Sunday, February 25, 2024
HomeIndian Newsक्या टीडीपी और अकाली दल भी बीजेपी में होंगे शामिल?

क्या टीडीपी और अकाली दल भी बीजेपी में होंगे शामिल?

आने वाले समय में टीडीपी और अकाली दल भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं! आगामी लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी ऐक्शन मोड पर काम कर रही है। पीएम मोदी ने खुद लोकसभा चुनाव की कमान थाम रखी है। पीएम मोदी का दावा है कि इस बार बीजेपी लोकसभा चुनाव में 370 और एनडीए 400 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब होगी। बीजेपी ने लोक सभा चुनाव में बड़ी जीत का परचम लहराने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उसी कड़ी में बीजेपी क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन बनाने की रणनीति बना रही है। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तेलुगु देशम पार्टी टीडीपी और शिरोमणि अकाली दल अकाली दल से बातचीत शुरू कर दी है। साथ ही राष्ट्रीय लोक दल रालोद के जयंत चौधरी के साथ सीटों को लेकर चर्चा चल रही है। टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू 'संभावनाएं तलाशने' के लिए दिल्ली पहुंचे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मिले। हालांकि बीजेपी पहले नायडू से नाराज थी, लेकिन अब वह उनका समर्थन हासिल करना चाहती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बीजेपी मजबूत नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी अकाली दल के साथ भी फिर से गठबंधन कर सकती है। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल एनडीए से बाहर हो गया था। सूत्रों का कहना है कि जयंत चौधरी के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। वह समाजवादी पार्टी की ओ से दिए गए सीटों की संख्या से कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्होंने दोबारा एनडीए छोड़ने से इनकार किया। बीजेपी लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन कर रही है। टीडीपी, अकाली दल और रालोद के साथ बातचीत जारी है। बिहार मेंबीजेपीऔर जेडीयू साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। यह जनता दल यूनाइटेड जदयू प्रमुख कुमार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने और बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के बाद, दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। यह बैठक कुमार के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 12 फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत का सामना करने से पांच दिन पहले हुई है। बिहार में 28 जनवरी को 'महागठबंधन' को छोड़कर राजग में लौटने के बाद जदयू के नेता कुमार राष्ट्रीय राजधानी के अपने पहले दौरे के दौरान बीजेपी के अन्य शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा दोनों भाजपा से ने सोमवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। जदयू सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कुमार की भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के दौरान राज्य में राज्यसभा चुनाव से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। बिहार में राज्यसभा की छह सीट खाली हो रही हैं, जिनके लिए 27 फरवरी को चुनाव होना है।

शायद यही अप्रोच बीजेपी और एनडीए को मजबूती प्रदान करता दिख रहा है। इंडिया गठबंधन में टूट की कहानी तभी से शुरू हो गई जब कांग्रेस को तीन राज्यों एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में करारी शिकस्त मिली। इसी के बाद पहले ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को आंखें दिखाना शुरू किया। सीट शेयरिंग तो दूर दीदी ने दो टूक कह दिया उनकी पार्टी टीएमसी अकेले लोकसभा चुनाव में उतरेगी। लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से विपक्षी एकता का जिक्र शुरू हुआ उसकी पोल धीरे-धीरे खुलती चली गई। क्षेत्रीय पार्टियों ने कहीं न कहीं कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सीट शेयरिंग की चर्चा शुरू होती उससे पहले ही गठबंधन में टकराव बढ़ने लगा। अब स्थिति ये हो गई कि इंडिया अलायंस में शामिल दल ही इससे कटना शुरू हो गए हैं। इसके लिए कहीं न कहीं कांग्रेस को ही जिम्मेदार माना जा रहा। इस बात की जिक्र नीतीश कुमार ने भी किया था। नीतीश कुमार को लेकर चर्चा थी कि उन्हें संयोजक बनाया जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने इस पर ग्रीन सिग्नल नहीं दिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे का नाम आगे बढ़ाया। बस इसी से नीतीश का मन खट्टा हो गया। इसी तरह से ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और उधर जयंत चौधरी भी अलग राह लेने को मजबूर होते नजर आए।

इसके बाद इंडिया गठबंधन को लेकर जोर-शोर से जुटे नीतीश कुमार बिहार में लालू की पार्टी आरजेडी के महागठबंधन से अलग हो गए। उन्होंने एनडीए का साथ पकड़ लिया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments