Friday, March 13, 2026
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जब अपनी मां से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ!

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी मां से मिले हैं! फादर्स डे’ पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की एक तस्वीर वायरल हैं। तस्वीर में उन्होंने अपनी मां के झुर्रियों भरे हाथों को पकड़ा हुआ है। ‘फादर्स डे’ पर मां के साथ योगी आदित्यनाथ की ये तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रही हैं। योगी आदित्यनाथ जिसे कोई ‘बुलडोजर बाबा’ कहता है तो कोई ‘सख्त सीएम’ कहता है। जिसके नाम से बदमाश थर्र-थर्र कांपते हो, वो शख्स जब एक मासूम बच्चे की तरह अपनी मां के आंचल में बैठा नजर आए तो नजारा बहुत भावुक होता है। मां से मुस्कुराकर बात करते योगी आदित्यनाथ की बॉडी लैंग्वेज को पढ़ना हर किसी की बसकी बात नहीं है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जन्मा ‘अजय सिंह बिष्ट’ हिमालय से बड़ा इरादा रखकर योगी आदित्यनाथ बना है। आज भले ही योगी बीजेपी के फायर ब्रांड नेता हों, भले ही यूपी के धाकड़ सीएम हों, लेकिन दिल से आज भी वो एक ‘पहाड़ी लड़का’ है। वो पहाड़ी लड़का जो अपने खेत, पहाड़ों, नदियों और झरनों को अलविदा कहकर नौकरी की तलाश में दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की तरफ निकल जाता है। 22 साल की उम्र में उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन को त्याग दिया और वो सन्यास की राह पर आगे बढ़ गए। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में एक हिंदू मठ, गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं, वह अपने आध्यात्मिक पिता महंत अवैद्यनाथ की मृत्यु के बाद सितंबर 2014 से इस पद पर हैंं।वो पहाड़ी लड़का जो दुनिया के किसी के कोने में रहे लेकिन उसके दिल से हिमालय दूर नहीं होता। मां से मुलाकात के वक्त योगी के चेहरे की मुस्कान बताती है कि वह अपनी मां से कितना प्यार करते हैं। ‘फादर्स डे’ पर मां के स्पर्श ने योगी को पिता की याद भी जरूर दिलाई होगी। वो पिता जिनके अंतिम संस्कार में ना पहुंच पाने की टीस आज भी उनके दिल में है। योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन कोरोना काल के दौरान साल 2020 में हुआ था। वह अंतिम बार अपने पिता के दर्शन भी नहीं कर पाए। योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया था कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करेंगे और अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। योगी ने अपने घरवालों से भी अपील की है कि लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग ही अंतिम संस्कार में शामिल हों। उन्होंने इस दुख की घड़ी में अपनी मां को एक भावुक पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा है कि उन्हें अपने पिता की मृत्यु का दुख है। वह उन्हें अंतिम बार देखना भी चाहते थे लेकिन वैश्विक महामारी के चलते वह ऐसा नहीं कर सके। योगी ने एक बहुत ही भावुक पत्र लिखा है और जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के ऊपर अपने कर्तव्य को रखने की बात कही है।

योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। मां-पिता ने उनके नाम अजय सिंह बिष्ट रखा। उन्होंने विज्ञान में स्नातक किया। अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने कई सामाजिक गतिविधियों और आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। 22 साल की उम्र में उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन को त्याग दिया और वो सन्यास की राह पर आगे बढ़ गए। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में एक हिंदू मठ, गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं, वह अपने आध्यात्मिक पिता महंत अवैद्यनाथ की मृत्यु के बाद सितंबर 2014 से इस पद पर हैंं।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश एम्स में अपनी मां से मुलाकात की। मुलाकात की फोटो सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की। इस फोटो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, ‘मां।’ फोटो में देखा जा सकता है कि सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी मां सावित्री देवी से उनका हालचाल पूछ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीएम योगी की मां के साथ फोटो वायरल हो रही है। इस पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सीएम योगी की मां की कई दिनों से तबीयत खराब थी, जिसके बाद उन्हें ऋषिकेश एम्स लाया गया। पिता जिनके अंतिम संस्कार में ना पहुंच पाने की टीस आज भी उनके दिल में है। योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन कोरोना काल के दौरान साल 2020 में हुआ था। वह अंतिम बार अपने पिता के दर्शन भी नहीं कर पाए।इससे पहले सीएम योगी की मां को आंखों में इंफेक्शन की वजह से ऋषिकेश एम्स में एडमिट कराया गया था। वहीं, सीएम योगी एक महीने में दूसरी बार अपनी मां से मिलने एम्स पहुंचे।

आखिर देश को कब तक मिलेगी गर्मी से राहत?

आज हम आपको बताएंगे कि देश को गर्मी से कब तक मिलेगी! दिल्ली सहित पूरे उत्तरभारत में लू और तापमान में कमी न होने से लोग परेशान हैं। इस बर गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं। लोगों को इस भीषण गर्मी से राहत दिलाना वाला एसी भी बेबस है। 20 जून के बाद मॉनसून के सक्रिय होने से पहले देश के कई राज्य ज्वालमुखी की तरह तप रहे हैं। दिल्ली की बात करें तो यहां दिन के साथ रात में भी लगातार लू चल रही है। 14 जून के बाद से यहां गर्मी कम नहीं हुई है। पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का भी यही हाल है। यहां भी गर्मी ने तांडव मचा रखा है। यूपी-बिहार के कई शहर भी खूब तप रहे हैं।  दिल्लीवालों को अगले दो तीन दिन तक राहत की बात तो भूल जाइए। बीते शनिवार से यहां लगातार लू चल रही है। इसके बाद हल्की बारिश और आंधी एक दो दिन की राहत ले कर आएंगी। लेकिन यह आंशिक होगी। एक बार फिर तेज गर्मी लौटेगी। रात के तापमान में बढ़ोत्तरी से लोगों को दोनों पहर में परेशानी झेलनी पड़ रही है।लू के रेड अलर्ट वाले जिलों में बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया और नवादा हैं तो वहीं पटना, नालंदा और जमुई में लू का येलो अलर्ट है। मौसम विभाग की मानें तो उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत और नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में 19 जून को तेज बारिश हो सकती है। यूपी भी इस भीषण गर्मी से अछूता नहीं है। यहां भी आने वाले दो से तीन दिन भयंकर लू के साथ गर्मी के तेवर हाई रहेंगे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के कई भागों में सोमवार को भी लू चलने के आसार हैं।रविवार को अधिकतम तापमान 44.9 डिग्री रहा। यह सामान्य से छह डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से छह डिग्री अधिक 33.2 डिग्री रहा। पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को आसमान साफ रहेगा। अधिकांश जगहों पर लू रहेगी। कुछ जगहों पर गंभीर लू और रात के समय भी लू की स्थिति रहेगी।

35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से शुष्क और गर्म तेज हवाएं चलेंगी। अधिकतम तापमान 45 और न्यूनतम 34 डिग्री रह सकता है। इसके बाद 18 और 19 जून को भी लू की स्थिति रहेगी। 20 जून और 21 जून को आंधी के साथ हल्की बारिश राहत तो लेकर आएगी, लेकिन तापनमान 40 डिग्री से ऊपर बना रहेगा।

दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं उत्तराखंड में भी गर्मी का सितम देखने को मिल रहा है। प्रदेश की राजधानी देहरादून में भी तापमान 40 डिग्री के पार चल रहा है। रात के समय 27. 9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। दिन और रात के तापमान में बढ़ोत्तरी से लोगों को दोनों पहर में परेशानी झेलनी पड़ रही है। मौसम विभाग की मानें तो उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत और नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में 19 जून को तेज बारिश हो सकती है। यूपी भी इस भीषण गर्मी से अछूता नहीं है। यहां भी आने वाले दो से तीन दिन भयंकर लू के साथ गर्मी के तेवर हाई रहेंगे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के कई भागों में सोमवार को भी लू चलने के आसार हैं। बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संतरविदास नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर और रायबरेली में भीषण लू का रेड अलर्ट जारी हुआ है। इसके साथ ही अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर. महोबा, झांसी, ललितपुर और आसपास के इलाकों में लू (हीट वेव) से लेकर तीव्र लू (हीट वेव) चलने की संभावना है।

बिहार में 9 जिले ऐसे हैं जहां भीषण गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पटना सहित 3 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर बिहार के एक या दो स्थानों पर गरज चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान है। वहीं दिल्ली की बात करें तो यहां दिन के साथ रात में भी लगातार लू चल रही है। 14 जून के बाद से यहां गर्मी कम नहीं हुई है। पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का भी यही हाल है। यहां भी गर्मी ने तांडव मचा रखा है। यूपी-बिहार के कई शहर भी खूब तप रहे हैं।  दिल्लीवालों को अगले दो तीन दिन तक राहत की बात तो भूल जाइए। बीते शनिवार से यहां लगातार लू चल रही है। लू के रेड अलर्ट वाले जिलों में बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया और नवादा हैं तो वहीं पटना, नालंदा और जमुई में लू का येलो अलर्ट है।

आखिर किसने बदलवाई संसद पर रखी मूर्तियां?

आज हम आपको बताएंगे कि संसद पर रखी मूर्तियां किसने बदलवाई है! संसद परिसर में महात्मा गांधी और डॉ बी आर आंबेडकर की प्रतिमाओं को दूसरी जगह स्थापित करने से जुड़े विवाद में लोकसभा के निवर्तमान अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि ‘किसी भी प्रतिमा को हटाया नहीं गया है।’ बिरला ने कहा कि सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं को ‘रीलोकेट’ किया गया है और परिसर में ही ‘प्रेरणा स्थल’ पर एक ही जगह सबको स्थापित करने का फैसला किया गया है। बिरला ने कहा कि उन्होंने इस बारे में ‘कई लोगों से चर्चा और विचार-विमर्श’ करने के बाद यह निर्णय किया और इससे ‘न तो सरकार का कोई लेनादेना है और न ही उसने हस्तक्षेप किया।’ जिसका नाम प्रेरणा स्थल रखा जाए, जिससे संसद परिसर में आने वाले लोग एक ही जगह पर महापुरुषों को श्रद्धांजलि दे सकें और उनके जीवन-दर्शन की जानकारी ले सकें। संसद परिसर से जुड़ा ऐसा फैसला लोकसभा स्पीकर का होता है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करती है।’रविवार को उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने संसद भवन परिसर में प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया, जहां 15 महापुरुषों और स्वंतत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु सहित कई सांसद उपस्थित थे। महात्मा गांधी और आंबेडकर की प्रतिमाएं पहले संसद परिसर में ऐसी जगह पर थीं, जहां विपक्ष सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए जुट जाया करता था। कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि प्रतिमाओं को रीलोकेट करने का फैसला सरकार ने ‘एकतरफा’ तौर पर किया।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा कि लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक, तस्वीरों और मूर्तियों से जुड़ी संसद की समिति की आखिरी बैठक 18 दिसंबर 2018 को हुई थी और 17वीं लोकसभा में उसका दोबारा गठन भी नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी की प्रतिमा को एक नहीं, बल्कि दो बार हटाया गया है। बिरला ने कहा, ‘लोकसभा परिसर में 15 महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां अलग-अलग स्थानों पर लगी थीं, जिससे उनकी ठीक से देखरेख नहीं हो पा रही थी और आंगतुकों को भी पता नहीं चल पाता था कि कहां किस महापुरुष की प्रतिमा है। समय-समय पर पहले भी मूर्तियों को शिफ्ट किया जाता रहा है। संसद के नए भवन के निर्माण के दौरान महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू और चौधरी देवी लाल की प्रतिमाओं को परिसर में ही अन्य स्थान पर सम्मानपूर्वक स्थानांतरित किया गया था।’

बिरला ने कहा, ‘इस बारे में हमने कई लोगों से समय-समय पर चर्चा की है। इसमें विचार आया कि सभी प्रतिमाओं को एक जगह पर होना चाहिए, जिसका नाम प्रेरणा स्थल रखा जाए, उप सभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु सहित कई सांसद उपस्थित थे। महात्मा गांधी और आंबेडकर की प्रतिमाएं पहले संसद परिसर में ऐसी जगह पर थीं, जहां विपक्ष सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए जुट जाया करता था। कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि प्रतिमाओं को रीलोकेट करने का फैसला सरकार ने ‘एकतरफा’ तौर पर किया।जिससे संसद परिसर में आने वाले लोग एक ही जगह पर महापुरुषों को श्रद्धांजलि दे सकें और उनके जीवन-दर्शन की जानकारी ले सकें। संसद परिसर से जुड़ा ऐसा फैसला लोकसभा स्पीकर का होता है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करती है।’

बिरला ने कहा कि पुराने संसद भवन और पार्लियामेंट की लाइब्रेरी बिल्डिंग के बीच मौजूद प्रेरणा स्थल पूरे साल विजिटर्स के लिए खुला रहेगा और महापुरुषों के सम्मान में वहां कार्यक्रम भी होते रहेंगे। बता दें कि उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने संसद भवन परिसर में प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया, जहां 15 महापुरुषों और स्वंतत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा कि लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक, तस्वीरों और मूर्तियों से जुड़ी संसद की समिति की आखिरी बैठक 18 दिसंबर 2018 को हुई थी और 17वीं लोकसभा में उसका दोबारा गठन भी नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी की प्रतिमा को एक नहीं, बल्कि दो बार हटाया गया है।इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु सहित कई सांसद उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिमाओं के पास नई टेक्नॉलजी के जरिए महापुरुषों की जीवन गाथा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लोग QR कोड के जरिए उपलब्ध होने वाली जीवन गाथा से प्रेरणा ले सकेंगे।

आखिर क्या है ऑपरेशन रेड फ्लैग ?

आज हम आपको ऑपरेशन रेड फ्लैग के बारे में जानकारी देने वाले हैं! इंडियन एयरफोर्स के दस्ते ने अलास्का में अमेरिकी वायुसेना बेस पर अभ्यास ‘रेड फ्लैग’ में हिस्सा लिया। यह अभ्यास 4 जून से 14 जून तक चला। रेड फ्लैग एक्सरसाइज अडवांस्ड एरियल कॉम्बैट एक्सरसाइज है। इसमें सिंगापुर, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, जर्मन वायुसेना के भी दस्ते थे। भारतीय वायुसेना का दस्ता पहली बार इस अभ्यास में फाइटर जेट राफेल लेकर पहुंचा। इसे वहां ले जाने के लिए आईएल-78 एयर टू एयर रीफ्यूलर की जरिए बीच हवा में रीफ्यूल भी किया गया। अभ्यास में अलग-अलग हवाई खतरे से निपटने की तैयारी की गई। राफेल ने वहां F-16, F-15A, A-10 एयरक्राफ्ट के साथ युद्धाभ्यास किया। भारतीय वायुसेना अब खुद अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की तैयारी में जुटी है जो इस साल के अंत तक भारत में होगी।मिशन योजना में सक्रिय रूप से भाग लिया और अभ्यास के दौरान नामित मिशनों के लिए अग्रणी नेतृत्व की भूमिका भी निभाई। चुनौतीपूर्ण मौसम और लगभग शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद, भारतीय वायुसेना के रखरखाव दल ने एक्सरसाइज के दौरान सभी विमानों की सेवा क्षमता सुनिश्चित करने के लिए लगन पूर्वक काम किया। यह अब तक का सबसे बड़ा युद्ध अभ्यास होगा जिसमें कई देश हिस्सा लेंगे। वायुसेना वैसे तो कई मल्टी नैशनल एक्सरसाइज का हिस्सा रही है लेकिन इसने आज तक कोई भी मल्टीनैशनल एक्सरसाइज (एक्टिव पार्टिसिपेशन) की मेजबानी नहीं की है। यह पहली बार होगा जब वायुसेना कई देशों की वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट को शामिल करते हुए एकसाथ अभ्यास की मेजबानी करेगी। इसमें अमेरिका, यूके, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हो सकते हैं।

अलास्का के ईल्सन एयर फोर्स बेस में आयोजित एक्सरसाइज रेड फ्लैग, वर्ष 2024 का दूसरा संस्करण था। यह एक उन्नत हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास है। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया, ‘भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने राफेल विमान और कर्मियों के साथ भाग लिया जिसमें वायुसेना दल, तकनीशियन, इंजीनियर, नियंत्रक और विषय विशेषज्ञ शामिल थे। राफेल लड़ाकू विमानों की ट्रान्साटलांटिक उड़ान को आईएल-78 के एयर टू एयर रिफ्यूलर (एएआर) ने संभव किया। कर्मियों और उपकरणों का परिवहन सी-17 ग्लोबमास्टर विमान द्वारा किया गया था।’ भारतीय वायुसेना की यह टुकड़ी 29 मई 2024 को अलास्का में ईल्सन बेस में पहुंची। रेड फ्लैग एक हवाई युद्ध अभ्यास है, जिसे यथार्थवादी युद्ध जैसी परिस्थितियां प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए कई परिदृश्यों के साथ आयोजित किया जाता है। वांछित वातावरण तैयार करने के लिए बलों का सीमांकन किया जाता है। रेड फोर्स पर वायु रक्षा की जिम्मेदारी होती है और ब्लू फोर्स आक्रामण करता है। इस एक्सरसाइज के दौरान रेड फोर्स का गठन मुख्य रूप से एफ-16 और एफ-15 विमानों की उड़ान वाले अमेरिकी एग्रेसर स्क्वाड्रन द्वारा किया गया था।

एक्सरसाइज के दौरान बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) लड़ाकू अभ्यास शामिल रहे। भारतीय वायुसेना चालक दल ने मिशन योजना में सक्रिय रूप से भाग लिया और अभ्यास के दौरान नामित मिशनों के लिए अग्रणी नेतृत्व की भूमिका भी निभाई। चुनौतीपूर्ण मौसम और लगभग शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद, भारतीय वायुसेना के रखरखाव दल ने एक्सरसाइज के दौरान सभी विमानों की सेवा क्षमता सुनिश्चित करने के लिए लगन पूर्वक काम किया। एक्सरसाइज के दौरान 100 से अधिक उड़ानें भरी गईं तथा सभी निर्धारित मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए गए।

इस सैन्य अभ्यास की मुख्य उपलब्धियों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ अंतर-संचालन की अंतर्दृष्टि रही। लंबी दूरी की यात्रा करने और रास्ते में हवा से हवा में ईंधन भरने का अनुभव, विशेष रूप से युवा चालक दल के लिए एक समृद्ध और रोमांचकारी अनुभव था। भारतीय सैन्य टुकड़ी की 24 जून को भारत वापस आने से पहले ग्रीस और मिस्र की वायु सेनाओं के साथ एक्सरसाइज में भाग लेने की योजना है। हवाई खतरे से निपटने की तैयारी की गई। राफेल ने वहां F-16, F-15A, A-10 एयरक्राफ्ट के साथ युद्धाभ्यास किया। अलास्का के ईल्सन एयर फोर्स बेस में आयोजित एक्सरसाइज रेड फ्लैग, वर्ष 2024 का दूसरा संस्करण था। यह एक उन्नत हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास है। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया, ‘भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने राफेल विमान और कर्मियों के साथ भाग लिया जिसमें वायुसेना दल, तकनीशियन, इंजीनियर, नियंत्रक और विषय विशेषज्ञ शामिल थे।भारतीय वायुसेना अब खुद अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की तैयारी में जुटी है जो इस साल के अंत तक भारत में होगी। यह अब तक का सबसे बड़ा युद्ध अभ्यास होगा जिसमें कई देश हिस्सा लेंगे।रेड फ्लैग के अनुभव से समृद्ध भारतीय वायुसेना एक्सरसाइज तरंग शक्ति 2024 के दौरान अन्य देशों के प्रतिभागी दलों की मेजबानी करने को लेकर उत्साहित है।

क्या युद्ध के मामले में भविष्य होगा आधुनिक?

युद्ध के मामले में भविष्य अब और भी आधुनिक होने वाला है! आज वायुसेना अकादमी (एएफए) में 213 ऑफिसर्स कोर्स की संयुक्त ग्रेजुएशन परेड को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख वी आर चौधरी ने कहा कि आधुनिक युग का युद्ध सिर्फ लड़ाई के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जटिल डेटा नेटवर्क और नयी साइबर प्रौद्योगिकियों से प्रभावित होने वाला और निरंतर बदलने वाला एक परिदृश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के युद्धों को अतीत की मानसिकता के साथ नहीं लड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग का युद्ध गतिशील है और लगातार बदलने वाला परिदृश्य है। यह अब केवल लड़ाई के मैदान तक सीमित नहीं है। यह जटिल डेटा नेटवर्क और उन्नत साइबर प्रौद्योगिकियों से तेजी से प्रभावित हो रहा है। अधिकारी के रूप में आप सभी को युद्ध जीतने में निर्णायक साबित होने के लिए प्रौद्योगिकी को प्रभावी ढंग से अपनाने, नवाचार करने और उसका लाभ उठाने की आवश्यकता है। चौधरी ने कहा कि किसी अधिकारी में दक्षता, आक्रामकता और पहल करने जैसे तीन सबसे प्रशंसनीय गुण होते हैं और साथ ही ऐसे अधिकारियों की भी जरूरत है जो विचारक भी हों। जब आप इस असाधारण सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं तो ऐसे में भारतीय वायुसेना के मूल मूल्यों- अभियान, समग्रता और उत्कृष्टता को अपना मार्गदर्शक बनाएं।हमारे लिए, वर्दीधारी पुरुषों और महिलाओं के लिए अभियान की सिद्धि सबसे महत्वपूर्ण है। एक रक्षा विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्नातक अधिकारियों में 22 महिला अधिकारी शामिल थीं, जिन्हें भारतीय वायुसेना की विभिन्न शाखाओं में कमीशन मिला है।यह किसी संगठन की दिशा, दक्षता और समग्र सफलता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उन्हें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए और इससे बहुत लाभ होगा। आप जितना अधिक पढ़ेंगे, आप अपने क्षेत्र की जटिलताओं को उतना ही बेहतर समझ पाएंगे। एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति अज्ञात के मुकाबले स्पष्टता के साथ अनुकूलन और नेतृत्व करने में सक्षम होता है।उन्होंने कहा कि पेशेवर ज्ञान प्राप्त करना सर्वोपरि है, लेकिन नये कमीशन प्राप्त अधिकारियों को अन्य क्षेत्रों में भी अपने कौशल को निखारना चाहिए।उन्होंने सत्यनिष्ठा के बारे में बताया कि नैतिक विकल्प चुनना, आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और एक मिसाल के साथ नेतृत्व करना टीम के सदस्यों के साथ विश्वास और निष्ठा को कैसे प्रेरित करेगा।इस समारोह में सफलतापूर्वक उड़ान प्रशिक्षण पूरा करने वाले फ्लाइट कैडेट्स, भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और मित्र देशों के अधिकारियों को ‘विंग्स’ प्रदान किए गए।

भारतीय वायुसेना के दृष्टि वक्तव्य ‘पहले जनता, हमेशा मिशन’ पर बोलते हुए चौधरी ने नए कमीशन प्राप्त अधिकारियों से पेशेवर क्षमता, शारीरिक और नैतिक साहस, चरित्र और सहानुभूति के माध्यम से अपने अधीनस्थों और साथियों का सम्मान अर्जित करने का आग्रह किया।सीजीपी भारतीय वायुसेना की उड़ान और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के 235 फ्लाइट कैडेट के प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है।चौधरी समीक्षा अधिकारी थे और उन्होंने प्रशिक्षण के सफल समापन पर स्नातक फ्लाइट कैडेट को ‘प्रेसीडेंट कमीशन’ प्रदान किया।एक रक्षा विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्नातक अधिकारियों में 22 महिला अधिकारी शामिल थीं, जिन्हें भारतीय वायुसेना की विभिन्न शाखाओं में कमीशन मिला है।

इस अवसर पर भारतीय नौसेना के नौ अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के नौ अधिकारियों और मित्र देशों के एक अधिकारी को भी उड़ान प्रशिक्षण के सफल समापन पर ‘विंग्स’ प्रदान किया गया। इसमें कहा गया है कि यह पहला सीजीपी भी है, जहां ‘ग्राउंड ड्यूटी’ शाखाओं के लिए चार साल पहले राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हुए 25 कैडेट को अधिकारी के रूप में कमीशन दिया गया।समीक्षा अधिकारी ने प्रशिक्षण के विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्नातक अधिकारियों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए।विज्ञप्ति में कहा गया है कि फ्लाइंग ब्रांच के फ्लाइंग ऑफिसर हैप्पी सिंह को पायलट कोर्स में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान पर आने के लिए ‘प्रेसीडेंट्स प्लैक’ और वायुसेना प्रमुख के ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।आधुनिक युग का युद्ध गतिशील है और लगातार बदलने वाला परिदृश्य है। यह अब केवल लड़ाई के मैदान तक सीमित नहीं है। यह जटिल डेटा नेटवर्क और उन्नत साइबर प्रौद्योगिकियों से तेजी से प्रभावित हो रहा है। अधिकारी के रूप में आप सभी को युद्ध जीतने में निर्णायक साबित होने के लिए प्रौद्योगिकी को प्रभावी ढंग से अपनाने, नवाचार करने और उसका लाभ उठाने की आवश्यकता है।विज्ञप्ति में कहा गया है कि फ्लाइंग ऑफिसर तौफीक रजा को ग्राउंड ड्यूटी ऑफिसर्स कोर्स में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान पर आने के लिए ‘प्रेसीडेंट्स प्लैक’ प्रदान किया गया!

प्रियंका या राहुल कौन बनेगा असली नेता विपक्ष ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रियंका या राहुल दोनों में से कौन असली नेता विपक्ष बनेगा! इन दिनों कांग्रेस के भीतर यह मांग तेजी से गहरा रही है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आना चाहिए। दरअसल विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पिछली दो लोकसभा में कांग्रेस 10 फीसदी सीटें भी नहीं ला पाई थी, जिसके चलते उसे नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला। इस बार पार्टी को 99 सीटें मिली है। इसके बाद कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष के पद का दावा बनता है। कांग्रेस के भीतर एक राय है कि राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनना चाहिए। पिछले दिनों कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग से लेकर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक तक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित तमाम नेताओं ने एक सुर से राहुल गांधी के सामने अपनी मांग रखी। इस मांग पर राहुल गांधी ने सोचने के लिए कुछ वक्त मांगा है। नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर पार्टी ने फैसला पूरी तरह से राहुल गांधी पर छोड़ा हुआ है। वैसे राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने को लेकर पार्टी के भीतर मानना है कि अब वक्त आ गया है कि राहुल गांधी को आगे बढ़कर पार्टी को लीड करना चाहिए। पार्टी के एक सीनियर नेता का कहना था कि जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुवाई की, पार्टी चाहती है कि वैसा ही नेतृत्व वह लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद हैं और नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए एक बेहतरीन मौका है।

वहीं पार्टी के एक अन्य नेता का कहना था कि पार्टी के भीतर यह राय पुख्ता है कि राहुल गांधी को अपने पिता वह पूर्व पीएम राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी की तरह नेता प्रतिपक्ष बनकर सदन में लोगों के मुद्दे उठाने चाहिए। उनका कहना था कि जिस तरह से उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा से लेकर मौजूदा चुनाव तक में आम आदमी से जुड़े जमीनी मुद्दों को पूरी ताकत से उठाया, वैसे ही अब सदन में वह आम आदमी की आवाज बनें।

सूत्र का कहना था कि भारत यात्राओं राहुल गांधी को एक निर्विवाद मास लीडर बना दिया है, जिसका लोहा सहयोगी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल सहित देश भी मान रहा है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन लोगों की सोच भी बदलेगी, जो कहीं ना कहीं अब भी राहुल गांधी को लेकर असहज महसूस करते हैं। हालांकि राहुल गांधी को लेकर हो रही ऐसी चर्चाओं के बीच मीडिया राहुल गांधी के संसदीय प्रदर्शन का लेखा-जोखा सामने रखकर उन्हें घेरने की कोशिश हो रही है। गौरतलब है कि आगामी 24 जून से 18वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र शुरू होने जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस मुद्दे को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। अगर राहुल इस भूमिका को स्वीकार नहीं करते तो फिर पार्टी के भीतर मनीष तिवारी, गौरव गोगोई जैसे नेता इस पद के दावेदार हो सकते हैं।

हालिया चुनाव में राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में अपने परिवार की पारंपरिक सीट रायबरेली के साथ-साथ केरल के वायानाड से भी जीते हैं। आने वाले दिनों में उन्हें इन दोनों में से एक सीट छोड़नी होगी। हालांकि राहुल गांधी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह कौन सी सीट छोड़ेंगे। पिछले दिनों उन्होंने रायबरेली और वायनाड दोनों ही जगह अपनी धन्यवाद सभा में लोगों के सामने दोनों सीटों को लेकर मन में चल रही दुविधा का जिक्र किया था। राहुल गांधी का कहना था कि वह जो भी फैसला करेंगे, वह वहां के मतदाताओं को भरोसे में लेकर करेंगे।

माना जा रहा है कि राहुल गांधी रायबरेली को रखकर वायनाड की सीट छोड़ सकते हैं। रायबरेली को लेकर पार्टी के भीतर तर्क है कि पिछले 70 सालों से रायबरेली और पिछले साढ़े चार दशक से अमेठी से गांधी परिवार का लगातार रिश्ता रहा है। अगर राहुल यह सीट छोड़ते हैं तो कहीं ना कहीं गांधी परिवार का दशकों पुराना रिश्ता छूटेगा। दूसरी ओर एक तर्क यह भी है कि साल 2009 के बाद कांग्रेस ने यूपी में इतना अच्छा प्रदर्शन किया है। 2009 में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थी, जबकि पिछले दो बार से यूपी में क्रमशः दो और एक सीट लाने वाली कांग्रेस इस बार छह सीटों पर जीती है। यूपी में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए जूझ रही कांग्रेस रायबरेली को छोड़कर यूपी की जनता को निराश नहीं करना चाहेगी।

दूसरी ओर वायनाड को लेकर चर्चा है कि अगर राहुल यह सीट छोड़ते हैं तो प्रियंका गांधी यहां से चुनाव लड़ सकती हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि राहुल के वायानाड छोड़ने से स्थानीय लोगों के बीच की नाराजगी को दूर करने का अच्छा तरीका रहेगा कि गांधी परिवार के किसी सदस्य को वहां से उतार दिया जाए। बताया जाता है कि कांग्रेस की केरल इकाई की ओर से यह सुझाव आया है। हालांकि प्रियंका के चुनावी राजनीति में आने का फैसला पूरी तरह से गांधी परिवार पर निर्भर करता है।

क्या राहुल गांधी बन पाएंगे विपक्षी नेता?

आज हम आपको बताएंगे कि राहुल गांधी विपक्षी नेता बन पाएंगे या नहीं! कांग्रेस में यह मांग तेज हो रही है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आना चाहिए। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पिछली दो लोकसभा में कांग्रेस 10 फीसदी सीटें भी नहीं ला पाई थी, जिसके चलते उसे नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला। इस बार पार्टी को 99 सीटें मिली है। इसके बाद कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष के पद का दावा बनता है। कांग्रेस के भीतर एक राय है कि राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनना चाहिए। पिछले दिनों कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग से लेकर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक तक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित तमाम नेताओं ने एक सुर से राहुल गांधी के सामने अपनी मांग रखी। इस मांग पर राहुल गांधी ने सोचने के लिए कुछ वक्त मांगा है। वैसे राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने को लेकर पार्टी के भीतर मानना है कि अब वक्त आ गया है कि राहुल गांधी को आगे बढ़कर पार्टी को लीड करना चाहिए। पार्टी के एक सीनियर नेता का कहना था कि जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुआई की, पार्टी चाहती है कि वैसा ही नेतृत्व वह लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद हैं और नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए एक बेहतरीन मौका है।

पार्टी के एक अन्य नेता का कहना था कि पार्टी के भीतर यह राय पुख्ता है कि राहुल गांधी को अपने पिता वह पूर्व पीएम राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी की तरह नेता प्रतिपक्ष बनकर सदन में लोगों के मुद्दे उठाने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी यह जिम्मेदारी लेते हैं तो इसका फायदा उन्हें और पार्टी दोनों को होगा। एक अहम सूत्र के मुताबिक, इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि राहुल के वायनाड छोड़ने से स्थानीय लोगों के बीच की नाराजगी को दूर करने का अच्छा तरीका रहेगा कि गांधी परिवार के किसी सदस्य को वहां से उतार दिया जाए।नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आने के बाद विपक्षी खेमे के भीतर भी राहुल गांधी को लेकर सोच बदलेगी। यात्राओं ने राहुल गांधी को एक निर्विवाद जन नेता बना दिया है, जिसका लोहा सहयोगी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल सहित देश भी मान रहा है। नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन लोगों की सोच भी बदलेगी, जो अब भी राहुल गांधी को लेकर असहज महसूस करते हैं।

राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में अपने परिवार की पारंपरिक सीट रायबरेली के साथ-साथ केरल के वायानाड से भी जीते हैं। उन्हें इन दोनों में से एक सीट छोड़नी होगी। हालांकि राहुल गांधी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह कौन-सी सीट छोड़ेंगे। उन्होंने रायबरेली और वायनाड दोनों ही जगह अपनी धन्यवाद सभा में लोगों के सामने दोनों सीटों को लेकर मन में चल रही दुविधा का जिक्र किया था। माना जा रहा है कि राहुल गांधी वायनाड की सीट छोड़ सकते हैं। वायनाड को लेकर चर्चा है कि अगर राहुल यह सीट छोड़ते हैं तो प्रियंका गांधी चुनाव लड़ सकती हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि राहुल के वायनाड छोड़ने से स्थानीय लोगों के बीच की नाराजगी को दूर करने का अच्छा तरीका रहेगा कि गांधी परिवार के किसी सदस्य को वहां से उतार दिया जाए।

बताया जाता है कि कांग्रेस की केरल इकाई की ओर से यह सुझाव आया है। रायबरेली को लेकर पार्टी के भीतर तर्क है कि पिछले 70 सालों से रायबरेली और पिछले साढ़े चार दशक से अमेठी से गांधी परिवार का लगातार रिश्ता रहा है। अगर राहुल यह सीट छोड़ते हैं तो गांधी परिवार का दशकों पुराना रिश्ता छूटेगा। राहुल गांधी को आगे बढ़कर पार्टी को लीड करना चाहिए। पार्टी के एक सीनियर नेता का कहना था कि जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुआई की, पार्टी चाहती है कि वैसा ही नेतृत्व वह लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद हैं और नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए एक बेहतरीन मौका है।दूसरी ओर एक तर्क यह भी है कि साल 2009 के बाद कांग्रेस ने यूपी में इतना अच्छा प्रदर्शन किया है। 2009 में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं, जबकि पिछले दो बार से यूपी में क्रमशः दो और एक सीट लाने वाली कांग्रेस इस बार छह सीटों पर जीती है।

क्या अब उत्तर रेलवे के स्टेशनों में डिजिटल पेमेंट होगा ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आप उत्तर रेलवे के स्टेशनों में डिजिटल पेमेंट होगा या नहीं! सुबह-सुबह का वक्त है। हाथ-मुंह धोने के बाद एक अच्छी चाय की तलब लगी है। चाय के साथ ही एक टोस्ट और बिस्किट भी खाने का मन है। सामने चाय-नाश्ते के स्टॉल पर यह बिक भी रहा है। इसे खरीदने के लिए जेब में पैसे भी पर्याप्त हों, लेकिन आप उसे खरीद नहीं सकें। सोचिए, आपको कैसा लगेगा। ऐसा ही आज हुआ है रामभरोसे के साथ। रामभरोसे मंडल बिहार में भागलपुर जिले के रहने वाले हैं। वह पंजाब के लुधियाना की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वह 28 मई को सुबह साढ़े सात बजे विक्रमशिला एक्सप्रेस से आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन पर उतरे। अच्छी चाय की तलब लगी थी, सोचा रेलवे स्टेशन पर पी लेंगे। लेकिन यहां तो उनके साथ खेल हो गया। टी स्टॉल वाले ने उनसे चाय के बदले डिजिटल पेमेंट करने को कहा। वह डिजिटल पेमेंट नाम की चिड़िया को जानते ही नहीं है। उन्हें लुधियाना के लिए नई दिल्ली से ट्रेन पकड़नी थी। सोचा नई दिल्ली में जा कर चाय पी लेंगे। ईएमयू ट्रेन से वह आनंद विहार से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां भी उनके साथ यही कांड हुआ।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर रामभरोसे चाय-नास्ते के स्टॉल पर पहुंचे। स्टॉल वाला आर्डर देने से पहले पूछा डिजिटल पेमेंट करना होगा। उसने पूछा यह क्या होता है तो स्टॉल वाले ने कहा मोबाइल फोन से पेमेंट कर दो। उन्होंने अपना ओल्ड मॉडल बटन वाला फोन आगे कर दिया। दुकानदार ने कहा सामान नहीं मिलेगा। आज से नया आर्डर लागू हो गया है। अब रेलवे स्टेशन पर सिर्फ डिजिटल पेमेंट के जरिये ही सामान मिलेगा। रामभरोसे को जब रेलवे स्टेशन पर चाय नहीं मिली तो वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकल गए। पहाड़गंज साइड जब वह सड़क पर गए तो तब जा कर उन्हें सांस में सांस आई। वहां भट्ठी पर ताजी चाय बन रही थी। ताजा ब्रेड सेक कर मक्खन लगा कर टोस्ट भी बनाया जा रहा था। उन्हें यहां बेकरी का बढ़िया बिस्कुट भी मिल गया। किसी ने डिजिटल पेमेंट की मांग नहीं की।

दरअसल, उत्तर रेलवे ने फैसला किया है कि आज यानी 28 मई 2024 से उसके अधिकार क्षेत्र वाले सभी शत प्रतिशत रेलवे स्टॉल्स पर ऑनलाइन पेमेंट की व्यवस्था होगी। मतलब कि डिजिटल वॉलेट से पेमेंट या ऑनलाइन पेमेंट। यह आदेश बीते 21 मई को उत्तर रेलवे के सीसीएम कैटरिंग की तरफ से जारी किया गया था। इसमें दुकानदारों को एक सप्ताह का वक्त दिया गया था। इस अवधि के अंदर रेलवे स्टेशनों पर डिजिटल ट्रांजेक्शन स्वीकार करने के लिए उपकरण लगाने के आदेश दिए गए थे। मतलब दुकानदार क्यूआर कोड, स्वाइप मशीन व ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने के लिए अन्य व्यवस्था कर ले। यह एक सप्ताह की अवधि 27 मई को ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, रेलवे के वेंडर इस आदेश को ठीक से समझ नहीं पाए। उन्होंने समझ लिया कि आज यानी 28 मई से रेलवे स्टेशनों की सभी दुकानों पर सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट कर यात्री समान खरीद पाएंगे। इसलिए वे यात्रियों के साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं।

उत्तर रेलवे के सीपीआरओ का कहना है कि सभी स्टॉल में ऑनलाइन पेमेंट स्वीकारने की व्यवस्था की गई है। लेकिन नकदी मतलब कि नोट और सिक्के देकर भी सामानों की खरीदी जारी रहेगी। उत्तर रेलवे के इस फैसले को अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंसी वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे जन विरोधी फैसला बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता का कहना है कि 100 प्रतिशत डिजिटल पेमेंट अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अभी अधिकतर यात्रियों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकल गए। पहाड़गंज साइड जब वह सड़क पर गए तो तब जा कर उन्हें सांस में सांस आई। वहां भट्ठी पर ताजी चाय बन रही थी। ताजा ब्रेड सेक कर मक्खन लगा कर टोस्ट भी बनाया जा रहा था। उन्हें यहां बेकरी का बढ़िया बिस्कुट भी मिल गया। किसी ने डिजिटल पेमेंट की मांग नहीं की।जब से सरकार ने ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा देने का काम शुरू किया था तभी से रेलवे स्टेशनों के स्टॉल पर क्यूआर कोड, स्वाइप मशीन आदि रखी हुई हैं। जो यात्री डिजिटल पेमेंट करना चाहता हैं वह करते हैं। बाकी नकद लेनदेन भी करते हैं। सिर्फ डिजिटल पेमेंट से ही दुकानदार सामान बेचेंगे यह आदेश सही नहीं है।

आखिर डीलक्स ट्रेन ने कैसे की अपनी शुरुआती यात्रा?

आज हम आपको बताएंगे कि डीलक्स ट्रेन ने अपनी शुरुआती यात्रा कैसे की! अंग्रेजो ने भारत में तब डीलक्स या लग्जरी ट्रेन चलाई थी, जबकि इसका नाम भी भारतीयों ने नहीं सुना था। देश की पहली deluxe ट्रेन बॉम्बे से पुणे के बीच चली थी, आज से 94 साल पहले। जी हां, देश की पहली डीलक्स और सुपरफास्ट ट्रेन डेक्कन क्वीन एक्सपेस मराठी में दख्खन ची रानी थी। 1930 में जब यह ट्रेन चली थी, तब यह कई मायनों में अनूठी थी। ब्रिटिश इंडिया में बॉम्बे प्रेसिडेंसी के तहत इसे अमीर यात्रियों के लिए लिए चलाया गया था। यह देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन का ताज इसी के सर पर है। साथ ही यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन है जो लंबी दूरी तक इलेक्ट्रिक इंजन से चली थी। यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन थी, फर्स्ट क्लास के उस डिब्बे को भी 1 जनवरी 1949 को समाप्त कर दिया गया था, और सेकेंड क्लास के डिब्बे को ही फर्स्ट क्लास के रूप में दुबारा डिजाइन किया गया था, जो जून 1955 तक जारी रहा। उसी समय पहली बार इस ट्रेन में थर्ड क्लास भी शुरू किया गया था।जिसमें महिला डिब्बा लगाया था। साथ ही पहली ऐसी ट्रेन थी, जिसमें डाइनिंग कार लगाया गया था। मतलब कि इसमें चलता-फिरता रेस्टोरेंट है।

एक जून 1930 को जब इस ट्रेन की पहली यात्रा शुरू हुई थी, तब इसें सात डिब्बे हुआ करते थे। उस समय पश्चिमी भारत में Great Indian Peninsula Railway या जीआईपी रेलवे नामक कंपनी रेल सेवा चलाती थी। उसने इसकी यात्रा कल्याण रेलवे स्टेशन से शुरू कराई थी। इस समय इसकी यात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से पुणे जंक्शन के बीच होती है।

हम कहें कि इस ट्रेन का संबंध घुड़दौड़ से है तो आप नहीं मानेंगे। लेकिन सच्चाई यही है। इस ट्रेन में शुरुआती यात्री पुणे के रेस कोर्स में हॉर्स रेसिंग में हिस्सा लेने वाले या हॉर्स रेसिंग पर पैसा लगाने वाले अमीर-उमरा होते थे। उन्हीं के लिए अंग्रेजों ने भारत की पहली लग्जरी या डीलक्स ट्रेन शुरू की थी। इस ट्रेन का रइस की अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि महज सात डिब्बों की ट्रेन में दो डिब्बे तो गार्ड वाले ही निकल गए। बचे पांच डिब्बे। इनमें भी एक डिब्बा रेस्टोरेंट कार था। ताकि अमीरों की आरामतलबी में खलल नहीं पड़े। इस ट्रेन का नाम पुणे के नाम पर रखा गया था। पुणे को “दक्खन की रानी” के रूप में भी जाना जाता है। शुरुआत में जो ट्रेन को सात डिब्बों के दो रैक के अंडरफ्रेम इंग्लैंड से मंगाए गए थे। उनके ऊपर रेलवे के ही मुंबई स्थित माटुंगा वर्कशॉप में कोच बनाए गए। शुरुआती रैक का एक डिब्बा सिल्वर कलर से रंगा गया था और उस पर स्कारलेट मोल्डिंग था। अन्य डिब्बों का रंग रॉयल ब्ल्यू और उस पर गोल्डन कलर का लाइन था।

जब डेक्कन क्वीन चली थी तब रेलवे में चार क्लास होते थे। लेकिन इस ट्रेन में केवल दो क्लास, फर्स्ट और सेकेंड क्लास के डिब्बे लगाए गए थे। फर्स्ट क्लास के उस डिब्बे को भी 1 जनवरी 1949 को समाप्त कर दिया गया था, और सेकेंड क्लास के डिब्बे को ही फर्स्ट क्लास के रूप में दुबारा डिजाइन किया गया था, जो जून 1955 तक जारी रहा। उसी समय पहली बार इस ट्रेन में थर्ड क्लास भी शुरू किया गया था।जीआईपी रेलवे नामक कंपनी रेल सेवा चलाती थी। उसने इसकी यात्रा कल्याण रेलवे स्टेशन से शुरू कराई थी। इस समय इसकी यात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से पुणे जंक्शन के बीच होती है।

अब डेक्कन क्वीन जर्मन डिब्बों यानी एलएचबी कोच के साथ दौड़ती है। इन आधुनिक डिब्बों को उत्कृष्ट प्रोजेक्ट के रूप में डेवलप किया गया है। इस रैक ब्रेल साइनेज, बायो टॉयलेट्स और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड भी लगाया है जो पहले नहीं था। इस बोर्ड के लगने से यात्रियों को ट्रेन और आने वाले स्टेशनों की जानकारी आसानी से मिलती है। बता दें कि बॉम्बे प्रेसिडेंसी के तहत इसे अमीर यात्रियों के लिए लिए चलाया गया था। यह देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन का ताज इसी के सर पर है। साथ ही यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन है जो लंबी दूरी तक इलेक्ट्रिक इंजन से चली थी। यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन थी, जिसमें महिला डिब्बा लगाया था। साथ ही पहली ऐसी ट्रेन थी, जिसमें डाइनिंग कार लगाया गया था। मतलब कि इसमें चलता-फिरता रेस्टोरेंट है। अब इस ट्रेन में 15 डिब्बे हैं। इनमें से एक डाइनिंग कार भी शामिल है। डाइनिंग कार आईएसओ सर्टिफाइड है।

आखिर वंदे भारत में कैसे उमड़ पड़ी है भीड़?

हाल ही में वंदे भारत ट्रेन में भीड़ उमड़ पड़ी है! ऐसा पहले सामान्य मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों के रिजर्व क्लास में होता था। अब ऐसा वीवीआईपी ट्रेन वंदे भारत में भी होने लगा है। इस समय सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, लखनऊ से हरिद्वार के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के डिब्बे में ढेर सारे बेटिकट यात्रियों को भीड़ दिखाया गया है। डिब्बे में अनऑथराइज्ड पैसेंजर्स की बहुलता की वजह से बोनाफाइड पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने और अपनी सीट पर बैठने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। यह ट्वीट अर्चित नागर नामक व्यक्ति ने @architnagar हैंडल से किया है। इस वायरल वीडियो में ट्रेन नंबर 22545 पर चढ़े कई यात्रियों को सीट ढूंढने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। वीडियो शेयर करते हुए एक एक्स यूजर ने लिखा, “#lucknowrailway @drmlucknow @ IndianRailMedia @ Indianrail #rail को बिना टिकट वाले यात्रियों ने जैक कर लिया @VandeभारतExp” इसे देख कर लगता है कि संबंधित व्यक्ति ने अनऑथराइज्ड पैसेंजर द्वारा हाईजैक करने की बात कर रहे हैं। इस वीडियो को अभी तक 16 हजार से भी अधिक लोगों ने देख लिया है।

इसी वीडियो को एक एक्स हैंडल @IndianTechGuide द्वारा पुनः शेयर किया गया है। इस बुधवार की सुबह तक 18 लाख से अधिक बार देखा लिया गया है। इस वीडियो पर ढेर सारी प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिसमें से एक ने कहा, “यह एक बड़ी समस्या है! हाल ही में, तिरूपति-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस में एक झूठा फायर अलार्म बज उठा, जब ट्रेन में एक बिना टिकट यात्री ने गाड़ी के शौचालय के अंदर सिगरेट जलाई। एक अन्य यूजर ने लिखा, “टीटी इस बकवास की इजाजत कैसे दे रहे हैं। यह रेल मंत्रालय का मज़ाक उड़ाने की एक सोची समझी चाल लगती है।”

इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, “समस्या वास्तव में भारत के लोगों के साथ है, एक तरफ वे विकास से नफरत करते हैं और दूसरी तरफ वे इसके लिए शुल्क का भुगतान न करके विकास का उपयोग करना चाहते हैं।” IndianFirst नाम के एक यूजर जिसका एक्स हैंडल @saurabh2al है, ने लिखा है “ये ग्रीन टोपी वाले तो वही लग रहे हैं जिन्होंने एक बार lko cdg express भी hijack करली थी… सारे AC coches में घुस गए थे… स्लीपर coach खाली थे… ये लोग संख्याबल का फायदा उठाते हैं… इस वजह से इनसे कोई कुछ बोलता नहीं. अब तो धंधा बन गया है.. झुंड में चलो.. Free में चलो”

पिछले महीने ही दिल्ली-सराय रोहिल्ला सुपरफास्ट एक्सप्रेस में फर्स्ट एसी केबिन के पास रास्ता रोके बिना टिकट यात्रियों की तस्वीरें वायरल हुई थीं। फोटो में, यात्री पांच घंटे से अधिक समय तक बाथरूम के पास बैठे रहे। बीते 25 मई को, ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस के एसी-3 कोच में जनरल डिब्बे के यात्रियों के बैठने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। अप्रैल में, रेल मंत्रालय ने अपने एसी कोचों में कुप्रबंधन और भीड़भाड़ के दावों को संबोधित करते हुए लोगों से इसकी छवि को “खराब न करने” के लिए कहा। “कोच का वर्तमान वीडियो। कोई भीड़-भाड़ नहीं. कृपया भ्रामक वीडियो साझा करके भारतीय रेलवे की छवि खराब न करें, ”मंत्रालय ने लगभग खाली कोच दिखाते हुए एक और वीडियो पोस्ट किया।

रेलवे के दैनिक यात्री सहदेव बहादुर कहते हैं कि यह सब रेलवे की कुव्यवस्था का परिणाम है। लोकल पैसेंजर्स के लिए पर्याप्त ट्रेन नहीं हैं। जो ट्रेन हैं, वह भी समय पर नहीं चलते। ऐसे में डेली पैसेंजरों को मेल-एक्सप्रेस में यात्रा करनी होती है। इन ट्रेनों में जनरल कोच एक या दो कर दिए गए हैं। उनमें पहले से ही इतने पैसेंजर ठुंसे होते हैं कि आप उसके पायदान पर नहीं खड़े हो सकते। ऐसे में ट्रेन के रिजर्व कोच में यात्रा करना लोकल पैसेंजर की मजबूरी है।

सवाल पूछते हैं कि क्या कभी मुंबई या कोलकाता में ऐसा होते देखे हैं? वह बताते हैं कि उन इलाकों में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यह एक बड़ी समस्या है! हाल ही में, तिरूपति-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस में एक झूठा फायर अलार्म बज उठा, जब ट्रेन में एक बिना टिकट यात्री ने गाड़ी के शौचालय के अंदर सिगरेट जलाई। एक अन्य यूजर ने लिखा, “टीटी इस बकवास की इजाजत कैसे दे रहे हैं। यह रेल मंत्रालय का मज़ाक उड़ाने की एक सोची समझी चाल लगती है।”क्योंकि वहां पर्याप्त संख्या में लोकल ट्रेन हैं। हर पांच मिनट पर लोकल ट्रेन आती है। फिर लोकल पैसेंजर क्यों मेल या एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ेंगे।