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आखिर अमेरिका पहुंचकर पीएम मोदी ने क्या कुछ किया खास?

आज हम आपको बताएंगे कि अमेरिका पहुंचकर पीएम मोदी ने क्या कुछ खास किया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के तहत शनिवार को फिलाडेल्फिया पहुंचे। फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट पर पहुंचने पर अमेरिका के चीफ ऑफ प्रोटोकॉल एथन रोसेनजवेग ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। अमेरिका के चीफ ऑफ प्रोटोकॉल का पद राजदूत और सहायक विदेश मंत्री के समकक्ष होता है। यहां से पीएम मोदी डेलावेयर में बाइडन से मिलने उनके निजी आवास पर पहुंचे हैं। फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट पर भारतीय प्रवासी समुदाय ने पीएम मोदी को गर्मजोशी से स्वागत किया। अमेरिका के विभिन्न शहरों से भारतीय प्रवासी प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर उनका स्वागत करने के लिए फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट पर पहुंचे हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने प्रवासी समुदाय के लोगों से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया। एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और न्यूयॉर्क में भारत के कांसुलेट जनरल बिनय श्रीकांत प्रधान भी मौजूद रहे।

तीन दिनों की अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री डेलावेयर में क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भविष्य के शिखर सम्मेलन (एसओटीएफ) में भाग लेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करने वाले हैं। पीएम मोदी क्वाड बैठक में हिस्सा लेने के लिए फिलाडेल्फिया से डेलावेयर के लिए रवाना हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ट्वीट किया, ‘आज मैं प्रधानमंत्री अल्बनीज (ऑस्ट्रेलिया), मोदी और किशिदा का अपने घर डेलावेयर में स्वागत करूंगा। ये नेता न केवल एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं- वे मेरे और हमारे राष्ट्र के दोस्त हैं। शिखर सम्मेलन में हम जो कुछ भी हासिल करेंगे, उसे लेकर मैं आशान्वित हूं।’

क्वाड नेताओं की छठी बैठक अमेरिका के स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे आर्कमेरे अकादमी में होनी है, जहां बाइडन ने हाई स्कूल में पढ़ाई की थी। भारतीय समयानुसार यह बैठक रविवार सुबह 1.30 बजे शुरू होगी। प्रधानमंत्री मोदी बैठक के अतिरिक्त राष्ट्रपति बाइडन और क्वाड समूह के दूसरे नेताओं के साथ द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अमेरिका में क्वाड शिखर सम्मेलन की शुरुआत में चीन पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि क्वाड एक्टिव रहने के लिए बना है और यह किसी के खिलाफ नहीं है। बिना नाम लिए चीन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि क्वाड के नेता नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संप्रभुता के सम्मान में खड़े हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि दुनिया में संघर्ष चल रहा है और क्वाड हर संघर्ष का शांतिपूर्ण सम्माधान चाहता है।

उन्होंने कहा, ‘क्वाड का साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर मिलकर काम करना पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। हम किसी के खिलाफ नहीं है। हम सभी नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान और सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्वतंत्र, खुला, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत हमारी साझा प्राथमिकता और साझा प्रतिबद्धता है। हमने मिलकर स्वास्थ्य, सुरक्षा, उभरती टेक्नोलॉजी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में कई सकारात्मक और समावेशी पहल की है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा संदेश स्पष्ट है। क्वाड सहायता करने, साझेदारी करने और पूरक बनने के लिए है। मैं एक बार फिर राष्ट्रपति बाइडन और मेरे सभी सहयोगियों को बधाई देता हूं। हमें 2025 में भारत में क्वाड लीडर्स समिट आयोजित करने में खुशी होगी।’ इस साल क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन पहले भारत में होने वाला था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन इस कार्यक्रम को अपने गृहनगर में आयोजित करने के इच्छुक थे। बाइडन के लिए यह शिखर सम्मेलन किसी विदाई की तरह है, क्योंकि उनके राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

हिंद महासागर में भारत की नेवी लगातार एक्टिव है। हूती विद्रोहियों से जहाजों की सुरक्षा से लेकर हाईजैक जहाजों को डाकुओं से छुड़ाकर भारत ने अपनी ताकत दिखाई है। क्वाड नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका की सराहना की। शनिवार को क्वाड देशों ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व से बहुत कुछ सीखना बाकी है। तीनों नेताओं ने हिंद महासागर में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी की तारीफ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक जापानी पीएम फुमियो किशिदा ने वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के आयोजन में पीएम मोदी की पहल की सराहना की और इस प्रयास के लिए जापान का समर्थन बढ़ाया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने पीए मोदी के नेतृत्व में हिंद महासागर में प्रमुख शक्ति के रूप में भारत की भूमिका बताई। वही राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिका दो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के अनुभव और नेतृत्व से बहुत कुछ सीखना है।

क्या कांग्रेस की नई लिस्ट में भी दिख रहा है परिवारवाद?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस की नई लिस्ट में परिवारवाद दिख रहा है या नहीं! आखिर लंबे इंतजार और हा-नां के बाद नामांकन के आखिरी दिन गुरुवार को दोपहर तक कांग्रेस ने हरियाणा में सभी 90 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। कांग्रेस की लिस्ट पर अगर नजर डाली जाए तो साफ दिखता है कि टिकटों को लेकर चली आखिरी मौके तक खींचतान में भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रभावशाली नजर आए। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में एक फिर परिवारवाद का जोर दिखा। बुधवार की आधी रात को 40 टिकटों के ऐलान के बाद जहां नौ सीटों पर पेंच फंसे दिखे तो वहीं बुधवार की आधी रात के बाद से लेकर गुरुवार की दोपहर तक कांग्रेस ने सभी सीटों पर तस्वीर साफ कर दी। चर्चा है कि 90 में से तकरीबन 70 सीटें हुड्डा खेमे को मिली हैं। हालांकि इस खेमे के एक नेता ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहा कि खेमा कहना गलत होगा, वह पार्टी के सीएलपी लीडर हैं। इस नाते सभी से उनके बेहतर संबंध हैं। कांग्रेस के ज्यादातर सीटें उन्हीं उम्मीदवारों को दी गई हैं, जो सर्वे से निकल कर आई हैं। वहीं एक सूत्र का कहना था कि चार-पांच सीटों पर हुड्डा भी अपने पसंदीदा को टिकट नहीं दिला पाए, क्योंकि उनके नाम सर्वे में नहीं आ रहे थे। दरअसल, हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा के अलावा कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला और कुमारी शैलजा भी सीएम पद पर दावेदारी का संकेत दे चुके हैं। इसलिए शैलजा व सुरजेवाला दोनों ही असेंबली टिकट चाह रहे थे। इन तमाम नेताओं में अपने अपने करीबियों और भरोसेमंद चेहरों को टिकट दिलाने की खींचतान भी चल रही थी।

कांग्रेस की इस लिस्ट में अपनों और परिवारीजनों को भी खासा मौका मिला है। इनमें सबसे अहम नाम रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला का माना जा रहा है। सुरजेवाला आदित्य को अपनी पारंपरिक सीट कैथल से टिकट दिलाने में कामयाब रहे। सुरजेवाला फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। वहीं मुलाना से जिन पूजा चौधरी को टिकट दिया गया है, वह अंबाला के सांसद वरुण चौधरी की पत्नी हैं। सांसद बनने के बाद वरुण ने यहां से इस्तीफा दिया था, जिससे यह सीट खाली हो गई थी। उल्लेखनीय है कि वरुण हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष फूलचंद मुलाना के बेटे हैं।

पंचकुला से कांग्रेस ने पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन को एक बार फिर मौका दिया है। पलवल सीट से करण दलाल को टिकट दिया गया है। करण दलाल रिश्ते में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समधि हैं। कलायत सीट से हिसार के लोकसभा सांसद जयप्रकाश सहारन के बेटे विकास सहारन को मौका दिया गया है। जबकि महम से बलराम दांगी को मौका मिला है। बलराम उन्हीं पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता आनंद सिंह दांगी के बेटे हैं, जो महम कांड में चर्चा में आए थे। इसी तरह कांग्रेस ने तोशाम से पूर्व सीएम बंसीलाल के पोते अनिरुद्ध चौधरी को उतारा है। उनका मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार श्रुति चौधरी से होना है, जो रिश्ते में उनकी चचेरी बहन हैं। श्रुति व उनकी मां किरण चौधरी लोकसभा चुनावों के बाद ही कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुई थीं। किरण फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। जबकि बंशीलाल के दामाद सोमवीर सिंह श्योराण को बाढ़डा सीट से टिकट दिया गया है।

कांग्रेस में टिकट के बाद कुछ असंतोष के सुर उठते दिखाई दे रहे हैं। अंबाला कैंट से चित्रा शर्मा ने बगावत कर दी है। वह अंबाला के उम्मीदवार निर्मल सिंह की बेटी हैं। पानीपत में भी असंतोष दिख रहा है। पानीपत शहरी सीट पर पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी ने निर्दलीय पर्चा भर दिया है तो वहीं पानीपत ग्रामीण से विजय जैन भी खम ठोंक रहे हैं। हालांकि जैन महज 25 दिन पहले ही बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए हैं। वह इस सीट से अपने लिए टिकट चाह रहे थे। वहीं तिगांव में ललित नागर का टिकट कटने से वह भी नाराज बताए जाते हैं। उनकी जगह रोहित नागर को टिकट दिया गया है। वह कांग्रेस नेता यशपाल नागर के बेटे हैं। इसी तरह से बवानीखेड़ा में विरोध के सुर उठ रहे हैं।

यही नहीं कांग्रेस ने अपना प्रचार शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां पार्टी घर-घर जाकर अपना प्रचार कर रही है, जनता को जमीन से जुड़े मुद्दे बता रही है। वहीं हरियाणा के सामाजिक जीवन खासकर गांवों में चौपाल के महत्व को देखते हुए चौपाल जत्थे का आयोजन किया जा रहा है। कांग्रेस के प्रमुख नेता जिन मुद्दों को लोगों के बीच अपने प्रचार में उठा रहे हैं, उनके बारे में बात कर रहे हैं, पार्टी ने योजना बनाई है कि वह उसे जमीनी स्तर पर ले जाएंगी। शहरों से लेकर गांव-गांव उन्हें समझाने का काम करेगी। इस काम में तेजी आएगी।

हरियाणा में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप भी बाकायदा प्रचार करेगी। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी व सोनिया गांधी तक शामिल हैं। पार्टी के एक अहम सूत्र के मुताबिक, प्रियंका गांधी तकरीनब 16-18 रैलिया करेंगी। जबकि सोनिया गांधी एक विशाल रैली करेंगी। यह रैली हरियाणा के बीचों बीच पानीपत, कुरुक्षेत्र या ऐसी किसी जगह होगी, जहां सेे पूरा राज्य कवर हो सके। इस रैली की जगह व दिन अभी फाइनल नहीं हुआ है। वहीं पार्टी के एक अहम रणनीतिकार के मुताबिक, खरगे और राहुल गांधी के प्रचार की तारीख और कार्यक्रम पर अभी मंथन चल रहा है। राहुल रैली से लेकर रोड शो तक करेंगे।

इनके अलावा, कांग्रेस की ओर से महिला पहलवान विनेश फोगाट व बजरंग पूनिया के अलावा समान सोच वाले एथलीट व पहलवान व खिलाड़ी भी प्रचार करेंगे। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई विनेश जुलेना सीट से मैदान में हैं। उनके लिए उनके साथी पहलवान बजरंग के अलावा दूसरे साथी भी आकर जुलेना में प्रचार करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, ये खिलाड़ी हरियाणा के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी होंगे। जबकि पार्टी ने विनेश व बजरंग को तमाम और सीटों पर प्रचार के लिए उतारने की योजना बनाई है। कांग्रेस समझ रही है कि महिला पहलवान उत्पीड़न मामले बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह के विरोधी रहे चेहरों के जरिए कांग्रेस जाटों खासकर खिलाड़ियों व उनके परिवार, गांवों के लोगों को एक संकेत दे सकती है। उन चेहरों के जरिए बीजेपी के खिलाफ नाराजगी को सामने लाने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस में आप के साथ बातचीत का पेंच सीटों पर भले ही उलझा हो, लेकिन कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व आप के साथ जाने के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, आप हरियाणा की 90 सीटों में से अपने लिए 18 सीटें मांग रही है, जो कांग्रेस को मंजूर नहीं। पता चला है कि आप 16 तक उतर आए हैं, जबकि ज्यादा जोर देने पर वह 12-13 पर राजी हो सकते हैं, लेकिन कांग्रेस 4-5 से ज्यादा सीटें देने के लिए तैयार नहीं। कांग्रेस के एक नेता का कहना था कि हम उनकी ऐसी मांग नहीं पूरी कर सकते। अगर हम इतनी सीटें देते हैं तो हमारे यहां बवाल हो जाएगा। सालों से जो उम्मीदवार अपने इलाके में मेहनत कर रहा है, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

क्या आयुष्मान योजना में आ गया है कोई परिवर्तन जानिए क्या है खास?

हाल ही में आयुष्मान योजना में एक खास परिवर्तन आया है! आने वाले अक्टूबर महीने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दो बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च होने वाले हैं, जिनमें टीकाकरण सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल किए जाने के लिए तैयार U-WIN पोर्टल भी है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 70 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान योजना में लाने का फैसला किया है, जिसकी भी तैयारी पूरी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दोनों प्रोजेक्ट को लॉन्च करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर मंत्रालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि बुजुर्गों के लिए आयुष्मान योजना का विस्तार करना एक बहुत बड़ा काम है, जिसे पूरा किया गया है। वहीं कोविड महामारी के खिलाफ भारत ने Co-WIN के जरिए दुनिया का सबसे सफल टीकाकरण अभियान चलाया और अब उसी तरह से बच्चों के टीकाकरण के लिए भी U-WIN भी होगा, इसके लिए सफल पायलट पूरा कर लिया गया है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ये डिजिटल इंडिया है, जिसमें हेल्थ भी पीछे नहीं है। देश में टीकाकरण सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल किया जा रहा है। यह पोर्टल गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ जन्म से लेकर 17 वर्ष की आयु तक के बच्चों के टीकाकरण और दवाओं का स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए बनाया गया है। 17 साल तक बच्चे को लगभग 11 वैक्सीन लगाई जाती है। मां को 3 वैक्सीन लगाई जाती है। बच्चे को 12 रोगों से बचाने के लिए 27 डोज लगते हैं। इन सभी को ट्रैक करने के लिए U-WIN पोर्टल बनाया गया है, यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में काम करेगा।

इसमें एक स्वचालित एसएमएस अलर्ट सिस्टम भी होगा, जैसे बच्चे को पहले महीने में दो वैक्सीन लगनी है तो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस जाएगा। इसके अलावा देश में कोई कहीं पर भी वैक्सीनेशन करवा सकेगा। सेल्फ रजिस्ट्रेशन सिस्टम की भी सुविधा है। आशा वर्कर्स तो रजिस्ट्रेशन करेंगी ही, साथ ही खुद भी रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। यूनिवर्सल क्यूआर बेस पर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मिलेगा। साढ़े पांच करोड़ को इस यूविन पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) में 70 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा लाभ देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अक्टूबर में शुरू की जाने वाली इस विस्तारित योजना से 4.5 करोड़ परिवारों के करीब छह करोड़ बुजुर्गों को लाभ मिलेगा, चाहे वे किसी भी सामाजिक-आर्थिक वर्ग से आते हों। अभी आयुष्मान भारत योजना का फायदा करीब 12.3 करोड़ परिवारों को मिल रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इस योजना में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों को नये विशिष्ट कार्ड दिए जाएंगे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने ड्रोन सेवा भी शुरू की है। AIIMS, INI, पूर्वोत्तर संस्थानों में ड्रोन सेवाएं शुरू की हैं। इसका उद्देश्य विशेष रूप से कठिन इलाकों से जोड़ना है। बहुत जल्दी सैंपल को पहुंचाने, मेडिकल सप्लाई पहुंचाने व रिपोर्ट लाने में ये ड्रोन कामयाब है। एम्स को जोड़ा गया है। इसका रेंज 25 किमी के दायरे में होगा। इंस्टिट्यूट के 25 किमी के रेंज में होगा। ट्रायल व ट्रेनिंग कंपलीट हो गए हैं। इसका AIIMS बीवीनगर, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, भोपाल, जोधपुर, पटना, बिालसपुर, रायबरेली, रायपुर, गोरखपुर, पुडुचेरी और इंफाल में संचालन किया जा रहा है।

इसी प्रकार भीष्म क्यूब भी लाया गया है जो आपदा प्रबंधन में आपातकालीन जीवन रक्षक क्लिनिक देखभाल के लिए है। यह भीष्म क्यूब प्रति दिन 10-15 सर्जरी कर सकता है। जब प्रधानमंत्री यूक्रेन गए थे, तब उन्होंने उन्हें 4 भीष्म क्यूब दिए थे। अब इसे देश के 50 हेल्थ इंस्टिट्यूशन में तैनात किया गया है, यह आपदा प्रबंधन के लिए है। 200 इमरजेंसी केसों को हैंडल किया जा सकता है।बता दें कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) में 70 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा लाभ देने की तैयारी शुरू हो गई है। एक दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया और अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस फैसले को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा का कहना है कि एक हफ्ते के अंदर पायलट रन शुरू हो जाएगा और इस योजना के दायरे में आने वाले 70 वर्ष के बुजुर्गों को स्पेशल कार्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 4.5 करोड़ परिवारों के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना से फायदा होगा। नैशनल हेल्थ अथॉरिटी के ऑनलाइन पोर्टल या फिर आयुष्मान ऐप के जरिए आवेदन कर ऑनलाइन कार्ड जनरेट किया जा सकेगा।

मंत्रालय इसके लिए बड़े स्तर पर कैंपेन भी चलाएगा। अस्पतालों में भी हेल्प डेस्क होंगे और बुजुर्गों के स्पेशल कार्ड बनवाने में मदद की जाएगी। हेल्थ वर्कर्स भी फील्ड में जाकर बुजुर्गों की मदद करेंगे। ओल्ड एज होम में भी कैंप होगा। कम्यूनिटी लेवल पर अभियान चलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस स्कीम का फायदा मिले। अभी तीन राज्यों में यह स्कीम लागू नहीं है। दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिसा में यह स्कीम लागू नहीं है। हालांकि ओडिसा सरकार ने आयुष्मान स्कीम को लेकर मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। बहुत जल्द ही ओडिशा के लोगों को भी इस स्कीम का फायदा मिलने लगेगा। इस स्कीम में 60 पर्सेंट शेयर केंद्र सरकार का और 40 पर्सेंट राज्य सरकार का होता है। वहीं राज्य सरकार चाहे तो अपनी ओर से भी लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा कर सकती है।

ओलिंपिक में फेल हुईं सिंधु ने फिर बदला अपना कोच, दो बार की मेडलिस्ट को कौन देगा ट्रेनिंग?

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सफलता की राह पर वापस लौटने के लिए बेताब सिंधु ने कोच बदलने के बाद एक विदेशी को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया
सिंधु फिनलैंड ओपन और डेनमार्क ओपन में हिस्सा लेंगी। उनका लक्ष्य इन दोनों प्रतियोगिताओं में अच्छे नतीजे हासिल करना है. दो बार के ओलंपिक पदक विजेता ने कोचिंग स्टाफ बदलने का फैसला किया।

पीवी सिंधु को कई दिनों से सफलता नहीं मिल रही है. पिछले पेरिस ओलिंपिक में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके थे. सफलता की राह पर वापस लौटने के लिए सिंधु ने कोच बदल दिए हैं। इस बार उन्होंने अपनी कोचिंग टीम में एक विदेशी को शामिल किया.

सिंधु अगले महीने फिनलैंड ओपन और डेनमार्क ओपन में हिस्सा लेंगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं का इंतजार कर रहा हूं।’ दो बार के ओलंपिक पदक विजेता ने कोचिंग स्टाफ के साथ कई दिनों की समस्याओं के बाद बदलाव करने का फैसला किया। सिंधु ने अगले दिसंबर तक अनूप श्रीधर को अपना अंतरिम कोच नियुक्त किया है. इस बार पूर्व विश्व नंबर एक ली ह्यून इल को सलाहकार नियुक्त किया गया।

सिंधु को उम्मीद है कि आशा, श्रीधर और ली की जोड़ी उन्हें अपेक्षित सफलता दिला सकती है। उन्होंने कहा, ”यह बहुत अच्छा है कि श्रीधर और ली इस कठिन समय में मेरी टीम में शामिल होने के लिए सहमत हुए.” दूसरी ओर, ली ने कहा, ”सिंधु के साथ काम करना एक आसान निर्णय था. हमने पहले भी साथ काम किया है. अगर मैं उसके विकास में योगदान दे सकूं तो मुझे खुशी होगी।” दक्षिण कोरिया के ली अगले दिसंबर तक सिंधु के साथ काम करेंगे। पूर्व दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी से सिंधु की जान-पहचान नई नहीं है. वे अतीत में बैडमिंटन प्रीमियर लीग में टीम के साथी के रूप में खेल चुके हैं। ली ने 2006 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा, वह 2002 और 2014 एशियाई खेलों में दक्षिण कोरिया की स्वर्ण विजेता टीम के सदस्यों में से एक थे।

ओलंपिक में लगातार दो बार पदक हासिल करने के बावजूद पीवी सिंधु को पेरिस से खाली हाथ लौटना पड़ा. उन्होंने अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद में कोच बदला। अनूप इस बार से श्रीधर से ट्रेनिंग लेंगे। फिलहाल वह दो प्रतियोगिताओं में ट्रायल के तौर पर प्रशिक्षण लेंगे।

सिंधु अगले एशियाई खेलों में पदक चाहती हैं. यदि संभव हुआ तो एक और ओलंपिक खेलना चाहूंगा। उनके पिता पीवी रमन्ना ने कहा, इसलिए वह जल्दी से अभ्यास पर लौट आए। उन्होंने कहा, ”सिंधु ने हैदराबाद के गाचीबाओली स्टेडियम में अभ्यास शुरू कर दिया है. वह सीज़न की शुरुआत आर्कटिक ओपन (8-13 अक्टूबर) से करेंगे। सिंधु अब बेंगलुरु में प्रैक्टिस नहीं करना चाहतीं. रमना ने कहा, ”अभी तक कोई शिविर शुरू नहीं हुआ है. इसलिए सिंधु ने हैदराबाद में ही प्रैक्टिस शुरू कर दी।’ पूर्व ओलंपियन अनूप ने थोड़े समय के लिए लक्ष्य सेन को कोचिंग दी। वह इस बार सिंधु से जुड़ने जा रहे हैं. आर्कटिक ओपन के अलावा वह सिंधु के साथ डेनमार्क ओपन (15-20 अक्टूबर) में भी जाएंगी।

रमाना ने कहा, ”वर्तमान कोच ऑगस्ट का अनुबंध कुछ दिनों में समाप्त हो रहा है। इसलिए हम एक नये कोच की तलाश कर रहे थे। देखते हैं कि अनुप के साथ उनकी जोड़ी कितनी सफल होती है। यदि नहीं, तो हमारे पास 4-5 और नाम हैं।” सुनने में आया है कि सिंधु एक बार फिर कोरिया की पार्क ताए सुंग के साथ जोड़ी बना सकती हैं. रमाना का दावा है, ”ऐसा नहीं है कि उनकी जोड़ी लड़-झगड़कर अलग हुई है. नतीजों की कमी के कारण वे एक-दूसरे से दूर चले गए।”

शादी की पहली सालगिरह पर पति राघव से अलग होने के बाद परिणीति को क्या है अफसोस?

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शादी की सालगिरह एक साथ मनाना, फिर अलग होना। तो क्या शादी की सालगिरह के पोस्ट पर हीरोइन की आवाज में कोई अफसोस उतरा? राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की शादी सितंबर 2023 में इसी समय हुई थी। पिछले जुलाई में भ्रम फैल गया था. लेकिन इस बार परिणीति चोपड़ा तोड़ने वाली हैं घर? ये सवाल उनके सोशल मीडिया पोस्ट को देखने के बाद उठा. अगस्त के पहले हफ्ते में फैन्स को इसका जवाब मिल गया। 7 अगस्त को परिणीति ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उनके पति इस वक्त उनसे दूरी पर हैं। शादी की सालगिरह एक साथ मनाना, फिर अलग होना। तो शादी की सालगिरह की पोस्ट में हीरोइन की आवाज अफसोस से भरी थी.

परिणीति इस वक्त मुंबई में हैं। लन्दन में लम्बा समय बिताया। राघव भारत में थे. संसद सत्र चल रहा था. आप सांसद राघवजी वहां व्यस्त हैं. इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री बदल गये हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जेल से रिहाई, कई और घटनाएं. राघव उस समय दिल्ली में थे। इस बीच हरियाणा का चुनाव प्रचार भी किया जा रहा है. माना जा रहा है कि राघव अपनी पत्नी को खास वक्त नहीं दे पा रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मालदीव में कुछ दिन अकेले बिताए। राघव-परिणीति ने बीच पर अकेले रह रहे दोनों की वह तस्वीर भी दी।

लेकिन एक्ट्रेस को इस बात का मलाल है कि वह अपने पति से ज्यादा बार नहीं मिल पातीं और वह उनसे पहले क्यों नहीं मिलीं. अपनी पहली शादी की सालगिरह पर परिणीति ने लिखा, ”मुझे नहीं पता कि तुम्हें पाने के लिए मैंने अपनी पिछली जिंदगी में और इस जिंदगी में क्या अच्छे काम किए। शुद्ध सज्जन, मेरा नासमझ दोस्त, संवेदनशील आदमी, एक समझदार पति से शादी की। सीधा-सादा, ईमानदार आदमी, सबसे अच्छा बेटा, दामाद। देश के प्रति आपकी भक्ति और प्रतिबद्धता मुझे प्रेरित करती है।’ मुझे आप से बहुत सारा प्यार है पहले क्यों नहीं देखा? शादी की सालगिरह मुबारक हो।” हालांकि, राघव ने परिणीति को ‘पारू’ कहकर बधाई दी।

लोकसभा चुनाव के बाद ‘भारत’ के दो सहयोगी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) हरियाणा में विधानसभा चुनाव में सक्रिय हो गए हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट है कि एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल और आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सीट रैफलिंग को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को दो बैठकें कीं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव समिति की बैठक में सीधे सीटों के समझौते का प्रस्ताव रखा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी की ओर से मंगलवार को एक सकारात्मक संदेश आया. उसके बाद ये मुलाकात.

प्रकाशित खबर के मुताबिक, AAP ने हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 10 सीटें मांगी हैं. कांग्रेस 7 छोड़ने को राजी हो गई. एआईसीसी के एक सूत्र ने बताया कि चुनाव समिति की बैठक में राहुल ने कांग्रेस नेताओं से सीधे पूछा कि क्या वोट शेयरिंग से बचने के लिए ‘भारत’ की सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों से समझौता करना संभव है. उस समय हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा था कि अगर आप जितनी सीटें चाहती है, कांग्रेस को उतनी सीटें नहीं मिलेंगी। लेकिन इसके बाद राहुल ने सीधे तौर पर कहा कि इस मामले में एकमात्र लक्ष्य बीजेपी को हराना होना चाहिए.

राहुल ने मंगलवार को एआईसीसी के नवनियुक्त पदाधिकारियों की बैठक में पद्मा खेमे के खिलाफ विपक्षी एकता का भी आह्वान किया. उस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे. वहीं, राहुल के रुख का स्वागत करते हुए आप सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को कहा, ”हमारा मुख्य उद्देश्य भी बीजेपी को हराना है.” हरियाणा के दो प्रभारी नेता संदीप पाठक और सुशील गुप्ता हमारी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से बात करेंगे और अगला कदम उठाएंगे. आप नेता और दिल्ली की मंत्री आतिशी ने मंगलवार रात कहा, ”अभी भी हमारे नेता ने इस संबंध में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है.”

इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी शासित हरियाणा में कांग्रेस और आप के बीच समझौता हो गया था. उस राज्य की 10 सीटों में से राहुल गांधी-मल्लिकार्जुन खड़ग की टीम ने नौ सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि केजरी को एक सीट मिली। ‘हाथ’ चिन्ह पहनने वाले उम्मीदवारों ने उनमें से पांच जीते। बाकी पांच ‘पद्म’ को मिले। 2019 में बीजेपी ने सभी 10 सीटें जीतीं. हालांकि, पिछले जुलाई में एआईसीसी प्रवक्ता जयराम रमेश ने विधानसभा चुनाव में आप के साथ समझौते की संभावना को खारिज कर दिया था। केजरी की पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में ‘एकला चलो’ का संदेश भी दिया. हालांकि, एआईसीसी महासचिव दीपक बाबरिया ने उम्मीदवार चयन के प्रभारी ‘स्क्रीनिंग कमेटी’ की बैठक के बाद कहा, ”सीट समझौते को लेकर आप के साथ चर्चा चल रही है.”

नाश्ते में ब्रेड, रोल या ब्रेड नहीं बल्कि ओट्स खाएं! आप जानते हैं क्यों?

काफी देर तक पेट भरा रहेगा. लेकिन इससे वजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लगभग हर कोई ऐसे ही खाने की तलाश में रहता है। ऐसा ही एक पौष्टिक आहार है ओट्स। चावल और रोटी के अलावा कई लोग ओट की खिचड़ी-पोला भी खाते हैं, कुछ लोग जई के आटे की रोटी भी बनाते हैं. लेकिन क्या सच में दिन-रात ओट्स खाने से शरीर को फायदा होता है?

नियमित रूप से ओट्स खाने के क्या फायदे हैं?

1) ओट्स में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। नियमित रूप से फाइबर खाने से आंतें स्वस्थ रहती हैं। पाचन संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करता है। कब्ज ठीक करता है. साथ ही आंत में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करता है।

2) ओट्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें फाइबर भी होता है. इसलिए जिन लोगों को मधुमेह है वे सुरक्षित रूप से ओट्स खा सकते हैं।

3) ओट्स में फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण यह भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। ओट्स बार-बार लगने वाली भूख को रोक सकता है।

ओट्स किसे नहीं खाना चाहिए?

जिन लोगों को ग्लूटेन जैसे खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, उन्हें बहुत अधिक ओट्स नहीं खाना चाहिए। ओट्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा फाइबर खाने से पेट खराब हो सकता है. कृत्रिम रूप से सुगंधित और स्वादिष्ट जई में चीनी होती है। तो सावधान रहो।

भरवां भोजन का भार फ्रीज करें। मछली से मांस, फल से सब्जियाँ। लेकिन, गंध को झेलने के लिए रेफ्रिजरेटर का दरवाज़ा खोलें! इससे क्या गलती होती है? इसका समाधान कैसे होगा?

साफ-सफाई का अभाव

सामान खरीदकर फ्रिज में भरना। जब सफ़ाई का समय हो, सिर पर हाथ! ऐसे में सफाई अभियान चलाना कैसे संभव होगा? आज नहीं तो कल, दिन बीत रहा है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो फ्रिज से बदबू आना बहुत सामान्य बात है। लंबे समय तक गंदे रेफ्रिजरेटर में भी रोगाणु जमा हो सकते हैं।

भोजन का परीक्षण किया

कुछ खोजते समय, आपको एक सप्ताह पुराना पका हुआ चिकन का टुकड़ा मिल सकता है। बार फ्रिज के कोने से सड़ी हुई हरी मिर्च है। अगर आप इस बात पर ध्यान नहीं देंगे कि आप कहां और कौन सी चीजें रखते हैं तो ऐसी सड़ी-गली, बासी चीजें बरामद हो जाएंगी। और परिणामस्वरूप, जब आप फ्रिज खोलते हैं तो उसमें से बदबू आने लगती है।

भरवां भोजन का भार फ्रीज करें। मछली से मांस, फल से सब्जियाँ। लेकिन, बदबू सहने के लिए रेफ्रिजरेटर का दरवाज़ा खोलें! इससे क्या गलती होती है? इसका समाधान कैसे होगा?

साफ-सफाई का अभाव

सामान खरीदकर फ्रिज में भरना। जब सफ़ाई का समय हो, सिर पर हाथ! ऐसे में सफाई अभियान चलाना कैसे संभव होगा? आज नहीं कल, दिन बीत रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो फ्रिज से बदबू आना बहुत सामान्य बात है। लंबे समय तक गंदे रेफ्रिजरेटर में भी रोगाणु जमा हो सकते हैं।

भोजन का परीक्षण किया

कुछ खोजते समय, आपको एक सप्ताह पुराना पका हुआ चिकन का टुकड़ा मिल सकता है। बार फ्रिज के कोने से सड़ी हुई हरी मिर्च है। अगर आप इस बात पर ध्यान नहीं देंगे कि आप कहां और कौन सी चीजें रखते हैं तो ऐसी सड़ी-गली, बासी चीजें बरामद हो जाएंगी। और परिणामस्वरूप, जब आप फ्रिज खोलते हैं तो उसमें से बदबू आने लगती है।

 

अगर आप तेजी से वजन कम करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी डाइट में बदलाव करना होगा। वजन कम करने की उम्मीद करते समय ओट्स कई खाद्य विकल्पों में सबसे ऊपर है। क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर और विभिन्न खनिज मौजूद होते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ओट्स में बिल्कुल भी कैलोरी नहीं होती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग बिना नाश्ता किए ही काम पर निकल जाते हैं। यह प्रथा बिल्कुल भी अच्छी नहीं है. इससे शरीर में हजारों बीमारियां घर कर सकती हैं। इतना ही नहीं वजन भी काफी बढ़ सकता है. ऐसे में भी ओट्स के जरिए आना मुश्किल हो सकता है. ओट्स को रात भर भिगोया जा सकता है. सुबह पांच मिनट में पौष्टिक नाश्ता तैयार हो जायेगा. समय भी बचेगा और पेट भी लंबे समय तक भरा रहेगा. और क्या लाभ?

1) आप नाश्ते में क्या खाते हैं, इसके आधार पर रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। ओट्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसके अलावा, ओट्स में आसानी से पचने योग्य फाइबर होता है। ये सभी सामग्रियां मधुमेह रोगियों के लिए अच्छी हैं।

2) ओट्स में आसानी से पचने वाला फाइबर रक्त में ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट हृदय को समग्र रूप से स्वस्थ रखते हैं। ओट्स उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी उपयोगी है।

3) ओट्स को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों द्वारा भी सराहा जाता है क्योंकि इसमें कैलोरी और ‘कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स’ कम होते हैं। फाइबर से भरपूर इस फूड को खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. जो अप्रत्यक्ष रूप से वजन नियंत्रण में मदद करता है।

आखिर क्या है पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे की खास बातें?

आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा आखिर क्यों खास है! प्रधानमंत्री 21 सितंबर से अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री विलमिंगटन, डेलावेयर में चौथे क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसकी मेजबानी संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन करेंगे। मोदी के अमेरिकी दौरे पर आज भारत के विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि यह राष्ट्रपति बाइडन और जापान के प्रधानमंत्री किशिदा के लिए यह एक तरह का विदाई कार्यक्रम जैसा होगा। बता दें कि इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी की स्पीच होगी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच एक सार्थक जुड़ाव का अवसर होगा जहां उन्हें भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने का अवसर मिलेगा। इस वर्ष क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के अमेरिकी पक्ष के अनुरोध के बाद, भारत ने 2025 में अगला क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने पर सहमति दी है।

भारतीय विदेश सचिव दीपक मिसरी ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि पीएम मोदी अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि विभिन्न बैठकें (द्विपक्षीय, अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में उन लोगों के साथ) अभी भी काम किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि क्वाड शिखर सम्मेलन में, नेता पिछले एक वर्ष में क्वाड द्वारा प्राप्त प्रगति की समीक्षा करेंगे और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को उनके विकास लक्ष्यों और आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता करने के लिए आने वाले वर्ष का एजेंडा तैयार करेंगे। 23 सितंबर को, प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘भविष्य का शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे। शिखर सम्मेलन का विषय ‘एक बेहतर कल के लिए बहुपक्षीय समाधान’ है। शिखर सम्मेलन में बड़ी संख्या में वैश्विक नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है। शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

न्यूयॉर्क में रहते हुए, प्रधानमंत्री 22 सितंबर को भारतीय समुदाय के एक समूह को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री अमेरिका स्थित प्रमुख कंपनियों के सीईओ के साथ बातचीत भी करेंगे ताकि एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और जैव प्रौद्योगिकी के अत्याधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अधिक सहयोग बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री के विचारकों और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय परिदृश्य में सक्रिय अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करने की भी उम्मीद है।

बता दे कि अमेरिका में पीएम मोदी विल्मिंगटन, डेलावेयर में क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान क्वाड के नेताओं – ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़, जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। यह तीन दिवसीय यात्रा का पहला कार्यक्रम होगा। मोदी ने कहा कि मैं क्वाड शिखर सम्मेलन में अपने सहयोगियों राष्ट्रपति बाइडन, प्रधानमंत्री अल्बनीज और प्रधानमंत्री किशिदा के साथ शामिल होने के लिए उत्सुक हूं। यह मंच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए काम करने वाले समान विचारधारा वाले देशों के एक प्रमुख समूह के रूप में उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति बाइडन के साथ मेरी बैठक से हमें अपने लोगों के लाभ और वैश्विक भलाई के लिए भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए नए मार्गों की समीक्षा करने और पहचान करने में मदद मिलेगी।

क्वाड नेता अपने शिखर सम्मेलन के दौरान कैंसर रोकथाम, पता लगाने और उपचार के लिए एक विशेष अभियान, जिसे कैंसर मूनशॉट कहा जाता है, लॉन्च करेंगे। उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे समूह के प्रमुख क्षेत्रों जैसे समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा, आपदा राहत और आतंकवाद का मुकाबला करने में काम को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएंगे। मोदी 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के भविष्य के शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

मोदी ने कहा कि भविष्य का शिखर सम्मेलन वैश्विक समुदाय के लिए मानवता की बेहतरी के लिए आगे की राह तैयार करने का एक अवसर है। मैं मानवता के छठे हिस्से के विचारों को साझा करूंगा क्योंकि शांतिपूर्ण और सुरक्षित भविष्य में उनकी हिस्सेदारी दुनिया में सबसे अधिक है। मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। मोदी ने यह भी कहा कि वह भारतीय प्रवासियों और महत्वपूर्ण अमेरिकी व्यापारिक नेताओं के साथ जुड़ने के लिए उत्सुक हैं। ये लोग प्रमुख हितधारक हैं और दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के बीच अनूठी साझेदारी को जीवंतता प्रदान करते हैं। वह 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में आयोजित होने वाले एक सामुदायिक कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करेंगे।

एक देश एक चुनाव के लिए क्या सरकार के पास है पूरा बहुमत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि एक देश एक चुनाव के लिए क्या सरकार के पास पूरा बहुमत है या नहीं! एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव है। यह प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इसको शिगूफा बता रही है। अन्य विपक्षी दल भी मोदी सरकार की इस पहल को व्यवहारिक नहीं बता रहे हैं। हर किसी के मन में सवाल आ रहा है कि क्या ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करना मोदी सरकार के लिए आसान होगा? आइए जानते हैं इस प्रस्ताव के बीच कौन-कौन सी बड़ी अड़चन आ सकती है। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए, सरकार ने यह कदम उठाया है। इस साल की शुरुआत में कोविंद समिति से 47 राजनीतिक दलों ने एक साथ चुनाव कराने के बारे में अपनी राय साझा की थी। इनमें से 32 दलों ने इस विचार का समर्थन किया, जबकि 15 ने इसका विरोध किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, NDA की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी ने सैद्धांतिक रूप से इसका समर्थन किया है। समिति के समक्ष इस कदम का समर्थन करने वाले सभी 32 दल या तो BJP के सहयोगी थे या फिर पार्टी के प्रति मित्रवत थे। हालांकि, BJD ने BJP का साथ छोड़ दिया है। समिति के समक्ष इस कदम का विरोध करने वाले 15 दलों में से 5 NDA के बाहर के दल हैं, जिनमें कांग्रेस भी शामिल है।

कोविंद समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए कुछ जरूरी बदलाव बताए हैं। समिति का कहना है कि संविधान में संशोधन करना होगा, जिसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इसके साथ ही, सभी वोटरों की एक लिस्ट बनाने के लिए अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं से भी सहमति लेनी होगी। संविधान में संशोधन करने के तरीके के बारे में अनुच्छेद 368 (2) में लिखा है, ‘इस संविधान का संशोधन, केवल संसद के किसी भी सदन में, उस उद्देश्य के लिए विधेयक पेश करके ही प्रारंभ किया जा सकता है और जब विधेयक प्रत्येक सदन द्वारा उस सदन के कुल सदस्य संख्या के बहुमत से और उस सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत से पारित हो जाता है, तो वह राष्ट्रपति के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा जो विधेयक पर अपनी अनुमति देगा और तदनुसार विधेयक के उपबंधों के अनुसार संविधान संशोधित हो जाएगा।’

लोकसभा में किसी भी संवैधानिक संशोधन को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। यानी उपस्थित और वोटिंग करने वाले दो तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है। अगर सभी 543 सांसद मौजूद हों तो 362 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के पास 234 सांसद हैं। संविधान संशोधन के लिए साधारण बहुमत के साथ-साथ विशेष बहुमत भी जरूरी है। इसका मतलब है कि संशोधन पास कराने के लिए सत्ता पक्ष को विपक्ष का भी समर्थन चाहिए होगा। उधर एनडीए के पास राज्यसभा में 113 सांसद हैं और 6 मनोनीत सदस्य उनका साथ देते हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन के पास 85 सांसद हैं। अगर सभी सांसद वोट देने आए तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोट चाहिए होंगे। कुछ संवैधानिक बदलावों के लिए राज्य विधानसभाओं की मंजूरी भी जरूरी होती है। अगर राज्यसभा में पूरे सदस्य उपस्थित रहें, तो कुल संख्या 164 होगी।

पूरे देश में एक साथ चुनाव कराना आसान नहीं है। इस साल मई-जून में लोकसभा चुनाव हुए थे, जबकि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी संसदीय चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव हुए थे। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जबकि महाराष्ट्र और झारखंड में भी इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। दिल्ली और बिहार उन राज्यों में शामिल हैं, जहां 2025 में चुनाव होने हैं। असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में वर्तमान विधानसभाओं का कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा। जबकि गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में समाप्त होगा। हिमाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और तेलंगाना में राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 2028 में समाप्त होगा। वर्तमान लोकसभा और इस वर्ष चुनाव में गए राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 में समाप्त होगा।

एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल की सफलता संसद में दो संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने पर निर्भर करती है, जिसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के व्यापक समर्थन की आवश्यकता होगी। चूंकि लोकसभा में बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है, इसलिए उसे न केवल अपने NDA सहयोगियों बल्कि विपक्षी दलों को भी साथ लाना होगा। NDA की प्रमुख घटक जनता दल (यूनाइटेड) ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के कदम से देश बार-बार होने वाले चुनावों से मुक्त होगा, सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और नीतिगत निरंतरता आएगी। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के दूरगामी परिणाम होंगे और इससे देश को व्यापक लाभ होगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि एक साथ चुनाव व्यावहारिक नहीं हैं और आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव नजदीक आने पर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बातें करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, आवश्यक सहमति बनाने का एक तरीका संशोधन विधेयकों को एक संसदीय समिति, जैसे कि स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति को भेजना है। इन समितियों में विपक्षी सदस्य शामिल होते हैं और वहां चर्चा से आम सहमति बन सकती है। केंद्र को राज्यों को भी शामिल करना होगा। स्थानीय निकायों को एक साथ चुनाव योजना का हिस्सा बनाने के लिए, कम से कम आधे राज्यों को आवश्यक संवैधानिक संशोधन का अनुमोदन करना होगा। हालांकि बीजेपी वर्तमान में एक दर्जन से अधिक राज्यों में शासन करती है, लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव राजनीतिक संतुलन को बदल सकते हैं।

भारत में पूर्व में 1951 और 1967 के बीच एक साथ चुनाव होते रहे हैं। 1967 में यह सिलसिला चरम पर था, जब 20 राज्यों में लोकसभा चुनावों के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी हुए थे। 1977 में यह संख्या घटकर 17 रह गई, जबकि 1980 और 1985 में 14 राज्यों में एक साथ चुनाव हुए थे। इसके बाद, मध्यावधि चुनाव सहित कई कारणों से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे।

एक देश और एक चुनाव के लिए सरकार ने क्या बनाया है प्लान?

आज हम आपको बताएंगे कि एक देश और एक चुनाव के लिए सरकार ने प्लान क्या बनाया है! केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर रामनाथ कोविंद पैनल की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। इसका मकसद लोकसभा के साथ सभी राज्यों के विधानसभा और स्थानीय निकायों का चुनाव कराना है। लेकिन ये इतना भी आसान नहीं है। इसे लागू करने के लिए सरकार को एक नहीं, बल्कि दो-दो संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराना होगा जिसके तहत संविधान में कई बदलाव करने पड़ेंगे। खैर, कोविंद कमिटी की रिपोर्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब आगे क्या? ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करने के लिए सरकार का आखिर प्लान क्या है? कैसे लागू होगा? आइए एक-एक बात समझते हैं। कोविंद पैनल की सिफारिशों को आगे बढ़ाने के लिए एक क्रियान्वयन समूह का गठन किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद बताया कि यह समूह रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों को लागू करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक साथ चुनाव दो चरणों में लागू किए जाएंगे: पहला लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए और दूसरा आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों के लिए।

सबसे पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। इसके बाद दूसरे चरण में पंचायतों और नगर पालिकाओं के स्थानीय निकाय चुनाव आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर कराए जाएंगे। सभी चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची होगी। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) राज्य चुनाव अधिकारियों की सलाह से मतदाता पहचान पत्र तैयार करेगा। केंद्र पूरे देश में इस बारे में विस्तृत चर्चा शुरू करेगा। पैनल की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक क्रियान्वयन समूह का गठन किया जाएगा। वैष्णव ने कहा कि बड़ी संख्या में पार्टियों ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का समर्थन किया है और केंद्र अगले कुछ महीनों में इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोविंद पैनल की सिफारिशों पर पूरे भारत में तमाम मंचों पर चर्चा की जाएगी।

कोविंद पैनल के मुताबिक जब संसद का सत्र होगा, तो इस कदम को अधिसूचित करने के लिए एक तारीख तय की जानी चाहिए। ⁠उस नियत तिथि के बाद होने वाले राज्य चुनावों से बनने वाली सभी विधानसभाएं केवल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक की अवधि के लिए ही होंगी। इसका मतलब है कि बदलाव के लिए लोकसभा चुनाव के बाद एक तारीख तय की जाएगी। उस तारीख के बाद जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनका कार्यकाल आम चुनावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए कम कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि 2024 और 2028 के बीच बनने वाली राज्य सरकारों का कार्यकाल 2029 के लोकसभा चुनावों तक ही होगा। उसके बाद लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अपने आप एक साथ होंगे।

⁠मिसाल के तौर पर, एक राज्य जहां 2025 में चुनाव होना है, उसके पास चार साल के कार्यकाल वाली सरकार होगी जबकि 2027 में चुनाव कराने वाले राज्य में 2029 तक केवल दो साल के लिए सरकार होगी। जैसे बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं तो ‘ONOE’ लागू करने के लिए उसकी विधानसभा का कार्यकाल 2029 तक रहेगा यानी सिर्फ 4 साल का। इसी तरह 2027 में यूपी विधानसभा के चुनाव होने हैं तो उसके बाद बनने वाली सरकार सिर्फ 2 साल रहेगी। ऐसे ही अन्य राज्यों के मामले में भी होगा। फिर 2029 में लोकसभा के साथ-साथ सभी राज्यों के विधानसभा का चुनाव भी मुमकिन हो सकेगा।

इस तरह बनी नई सरकार का कार्यकाल भी लोकसभा के पिछले पूर्ण कार्यकाल की शेष अवधि के लिए ही होगा और इस अवधि की समाप्ति सदन के विघटन के रूप में काम करेगी। इसे अभी जो उपचुनाव की प्रक्रिया होती है, उससे और बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। किसी लोकसभा, विधानसभा या राज्यसभा की सीट के रिक्त हो जाने की स्थिति में उपचुनाव कराए जाते हैं। लेकिन उपचुनाव में जीतकर आए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल लोकसभा या विधानसभा के बाकी बचे कार्यकाल जितना ही होता है। राज्यसभा की स्थिति में भी 6 साल का कार्यकाल पूरा होने में जितना समय बचा होता है, उतने समय के लिए ही उपचुनाव से जीते सांसद का कार्यकाल रहता है। बिल्कुल इसी तरह त्रिशंकु संसद या त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में चुनाव तो होंगे लेकिन जो सरकार बनेगी वह अगले आम चुनाव तक ही रहेगी। यानी अगर 2 साल बाद ही मध्यावधि चुनाव की नौबत आ जाए तो अगली सरकार का अधिकतम कार्यकाल सिर्फ 3 साल होगा, न कि 5 साल।

दो संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के बाद, संसद अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन प्रक्रियाओं का पालन करेगी। चूंकि केवल संसद को ही लोकसभा और विधानसभा से संबंधित चुनाव कानूनों को बनाने का अधिकार है, इसलिए पहले संशोधन विधेयक को राज्यों से समर्थन की जरूरत नहीं होगी। लेकिन, स्थानीय निकायों में चुनाव से जुड़े मामले राज्य के अधीन हैं और इसके लिए दूसरे संशोधन विधेयक को देश के कम से कम आधे राज्यों द्वारा अनुमोदित किया जाना जरूरी होगा।

दूसरे संविधान संशोधन विधेयक को राज्यों से मंजूरी के बाद, और दोनों सदनों में निर्धारित बहुमत से पारित होने के बाद, विधेयक राष्ट्रपति की सहमति के लिए जाएंगे। एक बार जब वह विधेयकों पर हस्ताक्षर कर देती हैं, तो वे कानून बन जाएंगे। इसके बाद, कार्यान्वयन समूह इन अधिनियमों के प्रावधानों के आधार पर इन बदलावों को अंजाम देगा। एकल मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र के संबंध में प्रस्तावित कुछ बदलावों के लिए कम से कम आधे राज्यों से मंजूरी की जरूरत होगी। संविधान के अनुच्छेद 325 में एक नया उप-खंड सुझाएगा कि एक निर्वाचन क्षेत्र में सभी मतदान के लिए एक ही मतदाता सूची होनी चाहिए।

क्या पेजर बम जैसे आधुनिक हथियारों से बचना संभव हो पाएगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पेजर बम जैसे आधुनिक हथियारों से भविष्य में बचना संभव हो पाएगा या नहीं! लेबनान में हिजबुल्लाह के सदस्य मंगलवार तब चौंक गए जब उनके पेजर में विस्फोट हो गया। किसी की जेब में तो किसी के हाथ में ही पेजर विस्फोट हो गया। इस पेजर ब्लास्ट में 11 लोग मारे गए और हजारों घायल हैं। हिजबुल्लाह ने इसके पीछे इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। बताया जा रहा है कि ये पेजर मूल रूप से हिजबुल्लाह के कम्युनिकेशन के लिए थे,लेकिन इजरायली एजेंसी ने इनको विस्फोटक में बदल दिया। हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना के पीछे इजराइल का हाथ है। हिजबुल्लाह के सदस्यों के पास जो नए पेजर थे, उनमें लिथियम बैटरी थी जो फट गई। लिथियम बैटरी जब अधिक गर्म होती है तो धुआं छोड़ती है, पिघलती है और यहां तक कि उसमें आग भी लग जाती है। हिजबुल्लाह के सदस्य पेजर का इस्तेमाल खास नजर से बचने के लिए कर रहे थे। भारत में 90 के दशक में पेजर का इस्तेमाल होता था लेकिन कुछ ही साल बाद यह पूरी तरह चलन से बाहर हो गया। अब सवाल यह भी है कि क्या ऐसे हमलों से बचा जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इन पेजर को इस साल अप्रैल-मई के महीने में ताइवान से लेबनान भेजा गया था। ऐसे में इस बात की पूरी गुंजाइश है कि इसकी तैयारी कई महीने पहले ही कर ली गई थी। जिन पेजर में विस्फोट हुआ उनमें 3 ग्राम के करीब विस्फोटक लगा हुआ था। इसे पेजर में लगी बैटरी के बगल में विस्फोटक लगाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर के वक्त इन पेजर्स पर एक संदेश आया और इस मैसेज ने पेजर में लगे विस्फोटक को एक्टिवेट कर दिया।

हिजबुल्लाह के सदस्यों को आपसी बातचीत के लिए मोबाइल फोन की जगह पेजर का इस्तेमाल करने को कहा गया था। मोबाइल से दूर रहने को कहा गया था और यह आशंका जाहिर की गई थी कि ऐसा करते हैं तो इजरायल उन्हें आसानी से निशाना बना सकता है। पेजर छोटा कम्युनिकेशन डिवाइस होता है जिनका इस्तेमाल मोबाइल फोन के आने से पहले एक दूसरे को मैसेज भेजने के लिए किया जाता था। आसान शब्दों में इसे समझें तो एसएमएस भेजने का एक उपकरण। पेजर पर कोई मैसेज आता है तो लाइट ब्लिंक होती है जिसके बाद यूजर को नए मैसेज के बारे में पता चलता है।

पेजर के अंदर एक छोटा विस्फोटक लगाकर दूर से ही एक्टिवेट किया गया। यह एक्टिवेशन किसी रेडियो सिग्नल के जरिए भी किया जा सकता है। एक बार जब विस्फोटक को एक्टिवेट किया जाता है तो यह एक शक्तिशाली विस्फोट पैदा करता है जो पेजर और आसपास की चीजों को नष्ट कर देता है। पेजर बम के इस्तेमाल के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले इसका इस्तेमाल टारगेट किलिंग के लिए किया जा सकता है। यह एक बेहद खतरनाक तरीका है क्योंकि जिसे टारगेट किया गया उसे पता भी नहीं चल पाता कि उसे मारा कैसे गया। दूसरे, इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विध्वंस के लिए भी किया जा सकता है। कई पेजर बमों को एक साथ रखकर किसी बिल्डिंग को भी उड़ाया जा सकता है।

पेजर विस्फोट या इस प्रकार के ब्लासट से जुड़े कई खतरे हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसका पता लगाना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि यह एक छोटे से डिवाइस के अंदर छिपा होता है, इसलिए इसे पहचान पाना लगभग नामुमकिन है। दूसरा खतरा यह है कि इसे अनजाने में एक्टिवेट किया जा सकता है। अगर किसी को यह पता न चले कि पेजर में विस्फोटक लगा है, तो वह इसे अनजाने में एक्टिवेट कर सकता है, जिससे एक विस्फोट हो सकता है। मेटल डिटेक्टर में आसानी से पकड़ में नहीं आता। लेबनान में इन हमलों की खबरों के बाद इस तरह के हमलों की आशंका बढ़ गई है।

बता दे कि लेबनान में हुए हमलों का आरोप इजरायल पर है। ये अटैक उस ओर इशारा करते हैं कि एआई के दौर में यह और कितना खतरनाक हो सकता है। ऐसे अटैक हो सकते हैं जिनकी कल्पना भी जल्द नहीं की जा सकती। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को छूने से भी इस वक्त लेबनान में लोग डर रहे हैं।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दखल हर फील्ड में बढ़ता जा रहा है। जरूरी नहीं कि किसी देश पर हमला करने के लिए मिसाइल या तोप का इस्तेमाल हो। मानव इतिहास में युद्ध का एक अंधकारमय अध्याय रहा है। सदियों से मनुष्य ने अधिक शक्तिशाली हथियार बनाने में अपना समय लगाया है। तलवार और धनुष से लेकर तोप और मिसाइल तक, युद्ध के तरीके लगातार विकसित होते रहे हैं। लेकिन अब, एक नई तकनीक ने युद्ध के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है वह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने की क्षमता प्रदान करती है। AI का उपयोग अब युद्ध में कई तरह से किया जा रहा है, जैसे कि ड्रोन, साइबर युद्ध, लॉजिस्टिक्स और युद्ध सिमुलेशन। ये हथियार बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने टारगेट को पहचान उन पर हमला कर सकते हैं। AI से लैस ड्रोन अब युद्ध के मैदान में निगरानी, हमला और तलाशी जैसे कई काम कर सकते हैं। AI युद्ध के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। AI से लैस हथियार अधिक सटीक माने जा रहे हैं। आम नागरिकों के हताहत होने की संभावना कम होती है। AI से लैस सिस्टम बहुत तेजी से फैसले ले सकते हैं। लेकिन, इनके गलत हाथों में जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। AI युद्ध के नैतिक पहलुओं के बारे में कई सवाल उठते हैं, जैसे कि एक मशीन को किसी इंसान को मारने का फैसला लेने देना कितना उचित है।

AI युद्ध के भविष्य को पूरी तरह से बदल सकता है। AI से लैस रोबोट और ड्रोन युद्ध के मैदान में आम हो सकते हैं। साइबर युद्ध एक प्रमुख युद्ध का मैदान बन सकता है। AI युद्ध को अधिक मुश्किल और अप्रत्याशित बना सकता है। एआई से युद्ध के तरीके भी बदले हैं। एआई से संचालित ड्रोन और रोबोट अब आम होते जा रहे हैं। एआई डेटा का विश्लेषण करके दुश्मन की गतिविधियों का पूर्वानुमान लगा सकता है और रणनीति बनाने में मदद कर सकता है। साइबर हमले अब युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं और एआई का उपयोग इन हमलों का पता लगाने और उनसे बचाव के लिए किया जा रहा है।