुल गांधी कहते दिखते हैं, 'मैं आपको गारंटी देके कह रहा हूं कि आजकल 50 प्रतिशत से ज्यादा रिजर्वेशन नहीं मिल सकता। मैं आपको गारंटी देके कह रहा हूं कि ये जो 50 प्रतिशत की लिमिट है, इसे कांग्रेस पार्टी की सरकार, I.N.D.I.A. की सरकार उठाकर फेंक देगी। और हम जो दलित हैं, आदिवासी भाई हैं, उनके रिजर्वेशन में कोई कमी नहीं आएगी और जो पिछड़ों का हक बनता है, वो उनको मिलेगा।'

चुनाव से पहले कांग्रेस खुद को दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के हितों का चैंपियन दिखाने की कोशिश कर रही है। वह सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तय की गई अधिकतम आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म करने की गारंटी दे रही है। तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में पहले से ही 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण का प्रावधान था। वैसे आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद पहले ही रिजर्वेशन की 50 प्रतिशत लिमिट पार हो चुकी है। बिहार सरकार ने जातिगत गणना के बाद आरक्षण में 15 प्रतिशत इजाफा किया है। अब सूबे में 75 प्रतिशत आरक्षण है। राहुल गांधी भी 50 प्रतिशत आरक्षण की लिमिट को खत्म करने की 'गारंटी' देकर दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कुछ महीने पहले हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी जातिगत गणना और आबादी के अनुपात में आरक्षण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस पर चुन-चुनकर हमले किए। उन्होंने कहा, 'जिस कांग्रेस ने जाति-पाति और भाषा के नाम पर देश को बांटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिस कांग्रेस ने आतंकवाद और अलगाववाद को अपने हित में पनपने दिया। जिस कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को हिंसा, अलगाव और पिछड़ेपन में धकेल दिया। जिस कांग्रेस के राज में नक्सलवाद को देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनाकर छोड़ दिया गया। जिस कांग्रेस ने देश की बहुत बड़ी जमीन दुश्मनों के हवाले कर दी। जिस कांग्रेस ने देश की सेना का आधुनिकीकरण होने से रोक दिया। वो कांग्रेस आज हमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए भाषण दे रहे हैं। जो कांग्रेस आजादी के बाद ही कन्फ्यूज रही कि उद्योग जरूरी है कि खेती जरूरी है, राष्ट्रीयकरण करना है या निजीकरण करना है। 10 साल में अर्थव्यवस्था को 12वें से 11 पर ही ला पाई, हम 10 साल में 5 नंबर पर लाए। ये कांग्रेस आर्थिक नीतियों पर लंबे-लंबे भाषण सुना रही है।'चुनाव से पहले ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए कर्पूरी ठाकुर को 'भारत रत्न' देने का दांव चलने वाले पीएम मोदी ने कांग्रेस को आरक्षण का जन्मजात विरोधी करार दिया। उस पर एससी, एसटी और ओबीसी के अपमान का आरोप लगाया। पिछले राष्ट्रपति चुनाव के बहाने पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'देश में पहली बार एनडीए ने एक आदिवासी बेटी को राष्ट्रपति बनाने के लिए प्रस्ताव रखा, उनको उम्मीदवार बनाया। आपको हमसे वैचारिक विरोध हो, वह एक बात है। आपको हमसे वैचारिक विरोध होता, आपने सामने कैंडिडेट खड़ा किया होता तो मैं समझ सकता था। लेकिन वैचारिक विरोध नहीं था आपका क्योंकि हमारे यहां से गए व्यक्ति को आपने अपना उम्मीदवार बनाया। इसलिए वैचारिक विरोध नहीं था, आपका विरोध एक आदिवासी बेटी के लिए था।' दरअसल, पिछले राष्ट्रपति चुनाव में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन ने द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया जो आदिवासी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया जो कभी बीजेपी के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित नेहरू को आरक्षण विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अफसरशाही में एससी, एसटी और ओबीसी की भर्ती ही रोक दी थी। पीएम ने कहा, 'और आज जो आंकड़े गिनाते हैं न इतने यहां हैं, इतने यहां हैं, उसका मूल यहां है क्योंकि उस समय उन्होंने रोक दिया था कि रिक्रूटमेंट ही मत करो। अगर उस समय सरकार में भर्ती हुई होती और वो प्रमोशन करते-करते आगे बढ़ते तो आज यहां तक बढ़ते।' यहां पर पीएम मोदी के निशाने पर राहुल गांधी थे जो लगातार आरोप लगाते रहते हैं कि केंद्र सरकार को चलाने वाले 90 अफसरों में सिर्फ 3 ही ओबीसी हैं।

पीएम मोदी ने कहा, 'नेहरूजी ने जो कहा वह हमेशा से कांग्रेस के लिए पत्थर की लकीर होता है। दिखावे के लिए आप कुछ भी कहें लेकिन आपकी सोच कई उदाहरणों से सिद्ध होती हैं। कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के एससी, एसटी और ओबीसी को उनके अधिकारों से वंचित रखा। आर्टिकल 370 को निरस्त किया तब जाकर इतने दशकों के बाद एससी, एसटी, ओबीसी को वो अधिकर मिले जो देश के लोगों को वर्षों से मिले हुए थे।’

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