Wednesday, March 4, 2026
Home Blog Page 694

नागरिकता के लिए रोहिंग्या मुसलमान के लिए क्या बोली केंद्र सरकार?

हाल ही में केंद्र सरकार के द्वारा नागरिकता के लिए रोहिंग्या मुसलमान के अधिकारों की बात कही गई है! सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि रोहिंग्या अवैध घुसपैठी हैं और उन्हें भारत में रहने का अधिकार नहीं है क्योंकि मौलिक अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिक के लिए है। केंद्र सरकार ने कहा कि उनका इस मामले में स्टैंड स्पष्ट है और रोहिंग्या अवैध घुसपैठी हैं और अवैध घुसपैठी सीधे तौर पर रिफ्यूजी नहीं माने जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा गया है कि रोहिंग्या रिफ्यूजी को हिरासत में लिया गया है और उन्हें रिहा किया जाए। उन्हें भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है ऐसे में उन्हें उनके देश डिपोर्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को इस मामले में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था । याचिकाकर्ता ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है।इस याचिका के जवाब में केंद्र ने उक्त जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत विकासशील देश है और यहां की जनसंख्या बहुत ज्यादा है।

देश के नागरिक का वेलफेयर प्राथमिकता के आधार होना चाहिए। ऐसे में विदेशी को सीधे तौर पर रिफ्यूजी के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है और वह भी तब जब ऐसे लोग बड़ी संख्या में देश में प्रवेश कर रहे हों। केंद्र ने कहा कि भारत विकासशील देश है और यहां जनसंख्या ज्यादा है और संसाधन सीमित है और वह देश के नागरिकों के लिए है और ऐसे में विदेशी को रिफ्यूजी के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

जो भी अवैध घुसपैठी हैं उन्हें रिफ्यूजी के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।केंद्र सरकार के होम मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों का मामला नीतिगत है। रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है।इस याचिका के जवाब में केंद्र ने उक्त जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत विकासशील देश है और यहां की जनसंख्या बहुत ज्यादा है।फॉरनर्स एक्ट के तहत सरकार का दायित्व है कि वह अवैध घुसपैठी को उनके देश डिपोर्ट करे।

केंद्र सरकार ने इस मामले में सर्बानंद सोनोवाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि बांग्लादेशी अवैध घुसपैठी भारत की सीमा में घुसे और असम व अन्य इलाकों में अवैध तरीके से रह रहे हैं और उन्हें भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है भारत में रहने वाले सभी नागरिकों को जीवन और समानता का अधिकार मिला हुआ है जिसका उल्लंघन हो रहा है।याचिका में कहा गया है कि उनका इस मामले में स्टैंड स्पष्ट है और रोहिंग्या अवैध घुसपैठी हैं और अवैध घुसपैठी सीधे तौर पर रिफ्यूजी नहीं माने जा सकते हैं।ऐसे में उन्हें उनके देश डिपोर्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को इस मामले में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था । याचिकाकर्ता ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें रिहा करने की गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है और उन्हें लगातार हिरासत में रखना असंवैधानिक है और यह अनुच्छेद 14 व 21 का उल्लंघन है। भारत में रहने वाले सभी नागरिकों को जीवन और समानता का अधिकार मिला हुआ है जिसका उल्लंघन हो रहा है।याचिका में कहा गया है कि उनका इस मामले में स्टैंड स्पष्ट है और रोहिंग्या अवैध घुसपैठी हैं और अवैध घुसपैठी सीधे तौर पर रिफ्यूजी नहीं माने जा सकते हैं। इस याचिका के जवाब में केंद्र ने उक्त जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत विकासशील देश है और यहां की जनसंख्या बहुत ज्यादा है।फॉरनर्स एक्ट के तहत सरकार का दायित्व है कि वह अवैध घुसपैठी को उनके देश डिपोर्ट करे।सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा गया है कि रोहिंग्या रिफ्यूजी को हिरासत में लिया गया है और उन्हें रिहा किया जाए। इस याचिका के जवाब में केंद्र ने उक्त जवाब दाखिल किया है।रोहिंग्या रिफ्यूजी को अवैध और मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया है और उन्हें डिटेंशन सेंटर और जेल में रखा गया है।

क्या इस बार होगी भाजपा के एनडीए और विपक्ष के इंडिया की जोरदार लड़ाई?

इस बार भाजपा के एनडीए और विपक्ष के इंडिया की जोरदार लड़ाई होने वाली है! 2024 लोकसभा चुनाव में सियासी दलों के बीच जंग नहीं होगी, बल्कि ये राजनीतिक सिद्धांतों की लड़ाई होगी। इसके साथ ही 18वीं लोकसभा में कई और चौंकाने वाली बातें देखने को मिल सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी को अभी राष्ट्रीय स्तर पर किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा। ऐसे में स्पष्ट रूप से अनुमान लगा सकते हैं कि एनडीए अपनी संसदीय सर्वोच्चता बरकरार रखेगी और संभवतः इसका विस्तार भी करेगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को लोकसभा की कुल 543 सीटों में 358 से 398 सीटें मिलने की उम्मीद है। अभी इनके पास 351 सीटें हैं। ताजा हालात में, उनके पास मौजूदा बहुमत 65 फीसदी से बढ़कर 66-73 फीसदी होगा। पिछले साल संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिली बढ़त से ऐसे अनुमान लगाए जा रहे हैं। बीजेपी ने इन चुनावों में जहां एमपी की सत्ता बरकरार रखी तो वहीं राजस्थान और छत्तीसगढ़ को कांग्रेस से छीन लिया। इसी प्रदर्शन के बाद बीजेपी नेतृत्व को ऐसा अनुमान है कि संसदीय चुनाव में पार्टी की सीटें बढ़ सकती हैं।

यही वजह है कि इन चुनावों के दौरान दिलचस्पी इस बात पर कम होगी कि कौन जीतता है। चुनाव विश्लेषक पहले ही ये समझ चुके हैं। उन्हें बस राजनीतिक तर्कों में ज्यादा दिलचस्पी होगी जिन्हें हम एक्शन के तौर पर देखेंगे। इस चुनाव में संबंधों की राजनीति और विचारधारा की पॉलिटिक्स के बीच संघर्ष देखने को मिलेगा। सियासी विश्लेषकों ने लंबे समय से देखा है और शिकायत की है कि भारतीय राजनीति अधिकांश विचारधाराओं के बजाय सामाजिक संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है। सियासी पार्टियों का फोकस सामान्य सिद्धांतों से ज्यादा विशेष ग्रुप्स यानी जातियों, वर्गों, ‘वोट बैंकों’ को टारगेट करने पर रहता है। भारतीय राजनीति में, पार्टियां अक्सर जाति या वर्ग के आधार पर विशिष्ट समूहों को टारगेट करती हैं। ऐसे में पारंपरिक रूप से विचारधाराओं की तुलना में सामाजिक संबंधों पर जोर दिया गया है।

पार्टियां सामूहिकता के बजाय गुरु पंथ से बंधी मिलती नजर आती हैं, ये चुनाव लोकप्रियता की लड़ाई है। ‘मोदी मैजिक’ पर निर्भर नजर आने वाली बीजेपी भी एक व्यापक सभ्यतागत मंच को बढ़ावा देने पर काम कर रही है, जिसके संदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजते हैं। अपना जादू चलाते हुए पीएम मोदी ने एक विशाल विचारधारा तैयार की है। उन्होंने भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में भी अपने संदेश को पहुंचाने के लिए एक सभ्यतागत मंच बनाने के लिए भी कड़ी मेहनत की है। भविष्य की ओर अग्रसर, अंतरिक्ष से जुड़ा भारत, जो अपनी प्राचीन जड़ों के भी संपर्क में है। कम से कम भारत के अंदर अब ये एक बड़ा ब्रांड बन गया है।

विदेशी अभी भी यह जानने की कोशिश कर रहे कि ‘भारत’ का जिक्र कैसे किया जाए। भारत की सड़कें विश्व स्तर की दिखाई देने लगी हैं। चंद्रमा पर उतरने से लेकर दक्षिण एशिया के पहले जी-20 शिखर सम्मेलन तक सब जगह इसकी वैश्विक चर्चा हो रही। इसमें खास बात है कि अर्थव्यवस्था में भारत ने ब्रिटेन का पांचवां स्थान तक छीन लिया। वाराणसी में दुनिया का सबसे बड़ा नया ध्यान केंद्र भी है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड योग सेशन गुजरात में हुआ जिसमें लगभग डेढ़ लाख लोगों ने एक साथ प्रदर्शन किया। अयोध्या में 2 मिलियन से अधिक दीये जलाकर एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया।

हाल ही में भारतीय शहरों में किए गए एक सर्वेक्षण में, 51 फीसदी ने अयोध्या में नए राम मंदिर का समर्थन किया। 49 फीसदी ने इसे चुनावी दांव माना। पिछले साल पहली बार, उत्तर भारत में कामकाजी वर्ग के हिंदुओं को अयोध्या मंदिर का वर्णन करते हुए सुना गया। वे जो चाहते हैं और भारत को जो चाहिए उससे ध्यान भटकाने वाला है। यूपी, जो लोकसभा में 80 सांसद भेजता है, एक बेहद प्रतिस्पर्धी बहुदलीय राज्य हुआ करता था। यहां तीन या चार पार्टियां दशकों से राजनीतिक छलांग लगा रही थीं। 2022 में बीजेपी के जीतने से पहले दशकों तक किसी भी पार्टी ने राज्य विधानसभा का चुनाव दोबारा नहीं जीता। यहां बीजेपी ने क्षेत्रीय दलों को दरकिनार करके एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरी, विचारधारा का महत्व बढ़ रहा। यहां राजनीतिक रूप से की गई सेटिंग के जरिए यादव या दलित जैसे विशेष ग्रुप्स को टारगेट करके संबंधों की राजनीति का इस्तेमाल कर कोई भी 30 से 35 फीसदी वोटों के साथ जीत दर्ज कर सकता है।

उत्तर भारत में, INDIA गठबंधन के सदस्य आपस में चुपचाप बात कर रहे हैं, कोई स्पष्ट सार्वजनिक संदेश जारी नहीं कर रहे हैं। बीजेपी अपने ही अंदाज में ‘भारत’ की नई विचारधारा पेश कर रही है। अपने दम पर, पार्टी के पास वास्तव में संसद के अंदर 55 फीसदी का बड़ा बहुमत है। इसे बरकरार रखने के लिए हिंदी पट्टी में अपना परचम लहराना होगा और ऐसा होगा। राजनीति की यह विचारधारा, राष्ट्रीय आदर्शों और वैश्विक सिद्धांतों के साथ भारत के पुराने व्यक्तिवाद, पितृसत्तात्मकता और जातिवाद के वोट बैंक की तुलना में अधिक परिपक्व और ‘आधुनिक’ दिखाई दे सकती है। हालांकि, यह वास्तव में ऐसी राजनीति है, जो स्थानीय संबंधों, मामलों और समूहों पर केंद्रित है। समग्रीकरण, सिद्धांतवादी विचारधारा की ओर बढ़ने से यह खतरा है।

क्या चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में CJI का होना आवश्यक है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में CJI का होना आवश्यक है या नहीं! सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का बचाव किया। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि चयन समिति में एक ज्यूडिशियल मेंबर होने से ही चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पैदा नहीं होती है। केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनाए गए नए कानून के तहत यह नियुक्ति हुई है नए कानून के तहत नियुक्ति पैनल में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मिनिस्टर को रखा गया है जबकि सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के फैसले में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पैनल द्वारा नियुक्ति की व्यवस्था दी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार के कानून और नियुक्ति को चुनौती गई है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की लॉ मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में याचिकाकर्ता की उस दलील को खारिज कर दिया गया जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि 15 मार्च को मामले में सुनवाई होनी थी और उससे एक दिन पहले ही 14 मार्च को नियुक्ति का ऑर्डर कर दिया गया।केंद्र ने याचिकाकर्ता की उस दलील का खंडन किया कि एग्जीक्यूटिव की दखल चुनाव आयोग की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है। याचिकाकर्ता का यह दावा भी गलत है कि बिना ज्यूडिशियल मेंबर की सेलेक्शन कमिटी पक्षपातपूर्ण होगा। सुप्रीम कोर्ट में एडीआर और कांग्रेसी नेता जया ठाकुर ने अर्जी दाखिल कर चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने के लिए बनाए गए नए कानून को चुनौती दी गई है।

केंद्र सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की दलील एक मौलिक गलतफहमी पर आधारित है कि किसी भी अथॉरिटी की स्वतंत्रता केवल तब भी बनाए रखा जा सकता है जब चयन समिति एक विशेष रचना के तहत बनाया गया हो। केंद्र के हलफनामे में चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनाए गए कानून का बचाव किया और कहा है कि यह समझना होगा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता या फिर किसी और संस्थान या अथॉरिटी की स्वतंत्रता चयन समिति में न्यायिक सदस्य की मौजूदगी से पैदा नहीं होती है। केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले में राजनीतिक विवाद अस्पष्ट मंशा के आधार पर बनाने की कोशिश की गई है। केंद्र ने हा कि जिन दो लोगों को चुनाव आयुक्त बनाया गया है उनकी योग्यता पर कभी कोई सवाल नहीं उठाया गया है। साथ ही कहा कि जो भी चुनाव आयुक्त नॉमिनेट किए गए हैं उनकी पात्रता या योग्यता पर कोई आपत्ति नहीं की गई है। केंद्र ने कहा कि याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज की जानी चाहिए। केंद्र ने कहा कि चुनाव आयुक्त व मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल की शर्तें एक्ट 2023 को चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार के तौर पर देखा जा रहा है जो ज्यादा लोकतांत्रिक, समावेशी है। केंद्र ने याचिकाकर्ता की उस दलील का खंडन किया कि एग्जीक्यूटिव की दखल चुनाव आयोग की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है। याचिकाकर्ता का यह दावा भी गलत है कि बिना ज्यूडिशियल मेंबर की सेलेक्शन कमिटी पक्षपातपूर्ण होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को 2023 के नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों ईसी की नियुक्ति पर रोक लगाने से मना कर दिया था। नए कानून के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री होते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के फैसले में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पैनल द्वारा नियुक्ति की व्यवस्था दी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार के कानून और नियुक्ति को चुनौती गई है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की लॉ मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में याचिकाकर्ता की उस दलील को खारिज कर दिया गया जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि 15 मार्च को मामले में सुनवाई होनी थी और उससे एक दिन पहले ही 14 मार्च को नियुक्ति का ऑर्डर कर दिया गया।मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने फैसला दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त सीईसी और चुनाव आयुक्त ईसी को प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर एक समिति के सुझाव के आधार पर नियुक्त किया जाएगा।

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर एक बयान दिया गया है! सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आम चुनाव होने वाला है। ऐसे में इससे अनिश्चितता और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त एक्ट 2023 पर भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने 2023 के फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा था कि चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनाए जाने वाली कमिटी में न्यायपालिका का सदस्य होना चाहिए। फैसले में एक पैनल बनाया गया था जिसमें पीएम, नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि फैसले का मकसद ये था कि जब तक संसद इस मामले में कानून बनाए, तब तक ये व्यवस्था लागू होगी। हम नियुक्ति से संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा है। बेंच ने कहा, याचिकाकर्ता ने पहले नए कानून पर रोक की मांग की थी और बाद में अर्जी दाखिल कर नए कानून के तहत की गई नियुक्तियों पर रोक की मांग की।सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त बनाया गया है। केंद्र सरकार के नए कानून के तहत सिलेक्शन कमिटी में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और पीएम द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को रखा गया है। इसमें चीफ जस्टिस को नहीं रखा गया था। इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एडीआर और कांग्रेसी नेता जया ठाकुर की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई हुई। आजादी के बाद लगातार चुनाव हुए हैं। कई बेहतरीन चुनाव आयुक्त नियुक्त होते रहे हैं। पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति इग्जेक्यूटिव द्वारा की जाती थी। अब एक नए कानून के तहत हुई है।

दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कुछ और समय दिया जाना चाहिए था। जो भी उम्मीदवार थे, उनके बैकग्राउंड को समझने के लिए कमिटी को ज्यादा समय दिया जाना चाहिए था। गौरतलब है कि 14 मार्च को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त बनाया गया है। केंद्र सरकार के नए कानून के तहत सिलेक्शन कमिटी में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और पीएम द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को रखा गया है। इसमें चीफ जस्टिस को नहीं रखा गया था। इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एडीआर और कांग्रेसी नेता जया ठाकुर की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई हुई।

सीनियर एडवोकेट विकास सिंह याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए अनूप बर्नवाल केस में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी। कहा गया था कि पैनल में पीएम, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस होंगे। केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया, उसमें चीफ जस्टिस को पैनल में नहीं रखा गया बल्कि उनकी जगह पीएम द्वारा नॉमिनेटेड केंद्रीय मंत्री को रखा गया। इस तरह के बदलाव से चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में इग्जेक्यूटिव का दखल होगा और यह खतरनाक है। एडीआर की ओर से प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कमिटी की जो बैठक हुई, उस पर सवाल है। कमिटी ने बेहद जल्दबाजी दिखाई। इस तरह से यह सब हुआ जिससे पिटिशनर की अर्जी बेकार हो जाए। सुनवाई की तारीख से एक दिन पहले नाम तय कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन्हें नियुक्त किया गया है, उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। अब वे नियुक्त हो चुके हैं और चुनाव होने वाले हैं। हम कानून पर रोक नहीं लगा रहे हैं। हमने नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो विषय हैं। एक है कि क्या कानून संवैधानिक दायरे में है। दूसरा ये कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया सही है। कोर्ट ने कहा कि दो या तीन दिन नियुक्ति प्रक्रिया के लिए दिए जाने चाहिए थे। इसमें रफ्तार थोड़ी धीमी रखनी चाहिए थी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 200 नामों पर विचार किया गया था। बेंच ने कहा कि 200 नामों पर विचार दो घंटे में किया गया। ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि हम प्रक्रिया की बात कर रहे हैं। न्याय होना जरूरी है, न्याय होते दिखना भी जरूरी है। आखिर में कोर्ट ने नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

क्या कांग्रेस पार्टी के पास सचमुच खत्म हो चुके हैं पैसे?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस पार्टी के पास सचमुच पैसे खत्म हो चुके हैं! कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा चुनावों के मद्देनजर एक साजिश बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने कांग्रेस को पंगु बनाने की चाल चली है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी के पास खर्च करने के लिए एक रुपया भी नहीं है और वह मतदान से पहले अपना चुनाव अभियान शुरू नहीं कर पाई है, जबकि भाजपा पूरे देश में पहले की तरह पैसा खर्च कर रही है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस को अपने बैंक खातों का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। उधर, आयकर विभाग इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का दावा है कि कांग्रेस पार्टी मामले का निपटारे की बजाय इसे खींचना चाहती है। डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने ही पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में अपने पास 340 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के अलावा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और नकदी होने की जानकारी टैक्स ट्राइब्यूनल को दी थी। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण की दिल्ली पीठ में कांग्रेस की याचिका का विरोध करते हुए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के वरिष्ठ स्थायी वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि टैक्स ऑफिसरों की कार्रवाई से पार्टी को कोई कठिनाई नहीं हुई क्योंकि उसने मार्च 2023 के अंत में 657 करोड़ रुपये की संपत्ति और 388 करोड़ रुपये की नकदी एवं अन्य संपत्तियां होने की जानकारी दी थी। इस महीने की शुरुआत में ट्राइब्यूनल ने आईटी डिपार्टमेंट की कांग्रेस के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की पार्टी की मांग खारिज कर दी।

टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने सोनिया और राहुल गांधी के इस आरोप का मुकाबला करने के लिए वकील की दलीलों की ओर इशारा किया कि पार्टी के पास अपना अभियान चलाने के लिए कोई पैसा नहीं बचा है। बैंक खातों को फ्रीज करने के दावों का खंडन करते हुए एक सूत्र ने कहा कि पार्टी के देशभर में कई खाते हैं और विभाग ने दिल्ली में पांच बैंक शाखाओं में बैंक खातों और सावधि जमा से 135 करोड़ रुपये वसूल किए हैं। एक सूत्र ने कहा, ‘हम खातों को फ्रीज करने के दावे को सिरे से खारिज करते हैं।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने निर्धारित अवधि के भीतर मांग पर रोक नहीं लगाई जिसके परिणामस्वरूप कार्रवाई हुई।

मामला वित्तीय वर्ष 2017-18 का है जब पार्टी ने दिसंबर 2018 की विस्तारित समय सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया था, जो रजिस्टर्ड राजनीतिक दलों को उपलब्ध टैक्स छूट के विकल्प का दावा करने के लिए एक पूर्व शर्त है। पार्टी 20 हजार रुपये से अधिक के नकद दान की स्वीकृति से संबंधित एक और आवश्यकता को पूरा करने में भी विफल रही। विभाग ने कहा कि पार्टी ने 14 लाख रुपये से अधिक के नकद दान स्वीकार किए, जिस कारण उसको मिला टैक्स छूट का विकल्प खत्म हो गया। अब पार्टी को ‘व्यक्तियों का संघ’ माना जा रहा है और उसे सामान्य टैक्स लाइबिलिटी का सामना करना पड़ रहा है।

जुलाई 2021 में टैक्स रिटर्न के आकलन के बाद आईटी डिपार्टमेंट ने कांग्रेस से 105 करोड़ रुपये टैक्स डिमांड रखी, लेकिन पार्टी ने केवल 2.5 करोड़ रुपये का पेमेंट किया। मामले को स्थगित रखने के लिए उसे अपीलीय आयुक्त के सामने 105 करोड़ रुपये की मूल डिमांड का 20%, यानी 21 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। ब्याज सहित टैक्स डिमांड अब बढ़कर 135 करोड़ रुपये हो गया है और अंतिम भुगतान होने या मामले को खारिज किए जाने तक ब्याज बढ़ता रहेगा। पार्टी ने मांग को चुनौती दी है। आईटी डिपार्टमेंट के सूत्रों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मामले को घसीट रही है, जिसकी ओर आईटीएटी ने भी अपने आदेश में इशारा किया क्योंकि विवेक तन्खा के नेतृत्व में पार्टी के वकीलों ने अपील के ‘त्वरित निपटान’ का विकल्प नहीं चुना।

सूत्रों ने बताया कि पार्टी के 11 में से आठ खाते फ्रीज हैं। पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि आयकर अधिनियम के अनुसार, 2017-18 के खातों को जमा करने में एक महीने की देरी पर अधिकतम 10 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है, लेकिन कांग्रेस पर 210 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर केसरी के कार्यकाल के दौरान 30 साल पहले का आयकर नोटिस जारी किया जा सकता है, तो सरकार महात्मा गांधी के उस दौर में भी जा सकती है जब जमनालाल बजाज कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे। कांग्रेस को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के ‘व्यवस्थित प्रयास’ के बारे में बात करते हुए, सोनिया गांधी ने कहा, ‘इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हम अपने चुनाव अभियान को प्रभावी बनाए रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।’

खरगे ने कहा कि अब कोई लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं है क्योंकि भाजपा ने मीडिया विज्ञापनों और एयर ट्रांसपोर्ट पर एकाधिकार स्थापित कर लिया है, जबकि कांग्रेस अपने नेताओं को विभिन्न शहरों में भेजने में भी सक्षम नहीं है और अभी तक रैलियों या मीडिया विज्ञापनों के साथ अपना अभियान शुरू नहीं कर पाई है।उन्होंने कहा, ‘सभी दलों के पास समान रूप से संसाधन होने चाहिए, न कि सत्ता में बैठे लोगों के पास संसाधनों, मीडिया पर एकाधिकार हो और सत्तारूढ़ दल का ईडी, आयकर, चुनाव आयोग और अन्य स्वायत्त निकायों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं हो सकता।’ उन्होंने कहा कि चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उजागर किया है कि कैसे भाजपा ने अपने बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा किए हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली नकदी का कोई हिसाब नहीं है, यह कहते हुए कि 70 से अधिक वर्षों से स्थापित एक स्वस्थ लोकतंत्र के रूप में भारत की छवि पर ‘प्रश्न चिह्न’ हैं।

क्या चुनाव आयोग नहीं रोक पा रहा है हेट स्पीच?

एक रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग हेट स्पीच नहीं रोक पा रहा है! दुश्मनी जमकर करो लेकिन यह गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हों जाएं तो शर्मिंदा ना हों’। भारतीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को मशहूर शायर बशीर बद्र के इस शेर को नेताओं के चुनावी भाषणों के दौरान बढ़ते जा रहे हेट स्पीच और पर्सनल अटैक जैसे मामलों को देखते हुए कहना ही पड़ा। आयोग ने साफ किया है कि वह किसी भी सूरत में नेताओं और स्टार प्रचारकों द्वारा हेट स्पीच और निजी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसा करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त एक्शन लेगा। लेकिन सवाल यह है कि चुनाव आयोग हेट स्पीच और पर्सनल अटैक के मामलों को कैसे रोकेगा? क्या इस तरह के नफरती भाषणों और निजी हमले करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने जैसी कार्रवाई भी कर सकता है? ऐसे नेताओं और उम्मीदवारों के भविष्य में चुनाव लड़ने से रोक सकता है? या फिर अन्य किसी तरह की कार्रवाई करेगा। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 14 सितंबर 2022 को कहा था कि फिलहाल हेट स्पीच से संबंधित देश में कोई स्पष्ट और सीधा कानून नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के मामलों को रोकने के लिए आदेश पारित करना चाहिए। आयोग ने देश की सर्वोच्च अदालत को यह भी बताया था कि असल में चुनावी मैदान में उतरे किसी भी उम्मीदवार को उस समय तक नहीं रोका जा सकता, जब तक की हेट स्पीच को परिभाषित करते हुए स्पष्ट कानून ना हो। इस मामले में लॉ कमिशन द्वारा दी गई 267 वीं रिपोर्ट में भी कहा गया था कि हेट स्पीच को लेकर जरूरी संशोधन की जरूरत है। हालांकि, अब जबकि देश आईपीसी और सीआरपीसी की जगह नए कानून लागू हो गए हैं तो एक्सपर्ट का कहना है कि हेट स्पीच के मामले में भी स्पष्ट कानून होना ही चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है कि मामले में सीधे और स्पष्ट कानून ना होने का फायदा यह नेतागण खूब उठाते हैं। इस कमी की आड़ लेकर कई बार कुछ नेता तो सारी मर्यादा ही क्रॉस कर डालते हैं।

चुनाव आयोग का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों की घोषणा करने से पहले नेताओं, उम्मीदवारों और स्टार प्रचारकों द्वारा आदर्श आचार संहिता को तोड़ने वाले पिछले पांच सालों के सारे रिकॉर्ड देखे गए हैं। इसके लिए नेताओं को अडवाइजरी जारी की गई हैं। आयोग का मानना है कि पहले के मुकाबले अब राजनीति का स्तर घटा है। प्रचार के दौरान उम्मीदवार, नेता और स्टार प्रचारक कई बार रेड लाइन क्रॉस कर जा रहे हैं। लेकिन अब इसे और नहीं होने दिया जाएगा। भले ही हेट स्पीच को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। लेकिन इसके लिए अन्य कई कानूनों के तहत आरोपियों पर एक्शन लिया जा सकता है। आयोग ने तमाम राजनीतिक दलों को अडवाइजरी जारी करके यह चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी तरफ से किसी नेता, उम्मीदवार या फिर स्टार प्रचारक ने चुनावी प्रचार के दौरान नफरती भाषण और निजी हमले किए तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

एक्सपर्ट ने एक रिपोर्ट का हवाला देकर बताया कि हेट स्पीच को लेकर देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। यह पिछले साल अक्टूबर में जारी की गई थी। इसके बाद इसमें और इजाफा हुआ है। चुनावों के दौरान चुनावों में खड़े होने वाले कितने ही उम्मीदवारों के शपथ पत्रों में भी कई तरह के आपराधिक मामलों का जिक्र किया जाता है। लेकिन कुछ मामलों को छोड़ दें तो कोई भी राजनीतिक पार्टी हेट स्पीच देने वाले हों या ना सभी तरह के उम्मीदवारों को टिकट दे देती हैं। ऐसे में जरूरत है इन्हें चुनाव लड़ने से ही रोकने की। साथ ही जो लोग चुनाव नहीं लड़ते केवल भाषण देते हैं। उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसमें सजा का भी प्रावधान हो। आयोग ने भी सरकार से इस मामले में कड़ा कानून बनाने की बात कही थी। लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है।

हेट स्पीच को लेकर अभी तक अलग से कोई कानूनी व्याख्या तो नहीं है। लेकिन कानूनी जानकार इसे नफरती भाषण बताते हुए कहते हैं कि मुख्य रूप से धार्मिक, सामाजिक, नस्ल, जातीयता, लिंग और इसी तरह से अन्य कई रूप से व्यक्तियों के एक समूह के खिलाफ नफरत फैलाने और उन्हें उकसाने वाला बताया गया है। इसमें व्यक्तियों का समूह चाहे किसी भी धर्म का हो, इसे आक्रामक भाषण देना बताया गया है जो समाज में शांति और व्यवस्था को खतरे में डालता है। वैसे संविधान के आर्टिकल 19 के मुताबिक अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर आठ प्रकार के प्रतिबंध हैं। आयोग का कहना है कि वैसे हेट स्पीच और निजी हमलों जैसे मामलों में आरपी एक्ट, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने और कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वैसे, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 फ्रीडम ऑफ स्पीच के दुरूपयोग के लिए दोषी ठहराए गए शख्स को चुनाव लड़ने से रोकती है। अन्य कानून भी जाति, धर्म, भाषा और समुदाय के आधार पर किए गए इस तरह के मामलों पर रोक लगाता है।

आखिर कैसा है 2024 का पुष्पक विमान?

आज हम आपको 2024 के पुष्पक विमान के बारे में जानकारी देने वाले हैं! त्रेतायुग में लंकापति रावण के पास एक विमान था। नाम था पुष्पक। यह विमान अपनी अद्भुत शक्तियों और सुंदरता के लिए जाना जाता था। अब कलयुग में एक बार फिर पुष्पक विमान की चर्चा है। लेकिन क्यों? दरअसल इसरो ने एसयूवी कार जितने आकार का एक पंखों वाला रॉकेट तैयार किया है। इसरो ने इसका नाम रावण के पुष्पक के नाम पर ही रखा है। इसे स्वदेशी स्पेस शटल कहा जा रहा है। कर्नाटक में एक रनवे पर इसकी सलफल लैंडिग कराई गई जिसके बाद से यह चर्चा में आ गया। टेस्ट के दौरान, इस रॉकेट को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से छोड़ा गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने इस परीक्षण के परिणाम को बहुत अच्छा और सटीक बताया। इसमें सबसे महंगे उपकरण सबसे ऊपरी भाग में होते हैं। इस भाग को सुरक्षित वापस लाने से काफी बचत होगी। भविष्य में इस वाहन का इस्तेमाल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स में ईंधन भरने या उन्हें वापस लाकर मरम्मत करने के लिए भी किया जा सकता है। पुष्पक अंतरिक्ष में कचरे को कम करने की दिशा में भी एक कदम है।इसरो ने बताया कि हमने फिर कमाल कर दिया। पुष्पक RLV-TD को एक ऊंचाई से छोड़ा गया जिसके बाद उसने रनवे पर वापस आने के लिए सफलतापूर्वक खुद ही रास्ता बना लिया। इसरो ने बताया कि यह परीक्षण अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर आने वाले रॉकेट के गति और दिशा को नियंत्रित करने का अभ्यास था। अंतरिक्ष विभाग के अनुसार, पुष्पक को वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया और फिर वहां से छोड़ा गया। इस दौरान उसने लैंडिंग के लिए पैराशूट, ब्रेक और पहिए का इस्तेमाल किया।

इसरो के अध्यक्ष श्री सोमनाथ ने पहले कहा था कि ‘पुष्पक अंतरिक्ष कार्यक्रम को सबसे किफायती बनाने की भारत की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘पुष्पक अंतरिक्ष में जाने वाला एक ऐसा वाहन है जिसे दुबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सबसे महंगे उपकरण सबसे ऊपरी भाग में होते हैं। इस भाग को सुरक्षित वापस लाने से काफी बचत होगी। भविष्य में इस वाहन का इस्तेमाल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स में ईंधन भरने या उन्हें वापस लाकर मरम्मत करने के लिए भी किया जा सकता है। पुष्पक अंतरिक्ष में कचरे को कम करने की दिशा में भी एक कदम है।

पहली बार इसे 2016 में उड़ाया गया था। उस समय इसने बंगाल की खाड़ी में बने एक वर्चुअल रनवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी। प्लान के मुताबिक, इसके बाद ये समुद्र में चला गया और इसे वापस नहीं लाया गया। दूसरी टेस्ट फ्लाइट 2023 में हुई थी, जहां इस पंखों वाले रॉकेट को चिनूक हेलीकॉप्टर से हवा में छोड़ा गया और फिर इसने खुद ही लैंडिंग कर ली। इसरो के अध्यक्ष श्री सोमनाथ के अनुसार, इस रॉकेट का नाम रामायण में वर्णित ‘पुष्पक विमान’ से लिया गया है, जो धन के देवता कुबेर का वाहन था। इसे बनाने में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक समर्पित टीम को 10 साल लग गए। ये 6.5 मीटर लंबा हवाई जहाज जैसा रॉकेट 1.75 टन वजनी है। बता दें कि उसने रनवे पर वापस आने के लिए सफलतापूर्वक खुद ही रास्ता बना लिया। बता दें कि इसे स्वदेशी स्पेस शटल कहा जा रहा है। कर्नाटक में एक रनवे पर इसकी सलफल लैंडिग कराई गई जिसके बाद से यह चर्चा में आ गया। टेस्ट के दौरान, इस रॉकेट को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से छोड़ा गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने इस परीक्षण के परिणाम को बहुत अच्छा और सटीक बताया। इसरो ने बताया कि हमने फिर कमाल कर दिया। पुष्पक RLV-TD को एक ऊंचाई से छोड़ा गया जिसके बाद उसने रनवे पर वापस आने के लिए सफलतापूर्वक खुद ही रास्ता बना लिया। इसरो ने बताया कि यह परीक्षण अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर आने वाले रॉकेट के गति और दिशा को नियंत्रित करने का अभ्यास था। अंतरिक्ष विभाग के अनुसार, पुष्पक को वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया और फिर वहां से छोड़ा गया। नीचे उतरते समय छोटे-छोटे इंजन इसकी मदद करते हैं कि ये सही जगह पर जाकर जमीन पर बैठ सके। इस पूरे प्रोजेक्ट पर सरकार ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं।

आखिर क्या है बदायूं के दोहरे हत्याकांड की कहानी?

आज हम आपको बदायूं के दोहरे हत्याकांड की कहानी बताने जा रहे हैं! उत्तर प्रदेश का बदायूं शहर सदमे से बाहर नहीं निकल सका है। हर शख्स की जुबां पर मासूम बच्चों के साथ हुए जघन्य हत्याकांड की ही चर्चा है। सवाल बना हुआ है कि आखिर साजिद और जावेद ने आखिर क्यों इस वहशियाना घटना को अंजाम दिया। आरोपियों ने जघन्य तरीके से वारदात को अंजाम दिया। जिस किसी ने भी घटनास्थल पर जाकर उस मंजर को देखा, उसके होश उड़ गए। गर्दन काटने के बाद भी शरीर के अन्य हिस्सों पर वार करते रहे। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हुई है। हेयर ड्रेसर साजिद और जावेद ने घर में आकर उधार लेने और चाय पीने के बाद ऊपर जाकर मासूम बच्चों को मार डाला। कमरे में अचानक से मुंह दबाकर गर्दन पर उस्तरे से गर्दन काट दिया। फिर सीने, पीठ, हाथ पर ताबड़तोड़ कई वार किए। आयुष और अहान के साथ नृशंसता की हदें पार कर दी गईं। दोनों बच्चे करीब 10 मिनट तक जान बचाने के लिए जूझते रहे।

पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हुई है कि साजिद ने 24 बार उस्तरे और चाकू से वार किया। रिपोर्ट के अनुसार छोटे बच्चे अहान के शरीर पर 9 वार और आयुष के शरीर पर 14 वार हुए। बुधवार सुबह ही दोनों बच्चों का पोस्टमॉर्टम कर दिया गया। फिर 10 बजे कछला घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं आरोपी साजिद का एनकाउंटर के बाद पोस्टमॉर्टम हुआ, जिसमें उसके शरीर में 3 गोलियां लगी मालूम हुईं। बच्चे ने हथियार झटकते हुए बाहर की तरफ दौड़ लगा दी। वह छत की तरफ भागा और शोर मचाने लगा। वहां भी आरोपी पीछे आया लेकिन बच्चा उसे चकमा देते हुए वापस सीढ़ी से नीचे दौड़ पड़ा।सखानू में उसे सुपुर्दे खाक कर दिया गया।

बदायूं जिले में हुए दोहरे हत्याकांड ने सबको झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी जावेद पर यूपी पुलिस ने इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस ने आरोपी जावेद पर 25 हजार का इनाम घोषित किया है। आरोपी जावेद हत्याकांड के बाद से फरार चल रहा है। इस घटना में शामिल आरोपी साजिद को एनकाउंटर में मार गिराया गया है, जिसकी मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। घटना में जिंदा बच गए तीसरे बच्चे ने बताया कि वापस जैसे ही ऊपर पहुंचा तो देखा कि साजिद दोनों भाइयों को मार रहा है। वे लोग 10 मिनट तक जान बचाने की जंग लड़ते रहे। हत्यारों ने उसको भी पकड़ लिया और मुंह दबाकर चाकू से वार किया लेकिन बच्चे ने हथियार झटकते हुए बाहर की तरफ दौड़ लगा दी। वह छत की तरफ भागा और शोर मचाने लगा। वहां भी आरोपी पीछे आया लेकिन बच्चा उसे चकमा देते हुए वापस सीढ़ी से नीचे दौड़ पड़ा।

बता दे कि दिल दहलाने वाली बदायूं की घटना पर केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने दुख प्रकट किया है। बीएल वर्मा ने कहा कि बदायूं की घटना बहुत दु:खद घटना है। इस घटना से न सिर्फ बदायूं के लोग, बल्कि वो सभी लोग सदमे में हैं, जिन्होंने इसके बारे में मीडिया में सुना या पढ़ा। मुझे लगता है कि आरोपी ने पुलिस के साथ भी कुछ वैसा ही करने की कोशिश की, जिसके बाद उसे अपनी करनी का दंड मिला। पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। बदायूं से सपा उम्मीदवार शिवपाल यादव ने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। इस सरकार में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। बता दें कि हेयर ड्रेसर साजिद और जावेद ने घर में आकर उधार लेने और चाय पीने के बाद ऊपर जाकर मासूम बच्चों को मार डाला। कमरे में अचानक से मुंह दबाकर गर्दन पर उस्तरे से गर्दन काट दिया। फिर सीने, पीठ, हाथ पर ताबड़तोड़ कई वार किए। आयुष और अहान के साथ नृशंसता की हदें पार कर दी गईं। दोनों बच्चे करीब 10 मिनट तक जान बचाने के लिए जूझते रहे। सपा नेता शिवपाल यादव ने पूछा कि एनकाउंटर (आरोपियों का) हो चुका है तो अब केस का पर्दाफाश कैसे होगा। एसएसपी बदायूं आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि आरोपी साजिद कल शाम को पीड़ित के घर के अंदर गया था और छत पर खेल रहे दोनों बच्चों पर हमला करके उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने घेराबंदी कर साजिद को पकड़ने की कोशिश की तो उसने पुलिस पर फायर किया। जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई है, जबकि मौके से जावेद फरार हो गया था।

क्या सांप के जहर से भी लग जाती है नशे की लत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सांप के जहर से भी नशे की लत लग जाती है या नहीं! जिस सांप का जहर शरीर के अंदर जाते ही इंसान की जान ले सकता है, उसका नशे के रूप में खूब इस्तेमाल हो रहा है। रेव पार्टियों में इस जहर को धड़ल्ले से परोसा जाता है। लोग इसके सेवन से मदहोश हो जाते हैं। यही नहीं इसका कारोबार करने वाला तो समझिए मालामाल हो जाता है। फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव भी इसी नशे के कारोबार में फंसे हैं। जब सफलता आप पर हावी होने लगती है तो आप कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिसका अंजाम आपको भी नहीं पता होता। बिग बॉस विनर और प्रसिद्ध यूट्यबूर एल्विश यादव के साथ यही हुआ। सफलता पचा नहीं पाए और आज की तारीख में इसी सांप के जहर का कारोबार करने के जुर्म में नोएडा पुलिस की गिरफ्त में हैं। लेकिन सांप के जहर की सप्लाई एल्विश यादव के इर्द-गिर्द बस नहीं घूमती है। पूरे भारत में इसका कारोबार खूब फल-फूल रहा है। आज हम इसके बारे में पूरी डिटेल देते हैं। सांपों का जहर, उसकी तस्करी और फिर रेव पार्टी में उसका नशा। पिछले साल नोएडा में हुई ऐसी ही एक रेव पार्टी में पता चला कि वहां लोग सांपों के जहर से नशा कर रहे हैं। नशा ऐसा कि आपका शरीर खतरे में पड़ जाए। लेकिन किसी को परवाह कहां। बात नवंबर के आस-पास की है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सांप तस्करी के एक गिरोह का पर्दाफाश किया था। सांप का जहर सप्लाई करने के जुर्म में पुलिस ने चार सांप पकड़ने वालों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जब्त किए गए जहर के सैंपल की फॉरेंसिक जांच में पता चला कि ये जहर कोबरा और करैत सांपों का था। पुलिस कार्रवाई मनेका गांधी की संस्था पीपल फॉर एनिमल्स की शिकायत के बाद हुई थी। तभी ऐक ऐसा नाम आया जिसे सुनकर सब चौंक गए। वह शख्स और कोई नहीं बल्कि बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 के विजेता और फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव था। एल्विश ने उस वक्त इन आरोपों को गलत बताया था। लेकिन, अब चल रही जांच के दौरान पुलिस को एल्विश का दो सांपों के साथ एक वीडियो मिला है। इसके बाद एल्विश ने पुलिस पूछताछ में यह भी माना है कि वो रेव पार्टियों में सांप और सांप का जहर लाने का इंतजाम करता था। इस वक्त एल्विश 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं।

सांप के जहर की लत का मतलब है कि जानबूझकर सांप का जहर लेकर नशा करना। ये खासकर रेव पार्टियों में देखा जाता है। यह बहुत खतरनाक है और इससे सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। सांप का जहर जहरों का ही मिश्रण होता है जिसे शिकार को मारने के लिए बनाया गया है। फिर सवाल उठता है कि क्या यह लीगल है? जवाब है बिल्कुल नहीं। भारत और कई अन्य देशों में सांप का जहर रखना या उसका मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करना गैरकानूनी है क्योंकि इससे जान भी जा सकती है। इसके बाद अगला सवाल यह भी उठेगा कि आखिर सांप के जहर में ऐसा क्या नशा है जो लोगों को अच्छा लगता है? कुछ लोग बताते हैं कि सांप के जहर का नशा करने के बाद उन्हें फील गुड सा लगता है, लेकिन इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है। मगर इस खुशी के साथ खतरनाक चीजें भी आती हैं, जैसे शरीर का अंग काम ना करना, खून बहना और अंदरूनी अंगों को नुकसान होना। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सांप का जहर असली लत नहीं है, क्योंकि इसके बहुत ज्यादा बुरे असर होते हैं।

जैसा कि ऊपर बताया गया कि नोएडा की रेव पार्टी वाली जगह से पुलिस को कोबरा और करैत सांप मिले थे। नशे के लिए भी इन सांपों का इस्तेमाल होता है। पहले सांपों को इन रेव पार्टियों में लाया जाता है। वहां सांप के सिर पर हल्के या किसी यंत्र से तेज थपकी दी जाती है। इसके बाद सांप की जीभ को इंसान के शरीर में काटने वाली जगह पर रखते हैं। सांप उस जगह पर डसता है। डसने के बाद इंसान को चुभन सी महसूस होती है जैसे किसी ने इंजेक्शन दिया हो। चुभन 10 से 40 सेकेंड कक महसूस होती है। सांप के जहर का सेवन करने वाले लोग आमतौर पर पैर या जीभ पर सांप से कटवाते हैं। इसके बाद लोगों को खुशी, भव्यता और अत्यधिक नींद का अनुभव होता है। इसके अलावा लोग घंटों बिस्तर पर पड़े रहते हैं या कमरों में घूमते रहते हैं।

सांपों के जहर का नशा करने का मामला नोएडा के अलावा भी कईव प्रदेशों में चल रहा है। मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम समेत कई मेट्रो शहरों में पहले भी मामले सामने आ चुके हैं। बताया जाता है कि सांप के जहर की तस्करी विदेश से होती है। यह वहां से एक ब्रांडेड बोतल में बंद कराकर लाया जाता है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की होती है। लोगों को इसके लिए मोटी रकम दी जाती है। सांप के जहर से नशा करने का मामला आज का नहीं है। मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम समेत कई मेट्रो शहरों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। सांप के जहर की तस्करी विदेशों से होती है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बंगाल बॉर्डर पर करोड़ों रुपये का सांप का जहर पकड़ा गया। 2016 में इस सांप के जहर ने सबसे ज्यादा खलबली मचाई थी जब लगभग 200 करोड़ का सांप का जहर जब्त किया गया था। यह ब्रांडेड बोतल में बंद करके लाया जाता है। आदिवासी इलाकों में सांप के जहर को सपेरों से सस्ते दामों में खरीदा जाता है। बीते दिनों एक मामला सामने आया था जिसमें एक किलो सांप के जहर के बदले सपेरे को 10 लाख रुपये दिए गए, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्कर ने इस सांप के जहर की कीमत एक करोड़ से ज्यादा की लगाई थी। फर्ज करिए, अगर किसी को 1 लीटर सांप के जहर की जरूरत है तो उसे करीब 200 सांपों को पकड़ना होगा।

क्या एल्विस यादव की लुक्सर जेल में बढ़ाई गई है सुरक्षा?

वर्तमान में एल्विस यादव की लुक्सर जेल में सुरक्षा बढ़ाई गई है! रेव पार्टियों में सांप के जहर के सप्लाई करने के आरोप में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बंद बिग बॉस ओटीटी-2 विनर एल्विश यादव को हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट कर दिया गया है। ग्रेटर नोएडा के लुक्सर जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में एल्विश यादव को रखा गया है। इससे पहले रविवार शाम से एल्विश यादव को लुक्सर जेल के क्वारंटाइन सेल में बंद माफियाओं के साथ रखा गया था। लुक्सर जेल में वर्तमान में कई माफिया बंद हैं। उनमें से 2 माफियाओं के बारे में लुक्सर जेल अधीक्षक ने बताया। जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि वर्तमान में इस जेल में कई माफिया बंद हैं। उनमें से दो माफिया मनोज आसे और अनिल भाटी है। अनिल भाटी सुंदर भाटी गैंग से संबंध रखता है। इसको जेल में आए करीब एक साल से अधिक समय हो गया है। गैंगस्टर ऐक्ट आदि गंभीर धाराओं में सजा काट रहा है। दूसरा माफिया मनोज आसे भी गैंगस्टर ऐक्ट आदि धाराओं में करीब 6 महीने से सजा काट रहा है।

अनिल भाटी वर्तमान में लुक्सर जेल में बंद है। वह कुख्यात सुंदर भाटी का भतीजा है। जिला प्रशासन ने उस पर रासुका लगा दी थी। अनिल भाटी सुंदर के बड़े भाई सहदेव भाटी का बेटा है। गिरोह का कमान भी वही सम्भाल रहा है। बता दें कि वर्ष 2017 नवंबर महीने में अनिल भाटी ने अरुण यादव से सुपारी लेकर अपने शूटर से बीजेपी नेता शिव कुमार यादव की हत्या करवाई थी। उस दिन शिवकुमार अपने ड्राइवर बलीनाथ और प्राइवेट गनर रहीस पाल के साथ पुराना हैबतपुर में बने अपने स्कूल से कार में प्रताप विहार में बने घर जा रहे थे। तिगरी गोल चक्कर के पास अनिल भाटी के भेजे बदमाशों ने दोनों ओर से घेरकर गोलियां बरसाई गई थीं। इस घटना में शिवकुमार, बलीनाथ और रहीसपाल की मौत हो गई थी। इस घटना की साजिश अरुण यादव ने रची थी। अनिल भाटी ने अपने शूटर नरेश तेवतिया, रावण उर्फ अनिरुद्ध भारद्वाज, अमर फौजी उर्फ राजकुमार से अंजाम दिलवाया। इस बर्बर घटना में अनिल भाटी की भूमिका और पुराने आपराधिक रिकॉर्डों को देखते हुए उसके खिलाफ उस समय के गौतमबुद्ध नगर के तत्कालीन डीएम ने रासुका लगाने का फैसला लिया था।

मनोज आसे उर्फ मनोज इमलिया ग्रेटर नोएडा के इमलिया गांव का रहने वाला है। वर्तमान में लुक्सर जेल में बंद है। वह रंगदारी लूट समेत के घटनाओं में शामिल है। वह करीब 20 वर्षों से जरायम की दुनिया में है। वर्ष 2023 अप्रैल तक इस कुख्यात पर एक लाख का इनाम घोषित था। मनोज आसे और उसके चार बदमाशों के साथ वर्ष 2023 अप्रैल माह में रात के समय पुलिस मुठभेड़ के दौरान कासना थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की गोली से घायल अवस्था में उसे दबोचा गया था। उस पर हत्या और रंगदारी समेत करीब 16 आपराधिक केस दर्ज हैं। मनोज आसे पुलिस की फाइलों में हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर है।

उधर, सोमवार और मंगलवार को भी ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय गौतमबुद्ध नगर में वकीलों की हड़ताल की वजह से एल्विश यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई। अब कल एल्विश यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई होने की उम्मीद है। लुक्सर जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह ने एनबीटी ऑनलाइन की टीम को बताया कि उसे लुक्सर जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में सोमवार को शिफ्ट कर दिया गया है। पहले नॉर्मल प्रोसीजर के तहत उसे आम कैदियों के साथ रखा जाना था, लेकिन एक सेलिब्रिटी होने के नाते उसे हाई सिक्योरिटी सेल में बंद किया गया है। उच्च सुरक्षा बैरक में तीन कैदियों के साथ एल्विश को रखा गया है। 17 मार्च यानी रविवार को उसे क्‍वारंटाइन बैरक में रखा गया था। वह कंबल बिछाकर जमीन पर सोया। आम कैदियों के तरह उसे भी रखा गया।

लुक्सर जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह ने आगे बताया कि हाई सिक्योरिटी सेल में कैदियों की संख्या निश्चित नहीं है। हाई सिक्योरिटी सेल एक तरह की पूरी सेल होती है। इसमें 10 से 12 छोटे-छोटे सेल (बैरक) होते हैं। उसमें हम अपने जरूरत के हिसाब से बंदियों को रखते हैं। बाहर से जेल प्रशासनिक के आधार पर जो चालान आते हैं या जेल में किसी प्रकार की सुरक्षा से संबंधित समस्या हो, उसको रखते हैं। जिस दिन एल्विश आया था, उसे क्वारंटाइन सेल में रखा गया था। फिर उसके अगले दिन हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट कर दिया गया। पूरे हाई सिक्योरिटी सेल में कोई भी कुख्यात टाइप का कैदी नहीं है और न ही पूरे जेल में, सभी नार्मल कैदी है। डीसीपी नोएडा विद्या सागर मिश्र ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है। साक्ष्य जुटाए गए हैं। इसके साथ ही साक्ष्य में जो भी सामने आएंगे, उनसे पूछताछ की जाएगी। उन्होंने बताया है कि वीडियो फुटेज की जांच भी की जा रही है, जो भी व्यक्ति की संलिप्तता आएगी, उनसे पूछताछ करेंगे। उन्होंने एल्विश आर्मी की एक्स (ट्विटर) पर कहे गए अपशब्द पर भी कार्रवाई की बात कही। उस पर सोशल मीडिया की टीम कार्रवाई करेगी। डीसीपी नोएडा ने एल्विश की पुलिस कस्टडी रिमांड पर बताया कि जांच में जरूरत पड़ी तो अप्लाई कर सकते हैं। वहीं, पुलिस सूत्रों की मानें तो एल्विश के फोन की भी जांच की जा रही है। इसमें कई राज सामने आ सकते हैं।