Friday, March 13, 2026
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आखिर चीनी को क्यों कहा जाता था सफेद सोना?

आज हम आपको बताएंगे कि चीनी को आखिर सफेद सोना क्यों कहा जाता है! चीनी यानी शक्कर, जिसे शुगर भी कहा जाता है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर शक्कर को एक समय सफेद सोना भी कहा जाता था! इसका भारतीय इतिहास और चीनी इतिहास से काफी मिलता-जुलता गहरा संबंध है! खैर, इस इतिहास के बारे में आपको पूरी जानकारी देंगे! 

आपको बता दे कि हर किसी की रसोई में कुछ और हो न हो, चीनी ज़रूर पाई जाती है. इसकी मिठास हमारी ज़ुबान पर यूं घुली हुई है कि इसे हम अपने से अलग मान ही नहीं सकते. क्या आपने कभी सोचा है कि गन्ने से बनने वाली चीनी को आखिर चीनी क्यों कहा जाता है, जबकि ये शुद्ध तौर पर भारतीय है. चीनी के मीठे ज़ायके के बिना इंसान का जीवन ही फीका हो जाएगा. इसमें न कोई विटामिन मिलता है और न ही कोई खास मिनरल, बावजूद इसके चीनी की मिठास में हर कोई जकड़ा हुआ है. आजकल चीनी हर कोई खरीद सकता है लेकिन चीनी को एक वक्त में सफेद सोना कहा जाता था. सफेद दानेदार चीनी को गन्ने और चुकंदर से बनाया जा सकता है. एक समय में चीनी इतनी महंगी थी कि सिर्फ व्यवसायी और राजा-महाराजा ही इसे अफोर्ड कर सकते थे!

गन्ने से शक्कर बनाने की प्रक्रिया का आविष्कार ही भारत में हुआ था और ईसा पूर्व सातवीं सदी में लिखे गए आयुर्वेदिन ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इसकी जानकारी दी गई है. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी गुड़-खांड समेत 5 तरह की शक्कर का ज़िक्र है. दुनिया में इसके पुराना शक्कर बनाने का दूसरा विवरण नहीं है. भारत से ही चीनी दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंची. भारत में तो इसका वर्णन शक्कर और शर्करा के रूप में रहा, फिर ये चीन से इसका क्या मतलब?

दरअसल भारत में इस्तेमाल होती थी- शक्कर, जो चीनी से अलग है. गन्ने के रस को गर्म करके इसे सुखाकर शक्कर बनती थी. उजली- पारदर्शी और दानेदार चीनी का चीन से गहरा वास्ता है. 13वीं सदी में इतालवी व्यापारी, खोजकर्ता और राजदूत मार्को पोलो के संस्मरणों में बताया गया है कि चीन के बादशाह कुबलई खां ने मिस्र से कारीगर बुलवाए थे, जिन्होंने चीन के लोगों को दानेदार शक्कर बनाना सिखाया. चूंकि इस तकनीक को चीन से मुगलकाल में भारत लाया गया, इसलिए इस प्रक्रिया से बनी शक्कर को चीनी कहा गया, बता दे कि चीनी की ‘जकड़’ इतनी सघन है कि मनुष्य का पूरा जीवन इसके स्वाद में ही फंसा रहता है. सबको पता है कि इसका अधिक सेवन बीमारियां पैदा करता है, लेकिन मरते दम तक आदमी इसकी मधुरता का दीवाना हुआ जाता है. इसमें मोटे तौर न कोई विटामिन है और न ही खनिज, वसा या फाइबर. जो कुछ होता भी है वह रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान निकल जाता है. इसमें सिर्फ कैलोरी होती है.

वो भी एक चम्मच में मात्र 15-20, लेकिन इसे मोटापे का कारक इसलिए माना जाता है, क्योंकि लोग इससे बनने व्यंजनों के अलावा और भी आहार (इसके साथ) ज्यादा खा जाते हैं.हैरानी की बात यह है कि पूरी दुनिया में मिठास (शुगर) कई फलों, सब्जियों व अन्य पदार्थों में हैं, लेकिन सफेद दानेदार चीनी सिर्फ गन्ने और चुकंदर से ही बनाई जा सकती है. मध्य युग में चीनी (शक्कर) को दुर्लभ आहार माना जाता था.रिर्पोटों के अनुसार 15वी शताब्दी तक दुनिया के अधिकांश लोगों को शक्कर की मिठास की जानकारी नहीं थी. तब मीठे के नाम पर फलों के अलावा अलग से मिठास पाने के लिए शहद ही था. स्पष्ट था कि वैश्विक स्तर पर शक्कर के कारोबार की गुंजाइश बची थी. इसे पुर्तगाली सौदागरों ने लपका, जिसके बाद चीनी बनने का इतिहास बुरी तरह ‘कड़वा’ हो गया. 15वी शती में वे करिबियन पहुंचे. यह इलाका गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त था और वहां शक्कर बनाने के लिए जंगलों में पर्याप्त ईंधन भी. बस लोगों की कमी थी. वे पश्चिम अफ्रीका पहुंचे और वहां अफ्रीकन लोगों को दास बनाकर करिबिया लाए. दासों का सिलसिला शुरू हुआ और 1505 में वहां पहली शुगर कॉलोनी खड़ी हो गई. उस दौरान यह बहुत महंगी थी और शासकों और बड़े कारोबारियों तक ही इसकी पहुंच थी. इसी दौरान इसे ‘सफेद सोना’ भी कहा गया. भारत में तो सालों तक राशनी कार्ड पर चीनी मिलती रही है. ये नाम सफेद शक्कर के लिए इतना लोकप्रिय हुआ कि सफेद-दानेदार चीनी घर-घर में पहुंच गई. भारत में पहली चीनी मिलों को लगाने का रिकॉर्ड 1610 में मिलता है.

चीनी भले ही कुछ ज्यादा विटामिन-मिनरल न रखती हो, लेकिन इसका उपयोग डायरिया, उल्टी, बुखार-खांसी में होता रहा है. इतना ही नहीं घावों और ज़ख्मों को भरने के लिए यूरोप में इस्तेमाल होती रही है! तो यह है शर्करा यानी चीनी का पूरा इतिहास!

क्या पीएम मोदी ने तोड़ दिया है पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का रिकॉर्ड?

हाल ही में लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम सबके सामने आ चुके हैं, जिसके बाद यह कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया है! जी हां, देश में अब तक दो ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री का पद संभाला है! पहले थे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अब बन चुके हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी! खैर, इस आंकड़े के बारे में आपको पूरी जानकारी देंगे!

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनडीए के बहुमत का आंकड़ा पार करने के साथ पीएम नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनसे पहले देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम यह रेकॉर्ड दर्ज था। हालांकि मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने और नेहरू के रेकॉर्ड में एक बड़ा फर्क है। मोदी ने चुनावी नतीजों की तस्वीर साफ होने के बाद मंगलवार को X पर एक पोस्ट में कहा, ‘देश की जनता-जनार्दन ने एनडीए पर लगातार तीसरी बार अपना विश्वास जताया है। भारत के इतिहास में ये एक अभूतपूर्व पल है। मैं इस स्नेह और आशीर्वाद के लिए अपने परिवारजनों को नमन करता हूं।‘ एक तरफ 2014 के चुनाव में बीजेपी ने मोदी की अगुआई में 282 और 2019 चुनाव में 303 सीटें जीतकर अकेले दम पर बहुमत हासिल किया था लेकिन इस बार बीजेपी अकेले दम पर बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों के आंकड़े से काफी पीछे है और सहयोगी दलों को मिलाकर NDA बहुमत हासिल कर पाया है। दूसरी ओर, 1951-52 में पहले आम चुनाव में नेहरू की अगुवाई में कांग्रेस को 364 सीटें मिली थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। यानी सीधी सी बात यह है कि यह बात सच है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है, लेकिन उस रिकॉर्ड में और इस रिकॉर्ड में जनादेश का बहुत अंतर है!1957 में हुए दूसरे चुनाव में कांग्रेस को 371 सीटें मिलीं और नेहरू फिर प्रधानमंत्री बने। 1962 में हुए तीसरे चुनाव में भी कांग्रेस ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस को 361 सीटें मिलीं और नेहरू ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला था।

नेहरू 1947 से 1964 तक पीएम रहे। 27 मई 1964 को उनका निधन हुआ। उन्होंने 16 साल 286 दिनों तक सत्ता संभाली थी। 1966-1977 और 1980 से 1984 तक पीएम रहीं इंदिरा गांधी ने 15 साल 350 दिनों तक सत्ता संभाली थी। पीएम नरेंद्र मोदी 10 वर्षों से इस पद पर हैं और अब उनका तीसरा कार्यकाल शुरू होने वाला है। यही नहीं नई सरकार बनने के बाद महत्वपूर्ण विभागों में तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के लिए 100 दिन के अजेंडे के शीघ्र क्रियान्वयन पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्रियों ने अधिकारियों को पहले 100 दिनों के अजेंडे पर पूरी गंभीरता के साथ काम करने को कहा है। बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाल लिया। नड्डा ने कार्यभार संभालने के बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव गणपतराव जाधव के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि देश की प्रगति में स्वास्थ्य मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में आने वाली सभी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को पूरी दुनिया में मान्यता मिल रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय इस समय देश में कई बड़ी योजनाओं को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। साथ ही आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी है। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने की एक बड़ी योजना है और बताया जा रहा है कि पहली बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में भी चर्चा की है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर 70 वर्ष की आयु से ऊपर के हर बुजुर्ग को आयुष्मान योजना के दायरे में लाया जाएगा। 70 साल से ऊपर का हर बुजुर्ग, चाहे वो गरीब हो, मध्यम वर्ग का हो या फिर उच्च मध्यम वर्ग से ही क्यों न हो, उन्हें भी 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।’ जनऔषधि केंद्रों पर 80 पर्सेंट डिस्काउंट के साथ सस्ती दवाएं मिलती रहेंगी, इन केंद्रों का विस्तार होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। यानी सीधी सी बात यह है कि यह बात सच है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है, लेकिन उस रिकॉर्ड में और इस रिकॉर्ड में जनादेश का बहुत अंतर है!

आने वाले समय में किन विदेश नीतियों पर काम करेगा भारत?

आज हम आपको बताएंगे कि आने वाले समय में भारत किन विदेश नीतियों पर काम करेगा! राजनयिक से नेता बने एस. जयशंकर ने विदेश मंत्री के रूप में मंगलवार को अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने पर कहा कि ‘भारत प्रथम’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ देश की विदेश नीति के दो मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे। उन्होंने कहा कि नई सरकार का जोर, टकरावों और तनावों का सामना कर रहे विभाजित विश्व में भारत को ‘विश्व बंधु’ बनाने पर होगा। जयशंकर बीजेपी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें पिछली सरकार में संभाले गए मंत्रालयों की ही जिम्मेदारी दी गई है। राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और निर्मला सीतारमण सहित कई सीनियर नेताओं को फिर से वही मंत्रालय सौंपे गये हैं, जो पिछली सरकार में उनके पास थे।जयशंकर ने यूक्रेन में युद्ध के मद्देनजर रूस से कच्चे तेल की खरीद पर पश्चिमी देशों की आलोचना को निष्प्रभावी करने से लेकर चीन से निपटने के लिए एक दृढ़ नीति- दृष्टिकोण तैयार करने तक प्रधानमंत्री मोदी की पिछली सरकार में अच्छा काम करने वाले अग्रणी मंत्रियों में से एक के रूप में उभरे। उन्हें विदेश नीति के मामलों को खासकर भारत की जी-20 की अध्यक्षता के दौरान घरेलू पटल पर विमर्श के लिए लाने का श्रेय भी दिया जाता है। जयशंकर ने कहा, ‘भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निश्चित रूप से मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने हमें जो दो सिद्धांत दिए हैं – भारत प्रथम और वसुधैव कुटुंबकम, वे भारतीय विदेश नीति के दो मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हमें पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर एक अशांत, बंटी हुई दुनिया में, संघर्षों और तनावों से भरी दुनिया में विश्व बंधु के रूप में खुद को स्थापित करेंगे।’

जयशंकर ने अपने मंत्रालयी सहयोगियों पबित्रा मार्गेरिटा और कीर्ति वर्धन सिंह का विदेश मंत्रालय में स्वागत भी किया। असम से राज्यसभा सदस्य मार्गेरिटा और उत्तर प्रदेश के गोंडा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीतने वाले सिंह विदेश मंत्रालय में नये राज्य मंत्री हैं। जयशंकर ने मॉस्को, कोलंबो, बुडापेस्ट और तोक्यो के दूतावासों के साथ-साथ विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय में अन्य राजनयिक पदों पर भी काम किया है।जयशंकर ने कहा, ‘मेरे लिए यह बहुत बड़ा सम्मान, बहुत बड़ा सौभाग्य है कि मुझे एक बार फिर विदेश मंत्रालय का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। आप सभी जानते हैं कि पिछले कार्यकाल में इस मंत्रालय ने वास्तव में असाधारण प्रदर्शन किया था।’

भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में मालदीव, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, सेशेल्स और मॉरीशस के नेताओं को आमंत्रित करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे सभी पड़ोसी देश (शपथ ग्रहण समारोह में) आए और प्रधानमंत्री मोदी ने उन सभी से मुलाकात की। पड़ोसी के तौर पर हमारे संबंध पहली प्राथमिकता और मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।’ यह पूछे जाने पर कि क्या नयी सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट की मांग करेगी, जयशंकर ने सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि देश का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। जयशंकर ने यूक्रेन में युद्ध के मद्देनजर रूस से कच्चे तेल की खरीद पर पश्चिमी देशों की आलोचना को निष्प्रभावी करने से लेकर चीन से निपटने के लिए एक दृढ़ नीति- दृष्टिकोण तैयार करने तक प्रधानमंत्री मोदी की पिछली सरकार में अच्छा काम करने वाले अग्रणी मंत्रियों में से एक के रूप में उभरे। उन्हें विदेश नीति के मामलों को खासकर भारत की जी-20 की अध्यक्षता के दौरान घरेलू पटल पर विमर्श के लिए लाने का श्रेय भी दिया जाता है। वर्तमान में जयशंकर गुजरात से राज्यसभा के सदस्य हैं।

जयशंकर ने 2015-18 तक भारत के विदेश सचिव, अमेरिका में राजदूत 2013-15, चीन में 2009-2013 और चेक गणराज्य में राजदूत 2000-2004 के रूप में कार्य किया है। बता दें कि कई सीनियर नेताओं को फिर से वही मंत्रालय सौंपे गये हैं, जो पिछली सरकार में उनके पास थे। जयशंकर ने कहा, ‘भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निश्चित रूप से मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने हमें जो दो सिद्धांत दिए हैं – भारत प्रथम और वसुधैव कुटुंबकम, वे भारतीय विदेश नीति के दो मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे।’ वह सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त 2007-2009 भी रहे। जयशंकर ने मॉस्को, कोलंबो, बुडापेस्ट और तोक्यो के दूतावासों के साथ-साथ विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय में अन्य राजनयिक पदों पर भी काम किया है।

आखिर कौन बनेंगे भारत के नए आर्मी चीफ?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत के नए आर्मी की आखिर कौन बनेंगे! लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी देश के नए सेना प्रमुख होंगे। केंद्र सरकार उन्हें अगले चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में नियुक्ति दी है। लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को 30 जून की दोपहर से अगले सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभालेंगे। द्विवेदी वर्तमान में उप सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वर्तमान सेनाध्यक्ष जनरल मनोज सी पांडे 30 जून को पदमुक्त हो रहे हैं। दरअसल, मौजूदा आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे का कार्यकाल 31 मई को पूरा हो रहा था लेकिन 30 जून तक का एक्सटेंशन दे दिया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को 15 दिसंबर, 1984 को भारतीय सेना की इन्फैंट्री (जम्मू और कश्मीर राइफल्स) में कमीशन मिला था। लगभग 40 वर्षों की अपनी लंबी और विशिष्ट सेवा के दौरान, उन्होंने विभिन्न कमांड, स्टाफ, इंस्ट्रक्शनल और विदेशी नियुक्तियों में काम किया है। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी की कमांड नियुक्तियों में रेजिमेंट (18 जम्मू और कश्मीर राइफल्स), ब्रिगेड (26 सेक्टर असम राइफल्स), महानिरीक्षक, असम राइफल्स (पूर्व) और 9 कोर की कमान शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर, अधिकारी ने सेना के उप प्रमुख के रूप में नियुक्त होने से पहले 2022-2024 तक महानिदेशक इन्फैंट्री और जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ (मुख्यालय उत्तरी कमान) सहित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई हैं।

01 जुलाई, 1964 को जन्मे द्विवेदी सैनिक स्कूल रीवा, नेशनल डिफेंस कॉलेज और यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने डीएसएससी वेलिंगटन और आर्मी वॉर कॉलेज, महू में भी कोर्स किया है। इसके अलावा, ले. जनरल द्विवेदी को यूएसएडब्ल्यूसी, कार्लिस्ले, यूएसए में प्रतिष्ठित एनडीसी समकक्ष पाठ्यक्रम में ‘विशिष्ट फेलो’ से सम्मानित किया गया। ले. जनरल द्विवेदी के पास रक्षा और प्रबंधन अध्ययन में एम फिल और सामरिक अध्ययन और सैन्य विज्ञान में दो मास्टर डिग्री हैं। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम), अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और तीन जीओसी-इन-सी प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है।

बता दे कि लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी अगले सेना प्रमुख होंगे। वह वर्तमान सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे का स्थान लेंगे। उनके नाम की घोषणा सरकार की ओर से मंगलवार रात की गई। जनरल पांडे 30 जून को रिटायर होंगे। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी की नियुक्ति में सरकार ने वरिष्ठता क्रम का पालन किया है। सरकार ने कुछ ही दिन पहले जनरल पांडे की रिटायरमेंट से पहले उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया था। जनरल पांडे को 31 मई को पहले रिटायर होना था। रक्षा मंत्रालय ने कहा सरकार ने वर्तमान में उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को 30 जून से अगले सेना प्रमुख के रूप में नियुक्त किया है।

एक जुलाई 1964 को जन्मे लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी सैनिक स्कूल, रीवा के पूर्व छात्र हैं। वह 15 दिसंबर 1984 को भारतीय सेना की 18-जम्मू कश्मीर राइफल्स में शामिल हुए थे। बाद में उन्होंने यूनिट की कमान संभाली। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने 19 फरवरी को उप सेना प्रमुख का पदभार संभाला था। उप सेना प्रमुख का पदभार संभालने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी 2022-2024 तक उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी को चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर कार्य करने व्यापक अनुभव है। वह वर्तमान में उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। देश के नए आर्मी चीफ के पास आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का अनुभव है। उनके पास उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर काम करने का शानदार अनुभव है। उन्हें उत्तरी पूर्वी राज्यों में उग्रवाद से निपटने वाले ऑपरेशन में भी महारत हासिल है। नए आर्मी चीफ सेना के आधुनिकीकरण प्रक्रिया में भी शामिल रह चुके हैं। मेक इन इंडिया के तहत सेना में स्वदेशी हथियारों को शामिल कराने में उनकी अहम भूमिका रही।

उपेंद्र द्विवेदी नेशनल डिफेंस कॉलेज और यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और आर्मी वॉर कॉलेज, महू से भी पाठ्यक्रम पूरा किया है। उनके पास रक्षा और प्रबंधन अध्ययन में एम फिल और सामरिक अध्ययन और सैन्य विज्ञान में दो मास्टर डिग्री है। जनरल पांडे 30 जून को रिटायर होंगे। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी की नियुक्ति में सरकार ने वरिष्ठता क्रम का पालन किया है। सरकार ने कुछ ही दिन पहले जनरल पांडे की रिटायरमेंट से पहले उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया था। जनरल पांडे को 31 मई को पहले रिटायर होना था।उपेंद्र द्विवेदी को 15 दिसंबर 1984 को भारतीय सेना की इन्फैंट्री जम्मू और कश्मीर राइफल्स में कमीशन मिला था। 40 वर्षों की लंबी सेवा के दौरान लेफ्टिनेंट द्विवेदी ने विभिन्न कमांड, स्टाफ, इंस्ट्रक्शनल और विदेशी नियुक्तियों में काम किया है।

क्या अब अमरनाथ यात्रा पर आ सकता है संकट ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब अमरनाथ यात्रा पर संकट आ सकता है या नहीं! जम्मू के रियासी में श्रद्धालुओं से भरी बस पर आतंकवादियों के हमला करने के बाद अब 29 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा पर खतरा मंडराने लगा है। बाबा बफार्नी के दर्शन के लिए यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी। इसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे राज्य के लिए सिक्योरिटी रिव्यू भी किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस-किस पॉइंट पर कितना खतरा है और वहां किस स्तर की सिक्योरिटी की जरूरत है। रियासी बस अटैक मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को 20 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शक है कि आतंकवादियों की मदद के लिए कोई ना कोई स्थानीय शख्स भी इस हमले में शामिल था, जो बैक हैंड से आतंकवादियों को सपोर्ट कर रहा था। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त जवानों की 11 टीमें जंगलों और पहाड़ों में फरार आतंकियों की तलाश कर रही हैं। इसके लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है।

मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि पुंछ जिले के सुरनकोट में 4 मई को एयरफोर्स काफिले पर आतंकियों द्वारा किए गए हमले में जो आतंकवादी शामिल थे। संभवत: वही आतंकवादी रियासी हमले में भी हो सकते हैं। शक लश्कर-ए-तैबा के टॉप कमांडर अबू हमजा, पाकिस्तानी सेना में कमांडो रह चुके फौजी और आदून नाम के एक अन्य आतंकी पर भी जताया जा रहा है, जिन्होंने हमला किया या फिर हमला करने वाले आतंकवादियों को निर्देश दिए। इनमें 32 साल का अबू हमजा पर 10 लाख का इनाम भी घोषित है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई आतंकी गिरफ्तार नहीं है। हां, 20 संदिग्ध लोगों से पूछताछ जरूर की जा रही है। मामले में बस के पीछे चल रही एक ईको कार के लापता होने और एक जीप के पीछे चलने की बात सामने आई थी। जिसे आतंकियों से जोड़कर देखा जा रहा था। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि ईको कार को ढूंढ लिया गया है। उसमें कुछ संदिग्ध नहीं मिला है। सर्च ऑपरेशन जारी है। कुछ इनपुट मिले हैं। जिनके आधार पर काम किया जा रहा है। कामयाबी मिलने की उम्मीद है। आतंकवादियों द्वारा बस में जो गोलियां बरसाई गई। वह कई तरह की मिली हैं। जिससे लग रहा है कि आतंकवादियों ने एक से अधिक टाइप के हथियार इस्तेमाल किए। इनमें अमेरिकी एम-4 कार्बाइन के साथ अन्य राइफलों के इस्तेमाल करने का शक है। जैसा की एनबीटी ने 10 जून को ही लिखा था कि अगर बस खाई में ना गिरती तो आतंकी बस में सवार सभी लोगों को मार डालते। बस में सवार घायलों का भी यही कहना है।

इसमें बस ड्राइवर विजय कुमार और कंडक्टर अर्जुन कुमार की बहादुरी भी बताई जा रही है। जिन्होंने फौजी जैसी ड्रेस पहने आतंकियों ने जब ड्राइवर को बस रोकने के लिए कहा तो उसने उन्हें भांपते हुए बस नहीं रोकी। जिसमें आतंकियों ने बस और टायरों पर गोलियां बरसा दीं। बस खाई में जा गिरी। घायलों में 10 लोगों को गोलियां लगी हैं। हमले में नौ लोगों की मौत हुई है, 41 घायल हुए। बता दें कि रविवार शाम 6:10 पर बस पर आतंकी हमला हुआ। इस हमले में स्थानीय राजबाग पौनी के रहने वाले बस ड्राइवर विजय कुमार और कटरा निवासी कंडक्टर अर्जुन की भी मौत हो गई। बस में सवार कुछ यात्रियों ने मीडिया को बताया कि जब बस ढलान पर थी तो एक आतंकी फौजी वर्दी में सड़क के बीचों-बीच बैठा था। बस की रफ्तार धीमी होते ही उसने फायरिंग शुरू कर दी। फिर और तरफ से भी बस पर फायरिंग होने लगी। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हुआ। ड्राइवर को भी गोली लगी और उनका बस से नियंत्रण खो गया। बस खाई में गिर गई। तब भी आतंकी बस पर गोलियां बरसाते रहे।

फरार आतंकियों की तलाश में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना ने साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पहाड़ी इलाके में आतंकियों के छिपे होने की आशंका को देखते हुए ड्रोन की भी मदद ली जा रही है। मौके पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के DGP आर. आर. स्वैन और रियासी की SSP मोहिता शर्मा समेत अन्य तमाम अफसर पहुंचे। इस बीच घटनास्थल पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक टीम भी पहुंची। फरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल इकट्ठा किए हैं।

पुरुषों और महिलाओं के बीच यह अंतर मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण है कि

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पुरुषों और महिलाओं के बीच यह अंतर मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण है कि
प्राकृतिक विविधता को समय के साथ सत्तावादी पितृसत्ताओं द्वारा असमानता के एक उपकरण में बदल दिया गया है। कमोबेश हर किसी को इस बात का प्रत्यक्ष अनुभव है कि लिंग अंतर का वास्तव में क्या मतलब है। विश्व आर्थिक मंच के शोधकर्ताओं ने 2024 में पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर की घोषणा की है, जो आर्थिक भागीदारी और भागीदारी, शैक्षिक प्राप्ति और उपलब्धि, स्वास्थ्य और जीवन शैली और राजनीतिक शक्ति जैसे कारकों के आधार पर दुनिया में पुरुषों और महिलाओं की स्थिति को मापता है। . लड़कियाँ पीछे हैं। समाज के अधिकांश नागरिक यही सोचते हैं कि ये सब ठीक चल रहा है, सब कुछ सही है। ये ‘महिलाओं के अधिकार’, ‘महिलाओं के अवसर’, ये सब एक उच्च श्रेणी का नौसिखिया आंदोलन है। विश्वविद्यालय में ‘मानविकी’ नामक विषय का अध्ययन करने के फलस्वरूप इस अध्ययन का समाज की स्थिति से कोई सम्बन्ध नहीं है। ये सरासर झूठ है. इस इनकार में, न देखने की रणनीति में खतरे का बीज छिपा है। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, मौजूदा लैंगिक असमानता का अंतर इतना व्यापक है कि इसे पाटने में 134 साल लगेंगे। इस मत से पहले के 134 साल के आंकड़े से साफ पता चलता है कि स्त्री-पुरुष के बीच कितना बड़ा अंतर है और इतना बड़ा होने के बावजूद यह कितना अनैतिक है।

पुरुषों और महिलाओं के बीच यह अंतर मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण है कि प्राकृतिक विविधता को समय के साथ सत्तावादी पितृसत्ताओं द्वारा असमानता के एक उपकरण में बदल दिया गया है। प्रकृति ने महिलाओं को बच्चे पैदा करने के लिए जो अधिकार दिया था, उसका फायदा उठाकर पुरुषों ने महिलाओं को एक अधीनस्थ स्थिति में ला दिया। जहां तक ​​अन्य देशों की बात है, भारतीय संस्कृति में लड़कियों को पीछे रखने के कई तरीके हैं। आइए लड़कियों को कन्या, जया, जननी इन तीन रूपों के आधार पर परखें। ‘मनुसंघिता’ में स्त्रियाँ बचपन में पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में पुत्र के अधीन रहती थीं। केवल ‘मनुसंघिता’ ही क्यों, अन्य धर्मों के नियमों में भी लड़कियों की यह अधीनता है। इसलिए बेगम रोकैया ने घिरी हुई लड़कियों की मुक्ति का सपना देखने के लिए सुल्ताना ड्रीम की रचना की। नारी साम्राज्य की कथा में लड़कियाँ प्रत्येक कार्य में स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर हैं। यही समझ लड़कियों की हालत बदल सकती है. 19वीं सदी में, महिला शिक्षा के विरोधियों ने घोषणा की कि उच्च शिक्षित लड़कियां बच्चे पैदा करने की क्षमता खो देती हैं। शिक्षित महिलाएं पति से वंचित रहती हैं। ऐसा विचार समाज से लुप्त नहीं हुआ है, यह स्कूलों को देखकर पता चलता है। लड़कियों की शादी करके माता-पिता अक्सर उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित कर देते हैं। शिक्षा को विवाह प्रणाली के विपरीत माना जाता है। यूं तो शादी लड़कियों की मुक्ति है। उसके बाद भवचक्र में बच्चे को जन्म देने वाली माताओं की एकमात्र जिम्मेदारी, बच्चे के साथ काम पर जाने की विभिन्न असुविधाएँ दिखाकर उनके आर्थिक अधिकारों को कमतर कर दिया गया। हालाँकि, एक उपयुक्त पारिवारिक बुनियादी ढाँचा बनाने का प्रयास दिखाई नहीं दे रहा है ताकि बच्चे को जन्म देने वाली माँ बच्चे के साथ काम कर सके। इसके अलावा सहिष्णु, सर्वशक्तिमान माँ का आदर्श प्रस्तुत कर भारतीय लड़कियों को उनके पोषण और स्वास्थ्य के अधिकार से वंचित करने की आध्यात्मिक रणनीति है। परिवार में सभी के भोजन के बाद जो बचता है उसे आवंटित किया जाता है। सामूहिक आश्वासन में यह भावना इतनी प्रबल है कि लड़कियां स्वास्थ्य और पोषण के लिए कुछ भी करने में दोषी महसूस करती हैं। जब भारतीय लड़कियाँ शिक्षा-स्वास्थ्य-कार्यस्थल-जीवनशैली सभी पहलुओं में पिछड़ी हैं, तो कहना न होगा कि वे राजनीतिक सत्ता से भी वंचित होंगी। पंचायत में लड़कियों के सामने पुरुषों द्वारा कलकठी करने की कहानी तो मशहूर है.

तो इस अंतर को दूर करने का तरीका क्या है? रास्ता आसान नहीं है. लेकिन सबसे पहले, हमें यह स्वीकार करना होगा कि एक अंतर है और यह अंतर ‘अनैतिक’ है। समाज के सभी स्तरों पर सामान्य जागरूकता की आवश्यकता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए लोकप्रिय मनोरंजन मीडिया का भी उपयोग किया जा सकता है। लड़कियों के सक्रिय रहने के साथ ही पुरुषों की भूमिका भी अहम है। हालाँकि, आशा का एक शब्द बाकी है। समलैंगिक पुरुषों की संख्या थोड़ी ही सही, लेकिन बढ़ रही है। महिलाओं में अपनी किस्मत खुद जीतने का साहस और ताकत धीरे-धीरे बढ़ रही है।

ट्रूडो ने मोदी से मुलाकात के बाद कहा, ”मैं कुछ बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत के साथ काम करूंगा।”

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इटली में G7 बैठक के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने नरेंद्र मोदी से अलग से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि दोनों देश अहम मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इटली में G7 बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग से मुलाकात की. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कनाडा कुछ ‘बहुत महत्वपूर्ण’ मुद्दों पर भारत के साथ मिलकर काम करेगा। लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि वो चीजें क्या हैं. खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा और भारत के बीच ठंडे पड़े रिश्तों के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह पहली मुलाकात है. इसलिए कई लोगों का मानना ​​है कि इस मुलाकात का एक अलग ही महत्व है.

जी7 बैठक के आखिरी दिन ट्रूडो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. वहां मोदी से मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा, ‘हमें कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर मिलकर काम करना होगा. मैं यहां इस बारे में बात नहीं करना चाहता कि वे क्या हैं। लेकिन हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि आने वाले दिनों में हम कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे।” उन्होंने ट्रूडो से हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर के साथ लिखा, “जी7 बैठक में कनाडाई पीएम से मिलें।”

कनाडा में ट्रूडो के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि मोदी से मुलाकात के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कुछ चर्चा हुई. दोनों देशों के बीच अभी कई अहम मुद्दे हैं. लेकिन इस बारे में कोई भी सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहता.

पिछले साल सितंबर से कनाडा के साथ भारत के रिश्ते खराब हो गए हैं। ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। नई दिल्ली ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि कनाडाई प्रधान मंत्री अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे के उच्च पदस्थ अधिकारियों को वापस बुलाते हैं। व्यापार वार्ता भी रुकी हुई है. कनाडाई पुलिस निज्जर की हत्या की जांच कर रही है और हत्या के सिलसिले में अब तक चार भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार कर चुकी है।
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत-कनाडा के रिश्ते दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। क्या नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में रिश्ते सुधरेंगे? सरकार बनाने का रास्ता साफ होते ही कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने मोदी को बधाई संदेश भेजा। रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोदी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट में ट्रूडो को धन्यवाद दिया। साथ ही मोदी ने कनाडा के साथ काम करने को लेकर भी सकारात्मक टिप्पणी की.

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पुष्टि होने के बाद ट्रूडो ने सोशल मीडिया पर मोदी को बधाई दी। उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा उनकी (मोदी) सरकार के साथ काम करने को तैयार है। ट्रूडो ने यह भी कहा, “मानवाधिकारों और कानून के शासन को बनाए रखते हुए दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाना संभव है।”

मोदी कनाडा के साथ भी अच्छे रिश्ते कायम रखना चाहते हैं. प्रधानमंत्री ने सोमवार को अपने पोस्ट में इसका जिक्र किया. उन्होंने लिखा, ”भारत आपसी समझ और एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति सम्मान पर कनाडा के साथ काम करने को उत्सुक है.” राजनयिक हलकों के एक वर्ग के मुताबिक, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत और कनाडा के बीच बिगड़ते संबंधों को सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं. विभिन्न तरीकों से करेंगे ट्रूडो की बधाई और उसके बाद मोदी की कनाडा के साथ काम करने की इच्छा से दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल जून में खालिस्तान समर्थक टाइगर फोर्स (KTF) के प्रमुख और कनाडा के सरे में गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख निज्जर की गुरुद्वारा परिसर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ट्रूडो ने कनाडा की संसद में भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि घटना की जांच में भारत की जासूसी एजेंसी की भूमिका थी। उन्होंने कहा, ”हमारी जांच एजेंसियां ​​मामले की अधिक विस्तार से जांच कर रही हैं।” अगला कदम कनाडाई नागरिकों को वीजा जारी करने पर प्रतिबंध लगाना है। इसके जवाब में ट्रूडो सरकार ने भारत में रहने वाले कनाडाई नागरिकों के लिए ‘विशेष सुरक्षा अलर्ट’ जारी किया। इसके बाद ट्रूडो ने नई दिल्ली के साथ अच्छे संबंधों की वकालत कर विवाद को अस्थायी तौर पर खत्म कर दिया.

लेकिन पिछले फरवरी में कनाडाई मीडिया “ग्लोबल न्यूज़” ने देश की जासूसी एजेंसी (आधिकारिक तौर पर, “विदेशी खुफिया एजेंसी”) “कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस” की एक रिपोर्ट लीक कर दी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत कनाडा की चुनाव प्रक्रिया में “अवांछित हस्तक्षेप” कर सकता है! जिससे दोनों देशों के बीच नया तनाव पैदा हो गया. हालांकि, भारत ने रिपोर्ट के दावे को खारिज कर दिया. दोनों देशों के बीच पिछले सात महीने से तनाव जारी है. देखना यह होगा कि मोदी के तीसरे कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते सुधरेंगे या नहीं।

क्या आमिर और इमाद टी20 वर्ल्ड कप के बाद संन्यास ले लेंगे? संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता l

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पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप से हट गया है. बाबर आजम को अब बचे एक मैच से कुछ हासिल नहीं होगा. क्या इमाद वसीम और मोहम्मद आमिर उस मैच के बाद संन्यास ले लेंगे पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप से हट गया है. बाबर आजम को अब बचे एक मैच से कुछ हासिल नहीं होगा. क्या इमाद वसीम और मोहम्मद आमिर उस मैच के बाद संन्यास ले लेंगे?

आमिर और इमाद पहले ही रिटायर हो चुके थे. लेकिन वर्ल्ड कप से पहले उनकी टीम में वापसी हो गई. 15 सदस्यीय टीम में उन्हें शामिल करने की काफी आलोचना हुई थी. इस बार यह सवाल है कि क्या वे वर्ल्ड कप के बाद दोबारा खेलेंगे. इमाद ने कहा, ”अभी हमारा एक मैच बाकी है. उसके बाद हम रिटायरमेंट के बारे में सोचेंगे. सच कहें तो पाकिस्तान टीम में काफी बदलाव की जरूरत है. बोर्ड उस पर गौर करेगा. हम अपने लिए दो मैच हार गए।’ हम आयरलैंड मैच के बाद चर्चा करेंगे और फैसला करेंगे।’ मैं कोई भी काम चुपचाप नहीं करता. पिछली बार जब मैं रिटायर हुआ था तो मैंने सबको बताया था। अगर इस बार भी ऐसा कुछ हुआ तो मैं सबको बताऊंगा और फैसला लूंगा.”

पाकिस्तान पहला मैच अमेरिका से हार गया. इसके बाद उन्हें भारत के खिलाफ भी हार मिली. अगर कनाडा मैच जीत भी जाता है तो भी बाबर को 4 से ज्यादा अंक नहीं मिलेंगे. वहीं भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान से ज्यादा अंक हासिल किए. प्रत्येक समूह से शीर्ष दो टीमें अगले दौर में पहुंचती हैं। नतीजतन, पाकिस्तान आखिरी मैच में आयरलैंड से भिड़ने से पहले ही विश्व कप से बाहर हो गया। इमाद ने पहले दो मैचों में हार के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ”हम किसी एक क्रिकेटर की वजह से नहीं हारे. हार के लिए पूरी टीम जिम्मेदार है. हम अपने आप को भूलकर हार गए। मैं कोई बहाना नहीं बनाना चाहता. हार-जीत खेल का हिस्सा है. लेकिन हमें अमेरिका के ख़िलाफ़ जीतना चाहिए था. हम एक के बाद एक मैच हार रहे हैं. क्रिकेट एक टीम गेम है, कोई भी टीम किसी एक व्यक्ति के कारण मैच नहीं हारती।”

भारतीय टीम के कोच राहुल द्रविड़ का कार्यकाल टी20 वर्ल्ड कप तक. इसके बाद वह जिम्मेदारी छोड़ देंगे. इसी बीच शनिवार को द्रविड़ कनाडा के ड्रेसिंग रूम में गए. उस टीम के क्रिकेटरों से बात की. फ्लोरिडा में शनिवार को भारत-कनाडा मैच हार गया. दोनों टीमों के बीच अंक बांट दिए गए हैं. इसके बाद द्रविड़ कनाडा के ड्रेसिंग रूम में गए. कनाडाई क्रिकेटरों का हौसला बढ़ाया. द्रविड़ ने कहा, ”इस प्रतियोगिता में आपके योगदान को नकारा नहीं जा सकता. हम सभी जानते हैं कि खेलने के लिए आपको कितना कुछ सहना पड़ता है। यह आसान नहीं है।”

द्रविड़ ने 2003 में स्कॉटलैंड के लिए क्रिकेट खेला। भारत के पूर्व कप्तान ने स्कॉटलैंड के लिए 11 वनडे मैच खेले। द्रविड़ ने उस अनुभव को कनाडाई क्रिकेटरों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा, ”मैं 2003 में स्कॉटलैंड के लिए खेला था. मैं जानता हूं कि एसोसिएट देशों के लिए क्रिकेट खेलना कितना कठिन है। आप सभी के लिए प्रेरणा हैं. टी20 विश्व कप खेलने के लिए आपको बहुत त्याग करना होगा।”

द्रविड़ को टीम कनाडा की ओर से एक जर्सी उपहार में दी गई। इस पर सभी दलों ने हस्ताक्षर किये. ग्रुप स्टेज में भारत का खेल ख़त्म हो चुका है. वे सुपर 8 में पहुंच गए हैं. अमेरिका भी उस ग्रुप से अगले दौर में पहुंच गया. कनाडा ने आयरलैंड के ख़िलाफ़ जीत हासिल की. लेकिन अमेरिका और पाकिस्तान से हार गए. भारत से मैच हारने पर कनाडा को एक अंक मिला. उनका विश्व कप अभियान तीन अंकों के साथ समाप्त हुआ।

टी20 वर्ल्ड कप के सुपर 8 में इंग्लैंड. रविवार सुबह ऑस्ट्रेलिया ने स्कॉटलैंड को हराया। आखिरी ओवर में डेविडेरा की टीम ने जीत हासिल की. ऑस्ट्रेलिया की जीत के साथ ही इंग्लैंड का सुपर 8 में जाना तय हो गया.

हालाँकि यह मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम स्कॉटलैंड था, लेकिन इंग्लैंड की किस्मत इस मैच पर निर्भर थी। जोस बटलर भी चाहते थे कि ऑस्ट्रेलिया जीते. क्योंकि स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के अंक बराबर हैं. नेट रन रेट के मामले में इंग्लैंड आगे रहा. रविवार को स्कॉटलैंड की जीत से उसके इंग्लैंड से काफी अंक आगे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में पिछली चैंपियन इंग्लैंड सुपर 8 में नहीं जाती.

रविवार के मैच पर इंग्लैंड ही नहीं आईसीसी की भी नजर थी. ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जोस हेजलवुड ने कहा है कि स्कॉटलैंड के खिलाफ हार से इंग्लैंड विश्व कप से बाहर हो जाएगा। उन्होंने कहा, “अगर हम इंग्लैंड को विश्व कप से बाहर कर सकें तो यह हमारी टीम के लिए अच्छा होगा।” उनके इस बयान के बाद आईसीसी हिल गई. यह भी खबर है कि अगर जानबूझकर मैच हारा गया तो ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को निर्वासित कर दिया जाएगा। आख़िरकार रविवार को ऑस्ट्रेलिया की जीत हुई. हालाँकि, स्कॉटलैंड ने आसानी से हार नहीं मानी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए 180 रन बनाए. डेविड्स को उस रन का पीछा करने और जीत के लिए आखिरी ओवर तक संघर्ष करना पड़ा। ओपनर ट्रैविस हेड ने 49 गेंदों पर 68 रन बनाए. दूसरे ओपनर डेविड वॉर्नर 1 रन से ज्यादा नहीं बना सके. कप्तान मिचेल मार्श को भी रन नहीं मिला. अगर मार्कस स्टोइनिस 29 गेंदों पर 59 रन की पारी नहीं खेलते तो ऑस्ट्रेलिया मुश्किल में पड़ जाता. हालांकि टीम डेविड ने छक्का मारकर टीम को जीत दिला दी. इसी कारण स्कॉटलैंड विश्व कप से बाहर हो गया। इंग्लैंड ने जगह ले ली.

हजारों पर्यटक अभी भी फंसे हुए हैं, भूस्खलन की घटनाएं अधिक हो रही हैं, सिक्किम की ‘जीवन रेखा’ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 बंद है।

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हजारों पर्यटक अभी भी फंसे हुए हैं, भूस्खलन की घटनाएं अधिक हो रही हैं, सिक्किम की ‘जीवन रेखा’ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 बंद है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 को स्थानीय लोग सिक्किम की ‘जीवनरेखा’ कहते हैं। सिक्किम के लोगों का सबकुछ इसी हाइवे पर निर्भर है. लगातार बारिश के कारण हाईवे जगह-जगह ध्वस्त हो गया। सिक्किम और उत्तरी बंगाल के उत्तरी हिस्सों में बाढ़ की स्थिति लगातार अशांत होती जा रही है। सिक्किम में बारिश कम होने का नाम नहीं ले रही है. इसी तरह दार्जिलिंग, कालिम्पोंग समेत तराई और डुआर्स में भी बारिश जारी है. हालात ऐसे हैं कि प्रशासन को सिक्किम की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले नेशनल हाईवे नंबर 10 को बंद करना पड़ा. परिणामस्वरूप, सिक्किम का संचार लगभग पूरे देश से कट गया। जिसके चलते सुरक्षा की दृष्टि से राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया है, इसलिए कहा जा रहा है कि स्थिति में थोड़ा सुधार होने पर इसे फिर से खोल दिया जाएगा.

शनिवार देर रात से ही बारिश हो रही है. कलिम्पोंग जिले के लिखुवीर से यातायात बंद कर दिया गया। रविवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगहों पर फिर से भूस्खलन हुआ. सेवक के पास कालीझोड़ा-लाटपंचर सड़क दयनीय है श्वेतीझोड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा ढह गया। जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 के दोनों किनारों पर भीड़ को कम करने के लिए रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया, जिससे वाहनों को जोखिम में डालकर सड़क से गुजरने की अनुमति मिल सके।

लगातार बारिश के कारण 27 मील कालीझोड़ा, रविझोड़ा समेत कई जगहों पर भूस्खलन हुआ. सिक्किम में भी बारिश रुकने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं. परिणामस्वरूप, मंगन से गंगटोक और मंगन से सिंघथम सड़कों पर कई स्थान पहले ही भूस्खलन की चपेट में आ चुके हैं। उधर, लाचुंग में फंसे पर्यटकों के रेस्क्यू पर भी संशय पैदा हो गया है. हालांकि, सिक्किम प्रशासन ने जानकारी दी है कि एयरलिफ्ट के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, लाचुंग में अभी भी 1,200 पर्यटक फंसे हुए हैं. नतीजतन चिंता बढ़ती जा रही है.

उत्तर बंगाल के तराई और डुआर्स के मैदानी इलाकों में भी लगातार बारिश जारी है. जिसके चलते इलाके की हर नदी उफान पर है. अलीपुरद्वार और कूचबिहार में कई लोगों को नुकसान हुआ है. मॉनसून के कारण सिलीगुड़ी में जान जोखिम में कई जगहों पर पानी जमा हो गया है. सिक्किम मौसम विभाग के केंद्रीय निदेशक गोपीनाथ राहा के मुताबिक अभी कुछ दिनों तक बारिश जारी रहेगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समस्या उत्तर बंगाल के ऊपर कम दबाव की धुरी बनने के कारण है.

मानसून की सक्रियता और निम्न दबाव अक्ष के संयोजन के कारण कम से कम अगले पांच दिनों तक पहाड़ी और तलहटी के पांच जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। सिक्किम पहले से ही पिछले कुछ दिनों से बारिश से प्रभावित है. अभी भी करीब डेढ़ हजार पर्यटक अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं. इस बीच सिक्किम प्रशासन का मानना ​​है कि अगर पर्यटक पहाड़ों पर घूमने आते हैं तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी जरूरी है.

उत्तर प्रदेश से असम तक बनी निम्न दबाव की धुरी पिछले चार-पांच दिनों से अभी भी सक्रिय है। निम्न दबाव अक्ष के अत्यधिक सक्रिय होने के कारण सिक्किम और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले कुछ दिनों में दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और जलपाईगुड़ी में भारी बारिश होगी. मौसम विभाग के सूत्रों ने कहा कि दार्जिलिंग और कलिम्पोंग के अलावा, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार जैसे जिलों में कम से कम तीन से चार दिनों तक अतिरिक्त भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग संकेत दे रहा है कि अगले कुछ दिनों तक रेड वॉर्निंग बनी रहेगी. केंद्रीय मौसम विभाग के सिक्किम अधिकारी गोपीनाथ राहा ने कहा, ”इस भारी बारिश के कारण पहाड़ों और हरपा बान नदी में भूस्खलन हो रहा है. अब ऐसा ही रहेगा.”

तीस्ता के दोनों किनारों पर सिक्किम के विभिन्न पर्यटक केंद्रों के अलावा, सिलीगुड़ी से सटे लालटोंग बस्ती तक के कई इलाके तीस्ता के अशांत पानी में बह गए हैं। मौसम विभाग के सूत्रों के मुताबिक यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में जलवाष्प इलाके के ऊपर आ रहा है. मौसम विभाग ने कहा कि अगले कुछ दिनों तक कलिम्पोंग और दार्जिलिंग में भारी बारिश जारी रहेगी. उन जिला प्रशासनों को भी सावधान रहने को कहा गया है.

कोलकाता पुलिस, अवैध इमारतों को गिराने के मामले में 730 पन्नों की चार्जशीट में हत्या का आरोप

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कोलकाता पुलिस ने गार्डेनरिच में अवैध रूप से ऊंची इमारतों को गिराने के मामले में 730 पन्नों की चार्जशीट में हत्या का आरोप लगाया है 89 दिनों की जांच के बाद कोलकाता पुलिस ने 730 पन्नों की लंबी चार्जशीट दाखिल की. उस आरोप पत्र में छह आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है. आखिरकार गार्डेनरिच में अवैध बहुमंजिला ढहने के मामले में कोलकाता पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. उस चार्जशीट में छह आरोपियों पर हत्या का आरोप लगाया गया है. कोलकाता पुलिस की होमिसाइड शाखा के जासूसों ने पिछले शुक्रवार को अलीपुर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इस साल 17 मार्च को गार्डेनरिच के वार्ड नंबर 134 में एक अवैध ऊंची इमारत देर रात ढह गई। उस घटना के बाद 89 दिनों तक जांच जारी रही. जांच के बाद कोलकाता पुलिस ने 730 पेज की चार्जशीट दाखिल की. उस आरोप पत्र में छह आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है. आरोपियों में प्रमोटर, जमीन मालिक और ठेकेदार शामिल हैं। ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं.

हालांकि इस घटना में शामिल एक शख्स फरार है. कोर्ट उनके खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुका है. कोलकाता पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उस चार्जशीट में कुल 170 लोगों को गवाहों की सूची में रखा गया है. कलकत्ता पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 173 (8) के तहत आगे की जांच के साथ पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का रास्ता भी खोल दिया है. हालाँकि अवैध ऊँची इमारतों के ढहने से शुरू में नौ लोग मारे गए थे, बाद में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। इसलिए पुलिस प्रशासन का इस घटना को कम करने का कोई इरादा नहीं है. घटना के अगले दिन सुबह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलाके का दौरा किया. तब यह साफ हो गया था कि पुलिस-प्रशासन इस मामले में कोई रियायत नहीं बरतेगा. इसके बाद पुलिस ने कोलकाता नगर पालिका के साथ मिलकर जांच की गति बढ़ा दी. इससे तीन माह के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करना संभव हो गया है।

दूसरी ओर, कोलकाता पुलिस की ऐसी सख्त कार्रवाई से नगर निगम के अधिकारी खुश हैं. क्योंकि कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का निर्वाचन क्षेत्र वार्ड 134, कोलकाता पोर्ट का हिस्सा है. इसलिए उस वार्ड में अवैध बहुमंजिला ढहने से सबसे ज्यादा असहजता खुद मेयर को थी. घटना के तुरंत बाद कोलकाता नगर निगम में एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया. उन्होंने यह भी आदेश दिया कि घटना की जांच करने और वास्तविक दोषियों को दंडित करने के लिए कोलकाता पुलिस को नगर पालिका द्वारा हर संभव सहायता दी जानी चाहिए। इसके बाद गार्डनरिच की घटना पर नगर पालिका ने कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की. इस घटना में नगर पालिका के तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है. कोलकाता नगर पालिका सूत्रों के मुताबिक अभी तक उन इंजीनियरों से निलंबन नहीं हटाया गया है.

पिछले मार्च में गार्डेनरिच में बनाई जा रही एक अवैध ऊंची इमारत के ढहने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल ‘दबाव’ में आ गई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में वे उस वार्ड में बड़े अंतर से आगे बढ़े हैं. दमामा बाजार में मतदान से ठीक पहले गार्डेनरिच में घर गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई. उस घटना के बाद, तृणमूल द्वारा संचालित कलकत्ता नगर पालिका को उम्मीद के मुताबिक खड़ा किया गया। चूंकि यह घटना खुद मेयर फिरहाद (बॉबी) हकीम के निर्वाचन क्षेत्र में हुई थी, इसलिए सबसे बड़ा सवाल उन्हीं का था। कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 134 की घटना ने पोर्ट क्षेत्र के तृणमूल नेतृत्व पर भी दबाव डाला। लेकिन 4 जून को गिनती के बाद देखा जा सकता है कि अल्पसंख्यक बहुल वार्ड संख्या 134 से तृणमूल उम्मीदवार माला रॉय 13,583 वोटों से आगे हैं. नतीजे जानने के बाद मेयर फिरहाद ने राहत की सांस ली.

गार्डेनरिच की घटना को लेकर विपक्ष कोलकाता नगर निगम प्रशासन, यहां तक ​​कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भी आलोचना करने से नहीं चूका. घटना की महत्ता को समझते हुए मुख्यमंत्री स्वयं बीमार होने पर भी क्षेत्र का दौरा करने गये। फिर भी विपक्ष के हमले नहीं रुके.

इस साल के लोकसभा चुनाव में सीपीएम ने दक्षिण कोलकाता कांग्रेस के समर्थन से सायरा शाह हलीम को उम्मीदवार बनाया. वाम मोर्चे को उम्मीद थी कि गार्डेनरीच में पराजय के परिणामस्वरूप वार्ड के अल्पसंख्यक मतदाता सत्तारूढ़ दल से दूर हो जायेंगे और अपने अल्पसंख्यक उम्मीदवार को चुनेंगे। लेकिन नतीजे जारी होने के बाद देखा गया कि सायरा उस वार्ड में दूसरे स्थान पर हैं. बीजेपी उम्मीदवार देबाश्री चौधरी तीसरे स्थान पर रहीं. इसलिए कलकत्ता बंदरगाह के तृणमूल नेताओं को लगता है कि पूरे राज्य की तरह वार्ड संख्या 134 में भी अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन उनकी ओर है.

गार्डनरिच में अवैध बहुमंजिला इमारतों को गिराए जाने के बाद स्थानीय पार्षद शम्स इकबाल पर सबसे ज्यादा सवाल उठाए गए। उन्होंने शनिवार को कहा, ”जो घटना घटी वह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसा प्रमोटर की गलती के कारण हुआ. लेकिन लोगों ने क्षेत्र में विकास देखा है. यह उनकी अपेक्षाओं से बढ़कर था। वार्डवासियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विकास और मेयर फिरहाद हकीम के काम पर भरोसा जताया है. इसलिए हम भारी अंतर से जीते.”