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वक्फ बिल पर फैलाए जा रहे झूठ के लिए क्या बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू?

हाल ही में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बिल पर फैलाए जा रहे झूठ के बारे में एक बयान दिया है! वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर चल रहे झूठ पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चिंता जताई है। ऐसा लग रहा है जैसे कई मुस्लिम संस्थाएं वक्फ बिल के पीछे पड़ गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ लोग झूठा प्रचार कर रहे हैं कि सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक के जरिए मुसलमानों की जमीन छीन लेगी। उन्होंने इस ‘नैरेटिव’ को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के कई लोगों ने विधेयक का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री के बयान से लग रहा है वक्फ को लेकर जिस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं उससे वो हैरान हैं। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस विधेयक के बारे में कुछ भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। कुछ लोग झूठ फैला रहे हैं कि मुसलमानों की संपत्ति सरकार ले लेगी। कोई भी हिंदू, बौद्ध, ईसाई या सिख किसी की जमीन नहीं छीनने जा रहा है। विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करना है। एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रिजिजू ने कहा कि कई मुस्लिम संगठनों ने विधेयक का समर्थन किया है क्योंकि उनका मानना है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग समुदाय से संबंधित कार्यों के लिए किया जाना चाहिए।

रिजिजू ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को करोड़ों की संख्या में सिफारिशें मिली हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विधेयक के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। सूत्रों ने रविवार को कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसदीय समिति को ईमेल के जरिये 1.2 करोड़ प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। बीजेपी के नेता जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी को दस्तावेजों के साथ 75,000 प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इसमें अपने-अपने दृष्टिकोण का समर्थन किया गया है। वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी 26 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच पांच राज्यों में अनौपचारिक चर्चा करेगी। इस दौरान वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों को सरल करने के प्रयास में विभिन्न हितधारकों को शामिल किया जाएगा।

यह अधिनियम पूरे देश में पंजीकृत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को नियंत्रित करता है। पहली बैठक 26 सितंबर को मुंबई में होगी, जिसमें महाराष्ट्र सरकार, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह प्रारंभिक बैठक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके आगामी परामर्शों का मार्ग प्रशस्त करेगी। अगले दिन, 27 सितंबर को, संयुक्त संसदीय समिति अहमदाबाद, गुजरात में विचार-विमर्श करेगी। इसमें गुजरात सरकार, गुजरात वक्फ बोर्ड और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यही नहीं कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से लाए गए नए वक्‍फ विधेयक की तारीफ की है। उन्‍होंने कहा कि वक्‍फ बोर्ड के पास इतनी ज्‍यादा ताकत होना देश के लिए घातक हो सकता है। वक्‍फ बिल लाने के लिए वह पीएम मोदी को धन्‍यवाद देते हैं। राजा भैया इन दिनों गुजरात के राजकोट में हैं। वहां महाराजा मांधाता सिंह की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में उन्‍होंने वक्‍फ बोर्ड की ताकत को राष्‍ट्रीय चिंता का विषय बताया। राजा भैया ने कहा कि भारत को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश में वक्‍फ बोर्ड जैसी कोई संस्‍था नहीं है। पता नहीं क्‍यों भारत में इस मुद्दे पर इतनी बहस क्‍यों होती है।

राजा भैया ने वक्‍फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए। उन्‍होंने कहा कि वक्‍फ बोर्ड बिना किसी न्‍यायिक हस्‍तक्षेप के संपत्तियों को अपने अधीन कर सकता है। उन्‍होंने 2013 के वक्‍फ एक्‍ट का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत वक्‍फ बोर्ड को जो अधिकार मिले हैं, वे सामान्‍य नागरिक अधिकारों के विपरीत हैं। यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह राष्‍ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन का मामला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए राजा भैया ने कहा कि उन्‍होंने वक्‍फ बोर्ड पर नियंत्रण लाने के लिए जो कदम उठाए हैं वे तारीफ के लायक हैं। यह कठिन फैसला है और इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा। हमें अपने नेता के फैसले का समर्थन करना चाहिए। हमें उन पर भरोसा है। कुंडा विधायक ने अपने भाषण में 2013 में तत्‍कालीन यूपीए सरकार द्वारा वक्‍फ बोर्ड की शक्तियों में किए गए विस्‍तार का भी जिक्र किया। उन्‍होंने इसे एकतरफा बताया। उन्‍होंने कहा कि वक्‍फ बोर्ड का इतना ताकतवर होना देश के लिए घातक हो सकता है। वक्‍फ बोर्ड का मौजूदा स्‍वरूप और उसकी शक्तियां भारतीय समाज और संविधान के लिए बड़ी चुनौती है।

अमेरिका में जाकर विश्व शांति के लिए क्या बोले पीएम मोदी?

हाल ही में पीएम मोदी ने अमेरिका में जाकर विश्व शांति के लिए एक बयान दे दिया है! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूयॉर्क में यूएन के ‘समिट ऑफ फ्यूचर’ में कहा कि हमारी सामूहिक ताकत में ही सफलता छिपी है ना कि युद्ध के मैदान में। वैश्विक शांति और विकास के लिए ग्लोबल संस्थानों में रिफॉर्म्स जरुरी हैं। रिफॉर्म ही रिलिवेंस की चाभी है। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन यूनियन को नई दिल्ली में हुई जी-20 समिट में स्थाई सदस्यता इसी दिशा में एक अहम कदम था। मोदी ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक तरफ वैश्विक आतंकवाद जैसा खतरा है तो दूसरी तरफ साइबर, मेरीटाइम, स्पेस जैसे अनेक संघर्ष के नए मैदान बन रहे हैं। इन सभी विषयों पर ग्लोबल एक्शन को ग्लोबल एंबिशन के हिसाब से होना चाहिए। टेक्नॉलजी के सेफ और संतुलित इस्तेमाल के लिए रेगुलेशन की आवश्यता है। मोदी ने कहा कि हमें ऐसी ग्लोबल डिजिटल गर्वनेंस चाहिए जिससे राष्ट्रीय प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रहे।

ग्लोबल गुड के लिए भारत अपना डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरे विश्व से साझा करने के लिए तैयार है। भारत के लिए वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर एक कमिटमेंट है। पूरी मानवता के हितों की रक्षा और वैश्विक समृद्धि के लिए भारत मन वचन कर्म से काम करता रहेगा। पीएम मोदी ने कहा कि जून में अभी-अभी मानव इतिहास के सबसे बड़े चुनाव में भारत के लोगों ने मुझे लगातार तीसरी बार सेवा का अवसर दिया है और मैं यहां मानवता के छठे हिस्से की आवाज आप तक पहुंचाने आया हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिनों के अमेरिका दौरे पर दूसरे दिन रविवार को आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के CEO के साथ ‘सार्थक’ गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत में विकास की संभावनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।बैठक में AI, क्वॉन्टम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसी बेहद आधुनिक टेक्नॉलजी पर काम करने वाली अमेरिका की 15 प्रमुख कंपनियों के CEO ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कंपनियों को सहयोग और इनोवेशन के मामले में भारत की विकास गाथा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पीएम मोदी के साथ CEO की गोलमेज बैठक में गूगल के सुंदर पिचाई ने कहा कि हम भारत में एआई में मजबूती से निवेश कर रहे हैं। पिचाई ने 120 मिलियन डॉलर के ‘ग्लोबल एआई ऑपर्च्युनिटी फंड’ की घोषणा की। ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा से एआई, भारत के लिए इसकी क्षमता और अवसरों के बारे में जानने के इच्छुक रहे हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र में ‘समिट ऑफ द फ्यूचर’ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति के लिए रिफॉर्म की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि जून में अभी मानव इतिहास के सबसे बड़े चुनावों में भारत के लोगों ने मुझे लगातार तीसरी बार सेवा का अवसर दिया है और आज मैं इसी मानवता के छठे हिस्से की आवाज आप तक पहुंचाने यहां आया हूं। जब हम ग्लोबल फ्यूचर के बारे में बात कर रहे हैं, तो मानव-केंद्रित दृष्टिकोण सर्वप्रथम होनी चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, ‘सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए, हमें मानव कल्याण, भोजन, स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। हमने भारत में 250 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर दिखाया है कि सतत विकास सफल हो सकता है। हम सफलता के इस अनुभव को ग्लोबल साउथ के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं।’

यूएन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मानवता की सफलता हमारी सामूहिक शक्ति में निहित है, युद्ध के मैदान में नहीं। वैश्विक शांति और विकास के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार महत्वपूर्ण हैं। सुधार प्रासंगिकता की कुंजी है… एक तरफ वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद जैसा बड़ा खतरा है, वहीं दूसरी तरफ साइबर, मैरिटाइम, स्पेस जैसे संघर्ष के नए मैदान बन रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर वैश्विक कार्रवाई वैश्विक महत्वाकांक्षा से मेल खानी चाहिए।’

नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘टेक्नोलॉजी के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए संतुलित विनियमन की आवश्यकता है। हमें ऐसे वैश्विक डिजिटल शासन की आवश्यकता है जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता अक्षुण्य रहे। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एक पुल होनी चाहिए न कि बाधा।’ उन्होंने आगे कहा कि भारत के लिए ‘वन अर्थ’, ‘वन फैमिली’ और ‘वन फ्यूचर’ एक प्रतिबद्धता है। यही प्रतिबद्धता हमारे ‘वन अर्थ’, ‘वन हेल्थ’ और ‘वन सन’, ‘वन वर्ल्ड’, ‘वन ग्रिड’ जैसे पहल में भी देखाई देता है!

मौसम विभाग के अनुसार कितने दिनों की रही है बारिश?

आज हम आपको बताएंगे की मौसम विभाग के अनुसार बारिश कितने दिनों की और रही है! मॉनसून की विदाई शुरू हो गई है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमी राजस्थान और कच्छ के कुछ हिस्सों से सोमवार को इसकी शुरुआत हो गई। इसके साथ ही देश से मॉनसून की विदाई का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हालांकि, मॉनसून की वापसी की सामान्य तारीख 17 सितंबर है लेकिन इस बार देरी हुई है। इस बार मॉनसून के दौरान सामान्य से 5% अधिक बारिश हुई है। इस साल मॉनसून की विदाई में देरी हुई है। यह लगातार 14वां साल है जब मॉनसून की वापसी देर से हुई है। पिछले साल मॉनसून की वापसी 25 सितंबर को शुरू हुई थी। तकनीकी रूप से मॉनसून का मौसम 30 सितंबर को समाप्त होता है, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक चलती है।

जहां तक इसके आगमन की बात है तो इस साल केरल और उत्तर-पूर्व के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून की शुरुआत 30 मई को एक साथ हुई थी जबकि इसकी सामान्य तारीख क्रमशः 1 जून और 5 जून है। मॉनसून ने 2 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लिया था जो कि इसकी सामान्य तारीख (8 जुलाई) से छह दिन पहले थी। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, चार महीने के मॉनसून सीजन (जून-सितंबर) का समापन ‘सामान्य से अधिक’ बारिश के साथ होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि मॉनसून दीर्घकालिक औसत (LPA) के 105-110% की श्रेणी में रहने की उम्मीद है। सोमवार तक हुई कुल बारिश (1 जून से 23 सितंबर तक) इस अवधि की ‘सामान्य’ बारिश से 5% अधिक दर्ज की गई है। हालांकि, सीजन के पहले महीने (जून) में 11% वर्षा की कमी दर्ज की गई थी।

इस साल केरल और उत्तर-पूर्व में मॉनसून 30 मई को ही आ गया था, जबकि आमतौर पर ये 1 जून और 5 जून को आता है। इस बार 2 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश में आ गया था। यह सामान्य तारीख 8 जुलाई से छह दिन पहले था। आमतौर पर, मॉनसून 38 दिनों (1 जून से 8 जुलाई) में पूरे भारत को कवर कर लेता है। इस साल, जून में धीमी प्रगति के बावजूद, इसने 34 दिनों में ऐसा किया। यह लगातार तीसरा साल था जब मॉनसून ने 2 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लिया। बता दें कि दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है। सितंबर की शुरुआत से जहां ज्यादातर जगहों पर मॉनसून जमकर बरसा है, वहीं अब इस पर ब्रेक लगने वाला है। इसी के साथ आने वाले कुछ दिनों में तापमान में इजाफा होने के आसार हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में 19 सितंबर से तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने वाली है, जिसमें उत्तर-पश्चिम भारत भी शामिल है। वहीं मौसम विभाग के मुताबिक, 22 सितंबर तक उत्तर-पश्चिम भारत से मॉनसून की वापसी शुरू हो सकती है।

अगर ऐसा होता है तो यह पिछले आठ सालों में मॉनसून की सबसे जल्दी वापसी होगी। मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके बाद तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी। ये दौर कुछ दिनों तक जारी रहेगा। वहीं अक्टूबर की शुरुआत से दिन और रात ठंडे होने लगेंगे। 19 सितंबर तक तापमान सामान्य से कम रहेगा लेकिन उसके बाद थोड़ा बढ़ जाएगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि 19 सितंबर के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश धीरे-धीरे कम होने लगेगी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 सितंबर से 3 अक्टूबर के हफ्ते में पूर्वी भारत को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की संभावना कम है।

मौसम विभाग अब आने वाले महीनों को लेकर पूर्वानुमान जारी कर रहा है। इस साल अल नीनो से ला नीना में बदलाव हो सकता है, जिससे पूरे देश का मौसम प्रभावित हो सकता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम. राजीवन ने कहा, ‘ठंड के मौसम का आना इस बात पर निर्भर करता है कि मध्य अक्षांश के पश्चिमी विक्षोभ कैसे आगे बढ़ते हैं। ला नीना वर्ष में हमें सामान्य से ज्यादा ठंड की उम्मीद करनी चाहिए।’ अल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर में होने वाले तापमान चक्र हैं, जिनका वैश्विक मौसम पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। अल नीनो तब होता है जब भूमध्यरेखा के पास प्रशांत महासागर सामान्य से ज्यादा गर्म होता है। इससे भारत में सूखे की स्थिति पैदा होती है। ला नीना इसके विपरीत होता है।

एक अन्य एक्सपर्ट्स ने कहा कि इस महीने के अंत तक मॉनसून के वापस जाने की उम्मीद है। प्राइवेट वेदर एजेंसी महेश पलावत ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि हवाओं के उत्तर दिशा में बदलते ही जल्द ही तापमान गिरना शुरू हो जाएगा। लेकिन यह ठंडा होगा या मामूली गिरावट होगी, यह हम नहीं कह सकते क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी क्षेत्र को कब प्रभावित करना शुरू करते हैं।’

बता दें कि इस साल जून की शुरुआत से ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। 1 जून से देश में औसतन 8% ज्यादा बारिश हुई है। वहीं पिछले साल मॉनसून 25 सितंबर के आसपास वापस जाना शुरू हुआ था। वहीं 2022 में 30 सितंबर के आसपास।

बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारत की टीम का ऐलान, लंबे समय बाद KKR के स्पिनर को मिला मौका

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टेस्ट सीरीज के बाद भारत बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज खेलेगा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उस सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है. केकेआर के इस स्पिनर को लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम में बुलावा मिला है. टेस्ट सीरीज के बाद भारत बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज खेलेगा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उस सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है. केकेआर के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम में बुलावा आया है। इसके अलावा मयंक यादव को पहली बार राष्ट्रीय टीम में बुलाया गया है.

आगामी टी20 फॉर्मेट में उन लोगों को लेकर टीम बनाई गई है जिन पर भारत निर्भर है. ध्यान भावी पीढ़ियों पर है। युवा क्रिकेटरों का चयन किया गया है. इसी तरह रियान पराग, हर्षित राणा, नितीश रेड्डी जैसे आईपीएल में अच्छा खेलने वाले क्रिकेटरों को टीम में मौका मिला।

महत्वपूर्ण बात वरुण को पाना है. 2020 में यूएई में आईपीएल में केकेआर के लिए अच्छा खेलने के बाद उन्हें 2021 टी20 वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया गया। लगभग हर मैच खेलने के बावजूद वरुण यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सके। केवल छह टी20 मैचों के बाद उन्हें अचानक राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया गया। लेकिन पिछले आईपीएल में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. केकेआर को चैंपियन बनाने में वरुण ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने 15 मैचों में 21 विकेट लिए. अर्थव्यवस्था की दर आठ के आसपास। परिणाम बहुत बुरा प्रदर्शन नहीं है. वरुण को घरेलू मैदान पर उनकी स्पिन की प्रभावशीलता को देखते हुए चुना गया है।

मयंक यादव को बुलाना भी जरूरी है. लखनऊ सुपर जाइंट्स के इस गेंदबाज ने पिछले आईपीएल में लगातार 150 किलोमीटर से ज्यादा गेंदबाजी करके धूम मचा दी थी. लेकिन ज्यादा देर तक खींच नहीं सके. चोट लगना वह उस चोट को ठीक करने के लिए लंबे समय तक राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में रहे हैं। बोर्ड ने होनहार गेंदबाजों के साथ ‘धीमे चलो’ की नीति अपनाई। हाल ही में मयंक पूरे शबाब पर हैं. फिटनेस क्लीयरेंस मिलने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया. टी20 के लिए किसी भी टेस्ट टीम को नहीं चुना गया. शुबमन गिल, यशस्वी जयसवाल, ऋषभ पंत जैसे सभी युवा क्रिकेटरों को आराम दिया गया है। टी20 के लिए बिल्कुल नई टीम का चयन किया गया है.

टीम इंडिया: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, रियान पराग, नितीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, जितेश शर्मा, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और मयंक यादव. कानपुर टेस्ट के पहले दिन दर्शकों के बीच बांग्लादेश के समर्थक टाइगर रवि की तबीयत बिगड़ गई. पहले तो उसने दावा किया कि उसे कानपुर की भीड़ ने पीटा है. बाद में उस दावे से हट गये. भारत सरकार इस बार रवि को वापस देश भेज रही है. एक खेल देखने और एक विशेष संगठन को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल वीजा पर भारत आने के अपराध के लिए उन्हें भविष्य में भारत में प्रवेश से पांच साल के लिए निर्वासित किया जा सकता है।

बांग्लादेशी मीडिया “सैमी न्यूज” के मुताबिक, रोबी को शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से रिहा होने के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की. उन्हें पहले ही दिल्ली भेजा जा चुका है. वहां से वह रविवार को ढाका लौटेंगे।

बांग्लादेश की ताज़ा स्थिति के कारण हाल ही में भारत का वीज़ा प्राप्त करने में कुछ सख्ती बरती जा रही है। लेकिन मेडिकल वीजा मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती. कथित तौर पर रवि ने उसका इस्तेमाल किया. समाचार एजेंसी पीटीआई का दावा है कि रवि को टीबी है. यह रोग संक्रामक है और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर नहीं रह सकता। दावा किया जाता है कि रवि उसी बीमारी का इलाज कराने के लिए भारत आए थे.

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पुलिस ने रवि के पासपोर्ट, वीजा और सहायक दस्तावेजों की जांच की। बताया गया है कि मेडिकल वीजा के साथ भारत आने के बावजूद रवि को अभी तक कोई चिकित्सा उपचार नहीं मिला है। उन्होंने गैलरी में अपने कपड़ों से एक खास कंपनी का प्रचार भी किया, जो कानून के खिलाफ है.

स्वदेश वापसी के अलावा रवि पर अगले साल भारत में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। रवि ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में खुद दावा किया था कि उन्हें भारतीय उच्चायोग से वीजा नहीं मिला। वह बांग्लादेश से मालदीव गए और वहां एक दोस्त की मदद से भारत आने के लिए मेडिकल वीजा प्राप्त किया। पुलिस के मुताबिक इस वीजा के साथ खेल देखने आकर उसने नियम तोड़े.

एक बार में थोड़ा-थोड़ा काटेंगे तो स्वाद बदल जाएगा, जानिए इसे डालने का तरीका

हर पाड़ा को फाड़कर बनाया जा सकता है. फिर, विभिन्न खाद्य पदार्थों में चाइव्स मिलाकर स्वाद बदला जा सकता है। जानें रेसिपी. उपवास के दिनों में फालर के रूप में खाया जाता है। गर्मी के दिनों में भीगे हुए चने का पानी पेट को ठंडा रखने में मदद करता है। दोबारा स्क्रैप करके कई तरह के पोस्ट बनाए जाते हैं. हालाँकि, लौंग का उपयोग करके विभिन्न खाद्य पदार्थों का स्वाद भी बढ़ाया जा सकता है। चिर्ड का प्रयोग विभिन्न पदों पर विभिन्न कारणों से किया जाता है, क्या आप जानते हैं?

पट्टी समोसा

महाराष्ट्र में पैटी समोसा का चलन है. यह तुरही का एक रूप है. हालाँकि, जैसा कि बंगाल के सिंगारा में गोले बनाने के लिए आटे का उपयोग किया जाता है, यहाँ ऐसा नहीं है। पैटी एक पतली पतली पैटी होती है जिसका उपयोग समोसे में किया जाता है। यह भी आटे या आटे से बना होता है, लेकिन यह कागज़ जैसा पतला होता है। इसे स्टोर पर खरीदा जा सकता है। पट्टी समोसे में प्याज भरने का रिवाज है. इसका प्रयोग चिद्रे में किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नमक और मसाले डालने के बाद प्याज पानी छोड़ता है। इससे पानी सोखने में मदद मिलती है. यदि आप एक पूरा कप कटा हुआ प्याज लेते हैं, तो आपको एक कप कद्दूकस किया हुआ लेना होगा। मिर्च, प्याज, भुना हुआ जीरा, मिर्च पाउडर, हरी मिर्च, चाट मसाला, स्वादानुसार नमक एक साथ अच्छी तरह गूंथ लें. इसके बाद पैन को भरकर समोसे को कई फोल्ड में बना लेना चाहिए. इसे तेल में डीप फ्राई करना चाहिए.

चिर डोसा

डोसा सूजी से बनाया जाता है. इसे चीयरड के साथ मिलाकर डोसा बनाया जा सकता है. 1 कटोरी को मिक्सर में पीस लीजिये. सूजी को बराबर मात्रा में मिला लें. इसमें थोड़ा सा अदरक, करी पत्ता, स्वादानुसार नमक और पानी डालकर फेंट लें। मिश्रण ज्यादा पतला या गाढ़ा नहीं होना चाहिए. – इसके बाद एक फ्लैट पैन या डोसा मेकर में थोड़ा सा तेल लगाकर डोसा बनाएं.

मसले हुए आलू के कटलेट

आलू कटलेट या बरा में थोड़ा सा मिलाने से स्वाद के साथ-साथ स्वाद भी बदल जाएगा. – धुले हुए झींगे, उबले आलू, प्याज, मिर्च, स्वादानुसार नमक, चाट मसाला मिलाकर कटलेट बनाएं. कॉर्नफ्लोर बॉल्स को पानी में डुबोएं और उनके बाहरी हिस्से को बिस्किट पाउडर से कोट करें। – इसके बाद आलू कटलेट को डीप फ्राई कर लें.

बंगाली खाना पकाने का मतलब है तेल से भरपूर। अगर इसे उबालकर भी खाया जाए तो सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाले बिना इसका स्वाद अच्छा नहीं लगता। अगर यह तला हुआ है तो कोई बात नहीं. छने हुए तेल में डुबाकर न तलें तो मन नहीं भरता। आप दिन भर में 3-4 चम्मच तेल खाने की कितनी भी कोशिश कर लें, अक्सर लक्ष्मणरेखा पार हो जाती है नतीजा यह होता है कि परेशानी बढ़ जाती है खाना पकाने में सिर्फ कितना तेल खर्च होता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कौन सा तेल खाया जाता है और कैसे, यह भी महत्वपूर्ण है। आप बाजार से जो तेल खरीद रहे हैं उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जांच करना भी जरूरी है। इसके अलावा अगर तेल का इस्तेमाल कैसे करना है इसके बारे में भी जानकारी नहीं है तो भी खतरा बढ़ जाएगा.

खाना पकाने का तेल खरीदते समय क्या देखें?

1) सबसे पहले तेल की मात्रा जांचें. खरीदारी के समय, संतृप्त वसा और ट्रांस वसा के लिए लेबल की जाँच करें। यदि इन दोनों वसा की मात्रा अधिक हो तो उस तेल में पका हुआ भोजन खाने से रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है जिससे हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाएगा।

2) ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आईसीएमआर) की जानकारी के मुताबिक, तेल में ओमेगा 6 और ओमेगा 3 फैटी एसिड के अनुपात की भी जांच करनी चाहिए। आम तौर पर, तेल में ओमेगा-6 और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अनुपात 2:1 और 4:1 के बीच होना चाहिए। अगर आपको तेल खरीदते समय यह अनुपात समझ में नहीं आ रहा है तो भी आपको यह जांच लेना चाहिए कि इसमें ओमेगा 3 या ओमेगा 6 फैटी एसिड है या नहीं। अगर इसमें विटामिन ई है तो यह भी ठीक है।

3) तेल का स्मोक पॉइंट भी महत्वपूर्ण है. कोई तेल कितनी गर्मी झेल सकता है यानी जिस तापमान पर वह जलने लगता है और हानिकारक रसायन पैदा करता है उसे ‘स्मोक पॉइंट’ कहा जाता है। इसका उपयोग तेल की अच्छाई और बुराई का आंकलन करने के लिए भी किया जाता है।

ऐसे तेल खरीदने चाहिए जो उच्च तापमान पर विघटित न हों और खराब रसायन न बनाएं उदाहरण के लिए, बादाम, सरसों, कनोला, सूरजमुखी, सोयाबीन, चावल की भूसी या तिल का तेल। जैतून के तेल का धुंआ बिंदु भी काफी कम होता है इसलिए खाना पकाने में जैतून के तेल का उपयोग करना स्वास्थ्यवर्धक है।

नारियल तेल का धुंआ बिंदु 350 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है, जो इसे तलने के लिए एक बेहतरीन तेल बनाता है।

जैतून के तेल का धुआँ बिंदु 325-375 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है और सोयाबीन तेल का धुआँ बिंदु लगभग 450 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है। ये दोनों तेल डीप फ्राई करने, तेज आंच पर किसी चीज को डीप फ्राई करने के लिए बहुत अच्छे हैं।

सूरजमुखी तेल का धुआं बिंदु 475-500 डिग्री फ़ारेनहाइट है। इस तेल का इस्तेमाल ज्यादातर किसी भी चीज को तेज आंच पर पकाने के लिए किया जाता है।

सरसों के तेल का धुंआ बिंदु लगभग 480 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है। सरसों का तेल मध्यम उपयोग में कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। हालाँकि, हृदय रोगियों या उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार खाना पकाने के तेल का सेवन करना चाहिए।

यदि आप सभी फैटी एसिड का लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको तेलों के मिश्रण का उपयोग करना चाहिए जैसे सरसों, चावल की भूसी या जैतून का तेल या सूरजमुखी का तेल। याद रखें, तलने के बाद बचे हुए तेल का उपयोग न करना ही बेहतर है। जले हुए तेल में खाना पकाने या तलने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाएगा। कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट से किया अपना वादा नहीं निभाया! सिर्फ 40 सीसी कैमरे ही क्यों आए?

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क्यू सागर दत्ता अस्पताल सागर दत्त के जूनियर डॉक्टरों के अनुसार, आरजी टैक्स मामले की सुनवाई के दौरान राज्य ने मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा बढ़ाने के कई आश्वासन दिये थे. उनमें से एक था सीसी कैमरे लगाने का काम. राज्य प्रशासन ने मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से किया अपना वादा नहीं निभाया है. ऐसा दावा शनिवार को कमरहाटी के सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने किया. उनके मुताबिक 17 सितंबर को आरजी टैक्स मामले की सुनवाई के दौरान राज्य में मेडिकल कॉलेजों की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई आश्वासन दिये थे. इनमें से एक था अगले सात से 14 दिनों में सीसीटीवी कैमरे लगाना. लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी जूनियर डॉक्टरों का दावा है कि इस संबंध में काम शुरू नहीं हुआ है.

सागर दत्त मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार रात एक मरीज की मौत के बाद तनाव फैल गया। मरीज के परिजनों पर डॉक्टरों पर मारपीट का आरोप लगाया गया है. इस घटना के बाद उस अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी. इस माहौल में राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा के मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक, सागर दत्त के पास फिलहाल 100 से भी कम सीसीटीवी कैमरे हैं. अधिकारियों की ओर से बताया गया कि कुल 360 सीसी कैमरे लगाये जायेंगे. लेकिन उसके बाद कोई काम आगे नहीं बढ़ा.

देरी की बात स्वीकारते हुए अधिकारियों ने कहा, टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई है. हालांकि उन्होंने बताया कि 40 सीसी कैमरे शनिवार को ही अस्पताल पहुंच गये थे. जूनियर डॉक्टरों का सवाल, क्या 14 दिन के अंदर 360 सीसी कैमरे चालू करना संभव है? जूनियर डॉक्टरों ने दावा किया कि अस्पताल के अधिकारियों को यह नहीं पता कि सीसीटीवी कैमरे कहां और कैसे संचालित होते हैं। इस संदर्भ में वे शुक्रवार की घटना को उदाहरण के तौर पर दिखा रहे हैं. आरोप है कि अगर आरोपियों की तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद हो भी जाएं तो अधिकारियों को यह समझने में कई घंटे लग जाते हैं कि निगरानी कैमरे कहां से संचालित हो रहे हैं।

मृत मरीज के परिजनों पर अस्पताल की चौथी मंजिल पर चढ़कर डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है. हमले के दौरान महिला डॉक्टरों को भी नहीं बख्शा गया. जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक, उनमें से कई लोगों ने डर के कारण टॉयलेट या रेस्ट रूम में शरण ली. लेकिन टॉयलेट के सामने कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं होने के कारण आरोपियों की पहचान करने में देरी हुई. इसके अलावा, उनका मानना ​​है कि अगर पुलिस ने वादे के मुताबिक सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखी होती तो मरीज के परेशान परिवार के सदस्यों को रोका जा सकता था।

सागर दत्त के रेजिडेंट डॉक्टर आकाश रॉय ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिन की सुनवाई में कहा गया था कि सात से 14 दिनों के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएंगे. आज 12 दिन हो गये. सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए अस्पताल में 360 स्थानों की पहचान की गई है। मैंने सुना है कि आज केवल 40 कैमरे आये हैं।” 17 सितंबर को आरजी टैक्स मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने पूछा कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य ने क्या कदम उठाए हैं. अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इस पर राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम ने रिपोर्ट दी. राज्य ने कोर्ट को बताया कि राज्य के सभी अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए शौचालय, विश्राम कक्ष, सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे. डॉक्टरों को ड्यूटी रूम में सुरक्षा मुहैया कराने के लिए भी सूचित किया गया है. जूनियर डॉक्टरों के एक सूत्र के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव मनोज पंत के साथ उनकी बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई.

जूनियर डॉक्टर आश्विन की शरद ऋतु में आंदोलन की मशाल जलाये रखना चाहते हैं. उन्होंने ऐसा प्लान बनाया है. मंगलवार को जूनियर डॉक्टरों की जीबी (जनरल बॉडी) बैठक थी. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने वहां दो से तीन चरण के कार्यक्रम का मसौदा तैयार किया है. जिनमें से पहला शुक्रवार, 27 सितंबर को होने वाला है। अक्टूबर की शुरुआत में देवी पक्ष की शुरुआत में जूनियर डॉक्टर अपने आंदोलन को और बड़ा करना चाहते हैं. जिसकी मुख्य मांग पीड़िता को न्याय दिलाना है. वे स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी कुछ अन्य मांगें भी सामने रखना चाहते हैं. जिनमें से एक है बंगाल के स्वास्थ्य क्षेत्र से ‘खतरे की संस्कृति’ को जड़ से खत्म करना।

जूनियर डॉक्टर शुक्रवार को दक्षिण कोलकाता के ढांढन्या थिएटर में नागरिक सम्मेलन आयोजित करने जा रहे हैं। हालांकि यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि अक्टूबर की शुरुआत में कैसे और किस तरह का आंदोलन होगा, लेकिन कई जूनियर डॉक्टर निजी बातचीत में कह रहे हैं कि वे आंदोलन का ‘प्रभाव’ पूरे बंगाल में फैलाना चाहते हैं. . जूनियर डॉक्टर जानबूझ कर एक और चीज ‘चोट’ पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. वही ‘चेहरा’ है. जो लोग जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में थे या जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात की थी, उन्हें कई लोगों ने आंदोलन का ‘चेहरा’ बताया है। लेकिन किंजल नंदा से लेकर देबाशीष हलदर या रुमेलिका कुमारा तक, इनमें से कोई भी व्यक्तिगत रूप से या कुछ लोग ‘आंदोलन के चेहरे’ नहीं हैं। इस आंदोलन का चेहरा है ‘जनता’. वे जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन के सामाजिक स्वरूप को बरकरार रखना चाहते हैं. जिस तरह आम लोग जूनियर डॉक्टरों के साथ खड़े हैं, उसी तरह जूनियर डॉक्टर भी समाज के विभिन्न वर्गों की मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन में शामिल होना चाहते हैं. वे भी उन आंदोलनों में शामिल हो रहे हैं.

रात को खाने के बाद दोपहर में टहलने से कम होगा वजन! कितनी देर तक चलना जरूरी है?

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खाने के बाद टहलना शरीर के लिए अच्छा होता है। लेकिन अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो खाने के बाद कितनी देर तक टहलना चाहिए, क्या आप जानते हैं? क्या आप सितारों की तरह पतली कमर और सपाट पेट चाहते हैं? लेकिन आपको कड़ी मेहनत करनी होगी. पर क्या करूँ! चलना, व्यायाम करना, या वजन के साथ व्यायाम करना!

स्लिम बॉडी पाने के लिए कई तरह के व्यायाम किए जा सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंच और डिनर के बाद आधे घंटे तक पैदल चलने से आप अपनी इच्छा पूरी कर सकते हैं?

अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन में कहा गया है कि चाहे दोपहर हो या रात, आपको खाने के बाद 30 मिनट तक टहलना चाहिए। तभी वजन कम होगा. लेकिन खाने के कितनी देर बाद टहलना है? तेज़ या धीमी? कितनी तेजी से तेजी से मोटा होकर चलना है?

अध्ययनों से पता चला है कि खाना खाने के एक घंटे बाद बिना समय बर्बाद किए टहलने से ज्यादा फायदेमंद है। यानी आपको खाने के बाद जितनी जल्दी हो सके चलना शुरू कर देना चाहिए। नतीजों से पता चला कि थोड़ा सा चलने से एक महीने में तीन किलो वजन कम हो गया।

कई लोगों को पेट फूलना, पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। खाने के बाद टहलने से पाचन क्रिया बेहतर होती है, ब्लड शुगर लेवल भी नियंत्रित रहता है। ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है. कार्बोहाइड्रेट से शरीर को ऊर्जा मिलती है। लेकिन अगर आप शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता से अधिक नियमित रूप से खाते हैं, तो वसा जमा हो जाती है। पैदल चलने से वजन बढ़ना या वसा जमा होना नियंत्रित रहता है।

लेकिन, काम के बीच खाने और टहलने की फुरसत किसके पास है? तो आप अपनी सुविधानुसार कुछ समय निकाल सकते हैं।

1. कार्यालय को अक्सर आपातकालीन कॉल करनी पड़ती है। समय बचाने के लिए आप खाने के बाद अपने फोन के साथ बाहर जा सकते हैं। यदि कार्यालय परिसर में खाली जगह हो तो आप खाना खाने के बाद टहल सकते हैं और उस समय फोन पर बात कर सकते हैं। लेकिन भीड़ भरी सड़क पर फोन लेकर चलना खतरनाक हो सकता है। इस संबंध में सावधानी बरतनी जरूरी है. 2. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा मधुमेह पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, यदि मधुमेह का रोगी दिन में तीन बार खाने के बाद 15 मिनट तक चलता है, तो यह एक बार में 45 मिनट तक चलने की तुलना में अधिक फायदेमंद है।

3. यदि आप पहले 5-10 मिनट तक समान गति से न चलकर धीरे-धीरे चल सकते हैं, तो आप तेजी से कैलोरी बर्न कर सकते हैं। इस तरह अगर आप पहले धीरे-धीरे चलेंगे, फिर गति बढ़ा देंगे और फिर धीरे-धीरे चलेंगे तो आपकी चर्बी तेजी से घटेगी।

खाने के बाद आपको न सिर्फ खाना चाहिए, बल्कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए टहलना भी चाहिए। दिन हो या रात, भर पेट खाने के बाद कुछ देर सक्रिय रहना जरूरी है। इसलिए डॉक्टर खाने के बाद कम से कम 10 मिनट तक टहलने की सलाह देते हैं। अगर आप खाने के बाद एक्टिव रहते हैं तो शरीर बेहतर रहता है। पाचन संबंधी कोई गड़बड़ी नहीं होती. भरपेट भोजन के बाद 10 मिनट की सैर क्या बदल सकती है जिंदगी?

1) खूब कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी युक्त खाना खाएं? ऐसे में पैदल चलने का कोई विकल्प नहीं हो सकता. पेट की चर्बी कम करने का यही एकमात्र तरीका है।

2) मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी नियमित रूप से खाने के बाद कम से कम 10 मिनट तक टहलना चाहिए। क्योंकि खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, इसलिए टहलने से यह नियंत्रण में आ जाता है।

3) खाने के बाद 10 मिनट तक टहलने से हाई ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खाने के बाद टहलना सेहतमंद हो सकता है। कई बार नियमित रूप से टहलने से भी ब्लड प्रेशर का स्तर नियंत्रण में आ जाता है.

स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम, योग के कितने भी विकल्प हों, वास्तव में नियमित पैदल चलने की तुलना में कुछ भी नहीं है। लेकिन इस मामले में 11 मिनट तक टहलने का अतिरिक्त महत्व है। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि 11 मिनट तक चलने से समय से पहले मौत का खतरा कम हो जाता है। यहां तक ​​कि पुरानी बीमारियों की समस्या भी कम हो जाती है। ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन’ में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि अगर आप नियमित रूप से 11 मिनट तक टहलते हैं, तो समय से पहले मौत का खतरा लगभग 25 प्रतिशत कम हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर आप हर दिन 11 मिनट पैदल चल सकते हैं, तो आप 11 बीमारियों का खतरा कम कर देंगे। 11 मिनट की सैर से मिलेगी किसी बीमारी से छुटकारा?

1) कैलोरी जलाने में मदद करता है। यदि आप हर दिन चौबीसों घंटे चलने की आदत विकसित कर सकते हैं, तो आपका वजन आसानी से कम हो जाएगा।

2) दिल के मरीजों के लिए 11 मिनट तक टहलना बहुत कारगर है। अगर आपको दिल की समस्या है तो आपको शारीरिक व्यायाम करना होगा। लेकिन व्यायाम का एक विकल्प पैदल चलना भी हो सकता है।

3) मानसिक थकान को कम करता है। चूहे के जीवन में चिंता, अवसाद गुलाब के साथी हैं। 11 मिनट की ये सैर आपके मन को काफी हल्का कर देगी.

क्या तृप्ति डिमरी की तस्वीरें देखने के बाद आपका मन लद्दाख जाने का हुआ? वहां कहां जाना है?

शूटिंग के लिए लेह जाने के बाद अभिनेत्री तृप्ति डिमरी प्रकृति से मंत्रमुग्ध हो गई हैं। क्या आपकी वहां जाने की इच्छा है? जानिए यहां से घूमने लायक 5 पते। एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी इन दिनों लद्दाख में शूटिंग में बिजी हैं. उन्होंने उस तस्वीर को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया. सुंदरी काम के साथ-साथ प्रकृति का आनंद भी ले रही हैं। और उस तस्वीर को देखकर कई लोगों का मन पहाड़ों की ओर झुक रहा है.

क्या आप भी लेह या लद्दाख जाने का प्लान बना रहे हैं? बीहड़ परिदृश्य में सुंदरता है. मित्र के इस ओर जीवंत पहाड़ी देश जाना जाता है। वर्षा आधारित क्षेत्र में परिदृश्य, लोग, संस्कृति – सब कुछ थोड़ा अलग है। लेकिन यहां प्रकृति हावी है. अगर आप प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के लिए लद्दाख जाने की योजना बना रहे हैं, तो आप इन जगहों पर जा सकते हैं।

नुब्रा घाटी
नुब्रा घाटी लद्दाख के आकर्षणों में से एक है। पहाड़ों से घिरी इस घाटी की खूबसूरती को देखने के लिए पर्यटक उमड़ पड़ते हैं। यहां दो कूबड़ वाले ऊंट पाए जाते हैं। ऑर्किड भी खिलते हैं. नुब्रा से गुम्फा, पनामिक हॉट स्प्रिंग्स का दौरा किया जा सकता है। विभिन्न स्थानों की पैदल यात्रा की जा सकती है। दिस्किट और हंडूर के दो प्रसिद्ध बौद्ध मठों के बीच ठंडा रेगिस्तान है। पर्यटकों को बैक्ट्रियन ऊंटों की पीठ पर रेगिस्तान के माध्यम से यात्रा करने का अवसर भी मिलता है।

पैंगोंग झील

मुझे ‘थ्री इडियट्स’ का आखिरी सीन याद है. हीरोइन स्कूटी से हीरो से मिलने आ रही है. एक नीली झील के किनारे. शूटिंग पैंगोंग झील पर हुई.

धूसर सतह पर नीले पानी की झील। हालाँकि, मौसम बदलने के साथ ही इस झील के पानी का रंग भी बदल जाता है। कभी-कभी इसमें हरे रंग का स्पर्श आ जाता है। इस खूबसूरत झील के आसपास कई हिंदी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। मणिरत्नम, राजकुमार हिरानी समेत कई निर्देशकों ने इस जगह को शूटिंग के लिए चुना है। समुद्र तल से 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील भारत से तिब्बत तक फैली हुई है। यह दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील है।

खार्दूंग-ला
लेह जिले का एक अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल खारदुंग-ला है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा वाहन योग्य दर्रा है। यह समुद्र तल से 17,582 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ऊंचाई के कारण पर्यटकों को यहां ज्यादा देर तक खड़े रहने की इजाजत नहीं है। यहां से आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत है।

मैग्नेट हिल

लेह की मैग्नेटिक हिल या चुम्बक पहाड़ भी पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। ऐसा माना जाता है कि इस पर्वत में एक चुंबकीय क्षेत्र है। परिणामस्वरूप, भले ही कार का इंजन बंद हो जाए, फिर भी वह ऊपर की ओर बढ़ती रहती है। चारों ओर भूरे पहाड़ और घाटी से होकर गुजरने वाली काली सड़कें। इस जगह की खूबसूरती भी कम नहीं है.

हेमिस राष्ट्रीय उद्यान

हेमिस नेशनल पार्क जैव विविधता से समृद्ध है और हिम तेंदुओं का घर है। राष्ट्रीय उद्यान लेह से 50 किमी दूर है। यहां कई स्तनधारी कम संख्या में रहते हैं। हर कोई जब लेह जाता है तो यहां नहीं जाता। लेकिन यदि आप वन्य जीवन में रुचि रखते हैं तो इसे अवश्य देखें।

कोलकाता से लद्दाख

कोलकाता से हवाई और सड़क मार्ग से लद्दाख पहुंचा जा सकता है। कोलकाता हवाई अड्डे से दिल्ली होते हुए लेह तक। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के रास्ते सड़क मार्ग से भी लद्दाख पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से हिमाचल और कश्मीर पहुंचा जा सकता है। वहां से सड़क मार्ग से लेह तक।

युवक अपनी बाइक पर अकेले ही लद्दाख चला गया। अपनी सपनों की यात्रा के बीच में ही युवक की मृत्यु हो गई। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा के 27 साल के युवक की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतक का नाम चिराग शर्मा है. वह एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में वरिष्ठ पद पर काम करता है। 22 अगस्त को वह बाइक से लद्दाख के लिए निकले थे। 26 अगस्त को उसने अपने पिता को बताया कि उसके सिर में दर्द हो रहा है. केवल एक बच्चे को पिता ने आराम करने की सलाह दी थी। कुछ घंटों बाद चिराग ने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. इसके बाद उन्होंने होटल के मैनेजर को फोन किया. उन्होंने अपने बेटे को अस्पताल में भर्ती कराने को कहा.

29 अगस्त को अस्पताल में इलाज के दौरान चिराग की मौत हो गई। कुछ घंटों बाद चिराग के पिता और मां लेह पहुंचे. वे उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मूल निवासी हैं। ये दोनों वहां पढ़ाते हैं. लेह समुद्र तल से 10 हजार फीट ऊपर है। ऊंचाई के कारण हवा में ऑक्सीजन कम है। हवा का दबाव भी कम है. इस वजह से वहां जाने के बाद कई लोग बीमार पड़ गए. सिरदर्द, उल्टी, मतली, सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।

आखिर कौन थे कश्मीरी पंडित टीका लाल टपलू?

आज हम आपको कश्मीरी पंडित टिक लाल तापलू की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसे हाल ही में पीएम मोदी ने याद किया था! जम्मू-कश्मीर चुनाव में बीजेपी जमकर प्रचार कर रही है। बीजेपी ने कश्मीरी पंडितों को लुभाने के लिए टीका लाल टपलू विस्थापित समाज पुनर्वास योजना के जरिये कश्मीरी पंडितों की ‘घर वापसी’ का वादा किया है। टीका लाल टपलू की आंतकियों ने हत्या कर दी थी। वो बीजेपी के सीनियर नेता थे। आज पीएम मोदी ने भी कश्मीर में एक सभा में टीका लाल टपलू को याद किया। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने आज के दिन यानी 14 सितंबर 1989 को उनकी हत्या की थी। आखिर टीका लाल टपलू कौन हैं, जिनके नाम पर बीजेपी ने योजना शुरू करने का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘आपके इसी विश्वास को आगे बढ़ाते हुए जम्मू कश्मीर भाजपा ने आपके लिए एक से बढ़कर एक संकल्प लिए हैं। आज ही हमनें टीका लाल टपलू को याद किया है, उन्हें श्रद्धांजलि दी है। तीन दशक से ज्यादा हो गए, इसी दिन उन्हें आतंकवादियों ने शहीद किया था। उनकी हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार का एक अंतहीन सिलसिला चला। ये भाजपा है, जिसने कश्मीरी पंडितों की आवाज उठाई और उनके हित में काम किया। जम्मू कश्मीर भाजपा ने कश्मीरी हिंदुओ की वापसी और पुनर्वास के लिए टीका लाल टपलू योजना बनाने का ऐलान किया है। इससे कश्मीरी हिंदुओं को उनका हक दिलाने में तेजी आएगी।’

कश्मीरी पंडितों के जाने-माने नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता टीका लाल टपलू की 14 सितंबर 1989 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। टपलू एक वकील थे और कश्मीरी पंडितों के लिए आवाp उठाते थे। उनकी हत्या ने घाटी में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा की एक भयानक लहर शुरू कर दी, जिसके कारण हज़ारों पंडितों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। टीका लाल टपलू श्रीनगर में पैदा हुए थे और उन्होंने पंजाब और उत्तर प्रदेश में शिक्षा प्राप्त की थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, वे जम्मू और कश्मीर लौट आए और वकालत शुरू कर दी। उनकी हत्या के दिन, एक बच्ची के रोने की आवाज सुनकर वे अपने घर से बाहर निकले थे। बच्ची की मां ने बताया कि उसकी बेटी के स्कूल में फंक्शन था और उसके पास पैसे नहीं थे। टपलू ने तुरंत अपनी जेब से पांच रुपये निकाले और बच्ची को देने लगे, तभी आतंकवादियों ने उन पर गोलियां बरसा दीं।वे जल्द ही कश्मीरी पंडित समुदाय के एक प्रमुख नेता बन गए और 1967 के आंदोलन और आपातकाल के दौरान कई बार जेल भी गए। टपलू बीजेपी के शुरुआती सदस्यों में से एक थे और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के उपाध्यक्ष भी बने। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए थे।

कश्मीरी पंडितों के लिए टपलू की सक्रियता और उनका भाजपा और आरएसएस से जुड़ाव ने उन्हें आतंकवादियों का निशाना बना दिया। 12 सितंबर 1989 को उनके घर पर हमला हुआ, हालांकि, वे बच निकलने में कामयाब रहे। लेकिन, 14 सितंबर को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट जाते समय आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया और उनकी हत्या कर दी। टपलू की हत्या ने घाटी में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया जाने लगा और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं। इस भयावह स्थिति के कारण हजारों कश्मीरी पंडित अपने घरों को छोड़कर दूसरे राज्यों में जाकर बसने के लिए मजबूर हो गए।

टीका लाल टपलू सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि एक ऐसे इंसान थे जो लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनकी हत्या के दिन, एक बच्ची के रोने की आवाज सुनकर वे अपने घर से बाहर निकले थे। बच्ची की मां ने बताया कि उसकी बेटी के स्कूल में फंक्शन था और उसके पास पैसे नहीं थे। टपलू ने तुरंत अपनी जेब से पांच रुपये निकाले और बच्ची को देने लगे, तभी आतंकवादियों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। टीका लाल टपलू की हत्या ने कश्मीरी पंडितों के घावों को और गहरा कर दिया। बता दें कि आतंकवादियों ने शहीद किया था। उनकी हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार का एक अंतहीन सिलसिला चला। ये भाजपा है, जिसने कश्मीरी पंडितों की आवाज उठाई और उनके हित में काम किया। उनकी हत्या को आज भी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुए अत्याचारों की याद दिलाता है। यही वजह है कि बीजेपी ने ऐलान किया है अगर उनकी सरकार बनती है तो वे कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए योजना चलाएंगे, जिसका नाम टपलू के नाम पर होगा।

एक ऐसा क्रूर सुल्तान जिसने एक लाख हिंदू पंडितों को मार दिया था!

आज कहानी एक ऐसे क्रूर सुल्तान की जिसने एक लाख हिंदू पंडितों को मार दिया था! जब स्वात घाटी से ताल्लुक रखने वाला शाह मीर नाम का एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ साल 1313 में कश्मीर पहुंचा। उस वक्त कश्मीर पर एक हिंदू शासक सुहादेव का शासन था। बाद में शाह मीर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए काफी ऊंचे पद यानी प्रधानमंत्री के पद पर पहुंच गया। उसने कश्मीर में इस्लाम फैलाने की मंशा रखने वाले एक सूफी मीर सैयद अली हमदानी के जरिए कश्मीर में शाह मीर राजवंश की नींव डाली।

मुगल शासक जहांगीर के शासनकाल में कश्मीर में सैनिक और प्रशासक रहे हैदर मलिक उर्फ हसन अली ने अपनी किताब तारीख-ए-कश्मीर में लिखा है कि शाह मीर के आने से कश्मीर की किस्मत बदलती चली गई। धीरे-धीरे इस राजवंश ने कश्मीर में मुस्लिमों का प्रभाव बढ़ता गया। इसमें सबसे खतरनाक शासक हुआ शिंगारा, जिसे सुल्तान सिकंदर भी कहा जाता था। कश्मीर के शासक जैनुल आबिदीन के दरबार में रहे एक लेखक कल्हण की ऐतिहासिक किताब ‘राजतरंगिणी’ के अनुसार, सुल्तान सिकंदर शाह मीरी ने कश्मीर की लंबे समय से चली आ रही सहिष्णु संस्कृति को समाप्त कर दिया। ऐसा कोई घर, मंदिर या चौराहा नहीं बचा, जहां रखी मूर्तियों को सिकंदर ने तोड़ा न हो। उसकी ऐसी करतूतों के चलते उसे बुतशिकन यानी मूर्ति तोड़ने वाला कहा गया।

सिकंदर ने बड़े पैमाने पर हिंदू और बौद्ध मंदिरों को नष्ट करना शुरू कर दिया। यहां तक कि उसने घरों में छिपाकर रखी गई मूर्तियों को निकालकर नष्ट करवा दिया। कल्हण ने लिखा है कि सिंकदर ने मार्तंड (सूर्य देव), विजयेश्वर (शिव), चक्रधारा (विष्णु), सुरेश्वरी (अज्ञात), वराह (विष्णु) और त्रिपुरेश्वर (अज्ञात) के मंदिरों को नष्ट कर दिया। वहीं, हसन अली के अनुसार, परिहासपुर में तीन मंदिर, इस्कंदर पोरा में तारापीठ मंदिर और उसके पास में ही बने महाश्री मंदिर को तोड़ डाला। वहीं, बुद्ध की एक विशाल मूर्ति को ध्वस्त कर दिया गया। उसे पिघलाकर उसके सिक्के बना दिए गए।

सिकंदर को सबसे ज्यादा चिढ़ ब्राह्मणों से थी, क्योंकि वह शासन व्यवस्था में काफी आगे रहा करते थे। उसने कश्मीरी ब्राह्मणों को चेतावनी दी कि वो या तो इस्लाम स्वीकार कर लें या फिर मौत को गले लगाना होगा। इस चेतावनी पर सभी ब्राह्मणों ने मरना कबूल किया। इन सभी को मार दिया गया। इतिहासकारों के अनुसार, उस वक्त 7 मंडा यानी करीब 259 किलो जनेऊ जला दिए गए थे। एक मंडा 36 किलो के बराबर होता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने ब्राह्मण मारे गए होंगे। सिकंदर सिर्फ यहीं नहीं रुका। उसने पूरे कश्मीर में हिंदुओं को यह अल्टीमेटम दिया कि वो इस्लाम कबूल लें या फिर कश्मीर छोड़ दें या मरने के लिए तैयार हो जाएं। इसका जिक्र सबसे ज्यादा फारसी किताबों में मिलता है।

तारीख-ए-कश्मीर समेत कई ऐतिहासिक किताबों में कहा गया है कि सिंकदर इतना आततायी था कि उसने कश्मीर के इतिहास से जुड़ी किताबों, धर्मग्रंथों को डल झील में फेंकवा दिया। 1 लाख से ज्यादा पंडितों को डल झील में डुबोकर मार दिया गया। इनमें से कुछ को तो श्रीनगर के बट्टा मजार जो की बट्टा कश्मीरी पंडितों की कब्र थी, वहां पर जिंदा जला दिया गया। ऐसा कोई शहर, कस्बा या गांव नहीं था, जहां मंदिर न तोड़े गए हों। सिकंदर ने हिंदुओं को बेइज्जत करने के लिए जजिया टैक्स वसूलना शुरू कर दिया। सिकंदर ये सारे काम सूफी हमदानी के इशारे पर किया करता था। हसन अली सिकंदर के कार्यकाल में जबरन धर्मांतरण का उल्लेख करता है। इसमें कहा गया है कि उसने उन सभी लोगों का नरसंहार किया था जिन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था।

बहारिस्तान-ए-शाही के अनुसार, कश्मीरी समाज के इस्लामीकरण करने के पीछे सिकंदर से ज्यादा एक सूफी मीर मुहम्मद हमदानी का था, जो बेहद कट्टर सूफी उपदेशक था। उसका कहना था कि काफिरों या गैर मुस्लिमों के मंदिरों को तोड़ दिया जाना चाहिए। इस्लामी राज कायम किया जाना चाहिए। राजतरंगिणी के अनुसार, हमदानी की इन बातों को सबसे ज्यादा अमल में लाया सिकंदर के वजीर सुहाभट्ट ने, जो नव परिवर्तित मुसलमान था। सुहाभट्ट वैसे तो पैदाइशी रूप से कश्मीरी ब्राह्मण था, मगर वो मुस्लिम बनने के बाद ज्यादात आततायी हो गया था। उसने अपना नाम सैफुद्दीन रख लिया था। कहा जाता था कि उसे मंदिरों को तोड़ने में खूब आनंद आता था।

ईरानी और कई कश्मीरी इतिहासकारों का दावा है कि हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले सिकंदर की तड़प-तड़पकर मौत हुई थी। बताया जाता है कि उसे एलिफैंटियासिस हो गया था, जिससे उसे असहनीय दर्द होता था। अप्रैल 1413 में सिकंदर की दर्दनाक मौत हुई थी। सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके सबसे बड़े बेटे मीर को अली शाह की उपाधि धारण करके सुल्तान बनाया गया। सिकंदर के वजीर सुहाभट्ट की भी मौत टीबी से तड़प-तड़पकर हुई थी। एशिया के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रिचर्ड जी सोलोमन के अनुसार, सिकंदर का यह काम धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक था। वह सत्ता पर ब्राह्मणों यानी पंडितों का वर्चस्व खत्म करना चाहता था। वह स्वभाव से शुद्धतावादी था और शराब, उत्सव और संगीत से दूर रहता था।