Sunday, February 25, 2024
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क्या भारत को छोड़ चीन के करीब जा रहा है मालदीव?

मालदीव अब भारत को छोड़ चीन के करीब जा रहा है! बीते कुछ समय में मालदीव की भारत के साथ संबंधों में खटास आई है तो चीन के साथ उसके रिश्ते बेहतर हुए हैं। इसका असर मालदीव मे आने वाले पर्यटकों पर भी होता दिख रहा है। ऐसा लगता है कि चीनी मालदीव के उस नुकसान की भरपाई की कोशिश में लगे हैं, जो उसको भारत से टकराव के वजह से टूरिज्म में रहा है। ये एक तरह से चीन की मालदीव को लुभाने की कोशिश नजर आती है। जनवरी के शुरू और आखिर में मालदीव में पहुंचने वाले विदेशी पयर्टकों की संख्या को देखा जाए तो साफ नजर आता है कि मुइज्जू के बीजिंग दौरे का फायदा उनको टूरिज्म में भी मिला है और बड़ी संख्या में चीनी मालदीव का रुख कर रहे हैं। जनवरी की दो तारीखों का आंकड़ा ये बताता है कि कैसे चीनी लोग मालदीव का रुख कर रहे हैं। जनवरी के पहले दो दिन यानी 2 जनवरी तक मालदीव पहुंचने वाले विदेश पर्यटकों में टॉप-3 में इटली, रूस और भारत थे। 2 जनवरी तक इटली के 2582, रूस के 1516 और 842 भारतीय मालदीव पहुंचे थे। इसके बाद जर्मनी, अमेरिका, कजाख्सतान और स्विट्जरलैंड का नंबर था। 2 जनवरी को चीन शीर्ष 10 में भी नहीं था लेकिन इसके 26 दिन बाद चीजें काफी हद तक बदल गईं। 28 जनवरी को मालदीव पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों में रूस और इटली ही टॉप-2 में शामिल रहे लेकिन तब तक तीसरे नबंर पर चीन आ गया। मालदीव में 28 जनवरी तक रूस और इटली से 28 जनवरी कतक 18 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे तो चीन से 16,529 पर्यटक पहुंचे। इसके बाद यूके, इंडिया और जर्मनी के पर्यटकों का नंबर आता है।

भारत से मालदीव जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 2023 में मालदीव में सबसे ज्यादा पर्यटक भारत से पहुंचे थे। इस साल के पहले महीने यानी में जनवरी में भारत इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर आ गया है। मालदीव के पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में हर साल दो लाख से ज्यादा भारतीयों ने मालदीव की यात्रा की। वहीं इस साल मालदीव में 28 जनवरी तक 1.74 लाख पर्यटक आए। जिनमें से केवल 13,989 भारतीय थे।

रूस से सबसे ज्यादा 18,561 पर्यटक मालदीव पहुंचे। इसके बाद इटली से 18,111 और तीसरे नंबर पर चीन से 16,529 लोग मालदीव गए हैं। चौथे नंबर पर ब्रिटेन है। बीते साल यानी 2023 में करीब 17 लाख पर्यटक मालदीव पहुंचे थे। जिनमें से सबसे ज्यादा 2,09,198 लोग भारतीय थे। इसके बाद रूस से 2,09,146 और चीन से 1,87, 118 पर्यटक थे। मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या 2022 में 2.4 लाख से ज्यादा और 2021 में 2.11 लाख के करीब थी।

बता दे कि भारत और मालदीव के रिश्ते में बीते कुछ महीनों से लगातार तनाव देखने को मिल रहा है, जो हाल के दिनों में काफी ज्यादा बढ़ा है। लंबे समय तक एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी रहे भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में तनाव का फायदा उठाने में चीन जुटा हुआ है। चीन जिस तरह से मालदीव का इस्तेमाल कर रहा है, वह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा के सबब भी हो सकता है। इसमें सबसे नई बात जो सामने आई है, वो ये है कि मालदीव ने चीन के अनुसंधान पोत जियांग यांग होंग-3 को इजाजत दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये अनुसंधान जहाज वास्तव में चीन के लिए एक सैन्य उद्देश्य की पूर्ति करता है और ये जहाज जासूसी के काम में आने वाले साजो-सामान से लैस है।

चीनी जहाज का मालदीव जाना इसलिए चिंता का सबब है क्योंकि इसका मकसद हिंद महासागर में संवेदनशील सैन्य परीक्षणों की जासूसी करना हो सकता है। इसके अलावा जहाज द्वारा जुटाए गए समुद्री डेटा से चीन की पनडुब्बी युद्ध करने और क्षेत्र में सैन्य अभियानों की योजना बनाने की क्षमता में मददगार साबित होगा। जो निश्चित ही भारत के लिए सुरक्षा की दृष्टि से अच्छी खबर नहीं है।

बीते कई दशकों से भारत ही मालदीव का सबसे करीबी रक्षा साझेदार है। 2018 से 2023 तक मालदीव के राष्ट्रपति रहे इब्राहिम सोलिह कहते हैं कि मालदीव भारत की संवेदनशीलता का सम्मान करने में सावधान था और उसने चीन के साथ बहुत कम सुरक्षा सहयोग किया। 2023 में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने मोहम्मद मुइज्जू का नजरिया इससे एकदम अलग है। मुइज्जू अपने से पूर्व की सरकारों के "इंडिया फर्स्ट" नीति का समर्थन नहीं करते हैं। मुइज्जू ने चुनाव जीतने के तुरंत बाद ही भारत सरकार से मालदीव में अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने के लिए कहा है। मुइज्जू ने राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भी चीन को ही चुना। उन्होंने साफतौर पर चीन की मालदीव में भूमिका बढ़ाने और भारत पर निर्भरता कम करने का इशारा किया है। चीन से मालदीव के रिश्ते को समझने के लिए दोनों देशों के बीच संबंधों से शुरुआत से ही चीजों को देखना होगा।

बीते साल, 2023 में चीजें फिर से बदलीं जब मोहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति चुनाव में सोलिह को हरा दिया। चुनाव जीतते ही मुइज्जू ने भारत से मालदीव में अपने सैन्य कर्मियों को हटाने को कहा और एक प्रमुख रक्षा समझौते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद उनके मंत्रियों की टिप्पणियों से हुए विवाद ने भी द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर मुइज्जू पदभार संभालने के बाद से चीन-मालदीव संबंध अच्छे हुए हैं। उनकी सरकार ने चीन के साथ कई आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें से कई भारत पर निर्भरता कम करने के लिए निर्धारित थे। इसके बाद हाल ही में चीनी जहाज जियांग यांग होंग 3 को मालदीव ने इजाजत दी है।

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